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मस्जिद को आतंकी बना रहे हथियार, जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने 3 हमलों का हवाला दे बताई हकीकत: एक में खुद आग लगा फैला दी अफवाह

पिछले 1 साल में जम्मू-कश्मीर में कम से कम तीन ऐसा मौके आए हैं, जब किसी बड़े हमले के दौरान आतंकियों ने किसी मस्जिद में पनाह ली हो। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जानकारी दी है कि शुक्रवार (अप्रैल 9, 2021) को शोपियाँ में हुए आतंकी हमले में भी एक मस्जिद का दुरुपयोग किया गया। इससे पहले 2020 में 19 जून को पाम्पोर और 1 जुलाई को सोपोर में हुई आतंकी घटनाओं में भी मस्जिद का इस्तेमाल किया गया था।

हालिया घटना की बात करें तो शोपियाँ में मस्जिद को नुकसान पहुँचाए बिना आतंकियों को मार गिराना पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। साउथ व सेन्ट्रल कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ मिशन में लगे विक्टर फ़ोर्स के कमांडर इंचार्ज मेजर जनरल राशिन बली ने कहा कि सुरक्षा बलों की प्रमुख चिंता थी कि मस्जिद की पवित्रता को कैसे बचाएँ। लेकिन, इस दौरान जवानों को काफी ज्यादा खतरे का सामना करना पड़ा।

सभी आतंकी हथियारों से लैस थे। मेजर जनरल ने कहा कि राज्य के खिलाफ हथियार उठाने का एक ही अर्थ है कि इधर से भी वैसी ही प्रतिक्रिया दी जाएगी। गुरुवार की रात 1 बजे ये ऑपरेशन शुरू किया गया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि मस्जिद में 5 आतंकी छिपे हुए हैं। क्षेत्र को सील कर के सबसे पहले लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया गया। जहाँ 3 आतंकी तड़के सुबह तक मारे गए, बाकि दोनों को शुक्रवार दोपहर 2 बजे मार गिराया गया।

भारतीय सेना ने आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली। उनमें 2 आतंकी के परिजनों को भीतर उन्हें समझाने के लिए भी भेजा गया था। एक के माता-पिता तो एक के भाई को भेजा गया था। इन सबके अलावा इलाके के ही एक प्रबुद्ध नागरिक को अंदर भेज कर आतंकियों से आत्मसमर्पण के लिए कहवाया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। एक नागरिक ने जब आतंकियों को आत्मसमर्पण करने को कहा ताकि मस्जिद को नुकसान न पहुँचे, तो उधर से उस पर फायरिंग की गई।

यहाँ तक कि सशस्त्र बलों के चंगुल से निकल कर भागने के लिए मजहब के नाम पर खून बहाने वाले उन हथियारबंद आतंकियों ने मस्जिद के एक हिस्से में भी आग लगाने की कोशिश की। इलाके में अफवाह फ़ैल गई कि जवानों ने पवित्र पुस्तकों को नुकसान पहुँचाया है। सशस्त्र बलों ने न सिर्फ ऑपरेशन के बाद मस्जिद की साफ़-सफाई की, बल्कि वहाँ मिली पुस्तकें भी स्थानीय प्रशासन को सौंपी। इसी तरह 1990 में भी शोपियाँ में 4 आतंकियों को मार गिराया गया था।

कश्मीर के IGP विजय कुमार ने कहा है कि मस्जिदों का जिस तरह से आतंकी घटनाओं के लिए इस्तेमाल हो रहा है, उसकी सभ्य समाज और मीडिया को निंदा करनी चाहिए। इसी तरह पाम्पोर में जून 2019 में आतंकियों के सफाए के लिए सुरक्षा बलों को मस्जिद में घुसना पड़ा था। इस एनकाउंटर में भी ज्यादा समय लगा था, क्योंकि पुलिस मस्जिद की रक्षा करना चाहती थी और आतंकियों को कई बार आत्मसमर्पण के लिए मनाया गया था।

इसी तरह जुलाई 2020 में भी सोपोर की एक मस्जिद में पनाह लिए आतंकियों की फायरिंग में एक CRPF के जवान की मौत हो गई थी। एक जवान के बलिदान के अलावा एक नागरिक की भी उन आतंकियों ने हत्या कर दी थी। साथ ही 3 घायल हुए थे। तब भी चेताया गया था कि मस्जिद प्रबंधक समितियाँ आतंकियों को भीतर घुसने न दें। उस दौरान एक बच्चे को भी बचाया गया था। मस्जिद में छिपे आतंकियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी थी।

