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कूच बिहार में 300-350 की भीड़ ने CISF पर किया था हमला, ममता ने समर्थकों से कहा था- केंद्रीय बलों का घेराव करो

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के चुनाव के दौरान भीड़ ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) पर हमला किया। हमला टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा समर्थकों से केंद्रीय बलों का घेराव करने के आह्वान के बाद हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना कूच बिहार जिले के सीतलकुची विधान सभा में माथाभांगा ब्लॉक के जोरापाटकी इलाके की है।

कूच बिहार एसपी ने अराजक तत्वों के खिलाफ सीआईएसएफ की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि कार्रवाई ‘आत्मरक्षा’ में की गई। उन्होंने कहा कि 300-350 लोगों की भीड़ ने CISF की टीम पर हमला किया था और उनके हथियार छीनने की कोशिश की। जिसके बाद टीम उपद्रवियों पर गोली चलाने के लिए मजबूर हो गई। अधिकारी ने बताया, “दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और स्थानीय लोगों ने सीआईएसएफ का घेराव कर राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद सेंट्रल फोर्स ने ओपन फायरिंग की।”

कई रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय बलों द्वारा ‘आत्मरक्षा’ में एक मतदान केंद्र पर खुलेआम गोलीबारी करने के बाद चार लोगों की मौत हो गई, जबकि बदमाशों द्वारा गोली चलाने के बाद एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। सुबह से ही सीतलकुची में तनाव था। खबरों के मुताबिक, बूथ के बाहर बम फेंके गए। इंडिया टुडे ने बताया कि कुछ समूहों ने भी गोलियाँ चलाईं जबकि पुलिस ने इलाके से बम बरामद करने में कामयाबी हासिल की। फायरिंग की घटना के बाद चुनाव आयोग ने बूथ पर वोटिंग रोक दी है।

पीएम मोदी ने कहा- कार्रवाई करे EC , ममता ने शाह का इस्तीफा माँगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिलीगुड़ी की रैली में बोलते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ‘केंद्रीय बलों के खिलाफ लोगों को उकसाने’ का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वे हिंसा के पीछे के लोगों को दंडित करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कूच बिहार में जो हुआ है, वो बहुत दुखद है। जिन लोगों की मृत्यु हुई है, मैं उनके निधन पर दुख जताता हूँ। मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ हैं। बीजेपी के पक्ष में जन समर्थन देख कर दीदी और उनके गुंडों में बौखलाहट हो रही है। पीएम मोदी ने कहा कि दीदी, ओ दीदी! बंगाल के लोग यहीं रहेंगे। अगर जाना ही है तो सरकार से आपको जाना होगा। पीएम मोदी ने पूछा, “दीदी, ये ताकतें देश को आतंकवादियों और नक्सलियों से बचाती हैं। आपको लगता है कि वे आपके गुंडों से डरेंगे?” 

दूसरी ओर, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि हिंसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की करतूत थी। पार्टी का दावा है कि केंद्रीय बलों ने शाह के इशारे पर हमला किया।

ममता बनर्जी ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि वह रविवार (अप्रैल 11, 2021) को बूथ का दौरा करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं बदला लूँगी। मेरा बदला ईवीएम के जरिए होगा। केंद्रीय बल मेरे दुश्मन नहीं हैं। लेकिन अमित शाह लोगों को मारने की साजिश रच रहे हैं।”

जुमे की नमाज के बाद हिफाजत-ए-इस्लाम के कट्टरपंथियों ने हिंसा के लिए उकसाया: हमले में 12 घायल

उत्तरी बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी समूह हिफाजत-ए-इस्लाम के कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद में इबादत करने आए लोगों पर हमला किया। घटना में 12 लोग घायल हुए। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, घटना शुक्रवार (अप्रैल 9, 2021) को गाइबांधा जिले के सिलामोनी मस्जिद की है। 

