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‘चेहरे’ के पोस्टर्स से गायब हुई रिया, आनंद पंडित कहा- हम उनके हालात का नहीं उठाना चाहते नाजायज फायदा

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती फिल्म चेहरे को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में उनका नाम आने के बाद ऐसी खबरें आईं कि रिया चक्रवर्ती को फिल्म ‘चेहरे’ से निकाल दिया गया है। फिल्म का जब पोस्टर और टीजर सामने आया तब भी इस तरह की चर्चा थी। हालाँकि ‘चेहरे’ का ट्रेलर रिलीज होने पर इस सस्पेंस से पर्दा उठा और रिया चक्रवर्ती ट्रेलर में नजर आईं।

फिल्म के मेकर्स के अनुसार चेहरे में रिया चक्रवर्ती का जो किरदार पहले से ही तय था वही रखा गया है। उसमें बिल्कुल बदलाव नहीं किया। वहीं इन सबके बीच अब ‘चेहरे’ के निर्माता आनंद पंडित ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती की परिस्थितियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और उनका फायदा भी नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने यह बात फिल्म ‘चेहरे’ के पोस्टर से रिया चक्रवर्ती की गायब नाम और तस्वीर के बारे में बात करते हुए कही है।

आनंद पंडित ने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्म चेहरे और रिया चक्रवर्ती को लेकर लंबी बात की। आनंद पंडित से चेहरे के पोस्टरों पर रिया चक्रवर्ती की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया था। जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि रिया चक्रवर्ती कलाकारों का एक हिस्सा है जिसमें शुरू से ही 8 कलाकार हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिया को हर चीज से बहुत पहले साइन किया गया था और संतोषजनक तरीके से वह हिस्सा रहीं। इसलिए, आनंद पंडित ने बताया है कि उनके नाम का उल्लेख नहीं करने का कोई कारण नहीं था।

उन्होंने मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा, “मुझे उनका नाम इसमें शामिल करने का कोई मुख्य कारण नजर नहीं आता। वह फिल्म के आठ आर्टिस्ट में से एक हैं। हमने उन्हें बहुत पहले ही साइन कर लिया था और उन्होंने अपना हिस्सा अच्छे से पूरा कर लिया है। इसलिए, हम उन्हें अच्छा काम करने वालों में देखते हैं। मैं अपनी फिल्म के फायदे के लिए उनका अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहता। इसलिए हमने फिल्म का दूसरा पोस्टर रिलीज किया जिसमें उनके नाम का जिक्र नहीं था। वह अपने जीवन में काफी उथल-पुथल से गुजर रही हैं, और हम और अधिक परेशानियाँ नहीं बढ़ाना चाहते हैं। हमने उन्हें फिल्म में भी तभी लिया, जब वह सहज थीं।”

फिल्म के डायरेक्टर रूमी जाफरी और प्रोड्यूसर आनंद पंडित ने कहा कि रिया चक्रवर्ती के किरदार से किसी तरह की काट-छाँट नहीं हुई है। उनके चलते फिल्म में अहम ट्विस्ट आता है। सभी कलाकारों को माकूल स्क्रीन टाइम और स्पेस मिला है। फिल्म में हर किसी की रहस्यमयी बैकस्टोरी है। लोगों को अच्छी सस्पेंस थ्रिलर मिलेगी।

आपको बता दें कि चेहरे का ट्रेलर बीते दिनों रिलीज हुई था, जिसमें रिया चक्रवर्ती की झलक देखने को मिली थी। चेहरे का निर्देशन रूमी जाफरी ने किया है। यह एक मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें अमिताभ बच्चन, रिया चक्रवर्ती, अनु कपूर और इमरान हाशमी के साथ कई बेहतरीन कलाकार प्रमुख किरदारों में नजर आएँगे।  

कोविड संक्रमित निजी एवं सरकारी कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव: योगी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को राहत प्रदान करते हुए यह आदेशित किया है कि सभी निजी एवं सरकारी कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव प्रदान की जानी चाहिए।

सरकार के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में यह आदेश दिया गया है कि जिन कार्यस्थलों में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं वहाँ कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव से संबंधित उपायों को कार्यस्थल के में गेट पर लगाना आवश्यक है। साथ ही कोरोनावायरस से संक्रमित कर्मचारियों को 28 दिन की पेड लीव भी देने का आदेश दिया गया है।

