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तृणमूल की जीत, नशे में BJP ऑफिस को लगाई आग: TMC के गुंडे दे रहे खून का ‘खेला होबे’ की धमकी

नोट: इससे पहले ANI ने ट्वीट किया था कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से जीत गई हैं। अभी न्यूज18 की खबर बता रही है कि ममता बनर्जी हार गई हैं।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत अभी आधिकारिक तौर पर घोषित भी नहीं हुई कि अभी से वहाँ हिंसा की तस्वीरें सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आई है, जिसमें भाजपा का कार्यालय जलता नजर आ रहा है।

टीवी9 के पत्रकार के मुताबिक ये घटना आरमबाग की है। पार्टी ने इसका इल्जाम टीएमसी पर लगाया है। हालाँकि टीएमसी ने इसमें अपने शामिल होने की बात को मना किया है।

बता दें कि चुनावी रुझान तृणमूल के पक्ष में आने के बाद से टीएमसी समर्थक जगह-जगह अपनी जीत के जश्न में हल्ला करते देखे गए। उन्होंने कोलकाता में स्थित भाजपा के कार्यालय के बाहर भी भारी मात्रा में इकट्ठा होकर ढोल बजाया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में जीत हासिल कर ली है। सुवेंदु अधिकारी को 1200 वोट से हराने वाली ममता के समर्थक इस बात की खुशी में चूर भी हो रखे हैं। सोशल मीडिया पर कई कट्टरपंथियों ने भाजपा समर्थकों को खुली चुनौती देनी और ‘खेला होबे’ जैसी धमकी देनी भी शुरू कर दी है।

यह सिर्फ एक ट्वीट नहीं है। यह मानसिकता है, जो बंगाल की बरसों से चली आ रही राजनीति के कारण उपजी है। वहाँ की राजनीति इस मानसिकता को पालती-पोसती है। BJP कार्यकर्ताओं की लगभग हर दिन होती हत्याओं से यह मानसिकता चुनाव से पहले भी दिख रही थी। आज जीत के जश्न में आग के रूप में आने वाले दिनों को लेकर सावधान करती, खौफ पैदा करती भी दिखा रही है।

‘राधे में मैं उनकी तरह युवा लगा हूँ’: 55 साल के सलमान खान ने 28 की दिशा पाटनी को किया ‘KISS’

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने दावा किया है कि वो अपनी आने वाली फिल्म ‘राधे – योर मोस्ट वॉन्टेड भाई’ में काफी युवा दिख रहे हैं। अक्सर उनकी फिल्मों में उनसे काफी कम उम्र की अभिनेत्रियों को लेने के लिए सलमान खान की आलोचना होती रही है। ‘राधे’ में भी ऐसा ही है। जहाँ सलमान खान की उम्र इस साल दिसंबर में 56 वर्ष हो जाएगी, ‘राधे’ में उनकी फीमेल लीड दिशा पाटनी मात्र 28 साल की हैं।

सलमान खान से दोनों के उम्र में इस अंतर को लेकर सवाल भी पूछा गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस फिल्म में वो दिशा पाटनी की उम्र के ही दिख रहे हैं। दिशा के बारे में सलमान ने कहा, “कमाल का काम किया है उन्होंने। बड़ी खूबसूरत लगी हैं। हमउम्र लगे हैं हम दोनों। वो मेरी उम्र की नहीं बल्कि मैं उनकी उम्र का लगा हूँ।” उन्होंने कहा कि अगर कोई अभिनेता इस उम्र में एक्शन कर सकता है, तो वो रोमांस भी कर सकता है।

इस फिल्म में सलमान खान और दिशा पाटनी का एक किसिंग सीन भी है। इसके बारे में बताते हुए सलमान खान ने कहा कि फिल्म में ये दृश्य ज़रूर है लेकिन ये किस दिशा को नहीं, टेप पर किया गया है। दिशा के होठों के ऊपर टेप लगाया गया और उस पर किसिंग सीन फिल्माया गया। दिशा पाटनी ने उम्र के अंतर की बात करते हुए कहा कि सलमान खान को इस फिल्म में एक युवा का किरदार दिया गया है, जो अपने 20s में है।

