Home Blog Page 3865

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (अप्रैल 21, 2021) को देश को संबोधित किया। लेकिन यह छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता टीएस सिंहदेव को रास नहीं आया। संबोधन में पीएम ने कोरोना संक्रमण को लेकर पैनिक नहीं होने की लोगों से अपील लोगों से की। साथ ही राज्य सरकारों से कहा था कि उन्हें लॉकडाउन को बिलकुल अंतिम विकल्प की तरह देखना चाहिए। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता सिंहदेव इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने संबोधन में आखिर राज्यों को वैक्सीन देने की बात क्यों नहीं की।

गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने बीते सोमवार को ही कोरोना के बढ़ते केसों के मद्देनजर 18 साल से ऊपर नागरिकों को वैक्सीन देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने स्थिति को देखते हुए वैक्सीनेशन पॉलिसी में बदलाव कर राज्यों के लिए प्रावधान बनाया कि वे उत्पादक से सीधे वैक्सीन खरीद सकते हैं। केंद्र सरकार ने ये भी घोषणा की कि उत्पादक अपनी वैक्सीन के 50% आउटपुट को खुले बाजार में और अन्य निजी कंपनियों को बेच सकते हैं।

केंद्र ने यह भी कहा कि कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर और जिनकी उम्र 45 साल से ऊपर है उन्हें केंद्र मुफ्त में वैक्सीन देगी। केंद्र ने घोषणा की कि अपने फंड से वह राज्यों को वैक्सीन, संक्रमण की गंभीरता और खुराक की बर्बादी के मामले में राज्य सरकारों की दक्षता के आधार पर आवंटित करेगी।

टीएस सिंहदेव उन विपक्षी नेताओं में से हैं जिन्होंने इसी साल फरवरी में भारत में निर्मित कोवैक्सीन के असर पर सवाल खड़े किए थे। ये तब की बात है जब सरकार ने फ्रंटलाइन वर्कर के लिए इस वैक्सीन के इस्तेमाल को अनुमति दी थी।

साल 2021 के फरवरी में टीएस देव का बयान

2021 में सिंहदेव ने आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाली स्वदेशी कोवैक्सीन के यूज पर कहा था कि वह इसे अपना समर्थन नहीं देते। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस वैक्सीन के सुरक्षित होने पर सवाल उठाकर डर फ़ैलाने की कोशिश की थी। हाल में उनका जिक्र डॉ. हर्षवर्धन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में भी किया था।

बघेल का नाम लिए बिना डॉ. हर्षवर्धन ने पत्र में कहा था कि आपकी पार्टी के एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर उकसाने का काम किया था।

बता दें कि फरवरी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि उनका राज्य हर किसी को वैक्सीन फ्री में देगा। फरवरी 2021 में सीएम बघेल ने कहा था, “अगर केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया तो छत्तीसगढ़ सरकार कोविड-19 वैक्सीन का खर्चा उठाएगी।” बघेल ने यह भी कहा था कि उन्होंने इस काम के लिए फंड बचा कर रखे हुए हैं। अगर केंद्र सरकार ने वैक्सीन उपलब्ध कराने से मना किया तो अपने राज्य के लोगों को हम कोविड वैक्सीन अपने खर्च पर देंगे।

उल्लेखनीय है कि जब छत्तीसगढ़ कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में आया तब बघेल अपनी पार्टी के लिए असम में प्रचार करने में व्यस्त थे। अब तक छत्तीसगढ़ में 5.74 लाख कोरोना संक्रमण के केस आ चुके हैं। इनमें से 1.25 लाख केस अब भी एक्टिव हैं। हालातों का हवाला दे राज्य में मंगलवार से कम्प्लीट लॉकडाउन लगाया गया है। लेकिन मुख्यधारा का मीडिया इन सब चीजों पर बिलकुल चुप्पी बनाए हुए है।

ऑक्सीजन लीक के कारण 22 की मौत, कई गंभीर: नासिक के जाकिर हुसैन अस्पताल में हादसा

महाराष्ट्र के नासिक में कोरोना आपदा के बीच जाकिर हुसैन अस्पताल में एक बड़ा हादसा होने की खबर है। यहाँ ऑक्सीजन टैंक लीक हो जाने से 22 मरीजों की मृत्यु हो गई जबकि कई अन्य लोगों की हालत गंभीर है। नासिक के जिलाअधिकारी ने स्वयं अस्पताल में दुर्घटना में मारे गए लोगों की संख्या की पुष्टि की

रिपोर्ट के अनुसार, टैंकर भरने के दौरान यह लीकेज हुई और अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन फैलने से लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। इस दौरान 25 मरीजों का अस्पताल में वेंटिलेटर पर इलाज जारी था। कई लोगों की हालत गंभीर थी। वहीं 60 से ज्यादा मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी।

