पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पाँव में पट्टी लगवा कर घूम रही हैं। लेकिन एक वीडियो में उन्हें वही पाँव आराम से हिलाते हुए देखा गया। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि TMC सुप्रीमो एक टेबल के सामने कुर्सी पर बैठी हुई हैं और बड़े आराम से अपने उस पाँव को ऊपर-नीचे उछाल और हिला रही हैं, जिसमें उन्हें चोटें आने की बात कही गई थी। इससे पहले 1 दिन में ही उन्होंने प्लास्टर से बदल कर गरम पट्टी करवा ली थी।
देखा जा सकता है कि इस दौरान ममता बनर्जी को कोई परेशानी नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर उन्हें ऐसा करते हुए दर्द होता तो फिर वो ज़रूर पाँव हिलाना रोक देतीं या फिर उधर ध्यान देतीं। लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वीडियो में एक मौका तो ऐसा आता है, जब वो अपने दूसरे वाले पाँव को चोटिल पाँव के ऊपर चढ़ा देती हैं और तब भी उन्हें किसी प्रकार की तकलीफ में नहीं देखा गया।
The Bengal CM was campaigning for the high-octane Nandigram seat. During a rally, the TMC supremo stood up with her fractured leg for the national anthem pic.twitter.com/cR9fFDEtUd
भाजपा नेता विष्णुवर्धन ने कहा कि ममता बनर्जी ने लोगों को जो कहानी बताई है, ये वीडियो उससे अलग ही कहानी बयाँ करती है। मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने पूछा कि अपने टूटे हुए पाँव के साथ भला कौन खेलता है? एक अन्य वीडियो में भी उन्हें आराम से अपने व्हीलचेयर से खड़े हुए देखा जा सकता है। बाद में बताया गया था कि राष्ट्रगान के दौरान उनसे बैठे नहीं जा रहा था, इसीलिए वो खड़ी हुई थीं।
इससे पहले 13 मार्च को भी उनके पैर में प्लास्टर की जगह बैंडेज देख कर भी लोगों ने पूछा था कि क्या ये सच में एक गंभीर चोट थी, जैसा बताया गया? लोगों ने कहा था कि एक ही दिन में प्लास्टर से बैंडेज हो गया, यही तो ‘आसोल परिवर्तन है’, अच्छे दिन’ है। एक व्यक्ति ने तो ममता बनर्जी की तुलना हॉलीवुड फिल्म के किरदार ‘वॉल्वरिन’ से कर दी थी, जो एक ऐसा फ़िल्मी किरदार है जिसके घाव चमत्कारिक रूप से तुरंत भर जाते हैं।
बॉलीवुड और तमिल की फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके रंगनाथन माधवन ने अब बतौर निर्देशक अपनी पारी शुरू की है। उनकी अगली फिल्म ‘रॉकेट्री – द नम्बि इफ़ेक्ट’ का ट्रेलर आ गया है और इसे सोशल मीडिया पर अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है। असल में ये फिल्म ISRO के वैज्ञानिक रहे एस नम्बि नारायणन की बायोपिक है। पद्म भूषण से सम्मानित नम्बि नारायणन के करियर में एक ऐसा समय भी आया था, जब उन पर झूठे आरोप लगे और उन्हें गिरफ्तार किया गया।
ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नम्बि नारायणन की बायोपिक है फिल्म ‘रॉकेट्री’
फिल्म के ट्रेलर में शाहरुख़ खान भी नज़र आते हैं। नम्बि नारायणन के किरदार में ढल चुके आर माधवन कहते हैं, “मैं यहाँ इसलिए आया हूँ ताकि जो इस देश में मेरे साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो।” फिल्म में नम्बि नारायणन पुराने दिनों में भारत में रॉकेट्री को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाते दिखते हैं, ताकि देश इस ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री का हिस्सा बने और रॉकेट्स बनाए, ‘खिलौने’ नहीं। इसके बाद उनके खिलाफ साजिश की बातें आती हैं।
उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाए गए। उनकी कामयाबी के बावजूद उन्हें अलग-थलग कर दिया गया। फिल्म में एक डायलॉग है – “किसी कुत्ते को मारना हो तो अफवाह फैला दो कि वो पागल है। ठीक उसी तरह, किसी इंसान को मारना हो तो दिखा दो कि वो देशद्रोही है।” उन पर गुजरे पारिवारिक संकट और गिरफ़्तारी के दौरान मिली प्रताड़ना को भी फिल्म में उकेरा जाएगा। कैसे उन्होंने न्यायिक लड़ाई जीती, फिल्म में ये भी दिखाया जाएगा।
आर माधवन की फिल्म ‘राकेट्री – द नम्बि इफ़ेक्ट’ का ट्रेलर
