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शाहीनबाग के मौलाना को पूर्व छात्र ने ही अगवा किया, ₹25 लाख की फिरौती माँगी: दिल्ली पुलिस ने बचाया

दिल्ली के शाहीनबाग इलाके से एक मदरसे के मौलाना को अगवा कर 25 लाख रुपए की फिरौती माँगी गई। पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर मौलाना को मुक्त कराया। इनके पास से पीड़ित का मोबाइल, दो लोहे की चेन, ताले और चाबी बरामद की गई है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आरोपितों की पहचान सदाकत (23), शमीम (26), नबी हसन (23), फिरदौस (22) और मंजर आलम (18) के तौर पर की है। सभी आरोपित मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि शाहीनबाग इलाके से मोहम्मद मुंतजीर आलम को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सकुशल मुक्त करा लिया गया है।

मौलाना मुंतजिर आलम 5 अप्रैल को गायब हो गया था। अगले दिन उसके भाई ने पुलिस से शिकायत की। एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने पड़ताल शुरू की। इसी बीच मौलाना के परिजनों को 25 लाख रुपए की फिरौती के लिए कॉल आया। कॉल मौलाना के ही नंबर से किया गया था। सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल करने पर पुलिस को सदाकत के बारे में सुराग मिला।

सदाकत का मोबाइल बंद था। लेकिन सब इंस्पेक्टर अरुण सिंधू ने तकनीकी मदद से उसे नोएडा के हरोल से गिरफ्तार किया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध) शिबेश सिंह ने बताया कि पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि सदाकत अपनी सास के घर नोएडा में छिपा हुआ है। उससे मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने शाहीनबाग के एन ब्लॉक के अबु फजल एन्क्लेव में छापेमारी की। मौलाना लोहे के चेन से बँधा मिला। इसके बाद चार अन्य आरोपित गिरफ्तार किए गए।

पूछताछ में सदाकत ने बताया कि 2008 में वह मौलाना का छात्र रहा था। अभी वह ओखला में फूड स्टॉल चला रहा था। वह पिछले 5 साल से अपनी कमाई मौलाना के पास जमा कर रहा था। सदाकत के मुताबिक उसने मौलाना के पास करीब 20 लाख रुपए जमा कर रखे थे। यह रकम उसने फूड स्टॉल और सट्टेबाजी से कमाई थी। जब उसने अपने पैसे माँगे तो मौलाना ने लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सदाकत से उसे अगवा करने का प्लान बनाया। उसे मजहबी कार्यों के लिए फ्लैट पर बुलाया और कैद कर लिया।

डॉक्टर के साथ कॉन्ग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री की बदतमीजी, लाचार होकर दिया इस्तीफा: CM शिवराज ने उठाई आवाज

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भोपाल के जेपी अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव के साथ बदतमीजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। शर्मा के साथ एक स्थानीय पार्षद गुड्डू भी है। इस घटना के बाद डॉक्टर श्रीवास्तव ने अपना इस्तीफा दे दिया है। डॉक्टर श्रीवास्तव जेपी अस्पताल में कोविड-19 वार्ड के नोडल अधिकारी भी थे।

घटना कुछ ऐसी है कि जेपी अस्पताल में एक कोविड-19 पॉजिटिव मरीज को गंभीर अवस्था में लाया गया। मरीज का ऑक्सीजन का स्तर लगभग 30% हो चुका था। अस्पताल में तुरंत ही उसे प्रारंभिक इलाज दिया गया किन्तु आईसीयू बेड्स की कमी के कारण उसे भर्ती नहीं किया जा सका। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के रिश्तेदारों को उसकी गंभीर स्थिति और अस्पताल में बेड्स की कमी की जानकारी दे दी थी।

गंभीर स्थिति में लाए गए मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता और उनके समर्थक अस्पताल पहुँच गए, जहाँ उन्होंने मरीज की मृत्यु के लिए वरिष्ठ डॉक्टर पर आरोप लगाए। वीडियो में पार्षद गुड्डू को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि डॉक्टरों ने गंभीर परिस्थितियों का मजाक बना दिया है।