इससे पहले एफडीए मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने घटना पर बात करते हुए 11 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा ”इस दुर्घटना में 11 लोगों की मौत हुई है। हम इसकी जाँच करेंगे। आगे ऐसी कोई घटना न घटे, इस पर भी जाँच की जाएगी। जो कोई भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा “नासिक में टैंकर के वॉल्व लीकेज के चलते बड़े स्तर पर ऑक्सीजन का रिसाव हुआ है। जिस अस्पताल में यह की जा रही थी, वहाँ इसका निश्चित असर हुआ होगा, लेकिन मुझे अभी और जानकारी जुटाना बाकी है। हम और जानकारी जुटाने के बाद प्रेस नोट जारी करेंगे।”

वहीं, अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि उन्हें 12.30 बजे कॉल पर बताया गया कि ऑक्सीजन टैंक लीक हो रहा है। इसके बाद वह मौके पर पहुँचे और पाया कि ऑक्सीजन टैंक का वॉल्व खुला हुआ था, वहीं से ऑक्सिजन लीक हो रही थी। उनके मुताबिक मौके पर पहुँच कर उन्होंने खुले वॉल्व को बंद किया किया लेकिन तब तक काफी ऑक्सीजन लीक हो चुकी थी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना बेकाबू स्थिति में है। वहाँ लगातार नए केस बढ़ रहे हैं। 24 घंटे में वहाँ से 62 हजार से अधिक नए मामले आए हैं। वहीं 24 घंटे में 519 की मृत्यु भी हुई है। ऐसे में इस घटना ने तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का कहना है कि उनके मरीज की मृत्यु ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की वजह से हुई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार से मरीजों को मदद देने के साथ, मामले में विस्तृत जाँच की माँग की है।

केंद्र गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना पर ट्वीट कर अपना दुख व्यक्त किया है। अमित शाह ने लिखा, “नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सिजन लीक होने से हुई दुर्घटना का समाचार सुन व्यथित हूँ। इस हादसे में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनकी इस अपूरणीय क्षति पर अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। बाकी सभी मरीजों की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।”

जानिए कौन हैं 5 माह की गर्भवती पुलिस अफसर जो छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दे रहीं ड्यूटी: तस्वीरें वायरल

छत्तीसगढ़ पुलिस की डीएसपी शिल्पा साहू सुर्खियों में हैं। इनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है। तस्वीर में शिल्पा साहू हाथ में डंडा लेकर सड़क पर लॉकडाउन का पालन करवाती नजर आ रही है। सादी वर्दी में ड्यूटी दे रही शिल्पा साहू की इस तस्वीर की खास बात यह है कि वे पाँच माह की गर्भवती हैं।

जानिए कौन हैं 5 माह की गर्भवती पुलिस अफसर जो छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दे रहीं ड्यूटी

आइए जानते हैं कि डीएसपी शिल्पा साहू की ट्रेनिंग, लव स्टोरी, नक्सलियों का सफाया और अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर में लॉकडाउन का पालन करवाने तक की पूरी कहानी। शिल्पा साहू मूलरूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली हैं। इनके पति देवांश सिंह राठौर भी छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी हैं। ये छत्तीसगढ़ के लोरमी से हैं।

शिल्पा व देवांश ने 2013 में पास की पीएससी 

शिल्पा व देवांश ने साल 2013 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। तब तक दोनों एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। पीएससी परीक्षा पास करने के बाद डीएसपी के रूप में साल 2016 में निमोरा एकेडमी में शिल्पा व देवांश ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे थे। तब इनकी मुलाकात हुई और शुरुआत में ही किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। हालाँकि ट्रेनिंग खत्म होते-होते दोनों की तकरार प्यार में बदल गई।

देवांश को जांजगीर चांपा और शिल्पा को बिलासपुर में तैनाती

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद देवांश को जांजगीर चांपा और शिल्पा को बिलासपुर में तैनात किया गया। दोनों की पोस्टिंग वाली जगहों के बीच मीलों की दूरियाँ थी, मगर दोनों एक दूसरे के दिल के काफी करीब थे। कुछ समय बाद शिल्पा को बालोद में बटालियन व देवांश को दंतेवाड़ा डीआरजी टीम का डीएसपी बनाया गया। इस दौरान चलाए गए नक्सल ऑपरेशन के लिए जाने वाली डीआरजी पुरुषों की टीम को एसडीओपी देवांश सिंह राठौर और दंतेश्वरी फाइटर्स महिला डीआरजी टीम को डीएसपी शिल्पा साहू लीड करती थी।

शादी के बाद भी किया नक्सलियों का सफाया 

जून 2019 में शिल्पा और देवांश ने लव मैरिज का फैसला किया तो दोनों के सामने सामाजिक कुरीतियाँ आड़े आ गई, मगर दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और विवाह बंधन में बँध गए। शादी के बाद डीएसपी पति पत्नी हाथ में एके-47 लेकर नक्सलियों का सफाया करने जंगल में जाते थे। ये पोटाली, चिकपाल, किरंदुल क्षेत्र के अंदरूनी गाँवों में नक्सल ऑपरेशन चला चुके हैं।

