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ऑक्सीजन सिलिंडर फटने से कोरोना अस्पताल में भीषण आग, 82 की मौत: बगदाद की घटना

इराक की राजधानी बगदाद के एक कोरोना अस्पताल में आग लगने के कारण 82 लोगों की मौत हो गई है। इनमें से अधिकतर कोरोना संक्रमित मरीज और उनके परिजन थे। एक ऑक्सीजन सिलिंडर फटने के कारण ये हादसा हुआ। भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और जीर्ण-शीर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर से बेहाल अरब के इस मुल्क में शनिवार (अप्रैल 24, 2021) को हुई इस घटना के बाद शोक का माहौल है। आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि 110 लोग घायल भी हैं।

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हादसा इब्न-अल-खातिब अस्पताल में हुआ। ये अस्पताल बगदाद से सटे एक पिछड़े इलाके में है, जिसे कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बना दिया गया था। इसके पास स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम या फायर होसेस जैसी कोई सुविधा नहीं है।

इराक के सिविल डिफेंस फोर्सेज के मुखिया खादिम बोहान ने कहा कि फॉल्स सीलिंग और ICU में कई ऐसे मेटेरियल्स का प्रयोग किया गया था, जो जल्दी आग पकड़ते हैं। इसी कारण आग काफी तेज़ी से फैली। उन्होंने कहा कि अगर स्मोक डिटेक्टर होता तो काफी लोगों की जान बचाई जा सकती थी। पिछले साल सिविल डिफेंस ने 18,500 इंस्पेक्शन किए थे, जिनमें से एक इस अस्पताल में भी था। लेकिन, सिफारिशों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

अस्पताल से बचाए गए डॉक्टरों और अन्य लोगों ने कहा कि आग लगने के बाद अराजकता का माहौल हो गया था। अस्पताल में कोविड-19 मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ थी। आधिकारिक रूप से परिजनों को कोरोना मरीजों को देखने आने पर प्रतिबंध है। लेकिन, अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ्सस्टफ्स की कमी के कारण परिजन ही देखभाल करते हैं। इराक में रोज 6000 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं और 50 लोगों की लगभग रोज मौत हो रही है।

1990 की शुरुआत से ही यहाँ के तानाशाह सद्दाम हुसैन पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण स्वास्थ्य सेवा को ठीक होने का मौका ही नहीं मिला। 2003 में अमेरिकी हमला और लूटपाट की घटनाओं के बाद मुल्क सिविल वार में फँस गया। इसके बाद खूँखार आतंकी संगठन ISIS ने लगभग एक तिहाई इलाके पर कब्ज़ा जमा लिया। सैकड़ों करोड़ डॉलर्स खर्च किए जाने के बावजूद अब यहाँ हालत ज्यों के त्यों है।

कई ऐसे अस्पताल हैं, जो भ्रष्टाचार के कारण सालों से निर्माणाधीन हैं। ऑक्सीजन का इस्तेमाल दुनिया भर के अस्पतालों में बढ़ रहा है, ऐसे में विशेषज्ञों ने आग से बचाव को लेकर पहले ही चेताया था। इस घटना के जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। जिस अस्पताल में आग लगी, पिछले साल ही उसका जीर्णोद्धार हुआ था। अस्पताल के डायरेक्टर और इंजीनियरिंग मेंटेनेंस हेड को गिरफ्तार कर लिया गया है। कई परिजन तो मृतकों का चेहरा तक नहीं पहचान पाए।

कोरोना वैक्सीन के लिए रॉ मेटेरियल देगा अमेरिका, मेडिकल उपकरण और वेंटिलेटर्स भीः NSA डोभाल के साथ बात के बाद फैसला

कोरोना वैक्सीन के लिए भारत को रॉ मेटेरियल देने पर अमेरिका आखिरकार राजी हो गया है। भारत में संक्रमण के गहराते संकट को देखते हुए वह मेडिकल उपकरण और प्रोटेक्टिव गियर भी भेजेगा। भारत की मदद को लेकर उस पर चौतरफा दबाव था। रॉ मेटेरियल्स की सप्लाई रोकने को लेकर उसकी खासी आलोचना हो रही थी। उसे याद दिलाया जा रहा था कि किस तरह भारत ने उसे विषम परिस्थितियों में HCQ दवा की सप्लाई की थी। अब राष्ट्रपति जो बायडेन ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

बायडेन ने कहा कि जिस तरह से भारत ने अमेरिका को तब सहायता भेजी थी, जब यहाँ के अस्पताल कोरोना की शुरुआती लहर के दौरान ही गहरे तनाव में थे, ठीक उसी तरह ज़रूरत के इस समय में हम भारत की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उससे पहले अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने अहम बयान दिया।

अमेरिकी NSA जेक सुल्लिवन ने कहा कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल से बात की है और लगातार बढ़ रहे कोविड-19 संक्रमण के मामलों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनों अधिकारियों में एक-दूसरे के करीबी संपर्क में रहने पर सहमति बनी। जेक ने कहा कि अमेरिका इस परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा है और हम उसकी सहायता के लिए अधिक संसाधन और सप्लाई उपलब्ध करा रहे हैं।

अमेरिका की सीनियर डायरेक्टर फॉर प्रेस एमिली हॉर्न ने दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद बयान जारी किया। अमेरिका ने भारत में बढ़ रहे संक्रमण पर सहानुभूति जताई है। इन दोनों देशों में ही कोविड-19 संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले हैं। अमेरिका ने भारत के साथ 70 सालों के स्वास्थ्य पार्टनरशिप को याद करते हुए कहा कि हमने स्मॉलपॉक्स, पोलियो और HIV के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, उसी तरह अब भी लड़ेंगे।

