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‘दिल्ली में बेड और ऑक्सीजन पर्याप्त, लॉकडाउन के आसार नहीं’: NDTV पर दावा करने के बाद CM केजरीवाल ने टेके घुटने

हाल ही में एक आरटीआई से यह बात सामने आई थी कि 2015-19 के बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने कोई नया अस्पताल नहीं बनाया। जैसा कि हम जानते हैं 2020 में पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई। 20 अप्रैल 2021 को ही दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि बीते साल लॉकडाउन के दौरान आप सरकार प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों को मदद पहुँचाने में नाकाम रही। हमने यह भी देखा है कि पिछले साल संक्रमण की शुरुआत में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े-बड़े दावे करते रहे और दिल्ली में हालात बदतर होते रहे। आखिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मोर्चा सँभालना पड़ा था और उसके बाद हालात काबू में आए थे।

अब एक बार फिर से दिल्ली में वही सब दोहराया जा रहा है। मात्र एक सप्ताह में काफी कुछ बदल गया है। AAP सरकार की भाषा बदल गई है। राज्य में कोरोना के कारण हाहाकार की स्थिति है। नेताओं के सुर बदल गए हैं। 20 अप्रैल को दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर केजरीवाल ने ट्वीट किया, जबकि ज्यादा दिन नहीं बीते जब वे दिल्ली के अस्पतालों में बेड खाली होने और पर्याप्त ऑक्सीजन होने के दावे कर रहे थे। इसके बाद संक्रमण चेन तोड़ने के नाम पर वे पहले नाइट कर्फ्यू लेकर आए। उसके बाद वीकेंड कर्फ्यू और अब 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक का लॉकडाउन। लॉकडाउन के ऐलान के बाद घर वापसी के लिए प्रवासी मजदूरों की पिछले साल जैसी होड़ ही देखने को मिली। और अब अस्पताल भी उसी पुराने संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार क्रेडिट लेने का कोई मौका चूक नहीं रही।

ऐसे में एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो बातें कही थीं, वो सुनने लायक है। तब दिल्ली में सब ठीक होने का दावा करने वाले AAP सुप्रीमो ने अब हॉस्पिटल बेड्स और ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल कर खुद को ट्वीट करने तक ही सीमित रखा है।

अप्रैल 15, 2021 को उन्होंने NDTV को दिए गए इंटरव्यू में दावा किया था कि दिल्ली में 500 के करीब ICU उपलब्ध हैं और दिल्ली सरकार के एप पर जाकर देखा जा सकता है कि किस अस्पताल में कितने बेड्स उपलब्ध हैं। उन्होंने तब 5000 बेड्स उपलब्ध होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कुछ ही अस्पतालों में बेड ख़त्म हुए हैं, दिल्ली में नहीं। उन्होंने स्थिति के दैनिक मॉनिटरिंग की बात करते हुए कहा था कि वे लॉकडाउन के खिलाफ हैं।

दिल्ली सरकार के एप की अब क्या हालत है, ये छिपी नहीं है। केजरीवाल के दावों के बाद जब एप पर चेक कर अस्पतालों को फोन कॉल किया गया तो स्थिति कुछ और ही निकली। जिन अस्पतालों में एप पर दर्जनों बेड्स खाली दिख रहे थे, वहाँ से कहा गया कि यहाँ एक भी मरीज को भर्ती करने लायक जगह नहीं है। कहीं-कहीं कहा गया कि स्थिति पल-पल बदलती रहती है। फिर उस एप का फायदा ही क्या?

केजरीवाल ने एक सप्ताह पहले कहा था कि ऑक्सीजन या बेड्स की कमी से लोगों की मौत की स्थिति दिल्ली में वो नहीं आने देंगे। लॉकडाउन लगाने की स्थिति उन्हें नजर नहीं आ रही। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस इंटरव्यू के अगले ही हफ्ते दिल्ली में पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया।

दिल्ली में पिछले 1 दिन में कोरोना के 28,395 नए मामले सामने आए हैं, जबकि केजरीवाल ने जिस दिन ये बयान दिए थे तब ये आँकड़ा 17,000 के करीब था। उस दिन जहाँ कोरोना ने 115 लोगों की जान ली है, पिछले 1 दिन में ये आँकड़ा लगभग ढाई गुना बढ़ कर 277 हो गया है। हाँ, उलटा टीकाकरण की संख्या में कमी आई है। पिछले 1 दिन में जिनका भी टेस्ट किया गया, उनमें से एक तिहाई कोरोना संक्रमित निकले हैं।

अब उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कह रहे हैं कि ऑक्सीजन को लेकर सब अस्पतालों से SOS फ़ोन आ रहे हैं और सप्लाई करने वाले लोगों को अलग-अलग राज्यों में रोक दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर राज्यों के बीच जंगलराज न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा। केजरीवाल कह रहे हैं कि दिल्ली में कुछ ही घंटों का ऑक्सीजन बचा है।

