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बेवजह ऑक्सीजन बाँट कॉन्ग्रेस थपथपा रही थी अपनी पीठ, विदेश मंत्री ने खोल दी पोल

कोरोना संकट काल में मदद को लेकर यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे जयराम रमेश और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच ट्विटर पर बहस छिड़ गई है। बताया जा रहा है कि फिलीपींस दूतावास के आग्रह के बाद यूथ कॉन्ग्रेस की तरफ से ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद किए जाने को लेकर जयराम रमेश ने विदेश मंत्रालय पर तंज कसा है।

जयराम रमेश ने शनिवार (1 मई) को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भारतीय युवा कॉन्ग्रेस के प्रयासों के लिए मैं उनका धन्यवाद करना चाहूँगा। एक भारतीय नागरिक होने के नाते मैं यह सोचकर स्तब्ध हो गया हूँ कि अब विदेशी दूतावास से आने वाले एसओएस कॉल, विपक्षी पार्टी की युवा शाखा अटेंड कर रही है। विदेश मंत्रालय सो रहा है क्या।”

जयराम रमेश द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक दिन बाद यानी रविवार (2 मई) को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जयराम रमेश के ट्वीट का करारा जवाब देते हुए लिखा, ”विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस दूतावास से संपर्क कर पता लगाया था। वहाँ कोरोना का कोई भी मामला नहीं है, बेवजह आपूर्ति की जा रही है। आपको पता है कि सस्ती लोकप्रियता के लिए यह सब कौन कर रहा है। इस तरह से ऑक्सीजन का सिलेंडर बाँटना गलत है, वो भी तब जब जरूरतमंद लोग सिलेंडर के लिए परेशान हो रहे हैं।” एस जयशंकर ने आगे जोर देकर कहा कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी निम्न राजनीति कर रही है। इसके चलते ही वह जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर देने से इनकार कर रही थी।

उन्होंने आगे लिखा, “जयरामजी, विदेश मंत्रालय कभी नहीं सोता है। हमारे लोग दुनियाभर में हैं। हम जानते हैं कि कौन क्या करता है।”

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अपनी टिप्पणी के जरिए विवादों को हवा दी है। बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहाँ के अन्य राजनेताओं ने पिछले साल दिसंबर में भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद जयराम रमेश ने तर्क दिया था कि नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ कहा है, इसलिए भारतीय आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप भी उचित है।

जीत की आहट में कोरोना भूले, बंगाल-तमिलनाडु में TMC-DMK के कार्यकर्ता मना रहे जश्न: ECI के आदेश को ठेंगा

जिन 5 राज्यों में आज रविवार (मई 2, 2021) को चुनाव परिणाम आ रहे हैं, उनमें से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दो सबसे बड़े राज्य हैं। दोनों ही जगह से फिलहाल जीतती दिख रही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटा कर जश्न मनाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहाँ चेन्नई में पार्टी मुख्यालय के सामने ही DMK कार्यकर्ताओं की भीड़ जश्न मनाते देखी गई, वहीं कोलकाता के कालीघाट से TMC वालों की ऐसी ही हरकत करते हुए तस्वीरें आईं है।

तमिलनाडु में DMK सुप्रीमो स्टालिन ने अपील की थी कि कोई भी कार्यकर्ता या नेता जश्न मनाने के लिए सड़कों पर नहीं निकलें। लेकिन पार्टी के मुख्यालय पर ही उनकी इस सलाह को धता बताया जा रहा है। वहाँ जम कर पटाखे भी फोड़े गए। बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं पुरुष एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए दिखे। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी AIADMK ने भी अपने कार्यकर्ताओं को ऐसी ही सलाह दे रखी है।

वहीं कोलकाता के कालीघाट से भी ऐसी ही एक वीडियो आई, जिसमें तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थक जम कर नारेबाजी करते हुए पार्टी को मिली बढ़त का जश्न मना रहे हैं। चुनाव आयोग ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए पाँचों राज्यों के अधिकारियों से कहा है कि वो ऐसी प्रत्येक घटनाओं के मामले में FIR दर्ज करें। चुनाव आयोग ने जश्न मनाने की इन घटनाओं को लेकर इन राज्यों के मुख्य सचिवों को विशेष निर्देश दिए हैं।