अमेरिका ने कहा कि उसने भारत में कोविशील्ड वैक्सीन के निर्माण के लिए तत्काल में ज़रूरी वैक्सीन बनाने वाले रॉ मेटेरियल्स के स्रोतों को चिह्नित कर लिया है और जल्द ही इनकी सप्लाई उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही यूनाइटेड स्टेटस ने थेराप्यूटिक्स, रैपिड डायग्नोसिस टेस्ट किट्स, वेंटिलेटर्स और PPE भी उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि यहाँ के फ्रंटलाइन वर्कर्स को की सुरक्षा हो सके और कोरोना के मरीजों का उपचार हो सके।

साथ ही अमेरिका ऑक्सीजन उत्पादन व इससे जुड़ी चीजों की सप्लाई पर भी विचार कर रहा है। 2022 के अंत तक भारत में वैक्सीन बनाने वाली BioE कम से कम 100 करोड़ वैक्सीन के डोज का निर्माण कर सके, इसके लिए US का डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DFC) वित्तीय सहायता मुहैया कराएगा। इसके अलावा वहाँ के सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल (CDC) और USAID के विशेषज्ञों की एक टीम भारत के साथ मिल कर काम करेगी।

विशेषज्ञों की समिति ये भी सुनिश्चित करेगी कि वैश्विक फंड से भारत को जल्द से जल्द मदद दिलाई जा सके। यूएस स्टेट सेक्रेटरी एंटोनी ब्लिंकेन ने कहा कि भारत के लोगों को अतिरिक्त सहायता मुहैया कराई जाएगी। यूएस चैंबर और कॉमर्स ने भी भारत को मदद करने का आग्रह व्हाइट हाउस से किया था। उसने कहा था कि अमेरिका के स्टॉक में 40 मिलियन AstraZeneca वैक्सीन हैं, जिनका फ़िलहाल उपयोग नहीं हो रहा।

विज्ञापन की वजह से केजरीवाल के कोरोना कुप्रबंधन पर नरमी? Times Now पत्रकारों के वायरल पत्र को चैनल ने नकारा

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से राजधानी दिल्ली की स्थिति भी बदतर है। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विज्ञापनों से सारे न्यूज चैनल्स भरे पड़े हैं। लोग जो भी टीवी न्यूज चैनल खोल रहे हैं, उस पर सीएम केजरीवाल दिख रहे हैं। इसी बीच ‘टाइम्स नाउ’ के कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि इन्हीं विज्ञापनों की वजह से चैनल दिल्ली में कोरोना से हुई बदतर स्थिति को नहीं दिखा रहा है।

कथित रूप से ‘Times Now’ के कर्मचारियों ने टाइम्स ग्रुप के MD विनीत जैन को पत्र लिख कर दिल्ली में कोविड-19 के कवरेज पर आपत्ति जताई है। चैनल के शीर्ष पत्रकारों राहुल शिवशंकर, नविका कुमार और पद्मजा जोशी का भी जिक्र पत्र में है। ऑपइंडिया ने एक विश्वसनीय सूत्र के माध्यम से इस पत्र की एक प्रति प्राप्त की है। साथ ही पत्रकारों के बीच ये पत्र खासा वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इसकी सत्यता की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते।

साथ ही ‘Times Now’ ने भी ऐसे किसी पत्र को लेकर अनभिज्ञता जताई है। इस पत्र में पत्रकारों ने पूछा है कि क्या AAP सरकार द्वारा दिए जाने वाले विज्ञापनों के कारण दिल्ली में कोरोना संक्रमण के कवरेज पर असर पड़ रहा है? इसमें लिखा है, “हम अपने चैनल पर आने वाले विज्ञापनों में उस व्यक्ति को देख कर चकित हैं, जो आज दिल्ली की बदतर स्थिति के लिए जिम्मेदार है।”

इसमें आगे लिखा है, “हम उस व्यक्ति का नाम लेने से भी नहीं हिचकिचाएँगे। उसका नाम अरविंद केजरीवाल है। अरविंद केजरीवाल ने हमारे चैनल को आपत्तिजनक विज्ञापनों से भर दिया है, ताकि हम दिल्ली में उनके द्वारा किए गए कोरोना के चौतरफा घोर कुप्रबंधन पर सवाल न खड़े करें। हम जानते हैं कि चैनल के लिए विज्ञापन महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या हमें उस व्यक्ति से करदाताओं के पैसे लेने चाहिए, जिसने उन्हीं करदाताओं से पैसों का इस्तेमाल 2015-19 में एक भी अस्पताल बनवाने के लिए नहीं किया?”

चैनल के कर्मचारियों ने लिखा कि ये कारोबार की बात नहीं है, बल्कि दिल्ली की जनता और उनकी समस्याओं की बात है। हमें हमेशा जनता और उनकी समस्याओं के बारे में सोचना चाहिए। कर्मचारियों ने पूछा है कि क्या उस व्यक्ति के खिलाफ जिसके खराब कार्यप्रणाली के चलते सैकड़ों लोगों की जानें चली गई हों सिर्फ इसलिए नरमी दिखाना उचित है, क्योंकि उसने हमें विज्ञापन देने में बड़ा खर्च किया है?

‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों ने ये भी याद दिलाया कि किस तरह से अरविंद केजरीवाल सारी चीजों के लिए अब किसी और पर दोष डाल रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इसलिए माधव जैसे पत्रकार दिल्ली सरकार को बचाते हुए इन सबका दोष किसी और पर डाल रहे हैं? यहाँ माधव का तात्पर्य वहाँ के सीनियर एडिटर माधवदास से हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब कोई केजरीवाल की गलती याद दिलाता है तो माधव उस व्यक्ति को सड़कों पर भी गाली देते हैं और लाइव टीवी पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।

पत्रकारों ने दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी की भी याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कुछ नहीं किया और ऊपर से दिल्ली की सीमा पर पहुँचे ऑक्सीजन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए भी कोई प्रयास नहीं किया। पत्रकारों ने कहा कि दूसरी तरफ श्रेयसी उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ‘ऑक्सीजन वॉर रूम’ वाला ट्वीट रीट्वीट कर रही थी, क्या हमारा चैनल AAP सरकार की प्रोपेगेंडा मशीनरी बन गई है?

