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महाराष्ट्रः 4 महीने-4 अस्पताल, आग और ऑक्सीजन लीक से कम से कम 57 मौतें; जिम्मेदार कौन?

महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है। इससे राज्य की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। पिछले कुछ हफ्तों से प्रदेश में हर दिन 50,000 से अधिक संक्रमितों के नए मामले सामने आ रहे हैं। महामारी से निपटने के महाविकास आघाड़ी सरकार की अक्षम कोशिशों के कारण स्थितियाँ गंभीर हो गई हैं। चाहे वह हाल ही में ऑक्सीजन पर टकराव की स्थिति हो या अस्पतालों का मामला हो। हर जगह तीन पैरों की सरकार ने अपनी अक्षमता का ही प्रदर्शन किया है।

महाराष्ट्र में बीते कुछ महीनों के दौरान अस्पतालों में हादसे के कई मामले सामने आए हैं। ऐसी ही 4 घटनाओं की लिस्ट नीचे है।

विरार: कोविड केयर अस्पताल में आग से 13 मौतें

शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) की रात मुंबई के विरार पश्चिम स्थित विजय वल्लभ कोविड केयर अस्पताल के ICU लगी भीषण आग में कम से कम 13 मरीजों की जलकर मौत हो गई। जानकारी सामने आई थी कि कोरोना मरीजों की जहरीले धुएँ की वजह से मौत हुई। इस मामले में विजय वल्लभ अस्पताल के अधिकारी डॉ. दिलीप शाह ने कहा था, “आज सुबह लगभग 3 बजे गहन चिकित्सा इकाई में आग लगने से 13 लोगों की मौत हो गई है। गंभीर हालत वाले 21 मरीजों को दूसरे अस्पताल में भेज दिया गया है।”

रिपोर्ट के अनुसार, 3 बजे के बाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगी थी, जहाँ 17 संक्रमितों की इलाज किया जा रहा था। जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझाया, लेकिन तब तक 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे को लेकर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने एक विवादास्पद बयान दिया और दावा किया कि विरार अस्पताल में आग एक राष्ट्रीय समाचार नहीं है।

टोपे ने कहा, “हम ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में बात करेंगे। हम रेमडेसिविर की कमी के बारे में बात करेंगे। हम इस घटना के बारे में भी बात करेंगे। हालाँकि, यह एक राष्ट्रीय समाचार नहीं है।”

नासिक: ऑक्सीजन लीक में 24 मरीजों की मौत

देशभर में अस्पताल और कोविड केयर सेंटर मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की जान जा रही है। जीवनरक्षक ऑक्सीजन की भारी कमी के बीच महाराष्ट्र के नासिक स्थित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल में टैकर से ऑक्सीजन सप्लाई के दौरान हुए लीकेज से 24 मरीजों की मौत हो गई थी। बता दें की लीकेज के कारण अस्पताल में करीब 30 मिनट तक O2 की सप्लाई बाधित थी।

भांडुप मॉल में आग लगने से 10 की मौत

पिछले महीने मुंबई के भांडुप इलाके में एक मॉल में भीषण आग लग गई थी, जिसके टॉप फ्लोर पर सनराइज हॉस्पिटल का कोविड अस्पताल था। जिस समय आग लगी, उस दौरान 76 COVID-19 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इस दौरान कथित तौर पर 10 लोगों की मौत हो गई थी।

सीएनएन न्यूज 18 को ड्रीम मॉल के मिले दस्तावेजों के मुताबिक मॉल में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया गया था। इससे पहले, बीएमसी ने अग्नि सुरक्षा मानदंडों को लेकर मुंबई के मॉल्स पर एक आकलन किया था, और ड्रीम मॉल उन 29 मॉलों में से एक था, जिन्हें असुरक्षित घोषित किया गया था, क्योंकि ये फायर सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा नहीं करते थे।

भंडारा में 10 शिशुओं की जलकर हुई थी मौत

महाराष्ट्र में विदर्भ के अंतर्गत आने वाले भंडारा जिले के एक अस्पताल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में आग लगने से 1 से 2 महीने के 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। यूनिट में कुल सत्रह बच्चे थे, लेकिन उनमें से केवल सात को बचाया जा सका था। ज्यादातर नवजातों की मौत दम घुटने के कारण हुई थी। एक बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं और दो अन्य को मामूली चोटें आई थीं। घटना के बाद अस्पताल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि ज्यादातर की मौत धुआँ निगलने के कारण हुई थी।

सरकार को जवाब देना चाहिए कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा

महाराष्ट्र में बीते 4 महीनों में अस्पतालों में आग लगने और लीक की 4 घटनाएँ हुई हैं। इन घटनाओं में जितनी भी मौतें हुई हैं, उनमें मरने वाले अधिकतर कोरोना मरीज थे। सरकार से यह सवाल किए जाने की आवश्यकता है कि आखिर इन घटनाओं में होने वाली मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है।

PM मोदी ने टोका, CM केजरीवाल ने माफी माँगी… फिर भी चालू रखी हरकत: 1 मिनट के वीडियो से समझें AAP की राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की, जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी हिस्सा लिया। लेकिन, उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए इस बैठक का लाइव प्रसारण कर दिया। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अगर कोरोना से लड़ने की दिशा में कोई राष्ट्रीय योजना होगी तो सभी राज्य सरकारें केंद्र के साथ मिल कर उस दिशा में काम करेगी।

बता दें कि पिछले 1 वर्ष से भी अधिक समय से लगातार कोरोना पर योजनाएँ बन रही हैं और उसे लागू किया जा रहा है, तभी देश पहली लहर से भी बाहर निकला था और अब तक 13.54 करोड़ लोगों का टीकाकरण भी हो चुका है। बैठक में अरविंद केजरीवाल कोरोना के कारण दिवंगत आत्माओं की शांति की बातें कर रहे थे। जबकि वो खुद PM के साथ बैठक के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे थे।

