Home Blog Page 3896

शिवसेना पार्षद संध्या दोषी ने कोविड हॉस्पिटल में खड़ा किया बखेड़ा, डॉक्टर-स्टाफ से बदतमीजी करते कैमरे में कैद

मुंबई के उपनगरीय इलाके के एक कोविड-19 हॉस्पिटल में शिवसेना पार्षद संध्या दोषी की दबंगई का वीडियो सामने आया है। वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की शिक्षा कमेटी की चेयरमैन भी हैं। अपने रसूख का अनुचित फायदा उठाने में नाकाम रहने पर संध्या ने अस्पताल में हंगामा खड़ा दिया है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना का जो वीडियो ट्विटर पर डाला है उसमें शिवसेना पार्षद अस्पताल कर्मचारियों के साथ बदतमीजी करतीं और अपनी पहचान की एक मरीज का सही तरीके से देखभाल नहीं करने का आरोप एक डॉक्टर पर लगाती दिख रही हैं। इस लिहाज से भी यह वीडियो चौंकाने वाला है कि पार्षद के साथ दिख रहे शख्स ने मास्क तक नहीं लगा रखा है।

घटना मुंबई के बोरिवली वेस्ट के भगवती अस्पताल की बताई जा रही है। शिवसेना पार्षद को कोविड-19 अस्पताल में फ्रंटलाइन वर्कर्स के काम में खलल डालते हुए देखा जा सकता है। पार्षद ने अस्पताल स्टाफ के साथ गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया। एक डॉक्टर के साथ वो बदतमीजी करते हुए वैसे 10 और डॉक्टर लाने का दावा भी किया। इस पर डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ ने वीडियो जारी करके शिव सेना पार्षद से निवेदन किया कि वो अपने कहे अनुसार और भी डॉक्टरों की व्यवस्था करें क्योंकि कोविड-19 अस्पताल में वैसे भी स्टाफ की कमी है।  

डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने कहा कि जब अस्पताल डॉक्टरों और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं ऐसे समय में किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिलना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि यहाँ कई ऐसे डॉक्टर भी हैं जो कोविड-19 से लड़ने के लिए 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।   

शिवसेना पार्षद की बदतमीजी के बाद डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने इस्तीफा देने की धमकी भी दी। सोशल मीडिया यूजर्स ने पार्षद के साथ आए हुए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की माँग की, क्योंकि वह अस्पताल में बिना मास्क के घूम रहा था और स्टाफ के साथ बात कर रहा था।

संध्या दोषी दो बार एनसीपी से भी पार्षद रह चुकी हैं। 2016 में उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में वह शिवसेना में शामिल हुईं थी। वर्तमान में वह बीएमसी की शिक्षा कमेटी की चेयरमैन और मुंबई उपनगरीय इलाके के वार्ड 18 की पार्षद हैं।   

2 अस्पताल-67 मरीज, ऑक्सीजन की कमी से जान पर आफतः देवदूत बनकर दौड़ी दिल्ली पुलिस

देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस ने कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान बचाई। निहाल विहार स्थित मंसाराम अस्पताल में रविवार (अप्रैल 18, 2021) को अचानक ऑक्सीजन की कमी से कोरोना संक्रमित 35 मरीजों की जान पर बन आई। काफी प्रयास के बावजूद जब अस्पताल को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाई तो अस्पताल प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से मदद माँगी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद बवाना के एक ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क कर दस सिलेंडर का इंतजाम किया और बाद में दस और सिलेंडर को अस्पताल को सौंप दिया। 

अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने पुलिस के इस कदम की सराहना की है। पुलिस कमिश्नर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हालाँकि यह इस कठिर दौर में छोटा हो सकता है लेकिन मैं दिल्लीवासियों को राहत देने के लिए दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा की गई पहल की सराहना करता हूँ, जिसमें निहाल विहार पुलिस भी शामिल है। मैं दिल्लीवासियों का भी तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। मैं आपको हमारे सकारात्मक दृष्टिकोण का आश्वासन दे सकता हूँ।”

इसके अलावा उन्होंने अन्य ट्वीट में बताया कि दिल्ली पुलिस हमदर्द फाउंडेशन और सेवा भारती की मदद से पुलिस परिवारों के लिए शाहदरा, रोहिणी और द्वारका में 3 कोविड केयर सेंटर स्थापित कर रही है। शाहदरा 78 बेड (20 ऑक्सीजन) के साथ फंक्शन में है। वहीं रोहिणी जल्द ही 20 बिस्तरों (10 ऑक्सीजन) के साथ काम करेगी।

वहीं जनकपुरी के अमरलीला अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिली। इसके बाद अस्पताल में ऑक्सीजन पहुँचाई गई। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक,  जनकपुरी के अमरलीला अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस ने यहाँ ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई। कीर्तिनगर से ऑक्सीजन सिलेंडर लाया गया, जिससे 32 लोगों की जान बच सकी। दिल्ली पुलिस ने 11 सिलिंडर की व्यवस्था की।

गौरतलब है कि रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर राजेश डबास ने पुलिस को फोन करके कहा कि यहाँ 35 कोविड मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उनकी ऑक्सीजन सप्लाई लगभग खत्म होने वाली है। राजेंद्र डबास ने यह भी बताया कि उन्होंने कई अथॉरिटीज से मदद माँगी, लेकिन कहीं से कोई भी जवाब नहीं मिला।