पत्रकारों ने ये भी आरोप लगाया कि मीडिया के ही कुछ लोग गंभीर पत्रकारिता करने की जगह विभाजनकारी कार्य कर रहे हैं। प्रशांत कुछ मामलों में राहुल गाँधी के विचारों को आगे बढ़ाने में लगे हैं तो कुछ मुद्दों पर तेजस्वी यादव का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या हमारे पत्रकार गुंडाराज और भ्रष्टाचार के सिरमौरों के किराए के लोग हो गए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि हमारे पत्रकार जनता की आवाज़ बनने की बजाए इस त्रासदी के काल में बेचैनी, घृणा और झूठा एजेंडा फैला रहे हैं।

हालाँकि, ‘टाइम्स नाउ’ ने ऑपइंडिया को दी गई प्रतिक्रिया में इसे एक फेक, आधारहीन और द्वेषपूर्ण प्रयास बताया है, ताकि चैनल को बदनाम किया जा सके और उसकी छवि को नुकसान पहुँचाई जा सके। चैनल ने कहा कि उसे ऐसा कोई पत्र मेल से प्राप्त नहीं हुआ है। उसने कहा कि ये खुले और पारदर्शी संस्कृति वाला चैनल है, जहाँ लोग अच्छे उद्देश्य से साथ मिल कर काम करते हैं। चैनल ने अपनी सालों की बनाई प्रतिष्ठा की भी बात की है।

क्या केजरीवाल का विज्ञापन अब पोर्नहब पर भी चल रहा है? लोगों ने कहा- सीधे युवाओं तक पहुँचने की कोशिश: Fact-Check

आरटीआई में खुलासा हुआ है कि केजरीवाल सरकार ने इस साल जनवरी से मार्च तक विभिन्न माध्यमों से विज्ञापनों पर 150 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। इसी बीच उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो पोर्नोग्राफी वेबसाइट पोर्नहब से लिया गया स्क्रीनशॉट है।

स्क्रीनशॉट को देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि केजरीवाल का विज्ञापन पोर्न वेबसाइट पर चल रहा है। स्क्रीनशॉट साझा करने वाले ट्विटर यूजर्स ने दावा किया है कि वह VPN पर पोर्न देख रहा था, तभी उसे वीडियो में केजरीवाल का विज्ञापन नजर आया।

कथित तौर पर केजरीवाल के विज्ञापन का स्क्रीनशॉट एक पोर्न वेबसाइट पर दिखाई दिया।

ट्विटर यूजर के इस पोस्ट से मानो सोशल मीडिया पर तूफान आ गया। हर कोई जवाब की तलाश में है, लेकिन अधिकांश भारतीयों को यह नहीं पता है कि पोर्नहब का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है, क्योंकि यह देश में प्रतिबंधित है।

ऑपइंडिया की जाँच

जब हमने स्क्रीनशॉट को देखा तो हमें लगा कि यह सब गलत हो रहा है और हमने इसकी जाँच शुरू कर दी। हमें लगा कि आम आदमी पार्टी भारत में पोर्नहब का इस्तेमाल करने वालों को टारगेट कर रही है। जैसा कि यह हमारी नीति है जो अपने प्रचार के लिए किसी भी अवैध दस्तावेज या वेबसाइटों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देती हैं, इस नियम का हम हर समय पालन भी करते हैं। इसलिए हमने इस स्क्रीनशॉट का विश्लेषण करना शुरू कर दिया।

केजरीवाल का विज्ञापन

हालाँकि, यहाँ ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह विज्ञापन वास्तव में अरविंद केजरीवाल का ही है। इसे अक्सर YouTube और अन्य प्लेटफार्मों पर देखा जा सकता है। आप यहाँ विज्ञापन देख सकते हैं।

ऑनलाइन विज्ञापन कैसे काम करते हैं?

एक समय था जब Google पर विज्ञापन वेबसाइट की सामग्री के आधार पर नजर आते थे। लेकिन, आजकल Google, Facebook, Twitter और अन्य प्लेटफ़ॉर्म आपके कंप्यूटर से कुकीज के रूप में बहुत सी व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करते हैं। आज हर तरह के विज्ञापन सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और साइट्स पर नजर आ जाएँगे। जब आप सोशल मीडिया या वेबसाइटों पर सर्फिंग कर रहे होते हैं, तो आपको हर तरह के विज्ञापन दिखाई देंगे।

उदाहरण के लिए, आपने गूगल पर लैपटॉप के बारे में सर्च किया या फिर कोई ट्वीट किया। इससे आपका स्थान, उम्र, लिंग और अन्य जानकारी के आधार पर एल्गोरिदम आपको लैपटॉप से संबंधित विज्ञापन दिखाना शुरू कर देगा। अगर आपने घूमने का प्लान बना कर गूगल पर बेस्ट टूरिस्ट प्लेस के बारे में जानकारी लेने के लिए कुछ भी सर्च किया तो आपको कुछ ही घंटों के भीतर इससे जुड़े विज्ञापन दिखाई देने लग जाएँगे।

इससे अक्सर यूजर कंफ्यूज हो जाते हैं कि ये वेबसाइट कैसे जानती हैं कि आप क्या देख रहे थे। दरअसल एल्गोरिदम को आपके व्यवहार को समझने और उन उत्पादों को दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें आप खरीदना चाहते हैं।

इसी तरह कंप्‍यूटर की भाषा में एल्गोरिदम (Algorithm) का उपयोग किसी प्रोग्राम के लॉजिक को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। एल्गोरिदम (Algorithm) दी गई समस्या के समाधान पर पहुँचने का तरीका हो सकता है, जिसे इस तरीके से डिज़ाइन किया जाता है कि यदि उसमेंं दी गई कमाण्ड को उसी क्रम में फॉलाे किया जाए तो बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

