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‘सरकार ने संकट में भी किया ऑक्सीजन निर्यात’- NDTV समेत मीडिया गिरोह ने फैलाई फेक न्यूज: पोल खुलने पर किया डिलीट

21 अप्रैल को भारत सरकार ने यह आरोप सिरे से खारिज कर दिया कि जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक भारत ने 9884 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया है। मीडिया की मुख्य धारा में भी यह रिपोर्ट दी जा रही है कि भारत ने 31 मार्च 2021 तक लगभग 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया है। NDTV, News18 और मनी कंट्रोल जैसे मीडिया समूहों ने भारत के ऑक्सीजन निर्यात से संबंधित तथ्यों को अनदेखा करके भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालाँकि, वास्तविक तथ्यों के सामने आने के बाद मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी।

20 अप्रैल 2021 को मनी कंट्रोल ने यह दावा किया कि 2021 के पहले तीन महीनों में भारत ने 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया। हालाँकि, मनी कंट्रोल ने यह नहीं बताया कि निर्यातित ऑक्सीजन मेडिकल ऑक्सीजन है या नहीं। इस कारण रिपोर्ट में ऑक्सीजन की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी।

मनी कंट्रोल की गुमराह करने वाली रिपोर्ट

ऐसी ही एक रिपोर्ट News18 के द्वारा शेयर की गई जिसमें मनी कंट्रोल की ही रिपोर्ट का जिक्र था। जल्दी ही ये रिपोर्ट्स सोशल मीडिया में शेयर होने लगीं जिससे भारत में जहाँ मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की समस्या सबके सामने है, चिंता की परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गईं।

News18 की रिपोर्ट
इस मामले पर संजय झा का ट्वीट

हालाँकि, ऑक्सीजन के निर्यात से संबंधित तथ्यों के सबके सामने आने के बाद मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी और सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी माँगी। मनी कंट्रोल के द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए माफीनामे में कहा गया कि भारत के ऑक्सीजन निर्यात से संबंधित रिपोर्ट को डिलीट कर दिया गया है क्योंकि इस रिपोर्ट से औद्योगिक ऑक्सीजन के निर्यात की गलत तस्वीर पेश हुई जिससे अनावश्यक चिंता उत्पन्न हुई। मनी कंट्रोल ने लिखा कि यह रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए थी। मनी कंट्रोल ने अपनी गलती के लिए खेद प्रकट किया।

इसके अलावा फेक न्यूज फैलाने के लिए प्रसिद्ध NDTV ने भी भारत के ऑक्सीजन निर्यात पर भ्रामक खबर चलाई। सरकार के द्वारा ऑक्सीजन निर्यात पर पूरी स्थिति साफ कर देने के बाद भी NDTV ने यह आरोप लगाया कि 2020 की तुलना में जनवरी 2021 में भारत का ऑक्सीजन निर्यात 700% बढ़ा है।

हालाँकि सरकार के सूत्रों ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रांतिपूर्ण बताया क्योंकि इन रिपोर्ट्स में जिस ऑक्सीजन की बात की गई है वह औद्योगिक ऑक्सीजन है जो कि मेडिकल ऑक्सीजन से कहीं अलग होती है।  


सरकार के सूत्रों के अनुसार निर्यातित ऑक्सीजन दो प्रकार की होती है, एक औद्योगिक ऑक्सीजन और दूसरी मेडिकल ऑक्सीजन। 2020-21 के दौरान अप्रैल से फरवरी के मध्य भारत ने 9884 मीट्रिक टन औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात किया जबकि इसी दौरान मात्र 12 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात हुआ।  

सालाना निर्यातित ऑक्सीजन की मात्रा भारत की सालाना ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता का मात्र 0.4% है। औद्योगिक ऑक्सीजन का अधिकतर निर्यात दिसंबर 2020 में हुआ। इसके अलावा सितंबर 2020 में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 2675 मीट्रिक टन प्रतिदिन थी वह जनवरी 2021 में घटकर 1418 मीट्रिक टन प्रतिदिन रह गई।

सरकार के आँकड़ों के अनुसार 2016-17 के दौरान भारत ने 15,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था जबकि इसी समय मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात 229.82 मीट्रिक टन था। अगले पाँच वर्षों में ऑक्सीजन की माँग घटी जिससे 2019-20 के दौरान औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात घटकर 4328 मीट्रिक टन हो गया जबकि मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात इसी समय 9.62 मीट्रिक टन रह गया।

ऑक्सीजन निर्यात पर आधारित आँकड़े

औद्योगिक ऑक्सीजन का चिकित्सा में उपयोग नहीं :