स्थिति ये आ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें टोकना पड़ा। पीएम ने AAP सुप्रीमो को याद दिलाया कि अब तक की जो परंपरा रही है, प्रोटोकॉल रहा है – ये उसके बिलकुल ही खिलाफ हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई मुख्यमंत्री इस तरह की ‘इन हाउस मीटिंग’ का लाइव प्रसारण कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सब को संयम का पालन करना चाहिए। उन्होंने इस हरकत को अनुचित बताया।

इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बैठक का ‘शोक सभा’ की तरह प्रयोग करते हुए कोरोना से मृत लोगों की आत्माओं की शांति से लेकर उनके परिजनों को दुःख सहने की क्षमता देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की बातें करने लगे। केजरीवाल ने कहा, “अगर मेरी तरफ से कोई गुस्ताखी हो गई है, अगर मैंने कुछ कठोर बोल दिया हो या मेरे आचरण में कोई गलती हो तो मैं उसके लिए आपसे माफ़ी चाहता हूँ।”

अरविंद केजरीवाल ने हाथ जोड़ कर ये बाते कहीं। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तरफ से जो भी प्रेजेंटेशन दिए गए, वो काफी अच्छे थे और जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका पालन करेंगे। इस बैठक में दिल्ली के सीएम का पूरा ध्यान अपने भाषण और खुद की बातों के लाइव प्रसारण पर था। नियमों का उल्लंघन और ऊपर से इतने संवेदनशील समय में राजनीति करने के लिए उनकी आलोचना हो रही है।

इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है।

अल्जीरियाई प्रोफेसर को ‘इस्लाम का अपमान’ करने पर 3 साल जेल, कुर्बानी और नाबालिग से निकाह पर उठाए थे सवाल

अल्जीरिया के जाने-माने प्रोफेसर 53 वर्षीय सैद जबेलखिर (Said Djabelkhir) को तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए ‘इस्लाम का अपमान’ करने के आरोप में उन्हें सजा दी गई है। इस साल की शुरुआत में हदीस (पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा) और इस्लाम की कुछ परंपराओं पर सवाल उठाने के बाद उन पर ‘मजहब और इस्लामी परंपराओं का मजाक’ बनाने का आरोप लगा था। 

Sidi Bel Abbs विश्वविद्यालय के एक शिक्षक और 7 वकीलों की ‘इस्लाम के अपमान’ की शिकायत के बाद प्रोफेसर जबेलखिर पर मुकदमा चलाया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उनके फेसबुक पोस्ट के कारण इस्लामी भवनाएँ आहत हुईं।

जमानत पर चल रहे प्रोफेसर ने सजा पर आश्चर्य व्यक्त किया है। न्यूज एजेंसी AFP से चर्चा करते हुए प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि वह कोर्ट ऑफ कैसेशन में अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे एक प्रोफेसर हैं न कि एक इमाम। लिहाजा उन्हें कारणों, तर्कों और तथ्यों पर विचार करना होता है और उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी है। शोधकर्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि वह अल्जीरिया में शोध करते हैं।

अल्जीरिया के प्रोफेसर का ‘अपराध’

इस्लाम पर दो पुस्तकें लिखने वाले प्रोफेसर सैद जबेलखिर ने जैसे ही इस्लाम की कुछ परपराओं और हदीसों पर प्रश्न उठाया वो इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए। प्रोफेसर जबेलखिर ने ईद पर जानवरों की कुर्बानी पर प्रश्न उठाया था और मुस्लिम समाज में छोटी बच्चियों से शादी को भी गलत ठहराया था।

प्रोफेसर जबेलखिर ने यह भी कहा कि कुरान में लिखा हुआ सब कुछ सही नहीं है। उन्होंने कश्ती नूह का उदाहरण देते हुए कहा कि कई मुसलमान कुरान में लिखी हर बात को सही मान रहे हैं। प्रोफेसर के अनुसार मुस्लिम इतिहास और मिथक का अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। AFP से चर्चा के दौरान प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि कुरान के द्वारा आधुनिक समय की अपेक्षाओं, आवश्यकताओं और प्रश्नों का कोई समाधान नहीं मिल सकता।

प्रोफेसर को जान से मारने की धमकी

न्यूज अरब के अनुसार प्रोफेसर जबेलखिर को जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि प्रोफेसर जबेलखिर के विचारों ने उसे मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुँचाया है। अपने बचाव में प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि उनका उद्देश्य इज़्तिहाद (व्याख्या) है, न कि जिहाद।

प्रोफेसर जबेलखिर को 2019 में भी जान से मरने की धमकी मिली थी, जब उन्होंने रमजान में रोजा की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया था। प्रोफेसर ने कहा था कि मुस्लिमों के लिए रोजा जरूरी नहीं है और इसके स्थान पर मुस्लिमों को खाना और पैसों को गरीबों को दान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तो पैगंबर के सभी साथियों ने भी उपवास नहीं किया था।

अल्जीरिया का ईशनिंदा कानून

अल्जीरिया की 99% जनसंख्या सुन्नी मुसलमानों की है और अल्जीरिया का संविधान भी इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में स्वीकार करता है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 36 में आस्था की स्वतंत्रता है। हालाँकि संविधान के इन प्रावधानों के बाद भी अल्जीरिया में धार्मिक स्वतंत्रता पर कई प्रतिबंध हैं। अल्जीरिया में लेखन, पेंटिंग, विचार अथवा किसी अन्य माध्यम से इस्लाम या पैगंबर की कथित अवहेलना पर तीन से पाँच साल की सजा और अर्थदंड का प्रावधान है।

PM मोदी के साथ मीटिंग को केजरीवाल ने बिना बताए कर दिया Live: बात हो रही थी जिंदगी बचाने की, करने लगे राजनीति

देश में कोरोना महामारी के कारण हर जगह हालत बिगड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र ने इसी स्थिति को देखते हुए शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस बैठक में महाराष्ट्र, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

