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‘COVID-19 रोकने में मास्क अप्रभावी’: प्रशांत भूषण के ट्वीट को ट्विटर ने किया रिमूव, बताया- नियमों का उल्लंघन

वामपंथी गिरोह के सक्रिय सदस्य व पीआईएल एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण के एंटी मास्क ट्वीट को ट्विटर ने अपने प्लैटफॉर्म से रिमूव कर दिया है। 10 अप्रैल को भूषण ने अपने ट्वीट में एक Hypothesis का लिंक शेयर करके ये बताया था कि फेसमास्क का इस्तेमाल कोरोना समय में कारगर नहीं है।

अपने ट्वीट में भूषण ने लिखा था, “डेटा का सुझाव है कि वायरल और संक्रामक बीमारी जैसे कोविड ​​-19  को रोकने के लिए फेसमास्क अप्रभावी हैं। फेसमास्क पहनने से काफी प्रतिकूल शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं।”

अपने ट्वीट में भूषण ने रिपोर्ट को कोट किया और मास्क पर हुई स्टडी को पढ़ने को कहा। लेकिन यूजर्स ने उनकी सुनने की बजाय उनकी आलोचना शुरू कर दी। यहाँ तक उनके अपने खेमे के लोगों (वामपंथियों) ने भी उन्हें नहीं बख्शा।

कई लोगों ने झूठी जानकारी फैलाने पर उनके ट्वीट की रिपोर्ट की और आखिरकार ट्विटर को शाम तक इस ट्वीट को हटाना पड़ा। अब ट्वीट पर भूषण का ट्वीट नहीं दिख रहा। लेकिन ये नजर आ रहा है कि ये ट्वीट ट्विटर नियमों का उल्लंघन करता है।

उल्लेखनीय है कि बरूच वेन्शेलबोइम द्वारा किया गया अध्ययन इस साल जनवरी में साइंश डायरेक्ट पर प्रकाशित किया गया था, और इसी रिपोर्ट को पिछले साल नवंबर में नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन, यूएस की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था, जो अमेरीकी सरकार द्वारा वित्त पोषित है। बता दें कि अध्य्यन, पहले से प्रकाशित वैज्ञानिक स्टडी पर आधारित है। वेबसाइट भी .gov domain पर आती है जिसका मतलब है कि ये यूएस सरकार की वेबसाइट है।

महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे ने कोरोना रोकने के लिए लॉकडाउन को बताया आखिरी विकल्प, फडनवीस ने कहा- लोगों का गुस्सा फूट जाएगा

पूरे देश में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमितों की संख्या फर्स्ट वेव के मुकाबले सेकंड वेव में तेजी से बढ़ रही है। पिछले 24 घंटों में 1,45,384 संक्रमित मरीज मिले। यह संख्या महामारी शुरू होने के बाद से सर्वाधिक है। कई राज्यों में भी संक्रमण के हालात गंभीर होते जा रहे हैं। उनमें से एक राज्य महाराष्ट्र भी है। महाराष्ट्र में हालात बहुत खराब हैं।

पिछले कई दिनों से राज्य में रोज मिलने वाले नए संक्रमितों की संख्या 50,000 से ऊपर बनी हुई है। कोरोनावायरस की इस समस्या से निपटने के लिए शनिवार (10, अप्रैल) को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य में पूर्ण लॉकडाउन करने पर विचार किया गया। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने सम्पूर्ण लॉकडाउन का विरोध किया और दूसरे उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विपक्ष के नेता और कैबिनेट के मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेन्द्र फड़नवीस, राज ठाकरे, चंद्रकांत पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल और नाना पटोले भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि फिलहाल हालात सही नहीं दिख रहे हैं और न ही लॉकडाउन के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वायरस की चैन तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाना पड़ेगा।

