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बांग्लादेश: 400 साल पुराने श्मशान और राधागोबिंद आश्रम में लगाई आग, मूर्तियाँ-रथ भी जलकर खाक

बांग्लादेश के मगुर जिले के मोहम्मदपुर उपजिला में 400 साल पुराने परुर्कुल अष्टग्राम महा श्मशान (Paruarkul Ashtagram Maha crematorium) और राधा गोबिंद आश्रम में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आग लगाने की घटना सामने आई है। आग से तीन कमरों के हिस्से, रथ और मूर्तियाँ जलकर खाक हो गईं।

मोहम्मदपुर उपजिला परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष और हिंदू-बौद्ध क्रिश्चियन ओइक्या परिषद (Hindu-Buddhist Christian Oikya Parishad) की आयोजन समिति की पूर्व सचिव स्वप्न रानी बिस्वास ने घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ सफाई कर्मचारी गुरुदास मंदिर में आए, जहाँ उन्होंने आग को देखा। बाद में प्रशासन और दमकल को सूचना दी गई। हालाँकि, मोहम्मदपुर से फायर ब्रिगेड के पहुँचने से पहले आग बुझा दी गई।

इस बीच मोहम्मदपुर उपजिला निरभाही अधिकारी रामानंद पाल, सहायक आयुक्त भूमि हरकृष्ण अधिकारी, मोहम्मदपुर पुलिस स्टेशन के ओसी तारक नाथ विश्वास और स्थानीय बाबूखाली संघ के अध्यक्ष मीर शहजाद अली घटना की जानकारी होते ही मौके पर पहुँचे। बाद में मगुरा के डिप्टी कमिश्नर अशरफुल आलम और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जहीरुल इस्लाम सहित वरिष्ठ प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर गए।

स्वप्न रानी ने घटना को सांप्रदायिक झड़पों को उकसाने और राजनीतिक अशांति पैदा करने वाला करार दिया। वहीं सहायक आयुक्त भूमि हरकृष्ण अधिकारी ने बताया कि घटना में आश्रम के दो कमरे क्षतिग्रस्त हुए हैं। मूर्ति भी टूटी हैं। आग लगने से रथ भी जल गए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच के बाद ही घटना के लेकर यकीनी तौर पर कुछ कहा जा सकता है।

पुलिस अधिकारी जहीरुल इस्लाम ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद आश्वासन दिलाया कि तोड़फोड़ के सबूत मिलने के बाद आरोपितों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द वाले जिले मगुरा में किसी भी सांप्रदायिक ताकत को बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश से लौटने के बाद कट्टरपंथी समूह हिफाजत-ए-इस्लाम ने चटगाँव स्थित ब्राम्हनबरिया में हिंसा की थी। हिफाजत समर्थकों ने यहाँ मंदिर में रखी माँ काली और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को तोड़ दिया था। श्री श्री आनंदमयी काली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष आशीष पॉल ने बताया कि हम डोल पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में पूजा कर रहे थे। इसी दौरान हिफाजत-ए-इस्लाम के करीब 200 से 300 हथियारबंद लोग मंदिर का गेट तोड़कर अंदर घुस आए। हमने काली माँ की मूर्ति को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने हमें ढकेलकर काली माँ की मूर्ति को तोड़ दिया।

मोदी की यात्रा के विरोध में कट्टरपंथी इस्लामिक गुटों ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प की, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हुई। इसके बाद पूर्वी बांग्लादेश में एक ट्रेन को हिफाजत-ए-इस्लाम ने निशाना बनाया था। राजशाही के पश्चिम जिले में दो बसों में आग लगाई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की।

दिल्ली में पब के बाहर अजय देवगन की पिटाई, किसानों के ‘विरुद्ध’ किया था ट्वीट: वायरल वीडियो का फैक्टचेक

सोशल मीडिया पर एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। इसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की जम कर पिटाई की गई है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में एक पब के बाहर उनकी पिटाई हुई। ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर विदेशी ताकतों द्वारा भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने पर जिन सेलब्रिटीज ने देश का पक्ष लिया था, उनमें अजय देवगन भी शामिल हैं।

दिल्ली में अजय देवगन की पिटाई?