इसके अलावा जो भी दुकानें, फैक्ट्रियाँ अथवा अन्य इकाईयाँ सरकार के आदेश के कारण बंद हुई हैं उनके कर्मचारियों को छुट्टी के साथ वेतन-भत्ता भी दिया जाएगा।

इसके अलावा Covid-19 के संक्रमण को रोकने के लिए कोरोना महामारी अधिनियम, 2020 में आठवाँ संशोधन किया गया जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न लगाना भारी जुर्माने का कारण बन सकता है। सरकार के आदेश के अनुसार पहली बार बिना मास्क के पकड़े जाने पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा किन्तु दूसरी बार बिना मास्क के पकड़े जाने पर यह जुर्माना 10,000 तक हो सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने और आर्थिक गतिविधियों को चलायमान रखने का प्रयास कर रही है। योगी सरकार ने हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लॉकडाउन लगाए जाने के निर्णय का विरोध किया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को पलटते हुए कहा था कि लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है।

देश के 3 सबसे बड़े डॉक्टर की 35 बातें: कोरोना में Remdesivir रामबाण नहीं, अस्पताल एक विकल्प… एकमात्र नहीं

देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच आज (अप्रैल 21, 2021) शाम 5 बजे एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया, नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी, मेदांता के चेयरमैन डॉ नरेश त्रेहान ने कोरोना के मुद्दे पर एक साथ आकर चर्चा की। कोरोना से जुड़ी समस्याओं पर बात करते हुए इस टीम ने कुछ समाधान और ध्यान रखने वाली बातें बताईं। 

एक्सपर्ट टीम की चर्चा न्यूज एजेंसी एएनआई पर प्रसारित हुई। इस चर्चा के महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं: 

नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी

– संक्रमण से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखने पर टेस्ट सबसे जरूरी, आइसोलेशन आवश्यक।
– पानी पीएँ। मास्क पहनें।
– संक्रमण की रिपोर्ट आने पर अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें।
– जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट कराएँ।
– किसी भी प्रकार से पैनिक न करें।
– समस्या का समाधान अब संभव है।
– बीमारी के लक्षण न होने पर खुद को घर में आइसोलेट करें।
– ऑक्सीमीटर घर पर अवश्य रखें।
– ऑक्सीजन लेवल हर 6 घंटे में चेक करते रहें।
– 94 प्रतिशत तक ऑक्सीजन लेवल पर घबराए नहीं। इससे ज्यादा ड्रॉप होने पर अस्पताल जाएँ। डॉक्टर से संपर्क करें। सारे निर्देश फॉलो करें।
– सही समय पर सही इलाज बचा सकती है जान।
– संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आने से पहले न मानें कि आप कोविड पॉजिटिव नहीं हैं।

मेदांता के डॉ नरेश त्रेहान

– डॉक्टर से संपर्क करके सही सलाह लें।
– संक्रमित होने पर यदि घर में जगह है तो खुद को आइसोलेट करें।
– मिड लेवल सिम्पटम होने पर ही अस्पताल जाएँ।
– बहुत कम लोगों को अस्पताल की जरूरत।
– स्वास्थ्य संस्थानों में सबको पर्याप्त केयर देने के लिए जगह नहीं।
– किसी हालत में घबराएँ नहीं।
– बड़ी तादाद में लोग ठीक हुए।
– ऑक्सीजन लेवल न ठीक होने पर ही अस्पताल पहुँचे।
– अस्पतालों के पास पर्याप्त ऑक्सीजन मात्रा है यदि उसे बर्बाद न किया जाए।
– ऑक्सीजन बर्बादी से सिर्फ़ मरीजों को नुकसान होगा।
– रेमडेसिवीर भी रामबाण नहीं है।
– उपकरणों का बहुत उत्पाद हुआ है। घबराने की जरूरत नहीं।