इस फिल्म को हिंदी, तमिल और अंग्रेजी में बनाया गया है। फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कार्य 2017 की शुरुआत में ही शुरू हो गया था। अक्टूबर 2018 में इसका टीजर जारी कर दिया गया था। आर माधवन और शाहरुख़ खान के अलावा फिल्म में कभी तमिल सिनेमा की सेंसेशन रहीं सिमरन और वहाँ के एक और बड़े स्टार सूर्या भी नज़र आएँगे। भारत के अलावा जॉर्जिया, रूस, फ़्रांस और सर्बिया में इस फिल्म की शूटिंग हुई है।
जब एक प्रतिभावान ISRO वैज्ञानिक अचानक कर लिया गया था गिरफ्तार
वो नवंबर 30, 1994 की बात थी, जब कुछ पुलिस वाले नम्बि नारायणन के घर पर आ धमके। उन्होंने कहा कि DIG आपसे बात करना चाहते हैं। जब नम्बि ने पूछा कि क्या उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है तो पुलिसकर्मियों ने ना में जवाब दिया। उन्हें पुलिस की गाड़ी में आगे बिठा कर ले जाया गया (अपराधियों को अक्सर पीछे बिठाया जाता है)। असल में उससे पहले 20 अक्टूबर को मरियम रशीदा नामक मालदीव्स की एक महिला को गिरफ्तार किया गया था।
बताया गया था कि वो एक जासूस है और ISRO में कुछ संपर्कों के जरिए वो पाकिस्तान को भारतीय रॉकेट तकनीक की बारीकियाँ सप्लाई कर रही है। 13 नवंबर को उसी साल फौजिया हुसैन नामक मालदीव की एक और महिला को गिरफ्तार किया गया, जो मरियम की दोस्त थी। नम्बि नारायणन तब क्रायोजेनिक इंजन प्रोजेक्ट के मुखिया और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स के डायरेक्टर इन चार्ज हुआ करते थे।
प्रोजेक्ट में उनके नीचे थे डी शशिकुमारन, जिनका नाम इस जासूसी केस में आया था। नम्बि नारायणन कहते हैं कि तब ISRO के वैज्ञानिक इस केस पर बातें करते थे और शशिकुमारन इसमें शामिल हैं या नहीं, इस पर भी। लेकिन, जासूसी वाली बात पर उनकी हँसी छूट जाती थी क्योंकि उनके अनुसार, तब भारत को पता ही नहीं था कि क्रायोजेनिक इंजन बनाते कैसे हैं। तब फ्रांस के साथ मिल कर बनाए गए ‘विकास इंजन’ का सिर्फ खाका ही था देश के पास।
ISRO के वैज्ञानिक इस पर चर्चाएँ करते थे और इस मामले की खबरें अख़बारों में आती रहती थीं, इसीलिए वो लोग फोन पर भी इससे जुड़ी बातें कर लिया करते थे। इसी दौरान एक बार नम्बि नारायणन को एहसास हुआ कि उनका फोन टैप किया जा रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त को ये आशंका जाहिर भी की, लेकिन फिर कहा कि जब उन्होंने कुछ गलत किया ही नहीं है तो फिर डरना किस बात से, जो टैप कर रहा है, उसे मस्ती करने दिया जाए।
पुलिस थाने में एक वैज्ञानिक को ले जाकर बिठा दिया गया, जिससे वो इतने तनावपूर्ण हो गए कि जब पुलिस वालों ने पूछा कि उन्हें खाना-पानी वगैरह में क्या चाहिए तो उन्होंने एक डब्बा Wills सिगरेट माँगा। वो 3 साल पहले ही स्मोक करना छोड़ चुके थे लेकिन एक ऐसा समय था, जब वो दिन भर में 40 सिगरेट पी जाया करते थे। रात को उन्हें वहीं बेंच पर सोना पड़ा। इससे पहले नम्बि नारायणन के परिवार की बात कर लेते हैं।
नम्बि नारायणन, उनके पिता और परिवार
उनके पिता और चाचा ने मिल कर एक कारोबार किया था लेकिन उनके चाचा की मौत के बाद उनके परिवार ने नम्बि के पिता से साझी सम्पत्तियों पर से सारे अधिकार छीन लिए, जिससे उन्हें 11 सालों के लिए मुक़दमे लड़ने पड़े थे। दिसंबर 12, 1941 को नम्बि का जन्म हुआ। वो तीन बेटियों के बाद जन्मे थे। उनका जन्म परिवार में भाग्यशाली माना गया, क्योंकि उसी महीन मुक़दमे का झंझट भी ख़त्म हुआ और कोर्ट ने उनके पिता के हक़ में फैसला दिया।
नम्बि की चाची आत्महत्या कर ली। उनके आहत पिता फिर नागरकोइल में बस गए और वहाँ तेल का एक व्यापार खोल लिया। उनके पिता ने संघर्ष कर के परिवार को उच्च-मध्यम वर्ग का बना दिया, उस जमाने में उनके घर में पानी और बिजली की सप्लाई थी। 40 के दशक में ये बड़ी बात थी। स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें या किसी चीज के लिए उन्हें कहना नहीं पड़ता। घर में सब मिला। उन्हें बचपन से गणित पसंद था।