‘कृषि कानूनों पर केंद्र के खिलाफ गुस्सा, इसलिए टीका नहीं ले रहे लोग’: पंजाब के CM ने ‘किसानों’ की आड़ में छिपाई नाकामी

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का दोहरा रवैया सामने आया है। एक तरफ वह कह रहे हैं कि राज्य में केवल पाँच दिन के टीके का भंडार बचा है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने दावा किया है कि किसान के प्रति सरकार के रवैए से नाराज लोग टीकाकरण के लिए नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जिस तरह से किसानों के साथ पेश आ रही है, उससे जनता गुस्से में है

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा देश में कोविड -19 स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “पंजाब में लोग अभी भी बड़ी संख्या में टीकाकरण के लिए बाहर नहीं आ रहे हैं क्योंकि कृषि कानूनों के मुद्दे पर भारत सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा है। यह गुस्सा टीकाकरण अभियान को प्रभावित कर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रतिदिन 85,000 से 90,000 लोगों को टीके लग रहे हैं और इस दर से पंजाब का मौजूदा 5.7 लाख टीकों का भंडार पाँच दिन में समाप्त हो जाएगा। कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण के हालात पर विचार-विमर्श के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी की ओर से आयोजित बैठक में सिंह में कहा था कि टीकाकरण की धीमी शुरुआत के बावजूद, पंजाब में 16 लाख से अधिक लोगों को टीका लगा है। औसतन यह संख्या प्रतिदिन 85,000 से 90,000 के बीच है। इस बैठक में राहुल गाँधी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। सिंह ने कहा कि पंजाब में अभी भी अधिक संख्या में लोग टीका लगवाने इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनमें कृषि कानूनों के मुद्दे को लेकर केन्द्र सरकार के प्रति ‘बेहद आक्रोश’ है।

पंजाब सरकार ने दावा किया कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सप्ताह के सभी सात दिनों में टीकाकरण किया जा रहा है। हालाँकि इंडिया टुडे की रिपोर्ट में इसके विपरीत खुलासे हुए। रिपोर्ट के मुताबकि टीकाकरण केंद्र बंद था और टीका लगाने के लिए कोई डॉक्टर या कर्मचारी नहीं थे। टीका लगवाने के लिए कोई लाभार्थी भी नहीं था।

इसके अलावा अस्पताल में, रोगियों और उनके रिश्तेदारों को बिना मास्क के खुलेआम घूमते पाया गया। इसी तरह के दृश्य शहर के कई अन्य हिस्सों में देखे गए, जिनमें धार्मिक स्थल, बाजार या अनाज बाजार शामिल हैं। सीएमओ की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि लगभग दो लाख लोग बिना मास्क के पाए गए और पुलिस द्वारा जबरन उनकी आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया गया।

टीकाकरण में राष्ट्रीय औसत से पीछे है पंजाब 

कोरोना के टीकाकरण की मुहिम में पंजाब राष्ट्रीय औसत से पिछड़ गया है। राज्य में अभी तक केंद्र द्वारा दी गईं कोरोना की 67 फीसदी खुराकें ही प्रयोग हो पाई हैं। केंद्र ने पंजाब को 22 लाख 36770 खुराकें दी थी, जिसमें से अब तक 14 लाख 94 हजार 663 ही प्रयोग हो पाई हैं। केंद्र ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर टीकाकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। 

केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर धीमे टीकाकरण पर चिंता जताई थी। केंद्र ने राज्य को निर्देश दिए थे कि वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज करना होगा। फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन देने पर बल देने के लिए कहा गया थ। इसके बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन 2 लाख लोगों का टीकाकरण करने का टारगेट दे दिया था। अब पंजाब में एक मरीज के संपर्क में आए 30 लोगों के टेस्ट किए जाएँगे। साथ ही राज्य में 50 हजार लोगों के टेस्ट भी हर रोज अनिवार्य कर दिए गए हैं।

मंदिर की जिस 2 बीघे जमीन के लिए गई शंभू पुजारी की जान, वहीं 9 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार: कब्जे हटेंगे

राजस्थान के दौसा में आखिरकार पुजारी शंभू शर्मा का अंतिम संस्कार हो गया। नौ दिन बाद रविवार (11 अप्रैल 2021) को उनके शव को मुखाग्नि मंदिर की उसी जमीन पर दी गई, जिस पर कब्जा उनकी मौत की वजह मानी जा रही है। अब इस जमीन से कब्जे भी हटाए जाएँगे।