यहाँ कट्टरपंथी समूह के लोग मस्जिद में आए और इमाम से माइक छीन कर अपने संगठन के बारे में बताने लगे। जब संगठन की मनमानी देख वहाँ मौजूद नमाजियों ने इस पर आपत्ति जताई तो उन पर हमला बोला गया। घटना में कम से कम 12 लोग घायल हो गए। बाद में मामले को सुंदरगंज थाने में दर्ज किया गया।

पुलिस स्टेशन इंचार्ज बुलबुल इस्लाम ने कहा कि यह हिफाज़ते इस्लाम के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला नहीं था। उन्होंने कहा “मस्जिद की समिति की असहमति इस अप्रिय घटना का कारण है।” वहीं मस्जिद के इमाम मतलूब उद्दीन का कहना है कि हमलावरों की पहचान हिफाजत कार्यकर्ताओं के तौर पर हुई है।

उन्होंने बताया कि उग्र लोगों ने जुमे की नमाज के बाद उनसे माइक छीना और नमाजियों को बाहर जाकर उनके समूह द्वारा फैलाई जा रही हिंसा का समर्थन करने को कहने लगे। इसी बीच नमाजियों ने उन्हें रोका तो सभी हमलावरों ने हमला बोल दिया।

गौरतलब है कि मस्जिद में हुई हिंसा में जिस कट्टरपंथी समूह हिफाजत-ए-इस्लाम का नाम सामने आ रहा है। उसके तार पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैं। इसके अलावा कट्टरपंथी संगठन को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है।

2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

पाकिस्तान में हिंदू लड़की को अगवा कर धर्मपरिवर्तन कराया, कोर्ट ने माँ-बाप को मिलने की भी इजाजत नहीं दी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाला अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते शनिवार को सिंध प्रांत के लरकाना में अली गोहर अबाद इलाके से आरती बाई नाम की 22 वर्षीय हिंदू लड़की का अपहरण कर जबरन धर्मपरिवर्तन कराया गया और उसकी एक व्यक्ति से शादी करा दी गई। इस मामले में कल जब अदालत ने हिंदू लड़की के माता-पिता को पीड़ित से मिलने नहीं दिया तो इसके विरोध में हिंदू समुदाय के लोगों ने कोर्ट के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।

पीड़ित परिवार के अनुसार, लड़की 3 अप्रैल 2021 को लापता हो गई थी। वह रेशम गली स्थित एक ब्यूटी पार्लर के लिए घर से निकली थी। वह यहाँ काम करती थी। जब वह घर नहीं लौटी तो उसके पिता ने पुलिस से संपर्क किया। बाद में पता चला कि लड़की का अपहरण कर उसका जबरन धर्मपरिवर्तन करा दिया गया और अपहरणकर्ता से ही उसकी शादी भी करवा दी गई।

लड़की के अपहरण के छह दिन बाद कराची के एक पत्रकार ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें दिखाया गया था कि हिंदू समुदाय के सदस्य, अपहृत लड़की के माता-पिता को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही यह भी बताया था कि स्थानीय अदालत ने माता-पिता को बेटी से मिलने की अनुमति नहीं दी थी।

पाकिस्तान में हिंदुओं लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्मांतरण आम बात है। इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू लड़कियों का आए दिन अपहरण करते हैं। फिर उनसे इस्लाम कबूल करवा अपहरणकर्ता से ही शादी करवा देते हैं।

बीते 11 मार्च सिंध में कविता ओड नाम की लड़की का जबरन अपहरण कर उससे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था। इसके कुछ दिनों बाद उसके घर को अज्ञात बदमाशों ने आग लगा दी। मार्च 2021 में पाकिस्तान में एक पत्रकार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। पत्रकार ने हिन्दू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण में राजनेताओं और मौलवियों की भूमिका को उजागर किया था।