डीजी ने दिया तबादले का तोहफा 

शिल्पा साहू बताती हैं कि डीजी डीएम अवस्थी को शादी का कार्ड देने गई थी। तब उन्होंने शिल्पा को शादी के तोहफे के रूप में पति पत्नी की एक साथ पोस्टिंग कर दी। उस वक्त डीजी ने कहा था- देवांश किरंदुल एसडीओपी और शिल्पा डीएसपी दंतेवाड़ा हेडक्वार्टर होंगी। दोनों को एक ही जिले में भेज रहा हूँ। मेरी तरफ से दोनों को शादी का यह तोहफा है। दोनों दंतेवाड़ा- किरंदुल बॉर्डर पर मिलते रहना।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए शिल्पा साहू ने कहा कि राज्य में कोविड महामारी की स्थिति बहुत गंभीर है, तो मुझे लगता है कि लोगों को अपने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए कर्तव्यबोध होता है। साथ ही ऐसी परिस्थितियों में जनता के बीच एक मजबूत संदेश जाना चाहिए। अगर वे देखते हैं कि मुझे गर्भवती होने के बावजूद लॉकडाउन लागू करवाने के लिए बाहर निकलना पड़ रहा है तो उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए।

सीनियर आईपीएस ने भी की तारीफ

पाँच माह की गर्भवती होने के बावजूद अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देने वाली शिल्पा साहू की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर लिखा है कि यह तस्वीर दंतेवाड़ा डीएसपी शिल्पा साहू की है। शिल्पा गर्भावस्था के दौरान भी चिलचिलाती धूप में अपनी छड़ी के साथ सड़कों पर मुस्तैदी से तैनात हैं और लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील कर रही हैं।

उन्होंने लिखा, “कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से लोगों को बचाने पुलिस इन दिनों हर संभव कोशिश कर रही है आप भी जिम्मेदार नागरिक की भूमिका अदा करें और लॉकडाउन के दौरान घर पर सुरक्षित रहें।”

शिवसेना पार्षद संध्या दोषी ने कोविड हॉस्पिटल में खड़ा किया बखेड़ा, डॉक्टर-स्टाफ से बदतमीजी करते कैमरे में कैद

मुंबई के उपनगरीय इलाके के एक कोविड-19 हॉस्पिटल में शिवसेना पार्षद संध्या दोषी की दबंगई का वीडियो सामने आया है। वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की शिक्षा कमेटी की चेयरमैन भी हैं। अपने रसूख का अनुचित फायदा उठाने में नाकाम रहने पर संध्या ने अस्पताल में हंगामा खड़ा दिया है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना का जो वीडियो ट्विटर पर डाला है उसमें शिवसेना पार्षद अस्पताल कर्मचारियों के साथ बदतमीजी करतीं और अपनी पहचान की एक मरीज का सही तरीके से देखभाल नहीं करने का आरोप एक डॉक्टर पर लगाती दिख रही हैं। इस लिहाज से भी यह वीडियो चौंकाने वाला है कि पार्षद के साथ दिख रहे शख्स ने मास्क तक नहीं लगा रखा है।

घटना मुंबई के बोरिवली वेस्ट के भगवती अस्पताल की बताई जा रही है। शिवसेना पार्षद को कोविड-19 अस्पताल में फ्रंटलाइन वर्कर्स के काम में खलल डालते हुए देखा जा सकता है। पार्षद ने अस्पताल स्टाफ के साथ गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया। एक डॉक्टर के साथ वो बदतमीजी करते हुए वैसे 10 और डॉक्टर लाने का दावा भी किया। इस पर डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ ने वीडियो जारी करके शिव सेना पार्षद से निवेदन किया कि वो अपने कहे अनुसार और भी डॉक्टरों की व्यवस्था करें क्योंकि कोविड-19 अस्पताल में वैसे भी स्टाफ की कमी है।  

डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने कहा कि जब अस्पताल डॉक्टरों और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं ऐसे समय में किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिलना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि यहाँ कई ऐसे डॉक्टर भी हैं जो कोविड-19 से लड़ने के लिए 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।   

शिवसेना पार्षद की बदतमीजी के बाद डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने इस्तीफा देने की धमकी भी दी। सोशल मीडिया यूजर्स ने पार्षद के साथ आए हुए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की माँग की, क्योंकि वह अस्पताल में बिना मास्क के घूम रहा था और स्टाफ के साथ बात कर रहा था।

संध्या दोषी दो बार एनसीपी से भी पार्षद रह चुकी हैं। 2016 में उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में वह शिवसेना में शामिल हुईं थी। वर्तमान में वह बीएमसी की शिक्षा कमेटी की चेयरमैन और मुंबई उपनगरीय इलाके के वार्ड 18 की पार्षद हैं।   