इसके बाद एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा ने कई अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क साधा और इस बारे में उनसे बातचीत की। एसीपी आशीष के निर्देशन में निहाल विहार से दो टीमों को निर्देश दिया गया कि वो तुरंत मुंडका और बवाना में जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करें। 10 ऑक्सीजन सिलेंडर आधे घंटे के अंदर पहुँचाए गए। इसके बाद 10 और सिलेंडर सहित कुल लगभग 20 ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाए गए। दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आज 35 कोरोना मरीजों की जान बच गईं।

बता दें कि पिछले साल भी लॉकडाउन के दौरान दिल्ली पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला था। दिल्ली के बदरपुर में पुलिस ने समय पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाया। नवजात बच्ची के पिता पंकज ने इसके लिए दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा था, “1 अप्रैल को जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई। हम उनके आभारी हैं।” 

पंजाब के 1650 गाँव से आएँगे 20000 ‘किसान’, दिल्ली पहुँच करेंगे प्रदर्शनः कोरोना की लहर के बीच एक और तमाशा

जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से परेशान है वहीं दूसरी तरफ ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर एक नए तमाशे की तैयारी हो रही है। दिल्ली की सरकार ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) की सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन लगा रखा है। इन सबके बीच बुधवार (अप्रैल 21, 2021) को पंजाब से हजारों की संख्या में किसान टिकरी बॉर्डर की तरफ कूच करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (उग्रहन) ने इस विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन के नेताओं का कहना है कि करीब 1650 गाँवों के 20,000 किसान पंजाब के तीन बॉर्डरों को पार कर दिल्ली पहुँचेंगे और प्रदर्शन करेंगे। बीकेयू उग्रहन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलन ने अपने संगठन की योजना का खुलासा करते हुए कहा कि इस बार प्रदर्शनकारी किसानों में अधिकतर महिलाएँ होंगी।

उन्होंने कहा कि चूँकि पुरुष अभी खेतों में व्यस्त हैं, इसलिए आंदोलन की जिम्मेदारी अब महिलाओं को ही सँभालनी पड़ेगी। बठिंडा-डाबवली, खनौरी-जींद और सर्दुलगढ़-फतेहाबाद बॉर्डरों से बसों, वैन और ट्रैक्टरों में भरकर किसानों को दिल्ली की सीमा पर लाकर छोड़ दिया जाएगा। खनौरी-जींद सीमा से चलने वाले जत्थे का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्रहन और महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलन करेंगे। 

अब गेहूँ की कटाई का मौसम ख़त्म हो गया है, इसलिए किसानों को वापस दिल्ली की सीमाओं पर लाया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ‘फिर दिल्ली चलो’ का नारा दिया है। किसान धन्ना भगत की जयंती मनाने के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने टिकरी सीमा पर अपनी एकता का भी प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि आंदोलन जारी था और किसान अस्थायी रूप से कटाई के लिए अपने घरों को लौटे थे।

कुछ अन्य किसान नेताओं का कहना है कि जिस तरह से चुनावी राज्यों में जाकर किसान नेताओं ने चुनाव प्रचार किया, उससे कई तबके नाराज थे। रबी की कटाई के बाद 3000 किसान टिकरी लौट चुके हैं। BKU (लखोवाल) के नेता पुरुषोत्तम सिंह गिल ने कहा कि ये संख्या बढ़ती ही जाएगी। BKU (राजेवाल) के प्रगति सिंह ने कहा कि किसान बस, ट्रेन और अपनी गाड़ियों से आ रहे हैं, क्योंकि अभी खेती के लिए ट्रैक्टर का काम है।

उन्होंने कहा कि किसान अगले एक महीने में अपने उत्पाद बेच लें, फिर वो और भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन स्थलों पर लौटेंगे। SKM ने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों से भी कहा है कि वापस जाने की बजाए वे ‘किसान आंदोलन’ में आ जाएँ, उनके लिए भोजन और रहने की व्यवस्था की जाएगी। नेता दर्शन पाल ने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ एकीकृत संघर्ष बताया। उग्रहन हाल में कोरोना से ठीक हुए हैं। वहीं सुखदेव सिंह का हाथ फ्रैक्चर होने के बाद सर्जरी हुई थी।

इस बीच ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एक कंपनी ने कहा है कि किसान आंदोलनकारियों ने हाइवे को ब्लॉक कर रखा हुआ है, जिससे परेशानी आ रही है। दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित बालाजी अस्पताल में लगभग ऑक्सीजन ख़त्म ही होने वाला था, लेकिन दिल्ली-यूपी सीमा पर गाजीपुर स्थित NH24 पर किसानों का कब्ज़ा होने के कारण सप्लाई में 2 घंटे की देरी हुई। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से ऑक्सीजन की सप्लाई लेकर चल रही गाड़ियों को 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

कोरोना से लड़ने आगे आए कॉर्पोरेट हाउस: रोज 700 टन ऑक्सीजन फ्री देगा रिलायंस, TATA की भी बड़ी घोषणा

कोरोना वायरस को हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद एक-एक कर भारत के बड़े कॉर्पोरेट कंपनियाँ साथ आ रही हैं। एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जामनगर ऑयल रिफाइनरी में ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ा दिया है। वहाँ अब प्रतिदिन 700 टन मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। कोरोना से पीड़ित राज्यों को ये ऑक्सीजन मुफ्त में सप्लाई की जाएगी।