हकीकत ये है कि कुछ मामलों में पाकिस्तान की अदालतें भी हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय करती हैं। जून 2020 में पाकिस्तान के एक जिला मजिस्ट्रेट ने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपनी हिंदू पत्नी को रखने की अनुमति दे दी थी। बावजूद इसके कि लड़की के माता-पिता ने ये आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का अपहरण करने के बाद आरोपी ने उससे जबरन शादी कर ली थी।

कर्नाटक: भगवद गीता की 3000 प्रतियों वाली लाइब्रेरी में उपद्रवियों ने लगा दी आग, FIR दर्ज

कर्नाटक के मैसूर में कुछ उपद्रवियों ने एक लाइब्रेरी में आग लगा दी। इस पुस्तकालय में भगवद गीता की लगभग 3000 प्रतियाँ थी। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह सार्वजनिक पुस्तकालय सैयद इसाक नाम के शख्स का था। घटना शुक्रवार (अप्रैल 9, 2021) की है। 

पुस्तकालय में 11,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह था। सैयद इसाक अपनी पुस्तकालय पहल के लिए क्षेत्र के निवासियों के बीच लोकप्रिय थे, जिससे लोगों को हजारों पुस्तकों तक पहुँचने में आसानी हुई। सैयद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “सुबह 4 बजे लाइब्रेरी के बगल में रहने वाले एक शख्स ने मुझे बताया कि अंदर आग लगी हुई है। जब मैं लाइब्रेरी पहुँचा, जो कि कुछ ही दूरी पर है, तो मैंने उसे राख में तब्दील होते हुए देखा।”

उन्होंने कहा, “पुस्तकालय में भगवद गीता के 3,000 से अधिक उत्कृष्ट संग्रह थे, कुरान और बाइबिल की 1,000 प्रतियों के अलावा विभिन्न शैलियों की हजारों पुस्तकें थी, जिन्हें मैंने दान करने वालों से प्राप्त किया था।” उन्होंने मामले पर पुलिस से संपर्क किया और आईपीसी की धारा 436 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सैयद ने कहा, “मैं शिक्षा से वंचित था और मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि दूसरों को मेरी जैसी दुर्दशा का सामना न करना पड़े। मैं चाहता हूँ कि लोग कन्नड़ सीखें, पढ़ें। हम इसे फिर से बनाएँगे।” बता दें कि सैयद इसाक दिहाड़ी मजदूर है।

इसाक ने इस सार्वजनिक पुस्तकालय को अमार मस्जिद के पास राजीव नगर में एक निगम पार्क के अंदर एक शेड जैसी संरचना में स्थापित किया था। हर दिन, 100-150 से अधिक लोग उनके पुस्तकालय में आते थे। इसाक कन्नड़, अंग्रेजी, उर्दू और तमिल सहित 17 से अधिक समाचार पत्रों की खरीद करते थे। हालाँकि वह अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करते थे, लेकिन वह लाइब्रेरी के रखरखाव और अखबारों की खरीद पर लगभग 6,000 रुपए खर्च करते थे।

‘ASI वाले ज्ञानवापी में घुस नहीं पाएँगे, आप मारे जाओगे’: काशी विश्वनाथ के पक्षकार हरिहर पांडेय को धमकी

काशी विश्वनाथ के पक्षकार हरिहर पांडेय को जान से मारने की धमकी मिली है। पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है और पांडेय की सुरक्षा में दो सिपाही तैनात कर दिए गए हैं। वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में पुरातात्विक सर्वेक्षण को मँजूरी देने के बाद धमकी मिली है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फोन करने वाले ने हरिहर पांडेय से कहा कि वे भले मुकदमा जीत गए हैं। लेकिन अब वे और उनके साथी मारे जाएँगे। उसने यह भी कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई वाले घुस नहीं पाएँगे। न्यूज 18 की रिपोर्ट में धमकी देने वाले का नाम यासीन बताया गया है।