पाबंदियाँ बढ़ाएँ लेकिन लॉकडाउन आखिरी विकल्प नहीं : देवेन्द्र फड़नवीस

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन लॉकडाउन ही आखिरी विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। पाबंदियाँ बढ़ा देनी चाहिए लेकिन व्यापारियों और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने इस सप्ताह के अंत में कड़े लॉकडाउन की घोषणा की है। यह लॉकडाउन शुक्रवार (09, अप्रैल) को रात 8 बजे से सोमवार (12, अप्रैल) की सुबह 7 बजे तक रहेगा। राज्य में नाइट कर्फ्यू भी लागू है जो शाम को 8 बजे से सुबह 7 बजे तक रहता है।

महाराष्ट्र में शुक्रवार को 58,993 नए संक्रमित मिले और 301 मरीजों की मौत हुई। इसके बाद राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 32,88,540 हो गई है।

मंदिरों की मुक्ति पर निर्णय के बाद अब लव जिहाद पर कानून की तैयारी: CM तीरथ सिंह ने संतों से कहा- आपको निराश नहीं करेंगे

गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड भी लव जिहाद पर कानून बनाने जा रहा है। हरिद्वार के परमधाम में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वह राज्य में लव जिहाद को लेकर चिंतित हैं और जल्दी ही उस पर सख्त कदम उठाने जा रहे हैं।

हरिद्वार के परमधाम में विहिप की केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में विहिप के कई सदस्य और साधु-संत उपस्थित थे। उन्होंने राज्य में लव जिहाद का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि साधु-संतों के आशीर्वाद से राज्य में लव जिहाद के बहुत अधिक मामले नहीं है किन्तु वह इस पर ध्यान दे रहे हैं और जल्दी ही इस पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह संतों को निराश नहीं करेंगे।

पुलिस अधिकारियों के साथ कर चुके हैं चर्चा :

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वह पुलिस अधिकारियों के साथ इस विषय पर पहले भी चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वो राज्य में लव जिहाद से संबंधित मामलों में सभी जिलों की रिपोर्ट भी ले चुके हैं जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

संतों और विहिप सदस्यों ने व्यक्त की थी चिंता :

चित्रकूट के रामचन्द्र दास ने कहा कि लव जिहाद एक सोची समझी साजिश है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित महिला अधिकारी भी धोखा खा सकती है तब संतों को आम नागरिकों की चिंता अवश्य करनी चाहिए।

इसके अलावा ऑनलाइन और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से धार्मिक स्थानों और संतों के विरुद्ध किए जा रहे षड्यंत्र और उनके आपत्तिजनक चित्रांकन के विषय में भी बैठक में चर्चा की गई। विहिप सदस्यों और साधुओं ने हिन्दू मंदिरों को सरकारों के नियंत्रण से मुक्त करने की माँग भी की। हालाँकि, उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में 51 मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने का निर्णय लिया है।   

रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध मुंबई पुलिस ने रद्द किए सभी ‘चैप्टर प्रोसिडिंग’, अर्नब गोस्वामी ने कहा- सत्यमेव जयते

रिपब्लिक टीवी ने सूचना दी है कि मुंबई पुलिस के द्वारा न्यूज एवं मीडिया समूह के विरुद्ध दर्ज की गई सभी ‘चैप्टर प्रोसीडिंग्स’ को रद्द कर दिया गया है। चैप्टर प्रोसीडिंग्स निवारक प्रवृत्ति की होती हैं और पुलिस संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति अथवा संस्था के विरुद्ध इनका उपयोग कर सकती है।

रिपब्लिक टीवी ने सोशल मीडिया पर इसकी सूचना देते हुए कहा, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के प्रमुख संपादक अर्नब गोस्वामी के विरुद्ध मुंबई पुलिस द्वारा शुरू की गईं सभी चैप्टर प्रोसीडिंग्स पूरी तरह से रद्द कर दी गई हैं। यह सत्य की जीत है और उनकी हार है जो भारत के सबसे पसंदीदा न्यूज ब्रांड के विरुद्ध साजिश कर रहे थे।”

मुंबई पुलिस द्वारा चैप्टर प्रोसीडिंग्स को रद्द किए जाने पर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क का बयान