उस वक़्त तमिलनाडु में मात्र 6 इंजीनियरिंग कॉलेज थे, जिनमें 4 प्राइवेट थे। उनमें से मदुरै स्थित थ्यागराजा कॉलेज में उन्हें एडमिशन मिला। नम्बि नारायणन के अनुसार, उन्हें कॉलेज छोड़ कर जाते हुए अपने पिता को उन्होंने मात्र दूसरी बार रोते देखा था। पहली बार वो अपनी माँ (नम्बि की दादी) के निधन पर रोए थे। इसके ठीक 5 महीने बाद नम्बि के पिता की मौत हो गई और तब उन्हें पता चला कि कम आय के बावजूद 5 बच्चों का परिवार उनके पिता कैसे चला रहे थे।
अब घर में कोई कमाने वाला न था। 19 वर्ष की उम्र में उन पर कठिन जिम्मेदारियाँ आ गईं लेकिन उनकी दो बहनों ने साफ़ कर दिया कि भाई की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। छात्र जीवन में सक्रियता और कुछ अच्छे प्रोफेसर्स के विश्वास ने उन्हें एक सुयोग्य इंजीनियर बनाया। अब लौटते हैं वापस जासूसी कांड पर। जब नम्बि को एडिशनल मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया था तो उन्हें पता ही नहीं था कि उन पर आरोप क्या है।
वहाँ उनसे सीधा पूछा गया कि क्या वो अपना जुर्म कबूल करते हैं? कटघरे में खड़े नम्बि नारायणन का एक ही सवाल था – “आरोप क्या है?” इसके बाद कोर्ट के ही एक कर्मचारी ने एक ब्लैक पेपर पर उनसे हस्ताक्षर कराया। उन्हें 11 दिनों के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया और इस तरह से इस केस में वो आरोपित बन गए। फिर इस मामले को CBI ने अपने हाथों में ले लिया। 1995 में नम्बि मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुँचे।
आरोपमुक्त होने के बावजूद वैज्ञानिक नम्बि नारायणन ने जारी रखी सम्मान की लड़ाई
सितंबर 1996 में NHRC ने इस मामले में केरल के पुलिस अधिकारियों और IB के अधिकारियों के खिलाफ फैसला देते हुए मानवाधिकार के घोर उल्लंघन का मामला माना और 10 लाख रुपए तत्काल मुआवजा देने का निर्देश दिया। केरल सरकार NHRC के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गई, लेकिन 2012 में उसके खिलाफ फैसला आया। तत्कालीन सरकार ने NHRC के आदेश पर रोक लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।
1996-97 में ही CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार का बहाना बनाया। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आने के बाद भी एक दशक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद आई ओमान चंडी की सरकार, जिसे इस जासूसी कांड के कारण जनता के बीच पूरा फायदा मिला था। लेकिन उसने भी केरल के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का फैसला लिया। उसने 15 साल बीतने का बहाना बनाया। 2012 में नम्बि नारायणन हाईकोर्ट गए, जहाँ से केरल सरकार को फटकार मिली। मजबूरन सरकार को कार्रवाई के लिए कमिटी बनानी पड़ी। फिर वो सारे अधिकारी भी हाईकोर्ट पहुँचे।
केरल हाईकोर्ट ने एकल पीठ के फैसले को पलटते हुए कहा कि CBI की रिपोर्ट एक ओपिनियन भर है और ये सरकार के ऊपर है कि वो उसे माने या ना माने। आप सोचिए, बिना सबूतों के भारत के कई वैज्ञानिकों को गद्दार घोषित किए जाने से किसका फायदा हुआ होगा, क्योंकि इससे भारत की रॉकेट्री तकनीक कई वर्ष पीछे चली गई थी। CBI ने पाया कि भारतीय स्पेस प्रोग्राम को पटरी से उतारने के लिए ये पूरी साजिश रची गई थी।
विदेशी हाथों बिके हुए वामपंथियों की थी पूरी साजिश: नम्बि नारायणन के बिना पिछड़ा ISRO
सारा दोष केरल की तत्कालीन CPI(M) सरकार का था, जिसने अमेरिका के इशारे पर भारतीय वैज्ञानिकों का करियर बर्बाद कर दिया और भारतीय स्पेस व रॉकेट्री विभाग का काम ठप्प कर दिया। भारत तब स्पेस की दुनिया में आत्मनिर्भर नहीं था और वो अमेरिका व रूस जैसे देशों पर निर्भर था, जहाँ से करोड़ों के आयात हुआ करते थे। इन देशों को ज़रूर लगा होगा कि भारत आत्मनिर्भर बना तो उनकी कमाई बंद हो जाएगी।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात भी सामने आती है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने इसके लिए केरल की तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार में शामिल बड़े नेताओं और अफसरों को मोटी रकम मुहैया कराई थी। अब आप बताइए। गद्दार कौन? नम्बि नारायणन जैसे ISRO के वैज्ञानिक या भ्रष्ट नेता-अधिकारी?