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि दो पक्षों के बीच जम कर मारपीट हो रही है। वीडियो में अजय देवगन जैसा एक शख्स पिटते हुए दिख भी रहा है। ‘किसान आंदोलन’ के सर्मथकों ने इस वीडियो को जम कर शेयर किया और कइयों ने कहा कि ये ‘जनता’ है जो सिंघम स्टार को पीट रही है। इसके बाद खुद अजय देवगन और उनकी टीम को सफाई देनी पड़ी।

अजय देवगन ने लिखा, “ऐसा लगता है कि मेरे जैसा दिखने वाला कोई शख्स मुश्किल में पड़ गया है। मेरे पास इससे संबंधित फोन कॉल्स आ रहे हैं। केवल स्पष्ट कर रहा हूँ – मैंने कहीं भी यात्रा नहीं की है। मेरे किसी भी विवाद में होने की सभी खबरें निराधार हैं, होली की शुभकामनाएँ।” इससे साफ़ है कि उस वीडियो में अजय देवगन नहीं, उनके ही जैसा दिखने वाला कोई और शख्स है। अजय देवगन फ़िलहाल दिल्ली में में हैं भी नहीं।

अजय देवगन पिछली बार 2020 में आई फिल्म ‘तान्हाजी – द अनसंग वॉरियर’ को प्रमोट करने के लिए दिल्ली गए हुए थे। उनकी टीम का कहना है कि इसके बाद से वो दिल्ली गए ही नहीं। टीम ने सभी मीडिया संस्थानों से फैक्ट्स के आधार पर ख़बरें चलाने का अनुरोध करते हुए कहा कि अजय देवगन लॉकडाउन खुलने के बाद से लगातार मैदान, मेडे और भंसाली की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की शूटिंग मुंबई में ही कर रहे हैं।

मार्च 2021 की शुरुआत में मुंबई के गोरेगाँव में में एक सिख व्यक्ति ने अजय देवगन की कार रोक दी थी और उनके खिलाफ टिप्पणी करने लगा था। कार रोकने के बाद वो व्यक्ति कह रहा था, “ये देखो अजय देवगन है। रोटी कैसे पचती है तुम्हें? भाइयो, ये देख लो। जो लोग पंजाब के खिलाफ हैं, उन्हें रोटी कैसे पचती है? शर्म करो शर्म! पगड़ी है सिर पर। लानत है तुम पर, लानत है। शर्म है कि नहीं तुम्हें? गाड़ी चढ़ाएगा मेरे ऊपर तू?”

पिता और चाचा को बचाने गई लड़की को TMC के गुंडों ने पीटा: सूजी आँखों से बताई पीड़ा, BJP ने शेयर किया Video

पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक लड़की की वीडियो वायरल हुई है। वीडियो में वह बता रही है कि कैसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने उसे और उसके परिवार को बेरहमी से पीटा। वीडियो को भाजपा की बंगाल ईकाई के ट्विटर अकाउंट से भी शेयर किया गया है। मामला नॉर्थ परगना जिले के दमदम नगरपालिका के काशीपुर क्षेत्र का है।

भाजपा द्वारा शेयर की गई इस वीडियो में लड़की आपबीती सुना रही है। उसकी आँख के पास आई चोटें भी वीडियो में साफ दिख रही हैं। घटना से संबंधित सवाल पूछे जाने पर वह कहती है, “मेरी आँख में चोट आई है। मेरे चाचा को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता मार रहे थे तो मेरे पापा उन्हें बचाने गए।”

पीड़िता आगे कहती है, “कई लोग मेरे चाचा को मार रहे थे। जब पापा को ये बात पता चली तो वह उन्हें बचाने गए। उन्हें भी पीटा गया। परिवार को पता चला तो हम भी उन लोगों को बचाने गए। सबने हमें भी पीटा।”

पीड़िता का वीडियो शेयर करते हुए भाजपा ने कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस की बर्बरता अपने चरम पर है। इस टाइम उन्होंने इस नवयुवती को पीटा क्योंकि वह अपने पिता को बचाने गई थी, जिन्हें तृणमूल के गुंडे मार रहे थे। सवाल जो अब दीदी से पूछा जाना चाहिए- क्या ये लड़की बंगाल की बिटिया नहीं है?”