प्रशासन और आंदोलन कर रहे बीजेपी नेताओं के बीच सहमति बनने के बाद उनके अंतिम संस्कार का मार्ग प्रशस्त हुआ। सहमति बनने के बाद बीजेपी नेता सिविल लाइंस फाटक पहुँचे। शव का एसएमएस अस्पताल में पोस्टमॉर्टम हुआ और शाम होते होते उनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया।

सरकार इस मामले में जाँच के दायरे में आ रहे सरकारी अधिकारियों को दौसा से हटाने पर सहमत हो गई। साथ ही पूरे प्रकरण की संभागीय आयुक्त से जाँच कराई जाएगी। प्रदेश में मंदिर माफी की जमीनों के संरक्षण के लिए कमेटी गठित करने, दर्ज एफआईआर की रेंज आईजी की देखरेख में जाँच तथा संभागीय आयुक्त के 30 अप्रैल तक समयबद्ध जाँच को लेकर समझौता हुआ।

इन मुददों पर बनी सहमति

सरकार मंदिर माफी की जमीनों को कब्जे और विवादों से बचाने के लिए कमेटी का गठन करेगी। ये कमेटी देश के दूसरे राज्यों के दौरे कर वहाँ बने कानूनों का अध्ययन करेगी और सरकार को रिपोर्ट देगी। शंभू पुजारी प्रकरण की प्रशासनिक जाँच जयपुर के संभागीय आयुक्त जितेंद्र उपाध्याय करेंगे। वह 30 अप्रैल तक सरकार को रिपोर्ट पेश करेंगे। 

इस मामले में दर्ज मुकदमों की जाँच आईजी (जयपुर) हवासिंह घुमरिया की निगरानी में होगी। मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण की जाँच होगी। वहाँ बनी 172 दुकानों को सील किया जाएगा। महुवा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी यानी ईओ और एडीएम द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की जाँच भी संभागीय आयुक्त करेंगे। जगदीश सैनी की मौत के मामले की भी सरकार जाँच कराएगी।

भूमाफियाओं पर जबरन रजिस्ट्री का आरोप

गौरतलब है कि पुजारी शंभू शर्मा की 2 बीघा जमीन फरवरी माह में कुछ भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री करा ली थी। पुजारी ने माफियाओं पर षडयंत्रपूर्वक रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाते हुए महुआ थाने में केस दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज कराने के करीब एक माह बाद 2 अप्रैल को पुजारी शंभू शर्मा की मौत हो गई थी।

इसके बाद दौसा सासंद किरोड़ी मीणा ने आरोप लगाते हुए उनके शव के साथ महुआ थाने के बाहर न्याय की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। मीणा का कहना था कि भू माफियाओं की ओर से जबरन रजिस्ट्री करवाने के कारण ही जमीन को खोने के सदमे में पुजारी शंभू शर्मा की जान निकल गई।

‘अगला बकरा यही है, अब तेरा ही पत्ता कटेगा’: साकिब सलीम की बर्थडे पार्टी में दिखी रिया चक्रवर्ती तो लोगों ने दी दूर रहने की सलाह

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद उनकी गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती को पीड़ित परिवार ने मुख्य आरोपित बनाया था। CBI इस मामले की अभी भी जाँच कर रही है। ड्रग्स का एंगल सामने आने से NCB भी इसके जाँच में शामिल है, जिसने रिया को गिरफ्तार भी किया था। जमानत पर बाहर रिया चक्रवर्ती भी सामान्य जीवन में लौट रही हैं, लेकिन उन्हें अभी भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

सार्वजनिक रूप से रिया चक्रवर्ती की जब भी कोई तस्वीर वायरल होती है तो आक्रोशित लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें निशाना बनाते हैं। हाल ही में उन्हें अभिनेत्री हुमा कुरैशी के भाई साकिब सलीम के जन्मदिन की पार्टी में देखा गया था। वहाँ से लौटते समय वह मुंबई एयरपोर्ट पर भी दिखीं, जिसके बाद सोशल मीडिया में कमेंट्स का ताँता लग गया। एक यूजर ने साकिब सलीम को रिया से दूर रहने की सलाह दी।

उसका कहना था कि रिया के साथ रहने से साकिब का भी पत्ता कट जाएगा’। एक अन्य यूजर ने साकिब सलीम को ‘अगला बकरा’ बताया और लिखा, ‘तू मरेगा’। एक अन्य यूजर ने साकिब सलीम को ‘शुभकामनाएँ’ देते हुए कहा कि अगला नंबर तुम्हारा ही है। एक अन्य यूजर ने साकिब सलीम की लंबी उम्र की दुआ की। SSR फैंस ने ये भी लिखा कि जहाँ सुशांत के परिवार को न्याय नहीं मिला, रिया पार्टियों में घूम रही हैं।