राजनीतिक विज्ञापनों के मामले में YouTube पर केजरीवाल का विज्ञापन इसका उदाहरण है, यह आपके स्थान, आयु, लिंग, राजनीतिक विचारधारा और बहुत कुछ के आधार पर दिखाई देगा। जैसा कि केजरीवाल को विज्ञापन प्रकाशित करने की आदत है। यह संभव है कि आप दिल्ली और पंजाब के बाहर भी उनका विज्ञापन देख सकते हैं।

बता दें कि एक ट्विटर यूजर आलोक भट्ट द्वारा शेयर किए गए आरटीआई से पता चला है कि जनवरी 2021 में AAP सरकार द्वारा विज्ञापनों पर 32.52 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, फरवरी 2021 में 25.33 करोड़ रुपए और मार्च 2021 में 92.48 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। ऐसे हालात में जब कोरोना की दूसरी लहर से राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा रही हैं, केजरीवाल सरकार ने औसतन हर दिन 1.67 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए हैं।

‘घर-घर श्मशान, कोरोना एक षड्यंत्र’ जैसे ट्वीट जिन्हें सरकार के आदेश पर ट्विटर ने किया डिलीट: गिरोह ने फैलाए कई ‘महाझूठ’

भारत को दो मोर्चों पर युद्ध करना पड़ रहा है। एक ओर जहाँ देश चाइनीज कोरोनावायरस संक्रमण से लड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर फेक न्यूज से। आए दिन सोशल मीडिया में पत्रकारों, फ़िल्मकारों और अन्य इंफ्लुएंसर्स द्वारा फेक न्यूज फैलाई जाती है जिससे देश में सरकार और व्यवस्था के प्रति असंतोष उत्पन्न होता है और लोगों में डर पैदा होता है। हालाँकि, इस पर कार्यवाही करते हुए भारत सरकार ने ट्विटर से ऐसी फेक न्यूज से भरी पोस्ट को अपने प्लेटफॉर्म से डिलीट करने का आदेश दिया।

अब जाहिर सी बात है कि जब भी सरकार ऐसी गलत अफवाहों से भरी पोस्ट को डिलीट करने के लिए कहेगी तो सबसे पहले ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का विलाप ही शुरू होगा। वामपंथी मीडिया यही कहेगा कि सरकार उनकी आवाज को दबा रही है। भले ही उनकी आवाज देश में भय का माहौल ही क्यों न बना दे।

जिनकी पोस्ट ट्विटर ने डिलीट की है उनमें पहला नाम है फिल्मकार अविनाश दास का जिन्होंने स्वरा भास्कर को निर्देशित किया है। दास ने एक पुराना वीडियो पोस्ट किया और बता दिया कि गुजरात का है। गुजरात मॉडल का मजाक उड़ाते हुए दास ने कहा कि वीडियो गुजरात के तापी जिले का है जहाँ मरीजों का टेंट में उपचार किया जा रहा है। बाद में पता चला कि तस्वीरें तो नवापुर महाराष्ट्र की थीं।

अविनाश दास के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

गुजरात के तापी जिले के लोगों में घबराहट का माहौल न बने इसलिए फिल्मकार दास की ट्विटर पोस्ट हटा दी गई।

नवापुर वीडियो का स्क्रीनशॉट
अविनाश दास का एक और ट्वीट

ऐसे ही एक फिल्मकार हैं विनोद कापरी। ये भी फेक न्यूज फैलाते हुए पकड़े गए। इन्होने तो अपने ही समकक्ष अविनाश दास को भी पीछे छोड़ दिया। दास ने कहा था कि मरीजों का टेंट में ईलाज हो रहा है लेकिन कापरी ने कह दिया कि हर घर श्मशान बन रहा है।

विनोद कापड़ी का घर घर मे श्मशान वाला ट्वीट

कापरी पर उनके ही सहकर्मी द्वारा अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए एक बच्ची को गोद लेने की झूठी कहानी फैलाने का आरोप लगाया गया था। अप्रैल 2020 में भी जब Covid-19 महामारी अपने प्रारंभिक चरण में थी तब कापड़ी को पीपीई किट और रक्षात्मक उपायों पर फेक न्यूज फैलाते पकड़ा गया था। अब इनका भी ट्वीट डिलीट कर दिया गया है। हालाँकि ये फेक न्यूज फैलाना कम करेंगे, इसकी गुंजाइश बहुत कम है।

विनोद कापड़ी का ट्वीट जो हटा दिया गया

कफील खान गोरखपुर के अस्पताल में हुई त्रासदी का आरोपी है। इसने भी दाह संस्कार की कुछ तस्वीरों को पोस्ट किया जिनका वर्तमान परिस्थितियों से कोई लेना देना नहीं था। ये पोस्ट भी डिलीट हुई।

कफील खान के हटाया गया ट्वीट

ऊपर बताए गए लोगों ने कम से कम महामारी के अस्तित्व को स्वीकार तो किया लेकिन राजनैतिक एक्टिविस्ट हंसराज मीणा बाकी सबसे कई कदम आगे निकल गए। उन्होंने कह दिया कि कोरोना वायरस मात्र एक षड्यंत्र है। मीणा ने अपनी बहादुरी के किस्से 12 अप्रैल 2021 को ट्वीट किए और बताया, “कोरोनाकाल में न मैंने मास्क खरीदा और न मुँह पर लगाया। एक साल के अंदर मैं कई राज्यों और 30 बड़े शहरों की यात्रा कर चुका हूँ। मैं इस बेवकूफी भरी बीमारी से बिल्कुल नहीं डरता और न ही अपने लोगों को डराता हूँ।“