मई 1996 में कोर्ट ने CBI की रिपोर्ट को मानते हुए आरोपित वैज्ञानिकों को बरी कर दिया लेकिन CPI(M) सरकार को उनका करियर बर्बाद करने की इतनी चुल्ल मची थी कि उसने मई 1998 में फिर से जाँच के आदेश दे दिए। 1996 में आरोपमुक्त होने के बावजूद सम्मान की लड़ाई 24 वर्षों तक चली। आखिरकार सितम्बर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक़ में फैसला दिया और केरल सरकार से कहा कि उन्हें 75 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिया जाए।
जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि नम्बि नारायणन को सारे लाभ दिए जाएँ और रकम की भरपाई गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों से हो। सोचिए, अगर नम्बि नारायणन ने अपने वादे के मुताबिक क्रायोजेनिक इंजन तभी बना लिया होता तो भारत स्पेस की दुनिया में 2 दशक आगे होता। 2019 में मोदी सरकार ने उन्हें ‘पद्म भूषण’ से नवाजा। उन्होंने ‘Ready To Fire: How India and I Survived the ISRO Spy Case’ पुस्तक में अपने इस संघर्ष का जिक्र किया है।
लड़ाई अब भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 सदस्यीय कमिटी बनाई है, जो जाँच करेगी कि ISRO वैज्ञानिक रहे नम्बि नारायणन को एक साजिश के तहत फँसाया गया था या नहीं। उनकी गिरफ़्तारी को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही गैर-जरूरी बता चुका है और प्रताड़ना के एवज में मुआवजे का आदेश दिया जा चुका है। दिसंबर 2020 में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज डीके जैन की अध्यक्षता में इस पैनल की पहली बैठक हुई। नारायणन को पैनल के समक्ष बुलाया गया। उनकी कहानी फिर सुनी गई।
पूर्व रॉ अधिकारी एनके सूद ने खुलासा किया था कि ये सब रतन सहगल नामक एक व्यक्ति ने किया। उन्होंने बताया था, “उसने ही नाम्बी नारायणन को फँसाने के लिए जासूसी के आरोपों का जाल बिछाया। ऐसा उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि बिगाड़ने के लिए किया। रतन जब आईबी में था, तब उसे अमेरिकन एजेंसी सीआईए के लिए जासूसी करते हुए धरा जा चुका था। अब वह सुखपूर्वक अमेरिका में जीवन गुजार रहा है। वह पूर्व-राष्ट्रपति अंसारी का क़रीबी है।”
महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ माकूल नहीं हैं। हर कोई एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भाग रहा है। बुधवार (31 मार्च 2021) को एक कोरोना मरीज इन्हीं सब चीजों से तंग आकर नगर निगम के कार्यालय पहुँच गया। मरीज के हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर देख अधिकारी भी घबरा गए। सबने फटाफट एंबुलेंस बुलवाकर उसे बिटको अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया। लेकिन बिगड़ी तबीयत के चलते गुरुवार रात को उसकी मौत हो गई।
38 वर्षीय बाबासाहेब कोले नासिक के सिडको के कामटवाड़े इलाके के निवासी थे। उनकी पत्नी और दो बच्चे अब अकेले हैं। यदि समय पर उचित इलाज मिलता तो शायद आज वह जिंदा होते। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें कोरोना संक्रमित मास्क लगाए नगर निगम कार्यालय के गेट पर बैठे हैं और पास में उनका एक रिश्तेदार है।
महाराष्ट्र में लापरवाही की हद:नासिक में 3 दिन तक कोरोना पेशेंट को बेड नहीं मिला, ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ निगम दफ्तर पहुंचा; इलाज नहीं मिलने से मौत https://t.co/xtorqHLUjW
मामले की जाँच में पता चला है कि मरीज तीन दिन से कोरोना पॉजिटिव था और उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। काफी मशक्कत के बाद भी किसी अस्पताल में उन्हें बेड नहीं मिल रहा था। इसलिए मजबूरी में मरीज को अपना ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नगर निगम के दफ्तर जाना पड़ा। इससे पहले वह स्थानीय पार्षद से भी अस्पताल में एक बेड दिलवाने के लिए गुहार लगा चुके थे। लेकिन उन्हें बेड नहीं मिला और हालत दिन पर दिन बिगड़ती रही।
परिजनों की मानें तो कोले का ऑक्सीजन लेवल सामान्य स्तर से 40 प्रतिशत नीचे गिर गया था। कोले की पत्नी ने बताया,
“दो-तीन दिन पहले उन्हें बिटको अस्पताल ले जाया गया था। वहाँ से वह दूसरे अस्पताल गए, वहाँ से सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुँचे। मेडिकल कॉलेज ने कहा कि उनके पास कोई बिस्तर नहीं है। हम फिर दूसरे अस्पतालों में गए। किसी ने उन्हें भर्ती नहीं किया। फिर हम सिविल (अस्पताल) वापस आए और वहाँ उन्हें ऑक्सीजन मिली। बाद में किसी ने हमारी नहीं सुनी।”
बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस और नगर निकाय ने इस मामले में कहा है कि वह अपनी जाँच कर रहे हैं। उन्हें पता लगाना है कि आखिर मरीज को नगरपालिका भवन जाने के लिए किसने उकसाया।
उल्लेखनीय है महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के केस लगातार बढ़ रहे हैं। बुधवार को वहाँ 40 हजार नए केस आए। पिछले माह आदित्य ठाकरे भी कोविड संक्रमित हो गए थे। बाद में उद्धव ठाकरे और उनकी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। ऐसे में सबको लग रहा था कि इतने केस देखकर कम से कम महाराष्ट्र सराकर राज्य में लॉकडाउन की घोषणा कर ही देगी। हालाँकि महाराष्ट्र के सीएम ठाकरे ने नई सख्तियों वाली SOP जारी कर दी, लेकिन लॉकडाउन नहीं लगाया है।
