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Remdesivir इंजेक्शन के निर्यात पर केंद्र सरकार ने लगाई रोक, ब्लैक मार्केटिंग पर होगी कड़ी कार्रवाई

केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

देश में बढ़ते कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (API) के निर्यात को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मरीजों को रेमडेसिविर की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। रेमडेसिविर का उपयोग कोविड-19 के ईलाज में होता है।

सरकार ने रेमडेसिविर के सभी स्थानीय निर्माताओं को आदेशित किया है कि वे अपनी वेबसाइट पर स्टॉकिस्ट और वितरकों की पूरी जानकारी प्रदान करें, जिससे रेमडेसिविर की आपूर्ति सहज और सरल हो सके। इसके अलावा ड्रग इंस्पेक्टर्स को रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग को रोकने और उसके अवैध संग्रहण पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

सरकार ने फार्मास्युटिकल विभाग को निर्माताओं के साथ विचार-विमर्श करके रेमडेसिविर के उत्पादन को तेज करने के लिए निर्देशित किया है क्योंकि आगामी समय में रेमडेसिविर की माँग तेजी से बढ़ने की संभावना है।

आईएमए के अध्यक्ष ने किया निर्णय का स्वागत

सरकार द्वारा रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जयलाल ने कहा कि वह सही समय पर लिए गए सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वायरस की पहली वेव के बाद भी रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और वह सरकार से यह अनुरोध करते हैं कि रेमडेसिविर से जुड़े सुधारों को सबसे निचले स्तर पर भी लागू किया जाए।

भारत में वर्तमान में सात ऐसी कंपनियाँ हैं, जो रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्माण कर रही हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन के उत्पादन के लिए इन कंपनियों का अमेरिका की Gilead Sciences के साथ अग्रीमन्ट है। इन कंपनियों की उत्पादन क्षमता फिलहाल 33.80 लाख इंजेक्शन प्रति महीने की है।

बंगाल में ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ है ही नहीं… आरफा खानम शेरवानी ‘आँकड़े’ दे छिपा रहीं लॉबी के हार की झुँझलाहट?

प्रशांत किशोर जैसे राजनैतिक ‘जानकार’ के द्वारा मुस्लिमों के तुष्टिकरण की बात को स्वीकारने के बाद भी ‘द वायर’ की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को नकारते हुए उसे मात्र एक ‘मिथक’ ही माना है। उन्होंने अपने दावे की प्रमाणिकता के लिए दशकों से मुस्लिमों के सामाजिक विकास के सूचकांकों में निचले स्तर पर बने रहने का उदाहरण पेश किया। मुस्लिम दूसरे समुदायों से समृद्ध नहीं हैं, इसलिए शेरवानी ने भारतीय राजनीति में उनके तुष्टिकरण के अटल सत्य को नकार दिया।  

शेरवानी ने तर्क दिया कि श्रम बल सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार बंगाल में मात्र 13% मुस्लिमों के पास एक वेतन युक्त नौकरी है, जबकि उसमें से भी 34.3% कैजुअल श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। शेरवानी ने कहा कि दोनों ही राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

शेरवानी ने भले ही इन मुट्ठीभर तर्कों के कारण मुस्लिम तुष्टिकरण को नकारने का प्रयास किया हो किन्तु सत्य यही है कि इस तुष्टिकरण ने बंगाल के अंदर भाजपा को जो अवसर दिया है, उसी कारण सा ही अब शेरवानी तुष्टिकरण की राजनीति को मिथक बताने लगी हैं।

आरफा खानम शेरवानी के तर्कों को सत्य माना जा सकता था लेकिन केवल तभी जब मुस्लिम समुदाय के नेतृत्वकर्ता और राजनैतिक जनप्रतिनिधि मजहबी प्राथमिकताओं के स्थान पर आर्थिक समृद्धि, साक्षरता और रोजगार के उचित अवसरों के लिए चिंतित होते। जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। मुस्लिम समाज में असदुद्दीन ओवैसी, अकबरुद्दीन ओवैसी और बंगाल की राजनीति में अबास सिद्दीकी के बढ़ते मजहबी जनाधार के आधार पर यही कहा जा सकता है कि मुस्लिम मतदाता अभी भी मजहबी मसलों को प्राथमिकता मे रखते हैं।

मुस्लिम समुदाय के मजहबी मसले आर्थिक और सामाजिक चिंताओं पर भारी पड़ते हैं। मुस्लिम समुदाय एक चक्र में उलझा हुआ है, उसके प्रतिनिधि भी मजहब को ही प्राथमिकता दे रहे हैं और प्राथमिकताओं का यही क्रम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में मुस्लिमों के तुष्टिकरण का सबसे बड़ा कारण है। भारत के धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों ने इसी कारण से मुस्लिमों के मजहबी मसलों को विकास और समृद्धि के उपायों से ऊपर रखा।

15 मिनट के लिए पुलिस हटा देने की माँग करने वालों और 50 करोड़ भारतीयों को वायरस से मारने की दुआ माँगने वालों से आर्थिक उन्नति से संबंधित योजनाओं की उम्मीद रखना पूर्णतः बेमानी है। जब नेता चुना ही जा रहा है मजहबी मसलों को निपटाने के लिए तो फिर उससे विकास और आर्थिक उन्नति की कौन सी उम्मीद की जाए!