अनजान नंबर से धमकी भरा कॉल आने के बाद हरिहर पांडेय ने पुलिस कमिश्नर से इसकी शिकायत की। सीओ दशाश्वमेध ने घर जाकर उनका का बयान लिया और शिकायत के आधार पर उनकी सुरक्षा में दो पुलिसकर्मी लगाए गए हैं।

हरिहर पांडेय के अनुसार, 8 अप्रैल को जब सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश दिया, तो उनके पास उसी शाम मोबाइल पर कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद की पहचान दालमंडी निवासी यासीन के तौर पर बताई। उसने कहा, “पांडेय जी मुकदमे में आपने आदेश तो करा लिया है, लेकिन एएसआई वाले ज्ञानवापी में घुस नहीं पाएँगे। आप और आपके सहयोगी मारे जाएँगे।”

दशाश्वमेध सीओ अवधेश पांडेय ने बताया कि हरिहर पांडेय की शिकायत के बाद पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। फोन पर किसने धमकी दी इसका पता लगाया जा रहा है। फिलहाल उन्हें सुरक्षा दे दी गई है।

बता दें कि 8 अप्रैल को काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट से पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर फैसला आया था। कोर्ट ने कहा था कि सर्वेक्षण का सारा खर्चा सरकार करेगी। इस मामले में हिंदू पक्षा ने दावा किया है कि विवादित ढाँचे के फर्श के नीचे करीब 100 फीट ऊँचा विशेश्वर का स्वयम्भू ज्योतिलिंग है और ढाँचे की दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बने हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि 1991 में काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में वाराणसी की कोर्ट में मुकदमा दाखिला हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी में पूजा की अनुमति माँगी थी। याचिका में कहा गया था कि 250 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था।

हरिहर पांडेय ने इस संबंध में बताया कि प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विशेश्वरनाथ की ओर से पंडित सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और उन्होंने बतौर वादी वर्ष 1991 में सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ वर्ष बाद पंडित सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा की मौत हो गई थी। अब वही इस मुकदमे के पक्षकार के तौर पर बचे हुए हैं।

बता दें कि इस केस पर 1993 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया। साल 2019 में फिर से सुनवाई शुरू हुई। 2 अप्रैल को अदालत ने दोनों पक्षों की सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और 8 अप्रैल को अपना निर्णय सुनाया।

केरल के शिक्षा मंत्री केटी जलील लोकायुक्त जाँच में दोषी करार: रिश्तेदार की भर्ती के लिए बदल दी योग्यताएँ, पद से हटाने की माँग

शुक्रवार (9, अप्रैल) को लोकायुक्त ने केरल के अल्पसंख्यक कल्याण एवं उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील को शक्ति के दुरुपयोग, पक्षपात, नेपोटिज्म और पद की शपथ के उल्लंघन का दोषी पाया है। लोकायुक्त ने यह भी आदेश दिया है कि जलील को मंत्री परिषद का सदस्य नहीं बने रहना चाहिए।

केरल सरकार में मंत्री केटी जलील के विरुद्ध यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई। वीके मोहम्मद के द्वारा जलील के विरुद्ध की गई शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि जलील ने केरल के राज्य अल्पसंख्यक विकास वित्त कॉर्पोरेशन लिमिटेड में जनरल मैनेजर के रूप में अपने रिश्तेदार केटी अदीब को नियुक्त करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है।

लोकायुक्त के अनुसार जलील द्वारा अपने पद का उपयोग करते हुए कॉर्पोरेशन में जनरल मैनेजर के पद की योग्यताओं में परिवर्तन किया गया। जलील के रिश्तेदार को जनरल मैनेजर के पद के योग्य बनाने के लिए योग्यताओं में ‘बीटेक के साथ पीजीडीबीए’ को भी एक योग्यता के रूप में जोड़ दिया गया जिससे जलील के रिश्तेदार केटी अदीब को लाभ पहुँचाया जा सके।

