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पीएम मोदी के बधाई संदेश का इमरान ने दिया जवाब, कहा- शांति और स्थिरता के लिए जम्मू-कश्मीर समेत सभी मुद्दों का हल जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों पाकिस्तान के नेशनल डे (23 मार्च) पर इमरान खान को बधाई देते हुए पत्र भेजा था। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने पीएम मोदी को बधाई संदेश का जवाब दिया है। उन्‍होंने लिखा है, ”दक्षिण एशिया में स्‍थायी शांति और स्थिरता के लिए भारत-पाकिस्‍तान के बीच जम्मू और कश्मीर विवाद समेत सभी बकाया मुद्दों को हल करना जरूरी है।”

उन्होंने आगे लिखा है कि पाकिस्तान के लोग भारत समेत सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण रिश्ता चाहते हैं। रचनात्मक बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल का निर्माण जरूरी है। पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से आई खबर के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों में सुधार के जो संकेत मिले थे वो और पुख्ता हो गए हैं।

इमरान खान ने पीएम मोदी को लिखा पत्र (आज तक )

बता दें कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने इमरान खान को पत्र लिख कर दोनों देशों के अच्छे संबंधों की कामना भी की थी। मोदी ने इमरान खान को लिखा, ”पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं पाकिस्तान की अवाम को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद एवं आक्रमकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है।”

पीएम मोदी ने लिखा कि मान्यवर, मानवता के इस बेहद कठिन काल में मैं आपको और पाकिस्तान की जनता को कोविड-19 महामारी से निपटने की शुभेच्छा देना चाहूँगा।

गौरतलब है कि हाल ही में इमरान खान ने कहा था कि अगर भारत और इस्लामाबाद के बीच शांति स्थापित होती है तो इससे नई दिल्ली को संसाधन संपन्न मध्य एशिया तक पहुँचने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान के पीएम ने दावा किया कि वर्ष 2018 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए काफी कदम उठाए, लेकिन दिल्ली से उन्हें कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

मच्छिंद्रनाथ मंदिर में घुसकर 50-60 मुस्लिमों की भीड़ ने लगाए ‘अल्लाह-हू- अकबर’ के नारे, आरती की बाधित : वीडियो वायरल

लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंग गढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 मार्च को, हिंदू भक्त पारंपरिक आरती कर रहे थे, तभी मुस्लिमों की भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में प्रवेश किया और कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। आक्रोशित मुस्लिम भीड़ ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। इतना ही नहीं हिंदुओं को उनकी वार्षिक परंपरा को निभाने से रोकने के लिए वो उनके चारों तरफ घूम-घूम कर चिल्लाने लगे।

Source: YouTube

यह वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो गया है। वीडियो में, मुसलमानों की भीड़ को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए हिंदू भक्तों को उनके अनुष्ठान करने के खिलाफ धमकाते हुए देखा जा सकता है।

बता दें कि हर साल, मछिंद्रनाथ के भक्त मछिंद्रनाथ के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मलंग गढ़ किले तक माघ पूर्णिमा श्रीमालंग यात्रा नामक एक धार्मिक यात्रा करते हैं। हालाँकि, कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण, इस वर्ष की यात्रा रद्द कर दी गई थी। लेकिन शिवसेना के आग्रह पर, हिंदू परंपराओं के अनुसार, हिंदुओं को मछिंद्रनाथ के मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई। सरकारी नियमों के अनुसार- वार्षिक स्नान, पालकी, गण्डमाला, नैवेद्य, महा आरती- को सरकारी अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित 50 भक्तों की उपस्थिति की अनुमति दी गई।

हालाँकि, कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया और उन्होंने आरती को बाधित करने की योजना बनाई। जैसे ही हिंदू संगठनों को इस बारे में पता चला, उन्होंने पुलिस को इसके बारे में सूचित किया। पुलिस ने कोरोना वायरस प्रतिबंधों का हवाला देते हुए केवल सात हिंदू भक्तों को आरती के लिए मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी। आरती शुरू होने के पाँच मिनट बाद, 50-60 मुस्लिम कट्टरपंथियों की एक हिंसक भीड़ ने मंदिर में प्रवेश किया और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए, उन्होंने हिंदुओं से अपने धार्मिक अनुष्ठान को रोकने के लिए कहा।