2 अस्पताल-67 मरीज, ऑक्सीजन की कमी से जान पर आफतः देवदूत बनकर दौड़ी दिल्ली पुलिस

देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस ने कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान बचाई। निहाल विहार स्थित मंसाराम अस्पताल में रविवार (अप्रैल 18, 2021) को अचानक ऑक्सीजन की कमी से कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान पर बन आई। काफी प्रयास के बावजूद जब अस्पताल को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाई तो अस्पताल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से मदद माँगी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद बवाना के एक ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क कर दस सिलेंडर का इंतजाम किया और बाद में दस और सिलेंडर को अस्पताल को सौंप दिया। 

अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने पुलिस के इस कदम की सराहना की है। पुलिस कमिश्नर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हालाँकि यह इस कठिर दौर में छोटा हो सकता है लेकिन मैं दिल्लीवासियों को राहत देने के लिए दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा की गई पहल की सराहना करता हूँ, जिसमें निहाल विहार पुलिस भी शामिल है। मैं दिल्लीवासियों का भी तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। मैं आपको हमारे सकारात्मक दृष्टिकोण का आश्वासन दे सकता हूँ।”

इसके अलावा उन्होंने अन्य ट्वीट में बताया कि दिल्ली पुलिस हमदर्द फाउंडेशन और सेवा भारती की मदद से पुलिस परिवारों के लिए शाहदरा, रोहिणी और द्वारका में 3 कोविड केयर सेंटर स्थापित कर रही है। शाहदरा 78 बेड (20 ऑक्सीजन) के साथ फंक्शन में है। वहीं रोहिणी जल्द ही 20 बिस्तरों (10 ऑक्सीजन) के साथ काम करेगी।

वहीं जनकपुरी के अमरलीला अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिली। इसके बाद अस्पताल में ऑक्सीजन पहुँचाई गई। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक,  जनकपुरी के अमरलीला अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस ने यहाँ ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई। कीर्तिनगर से ऑक्सीजन सिलेंडर लाया गया, जिससे 32 लोगों की जान बच सकी। दिल्ली पुलिस ने 11 सिलिंडर की व्यवस्था की।

गौरतलब है कि रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर राजेश डबास ने पुलिस को फोन करके कहा कि यहाँ 35 कोविड मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उनकी ऑक्सीजन सप्लाई लगभग खत्म होने वाली है। राजेंद्र डबास ने यह भी बताया कि उन्होंने कई अथॉरिटीज से मदद माँगी, लेकिन कहीं से कोई भी जवाब नहीं मिला।

इसके बाद एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा ने कई अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क साधा और इस बारे में उनसे बातचीत की। एसीपी आशीष के निर्देशन में निहाल विहार से दो टीमों को निर्देश दिया गया कि वो तुरंत मुंडका और बवाना में जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करें। 10 ऑक्सीजन सिलेंडर आधे घंटे के अंदर पहुँचाए गए। इसके बाद 10 और सिलेंडर सहित कुल लगभग 20 ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाए गए। दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आज 35 कोरोना मरीजों की जान बच गईं।

बता दें कि पिछले साल भी लॉकडाउन के दौरान दिल्ली पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला था। दिल्ली के बदरपुर में पुलिस ने समय पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाया। नवजात बच्ची के पिता पंकज ने इसके लिए दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा था, “1 अप्रैल को जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई। हम उनके आभारी हैं।” 

पंजाब के 1650 गाँव से आएँगे 20000 ‘किसान’, दिल्ली पहुँच करेंगे प्रदर्शनः कोरोना की लहर के बीच एक और तमाशा

जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से परेशान है वहीं दूसरी तरफ ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर एक नए तमाशे की तैयारी हो रही है। दिल्ली की सरकार ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) की सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन लगा रखा है। इन सबके बीच बुधवार (अप्रैल 21, 2021) को पंजाब से हजारों की संख्या में किसान टिकरी बॉर्डर की तरफ कूच करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (उग्रहन) ने इस विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन के नेताओं का कहना है कि करीब 1650 गाँवों के 20,000 किसान पंजाब के तीन बॉर्डरों को पार कर दिल्ली पहुँचेंगे और प्रदर्शन करेंगे। बीकेयू उग्रहन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलन ने अपने संगठन की योजना का खुलासा करते हुए कहा कि इस बार प्रदर्शनकारी किसानों में अधिकतर महिलाएँ होंगी।

उन्होंने कहा कि चूँकि पुरुष अभी खेतों में व्यस्त हैं, इसलिए आंदोलन की जिम्मेदारी अब महिलाओं को ही सँभालनी पड़ेगी। बठिंडा-डाबवली, खनौरी-जींद और सर्दुलगढ़-फतेहाबाद बॉर्डरों से बसों, वैन और ट्रैक्टरों में भरकर किसानों को दिल्ली की सीमा पर लाकर छोड़ दिया जाएगा। खनौरी-जींद सीमा से चलने वाले जत्थे का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्रहन और महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलन करेंगे। 

