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डॉ आमिर खान गिरफ्तार, ₹4000 का इंजेक्शन बेच रहा था ₹60000 में: कोरोना पीड़ितों को ठगने में MR इमरान भी शामिल

इंदौर के एक अस्पताल में कोरोना वायरस संक्रमण का फायदा उठा कर मरीजों को लूटने वाले दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें से एक डॉक्टर है तो एक मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव। जिन पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, उन्हें ही मरीजों की आपात स्थिति का फायदा उठा कर अपनी कमाई करते हुए दबोचा गया। अस्सिस्टेंट ड्यूटी डॉक्टर आमिर खान और MR इमरान खान के खिलाफ अंकिता यादव नामक महिला ने शिकायत की थी।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने कोरोना पीड़ित को दिए जाने वाले इंजेक्शन का न सिर्फ नकली बिल बनाया, बल्कि उसे 60,000 रुपए में बेचा। ये घटना मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित मयूर अस्पताल की है। खजराना TI दिनेश वर्मा ने बताया कि अंकिता यादव की बहन प्रीति कोरोना पीड़ित हो गई थीं और उन्हें इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ डॉक्टर ने एक अर्जेन्ट इंजेक्शन लिखा और उसे खरीद कर लाने को कहा।

उसी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर आमिर खान ने महिला से कहा कि वो इस इंजेक्शन को उपलब्ध करा सकता है। जब महिला ने बिल माँगा तो उसने इनकार कर दिया। फिर 60,000 रुपए का ऑनलाइन पेमेंट लेकर इंजेक्शन दे दिया। बाद में उसने महिला के मोबाइल नंबर पर बिल भेज दिया। पड़ताल में पता चला कि बिल पर छपा नंबर MR इमरान खान का था। बिल उसने ही छपवाए थे। वो लंबे समय से आमिर के साथ मिल कर ठगी के कारोबार में लगा था।

आमिर खान इससे पहले स्वर्णबाग कॉलोनी में हेल्थ प्लस नाम से क्लिनिक चलाता था। दोनों के खिलाफ जयदीप साधवानी नामक शख्स ने भी शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि वो लाइफ विजन नामक फर्म चलाते हैं, जो किसी व्यक्ति को सीधे दवाई नहीं देता। सिर्फ अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स को ही दवाई सप्लाई की जाती है। अंकिता यादव बिल लेकर उनके पास ही पहुँची थीं और साइन करने को कहा था।

लेकिन, उन्होंने भाँप लिया कि वो एक फर्जी बिल था। उन्होंने नंबर पर कॉल किया तो इमरान ने बताया कि वो इन्फोबेल में कार्यरत है। अंसार खान का बेटा आमिर सिल्वर कॉलोनी का रहने वाला है, जबकि जबकि बाबू खान का बेटा इमरान शाहीबाग का निवासी है। जिस इम्युनोसीन अल्फा इंजेक्शन को वो 60,000 में बेचते थे, उसकी सामान्य कीमत 4000 रुपए है। मयूर अस्पताल इंदौर के रोतला रिंग रोड पर स्थित है।

अम्मी कोविड वॉर्ड में… फिर भी बेहतर बेड के लिए इंस्पेक्टर जुल्फिकार ने डॉक्टर का सिर फोड़ा: UP पुलिस से सस्पेंड

प्रयागराज के एक अस्पताल में एक कोरोना मरीज को भर्ती कराने के लिए बेड नहीं मिला तो उसके परिजनों ने एक डॉक्टर की ही पिटाई कर डाली, जिसके बाद विरोधस्वरूप अन्य डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए। ये बवाल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कोविड-19 लेवल थ्री स्वरूपरानी अस्पताल (SRN Hospital) में हुआ। शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को तड़के सुबह 3 बजे कोरोना संक्रमित मरीज के परिजनों और डॉक्टर के बीच झड़प हुई।

कोरोना पीड़ित एक बुजुर्ग महिला थी, जिनकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए बेटे जुल्फिकार ने एक डॉक्टर की पिटाई कर दी। जुल्फिकार प्रतापगढ़ में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है। हालाँकि, अपने डॉक्टर को पिटते देख कर अस्पताल के बाकी कर्मचारी भी उग्र हो गए और उन्होंने इंस्पेक्टर जुल्फिकार की भी जम कर पिटाई की, जिससे वो अधमरा हो गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उक्त इंस्पेक्टर को सस्पेंड करने का आश्वासन दिया है।