पश्चिम बंगाल के ही आसनसोल से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ पार्टी का झंडा लेकर TMC कार्यकर्ता सड़कों पर जश्न मनाते हुए दिखे। बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट ने ECI को फटकारते हुए कहा था कि रैलियों की अनुमति देने के लिए उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। साथ ही 2 मई की मतगणना रोकने की भी चेतावनी दी थी। ECI हाई कोर्ट के इस बयान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया है।

चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान या इसके बाद होने वाले किसी भी प्रकार के जश्न पर पाबंदी लगा दी थी। सभी दलों से कहा गया था कि वो सड़क पर निकल कर भीड़ न जुटाएँ। देश में कोरोना वायरस संक्रमण की बढ़ती घटनाओं को लेकर चहुँओर से घिरे चुनाव आयोग की आलोचना कई विपक्षी दलों ने भी की थी। इन सबके बावजूद विभिन्न राज्यों में बढ़त में दिख रही पार्टी के कार्यकर्ता मानने को तैयार नहीं दिख रहे।

CM योगी ने 2 करोड़ श्रमिकों को दी सौगात: ₹2 लाख का सुरक्षा बीमा, आयुष्मान भारत से ₹5 लाख, बच्चों को निःशुल्क कोचिंग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को दो बड़ी सौगात दी। सीएम योगी की इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश के दो करोड़ मजदूरों को फायदा पहुँचेगा।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित पहली योजना के तहत राज्य के किसी भी श्रमिक की किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाने या उसका अंग-भंग हो जाने पर या स्थाई विकलांगता के मामले में उसे दो लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर मिलेगा। वहीं अब तक आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं हो पाए श्रमिकों को भी पाँच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मुहैया कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निःशुल्क खाद्यान वितरण की व्यवस्था की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निःशुल्क खाद्यान वितरण की व्यवस्था पाँच मई से शुरू होगी।

वहीं पिछले साल कोविड के दौरान योगी सरकार ने 40 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को रोजगार व अन्य सुविधाएँ मुहैया कराई थीं।

श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा और कोचिंग

राज्य के श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा मुहैया कराने की योजना का ऐलान भी किया गया। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालयों में शुरू होने जा रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के बच्चों को सीबीएसई आधारिक निःशुल्क आवासीय शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी।

सीएम योगी ने श्रमिकों के लिए एक और योजना की घोषणा करते हुए कहा कि श्रमिकों के बच्चों को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त में कोचिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

सीएम योगी ने कहा कि साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू के दौरान औद्योगिक इकाइयाँ चलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों पर श्रमिकों को संक्रमण से बचाने को उनके लिए सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनिंग, पल्स ऑक्सीमीटर आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वहाँ कोविड हेल्पडेस्क की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

वेंटिलेंटर पर कॉन्ग्रेस, TMC को ऑक्सीजन: ABP के चुनावी कवरेज पर भड़के यूजर्स, कहा- पीक पर असंवेदनशीलता

आपने कई बार देखा होगा कि क्रिएटिव होने के चक्कर में न्यूज चैनल कुछ ऐसा कर देते हैं जिससे न केवल उनका मजाक बनता है, बल्कि संवेदनाएँ भी आहत होती हैं। कभी टाइम मशीन में बैठकर कवरेज होती है तो कभी लाइव टीवी पर एंकर ही रॉकेट में उड़ने लगता है।

सामान्य दिनों में ये सब मीडिया चैनलों पर दिखना बेहद आम है। लेकिन कोविड जैसे संवेदशील समय में यदि इस तरह के प्रयास किए जाएँ तो थू-थू के अलावा कुछ नहीं मिलेगी। एबीपी के साथ कुछ यही हुआ है।