हिंदू संगठनों ने मंदिर में तोड़-फोड़ करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हिल रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत की। हालाँकि, पुलिस ने आश्वासन दिया कि वे मामला दर्ज किए बिना ही जाँच करेंगे। हिंदू समूहों ने पुलिस को घटना की जाँच करने और अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए 4 दिनों का अल्टीमेटम दिया, इसमें विफल रहने पर उन्होंने व्यापक आंदोलन शुरू करने की बात कही।

यह घटना 28 मार्च को रात 8 बजे हुई। बताया जा रहा है कि जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मियों के कॉलर पकड़ लिए और उन्हें धक्का दे दिया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जगह के स्वामित्व को लेकर हिंदू और मुसलमानों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है

हिंदू भक्तों का मानना है कि यह स्थान नाथ संप्रदाय के बाबा मछिंद्रनाथ का विश्राम स्थल है और पेशवाओं ने पूजा करने के लिए केतकर नामक एक ब्राह्मण परिवार को सौंपा था। हर साल हिंदू रीति-रिवाजों से यहाँ पूजा की जाती है, खासकर माघ पूर्णिमा पर भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। हालाँकि, मुसलमानों का दावा है कि यह सूफी फकीर हाजी अब्दुल रहमान शाह मलंग उर्फ मलंग बाबा का पवित्र स्थान है। उनका दावा है कि वह 13वीं शताब्दी में यमन से आए थे।

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस एक आपदा थी, चप्पलें उठाना, अपने नेता के लिए गलत अनुवाद काम नहीं आया: PM मोदी का नारायणसामी पर तंज

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता वी नारायणसामी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को कहा कि उनके नेतृत्व वाली पार्टी की पिछली सरकार एक ‘आपदा’ थी और यह सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम थी। मोदी ने साथ ही राज्य में विकास सुनिश्चित करने के लिए राजग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

एआईएनआरसी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एन रंगासामी, अन्नाद्रमुक और भाजपा नेताओं की मौजूदगी में राजग की एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें चुनावी राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और इस केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के समर्थन में ‘बड़ी लहर’ देखी है। यहाँ 6 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है।

एक के बाद एक इस्तीफों के चलते अपनी सरकार के अल्पमत में आने से पिछले महीने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र देने वाले नारायणसामी पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “सालों तक काम न करने वाली कॉन्ग्रेस सरकारों की लंबी सूची में पुडुचेरी की पिछली सरकार का विशेष स्थान है। आला कमान की सरकार, पुडुचेरी की दिल्ली के आलाकमान की सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम थी।”

पीएम मोदी ने पुडुचेरी में कहा की दिल्ली हाई कमान की सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही, चाहे कोई सा भी क्षेत्र ले लों शिक्षा, मेडिकल, एससी-एसटी का कल्याण। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यहाँ हमारी सरकार बनने पर एनडीए बेस्ट पुडुचेरी (BEST Puducherry) बनाने के लिए काम करेगा। BEST का मतलब बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि B से बिजनेस हब, E से एजूकेशन हब, S से आध्यात्मिक हब और T का मतलब पर्यटन हब है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े विधायक के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।

मोदी ने आरोप लगाया कि नारायणसामी के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा, चिकित्सा सीटों को भरने, अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय के कल्याण जैसे सभी क्षेत्रों में नाकाम रही और यहाँ सिर्फ लूट ही लूट थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस विधायक पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से सीधे संबंधित भ्रष्टाचार के बारे में खुले तौर पर बात कर रहे हैं।

मोदी ने कहा कि उनका “राजनीति में काफी लंबा अनुभव है” और उन्होंने कई चुनाव देखे हैं लेकिन इस साल यहाँ हो रहे चुनाव ‘खास’ हैं। मोदी ने नारायणसामी के बारे में कहा, “क्योंकि निवर्तमान मुख्यमंत्री को टिकट नहीं दिया गया। कई सालों की वफादारी, नेताओं की चप्पलें उठाना, अपने नेता (राहुल गाँधी) को खुश करने के लिये गलत अनुवाद करना- इसके बावजूद टिकट नहीं- यह दिखाता है कि उनकी सरकार कितनी बड़ी आपदा थी।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ जाँच की अनुरोध वाली याचिका पर लगाई फटकार, कहा- सस्ती प्रसिद्धि पाने का तरीका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख और पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ सीबीआई जाँच का अनुरोध करने वाली याचिका को लेकर एक वकील को फटकार लगाई। जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस मनीष पिताले की पीठ ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएँ अक्सर सस्ती प्रसिद्धि के लिए दायर की जाती हैं।