इंस्पेक्टर के साथ उसके दो अन्य भाई भी डॉक्टर की पिटाई में शामिल थे। अस्पताल कर्मियों ने उनकी भी धुनाई की। इसके बाद डॉक्टर और मेडिकल कर्मियों ने हड़ताल कर दिया, जिससे अस्पताल में हाहाकार मच गया। उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल कोरोना के 2,59,810 मामले हैं, जिनमें से 16,988 (6.53%) प्रयागराज में ही हैं। लखनऊ में 54,967 (21.15%) सक्रिय मामलों के बाद राज्य में प्रयागराज का ही स्थान है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे और उन्होंने आक्रोशित डॉक्टरों को शांत कराया। इंस्पेक्टर को तत्काल सस्पेंड कर के उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर त्वरित विधिक कार्रवाई करने का आश्वासन वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया, लेकिन इसके बाद भी जूनियर डॉक्टर नहीं माने और हड़ताल जारी रखा। सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की हालत खराब है और व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है।

इंस्पेक्टर जुल्फिकार की अम्मी अप्रैल 18 से ही अस्पताल में भर्ती थीं और कोरोना पॉजिटिव आने के कारण उन्हें कोविड वॉर्ड में भर्ती कर दिया गया। जबकि इंस्पेक्टर अपनी अम्मी के लिए बेहतर वॉर्ड में बेड चाहता था। इसी बात को लेकर डॉक्टर के साथ बहस हुई और जुल्फिकार समेत तीनों भाइयों ने मिल कर डॉक्टर को ग्लूकोज चढ़ाने वाले स्टैंड से इतना मारा कि उनका सिर फट गया। IG केपी सिंह स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं।

अस्पताल के EMO डॉक्टर सूर्यभान कुशवाहा समेत सभी डॉक्टरों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के दौर में वे लोग अपनी जान की परवाह न करते हुए काम कर रहे हैं, लेकिन तीमारदारों द्वारा जिस तरह मारपीट की जा रही है, इससे उनमें भय का माहौल पैदा हो रहा है। सिटी एसपी दिनेश सिंह भी कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 4 पुलिसकर्मी मौके पर थे, जिन्होंने डॉक्टर को नहीं बचाया।

थरूर और पवार ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की ‘मौत की खबर’ फैलाई, बाद में डिलीट किए ट्वीट्स

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को श्रद्धांजलि दे दी! शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा, “पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के गुजर जाने से मैं बेहद दुःखी हूँ। मैं उनके साथ अपनी कई सकारात्मक बातचीत को याद करता हूँ। एक बार उन्होंने और दिवंगत केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे BRICS की बैठक के लिए मॉस्को जाने वाली संसदीय समिति का नेतृत्व करने को कहा था।”

‘न्यूज़ 18’ ने चलाई सुमित्रा महाजन के ‘निधन’ की खबर

दरअसल, ‘न्यूज़ 18’ ने मध्य प्रदेश के इंदौर से लगातार 30 वर्षों तक सांसद रहीं सुमित्रा महाजन के निधन की खबर चलाई थी। चैनल ने गुरुवार (अप्रैल 22, 2021) को रात 11:19 बजे ये खबर चलाई, जिसे बाद में डिलीट कर लिया गया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं सुमित्रा महाजन को NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी ‘भावपूर्ण श्रद्धांजलि’ देते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक क्षति करार दिया।

वहीं महाराष्ट्र के सुपर CM कहे जाने वाले शरद राव पवार ने भी ट्विटर पर लिख डाला कि उन्हें ‘सुमित्रा महाजन के निधन’ का दुःख है और परिजनों को शक्ति मिले, ऐसी वो कामना करते हैं। पत्रकार रुबिका लियाकत ने भी लिखा, “सुमित्रा महाजन नहीं रहीं! ॐ शांति।” इसी तरह सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी। हालाँकि, अधिकतर ने बाद में अपने ट्वीट्स डिलीट कर लिए। अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है।