रिपब्लिक ने आगे कहा, “इन चैप्टर प्रोसीडिंग्स के साथ रिपब्लिक के खिलाफ किए जा रहे सारे षड्यंत्र भी खत्म हो गए। सत्य को कहने का साहस रखने वाले और राष्ट्रवादी मीडिया नेटवर्क के लिए यह एक बड़ी जीत है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का ऑर्डर भी यही कहता है कि हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत, गलत और निराधार हैं।”

रिपब्लिक ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि जो वास्तविक अपराधी थे, सजिशकर्ता थे, आज वो हार चुके हैं और रिपब्लिक की यह जीत सत्य कहने, लोगों के हित को प्राथमिकता देने और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की अर्नब गोस्वामी की विरासत का परिणाम है।

अपने समर्थकों को धन्यवाद देते हुए मीडिया नेटवर्क ने कहा कि उन सभी समर्थकों का हृदय से धन्यवाद जिन्होंने हमेशा साथ रहकर सत्य की लड़ाई लड़ी और यह साबित किया कि सत्य कभी भी पराजित नहीं हो सकता है, चाहे झूठ कितना भी क्यों न चिल्लाए।

मुंबई पुलिस ने कथित मुट्ठीभर साक्ष्यों के बल पर रिपब्लिक टीवी को टीआरपी घोटाले में घसीटने का प्रयास किया। बाद में यह साफ हो गया था कि महा विकास अघाड़ी सरकार की आलोचना, सुशांत सिंह राजपूत के केस और पालघर में साधुओं की मॉब लिन्चिंग पर रिपब्लिक की लगातार रिपोर्टिंग के कारण मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक नेटवर्क के विरुद्ध एजेंडा चलाया था।  

किशनगंज SHO हत्या के मामले में आलम, अबुजर और शहीनूर खातून गिरफ्तार: बंगाल में भीड़ ने पीट-पीटकर मारा

पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले में शनिवार (अप्रैल 10, 2021) की तड़के बिहार के एक पुलिस अधिकारी को हिंसक भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला। घटना गोलपोखर थाने के पंतपाड़ा गाँव की है। यहाँ किशनगंज के थानाध्यक्ष एक बाइक चोरी मामले में रेड मारने अपनी टीम के साथ निकले थे। उन्हें पता चला था कि अपराधियों का कनेक्शन सीमावर्ती पश्चिम बंगाल के क्षेत्र से जुड़ा है।

हालाँकि, रेड के दौरान हिंसक भीड़ उनके सामने आई और उन्हें पीटने लगी। इस बीच पांजीपाड़ा के पुलिस अधिकारियों ने उन्हें वहाँ से बचाया और इस्लामपुर सदर अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ पता चला की वह जिंदा नहीं हैं। 

पुलिस ने थानाध्यक्ष की मौत के बाद इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान फिरोज आलम, अबुजर आलम और शहीनूर खातून के तौर पर हुई है। वहीं, किशनगंज पुलिस द्वारा मृत अधिकारी का शव पोस्टमार्टम के बाद ले लिया गया। लेकिन, कुमार के घरवालों ने उनके शव को लेने से मना करते हुए इसे एक साजिश कहा।

कुमार के परिजनों ने टीम के अन्य पुलिसकर्मियों पर सवाल खड़े किए। परिवार जानना चाहता है कि आखिर बंगाल पुलिस को पहले इस रेड के बारे में क्यों नहीं बताया गया। परिजन इस केस में SIT जाँच की माँग कर रहे हैं, जबकि बिहार पुलिस ने कुमार की मृत्यु के बाद उनके किसी परिजन को जॉब देने की बात कही है।

बता दें कि किशनगंज थानाध्यक्ष ने बिहार पुलिस 1994 में ज्वाइन की थी। कुछ साल पहले ही उनका ट्रांस्फर हुआ था। बताया जा रहा है कि किशनगंज के SHO की हत्‍या शनिवार की सुबह करीब 4 बजे की गई थी। छापेमारी करने गई टीम पर भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया। इस दौरान बाकी पुलिसकर्मी तो बच निकले, लेकिन अंधेरे में थानाध्यक्ष अश्विनी अपराधियों के हाथ लग गए। अपराधियों ने पीट-पीटकर उनकी हत्‍या कर दी।