मीणा कहना चाह रहे थे कि उन्हें कोरोनावायरस का संक्रमण नहीं हुआ तो वह है ही नहीं। उन्होंने #कोरोना_एक_षड्यंत्र_है भी लिखा। यही हैशटैग उनके समर्थकों ने भी लपक लिया। अब जैसा लीडर होगा वैसे ही होंगे समर्थक। हो गए हजारों ट्वीट।

हंसराज मीणा ने तो बीमारी और वायरस दोनों को नकार दिया, खैर यह ट्वीट भी हट गया है

मीणा के जैसे ही मासूम कैफ़ी और केएस सिद्दीकी जैसों ने भी कोरोना को षड्यंत्र ही बताया। कैफ़ी ने इसे जनसंख्या कम करने का षड्यंत्र बताया तो वहीं सिद्दीकी ने यहाँ तक कह दिया कि यह बीमारी और वायरस सिर्फ टीवी में ही है।

मीणा के ही एक समर्थक ने यहाँ तक कह दिया कि कोरोनावायरस एक षड्यंत्र है तो वैक्सीन की कोई जरूरत ही नहीं है।

हंसराज मीणा के कुछ समर्थक, इनका भी ट्वीट डिलीट किया जा चुका है

फिर क्या था, भ्रमक खबरें फैलाने पर इनका भी ट्वीट डिलीट हुआ। भारत सरकार ने ट्विटर से इनके ट्वीट पर भी कार्रवाई करवाई।

किसान आंदोलन के दौरान भी ट्विटर ने कुछ भ्रामक खबरों से भरे ट्वीट हटाने से मना कर दिया था। तब भारत सरकार ने ट्विटर को साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत का घरेलू कानून मानना ही पड़ेगा। इसके बाद इस बार ट्विटर ने अपना रूख बदला है।

कोरोना डेथ सर्टिफिकेट में पीएम मोदी की फोटो? हफ्तेभर में लिबरल फेक न्यूज़ फैक्ट्री ने कर दिखाया सच: गैंग की करतूत का पर्दाफाश

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने पिछले सप्ताह (18 अप्रैल, 2021) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ फेक न्यूज फैलाई थी। उन्होंने कहा था कि अगर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट्स पर प्रधानमंत्री मोदी की फोटो लगाई जाती है, तो कोविड-19 से जान गँवाने वालों के मृत्यु प्रमाणपत्र पर भी उनकी फोटो लगाई जानी चाहिए।

महाविकास अघाड़ी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मलिक ने देश में कोरोना के बढ़ते मामलों और इससे हो रही मौतों के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अगर प्रधानमंत्री टीकाकरण का श्रेय लेना चाहते हैं, तो उन्हें कोविड-19 से होने वाली मौतों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद से अन्य नेता और तथाकथित बुद्धिजीवी भी इसी तरह की माँग करने लगे थे।

सेक्युलर एक्ट्रेस नगमा ने ट्विटर पर कहा, “वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट्स की तरह ही मोदी की एक तस्वीर कोरोना से मरने वाले हर भारतीय के मृत्यु प्रमाणपत्र पर होनी चाहिए।” नगमा ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की पुरानी फोटो के साथ उनका हाल ही में पोस्ट किया गया एक ट्वीट शेयर करते हुए दावा किया गया कि पूर्व सेना प्रमुख अपने भाई के लिए अस्पताल में बेड की तलाश कर रहे थे। हालाँकि, वह दावा फर्जी था। वास्तव में, जनरल वीके सिंह किसी और की मदद करने की कोशिश कर रहे थे, उसके लिए वो बेड की व्यवस्था कर रहे थे।

कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया विंग की नेशनल कोऑर्डिनेटर लावण्या बल्लाल ने कहा, “कोरोना से जान गँवाने वाले हर व्यक्ति के मृत्यु प्रमाणपत्र में नरेंद्र मोदी की तस्वीर होनी चाहिए। हर कब्रिस्तान, श्मशान में उनका बिलबोर्ड होना चाहिए। यह भी राष्ट्र के लिए उनका योगदान है।”

लावण्या बल्लाल का ट्वीट

तृणमूल कॉन्ग्रेस की कथित फायरब्रांड महुआ मोइत्रा ने वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट्स की एक फोटो साझा करते हुए कहा, “अगर कोविड-19 के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट्स में माननीय पीएम की फोटो है, तो क्या ऑक्सीजन से मरने वालों के मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी फोटो नहीं लगाई जा सकती है?”

महुआ मोइत्रा का ट्वीट

कॉन्ग्रेस समर्थक और मोदी के खिलाफ नफरत फ़ैलाने वाले ट्रोलर्स और फेक न्यूज फैलाने वालों को इन नेताओं के बयानों से एक मौका मिल गया है। कुछ पोस्ट सोशल मीडिया पर दिखाई देने लगे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि अब मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी पीएम मोदी की फोटो आ सकती है।

ये है सच्चाई

जब हमने वायरल फोटो को रिवर्स सर्च किया तो ‘इंडिया टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में हमें यही फोटो मिली। ये रिपोर्ट एनसीपी नेता नवाब मलिक के उस बयान से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने कहा था, “जिस तरह से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट्स में पीएम मोदी की फोटो लगाई जा रही है, उसे देखते हुए हम ये माँग रखते हैं कि पीएम मोदी की फोटो मृत्यु प्रमाणपत्र में भी लगाई जाए।”

इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट में यह फोटो मिली है

बता दें कि वायरल फोटो में दिख रहा दस्तावेज धुँधला है, वहीं ‘इंडिया टाइम्स’ की रिपोर्ट वाली फोटो में यह दस्तावेज तुलनात्मक रूप से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसे जूम करने पर साफ देखा जा सकता है कि इसके ऊपरी हिस्से में बाईं तरफ ‘Provisional Certificate for Covid-19 Vaccination’ लिखा हुआ है।