मध्य प्रदेश में भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बताया है कि ‘ताई’ एकदम स्वस्थ हैं और साथ ही उनकी लंबी उम्र की भी कामना की है। इसके बाद थरूर ने अपने ट्वीट डिलीट करते हुए विजयवर्गीय को धन्यवाद दिया और लिखा, “मुझे समझ नहीं आता कि किस चीज से दुष्प्रेरित होकर लोग इस तरह की बुरी ख़बरें फैलाते हैं। मैं सुमित्रा जी के लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना करता हूँ।”

थरूर ने लिखा कि उन्होंने एक स्रोत को विश्वसनीय समझते हुए उस पर भरोसा किया था, लेकिन अब वो ये जान कर खुश हैं कि सुमित्रा महाजन ज़िंदा हैं। उन्होंने लिखा कि वो अपनी बात को वापस लेते हुए भी खुश हैं। सुमित्रा महाजन के परिजनों ने भी किसी अफवाह पर विश्वास न करने की सलाह देते हुए कहा कि वो एकदम स्वस्थ हैं। उनके छोटे बेटे मंदार महाजन ने वीडियो जारी कर के बताया कि उनकी माँ की कोरोना रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है।

वहीं खुद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इन ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि आखिर न्यूज़ चैनल्स बिना इंदौर प्रशासन से पुष्टि किए हुए इस तरह की खबर कैसे चला सकते हैं? उन्होंने बताया कि उनकी भतीजी ने शशि थरूर के दावे का जवाब दिया है, लेकिन साथ ही पूछा कि इस तरह से सार्वजनिक रूप से घोषणा करने की कौन सी हड़बड़ी थी? बता दें कि उन्हें बस हल्का बुखार आया था, जिसके बाद उन्होंने कोविड टेस्ट कराया था।

13 कोरोना मरीजों की ICU में जल कर मौत: महाराष्ट्र के विजय वल्लभ अस्पताल में लगी भीषण आग

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र के अस्पतालों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार (23 अप्रैल, 2021) की सुबह मुंबई के विरार स्थित विजय वल्लभ अस्पताल में आग लगने से 13 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।

अस्पताल के सीईओ डॉ दिलीप जैन ने इस घटना की पुष्टि की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के आईसीयू में 17 मरीजों का इलाज चल रहा था। सुबह लगभग 3.15 बजे एयर कंडीशनर में शॉर्ट-सर्किट के कारण आग आग लगी। इस पर 5.30 बजे तक काबू पाया गया।

घटनास्थल पर मौजूद एक अन्य अधिकारी ने बताया, “आईसीयू वॉर्ड में एसी में ब्लास्ट होने के बाद आग लगी थी। आग लगने के बाद फायर ब्रिग्रेड, हॉस्पिटल स्टाफ और पुलिस ने जब मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करना शुरू किया, तब पता चला कि आईसीयू में इलाज करा रहे 17 में से 13 मरीजों की मौत हो चुकी है।”

PM मोदी ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है।

बताया जा रहा है कि विजय वल्लभ अस्पताल एक निजी संस्था है, जो कोविड अस्पताल के रूप में कार्य करती है। इस लापरवाही को लेकर अभी तक अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में बुधवार (21 अप्रैल, 2021) को टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से 24 कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। यह घटना नासिक के जाकिर हुसैन हॉस्पिटल में घटी थी। यहाँ अचानक टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से पूरे अस्पताल परिसर में धुँआ ही धुँआ हो गया था। इससे अस्पताल में भर्ती 24 मरीजों की मौत हो गई थी। ये सभी मरीज वेंटिलेटर पर थे। महाराष्ट्र के अस्पतालों में आए दिन आग लगने की घटनाओं ने तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना बेकाबू स्थिति में है। वहाँ लगातार नए केस बढ़ रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 67,013 नए केस दर्ज किए गए हैं। इस दौरान 62,298 मरीज ठीक भी हुए हैं और 568 मरीजों की मौत हो गई। राज्य में अभी 40,94,840 संक्रमित केस हैं, जिसमें 6,99,858 एक्टिव हैं और कुल 33,30,747 मरीज ठीक हो चुके हैं।

Remdesivir के नाम पर अकाउंट में पैसे मँगवा गायब हो रहे धोखेबाज, सिप्ला ने चेतायाः जानें ठगी से कैसे बचें