AIIMS दिल्ली के निदेशक डॉ गुलेरिया

– 85% लोग रिकवर हुए हैं, बिना किसी भारी-भरकम ईलाज के।
– 15% को सिर्फ़ विस्तृत इलाज की जरूरत पड़ी।
– ज्यादातर लोगों को अस्पताल की जरूरत नहीं।
– पैरासिटामॉल से मरीज ठीक हो रहे। रेमडेसिवीर की जरूरत बहुत कम को।
– होम आइसोलेशन और अपने डॉक्टर से बात करना- अस्पताल आने से बेहतर।
– ऑक्सीजन बहुत जरूरी है। फेफड़े संबंधी बीमारी में बहुत ज्यादा। लेकिन जरूरत से अधिक से लेना सिर्फ़ ऑक्सीजन की बर्बादी है।
– ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 पहुँचने पर मॉनिट्रिंग आवश्यक, लेकिन ऑक्सीजन की जरूरत नहीं।
– जरूरतमंद के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध हो, इसलिए बेवजह इस्तेमाल करके इसे बर्बाद न करें।
– वैक्सीन आपको बड़ी बीमारियों से बचाएगी। वायरस आने से नहीं रोकेगी। वायरस आएगा, लेकिन एंटीबॉडीज के कारण असर नहीं दिखा पाएगा।
– वैक्सीन लेने के बाद RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। इसलिए उस समय भी अपने आस-पास लोगों से दूरी बनाएँ।
– वैक्सीन एक हथियार है महामारी से लड़ने का। कोशिश करें कि संक्रमण की चेन तोड़ें। दो गज की दूरी का पालन करें। भीड़-भाड़ में जानें से बचें। अपना खान-पान अच्छा ख्याल रखें। हर नागरिक को महामारी के हिसाब से व्यवहार करने की आवश्यकता।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। 2.95 लाख नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,56,16,130 हो गई है। वहीं 2,023 और मरीजों की मौत हो जाने से मृतकों की गिनती भी 1,82,553 पहुँच गई है। इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड वैक्सीन को लेकर बताया है कि 95 दिन में 13 करोड़ वैक्सीन डोज देने वाला भारत पहला देश है।

‘VHP और बजरंग दल हैं उग्रवादी संगठन, PM मोदी हिटलर, दक्षिणपंथ फासीवादी’: केरल के प्रोफेसर गिल्बर्ट का क्लास लेक्चर

सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ केरल के असिस्टेंट प्रोफेसर गिल्बर्ट सेबेस्टियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। वो विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (CUKTA) कासरगोड के सचिव भी हैं। इंटरनेशनल रिलेशन्स एंड पॉलिटिक्स विभाग में पढ़ाने वाले सेबेस्टियन JNU से पोस्ट डाक्टरल फेलो हैं। फासीवाद और नाजीवाद पर उनके लेक्चर के एक वायरल ऑडियो क्लिप में उन्हें हिन्दू धर्म, स्वस्तिक, हिन्दुओं, संघ, भाजपा और हिन्दू संगठनों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है।

ऑपइंडिया ने भी उस कथित ऑडियो क्लिप को एक्सेस किया, जिसमें वो दुनिया भर में दक्षिणपंथी सरकारों के उदय को दक्षिण पंथ के पुनरुत्थान बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथ लालच देकर सत्ता में आता है, जैसे 30 के दशक में इटली में मुसोलोनी और जर्मनी में हिटलर ने सत्ता पाई। उन्होंने कहा कि नौकरियों, इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छी आय का वादा कर के दक्षिणपंथ सत्ता में आता है, जिसमें कॉर्पोरेट और मध्यम वर्ग उनकी मदद करते हैं।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

उन्होंने कहा कि भाजपा ने भी यही ‘तिकड़म’ आजमाया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा करके सत्ता में आने वाली भाजपा इस विषय में कुछ नहीं कर रही। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण भारत में लोग शिक्षित हैं, इसीलिए वो भाजपा पर भरोसा नहीं करते। साथ ही जोड़ा कि दलितों और कामकाजी लोगों को भाजपा पर विश्वास नहीं। उन्होंने दावा किया कि अगर ये लोग भाजपा को समर्थन देते भी हैं तो तुष्टिकरण के कारण।

बकौल गिल्बर्ट सेबेस्टियन, नाजियों का Hakenkreuz और भारत का पवित्र स्वस्तिक चिह्न एक ही है। उन्होंने पूछा कि नाजियों के इस प्रतीक को आपने कहाँ देखा है? एक छात्र ने जब उठ कर कहा कि इस चिह्न का प्रयोग मंदिरों में होता है तो वो चुप रहे। बता दें कि ये दोनों एकदम अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा कि अन्य राजनीतिक व्यवस्थाओं के उलट फासीवाद और तानाशाही सिविल सोसाइटी को उग्रवादियों के रूप में प्रयोग में लाता है।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