सऊदी अरब के दैनिक अखबार ‘सऊदी गजट’ ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार के द्वारा किए जा रहे विकास और जन कल्याण के कार्यों की प्रशंसा की है। सऊदी के इस दैनिक अखबार ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के युवा मोदी सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय के प्रति सकारात्मक रवैया अपना रहे हैं और देश की विकास यात्रा में शामिल होना चाहते हैं।
सऊदी गजट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के वो स्थानीय नेता गलत साबित हो चुके हैं जो यह कहते थे कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद घाटी में कोई भी तिरंगा लेकर नहीं चलेगा। केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए अखबार ने कहा कि इन योजनाओं की सहायता से जम्मू-कश्मीर के कई गरीब विद्यार्थी देश के बड़े संस्थानों में एडमिशन ले रहे हैं। कई छात्र अपनी डिग्री पूरी करके बड़ी व्यापार संस्थाओं में नौकरी कर रहे हैं।
सऊदी गजट ने लिखा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि केंद्र सरकार के द्वारा लागू की गई योजनाओं का पूरा लाभ जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पहुँचे। अखबार ने ‘हिमायत’ योजना के विषय में बताते हुए कहा है कि इस योजना के अंतर्गत कश्मीरी युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसके कारण उन्हें पर्यटन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
अखबार ने जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार की नीतियों की सफलता की प्रशंसा करते हुए लिखा कि जो युवा पिछले तीन दशकों से भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध कर रहे थे और पत्थरबाजी में सक्रिय रूप से शामिल रहते थे, आज उनके जीवन में बदलाव आ रहा है। ये युवा रोजगार और आर्थिक अवसरों की खोज में भाग ले रहे हैं। अखबार ने लिखा है कि भर्ती एजेंसियाँ जम्मू-कश्मीर में पूर्णतः सक्रिय हो चुकी हैं और भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से सैकड़ों कश्मीरी युवा रोजगार भी हासिल कर चुके हैं।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने संसद में एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A के जाल से मुक्त कर दिया था। उसके बाद केंद्र सरकार लगातार जम्मू-कश्मीर को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए तत्पर है।
जम्मू-कश्मीर के नौगाम के अरीबाग में भाजपा नेता अनवर खान के घर पर आतंकी हमला करने वाले 3 आतंकवादियों को आज (अप्रैल 2, 2021) मार गिराया गया। पुलिस को इनके पास से गायब हुए हथियार भी मिले। आईजीपी विजय कुमार ने बताया, “कल बीजेपी नेता के घर पर हुए हमले में शामिल आतंकवादियों को मार दिया गया है। पुलिस का हथियार भी बरामद हो गया।”
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये हमला लश्कर-ए-तैयबा और अलबद्र ने मिलकर किया था। हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार दिया गया, जबकि 2 आतंकियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा। बता दें कि 1 अप्रैल 2021 को भाजपा नेता के घर पर हुए आंतकी हमले में एक पुलिस के जवान रमीज राजा की मौत हो गई थी।
Three terrorists have been neutralized at a hideout in encounter in the Ghat mollah area of Kakapora. Yesterday, we had shared that there were four terrorists, on the basis of an arrest, we got further information about the other 3 as well: Vijay Kumar, IGP Kashmir pic.twitter.com/Kbqgp1BJdP
अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए रमीज ने पिछले साल ही पुलिस ज्वाइन की थी। गुरुवार दोपहर जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपट के गाँव आया तो हर व्यक्ति फफक कर रो पड़ा। दो दिन पहले ही रमीज का निकाह तय हुआ था। ईद के बाद उसे अपनी दुल्हन लेकर आनी थी। घर में शादी की तैयारियाँ चल रही थीं।
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार, रमीज की माँ नसीमा अपने बेटे के लिए रो रोकर कहती हैं, “जिन्होंने मेरे रमीज को शहीद किया है, उन्होंने हम सभी को जीते जी कत्ल कर दिया है। कहते हैं कि मेरे बेटे को मुजाहिदों ने मारा है, यह कौन से मुजाहिद हैं। मेरा बेटा भी तो मुजाहिद ही था, वह भी इसी कौम की खातिर, इसी कश्मीर के लिए पुलिस में भर्ती हुआ था। मेरा खाविंद (पति) भी पुलिस में ही था। मेरे बेटे को शहीद करने वाले कभी भी मुजाहिद नहीं हो सकते। मैं तो उसके लिए सेहरा सजा रही थी।”
रमीज के एक साथी ने बताया की वह बहुत मजाकिया था। वह किसी से नहीं डरता ता। जब भी सब उसे कहते कि थोड़े संजीदा हो जाओ तो वह कहता, “मैं खुशीपोरा का हूँ, खुश रहूँगा, हँसूगा-हँसाऊँगा। संजीदा नहीं रह सकता।”