इस मामले को लेकर भाजपा के पाटलिपुत्र सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने पश्चिम बंगाल सरकार और वहाँ के प्रशासन पर हमला बोला है। उन्‍होंने कहा है कि यह घटना बंगाल में कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति को उजागर करने के लिए काफी है। वहाँ पूरी तरह से गुंडों का राज है। 

सीतलकुची में चुनावी हिंसा में मोनिरुज्जमान, समीउल, हमीदुल, नूर की मौत, हथियार छीन रहे उपद्रवियों पर बचाव में हुई फायरिंग

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान से पहले हिंसा में 5 लोगों की मौत हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार हिंसक भीड़ ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलों (सीआईएसएफ) की एक टीम पर हमला कर हथियार छीनने का प्रयास किया। जिसके बाद आत्मरक्षा में सीआईएसएफ की टीम को मजबूरी में ओपन फायर करना पड़ा। इस फायरिंग में चार उपद्रवियों मोनिरुज्जमान, हमीदुल मियाँ, नूर अल्मा मियाँ और समीउल हक की मौत हो गई। हालाँकि, मामले को राजनैतिक रंग देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केन्द्रीय बलों ने वोटिंग के लिए लाइन में खड़े व्यक्तियों पर गोली चलाई है।

घटना कूच बिहार जिले के सीतलकुची विधान सभा में माथाभांगा ब्लॉक के जोर पाटकी इलाके की है। जलपाईगुड़ी रेंज के डीआईजी अन्नप्पा ई ने मीडिया को बताया कि पोलिंग बूथ पर वोट डालने आई एक महिला के साथ एक 14 वर्षीय बच्चा भी था जो अचानक बीमार होकर गिर गया जिसे वहीं खड़ी क्विक रिस्पॉन्स टीम की वैन में अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद यह अफवाह फैल गई कि केन्द्रीय बलों ने बच्चे को गोली मार दी। इस अफवाह के बाद सैकड़ों की भीड़ इकट्ठा हो गई और उसमें से कई उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों के हथियारों को छीनने का प्रयास भी किया।

जब भीड़ लगातार अनियंत्रित होती गई तब मजबूरी में सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने आत्मरक्षा में गोली चला दी। कूच बिहार एसपी ने अराजक तत्वों के खिलाफ सीआईएसएफ की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि कार्रवाई ‘आत्मरक्षा’ में की गई। उन्होंने कहा कि 300-350 लोगों की भीड़ ने सीआईएसएफ की टीम पर हमला किया था और उनके हथियार छीनने की कोशिश की। जिसके बाद टीम उपद्रवियों पर गोली चलाने के लिए मजबूर हो गई।

इस फायरिंग में चार उपद्रवियों मोनिरुज्जमान, हमीदुल मियाँ, नूर अल्मा मियाँ और समीउल हक की मौत हो गई। एक दूसरे घटनाक्रम में उपद्रवियों के द्वारा गोली चलाने से पहली बार वोट डालने जा रहे अठारह वर्षीय आनंद बर्मन की भी मौत हो गई।  

घटना के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस ने मामले को चुनावी रंग देते हुए आरोप लगाया कि हिंसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की करतूत थी। पार्टी का दावा है कि केंद्रीय बलों ने शाह के इशारे पर हमला किया।

ममता बनर्जी ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि वह रविवार (अप्रैल 11, 2021) को बूथ का दौरा करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं बदला लूँगी। मेरा बदला ईवीएम के जरिए होगा। केंद्रीय बल मेरे दुश्मन नहीं हैं। लेकिन अमित शाह लोगों को मारने की साजिश रच रहे हैं।”

‘अब आइसक्रीम नहीं धूल खाएँगे’: सचिन वाजे के तलोजा जेल पहुँचने पर अर्नब गोस्वामी ने साधा बरखा दत्त पर निशाना

मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे को तलोजा जेल भेजे जाने के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने अपने प्राइम टाइम में बरखा दत्त को एक विशेष संदेश दिया।