इसके लिए उन्होंने इटली में ब्लैक शर्ट्स और जर्मनी में ब्राउन शर्ट्स का उदाहरण दिया और कहा कि भारत में RSS और VHP को भी उसी कैटेगरी में रखा जा सकता है। उन्होंने RSS को सभी हिन्दू संगठनों की माँ बताते हुए कहा कि VHP और बजरंग दल इसके उग्रवादी हिस्से हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिन्दू NRI विदेश से इन्हें रुपए भेजते हैं, ताकि देश में अशांति हो। उन्होंने भाजपा को RSS का मुखौटा बताते हुए कहा कि संघ के बैनर तले कई संगठन हैं, जो उसके लिए ‘गंदा काम’ करते हैं।

गिल्बर्ट सेबेस्टियन के लेक्चर का स्लाइड शो

उन्होंने 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों का दोष भी बजरंग दल पर ही मढ़ा। साथ ही उत्तर भारतीय हिन्दुओं को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की जड़ करार दिया। गिल्बर्ट ने छात्रों को बरगलाते हुए कहा कि निर्भया कांड का एक दोषी रोज पूजा-पाठ किया करता था। उन्होंने अपने लेक्चर में हिन्दुओं को अनपढ़ और अपराधी बताया। साथ ही पीएम मोदी की तुलना नाजी तानाशाह हिटलर के साथ कर डाली।

‘केजरीवाल सरकार ने लूट लिया हमारा ऑक्सीजन टैंकर’, अब पुलिस के साथ भेजेंगे’: हरियाणा के मंत्री

देश में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों से स्थिति गंभीर होती जा रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सनसनीखेज दावा किया है। अनिल विज ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर ऑक्सीजन लूटने का आरोप लगाया। 

अनिल विज ने कहा, “हम पर दबाव डाला जा रहा है कि हम दिल्ली को ऑक्सीजन दें। हमारी पहली प्राथमिकता हरियाणा है। कल हमारा टैंकर फरीदाबाद के अस्पतालों के लिए दिल्ली से जा रहा था। दिल्ली सरकार ने हमारा टैंकर लूट लिया। मैंने आदेश जारी किए हैं कि जो टैंकर जाएगा वो पुलिस के साथ जाएगा।”

दिल्ली सरकार ने मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) रात को का दावा किया था कि उनके कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी है और कुछ घंटों की जरूरत की ही ऑक्सीजन बची है, हालाँकि इसके बाद मंगलवार रात और बुधवार को दिन में दिल्ली में ऑक्सीजन की सप्लाई को बढ़ाया गया है। दिल्ली के अस्पताल कोरोना मरीजों से भरे पड़े हैं और न के बराबर आईसीयू तथा वेंटिलेटर बेड बचे हैं।

कोरोना की इस दूसरी लहर में दिल्ली के अस्पतालों पर भारी दबाव है। दिल्ली के अस्पताल इस वक्त न सिर्फ पूरी तरह से भर चुके हैं बल्कि उनमें ऑक्सीजन की भी भारी किल्लत हो रही है। कल शाम ही दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने ट्वीट कर पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि अस्पताल के पास सिर्फ 4 घंटे का ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन अगर सही समय पर न मिला तो दिक्कत हो सकती है। उनके इस ट्वीट के चंद घंटों के बाद ही उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से एक ऑक्सीजन टैंकर जीटीबी अस्पताल पहुँच गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की खातिर हर संभव प्रयास कर रहा है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि आवश्यक जन स्वास्थ्य के सामान की कमी नहीं हो। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय दिल्ली के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू करने का हरसंभव प्रयास कर रहा है ताकि राजधानी के अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी नहीं हो। 

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की ‘नेगरी सेम्बीलन इस्लामी रिलीजियस काउंसिल (MAINS)’ ने कहा है कि ‘अल्लाह’ एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए। संस्था ने ऐलान किया कि ‘अल्लाह’ शब्द का न तो किसी अन्य मजहब के लोग इस्तेमाल कर सकते हैं और ही अल्लाह की तुलना किसी अन्य मजहब के देवी-देवता अथवा ईश्वर से की जा सकती है।