अब गेहूँ की कटाई का मौसम ख़त्म हो गया है, इसलिए किसानों को वापस दिल्ली की सीमाओं पर लाया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ‘फिर दिल्ली चलो’ का नारा दिया है। किसान धन्ना भगत की जयंती मनाने के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने टिकरी सीमा पर अपनी एकता का भी प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि आंदोलन जारी था और किसान अस्थायी रूप से कटाई के लिए अपने घरों को लौटे थे।

कुछ अन्य किसान नेताओं का कहना है कि जिस तरह से चुनावी राज्यों में जाकर किसान नेताओं ने चुनाव प्रचार किया, उससे कई तबके नाराज थे। रबी की कटाई के बाद 3000 किसान टिकरी लौट चुके हैं। BKU (लखोवाल) के नेता पुरुषोत्तम सिंह गिल ने कहा कि ये संख्या बढ़ती ही जाएगी। BKU (राजेवाल) के प्रगति सिंह ने कहा कि किसान बस, ट्रेन और अपनी गाड़ियों से आ रहे हैं, क्योंकि अभी खेती के लिए ट्रैक्टर का काम है।

उन्होंने कहा कि किसान अगले एक महीने में अपने उत्पाद बेच लें, फिर वो और भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन स्थलों पर लौटेंगे। SKM ने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों से भी कहा है कि वापस जाने की बजाए वे ‘किसान आंदोलन’ में आ जाएँ, उनके लिए भोजन और रहने की व्यवस्था की जाएगी। नेता दर्शन पाल ने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ एकीकृत संघर्ष बताया। उग्रहन हाल में कोरोना से ठीक हुए हैं। वहीं सुखदेव सिंह का हाथ फ्रैक्चर होने के बाद सर्जरी हुई थी।

इस बीच ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एक कंपनी ने कहा है कि किसान आंदोलनकारियों ने हाइवे को ब्लॉक कर रखा हुआ है, जिससे परेशानी आ रही है। दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित बालाजी अस्पताल में लगभग ऑक्सीजन ख़त्म ही होने वाला था, लेकिन दिल्ली-यूपी सीमा पर गाजीपुर स्थित NH24 पर किसानों का कब्ज़ा होने के कारण सप्लाई में 2 घंटे की देरी हुई। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से ऑक्सीजन की सप्लाई लेकर चल रही गाड़ियों को 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

कोरोना से लड़ने आगे आए कॉर्पोरेट हाउस: रोज 700 टन ऑक्सीजन फ्री देगा रिलायंस, TATA की भी बड़ी घोषणा

कोरोना वायरस को हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद एक-एक कर भारत के बड़े कॉर्पोरेट कंपनियाँ साथ आ रही हैं। एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जामनगर ऑयल रिफाइनरी में ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ा दिया है। वहाँ अब प्रतिदिन 700 टन मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। कोरोना से पीड़ित राज्यों को ये ऑक्सीजन मुफ्त में सप्लाई की जाएगी।

ET ने अपने सूत्रों के हवाले से ये खबर प्रकाशित की है। जामनगर की रिफाइनरी में इससे पहले प्रतिदिन 100 टन ऑक्सीजन का उत्पादन होता था तो इस हिसाब से अब ये 7 गुना अधिक हो जाएगा। गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को ये ऑक्सीजन दिया जाएगा, जिससे रोज 70,000 से भी अधिक कोरोना पीड़ित मरीजों को मदद मिल सकेगी। कंपनी की योजना है कि मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन 1000 टन तक बढ़ाया जाए।

जामनगर रिफाइनरी में मुख्य रूप से कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और जेट ऑइल में बदलने का कार्य किया जाता है। लेकिन, कोरोना के कारण माँग बढ़ने से रिलायंस ने ऑक्सीजन के उत्पादन का निर्णय लिया। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को मेडिकल ग्रेड में बदला जा रहा है। इसके लिए नए उपकरण स्थापित किए गए हैं। यहाँ तक कि राज्यों को -183°C में ट्रांसपोर्टेशन का, सारा खर्च रिलायंस ही उठा रही है।

‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)’ और ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)’ जैसी सरकारी कंपनियों ने भी अपने संसाधनों का इस्तेमाल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए करने का फैसला लिया है। IOC ने कहा कि उसने मुफ्त में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब को 150 टन ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी है। इसी तरह BPCL भी 100 टन ऑक्सीजन की पूर्ति कर रहा। ऑयल रिफाइनरीज में नाइट्रोजन उत्पादन के लिए एयर-सेपरेशन प्लांट्स होते हैं, जिनमें ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है।

रिलायंस का जामनगर यूनिट फ़िलहाल गुजरात को प्रतिदिन 400 टन ऑक्सीजन दे रहा है। रिलायंस ने BMC के साथ मिल कर पिछले साल ही देश का पहला कोविड अस्पताल स्थापित किया था। मात्र 2 सप्ताह में 100 बेड्स के साथ ये शुरू हुआ और फिर 250 बेड्स की कैपेसिटी बनाई गई। मुंबई में रिलायंस ने क्वारंटाइन सेंटर भी बनाए।