रिया चक्रवर्ती का ताज़ा इंस्टाग्राम पोस्ट

बता दें कि सुशांत की मौत के लगभग डेढ़ महीने बाद उनके पिता केके सिंह ने पटना में रिया चक्रवर्ती पर आत्महत्या के लिए उकसाने और 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया था। इस मामले में बिहार और मुंबई की पुलिस में ठन गई थी। रिया चक्रवर्ती को फ़िलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे रखी है। रिया की अगली फिल्म ‘चेहरे’ है, जिसमें अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी जैसे बड़े अभिनेता नजर आएँगे।

रिया ने रविवार (अप्रैल 11, 2021) को इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वो एक किताब पढ़ती दिख रही हैं। उन्होंने इस दौरान ‘गीतांजलि’ में रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचार को अपना कैप्शन बनाते हुए लिखा, “सवाल और रोना। ओह, कहाँ? हजार धाराओं के आँसुओं में पिघल जाना है और उम्मीदों की बाढ़ से दुनिया को बचाना है। हाँ, मैं हूँ।” साथ ही उन्होंने ‘विश्वास के साथ’ वाला टैगलाइन भी लिखा।

नाइट गार्ड की नौकरी से IIM में असिस्टेंट प्रोफेसर… जिनका झोपड़ी में हुआ जन्म, फिर भी आरक्षण को कहा ना

IIM राँची में बीते दिनों केरल के रहने वाले रंजीत रामचंद्रन का असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चयन हुआ है। 28 वर्षीय रामचंद्रन कभी नाइट गार्ड की नौकरी करते थे। उन्होंने संघर्ष का लंबा सफर तय किया है। ​शनिवार को उन्होंने केरल के अपने घर की एक तस्वीर फेसबुक पर शेयर की। उन्होंने लिखा, ”IIM के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है।” उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोग इस पोस्ट को खासा पसंद कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान रंजीत कहते हैं, ”मैं चाहता था कि मेरा जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा बने, जो सफलता पाने के लिए संघर्ष करते हैं। मेरी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी होने के बाद एक समय ऐसा भी था, जब मैंने आगे की पढ़ाई छोड़कर कोई छोटी-मोटी नौकरी करके परिवार को मदद करने के बारे में सोचा था।” 28 वर्षीय रामचंद्रन इससे पहले बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में बीते दो महीने से असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे।

परिवार के लिए नाइट गार्ड की नौकरी

रंजीत रामचंद्रन ने अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए एक लंबा और संघर्ष से भरा सफर तय किया। यही कारण है कि आज वह खासा चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के मुतबिक, एक समय ऐसा भी था जब रंजीत ने अपने परिवार का पेट पालने के लिए नाइट गार्ड की नौकरी तक की थी। उन्होंने बताया कि वो दिन में कॉलेज जाते थे और रात में टेलीफोन एक्सचेंज में नाइट गार्ड की नौकरी करते थे। 5 साल तक उन्होंने वहाँ काम किया था।

कासरगोड में कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा:

”12वीं के बाद मैंने अपने माता-पिता को आर्थिक मदद करने के लिए नौकरी करने की ठानी। मुझे एक स्थानीय बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में नाइट गार्ड की नौकरी मिल गई। इसके लिए मुझे 4,000 रुपए महीने मिलते थे। इसमें से कुछ पैसे में अपने छोटे भाई और बहन की पढ़ाई पर खर्च करता था।”

रंजीत का वो घर, जहाँ वो पले-बढ़े

एक साल पहले ही इकोनॉमिक्स में पीएचडी

रंजीत ने एक साल पहले ही इकोनॉमिक्स में पीएचडी की है। हालाँकि, एक समय वह इसे छोड़ना चाहते थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आईआईटी मद्रास में दाखिला लिया, तब उन्हें अंग्रेजी तक बोलनी नहीं आती थी। लेकिन उस दौरान मार्गदर्शक प्रोफेसर सुभाष ने उनकी काफी मदद की।