मृत्यु प्रमाणपत्र ऐसा होता है, सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स द्वारा शेयर किया गया मृत्यु प्रमाणपत्र फेक है

द क्विंट ने कोरोना महामारी में यूथ कॉन्ग्रेस के वीडियो के बहाने किया राहुल गाँधी का महिमामंडन, RSS-सेवा भारती को नजरअंदाज

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने रविवार को सोशल मीडिया में अपने साथी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से चाइनीज कोरोना वायरस महामारी के दौरान सामने आने और लोगों की मदद करने का आह्वान किया।

राहुल गाँधी ने अपनी इस सोशल मीडिया पोस्ट में चाइनीज कोरोना वायरस महामारी का जिक्र किए बिना दावा किया कि देश को जिम्मेदार नागरिकों की जरूरत है। उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से ‘देशवासियों के दर्द को कम’ करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि यह ‘कॉन्ग्रेस परिवार का धर्म’ है।

संयोग से, वायनाड से कॉन्ग्रेसी सासंद का यह उपदेश ‘निष्पक्ष प्लेटफॉर्म’ द क्विंट के द्वारा इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस को प्रमोट करने वाले वीडियो के पब्लिश करने के एक दिन बाद आया है।

हाल ही में प्रकाशित ‘कैसे IYC के श्रीनिवास बीवी और उनकी टीम ने परेशान कोविड-19 मरीजों की मदद की’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में द क्विंट ने यह दिखाने की कोशिश की जैसे श्रीनिवास की टीम के अलावा और कोई भी कोविड मरीजों की मदद के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहा है।

द क्विंट के वीडियो का स्क्रीनशॉट

इस वीडियो रिपोर्ट में द क्विंट ने दिखाया कि कैसे श्रीनिवास की 10 सदस्यीय टीम पूरे देश में कोविड-19 मरीजों को बेड, ऑक्सीजन, दवाएँ और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए दिन-रात काम कर रही है। श्रीनिवास ने द क्विंट को बताया कि वे बेड की उपलब्धता को जानने के लिए राज्य सरकार के डैशबोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं और फिर उस जानकारी के अनुसार उसे मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस का राजनीतिक स्टंट?

ध्यान देने वाली बात यह है कि क्विंट ने इस वीडियो में दिल्ली सरकार का डैशबोर्ड दिखाया था जिसका श्रीनिवास इस्तेमाल कर रहे थे। यह वही डैशबोर्ड है जिसकी कुछ दिन पहले बेड उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी देने के लिए आलोचना हुई थी।

हालाँकि, श्रीनिवास ने अपने इंटरव्यू में किसी भी राजनीतिक सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने दावा किया कि वह महामारी के दौरान राजनीति के बजाय केवल मदद करना चाहते थे, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्थिति अलग है।

यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव बंटी शेल्के ने क्विंट के वीडियो को कोट किया और कोविड-19 मैनेजमेंट को लेकर भारत सरकार का मजाक उड़ाया। उन्होंने कोविड-19 की स्थिति से निपटने के मामले में श्रीनिवास की 10 सदस्यीय टीम की तुलना केंद्र सरकार की 10 सदस्यीय टीम से की और कहा, ”नरेंद्र मोदी को उनसे (श्रीनिवास) और कॉन्ग्रेस से सीखना चाहिए की संकट से कैसे निपटते हैं।”

शेल्के इस बात का जिक्र करना भूल गए कि कॉन्ग्रेस शासित राज्यों जैसे कि छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र (महा विकास अघाडी सरकार) कोविड-19 मैनेजमेंट के मामले में कितना खराब काम कर रहे हैं। जहाँ राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री सलमान के बॉडीगार्ड शेरा के साथ फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं तो वहीं महाराष्ट्र देश में कोविड-19 के नए मामले बढ़ाने के मामले में नंबर एक पर है।

सोशल मीडिया पर शेल्के की इस पोस्ट के बाद कुछ अन्य लोग भी केंद्र सरकार और आरएसएस का मजाक उड़ाने लगे।

BJYM, AVBP और सेवा भारती के कामों को किया द क्विंट ने नजरअंदाज :

द क्विंट ने BJYM, AVBP और कई अन्य संस्थाओं, जिनमें आरएसएस और सेवा भारती भी शामिल हैं, को नजरअंदाज कर दिया जो जरूरतमंदों की मदद को आगे आए। सेवा भारती की दिल्ली शाखा के पास डॉक्टर काउंसलिंग, भोजन सहायता, ब्लड प्लाज्मा और अन्य चीजें मुहैया कराने के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन है। वे कोविड पॉजिटिव और क्वारंटाइन परिवारों को मुफ्त भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं।

सेवा भारती के वॉलंटियर्स पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए नियमित तौर पर मजनू का टीला जाते रहते हैं।

आरएसएस और बजरंग दल के वॉलंटियर्स कोविड मरीजों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, खासतौर पर तब जब या तो पूरा परिवार कोविड पॉजिटिव है या फिर परिवार को बीमारी से संक्रमित होने का डर है।

आरएसएस ने हाल ही में गोरखपुर में एक 50 बेड वाला आइसोलेशन सेंटर खोला है। कई बीजेपी नेता जिनमें कपिल मिश्रा, तजिंदर बग्गा, तेजस्वी सूर्या और कई अन्य शामिल हैं, कोविड मरीजों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या कोविड मरीजों और उनके परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए BJYM के देश भर के सदस्यों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय स्थापित कर रहे हैं।

क्या निष्पक्ष है द क्विंट :  