इसी तरह TATA ने भी पीएम मोदी की अपील पर ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का फैसला किया है। टाटा समूह 24 क्रायोजेनिक लिक्विड ऑक्सीजन सिलिंडर इम्पोर्ट करेगा। Paytm ने होम मेडिकल उपकरणों की खरीद का फैसला लिया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों की मदद की जा सके। SAIL ने 33000 टन ऑक्सीजन सप्लाई का निर्णय लिया।

गुजरात: अली मस्जिद में सामूहिक नमाज से रोका तो भीड़ ने पुलिस पर किया हमला, वाहनों को फूँका

गुजरात के कपड़वंज में मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को एक भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिस ने भीड़ जमा करके सामूहिक रूप से नमाज अदा करने से मना किया था। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कपडवंज में लायंस क्लब के पास की अली मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए गई थी। लेकिन मामला बिगड़ गया और हिंसक मोड़ ले लिया। 

रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने कुंडव पुलिस चौकी और टाउन पुलिस स्टेशन पर हमला किया। भीड़ ने दो बाइक और एक कार को जला दिया गया। इसके अलावा भीड़ ने कुंडव थाने को भी नष्ट कर दिया। इसके बाद भीड़ ने टाउन पुलिस स्टेशन पर हमला किया और पथराव करना शुरू कर दिया।

हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का सहारा लेना पड़ा। हालाँकि, तब भी भीड़ नियंत्रण से बाहर थी। आखिरकार अतिरिक्त बलों को बुलाकर हालात पर काबू पाया गया। हमले में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है। हालाँकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिसकर्मियों ने मीडिया को किसी तरह का बयान देने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी कोरोना काल में सामूहिक नमाज पढ़ने से रोकने पर पुलिसकर्मियों पर हमले की कई खबर सामने आई थी। झारखंड के बोकारो स्थित पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के नारायणपुर मस्जिद में अलविदा जुम्मे की नमाज अदा करने को लेकर जमकर बवाल हुआ था। मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए 100 से अधिक लोगों के जुटान की सूचना पर पहुँची पुलिस पर नमाजियों ने हमला और पत्थरबाजी की।

वहीं उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस पर पथराव की गई थी। शहर के सराय रहमान स्थित गड्डा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची तो इन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया था।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

भारत की आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए “तैयारी” एक अनोखा शब्द होता है। बहुत से भारतीय “तैयारी” शब्द और उसके अर्थ से बिलकुल ही अनजान होते हैं। इसे आसानी से समझना हो तो कभी किसी बैंक में जाकर खड़े हो जाइए। वहाँ आने वाले लोगों में से कोई भी ऐसा नहीं होता, जो गलती से वहाँ चला आया हो। सभी घर, दफ्तर या दुकानों से बाकायदा बैंक जाने के लिए निकले लोग ही होते हैं। अब बैंक जाएँगे तो कोई फॉर्म भी भरना पड़ सकता है, ये भी तय होता है, किसी को अलग से बताने की जरूरत नहीं होती। फिर क्या वजह होती है कि बैंकों में लोग एक दूसरे से कलम माँगते नजर आते हैं?

इतनी मामूली सी तैयारी भी भारतीय लोगों के बस की नहीं? बिलकुल थी। उन्होंने ये तैयारी इसलिए नहीं की थी क्योंकि वो मानकर चले थे कि अगर जरूरत हुई तो वहीं बैंक में कर्मचारियों ने कोई कलम टाँग रखी होगी। अगर वो नहीं हुआ तो किसी और से माँग कर काम चला लेंगे, इस उम्मीद में वो बिना कलम के बैंक आते हैं। ये तो “तैयारी” नहीं करना है, वो ऐसे छोटे मामलों में ही नहीं दिखेगा। वो बड़े मामलों में भी दिख जाता है। जैसे कुछ वर्ष पहले लगातार आए भूकम्पों का दौर याद कीजिए। जल्दी से घर से भाग कर निकला जा सके, इसके लिए तैयारी रखने की सलाह दी जाती है। सोचिए आज किसी के घर से जरूरी दवा, बिस्कुट, पीने के पानी का तैयार इंतजाम मिलेगा? लेकर फ़ौरन घर से निकला जा सके ऐसा कोई डब्बा, कोई पैकेट है?