ET ने अपने सूत्रों के हवाले से ये खबर प्रकाशित की है। जामनगर की रिफाइनरी में इससे पहले प्रतिदिन 100 टन ऑक्सीजन का उत्पादन होता था तो इस हिसाब से अब ये 7 गुना अधिक हो जाएगा। गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को ये ऑक्सीजन दिया जाएगा, जिससे रोज 70,000 से भी अधिक कोरोना पीड़ित मरीजों को मदद मिल सकेगी। कंपनी की योजना है कि मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन 1000 टन तक बढ़ाया जाए।

जामनगर रिफाइनरी में मुख्य रूप से कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और जेट ऑइल में बदलने का कार्य किया जाता है। लेकिन, कोरोना के कारण माँग बढ़ने से रिलायंस ने ऑक्सीजन के उत्पादन का निर्णय लिया। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को मेडिकल ग्रेड में बदला जा रहा है। इसके लिए नए उपकरण स्थापित किए गए हैं। यहाँ तक कि राज्यों को -183°C में ट्रांसपोर्टेशन का, सारा खर्च रिलायंस ही उठा रही है।

‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)’ और ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)’ जैसी सरकारी कंपनियों ने भी अपने संसाधनों का इस्तेमाल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए करने का फैसला लिया है। IOC ने कहा कि उसने मुफ्त में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब को 150 टन ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी है। इसी तरह BPCL भी 100 टन ऑक्सीजन की पूर्ति कर रहा। ऑयल रिफाइनरीज में नाइट्रोजन उत्पादन के लिए एयर-सेपरेशन प्लांट्स होते हैं, जिनमें ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है।

रिलायंस का जामनगर यूनिट फ़िलहाल गुजरात को प्रतिदिन 400 टन ऑक्सीजन दे रहा है। रिलायंस ने BMC के साथ मिल कर पिछले साल ही देश का पहला कोविड अस्पताल स्थापित किया था। मात्र 2 सप्ताह में 100 बेड्स के साथ ये शुरू हुआ और फिर 250 बेड्स की कैपेसिटी बनाई गई। मुंबई में रिलायंस ने क्वारंटाइन सेंटर भी बनाए।

इसी तरह TATA ने भी पीएम मोदी की अपील पर ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का फैसला किया है। टाटा समूह 24 क्रायोजेनिक लिक्विड ऑक्सीजन सिलिंडर इम्पोर्ट करेगा। Paytm ने होम मेडिकल उपकरणों की खरीद का फैसला लिया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों की मदद की जा सके। SAIL ने 33000 टन ऑक्सीजन सप्लाई का निर्णय लिया।

गुजरात: अली मस्जिद में सामूहिक नमाज से रोका तो भीड़ ने पुलिस पर किया हमला, वाहनों को फूँका

गुजरात के कपड़वंज में मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को एक भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिस ने भीड़ जमा करके सामूहिक रूप से नमाज अदा करने से मना किया था। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक कपडवंज में लायंस क्लब के पास की अली मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए गई थी। लेकिन मामला बिगड़ गया और हिंसक मोड़ ले लिया। 

रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने कुंडव पुलिस चौकी और टाउन पुलिस स्टेशन पर हमला किया। भीड़ ने दो बाइक और एक कार को जला दिया गया। इसके अलावा भीड़ ने कुंडव थाने को भी नष्ट कर दिया। इसके बाद भीड़ ने टाउन पुलिस स्टेशन पर हमला किया और पथराव करना शुरू कर दिया।

हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का सहारा लेना पड़ा। हालाँकि, तब भी भीड़ नियंत्रण से बाहर थी। आखिरकार अतिरिक्त बलों को बुलाकर हालात पर काबू पाया गया। हमले में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है। हालाँकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिसकर्मियों ने मीडिया को किसी तरह का बयान देने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी कोरोना काल में सामूहिक नमाज पढ़ने से रोकने पर पुलिसकर्मियों पर हमले की कई खबर सामने आई थी। झारखंड के बोकारो स्थित पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के नारायणपुर मस्जिद में अलविदा जुम्मे की नमाज अदा करने को लेकर जमकर बवाल हुआ था। मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए 100 से अधिक लोगों के जुटान की सूचना पर पहुँची पुलिस पर नमाजियों ने हमला और पत्थरबाजी की।

वहीं उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस पर पथराव की गई थी। शहर के सराय रहमान स्थित गड्डा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची तो इन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया था।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

भारत की आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए “तैयारी” एक अनोखा शब्द होता है। बहुत से भारतीय “तैयारी” शब्द और उसके अर्थ से बिलकुल ही अनजान होते हैं। इसे आसानी से समझना हो तो कभी किसी बैंक में जाकर खड़े हो जाइए। वहाँ आने वाले लोगों में से कोई भी ऐसा नहीं होता, जो गलती से वहाँ चला आया हो। सभी घर, दफ्तर या दुकानों से बाकायदा बैंक जाने के लिए निकले लोग ही होते हैं। अब बैंक जाएँगे तो कोई फॉर्म भी भरना पड़ सकता है, ये भी तय होता है, किसी को अलग से बताने की जरूरत नहीं होती। फिर क्या वजह होती है कि बैंकों में लोग एक दूसरे से कलम माँगते नजर आते हैं?