इस्लामी काउंसिल MAINS के अध्यक्ष दातुक डॉक्टर अब्दुल अजीज शेख अल कादिर ने ये घोषणा की। ये मलेशिया के नेगेरी सेम्बीलन (Negeri Sembilan) राज्य की मजहबी संस्था है। इस राज्य की राजधानी पोर्ट डिक्सॉन (Port Dickson) में स्थित है, जो मलेशिया के पूर्वी तटवर्ती इलाके में आता है और राजधानी क्वालालंपुर से दक्षिण की तरफ है। मलेशिया के राज्यों में ‘अल्लाह’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।

कादिर ने कहा कि राज्य में शांति और भाईचारा कायम रखने के लिए और सभी मजहबों और नागरिकों की संवेदनशीलता को समझते हुए ग़ैर-मुस्लिमों को ये सलाह दी जाती है कि वो कानून का पालन करें और ‘अल्लाह’ शब्द को लेकर जारी फतवा के हिसाब से चलें। बता दें कि इस राज्य में सितंबर 14, 2016 को ही एक राजपत्रित फतवे में मुस्लिमों को ‘अल्लाह’ शब्द का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी गई थी।

उन्होंने कहा कि ‘अल्लाह’ शब्द के इस्तेमाल से गाली या अपमान की बू आती है तो फिर कानून के हिसाब से सजा दी जाएगी। राज्य में मुस्लिमों के बीच मजहबों के प्रचार को रोकने के लिए पहले ही कानून बन चुका है। सिर्फ ‘अल्लाह’ ही नहीं, बल्कि 36 शब्दों की एक सूची तैयार की गई है जिसका इस्तेमाल ग़ैर-मुस्लिम नहीं कर सकते। मुस्लिमों के बीच अन्य मजहबों के प्रचार को ‘प्रोपेगेंडा’ बता कर प्रतिबंधित कर दिया गया।

मार्च में मलेशिया के 13 राज्यों में से एक सेलंगोर के सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी। शरफुद्दीन ने ‘सेलंगोर इस्लामी रिलीजियस काउंसिल’ से कहा था कि वे इस मामले में हाई कोर्ट में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा था कि वे अपने इस स्टैंड पर कायम हैं कि ‘अल्लाह’ शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने इस फतवे को निरस्त किया था, जिसके बाद कई राज्यों ने विरोध किया।

SII ने तय की कोविशील्ड की कीमत: राज्य और निजी अस्पताल खरीद सकेंगे उत्पादन का 50% हिस्सा

भारत की प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने Covid-19 वैक्सीन कोविशील्ड की कीमत तय की है। 1 मई से शुरू हो रहे वैक्सीनेशन के अगले चरण के लिए यह कीमत राज्य सरकार और निजी अस्पतालों के लिए तय की गई है। एसआईआई के अनुसार राज्य की सरकारों के लिए यह कीमत 400 रुपए प्रति डोज होगी एवं निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपए प्रति डोज के हिसाब से चुकाने होंगे।

अपने मीडिया स्टेटमेंट में एसआईआई ने भारत सरकार द्वारा वैक्सीनेशन कार्यक्रम के विस्तार और वैक्सीन निर्माताओं के द्वारा 1 मई 2021 से पहले राज्यों और बाजार में उपलब्ध वैक्सीन की कीमतें तय करने के सरकार के आदेश के बाद यह रेट लिस्ट जारी की है।

कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में कहा है कि कुल उत्पादन का 50% हिस्सा भारत सरकार के वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लिए समर्पित होगा जबकि शेष 50% राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों की आपूर्ति के लिए होगा। कंपनी ने यह स्टेटमेंट केंद्र सरकार की वैक्सीन खरीद की गाइडलाइन के बाद जारी किया है।

एसआईआई ने यह भी बताया कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध वैक्सीनों की तुलना में कोविशील्ड की कीमतों को कम रखने का प्रयास किया गया है। कंपनी के अनुसार अमेरिका की वैक्सीन की कीमत 1500 रुपए से अधिक है जबकि बाजार में रूस और चीन की वैक्सीन की कीमत 750 रुपए से अधिक है।

एसआईआई ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में अन्य कॉर्पोरेट संस्थानों और निजी ईकाईयों को राज्य और निजी स्वास्थ्य क्षेत्रों के माध्यम से वैक्सीन प्राप्त करने की सलाह दी है क्योंकि वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए वैक्सीन को सभी के लिए उपलब्ध कराना फिलहाल मुश्किल है।