यह पहली बार नहीं है जब द क्विंट ने अपनी राजनीतिक विचारधारा के दूसरे पक्ष को बिल्कुल ही नजरअंदाज करते हुए एकदम पक्षपाती रिपोर्ट प्रकाशित की है। मार्च 2021 में द क्विंट ने एबीवीपी नेता शिवांगी खरवाल को गलत साबित करने के लिए एडिट की गई ऑडियो क्लिप प्रकाशित की। उसी महीने में, इस पब्लिकेशन ने आतंकवादी के साथ हमदर्दी दिखाते हुए निकिता तोमर के परिजनों के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाया, क्योंकि कातिल एक मुस्लिम था।

द क्विंट की पैरेंट कंपनी, क्विंटिलियन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने न्यूयॉर्क स्थित ब्लूमबर्ग एलपी के साथ डिजिटल प्रॉडक्ट-ब्लूमबर्ग क्विंट लॉन्च करने के लिए अप्रैल 2016 में एक साझा उपक्रम करार पर हस्ताक्षर किया था। ब्लूमबर्ग एलपी का मालिकाना हक माइकल ब्लूमबर्ग के पास है, जो डेमोक्रेट पार्टी से नॉमिनी बनने के लिए लड़ रहे उम्मीदवारों में से एक थे।

द क्विंट ने हाल ही में अपने पाठकों को भारत में अमेरिका जैसे दंगे करने के लिए उकसाया था। हाल ही में राहुल गाँधी ने भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका से ऐसे समय में हस्तक्षेप की माँग की थी, जब डेमोक्रेट्स का यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव, सीनेट के साथ ही वाइट हाउस पर भी नियंत्रण है।

‘कंगाल’ पाकिस्तान ने की भारत के मदद की पेशकश: लिबरल गैंग हुआ लहालोट, स्वरा को दिखा ‘बड़ा दिल’

भारत में कोरोना वायरस के कहर के बीच हालात बदतर होते जा रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण लगातार हालात गंभीर हैं। केंद्र सरकार इस हालात से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (25 अप्रैल 2021) को देशभर में 551 अतिरक्त पीएसए ऑक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी दी है।

इस बीच बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश करते हुए खुद भूखों मर रहे पाकिस्तान ने भारत को मदद आश्वासन दिया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह भारत को जरूरी मेडिकल सामान देना चाहता है। इसमें कहा गया है कि कोरोना महामारी की इस संकट की घड़ी में हम मदद के तौर पर भारत को वेंटिलेटर, बाईपैप मशीनें, डिजिटल एक्सरे मशीन, पीपीई किट और जरूरी मेडिकल सामान देना चाहते हैं।

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार (24 अप्रैल 2021) को ट्वीट कर भारत के साथ एकजुटता जाहिर की थी। साथ ही कोरोना पीड़ितों के जल्द ठीक होने की कामना भी की थी। उन्होंने कहा था कि हमें मानवता के साथ मिलकर इस वैश्विक चुनौती से लड़ना होगा।

जबकि, कंगाल पाकिस्तान के हाल खुद बहुत बुरे हैं। वर्ल्ड ओ मीटर की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में बीते 24 घंटे के दौरान 5611 नए संक्रमित मिले हैं। वहाँ रविवार (25 अप्रैल 2021) को कोरोना संक्रमितों की संख्या 79,5,627 थी। जबकि, 17 हजार से अधिक मौतें हुई हैं। वहाँ कोरोना के चलते हालात ऐसे हो गए हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड्स नहीं मिल रहे हैं।

इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में बेड कम पड़ने और ऑक्सीजन की कमी के चलते सर्जरी रोक दी गई है और कंगाल पड़ोसी भारत को मदद देने की बात करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में अपने आपको सही साबित करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हालात ऐसे ही रहने पर लॉकडाउन लगाने की चेतावनी दी है। पड़ोसी देश में कोरोना के हालात कितने भयावह हैं उसे इस बात से समझा जा सकता है कि इमरान खान ने सेना को हालात नियंत्रित करने के लिए उतार दिया है।

इसके अलावा पड़ोसी देश खुद गृह युद्ध के हालात से जूझ रहा है। वहाँ का कट्टरपंथी धार्मिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान में खून की होली खेल रहा है। हाल ही इस कट्टर इस्लामी संगठन ने पाकिस्तान में कई जगह तोड़फोड़ और आगजनी की थी। हालात इतने ज्यादा खराब हो गए थे कि पाकिस्तान ने देश में Facebook, Twitter, Tiktok, WhatsApp और YouTube जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर बीते 16 अप्रैल 2021 को प्रतिबंध लगा दिया था।

इससे पहले पिछले साल भी पाकिस्तान की सेना के खिलाफ सिंध प्रांत की पुलिस ने बगावत कर दी थी। पुलिस ने नवाज शरीफ के दामाद रिटायर्ड कैप्टन मुहम्मद सफदर की गिरफ्तारी के बाद बगावत का बिगुल फूँक दिया था। ‘सिंध पुलिस और पाकिस्तान सेना के बीच इस दौरान हुई गोलीबारी में कराची के 10 पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे।

फेक न्यूज़ पेडलर स्वरा भास्कर को पाकिस्तान में दिखा बड़ा दिल

हालाँकि, पाकिस्तान के इस प्रोपागैंडा में भारत के लेफ्ट लिबरल गैंग की मेंबर अभिनेत्री स्वरा भास्कर को “बड़ा दिल” दिखा। स्वरा भास्कर ने पाकिस्तान के मदद के ऑफर पर ट्वीट किया, “इस कठिन समय में पाकिस्तानी नागरिक समाज और सोशल मीडिया पर भारत के प्रति एकजुटता और दयालुता देखकर अच्छा लगा। बावजूद इसके कि हमारे मीडिया और मुख्यधारा के सार्वजनिक प्रवचनों ने पाकिस्तानियों का लगातार मजाक उड़ाया है। धन्यवाद बड़े दिल वाले पड़ोसी।”