लोकायुक्त जस्टिस सिरियक जोसेफ और उप लोकायुक्त हारुल उल राशिद ने कहा कि ‘पद की शपथ के उल्लंघन, नेपोटिज्म, पक्षपात और शक्ति के दुरुपयोग’ के आरोप में जलील के विरूद्ध ‘केरल लोकायुक्त अधिनियम 1956’ की धारा 14 के तहत उचित कार्रवाई करने के लिए केरल के मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दी गई है।

वहीं भाजपा नेता और विदेश मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त ने जलील को पद की शपथ के उल्लंघन, शक्ति के दुरुपयोग और पक्षपात का दोषी पाया है, ऐसे में सरकार का यह कर्त्तव्य है कि जलील को पद से हटाया जाना चाहिए। मुरलीधरन ने कहा, “मैं सरकार से माँग करता हूँ कि जलील को पद से हटाया जाए और उसे कोई भी लाभ न दिया जाए। मुख्यमंत्री विजयन को यह कारण बताना होगा कि वह जलील पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं”।  

मुरलीधरन ने यह भी कहा कि जलील का यह कहना कि वह निर्णय के विरुद्ध कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं, न्यायिक व्यवस्था का अपमान है।

खुद के सर्वे में हार रही TMC, मुस्लिम तुष्टिकरण से आजिज हो हिंदू BJP के साथ: क्लबहाउस पर सब कुछ बोल गए PK

क्लबहाउस ऐप पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) और लुटियंस पत्रकारों के बीच बातचीत सोशल मीडिया में छाई हुई है। किशोर फिलहाल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। इस बातचीत में उन्होंने माना है कि टीएसमी के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी बीजेपी बंगाल के विधानसभा चुनाव में आसानी से जीत रही है।

पीके को इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि उनकी बातचीत रिकॉर्ड हो रही। ऑडियो में प्रशांत किशोर ने माना कि TMC के आंतरिक सर्वे में भी भाजपा जीत रही है। लोग मोदी को वोट कर रहे हैं। बंगाल की आबादी के 27% SC और मतुआ सभी भाजपा के लिए वोट कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “भाजपा को मोदी और हिंदू फैक्टर के कारण वोट मिल रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी के बाहर निकलने या मेरे प्रवेश का चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं है। यहाँ 1 करोड़ से अधिक हिंदी भाषी लोग हैं और 27% अनुसूचित जाति हैं। ये सभी भाजपा के साथ खड़े हैं।”

प्रशांत किशोर ने आगे जोर देकर कहा, ”मतुआ मुख्य रूप से भाजपा को वोट देंगे। हालाँकि, वे भाजपा के लिए एकजुट होकर मतदान नहीं करेंगे। वो 75% बीजेपी और 25% टीएमसी को चुनाव करेंगे, क्योंकि उन्होंने लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही किया था।”

‘ज्यादातर लोगों का मानना, बीजेपी बना रही सरकार‘

चुनावी रणनीतिकार ने कहा, “हमने यह पता लगाने के लिए एक आंतरिक सर्वेक्षण किया कि राज्य में किसकी सरकार बनने जा रही है और लोग किसे वोट दे रहे हैं। सर्वेक्षण में हमने पाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बना रही है। भाजपा को वोट देने वाले भी कह रहे हैं कि पार्टी सरकार बनाएगी। वाम दलों को लगभग 15% वोट ही मिलेंगे। वामपंथियों को वोट देने वालों 2/3 का भी यही कहना है कि बीजेपी सत्ता में आएगी और बहुमत की सरकार बनाएगी।”

प्रशांत किशोर का कहना है कि वाम मतदाताओं के बीच यह धारणा प्रबल है कि भाजपा को सत्ता में आना चाहिए। तभी वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाहर से राज्य में आने वाले कई लोग भाजपा की जमीनी उपस्थिति से अनभिज्ञ हैं। लेकिन यह सच नहीं है। वे पहले वाम दलों के सदस्य रहे होंगे, लेकिन अब वे समर्पित भाव से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। किशोर ने स्वीकार किया कि एक या दो निर्वाचन क्षेत्रों के अलावा अन्य जगहों पर भाजपा के पास जमीनी कैडर हैं। उन्होंने यह भी माना कि लगभग 50-55% हिंदू भाजपा को वोट देंगे।