बैठक में ऑक्सीजन आपूर्ति, रमेडेसिविर जैसी आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता पर बात हुई। इससे पहले पीएम अधिकारियों से मीटिंग कर स्थिति के बाबत उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट माँग चुके थे। बैठक में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। 

मसलन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम मोदी के साथ चल रही बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य को मिलने वाली वैक्सीन की कीमत एक होनी चाहिए। वहीं एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगने वाली वैक्सीन के लिए कोरोना के टीके की उपलब्धता को लेकर केंद्र राज्य सरकारों को एक्शन प्लान जारी करे।

लेकिन, इस बैठक के बाद जो बात चर्चा में आई, वह अरविंद केजरीवाल और हर मामले में राजनीति करने वाली उनकी आदत थी। दरअसल, इस बैठक में केजरीवाल ने लाचारों की तरह पहले पीएम मोदी से ऑक्सीजन को लेकर अपील की और बाद में क्लोज डोर मीटिंग की बातचीत पब्लिक कर दी।

इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया।

इसके अलावा, सीएम केजरीवाल की स्पीच भी पूर्णत: राजनीति से प्रेरित थी। ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएम के साथ हुई ऐसी निजी बातचीच को प्रसारित कर दिया गया हो। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है। लेकिन केजरीवाल को मालूम था कि उनकी स्पीच सार्वजनिक हो रही है। 

केजरीवाल द्वारा की गई इस हरकत के बाद इसे विश्वास के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने अरविंद केजरीवाल को एक आपदा कहा है। मालवीय के अनुसार, केजरीवाल बिना तैयारी के पीएम के साथ बैठक में बैठते हैं। उन्हें चीजों की कोई जानकारी नहीं है कि राजधानी में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पहले ही चीजें की जा रही हैं और टीकों की कीमत से भी वह बेखबर हैं। मालवीय का पूछना है कि आखिर ये शख्स दिल्ली को कैसे बचाएगा।

सीएम केजरीवाल ने इस बैठक में दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की कमी को उजागर कर राजनीति करनी चाही और इस तरह से ये दर्शाया कि उन्हें मदद नहीं मिल रही। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केजरीवाल ने एक जगह कहा, “दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी है। क्या अगर यहाँ कोई ऑक्सीजन प्रोड्यूसिंग प्लांट नहीं होगा तो दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। कृपया मुझे बताएँ कि जब दिल्ली आने वाला ऑक्सीजन सिलिंडर दूसरे राज्य में रोका जाए तो केंद्र सरकार से इस संबंध में किससे बात करें।”

बता दें कि केजरीवाल की इस नासमझी पर सरकारी सूत्रों ने उन पर निशाना साधा। सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर वैक्सीन की कीमत पर झूठ बोला। सीएम केजरीवाल ने एयरलिफ्ट की बात कही लेकिन वो नहीं जानते कि ये पहले से हो रहा है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल एकदम निचले स्तर पर गिर गए हैं। उनका पूरा भाषण किसी समाधान के लिए नहीं बल्कि राजनीति खेलने और जिम्मेदारी से बचने के लिए था।

भाजपा नेता संबित पात्रा ने केजरीवाल की इस हरकत को घटिया राजनीति कहा। उन्होंने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग को सार्वजनिक करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। ताकि राजीनित में नंबर बढ़ाए जा सकें।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के हालात अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत बदतर हो रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 26 हजार से ज्यादा केस आए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 956,348 हो गई और सबसे चिंताजनक बात ये है कि यहाँ संक्रमण दर रिकॉर्ड भी 36 प्रतिशत हो गया है, जिसके बाद कल राजधानी में 306 मृत्यु हुई।

उनके पत्थर-हमारे अन्न, उनके हमले-हमारी सेवा: कोरोना की लहर के बीच दधीचि बने मंदिरों की कहानी

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश के लोग न सिर्फ मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, बल्कि कई दवाओं की कमी से भी जूझ रहे हैं। कई राज्यों में लगी पाबंदियों के कारण गरीब और प्रवासी मजदूर हलकान हैं, सो अलग। इन सबके बीच सवाल पूछे जा रहे हैं मंदिरों से, जिनकी संपत्ति पर दशकों से सरकार का कब्ज़ा है। साथ ही हिन्दू श्रद्धालु मंदिर के लिए जमा किए गए चंदे का क्या करें, ये भी वो वामपंथी तय करने की कोशिश कर रहे जो इसके खिलाफ थे।

साथ ही मोदी सरकार को मंदिर बनवाने वाली सरकार बताया जा रहा, जबकि अब तक सरकार ने एक भी मंदिर नहीं बनवाया है। हाँ, विकास कार्यों के आँकड़े ज़रूर पिछली सभी सरकारों के मुकाबले दुरुस्त हैं। यहाँ हम उन 5 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने हाल में कोरोना की दूसरी लहर से उपजे संकट के बीच जनहित में कदम आगे बढ़ाए हैं। ये मंदिर कोविड मरीजों और गरीबों की सेवा कर रहे हैं।

द्वारका स्थित ISKCON मंदिर

द्वारका के इस्कॉन मंदिर ने संकट के इस समय में जब दिल्ली में कई पाबंदियाँ लागू हैं, गरीबों तक भोजन पहुँचाने का फैसला लिया है। पिछले वर्ष भी मंदिर ने जिला प्रशासन के साथ मिल कर कई गरीबों के भरण-पोषण का जिम्मा उठाया था, जिसे इस साल विस्तार दिया जा रहा है। मंदिर से जुड़ीं महिमा सब्बरवाल ने बताया कि ‘फ़ूड फॉर लाइफ’ के तहत ‘श्रवण कुमार सेवा’ का संचालन किया जा रहा है।