फार्मास्यूटिकल कम्पनी सिप्ला ने रेमडेसिविर (Remdesivir) को लेकर कुछ बेईमान लोगों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी के खिलाफ चेतावनी भरा नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में, सिप्ला ने लोगों से उन बेईमानों से सावधान रहने को कहा है, जिन्होंने फर्जी तरीके से सिप्ला लिमिटेड के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवा लिए हैं। नोटिस में कहा गया है कि ऐसे घोटालेबाज दवा की कथित सप्लाई के नाम पर खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए लोगों को गुमराह कर कर रहे हैं।

सिप्ला ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति कंपनी से जुड़े या अधिकृत नहीं हैं। कम्पनी ने कहा, ”अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है। हम उपभोक्ताओं को सिप्ला उत्पादों को केवल हमारे अधिकृत स्टॉकिस्ट और चैनल भागीदारों के माध्यम से लेने का आग्रह करते हैं।”

कंपनी ने बताया है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट से खुलासा हुआ कि घबराए लोगों ने बेईमानों को रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए पैसे दिए। जब हमने सोशल मीडिया को खँगालना शुरू किया तो हमें ऐसे लोगों के बारे में पता चला जो रेमडेसिविर इंजेक्शन का इंतजाम करने के नाम पर ठगे गए थे। हमें कुछ ऐसे ट्वीट मिले जिसमें कहा गया है कि ऐसे घोटाले उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से हो रहे हैं।

सौरभ तिवारी ने ट्विटर पर लिखा है कि उन्होंने रेमडेसिविर के लिए मुम्बई फोन किया। दूसरी ओर से व्यक्ति ने दो घंटे में इंजेक्शन का इंतजाम करने का दावा किया। उसने तिवारी से अपने खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा। शक होने पर जब तिवारी ने डिटेल चेक किया तो पाया कि नंबर मुम्बई का न होकर पश्चिम बंगाल का था और अकाउंट नम्बर किसी प्राइवेट बैंक का था।

एक और यूजर पूजा मेहता ने अपने कटु अनुभव के बारे में बताया है कि कैसे अभिषेक कुमार नामक एक शख्स ने उनके साथ 28000 रुपए की धोखाधड़ी की। उसने जाइडस फार्मास्यूटिकल का कर्मचारी होने का दावा किया था और टोसिलिजुआम्ब (Tocilizumab) का इंतजाम करने के नाम पर उससे 28 हजार रुपए ले लिए।

एक और यूजर ने केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को जवाब देते हुए आरोप लगाया है कि उसने अजय अग्रवाल नामक किसी व्यक्ति को रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए पैसे दिए थे और अब वह उसका फोन नहीं उठा रहा है।

एक और यूजर ज्योति ने आरोप लगाया है कि उसने इंजेक्शन के लिए किसी को 15000 रुपए दिए थे, लेकिन अब उसका नम्बर स्विच ऑफ है।

इसी तरह नचिकेता ने भी एक कहानी साझा करते हुए बताया है कि उसे सोशल मीडिया से एक नम्बर मिला, लेकिन उसे ट्रूकॉलर पर रेमडेसिविर फ्रॉड (Remdesivir fraud) के नाम पर सेव किया गया था।

खुद को ऐसी धोखाधड़ी से बचाने के तरीके

सबसे पहले, इंजेक्शन के लिए ऑनलाइन भुगतान न करें, खासतौर पर दवा मिलने से पहले। जैसा कि सिप्ला ने अपनी एडवायजरी में उल्लेख किया है, इंजेक्शन के लिए हमेशा अधिकृत वितरक के पास जाएँ। सिप्ला ने Tocilizumab [PDF] और रेमडेसिविर [PDF] दोनों के लिए अधिकृत वितरकों की सूची प्रदान की है, जिन्हें उनकी वेबसाइट से एक्सेस किया जा सकता है।

सोशल मीडिया मंचों पर बहुत सारे लिस्ट की भरमार हैं जो सत्यापित होने का दावा करते हैं। उनमें से किसी पर भरोसा करने से पहले, कृपया नम्बर पर कॉल करें और यह पता लगाने की कोशिश करें कि क्या वितरक की ऑनलाइन मौजूदगी है। जानकारी की दोबारा जाँच करें और भुगतान तभी करें जब दवा आपके हाथ में आ जाए।

ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ लोगों ने कुछ लोगों के लिए कुछ दवाओं की व्यवस्था की, लेकिन बाद में पैसे इकट्ठा किए और फोन बंद कर दिया। यह विश्वास हासिल करने के लिए पहले घोटाले करने वालों की एक बुनियादी रणनीति है और फिर पैसे लेकर भाग जाते हैं। लिहाजा विवरण का सत्यापन किए बिना दवा के लिए किसी को अग्रिम भुगतान न करें।