जहाँ पहले ऑक्सीजन और बेड्स की कमी वाली स्थिति न आने की बातें इन्हीं लोगों द्वारा की जा रही थी, अब दूसरे राज्यों पर दोष मढ़ने से पहले AAP को उन किसान प्रदर्शनकारियों की निंदा करनी चाहिए, जिनकी वजह से ऑक्सीजन की सप्लाई रुक रही है। सप्लायर कंपनी ने स्पष्ट कहा है कि सीमा पर बैठे किसान आंदोलनकारियों की वजह से घंटों की देरी हो रही, क्योंकि 100 किलोमीटर ज्यादा चक्कर काटने पड़ रहे।

एक सप्ताह पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था, “दिल्ली के अस्पतालों में इस वक्त पर्याप्त बेड्स मौजूद हैं। जनता से मेरी अपील है कि घबराएँ नहीं, हो सकता है कि किसी को उसकी पसंद का अस्पताल शायद ना मिले लेकिन किसी और अस्पताल में बेड और इलाज ज़रूर मिलेगा।” अब दिल्ली में न बेड है और न ऑक्सीजन। केंद्र से ऑक्सीजन माँगी जा रही है। क्या सरकार एक सप्ताह आगे का भी अनुमान नहीं लगा सकी?

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

उत्तर प्रदेश के मेरठ से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक अब्बू ने ही अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया और विफल होने पर उसने अपनी बेटी की चोटी कैंची से काटने के बाद उसे उस्तरे से गंजा कर डाला। अब्बू की हदें पार होने के बाद बेटी ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आरोपित अब्बू शकील को हिरासत में ले लिया है।

मामला थामा लिसाड़ी गेट क्षेत्र के लक्खीपुरा गली नंबर 26 का है। 20 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि उसका अब्बू उस पर गंदी निगाह रखता था। कई बार उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पीड़िता के अनुसार जब भी उसकी अम्मी नमाज पढ़ने लगती, अब्बू नशे में धुत्त होकर उसके साथ गंदी हरकतें करता था। कथित तौर पर शकील पिछले 3 साल से बेटी के साथ गंदी हरकतें करता आ रहा था।

पीड़िता ने बताया कि घर की इज्जत को छुपाने के लिए उसने पहले किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन इस बार जैसे ही उसकी अम्मी नमाज पढ़ने गई तो अब्बू शकील नशे में धुत्त होकर उसके कमरे में घुस गया और दुष्कर्म का प्रयास करने लगा। इसके बाद बेटी ने शोर मचा दी और उसके चंगुल से छूटने की कोशिश की। लेकिन शकील ने उसको पकड़ लिया और गंजा कर दिया।

पीड़िता ने थाना लिसाड़ी गेट में अब्बू के खिलाफ दुष्कर्म का प्रयास करने की तहरीर दी। पुलिस ने आरोपित शकील को हिरासत में ले पीड़िता, उसकी अम्मी और मोहल्ले के लोगों के बयान दर्ज किए हैं और मेडिकल भी कराया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर थाना के एक गाँव में अपनी ही नाबालिग बेटी से अब्बू द्वारा दुष्कर्म करने का मामला सामने आया था। आरोपित अब्बू, गुलाम रसूल पिछले 1 साल से अपनी ही 16 साल की बेटी को हवस शिकार बनाया। लगातार दुष्कर्म के बाद जब उसकी बेटी गर्भवती हो गई तब मामले का खुलासा हुआ।

‘हाइवे पर किसान, ऑक्सीजन सप्लाई में परेशानी’: कोरोना के खिलाफ लड़ाई में AAP समर्थित आंदोलन ही दिल्ली का काल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले दो दिनों से कह रहे हैं कि ऑक्सीजन की भारी किल्लत है, जिससे हाहाकार मच सकता है। अब पता चल रहा है कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई में देरी आ रही है। ये वही ‘किसान आंदोलन’ है, जिसे AAP ने समर्थन दिया हुआ है। अब वे सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डालते दिख रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया था, जिसके तहत ‘श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट’ तक ऑक्सीजन की सप्लाई तेज़ी से और निर्बाध रूप से हो सके। इस अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत नाजुक स्तर पर पहुँच गई थी। 19,500 लीटर के दो लिक्विड ऑक्सीजन सिलिंडरों को उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं से लाने के लिए सोमवार (अप्रैल 19, 2021) की रात डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाया गया था।