जेपी अस्पताल में सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने पीटीआई को जानकारी देते हुए कहा, “कुछ नेताओं की बदतमीजी के चलते हमारे वरिष्ठ डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है। सुबह ही एक मरीज को गंभीर हालत में ट्रॉमा वार्ड में भर्ती किया गया था। डॉ. योगेंद्र ने मरीज के परिजनों को उसकी गंभीर हालत की सूचना दे दी थी। इलाज के दौरान ही मरीज की मृत्यु हो गई, जिसके बाद कुछ नेताओं ने डॉ. योगेंद्र के साथ बदतमीजी की।”

इस पूरी घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके खेद जताया और कहा, “आज हमारे डॉक्टरों के साथ जैसा बर्ताव किया गया, वह शर्मनाक है और किसी को भी डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि हमें राजनीति से ऊपर उठ कर एक साथ मिलकर कोरोना वॉरियर्स की सहायता करनी चाहिए। वो अपनी जान को जोखिम में डाल कर हमारी सेवा करते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने भी डॉक्टर के इस्तीफे की जानकारी साझा की। 

न्यू इंडियन एक्स्प्रेस ने जब कॉन्ग्रेस नेता पीसी शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, “मेरे क्षेत्र के एक मरीज की अस्पताल में मौत हो गई। ऐसे में एक संवेदनशील व्यक्ति क्या गुस्सा नहीं होगा? गरीब मरीज को निजी अस्पताल में जाने के लिए बोला गया। इसकी बात कोई नहीं कर रहा है। मेरे एक समर्थक ने डॉक्टर से चिल्ला कर बात की, जिसके लिए मैं माफी माँग चुका हूँ।”

घटना के वीडियो में डॉक्टर का बयान

एक सोशल मीडिया यूजर ने घटना का वीडियो शेयर किया है, जहाँ डॉक्टर घटना की जानकारी देते हुए देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं के द्वारा बदतमीजी किए जाने के बाद अब वो आगे अपनी सेवा नहीं देना चाहते हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भविष्य में स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों पर उन परिस्थितियों के लिए हमले भी किए जा सकते हैं, जो उनके नियंत्रण में ही नहीं हैं।

मध्य प्रदेश में 60 घंटे का लॉकडाउन

पिछले 24 घंटों में मध्य प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के 4882 नए मरीज मिले। कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक ऑक्सीजन और रेमडेसिविर नामक दवा की कमी के बाद राज्य में 60 घंटे का लॉकडाउन लगा दिया गया है, जो शुक्रवार (09, अप्रैल) को शाम 6 बजे से शुरू होकर सोमवार (12, अप्रैल) को सुबह 6 बजे तक रहेगा। कैबिनेट के साथ वर्चुअल मीटिंग में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाइ को तीन गुण किया जाएगा और हर महीने एक लाख रेमडेसिविर के इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएँगे।

9 दिन से पुजारी के शव को अंतिम संस्कार का इंतजार: राजस्थान सरकार को जगाने के लिए भरी दोपहर में लालटेन यात्रा

राजस्थान के टीकरी के पुजारी शंभू शर्मा की मौत 2 अप्रैल को हुई थी। लेकिन उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। हालाँकि लगातार विरोध-प्रदर्शनों, बीजेपी की लालटेन यात्रा और सोशल मीडिया में इस घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किए जाने के बाद राजस्थान सरकार की नींद टूटती दिख रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच सहमति बन गई है। तकरीबन दो घंटे तक चली बैठक के बाद आंदोलन समाप्ति की घोषणा की गई। सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. महेश जोशी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंदिर माफी की जमीन के संरक्षण के लिए कमेटी अन्य राज्यों का अध्ययन करेगी। इसके अलावा जब तक जाँच चलेगी, निर्माण की गई दुकानें सील रहेंगी। संभागीय आयुक्त 30 अप्रैल तक जाँच करेंगे।

बता दें कि बैठक में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. महेश जोशी, मुख्य सचिव निरंजन आर्य, DGP ML लाठर, गृह सचिव अभय कुमार, पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव शामिल हुए। वहीं आंदोलनकारी पक्ष से सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, किरोड़ी रामचरण बोहरा, बीजेपी नेता अरुण चतुर्वेदी, विधायक अशोक लहोटी, भाजपा शहर अध्यक्ष राघव शर्मा, बीजेपी नेता मुकेश दाधीच, सुमन शर्मा और विप्र फाउंडेशन अध्यक्ष राजेश कर्नल उपस्थित रहे।

