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क्रुणाल पांड्या ने बनाया सचिन-कोहली से भी तेज रिकॉर्ड: डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी, भावुक हुए हार्दिक पांड्या

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट और टी20 सीरीज के बाद अब वनडे सीरीज का पहला मुकाबला भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जा रहा है। जिसमें अपने डेब्यू वनडे मैच में खेल रहे क्रुणाल पांड्या ने तूफानी पारी से इतिहास रच डाला है।

क्रुणाल पांड्या ने भारत के लिए नंबर 7 पर खेलते हुए तेजतर्रार अर्धशतक जड़ा। जिसके चलते वो ODI क्रिकेट के डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी जड़ने वाले दुनिया के एकलौते बल्लेबाज बन गए हैं।

दरअसल मैच के दौरान 41वें ओवर में जब क्रुणाल के छोटे भाई हार्दिक पांड्या 1 रन बनाकर आउट हो गए, उसके बाद पहली बार वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्ला लेकर मैदान में क्रुणाल पांड्या उतरे और शुरू से ही दमदार शॉट्स लगाते चले गए।

रिजल्ट ये रहा कि महज 26 गेंदों में 7 चौकों और 2 छक्के की मदद से उन्होंने अपनी फिफ्टी पूरी कर डाली। इस तरह उनके द्वारा खेली गई ये तेजतर्रार पारी किसी खिलाड़ी द्वारा वनडे क्रिकेट के डेब्यू मैच में अभी तक की सबसे तेज फिफ्टी बन गई। जबकि ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकलौते बल्लेबाज बन गए हैं।

क्रुणाल को उनके छोटे भाई हार्दिक पंड्या ने डेब्यू कैप थमाई। 29 साल के क्रुणाल इससे पहले टी20 इंटरनैशनल मैच खेल चुके हैं। क्रुणाल ने 18 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 121 रन बनाने के साथ साथ कुल 14 विकेट चटकाए हैं। क्रुणाल डेब्यू कैप हासिल कर भावुक हो गए। कैप हासिल कर क्रुणाल ने आसमान की ओर देखते हुए पिता को याद किया। टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वसीम जाफर ने फोटो ट्वीट कर लिखा, ‘मेरी आँखों में कुछ है’।

वहीं भारत के लिए वनडे क्रिकेट में डेब्यू करते हुए फिफ्टी जड़ने वाले क्रुणाल पांड्या 7वें बल्लेबाज बन गए हैं। इस रिकॉर्ड में रॉबिन उथप्पा, रविन्द्र जडेजा और केएल राहुल जैसे बल्लेबाज शामिल हैं। वहीं वनडे क्रिकेट में डेब्यू मैच में नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए फिफ्टी जड़ने वाले क्रुणाल पांड्या तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इस लिस्ट में सबा करीम और रविन्द्र जडेजा शामिल हैं। 

मैच की बात करें तो शुरू में शिखर धवन के 98 और कप्तान कोहली के 56 रनों की पारी के बाद अंत में क्रुणाल पांड्या 58 रन और केएल राहुल के 62 रनों की नाबाद पारी के बदौलत भारत ने इंग्लैंड को जीत के लिए 318 रनों का विशाल लक्ष्य दिया है।

जनवरी में हुआ था पांड्या ब्रदर्स के पिता का निधन

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में ही क्रुणाल और हार्दिक पांड्या के पिता का निधन हार्ट अटैक से हो गया था। उस समय क्रुणाल पांड्या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए बड़ौदा टीम के साथ थे और वह कप्तान थे। पिता के बारे में खबर मिलते ही वह टूर्नामेंट छोड़कर घर के लिए रवाना हो गए थे। पांड्या ब्रदर्स को उनके पिता ने क्रिकेट खेलने में काफी मदद और सपोर्ट किया था।

‘मुसलमान के हिंदू पूर्वजों ने 200 साल पहले मंदिर निर्माण में मदद की होगी… लेकिन कोई रिकॉर्ड नहीं: यति नरसिंहानंद सरस्वती