रमीज के जनाजे में उमड़ी भीड़ (साभार: दैनिक जागरण)
उल्लेखनीय है कि कल भाजपा नेता के आवास पर हुए आतंकी हमले में रमीज गोली लगने से घायल हुए थे। बाद में अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उनकी मौत हो गई। गुरुवार को ही उनका शव तिरंगे में लिपटकर उनके गाँव खुशी पोरा पहुँचा, जहाँ देखते ही देखते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हुजूम उमड़ गया। आसपास की दुकानें बंद हो गईं और सबकी मौजूदगी में उन्हें उनके पैतृक गाँव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं पर हमले अब भी नहीं थम रहे हैं। डायमंड हार्बर से भाजपा प्रत्याशी दीपक हल्दर और उनके समर्थकों पर लठियों से हमला किया गया है। हल्दर तीसरे चरण के मतदान से पहले हरिदेवपुर में चुनाव प्रचार कर रहे थे। उन्होंने टीएमसी के सदस्यों पर हमले करने का आरोप लगाया है। ये वही क्षेत्र है, जहाँ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक सांसद हैं।
#NewsAlert | BJP candidate from Diamond Harbour, West Bengal, has been injured in what is being alleged as an attack by the TMC workers.
हल्दर ने आरोप लगाया कि जब वे चुनाव प्रचार से लौट रहे थे तब कुछ लोगों ने उन्हे घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्हें डायमंड हार्बर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे दीपक हल्दर
बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले ही हल्दर टीएमसी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें डायमंड हार्बर से अपना प्रत्याशी घोषित किया था। हल्दर ने आरोप लगाया था कि उन्हें जनता के लिए कार्य करने से रोक जा रहा है, जिस कारण वे टीएमसी से अलग हो रहे हैं।
बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से हल्दर पर हुए हमले की निंदा की है। अर्जुन सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि हल्दर पर हमला करने वाले लोग अभिषेक बनर्जी के पाले हुए टीएमसी के गुंडे हैं। अभिषेक बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और डायमंड हार्बर उनका गढ़ माना जाता है। TMC पर उनका नियंत्रण होने के कारण भाजपा अक्सर ‘भाईपो (भतीजा) राजनीति’ का आरोप लगाती रही है।
इससे पहले बंगाल में भाजपा की वरिष्ठ नेता लॉकेट चटर्जी पर हमला हुआ था। पूर्व क्रिकेटर और भाजपा प्रत्याशी अशोक डिंडा भी एक हमले में घायल हो गए थे। इसके अलावा नंदीग्राम में ममता बनर्जी के विरुद्ध चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशी शुभेन्दु अधिकारी के काफिले पर भी हमला हुआ था। हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बंगाल में भाजपा के 130 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।
असम में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। ऐसे में वहाँ माहौल बिगाड़ने के लिए रांगिया जिले के गोरुकुची क्षेत्र में असामाजिक तत्वों ने सड़क के किनारे पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया। घटना 1 अप्रैल सुबह की है। उस दौरान विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण के तहत मतदान चल रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी झंडा बाँस के डंडे से बाँध कर मिट्टी के ऊँचे टीले पर लगाया गया था।
इसको लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। पार्टियाँ एक-दूसरे को इसके लिए आरोपी ठहराने में जुटी हुई हैं। विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह इसके लिए मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। जबकि यह किसने किया, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
लोगों ने पाकिस्तानी झंडा जला निकाला गुस्सा
इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि गोरुकुची के लोगों के बीच सांप्रदायिक फूट डालने के लिए यह घटिया काम किया गया है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि रांगिया के लोग हर समुदाय के साथ शांति के साथ रहते हैं। इसलिए पाकिस्तानी झंडे वाली बात वोटों के लिए लोगों को बाँटने की साजिश मात्र है।
Enemy inside. A Pakistani flag found unfurled on a small bamboo stick at Rangia Assam by some anti-social, anti-india people. Flag was set on fire by angry local residents. Local residents came out and vent out their anger by shouting “#Pakistan Murdabad”. pic.twitter.com/JkPouzftk7
— Nandan Pratim Sharma Bordoloi ?? (@NANDANPRATIM) April 1, 2021
एक स्थानीय नागरिक ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “जब हम यहाँ आए तो यह झंडा लहरा रहा था। हम रांगिया के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि कौन सी पार्टी इस तरह का काम कर सकती है।”
पाकिस्तानी झंडा मिलने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इस झंडे को जला दिया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
#VIDEO | A Pakistani flag was found unfurled in Gorkuchi area of Rangia, #Assam.