इस मामले में शनिवार को भी सहमति की कोई उम्मीद नहीं देख पुजारी की डेड बॉडी को डीप फ्रीजर में शिफ्ट कर दिया गया था। दोपहर में सरकार के साथ बातचीत की उम्मीद जगी जब पुलिस के अधिकारी सरकार का संदेश लेकर आए। संभावना थी कि सचिवालय में अफसरों के साथ बातचीत में मामले का हल निकल जाएगा, मगर दिन ढलते -ढलते बातचीत की तमाम संभावनाएँ धूमिल हो गई थी।

साभार: राजस्थान पत्रिका

रामचरण बोहरा और अरूण चतुर्वेदी सरकार के संदेश का इंतजार ही करते रह गए। इस बीच किरोड़ी ने सरकार को आइना दिखाने की कोशिश की। उन्होंने लालटेन यात्रा निकाली। भरी दोपहरी में किरोड़ी हाथ में लालटेन लेकर सिविल लाइंस फाटक से सी स्कीम की तरफ बढने लगे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किरोड़ी और उनके समर्थकों को रोक दिया। इस दौरान पुलिस के साथ तीखी नोक झोंक भी हुई।

इससे पहले किरोड़ी ने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाया था। अरुण चतुर्वेदी ने कहा था कि वे सिर्फ पुजारियों के लिए ठोस कानून चाहते हैं, ताकि मंदिर माफी की जमीनों के मामले में अपराध न हों। सैंकड़ों पुजारियों की हत्या हो चुकी है। शंभू पुजारी की मौत के जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्यवाही होनी चाहिए।

मामले में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट कर शंभू पुजारी के लिए न्याय की माँग की। उन्होंने कहा, “राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि शंभू पुजारी के साथ जो महापाप हुआ है, जो अन्याय हुआ है, उसमें आपकी सरकार पूरी तरह भागीदार नजर आ रही है। आपका ये मौन, ये चुप्पी आपराधिक है। शंभू पुजारी का शव अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में वहाँ आज भी रखा हुआ है। मैं आपसे ये निवेदन करता हूँ कि आज शाम तक सांसद किरोड़ी लाल और अन्य सभी लोगों की जो भी माँगें हैं, उनको पूरा किया जाए। शंभू पुजारी का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ सुनिश्चित किया जाए। प्रदर्शनकारियों की माँगों को तुरंत स्वीकार कीजिए। आज शाम तक ये सुनिश्चित करें अन्यथा कल मुझे जयपुर आना ही होगा।”

भूमाफियाओं पर जबरन रजिस्ट्री करवाने का आरोप

गौरतलब है कि पुजारी शंभू शर्मा की 2 बीघा जमीन की फरवरी माह में कुछ भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री करा ली थी। पुजारी ने माफियाओं पर षडयंत्रपूर्वक रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाते हुए महुआ थाने में केस दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज कराने के करीब एक माह बाद 2 अप्रैल को पुजारी शंभू शर्मा की मौत हो गई थी।

इसके बाद दौसा सासंद किरोड़ी मीणा ने आरोप लगाते हुए उनके शव के साथ 3 अप्रैल से 8 अप्रैल तक महुआ थाने के बाहर न्याय की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। मीणा का कहना है कि भू माफियाओं की ओर से जबरन रजिस्ट्री करवाने के कारण ही जमीन को खोने के सदमे में पुजारी शंभू शर्मा की जान निकल गई।

₹100 करोड़ की वसूली: महाराष्ट्र के गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख के 2 सहायकों को CBI ने किया तलब

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के दो सहायकों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूछताछ के लिए तलब किया है। दोनों को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों के मद्देनजर समन भेजा गया है। सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि देशमुख ने सचिन वाजे को 100 करोड़ की टारगेट दे रखा था।

इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने देशमुख के खिलाफ सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। एजेंसी ने देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने बताया, “बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 5 अप्रैल, 2021 को केस रजिस्टर किया था।” अधिकारियों ने बताया कि संजीव पलांडे और कुंदन को हाई कोर्ट के आदेश पर शुरू की गई जाँच के तहत पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया है।