शेरवानी ने जो भी कहा, उसे डॉ. भीमराव अंबेडकर के शब्दों से तौलते हैं। अंबेडकर ने अपनी किताब ‘Pakistan or the Partition of India’ में साफ तौर पर कहा है कि मुस्लिम समुदाय का सामाजिक ही नहीं अपितु राजनैतिक अस्तित्व भी ठहराव पर आधारित है। मुस्लिम इलाकों में चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी सामाजिक मुद्दों के स्थान पर मजहबी अवधारणाओं और हिन्दू-मुस्लिम पहचान पर ही चुनाव लड़ता है। उनके लिए राजनीति का भी कोई महत्व नहीं है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि सामाजिक विकास के मुद्दे मुस्लिम प्रत्याशियों के वादों से गायब रहते हैं। मुस्लिम प्रत्याशियों और उनके मतदाताओं के विषय में कहते हुए अंबेडकर कहते हैं कि मुस्लिमों का अपना एक राजनैतिक संसार है, जहाँ सिर्फ एक ही चीज सबसे महत्वपूर्ण है और वह है उनका ‘मजहब’।

वर्तमान राजनीति में भी यही सही है। यदि आरफा खानम शेरवानी अपने तर्कों पर यकीन करती हैं तो उन्हें अकबरुद्दीन ओवैसी, अमानतुल्ला खान और अब्बास सिद्दीकी जैसे नेताओं की बढ़ती मजहबी लोकप्रियता और उसके परिप्रेक्ष्य में उनके बयानों पर ध्यान देना चाहिए। ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल के अंदर इसी तुष्टिकरण का प्रयास किया, जिसकी कीमत हिन्दू हितों को दरकिनार करके चुकाई गई। संभव है कि बंगाल में दशकों से हुआ यह तुष्टिकरण ममता की कुर्सी और उनके राजनैतिक अस्तित्व दोनों को ही कुछ समय के लिए वनवास में धकेल दे।

अंग्रेजी में इस लेख को पूरा पढ़ें।

सबरीमाला मंदिर खुला: विशु के लिए विशेष पूजा, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने किया दर्शन

केरल स्थित भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को विशेष पूजा का आयोजन किया गया। केरल में मनाए जाने वाले विशु त्योहार से पहले शनिवार को मंदिर को खोला गया है। कोरोना संक्रमण के बीच मंदिर खुलने के बाद कई सारे श्रद्धालु भी दर्शन पूजन के लिए पहुँचे। रविवार (अप्रैल 11, 2021) को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने भी दर्शन पूजन के लिए मंदिर का दौरा किया।

त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने कहा कि कोविड-19 मामलों की संख्या में वृद्धि के कारण मंदिर में कोविड -19 प्रतिबंध लागू रहेगा। कतार से गुजरने वाले भक्तों की संख्या अनिवार्य रूप से प्रतिदिन 10,000 होगी। रविवार से केवल उन्हीं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी, जिनके पास पिछले 48 घंटे में RT-PCR नेगेटिव सर्टिफिकेट होगा या फिर जिन्होंने कोरोना वैक्सीन का दोनों डोज ले लिया हो। प्रशासन ने कहा था कि भक्तों को रविवार सुबह 5 बजे दर्शन की अनुमति दी जाएगी, जिसके बाद मंदिर 14 अप्रैल को सुबह 5 बजे ‘विशुकनी’ के दर्शन के लिए खोला जाएगा।  

बता दें कि केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Election 2021) में सबरीमाला का मुद्दा छाया रहा है और सत्तारूढ़ एलडीएफ से कॉन्ग्रेस नीत यूडीएफ ने भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं से कई वादे किए हैं। विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ LDF (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) को निशाने पर लेने के लिए विपक्षी UDF (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) और राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने ‘सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश’ के मुद्दे को प्राथमिकता दी थी।

राज्य में मतदान के दिन भी यह मुद्दा बहस का केंद्र रहा और बड़े नेता इस विषय पर एक दूसरे से उलझे रहे। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि सबरीमाला के मुख्य देव भगवान अयप्पा और अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद एलडीएफ सरकार के साथ है, जिसने लोगों के कल्याण के लिए काम किया है।

विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस चुनाव में वाममोर्चा सरकार निश्चित ही भगवान अयप्पा एवं उनके श्रद्धालुओं के कोप का भाजन बनेगी। विजयन को निशाने पर लेते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि तीन साल पहले सबरीमाला में मुख्यमंत्री ने जो कुछ किया, वह ‘आसुरी कृत्य’ था और राज्य के लोग उनके ‘कपट भरे इस कर्म’ को नहीं भूलेंगे।

विजयन का ये बयान अजीब था, क्योंकि केरल की वामपंथी सरकार ने ही पूरी सुरक्षा के बीच तथाकथित महिला एक्टिविस्ट्स को सबरीमाला मंदिर के भीतर पहुँचाया था। साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था। प्रदेश भर में भगवान अय्यपा के भक्तों पर हजारों केस दर्ज किए गए थे, जिन्हें चुनाव से ऐन पहले हटा लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में भी केरल की सरकार ने श्रद्धालुओं का पक्ष नहीं लिया।

2018 में भी सीपीएम ने सर्वोच्च न्यायालय के उस विवादित फैसले का समर्थन किया था, जिसने उस परंपरा को अवैध करार दिया था, जिसके तहत केरल के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र सीमा वाली महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। सीपीआईएम के नेतृत्व वाले केरल प्रशासन पर जानबूझकर दो महिलाओं को स्वेच्छा से मंदिर में प्रवेश करा, प्राचीन परंपरा को तोड़कर मंदिर को ही दूषित करने के आरोप लगे थे।

रमजान हो या कुछ और… 5 से अधिक लोग नहीं हो सकेंगे जमा: कोरोना और लॉकडाउन पर CM योगी

कोरोना वायरस की दूसरी लहर को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने आदेश जारी किया है कि किसी भी त्योहार में धार्मिक स्थलों पर 5 से ज्यादा व्यक्ति नहीं जमा हो सकेंगे। सीएम योगी अगले दो दिनों में इस मसले पर धर्मगुरुओं से चर्चा कर उनसे इंसानी जीवन को महत्व देने की अपील करेंगे।

मुख्यमंत्री ने पुलिस कमिश्नर को लखनऊ में एक स्थान पर 5 से अधिक लोगों को इकट्ठा नहीं होने देने और व्यापारियों के साथ चर्चा कर सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया है। साथ ही कंटेनमेंट जोन में किसी भी तरह के यातायात पर रोक और एक संक्रमित मरीज से कम से कम 25 मीटर व एक से अधिक मरीजों के मामले में 50 मीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन में बदलने का निर्देश दिया गया है। कंटेनमेंट जोन में पीपीई किट पहनना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोक भवन में कोरोना पर हाई लेवल मीटिंग के बाद कोरोना की सेंकेड वेव को पहली से अधिक खतरनाक बताया और कहा कि हमें कोविड की पहली लहर का अनुभव है, इसलिए दूसरी को रोकने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है।

शहर के सभी कोविड अस्पतालों में व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद सीएम योगी ने बलरामपुर में 300 बेड के कोविड डेडीकेटेड अस्पताल को रविवार से शुरू करने का आदेश दिया। इसमें 20 आईसीयू समेत आईसोलेशन की सुविधा भी होगी।

सर्वाधिक कोरोना प्रभावित जिलों लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर में टेलीमेडिसिन की सेवा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही प्रदेश में रोज हो रही कोरोना जाँचों में कम से कम एक लाख आरटीपीसीआर टेस्ट कराने का आदेश सीएम ने दिया है।

इंसान से आस्था है, आस्था से इंसान नहीं: CM

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एक स्थान पर 5 लोगों से अधिक जमा नहीं होने का आदेश देने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आस्था इंसान से है न कि इंसान आस्था से। रमजान समेत अन्य त्योहारों को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा कि इंसान रहेगा तो ही आस्था रहेगी। कोई भी धार्मिक स्थान हो, 5 से अधिक लोग एक स्थान पर एकत्रित नहीं हो सकेंगे।

यूपी में वैक्सीन की कमी नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैक्सीन पर जारी सियासत को लेकर कहा कि उत्तर प्रदेश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम हमारे देश में चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश के 6 हजार केंद्रों पर टीकाकरण अभियान चल रहा है। वहीं टीके की कमी को लेकर सीएम ने कहा कि राज्यों की सही तैयारी नहीं होने के कारण ऐसा हुआ होगा। देश में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि टीके की बर्बादी को रोकने के लिए रणनीति तैयारी की जा रही है।