कोविड की गंभीरता को देखते हुए जहाँ कुछ चैनलों ने चुनावी कवरेज तक पर रोक लगा दी। वहीं एबीपी थोड़ा हटके दिखने के चक्कर में हर नैतिकता भूल गया। इस समय एबीपी के चुनावी कवरेज की कुछ क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

मास्क लगाकर इसमें एंकर को देख सकते हैं कि वो रुझानों का विश्लेषण कर रही हैं। देखा जा सकता है कि कैसे चुनावों को ऑक्सीजन से जोड़कर बंगाल के रुझान बताए गए। क्लिप में एंकर कहती हैं, “देश में ऑक्सीजन के लिए इस समय हाहाकार मचा हुआ है। तो अब ये सीटों की जो ऑक्सीजन है ये किसको मिली ये हम ग्राफिक्स के जरिए अपने दर्शकों को बता रहे हैं।”

इसके बाद क्लिप में पीछे देख सकते हैं कि ऑक्सीजन टैंकर प्लेन से बाहर आता है और एंकर कहती हैं, “इस ऑक्सीजन टैंकर से बीजेपी को बिलकुल ऑक्सीजन नहीं मिली है। सीटों की जो बात हो रही है वो टीएमसी को 194 सीटें मिल रही हैं और कॉन्ग्रेस के हाथ 4 सीटें आई हैं। कॉन्ग्रेस को देख लग रहा है कि वो वेंटिलेटर पर है। उन्हें बिलकुल ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। सीटों की ऑक्सीजन में टीएमसी बाजी मारती दिखाई दे रही है।”

एबीपी न्यूज की इस क्लिप को मशहूर कॉमेडियन सलोनी गौर ने अपने ट्वीट पर शेयर किया है। उन्होंने एबीपी की कवरेज पर हताशा दिखाते हुए कहा कि असंवेदनशीलता यहाँ पीक पर है। स्वाति भासीन नाम की यूजर ने एबीपी की इस क्लिप को देख कहा कि इन लोगों को लगता है कि देश में ऑक्सीजन की कमी एक मजाक है।

‘2 मई को नहीं हो चुनावी कवरेज’: रवीश कुमार ने दिया था ज्ञान, NDTV ठेंगा दिखा सुबह से चला रही दुकान

समाचार चैनल NDTV पहले से ही मोदी विरोधी पत्रकारिता के लिए कुख्यात है। इसके पत्रकार रवीश कुमार सोशल मीडिया से लेकर अपने चैनल तक पर भाजपा विरोधी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। जो रवीश कुमार कल तक डींगें हाँक रहे थे कि समाचार चैनलों को रविवार (मई 2, 2021) को आने वाले 5 राज्यों के चुनावी नतीजों को कवर नहीं करना चाहिए, लेकिन आज उनके ही चैनल पर केवल चुनाव की ही चर्चा है।

रवीश कुमार ने ‘भारत समाचार’ की तारीफ़ की थी और अन्य समाचार चैनलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो चुनाव की कवरेज न करें लेकिन इसकी आड़ में नैतिकता का भी दावा न करें। अपने फेसबुक पोस्ट में रवीश ने लिखा था, “अब सवाल आता है कि क्या चुनावी नतीजों को कवर करना चाहिए? मेरी राय में नहीं करना चाहिए। हमने जिन हुक्मरानों पर भरोसा किया उन्होंने सबको फँसा दिया। कितने परिवारों में कितने लोग खत्म हो गए। आपके हमारे प्रधानमंत्री ने संवेदना के दो शब्द नहीं कहे हैं। चुनाव आयोग भी दोषी है।”

रवीश कुमार ने अपनी राय बताते हुए स्पष्ट लिखा था कि किसी चैनल को चुनावी नतीजे के दिन कवर नहीं करना चाहिए और किसी नेता का इंटरव्यू नहीं चलाना चाहिए क्योंकि ये अब डिज़र्व नहीं करते हैं। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा के नेता/समर्थक भी खुद के लिए हॉस्पिटल में बेड्स का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी थी कि चुनावी नतीजों का कवरेज न हो। साथ ही लोगों को न्यूज़ चैनल ऑन न करने की सलाह भी दी थी।