पीएम मोदी की लोकप्रियता पर क्या बोले

पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी की लोकप्रियता के बारे में पूछे जाने पर प्रशांत किशोर ने कहा, “पीएम मोदी के खिलाफ कोई एंटी-इनकंबेंसी नहीं है। मोदी बंगाल ही नहीं पूरे देश में बहुत ज्यादा पॉपुलर हैं, इसमें कोई भी संदेह नहीं है। पूरे देश में लोग उनकी बात सुन रहे हैं। पूरे भारत में उनका एक कल्ट है। कम से कम 35% लोग ऐसे हैं जो पीएम में भगवान देखते हैं। यह अच्छा है या बुरा यह एक अलग मुद्दा है। पीएम मोदी का मूल आधार हिंदी भाषी लोग हैं। इसके अलावा सत्ता विरोधी लहर राज्य सरकार के खिलाफ है, न कि केंद्र के खिलाफ है।”

उन्होंने कहा, ”हमने अपने सर्वे में पाया कि पीएम मोदी और ममता बनर्जी दोनों ही यहाँ काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन मोदी इसलिए भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि यहाँ के लोगों ने राज्य में भाजपा के शासन का अनुभव नहीं किया है। यह एक बड़ा कारण है। लोगों ने राज्य में पिछले 30-35 वर्षों से भाजपा की सरकार नहीं देखी है। वहीं इस बार मोदी की रैलियों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहला रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों का जुटना और दूसरा उनकी (PM) लोकप्रियता है। इसमें दो राय नहीं है कि रैलियों में बड़ा बदलाव टीएमसी के खिलाफ गुस्सा, ध्रुवीकरण और मोदी की लोकप्रियता है।”

टीएमसी की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकारा

बंगाल का उदाहरण देते हुए प्रशांत ने कहा कि हमें स्वीकार करना होगा कि यहाँ अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए पिछले 20 वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की राजनीति में यह धारणा रही है कि जिसके पास भी मुस्लिम वोट होगा वही सरकार बनाएगा। चाहे वह वाम, कॉन्ग्रेस या दीदी की सरकार हो। रणनीति मुस्लिम वोटों को साधने की रही है। पहली बार हिंदुओं ने महसूस किया है कि उनके लिए एक पार्टी (भाजपा) है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी को इस भावना का फायदा मिल रहा है।

गौरतलब है कि साक्षी जोशी, आरफ़ा खानम शेरवानी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी, रवीश कुमार और अन्य कई लुटियन पत्रकार समूह इस चैट का हिस्सा थे। इस बातचीत के दौरान ‘स्वतंत्र पत्रकार’ साक्षी जोशी ने ममता बनर्जी की शौचालय की दिनचर्या के बारे में उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछताछ की।

दिलचस्प यह है कि इस बातचीत में बीजेपी की संभावनाओं पर इतने खुलकर बात करने वाले प्रशांत किशोर ने बीते साल के अंत में दावा किया था कि बंगाल चुनाव में यदि बीजेपी को 100 सीटें आ गई तो वे चुनावी प्रबंधन का काम छोड़ देंगे। वैसे क्लबहाउस पर हुई इस बातचीत के कई तरह के मायने भी लग रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बंगाल चुनाव के नतीजों से प्रशांत किशोर के पंजाब के असाइनमेंट पर फर्क न पड़े, इसलिए उन्होंने जानबूझकर यह प्लेटफॉर्म और वक्त चुना है।

‘दलित भाई-बहनों से इतनी नफरत’: सिलीगुड़ी में बोले PM मोदी- दीदी आपको जाना होगा

पश्चिम बंगाल में आज (अप्रैल 10, 2021) 5वें चरण के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिलीगुड़ी में चुनावी रैली करने पहुँचे। जनसभा संबोधित करते हुए उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा।