यूपी में नहीं लगेगा लॉकडाउन

महाराष्ट्र की तरह उत्तर प्रदेश में भी लॉकडाउन को लेकर सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि राज्य में लॉकडाउन की कोई आवश्यकता है। जहाँ भी 500 से ज्यादा केस आ रहे हैं, वहाँ नाइट कर्फ्यू लगाया जाएगा, लेकिन इस दौरान आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई होती रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया है कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों और कॉलेजों को 20 अप्रैल तक के लिए बंद कर दिया गया है। कोचिंग, क्लब भी बंद रहेंगे। बंद सभागारों में 50 और खुले में 100 से ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा।

योगी के कोविड प्रबंधन की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने की है सराहना

अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने संक्रमण काल और लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों की प्रदेश वापसी कुशल तरीके से कराने और उनके साथ बेहतर समायोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की थी। अपनी स्टडी में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कहा था, “जब कोरोना संक्रमण से सारा विश्व परेशान था, तो योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी चुनौतियों को सहर्ष स्वीकारने के साथ ही प्रत्येक नागरिक को इस संकट से उबारने के लिए कार्य किया। सरकार ने प्रवासियों को परिवहन सुविधा देने के साथ ही उन्हें राशन किट भी बाँटे। दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को मुफ्त राशन देने के साथ ही उनके कौशल के अनुसार घर में ही उन्हें काम भी उपलब्ध कराया था।”

राजस्थान: छबड़ा में सांप्रदायिक हिंसा, दुकानों को फूँका; पुलिस-दमकल सब पर पत्थरबाजी

राजस्थान के बारां जिले के छबड़ा में सांप्रदायिक हिसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया गया है। फसाद की शुरुआत छबड़ा उपखंड मुख्यालय के धरनावदा चैराहे पर शनिवार शाम 10 अप्रैल 2021 की शाम चाकूबाजी की घटना से हुई।

रविवार (11 अप्रैल) को हालात तब और बिगड़ गए जब उपद्रवियों ने पत्थरबाजी करते हुए आगजनी और लूटपाट की। कई दुकानों को फूँका गया। पुलिस और दमकल की गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आगजनी की घटना के बाद क्षेत्र की बिजली काट दी गई है। धारा 144 लागू कर दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम धरनावदा चौराहे पर कमल सिंह ठेले से फल खरीद रहे थे। इसी दौरान उनकी फरीद, आबिद और समीर से कहासुनी हो गई। युवकों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। उन्हें बचाने दौड़े दुकानदार राकेश नागर पर भी हमला किया गया। घायलों को अस्पताल भेजकर पुलिस ने आरोपित तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

पत्रिका डॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार विवाद की शुरुआत गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुई।चाकूबाजी के बाद 35 साल के कमल सिंह और उन्हें बचाने आने राकेश धाकड़ को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

रिपोर्टों के अनुसार रविवार की सुबह चौराहे पर फिर से दोनों तरफ के लोगों का जुटान हुआ। लोग आपस में बातचीत कर ही रहे थे कि पत्थरबाजी शुरू हो गई। बाजार में भगदड़ मच गई। उपद्रवियों ने कई दुकानों को आग के हवाले कर समान लूट लिए। आग पर काबू करने पहुँची दमकल की गाड़ी को भी निशाना बनाया गया। फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। आसपास के थानों से भी पुलिस को मौके पर भेजा गया है। कोटा के आईजी भी घटनास्थल के लिए निकल गए हैं।

केरल में मंदिर के बाहर मुस्लिम लीग का झंडा, हिंदू कार्यकर्ताओं ने शूटिंग पर जताया एतराज तो कर लिए गए गिरफ्तार

केरल के पलक्कड़ जिले के कदामपसीपुरम (Katampazhipuram) से सटे श्रीकृष्णापुरम में शनिवार (10 अप्रैल 2021) को हिंदू कार्यकर्ताओं ने ‘नियम नाड़ी (Neeyam Nadhi)’ नामक फिल्म की शूटिंग रुकवा दी। इस फिल्म का निर्देशन आशिक, शीनू और सलमान मिलकर कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार वलियायमकुन्नु भगवती मंदिर (Vayillyam Kunnu Bhagavathi Temple) के बाहर कुछ लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने फिल्म के एक दृश्य की शूटिंग शुरू कर दी। इस दृश्य में मंदिर से बाहर आ रही एक लड़की (जिसने हिन्दू परिधान पहन रखा था) को एक दूसरे मजहब (इस्लाम) के व्यक्ति की ओर आकर्षित होते हुए दिखाया जा रहा था। मंदिर के बाहर जान-बूझकर फिल्माए जाने वाले ऐसे आपत्तिजनक दृश्यों के खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इसके अलावा उन्होंने मंदिर के बाहर मुस्लिम लीग और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के हरे और लाल झंडे लगाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई। हिंदुओं के प्रदर्शन के बाद पुलिस फिल्म बनाने वालों को दूसरी जगह लेकर गई। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