परमबीर सिंह ने पुलिस कमिश्नर के पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को यह पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा था कि देशमुख ने वाजे को मुंबई के सभी बार और रेस्टोरेंट से हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था। एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में सचिन वाजे के खिलाफ जाँच चल रही है।

5 अप्रैल को दिए अपने आदेश में हाई कोर्ट कहा ने 15 दिनों के भीतर CBI को प्रारंभिक जाँच पूरा करने को कहा था। प्रारंभिक जाँच के बाद यह CBI निदेशक के ऊपर होगा कि वे इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा था कि सरकार द्वारा कमिटी बनाने के निर्णय के बाद लगता है कि इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं।

महाराष्ट्र सरकार ने देशमुख के खिलाफ सीबीआई जाँच के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसे बहुत ही गंभीर मामला बताते हुए इसकी जाँच को आवश्यक बताया था।

महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कौल ने कहा था कि यह मुद्दा जनता के विश्वास का है। इस केस में जिन दो लोगों की संलिप्तता है वे एक साथ काम करते आए हैं और दोनों ही ऊँचे पदों पर रह चुके हैं। ऐसे में किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा इस मामले की जाँच किया जाना अति आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय में देशमुख की पैरवी कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने की थी।

SHO बेटे का शव देख माँ ने तोड़ा दम, बंगाल में पीट-पीटकर कर दी गई थी हत्या: आलम सहित 3 गिरफ्तार, 7 पुलिसकर्मी भी सस्पेंड

बिहार पुलिस के अधिकारी अश्विनी कुमार का शव देख उनकी माँ ने भी दम तोड़ दिया। किशनगंज के SHO अश्विनी कुमार की पश्चिम बंगाल में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फिरोज आलम, अबुजर आलम और शहीनूर खातून की गिरफ्तारी हुई है। पूर्णिया क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने बंगाल में छापेमारी के दौरान अश्विनी कुमार को अकेला छोड़कर भागने वाले 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

बताया जा रहा है कि अश्विनी कुमार की मौत की खबर सुनकर उनकी माँ ने दम तोड़ दिया। जब उनका पार्थिव शरीर घर लाया गया तो उसे देखते ही माँ ने प्राण त्याग दिए। इसके बाद से पूरे इलाके का माहौल गमगीन है। आज (अप्रैल 11, 2021) एक साथ माँ उर्मिला देवी और थानेदार बेटे की अर्थी घर से उठेगी।

बिहार के किशनगंज थाने के एसएचओ अश्विनी कुमार वॉन्टेड अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम के साथ पश्चिमी बंगाल के पांतापाड़ा गाँव में गए थे। यहाँ भीड़ ने एसएचओ की पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। घटनास्थल से अपनी जान बचाकर भागे सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार समेत 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

किशनगंज के एसपी कुमार आशीष ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पूर्णिया रेंज के आईजी सुरेश कुमार चौधरी ने कर्तव्यहीनता के आरोप में 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। यदि इन पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन विवेकपूर्ण ढंग से किया होता तो संभवत: यह घटना नहीं घटित हुई होती।

निलंबित होने वाले 7 पुलिसकर्मी में अंचल निरीक्षक मनीष कुमार, सिपाही राजू सहनी, अखिलेश्वर तिवारी, प्रमोद कुमार पासवान, उज्ज्वल कुमार पासवान, सुनील चौधरी सहित सिपाही सुशील कुमार का नाम शामिल है। तो वहीं, इस मामले में तीन अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसमें मुख्य अभियुक्त फिरोज आलम, अबुजार आलम और सहीनुर खातून शामिल है।

क्या है पूरा मामला 

ये घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के गोलपोखर पुलिस स्टेशन इलाके के गाँव पांतापारा में हुई। किशनगंज थाने के एसएचओ अश्विनी कुमार दलबल के साथ बाइक चोरी को पकड़ने बंगाल के पांतापाड़ा गाँव छापेमारी करने गए थे। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर खदेड़ा। थानाध्यक्ष को घेर लिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ने सूचना के बावजूद बिहार पुलिस की टीम का कोई सहयोग नहीं किया।

टीका उत्सव की शुरुआत पर PM मोदी ने किए 4 आग्रह: वैक्सीनेशन में भारत दुनिया में सबसे तेज, 85 दिन में ही 10 करोड़ डोज