इतनी मामूली सी तैयारी भी भारतीय लोगों के बस की नहीं? बिलकुल थी। उन्होंने ये तैयारी इसलिए नहीं की थी क्योंकि वो मानकर चले थे कि अगर जरूरत हुई तो वहीं बैंक में कर्मचारियों ने कोई कलम टाँग रखी होगी। अगर वो नहीं हुआ तो किसी और से माँग कर काम चला लेंगे, इस उम्मीद में वो बिना कलम के बैंक आते हैं। ये तो “तैयारी” नहीं करना है, वो ऐसे छोटे मामलों में ही नहीं दिखेगा। वो बड़े मामलों में भी दिख जाता है। जैसे कुछ वर्ष पहले लगातार आए भूकम्पों का दौर याद कीजिए। जल्दी से घर से भाग कर निकला जा सके, इसके लिए तैयारी रखने की सलाह दी जाती है। सोचिए आज किसी के घर से जरूरी दवा, बिस्कुट, पीने के पानी का तैयार इंतजाम मिलेगा? लेकर फ़ौरन घर से निकला जा सके ऐसा कोई डब्बा, कोई पैकेट है?

जब पहली बार कोरोना लहर आई तो लोगों ने करीब दो-तीन पीढ़ियों बाद देखा कि महामारी की स्थिति में क्या होता है। इससे पहले 1974 में स्मालपॉक्स और 1994 में प्लेग की महामारी के बाद 2009 में भारत सरकार ने स्वाइन फ्लू को भी महामारी घोषित किया था। इनसे निपटने के लिए हमारे पास ब्रिटिश दौर का एक कानून है, जिसे “एपिडेमिक एक्ट 1897” कहा जाता है। ये उस दौर में मुंबई (तब की बम्बई) में फैले ब्युबोनिक प्लेग से निपटने के लिए बनाया गया था। सवा सौ वर्ष पुराने कानून से आज के दौर की महामारियों से कैसे निपटा जाएगा, पता नहीं। हमारी तैयारी इतनी अच्छी है कि पिछले एक वर्ष में हमने इस कानून में जरूरी सुधारों-परिवर्तनों की बात भी नहीं की है।

जो सुधार हुआ है, वो बस इतने कि जिससे डॉक्टरों-स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वाले (तथाकथित सिंगल सोर्स) को इस कानून के जरिए दण्डित करने के प्रावधान इस कानून में जोड़ दिए गए हैं। कई महामारियों के लिए माना जाता है कि वो सफाई की कमी के कारण फैलती हैं। भारत में पहले से ही “स्वच्छ भारत अभियान” चल रहा था। इसके बाद भी हमने सफाई के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए। गंदगी फ़ैलाने वालों के लिए भी इस कानून में अलग से प्रावधान होने चाहिए। इससे जब महामारी की स्थिति हो, उस समय गंदगी फ़ैलाने वालों को और कठोर दंड दिया जा सकेगा। महामारी के काल में नकली दवाएँ बनाने वालों, दवाओं की कालाबाजारी करने वालों के लिए भी इसमें आज के दौर के हिसाब से प्रावधान होने चाहिए।

समाजवादी सोच की ये समस्या है कि वो मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती। दस वर्ष आगे, अगली पीढ़ी का क्या होगा, ऐसी बातें समाजवादी सोच ही नहीं सकता। समाजवाद भविष्य की तैयारियाँ करने के बदले सरकार के भरोसे हाथ बाँधकर बैठना सिखाता है। उसमें भी अगर नेहरू वाला समाजवाद हो तो फिर तो कोढ़ में खाज वाला मामला सामने आ जाता है। इस बार जब ऑक्सीजन की कमी होनी शुरू हुई तो पता चला कि बिहार के बेगुसराय में एक ऑक्सीजन की फैक्ट्री थी। ये बिजली बिल न भरे जाने के कारण बंद हो गई थी। इसे दोबारा शुरू करवाने में जिला प्रशासन को दो दिन लगे।

आश्चर्य किया जाना चाहिए कि बिहार के ऐसे क्षेत्र में ऑक्सीजन की फैक्ट्री लगी है, जो पिछड़ा माना जाता है। वहाँ रोजगार देने वाली फैक्ट्री को सब्सिडी और सुविधाएँ मिलनी चाहिए थीं। उनके बिजली के बिल में कुछ रियायत होनी चाहिए थी। और जिसे शुरू करने में एक डीएम को दो दिन लगे, उसे बंद होने ही क्यों दिया गया था? ऐसा एक किस्सा बिहार के दूसरे इलाके से भी है। पश्चिमी चम्पारण में चनपटिया नाम का एक गाँव है। पिछली बार लॉकडाउन में जो मजदूर यहाँ वापस आए, उनके पास कौशल तो था, मगर पूँजी नहीं थी। डीएम कुंदन कुमार ने श्रमिकों की एक “स्टार्टअप जोन” बनाने में मदद की। वापस लौटे मजदूर अब यहाँ मिलों के खुद मालिक हैं और धंधा अच्छा चल रहा है। इसे देखने नीतीश कुमार भी जा चुके हैं।

सवाल है कि जो तैयारी कुछ लोग दिखाते हैं, वो समाज के बड़े हिस्से में क्यों नहीं फ़ैल रहा? क्या हम किसी अवतार के आकर समस्याएँ सुलझाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं? अगर अवतार के आने की प्रतीक्षा है भी तो ये प्रतीक्षा शबरी जैसी क्यों नहीं है? रोज रास्ता झाड़ पोंछ कर साफ़ क्यों नहीं कर रहा कोई? अगस्त्य-अनुसूया जैसी क्यों नहीं है? हथियार-कपड़े पहले से तैयार क्यों नहीं हैं, जो अवतार के आने पर उसे थमाए जा सकें? विश्वामित्र जैसी क्यों नहीं है, जो पहले से ही कम से कम दंडकारण्य से लेकर आस-पास के दूसरे रास्तों की जानकारी अवतार को दे सके? अवतार भी ऐसे तो आते नहीं न? भक्त ऐसे हों कि बुला सकें, तभी आते हैं।