दिशा का कहना है कि इससे लोगों को इस केमिस्ट्री को समझने में मदद मिलेगी। दिशा ने कहा कि उनके मैनेजरों की टीम है जिनके साथ वो अपने किरदार के बारे में विचार-विमर्श करती हैं, लेकिन उन्हें ये किरदार इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत हाँ कर दिया। उन्होंने कहा कि फिर उन्हें सलमान खान के साथ काम करने का मौका मिले न मिले, इसीलिए ये फिल्म तो करनी ही थी। ‘राधे’ के निर्देशक दक्षिण के मशहूर कोरियोग्राफर प्रभु देवा हैं।

इस फिल्म में सलमान खान ने 2017 में आई अल्लू अर्जुन की फिल्म Duvvada Jagannadham (DJ) के गाने ‘सिटी मार’ को कॉपी किया है। बॉक्स ऑफिस पर 115 करोड़ रुपए का कारोबार करने वाले DJ अल्लू अर्जुन की सुपरहिट फिल्मों में से एक है, जिसका संगीत देवी श्री प्रसाद ने दिया था। इसके ‘सिटी मार’ गाने का ऑडियो और वीडियो, दोनों ही बड़े हिट हुए थे। अल्लू अर्जुन और पूजा हेगड़े के डांस मूव्स की भी खासी प्रशंसा हुई थी।

आंध्र: सरकारी अस्पताल में 14 कोरोना मरीजों की मौत, ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी को प्रशासन ने नकारा

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर के सर्वोजन सरकारी अस्पताल में शनिवार शाम 14 कोरोना मरीजों की मौत हो गई। मरीजों के परिजनों ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि मौत ऑक्सीजन सप्लाई में व्यवधान की वजह से हुई। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ पर लापरवाही का भी आरोप लगाया। हालाँकि, अधिकारियों ने ऑक्सीजन की कमी से इनकार करते हुए कहा है कि मरीजों की मौत कोविड-19 जटिलताओं के कारण हुई।

मरीजों के रिश्तेदारों में से एक वामसी ने मीडिया को बताया, “एक वॉर्ड के छह मरीजों की मौत हो गई है, जब ऑक्सीजन सेचुरेशन का स्तर 90 से धीरे-धीरे 70, 60 तक गिर गया। अन्य वॉर्डों में इस तरह के दूसरे और केस भी हो सकते हैं। जब मरीजों के रिश्तेदारों ने अस्पताल के कर्मचारियों को इस बारे में सूचित किया तो उन्होंने बताया कि तकनीकी टीम आकर मामले की जाँच करेगी। उन्होंने अपनी ओर से कोई मदद नहीं की। यदि सामान्य ऑक्सीजन सिलेंडर होते, तो उन लोगों की जान बच जाती।”

आरोपों के बाद संयुक्त कलेक्टर निशांत कुमार ने अस्पताल का निरीक्षण किया और सरकार को एक रिपोर्ट सौंपते हुए कहा, “मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई में किसी दिक्कत के कारण नहीं, बल्कि COVID-19 और अन्य जटिलताओं के कारण हुई हैं।” उन्होंने कहा, “हमारी टीम ने ऑक्सीजन प्लांट की जाँच की है। हमने वार्ड का दौरा भी किया और हर लाइन और वॉल्व की अच्छी तरह से जाँच की। वहाँ कोई लीकेज नहीं है। ऑक्सीजन प्लांट का प्रेशर भी सही है। सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि अस्पताल में हुई मौतों का ऑक्सीजन से कोई लेना-देना नहीं है। आज कुल 15 मौतें हुई हैं। जितने लोगों की मौत हुई है, उनकी सभी की उम्र ज्यादा थी और उन्हें पहले से ही गंभीर बीमारियाँ थीं। वहीं जिला कलेक्टर गंधम चंद्रूडू ने कहा कि कुछ लोगों ने जान-बूझकर डर का माहौल बनाने के लिए ऐसा किया और हम मामले की जाँच कर रहे हैं।

मो. अकबर ने नौकरी का झाँसा दे युवती से किया रेप, अश्लील वीडियो भेजकर तुड़वाई शादी: MP पुलिस ने किया गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के रीवा में एक युवती के साथ नौकरी दिलाने के नाम पर रेप किए जाने का मामला सामने आया है। युवती के साथ रेप करने और अश्लील वीडियो बनाने का आरोप मोहम्मद अकबर पर लगा है। बताया जा रहा है कि मोहम्मद अकबर ने युवती की शादी तय हो जाने पर उसके ससुराल वालों को उसकी अश्लील वीडियो भेज दी। 