रवीश कुमार ने की थी चुनावी नतीजों को कवर न करने की अपील

लेकिन, क्या खुद रवीश कुमार जिस चैनल में कार्यरत हैं वो उनकी बातों के हिसाब से चल रहा है? जवाब है – नहीं। NDTV पर चुनावी नतीजों की कवरेज हो रही है। खूब हो रही है। नीचे हम जो स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं, उनमें से एक NDTV के अंग्रेजी चैनल का है और एक हिंदी का। ‘NDTV इंडिया’ पर एंकर इस बात पर चटखारे लेते दिखे कि भाजपा पश्चिम बंगाल में 100 के पार जा पाएगी भी या नहीं।

NDTV के अंग्रेजी चैनल पर चुनावी नतीजों की कवरेज
NDTV की हिंदी चैनल पर भी चल रही चुनावी कवरेज

NDTV के इन दोनों चैनलों पर सुबह से ही चुनावी नतीजों के आँकड़े चल रहे हैं और साथ ही इसी पर बातचीत भी हो रही है। हाँ, बीच-बीच में कुछ अन्य ख़बरें दिखा दी जा रही हैं लेकिन आँकड़े लगातार प्रदर्शित हो रहे हैं। दूसरों को चुनावी नतीजों की कवरेज न करने की सलाह देने वाले रवीश कुमार की बात उनका अपना ही चैनल नहीं मानता? या फिर पश्चिम बंगाल में TMC को आगे देख कर उन्होंने मन बदल लिया? ये भी हो सकता है कि रवीश को लगता हो कि किसी को उनका दोहरा रवैया पता नहीं चलेगा।

कोरोना वैक्सीन फैक्ट्री को शिवसेना के गुंडों ने घेरा, पहले दो की धमकी: पूनावाला को ‘आक्रामक मुख्यमंत्रियों’ का भी फोन

देश में लगातार वैक्सीन की माँग बढ़ती जा रही है। इसी बीच, कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कोविड-19 की वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर अपने ऊपर भारी दबाव की बात कही है।

पत्रकार राहुल कंवल ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि अदार पूनावाला ने उन्हें वीडियो भेजे हैं, जिसमें शिव सेना के गुंडे उनकी फैक्ट्री के बाहर खड़े होकर उन्हें धमका रहे थे और वैक्सीन की माँग कर रहे थे।

द टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पूनावाला ने यह आरोप लगाया है कि वैक्सीन को लेकर भारत के कई शक्तिशाली लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सब भार उनके कंधों पर पड़ रहा है, जबकि यह काम उनके अकेले के वश का नहीं है।

केंद्र सरकार से सिक्योरिटी मिलने के बाद पहली बार इस बारे में बात करते हुए पूनावाला ने बताया कि भारत के पावरफुल लोग आक्रामक रूप से कॉल करके कोविशील्ड वैक्सीन की माँग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास भारत के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, व्यावसायिक लोगों के आक्रामक फोन आ रहे हैं। सब के सब उन्हें जल्द से जल्द कोविशील्ड की आपूर्ति के लिए कह रहे हैं।

वहीं, पूनावाला ने इंग्लैंड में अपने बिजनेस पार्टनर के साथ इसको लेकर बैठक की। उन्होंने शनिवार (1 मई) रात को बताया, “इंग्लैंड में हमारे सभी साझेदारों और हितधारकों के साथ एक बैठक हुई। इस बीच, COVISHIELD का उत्पादन पुणे में पूरे जोरों पर है। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि वो वैक्सीन के निर्माण के विस्तार की योजना के साथ लंदन आए हैं। जल्द ही भारत वापस लौटूँगा।”