कोरोना की दूसरी लहर के जोर पकड़ने के बीच आज (11 अप्रैल 2021) से राष्ट्रव्यापी टीका उत्सव का आगाज हुआ है। ज्योतिबा फुले की जयंती से शुरू हुआ यह उत्सव यह 14 अप्रैल यानी बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती तक चलेगा। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह उत्सव, एक प्रकार से कोरोना के खिलाफ दूसरी बड़ी जंग की शुरुआत है। इसमें पसर्नल के साथ-साथ सोशल हाइजिन पर भी बल देना है।

पीएम मोदी ने कहा है कि इस दौरान चार बातों का आग्रह किया है। मसलन, कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग जो खुद जाकर टीका नहीं लगवा सकते हैं, उनकी मदद करना। जिनके पास साधन और जानकारी का अभाव है उनको सहयोग प्रदान करना। मास्क पहनना और अपने इलाके में संक्रमण की स्थिति में ‘माइक्रो कन्टेनमेंट जोन’ बनाने की पहल करने की अपील की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों से दौरान बड़ी संख्या में वे टीका लगवाने की अपील की

85 दिन में लगाए गए 10 करोड़ टीके

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को बताया कि भारत ने 85 दिन में 10 करोड़ टीके लगाए हैं। भारत दुनिया का सबसे तेज टीकाकरण अभियान चलाने वाला देश बन गया है। इतने वक्त में अमरीका ने 9.2 करोड़ और चीन में 6.14 करोड़ टीके लगे थे। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को टीके की 10 करोड़ खुराक देने में 89 दिन लगे, जबकि चीन को 102 दिन लगे थे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी भारत में सबसे तेज टीकाकरण को दर्शाने वाला एक चार्ट ट्वीट किया और इसे ‘स्वस्थ व कोविड मुक्त भारत’ के लिए मजबूत प्रयास करार दिया है।

गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) को मुख्यमंत्री के साथ समीक्षा बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की थी कि उन सभी लोगों का टीकाकरण कराने पर राज्य ध्यान केंद्रित करें जो 45 साल से अधिक उम्र के हैं।

मोदी की अपील- टीके की बर्बादी बिल्कुल न करें

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कभी-कभी इससे माहौल बदलने में मदद मिलती है। ज्योतिबा फुले की जयंती 11 अप्रैल को है और 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती है। क्या हम टीका उत्सव का आयोजन कर सकते हैं और टीका उत्सव का माहौल बना सकते हैं? हमें विशेष अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक योग्य लाभार्थियों का टीकाकरण करना चाहिए और इसकी बर्बादी बिल्कुल नहीं हो इस पर विचार करना चाहिए। ‘टीका उत्सव’ के दौरान अगर चार दिनों में बर्बादी नहीं होगी तो इससे हमारे टीकाकरण की क्षमता बढ़ेगी।”

24 घंटे में 1.52 लाख से अधिक केस आए सामने

कोरोना की दूसरी लहर दिन प्रतिदिन खतरनाक होती जा रही है। देश में शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को कोरोना के 1.52 लाख से अधिक नए केस मिले। लगातार 5वें दिन संख्या एक लाख से ज्यादा रही है। हर दिन के साथ संक्रमितों की संख्या का नया रिकॉर्ड बन रहा है। शुक्रवार को करीब 1.45 लाख और गुरुवार को 1.31 लाख मरीज मिले थे। अब देश में एक्टिव केस की संख्या 11 लाख के पार हो गई है।

पिछले 24 घंटे में 90,584 लोग ठीक हुए हैं और 839 लोगों की मौत हुई हैं। मौत के मामले में इस साल दूसरी बार एक दिन में 800 या इससे ज्यादा लोगों ने जान गँवाई है। इससे पहले 8 अप्रैल को 802 लोगों की मौत हुई थी।

दिल्ली में नई पाबंदियों का ऐलान

दिल्ली में बढ़ते के कोरोना मामलों के मद्देनजर नाइट कर्फ्यू के बाद अब नई पाबंदियों का ऐलान किया गया है। दिल्ली में अब अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 और शादी समारोह में 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे।