एसआईआई द्वारा कोविशील्ड की कीमतें तय कर देने का बाद राज्य सरकारें और निजी अस्पताल इन्हीं कीमतों के आधार पर वैक्सीन का अंतिम मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। हालाँकि उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्य अपने निवासियों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने का निर्णय ले चुके हैं।

भारत सरकार का वैक्सीनेशन कार्यक्रम का तीसरा चरण :

19 अप्रैल को भारत सरकार ने कोविड-19 के वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की घोषणा की। इसके अनुसार 1 मई 2021 से 18 वर्ष से अधिक की आयु के सभी नागरिक वैक्सीन का डोज ले पाएँगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वैक्सीनेशन कार्यक्रम से संबंधित कई नीतियों की समीक्षा हुई जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब राज्य, वैक्सीन निर्माताओं से सीधे वैक्सीन खरीद सकते हैं। केंद्र सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को अपने उत्पादन का 50% राज्य और अन्य निजी इकाईयों को प्रदान करने की छूट भी प्रदान की।

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (अप्रैल 21, 2021) को देश को संबोधित किया। लेकिन यह छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता टीएस सिंहदेव को रास नहीं आया। संबोधन में पीएम ने कोरोना संक्रमण को लेकर पैनिक नहीं होने की लोगों से अपील लोगों से की। साथ ही राज्य सरकारों से कहा था कि उन्हें लॉकडाउन को बिलकुल अंतिम विकल्प की तरह देखना चाहिए। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता सिंहदेव इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने संबोधन में आखिर राज्यों को वैक्सीन देने की बात क्यों नहीं की।

गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने बीते सोमवार को ही कोरोना के बढ़ते केसों के मद्देनजर 18 साल से ऊपर नागरिकों को वैक्सीन देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने स्थिति को देखते हुए वैक्सीनेशन पॉलिसी में बदलाव कर राज्यों के लिए प्रावधान बनाया कि वे उत्पादक से सीधे वैक्सीन खरीद सकते हैं। केंद्र सरकार ने ये भी घोषणा की कि उत्पादक अपनी वैक्सीन के 50% आउटपुट को खुले बाजार में और अन्य निजी कंपनियों को बेच सकते हैं।

केंद्र ने यह भी कहा कि कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर और जिनकी उम्र 45 साल से ऊपर है उन्हें केंद्र मुफ्त में वैक्सीन देगी। केंद्र ने घोषणा की कि अपने फंड से वह राज्यों को वैक्सीन, संक्रमण की गंभीरता और खुराक की बर्बादी के मामले में राज्य सरकारों की दक्षता के आधार पर आवंटित करेगी।

टीएस सिंहदेव उन विपक्षी नेताओं में से हैं जिन्होंने इसी साल फरवरी में भारत में निर्मित कोवैक्सीन के असर पर सवाल खड़े किए थे। ये तब की बात है जब सरकार ने फ्रंटलाइन वर्कर के लिए इस वैक्सीन के इस्तेमाल को अनुमति दी थी।

साल 2021 के फरवरी में टीएस देव का बयान

2021 में सिंहदेव ने आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाली स्वदेशी कोवैक्सीन के यूज पर कहा था कि वह इसे अपना समर्थन नहीं देते। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस वैक्सीन के सुरक्षित होने पर सवाल उठाकर डर फ़ैलाने की कोशिश की थी। हाल में उनका जिक्र डॉ. हर्षवर्धन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में भी किया था।

बघेल का नाम लिए बिना डॉ. हर्षवर्धन ने पत्र में कहा था कि आपकी पार्टी के एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने स्वदेशी वैक्सीन के खिलाफ लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर उकसाने का काम किया था।

बता दें कि फरवरी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि उनका राज्य हर किसी को वैक्सीन फ्री में देगा। फरवरी 2021 में सीएम बघेल ने कहा था, “अगर केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया तो छत्तीसगढ़ सरकार कोविड-19 वैक्सीन का खर्चा उठाएगी।” बघेल ने यह भी कहा था कि उन्होंने इस काम के लिए फंड बचा कर रखे हुए हैं। अगर केंद्र सरकार ने वैक्सीन उपलब्ध कराने से मना किया तो अपने राज्य के लोगों को हम कोविड वैक्सीन अपने खर्च पर देंगे।