प्रोफेसर सुभाष ने ही रंजीत को समझाया कि पीएचडी बीच में छोड़ना गलत होगा। फिर वहीं से रंजीत आईआईएम में प्रोफेसर बनने का न सिर्फ सपना देखे बल्कि उसे साकार करने की ठान ली। आईआईटी मद्रास में स्टाइपेंड के तौर पर मिलने वाले पैसों से रंजीत अपना खर्च तो चलाते ही थे, साथ में इसमें से एक हिस्सा बचाकर अपने भाई-बहनों की पढ़ाई पर खर्च करते थे।

करियर में आरक्षण की आवश्यकता नहीं

रंजीत रामचंद्रन के पिता रवींद्रन पेशे से एक टेलर हैं और उनकी माँ मनरेगा में मजदूर हैं। वह तीन भाई-बहन में सबसे बड़े हैं। उनका पूरा परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहता है, जिसकी छत पर पॉलिथीन लगी हुई है और बारिश में इसमें पानी तक टपकता है। रंजीत केरल के कासरगोड जिले में रहने वाले मराठी भाषी पिछड़ी जनजाति समुदाय से हैं, लेकिन रंजीत का कहना है कि उन्हें अपने करियर में आरक्षण की आवश्यकता नहीं है।

केरल सरकार पर उठे सवाल

बता दें कि फेसबुक पर रंजीत की पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोग इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर कर रहे हैं। उनके संघर्ष की कहानी वायरल होने के बाद एक सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार ने केरल सरकार पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि भाई-भतीजावाद के बीच रंजीत की नियुक्ति पर सरकार ने आँखें मूंद लीं। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने सवाल किया कि रंजीत को कालीकट विश्वविद्यालय में नियुक्त क्यों नहीं किया गया? जबकि उन्होंने कालीकट विश्वविद्यालय में शिक्षक पद के लिए चौथा स्थान प्राप्त किया था।

गुफरान ने 5 साल की दलित बच्ची का किया रेप, गला घोंट मार डाला: ‘बड़े सरकार की दरगाह’ पर परिवार के साथ आया था

उत्तर प्रदेश की बदायूँ में एक 5 साल की दलित बच्ची के साथ रेप और हत्या की घटना सामने आई है। काफी गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली बच्ची खेत में गिरी गेहूँ की बाली बिनने के लिए गई हुई थी, जिस दौरान उसके साथ ये हादसा हुआ। खेत में गेहूँ की कटाई के बाद भी कुछ बालियाँ बची रह जाती हैं, जिन्हें गरीब परिवारों के लोग ले जाते हैं। आरोपित का नाम गुफरान है, जिसने पूछताछ में बताया कि वो दरगाह पर आया हुआ था।

ये घटना रविवार (अप्रैल 11, 2021) की है। वारदात को अंजाम देकर गुफरान वहाँ से भागने की फिराक में था, लेकिन ग्रामीणों ने उसे धर-दबोचा। इस मामले की सूचना के बाद भारी संख्या में पुलिस बल को वहाँ भेजा गया। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह उसे आक्रोशित लोगों के चंगुल से छुड़ा कर गिरफ्तार किया जा सका। आरोपित उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर स्थित सुल्तानपट्टी का रहने वाला है।

वो स्थानीय ‘बड़े सरकार की दरगाह’ पर आया हुआ था। पुलिस ने रेप एवं हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में घटी इस घटना के बारे में पीड़ित परिजनों का कहना है कि बच्ची के माता-पिता पास के ही खेत में गेहूँ काट रहे थे और बच्ची खेत में बालियाँ बिन रही थी। तभी गुफरान वहाँ पहुँचा और उसने बच्ची को दबोच लिया। उसके साथ रेप किया, फिर उसकी हत्या कर दी। लेकिन, भागते हुए वो पकड़ा गया।

ग्रामीणों ने उसकी जम कर पिटाई भी की है। उसने बताया कि वो अपने परिवार के साथ ही ‘बड़े सरकार की दरगाह’ पर आया हुआ था। 30 वर्षीय आरोपित ने गला घोंट कर बच्ची की हत्या की। बदायूँ के SSP संकल्प शर्मा ने बताया कि मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और आरोपित के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है और पता लगाया जा रहा है कि आरोपित दरगाह से वहाँ तक पहुँचा कैसे।

मुख्तार अंसारी को UP की जेल में अब आँखों की दिक्कत, पहले था गले में दर्द: डॉक्टरों को बता रहे हर दिन नई बीमारी

यूपी की बाँदा जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी डॉक्टरों को रोजाना नई बीमारी बता रहे हैं। अब उन्होंने बताया है कि आँखों से धुँधला दिख रहा है। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, सिर्फ चश्मा बदला जाना है। वहीं दो दिन पहले भी उन्होंने गले में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने उनकी मेडिकल जाँच की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं है।