इसके पहले 40 वर्षीय पूनावाला ने बताया था कि वह दबाव के चलते वह अपनी बेटी और पत्नी के साथ लंदन आ गए। एसआईआई के प्रमुख ने कहा, ”मैं यहाँ ज्यादा समय तक इसलिए रुका हूँ, क्योंकि मैं उस स्थिति में फिर से नहीं जाना चाहता। सब कुछ मेरे कंधे पर आ गया है, लेकिन मैं अकेले कुछ नहीं कर सकता। मैं ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहता, जहाँ आप सिर्फ अपना काम करने की कोशिश कर रहे हों और सिर्फ इसलिए कि आप हर किसी की जरूरत को पूरा नहीं कर सकते, आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि बदले में वे क्या करेंगे।”

मालूम हो कि कोविशील्ड पहली वैक्सीन है, जिसे डीसीजीआई ने कोरोना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी। कोविशील्ड का उत्पादन दुनिया की वैक्सीन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रही है। भारत में जारी टीकाकरण में अभी कोविशील्ड व भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन को ही मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। 

दरअसल, कंपनी ने वैक्सीन ब्रिटेन सहित 68 देशों को निर्यात करना शुरू कर दिया था, लेकिन इसी दौरान भारत में कोरोना से स्थिति खराब होने लगी। पूनावाला ने इंटरव्यू में कहा, ”हम वास्तव में सभी की मदद करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि भगवान भी पूर्वानुमान लगा सकते थे कि ऐसा होने वाला था।”

अदार पूनावाला ने ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कोविशील्ड की कीमत को बढ़ाए जाने के आरोप को नकारते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस वैक्सीन को दुनिया भर में सबसे सस्ती वैक्सीन बताया है। उन्होंने कहा, ”हमने मुनाफाखोरी करने के बजाय जो भी बेहतर हो सकता था, वह किया है।”

बता दें कि हाल ही में पूनावाला को केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा भी मुहैया करवाई है। अब से पूनावाला की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की होगी। सरकार का यह फैसला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र के बाद आया है। पत्र में प्रकाश कुमार सिंह ने लिखा था कि पूनावाला को कई ग्रुप की तरफ से धमकी मिल रही है।

जब से केंद्र सरकार ने टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा की है, भारत में बनने वाली वैक्सीन की कीमतों को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल कुछ राज्य सरकारों ने ही बार-बार वैक्सीन की कीमतों को अधिक बताया। ऐक्टिविस्ट, सिनेमा स्टार और सोशल मीडिया सेलेब ने भी क़ीमतों पर बयान दिए हैं, जिन पर काफी लंबी बहसें हुई हैं। कुछ ऐक्टिविस्ट तो यह माँग भी उठा चुके हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट हर भारतीय को मुफ़्त में वैक्सीन दे।

भाई राहुल के रास्ते प्रियंका गाँधी: 200 यूनिट फ्री बिजली, ₹2000 गृहिणी सम्मान, 5 लाख नौकरी… सब फेल

2021 विधानसभा चुनावी नतीजों के मद्देनजर मतगणना शुरू हो गई है। शुरुआती रुझानों में असम में लगातार NDA गठबंधन ने बढ़त बनाई हुई है। वहीं यूपीए बहुमत से बहुत पीछे चल रही है। ताजा अपडेट्स में एनडीए 67 सीटों पर आगे हैं वहीं यूपीए 39 सीट तक बढ़त बना पाई है।

दिलचस्प बात यह है कि असम वह राज्य है जहाँ कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी ने 2 दिवसीय दौरे पर 6 रैलियाँ बैक टू बैक कीं। प्रियंका गाँधी ने दौरे के पहले दिन जोरहाट, नजीरा और खुमतई में रैली की। फिर अगले दिन उन्होंने गोलाघाट जिले के सरूपथार और नागाँव के कलियाबोर में रैली की। उनकी अंतिम रैली श्रीमंत शंकरदेवा की जन्मस्थली बाताद्रव में हुई।