शो में बिना कोई नाम लिए गोस्वामी ने बरखा दत्त को पिछले साल उनके साथ हुई उस घटना पर जश्न मनाने के लिए लताड़ा, जब मुंबई पुलिस ने गोस्वामी को उनके घर से ले जाकर जेल में प्रताड़ित किया था।

शुक्रवार के प्राइम टाइम में अर्नब लुटियन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर बरसे। डिबेट के 46 मिनट 19 सेकेंड के स्लॉट पर अर्नब ने सीधे बरखा दत्ता को उनकी अवैध गिरफ्तारी पर जश्न मनाने और सचिन वाजे जैसे भ्रष्ट अधिकारी के कुकर्मों का महिमामंडन करने के लिए लताड़ा।

गोस्वामी ने कहा, “जिस रात मुझे गिरफ्तार किया गया था और मेरा परिवार भरी हुई AK-47 के साथ घिरा हुआ था, एक पत्रकार, कोट-अनकोट, मैं उसे पत्रकार नहीं कहूँगा, भारत में हाफिज सईद की पसंदीदा ने कथिततौर पर कहा था कि वह आइसक्रीम खाकर इस रात का जश्न मनाना चाहती हैं। आज वो आइसक्रीम नहीं खाएँगी। अब वह धूल खाएँगे।”

अर्नब ने आगे कहा, “मेरे टारगेट कई हैं, तब मीडिया का दुरुपयोग नहीं किया गया था, उन्होंने  मेरे खिलाफ साजिश रची थी। मेरे हाथ बहुत सबूत लगे हैं और मैं समय आने पर नाम लूँगा।”

अर्नब की गिरफ्तारी पर बरखा को खानी थी आइसक्रीम

गौरतलब है कि 4 नवंबर 2020 को जब अर्नब को 40 मुंबई पुलिसकर्मी उनके घर से खींचकर अपने साथ ले गए थे, उस समय बरखा दत्त ने आइसक्रीम खाने की बात अपने ट्विटर पर लिखी थी। आज उसी ट्वीट के जवाब में अर्नब ने अपना संदेश दिया है।

मालूम हो कि बरखा दत्त की फैन फॉलोइंग आतंकियों में भी हैं। उन्हें लश्कर ए तैयबा का हाफिज सईद फॉलो करता है। एक इंटरव्यू में सईद ने बरखा को सराहते हुए कहा था, “भारत में बरखा दत्त जैसे लोग भी मौजूद, बहुत अच्छी बात करने वाले भी मौजूद हैं।”

याद दिला दें कि पिछले साल 4 नवंबर 2020 को अर्नब गोस्वामी को बिना समन जारी किए घर से जबरदस्ती उठाया गया था। कुछ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें उस दौरान उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर ले जाया गया और फिर तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया। गोस्वामी को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को लीड सचिन वाजे ने किया था, जो अब खुद एंटीलिया केस में तलोजा जेल में बंद है।

PM मोदी ने भारत में नई शक्ति का निर्माण कर सांस्कृतिक बदलाव को दिया जन्म, उन्हें रोकना मुश्किल: संजय बारू

पॉलिटिकल कमेंटेटर और विश्लेषक संजय बारू ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में एक नए एलीट क्लास का निर्माण किया है। उन्होंने एक ऐसे सांस्कृतिक बदलाव को जन्म दिया है, जो देश पर राज करेगा, उसके विचार, भारत के विचार होंगे। बारू ने यह बात हाल ही में वामपंथी ऑनलाइन पोर्टल द वायर के लिए पत्रकार करण थापर को दिए इंटरव्यू में कही।

इंटरव्यू में बोलते हुए उन्होंने अपनी नई किताब, “इंडियाज पावर एलीट: क्लास, कास्ट एंड ए कल्चरल रिवॉल्यूशन” को लॉन्च किया। बारू ने कहा कि नए बुद्धिजीवी अमित शाह और योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से अलग दुनिया से हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में सरकार और नौकरशाही ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को अधिक महत्व देना शुरू कर दिया है। इससे पहले इस पर अंग्रेजी उच्च-मध्यम वर्ग का वर्चस्व था।