5 हिन्दू कार्यकर्ता गिरफ्तार

घटना के बाद श्रीकृष्णपुरम पुलिस ने श्रीजीत, सच्चिदानंदन, सुब्रमण्यिन, बाबू और सबरीश को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी को अवैध एकत्रीकरण और हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। फिल्म के लेखक सलमान फारिस ने कहा, “पहला दृश्य एक लड़की के मंदिर से बाहर आने का था जो फिल्माया जा चुका था। जैसे ही हमारे क्रू मेंबर्स दूसरा दृश्य फिल्माने लगे तो कुछ स्थानीय लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।  

सलमान ने यह भी आरोप लगाया कि इस हंगामे में एक 13 वर्ष की लड़की भी घायल हुई है और कुर्सियों और कैमरों को भी तोड़ दिया गया है। शूट के दौरान एसएफआई और मुस्लिम लीग के झंडों के विषय में पूछने पर उसने कहा कि शूटिंग मंदिर के बाहर हो रही थी और इसे ‘वर्क ऑफ आर्ट’ के तौर पर स्वीकार करना चाहिए। फारिस ने कहा कि उसे मंदिर प्रबंधन ने ही 3000 रुपए प्रतिदिन के किराए पर शूटिंग की मौखिक अनुमति दी थी।  

मंदिर प्रबंधन द्वारा नहीं दी गई थी अनुमति

भाजपा के जिला अध्यक्ष ई कृष्णदास ने कहा कि न तो देवस्वोम बोर्ड द्वारा और न ही मंदिर प्रबंधन के द्वारा कोई अनुमति दी गई थी। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार वलियायमकुन्नु मंदिर के कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि उन्हें मंदिर में शूटिंग की कोई भी अनुमति दिए जाने की कोई जानकारी नहीं है। मंदिर प्रशासन इस मुद्दे पर याचिका दायर करने का विचार भी कर रहा है। ई कृष्णदास ने कहा कि फिल्म के दृश्य मंदिर के भक्तों की आस्था को आहत करते हैं और वो लगातार फिल्म ‘नियम नाड़ी’ के विरुद्ध प्रदर्शन करते रहेंगे।  

‘लंदन में एक बुरा दिन दूसरे जगह के अच्छे दिन से बेहतर’ – इंडिया को याद कर रही हैं या गाली दे रहीं सोनम कपूर?

बॉलीवुड ऐक्ट्रेस सोनम कपूर (Sonam Kapoor) इस समय लंदन में हैं और उन्होंने अपने लेटेस्ट सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि वह भारत को काफी मिस कर रही हैं। दरअसल, सोनम कपूर ने अपने पति आनंद आहूजा के साथ एक तस्वीर शेयर कर लंबा पोस्ट लिखा है।

सोनम कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है। इसमें आप देख सकते हैं कि वह अपने पति आनंद आहूजा के साथ कहीं जाते हुए नजर आ रही हैं। इस दौरान सोनम कपूर मुस्कुरा रही हैं और आनंद आहूजा पीछे मुड़ कर जीभ निकाल कर हँस रहे हैं।

इस तस्वीर के साथ ऐक्ट्रेस ने लिखा, “मैं भारत को इतना मिस कर रही हूँ और अपने परिवार और दोस्तों से मिलने अपने घर वापस आना चाहती हूँ, लेकिन मैंने महसूस किया कि ऐसा करके मैं लंदन में अपने नए घर को निराश करूँगी, जिसने मुझे मेरे खूबसूरत पति के साथ बहुत कुछ दिया है।” इसके साथ ही सोनम ने लिखा, “लंदन में एक बुरा दिन अभी भी किसी और जगह के अच्छे दिन से बेहतर है।”

उन्होंने 19वीं सदी के अमेरिकी निबंधकार वाल्डो इमर्सन के एक कोट का हवाला देते हुए कहा, “लंदन में सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ भिन्न-भिन्न मतों और धर्मों के लोगों के रहने के बाद भी रोमांटिक व्यक्तियों के लिए जगह है और यहाँ कवि, रहस्यवादी और नायक अपने समकक्षों से मुकाबला करने की उम्मीद कर सकते हैं।”

सोनम कपूर के इस पोस्ट पर उनकी माँ सुनीता कपूर ने कमेंट कर लिखा- ‘मिस यू सो मच।’ जिसके जवाब में सोनम ने लिखा- “मैं भी आपको मिस कर रही हूँ माँ।” वहीं उनके पिता अनिल कपूर ने भी कमेंट किया- “मिस यू सो मच।” जिसके जवाब में सोनम ने लिखा- “मिस यू डैडी।”