ये मुहिम रविवार (अप्रैल 18, 2021) से शुरू की गई है। 15 हजार लोगों को इसके तहत डिब्बे में पैक कर के भोजन पहुँचाया गया। इसमें खिचड़ी, दाल, आलू की सब्जी और रोटी शामिल हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें हल्दी, देसी घी, हींग और काली मिर्च जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जा रहा है। इससे लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत होगा। दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पश्चिमी जिले के लिए 9717544444 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

मंदिर का लक्ष्य है कि 1 दिन में ढाई लाख लोगों तक मुफ्त भोजन पहुँचाया जा सके। स्थानीय लोग भी इसे सफल बनाने के लिए मंदिर के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। भोजन पकाते समय संक्रमण से बचाव के उपाय और सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। भोजन का गलत प्रयोग न हो, इसके लिए ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है कि ये ज़रूरतमंदों तक ही पहुँचे। जिस ई-रिक्शा का डिलीवरी के लिए इस्तेमाल हो रहा है, उसमें भी स्वच्छता का खास ध्यान रखा गया है।

मुंबई के जैन मंदिरों ने भी बढ़ाए कदम

महाराष्ट्र, खासकर उसकी राजधानी मुंबई इस वक़्त न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे बड़ा हब बना हुआ है। इन सबके बीच जैन समाज के संतों और प्रबुद्ध लोगों ने जैन मंदिरों को ही कोविड सेंटर में तब्दील कर दिया है। मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित पावन धाम जैन मंदिर में बनाए गए 100 बेड्स वाले कोविड सेंटर में हरेक बेड के लिए ऑक्सीजन का भी इंतजाम किया गया है।

मंदिर प्रशासन ने कहा कि महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है और सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में बेड्स न मिलने के कारण लोग मर रहे हैं, ऐसे में मंदिर ने आगे आने का फैसला लिया। मंदिर के सेवादार प्रदीप मेहता ने कहा कि सेवा और दान ही सबसे ज़रूरी चीज है। पावन धाम जैन मंदिर में स्टडी रूम, मेडिटेशन रूम और किचन सहित कई सुविधाएँ हैं। अब तक यहाँ धार्मिक कार्य ही होते आए हैं।

कुछ यूँ कोविड सेंटर में तब्दील हुआ मुंबई का जैन मंदिर (वीडियो साभार: ABP)

कोविड मरीजों के लिए 100 ऑक्सीजन बेड्स वाली सेवा शुरू हो गई है। 5 मंजिला मंदिर के कर्मचारी भी अब जनसेवा में लग गए हैं। ऑक्सीजन बेड के लिए 3000 रुपए प्रतिदिन का किराया रखा गया है, जो मुंबई के अस्पतालों से काफी कम है। इन रुपयों का इस्तेमाल डॉक्टरों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए किया जाएगा। मरीजों को एक अच्छा वातावरण दिया जाएगा। दवाइयों की भी व्यवस्था होगी।

ओडिशा के पुरी का ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भी जनसेवा में पीछे नहीं है। मंदिर में श्रद्धालुओं को भीड़ जुटाने से पहले ही रोक दिया गया है, ताकि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन हो सके। सिर्फ पुजारी ही पूजा-पाठ कर रहे हैं। ‘श्री जगन्नाथ टेम्पल एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA)’ ने सेवादारों, भक्तों और उनके परिवारों के लिए एक कोविड सेंटर की स्थापना का फैसला किया। ग्रैंड रोड स्थित ‘भक्त निवास’ में सारे उपकरणों और सेवाओं के साथ इसकी व्यवस्था हुई है।

SJTA के मुख्य प्रशासक किशन कुमार ने जिला प्रशासन के साथ बैठक के बाद कहा कि इस कोविड सेंटर में डॉक्टरों, नर्सों और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई है। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) से ये पूर्णरूपेण चालू हो जाएगा। साथ ही वहाँ कोरोना टेस्टिंग फैसिलिटी भी होगी। एम्बुलेंस के जरिए गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तुरंत बड़े अस्पताल में भेजा जाएगा। जून के बाद आयुर्वेदिक और होमियोपैथी इलाज भी होगा।

साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोग कोरोना का टीका लगाएँ, इसके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। कुम्भ मेला से वापस आने वाले 32 सेवादारों में से मात्र एक को ही कोरोना पॉजिटिव पाया गया। नए कोविड सेंटर में ऑक्सीजन की भी व्यवस्था होगी। जगन्नाथ मंदिर से जुड़े लोगों को कोरोना संक्रमण न हो, इसके लिए पहले ही बैठक कर के सतर्कता के उपाय अपनाए गए थे।

काशी विश्वनाथ मंदिर की रसोई से गरीबों को भोजन

वाराणसी भी कोरोना से बेहाल है। ऐसे में यहाँ के विश्वनाथ मंदिर की रसोई ने गरीबों का पेट भरने का जिम्मा उठाया है। कई NGO के साथ मिल कर कोरोना मरीजों को भी भोजन पहुँचाया जा रहा है। कोरोना के कारण मरने वालों के शवों को भी हाथ नहीं लगाना है, ऐसे में परिजनों के लिए अंतिम-संस्कार एक बड़ी समस्या है। इसीलिए, मारवाड़ी समाज ने कोविड मरीजों को अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, दवा तथा आकस्मिक मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया है।

स्वामीनारायण मंदिर का कोविड सेंटर

गुजरात के वड़ोदरा में भी मंदिरों ने बढ़-चढ़कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हाथ बढ़ाया है। BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर ने 300 बेड्स वाले कोविड सेंटर की स्थापना की है। अतलदरा में 3.5 एकड़ में इस फैसिलिटी की स्थापना हुई है। ICU कमरों, पंखों और कूलर के अलावा यहाँ ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होगी। जल्द ही 200 और बेड्स को जोड़ कर कोविड सेंटर की क्षमता को 500 बेड्स तक किया जाएगा।