उल्लेखनीय है कि जब छत्तीसगढ़ कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में आया तब बघेल अपनी पार्टी के लिए असम में प्रचार करने में व्यस्त थे। अब तक छत्तीसगढ़ में 5.74 लाख कोरोना संक्रमण के केस आ चुके हैं। इनमें से 1.25 लाख केस अब भी एक्टिव हैं। हालातों का हवाला दे राज्य में मंगलवार से कम्प्लीट लॉकडाउन लगाया गया है। लेकिन मुख्यधारा का मीडिया इन सब चीजों पर बिलकुल चुप्पी बनाए हुए है।

ऑक्सीजन लीक के कारण 22 की मौत, कई गंभीर: नासिक के जाकिर हुसैन अस्पताल में हादसा

महाराष्ट्र के नासिक में कोरोना आपदा के बीच जाकिर हुसैन अस्पताल में एक बड़ा हादसा होने की खबर है। यहाँ ऑक्सीजन टैंक लीक हो जाने से 22 मरीजों की मृत्यु हो गई जबकि कई अन्य लोगों की हालत गंभीर है। नासिक के जिलाअधिकारी ने स्वयं अस्पताल में दुर्घटना में मारे गए लोगों की संख्या की पुष्टि की।

रिपोर्ट के अनुसार, टैंकर भरने के दौरान यह लीकेज हुई और अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन फैलने से लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। इस दौरान 25 मरीजों का अस्पताल में वेंटिलेटर पर इलाज जारी था। कई लोगों की हालत गंभीर थी। वहीं 60 से ज्यादा मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी।

इससे पहले एफडीए मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने घटना पर बात करते हुए 11 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा ”इस दुर्घटना में 11 लोगों की मौत हुई है। हम इसकी जाँच करेंगे। आगे ऐसी कोई घटना न घटे, इस पर भी जाँच की जाएगी। जो कोई भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा “नासिक में टैंकर के वॉल्व लीकेज के चलते बड़े स्तर पर ऑक्सीजन का रिसाव हुआ है। जिस अस्पताल में यह की जा रही थी, वहाँ इसका निश्चित असर हुआ होगा, लेकिन मुझे अभी और जानकारी जुटाना बाकी है। हम और जानकारी जुटाने के बाद प्रेस नोट जारी करेंगे।”

वहीं, अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि उन्हें 12.30 बजे कॉल पर बताया गया कि ऑक्सीजन टैंक लीक हो रहा है। इसके बाद वह मौके पर पहुँचे और पाया कि ऑक्सीजन टैंक का वॉल्व खुला हुआ था, वहीं से ऑक्सिजन लीक हो रही थी। उनके मुताबिक मौके पर पहुँच कर उन्होंने खुले वॉल्व को बंद किया किया लेकिन तब तक काफी ऑक्सीजन लीक हो चुकी थी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना बेकाबू स्थिति में है। वहाँ लगातार नए केस बढ़ रहे हैं। 24 घंटे में वहाँ से 62 हजार से अधिक नए मामले आए हैं। वहीं 24 घंटे में 519 की मृत्यु भी हुई है। ऐसे में इस घटना ने तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का कहना है कि उनके मरीज की मृत्यु ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की वजह से हुई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार से मरीजों को मदद देने के साथ, मामले में विस्तृत जाँच की माँग की है।

केंद्र गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना पर ट्वीट कर अपना दुख व्यक्त किया है। अमित शाह ने लिखा, “नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सिजन लीक होने से हुई दुर्घटना का समाचार सुन व्यथित हूँ। इस हादसे में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनकी इस अपूरणीय क्षति पर अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। बाकी सभी मरीजों की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।”

जानिए कौन हैं 5 माह की गर्भवती पुलिस अफसर जो छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दे रहीं ड्यूटी: तस्वीरें वायरल

छत्तीसगढ़ पुलिस की डीएसपी शिल्पा साहू सुर्खियों में हैं। इनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है। तस्वीर में शिल्पा साहू हाथ में डंडा लेकर सड़क पर लॉकडाउन का पालन करवाती नजर आ रही है। सादी वर्दी में ड्यूटी दे रही शिल्पा साहू की इस तस्वीर की खास बात यह है कि वे पाँच माह की गर्भवती हैं।

जानिए कौन हैं 5 माह की गर्भवती पुलिस अफसर जो छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दे रहीं ड्यूटी