यह याचिका एक सप्ताह पहले डॉक्टर जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल द्वारा दायर की गई थी। पाटिल को फटकार लगाते हुए न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, “आप कहते हैं कि आप कानून में डॉक्टरेट हैं, कृपा करके आप हमें आपके द्वारा लिखा एक भी पैराग्राफ दिखाएँ। आपकी पूरी याचिका पैराग्राफ निकालने पर आधारित है। याचिका में केवल राज्य के गृह मंत्री एवं सिंह के बीच हुई बातचीत को ही पेश किया गया है। आप अपनी याचिका में कोई मौलिक अनुरोध कीजिए। आपका क्या योगदान है? इससे आपका क्या लेना-देना है? आपने किस कारण याचिका दायर की है।”

वहीं याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया उन्होंने इस पूरे मामले में मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, पाटिल ने याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि वह गृह मंत्री देशमुख पर लगे आरोपों की जाँच सीबीआई से करवाने का निर्देश दें। पाटिल का कहना है कि देशमुख और परमबीर सिंह ने मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास के बाहर मिली विस्फोटक सामग्री युक्त SUV, मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वाजे की गिरफ्तारी और संबंधित घटनाक्रमों के दौरान अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया।

हाईकोर्ट ने इसके बाद आशुतोष कुंभकोणी से इस मामले से संबंधित सभी यचिकाओं को एक साथ जोड़ने को कहा, ताकि कोई अनुचित आदेश पारित न हो सके। अदालत पाटिल की याचिका और अन्य संबंधित याचिकाओं पर एक अप्रैल को सुनवाई करेगी।

महबूबा मुफ्ती को श्रीनगर HC से भी झटका, पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने की अर्जी कोर्ट ने की खारिज

जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के पासपोर्ट मामले में नया मोड़ आ गया है। महबूबा मुफ्ती पासपोर्ट का रिन्यूअल खारिज करने के खिलाफ श्रीनगर हाई कोर्ट पहुँच गई और उन्होंने कोर्ट से निर्देश देने की माँग की। हालाँकि, उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिला, क्योंकि हाई कोर्ट ने महबूबा मुफ्ती की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। 

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

महबूबा मुफ्ती के मामले की सुनवाई करते हुए श्रीनगर हाई कोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे ने कहा कि पासपोर्ट ऑफिसर ने पुलिस वेरीफिकेशन की रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट का रिन्यूअल रद्द किया है। ऐसे मामले में मैं कोई निर्देश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट जैसे मामलों में कोर्ट के पास सीमित अधिकार क्षेत्र ही बनता है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से प्रशासनिक मामला है। कोर्ट ने भी कहा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप के लिए कोई वजह नहीं जान पाए हैं।

पासपोर्ट ऑफिस ने भेजा था रिन्यूवल के रिजेक्शन का पत्र

बता दें कि 27 मार्च को श्रीनगर स्थित पासपोर्ट ऑफिस ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को पत्र के माध्यम से ये जानकारी दी थी कि आपका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो सकता। क्योंकि पुलिस रिपोर्ट आपके अनुकूल नहीं है। इसके बाद महबूबा मुफ्ती भड़क गई थी। 

बौखलाई महबूबा मुफ्ती

विदेश मंत्रालय का पत्र मिलने के बाद महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर जोरदार हमला बोला था। उन्होंने लिखा, “पासपोर्ट ऑफिस ने मुझे पासपोर्ट इश्यू करने से मना कर दिया, क्योंकि सीआईडी की रिपोर्ट में मुझे हिंदुस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। ये है कश्मीर में सामान्य हालात की असलियत।” उन्होंने कहा कि कश्मीर में अगस्त 2019 के बाद से सब कुछ सामान्य बताया जा रहा है, जिसमें अब एक पूर्व मुख्यमंत्री का पासपोर्ट रखना इतने ताकतवर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है।