पुलिस ने बताया था कि दोनों की राज्यों से लगी सीमाओं पर ट्रैफिक जाम के कारण ऑक्सीजन के सिलिंडर अटके रहे, वहीं अब सप्लायर्स ने एक पत्र में कुछ अलग ही कारण बताया है। उसने कहा है कि आंदोलनरत किसानों के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा आई। ये पत्र ‘आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स’ ने लिखा है, जो केंद्र सरकार को ऑक्सीजन की सप्लाई करती है। उनके प्लांट्स राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

कंपनी ने कहा है कि आंदोलनकारियों ने हाइवे को ब्लॉक कर रखा हुआ है, जिससे सप्लाई में परेशानी आ रही है। पश्चिम विहार स्थित बालाजी अस्पताल में लगभग ऑक्सीजन ख़त्म ही होने वाला था, लेकिन दिल्ली-यूपी सीमा पर गाजीपुर स्थित NH24 पर किसानों का कब्ज़ा था, जिससे सप्लाई में 2 घंटे की देरी हुई। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से ऑक्सीजन की सप्लाई लेकर चल रही गाड़ियों को 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

कंपनी के पत्र में ये भी लिखा है कि इसके इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) फैसिलिटीज से ऑक्सीजन की सप्लाई भी ‘किसान आंदोलन’ की वजह से रुक रही है। भारत सरकार ने उससे कहा है कि वो पानीपत स्थित IOC की यूनिट से ऑक्सीजन लेकर दिल्ली पहुँचाए। लेकिन, बीच में सिंघु बॉर्डर पड़ता है, जहाँ किसान अब भी बैठे हुए हैं। इसलिए, कंपनी ने ऑक्सीजन ले जा रहे ट्रकों और ट्रांसपोर्ट्स के लिए ग्रीन कॉरिडोर्स बनाने की माँग की है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी किसानों द्वारा सड़क जाम करने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए कहा कि वो किसी और के अधिकारों को नहीं छीन सकते और उनके आवागमन को बाधित नहीं कर सकते। जस्टिस संजय किशन कौल ने किसानों से कहा कि आप किसी नीति से सहमत नहीं हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरों का रास्ता बंद कर दें। एक सिंगल माँ ने याचिका दायर कर के कहा था कि आंदोलन के कारण उसे दिल्ली से नोएडा के सफर में 20 मिनट की जगह 2 घंटे लगते थे।

‘जिस देश में गंगा रहता है’ फेम किशोर नांदलस्कर का कोरोना से निधन: ‘सन्नाटा’ को दर्शकों ने दिया था भरपूर प्यार

बॉलीवुड अभिनेता किशोर नंदलास्कर का कोरोना से मुबंई में निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि कोरोनो संक्रमण के बाद उन्हें ठाणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने मंगलवार (20 अप्रैल, 2021) को दोपहर करीब 12.30 बजे अंतिम साँस ली।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, किशोर नांदलस्कर के‌ पोते अनीष ने उनकी मौत की जानकारी दी है। अनीष ने बताया कि उनके दादा को कोरोना पॉजिटिव आते ही ठाणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें कोविड सेंटर में भर्ती कराने से पहले साँस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। उनका ऑक्सीजन लेवल भी काफी गिर गया था। उन्होंने दोपहर 12:30 बजे आखिरी साँस ली थी। 

मालूम हो कि किशोर नंदलास्कर ने बॉलीवुड में वास्तव, सिम्बा, जिस देस में गंगा रहता है, खाकी और सिंघम जैसी तमाम फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा मराठी फिल्म इंडस्ट्री में भी वह काफी मशहूर कलाकार थे।

उन्होंने 1989 में मराठी फिल्म ‘इना मीना डीका’ से फिल्म जगत में डेब्यू किया था। उन्होंने मराठी फिल्मों मिस यू मिस, भविष्याची ऐशी तैशी, गाव थोर पुढारी चोर, जरा जपुन करा, हैलो गंधे सर, मध्यममार्ग -द मिडिल क्लास जैसी कई फिल्मों में काम किया था। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर छा गई है।

बता दें कि किशोर को सबसे ज्यादा फेम अभिनेता गोविंदा की फ‍िल्‍म ‘जिस देश में गंगा रहता है’ से मिला। इस फिल्म में उन्होंने सन्‍नाटा का किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों को खूब पसंद किया था।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाराष्ट्र में रेमडेसिविर खेप को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री ने बड़ा खुलासा किया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी थी कि रेमडेसिविर (Remdesivir) की 60,000 शीशियों को बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार के लिए मँगाया था।

मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को News18 लोकमत को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बीजेपी के नेताओं ने दवा निर्माताओं के एक प्रनितिधिमंडल के साथ उनसे उनके घर में मुलाकात की थी। बीजेपी ने उनसे राज्य सरकार के लिए रेमडेसिविर स्टॉक खरीदने में मदद की पेशकश की और वो इसके लिए तैयार हो गए थे। पूरी प्रक्रिया सभी नियमों का पालन करते हुए लोगों की मदद करने के इरादे से की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने महाविकास अघाड़ी को लेकर भी काफी कुछ बताया।