मंदिर से जुड़े ज्ञान वत्सल स्वामी ने बताया कि मंदिर ने दवाओं के लिए स्टोर, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग से कमरों और मरीजों के परिजनों के लिए रेस्ट रूम्स की भी व्यवस्था की है। मंदिर द्वारा ये पहल किए जाने के बाद शहर के कई अन्य धार्मिक स्थल भी सामने आए हैं और स्वामीनारायण मंदिर से प्रेरणा लेकर लोगों की मदद कर रहे हैं। जहाँ सरकारें और प्रशासन भी पस्त हैं, वहाँ मंदिरों ने मदद का हाथ बढ़ाया है।

कई अन्य मंदिर भी कर रहे मदद, ‘गिरोह विशेष’ चुप

इन मंदिरों के अलावा कई अन्य छोटे-बड़े मंदिर भी जनसेवा में लगे हैं, जिनके बारे में हम आपको बताते रहेंगे। पिछले साल भी जब कोरोना ने सिर उठाया था, तब देश भर के मंदिरों ने पीएम केयर्स में दान देने से लेकर लोगों की मदद तक, सब कुछ किया था। कई हिंदू मंदिरों ने दान में करोड़ों रुपए खर्च किए थे, जरूरतमंदों के लिए भोजन और आश्रय प्रदान किया था और संकट के समय राष्ट्र का समर्थन करने के लिए खड़े हुए थे।

वहीं इसी बीच कुछ मजहबी स्थलों से मदद की बात तो दूर, उलटा कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह देने पर पुलिस पर ही ईंट-पत्थर से हमले की ख़बरें आ रही हैं। राजस्थान के सांगनेर स्थित जामा मस्जिद में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने गई तो पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। गुजरात के कपड़वंज स्थित अली मस्जिद में भीड़ जुटाने से रोका गया तो पुलिस पर हमला हुआ

विरार हो या भंडारा, सवाल वहीः कब तक जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली बता मन बहलाते रहेंगे

महाराष्ट्र के विरार के एक अस्पताल में आग लगने से तेरह लोगों की मृत्यु हो गई। कोविड अस्पतालों में होनेवाली यह अकेली दुर्घटना नहीं है। इससे पहले नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक लीक होने से चौबीस लोगों की मृत्यु हो गई थी।

दो दिन पहले ही मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को राज्य में COVID रोकने के लिए पर्याप्त कोशिशें न कर पाने का दोषी बताते हुए अपनी टिप्पणी में कहा था कि ‘आपको भले ही शर्म न आए पर हमें शर्म आती है कि हम इस घिनौने और घटिया समाज के सदस्य हैं’।

उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी उस समय आई जब महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय के उस आदेश का पालन करने में असमर्थता प्रकट की जिसमें न्यायालय ने सरकार को नागपुर के लिए ऐंटी बायआटिक इंजेक्शन रेमडेशेविर के दस हज़ार वायल ख़रीदने का आदेश दिया था।

इसमें कोई दो राय नहीं कि चीनी वायरस COVID-19 की दूसरी लहर बहुत तेज है और देश के अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। पर ऐसा क्यों है कि महाराष्ट्र सरकार के संक्रमण रोकने के प्रयास शुरू से ही असफल दिखाई देते रहे हैं? कुछ लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि दरअसल राज्य संक्रमण की पहली लहर पर भी असरदार तरीक़े से क़ाबू पाने में असफल रहा।

इन सब के ऊपर राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीरता का आलम यह है कि पिछले बीस दिनों में कोविड केयर अस्पतालों में आग लगने की दो घटनाएँ हो चुकी हैं। ऑक्सीजन टैंक लीक होने की घटना अभी बिलकुल ताज़ा है। जनवरी महीने में भंडारा जिले के एक अस्पताल में आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें दस बच्चों की मृत्यु हो गई थी। कोविड संक्रमण के बाद केयर यूनिट बने पर उनमें व्यवस्था और बेड की कमी की समस्या एक वर्ष में कम हुई ही नहीं।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अधिकतर सरकारें गंभीर नहीं दिखाई देतीं, पर महाराष्ट्र सरकार की बात ही अलग है। पिछले एक वर्ष में कोविड के गंभीर संकट के बावजूद सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर मीडिया और समाज में बहस होती रही है, फिर चाहे वह गठबंधन की आपसी खींचतान हो या प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार। ऊपर से केंद्र के साथ राज्य सरकार का समन्वय किसी से छिपा नहीं है। स्वास्थ्य संकट के इस काल में राज्य सरकार की केंद्र को पत्र लिखने से लेकर वैक्सीन की कमी का हल्ला करने तक पर्याप्त राजनीति भी किसी से छिपी नहीं है।

ऊपर से असंवेदनशीलता देखिए कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अस्पताल में आग लगने से तेरह लोगों की मृत्यु राष्ट्रीय मीडिया लायक़ समाचार नहीं है। कौन से रसातल में पहुँच गई है सरकारी संवेदना? हम किसी दुर्घटना को क्या अब ऐसे आँकेंगे कि उसकी ख़बर राष्ट्रीय मीडिया लायक़ है या लोकल मीडिया लायक़? क्या यह देखकर कार्रवाई होगी कि कितने अख़बारों ने उस ख़बर को फ़्रंट पेज पर छापा या कितने न्यूज़ चैनल ने उसे ब्रेकिंग न्यूज़ बनाया? सरकारें यह कौन सा विमर्श चलाना चाहती हैं?