रेस्टोरेंट और बार भी अब अपनी सीटिंग कैपेसिटी की 50% क्षमता के साथ काम करेंगे। मेट्रो में भी एक कोच में सीटिंग कैपेसिटी के 50% ही लोग यात्रा कर सकेंगे। बसों और मेट्रो में भी एक समय मे 50% क्षमता के साथ ही यात्री यात्रा कर सकेंगे। सिनेमा, थिएटर और मल्टीप्लेक्स भी 50% क्षमता के साथ ही चलेंगे।

फ्लाइट के जरिए महाराष्ट्र से दिल्ली आने वाले सभी यात्रियों को यात्रा से करीब 72 घंटे तक पुरानी RT-PCR टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। साथ ही जो लोग महाराष्ट्र से बिना निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट के आएँगे, उन्हें 14 दिन क्वारंटाइन किया जाएगा।

राजनीतिक-सामाजिक आयोजनों पर रोक

दिल्ली में सभी तरह की सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, अकादमी, सांस्कृतिक, धार्मिक और त्योहार संबंधी जमावड़ों पर रोक लगा दी गई है। सभी स्विमिंग पूल भी बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान सिर्फ वही स्विमिंग पूल खुले रहेंगे, जहाँ खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं। स्टेडियम में स्पोर्ट्स इवेंट आयोजित करने की इजाजत होगी, लेकिन दर्शक नहीं जा सकेंगे।

14 साल के फैसल से अम्मी-अब्बू गुहार लगाते रहे पर आतंकी कमांडर ने नहीं करने दिया सरेंडर, कश्मीर में 3 दिन में 11 आतंकवादी ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ (Shopian Encounter) में तीन आतंकियों को मार गिराया है। कश्मीर में पिछले तीन दिनों 11 आतंकी ढेर किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि शोपियाँ का ऑपरेशन पूरा हो गया है। वहीं अनंतनाग के बिजबेहरा में मुठभेड़ चल रही है। माना जा रहा है कि वहाँ दो से तीन आतंकी छिपे हो सकते हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में शोपियाँ जिले के हादीपुरा में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना पाकर सुरक्षाबलों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की। मार गिराए गए आतंकी अलबदर से जुड़े थे।

मारे गए आतंकियों में एक 14 साल का नाबालिग फैसल गुलजार गनई भी था। उसका आत्मसमर्पण कराने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः सुरक्षा बलों के हाथों वह मारा गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सुरक्षा बलों ने नाबालिग के माता-पिता से सरेंडर करने की अपील भी कराई। पहले तो फैसल आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हुआ, लेकिन उसके साथ मौजूद अलबदर कमांडर आसिफ शेख ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।

मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान अलबदर का जिला कमांडर आसिफ अहमद गनी, 14 वर्षीय आतंकी फैसल गुलजार गनी और उबैद अहमद के रूप में हुई है। हालाँकि अधिकारिक तौर पर पुलिस ने मारे गए आतंकियों की पहचान उजागर नहीं की है।

इसके पहले सुरक्षाबलों ने शुक्रवार (अप्रैल 9, 2021) को शोपियाँ जिले की एक मस्जिद में छिपे 5 आतंकियों को मार गिराया था। वहीं गुरुवार (अप्रैल 8, 2021) को शोपियाँ के ही जानमोहल्ला इलाके में एनकाउंटर के दौरान 3 आतंकी आतंकी मारे गए थे।

बता दें कि मस्जिद में छिपे आतंकियों से पहले सरेंडर करने के लिए कहा गया था। उन्हें समझाने के लिए उस मस्जिद के इमाम और एक आतंकी के भाई को मस्जिद के अंदर भेजा गया था, लेकिन आतंकी नहीं माने। आतंकियों को आत्मसमर्पण के लिए 17 मौके दिए गए, मगर इसके बाद भी जब उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया तो ऐसे में कई घंटों की मशक्कत के बाद सुरक्षाबलों ने सभी 5 आतंकियों को ढेर कर दिया।

कूच बि​हार में नेताओं की नो एंट्री, सुरक्षा बलों की 71 और कंपनियों को बंगाल भेजने का निर्देश: हिंसा के बाद EC सख्त

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं। जिले में अगले 72 घंटों तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। एक बूथ पर दोबारा मतदान के आदेश दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सुरक्षा बलों की 71 अतिरिक्त कंपनियों की राज्य में तैनाती के आदेश दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 5वें चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार खत्म होने की समय सीमा 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे कर दी है।