रेलवे प्लांट अपनी औद्योगिक ऑक्सीजन सप्लाई का उपयोग मेडिकल उद्देश्य के लिए करना चाहता था। इस पर प्रीमियर क्रायोजेनिक्स लिमिटेड के डेप्युटी जनरल मैनेजर पीके बोरा ने यह बताया कि औद्योगिक लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग चिकित्सा उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।

मेडिकल और औद्योगिक ऑक्सीजन के विषय में पीके बोरा का पत्र

भारत सरकार ने ऑक्सीजन का निर्यात बैन किया :

कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने नौ उद्योगों को छोड़कर शेष उद्योगों में ऑक्सीजन के उपयोग को बैन कर दिया है। बढ़ती माँग को देखते हुए सरकार ऑक्सीजन के उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने का भरपूर प्रयास कर रही है।

टाटा, रिलायंस, जिंदल और ऐसे ही अन्य औद्योगिक घरानों ने अपनी औद्योगिक ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता का उपयोग मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश जैसी राज्य सरकारों और डीआरडीओ जैसी सरकारी संस्थाओं ने भी अस्पतालों में ही ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है जिससे किसी भी प्रकार की ऑक्सीजन की कमी न हो।

कोरोना महामारी में कश्मीरी पत्रकार, TMC और प्रोपगेंडाबाजों ने जमकर शेयर की फेक तस्वीरें: फैक्ट चेक

कोरोना महामारी के समय में विपक्षी पार्टियाँ, वामपंथी पत्रकार और प्रोपगेंडा फैलाने वाले लोग लगातार फर्जी खबरों के सहारे देश में पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में जब कोविड महामारी से भारत त्रस्त है तब हर किसी को झूठी खबरें फैलाने से बचना चाहिए, लेकिन ये लोग इसे अवसर मानकर अपना एजेंडा चला रहे हैं।

इसी क्रम में कश्मीर के पत्रकार आरिफ शाह ने कल एक बुजुर्ग महिला की पुरानी तस्वीर शेयर की। तस्वीर में महिला रोड पर बैठी दिखी और ऑक्सीजन सिलेंडर उसके बगल में रखा था। शाह ने इस तस्वीर को शेयर करके कहा, “ये वो जगह है जहाँ भारत इस समय है।” 

पत्रकार का मकसद जाहिर है यही दिखाना था कि ये फोटो अभी हाल की है जबकि हकीकत में ये फोटो पुरानी है। हमारे खबर लिखने तक आरिफ इस तस्वीर को डिलीट कर चुके हैं। लेकिन स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि इस पर हजार रीट्वीट हो चुके हैं। इतने व्यापक स्तर पर झूठी खबर फैलाने के बाद आरिफ ने किसी तरह की माफी भी नहीं माँगी।

इसी तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल से RVCJ ग्रुप ने भी शेयर किया था। हालाँकि, आलोचना के बाद उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता।”

ममता सरकार के एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘बंगलार गोरबो ममता’ ने भी इस पुरानी तस्वीर को शेयर करके मोदी सरकार को देश से हटाने की अपील की। हमारे खबर लिखने तक ये पोस्ट अकॉउंट पर ही था।

बता दें कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही इस तस्वीर पर जब हमने पड़ताल की तो पाया कि ये तस्वीर 2018 की है। ANI ने तब रिपोर्ट में बताया था कि एक आदमी आगरा मेडिकल कॉलेज के बाहर कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर एम्बुलेंस का वेट कर रहा था। उसी समय ये तस्वीर भी ली गई थी।

यहाँ हम ये नहीं कह रहे कि 2018 की यह तस्वीर किसी कीमत पर जायज है या इसे सही ठहराया जा सकता है, लेकिन इस समय में इसे शेयर करना सिर्फ़ सामान्य जन में डर व्याप्त करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।

महाराष्ट्र की तस्वीर को बताया गया गुजरात का मॉडल

स्वरा भास्कर के दोस्त व अनारकली ऑफ आरा के निर्देशक अविनाश दास ने 20 अप्रैल को एक तस्वीर शेयर की थी। तस्वीर में लोग अपने हाथ में ड्रिप लगाए जमीन पर पड़े थे। इसमें दास ने लिखा था कि यह गुजरात के हेल्थकेयर का मॉडल है और तस्वीर गुजरात के तापी जिले की है, जहाँ कोरोना मरीजों का इलाज टेंट में हो रहा है।

इसी तस्वीर को ममता सरकार के एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘बंगलार गोरबो ममता’ ने शेयर किया। अपने ट्वीट में उन्होंने पूछा कि क्या वाकई प्रधानमंत्री को कोई परवाह है।

जब हमने इस तस्वीर का पता लगाया तो पता चला कि ये तस्वीर गुजरात की नहीं बल्कि महाराष्ट्र के नवापोरा की है और यहाँ कोविड का इलाज नहीं बल्कि टाइफाइड का इलाज हो रहा है। अस्पताल में बेड की कमी के कारण इलाज टेंट में दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर ऐसी भ्रामक सामग्री कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं और कई यूजर्स ऐसे हैं जो इनकी पोल खोल रहे हैं।

फर्जी खबर फैलाने वालों के लिए क्या है कानून?