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था। उन्होंने राजनीतिक दलों से आरोप प्रत्यारोप लगाने की बजाय इस मुश्किल घड़ी में साथ आने का आग्रह किया।

दरअसल, एफडीए मंत्री के इस कबूलनामे से महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सहयोगियों शिवसेना-एनसीपी और कॉन्ग्रेस की काफी किरकिरी हुई है। दरअसल, शनिवार-रविवार की रात दमन से लाए जा रहे साठ हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन की इस खेप को मुंबई पुलिस ने कालाबाजारी का स्टॉक समझकर जब्त कर लिया था। इतना ही नहीं कंपनी के एक अधिकारी को हिरासत में भी ले लिया गया था। रात भर चले ड्रामे के बाद अधिकारी को जाने दिया गया, लेकिन इस मामले को लेकर काफी हंगामा हुआ था।

राजेंद्र शिंगणे के स्पष्टीकरण के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने कहा कि उन्होंने दवा निर्माताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ शिंगणे से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि शिंगणे ने हमारे प्रयासों के लिए हमें धन्यवाद भी किया और हमने भी यह आश्वासन दिया कि इंजेक्शन की खुराक राज्य सरकार को दी जाएगी। दरेकर ने कहा कि अब एनसीपी के गृह मंत्री दिलीप पाटिल, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक, शिवसेना सांसद संजय राउत, प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख नाना पटोले और प्रियंका गाँधी वाड्रा जैसे नेताओं को इस मामले में जवाब देना चाहिए।

गौरतलब है कि बीजेपी विधायक प्रसाद लाड ने सोमवार को कहा कि 60 हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन की जिस खेप को कालाबाजारी का स्टॉक समझा जा रहा था, उस स्टॉक को बीजेपी महाराष्ट्र सरकार को देने के लिए खरीदने जा रही थी। लाड ने आगे यह भी कहा कि हमने एफडीए मंत्री राजेंद्र शिंगणे को एक पत्र लिखा था और दमन से फोन कर मुख्य सचिव सीताराम कुंटे को सूचित किया था कि बीजेपी राज्य में रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने की कोशिश कर रही है। हमने राज्य सरकार को कंपनियों से सीधे संपर्क करके और रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने का निवेदन भी किया था।

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो कंपनी इंजेक्शन की आपूर्ति करके महाराष्ट्र सरकार की मदद कर रही थी, उसे पुलिस स्टेशन बुलाया गया और पूछताछ की गई। इस डर से कि बीजेपी को इसका श्रेय मिलेगा, महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने इसे राजनीतिक रंग देने की भी कोशिश की। बीजेपी नेता जनता की भलाई के लिए किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार है।

बता दें कि कॉन्‍ग्रेस समर्थक और बेबाकी से फेक न्यूज फैलाने में माहिर साकेत गोखले ने सोमवार (अप्रैल 19, 2021) को राज्य के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल के साथ मिलकर देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ रेमडेसिविर स्टॉक की जमाखोरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले गोखले ने बेबुनियाद ट्वीट्स की सीरीज में आरोप लगाया था कि भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने पार्टी कार्यालय में 4.75 करोड़ रुपए की रेमडेसिविर (Remdesivir) की जमाखोरी की है।

गोखले ने यह आरोप मुंबई पुलिस द्वारा शनिवार को दमन स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी के रेमडेसिविर सप्लायर को हिरासत में लेने और सवाल पूछे जाने के बाद लगाया था। बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने कंपनी से रेमडेसिविर को महाराष्ट्र में लोगों को आपूर्ति करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर को हिरासत में ले लिया था। हालाँकि, देवेंद्र फडणवीस द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। 

वैक्सीन लगवा चुके राकेश टिकैत ने कहा- अगर किसानों को कोरोना होता है, तो इसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार होगी

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसान कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं, तो इसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि किसान अपनी माँग पूरी हुए बिना किसी कीमत पर दिल्ली की सीमाओं से नहीं हटेंगे। राजधानी में 6 दिन का लॉकडाउन है, यह किसानों के विरोध प्रदर्शन को रोक नहीं सकता है। कोरोना वैक्सीन लगवा चुके टिकैत ने कहा कि यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने से कैसे बचाया जाए।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए टिकैत ने कहा, “आंदोलन अगर खत्म हो जाए तो क्या देश से कोरोना खत्म हो जाएगा। वे हमारे गाँव हैं जहाँ हम 5 महीने से रह रहे हैं। अगर किसान कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। जब देश भर में COVID-19 के मामले बढ़ रहे हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इसके लिए भी किसान ही जिम्मेदार हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई बीमारी है, तो सरकार को इसका इलाज सुनिश्चित करना चाहिए और इसके लिए अस्पतालों का निर्माण करना चाहिए। राजनेता अन्य उद्देश्यों के लिए धन एकत्र कर रहे हैं। वे रैलियाँ कर रहे हैं और चुनाव लड़ रहे हैं।