जिसके बाद युवती ने शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज आरोपित को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस ने अकबर का मोबाइल जब्त कर लिया है और उसकी साइबर सेल से जाँच करवाई जा रही है।

दरअसल, युवती दो महीने पहले मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत लाभ लेने के लिए मोहम्मद अकबर के संपर्क में आई थी। अकबर ने युवती को नौकरी लगवाने और उसे महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाने का झाँसा दिया। युवती भी उसकी बातों में आ गई। इसके बाद अकबर ने उसे किराए पर कमरा दिलवाया। फिर 25 मार्च को आरोपित अकबर खान उसके घर आया और उसके साथ बलात्कार किया। आरोपित ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया।

इसके बाद आरोपित वीडियो वायरल कर देने की धमकी देकर लगातार उसके साथ दुष्कर्म करता रहा, मगर युवती शादी टूटने की डर से चुपचाप सब कुछ सहती रही। फिर आरोपित ने उसकी शादी तुड़वाने के लिए वह वीडियो ससुराल पक्ष के सदस्यों को भेज दिया। जिससे उसकी शादी टूट गई। जिसके बाद युवती ने शिकायत दर्ज करवाई। युवती की शिकायत पर आरोपित को घर से गिरफ्तार किया गया। 

मामले में सीएसपी 2 प्रतिभा शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया, “अमहिया थाने में युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उसने आरोपित के द्वारा बलात्कार करने व वीडियो बनाकर वायरल करने की जानकारी दी थी। मामला दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए परीक्षण के लिए अस्पताल भिजवा दिया गया। घटना की जाँच की जा रही है।”

हजारों की भीड़ इकट्ठा कर महापंचायत करने पहुँचे टिकैत, अम्बाला पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन पर दर्ज की FIR

कोरोना वायरस की बढ़ती रफ्तार के कारण पूरे देश कि गति धीमी पड़ी हुई है। लेकिन राकेश टिकैत एक ऐसा नाम हैं जो एक राज्य से दूसरे राज्य में लगातार आने-जाने में लगे हुए हैं। आज (मई 2, 2021) भी वह अंबाला के धुराली गाँव में किसान मजदूर महापंचायत को संबोधित करने पहुँचे, जिसके लिए वहाँ हजारों की भीड़ जुटाई गई।

जानकारी के मुताबिक, राकेश टिकैत धारा 144 का उल्लंघन करके महापंचायत करने जा रहे थे। लेकिन प्रशासन ने कोविड नियमों का उल्लंघन होता देख उन पर एक्शन ले लिया। पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, अंबाला पुलिस ने राकेश टिकैत के ख़िलाफ़ धारा 144 के उल्लंघन करने और महामारी फैलाने के आरोप में धारा 269 और 270 के तहत मुकदमा दर्ज किया।

बता दें कि राकेश टिकैत ने इससे पहले 29 अप्रैल को प्रेम नगर में एक किसान महापंचायत की थी। टिकैत ने लोगों को संक्रमण की गंभीरता बताना तो दूर इस दौरान उन्हें भड़काने का काम किया। टिकैत ने कहा, “Covid-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। हम सरकार से बात करने को तैयार हैं। गुजरात में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लेकिन अगर किसानों का मुद्दा नहीं सुलझा तो भाजपा सरकार गुजरात मॉडल को पूरे देश में लागू कर देगी।“

एक अन्य किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने राकेश टिकैत की भाषा दोहराते हुए कहा था कि अगर सरकार पूरे देश में भी धारा 144 लगा देगी तब भी वह किसान आंदोलन चलाते रहेंगे। इसके अलावा अभी हाल में इन नेताओं की जिद के चलते 30 अप्रैल को किसान आंदोलन में शामिल होने आई बंगाल की युवती ने दम तोड़ दिया था। वह 27 अप्रैल से टिकरी बॉर्डर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थी।

उल्लेखनीय है कि कोविड स्थिति के मद्देनजर किसान आंदोलन समाप्त करने की अपील कई बार किसान नेताओं से की जा चुकी है। लेकिन टिकैत हर बार सामने आकर इसे वापस लेने से मना कर देते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि कुछ किसान खेतों में कटाई के काम और पंचायत चुनाव के चलते अपने गाँव चले गए थे, लेकिन अब वह उन किसानों को भी वापस लाएँगे और आंदोलन बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए ये भी कहा था कि अगर कोई भी कोशिश हुई तो किसान उसका जवाब देंगे। उनका कहना था कि वह कोरोना नियमों का पालन करते हुए बॉर्डर पर डटे रहेंगे, लेकिन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने तक सड़कों से नहीं हटेंगे।