बाकी जब सरकार कुछ नहीं कर रही कहिएगा, तो कम से कम उन दर्जनों स्वयंसेवकों (जो किसी संघ से जुड़े हों, ऐसा जरूरी नहीं) जितनी मेहनत के बाद कहिएगा। वो कहीं ऑक्सीजन जुटाने में, कहीं एम्बुलेंस का प्रबंध करने में, कहीं शवों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं। और कुछ नहीं होता तो अपने शहर में कौन लोगों की मदद कर रहा है, उनका नाम-पता तो मालूम कीजिए!

यूपी-असम में लगेगी फ्री वैक्सीन, केरल ने केंद्र से मुफ्त में माँगी: Remdesivir से आयात शुल्क हटा, दूर होगी कमी-लागत घटेगी

रेमडेसिविर (Remdesivir) की कमी दूर करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने रेमडेसिविर, इसके कच्चे माल और एंटी वायरल दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान पर आयात शुल्क समाप्त करने की घोषणा की है। वहीं उत्तर प्रदेश और असम ने 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए  मुफ्त में वैक्सीन लगाने की घोषणा की है। इसके विपरीत केरल ने केंद्र से मुफ्त में कोरोना वैक्सीन की माँग की है।

राजस्व विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने जन हित में रेमडेसिविर और अन्य उत्पादों से सीमा शुल्क समाप्त करने का फैसला किया है। जिन उत्पादों पर अब आयात शुल्क नहीं लगेगा उनमें रेमडेसिविर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रिडिएंट्स (Remdesivir API), रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर के विनिर्माण में काम आने वाली बीटा साइक्लोडेक्ट्रिन शामिल है। आयात शुल्क की यह छूट इस साल 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के मरीजों की स्वास्थ्य देखभाल की प्राथमिकता के मद्देनजर रेमडेसिविर एपीआई, इंजेक्शन और अन्य सामग्री को आयात शुल्क मुक्त किया गया है। इससे आपूर्ति बढ़ेगी और लागत घटेगी, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी। इससे पहले 11 अप्रैल को रेमडेसिविर की बढ़ती माँग के मद्देनजर केंद्र ने इसके इंजेक्शन और एपीआई के निर्यात को स्थिति में सुधार आने तक प्रतिबंधित कर दिया था।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में चलाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण को लेकर की गई घोषणा के बाद भाजपा शासित दो राज्य- उत्तर प्रदेश और असम ने अपने यहाँ 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान के दौरान सभी को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले से प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर काबू पाने में मदद मिलेगी। देश में बड़े पैमाने पर कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होने से महामारी पर रोक लगाने में काफी मदद मिल सकती है। हमने फैसला किया है कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन मुफ्त लगाई जाएगी। राज्य सरकार कोरोना वायरस अभियान को अपने संसाधनों से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।”

असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने ट्वीट में कहा है कि असम 18 से 45 साल उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को फ्री में वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन दे रही है। सरमा ने कहा कि पिछले साल असम में आरोग्य निधि के जरिए एकत्रित धनराशि का इस्तेमाल टीकों की खरीद के लिए किया जाएगा। सरमा ने कहा कि उन्होंने भारत बायोटेक को 1 करोड़ खुराक के आदेश दिए हैं।

इधर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मंगलवार को अपने राज्य के लोगों को फ्री में कोरोना वैक्सीन देने के वादे से मुकर गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वैक्सीन की नई नीति में बदलाव करने का अनुरोध किया।. साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य सरकारों को मुफ्त में आवश्यक टीके की पूरी मात्रा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया।

विजयन ने कहा कि राज्य सरकारें पहले से ही कोरोना महामारी के कारण अतिरिक्त वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे में वैक्सीन खरीदने का अतिरिक्त बोझ राज्य पर काफी दबाव डालेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों का स्वास्थ्य क्षेत्र में संवैधानिक दायित्व है और उन्हें वैक्सीन के एक सुनिश्चित कोटा की आवश्यकता है, जो कोरोना महामारी की स्थिति में मुफ्त प्रदान किया जाना है। साथ ही कहा कि ये जरूरी है कि राज्यों को नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए।

केंद्र की नई नीति के अनुसार वैक्सीन निर्माता मासिक उत्पादन की 50 फीसदी सप्लाई केंद्र को करेंगे और बाकी बची 50 फीसदी वैक्सीन की सप्लाई वो राज्यों और खुले बाजार में कर सकेंगे। विजयन ने कहा कि राज्यों से कहा गया है कि वो एक कीमत पर मैन्युफैक्चरर से वैक्सीन लें। विजयन ने प्रधानमंत्री से केरल को राज्य के मेगा टीकाकरण योजना को लागू करने के लिए टीकों की 50 लाख खुराकें आवंटित करने का भी आग्रह किया।

केरल ने दिसंबर में सभी के लिए मुफ्त टीके की घोषणा की थी

बता दें कि विजयन ने दिसंबर 2020 में घोषणा की थी कि उनके राज्य में सभी के लिए टीके मुफ्त होंगे। मार्च 2020 में, केरल ने चीनी वायरस महामारी से लड़ने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया था।

केरल ने महामारी से लड़ने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया था