जब पहली बार कोरोना लहर आई तो लोगों ने करीब दो-तीन पीढ़ियों बाद देखा कि महामारी की स्थिति में क्या होता है। इससे पहले 1974 में स्मालपॉक्स और 1994 में प्लेग की महामारी के बाद 2009 में भारत सरकार ने स्वाइन फ्लू को भी महामारी घोषित किया था। इनसे निपटने के लिए हमारे पास ब्रिटिश दौर का एक कानून है, जिसे “एपिडेमिक एक्ट 1897” कहा जाता है। ये उस दौर में मुंबई (तब की बम्बई) में फैले ब्युबोनिक प्लेग से निपटने के लिए बनाया गया था। सवा सौ वर्ष पुराने कानून से आज के दौर की महामारियों से कैसे निपटा जाएगा, पता नहीं। हमारी तैयारी इतनी अच्छी है कि पिछले एक वर्ष में हमने इस कानून में जरूरी सुधारों-परिवर्तनों की बात भी नहीं की है।

जो सुधार हुआ है, वो बस इतने कि जिससे डॉक्टरों-स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वाले (तथाकथित सिंगल सोर्स) को इस कानून के जरिए दण्डित करने के प्रावधान इस कानून में जोड़ दिए गए हैं। कई महामारियों के लिए माना जाता है कि वो सफाई की कमी के कारण फैलती हैं। भारत में पहले से ही “स्वच्छ भारत अभियान” चल रहा था। इसके बाद भी हमने सफाई के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए। गंदगी फ़ैलाने वालों के लिए भी इस कानून में अलग से प्रावधान होने चाहिए। इससे जब महामारी की स्थिति हो, उस समय गंदगी फ़ैलाने वालों को और कठोर दंड दिया जा सकेगा। महामारी के काल में नकली दवाएँ बनाने वालों, दवाओं की कालाबाजारी करने वालों के लिए भी इसमें आज के दौर के हिसाब से प्रावधान होने चाहिए।

समाजवादी सोच की ये समस्या है कि वो मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती। दस वर्ष आगे, अगली पीढ़ी का क्या होगा, ऐसी बातें समाजवादी सोच ही नहीं सकता। समाजवाद भविष्य की तैयारियाँ करने के बदले सरकार के भरोसे हाथ बाँधकर बैठना सिखाता है। उसमें भी अगर नेहरू वाला समाजवाद हो तो फिर तो कोढ़ में खाज वाला मामला सामने आ जाता है। इस बार जब ऑक्सीजन की कमी होनी शुरू हुई तो पता चला कि बिहार के बेगुसराय में एक ऑक्सीजन की फैक्ट्री थी। ये बिजली बिल न भरे जाने के कारण बंद हो गई थी। इसे दोबारा शुरू करवाने में जिला प्रशासन को दो दिन लगे।

आश्चर्य किया जाना चाहिए कि बिहार के ऐसे क्षेत्र में ऑक्सीजन की फैक्ट्री लगी है, जो पिछड़ा माना जाता है। वहाँ रोजगार देने वाली फैक्ट्री को सब्सिडी और सुविधाएँ मिलनी चाहिए थीं। उनके बिजली के बिल में कुछ रियायत होनी चाहिए थी। और जिसे शुरू करने में एक डीएम को दो दिन लगे, उसे बंद होने ही क्यों दिया गया था? ऐसा एक किस्सा बिहार के दूसरे इलाके से भी है। पश्चिमी चम्पारण में चनपटिया नाम का एक गाँव है। पिछली बार लॉकडाउन में जो मजदूर यहाँ वापस आए, उनके पास कौशल तो था, मगर पूँजी नहीं थी। डीएम कुंदन कुमार ने श्रमिकों की एक “स्टार्टअप जोन” बनाने में मदद की। वापस लौटे मजदूर अब यहाँ मिलों के खुद मालिक हैं और धंधा अच्छा चल रहा है। इसे देखने नीतीश कुमार भी जा चुके हैं।

सवाल है कि जो तैयारी कुछ लोग दिखाते हैं, वो समाज के बड़े हिस्से में क्यों नहीं फ़ैल रहा? क्या हम किसी अवतार के आकर समस्याएँ सुलझाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं? अगर अवतार के आने की प्रतीक्षा है भी तो ये प्रतीक्षा शबरी जैसी क्यों नहीं है? रोज रास्ता झाड़ पोंछ कर साफ़ क्यों नहीं कर रहा कोई? अगस्त्य-अनुसूया जैसी क्यों नहीं है? हथियार-कपड़े पहले से तैयार क्यों नहीं हैं, जो अवतार के आने पर उसे थमाए जा सकें? विश्वामित्र जैसी क्यों नहीं है, जो पहले से ही कम से कम दंडकारण्य से लेकर आस-पास के दूसरे रास्तों की जानकारी अवतार को दे सके? अवतार भी ऐसे तो आते नहीं न? भक्त ऐसे हों कि बुला सकें, तभी आते हैं।

बाकी जब सरकार कुछ नहीं कर रही कहिएगा, तो कम से कम उन दर्जनों स्वयंसेवकों (जो किसी संघ से जुड़े हों, ऐसा जरूरी नहीं) जितनी मेहनत के बाद कहिएगा। वो कहीं ऑक्सीजन जुटाने में, कहीं एम्बुलेंस का प्रबंध करने में, कहीं शवों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं। और कुछ नहीं होता तो अपने शहर में कौन लोगों की मदद कर रहा है, उनका नाम-पता तो मालूम कीजिए!