बता दें कि भारत में ऐसी फर्जी खबरें फैलाने वालों से निपटने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। लेकिन आईपीसी, आईटी एक्ट, महामारी अधिनियम कानून में कुछ प्रावधान है जिनका इस्तेमाल इनसे निपटने के लिए किया जा सकता है।

IPC, 1860 की धारा 505 (1 ) के अनुसार जो कोई भी ऐसे बयान या झूठी खबरें फैला कर डर व्याप्त करने की कोशिश करता है, उसे 3 साल की जेल या जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है।

इसी तरह आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत, जो कोई भी संचार उपरकरण या कम्प्यूटर संसाधनों का प्रयोग करके कोई ऐसी धोखाधड़ी करता है तो उसे जेल या फिर 1 लाख तक का फाइन हो सकता है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 54 के अनुसार, जो कोई भी झूठी चेतावनी देता है या आपदा या उसकी गंभीरता या परिमाण के रूप में ऐसा कोई झूठ फैलाता है, जिससे लोगों में घबराहट पैदा हो, तो उसे 1 वर्ष तक की कारावास की सजा या जुर्माना हो सकता है।

महाराष्ट्र में अब अजीबो-गरीब समस्या मुर्गियों ने अंडे देने किए बंद, शिकायत लेकर थाने पहुँचा पोल्ट्री फर्म का मालिक

महाराष्ट्र के पुणे से एक बहुत अजीबोगरीब मामला सामने आया है। वहाँ एक मुर्गी पालक ने अपने फर्म में मुर्गियों के अंडे न देने पर एक कंपनी को जिम्मेदार बताते हुए पुलिस के पास शिकायत की। मालिक का कहना है कि एक निश्चित कंपनी का उत्पाद खाकर उसकी मुर्गियाँ अंडे नहीं दे रहीं।

डेक्कन हेराल्ड की खबर के अनुसार, इस संबंध में पुलिस अधिकारी ने बताया कि फर्म मालिक ने उनके पास बुधवार को शिकायत की। हालाँकि, इस पर एफआईआर नहीं हुई क्योंकि जिस कंपनी पर फर्म मालिक ने आरोप मढ़ा, वह उसके लिए उसे मुआवजा देने को तैयार हो गया है। 

लोनी कालभोर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजेंद्र मोक्षी ने कहा, “शिकायतकर्ता पोल्ट्री फार्म का मालिक है। वह और कम से कम 4 अन्य पोल्ट्री फार्म मालिक इलाके में इसी परेशानी से ग्रसित थे। सबने हमारे पास शिकायत करवाई।”

अधिकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं ने कहा कि वह राज्य के अहमदनगर जिले में बनी एक कंपनी से उत्पाद खरीद कर मुर्गियों को खिलाते थे। लेकिन मुर्गियों ने उत्पाद का सेवन करने के बाद अंडे देना ही बंद कर दिया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ब्लॉक लेवल एनिमल हस्बैंड्री अधिकारी को अहमदनगर में संपर्क किया। अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि ये बहुत सामान्य प्रक्रिया है कि कई बार कुछ उत्पाद मुर्गियों को सूट नहीं होते और वह उन्हें खाने के बाद अंडे देना बंद कर देती हैं। अधिकारियों के हवाले से पुलिस ने कहा कि मुर्गियों के अंडे न देने का मामला मुर्गियों द्वारा नए उत्पाद सेवन करने के बाद आया है। जैसे ही मुर्गियों पुराने खाने का सेवन करेंगी वह दोबारा अंडे देने लगेंगी।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने संबंधित कंपनी से भी बात की, जिन्होंने बताया कि उन्हें कुछ अन्य ग्राहकों से भी फीड के बारे में ऐसी ही शिकायतें मिली हैं। निर्माता ने हमें आश्वासन दिया कि वे उत्पाद वापस ले लेंगे और प्रभावित लोगों को उनके नुकसान के लिए मुआवजे की पेशकश करेंगे।” पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता एक नामी उत्पाद कंपनी से अपनी मुर्गियों के लिए खाना खरीदते थे। लेकिन बाद में रेट बढ़ने के कारण उन्होंने अहमद नगर से माल खरीदना शुरू कर दिया और तभी से उन्हें यह समस्या हुई।