पीएम ने कहा कि वह बंगाल में दीदी और टीएमसी की मनमानियाँ नहीं चलने देंगे। उत्तर बंगाल में घोषणा हो चुकी है कि टीएमसी जाएगी और भाजपा आएगी। कूचबिहार की घटना पर दुख जताते हुए पीएम ने कहा कि दीदी और उनके गुंडों की बौखलाहट बेकाबू हो रही है।

अपने संबोधन में उन्होंने राज्य में दशकों से तैयार हुए राजनीतिक माहौल को लेकर कहा कि अब इसे बदलने का समय है। हिंसा करना, सुरक्षाबल पर हमले के लिए लोगों को उकसाना, चुनाव प्रक्रिया में रोड़ा अटकाना, दीदी को नहीं जिता पाएगा।

‘आसोल पॉरिबोर्तोन’ पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोगी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन वीडियो का जिक्र किया जिसमें टीएमसी विधायक धमकी दे रहे हैं कि बीजेपी को वोट दिया तो लोगों को उठाकर बाहर फेंक दिया जाएगा।

पीएम बोले, “दीदी, ओ दीदी! बंगाल के लोग यहीं रहेंगे। अगर जाना ही है तो सरकार से आपको जाना होगा। दीदी आप बंगाल के लोगों की भाग्य विधाता नहीं हैं। बंगाल के लोग आपकी जागीर नहीं हैं।”

अपने संबोधन में पीएम ने टीएमसी नेता सुजाता मंडल के ‘भिखारी’ वाले बयान को लेकर टीएमसी की सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “एक वीडियो सामने आया है जिसमें दीदी की करीबी एक नेता ने अनुसूचित जाति के लोगों का बहुत बड़ा अपमान किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जो अनुसूचित जाति है, Schedule Caste समुदाय है वो भिखारियों की तरह व्यवहार करती है।” आगे पीएम ने दीदी से पूछा, “क्या SC समुदाय के मेरे भाई बहनों और उनके बच्चों से आप, आपकी पार्टी, आपके नेता इतनी नफरत करते हैं?”

इसके बाद उन्होंने बताया कि कैसे ममता सरकार को कभी गुंडो, हत्यारों, लुटेरों, तोलाबाजों पर गुस्सा नहीं आया, लेकिन वह सुरक्षाबल पर गुस्सा कर रही हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो बंगाल के लोगों के अधिकार की रक्षा कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि दीदी के गुंडे इस बार वोट नहीं छाप पा रहे इसलिए दीदी नाराज हैं।

गरीब, दलित, आदिवासियों, पिछड़ों को कभी हक न दिए जाने पर पीएम ने सवाल उठाया और कहा कि बंगाल में नल से जल नहीं आया, सिंचाई को पानी नहीं मिला, लेकिन नदियाँ माफियों को दे दी गई। उन्होंने किसान परिवारों को उनका हक दिलाने के वादे को दोहराया। उन्हें आश्वस्त किया कि बीजेपी के आते ही पहली बैठक में उनके हित में फैसले लेने का काम शुरू होगा। जो 18 हजार रुपया किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का नहीं दिया गया है, उसे भी खातों में जमा किया जाएगा।

एंटी मास्क स्टडी के सहारे प्रशांत भूषण की कुटिल चाल, लोगों ने बेशर्मी पर लगाई लताड़

‘प्रख्यात बुद्धिजीवी’ और पीआईएल एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण ने कानूनी गतिविधियों में कई असफलताओं के मिलने के बाद अब अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए नया पैंतरा आजमाया है। रोहिंग्या मामले में प्रशांत भूषण द्वारा दायर की गई याचिका में उनके पक्ष में फैसला न आने के बाद एंटी-मास्क को लेकर ट्वीट किया।