यूपी-असम में लगेगी फ्री वैक्सीन, केरल ने केंद्र से मुफ्त में माँगी: Remdesivir से आयात शुल्क हटा, दूर होगी कमी-लागत घटेगी

रेमडेसिविर (Remdesivir) की कमी दूर करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने रेमडेसिविर, इसके कच्चे माल और एंटी वायरल दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान पर आयात शुल्क समाप्त करने की घोषणा की है। वहीं उत्तर प्रदेश और असम ने 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए  मुफ्त में वैक्सीन लगाने की घोषणा की है। इसके विपरीत केरल ने केंद्र से मुफ्त में कोरोना वैक्सीन की माँग की है।

राजस्व विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने जन हित में रेमडेसिविर और अन्य उत्पादों से सीमा शुल्क समाप्त करने का फैसला किया है। जिन उत्पादों पर अब आयात शुल्क नहीं लगेगा उनमें रेमडेसिविर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रिडिएंट्स (Remdesivir API), रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर के विनिर्माण में काम आने वाली बीटा साइक्लोडेक्ट्रिन शामिल है। आयात शुल्क की यह छूट इस साल 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के मरीजों की स्वास्थ्य देखभाल की प्राथमिकता के मद्देनजर रेमडेसिविर एपीआई, इंजेक्शन और अन्य सामग्री को आयात शुल्क मुक्त किया गया है। इससे आपूर्ति बढ़ेगी और लागत घटेगी, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी। इससे पहले 11 अप्रैल को रेमडेसिविर की बढ़ती माँग के मद्देनजर केंद्र ने इसके इंजेक्शन और एपीआई के निर्यात को स्थिति में सुधार आने तक प्रतिबंधित कर दिया था।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में चलाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण को लेकर की गई घोषणा के बाद भाजपा शासित दो राज्य- उत्तर प्रदेश और असम ने अपने यहाँ 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान के दौरान सभी को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले से प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर काबू पाने में मदद मिलेगी। देश में बड़े पैमाने पर कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होने से महामारी पर रोक लगाने में काफी मदद मिल सकती है। हमने फैसला किया है कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन मुफ्त लगाई जाएगी। राज्य सरकार कोरोना वायरस अभियान को अपने संसाधनों से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।”

असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने ट्वीट में कहा है कि असम 18 से 45 साल उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को फ्री में वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन दे रही है। सरमा ने कहा कि पिछले साल असम में आरोग्य निधि के जरिए एकत्रित धनराशि का इस्तेमाल टीकों की खरीद के लिए किया जाएगा। सरमा ने कहा कि उन्होंने भारत बायोटेक को 1 करोड़ खुराक के आदेश दिए हैं।

इधर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मंगलवार को अपने राज्य के लोगों को फ्री में कोरोना वैक्सीन देने के वादे से मुकर गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वैक्सीन की नई नीति में बदलाव करने का अनुरोध किया।. साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य सरकारों को मुफ्त में आवश्यक टीके की पूरी मात्रा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया।

विजयन ने कहा कि राज्य सरकारें पहले से ही कोरोना महामारी के कारण अतिरिक्त वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे में वैक्सीन खरीदने का अतिरिक्त बोझ राज्य पर काफी दबाव डालेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों का स्वास्थ्य क्षेत्र में संवैधानिक दायित्व है और उन्हें वैक्सीन के एक सुनिश्चित कोटा की आवश्यकता है, जो कोरोना महामारी की स्थिति में मुफ्त प्रदान किया जाना है। साथ ही कहा कि ये जरूरी है कि राज्यों को नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए।

केंद्र की नई नीति के अनुसार वैक्सीन निर्माता मासिक उत्पादन की 50 फीसदी सप्लाई केंद्र को करेंगे और बाकी बची 50 फीसदी वैक्सीन की सप्लाई वो राज्यों और खुले बाजार में कर सकेंगे। विजयन ने कहा कि राज्यों से कहा गया है कि वो एक कीमत पर मैन्युफैक्चरर से वैक्सीन लें। विजयन ने प्रधानमंत्री से केरल को राज्य के मेगा टीकाकरण योजना को लागू करने के लिए टीकों की 50 लाख खुराकें आवंटित करने का भी आग्रह किया।

केरल ने दिसंबर में सभी के लिए मुफ्त टीके की घोषणा की थी

बता दें कि विजयन ने दिसंबर 2020 में घोषणा की थी कि उनके राज्य में सभी के लिए टीके मुफ्त होंगे। मार्च 2020 में, केरल ने चीनी वायरस महामारी से लड़ने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया था।

केरल ने महामारी से लड़ने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया था

कोरोना संक्रमण के लिहाज से महाराष्ट्र के बाद वर्तमान में केरल दूसरा सबसे प्रभावित राज्य है। राज्य में 12.72 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1.18 लाख से अधिक मामले वर्तमान में एक्टिव हैं। केरल में लगभग 5,000 लोग वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं।