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नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने BJP नेता का सिर फोड़ा, MP अर्जुन सिंह के घर पर बमबाजी: TMC पर आरोप

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले हिंसा तेज हो गई है। नंदीग्राम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पदयात्रा पर हमला किया गया। वहीं नॉर्थ 24 परगना के भाटपाड़ा में बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय पर बमबारी की गई। बीजेपी (BJP) ने दोनों घटनाओं के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को जिम्मेदार ठह​राया है। हालाँकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम के सोनचुरा में गुरुवार (18 मार्च 2021) को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की रैली थी। इस दौरान अचानक से हिंसा होने लगी। कुछ लोगों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीट दिया। आरोप है कि हमला करने वाले टीएमसी से जुड़े थे।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ममता बनर्जी को लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी की पदयात्रा शुरू होने के बाद बीजेपी युवा मोर्चा के नेता पर उनके सामने हमला किया गया। उन्होंने कहा कि मैं चुनाव आयोग से अर्धसैनिक बलों की तैनाती की अपील करता हूँ। रिपोर्ट में बताया गया है कि बीजेपी कार्यकर्ता का हमले में सिर फट गया।

नंदीग्राम वही सीट है जहाँ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं। यहीं नामांकन के बाद उनके पैर में चोट लगी थी, जिसे टीएमसी ने ‘हमले’ के तौर पर प्रचारित करने की कोशिश की थी। ममता का मुकाबला बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही ममता कैबिनेट और टीएमसी से इस्तीफा दिया था।

बंगाल के मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने कार्यकर्ताओं को काबू में नहीं रख पा रही है। इसकी वजह से बीजेपी के पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। उन्होंने इसे शुभेंदु बीजेपी बनाम पुरानी बीजेपी का झगड़ा बताया। हाकिम ने कहा कि बीजेपी राजनीति को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है। अपनी अंदरुनी लड़ाई छिपाने के लिए टीएमसी पर आरोप लगा रही है।

इधर भाटपाड़ा के जगदाल इलाके में बुधवार को अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय ‘मजदूर भवन’ को निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में करीब 15 जगहों पर टीएमसी कैडरों ने बम फेंके। सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया गया।

बीजेपी सांसद ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा है कि बम हमलों के बाद से स्थानीय लोग दहशत में है। उन्हें स्थानीय पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही।

एक अन्य ट्वीट में तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल पुलिस की मौजूदगी में हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर बम फेंके। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने कहा है कि इस घटना से चुनाव आयोग को अवगत कराया जाएगा।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी पर लगा है। बीते दिसंबर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले तक को निशाना बनाया गया था। वहीं गुरुवार को बंगाल के पुरुलिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन चुनावों में टीएमसी साफ हो जाएगी

इस्लामी आतंकवाद पर प्रश्नोत्तर को लेकर भड़की इस्लामी भीड़, प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला: तोड़े फर्नीचर, जलाई किताबें

राजस्थान में मजहब के नाम पर इस्लामी भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने का मामला सामने आया है। राजधानी जयपुर में एक मुस्लिम भीड़ एक किताब में प्रकाशित कंटेंट को लेकर इस कदर नाराज़ और आक्रोशित हो गई कि प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर ही हमला बोल दिया। ये घटना बुधवार (मार्च 16, 2021) को चारदीवारी क्षेत्र में स्थित संजीव प्रकाशन में शाम के समय हुई। वहाँ जम कर तोड़फोड़ मचाई गई।

उक्त प्रकाशन संस्थान द्वारा छापी गई 12वीं की एक पुस्तक में इस्लामी आतंकवाद को लेकर एक चैप्टर था, जिसके कारण सारा विवाद हुआ। हमलावरों के ऑफिस में रखे फर्नीचरों को तोड़ डाला और वहाँ रखी दूसरी किताबों को भी फाड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पर ज़रूर पहुँची, लेकिन उससे पहले हमलावर अपना काम करके फरार हो चुके थे। वो अपने साथ कई किताबें लूट कर भी ले गए।

इसके बाद इस्लामी समूह ऑफिस के बाहर आ गया और फिर वहाँ सारी किताबों को फाड़ कर रखा गया। फिर उसमें आग लगा दी गई। बेख़ौफ़ बदमाशों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। पब्लिशिंग मैनेजर विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर बवाल किया जा रहा है, जिसमें इस्लामी आतंकवाद के सवाल पर एक जवाब छपा था और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में भी वो प्रश्न आया था। उसका कंटेंट इस प्रकार है:

सवाल:इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते है?
जवाब:इस्लामी आतंकवाद इस्लाम का ही एक रूप है, जो पिछले 20-30 सालों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है। आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है। समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामी आतंकवाद का मुख्य लक्षण है। मजहब या अल्लाह के नाम पर आत्मघाती हमला और अत्यधिक बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली, और निर्मम नृशंस हत्याएँ करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया मजहबी व अलगाववादी श्रेणी में आता है

हालाँकि, ये हमला कंटेंट को हटाए जाने और किताबें बाजार से वापस लेने के बावजूद हुई है। पब्लिशिंग मैनेजर का कहना है कि कुछ दिनों पहले जब इस पर आपत्ति आई थी, तभी तमाम पुस्तकों को बाजारों से वापस उठवा लिया गया था और उक्त कंटेंट को हटा दिया गया था। शुक्ला ने कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचे, इसीलिए ऐसा किया गया। जबकि बाकी प्रकाशन संस्थानों की पुस्तकों में भी इस सवाल का जवाब यही है।

इतना ही नहीं, संजीव प्रकाशन संस्थान ने इसे लेकर लिखित में माफ़ी भी माँग ली थी। इसके बावजूद उन्हें कुछ दिनों पहले धमकी भरे फोन कॉल्स आए थे। पुलिस कोतवाली में शिकायत करने पर 2-4 जवान भी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए गए थे। दोपहर 3 बजे 4-4 लोग ऑफिस में आ धमके, जिनके साथ 30-40 और लोग थे जो बार खड़े थे। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

ये पूरा मामला 2017 का है। ये जवाब उसी साल छपा था। 4 साल बाद उस कंटेंट को लेकर प्रकाशन संस्थान के दफ्तर पर हमला हुआ। राजस्थान पुलिस द्वारा मुहैया कराए गए 3 सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में ‘संजीव प्रकाशन’ के दफ्तर पर इस्लामी आतंकवाद के उसी कंटेंट को लेकर हमला हुआ। कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान ने इस कंटेंट का मामला राजस्थान की विधानसभा में भी उठाया था और जवाबदेह लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस जाँच की बात कह रही है।

जहाँ आसमान से गिराए गए थे हथियार, वहाँ ममता पर बरसे PM मोदी: मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिजनों से भी मिले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (18 मार्च 2021) को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में रैली की। ममता बनर्जी सरकार की नाकामी गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार के अब गिनती के दिन बचे हैं। पुरुलिया वही जगह है, जहाँ 1995 में रूस के एक कार्गो प्लेन से हथियार गिराए गए थे।

रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस को भ्रष्टाचार का पर्याय बताते हुए कहा कि TMC का अर्थ ट्रांसफर माय कमीशन होता है, जबकि हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की बात करते हैं। यही हमारी और उनकी सोच का अंतर है।

ममता बनर्जी के ‘खेला होबे’ नारे पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा नारा है- विकास होबे। बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक मामले में आए फैसले का जिक्र करते हुए ममता को उनके बयान भी याद दिलाए। बंगाल के पुरुलिया में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में टीएमसी हाफ हो गई थी। इस बार वह पूरी तरह साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अपनी झल्लाहट उन पर निकाल रही हैं। लेकिन, हमारे लिए वह भारत की करोड़ों बेटियों में से एक हैं। उनका सम्मान हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

पुरुलिया की सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह पवित्र भूमि है। लेकिन आज यहाँ पानी तक की किल्लत हो गई है। पहले वामपंथियों ने यहाँ उद्योग-धंधे पनपने नहीं दिए। इसके बाद टीएमसी की उपेक्षा ने पुरुलिया की पहचान देश के सबसे पिछड़े इलाके के तौर पर बना दी है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने पुरुलिया को दिया- जल संकट। पुरुलिया को दिया- पलायन। इन लोगों ने पुरुलिया के गरीबों को दिया- भेदभाव भरा शासन।

PM मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में टूरिज्म की भरपूर सम्भावनाएँ हैं। बीजेपी की सरकार आने पर यहाँ के हैंडिक्राफ्ट को बढ़ावा दिया जाएगा। जल संकट का समाधान होगा। बंगाल के हर हिस्से को रेलवे और रोड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि 2 मई के बाद यहाँ बीजेपी सरकार बनेगी तो विकास में तेजी आएगी।

गौरतलब है कि बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएँगे।

AAP की चाटुकारिता, मोदी-विरोध में रवीश की सस्ती कविता: दिल्ली-बिल्ली कर गिराई पत्रकारिता की गिल्ली

“दिल्ली के पीछे एक दिल्ली, दिल्ली के आगे एक दिल्ली। बोलो कितनी दिल्ली? आगे-आगे दिल्ली, पीछे-पीछे दिल्ली। पीछे-पीछे दिल्ली, आगे-आगे दिल्ली। भीगी दिल्ली, भीगी बिल्ली। भीगी बिल्ली, भीगी दिल्ली। दिल्ली के पीछे पड़ गई दिल्ली। इचक दिल्ली, बीचक दिल्ली, दिल्ली ऊपर दिल्ली, इचक दिल्ली। दिल्ली बन गई बिल्ली। बिल्ली बिचक गई दिल्ली। एक बिल्ली के पीछे दिल्ली, एक दिल्ली के आगे बिल्ली। बोलो कितनी दिल्ली? हम बड़की दिल्ली, तुम छोटकी दिल्ली। हम छोटकी दिल्ली, तुम बड़की दिल्ली। खूब घूमाओ जनता को, जनता बन जाए भीगी बिल्ली।”

ये कोई सस्ता कवि-सम्मलेन के मंच पर कविता पढ़ रहा कोई सस्ता कवि नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चैनल पर प्राइम टाइम में खबर पढ़ रहा एक बहुत बड़ा पत्रकार है। NDTV पर रवीश कुमार ने कुछ इसी अंदाज़ में संसद में लाए गए उस विधेयक पर टिप्पणी की, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में सरकार से तात्पर्य होगा दिल्ली के उप-राज्यपाल से। वहीं सत्ताधारी आम आदमी पार्टी कह रही है कि ये चुनी हुई सरकार का अपमान है।

रवीश कुमार भला मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से न बोलें, ऐसा कैसे हो सकता है। उन्होंने दिल्ली सीएम का महिमामंडन करते हुए सर्टिफिकेट दे डाला कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार से टकराव वाली राजनीति छोड़ दी थी और साथ ही कहा कि वो वर्षों बाद जंतर-मंतर लौटे हैं।

इस दौरान वो राज्यसभा में अक्सर हंगामा के कारण विवादों में रहने वाले सांसद संजय सिंह का भी गुणगान करना नहीं भूले। रवीश कुमार ने दावा कर डाला कि AAP सरकार के काम को पहचान मिली और सराहना भी हुई।

देशभक्ति और राम मंदिर पर दिल्ली सरकार के ऐलानों के लिए उसकी पीठ थपथपाते हुए संभावना जताई कि केंद्र के साथ सामंजस्य के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने दावा कर डाला कि केंद्र सरकार चुनी हुई दिल्ली सरकार के अधिकारों पर अंकुश लगा रही है। अपनी बातों को सही साबित करने के लिए उन्होंने उमर अब्दुल्लाह जैसों के बयान का समर्थन किया।

सबसे बड़ी बात तो ये कि रवीश कुमार ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के इस बार के चुनावी स्लोगन ‘खेला होबे’ का इस्तेमाल किया। आखिर वो एक ‘न्यूट्रल’ पत्रकार जो हैं।

अरविंद केजरीवाल के लंबे-चौड़े भाषण भी इस प्राइम टाइम खबर में दिखाए गए, जिसमें वो कहते दिख रहे हैं कि फिर चुनावों का क्या मतलब रह गया? तो क्या अब AAP ये मान कर अगला चुनाव नहीं लड़ेगी? क्योंकि उसका ही कहना है कि अब दिल्ली सरकार के पास कोई अधिकार ही नहीं है।

असली बात तो ये है कि ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी एक्ट’ में संशोधन कर के उसमें सिर्फ एक चीज जोड़ी गई है, कुछ भी हटाया नहीं गया है। बस 1991 एक्ट में इतना जोड़ा गया है कि दिल्ली में सरकार का तात्पर्य उप-राज्यपाल से होगा।

सेक्शन 24 में लिखा है कि विधानसभा द्वारा पास किए गए कानून उप-राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए जाएँगे। साथ ही प्रशासनिक जाँच बिठाने जैसे अधिकारों में कटौती की गई है। बता दें कि दिल्ली पुलिस पहले से ही वहाँ की सरकार के अधीन न होकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है, ऐसे में चीजों को लिखित में और स्पष्ट किया गया है।

सरकार के फैसलों के लिए उप-राज्यपाल का मत लिए जाने की बात भी कही गई है। बता दें कि नई दिल्ली देश की राजधानी है, ऐसे में वहाँ हर घटना का सम्बन्ध देश की सुरक्षा से जुड़ता है। इसीलिए, राजनीति होने से बचने के लिए दोनों सरकारों के अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या ज़रूरी है।

पूरे प्राइम टाइम में अरविंद केजरीवाल पर रवीश कुमार ने यही दोष लगाया कि उन्होंने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने का विरोध नहीं किया। एक ‘संविधान विशेषज्ञ’ को बुला कर भी यही कहलवाया गया।

रवीश कुमार ने इस दौरान अपनी पुरानी भविष्यवाणी भी दिखाई, जो उन्होंने तब किया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट में उप-राज्यपाल के अधिकारों को लेकर फैसला दिया था। रवीश ने तब कहा था कि खिलाड़ी अब नया खेल लेकर आएँगे। उन्होंने पूछ डाला कि केंद्र सरकार यही सारे अधिकार राष्ट्रपति को क्यों नहीं दे देती है?

  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना पूर्ण बहुमत से संसद के दोनों सदनों में पारित बिल भी कानून का रूप नहीं ले पाता।
  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि राष्ट्रपति ही देश की तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर है।
  • रवीश कुमार को पता होना चाहिए कि संसद में अभिभाषण के समय राष्ट्रपति द्वारा ‘मेरी सरकार’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • रवीश कुमार को पता तो होना चाहिए… लेकिन वो एक ‘न्यूट्रल’ पत्रकार हैं… इसलिए नहीं पता है!

रवीश कुमार ने अपने इस प्राइम टाइम में विपक्षी नेताओं के बयानों के हवाले से भाजपा पर निशाना साधा है। साथ ही सीएम केजरीवाल को अप्रत्यक्ष रूप से सलाह दी है कि वो जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी इस्लामी कट्टरपंथी नेताओं का साथ दें, तो वो उनके और लाडले हो जाएँगे। रवीश कुमार ने दिल्ली-बिल्ली करते-करते प्रोपेगेंडा वाली गिल्ली को अपने कुतर्कों के डंडे से दूर मारना तो चाहा, लेकिन वो उनके कमरे में ही गिर गया।

हजारों की मुस्लिम भीड़ का हिन्दू गाँव पर हमला: 88 घर, 8 मंदिर क्षतिग्रस्त – हिन्दू युवक को ही कर लिया बांग्लादेश में गिरफ्तार

बांग्लादेश में बुधवार (मार्च 17, 2021) को हजारों की मुस्लिम भीड़ ने एक हिन्दू गाँव पर हमला बोल दिया। इस्लामी संगठन ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के बैनर तले भीड़ ने हिन्दू गाँव पर हमला बोला। ये घटना सुनामगंज जिले के ‘शल्ला उपजिला’ इलाके में हुई।

हिन्दू गाँव पर हमले के पीछे मामला बस इतना था कि एक हिन्दू व्यक्ति ने संगठन के जॉइंट सेक्रेटरी जनरल मौलाना मुफ़्ती मामुनुल द्वारा दिए गए कट्टरवादी भाषण की आलोचना की थी।

नवागाँव के एक हिन्दू युवक ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामुनुल की आलोचना की थी। मौलाना ने अपने भाषण में बंगबंधु मुजीबुर रहमान की मूर्ति लगाने का विरोध किया था। जैसे ही इस सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में खबर फैली, हजारों की मुस्लिम भीड़ ने धारदार हथियारों के साथ हिन्दू गाँव पर हमला बोल दिया।

इस मामले में मंगलवार की रात से ही ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के नेता लोगों को भड़काने में लगे हुए थे और उसी समय से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस सोशल मीडिया पोस्ट से सांप्रदायिक शांति भंग हो सकती है।

पुलिस ने इस्लामी भीड़ के दबाव में आकर उसी रात उस हिन्दू युवक को गिरफ्तार भी कर लिया था। लेकिन, काशीपुर, चंड़ी और नाचीपुर के हजारों मुस्लिम उग्र होकर निकल पड़े।

आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों से ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के समर्थक वहाँ हथियारों के साथ आ धमके। बुधवार को सुबह 9 बजे से ही हिन्दुओं के घरों पर हमले शुरू कर दिए गए। इस घटना में 80 से अधिक हिन्दू परिवारों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।

हबीबपुर यूनियन चेयरमैन विवेकानंद मजूमदार बकुल ने बताया कि कई हिन्दुओं के घरों को ध्वस्त किया गया है। भीड़ से बचने के लिए स्थानीय हिन्दू वहाँ से भाग खड़े हुए। बांग्लादेश के हिन्दू एक्टिविस्ट राजू दास ने बताया कि इस दौरान 88 घरों व 8 पारिवारिक मंदिरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

न सिर्फ घरों को क्षतिग्रस्त किया गया, बल्कि अंदर रखे समान भी लूट लिए गए। ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ कई मुल्ला-मौलवियों का संगठन है, जिसकी स्थापना 2010 में सत्ताधारी अवामी लीग से कथित रूप से बंगलादेश को ‘बचाने’ के लिए हुई थी।

चिट्टागोंग के ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ संगठन ने बांग्लादेश की सरकार द्वारा महिलाओं को बराबर के अधिकार देने के फैसले का विरोध करते हुए ‘इस्लाम विरोधी नीतियों’ को बदल कर मुल्क को सेक्युलर बनने से रोकने की कसम ली है।

शल्ला पुलिस थाने के इंचार्ज नजमुल हक़ ने बताया कि पुलिस के साथ-साथ RAB (रैपिड एक्शन बटालियन) को भी मौके पर लगाया गया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों और उपजिला चेयरमैन अल अमीन से बातचीत कर के माहौल को नियंत्रित किया गया है।

डिप्टी कमिश्नर और एसपी ने घटनास्थल का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया कि हिन्दू युवक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और उसे जाँच एजेंसियों को सौंप दिया गया है।

बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या और मंदिरों पर हमले कोई नई बात नहीं है। ऐसी घटनाएँ हर कुछ दिन पर सामने आती हैं। सितम्बर 2020 में गाजीपुर, ढाका, बांग्लादेश के दक्खिन सलाना इलाके में स्थित काली मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था।

जम्मू कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊँचा रेल ब्रिज, ऊँचाई एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ज्यादा: देखें वीडियो

जम्मू कश्मीर में अगस्त 2019 में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से न सिर्फ माहौल शांतिपूर्ण हुआ है और कई आतंकी मार गिराए गए हैं, बल्कि विकास कार्यों में भी तेज़ी देखी जा रही है। अब विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च-ब्रिज (चाप सेतु) भी इसी केंद्र शासित प्रदेश में बनने जा रहा है। इस रेलवे ब्रिज की लंबाई 1.325 किलोमीटर होगी, जिस पर दिसंबर 2022 से आवागमन शुरू होने की संभावना है।

भारतीय रेलवे ने एक वीडियो जारी कर के चेनाब नदी पर बन रहे इस आर्च-ब्रिज के बारे में जानकारी दी है। इस रेल पुल से कश्मीर की घाटी रेलवे के द्वारा शेष भारत से जुड़ेगी। इस पुल के आर्च वाले मुख्य भाग की लंबाई 467 मीटर होगी। नदी के तल से इसकी ऊँचाई 359 मीटर होगी। इसकी ऊँचाई का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि फ़्रांस के पेरिस में स्थित एफिल टॉवर से भी ये 35 मीटर ज्यादा ऊँचा होगा।

एफिल टावर की ऊँचाई 324 मीटर (1063 फ़ीट) है। इस रेलवे आर्च-ब्रिज के कटरा वाली साइड पर स्टील की धातु से बना जो सपोर्ट लगाया गया है, उसकी ऊँचाई 131 मीटर है, जो क़ुतुब मीनार (73 मीटर) से काफी ज्यादा ऊँचा है। इस आर्च-ब्रिज को इस हिसाब से मजबूती देकर डिजाइन किया गया है कि ये 266 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से बह रही हवाओं को बर्दाश्त करने में सक्षम होगा।

बता दें कि भारत में अब तक किसी भी चक्रवात या तूफ़ान में हवाओं की रफ़्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं मापी गई है। अम्फान चक्रवात के दौरान उच्चतम स्तर पर 240 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएँ चली थीं, जो देश में अब तक का सर्वाधिक है। इस आर्च-ब्रिज को बनाने के दौरान एक समय ऐसा भी आया था, जब 3200 लोग काम में लगे हुए थे। इसकी डिजाइन लाइफ 120 वर्षों की बताई गई है।

भारतीय रेलवे ने बताया है कि इसका निर्माण पूरा होने के बाद इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ये एक बड़ी उपलब्धि होगी और भारतीय रेलवे के तकनीक विशेषज्ञों के लिए गर्व की बात भी। इस ब्रिज पर -20 डिग्री सेल्सियस तापमान का भी कोई असर नहीं होगा। जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में 1893 में -14.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था, जो राज्य में अब तक का सबसे कम है। मोदी सरकार के आने के बाद इन्फ्रस्टरक्चर में ऐसे कई कार्य हुए हैं।

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2020 में रोहतांग में 9.02 किलोमीटर लम्बे ‘अटल टनल’ का उद्घाटन किया था। इससे मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर घट गई थी, अर्थात अब 4-5 घंटे कम हो गई है। ये दुनिया का सबसे लंबा राजमार्ग टनल है, जो पूरे साल मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी को जोड़ कर रखता है। यह घोड़े की नाल के आकार में 8 मीटर सड़क मार्ग के साथ सिंगल ट्यूब और डबल लेन वाली टनल है।

CM योगी के 4 साल: अपराध मुक्त UP में मुठभेड़ की 7791 घटनाएँ, 135 अपराधी ढेर, अब तक 16000 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ की सरकार अक्सर जीरो टॉलेरेंस की बातें करती हैं। ऐसे में भाजपा की सरकार आने के बाद से पुलिस और अपराधियों के बीच कई मुठभेड़ हुए हैं, जिनमें आत्मरक्षा में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और कई अपराधी मारे गए।

विपक्ष उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की संख्या को लेकर अक्सर सरकार को घेरता है और तमाम तथ्यों के सामने आने के बावजूद उन्हें फर्जी बताता है। ‘दैनिक जागरण’ के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 4 वर्ष में उत्तर प्रदेश में अब तक 135 अपराधी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

इस वर्ष पिछले ढाई महीने में हुई ऐसी कई मुठभेड़ों में 6 अपराधी ढेर हो गए। वार्षिक आँकड़ों की बात करें तो 2017 में पुलिस और अपराधियों की मुठभेड़ में 28, वर्ष 2018 में 41, वर्ष 2019 में 34 जबकि वर्ष 2020 में 26 अपराधी मारे गए हैं। इनमें 111 ऐसे थे, जो इनामी बदमाश थे।

इनमें से कइयों की तलाश पुलिस को पहले से ही थी और वो फरार चल रहे थे। पुलिस को देखते ही या खुद को घिरा हुआ पाते ही उन्होंने शस्त्रों का प्रयोग शुरू किया और आत्मरक्षा व आम नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा के लिए हुई जवाबी कार्रवाई में उनकी मौत हो गई। कई बार पुलिस घायल अपराधियों को इलाज के लिए अस्पताल ले गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पिछले साल विकास दुबे कांड सुर्खियों में था। विकास दुबे पर 5 लाख का इनाम था। उसने अपने गुर्गों के साथ मिल कर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। ऐसे खूँखार अपराधी के अलावा भी UP पुलिस ने कुछ ऐसे अपराधियों का समाज से सफाया किया है, जो इनामी बदमाश थे, जिनका इलाके में खौफ था।

UP पुलिस के साथ मुठभेड़ में तीन ऐसे बदमाशों की भी जान गई, जिन पर ढाई लाख रुपए का इनाम था। दो लाख रुपए के इनामी दो बदमाश, डेढ़ लाख रुपए के इनामी तीन बदमाश, एक लाख रुपए के इनामी 18 बदमाश, 75 हजार का इनामी एक बदमाश और पचास हजार के इनामी 46 बदमाश इन मुठभेड़ों में ढेर हुए।

इन सबके अलावा 25 हजार रुपए के इनामी 20 बदमाश, 15 हजार रुपए के इनामी 11 बदमाश, 12 हजार रुपए के इनामी चार बदमाश तथा पाँच हजार रुपए का इनामी एक बदमाश UP पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में चलाई गई गोली का शिकार हुआ।

सबसे अधिक अपराधी मेरठ में मारे गए हैं, जहाँ ये संख्या 18 है। अब तक पुलिस और अपराधों के बीच राज्य में हुई 7791 मुठभेड़ों में 16000 से अधिक अपराधी गिरफ्तार हुए हैं। इनमें से 3000 बदमाश ऐसे हैं, जो पुलिस की गोली से घायल हुए। इनमें से अधिकतर को अस्पताल में भर्ती करा कर उनकी जान बचाई गई।

हाल ही में बलरामपुर की एक जनसभा में AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि योगी सरकार में एनकाउंटर में मारे गए अपराधियों में 37% मुस्लिम हैं, जबकि राज्य में मुस्लिमों की जनसंख्या 18-19% है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी ‘ठोक दो’ जैसी बातें करते हैं।

अगस्त 2020 में डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस पर विशेष वर्ग के लोगों के एनकाउंटर किए जाने के आरोप पर कहा था कि इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं और अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होता है। उन्होंने बताया था कि पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सभी का आपराधिक इतिहास रहा है और कई तो पुलिस कर्मियों की हत्या में शामिल थे। जाति या सांप्रदायिक आधार पर अपराधियों के साथ भेदभाव नहीं किया गया है।

राकेश टिकैत और ‘किसान’ गैंग में अकेले लगाया ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद… भारत माता की जय’ का नारा: Video Viral

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक आदमी है। वो भीड़ के बीच में है और ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ के साथ-साथ ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहा है।

वीडियो इसलिए वायरल हो रहा है क्योंकि जिस भीड़ के बीच में वो इंसान अकेला नारा लगा रहा है, वो भीड़ ‘किसानों’ की भीड़ है। उसी भीड़ में ‘किसान’ नेता राकेश टिकैत भी है।

यह वायरल वीडियो कब की है, इसके बारे में पता नहीं। लेकिन इसकी शुरुआत में राकेश टिकैत की जयकार को आप सुन सकते हैं। फिर अचानक से लगभग 20 सेकंड के बाद एक आदमी जोर-जोर से तेज आवाज में ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’… ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ बोलने लगता है।

राकेश टिकैत और उसके समर्थक स्तब्ध रह जाते हैं। कुछ देर के लिए वे चुपचाप इस आदमी को देखते हैं। फिर वो सब मोदी विरोधी नारे लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन ये अकेला इंसान उस भीड़ से ज्यादा जोर से चिल्लाते हुए ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’… ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाता रहता है।

यह वायरल वीडियो कहाँ शूट किया गया, यह भी स्पष्ट नहीं है। देखने में कोई रेलवे स्टेशन जैसा प्रतीत हो रहा है।

राकेश टिकैत के बारे में बता दें कि वो हाल ही में पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने के लिए बंगाल गए थे। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ टीएमसी को समर्थन दिया है।

गीता और बबीता की बहन रितिका फोगट ने की आत्महत्या: फाइनल में सिर्फ 1 पॉइंट से हारीं, नहीं सह पाईं गम

गीता और बबीता फोगट की बहन रितिका फोगट ने एक कुश्ती टूर्नामेंट के फाइनल मैच में मिली हार के कारण आत्महत्या कर ली है। रितिका, गीता और बबीता की ममेरी बहन थीं।

रितिका फोगट के बारे में बताया जा रहा है कि कुश्ती टूर्नामेंट के फाइनल में हार का गम वो नहीं सह पाईं, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। उन्होंने स्टेट सब-लेवल जूनियर, जूनियर वुमन एंड मेन रेसलिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। ये टूर्नामेंट राजस्थान के भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में चल रहा था।

मार्च 12-14 के बीच हुए इस टूर्नामेंट के फाइनल मैच में रितिका मात्र एक पॉइंट के कारण हार गईं। इसके बाद वो अवसाद में चली गई थीं और फिर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

बताया जा रहा है कि द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित और गीता व बबीता के पिता महावीर फोगट भी उस टूर्नामेंट स्थल पर मौजूद थे। फोगट बहनों के ऊपर ‘दंगल’ फिल्म भी बनी थी, जिसमें आमिर खान ने महावीर फोगट का किरदार अदा किया था।

रितिका भी गीता और बबीता की तरह कुश्ती में नाम कमाना चाहती थीं और इसके लिए वो मेहनत भी कर रही थीं। रितिका ने पंखे में दुपट्टा बाँध कर फाँसी लगा ली।

रितिका फोगट के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है। गीता और बबीता की एक और कजन बहन विनेश फोगट भी टोक्यो ओलम्पिक के दावेदारों में शामिल हैं और वो देश की उम्दा फ्रीस्टाइल रेसलर्स में से एक हैं।

बता दें कि गीता और बबीता की बहन ऋतू फोगट भी कुश्ती की दुनिया में नाम कमा रही हैं। उन्होंने MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) विधा की कुश्ती में नाम रोशन किया है। साथ ही वो प्रतिष्ठित ‘ONE चैम्पियनशिप’ का हिस्सा भी बनी थीं।

‘शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था, तभी की आसिफ की पिटाई’: जमानत पर छूटने के बाद श्रृंगी यादव का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित मुस्लिम बहुल क्षेत्र डासना के शिव-शक्ति मंदिर में आसिफ नाम के एक किशोर की पिटाई के बाद मंदिरों को बदनाम करने का सिलसिला चल पड़ा है। लेकिन, जिस तरह से महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कुछ तथ्यों के जरिए वामपंथी मीडिया गिरोह की बखिया उधेड़ी है, उसके बाद से कई दावे सामने आए हैं। अब श्रृंगी यादव ने आरोप लगाया है कि आसिफ शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था।

‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए श्रृंगी यादव ने बताया कि वो लड़का झूठ बोल रहा है कि वो पानी पीने के लिए मंदिर के भीतर घुसा था। उन्होंने कहा कि मंदिर में कई शिवलिंग मौजूद हैं। आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया कि उसने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता।

उन्होंने बताया कि आसिफ के साथ एक और लड़का था, जो टोपी पहन कर आया हुआ था। चश्मदीद रहे श्रृंगी ने बताया कि उसने उस लड़के को ही सबसे पहले देखा था, जो दरवाजे पर खड़ा था। उन्होंने कहा कि वो लड़का अपनी पैंट की चेन खोल कर गलत हरकतें कर रहा था। उस समय कई हिन्दू महिला श्रद्धालु भी मंदिर में आए हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लड़के अक्सर उलटी-सीधी हरकतें करने के लिए आते रहते हैं।

मंदिर के आसपास मुस्लिम समाज के युवकों द्वारा छेड़खानी का आरोप दोहराते हुए यादव ने कहा कि कुछ दिनों पहले दारुल उलूम देवबंद से कुछ लड़के आए थे और उन्होंने अपना नाम गलत बताया था। चेतावनी दिए जाने के बाद वो चले गए थे। उन्होंने बताया कि कुछ दी दिनों पहले भगवन परशुराम की प्राचीन प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई थी। साथ ही ये भी कहा कि यहाँ मंदिर के पास आकर लड़के गुंडागर्दी करते हैं।

वहीं ‘पाञ्चजन्य’ से बातचीत करते हुए महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि पिछले 5 दिनों से सभी लोग मंदिर के पीछे पड़े हुए हैं और कह रहे है कि पानी पीने आए बच्चे को पीट दिया। उन्होंने कहा कि ये बात अगर होती तो ये बुरी बात है लेकिन वो हिन्दुओं से कहना चाहते हैं कि क्या सच में वो पानी पीने आया था? उन्होंने कहा कि बाहर से दिखाई भी नहीं देता है कि अंदर कोई नल है। उन्होंने कहा कि वो उसे ‘बच्चा’ नहीं मानते।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने ‘पाञ्चजन्य’ से की बातचीत

इसके बाद महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि उनके शिष्य श्रृंगी यादव ने जमानत पर छूटने के बाद उन्हें सच्चाई बताई है कि असल में आसिफ मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था। इसके बाद श्रृंगी यादव ने उसे पकड़ा। उन्होंने पूछा कि क्या हमारे भगवान इसीलिए हैं ताकि उनके ‘बच्चे’ आकर पेशाब करें? उन्होंने कहा कि 95% मुस्लिमों वाले इलाके में मंदिर में उनके प्रवेश का बोर्ड लगाना उनकी मजबूरी है।

यति नरसिंहानंद सरस्वती पिछले 15 वर्षों से वहाँ महंत हैं। उन्होंने हिन्दुओं को अपनी पीड़ा समझने की बात करते हुए पुलिस पर आरोप लगाए कि मंदिर में 4 बार डकैती की घटनाओं में कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि वो मुस्लिमों के दबाव में थे। उन्होंने कहा कि बसपा विधायक असलम चौधरी ने भी देख लेने की धमकी दी है। उनके अनुसार वहाँ लोग रोज नरक झेल रहे हैं, उसे महसूस करना और दूर से सहानुभूति जताने में अंतर है।

हाल ही में विधायक असलम चौधरी ने कहा था, “डासना मंदिर हमारे पूर्वजों का मंदिर है। यह मंदिर हमारे पूर्वजों ने बनाया है। यहाँ पर कुछ गुंडे प्रवृत्ति के लोग आ गए। कुछ लोगों ने बाहर से आकर मंदिर पर कब्जा करना चाहा और तरह-तरह की एक्टीविटी करके यहाँ के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। हम इन गुर्गों को बताना चाहेंगे कि मंदिर हमारी विरासत है। हम पानी पीने भी जाएँगे, अपनी मंदिर की देख-रेख करने भी जाएँगे। मैं मंदिर में जाऊँगा। मैं देखता हूँ कि कौन रोकता है।”