ऐसे समय में जब डॉक्टर और हेल्थकेयर विशेषज्ञ लोगों को कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कारण मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं, भूषण ने मास्क के उपयोग के खिलाफ षड्यंत्रकारी सिद्धांतों का सहारा लिया है।

Prashant Bhushan spreads anti-mask conspiracy theories
प्रशांत भूषण ने मास्क विरोधी षड्यंत्र फैलाए

उनकी साजिश की वजह से बोर्ड की आलोचना हुई। भूषण की इस बयानबाजी से दुखी डॉ. अमित थडलानी ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पता है कि परिकल्पना (hypothesis) का क्या मतलब है। एक परिकल्पना एक प्रस्ताव है जो एक अध्ययन या प्रयोग का विषय है जो अभी तक सच नहीं पाया गया है।

अन्य लोगों ने भी डॉ. अमित थडलानी के स्टेटमेंट से सहमति जताई।

दूसरों ने भी उन्हें उनके ट्वीट के लिए लताड़ लगाई।

राजनीतिक स्पेक्ट्रम के लोग ट्वीट के लिए उनकी निंदा कर रहे हैं।

अपने प्रोपेगेंडा ट्वीट के लिए सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा लताड़े जाने पर प्रशांत भूषण ने माफी माँगने के बजाय बेशर्मी का उदाहरण दिया।

इससे पहले फरवरी में, पीआईएल कार्यकर्ता ने दावा किया था कि कोविद -19 देश में स्वाभाविक रूप से खत्म हो रहा था और उनका कहना था कि सरकार टीकों में निवेश करने से परहेज करे।

‘दलित स्वभाव से भिखमंगे, बीजेपी के हाथों बिके हैं’: ममता बनर्जी की करीबी TMC नेता सुजाता खान

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता सुजाता मंडल खान ने दलितों को लेकर आपत्तिजनक बातें की है। इसका वीडियो भाजपा अनुसूचित मोर्चा ने शेयर किया है।

न्यूज18 बांग्ला से चर्चा करते हुए सुजाता खान ने कहा कि भले ही ममता बनर्जी ने अनुसूचित जातियों (SC) के लिए बहुत कुछ किया हो, लेकिन फिर भी उनको कमी बनी ही रहती है। खान ने कहा, “एक कहावत है कि कुछ स्वभाव से भिखारी होते हैं तो कुछ परिस्थितियों के कारण। अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं।”     

खान ने दलित समुदाय को कृतघ्न बताते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने उनके लिए काफी कुछ किया लेकिन उन्होंने पैसे के लिए खुद को बीजेपी के हाथों बेच दिया। और अब वे हम पर अत्याचार कर रहे हैं।” 

बीजेपी ने इस बयान को लेकर टीएमसी की आलोचना की है। पार्टी की प्रदेश ईकाई ने ट्वीट कर कहा है, “ममता बनर्जी की करीबी तृणमूल नेता सुजाता मंडल ने अनुसूचित जाति के लोगों को ‘स्वभाव से भिखारी’ बताया है। क्या बंगाल के लोग टीएमसी को करारा जवाब देकर उन्हें सत्ता से बाहर करेंगे। दलित समाज (राजबंशी, मातुआ, नमशुद्र) बेहतर के हकदार हैं।”

ग्रामीणों पर सुजाता और उनके समर्थकों का हमला

हाल ही में सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें टीएमसी लीडर सुजाता मंडल खान और उनके समर्थकों पर गाँव वालों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया गया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया था कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने एक ग्रामीण का हाथ तोड़ दिया। इसके बाद ग्रामीण भी बड़ी संख्या में टीएमसी नेताओं के विरूद्ध लामबंद हो गए और उन्हें टीएमसी के सदस्यों को खदेड़ दिया। इसे कई मीडिया पोर्टल्स ने सुजाता मंडल खान पर भाजपा सदस्यों के हमले के तौर पर प्रचारित किया था।