बताया जा रहा है कि मुख्तार अंसारी ने शनिवार को आँखों से धुँधला दिखाई देने की दिक्कत बताई थी। इस पर नेत्ररोग विशेषज्ञ को बुला कर उनकी आँखों की जाँच कराई गई थी। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें पास की वस्तुएँ धुँधली दिखाई दे रही हैं। इस पर उन्हें नया चश्मा बनवाने की सलाह दी गई।

वहीं, उत्तर प्रदेश की पुलिस व स्पेशल टास्क फोर्स बाहुबली विधायक से जुड़े सभी कनेक्शन खंगालने में जुट गई है। इसी क्रम में लखनऊ एसटीएफ की टीम ने स्थानीय कोतवाली अन्तर्गत नगर के निवासी व अंसारी के करीबी जियाउल्लाह के घर रविवार की दोपहर करीब 12 बजे छापेमारी। इसके बाद स्पेशल टास्क फोर्स की टीम परिजनों से मुख्तार अंसारी से कनेक्शन के बारे में पूछताछ करने के बाद वापस लौट गई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्तार अंसारी के आने के बाद से बाँदा जेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। अब हर समय बाउंड्री गेट पर पीएसी का पहरा रहता है। यहाँ एक SI और 6 सिपाही तैनात रहते हैं। पहले एक वार्डेन और तीन होमगार्ड की तैनाती रहती थी।

शनिवार को बाँदा जेल में मुख्तार अंसारी के कुछ करीबी उनसे मिलने पहुँचे थे, जिन्हें प्रशासन ने मिलवाने से इनकार कर दिया था। अधिकारियों ने कहा कि बाउंड्री गेट से लेकर अंदर तक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, हर आने-जानेवाले की निगरानी हो रही है।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी बुधवार (अप्रैल 7, 2021) सुबह करीब 4.30 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच बाँदा जेल लाए गए थे। बाहुबली विधायक के उत्तर प्रदेश पहुँचते ही उन पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। योगी सरकार जल्द ही मुख्‍तार अंसारी की विधानसभा की सदस्यता को खत्म करने की कार्रवाई भी शुरू हो सकती है।

नियम है कि अगर कोई विधानसभा सदस्य विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने से 60 दिन तक अनुपस्थित रहता है तो आर्टिकल 190 के तहत उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है। आर्टिकल 190 के अलावा मुख्तार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को भी सदस्यता खत्म करने का आधार यूपी सरकार बनाएगी।

वहीं मुख्तार अंसारी के वकील के मुताबिक इस मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी से जुड़ा ये पूरा मामला प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में भी स्थानांतरित किया जाएगा।

बता दें कि माफिया मुख्तार अंसारी पर 47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लेकिन वह पंजाब में अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए काफी दिनों से वहाँ की रोपड़ जेल में बंद थे।

स्वास्तिक को बैन करने के लिए अमेरिका के मैरीलैंड में बिल पेश: हिन्दू संगठन की आपत्ति, विरोध में चलाया जा रहा कैम्पेन

अमेरिका के एक बड़े हिन्दू संगठन ‘हिन्दू अमेरिका फाउंडेशन (HAF)’ ने हिंदुओं के पवित्र प्रतीक चिन्ह ‘स्वास्तिक’ को बैन किए जाने के विरोध में कैम्पेन चलाया है। संगठन ने अमेरिका के राज्य मैरीलैंड में हाउस ऑफ डेलीगेट्स के एक बिल पर आपत्ति जताई है, जिसमें स्वास्तिक को ‘घृणा’ की निशानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बिल में कपड़ों, किताबों, स्कूल और ऐसी ही अन्य जगहों पर स्वास्तिक के उपयोग को बैन करने की बात कही जा रही है।

HAF ने मैरीलैंड के गवर्नर, स्टेट सीनेटर और स्टेट डेलीगेट्स को यह बताया है कि मैरीलैंड का ‘हाउस बिल 0418’ स्वास्तिक की गलत तरीके से व्याख्या करता है। इस बिल में संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुए स्वास्तिक चिन्ह को नाजियों के प्रतीक चिन्ह के समतुल्य माना है, जो पूर्णतः गलत है। HAF ने कहा कि स्वास्तिक ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिल कर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘अच्छा होना’।

संगठन ने यह भी बताया कि स्वास्तिक का उपयोग न केवल हिन्दू अपितु बौद्ध और जैन भी अपने घरों, मंदिरों और पवित्र स्थानों में परंपराओं, दैनिक पूजा-पाठ और विशेष धार्मिक अवसरों पर करते हैं। यह दुनिया भर के हिंदुओं के लिए पवित्र और पूज्य है। इसके अलावा स्वास्तिक व्यापार के प्रतिष्ठानों, गहनों और कलाकृतियों में भी समृद्धि के प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता है।

नाजी पार्टी के प्रतीक चिन्ह ‘हुक्ड क्रॉस’ (जर्मनी में, Hakenkreuz) से तुलना करने पर HAF ने मैरीलैंड राज्य के बिल पर आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि नाजी पार्टी ने हुक्ड क्रॉस को अपने प्रतीक चिन्ह के रूप में 1920 में अपनाया था। उससे स्वास्तिक की तुलना करना पूरी तरह से गलत है क्योंकि नाजियों के हुक्ड क्रॉस से अलग स्वास्तिक शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक है।

HAF ने यह आशंका जताई है कि हाउस बिल 0418 में स्वास्तिक के घृणा के प्रतीक चिन्ह के रूप में चित्रांकन करने के बाद अमेरिका के अंदर हिंदुओं और उनके बच्चों के प्रति नस्लभेदी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। संगठन का कहना है कि यदि इस बिल से स्वास्तिक की गलत व्याख्या को नहीं हटाया गया तो शिक्षा संस्थानों और अन्य स्थानों पर अमेरिका में रहने वाले और अपनी धार्मिक पहचान को लेकर चलने वाले हजारों हिंदुओं, जैनों और बौद्धों को भेदभाव और यहाँ तक कि ‘हेट क्राइम’ का शिकार भी होना पड़ सकता है।

हिन्दू अमेरिका फाउंडेशन (HAF) ने कहा कि इस बिल के अस्तित्व में आने के बाद अमेरिका में रहने वाले हिन्दू न तो अपने धर्म का स्वतंत्र तरीके से पालन कर पाएँगे और न ही उसे अपनी पीढ़ियों तक पहुँचा पाएंगे। HAF ने बताया कि 2008 में हिन्दू-यहूदी लीडरशिप समिट में इस विषय पर चर्चा की गई थी, जिसके बाद हिंदुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्वास्तिक के महत्व और उसके सकारात्मक प्रभाव को एकमत से मान्यता मिली थी।

मैरीलैंड राज्य द्वारा हाउस बिल 0418 के माध्यम से स्वास्तिक की गलत व्याख्या करने और उसे बैन करने के विरुद्ध HAF कैम्पेन चला रहा है। संगठन ने लोगों से अपील की है कि वो मैरीलैंड की राज्य विधायिका और गवर्नर होगन से इस बिल का विरोध करने की माँग करें।

हिन्दू अमेरिका फाउंडेशन एक शैक्षणिक और हिंदुओं के हितों की हिमायत करने वाला संगठन है। इसकी स्थापना 2003 में हुई थी। HAF का उद्देश्य है कि हिंदुओं और हिन्दू धर्म की विशेषताओं और परंपराओं के विषय में लोगों को शिक्षा दी जाए और हिन्दू धर्म से जुड़े सभी पहलुओं की उचित व्याख्या की जाए।

‘जिन राज्यों में चुनाव हो रहे, वहाँ कोरोना कम क्यों’ – अपने राज्य के बजाय महाराष्ट्र के मंत्री असलम शेख पता लगाने में जुटे

महाराष्ट्र में कोरोना की रफ्तार बेकाबू होती जा रही है। अपने राज्य में इसके रोकथाम से अलग दूसरी ओर उद्धव ठाकरे सरकार जानना चाहती है कि अन्य राज्यों (खासकर जहाँ चुनाव हो रहे हैं) में ऐसी स्थिति क्यों नहीं देखने को मिल रही है।

महाराष्ट्र के मंत्री असलम शेख ने कहा, ”हमने COVID-19 टास्क फोर्स से यह अध्ययन करने के लिए कहा है कि केवल महाराष्ट्र में कोरोना के मामले क्यों बढ़ रहे हैं और उन राज्यों में क्यों नहीं बढ़ रहे, जहाँ विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। कई मंत्री वहाँ बड़े पैमाने पर सभाएँ कर रहे हैं, लेकिन वहाँ COVID-19 मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं देखने को मिल रही।”