मालूम हो कि केवल यही 6 रैलियाँ प्रियंका गाँधी ने चुनाव के मद्देनजर नहीं की थी, बल्कि 1-2 मार्च को भी प्रियंका गाँधी असम में बैठकें कर चुकी थीं। 2 मार्च को तेजपुर पहुँच उन्होंने राज्य की जनता को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देना का वादा किया था। 

उन्होंने ये भी कहा था कि इस कदम से जनता के 1400 रुपए बचेंगे। प्रियंका ने कहा कि यदि उनकी सरकार आई तो राज्य में  सीएए लागू नहीं होने दिया जाएगा और कम से कम 5 लाख सरकारी नौकरियाँ निकाली जाएँगी। 

राज्य की महिलाओं को रिझाने के लिए प्रियंका गाँधी ने 2000 रुपए हर महीने गृहणियों को भी देने का ऐलान किया। वहीं चाय के बागान में काम करने वालों के लिए ऐलान किया कि उन्हें 365 रुपए वेतन दिया जाएगा।

इन वादों के अलावा प्रियंका गाँधी ने अपनी छाप छोड़ने के लिए चाय काे बागान में मजदूरों के साथ टोकरी माथे पर लगाकार चाय की पत्तियाँ भी तोड़ीं। सोशल मीडिया पर उनकी ये तस्वीरें बहुत वायरल हुईं।

लेकिन, बाद में रॉबर्ट वाड्रा के कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद 3 अप्रैल को प्रियंका गाँधी ने ऐलान कर दिया कि स्थिति के मद्देनजर असम, तमिलनाडु और केरल में अपनी रैलियाँ कैंसिल कर रही हैं।

उन्होंने अपने पति के कोविड पॉजिटिव होने की जानकारी देते हुए सबसे माफी माँगी और अपने पार्टी प्रत्याशियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी प्रत्याशी राज्य में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और कॉन्ग्रेस विजयी होगी।

असम चुनाव

उल्लेखनीय है कि असम की 126 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में 82.04 फीसद वोट किए गए। कॉन्ग्रेस ने जहाँ नए-नए वादों पर इन चुनावों को लड़ा। वहीं भाजपा ने अपने कामों को गिना कर वोट माँगे। बता दें कि बीजेपी इस बार असम गण परिषद, UPPL, GSP के साथ गठबंधन में है, जबकि कॉन्ग्रेस के साथ AIUDF, BPF, CPI (M), CPI, CPI (ML) जैसी पार्टियाँ हैं।

सड़क के रास्ते बढ़िया अस्पताल जाने से आजम खान का इनकार: कोरोना संक्रमित हैं, UP पुलिस रात में एंबुलेंस लेकर आई थी

कोरोना संक्रमित समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान ने इलाज के लिए लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) जाने से इनकार कर दिया। सीतपुर जेल में बंद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को शुक्रवार (29 अप्रैल) को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था, जिसके बाद उन्हें जेल के अंदर ही एक अलग बैरक में आइसोलेट कर दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला कारागार में बंद कोरोना संक्रमित पाए गए अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान को इलाज के लिए जब लखनऊ के केजीएमयू ले जाने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ एंबुलेंस जेल के गेट पर पहुंची थी लेकिन आजम खान ने जाने से साफ इनकार कर दिया।

कोरोना संक्रमित आजम खान ने लखनऊ जाने से किया इनकार

रविवार रात को कोरोना संक्रमित आजम खान को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाना था। इसके लिए रात करीब 9 बजे जेल के मुख्य गेट पर एंबुलेंस सहित उनकी सुरक्षा में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।

लेकिन रात करीब 1 बजे आजम खान ने अपनी तबीयत में सुधार बताते हुए लखनऊ जाने से मना कर दिया। इसके बाद जेल के बाहर खड़ी एंबुलेंस पुलिस बल समेत वापस लौट गई।

आजम खान को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले जाने के वास्ते पुलिस अधिकारी उन्हें काफी देर तक समझाते रहे। लेकिन आखिरकार आजम खान ने सड़क के रास्ते लखनऊ जाने से इनकार कर दिया।