विवादों में आया था सोनम का फोटोशूट

बता दें कि सोनम कपूर ने हाल ही में एक फोटोशूट करवाया था, जिसकी वजह से वह चर्चा में रही थीं। उनके आउटफिट को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने नाराजगी जताई थी, तो कई ने उनका मजाक उड़ाया था। सोनम के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्हें 2019 में आई फिल्म द जोया फैक्टर में देख गया था।

इसके अलावा वह कुछ समय पहले नेटफ्लिक्स की फिल्म AK vs AK में भी दिखी थीं। अब सोनम, डायरेक्टर शोम मखीजा की फिल्म ब्लाइंड में काम कर रही हैं, जिसे सुजॉय घोष प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह कोरियन फिल्म का रीमेक है। सोनम के साथ इसमें पूरब कोहली, विनय पाठक और लिलेट दुबे भी नजर आएँगे। 

कद: 3 फीट 4 इंच, उम्र: 26 साल: 8 भाई-बहनों में सबसे छोटे पर सबसे ‘जहरीले’ रफीकुल इस्लाम मदनी से मिलिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2021 के आखिरी हफ्ते में बांग्लादेश की यात्रा पर गए थे। इस यात्रा के विरोध में बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा, आगजनी की थी। बवाल के पीछे जिस कट्टरपंथी संगठन का नाम प्रमुखता से आया था, वह है हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam)। इसी संगठन से जुड़ा है रफीकुल इस्लाम मदनी।

खुद को इस्लामी उपदेशक बताने वाले मदनी को बांग्लादेश की पुलिस ने एक बार फिर गिरफ्तार किया है। उसे देश के विरुद्ध भाषण देने और व्यवस्था भंग करने के आरोप में डिजिटल सुरक्षा कानून (DSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

मदनी की उम्र 26 साल है। पर वह ‘शिशु वक्ता (shishu bokta)’ के नाम से जाना जाता है। वजह उसकी हाइट है। भले ही वह 3 फीट 4 इंच का ही हो, लेकिन जहर जमकर उगलता है। सरकार, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और नामचीन लोगों के खिलाफ देशभर में घूम-घूमकर जहर उगल उसने पहचान बनाई है। बांग्लादेश में इस्लामी शासन की वह पैरोकारी करता है।

रैपिड एक्शन बटालियन के निदेशक (कानून एवं मीडिया) कमांडर खानडाकेर अल मोइन ने बताया कि मदनी को उत्तरी बांग्लादेश के नेत्रकोना जिले में उसके पैतृक घर से पकड़ा गया। वह अपने आठ भाई-बहनों में सबसे छोटा है। गरीब परिवार से आने वाला मदनी अब दो मदरसों का निदेशक है।

हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश ने उसको जल्द से जल्द रिहा करने की माँग की है। मदनी इस समूह की केंद्रीय समिति का सदस्य है। हिफाजत नेताओं ने कहा है कि अगर मदनी को रिहा नहीं किया गया तो वे जोरदार आंदोलन करेंगे।

एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बार है जब मदनी को गिरफ्तार किया गया है। उसे मोदी की यात्रा का विरोध करने के लिए ढाका में 30 अन्य लोगों को 25 मार्च को गिरफ्तार किया था। उस समय मदनी को कुछ घंटों बाद ही रिहा कर दिया गया था।

RAB ने कहा कि मदनी की गिरफ्तारी के बाद उसके फोन से आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले हैं, जिनमें ‘एडल्ट कंटेंट’ भी शामिल है। यह साबित करता है कि मदनी फ्रॉड है। पुलिस के अनुसार, मदनी ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ‘अस्वीकार’ कर दिया। उसने कथित तौर पर यूट्यूब पर भी इसी तरह की नफरत फैलाई थी।

विवादास्पद उपदेशक का जन्म जिले के पूर्बधला उपजिला के लेडरिकंडा गाँव में एक गरीब परिवार में हुआ था। हिफाजत-ए-इस्लाम की नेट्रोकोना इकाई के नेता मौलाना गाजी अब्दुर रहीम के अनुसार, वह अपने माता-पिता के आठ बच्चों में सबसे छोटा है। ढाका के बारिधारा इलाके में स्थित जामिया मदनी मदरसा से दावरा-ए-हदीस की डिग्री (मास्टर डिग्री के बराबर) हासिल कर वह ‘उपदेशक’ बना।