कोरोना संक्रमण के लिहाज से महाराष्ट्र के बाद वर्तमान में केरल दूसरा सबसे प्रभावित राज्य है। राज्य में 12.72 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1.18 लाख से अधिक मामले वर्तमान में एक्टिव हैं। केरल में लगभग 5,000 लोग वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गले पर वार कर हत्या कर दी गई है। दोनों गाँव के ही ‘धरोहर नाथ मंदिर’ में कई साल से रह रहे थे। मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) की रात जब दोनों गहरी नींद में थे, तभी कुदाल से काट कर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ही महात्मा वैरागी किस्म के थे और उन्हें छल-प्रपंच से कोई मतलब नहीं था। उनका स्वभाव भी मृदु था।

बता दें कि धरोहर नाथ मंदिर स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध है और वहाँ विभिन्न मौकों पर पूजा-पाठ के भारी भीड़ उमड़ती है। दोनों साधु का शव पोस्टमॉर्टम के लिए मधुबनी सदर अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने अभी तक हत्या के कारणों के बारे में कुछ नहीं बताया है। जाँच चल रही है। दोनों साधुओं के साथ उनका एक सहायक भी रहता था, जिसकी जान बच गई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई।

मृतक साधुओं में से एक का सिर कमरे में तो दूसरे का दीवार के बगल में पाया गया। साधुओं के धड़ों को भूँसे में छिपा दिया गया था। बिछावन और मच्छरदानी खून से लथपथ थे। एक पुजारी नारायण दास ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी, जिन्हें पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। एक स्थानीय व्यक्ति का दावा है कि 4-5 की संख्या में हमलावर थे। ग्रामीणों ने कहा कि दहशत फैलाने और डर पैदा करने के लिए ऐसा किया गया।

एक ग्रामीण ने कहा कि साधु-महात्मा यहाँ नहीं रहें, इसीलिए उनकी हत्या कर दी गई। इनमें से एक पुजारी के बड़े भाई पास के ही बिसौली कुटी पर रहते हैं। घटनास्थल पर पुलिस मौजूद है और वो जाँच कर रही है। हमने इस मामले में पुलिस का पक्ष लेने के लिए खिरहर SHO से संपर्क किया, लेकिन उनका नंबर लगातार व्यस्त आ रहा था। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि पुलिस पोस्टमॉर्टम के बाद ही कुछ कह सकेगी।

इलाके में पहले से ही तनाव का माहौल है, क्योंकि इससे पहले की रात बिसौली कुटी के महंत ब्रजमोहन दास के आश्रम पर भी हमला हुआ था। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत ने बताया कि उनकी थाना प्रभारी से ठीक से बात नहीं हो सकी है और वो आज रामनवमी की पूजा में व्यस्त हैं, इसीलिए अब तक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हालाँकि, उन्होंने थाने में जाकर पुलिस को इस घटना से अवगत करा दिया है।

महंत ने बताया कि सोमवार की रात उनका सहायक अपने कमरे में IPL का मैच देख रहा था, तभी खिड़की के पास से कुछ फुसफुसाहट की आवाज़ आई। जब उसने करीब जाकर सुना तो बिजली काटने की बातें की जा रही थी। इसके कुछ देर बाद ही अचानक से मठ परिसर की बिजली गुल हो गई। फिर उसके मन में कुछ खटका और उसने बाहर निकल कर देखा तो गाँव में अन्य जगह बिजली थी।

खिरहर में पुजारियों की हत्या, तस्वीरें विचलित कर सकती हैं (वीडियो साभार: हरलाखी न्यूज़)

उसने महंत को आकर सारी बातें बताईं, जिन्होंने तुरंत थाने में फोन कॉल कर के खुद पर खतरा होने की जानकारी दी। साथ ही कुछ ग्रामीणों को भी सूचित किया। वो बताते हैं कि जब उन्होंने बाहर निकल कर देखा तो कुछ लोग कपड़ा मुँह पर बाँधे हुए खड़े थे। मठ के अंदर से आत्मरक्षा के लिए इन लोगों ने कुछ चीजें बाहर फेंकी, जिसके बाद वे लोग पीछे हट गए। तब तक कुछ ग्रामीण जुटे और शोर मचाने लगे।

बिसौली कुटी के महंत इलाके में ‘लव जिहाद’ और इस्लामी कट्टरपंथ के मामलों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं। इसी साल मार्च में खिरहर थाना क्षेत्र के ही बालाराही शोएब नाम के एक युवक पर नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण का आरोप लगा था। सितम्बर 2020 में ऐसे ही एक मामले में राष्ट्रीय बाल आयोग को संज्ञान लेना पड़ा था। इन सब मामलों को लेकर वे काफी मुखर रहे थे।

पाकिस्तानी फ्री होकर रहें, इसलिए रेप की गईं बच्चियाँ चुप रहें: महिला सांसद नाज शाह के कारण 60 साल के बुजुर्ग जेल में

इंग्लैंड में एक सांसद हैं, नाम है नाज शाह। पाकिस्तानी मूल की हैं। इन्हें रिटायर हो चुके एक नर्स ने नस्लवादी चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी के आधार पर अब 60 साल के इयान ब्राउन (नर्स) को वहाँ की अदालत ने सजा सुनाई है।