आज अस्पताल में लगी आग में तेरह लोगों की मृत्यु के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जाँच के आदेश तो दे दिए पर इस आदेश की बात पर एक प्रश्न उठता है कि क्या हम फिर दशकों पीछे जा रहे हैं जिसमें सरकारें दुर्घटनाओं को रोकने से अधिक जाँच कमीशन बैठाने को लेकर गंभीर रहती हैं? साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि ऐसे जाँच कमीशन से क्या फ़ायदा जिसकी रिपोर्ट समय पर नहीं आती या आती भी है तो क़ानूनी दाँव-पेंच की वजह से अक्सर उस पर कार्रवाई नहीं होती। कई बार तो कार्रवाई होने तक ऐसी दुर्घटनाओं में मरने वालों के रिश्तेदार भी शायद नहीं बचते।

हर बार जब ऐसी दुर्घटना होती है, बहस वही पुराने मुद्दे पर पहुँच जाती है कि अस्पताल का प्लान कैसा था? कैसे पास हुआ था? क्या प्लान के पास होने में कोई भ्रष्टाचार हुआ था? क्या पर्याप्त सुविधाएँ थीं जो अस्पताल में होनी चाहिए? ये ऐसे प्रश्न हैं जो दशकों से अपनी जगह टिके हुए हैं। कोई कोशिश भी नहीं करता कि उनका उत्तर दे जिससे नए और आधुनिक प्रश्न उठें जो हमारे विकास की गवाही भी दें।

पर नहीं। हम इन्हीं पुराने प्रश्नों को खड़ा करके बहस करते रहेंगे ताकि ख़ुद को एक सजग समाज के रूप में प्रस्तुत कर सकें। बहस करके काम पर चल देंगे और अपनी इस जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली की संज्ञा देकर मन को सांत्वना देते रहेंगे।

B.1.618 ट्रिपल म्यूटेंट कोरोना वायरस: 60 दिनों में 12% केस इसी के, टीकों-एंटीबॉडी का मुकाबला करने में भी सक्षम

भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। देश में प्रतिदिन कोरोना के लाखों केस सामने आने से स्थिति चिंताजनक बन गई है। गुरुवार रात 12 बजे तक भारत में 332,503 नए कोरोना संक्रमित मिले। इस दौरान 2256 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते रूप के लिए अभी तक देश में डबल म्यूटेंट वायरस को जिम्मेदार माना जा रहा था। लेकिन अब तीन बार रूप बदल चुके (ट्रिपल म्यूटेंट) वायरस का पता चला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से लिए गए कई सैंपल में ट्रिपल म्यूटेंट वायरस मिला है। इसे B.1.618 नाम दिया गया है।

बताया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने B.1.618 को बंगाल स्ट्रेन का नाम दिया है। नया वेरिएंट तीन अलग-अलग कोविड स्ट्रेस से मिलकर बना है। यानी कि कोरोना वायरस के इस स्ट्रेन ने तीन बार रूप बदला है, जो काफी घातक है। यह शरीर के इम्युन कवच को भेद रहा है, जिससे पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके लोग या फिर वैक्सीन लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आ जा रहे हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायॉलजी (IGIB) में जीनोम म्यूटेशन रिसर्चर विनोद सकारिया ने कहा, “बंगाल में हाल के महीनों में B.1.618 बहुत तेजी से फैला है। B.1.617 के साथ मिलकर इसने पश्चिम बंगाल में बड़ा रूप धारण कर लिया है।”

कोलकाता से 50 किलोमीटर दूर कल्याणी में नैशनल इंस्टिटयूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) ने पिछले साल 25 अक्टूबर को एक मरीज में बंगाल स्ट्रेन को पहली बार पाया था। इस साल जनवरी तक यह बड़ी तादाद में फैल गया। असोसिएट प्रोफेसर श्रीधर चिन्नास्वामी ने कहा कि बंगाल स्ट्रेन कथित डबल म्यूटेंट से अलग है। यह देश के कई हिस्सों में फैल गया है।

क्या है ट्रिपल म्यूटेशन

भारत में इससे पहले डबल म्यूटेशन वाला वेरिएंट मिला था, यानी जिसमें कोरोना के दो अलग स्ट्रेन मिल गए हों। अब मिले ट्रिपल म्यूटेशन वेरिएंट में कोरोना के तीन स्ट्रेन मिल गए हैं।

भारत की 10 लैब में वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग

विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस में हो रहे बदलाव (म्यूटेशन) की वजह से कई देशों में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ट्रिपल म्यूटेशन वाला वायरस कितना घातक है और कितनी तेजी से फैलता है? इसको लेकर फिलहाल, भारत की 10 लैब में वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग (कोरोना के नए स्ट्रेन का पता) हो रही है।

एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, B.1.618 वैरिएंट में एक बदलाव वैसा ही है, जैसा ब्राजील और साउथ अफ्रीकी वैरिएंट में देखने को मिला था। इस बदलाव को E484K कहते हैं। एक रिसर्च के अनुसार, इस बदलाव से वायरस टीकों या पिछले इन्‍फेक्‍शन से पैदा हुई एंटीबॉडी का मुकाबला करने में सक्षम हो जाता है। E484K म्यूटेशन एक प्रमुख इम्यून एस्केप वेरिएंट है, जो दुनिया भर में उभरते हुए वंशों में पाया जाता है।

बता दें कि ग्‍लोबल रिपॉजिटरी GISAID में भारत की ओर से सबमिट डेटा के अनुसार, पिछले 60 दिनों में जितने भी वैरिएंट सीक्‍वेंस किए गए हैं, उनमें से 12% सैम्‍पल B.1.618 के हैं। यह तीसरा सबसे आम वैरिएंट है। सबसे ज्‍यादा 28% सैम्‍पल्‍स में B.1.617 वैरिएंट मिला है, उसके अलावा B.1.1.7 (यूके वैरिएंट) भी काफी सारे सैम्‍पल्‍स में पाया गया है।

गौरतलब है कि भारत में कोरोना के मामलों ने दुनिया भर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देश में महामारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1,86,927 हो गई है। अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,62,57,164 हो गई है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस में हो रहे म्यूटेशन की वजह से सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में साधुओं की हत्या में एक गिरफ्तार, कुदाल से काट दिया था गला