बीते दिनों किसान नेता राकेश टिकैत ने जम्मू जाने के दौरान कहा था कि कोरोना नियमों का पालन करते हुए आंदोलन को जारी रखा जाएगा। ये कोई शाहीन बाग नहीं है, जिसे कोरोना वायरस के नाम पर खत्म किया जा सकता है।

किसानों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं राकेश टिकैत ने आगे जोर देकर कहा कि कोरोनो वायरस के प्रकोप के कारण आंदोलन नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने मंगलवार को दिल्ली-यूपी की सीमा के पास एक अस्पताल में वैक्सीन लगवाई है। इससे पहले टिकैत ने 13 अप्रैल को गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन स्थल के पास स्थित एक अस्पताल में कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ली थी।

बता दें कि दिल्ली में लॉकडाउन लगने से पहले ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान कर दिया था कि लॉकडाउन लगने के बावजूद बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन नहीं थमेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक राकेश टिकैत का किसानों पर खासा प्रभाव है। यही वजह है कि किसान न तो तीनों कृषि कानूनों की अच्छाई समझ पा रहे हैं और न ही इस पर हो रही राजनीति की गहराई तक पहुँच सके हैं। 

देश को लॉकडाउन से बचाएँ, आजीविका के साधन बाधित न हों, राज्य सरकारें श्रमिकों में भरोसा जगाएँ: PM मोदी

देश में पिछले कई दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के कारण हालात काफी खराब हो गए हैं। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नजर बनाए हुए हैं। कोरोना के हालात पर अहम बैठकों के बाद पीएम मोदी ने मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) रात को 8:45 बजे देश को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने कोरोना वॉरियर्स के अथक प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “आज देश एक बड़ी चुनौती से गुजर रहा है। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करता हूँ।” 

पीएम ने कहा कि इस बार कोरोना संकट के कारण देश के अनेक हिस्से में ऑक्सीजन की माँग बढ़ी है। इस विषय में तेजी से काम किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों और प्राइवेट सेक्टर, सभी का मकसद है कि हर जरूरतमंद को ऑक्सीजन मिले। इस बार जैसे ही कोरोना के केस बढ़े, देश के फार्मा सेक्टर ने दवाइयों का उत्पादन और बढ़ा दिया है। आज जनवरी-फरवरी की तुलना में देश में कई गुना ज्यादा दवाइयों का प्रॉडक्शन हो रहा है

प्रधानमंत्री ने कहा कि कल भी दवा निर्माता कंपनियों के साथ बातचीत हुई है। प्रॉडक्शन बढ़ाने के लिए हर स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने का काम भी तेजी से चल रहा है। कुछ शहरों में विशेष और विशाल कोविड अस्पताल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कठिन से कठिन समय में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हम सही निर्णय लें, सही दिशा में प्रयास करें तभी हम विजय हासिल कर सकते हैं। इसी मंत्र को सामने रखकर आज देश दिन-रात काम कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल जब बहुत कम कोरोना वायरस का प्रकोप सामने आया था, उसी समय से वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाने के प्रयास शुरू कर दिए थे। आज दुनिया की सबसे सस्ती वैक्सीन भारत के पास है। टीकाकरण के पहले चरण से ही गति के साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों तक, जरूरतमंद लोगों तक वैक्सीन पहुँचे। दुनिया में सबसे तेजी से भारत में पहले 10 करोड़, फिर 11 करोड़ और अब 12 करोड़ वैक्सीन डोज दी गई है।

टीकाकरण अभियान से कोरोना वॉरियर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स, बुजुर्गों को टीका लग चुका है। कल ही एक और फैसला किया है। 1 मई से 18 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगेगा। भारत में जो भी वैक्सीन बनेगी, उसका आधा हिस्सा सीधे राज्यों और अस्पतालों को मिलेगा। पहले की तरह ही सरकार अस्पतालों में मुफ्त वैक्सीन मिलती रहेगी। इसका फायदा गरीब और मध्यम आमदनी वाले परिवारों को होगा।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकते हुए आजीविका के साधन बाधित नहीं हों। केंद्र और राज्यों की सरकारों की मदद से श्रमिकों को भी वैक्सीन दी जाएगी। हमारी राज्य सरकारों से अपील है कि वो श्रमिकों में भरोसा जगाएँ।