उल्लेखनीय है कि 26 फरवरी 2021 को रात 1:30 बजे टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की बुजुर्ग माँ की बेरहमी से पिटाई की थी, जिनकी घटना के एक माह बाद कल मौत हो गई। उन्होंने गंभीर चोटों के चलते दम तोड़ा। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे लेकर जानकारी दी।

उन्होंने लिखा, ”बंगाल की यह बेटी, किसी की माँ, किसी की बहन… मर चुकी है। टीएमसी के लोगों ने उन पर क्रूरतापूर्ण हमला किया गया था, लेकिन ममता बनर्जी ने उनके लिए दया का भाव भी प्रकट नहीं किया। उनके परिवार के घावों को कौन ठीक करेगा? टीएमसी की हिंसा की राजनीति ने बंगाल की आत्मा को चोट पहुँचाई है।” 

मालूम हो कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा नई नहीं है। शुक्रवार को 30 साल के भाजपा कार्यकर्ता लाल सोरेन की लाश उनके घर के नजदीक एक जंगल में मिली। मेदिनीपुर विधानसभा के बूथ सेक्रेट्री 26 मार्च को जामुन के पेड़ से लटके पाए गए थे।

भाजपा ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट में लिखा था, “मेदिनीपुर विधानसभा के बूथ सेक्रेट्री 30 वर्षीय लालमोहन सोरेन आज सुबह लटके मिले। 72 घंटे में 4 हत्याएँ हुई हैं। ये समय है कि बंगाल एक साथ आए और इस राजनीतिक हिंसा वाले दौर को खत्म करे।”

लाल सोरेन से पहले कूचबिहार जिले के दिनहाटा टाउन मंडल के अध्यक्ष अमित सरकार का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैली थी। मंडल अध्यक्ष का शव दिनहाटा में वेटनरी हॉस्पिटल के परिसर से बरामद हुआ था।

ऐसे ही नादिया के शांतिपुर में भाजपा कार्यकर्ता प्रताप बरमन और दिपांकर बिस्वास की बेहरहमी से हत्या की घटना सामने आई थी। भाजपा ने उनकी मौत का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया था। 18 मार्च को भी एक भाजपा कार्यकर्ता विकास नस्कर की लाश पेड़ से झूलती मिली थी। वह दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दक्षिण के निवासी थे।

गुरुद्वारे से निकली तलवार-डंडों से लैस भीड़, पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा: नांदेड़ में ‘होला मोहल्ला’ पर हिंसा

महाराष्ट्र के नांदेड़ में तलवार और डंडों से लैस सिखों की भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इसमें 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि राज्य में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के कारण होली के जुलूस पर पाबंदी लगाई गई थी। स्थानीय गुरुद्वारे में ‘होला मोहल्ला’ पर भी रोक लगी हुई थी। सिखों ने भी आश्वासन दिया था कि वे गुरुद्वारे के भीतर ही इसे मनाएँगे।

सिख बहार नहीं निकले इसकी निगरानी के लिए गुरुद्वारे के बाहर पुलिस बल तैनात थी। प्रशासन ने गुरुद्वारे का दरवाजा भी बंद कर दिया था। लेकिन कुछ सिख युवकों ने दरवाजे को तोड़ पुलिस पर हमला कर दिया। भीड़ ने पुलिस के वाहनों को भी निशान बनाया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा। सचखंड हुजूर साहिब गुरुद्वारे में होली से पहले पुलिस ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें ‘होला मोहल्ला’ का आयोजन कोरोना दिशा-निर्देशों के अनुरूप करने को कहा गया था।