महबूबा मुफ्ती ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर उस पत्र को भी पोस्ट किया। ये पत्र श्रीनगर स्थित विदेश मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय से भेजा गया है। जिसमें महबूबा मुफ्ती के पासपोर्ट को रिन्यू न करने की वजह बताई गई है। हालाँकि पत्र में ये भी लिखा गया है कि अगर आप इसके विरोध में अपील करना चाहती हैं, तो आप कर सकती हैं। बता दें कि अगर किसी को पासपोर्ट रिन्यू कराना होता है, तो स्थानीय पुलिस की एलआईयू की रिपोर्ट लगती है। जम्मू और कश्मीर में ये काम स्थानीय सीआईडी करती है।

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती पर मनी लाँन्ड्रिंग का केस चल रहा है। इसी केस में बीते गुरुवार को ईडी की टीम ने उनसे 5 घंटे तक पूछताछ भी की थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने मुफ्ती के श्रीनगर स्थित घर से 23 दिसंबर 2020 को एक डायरी बरामद की थी, जिसमें कई प्रकार के वित्तीय लेनदेन का जिक्र था। जाँच एजेंसी इसी की पड़ताल में लगी हुई है।

‘जो करना है करो’: ममता ने लोगों को ‘मॉब जस्टिस’ के लिए उकसाया, कहा- देखना चाहती हूँ कि कौन हारता और कौन जीतता है

पश्चिम बंगाल राज्य विधान सभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार (मार्च 30, 2021) को ‘मॉब जस्टिस’ की वकालत करती हुई नजर आईं और नंदीग्राम के लोगों को अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए उकसाया

नंदीग्राम में एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए, ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान सामाजिक अशांति पैदा करने के लिए उकसाया। यह मानते हुए कि उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी असामाजिक गतिविधियों में लिप्त होगी, पश्चिम बंगाल के सीएम ने लोगों को कानून व्यवस्था को दरकिनार करने और मामले को अपने हाथों में लेने के लिए उकसाया।

(Video Courtesy: Youtube/News18 Bangla)

अपने भाषण में लगभग 6 मिनट में, उन्होंने कहा, “आज से, गुंडों (भाजपा का जिक्र करते हुए) को (अपने इलाके में) प्रवेश करने की अनुमति नहीं दें। घड़ी में शाम के 6 बजे के बाद, सभी बाहरी लोगों को अलविदा बोल दें। 6 बजे के बाद केवल इनसाइडर रहेंगे।” उन्होंने डर को व्याप्त करने और ‘मॉब जस्टिस’ को बढ़ावा देने के लिए भाजपा को ‘बाहरी लोगों’ और ‘गुंडों’ के रूप में संदर्भित किया।

पश्चिम बंगाल के सीएम ने लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाया

ममता बनर्जी ने इसके बाद 2007 में नंदीग्राम में पुलिस की बर्बरता के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए लोगों के मन में बीजेपी के प्रति डर बैठाने की कोशिश की। उन्होंने जोर देकर कहा, “अपने घरों से समूहों में निकलें। यदि वे किसी को भी छूते हैं, विशेष रूप से महिला को, तो लाखों माताएँ हाथ में रसोई के बर्तन के साथ बाहर आ जाएँ।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वे किसी भी आदमी पर हमला करते हैं, तो सभी बुजुर्गों को समूहों में एकजुट होना चाहिए।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने हिंसा के विचार पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”मैं देखना चाहती हूँ कि कौन इस खेल को हारता है और कौन जीतता है।” ममता बनर्जी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग ‘बाहरी लोगों’, सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।

ममता बनर्जी ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ क्या करना चाहिए

ममता बनर्जी ने सिफारिश की, “वे आपको अधिकतम 2 दिनों के लिए डरा सकते हैं। केवल दो दिन बचे हैं (मतदान के लिए)। सुरक्षाकर्मियों की बात सुनो, जो बाहर से आए हैं, सिर्फ इन 2 दिनों के लिए … मैं उनसे निष्पक्ष रूप से काम करने का अनुरोध करूँगी।” इसके तुरंत बाद, पश्चिम बंगाल के सीएम के स्वर में बदलाव आया। 9:42 मिनट में उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में भाषण देते हुए कहा, “यदि वे पालन नहीं करते हैं, तो, सभी माँ और बेटियाँ एक साथ में आएँ और जो करना है, करें।”