गौरतलब है कि रांगिया कामरुप जिले में स्थित छोटा सा गाँव है। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहाँ की जनसंख्या 26,389 है। यह स्थान श्रीपुर देवालय मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि देवी सती के शरीर का भाग यहाँ गिरा था। तभी से यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है।
लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए गुजरात विधानसभा ने नया बिल पास किया है। ‘गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम 2021’ गुरुवार (1 अप्रैल 2021) को सदन में पास हुआ। इस बिल में शादी के जरिए जबरन धर्मांतरण या इस तरह की शादी में सहयोग करने पर दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई अपने पूर्वजों के धर्म में वापसी करना चाहेगा तो उसमें यह बिल बाधक नहीं होगा।
इस बिल में अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा और विवाह द्वारा धोखाधड़ी या जबरन धर्म परिवर्तन के लिए अधिकतम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। यह बिल गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट-2003 में संशोधन कर राज्य सरकार लेकर आई है।
Gujarat Freedom of Religion (Amendment) Bill, 2021 has been passed with majority in Gujarat Vidhan Sabha today: Gujarat Home Minister Pradipsinh Jadeja pic.twitter.com/vLxuZFtUIh
गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने बताया कि नए बिल में बहला-फुसलाकर, धमकी, लालच और भय दिखाकर अन्य धर्म की युवती से विवाह और धर्मांतरण के लिए 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। इस तरह के मामलों में 2 लाख रुपए जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। नाबालिग और अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में 7 साल की सजा हो सकती है।
सदन में बिल को पेश करते हुए गृह मंत्री जडेजा ने कहा कि यह कानून हिन्दू लड़कियों को धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह के कुचक्र से बचाने के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दू लड़कियों से शादी करने और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय माध्यमों से फंडिंग हो रही है। गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी कहा कि यह कानून किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं बनाया गया है। यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।
गौरतलब है कि विधानसभा में ही कॉन्ग्रेस विधायक इमरान खेडावाला ने इस बिल की प्रति फाड़ डाली थी। कॉन्ग्रेस MLA ने इसे बीजेपी का नया हथकंडा बताते हुए कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। खेडावाला ने यह भी दावा किया कि विधेयक में जिहाद शब्द का इस्तेमाल कर एक समुदाय को निशाना बनाया गया है।
खेडावाला ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह शादी से पहले या धोखे से करवाए गए जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं देते। उनके अनुसार इस कृत्य के लिए विधेयक में जितनी सजा लिखी है उससे ज्यादा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध के लिए सऊदी अरब के शरिया कानून जैसी सजाएँ होनी चाहिए।
लव जेहाद के विरुद्ध इस तरह क कानून बनाने वाला गुजरात तीसरा राज्य है। इससे पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भी लव जेहाद को रोकने के लिए कानून बना चुके है। उत्तर प्रदेश में फरवरी में धर्मांतरण विरोधी बिल राज्य विधानसभा द्वारा पास कर दिया गया था। मध्य प्रदेश में भी हाल ही में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हुआ है।
शायर मुनव्वर राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया है। मुनव्वर राणा की बेटी सौम्या ने गुरुवार को बताया कि यूरिन में इन्फेक्शन की वजह से उनके पिता की तबीयत पिछले दिनों ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें मंगलवार को दिल्ली एम्स ले जाया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंभीर हालत होने के चलते शायर का इलाज लगातार डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है। बताया जा रहा है कि 68 वर्षीय शायर राणा गले के कैंसर से भी पीड़ित हैं। साल 2017 में उनके सीने में तेज दर्द उठा था। उनके फेफड़ों और गले में इंफेक्शन भी हुआ था, जिसके बाद उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था।
राणा के घुटने का भी इलाज चल रहा है। पिछले 7 सालों में कई बार उनके घुटने का ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। बता दें कि राणा को 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