पीएम ने कहा कि पिछली बार की परिस्थितियाँ आज से काफी भिन्न थी। तब हमारे पास कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं था। कोरोना टेस्ट के लिए लैब नहीं, पीपीई किट नहीं, कई और भी चीजें नहीं। आज हमारे पास बड़ी मात्रा में पीपीई किट्स हैं, लैब्स हैं, टेस्टिंग की कैपिसिटी भी बढ़ा रहे हैं।

पीएम ने कहा, “मैं राज्यों से अनुरोध करता हूँ कि वो लॉकडाउन से बचें, छोटे-छोटे कंटेनमेंट जोन पर ही ध्यान केंद्रित करें। देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस संकट की घड़ी में देशवासी आगे आएँ और जरूरतमंदों को मदद पहुँचाएँ। सेवा के संकल्प से ही हम ये लड़ाई जीत पाएँगे। युवा साथियों से अनुरोध है कि सोसाइटी, मोहल्ले और अपार्टमेंट में कोविड अनुशासन पालन करवाने में मदद करें। हम ऐसा करेंगे तो सरकारों को न तो कर्फ्यू और ना ही कंटेनमेंट जोन बनाने की जरूरत होगी। लॉकडाउन को तो सवाल ही नहीं होगा।”

‘दिल्ली के अस्पतालों में कुछ ही घंटे का ऑक्सीजन बाकी’, केजरीवाल ने हाथ जोड़कर कहा- ‘मोदी सरकार जल्द करे इंतजाम’

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों पर खासा दबाव बढ़ गया है और यहाँ पर ऑक्सीजन तथा वेंटिलेटर समेत कई अहम सुविधाओं की भारी कमी की शिकायत की जा रही है। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। कुछ ही घंटे के लिए ऑक्सीजन बची हुई है और केंद्र सरकार तत्काल मुहैया कराए।

राष्ट्रीय राजधानी भी कोरोना महामारी से खासी त्रस्त है और रिकॉर्ड तोड़ संख्या में रोजाना नए केस सामने आ रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को ट्वीट कर कहा, “दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। मैं फिर से केंद्र से अनुरोध करता हूँ दिल्ली को तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए। कुछ ही अस्पतालों में कुछ ही घंटों के लिए ऑक्सीजन बची हुई है।”

इसके बाद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अस्पतालों की लिस्ट जारी की, जिनमें अगले कुछ घंटों में ऑक्सीजन खत्म होने वाली है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”दिल्ली में अधिकतर अस्पतालों में केवल अगले 8 से 12 घंटे के लिए ही ऑक्सीजन उपलब्ध है। हम एक हफ़्ते से दिल्ली को ऑक्सीजन सप्लाई कोटा बढ़ाने की माँग कर रहे हैं जो कि केंद्र सरकार को करना है। अगर कल सुबह तक पर्याप्त मात्रा में अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं पहुँची तो हाहाकार मच जाएगा।”

प्रमुख सरकारी अस्पताल में बाकी ऑक्सीजन स्टॉक-

DDU हॉस्पिटल- 12 घंटे

बुराड़ी हॉस्पिटल- 8 घंटे

अंबेडकर हॉस्पिटल- 24 घंटे

आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल- 10-12 घंटे

दीप चंद बंधु हॉस्पिटल- 8 घंटे

संजय गांधी हॉस्पिटल- 12 घंटे

LNJP हॉस्पिटल- 12 घंटे

बाबा साहेब अंबेडकर हॉस्पिटल- 8-10 घंटे

प्रमुख प्राइवेट अस्पताल में बाकी ऑक्सीजन स्टॉक-

बी एल कपूर- 8-10 घंटे

बत्रा हॉस्पिटल- 8-9 घंटे

वेंकटेश्वर हॉस्पिटल- 4 घंटे

स्टीफेंस- 12-15 घंटे

गंगाराम हॉस्पिटल- 16-18 घंटे

होली फैमिली- 24 घंटे

मैक्स पटपड़गंज- 8-10 घंटे

बालाजी- 48 घंटे

श्री अग्रसेन- 48 घंटे

महाराजा अग्रसेन- 5 घंटे

इससे पहले मनीष सिसोदिया ने ट्वीट करते हुए कहा था, “ऑक्सीजन को लेकर सब अस्पतालों से SOS फोन आ रहे हैं। सप्लाई करने वाले लोगों को अलग-अलग राज्यों में रोक दिया जा रहा है। ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर राज्यों के बीच जंगलराज न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा।”

वहीं, दूसरी ओर केंद्र ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और कुछ उद्योगों को छोड़कर ऑक्सीजन के अन्य तरह के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अदालत को बताया गया कि 20 अप्रैल तक की स्थिति के अनुसार, मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता में 133 प्रतिशत की असामान्य बढ़ोतरी का अनुमान है। दिल्ली द्वारा बताई गई माँग का प्रारंभिक अनुमान 300 मीट्रिक टन का था जिसका संशोधित अनुमान बढ़कर 700 मीट्रिक टन हो गया।