उद्धव ठाकरे सरकार महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की स्थिति को संभालने में विफल रही है। वर्तमान में महाराष्ट्र में देश में COVID-19 के कुल एक्टिव केस का लगभग आधा हिस्सा है। राज्य में प्रतिदिन लगभग 50,000 नए कोरोना के केस मिल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। मार्च 2021 की शुरुआत में महाराष्ट्र में कुल एक्टिव केस एक लाख से कम थे, लेकिन अब यह संख्या यहाँ 5 लाख के पार पहुँच गई है।

इसके उलट महाराष्ट्र के मंत्री ने देखा कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रैलियाँ और रोड शो किए गए, वहाँ कोरोना के मामले कम दर्ज हुए हैं। असम में कोरोना के कुल एक्टिव केस लगभग 1500 हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में 21,000 के करीब। केरल में लगभग 40,000 सक्रिय मामले हैं, वहीं तमिलनाडु में लगभग 38,000 मामले हैं।

बीते दिनों कुछ विपक्षी दलों के नेता और वाम दल की मीडिया ने असम और पश्चिम बंगाल में केंद्रीय मंत्रियों द्वारा की जाने वाली चुनावी रैलियों के साथ महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना के मामलों को जोड़ने का प्रयास किया। नतीजा सामने है! अब महाराष्ट्र के मंत्री इस बात पर सहमत हो ही गए कि उनका राज्य कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में विफल रहा, जबकि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहाँ स्थिति महाराष्ट्र से कहीं अधिक बेहतर है।

हालाँकि, कोरोना वायरस के बारे में फर्जी खबरें फैलाने में कॉन्ग्रेसी नेता सबसे आगे हैं। शनिवार को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने आरोप लगाया था कि उनके राज्य को सबसे कम वैक्सीन की डोज दी गई है, जबकि भाजपा शासित राज्यों को अधिक वैक्सीन की खुराक दी जाती है। हालाँकि यह एक सफेद झूठ है, क्योंकि महाराष्ट्र को वैक्सीन की सबसे अधिक डोज दी गई है। एक अन्य कॉन्ग्रेस शासित राज्य राजस्थान ने भी बड़ी संख्या में वैक्सीन की डोज प्राप्त की है, जो शीर्ष तीन वैक्सीन प्राप्त करने वाले राज्यों में से एक है।

बता दें कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कोरोना की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। आज मुंबई में कोरोना विस्फोट हुआ। यहाँ पिछले 24 घंटे में 9989 नए केस सामने आए हैं, वहीं 58 की मौत हो गई।

आनंद को मार डाला क्योंकि वह BJP के लिए काम करता था: कैमरे के सामने आकर प्रत्यक्षदर्शी ने बताया पश्चिम बंगाल का सच

पश्चिम बंगाल के सितलकुची में चौथे चरण के मतदान के दौरान भाजपा के एक कार्यकर्ता आनंद बर्मन की हत्या कर दी गई। तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया कि चुनाव में हुई हत्याओं के पीछे भाजपा जिम्मेदार है किन्तु भाजपा ने कहा कि आनंद सितलकुची विधानसभा में पथनतुली क्षेत्र के बूथ नंबर 85 का पार्टी का पोलिंग एजेंट था। रिपोर्ट्स के अनुसार बूथ के बाहर ही उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई।

‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भण्डारी ने इस घटना पर एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान शेयर किया है। इसमें प्रत्यक्षदर्शी यह बता रहा है कि जब आनंद बर्मन की हत्या हुई, तब वह वोट डालने के लिए लाइन में खड़ा था।

वीडियो में प्रत्यक्षदर्शी कहता है, “आनंद वोट डालने गया था, तब वो लोग बम लेकर आए। उन्हें देखकर आनंद डर गया और घर लौटते समय उसकी हत्या कर दी गई।“ प्रत्यक्षदर्शी ने यह भी बताया कि आनंद की उनसे कोई दुश्मनी भी नहीं थी। हत्या का एक मात्र कारण था कि आनंद भाजपा के लिए काम करता था, जबकि दूसरे लोग तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए।  

प्रत्यक्षदर्शी ने यह भी बताया कि लोगों को धमकियाँ भी दी गई थीं कि वो भाजपा को वोट न करें। पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान के दौरान हिंसा हुई थी। एक अन्य घटना में आत्मरक्षा में केन्द्रीय सुरक्षा बलों द्वारा की गई ओपन फायरिंग में 4 उपद्रवियों की जान चली गई। सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ द्वारा अपने हथियार छीनने के बाद आत्मरक्षा के लिए ओपन फायरिंग की थी।