इसके बाद ममता बनर्जी ने भाजपा का डर और उन पर गुंडागर्दी का सहारा लेने का आरोप लगाते हुए पूछा, “क्या तुमने पहले ही गेम / मैच गँवा दिया है? क्या इसीलिए तुम गुंडागर्दी का सहारा ले रहे हो और लोगों में डर पैदा कर रहे हो?” इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने भाजपा को उनके कथित ‘गुंडागर्दी’ पर सबक सिखाने की धमकी दी। 

झारखंडः हेमंत सरकार ने रामनवमी जुलूस पर लगाई रोक, BJP सांसद ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में जाएगा मामला

कोरोना महामारी को नियंत्रण में करने के लिए झारखंड की हेमंत सरकार ने रामनवमी जुलूस को लेकर बड़ा फैसला किया है। हेमंत सरकार ने रामनवमी के मौके पर जुलूस निकालने पर रोक लगा दिया है, जिसको लेकर भाजपा विरोध कर रही है। झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने को कहा है। हेमंत सरकार ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले को काबू में करने के लिए गाइडलाइन जारी की है।

गाइडलाइंस के मुताबिक झारखंड में रामनवमी जुलूस पर रोक लगाई गई है। गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार के इस फैसले से असहमति जताते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात कही है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “सारे विरोध के बावजूद जब बाबा का मंदिर मैंने सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर खुलवा दिया, इसी बात पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से लड़ाई कर मैं और मेरा परिवार 22 केस लड़ रहा है और बाबा की कृपा से जीत हासिल भी कर रहा है तो रामनवमी का पूरे झारखंड में जुलूस के लिए भी मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊँगा। हिम्मतें मरदा मददे ख़ुदा।”

निशिकांत दूबे ने आगे सवालिया लहजे में कहा कि यदि मधुपुर विधानसभा उपचुनाव 2021 में चुनावी रैली हो सकती है, तो रामनवमी का जुलूस क्यों नहीं निकल सकता है। पूजा समिति यदि रामनवमी का जुलूस निकालने के लिए इच्छुक होगी तो हम लोग इसका तन-मन-धन से समर्थन करेंगे।

इससे पहले 22 मार्च को, हजारीबाग के विधायक मनीष जायसवाल ने रामनवमी समारोहों पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी। जायसवाल ने विधानसभा में कहा था, “रामनवमी हजारीबाग में श्रद्धा का त्योहार है और जुलूस पर प्रतिबंध लगाने से लोगों की भावनाओं को चोट पहुँचेगी।” 

बता दें कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर राज्य सरकार ने कई दिशा-निर्देश जारी किए। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर होली नहीं खेलने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा सरहुल, शब-ए-बरात, नवरात्र, रामनवमी व ईस्टर सहित सभी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजनों और जुलूस पर भी रोक लगा दी गई है। जिसके बाद रामनवमी व जुलूस पर रोक के विरोध में सियासत काफी तेज हो गई है। बीजेपी नेता का कहना है कि सरकार रामनवमी के जुलूस को अनुमति दे।

बीजेपी प्रत्याशी और पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा की गाड़ी पर पत्थरबाजी, पीठ में लगी चोट, कहा- TMC के गुंडों ने किया हमला

बंगाल में दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार आज खत्म हो गया है। इसी बीच बीजेपी प्रत्याशी और पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा पर हमला होने की खबर सामने आई है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी डिंडा ने हमले को लेकर ट्विटर पर वीडियो और फोटो भी शेयर किया है। मोयना से बीजेपी प्रत्याशी ने बताया कि TMC के गुंडों ने उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ कर उन्हें घायल कर दिया गया। हमलावरों की संख्या 50 के करीब थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने भी हमले की कुछ तस्वीरें साझा की हैं। इसमें बीजेपी प्रत्याशी की गाड़ी का शीशा टूटा हुआ नजर आ रहा है। वहीं एक अन्य तस्वीर में डिंडा एक बेंच पर बैठे अपनी गर्दन पर हाथ रखे हुए दिखाई दे रहे हैं।

हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब टीएमसी के गुंडों ने भाजपा के लोगों पर हमला किया है। इससे पहले भी वह प्रदेश में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला कर चुके हैं। सोमवार को टीएमसी के गुंडों द्वारा की गई पिटाई से घायल बीजेपी कार्यकर्ता की बुजुर्ग माँ शोभा मजूमदार की एक महीने बाद मौत हो गई।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण में 30 विधानसभा सीटों पर गुरुवार को वोटिंग होने जा रही है। इसमें 171 प्रत्याशियों की किस्मत दाँव पर है, जिनमें 19 महिलाएँ भी शामिल हैं।

बता दें कि बंगाल में कुल आठ चरणों में चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी और राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस दूसरे चरण की सभी 30 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि जबकि, लेफ्ट और उनके घटक दल इंडियन सेक्युरल फ्रंड यहाँ पर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चुनाव लड़ रही हैं। सीपीएम ने 15 के 15 प्रत्यासी दूसरे चरण में सियासी मैदान में हैं तो वहीं कॉन्ग्रेस के-9, सीपीआई के 2 और एआईएफबी और आरएसपी के 1-1 उम्मीदवार हैं। जबकि 32 निर्दलियों के साथ अन्य 44 उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

चप्पल मारी, बाल नोचे, भरी सभा में खींच दी साड़ी : PM मोदी ने 32 साल पहले जयललिता के साथ हुई घटना की दिलाई याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को तमिलनाडु के धारापुरम में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस और डीएमके के गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने जनता से 25 मार्च 1989 को AIADMK की दिवंगत राजनेत्री व तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ हुआ वाकया कभी न भूलने को कहा।

पीएम जनसभा में बोले, “डीएमके के युवराज ने वरिष्ठ नेताओं को किनारे कर दिया और उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की। डीएमके ने फिर भी उन्हें रोकने के लिए कोई कोशिश नहीं की। 25 मार्च 1989 की तारीख को कभी मत भूलिएगा। तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके नेताओं ने किस तरह अम्मा जयललिता के साथ व्यवहार किया था?”

प्रधानमंत्री ने आज के भाषण में ‘अम्मा’ जयललिता के साथ हुई जिस घटना का जिक्र किया, उसे बीती 25 मार्च पूरे 32 साल बीत गए हैं। इसी तारीख को तमिलनाडु विधानसभा में जयललिता पर डीएमके के बड़े बड़े नेताओं ने हमला किया था।

सदन में हुए इस अपमान ने उनके मन पर ऐसा असर छोड़ा कि उन्होंने शपथ ले ली कि जब तक डीएमके के मुख्यमंत्री सदन में बैठेंगे वो विधानसभा नहीं आएँगी। उनकी इस एक शपथ ने उन्हें दो साल के अंदर आम राजनेत्री से राज्य की मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचा दिया और देखते ही देखते वे राज्य की जनता के दिल में अम्मा बन कर राज करने लगीं।

25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को विपक्षी अन्नाद्रमुक विधायकों ने जमीन पर धकेल दिया था। जहाँ करुणानिधि पर हुए एक हमले का बदला लेने के लिए विपक्षी नेताओं ने न केवल जयललिता का विरोध किया बल्कि भरी सभा में उनकी साड़ी खींचकर, बाल नोचकर उन्हें चप्पल मारी। इस बीच उनके कंधे पर लगी सेफ्टी पिन खुल गई और चोट के कारण खून बहने लगा।

एक इंटरव्यू में जयललिता ने कहा था,

“25 मार्च 1989 में विधानसभा में हुए हमले से ज्यादा मेरे लिए कुछ अपमानजनक नहीं है। मुख्यमंत्री करुणानिधि वहीं थे। उनकी दोनों पत्नियाँ भी वीआईपी बॉक्स में बैठकर देख रही थीं। उनके हर विधायक और मंत्री ने मुझे खींच-खींचकर शारीरिक शोषण किया। उनका हाथ जिस पर गया उन्होंने उसे खींचा चाहे कुर्सी हो,माइक हो या भारी ब्रास बेल्ट। अगर वह उस दिन सफल होते तो आज मैं जिंदा न होती। मेरे विधायकों ने उस दिन मुझे बचाया। उनमें से एक ने मेरी साड़ी भी खींची। उन्होंने मेरे बाल खींचे और कुछ तो नोच भी डाले। उन्होंने मुझ पर चप्पल फेंकी। कागज के बंडल फेंके। भारी किताबें मारी। उस दिन मैंने सदन को आँसुओं और गुस्से के साथ छोड़ा। मैंने कसम खाई कि जब तक ये आदमी मुख्यमंत्री बनकर सदन में होगा मैं यहाँ नहीं बैठूँगीं और जब मैं उस सदन में दोबारा गई तो मैं चीफ मिनिस्टर थी। मैंने दो साल में अपनी कसम पूरी की।”