केजरीवाल की केंद्र से अपील

गौरतलब है कि दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार (अप्रैल 18, 2021) की सुबह पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और दोपहर में पीएम मोदी को भी पत्र लिखकर दिल्ली में केंद्र के अस्पतालों में 10 में से 7 हजार हजार बेड्स कोविड के लिए रिजर्व करने और ऑक्सीजन की सप्लाई करने की माँग की थी।

पत्रकारिता का पीपली लाइवः स्टूडियो से सेटिंग, श्मशान से बरखा दत्त ने रिपोर्टिंग की सजाई चिता

स्टूडियो में बैठकर समाचार पढ़ने के दिनों से टीवी न्यूज़ पहले ही बहुत आगे चला गया था। चलते-चलते कारगिल तक पहुँचा और वहाँ रुक कर सारी सराहना बटोर कर अपने क़ब्ज़े में कर ली। जहाँ खड़े होकर रिपोर्टिंग की, अक्सर पाकिस्तानी गोले वहीं आकर गिरने लगे। युद्ध को लाइव देखने की कल्पना कभी न करने वाले दर्शकों को लगा कि समाचार के प्रति ऐसा समर्पण! हे ईश्वर, हर संवाददाता को ऐसे ही समर्पित बना दें ताकि हम न्यूज़ एंजॉय कर सकें।

कारगिल से आगे गई तो गुजरात को कवर किया। कवरेज जैसी रही, वह किसी से छिपा नहीं है। वहीं गुजरात में ईकोसिस्टम का निर्माण हुआ। वकीलों, एनजीओ और न्यूज़ चैनल का अटूट रिश्ता। एक दशक तक चला। कश्मीर पहुँची तो अपने ही घरों से भगाए गए पंडितों को विलेन करार दे दिया। बोली; सरकारी नौकरियों पर पंडितों का क़ब्ज़ा था तो और क्या होता?

न्यूज़ की महानता का जो सस्वर पाठ कारगिल से शुरू हुआ था वह अब 24 घंटों के अटूट पाठ में बदल चुका था। आगे जाकर मुंबई टेरर अटैक तक पहुँचा। जिस तरह से अटैक को कवर किया, उसे देखकर सब हतप्रभ। क्या समर्पण है! क्या ईमानदारी है! क्या संवाददाता है! क्या न्यूज़ है!


वो तो बाद में पता चला कि न्यूज़ केवल भारतीय नहीं देख रहे थे, पाकिस्तानी भी वही न्यूज़ देख रहे थे और उसका फ़ायदा भी उठा रहे थे। नॉन स्टेट ऐक्टर केवल एक तरफ़ नहीं थे। सफ़र चलता रहा और एक वर्ष के अंदर ही संवाददाता कैबिनेट फ़ाइनेलाइज करने लायक़ हो गए।

टीवी न्यूज़ वालों की विशेषता यह कि वे ख़ुद तो सब कुछ लाइव दिखा लेते हैं पर उनके बारे में कुछ भी लाइव नहीं होता। उनके बारे में सब कुछ वर्षों बाद न्यूज़ बनता है। घटनाओं को न्यूज़ बनाने वाले लोग जब बाद में ख़ुद न्यूज़ बनने लगे तब जाकर जनता को पता चला कि जिन्हें वे संवाददाता समझ रहे थे वे दरअसल कुछ और ही थे।

भारत भर को पीपली लाइव बनाने वाले अब तक लाइव को अलग ही ऊँचाई पर ले चढ़े हैं। ऐसी ऊँचाई पर जहाँ से भारतीय अब पहले से अधिक छोटा दिखाई देता है। भारतीयों के लिए पहले से ही मन में कोई इज़्ज़त नहीं थी। अब भारत के लिए भी नहीं है। हाल यह है कि सराहना के लिए हाफ़िज़ सईद को मुँह खोलना पड़ता है। क्या करें, देश में इंटॉलरन्स इतना बढ़ गया है कि कोई सराहना भी नहीं करता। ऐसे में विदेशी टैलंट ही समझ पाएगा कि सराहना क्या होती है और कैसे की जाती है।

चलते-चलते कोरोना तक पहुँचे हैं। एक वर्ष पहले से किसी आशा में बैठे थे। विशेषज्ञ को लाकर चैनल पर बैठाया। वो बोला; इतने बिलियन संक्रमित होंगे। इतने मिलियन मर जाएँगे। विशेषज्ञ लाख और करोड़ में बात नहीं करता। जब भी करता है बिलियन और मिलियन में करता है। लाशें देखने की इच्छा लिए बैठे रहे। नहीं दिखाई दीं तो निराश हो गए। जीवन बर्बाद लगने लगा था कि तब तक कोरोना की दूसरी लहर आ गई। सूखे जीवन में फिर से बरखा हुई और फिर से जीवन हरा-भरा हो गया है।