संजय बारू ने इसके बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “नई एलीट पॉवर प्रांतीय है, अंग्रेजी में सहज नहीं है। मुझे लगता है कि हमारे पास दिल्ली में और भारत के कई हिस्सों में जो नौकरशाही है। वह मौखिक रूप से सोचती है। प्रशासनिक व्यवस्था में जिस तरह की उपमाओं प्रतीकवाद का उपयोग करते हैं, उसमें सांस्कृतिक क्रांति मिली हुई है। यह एक ऐसा तरीका है, जिसके बारे में शासक वर्ग गहनता से विचार करता है।”

बारू ने कहा, “नई एलीट शक्ति पूरी तरह से क्षेत्रीय है। ये लोग बातचीत में हिंदी अथवा मौखिक भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। ये अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत अपर-मिडिल-क्लास से आते हैं। देश में नई शक्तियां मध्यम वर्ग की हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से ऊंचा मुकाम हासिल किया हैं। ये उन परिवारों में पैदा नहीं हुए, जिन्हें हर तरह की चीजें आसानी से मिल जाती हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि पीएम मोदी के सत्ता में आने से पहले नई दिल्ली में सरकार ने किस तरह से बदलाव किया? BJP के सत्ता में आने से पहले राजधानी के पावर एलीट का गठन करने वाले सामाजिक वर्ग में आमूल-चूल परिवर्तन नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर मौकों पर सत्ता के एलीट क्लास में भी समान विशेषताएं मिल जाती थीं।

पॉलिटिकल कमेंटेटर ने यह भी कहा कि पुराना एलीट क्लास अक्सर एक ही यूनिवर्सिटी अथवा स्कूल से होता था, जो कि जिमखाना या आईआईसी से होता था। बारू ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ऐसा पहली बार है जब देश के पीएमओ में सेंट स्टीफेंस अथवा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट कोई भी अधिकारी नहीं है।

बारू ने कहा, “पुराने जन बुद्धिजीवियों और लेफ्ट लिबरल्स को हिंदू राष्ट्रवादी बुद्धिजीवियों से बदल दिया गया है।”

उन्होंने ये दावा किया कि सत्ता के एलीट क्लास की उभरती हुई सांस्कृतिक क्रांति ने इंडिया को दरिकनार कर सांस्कृतिक तौर पर भारत को प्रदर्शित किया है। राजनीतिक टिप्पणीकार ने कहा कि देश में सांस्कृतिक बदलाव की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आगमन के साथ ही शुरू हो गया था। यह ठीक उसी तरह है जैसे माओ के आने से बदलाव शुरू हुआ था। बारू ने आगे कहा कि दोनों ही उदाहरणों में एक ही उद्देश्य निहित था और वो यह कि पुरानी शक्तियों को किसी भी तरह से हटाना था।

करण थापर के साथ 32 मिनट के साक्षात्कार में बारू ने जनता के बीच पीएम मोदी की लोकप्रियता और राजनीतिक सफलता के लिए उनके मंत्र का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा के हिंदुत्व, राष्ट्रवाद, राम मनोहर लोहिया की जाति-आधारित सामाजिक कल्याण और वामपंथी वर्ग आधारित समर्थक गरीब कट्टरपंथ से मिला-जुला है। उन्होंने कहा कि यह वामपंथियों और कुलीनों के लिए भी शत्रुतापूर्ण है।

यह पूछे जाने पर कि मोदी को किस प्रकार से चुनौती दी जा सकती है। इस पर बारू ने कहा कि विपक्ष का पुनरुद्धार या आर्थिक पतन केवल दो चीजें ऐसी हैं, पीएम मोदी को रोक सकती हैं। उन्होंने कहा कि नए आकांक्षी भारत के लोग पीएम मोदी की ओर आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि वह उन्हें पहचानते हैं। वो उन्हीं के विचारों को दर्शाते हैं। हालाँकि, बारू के मुताबिक अगर अर्थव्यवस्था पर बुरा असर होता है तो पीएम मोदी के प्रति लोगों का यह अटूट समर्थन मोहभंग और हताशा में बदल सकता है।