हाल ही में गाजियाबाद के डासना में एक नाबालिग लड़के आसिफ की पिटाई हुई, जिसके बाद दावा किया गया कि वो मंदिर में पानी पीने गया था। हालाँकि, एक व्यक्ति ने इस पूरे नैरेटिव पर तथ्यों से तगड़ा प्रहार किया। डासना में जब जात-पात या आस-पड़ोस की लड़ाई होती है तो एक ही व्यक्ति का समझौता अंतिम माना जाता है, यति नरसिंहानंद सरस्वती का।

इस घटना के बाद कई मुस्लिमों ने दावा किया कि उनके पूर्वजों ने मंदिर के निर्माण में मदद की थी। हालाँकि, मंदिर के मुख्य पुजारी ने अब दावा किया है कि उन्होंने मंदिर के अधिकांश हिस्सों का निर्माण किया है। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने यह भी दावा किया कि स्थानीय मुसलमानों के पूर्वजों ने शायद 200 साल पहले मंदिर के निर्माण में मदद की थी, जब वो हिंदू थे, मुस्लिम में कन्वर्ट नहीं हुए थे।

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने दावा किया कि उनके पास मंदिर को दिए जाने वाले सभी दान का रिकॉर्ड है और उनमें से कोई भी स्थानीय मुस्लिम आबादी से नहीं है। उन्होंने कहा, “स्थानीय मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे और उन्होंने शायद 200 साल पहले मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था, मगर किसी के पास भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। मेरे पास इस मंदिर के लिए किए गए प्रत्येक दान का विवरण है और मैं गारंटी दे सकता हूँ कि उनमें से कोई भी स्थानीय मुस्लिम आबादी से नहीं है।”

मंदिर परिसर के अंदर मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले नए बोर्ड के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह बोर्ड हमेशा के लिए रहेगा। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश करने से रोका नहीं जाएगा, यह बोर्ड केवल उन लोगों के लिए है, जिनका धार्मिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।”

बता दें कि मंदिर के गेट पर पहले से भी एक बड़ा बोर्ड लगा दिया गया है। जिस पर लिखा है, “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”

गौरतलब है कि डासना देवी मंदिर पौराणिक समय से महाभारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहाँ पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय बिताया था। इस मंदिर पर जब हमला हुआ था तो यहाँ पर देवी देवाताओं की मूर्तियों को मंदिर परिसर में बने एक तालाब में छुपा दिया गया था।

नवरात्र पर्व के मौके पर अष्टमी और नवमी के दिन हजारों की संख्या में लोग ऐतिहासिक महत्व वाले डासना स्थित प्राचीन देवी में दर्शन के लिए आते हैं। परिवार के लोगों की सुख शांति के लिए प्रचंड चंडी देवी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि करीब पाँच हजार साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव, नौ दुर्गा, सरस्वती, हनुमान की मूर्ति स्थापित हैं।

बदायूँ में अर्धनग्न अवस्था में मिला साधु का शव: चेहरा कुचलकर की गई बुरी तरह हत्या, प्राइवेट पार्ट भी जलाया

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में एक साधु की हत्या करके उसकी लाश को सड़क पर फेंक दिया गया। घटना उझानी क्षेत्र की है। मंगलवार की सुबह ही गाँव के एक व्यक्ति माखनलाल के घर के बाहर साधु का नग्न शव मिला।

मीडिया खबरों के अनुसार उस साधु के सिर को बहुत बुरे तरीके से किसी भारी वस्तु से कुचला गया और उनके प्राइवेट पार्ट को भी जलाया गया है, अर्धनग्न और अधजली अवस्था में उनका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इस्लामनगर का निवासी था साधु

शव मिलने के पश्चात जब पुलिस द्वारा आसपास के गाँवों के लोगों से शिनाख्त की गई तब यह जानकारी मिली कि साधु का नाम रामचन्द्र कश्यप है और वह इस्लामनगर क्षेत्र के सोहरा गाँव के निवासी थे। वह उझानी गाँव कैसे पहुँचे, इसकी जानकारी उस साधु के परिवार वाले भी नहीं दे पा रहे हैं।

जिस माखनलाल के घर के बाहर साधु का शव मिला, वह किसी दूसरे घर में छिपा हुआ था। ऐसे में पुलिस शक के आधार पर उससे भी पूछताछ कर रही है।