वैसे मुनव्वर राणा हाल के समय में अपनी शायरी से ज्यादा हिंदुओं और मोदी सरकार से घृणा की वजह से चर्चा में रहे हैं। इसी साल जनवरी में किसानों को उकसाने की कोशिश करते हुए उन्होंने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा था, “इस मुल्क के कुछ लोगों को रोटी तो मिलेगी, संसद को गिरा कर वहाँ कुछ खेत बना दो। अब ऐसे ही बदलेगा किसानों का मुकद्दर, सेठों के बनाए हुए गोदाम जला दो। मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, गर्दन को उड़ाओ, मुझे या जिंदा जला दो।”
इसी तरह बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद उन्होंने ओवैसी को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। इसी तरह फ्रांस में शिक्षक का गला रेतने वाले हमलावर का बचाव करते हुए कहा था, “अगर उसकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता। किसी को इतना मजबूर न करो कि वह कत्ल करने के लिए तैयार हो जाए।”
भारत के साथ व्यापार को लेकर खुद ही फैसले लेकर खुद ही उसे पलट रहे पाकिस्तान को अब संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से ‘डबल झटका’ मिला है। पहला, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की मेजबानी वाली ‘क्लाइमेट लीडर्स समिट’ में पाकिस्तान को न्योता नहीं दिया गया है। दूसरा, US क्लाइमेट एन्वॉय जॉन केरी अपने एशिया ट्रिप में भारत तो आएँगे, लेकिन पाकिस्तान का दौरा नहीं करेंगे।
क्लाइमेट समिट अप्रैल 22-23, 2021 को होना है। ये समिट वर्चुअल रूप से ही होगा। इसमें जलवायु संकट के लिए किए जा रहे प्रयासों में तेज़ी लाने पर चर्चा की जाएगी। दुनिया भर के 40 वैश्विक नेता इस समिट का हिस्सा बनेंगे। भारत के अलावा बांग्लादेश भी इसमें शामिल होगा, लेकिन पाकिस्तान नहीं। इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में ‘UN क्लाइमेट चेन्ज कॉन्फ्रेंस (COP26)’ का आयोजन भी होना है।
क्लाइमेट चेन्ज के दुष्प्रभावों के मामले में पाकिस्तान दुनिया का 5वाँ सबसे कमजोर मुल्क है, लेकिन इसके बावजूद उसे न्योता न मिलने से वहाँ के नेता और अधिकारी बौखलाए हुए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफिज चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान के ‘बिलियन ट्री सुनामी’ प्रोजेक्ट को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रशंसा मिली। उन्होंने कहा कि इस समिट में वो देश शामिल हो रहे हैं, जो 80% कार्बन एमिशन के लिए जिम्मेदार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान मुद्दे को छोड़ दें तो पाकिस्तान का अमेरिका के लिए कोई महत्व नहीं है। इसीलिए, विश्व के इन 40 नेताओं में इमरान खान का नाम शामिल नहीं है। पाकिस्तान द्वारा तालिबान को समर्थन देने से भी अमेरिका खफा है। पाकिस्तान को अमेरिका ने कड़ा सन्देश भी दिया है। स्पेशल एन्वॉय जाल्में ख़लीलजाद ने भी अपने पिछले इस्लामाबाद दौरे में विदेश मंत्री की जगह पाकिस्तान के सेना प्रमुख से मुलाकात की थी।
Looking forward to meaningful discussions with friends in the Emirates, India, and Bangladesh on how to tackle the climate crisis. #RoadToGlasgowhttps://t.co/LDfAVWgg0G
— Special Presidential Envoy John Kerry (@ClimateEnvoy) March 31, 2021
अब अमेरिकी राजदूत जॉन केरी भारत और बांग्लादेश आ रहे हैं, लेकिन वो पाकिस्तान नहीं जाएँगे। अब पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय ये कह कर इज्जत बचा रहा है कि वो कार्बन एमिशन के मामले में काफी निचले पायदान पर है, इसीलिए इस समिट में उसे नहीं बुलाया गया। पाकिस्तान का कार्बन एमिशन 1% से भी कम है। भारत पर 2050 तक नेट जीरो एमिशन लक्ष्य का दबाव भी है। केरी का दौरा गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) से शुरू हुआ।
इस दौरान उन्हें UAE, भारत और बांग्लादेश जाना है। 9 दिनों तक चलने वाली इस दौरे में अबुधाबी, नई दिल्ली और ढाका उनका ठिकाना बनेगा। केरी ने तीनों देशों के दौरे को लेकर ट्वीट भी किया। भारत ने कहा है कि वो पेरिस समझौते का पालन करते हुए 2030 तक कार्बन एमिशन को 2005 के स्तर से 30-35% कम करेगा। साथ ही वो ग्रीन व रिन्यूएबल एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। भारत ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायन्स’ भी बनाया है।
बताते चलें कि पाकिस्तान की सरकार वहाँ की इस्लामी कट्टरवादियों के सामने झुक गई है। 1 दिन पहले ही वहाँ की केंद्रीय कैबिनेट ने ‘इकोनॉमिक कोआर्डिनेशन कमिटी (ECC)’ के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें भारत से कॉटन और शुगर इम्पोर्ट करने की बात कही गई थी। उससे 1 दिन पहले ही पाकिस्तान ने भारत से होने वाले व्यापार पर से पाबंदी हटाई थी। 2019 में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने बौखलाहट में ये निर्णय लिया था।