आइए जानते हैं कि डीएसपी शिल्पा साहू की ट्रेनिंग, लव स्टोरी, नक्सलियों का सफाया और अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर में लॉकडाउन का पालन करवाने तक की पूरी कहानी। शिल्पा साहू मूलरूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली हैं। इनके पति देवांश सिंह राठौर भी छत्तीसगढ़ पुलिस में डीएसपी हैं। ये छत्तीसगढ़ के लोरमी से हैं।

शिल्पा व देवांश ने 2013 में पास की पीएससी 

शिल्पा व देवांश ने साल 2013 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। तब तक दोनों एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। पीएससी परीक्षा पास करने के बाद डीएसपी के रूप में साल 2016 में निमोरा एकेडमी में शिल्पा व देवांश ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे थे। तब इनकी मुलाकात हुई और शुरुआत में ही किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। हालाँकि ट्रेनिंग खत्म होते-होते दोनों की तकरार प्यार में बदल गई।

देवांश को जांजगीर चांपा और शिल्पा को बिलासपुर में तैनाती

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद देवांश को जांजगीर चांपा और शिल्पा को बिलासपुर में तैनात किया गया। दोनों की पोस्टिंग वाली जगहों के बीच मीलों की दूरियाँ थी, मगर दोनों एक दूसरे के दिल के काफी करीब थे। कुछ समय बाद शिल्पा को बालोद में बटालियन व देवांश को दंतेवाड़ा डीआरजी टीम का डीएसपी बनाया गया। इस दौरान चलाए गए नक्सल ऑपरेशन के लिए जाने वाली डीआरजी पुरुषों की टीम को एसडीओपी देवांश सिंह राठौर और दंतेश्वरी फाइटर्स महिला डीआरजी टीम को डीएसपी शिल्पा साहू लीड करती थी।

शादी के बाद भी किया नक्सलियों का सफाया 

जून 2019 में शिल्पा और देवांश ने लव मैरिज का फैसला किया तो दोनों के सामने सामाजिक कुरीतियाँ आड़े आ गई, मगर दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और विवाह बंधन में बँध गए। शादी के बाद डीएसपी पति पत्नी हाथ में एके-47 लेकर नक्सलियों का सफाया करने जंगल में जाते थे। ये पोटाली, चिकपाल, किरंदुल क्षेत्र के अंदरूनी गाँवों में नक्सल ऑपरेशन चला चुके हैं।

डीजी ने दिया तबादले का तोहफा 

शिल्पा साहू बताती हैं कि डीजी डीएम अवस्थी को शादी का कार्ड देने गई थी। तब उन्होंने शिल्पा को शादी के तोहफे के रूप में पति पत्नी की एक साथ पोस्टिंग कर दी। उस वक्त डीजी ने कहा था- देवांश किरंदुल एसडीओपी और शिल्पा डीएसपी दंतेवाड़ा हेडक्वार्टर होंगी। दोनों को एक ही जिले में भेज रहा हूँ। मेरी तरफ से दोनों को शादी का यह तोहफा है। दोनों दंतेवाड़ा- किरंदुल बॉर्डर पर मिलते रहना।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए शिल्पा साहू ने कहा कि राज्य में कोविड महामारी की स्थिति बहुत गंभीर है, तो मुझे लगता है कि लोगों को अपने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए कर्तव्यबोध होता है। साथ ही ऐसी परिस्थितियों में जनता के बीच एक मजबूत संदेश जाना चाहिए। अगर वे देखते हैं कि मुझे गर्भवती होने के बावजूद लॉकडाउन लागू करवाने के लिए बाहर निकलना पड़ रहा है तो उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए।

सीनियर आईपीएस ने भी की तारीफ

पाँच माह की गर्भवती होने के बावजूद अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देने वाली शिल्पा साहू की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर लिखा है कि यह तस्वीर दंतेवाड़ा डीएसपी शिल्पा साहू की है। शिल्पा गर्भावस्था के दौरान भी चिलचिलाती धूप में अपनी छड़ी के साथ सड़कों पर मुस्तैदी से तैनात हैं और लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील कर रही हैं।

उन्होंने लिखा, “कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से लोगों को बचाने पुलिस इन दिनों हर संभव कोशिश कर रही है आप भी जिम्मेदार नागरिक की भूमिका अदा करें और लॉकडाउन के दौरान घर पर सुरक्षित रहें।”