बिहार के मधुबनी के खिरहर स्थित ऐतिहासिक धरोहर नाथ धाम पर दो साधुओं की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। हरलाखी प्रखंड अंतर्गत आने वाले इस इलाके में मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) की रात दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। आरोपित का आपराधिक इतिहास खँगालने पर पता चला कि उसके चाचा ने वर्ष 2014 में तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र मंडल पर गोलीबारी की थी।

एसपी सत्यप्रकाश ने घटनास्थल पर जाकर मामले की छानबीन की थी और उसके बाद से ही पुलिस आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। पुलिस ने आरोपित दीपक चौधरी को बासोपट्टी स्थित ब्राह्मण टोल से धर-दबोचने में सफलता पाई है। पूछताछ में उसने हत्या का आरोप कबूल करते हुए कहा कि उसने अकेले ही इस घटना को अंजाम दिया था। उसने कहा कि ये मामला दानपेटी के रुपयों के विवाद से जुड़ा हुआ है।

दीपक चौधरी का कहना है कि दोनों साधुओं ने दानपेटी के रुपए में से उसे हिस्सा नहीं दिया था, इसीलिए उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या आरोपित ने बताया कि उसने दोनों साधुओं का सिर धड़ से अलग करने में 2 घंटे का समय लिया। फिर उसने दोनों शवों को अकेले घसीट कर 100 मीटर दूर भूसा घर में छिपा दिया। एक के सिर को मंदिर परिसर में ही गड्ढा खोद कर छिपा दिया। फिर बाल्टी में पानी भर कर उसने घटनास्थल पर लगे खून को साफ़ किया।

इसके बाद वो उनमें से एक साधु की ही साइकल से कुदाल लेकर अपने घर गया और वहाँ दोनों चीजें छिपा दी, जबकि वो खुद बासोपट्टी के ही एक मंदिर में जाकर छिप गया। तीसरे साधु नारायण मुखिया का बयान ले लिया गया है और आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। 3 साधुओं में से जिन 2 की हत्या हुई, वो बाहरी थे। जबकि गाँव के एक साधु जो साथ में सोए हुए थे, वो बच गए। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

‘मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन’ ने इस मुद्दे को उठाते हुए खिरहर थाना क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर चिंता जताई और आशंका व्यक्त की कि इस दोहरे हत्याकांड में और भी लोगों का हाथ हो सकता है, पुलिस को बारीकी से जाँच करने की ज़रूरत है। संगठन के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री राघवेंद्र रमण ने कहा कि मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक व्यक्ति को चाकू मारा गया था, जिस मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।

‘दैनिक भास्कर’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

मधुबनी में दोनों साधुओं के शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। बुधवार को शाम 5 बजे के बाद दोनों का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। परिवार व गाँव-समाज के लोगों का कहना है कि दोनों ही साधु हँसमुख थे और उनका हँसता चेहरा अब भी उनके जेहन में है। एक साधु हीरादस का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव सिरियापुर में बछराजा नदी के किनारे हुआ। दूसरे मृतक भगवानपुर निवासी आनंद मिश्र का अंतिम संस्कार भी भगवानपुर में हुआ।

उधर ऑपइंडिया ने इसी इलाके में विश्वामित्र आश्रम विशौल के महंत ब्रजमोहन दास पर हमले का मुद्दा भी उठाया था। इस घटना से 2 रात पहले उनके मठ पर हमला हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस-प्रशासन से साधु-संतों की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। हरलाखी थानाध्यक्ष प्रेमलाल पासवान ने मठ में दो चौकीदारों की नियुक्ति कर दी है। महंत के आवदेन के आधार पर जाँच भी शुरू कर दी गई है।

शाहनवाज दूत है, कोरोना मरीजों के लिए बेच डाला कार: 10 महीने पुरानी खबर मीडिया में फिर से क्यों?

कोई व्यक्ति एक ही चीज को दो बार कैसे बेच सकता है? यह संभव है! गंगा-जमुनी तहजीब और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारतीय मीडिया संस्थान इस तरह का कमाल करते रहते हैं। ऐसे में मुंबई के मलाड में रहने वाले शाहनवाज शेख को ‘ऑक्सीजन मैन’ का नाम दे दिया गया और जून 2020 में जिस चीज के लिए उनके बारे में खबरें छपी थीं, इसके 10 महीने बाद अप्रैल 2021 में भी उसी खबर को दोबारा चला कर उनकी पीठ थपथपाई गई।

सबसे बड़ी बात तो ये कि ‘न्यूज़ 18’, ‘इंडिया डॉट कॉम’ और ‘इंडिया टुडे’ जैसे पोर्टलों ने न सिर्फ इस खबर को फिर से चलाया, बल्कि ये भी नहीं बताया कि यह एक पुरानी खबर है। अब जब कोरोना की दूसरी लहर से लोग परेशान हैं और कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की बात सामने आ रही है, ऐसे में इस खबर को दोबारा चलाने के पीछे क्या कारण था, वो समझ से परे है। खासकर, ये छिपा कर कि ये अब की खबर नहीं है।

‘इंडिया टाइम्स’ ने पिछले साल चलाई थी ये खबर, ‘लोकमत’ ने अब चलाई

जून 2020 में भी भारत में कोरोना के कारण स्थिति गंभीर थी और संक्रमितों की संख्या देश भर में लगातार बढ़ रही थी। तभी शाहनवाज शेख का बयान ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे मीडिया संस्थानों ने चलाया था, जिसमें वो कहते दिख रहे थे कि उन्हें कोविड-19 मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में आर्थिक समस्या आ रही थी, इसीलिए उन्होंने अपनी ‘ड्रीम कार’ कस्टमाइज्ड फोर्ड एंडेवर को बेच दिया।

शाहनवाज शेख ने बताया था कि इन रुपयों से उन्होंने कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर्स का इंतजाम किया। तब प्रकाशित हुई ख़बरों के अनुसार, शाहनवाज के एक दोस्त थे, जो उनके बिजनेस पार्टनर भी थे। दोनों बचपन से दोस्त थे और साथ काम करते थे। दोस्त की एक कजन बहन मुम्ब्रा में रहती थी, जो 6 महीने की गर्भवती थी। एक दिन अचानक उसे साँस लेने में तकलीफ होने लगी। उसका पति उसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहता था।