बरखा दत्त के ट्वीट से लिया गया स्क्रीनशॉट

आज श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग हो गई है। कैमरे को गिद्ध की आँख ने रिप्लेस कर दिया है। स्टूल भी नहीं है कि न्यूज़ खड़ी हो सके। पुरानी बाल्टी को औंधें कर उसपर लैपटॉप रख खबर गढ़ी जा रही है। दर्शक हतप्रभ है। यह सोचते हुए कि क्या यात्रा है! क्या संवाददाता है! विज़ूअल न्यूज़ मेकिंग की पराकाष्ठा। नए तरह के रिपोर्ताज़।

टीवी स्टूडियो से चलकर न्यूज़ चिता तक पहुँच गई है।

यूपी में दूसरी बार बिना मास्क धरे गए तो ₹10,000 जुर्माने के साथ फोटो भी होगी सार्वजनिक, थूकने पर 500 का फटका

कोरोना वायरस का संक्रमण यूपी में बेतहाशा तरीके से बढ़ रहा है। ऐसे में यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी से मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करने और उल्लंघन करने वाले लोगों पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। अब योगी सरकार ने एक और कड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में पब्लिक प्लेस पर थूकने वालों के खिलाफ सख्ती करने का आदेश जारी किया गया है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति पब्लिक प्लेस में थूकते हुए पकड़ा गया तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी अधिनियम 2020 में आठवाँ संशोधन किया है। संशोधन के मुताबिक घर से बाहर बिना मास्क या गमछा के निकलने पर पहली बार पकड़े जाने पर एक हज़ार रुपए और दोबारा पकड़े जाने पर दस हज़ार रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है। मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को जारी नए आदेश में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अमित मोहन प्रसाद ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति के सार्वजनिक स्थलों पर अथवा घर से बाहर थूकने पर उसे 500 रुपए के जुर्माना से दंडित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभी हाल में मास्क न पहनने पर पहली बार पकड़े जाने पर एक हज़ार रुपए और दोबारा पकड़े जाने पर दस गुना ज़्यादा जुर्माना लगाने का निर्देश दिया था।

अब योगी सरकार ने मास्क न लगाने वालों पर और कड़ाई करते हुए दूसरी बार पकड़े जाने पर फोटो भी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। यानी 10 हजार रुपए जुर्माना भरने वालों के फोटो भी सार्वजनिक कर दिए जाएँगे। संक्रमण फैलने से रोकने के लिये मास्क बेहद जरूरी है। लगातार लोगों को इसको लेकर जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कंटेनमेंट जोन के प्रावधानों को भी सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

पुलिस ने लगातार इस पर एक्शन भी शुरू कर दिया है। देवरिया में ऐसे ही एक शख्स द्वारा दो दिन में मास्क न पहने के नियम का दूसरी बार उल्लघन करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

इसके अलावा प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को घर से काम (Work from home) की मंजूरी प्रदान की है।

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने इस संबंध में जारी आदेश में कहा कि जिला प्रशासन या सक्षम अधिकारी की ओर से शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को दिए गए प्रशासकीय कार्य और जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपस्थित होना होगा।

प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ सतीश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कोरोना की वजह से शिक्षण कार्य पहले ही बंद कर दिया गया था लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों को भी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जाएगी। लेकिन पंचायत चुनाव और अन्य आवश्यक कार्यों में दिए जाने वाले कामों को करना होगा।

गौरतलब है कि इलाहाबाद कोर्ट ने 19 अप्रैल को यूपी के पाँच शहरों- प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, और गोरखपुर में 26 अप्रैल तक कड़े प्रतिबंधों के साथ लॉकडाउन लगाने की निर्देश दिए थे। हालाँकि योगी सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और शीर्ष अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इस बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में संपूर्ण लॉकाडाउन न लगाने की वजह बताई है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रत्येक प्रदेशवासी के जीवन और जीविका की सुरक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। लॉकडाउन के कारण किसी के भी सामने आजीविका का संकट उत्पन्न न हो इसीलिए वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर हमने ‘कोरोना कर्फ्यू’ को पूरी सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।”

उन्होंने कहा, ”कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण हेतु यूपी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सभी जिलों में कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों में बढ़ोत्तरी, आइसोलेशन व ICU बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित सभी चिकित्सकीय जरूरतों की उपलब्धता के साथ ही अतिरिक्त चिकित्सकों/पैरा मेडिकल स्टाफ की भी तैनाती की जा रही है।”