‘चेहरे’ के पोस्टर्स से गायब हुई रिया, आनंद पंडित कहा- हम उनके हालात का नहीं उठाना चाहते नाजायज फायदा

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती फिल्म चेहरे को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में उनका नाम आने के बाद ऐसी खबरें आईं कि रिया चक्रवर्ती को फिल्म ‘चेहरे’ से निकाल दिया गया है। फिल्म का जब पोस्टर और टीजर सामने आया तब भी इस तरह की चर्चा थी। हालाँकि ‘चेहरे’ का ट्रेलर रिलीज होने पर इस सस्पेंस से पर्दा उठा और रिया चक्रवर्ती ट्रेलर में नजर आईं।

फिल्म के मेकर्स के अनुसार चेहरे में रिया चक्रवर्ती का जो किरदार पहले से ही तय था वही रखा गया है। उसमें बिल्कुल बदलाव नहीं किया। वहीं इन सबके बीच अब ‘चेहरे’ के निर्माता आनंद पंडित ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती की परिस्थितियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और उनका फायदा भी नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने यह बात फिल्म ‘चेहरे’ के पोस्टर से रिया चक्रवर्ती की गायब नाम और तस्वीर के बारे में बात करते हुए कही है।

आनंद पंडित ने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्म चेहरे और रिया चक्रवर्ती को लेकर लंबी बात की। आनंद पंडित से चेहरे के पोस्टरों पर रिया चक्रवर्ती की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया था। जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि रिया चक्रवर्ती कलाकारों का एक हिस्सा है जिसमें शुरू से ही 8 कलाकार हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिया को हर चीज से बहुत पहले साइन किया गया था और संतोषजनक तरीके से वह हिस्सा रहीं। इसलिए, आनंद पंडित ने बताया है कि उनके नाम का उल्लेख नहीं करने का कोई कारण नहीं था।

उन्होंने मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा, “मुझे उनका नाम इसमें शामिल करने का कोई मुख्य कारण नजर नहीं आता। वह फिल्म के आठ आर्टिस्ट में से एक हैं। हमने उन्हें बहुत पहले ही साइन कर लिया था और उन्होंने अपना हिस्सा अच्छे से पूरा कर लिया है। इसलिए, हम उन्हें अच्छा काम करने वालों में देखते हैं। मैं अपनी फिल्म के फायदे के लिए उनका अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहता। इसलिए हमने फिल्म का दूसरा पोस्टर रिलीज किया जिसमें उनके नाम का जिक्र नहीं था। वह अपने जीवन में काफी उथल-पुथल से गुजर रही हैं, और हम और अधिक परेशानियाँ नहीं बढ़ाना चाहते हैं। हमने उन्हें फिल्म में भी तभी लिया, जब वह सहज थीं।”

फिल्म के डायरेक्टर रूमी जाफरी और प्रोड्यूसर आनंद पंडित ने कहा कि रिया चक्रवर्ती के किरदार से किसी तरह की काट-छाँट नहीं हुई है। उनके चलते फिल्म में अहम ट्विस्ट आता है। सभी कलाकारों को माकूल स्क्रीन टाइम और स्पेस मिला है। फिल्म में हर किसी की रहस्यमयी बैकस्टोरी है। लोगों को अच्छी सस्पेंस थ्रिलर मिलेगी।

आपको बता दें कि चेहरे का ट्रेलर बीते दिनों रिलीज हुई था, जिसमें रिया चक्रवर्ती की झलक देखने को मिली थी। चेहरे का निर्देशन रूमी जाफरी ने किया है। यह एक मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें अमिताभ बच्चन, रिया चक्रवर्ती, अनु कपूर और इमरान हाशमी के साथ कई बेहतरीन कलाकार प्रमुख किरदारों में नजर आएँगे।  

कोविड संक्रमित निजी एवं सरकारी कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव: योगी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को राहत प्रदान करते हुए यह आदेशित किया है कि सभी निजी एवं सरकारी कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव प्रदान की जानी चाहिए।

सरकार के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में यह आदेश दिया गया है कि जिन कार्यस्थलों में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं वहाँ कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव से संबंधित उपायों को कार्यस्थल के में गेट पर लगाना आवश्यक है। साथ ही कोरोनावायरस से संक्रमित कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव भी देने का आदेश दिया गया है।