हालाँकि, भारत अब तक दुनियाभर के 70 से अधिक देशों को वैक्सीन मैत्री के तहत कोरोना की वैक्सीन भेज चुका है, लेकिन वामपंथियों और कथित लिबरल्स ने कभी इसकी तारीफ नहीं की। बल्कि इस पर हमेशा सवाल खड़े करने की कोशिश की। देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है, लेकिन एक बार भी वामपंथियों ने इसकी सराहना नहीं की और पाकिस्तान ने दुष्प्रचार करने के इरादे से मदद की बात। इससे ये फूले नहीं समा रहे हैं।

टीवी सीरियल में राम का किरदार निभाने वाले गुरमीत चौधरी खोलेंगे 1000 बेड का अस्पताल: पटना और लखनऊ होंगे पहला पड़ाव

टीवी के पॉपुलर शो ‘रामायण’ में भगवान श्री राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता गुरमीत चौधरी ने ट्विटर के माध्यम से सूचना दी कि वह पटना और लखनऊ में 1000 बिस्तरों का अल्ट्रा मॉडर्न अस्पताल खोलने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य शहरों में भी उनकी ऐसी ही कुछ योजनाएँ हैं।

जनवरी में गुरमीत चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि वह अयोध्या में बनने वाले प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के लिए अपना योगदान देंगे। अब उन्होंने पटना और लखनऊ में अस्पताल भी खोलने का निर्णय लिया है।

गुरमीत ने कहा था, “आप सब ने मुझे भगवान राम के किरदार में देखा था। इसके अलावा भी मैंने कई किरदार निभाए लेकिन मुझे यह भरोसा है कि मैं आज जो भी हूँ वह उन्हीं की वजह से हूँ। रामायण मेरा टीवी पर पहला शो था। मैं आपका हृदय से धन्यवाद करता हूँ और आज मैं आप सबसे कुछ शेयर करना चाहता हूँ।“

गुरमीत कोरोनावायरस के इस संक्रमण के दौरान भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की मदद करते हुए नजर आते हैं। वह सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण दवाईयाँ उपलब्ध कराने के लिए खासे सक्रिय हैं।

गुरमीत चौधरी ने 2008 में टेलीविजन के बेहद पॉपुलर शो ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाया था जो बहुत प्रसिद्ध हुआ था। अभिनेत्री देबिना बनर्जी ने माता सीता का किरदार निभाया था। बाद में 2011 में गुरमीत और देबिना ने शादी कर ली थी।

हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के पुजारी श्री कृष्ण भट्ट का निधन: 40 साल से 3 मीटर ऊँचे शिवलिंग की करते थे सेवा

रविवार (25 अप्रैल 2021) को श्रीकृष्ण भट्ट का देहावसान हो गया। भट्ट ने कर्नाटक के हम्पी के बादावी लिंग मंदिर में 40 वर्षों से पुजारी के रूप में सेवा की। विश्व हिन्दू परिषद के सदस्य गिरीश भारद्वाज ने ट्विटर पर श्री कृष्ण भट्ट के निधन का समाचार दिया।

विभिन्न सोशल मीडिया मंचों में ईश्वर भक्ति और सनातन धर्म के प्रति समर्पण को दिखाने के लिए उनकी फोटो शेयर की जाती थी। इन तस्वीरों में श्री कृष्ण भट्ट शिवलिंग की सेवा करते हुए देखे जाते थे।

94 वर्षीय श्री कृष्ण भट्ट कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के तीर्थाहल्ली तालुक के एक गाँव के रहने वाले थे। वह हम्पी के सत्यनारायण मंदिर में एक पुजारी के तौर पर नियुक्त हुए थे। बाद में वह आनगुंडी रॉयल परिवार के द्वारा हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के पुजारी बनाए गए। भट्ट पिछले 40 सालों से निरंतर मंदिर में सेवा करते आए थे। वह शाम होने तक मंदिर में ही रहते थे।  

बादावी के लिंग मंदिर और श्री कृष्ण भट्ट की सबसे खास बात यह थी कि भट्ट 3 मीटर ऊँचे शिवलिंग में चढ़कर उसकी साफ सफाई करते थे। मंदिर में हमेशा ही पानी भरा रहता था और वहाँ कोई सीढ़ी या शिवलिंग की साफ सफाई के लिए कोई साधन भी नहीं था। ऐसे में भट्ट शिवलिंग में चढ़कर वहाँ भस्म और विभूति इत्यादि अर्पित करते। भक्त भी इसे सहर्ष ही स्वीकार करते थे।

हम्पी के ही विरूपाक्ष मंदिर के वरिष्ठ पुजारी शिव भट्ट ने न्यू इंडियन एक्स्प्रेस से चर्चा करते हुए कहा था कि शिवलिंग पर चढ़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं है। इसे कोई भी अपवित्रता से जोड़ कर नहीं देख सकता क्योंकि यह श्रद्धा और समर्पण से जुड़ा है। बादावी का लिंग मंदिर विजयनगर के राय वंश के द्वारा 15वीं शताब्दी में बनाया गया था।

हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के गर्भ गृह की छत में कई छेद हैं। ये छेद बहमनी के सुल्तानों के इस्लामिक आक्रमण के कारण बन गए थे। इसी कारण मंदिर में 500 सालों तक पूजा-पाठ नहीं हो सकी। 1980 के दौरान मंदिर में पूजा प्रारंभ हुई। इन्हीं छेदों के कारण मंदिर के गर्भ गृह में सूर्य का प्रकाश आता रहता है। इससे उत्पन्न होने वाली मनमोहक छटा श्रद्धालुओं को मंदिर तक खींच लाती है।   

हालाँकि श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। अभी तक श्रीकृष्ण भट्ट ही मंदिर से जल लाकर श्रद्धालुओं पर छीट दिया करते थे। अब श्रीकृष्ण भट्ट के परलोक गमन के बाद बादावी में एक शून्य उत्पन्न हुआ है, भक्ति और समर्पण का शून्य।