5 राज्यों के नतीजे अलग-अलग, पर एक सवाल वही- कॉन्ग्रेस का क्या होगा, राहुल गाँधी देंगे और कितने घाव

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। असम में भाजपा, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और केरल में एलडीएफ की सत्ता में वापसी होती दिख रही है। बंगाल में फिलहाल बीजेपी अपनी आशा के अनुरूप प्रदर्शन करती नहीं दिख रही। पुदुच्चेरी में उसका गठबंधन जीत हासिल करते दिख रहा है।

जब अंतिम नतीजे आ जाएँगे तो हर दल इन चुनावों में अपने प्रदर्शन पर चिंतन करेगा। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित मुक़ाबले में भाजपा की संभावित जीत क्यों नहीं हो सकी, आने वाले समय में यह बहस का एक बड़ा विषय होगा। तमिलनाडु में डीएमके को आशा के अनुरूप एक बड़ी जीत क्यों नहीं मिल सकी, यह भी चर्चा का विषय रहेगा।

पर इन सब के बीच जिस एक आवश्यक विषय पर चर्चा शायद न दिखे, वह होगी इन चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी का प्रदर्शन। केरल, असम और तमिलनाडु में राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा ने बड़ी मेहनत की थी। असम के चाय बाग़ानों में प्रियंका मजदूरों के साथ चाय पत्ती तोड़ते हुए भी दिखी थीं। इसके अलावा राहुल गाँधी ने चाय बागान बहुत इलाकों में गुजरात के व्यापारियों से अलग से पैसे लेने का वादा भी किया था। दक्षिण भारत के राज्यों में राहुल ने चुनाव प्रचार के दौरान कसरत करने से लेकर समुद्र में गोता लगाने जैसे मेहनत वाले और चुनाव प्रचार के लिए महत्वपूर्ण काम किए थे। पर उनका असर नहीं हुआ और उनके दल के प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ।

केवल पश्चिम बंगाल में दल की रणनीति सफल होते हुए दिखी जहाँ उन्होंने चुनाव प्रचार लगभग न के बराबर किया। उसके अलावा दल ने कहीं न कहीं अधीर रंजन चौधरी को अपना काम करने से रोका। प्रचार के दौरान ही चौधरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता पद से हटाकर दल ने किसे फायदा पहुँचाने की कोशिश की, उसकी विवेचना शायद आने वाले दिनों में हो। अधीर रंजन का खुद को चुनाव प्रचार से लगभग अलग रखना किस रणनीति का हिस्सा था, वह शायद आज आए नतीजों से स्पष्ट हो गया है।

चुनाव परिणामों के दिन कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा कोरोना का हवाला दे अपने प्रवक्ताओं को न्यूज़ स्टूडियो में न भेजने का फ़ैसला क्या संदेश देता है? शायद यही कि दल फिलहाल प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है। पर क्या चुनावी प्रक्रिया की गर्द जम जाने के बाद भी दल प्रश्न सुनने का मन बनाएगा? क्योंकि आज के दिन तो प्रवक्ताओं से किए गए प्रश्न इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में दल के प्रदर्शन के इर्द-गिर्द होते, पर भविष्य में तो और प्रश्न पूछे जाएँगे।

समय आने पर यह पूछा जाएगा कि कॉन्ग्रेस पार्टी भाजपा से खुद क्यों नहीं लड़ सकती? जब लड़ने का समय आता है तब अपनी भूमिका किसी और को देकर मैदान से हट जाती है? क्यों राहुल गाँधी केंद्र में तो विपक्ष की ओर से खुद को नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं पर चुनाव आते ही वे लघु मानव की भूमिका में आ जाते हैं? पूछा जाएगा कि इन चुनावों में दल के प्रदर्शन के बाद विपक्ष की राजनीति में राहुल गाँधी का कद कितना बढ़ा है? या छोटा हुआ है तो कितना छोटा हुआ है?

ममता बनर्जी ने जिस तरह से पश्चिम बंगाल में वापसी की है, उसके बाद विपक्षी राजनीति में उनका कद कितना बढ़ेगा? भाजपा के मुक़ाबले जब एकजुट होकर खड़े होने का प्रश्न उठेगा तब विपक्ष का नेता कौन होगा? ममता बनर्जी अनौपचारिक रूप से पहले ही अभिषेक बनर्जी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर चुकी हैं। ऐसे में क्या इस संभावना से इनकार किया जा सकेगा कि वे राज्य से निकल कर केंद्र की राजनीति में नहीं जाएँगी? यदि ऐसा होगा तब विपक्ष में राहुल गाँधी की भूमिका क्या होगी? क्या कान्ग्रेस पार्टी को यह स्वीकार होगा? अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं। वहाँ प्रियंका खुद को कॉन्ग्रेस की ओर से नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिशें करती रही हैं। ऐसे में इन सब के बीच राहुल गाँधी खुद को कहाँ पाते हैं?

ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिन पर कॉन्ग्रेस पार्टी को आज नहीं तो कल उत्तर देना ही होगा और जब ये प्रश्न उठेंगे तब शायद मंच और हों और पार्टी किसी बहाने की आड़ में खुद को छिपा न सके।

‘वैक्सीन के लिए देश क्यों दे इतना पैसा? कंपनी के पास नहीं होना चाहिए मूल्य तय करने का अधिकार’: SC ने केंद्र से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो कोरोना वैक्सीन का मूल्य निर्धारण करने का अधिकार इसके निर्माताओं को न दे। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि जब वैक्सीन निर्माताओं के पास ही इसका दाम तय करने के अधिकार होंगे तो वो कैसे बराबरी सुनिश्चित करेंगे? जस्टिस चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए केंद्र सरकार को वैक्सीन के निर्माण के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को 10 सवालों की सूची दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार ही सारे वैक्सीन खरीदे और फिर राज्यों को दे। सवालों की सूची में ये भी पूछा गया कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों में कितना निवेश किया है और उन्हें क्या सहूलियतें दी हैं। साथ ही ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए एक रियल टाइम मेकेनिज्म विकसित करने की सलाह दी।

SG ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार हर वो कुछ करने के लिए तैयार है, जिसकी नागरिकों को ज़रूरत हो। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक ‘राष्ट्रीय टीकाकरण नीति’ का अनुसरण करने की सलाह दी। उन्होंने वैक्सीन की पहुँच से SC/ST समुदाय के बाहर होने की आशंकाओं पर चिंता व्यक्त की। वहीं जस्टिस रवींद्र भट ने कहा कि जो स्वास्थ्यकर्मी अधिक कार्य कर रहे हैं, उन्हें रुपए भी उसी हिसाब से मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम सिर्फ ये कह कर इतिश्री नहीं कर सकते कि वो कोविड वॉरियर्स हैं क्योंकि कई नर्सों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अब स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आभार जताने का समय है। उन्होंने केंद्र सरकार से ये भी पूछा कि जब AstraZeneca अमेरिका के नागरिकों को कम दाम पर वैक्सीन दे रही है तो हम क्यों इसका ज्यादा मूल्य दें? उन्होंने आँकड़े गिनाए कि इससे 30-40 हज़ार करोड़ रुपयों का अंतर आ रहा है।

जस्टिस रवींद्र भट ने पूछा, “एक राष्ट्र के रूप में हम इतना पैसा क्यों दें?” उन्होंने इस बात से आपत्ति जताई कि वैक्सीन के लिए जहाँ कंपनियाँ केंद्र से 150 रुपए प्रति डोज मूल्य ले रहा है, वहीं राज्यों को 300-400 रुपए प्रति डोज चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने ‘ड्रग्स प्राइस कंट्रोल’ के नियम 19 एवं 20 की याद दिलाते हुए कहा कि केंद्र सरकार दवाओं का दाम निर्धारित कर सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि 4500 करोड़ कहाँ और कैसे दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया के माध्यम से आपात मदद माँगने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई नागरिक सोशल मीडिया या इंटरनेट के माध्यम से अपनी शिकायतें कहता है या मदद माँगता है तो इसे ‘गलत सूचना’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के DGP ये समझ लें कि ऐसी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।

राजदीप फिर फिसले, कहा- TMC को बंगाल जीतने पर कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला खिलाना चाहिए, राहुल कँवल ने कराया- चुप

2 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती की प्रक्रिया चल रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम कवरेज के दौरान, इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने टिप्पणी की कि यदि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) बंगाल में जीत जाती है तो उसे कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला का ट्रीट देना चाहिए।

सरदेसाई ने कहा, “जैसे-जैसे चुनाव अभियान छठे, सातवें और आठवें दौर में पहुँचा, हर बार जब एक बड़ा ध्रुवीकरण देखने को मिला। जब तक मालदा, मुर्शिदाबाद आता है तब तक ध्रुवीकरण इतना हो चुका होता है कि कॉन्ग्रेस का मतदाता कहता है कि कॉन्ग्रेस तो जीतने वाली नहीं है, इसलिए मैं इसे ममता को वोट दूँगा। मैं भाजपा को हराना चाहता हूँ। इसलिए कॉन्ग्रेस ने भी चुनाव प्रचार करना बंद कर दिया। बंगाल में कॉन्ग्रेस किसी भी स्थिति में हारने वाली थी और ममता कॉन्ग्रेस की हार से लाभान्वित हुई हैं। इसलिए जीतने पर उन्हें कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला खिलाना चाहिए।”

जिस पर राहुल कँवल ने जवाब दिया, “आप कॉन्ग्रेस को बहुत अधिक श्रेय दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस कभी रेस में थी ही नहीं।” यह स्पष्ट है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में एक लोकप्रिय स्थानीय नेता बनी हुई हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस के अस्तित्व को बचाने के लिए बेताब सरदेसाई को राहुल कंवल ने यह कह कर चुप करा दिया कि कॉन्ग्रेस तो कभी रेस में थी ही नहीं।

राजदीप सरदेसाई का इतिहास शर्मनाक पलों से भरा है

यह पहली बार नहीं है जब सरदेसाई की टिप्पणियों की वजह से सहकर्मियों को शर्मिंदा होना पड़ा है। हाल ही में, 26 जनवरी के दंगों की कवरेज के दौरान, उन्होंने बहुत सी भ्रामक और फर्जी रिपोर्टिंग की, जिसकी भारी आलोचना हुई। स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें कुछ समय के लिए इंडिया टुडे से सस्पेंड करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम

चुनाव आयोग के अनुसार, 2 मई को दोपहर 12:00 बजे तक, टीएमसी 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी 80 पर आगे चल रही है। अब तक तीन दौर पूरे हो चुके हैं, और वास्तविक परिणाम शाम 6 बजे तक आ जाने चाहिए। आप यहाँ हमारी लाइव कवरेज देख सकते हैं।

फिलीपींस की देखादेखी कर न्यूजीलैंड उच्चायोग ने कराई फजीहत, कॉन्ग्रेस की ‘ऑक्सीजन स्टंट’ पर माँगी माफी

कॉन्ग्रेस की ‘ऑक्सीजन स्टंट’ में उलझने की वजह से फिलीपींस के बाद अब न्यूजीलैंड उच्चायोग की भी किरकिरी हो रही है। फिलीपींस दूतावास के अगले ही दिन न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने भी यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी से ऑक्सीजन के लिए मदद माँगी।

भारत के न्यूजीलैंड उच्चायोग ने रविवार (2 मई) को किए गए एक ट्वीट में विदेश मंत्रालय दरकिनार करते हुए विपक्षी कॉन्ग्रेस पार्टी की यूथ विंग से ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए मदद माँगी। इस ट्वीट में कहा गया है, “श्रीनिवास बीवी, क्या आप न्यूजीलैंड उच्चायोग में तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद कर सकते हैं? धन्यवाद।”

श्रीनिवास बीवी इसके बाद अन्य कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ न्यूजीलैंड उच्चायोग पहुँचे। उन्होंने ट्वीट किया, “हम ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ न्यूजीलैंड उच्चायोग पहुँचे हैं। कृपया द्वार खोलें और समय पर एक जान बचाएँ। #SOSIYC”

एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने सूचित किया, ”अपडेट- न्यूजीलैंड उच्चायोग ने दूतावास के गेट खोल दिए और सिलेंडर स्वीकार कर लिए। साथ ही, उन्होंने इस त्वरित राहत के लिए #SOSIYC टीम को धन्यवाद दिया क्योंकि दूतावास के अंदर रोगी गंभीर रूप से बीमार था।”

इसके बाद नेटिजन्स ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर न्यूजीलैंड दूतावास की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया, ”MEA ने स्पष्ट किया है कि फिलीपींस के दूतावास में COVID के जीरो मामले हैं। उस दूतावास को ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे IYC के स्टंट को देखते हुए, न्यूजीलैंड दूतावास के एक सोशल मीडिया हैंडलर ने MEA से अनुरोध किए बिना ट्वीट किया। न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने इस गलत सूचना के लिए अब MEA से माफी माँगी है।”

वयोवृद्ध पत्रकार कंचन गुप्ता ने पूछा कि क्या युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से पूछने से पहले न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था। उन्होंने ट्वीट किया, “लेकिन किसके लिए @NZinIndia तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है? उनकी जरूरत किसे है? @MEAIndia से संपर्क किया गया था?”

उन्होंने आगे सवाल किया, “क्या न्यूजीलैंड दूतावास ने अपने दरवाजे खोले हैं? न्यूजीलैंड उच्चायोग को बताना चाहिए 1. उन्होंने ऑक्सीजन किससे माँगी? 2. क्या उन्होंने सार्वजनिक अपील से पहले MEA से संपर्क किया था? 3. यदि हाँ, तो MEA की प्रतिक्रिया क्या थी? (मैं यह भी नहीं पूछूँगा कि दिल्ली में IYC के लोगों को ऑक्सीजन कहाँ मिल रहा है क्योंकि ICUs तक में इसकी कमी है।)”

विवाद के बाद, भारत में न्यूजीलैंड दूतावास ने अपना प्रारंभिक ट्वीट हटा दिया और माफी माँगी। उन्होंने लिखा, “ऑक्सीजन सिलेंडर की तत्काल व्यवस्था के लिए हम सभी स्रोतों से कोशिश कर रहे थे। दुर्भाग्य से हमारी अपील का गलत अर्थ निकाला गया है, जिसके लिए हमें खेद है।”

बांग्लादेशी और रोहिंग्या ममता की सबसे बड़ी ताकत…एक और कश्मीर बन रहा: बंगाल के चुनावी ट्रेंड पर कंगना रनौत

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही है। जैसे-जैसे रूझान सामने आते जा रहे है प्रतिक्रियाएँ भी आने लगी हैं। बंगाल की मौजूदा तस्वीर पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने ट्वीट कर ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने टीवी पर आ रहे रुझानों को देखते हुए कहा है कि बंगाल में अब कोई इलाका हिंदू बहुल नहीं बचा है।

कंगना रनौत ने अपने ट्वीट में लिखा, “बांग्लादेशी और रोहिंग्या ममता की सबसे बड़ी ताकत हैं…इस ट्रेंड के हिसाब से पता चलता है कि वहाँ कोई हिंदू बहुल इलाका नहीं बचा और डेटा के मुताबिक बंगाली मुसलमान सबसे गरीब और वंचित हैं। बढ़िया है। एक और कश्मीर बन रहा है।”

मालूम हो कि कंगना रनौत 2021 विधानसभा चुनावों के बीच लगातार अपनी राय रखती दिखाई दीं। उनकी आने वाली फिल्म भी तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के ऊपर है। ‘थलाइवी’ के अलावा कंगना ‘धाकड़’ और ‘तेजस’ जैसी फिल्मों में काम कर रही हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर अन्य सेलीब्रिटीज के मुकाबले ज्यादा सक्रिय होकर राजनीति पर बात भी करती हैं।

बंगाल में TMC में सत्ता में वापसी!

विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतगणना आज सुबह 8 बजे प्रारंभ हुई थी। शुरुआती रुझानों में भाजपा और टीएमसी में काँटे की टक्कर दिखाई जा रही थी। हालाँकि बाद में टीएमसी आगे निकल गई। खबर लिखे जाने तक टीएमसी 190 सीट पर लीड में थी, वहीं भाजपा के पास 94 सीट आती दिख रही हैं।

इन परिणामों के आने के साथ ही टीएमसी समर्थकों ने राज्य में जगह जगह इकट्ठा होकर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। इस संबंध में चुनाव आयोग ने किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ को रोकने के लिए तत्काल एक्शन लेने को कहा है।

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को जीत पर बधाई भी दे दी है। अखिलेश यादव ने लिखा, “बंगाल में भाजपा की नफरत की राजनीति को हराने वाली जागरुक जनता, जुझारू ममता बनर्जी और टीएमसी के समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। ये भाजपाइयों के एक महिला पर किए गए अपमानजनक कटाक्ष ‘दीदी ओ दीदी’ का जनता द्वारा दिया गया मुँहतोड़ जवाब है।”