इसके अलावा जो भी दुकानें, फैक्ट्रियाँ अथवा अन्य इकाईयाँ सरकार के आदेश के कारण बंद हुई हैं उनके कर्मचारियों को छुट्टी के साथ वेतन-भत्ता भी दिया जाएगा।

इसके अलावा Covid-19 के संक्रमण को रोकने के लिए कोरोना महामारी अधिनियम, 2020 में आठवाँ संशोधन किया गया जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न लगाना भारी जुर्माने का कारण बन सकता है। सरकार के आदेश के अनुसार पहली बार बिना मास्क के पकड़े जाने पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा किन्तु दूसरी बार बिना मास्क के पकड़े जाने पर यह जुर्माना 10,000 तक हो सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने और आर्थिक गतिविधियों को चलायमान रखने का प्रयास कर रही है। योगी सरकार ने हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लॉकडाउन लगाए जाने के निर्णय का विरोध किया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को पलटते हुए कहा था कि लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है।

देश के 3 सबसे बड़े डॉक्टर की 35 बातें: कोरोना में Remdesivir रामबाण नहीं, अस्पताल एक विकल्प… एकमात्र नहीं

देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच आज (अप्रैल 21, 2021) शाम 5 बजे एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया, नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी, मेदांता के चेयरमैन डॉ नरेश त्रेहान ने कोरोना के मुद्दे पर एक साथ आकर चर्चा की। कोरोना से जुड़ी समस्याओं पर बात करते हुए इस टीम ने कुछ समाधान और ध्यान रखने वाली बातें बताईं। 

एक्सपर्ट टीम की चर्चा न्यूज एजेंसी एएनआई पर प्रसारित हुई। इस चर्चा के महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं: 

नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी

– संक्रमण से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखने पर टेस्ट सबसे जरूरी, आइसोलेशन आवश्यक।
– पानी पीएँ। मास्क पहनें।
– संक्रमण की रिपोर्ट आने पर अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें।
– जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट कराएँ।
– किसी भी प्रकार से पैनिक न करें।
– समस्या का समाधान अब संभव है।
– बीमारी के लक्षण न होने पर खुद को घर में आइसोलेट करें।
– ऑक्सीमीटर घर पर अवश्य रखें।
– ऑक्सीजन लेवल हर 6 घंटे में चेक करते रहें।
– 94 प्रतिशत तक ऑक्सीजन लेवल पर घबराए नहीं। इससे ज्यादा ड्रॉप होने पर अस्पताल जाएँ। डॉक्टर से संपर्क करें। सारे निर्देश फॉलो करें।
– सही समय पर सही इलाज बचा सकती है जान।
– संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आने से पहले न मानें कि आप कोविड पॉजिटिव नहीं हैं।

मेदांता के डॉ नरेश त्रेहान

– डॉक्टर से संपर्क करके सही सलाह लें।
– संक्रमित होने पर यदि घर में जगह है तो खुद को आइसोलेट करें।
– मिड लेवल सिम्पटम होने पर ही अस्पताल जाएँ।
– बहुत कम लोगों को अस्पताल की जरूरत।
– स्वास्थ्य संस्थानों में सबको पर्याप्त केयर देने के लिए जगह नहीं।
– किसी हालत में घबराएँ नहीं।
– बड़ी तादाद में लोग ठीक हुए।
– ऑक्सीजन लेवल न ठीक होने पर ही अस्पताल पहुँचे।
– अस्पतालों के पास पर्याप्त ऑक्सीजन मात्रा है यदि उसे बर्बाद न किया जाए।
– ऑक्सीजन बर्बादी से सिर्फ़ मरीजों को नुकसान होगा।
– रेमडेसिवीर भी रामबाण नहीं है।
– उपकरणों का बहुत उत्पाद हुआ है। घबराने की जरूरत नहीं।

AIIMS दिल्ली के निदेशक डॉ गुलेरिया

– 85% लोग रिकवर हुए हैं, बिना किसी भारी-भरकम ईलाज के।
– 15% को सिर्फ़ विस्तृत इलाज की जरूरत पड़ी।
– ज्यादातर लोगों को अस्पताल की जरूरत नहीं।
– पैरासिटामॉल से मरीज ठीक हो रहे। रेमडेसिवीर की जरूरत बहुत कम को।
– होम आइसोलेशन और अपने डॉक्टर से बात करना- अस्पताल आने से बेहतर।
– ऑक्सीजन बहुत जरूरी है। फेफड़े संबंधी बीमारी में बहुत ज्यादा। लेकिन जरूरत से अधिक से लेना सिर्फ़ ऑक्सीजन की बर्बादी है।
– ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 पहुँचने पर मॉनिट्रिंग आवश्यक, लेकिन ऑक्सीजन की जरूरत नहीं।
– जरूरतमंद के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध हो, इसलिए बेवजह इस्तेमाल करके इसे बर्बाद न करें।
– वैक्सीन आपको बड़ी बीमारियों से बचाएगी। वायरस आने से नहीं रोकेगी। वायरस आएगा, लेकिन एंटीबॉडीज के कारण असर नहीं दिखा पाएगा।
– वैक्सीन लेने के बाद RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। इसलिए उस समय भी अपने आस-पास लोगों से दूरी बनाएँ।
– वैक्सीन एक हथियार है महामारी से लड़ने का। कोशिश करें कि संक्रमण की चेन तोड़ें। दो गज की दूरी का पालन करें। भीड़-भाड़ में जानें से बचें। अपना खान-पान अच्छा ख्याल रखें। हर नागरिक को महामारी के हिसाब से व्यवहार करने की आवश्यकता।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। 2.95 लाख नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,56,16,130 हो गई है। वहीं 2,023 और मरीजों की मौत हो जाने से मृतकों की गिनती भी 1,82,553 पहुँच गई है। इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड वैक्सीन को लेकर बताया है कि 95 दिन में 13 करोड़ वैक्सीन डोज देने वाला भारत पहला देश है।

‘VHP और बजरंग दल हैं उग्रवादी संगठन, PM मोदी हिटलर, दक्षिणपंथ फासीवादी’: केरल के प्रोफेसर गिल्बर्ट का क्लास लेक्चर

सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ केरल के असिस्टेंट प्रोफेसर गिल्बर्ट सेबेस्टियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। वो विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (CUKTA) कासरगोड के सचिव भी हैं। इंटरनेशनल रिलेशन्स एंड पॉलिटिक्स विभाग में पढ़ाने वाले सेबेस्टियन JNU से पोस्ट डाक्टरल फेलो हैं। फासीवाद और नाजीवाद पर उनके लेक्चर के एक वायरल ऑडियो क्लिप में उन्हें हिन्दू धर्म, स्वस्तिक, हिन्दुओं, संघ, भाजपा और हिन्दू संगठनों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है।

ऑपइंडिया ने भी उस कथित ऑडियो क्लिप को एक्सेस किया, जिसमें वो दुनिया भर में दक्षिणपंथी सरकारों के उदय को दक्षिण पंथ के पुनरुत्थान बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथ लालच देकर सत्ता में आता है, जैसे 30 के दशक में इटली में मुसोलोनी और जर्मनी में हिटलर ने सत्ता पाई। उन्होंने कहा कि नौकरियों, इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छी आय का वादा कर के दक्षिणपंथ सत्ता में आता है, जिसमें कॉर्पोरेट और मध्यम वर्ग उनकी मदद करते हैं।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

उन्होंने कहा कि भाजपा ने भी यही ‘तिकड़म’ आजमाया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा करके सत्ता में आने वाली भाजपा इस विषय में कुछ नहीं कर रही। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण भारत में लोग शिक्षित हैं, इसीलिए वो भाजपा पर भरोसा नहीं करते। साथ ही जोड़ा कि दलितों और कामकाजी लोगों को भाजपा पर विश्वास नहीं। उन्होंने दावा किया कि अगर ये लोग भाजपा को समर्थन देते भी हैं तो तुष्टिकरण के कारण।

बकौल गिल्बर्ट सेबेस्टियन, नाजियों का Hakenkreuz और भारत का पवित्र स्वस्तिक चिह्न एक ही है। उन्होंने पूछा कि नाजियों के इस प्रतीक को आपने कहाँ देखा है? एक छात्र ने जब उठ कर कहा कि इस चिह्न का प्रयोग मंदिरों में होता है तो वो चुप रहे। बता दें कि ये दोनों एकदम अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा कि अन्य राजनीतिक व्यवस्थाओं के उलट फासीवाद और तानाशाही सिविल सोसाइटी को उग्रवादियों के रूप में प्रयोग में लाता है।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

इसके लिए उन्होंने इटली में ब्लैक शर्ट्स और जर्मनी में ब्राउन शर्ट्स का उदाहरण दिया और कहा कि भारत में RSS और VHP को भी उसी कैटेगरी में रखा जा सकता है। उन्होंने RSS को सभी हिन्दू संगठनों की माँ बताते हुए कहा कि VHP और बजरंग दल इसके उग्रवादी हिस्से हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिन्दू NRI विदेश से इन्हें रुपए भेजते हैं, ताकि देश में अशांति हो। उन्होंने भाजपा को RSS का मुखौटा बताते हुए कहा कि संघ के बैनर तले कई संगठन हैं, जो उसके लिए ‘गंदा काम’ करते हैं।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

उन्होंने 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों का दोष भी बजरंग दल पर ही मढ़ा। साथ ही उत्तर भारतीय हिन्दुओं को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की जड़ करार दिया। गिल्बर्ट ने छात्रों को बरगलाते हुए कहा कि निर्भया कांड का एक दोषी रोज पूजा-पाठ किया करता था। उन्होंने अपने लेक्चर में हिन्दुओं को अनपढ़ और अपराधी बताया। साथ ही पीएम मोदी की तुलना नाजी तानाशाह हिटलर के साथ कर डाली।

‘केजरीवाल सरकार ने लूट लिया हमारा ऑक्सीजन टैंकर’, अब पुलिस के साथ भेजेंगे’: हरियाणा के मंत्री

देश में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों से स्थिति गंभीर होती जा रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सनसनीखेज दावा किया है। अनिल विज ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर ऑक्सीजन लूटने का आरोप लगाया। 

अनिल विज ने कहा, “हम पर दबाव डाला जा रहा है कि हम दिल्ली को ऑक्सीजन दें। हमारी पहली प्राथमिकता हरियाणा है। कल हमारा टैंकर फरीदाबाद के अस्पतालों के लिए दिल्ली से जा रहा था। दिल्ली सरकार ने हमारा टैंकर लूट लिया। मैंने आदेश जारी किए हैं कि जो टैंकर जाएगा वो पुलिस के साथ जाएगा।”

दिल्ली सरकार ने मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) रात को का दावा किया था कि उनके कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी है और कुछ घंटों की जरूरत की ही ऑक्सीजन बची है, हालाँकि इसके बाद मंगलवार रात और बुधवार को दिन में दिल्ली में ऑक्सीजन की सप्लाई को बढ़ाया गया है। दिल्ली के अस्पताल कोरोना मरीजों से भरे पड़े हैं और न के बराबर आईसीयू तथा वेंटिलेटर बेड बचे हैं।

कोरोना की इस दूसरी लहर में दिल्ली के अस्पतालों पर भारी दबाव है। दिल्ली के अस्पताल इस वक्त न सिर्फ पूरी तरह से भर चुके हैं बल्कि उनमें ऑक्सीजन की भी भारी किल्लत हो रही है। कल शाम ही दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने ट्वीट कर पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि अस्पताल के पास सिर्फ 4 घंटे का ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन अगर सही समय पर न मिला तो दिक्कत हो सकती है। उनके इस ट्वीट के चंद घंटों के बाद ही उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से एक ऑक्सीजन टैंकर जीटीबी अस्पताल पहुँच गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की खातिर हर संभव प्रयास कर रहा है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि आवश्यक जन स्वास्थ्य के सामान की कमी नहीं हो। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय दिल्ली के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू करने का हरसंभव प्रयास कर रहा है ताकि राजधानी के अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी नहीं हो। 

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की ‘नेगरी सेम्बीलन इस्लामी रिलीजियस काउंसिल (MAINS)’ ने कहा है कि ‘अल्लाह’ एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए। संस्था ने ऐलान किया कि ‘अल्लाह’ शब्द का न तो किसी अन्य मजहब के लोग इस्तेमाल कर सकते हैं और ही अल्लाह की तुलना किसी अन्य मजहब के देवी-देवता अथवा ईश्वर से की जा सकती है।

इस्लामी काउंसिल MAINS के अध्यक्ष दातुक डॉक्टर अब्दुल अजीज शेख अल कादिर ने ये घोषणा की। ये मलेशिया के नेगेरी सेम्बीलन (Negeri Sembilan) राज्य की मजहबी संस्था है। इस राज्य की राजधानी पोर्ट डिक्सॉन (Port Dickson) में स्थित है, जो मलेशिया के पूर्वी तटवर्ती इलाके में आता है और राजधानी क्वालालंपुर से दक्षिण की तरफ है। मलेशिया के राज्यों में ‘अल्लाह’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।

कादिर ने कहा कि राज्य में शांति और भाईचारा कायम रखने के लिए और सभी मजहबों और नागरिकों की संवेदनशीलता को समझते हुए ग़ैर-मुस्लिमों को ये सलाह दी जाती है कि वो कानून का पालन करें और ‘अल्लाह’ शब्द को लेकर जारी फतवा के हिसाब से चलें। बता दें कि इस राज्य में सितंबर 14, 2016 को ही एक राजपत्रित फतवे में मुस्लिमों को ‘अल्लाह’ शब्द का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी गई थी।