‘न्यूज़ 18’ ने चालाकी से छिपाई कार बेचने की तारीख़, फिर से चलाई खबर

जून-जुलाई 2020 में शाहनवाज द्वारा बताई गई कहानी की मानें तो दोस्त की बहन को ऑटो रिक्शा से कई अस्पतालों में ले जाया गया लेकिन बेड नहीं मिला। किसी में ऑक्सीजन नहीं था, किसी में बेड्स नहीं थे, किसी में वेंटिलेटर नहीं था तो किसी ने कोरोना टेस्ट कराने को कहा। उसकी मौत हो गई और इसके बाद शाहनवाज लोगों को बचाने लगे। उन्होने अपनी SUV को एम्बुलेंस बना दिया। एक टीम बनाई और लॉकडाउन में लोगों की मदद की, उन्हें भोजन दिया।

‘इंडिया डॉट कॉम’ ने तो ऐसे चलाया जैसे ये कल की ही खबर हो

‘न्यूज़ 18’ की हालिया खबर में भी यही कहानी दोहराई गई है और कहा गया है कि शाहनवाज पिछले साल से ही एक बड़े कोरोना वॉरियर रहे हैं। बताया गया है कि अब तक उन्होंने 4000 लोगों की मदद की है और रोज उन्हें 500-600 फोन कॉल्स आते हैं। जबकि, ‘इंडिया डॉट कॉम’ की खबर में बताया गया है कि ‘कुछ ही दिनों पहले’ शाहनवाज ने अपनी कार बेच कर 160 ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की।

‘इंडिया टुडे’ ने भी इसी तरह ‘कुछ दिन पहले’ SUV बेचने की बात की और इस खबर को प्रकाशित किया। अब चैनल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से माफ़ी माँगते हुए कहा है कि ये एक पुरानी खबर है, जो फिर से चल रही है। लेकिन साथ ही ‘इंडिया टुडे’ ने जोड़ा, “लेकिन हमें निश्चित रूप से ऐसे और भी लोगों की ज़रूरत है।” लेकिन, इस स्टोरी को डिलीट नहीं किया गया है और ये साइट पर मौजूद है।

पिछले साल ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द क्विंट’ ने शाहनवाज के हवाले से ही बनाया था वीडियो

इसी खबर में ये भी लिखा है कि शाहनवाज ने पिछले वर्ष भी अपनी कार बेच दी थी। भला एक ही SUV को 2 बार एक ही काम के लिए कैसे बेचा जा सकता है? खबर में इसके आगे शाहनवाज शेख के पिछले साल के बयान को ही हूबहू छाप दिया गया है। पिछले साल भी ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के वीडियोज में शाहनवाज ही एक दीवार के बैकग्राउंड के साथ अपनी कहानी बता रहे थे। बीच-बीच में उनके ‘सामाजिक सेवा कार्यों’ का स्लाइडशो चलाया गया था।

13 मरीज अस्पताल में जल कर मर गए, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा – ‘यह नेशनल न्यूज नहीं’

महाराष्ट्र में शुक्रवार सुबह अस्पताल में आग लगने से 13 कोविड मरीजों की दर्दनाक मौत को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि यह राष्ट्रीय खबर नहीं है। मीडिया को ये बयान देते समय देश के सर्वाधिक कोरोनावायरस प्रभावित राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बिना मास्क लगाए नजर आए।

यह घटना शुक्रवार तड़के मुंबई के विरार स्थित विजय वल्लभ अस्पताल में एसी में शॉर्ट-शर्किट की वजह से आग लगने से हुई, जिससे आईसीयू में इलाज करा रहे 17 में से 13 मरीजों की मौत हो गई।

मुंबई में अस्पताल में 13 लोगों की मौत नेशनल न्यूज नहीं: राजेश टोपे

मुंबई के विजय वल्लभ कोविड केयर हॉस्पिटल में 13 लोगों की आग लगने से मौत के मामले में सवाल पूछे जाने पर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, ”हम ऑक्सीजन के बारे में बात करेंगे, रेमडेसिविर के बारे में बात करेंगे, यह घटना जो घटी है वो नेशनल न्यूज नहीं है। लेकिन राज्य सरकार की तरफ से पूरी मदद करेंगे।”

पत्रकारों द्वारा ये पूछे जाने पर कि 13 लोगों की मौत को वह नेशनल न्यूज नहीं मान रहे हैं तो टोपे ने कहा, ”राज्य सरकार की हद तक हम पूरी मदद करेंगे। उन्हें राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए और महानगरपालिका की तरफ से 5 लाख रुपए दिया जाएगा, 10 लाख रुपए की मदद दी जाएगी, जो नासिक में घटना घटी है, उसी टाइप में हम मदद करेंगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय वल्लभ अस्पताल एक निजी संस्था है, जो कोविड अस्पताल के रूप में कार्य करती है। टोपे ने कहा कि इस घटना की विस्तृत जाँच की जाएगी और रिपोर्ट 10 दिन में हासिल करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र में महज दो दिन के अंदर ही यह अस्पताल में दुर्घटना की वजह से ये कोविड मरीजों की मौत की दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में बुधवार (21 अप्रैल, 2021) को टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से 24 कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। यह घटना नासिक के जाकिर हुसैन हॉस्पिटल में घटी थी।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को राज्य में 67,013 नए केस मामले सामने आए। इस दौरान 62,298 मरीज ठीक भी हुए हैं और 568 मरीजों की मौत हो गई। राज्य में अभी 40,94,840 संक्रमित केस हैं, जिसमें 6,99,858 एक्टिव मामने हैं और कुल 33,30,747 मरीज ठीक हो चुके हैं।