पंजाब में पाकिस्तान से आए 200 कोरोना पॉजिटिव, सिलचर एयरपोर्ट से बिना टेस्ट के ही भागे 300 यात्री

देश में कोरोना की रफ्तार बेकाबू होने के बाद राज्य सरकारें सख्त हो गई हैं। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सहयोग करने की जगह स्थिति को और भयावह बनाने में लगे हैं। असम के सिलचर से खबर है कि वहाँ एयरपोर्ट से 300 से ज्यादा यात्री बिना कोरोना टेस्ट कराए भाग गए। वहीं पंजाब में 200 ऐसे लोग मिले जो वैसाखी मनाने पाकिस्तान गए थे और अब कोविड पॉजिटिव हैं। इन पर मेडिकल टीम के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप है।

असम के सिलचर एयरपोर्ट पर हुई घटना पर अधिकारियों का कहना है कि फरार हुए यात्रियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। कथित तौतर पर सिलचर एयपोर्ट इतना बड़ा नहीं है कि वहाँ बड़ी संख्या में यात्रियों की कोविड-19 की जाँच हो सके। इसलिए एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों के लिए यह व्यवस्था सरकारी अस्पताल में की। लेकिन कुछ यात्री अस्पताल पहुँचने से पहले रास्ते में उतर गए।

डिस्ट्रिक्ट एडिशनल डिप्टी कमिशनर ने बताया कि 6 एयरक्राफ्ट से 690 यात्री एयरपोर्ट पर आए। उन्हें अस्पातल ले जाने के दौरान करीब 300 लोगों ने सिर्फ 500 रुपए के टेस्ट के लिए हल्ला मचाया। इसके बाद वह नियम का उल्लंघन कर भाग गए। केवल 189 का टेस्ट हुआ। इनमें 6 संक्रमित पाए गए। भागे गए सभी यात्रियों का डेटाबेस है और उन्हें ढूँढकर उन पर धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।

कुछ दिन पहले भारत के तीर्थयात्री बैसाखी मनाने वाघा बॉर्डर के जरिए लाहौर गए थे। दो दिन पहले जब ये लौटे तो इनका कोविड टेस्ट हुआ। इनमें से 200 संक्रमित पाए गए। अमृतसर में सिविल सर्जन डॉक्टर चरणजीत सिंह ने बताया कि पाकिस्तान से लौटे 816 श्रद्धालुओं में से 650 का कोविड-19 टेस्ट किया जा चुका है। इनमें 200 को संक्रमण की पुष्टि हुई है।

डॉ. चरणजीत ने कहा श्रद्धालुओं के मेडिकल टीम से दुर्व्यवहार की शिकायत के बाद जाँच बीच में रोकनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जाँच की जाएगी और शिकायत दर्ज की जाएगी। श्रद्धालु दो दिन पहले ही पाकिस्तान से लौटे हैं।

‘सॉरी, पता नहीं था कोरोना की दवाई है’: पुलिस स्टेशन के बाहर वैक्सीन की 622 डोज छोड़ गया चोर

हरियाणा के जींद के एक अस्पताल से चोरी हुई कोरोना वैक्सीन की 622 डोज मिल गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एक बाइक सवार सिविल लाइन पुलिस थाने के बाहर चाय की दुकान पर एक थैला छोड़ चला गया। जब इस खोला गया तो उसमें वैक्सीन की डोज थी। साथ ही एक माफीनामा भी था, जिस पर लिखा था, “सॉरी, पता नहीं था कोरोना की दवाई है।”

रिपोर्टों के अनुसार प्लास्टिक की बैग में कोवैक्‍सीन की 440 और कोविशील्‍ड की 182 शीशी थी। हालॉंकि इससे पुलिस की परेशानियों का अंत होता नहीं दिखता, क्योंकि अस्पताल से वैक्सीन की 1710 डोज चोरी हुई थी। अब पुलिस बचे हुए डोज की बरामदगी की कोशिश में लगी हुई है।