इसके बाद आजम खान को सीतापुर जेल में ही आइसोलेशन में दोबारा रखा गया। सपा सांसद ने लिखित में दिया कि वह ठीक हैं और अस्पताल में नहीं भर्ती होना चाहते हैं।

आजम खान को पिछले साल फरवरी में जेल भेजा गया था। उनके साथ उनका बेटा अब्दुल्ला आजम भी जेल में बंद है। दरअसल, 27 फरवरी 2020 को सांसद को उसके परिवार (पत्नी और बेटे) के साथ सीतापुर की जेल में शिफ्ट किया गया था।

बीते दिनों आजम की पत्नी व रामपुर सदर सीट से विधायक तंजीन फातिमा को जमानत मिल गई थी। वहीं, 80 से अधिक मुकदमों में दोषी पाए गए आजम और उसके बेटे को जमानत नहीं मिल पाई है।

बंगाल में BJP और TMC में कड़ी टक्कर: नंदीग्राम में ममता बनर्जी को पछाड़ आगे चल रहे शुभेंदु अधिकारी

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए मतगणना शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में आज (मई 2, 2021) शाम तक फैसला हो जाएगा कि किसकी सरकार सत्ता में आएगी और किसे शिकस्त का मुँह देखना पड़ेगा।

शुरुआती रुझानों से हालाँकि कुछ भी कहना सही नहीं है। लेकिन इनसे एक तस्वीर साफ हो जाती है कि किस राज्य में कौन सी पार्टी का पलड़ा भारी है। सुबह 8 बजे से आज वोट की गिनती शुरू हुई है और तबसे आँकड़े लगातार बदल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में अब तक यही रुझान आए हैं कि इस समय भारतीय जनता पार्टी और टीएमसी में कड़ी टक्कर है। खबर लिखने तक बंगाल की 294 विधानसभा सीट में 172 सीटों को लेकर रुझान आ चुके हैं।

भाजपा यहाँ 79 सीटों पर लीड कर रही है वहीं टीएमसी भी 93 सीटों पर आगे है। यहाँ लेफ्ट अभी केवल 2 सीटों पर आगे हैं। रिपब्लिक टीवी के अनुसार सुबह के 9 बजकर 26 बजे तक नंदीग्राम में ममता बनर्जी 1400 वोट से शुभेंदु अधिकारी से पीछे थीं।

बात करें तमिलनाडु की तो 234 में से 172 सीटों पर रुझान आए हैं। ताजा आँकड़े बताते हैं कि यहाँ डीएमके 99 सीटों पर आगे है और AIADMK 72 सीटों पर लीड कर रही है।

असम की 126 विधानसभा सीटों में से 79 सीट को लेकर तस्वीर बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक यहाँ 50 सीट पर एनडीए आगे है जबकि यूपीए 25 सीटों पर लीड कर रही है। अन्य के खाते में 4 सीट आई है।

केरल की 140 में से 140 सीटों के रुझान आ गए हैं। इनमें एलडीएफ 86 और यूडीएफ 50 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी 1 सीट पर आगे है। पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर हुए चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझान आने लगे हैं। इनमें एनडीए 9 और यूपीए 5 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

केजरीवाल ने की बत्रा हॉस्पिटल में 12 मरीजों की मौत पर ‘सस्ती’ राजनीति, डॉक्टरों ने दिल्ली सरकार को ठहराया जिम्मेदार

कोरोना के कहर से परेशान दिल्ली को रविवार तब एक और खबर से झटका लगा जब महरौली स्थित बत्रा अस्पताल में 12 मरीजों की जान चली गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इन सभी मरीजों की मौत अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई।

ध्यान देने वाली बात ये है कि बत्रा अस्पताल ने शनिवार सुबह से ही ऑक्सीजन की कमी के बारे में जानकारी देना शुरू कर दिया था, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन कमी की खबर सामने आने के बाद भी कुछ नहीं किया गया और अंत में 12 मरीजों की जान चली गई।