जानकारी के मुताबिक रफीकुल के पिता और भाई खेती करते हैं और आजीविका के लिए रफीकुल की कमाई पर निर्भर हैं। रफीकुल अब नेत्रोकोना और गाजीपुर में दो मदरसों का संचालन कर रहा है। 1995 में जन्मे रफीकुल ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय से की और बाद में जामिया हुसैनिया मालनी मदरसा में दाखिला लिया। तीन साल तक वहाँ अध्ययन करने के बाद, वह गाजीपुर के एक मदरसे में शिफ्ट हो गया। बाद में, 2019 में, उन्होंने ढाका के जामिया मदनी मदरसा में अपनी दावरा-ए-हदीस की डिग्री पूरी की।

उसके हमनाम और पूर्व मदरसा साथी रफीकुल इस्लाम ने ढाका ट्रिब्यून को बताया, “मैं हिफाज़त-ए-इस्लाम के पूर्व महासचिव नूर हुसैन कासेमी के करीब था। मैं भी नेत्रोकोना से आता हूँ और ने ही रफीकुल को बारिधारा के मदरसे में लाया था, जिसकी स्थापना नूर हुसैन कासेमी ने की थी।”

‘उपदेशक’ को मिलने वाले पैसे को लेकर रफीकुल ने कहा, “यह तय नहीं है। जहाँ तक मुझे पता है, यह 2,000 से 50,000 टका तक है। यह उन लोगों पर निर्भर करता है जो उसे (बोलने के लिए) आमंत्रित करते हैं।”

मदनी टाइटल के बारे में रफ़ीकुल ने बताया, “उसे मदनी मदरसे से अपनी दावरा-ए-हदीस की डिग्री मिली। यही वजह है कि कुछ लोग उसे मदनी कहते हैं। उन्हें हाल ही में उसे इस टाइटल का उपयोग बंद करने के लिए एक कानूनी नोटिस दिया गया था, क्योंकि वह सऊदी अरब में इस्लामिक विश्वविद्यालय मदीना से स्नातक नहीं था। जहाँ तक मुझे जानकारी है, रफीकुल ने खुद मदनी की उपाधि का इस्तेमाल नहीं किया। वह अपनी हाइट के लिए ‘शिशु वक्ता’ के रूप में जाना जाता है, भले ही वह 26 साल का है।”

गौरतललब है कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर काम करने वाले हिफाजत-ए-इस्लाम को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है। 2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

हिफाजत-ए-इस्लाम हमेशा से बांग्लादेश को इस्लामी देश बनाने की पैरवी करता रहा है। साल 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश संविधान से इस्लाम शब्द हटाने की याचिका को स्वीकार किया था, तो इसका विरोध करते हुए धमकियाँ दी थीं। हिफाजत ने कहा था कि देश का राष्ट्र धर्म यदि इस्लाम होगा तो इससे अल्पसंख्यकों के धर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा इस संगठन के तमाम प्रमुख नेताओं पर हत्या, तोड़फोड़, आगजनी जैसे गंभीर आरोप हैं।

नजीब भाई बुरे धुले: ‘इंदिरानगर का गुंडा’ पर ऊँगली कर रहा था पाकिस्तानी पत्रकार, वेंकटेश प्रसाद ने उड़ा दी गिल्ली

क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान प्लेटफॉर्म CRED के विज्ञापन में नए अंदाज से राहुल द्रविड़ ने इंटरनेट पर तहलका मचा रखा है। अब दक्षिण के एक और पूर्व क्रिकेटर अपने अंदाज की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। ये हैं टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद।

प्रसाद ने एक ट्वीट किया जिसमें 1996 वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी बल्लेबाज आमिर सोहेल को बोल्ड करने की तस्वीर थी। इसके साथ उन्होंने राहुल द्रविड़ के चर्चित विज्ञापन का कैप्शन इंदिरानगर का गुंडा दिया। इस ट्वीट पर पाकिस्तानी खेल पत्रकार नजीब उल हसनैन ने प्रसाद को ट्रोल करने की कोशिश की। लेकिन, यह उन्हें भारी पड़ गई।

प्रसाद के ट्वीट पर हसनैन ने लिखा, “यह उनके करियर की एकमात्र उपलब्धि है।”

प्रसाद ने इसका जवाब देते हुए लिखा, “नहीं नजीब भाई। कुछ उपलब्धियाँ बाद के लिए रख ली थी। इंग्लैंड में हुए अगले वर्ल्ड कप में मैंने मैनचेस्टर में पाकिस्तान के खिलाफ 27 रन देकर पाँच विकेट लिए थे। उनकी टीम 228 रन भी नहीं बना पाई थी। गॉड ब्लेस यू।”

90 के दशक में जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर प्रसाद भारतीय गेंदबाजी की कमान सँभालते थे। उन्होंने आमिर सोहेल की जो तस्वीर ट्वीट की थी उस मैच की यादें आज भी लोगों के जेहन में कैद है। उस मैच में भारत ने 8 विकेट पर 287 रन बनाए थे। नवजोत सिंह सिद्धू ने 93 और अजय जडेजा ने ताबड़तोड़ 45 रन की पारी खेली थी। जवाब में पाकिस्तान ने भी ताबड़तोड़ शुरुआत की थी। लेकिन सोहेल की गिल्ली उड़ते ही मैच पूरी तरह पलट गया था।

वहीं चर्चित विज्ञापन में जाम में फँसने के बाद शांत स्वभाव के द्रविड़ का धैर्य जवाब देते दिखाया गया है। उन्हें इतना गुस्सा आता है कि बगल में खड़ी कार का मिरर तोड़ते हुए वह चिल्लाते हैं, “इंदिरानगर का गुंडा हूँ मैं।” द्रविड़ के इस अवतार को लेकर उनकी आईपीएल फ्रेंचाइजी ने चुटकी लेते हुए कहा था कि यह उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक था। वहीं विराट कोहली ने लाफिंग इमोजी के साथ ट्वीट कर कहा था, “राहुल भाई का ये अंदाज कभी नहीं देखा।”

जब बेटी पैदा हुई तब पता चला अफजल है पति, प्यार करते समय बताया था अशोक… अब नमाज भी पढ़वाया, घर से भी भगाया

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद का केस सामने आया है। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 25 साल के व्यक्ति के खिलाफ अपनी असली पहचान छिपा कर शादी करने का केस दर्ज किया है। आरोपित ने अपनी पहचान अरमान कोहली के तौर बताई थी, जबकि हकीकत में उसका नाम अफजल था।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे उसके पति की असली पहचान का पता उस वक्त चला, जब उसकी बेटी का जन्म हुआ। शिकायतकर्ता की पहचान पूजा सोनी के तौर पर हुई है। वो आरोपित से कुछ साल पहले दिल्ली में मिली थी।

पेशे से प्लंबर आरोपित ने उस दौरान पूजा को अपना परिचय अशोक राजपूत के रूप में दिया था। धीरे-धीरे दोनों में पहचान हुई और उन्हें प्यार हो गया। इसके बाद मार्च 2019 में दोनों ने एक मंदिर में शादी कर ली।

पुलिस को दी गई शिकायत में पूजा ने बताया कि लगभग दो साल से वह अपने पति के धर्म को लेकर अनजान थी। वह सोचती थी कि उसका पति एक हिंदू है, जबकि हकीकत में वह एक मुस्लिम व्यक्ति था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के हवाले से लिखा गया है, ”इस साल 7 फरवरी को हमारी एक बेटी हुई। 22 मार्च को वह मुझे अलीगढ़ के रीत गाँव में अपने घर ले गया। वहाँ मुझे पता चला कि उसका नाम अफजल खान था। वहाँ मुझे नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया, पूजा करने से रोक दिया गया। 8 अप्रैल को उन्होंने मेरी बेटी को मुझसे छीन लिया और इसके बाद जबरदस्ती मेरा नाम बदल कर ‘अलना’ रख दिया।”

महिला ने कहा कि उसके पति और उसकी बहनों ने उन्हें घर से निकाल दिया और मथुरा में छोड़ दिया। पीड़िता ने बताया कि वह शादी के दो साल पूरे होने के बावजूद ससुराल वालों से नहीं मिली थी। पीड़ित महिला ने पति अफजल और उसकी बहनों के खिलाफ अलीगढ़ के लोढ़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।

पुलिस ने अशोक राजपूत उर्फ ​​अफजल खान और उसकी बहनों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 323 के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा आरोपितों पर लव जिहाद कानून के तहत भी केस दर्ज किया गया है। हालाँकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और शिकायतकर्ता पुलिस की निगरानी में है।

हिंदू होने का ढोंग करता रहा अफजल

25 वर्षीय आरोपित अफजल लंबे समय से अरमान कोहली होने का नाटक कर रहा था। वह उत्तर प्रदेश में 16 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ रहता था। लड़की के परिवार के अनुसार, नाबालिग लड़की किसी काम से घर से बाहर निकली थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिजनों ने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराया था।

ढूँढे जाने के बाद पूछताछ में लड़की ने बताया कि वह दिल्ली के उस्मानपुर इलाके के अरमान उर्फ ​​अफजल नामक 25 साल के बढ़ई के संपर्क में थी। लड़की ने इस बात का खुलासा किया है कि आरोपित ने उसे यह कहकर धोखे में रखा था कि वह अरमान कोहली है और वह हिंदू था। उसने यह भी कहा कि अफजल ने उसे बदलने की पूरी कोशिश की थी। फिलहाल, अफजल अब जेल की हवा खा रहा है।