चोरी का यह मामला जींद जिले के पीपी सेंटर जनरल अस्पताल का है। स्टोर रूम से कोविशील्ड के 1270 और कोवैक्सिन के 440 डोज चोरी हो गए थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के बाद जिले में कोरोना का एक भी टीका बचा नहीं था।

चोर के द्वारा लिखा गया माफीनामा (फोटो : साभार रिपब्लिक)

चोरी के बाद सेंटर के इन्चार्ज ने कहा था, “मैं अपने मेन सेंटर को भी चेक करूँगा, जहाँ से पूरे जिले को सप्लाई जाती है। अधिकारियों को भी सूचित करूँगा।” जींद के स्‍वास्‍थ्‍य निरीक्षक राममेहर वर्मा ने बताया था कि रात के वक्त ताला तोड़कर वैक्‍सीन चोरी को अंजाम दिया गया। स्टोर रूम की आलमारी में रखीं कुछ फाइलें भी चोरी हुई थी। लेकिन वहीं रखी अन्य दवाइयों और 50 हजार रुपए को हाथ तक नहीं लगाया गया था।

इससे पहले राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक अस्पताल से वैक्सीन चोरी का मामला सामने आया था। वहॉं वैक्सीन की 320 डोज चोरी हुई थी। गौरतलब है कि 1 मई से 18 साल से अधिक की उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उससे पहले देश के कई हिस्सों से Ramdesivir की ब्लैकमार्केटिंग की खबरें आई हैं।

बंगाल में रैली नहीं, कोरोना पर हाई लेवल मीटिंग करेंगे PM मोदी; पर क्या आप जानते हैं रिव्यू मीटिंग में कितनी बार शामिल हुईं ममता

देश में कोरोना वायरस के गंभीर होते खतरे से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अधिकारियों और राज्यों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) एक हाई लेवल मीटिंग के लिए पश्चिम बंगाल की अपनी रैलियों को कैंसिल कर दिया है। वे बंगाल के मतदाताओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे।

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को चार रैलियाँ करेंगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि बीते 3 महीने में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्रियों की एक भी बैठक में ममता ने शिरकत नहीं की है। मार्च और अप्रैल में हुई ऐसी बैठकों में शिरकत करने की बजाए उन्होंने चुनाव प्रचार को तवज्जो दी।

पीएम मोदी ने ट्विटर के माध्यम से यह सूचना दी कि Covid-19 की परिस्थितियों को रिव्यू करने के लिए बुलाई गई एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के कारण वो 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल नहीं जा पाएँगे, लेकिन वर्चुअल माध्यम से इन रैलियों को संबोधित करेंगे। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल भाजपा के कार्यकर्ता और मतदाता पीएम मोदी की रैली को लेकर उत्साहित थे। किन्तु अब पीएम मोदी रैली में शामिल होने के लिए बंगाल नहीं पहुँच पाएँगे।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को शाम 5 बजे मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और कोलकाता के मतदाताओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे।

इसके अलावा आज (22 अप्रैल) भी पीएम मोदी देश में बढ़ती ऑक्सीजन की माँग और उसके अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करने लिए बुलाई गई एक बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में कैबिनेट और मुख्य सचिव समेत, विभिन्न मंत्रालयों, फार्मा क्षेत्र और नीति आयोग के सदस्य भी शामिल हुए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देश में पिछले कुछ दिनों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन 3300 मीट्रिक टन प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ा है। यह वृद्धि निजी और सार्वजनिक स्टील प्लांट्स, उद्योग और ऑक्सीजन निर्माताओं के सहयोग के कारण संभव हो सका है। इसके अलावा गैर-जरूरी उद्योगों में ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई है।

पीएम मोदी को बताया गया कि वर्तमान में 20 राज्यों की 6785 मीट्रिक टन प्रतिदिन की मेडिकल ऑक्सीजन की माँग के मुकाबले उन्हें केंद्र द्वारा 6822 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। बैठक में पीएम मोदी ने राज्यों को ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने ऑक्सीजन के सिलेंडरों, टैंकरों और दवाइयों के सुगम आवागमन के लिए रेलवे और भारतीय वायु सेना का उपयोग करने की बात भी की।

बैठक के बाद देश भर में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं;