कूच बिहार में चौथे चरण के तहत शनिवार (10 अप्रैल 2021) को वोट पड़े थे। इस दौरान हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो गई थी। जिले के सीतलकुची विधानसभा क्षेत्र के माथाभांगा ब्लॉक के जोर पाटकी इलाके में भीड़ ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलों (सीआईएसएफ) की एक टीम पर हमला कर हथियार छीनने का प्रयास किया था।

इसके बाद आत्मरक्षा में सीआईएसएफ की टीम को ओपन फायर के लिए मजबूर होना पड़ा। फायरिंग में चार उपद्रवियों मोनिरुज्जमान, हमीदुल मियाँ, नूर अल्मा मियाँ और समीउल हक की मौत हो गई थी। एक अन्य घटना में उपद्रवियों की फायरिंग में पहली बार वोट डाल रहे अठारह वर्षीय आनंद बर्मन की मौत हो गई थी।

कूच बिहार के एसपी ने अराजक तत्वों के खिलाफ सीआईएसएफ की कार्रवाई को सही बताते हुए कहा था कि 300-350 लोगों की भीड़ ने CISF की टीम पर हमला किया था और हथियार छीनने की कोशिश की। जिसके बाद टीम उपद्रवियों पर गोली चलाने के लिए मजबूर हो गई। अधिकारी ने बताया था, “दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और स्थानीय लोगों ने सीआईएसएफ का घेराव कर राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद सेंट्रल फोर्स ने ओपन फायरिंग की।”

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कूच बिहार जाने का ऐलान किया था। कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ने की किसी भी आशंका से बचने के लिए चुनाव आयोग ने कूच बिहार जिले में अगले 72 घंटों तक नेताओं के प्रवेश पर रोक लगाई है। आयोग ने कहा है, “निर्वाचन आयोग निर्देश देता है कि 5वें चरण (17 अप्रैल) के लिए चुनाव प्रचार नहीं होने की अवधि को बढ़ाकर 72 घंटे किया जाएगा। मतदान से 72 घंटे पहले प्रचार की इजाजत नहीं दी जाएगी जिससे स्वतंत्र, निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित हो सके।”

साथ ही चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पश्चिम बंगाल के शेष चार चरणों के चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से करवाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 71 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात करने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए अब तक 1,000 कंपनियों की तैनाती हो चुकी है। नई 71 कंपनियों में बीएसएफ (33), आईटीबीपी (13), सीआरपीएफ (12), एसएसबी (9) और सीआईएसएफ (4) से लिया गया है।

कूच बिहार की हिंसा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कल सिलीगुड़ी की रैली में जिक्र किया था। उन्होंने ममता बनर्जी पर ‘केंद्रीय बलों के खिलाफ लोगों को उकसाने’ का आरोप लगाया था। साथ ही चुनाव आयोग से हिंसा के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मॉंग की थी। दूसरी ओर, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार बताया था। पार्टी ने कहा था कि केंद्रीय बलों ने शाह के इशारे पर हमला किया।

TRP स्कैम में सचिन वाजे ने BARC से लिए थे ₹30 लाख, डमी कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे पैसे: रिपोर्ट

मुंबई की तलोजा जेल पहुँच चुके मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की 27 दिनों की कड़ी पूछताछ में यह सामने आया है कि एंटीलिया के बाहर विस्फोटक रखने के बाद वाजे कुछ और बड़ा करने वाला था। इसकी डिटेल NIA की टीम जल्द सार्वजनिक कर सकती है।

इस बीच टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (TRP) स्कैम में भी उसकी भूमिका सामने आई है। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सचिन वाजे का लिंक पाया है। अधिकारियों ने पाया कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने अपने अधिकारियों को परेशान न करने के एवज में वाजे को मुंबई क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर के माध्यम से 30 लाख रुपए दिए थे।

बताया जा रहा है कि BARC के अधिकारियों ने वाजे को रिश्वत देने के बारे में बयान भी दिया है, जिसमें बताया गया है कि पैसा एक डमी कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया। BARC द्वारा डमी कंपनी में भुगतान करने के बाद इसे चार और शेल कंपनियों के माध्यम से लेयर्ड किया गया। फ़िर इसे हवाला ऑपरेटर के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद इस राशि को BARC को नकद में लौटाया गया, जिसे बाद में वाजे के सहयोगी इंस्पेक्टर सौंप दिया गया।