बता दें कि तमिलनाडु की इस नेत्री का जीवन और यूपी में मायावती का राजनीतिक करियर लगभग एक जैसा है। वहाँ जयललिता 25 मार्च 1989 में सदन में हुई बदसलूकी के बाद 6 बार सीएम बनीं और उत्तर प्रदेश में मायावती, 1993 में गेस्ट हाउस कांड के बाद दलितों की एकमात्र नेता बनकर उभरीं।

दरअसल, 1993 में सपा और बसपा की गठबंधन में सरकार बनने के बाद मुलायम सिंह सीएम थे। साल 1995 में जब बसपा ने गठबंधन से अपना नाता तोड़ा तो मुलायम समर्थक आग बबूला हो गए और 2 जून को अचानक लखनऊ का गेस्ट हाउस घेर लिया। वहाँ मायावती पर हमला हुआ, उन्हें जान से मारने की कोशिश हुई। तभी भाजपा ने बसपा को समर्थन देने का ऐलान किया और घटना के अगले ही दिन मायवती पहली दफा यूपी की सीएम कुर्सी पर विराजमान हुईं। इनमें से 2 बार उन्हें कुछ कुछ माह बाद कुर्सी छोड़नी पड़ी और 2 बार उन्होंने अपना शासन काल पूरा भी किया।

ड्रग्स केस में एक्टर एजाज खान को NCB ने लिया हिरासत में, जिसने कहा था- ‘भारतीय संविधान की जगह कुरान का करूँगा चयन’

ड्रग्स केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई जारी है। ड्रग्स केस में ड्रग पेडलर शादाब बटाटा की गिरफ्तारी के बाद एक्टर एजाज खान का नाम संज्ञान में आया था। ऐसे में आज (मार्च 30, 2021) एनसीबी ने एजाज खान को हिरासत में लिया है। एजाज खान राजस्थान से मुंबई लौटे, जिसके ठीक बाद एनसीबी ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 

एजाज पर ऐसा आरोप लगे हैं कि वो बटाटा गैंग का हिस्सा है। एनसीबी की टीम एजाज की अंधेरी और लोखंडवाला के कई ठिकानों पर छापेमारी भी कर रही है। साल 2018 में, एजाज खान को नवी मुंबई पुलिस ने एक ड्रग मामले में गिरफ्तार किया था। उस वक्त एजाज खान के पास से करीब 1 लाख रुपए की MD ड्रग्स बरामद किया गया था। 

गौरतलब है कि एजाज खान को फेसबुक लाइव वीडियो में की गई सांप्रदायिक टिप्पणी के लिए अप्रैल 2020 में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अपने फेसबुक लाइव वीडियो में एजाज खान ने कहा था, “अगर एक चींटी मर जाती है, तो एक मुसलमान जिम्मेदार होता है, अगर एक हाथी मर जाता है, तो एक मुसलमान जिम्मेदार होता है। अगर दिल्ली में भूकंप आता है, तो एक मुसलमान जिम्मेदार होता है, यानी किसी भी घटना के लिए मुसलमान जिम्मेदार होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस साजिश के लिए कौन जिम्मेदार है?”

उन्होंने यह कहते हुए विवाद को जन्म दिया था कि वह किसी भी समय भारतीय संविधान की जगह कुरान का चयन करेंगे। विवादास्पद अभिनेता को कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल से भी समर्थन मिला था।

एक वीडियो में एजाज खान ने कहा था, “ये सारे पंडितों की पूरी गली को इतना मारो और इनको जेल में डालो। कौन से पंडित? ये दरिंदे हैं साले। बल्कि सारे हिंदुस्तान के पंडितों को इनको अंदर करवाना चाहिए। इन्होंने पंडितों का नाम भी खराब किया है। पंडितों की जाति का नाम खराब किया है। ब्राह्मणों की जाति का नाम खराब किया है। अब तो ऐसा हो गया है कि पंडित भी मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। मतलब ब्राह्मण पंडित भी मॉब लिंचिंग में आ गए हैं। क्या बात है यार! कमाल हो गया।”