बंगाल: मतदान देने आई महिला से ‘कुल्हाड़ी वाली’ मुस्लिम औरतों ने छीना बच्चा, कहा- नहीं दिया तो मार देंगे

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के चुनाव के बीच हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। टीवी 9 बांग्ला के अनुसार आज शीतलकुची विधानसभा क्षेत्र के जोरापटकी इलाके में मतदान केंद्र पर वोट डालने गई एक महिला ने इसी हिंसा के बीच अपना बच्चा खो दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला अपना वोट डालने जैसे ही मतदान केंद्र में घुसी, तभी हिंसक भीड़ वहाँ बमबारी और गोलीबारी करने लगी। उसने बताया, “जब मैं बटन दबाने चली, वहाँ लड़ाई शुरू हो गई। हर जगह खून खराबा मच गया। मैं अपने बच्चे के साथ मतदान केंद्र से बाहर ही नहीं जा पाई।” 

महिला बताती है कि कैसे उपद्रवियों ने उसके बाल खीचें और उसके बच्चे को छीन कर अपने साथ ले गए। अब वह सबसे बस रोते हुए यही पूछ रही है, “मैं अपने बच्चे को कहाँ खोजूँ?” वह कहती है, “मैं किसी सरकार को नहीं चाहती। यहाँ तमाम मुस्लिम महिलाएँ दाओ (कुल्हाड़ी) के साथ लोगों को काटने आईं। उन्होंने मुझे डराया कि अगर मैंने बच्चा नहीं दिया तो वह मेरे बच्चे को मार देंगें।”

जानकारी के अनुसार, महिला के अलावा उसके रिश्तेदार का बच्चा भी गायब है। उसने प्रशासन से अपील की है कि उसका और उसके रिश्तेदार का बच्चा वापस दिलवाया जाए।

टीवी9 द्वारा अपलोड की गई वीडियो में तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता को उस पीड़िता को डराते हुए देखा जा सकता है। टीएमसी नेता मामले में संज्ञान लेने की बजाय महिला पर आरोप लगा रहे हैं और पुलिस अधिकारी को उस महिला को वहाँ से भगाने का निर्देश दे रहे हैं।

टीएमसी पार्टी ने इस घटना में पीड़िता को झूठा करार दिया है और उसके विलाप को नाटक कहा है। नेता का कहना है कि बच्चा महिला के ही पास है जबकि पुलिस लगातार इन कोशिशों में लगी है कि वह महिला को आश्वस्त कर पाएँ कि उनका बच्चा जल्दी घर लौट आएगा।

बता दें कि बंगाल में चौथे चरण का मतदान आज चार जिलों में हो रहे हैं। इस बीच हिंसा की कई खबरें लगातार आ रही हैं। टीएमसी के गुंडे भाजपा समर्थकों को रोकने के लिए लगातार उन्हें निशाना बना रहे हैं।

चौथे चरण में मतदाताओं और सुरक्षाबल पर TMC ने किया हमला

उत्तरी बंगाल के कूच बिहार में फायरिंग में 4 लोग मारे गए हैं। कूच बिहार के सीतलकुची में वोटिंग करने के लिए मतदान केंद्र पर लाइन में खड़े एक 18 साल के युवक की हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान आनंद बर्मन के तौर पर हुई है।

बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया है कि आनंद जब वोट देने के लिए कतार में खड़ा था, उसी समय टीएमसी के गुंडों ने उस पर बंदूक और बम से हमला किया। चुनाव आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है और प्रशासन से एक्शन रिपोर्ट माँगी है।

वहीं ममता बनर्जी द्वारा सुरक्षाबल का घेराव करने की बात कहने के बाद एक भीड़ ने CISF पर भी हमला किया। ये घटना कूच बिहार जिले के सीतलकुची विधान सभा में माथाभांगा ब्लॉक के जोरापाटकी इलाके की है।