बता दें कि पिछले साल 4 नवंबर 2020 को अर्नब गोस्वामी को बिना समन जारी किए घर से जबरदस्ती उठाया गया था। उन्हें अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर ले जाया गया और फिर तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया। गोस्वामी को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को लीड सचिन वाजे ने किया था, जो अब खुद एंटीलिया केस में तलोजा जेल में बंद है।

पिछले दिनों मुंबई के एक बिल्डर ने सचिन वाजे के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज कराया था। उसने वाजे और उसके साथियों पर डरा-धमका कर रुपए वसूलने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में मुंबई पुलिस कमिश्नर और महाराष्ट्र के DGP को भी शिकायत पत्र भेजा था।

बिल्डर ने बताया कि उससे विभिन्न लोगों को लाखों रुपए देने को कहा गया और ऐसा न करने पर विभिन्न मामलों में फँसा कर जेल भेजने की धमकी दी गई। बिल्डर ने बताया कि वो ‘क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU)’ में सचिन वाजे से व्यक्तिगत रूप से मिलने भी गया था। लेकिन उसे नहीं मिलने दिया गया। उससे 5 लाख रुपए की डिमांड की गई। पैसा नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।

‘किसान- हमें बिचौलियों के माध्यम से पैसा चाहिए’: पंजाब में अब DBT के जरिए MSP भुगतान रोकने के लिए प्रदर्शन

एक ओर जहाँ केंद्र सरकार बिचौलियों को दरकिनार करते हुए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों को सीधे खाते में ही भुगतान करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर पंजाब में किसान फसल के दामों को सीधे बैंक खाते में लेने के लिए तैयार ही नहीं हैं। किसानों की माँग है कि उन्हें उपज का दाम बिचौलियों के माध्यम से ही दिया जाए।

पंजाब में आज (10, अप्रैल) से ही फसल खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली थी किन्तु कई स्थानों पर प्रदर्शन के कारण यह शुरू नहीं हो सकी। मजदूर संघों और आढ़तियों की हड़ताल के कारण पंजाब के कई हिस्सों में फसल कि खरीदी नहीं हो सकी। मजदूर संघ और आढ़तिए किसानों के ‘हित’ में सीधे भुगतान का विरोध कर रहे हैं।

पंजाब में मजदूर संघ के महासचिव ने कहा कि यदि केंद्र की डीबीटी योजना लागू हुई तो इससे किसान बर्बाद हो जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूर संघ उन किसानों के हित में हड़ताल पर हैं, जो महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। एक आढ़तिया ने यह भी कहा कि जब तक माँगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल चलती रहेगी।

जालंधर में अनाज मंडी में कुछ किसान गेहूँ लेकर पहुँचे किन्तु आढ़तियों और मजदूरों की हड़ताल के कारण अपनी उपज बेंच नहीं सके। किसानों का कहना है कि खरीदी के सीधे भुगतान से उन्हें नुकसान ही है क्योंकि उन्हें वही राशि आढ़तियों से मिल जाती है और पैसों की आवश्यकता पड़ने पर वे आढ़तियों से पैसे उधार भी ले सकते हैं।

गौरतलब है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रत्यक्ष भुगतान पर ना-नुकुर करने वाली पंजाब सरकार भी अंततः खरीदी के सीधे भुगतान के लिए राजी हो गई थी। हालाँकि, राज्य सरकार का यह निर्णय तब आया जब केंद्र ने कहा कि यदि राज्य सरकार प्रत्यक्ष भुगतान की योजना को लागू नहीं करेगी तो केंद्र भी राज्य के खाद्य स्टॉक की खरीदी नहीं करेगी। राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह ने कहा कि राज्य सरकार के पास इसी सीजन से प्रत्यक्ष भुगतान योजना लागू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

राज्य सरकार की इस घोषणा के बाद आढ़तियों ने ऐलान किया कि वे 10 अप्रैल से हड़ताल पर जा रहे हैं। राज्य में इसी दिन से फसल खरीदी शुरू होने वाली थी। वहीं पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा में आढ़तियों की हड़ताल खत्म हो गई है और अनाज मंडियों गेंहू की खरीदी भी शुरू हो गई है।