  1. ऑक्सीजन लेकर जा रहे वाहनों के अंतरराज्यीय आवागमन पर किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
  2. किसी एक राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में स्थित ऑक्सीजन निर्माता अथवा सप्लायर पर अपनी आपूर्ति को उसी एक राज्य तक सीमित करने का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।
  3. ऑक्सीजन की आपूर्ति से संबंधित किसी भी वाहन पर विभिन्न शहरों का कर्फ्यू अथवा लॉकडाउन से संबंधित कोई भी प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
  4. छूट प्राप्त उद्योगों के अतिरिक्त अन्य उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई सरकार के आगामी आदेश तक प्रतिबंधित होगी।

पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के हालात चिंताजनक है। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था दबाव बढ़ता जा रहा है। संक्रमण कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है जिसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे।

बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी और किसान संक्रमित हुए तो केंद्र जिम्मेदार: वैक्सीन ले दोहरा ‘खेला’ कर रहे राकेश टिकैत

कोरोना की भयानक आपदा के बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता और स्वयंभू किसान नेता राकेश टिकैत का एक वीडियो सामने आया है। 3 लाख से ज्यादा संक्रमण के मामले आने के बावजूद टिकैत इसमें कोविड नियमों को ताक पर रखते हुए गाजीपुर बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करते दिख रहे हैं। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह कथित प्रदर्शनकारी एक-दूसरे के आस-पास बैठे हैं।  

खुद कोरोना वैक्सीन लगवा चुके ये वही टिकैत हैं, जिनका कहना है कि यदि प्रदर्शनकारी किसान संक्रमित होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। वहीं इफ्तार पार्टी को लेकर सवाल किए जाने पर वे कहते हैं कि सरकार ने 50 लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत दी है। वहाँ तो सिर्फ़ 22-35 लोग थे। कोई एक-दूसरे से नहीं मिला, न किसी ने हाथ मिलाया।

मालूम हो कि सार्वजनिक स्थल को घेर कर बैठने वाले प्रदर्शनकारी इस संकट की घड़ी में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली गाड़ियों की आवाजाही भी बाधित कर रहे हैं। इनका कहना है कि प्रदर्शनस्थल इनका घर बन गया है। अब वह इसे छोड़कर कहाँ जाएँ।

टिकैत ने प्रदर्शन न खत्म करने की बात कहते हुए कहा, “किसान अपने घर ही हैं। उन्हें कहाँ जाने को कह दें। क्या कोरोना यहाँ से फैल रहा है? हम पाँच महीने से हैं यहाँ, ये हमारा घर हो गया है… कई किसानों ने वैक्सीन ले ली है। लेकिन दूसरी डोज लेने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है। हमने अधिकारियों से यहाँ कैंप लगाने को कहा है।”

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बीच किसान आंदोलन खत्म न करने की जिद्द पर अड़े किसान नेता राकेश टिकैत खुद कोरोना वैक्सीन लगवा चुके हैं और बाकी किसानों के लिए कह रहे हैं कि अगर किसी किसान को कोविड हुआ तो उसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार होगी।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए टिकैत ने कुछ दिन पहले कहा था, “आंदोलन अगर खत्म हो जाए तो क्या देश से कोरोना खत्म हो जाएगा। वे हमारे गाँव हैं जहाँ हम 5 महीने से रह रहे हैं। अगर किसान कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। जब देश भर में COVID-19 के मामले बढ़ रहे हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इसके लिए भी किसान ही जिम्मेदार हैं?”

टिकैत ने आगे कहा कि अगर कोई बीमारी है, तो सरकार को इसका इलाज सुनिश्चित करना चाहिए और इसके लिए अस्पतालों का निर्माण करना चाहिए। राजनेता अन्य उद्देश्यों के लिए धन एकत्र कर रहे हैं। वे रैलियाँ कर रहे हैं और चुनाव लड़ रहे हैं।

बता दें कि ये दिल्ली का दुर्भाग्य है कि एक ओर पिछले 24 घंटे में यहाँ से 24 हजार नए मामले आए हैं, जगह-जगह लोग मेडिकल सुविधा के अभाव में तड़प रहे हैं और दूसरी ओर सीमा पर बैठकर राकेश टिकैत ऐसी इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं।

टिकैत का कहना है कि अगर देश में लॉकडाउन लगा तो किसान प्रदर्शन फिर भी चालू रहेगा। कोविड दिशा-निर्देश प्रदर्शन पर बैठकर फॉलो किए जाएँगे। इसके अलावा बीते दिनों किसान नेता राकेश टिकैत ने जम्मू जाने के दौरान कहा था कि कोरोना नियमों का पालन करते हुए आंदोलन को जारी रखा जाएगा। ये कोई शाहीनबाग नहीं है, जिसे कोरोना वायरस के नाम पर खत्म किया जा सकता है।

पाकिस्तान के जिस होटल में थे चीनी राजदूत उसे उड़ाया, बीजिंग के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट से ऑस्ट्रेलिया ने किया किनारा

चीन को बुधवार (21 अप्रैल 2021) को दो बड़े झटके लगे। एक पाकिस्तान में जहाँ वह लगातार दखल बढ़ा रहा है। दूसरा झटका वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के उसके मॅंसूबों को ऑस्ट्रेलिया ने दिया है।

पाकिस्तान के क्वेटा में कार बम विस्फोट में पाकिस्तानी तालिबान ने उस होटल को उड़ा दिया, जिसमें चीन के राजदूत ठहरे थे। हमले में 5 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 अन्य जख्मी हो गए। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की स्कॉट मॉरिसन सरकार ने चीन के साथ हुए ‘बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)’ से संबंधित समझौतों को रद्द कर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की प्रांतीय विक्टोरिया सरकार और चीन के नेशनल डेवलपमेंट एण्ड रिफॉर्म कमीशन के मध्य अक्टूबर 2018 और अक्टूबर 2019 में हुए थे। चीन ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को दुर्भावनापूर्ण और अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया है।

बुधवार (21 अप्रैल 2021) को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के साथ हुए चार समझौतों को रद्द करने की घोषणा की। इन चार समझौतों में से दो समझौते ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया प्रांत की सरकार ने किए थे, जो चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई से जुड़े थे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने कहा कि ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति और विदेशी संबंधों के प्रतिकूल थे। उन्होंने विदेशी संबंधों में स्थिरता को प्रमुख स्थान देते हुए कहा कि यह निर्णय ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और देश के विदेशी संबंधों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए है।

बीआरआई के तहत समझौतों को रद्द करने के ऑस्ट्रेलिया के निर्णय के बाद चीन नाराज हो गया है। ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय चीन और ऑस्ट्रेलिया के मध्य संभावित ट्रेड वॉर का कारण बन सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि का यह निर्णय बताता है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार चीन के साथ संबंधों को सुधारने के प्रति बिल्कुल भी ईमानदार नहीं है।

पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लेकर अपना रवैया अधिक स्पष्ट किया है। फिर चाहे वह चाइनीज कंपनी हुआवे को बैन करने की बात हो या फिर शिनजियांग और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकारों पर आवाज उठाने की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान समेत चीन के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा करने की माँग भी की थी। हालाँकि चीन से ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते तब से ही खराब हैं जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी के विषय में चीन की स्वतंत्र रूप से जाँच की माँग की थी।

जिस प्रकार से ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के बीआरआई से जुड़े समझौतों को रद्द करने के लिए अपने विदेशी संबंधों की स्थिरता की दुहाई दी, उसे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। भारत ने शुरू से ही चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अपनी दूरी बनाकर रखी। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत ही एकमात्र ऐसा बड़ा देश रहा है जिसने मुखरता से चीन की विस्तारवादी नीतियों की आलोचना की और इसके लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए।

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का ‘क्वाड’ समूह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों का सबसे बड़ा अवरोध बन सकता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया द्वारा चीन के साथ समझौतों को रद्द किया जाना हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नए सामरिक समीकरणों का निर्माण करेगा, जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।

क्या है बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव?

बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव अथवा वन बेल्ट-वन रोड चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस परियोजना के माध्यम से चीन अपने देश को एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से रोड और रेलवे लाइन के माध्यम से जोड़ना चाहता है। उसकी यह परियोजना प्राचीन सिल्क रूट का ही आधुनिक संस्करण है। हालाँकि चीन इसे व्यापार सुगमता और वैश्विक व्यापार के अवसरों की वृद्धि की एक पहल के रूप में प्रचारित करता है, किन्तु भारत समेत कई देश इसे चीन की एक गहरी साजिश बताते हैं। एक ऐसी साजिश जिसके तहत चीन अल्पविकसित और विकासशील देशों में विकास के नाम पर उन्हें भारी कर्ज में लाद देता है।