परिजनों के अनुसार रामचन्द्र ने घर-गृहस्थी छोड़ दी थी और सन्यासी बनकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है।

एसपी सिटी प्रवीण सिंह चौहान ने बताया है कि मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।  

AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2 साल की जेल: AIIMS स्टाफ पर किया था हमला, जज ने नहीं दी राहत

दिल्ली की एक अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के सुरक्षा कर्मचारियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के लिए AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2016 के एक मामले में दोषी बरकार रखा। उन्हें जो 2 साल जेल की सजा सुनाई गई थी, उसे जज ने बरकरार रखा।

जज के फैसले के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने सोमनाथ भारती को हिरासत में ले लिया है।

अदालत ने आईपीसी की धारा 149 और 147 के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत भारती की सजा को बरकरार रखा। हालाँकि, AAP विधायक को IPC के 323 और 353 के आरोपों से बरी कर दिया गया।

गौरतलब है कि जनवरी 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मारपीट के मामले में दोषी ठहराया था। दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार पांडेय ने 2016 में दर्ज किए गए इस मामले के 4 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया। आप विधायक पर एम्स के सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट का आरोप है। अदालत ने भारती को दो साल जेल की सजा सुनाई थी।

एम्स के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 2016 में सोमनाथ भारती पर सुरक्षाकर्मी से मारपीट का आरोप लगाते हुए हौज ख़ास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोमनाथ भारती पर दंगे भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया था। 

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस ने आम आदमी पार्टी विधायक को रायबरेली जाते हुए गिरफ्तार किया था। इस दौरान सोमनाथ भारती ने तैश में आकर पुलिसकर्मियों से बहस शुरू कर दी थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने आप विधायक पर काली स्याही फेंक दी थी। इस घटना के बाद सोमनाथ भारती ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्यमंत्री आदित्यानाथ को सरेआम धमकी देना शुरू कर दिया। 

स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की एक वीडियो में आप विधायक कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

असम में भाजपा ने घोषणा पत्र में दिया NRC को दुरुस्त करने का भरोसा: इन 10 बड़े वादों के साथ पार्टी उतरी चुनाव में

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आज (मार्च 23, 2021) असम में पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया। भाजपा की ओर से उन्होंने आश्वासन दिया कि वह राज्य में सही NRC पर काम करेंगे जिससे असम की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। मौके पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द सोणोवाल और राज्य मंत्री हिमन्त बिस्वा शर्मा भी मौजूद रहे।

घोषणा पत्र लॉन्च करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वादा किया कि वह असम की संस्कृति की रक्षा, असम की सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं और घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस उनके देश भेजकर रहेंगे।

मीडिया से बात करते हुए नड्डा ने कहा, “हम असली भारतीयों की रक्षा करेंगे और घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजकर असम सभ्यता को सुरक्षित करेंगे।”

अपने संकल्प पत्र में भाजपा ने 10 वादे किए। पार्टी की ओर से नड्डा ने कहा कि यदि उन्हें दोबारा राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिला तो वह अपने सभी वादों को पूरा करेंगे। घोषणा पत्र लॉन्च करते हुए नड्डा ने बताया कि पिछले 5 साल पार्टी का मकसद जाति, माटी और बेटी को सशक्त करना रहा। अब उनका वादा है कि वह राज्य में 2 लाख सरकारी, 1 लाख प्राइवेट सेक्टर में जॉब मार्च 2022 तक निकालेंगे।

नड्डा ने कहा, “ये प्रतिबद्धताएँ, विकास, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण के लिए हमारी दिशा है, और अधिक शुरुआतें समावेशी विकास के लिए हमारे उद्देश्य का एक हिस्सा हैं।”

आइए जानते हैं कि भाजपा ने असम चुनाव में कौन से 10 वादे किए हैं:

  • 1. मिशन ब्रह्मपुत्र- बाढ़ समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के आसपास बड़े जलाशयों का निर्माण करवाएगी। 
  • 2. ओरुनोदोई योजना: इस योजना के तहत 30 लाख परिवारों को प्रतिमाह 3,000 रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी।
  • 3. नामघरों को ढाई लाख रुपए की आर्थिक मदद, अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाया जाएगा।
  •  4. शिक्षा: सरकारी स्कूलों में मुफ्त में शिक्षा, आठवीं के बाद छात्राओं साइकिल दी जाएगी।
  • 5. एनआरसी लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होगा और घुसपैठ भी रोकी जाएगी।
  • 6. परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • 7. आत्मनिर्भर असम- प्रदेश में अलग अलग क्षेत्रों को मदद दी जाएगी और उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा।
  • 8. दो लाख लोगों को सरकारी नौकरी और प्राइवेट सेक्टर में आठ लाख नई नौकरियाँ देने का भी वादा किया गया। इसके अलावा पार्टी ने असम को सबसे तेज जॉब क्रिएयर राज्य बनाने का वादा किया है।
  • 9. स्वामी विवेकानंद के नाम योजना- युवाओं को स्टार्टअप के लिए बढ़ावा मिलेगा, इसके तहत 10 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य होगा।
  • 10. आखिरी संकल्प के मुताबिक असम के लोगों को मजबूत करने के इरादे से जमीन के स्वामित्व का हक देने का वादा है।

बता दें कि असम में 27 मार्च से चुनाव की शुरुआत होगी। 3 चरणों में इन्हें संपन्न कराया जाएगा। परिणाम 2 मई को आएँगे। इससे पहले साल 2016 में भाजपा ने असम में ऐतिहासित जीत हासिल की थी। तब, 15 साल से सत्ता में मौजूद कॉन्ग्रेस से भाजपा ने सत्ता हासिल की थी। भाजपा और उसके गठबंधन वाली पार्टियों ने 86 सीटों पर विजय पाई थी। इनमें से 60 स्पष्ट तौर पर अकेले बीजेपी को मिली थी। एजीपी ने 14 सीट जीतीं थीं और बीपीएफ ने 12, इस बार बीपीएफ ने कॉन्ग्रेस से हाथ मिला लिया है। भाजपा का गठबंधन सिर्फ़ असम गण परिषद और यूनाइटिड पीपुल्स पार्टी लिबरल से ही है।

बंगाल: शाह ने TMC पर लगाया ‘अम्फान राहत राशि’ हड़पने का आरोप, कहा- SIT बनाकर दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (मार्च 23, 2021) को पश्चिम बंगाल के गोसाबा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंफान तूफान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी, लेकिन यहाँ के लोगों को कुछ नहीं मिला। भतीजा एंड कंपनी ये पैसा खा गई। भाजपा सरकार आने के बाद एसआईटी बनाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर केंद्र की योजनाएँ राज्य में लागू ना करने को लेकर भी निशाना साधा। अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी जनता की बजाय केवल अपने भतीजे की भलाई के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “ममता दीदी भतीजे को मुख्यमंत्री बनाने में लगी हुई हैं। क्या आप उनके भतीजे को मुख्यमंत्री बनता देखना चाहते हैं? अगर नहीं तो भाजपा को वोट दें।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा सत्तारूढ़ तृणमूल के ‘गुंडों और सिंडिकेट’ का सामना करने को तैयार है। उन्होंने कहा, “हमें तृणमूल के इस सिंडिकेट शासन को खत्म करना है। हम इस संस्कृति को खत्म करेंगे।” 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज गंगासागर के पवित्र तीर्थ की इस भूमि पर आकर मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि कहा जाता है कि- सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार। इसके साथ ही उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की भूमि भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई। 

उन्होंने कहा कि हम नोबल प्राइज की तर्ज पर टैगोर प्राइज और ऑस्कर की तर्ज पर सत्यजीत रे प्राइज लाकर हम बंगाल के दो बेटों क श्रद्धांजलि देंगे। शाह ने कहा कि बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के विकास के लिए 115 स्कीम बनाई हैं। ममता दीदी ने गरीबों को लूटने के लिए 115 स्कैम बनाए हैं। गरीबों के हक का पैसा कट मनी वाले ले जाते है। इसे बंद करने का काम भाजपा की सरकार करेगी। अपने संबोधन में अमित शाह ने फिर दोहराया कि बीजेपी की सरकार राज्य में CAA लागू करेगी और शरणार्थियों को नागरिकता देगी।

ममता बनर्जी पर शाह ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने 282 में से 82 वादे भी पूरे नहीं किए। दीदी अपना हिसाब नहीं देती है, लेकिन इस बार आप टीएमसी का हिसाब कर देना। अमित शाह ने ऐलान किया कि बीजेपी की सरकार बनी तो हम एक ही साल में सुंदरवन को जिला बना देंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि आज 23 मार्च यानी शहीद दिवस है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी ने हँसते हँसते फाँसी का फँदा चूम कर, अपने प्राणों की आहुति माँ भारती को स्वतंत्र करने के लिए दी थी। मैं तीनों महान आत्माओं को श्रद्धांजलि देता हूँ।

‘अगर महिलाएँ और बच्चे शोर नहीं मचाते तो पूरी वाल्मीकि बस्ती को जला देती मुस्लिम भीड़’: सराय काले खाँ की काली रात

दिल्ली के सराय काले खाँ में एक दलित हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने अपने दूसरे 50 से अधिक मुस्लिम साथियों के साथ दलित बस्ती में घुस कर हमला कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने बस्ती में हमला कर के ईंट-पत्थर चलाए व चाकू-तलवार, लाठी-रॉड न जाने किन-किन हथियारों से हमला किया। मगर जब बस्ती के हिन्दुओं ने एकजुट होकर उनका प्रतिरोध किया तो वो भाग खड़े हुए।

चूँकि, यहाँ हमले के बाद, हिन्दू छत पर थे और हमलावर भीड़ नीचे गली में, फिर भी इससे पहले कि हिन्दू संभलते, बचाव और विरोध करते तब तक 30 से अधिक गाड़ियाँ थोड़ दी गई, जिसका दरवाजा खोल पाए या खुला मिला बस्ती में उस पर हमला किया। बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ गाड़ी तोड़ने के बाद उसी में से पेट्रोल निकालकर बस्ती जलाने की कोशिश में थे, मगर बस्ती के लोगों और महिलाओं की सक्रियता ने, उनके मदद के लिए खूब तेज शोर मचाने ने इस हादसे को होने से बचा लिया।

चश्मदीदों ने बताया कि शनिवार (मार्च 20, 2021) की रात लगभग 11 बजे 50-60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ आई। उनके हाथ में कई तरह के हथियार थे। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दोपहर के 12 बजे मुस्लिम लड़की की एक रिश्तेदार, जिसका नाम शबीना (पिता का नाम सुलेमान) था, ने बस्ती में आकर धमकी दी थी। उसने कहा था कि वो शाम में खून की होली खेलेगी, शाम के समय सेलेक्ट कॉलोनी थाने में भी लड़का और लड़की दोनों पर हमला करने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस ने समझा कर हटा दिया। लेकिन रात में सबीना ने अगुवाई करते हुए मुस्लिम भीड़ को बाल्मीकि बस्ती में लाई और इस भयावह घटना को अंजाम दिया गया।

मुस्लिम भीड़ लोगों के घर में घुसने लगी, दरवाजों को तोड़ा, महिलाओं के साथ बदतमीजी की गई, उन पर तलवार से हमला किया गया। मामले में फिलहाल अली, फैसल, हसन और अफरान नाम के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हमले में शामिल बाकी लोगों की अभी पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है, क्योंकि बताया जा रहा है कि इन लोगों को हमला करने के लिए बाहर से बुलाया गया था। 

उन्होंने बताया कि जब मुस्लिम भीड़ ने मस्जिद की तरफ से प्रवेश करते हुए चारो तरफ फैलकर पहले बस्ती घेर लिया और तोड़फोड़ करते हुए काफी पथराव करने लगे। तब वहाँ के लोगों को लगा अगर लड़े नहीं तो नहीं बचेंगे। सबने छतों से और बाहर निकलकर एकजुट होकर ललकारा तब CCTV और लोगों के छतों और गली में डट जाने से मुस्लिम भीड़ भाग खड़ी हुई। उन्हें पुलिस के आ जाने का भी डर था क्योंकि लोग लगातार दिल्ली पुलिस को कॉल कर रहे थे। लेकिन लगभग इस आधे में भी उपद्रवियों ने लगभग 30 गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया। वो लोग गाड़ियों की टंकी खोल कर आग लगाने की कोशिश कर रहे थे, बताया गया उनके एसिड भी था लेकिन लोग छतों से भारी चीज गली में फेंकने लगे थे जिससे मुस्लिमों को भागना पड़ा।

यह भी कहा जा रहा है कि गाड़ियों को गिराकर भागते समय भी कुछ लोगों ने तेजी से टंकियों से पेट्रोल निकालने की कोशिश की, ताकि बस्ती में आग लगा सकें, लेकिन बस्ती की महिलाओं और बच्चों की बहादुरी के सामने वो डर गए और भाग खड़े हुए। अगर वो पेट्रोल निकालने में कामयाब हो जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

बता दें कि दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया था। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया।

शादीशुदा जोड़े ने वीडियो जारी कर सुरक्षा की माँग की है। 22 वर्षीय युवक ने कहा कि उन्होंने मार्च 17 को अपनी मर्जी से शादी की है और लड़की भी बालिग है। युवक और युवती ने वीडियो जारी कर के सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि गली तहस-नहस कर दी गई है और धारदार हथियारों से किए गए वार में कई लोग घायल भी हुए हैं। युवक ने बताया कि उसके पिता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और ऐसी ही धमकियाँ उसे भी लगातार मिल रही है। युवक ने परिवार और खुद के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई।

औवैसी के साथी अब्बास की रैली में जाने पर इंडियन सेकुलर फ्रंट के नेता के घर में लगाया आग, TMC के गुंडों पर आरोप

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लड़ाई तेज होती जा रही है। रविवार (मार्च 21, 2021) को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के एक नेता के घर में आग लगा दी गई। यह घटना भांगोर थाना क्षेत्र के शापा में हुई।

आईएसएफ नेता अजीत मोल्ला पार्टी प्रमुख अब्बास सिद्दीकी की रैली में भाग लेने के बाद घर लौट रहे थे, इसी दौरान उनके घर में आग लग गई। पुलिस ने बताया कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

हाल ही में इंडियन सेकुलर फ्रंट ने राज्य में लगातार हमले के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी पर दोष लगाया, जबकि TMC ने आरोपों का खंडन किया है। इस मामले में भी आईएसएफ ने आरोप लगाया कि अजीत मोल्ला के घर को कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के ‘गुंडों’ ने आग लगा दी क्योंकि उन्होंने रविवार को अब्बास सिद्दीकी की रैली में भाग लिया था। 

पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा कि उन्होंने घटना के संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और मामला दर्ज किया है। उसी रात, पुलिस ने जिले के बरुईपुर थाना क्षेत्र में चलतबेरिया से 20 क्रूड बम भी बरामद किए।

गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में पश्चिम बंगाल के विवादित मौलवी अब्बास सिद्दीकी पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमला बोला था। फुर्फूरा शरीफ पीरजादा को दक्षिण 24 परगना के भांगर क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेर कर पीटा था। वहाँ वह अपने एक अनुयायी से मिलने गया था।

इस घटना का एक वीडियो क्लिप भी सामने आया था। इसमें टीएमसी गुंडों को सिद्दीकी को धमकाते, गाली देते हुए देखा गया। इसके अलावा टीएमसी के गुर्गों ने दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ कर भी घर में घुसने की कोशिश की।

पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस के खेमे में बेचैनी है, क्योंकि ममता बनर्जी ने पिछले एक दशक में मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर खासी सक्रियता दिखाई है। अब पश्चिम बंगाल में ओवैसी को बंगाल के सबसे प्रभावशाली मौलानाओं में से एक अब्बास सिद्दीकी का साथ मिल रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि 2011 में मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही ममता बनर्जी ने साढ़े 3 दशक से सत्ता पर काबिज वामपंथियों को हराया था।

मौलाना अब्बास सिद्दीकी पहले से ही विवादित चेहरा रहे हैं। अप्रैल 2020 में उन्होंने कहा किया था कि अल्लाह कोई ऐसा वायरस भेज दे, जिससे भारत में 20-50 करोड़ लोग मारे जाएँ। जब CAA को लेकर उपद्रव हो रहा था, तो उसने धमकी दी थी कि अगर इस कानून को बंगाल में वापस नहीं लिया गया तो वो कोलकाता एयरपोर्ट को ठप्प कर देगा।

‘गैर-मुस्लिमों को अल्लाह शब्द के इस्तेमाल की इजाजत नहीं, किसी ईश्वर की तुलना अल्लाह से नहीं हो सकती’: अदालत में सुनवाई

मलेशिया में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या ‘अल्लाह’ शब्द की पवित्रता को बचाए रखने के लिए नॉन-मुस्लिमों द्वारा इसके प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगा दी जाए? वहाँ की अदालत में इसी तरह का मामला चल रहा है, जिस पर मलेशिया के 13 राज्यों में से एक सेलंगोर के सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘अल्लाह’ शब्द को लेकर हाईकोर्ट द्वारा नॉन-मुस्लिमों पर प्रतिबंध न लगाए जाने पर आपत्ति जताई।

शरफुद्दीन ने ‘सेलंगोर इस्लामी रिलीजियस काउंसिल’ से कहा है कि वो इस मामले में हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा कि ‘अल्लाह’ शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता – अपने इस स्टैंड पर वो कायम हैं। उनके राज्य ने 2010 में एक फतवा जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अल्लाह की तुलना किसी भी दूसरे मजहब/समुदाय के ईश्वर या देवी-देवता से नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर वो इस्लाम की पवित्रता और ‘अल्लाह’ शब्द के सम्मान को बरक़रार रखने में कामयाब नहीं होते हैं तो फिर सेलंगोर में उनके इस्लाम का मुखिया होने का औचित्य ही क्या रह जाता है? उन्होंने कहा कि लोगों को न सिर्फ एक-दूसरे के मजहबों का सम्मान करना चाहिए, बल्कि किसी अन्य मजहब के संवेदनशील मुद्दों को छूने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक एकता पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

साथ ही उन्होंने चेताया कि जब मुस्लिम अन्य मजहबों में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं तो अन्य मजहब वाले भी मुस्लिमों और इस्लाम की इज्जत करें, खासकर ‘अल्लाह’ शब्द का सम्मान करें। मलेशिया में दिसंबर 5, 1986 को गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि ‘अल्लाह, बैतुल्लाह और सोलत’ – ये तीन शब्द नॉन-मुस्लिमों की जुबान पर नहीं आने चाहिए। हाईकोर्ट ने इसे अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।

अब फिर सरकार ने अदालती आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। जोहोर के सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर ने भी इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शरफुद्दीन ने सभी राज्यों को ऐसा ही करने को कहा है। सरकारी आदेश को रद्द करने का आदेश जज नूर बी आरिफ़िन ने दिया था। अब मलेशिया के दो इस्लामी संस्थाओं को सुनवाई में पार्टी बनाया गया है, जिनके मौलाना कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।

फिल्मी नहीं, फैमिली वाला है ये बॉलीवुड: जो कंगना ने कहा, शनाया के लिए करण जौहर ने वही दिखाया

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) का मसला खूब उछला था। खासकर कंगना रनौत इसको लेकर बेहद मुखर थीं। उनके निशाने पर खासतौर पर ​थे निर्माता-निर्देशक करण जौहर। वही करण जौहर अब शनाया कपूर के तौर पर एक और स्टार किड्स की लॉचिंग की तैयारियों में हैं।

सुशांत की मौत के बाद कंगना ने कहा था कि नेपोटिज्म उन वजहों में एक है जिसके चलते इतने प्रतिभाशाली एक्टर को दुनिया छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सुशांत की मौत के मामले में कई बड़ी हस्तियों को मूवी माफिया कहकर घेरा था। कंगना का मानना रहा है कि करण जौहर बाहरी टैलेंट के प्रति असहिष्णु हैं और नेपोटिज्म की अगुवाई करते हैं।

शनाया कपूर को लॉन्च करने का ऐलान कर करण ने एक तरह से इसकी पुष्टि ही की है। शनाया, संजय कपूर की बेटी और अनिल कपूर की भतीजी हैं। करण ने शनाया की एक वीडियो शेयर करके बताया है कि इस जुलाई से शनाया बॉलीवुड प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू करेंगी।

5 years of Student Of The Year:
स्टूडेंट ऑफ द ईयर में आलिया भट्ट और वरुण धवन को किया गया था लॉन्च

वैसे शनाया पहली स्टार किड नहीं हैं, जिन्हें करण लॉन्च करने जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट और डेविड धवन के बेटे वरुण धवन को ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के जरिए लॉन्च किया था। फिर चंकी पाडे की बेटी अनन्या पांडे को उसी फिल्म के दूसरे पार्ट में लॉन्च किया।

स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 में अनन्या पांडे

श्रीदेवी की बेटी जाह्ववी कपूर को धाकड़ फिल्म के जरिए बॉलीवुड में भी वही लाए थे। आलोचकों का कहना है कि करण जिस तरह से स्टार किड्स को लॉन्च करते हैं उसी आसानी से बाहर की प्रतिभाओं को मौका नहीं मिलता है।

शनाया के अलावा अभी और कुछ स्टार किड्स हैं जिनको ​जल्द ही लॉन्च किए जाने की अटकलें हैं। इस सूची में सबसे पहले शाहरुख खान की बेटी सुहाना और बेटे आर्यन खान हैं। दोनों की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग हैं और करण जौहर से अच्छे रिलेशन भी। चर्चा है कि इनमें से आर्यन को भी करण जौहर ही लॉन्च करेंगे। संभवत: वह स्टूडेंट ऑफ द ईयर 3 से बॉलीवुड करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

सुहाना खान और आर्यन खान

इसी प्रकार चंकी पांडे के भतीजे अहान पांडे भी इस साल फिल्मों में नजर आने वाले हैं। उनके करियर की शुरुआत यशराज फिल्म से हो सकती है।

जाह्नवी कपूर और बहन खुशी कपूर

वहीं श्रीदेवी की दूसरी बेटी खुशी के भी बॉलीवुड में आने के चांस ज्यादा हैं। बस देखना ये है कि क्या उनको भी करण ही लॉन्च करेंगे, जैसे जान्हवी को किया था या कोई और प्रोडक्शन हाउस इसकी जिम्मेदारी लेगा।।

मालूम हो कि शनाया कपूर के बॉलीवुड एंट्री को लेकर नेपोटिज्म का मुद्दा फिर तूल पकड़ चुका है। करण जौहर को स्टार किड्स का गॉडफादर कहा जा रहा है। वहीं शनाया के लुक्स से लेकर एक्टिंग स्किल पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।  लोगों का कहना है कि करण जौहर ने कंपनी ही इसलिए खोली है ताकि वह सभी स्टारकिड्स को एक्टर-एक्ट्रेस बना सकें।

अब जाहिर है कि सोशल मीडिया यूजर्स और कंगना रनौत के इल्जाम बेबुनियाद नहीं हैं। इतनी बड़ी तादाद में स्टार किड्स का बॉलीवुड में एंट्री पाना सवाल तो उठाता ही है कि क्या करण जैसे निर्देशकों के लिए अब एक्टर बनने की योग्यता स्टार किड होने तक सीमित रह गई है। अगर नहीं, तो सुशांत जैसे टैलेंट को नकारना या फिर कंगना रनौत की अंग्रेजी का मजाक उड़ाना कहाँ तक उचित है। करण के पुराने इंटरव्यू देख कर लगता है जैसे उनके लिए यह मुद्दा हँसी-मजाक की बात है। एक इंटरव्यू में करण को कहते हुए सुना जा सकता है कि नए टैलेंट को मौका देने का ठेका उन्होंने नहीं उठाया। उन्होंने कहा था, “मैं जो करना चाहता हूँ करूँगा। चाहे मैं अपने फूफे के बेटे को लॉन्च करूँ या चाची के भतीजे को लॉन्च करूँ।”