इयान ब्राउन ने सांसद नाज शाह को 11 अप्रैल 2020 को चिट्ठी भेजी थी। इसमें मुख्य तौर पर जबरन शादी, ऑनर किलिंग, ग्रूमिंग गैंग और महिला जननांग विकृति (FGM: female genital mutilation) के बारे में लिखा गया था। साथ ही सांसद नाज शाह पर तंज कसते हुए यह भी लिखा था कि ग्रूमिंग गैंग के शिकार लोग आपकी (सासंद की) नियुक्ति पर खुश होंगे।

पाकिस्तानी मूल की सांसद नाज शाह ने इस चिट्ठी के कंटेंट को नस्लीय मानते हुए पुलिस में शिकायत दी थीं। कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हालाँकि नर्स इयान ब्राउन ने चिट्ठी की बातों को नस्लीय मानने से इनकार किया। उन्होंने इतना ही स्वीकार किया कि ग्रूमिंग गैंग (पाकिस्तानी मूल के) ने जिन सैकड़ों-हजारों बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण, हत्या, अपहरण आदि किए, उसके गुस्से के कारण सांसद को पत्र लिखा गया।

वेस्टमिन्सटर मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने नर्स इयान ब्राउन की बातों को नकारते हुए भेजी गई चिट्ठी को नस्लीय ही माना और सजा सुनाई। ब्राउन को 6 सप्ताह की सजा, 24 महीने का सस्पेंशन और अगले 6 महीने तक सांसद नाज शाह से संपर्क नहीं करने का आदेश सुनाया गया।

नाज शाह, ग्रूमिंग गैंग और 2017

बात 2017 के अगस्त की है। ओवेन जोन्स नाम का एक पैरोडी अकाउंट था ट्विटर पर। उसने लिखा था – विविधता (विभिन्न नस्लों, देशों के लोगों के एकसाथ रहने) की भलाई के लिए… रोटरहैम और अन्य जगहों पर जिन लड़कियों का यौन शोषण हुआ, उन्हें अपना मुँह बंद रखने की जरूरत है। नाज शाह तब भी सांसद थीं। उन्होंने न सिर्फ इस ट्वीट को लाइक किया था बल्कि इसे रिट्वीट भी किया था। बवाल के बाद ट्वीट डिलीट करना पड़ा था नाज शाह को।

महिला सांसद के विचार

इन सबके पीछे एक कहानी थी। कहानी पाकिस्तानी कनेक्शन की। ग्रूमिंग गैंग (ऐसा गिरोह, जो 13-16 साल की लड़कियों को प्याप में फँसाता, रेप करता, देह-व्यापार में धकेलता या मर्डर कर देता) इंग्लैंड में पाकिस्तानियों का एक “अनजान लेकिन खौफनाक” समूह है। नाज शाह भी पाकिस्तानी मूल की है। रोटरहैम सेक्स स्कैंडल को लेकर एक सांसद साराह चैंपियन ने अपनी बात रखी थी। पीड़ितों को न्याय दिलाने और आरोपितों को सजा देने की बात कही गई थी।

पाकिस्तानी मूल की सांसद नाज शाह को यह बुरा लगा था। इतना बुरा कि खुद एक महिला होते हुए भी यौन शोषण पीड़ितों की न सोच कर उन्होंने आरोपितों के लिए लंबा-चौड़ा लेख लिख डाला था। नाज शाह के अनुसार ग्रूमिंग गैंग पर चर्चा करके बिना वजह पूरे पाकिस्तानी कम्युनिटी को बदनाम किया जाना है।

ग्रूमिंग गैंग: मौत नहीं रेप का आतंक

यह पूरे इंग्लैंड में फैला हुआ है। बहुत कम ऐसे शहर हैं, जहाँ पर यह गैंग सक्रिय नहीं। पिछले 40 साल में इंग्लैंड में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने रेप किया है। रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था।

हिल ने कहा था, “इसका बहुत कुछ नस्ल और धर्म से लेना-देना है। लड़कियों की गोरी त्वचा हमेशा ग्रूमिंग गैंग से जुड़े मुस्लिम अपराधी के दिमाग में होती है। खुद डॉ. एला हिल की यातना अच्छे मुस्लिम और गैर मुस्लिम के विचारों से प्रेरित था। उनके मुस्लिम अपराधी (पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड) का मानना था कि उनके साथ बलात्कार जायज है, क्योंकि वह सिर से पैर तक पूरी तरह से ढँकी नहीं थीं।

19000 बच्चे-बच्चियों का यौन शोषण सिर्फ 2018-19 में

2019 में इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिगों के साथ यौन ग्रूमिंग (sexual grooming) की वारदात को अंजाम दिया गया था। इंग्लैंड में स्थानीय प्रशासन ने 2018-19 में कुल 18,700 पीड़ितों की पहचान की थी, जिनकी संख्या पाँच साल पहले 3300 थी। नवीनतम आँकड़ों में पिछले 5 वर्षों में चाइल्ड ग्रूमिंग पीड़ितों की संख्या में तेज वृद्धि देखी गई।

इन सब आँकड़ों के बावजूद इंग्लैंड की न्यायिक व्यवस्था अब तक सख्ती (अज्ञात कारणों से) नहीं दिखा पा रहा। इसे आप इस खबर से समझिए। इंग्लैंड में रोशडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गिरोह का सरगना कारी अब्दुल रऊफ अब आराम से सड़कों पर बेखौफ घूम रहा है। सजा के बाद अब वो फ्री है! वो भी तब जबकि उसकी सजा के अनुसार उसे 6 साल बाद निर्वासित किया जाना था… लेकिन अभी तक नहीं किया गया।

अब्दुल या डॉ. एला हिल के पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड जैसों के साथ क्यों न्यायिक सख्ती की जानी चाहिए, इसे समझिए। अब्दुल ने एक बच्चे के साथ तब जबरन सेक्स किया, जब वो खुद 3 बच्चों का बाप था। फिर मानव तस्करी भी की। डॉ. हिल का पाकिस्तानी ब्वॉयफ्रेंड प्यार का नाटक करके बार-बार रेप करता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो ‘मुसलमान जैसी नहीं’ है।

पाकिस्तान की बदनामी, विविधता बचाना, सांसद को तकलीफ या बच्चियों को न्याय?

नाज शाह सांसद हों या पाकिस्तानी मूल की या एकदम अंग्रेज… इस पर बहस हो सकती है लेकिन वह एक औरत हैं, यह अकाट्य सत्य है। आश्चर्य इस बात का है कि एक औरत यह कैसे कह सकती है कि जिन बच्चे-बच्चियों का यौन शोषण हुआ है, वो चुप हो जाएँ क्योंकि देश में विविधता को बचाना है। सभ्य समाज की पूरी नींव ही न्याय पर आधारित है। जो ताकतवर है, उसी को ध्यान में रख कर फैसले सुनाने वाला समाज जंगलों में रहता था। सांसद नाज शाह तो इंग्लैंड के शहर में रहती हैं, फिर जंगली मानसिकता क्यों? उनकी सोच का कनेक्शन इस्लामी कट्टरपंथ से तो नहीं!

इस्लामी कट्टरपंथी सोच से प्रभावित नहीं हैं नाज शाह तो एक चिट्ठी (गुस्से से भरी, नस्लीय ही सही) से इतनी नाराजगी क्यों? क्यों किसी 60 साल के बुजुर्ग के लिए इतनी नफरत कि वो सलाखों के पीछे पहुँचा दिए जाएँ? क्षमा शोभती उस भुजंग को… ओह, दिनकर की यह कविता पाकिस्तानी आसमानी किताब वाली सांसद कहाँ पढ़ी होंगी!

विकास दुबे की गाड़ी पलटी ही थीः न्यायिक जाँच में UP पुलिस को क्लीनचिट, मीडिया के रवैए पर उठाए सवाल

विकास दुबे के एनकाउंटर में न्यायिक जाँच आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस को क्लीनचिट देते हुए मीडिया के रवैए पर सवाल उठाए हैं। रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान की अगुवाई वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है। एनकाउंटर की जाँच के लिए कमेटी बनाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगाई थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस बीएस चौहान जाँच आयोग को गैंगस्टर विकास दुबे और उसके पाँच साथियों के एनकाउंटर में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कोई गलत काम करने सबूत नहीं मिला है। न्यायिक जाँच में मुठभेड़ को सही माना गया है।

बता दें कि पिछले साल बिकरू गाँव में विकास दुबे और उसके साथियों द्वारा यूपी पुलिस के एक DSP और कई जवानों को गोलियों से भून दिया गया था, जिसके बाद मध्य प्रदेश से यूपी लाए जाते वक्त विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था। यूपी सरकार ने पिछले साल ही इस मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज बीएस चौहान के नेतृत्व में कमीशन का गठन किया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शशिकांत अग्रवाल और पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता शामिल थे।

आयोग ने स्वतंत्र गवाहों की आठ महीने की गहन खोज के बाद सोमवार (अप्रैल 19, 2021) को यूपी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट को फाइल किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। एक सूत्र ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “जाँच के दौरान कोई भी ऐसा गवाह सामने नहीं आया, जो मुठभेड़ के पुलिस से अलग कुछ जानकारी दे सके। इस केस में पुलिस के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।”

बता दें कि आयोग द्वारा समाचार पत्रों में बार-बार विज्ञापन देने के बावजूद मीडिया कर्मियों सहित ऐसा कोई भी व्यक्ति पैनल के सामने पेश नहीं हुआ, जिसने मुठभेड़ को फर्जी बताया था। आयोग ने मुठभेड़ स्थलों के पास के गाँवों में पर्चे भी बाँटे थे, जिसमें लोगों से घटनाओं का वर्णन करने का अनुरोध किया गया था। सूत्रों ने बताया कि कई ऐसे स्वतंत्र गवाह सामने आए जिन्होंने पुलिस के वर्जन को सपोर्ट किया।

न्यायमूर्ति चौहान आयोग ने अपनी 130 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है कि जाँच के दौरान दल ने मुठभेड़ स्थल का निरीक्षण करने के साथ ही बिकरू गाँव का भी दौरा दिया। मुठभेड़ करने वाली पुलिस टीम के सदस्यों के बयान लेने का प्रयास करने के साथ मौके पर मौजूद लोगों तथा मीडिया से बात की। जाँच कमेटी ने विकास दुबे की पत्नी, रिश्तेदारों और गाँव के लोगों को भी बयान के लिए बुलाया, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। न्यायमूर्ति चौहान ने कथित तौर पर घटनाओं के सबूत या फुटेज देने के लिए आगे नहीं आने के लिए मीडिया के व्यवहार को भी ‘काफी निराशाजनक’ बताया, जिन्होंने कथित फर्जी मुठभेड़ की कवरेज की थी।

गौरतलब है कि 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरु गाँव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोपित गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) 10 जुलाई 2020 की सुबह भागने की कोशिश करते हुए पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। उसे कानपुर लाते वक्त रास्ते में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने घायल यूपी एसटीएफ के पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल विकास दुबे की मौत हो गई थी।