कूच बिहार एसपी ने अराजक तत्वों के खिलाफ सीआईएसएफ की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि कार्रवाई ‘आत्मरक्षा’ में की गई। उन्होंने कहा कि 300-350 लोगों की भीड़ ने CISF की टीम पर हमला किया था और उनके हथियार छीनने की कोशिश की। जिसके बाद टीम उपद्रवियों पर गोली चलाने के लिए मजबूर हो गई। अधिकारी ने बताया, “दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और स्थानीय लोगों ने सीआईएसएफ का घेराव कर राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद सेंट्रल फोर्स ने ओपन फायरिंग की।”

एंटीलिया के बाहर जिलेटिन कांड के बाद सचिन वाजे करने वाला था एनकाउंटर, दूसरों पर आरोप मढ़ने की थी पूरी प्लानिंग

मुंबई के एंटीलिया केस में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने NIA के सामने बड़ा खुलासा किया है। वाजे ने बताया है कि वो एंटीलिया के बाहर जिलेटिन कांड के बाद कुछ फेक एंकाउंटर भी करने वाला था। अपने इस काम को अंजाम देने के लिए वाजे औरंगाबाद से चोरी हुई मारुती इको का इस्तेमाल करता, जिसका नंबर प्लेट कुछ दिन पहले मीठी नदी से बरामद हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, वाजे ने जिलेटिन केस के कुछ दिन बाद एक एनकाउंटर की प्लानिंग की गई थी, ताकि यह बताया जाए कि जो लोग एनकाउंटर में मारे गए, उन्होंने ही मुकेश अंबानी की एंटीलिया बिल्डिंग के बाहर जिलेटिन वाली स्कॉर्पियो खड़ी की थी। वाजे की इस लिस्ट में मनसुख हिरेन का नाम था या नहीं ये साफ नहीं हो पाया है।

पूरे प्लॉन को अंजाम देने के लिए 2 लोगों की पहचान हुई थी, जिनके एनकाउंटर होते ही इन्वेस्टिगेशन का पूरा केस वहीं खत्म हो जाता। लेकिन जिलेटिन की वजह से जब इस केस में टेरर एंगल आया और जाँच में एटीएस के बाद NIA ने जाँच का काम संभाला तो वाजे की सारी प्लॉनिंग फेल होती गई। धीरे-धीरे बराबद सभी सबूतों पर वाजे को धरा गया।

जाँच में उसके पास से NIA को कई लाख कैश, बेनामी कारतूस और बैंक खाते में जमा डेढ़ लाख रुपए मिले हैं। एजेंसी को शक है कि इस केस में हिरेन भी साथ था, तभी उसकी जान गई।

बता दें कि मुंबई की NIA कोर्ट ने सचिन वाजे मामले पर सुनवाई करते हुए उसे 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा है। वह इस समय तलोजा जेल में है। शुक्रवार को उसकी मेडिकल रिपोर्ट पेश करके बताया गया कि उसे कार्डियो ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं है। NIA ने कोर्ट से खुद ये भी कहा है कि उन्हें अब मामले में वाजे से और पूछताछ नहीं करनी, जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि जाँच एजेंसी की पड़ताल पूरी हो गई है।

बता दें कि 25 फरवरी को इस पूरे केस की शुरुआत हुई थी। मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया से कुछ दूरी पर एक विस्फोटक से लदी गाड़ी मिली। इसमें जिलेटिन की 20 छड़े थीं। मामले की जाँच शुरू हुई तो पता चला की गाड़ी ठाणे व्यापारी मनसुख हिरेन की है।

5 मार्च को इस केस में नया मोड़ आया जब हिरेन की लाख में नदी के पास मिली। मामले की गुत्थी सुलझाने का जिम्मा पहले सचिन वाजे पर ही था लेकिन बाद में इस काम को पहले मुंबई एटीएस को दिया गया और फिर इस मामले की जाँच NIA को दे दी गई। 13 मार्च को सचिन वाजे गिरफ्तार हुआ और तब से इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। कई नेताओं और पुलिस अधिकारियों के नाम भी इस बीच सामने आ चुके हैं।