बत्रा हॉस्पिटल के एक्जिक्युटिव डायरेक्टर ने एक वीडियो जारी किया, जिसे एनडीटीवी ने रविवार दोपहर 1:00 बजे रिपोर्ट किया। इस वीडियो में बत्रा हॉस्पिटल के एक्जिक्युटिव डायरेक्टर ये कहते सुनाई दिए कि उनके यहाँ ऑक्सीजन खत्म हो रहा है और महज कुछ सिलेंडर ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार उनकी मदद करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ऑक्सीजन टैंकर दूर था। उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल के पास केवल 10 मिनट का ऑक्सीजन बचा था।

जैसे ही एनडीटीवी ने ट्वीट किया, लगभग उसी समय आप एमएलए राघव चड्ढा ने ट्वीट किया कि अस्पताल में अगले 5 मिनट में ऑक्सीजन पहुँच रहा है। राघव चड्ढा ने दोपहर में 1 बजकर 16 मिनट पर ट्वीट किया था। हालाँकि राघव चड्ढा का यह वादा कि 5 मिनट में ऑक्सीजन अस्पताल पहुँच रहा है केवल झूठा वादा साबित हुआ। अगले दो घंटे में ऑक्सीजन अस्पताल नहीं पहुँचा, इसके बाद खबर आई कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों ने दम तोड़ दिया।

जैसे ही मरीजों की मौत की खबर आई, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 12 लोगों की मौत पर राजनीति खेलते हुए तुरंत ही एक ट्वीट किया। उन्होंने दिल्ली को ऑक्सीजन न मुहैया कराने का दोष केंद्र के सिर पर डाल दिया।

एक तरफ जहाँ ‘आप’ ने सारा दोष मोदी सरकार पर डाल दिया तो वहीं बत्रा हॉस्पिटल के एक डॉक्टर का वीडियो सामने आया जिसमें न्यूज 24 से बातचीत करते हुए उन्होंने मरीजों की मौतों और ऑक्सीजन की कमी के लिए पूरी तरह से अरविंद केजरीवाल सरकार को दोषी बताया।

वीडियो में, डॉक्टर ने खुलासा किया कि शनिवार को सुबह 7 बजे से नोडल अधिकारियों को अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए SOS कॉल किए जा रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि वह किस सरकारी अधिकारी के बारे में बात कर रहे हैं और अस्पताल दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार या फिर केंद्र सरकार के संपर्क था, तो डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल का केंद्र सरकार से कोई संपर्क नहीं है और वे अरविंद केजरीवाल सरकार के अधिकारियों के संपर्क में थे।

डॉक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य दिल्ली सरकार का राज्य का विषय है दिल्ली में निजी अस्पतालों का संचालन और नेतृत्व अरविंद केजरीवाल सरकार राज्य स्तर पर करती है न कि केंद्र सरकार। डॉक्टर ने कहा कि कोविड-19 महामारी शुरू हुए 14 महीने हो गए हैं और शुरुआत से ही, यह ज्ञात था कि कोविड-19 के उपचार के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता है।

डॉक्टर ने केजरीवाल सरकार से सवाल किया कि पिछले 14 महीनों में दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने की कितनी कोशिश की है। डॉक्टर ने कहा कि जो भी ऑक्सीजन दिल्ली सरकार को उपलब्ध कराई गई थी, यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी कि जिन अस्पतालों को जरूरत है वहाँ ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने फिर सरकार से अपील की लड़ना बंद करें और दिल्ली को “आत्मनिर्भर” बनने और उन प्लांट्स का निर्माण करने की जरूरत है, जो दिल्ली के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकें।

बत्रा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत दिल्ली सरकार ने जहाँ मोदी सरकार को दोषी ठहराने की पूरी कोशिश की है, वहीं बत्रा अस्पताल के अधिकारी मरीजों की मौत के लिए पूरी तरह दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।