उन्होंने कहा कि ‘अल्लाह’ शब्द के इस्तेमाल से गाली या अपमान की बू आती है तो फिर कानून के हिसाब से सजा दी जाएगी। राज्य में मुस्लिमों के बीच मजहबों के प्रचार को रोकने के लिए पहले ही कानून बन चुका है। सिर्फ ‘अल्लाह’ ही नहीं, बल्कि 36 शब्दों की एक सूची तैयार की गई है जिसका इस्तेमाल ग़ैर-मुस्लिम नहीं कर सकते। मुस्लिमों के बीच अन्य मजहबों के प्रचार को ‘प्रोपेगेंडा’ बता कर प्रतिबंधित कर दिया गया।

मार्च में मलेशिया के 13 राज्यों में से एक सेलंगोर के सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी। शरफुद्दीन ने ‘सेलंगोर इस्लामी रिलीजियस काउंसिल’ से कहा था कि वे इस मामले में हाई कोर्ट में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा था कि वे अपने इस स्टैंड पर कायम हैं कि ‘अल्लाह’ शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने इस फतवे को निरस्त किया था, जिसके बाद कई राज्यों ने विरोध किया।

SII ने तय की कोविशील्ड की कीमत: राज्य और निजी अस्पताल खरीद सकेंगे उत्पादन का 50% हिस्सा

भारत की प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने Covid-19 वैक्सीन कोविशील्ड की कीमत तय की है। 1 मई से शुरू हो रहे वैक्सीनेशन के अगले चरण के लिए यह कीमत राज्य सरकार और निजी अस्पतालों के लिए तय की गई है। एसआईआई के अनुसार राज्य की सरकारों के लिए यह कीमत 400 रुपए प्रति डोज होगी एवं निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपए प्रति डोज के हिसाब से चुकाने होंगे।

अपने मीडिया स्टेटमेंट में एसआईआई ने भारत सरकार द्वारा वैक्सीनेशन कार्यक्रम के विस्तार और वैक्सीन निर्माताओं के द्वारा 1 मई 2021 से पहले राज्यों और बाजार में उपलब्ध वैक्सीन की कीमतें तय करने के सरकार के आदेश के बाद यह रेट लिस्ट जारी की है।

कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में कहा है कि कुल उत्पादन का 50% हिस्सा भारत सरकार के वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लिए समर्पित होगा जबकि शेष 50% राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों की आपूर्ति के लिए होगा। कंपनी ने यह स्टेटमेंट केंद्र सरकार की वैक्सीन खरीद की गाइडलाइन के बाद जारी किया है।

एसआईआई ने यह भी बताया कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध वैक्सीनों की तुलना में कोविशील्ड की कीमतों को कम रखने का प्रयास किया गया है। कंपनी के अनुसार अमेरिका की वैक्सीन की कीमत 1500 रुपए से अधिक है जबकि बाजार में रूस और चीन की वैक्सीन की कीमत 750 रुपए से अधिक है।

एसआईआई ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में अन्य कॉर्पोरेट संस्थानों और निजी ईकाईयों को राज्य और निजी स्वास्थ्य क्षेत्रों के माध्यम से वैक्सीन प्राप्त करने की सलाह दी है क्योंकि वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए वैक्सीन को सभी के लिए उपलब्ध कराना फिलहाल मुश्किल है।

एसआईआई द्वारा कोविशील्ड की कीमतें तय कर देने का बाद राज्य सरकारें और निजी अस्पताल इन्हीं कीमतों के आधार पर वैक्सीन का अंतिम मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। हालाँकि उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्य अपने निवासियों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने का निर्णय ले चुके हैं।

भारत सरकार का वैक्सीनेशन कार्यक्रम का तीसरा चरण :

19 अप्रैल को भारत सरकार ने कोविड-19 के वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की घोषणा की। इसके अनुसार 1 मई 2021 से 18 वर्ष से अधिक की आयु के सभी नागरिक वैक्सीन का डोज ले पाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वैक्सीनेशन कार्यक्रम से संबंधित कई नीतियों की समीक्षा हुई जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब राज्य, वैक्सीन निर्माताओं से सीधे वैक्सीन खरीद सकते हैं। केंद्र सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को अपने उत्पादन का 50% राज्य और अन्य निजी इकाईयों को प्रदान करने की छूट भी प्रदान की।