सोमवार (मार्च 29, 2021) को होली के दिन दोपहर तक सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और होली से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए, लेकिन शाम होते-होते होली का जुलूस निकालने की बारी आई तो भीड़ गुरुद्वारा परिसर में एकत्र हो गई। दरवाजा तोड़ कर भीड़ सड़कों पर आ निकली। पुलिस ने जुलूस को आगे बढ़ने से रोका, जिससे वो भड़क गए और 300 लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। शाम 4 बजे हुई इस घटना में पुलिस के बैरिकेड्स भी तोड़े गए।

नांदेड़ रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) निसार तंबोली ने बताया, “कोरोना महामारी के कारण ‘होला मोहल्ला’ का जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। गुरुद्वारा कमेटी को सूचित कर दिया गया था और उन्होंने हमें आश्वस्त किया था कि वे हमारे निर्देशों का पालन करेंगे। उन्होंने कहा था कि वे कार्यक्रम गुरुद्वारे के परिसर के अंदर करेंगे।” DIG ने 200 लोगों के खिलाफ IPC की धारा- 307, 324, 188 और 269 के तहत मामला दर्ज करने की बात कही।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उन पर भी तलवार से हमला किया गया। IG निसार तंबोली भी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाई। वहाँ अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है। इस गुरुद्वारा को सिखों की दक्षिण काशी भी कहा जाता है, जहाँ कई वर्षों से होली पर ऐसा आयोजन होता आ रहा है। नांदेड़ में 4 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा की गई थी।

नांदेड़ पुलिस ने गुरुद्वारे के बाहर तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले को लेकर अब तक 17 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बताया है कि अज्ञात लोगों पर दंगा और हत्या के प्रयास के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं।

गौरतलब है फरवरी 2021 में नांदेड़ से ही एक खालिस्तानी समर्थक सरबजीत सिंह किरात को धरा गया था। वो मूल रूप से लुधियाना का है। इसी तरह के एक अन्य मामले में गुरपिंदर सिंह नामक एक व्यक्ति को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। महाराष्ट्र से पिछले दिन कोरोना के 31,000 नए मामले सामने आए और 102 की संक्रमण के कारण मौत हुई। नांदेड़ में भी प्रतिदिन 1000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

शेरपुर की अनोखी होली: रंग लगाने के बाद हिंदू हुरियारे मुस्लिमों को देते हैं ‘जीभर’ गाली, नवाबों के दौर से जारी परंपरा

देश भर में आज रंगों के साथ होली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। वहीं, पीलीभीत के शेरपुर में होली के दिन रंग के साथ-साथ गलियाँ भी दी जाती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ हिंदू पहले मुस्लिमों को रंग लगाते हैं और फिर उनको गाली देते हैं।

खास बात यह है कि कहा जा रहा है- मुस्लिम इससे नाराज भी नहीं होते हैं, बल्कि हँसकर होली की बधाई देते हैं। इसके बदले में मुस्लिम लोग हिंदूओं को सौहार्द के रूप में पैसा (नजराना) भी देते हैं। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के शेरपुर गाँव की गाली देने की परंपरा नवाबी दौर से ही चली आ रही है। इसे लेकर गाँव में कभी सांप्रदायिक तनाव भी नहीं हुआ है।

होली पर हिंदू-मुस्लिम होते हैं उत्साहित

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- मुस्लिम बहुल आबादी वाले इस गाँव में सैकड़ों हिंदू परिवार हैं। जब भी होली आती है तो हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम भी उत्साहित हो जाते हैं। कहा जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग होलिका की तैयारी में सहयोग से कभी पीछे नहीं हटते। इस दिन रंग-गुलाल से सराबोर हुरियारों की टोलियाँ मुस्लिम परिवारों के घरों के बाहर पहुँचती हैं और फिर उन्हें ‘जीभर’ गालियाँ देना शुरू कर देती हैं।

वैसे यह परंपरा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में जोगीरा और कबीरा के रूप में भी निभाई जाती है। जिसका लोग बुरा न मानो होली है। कहकर खूब आनंद लेते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे में हिंदू भाइयों की गालियों पर कोई मुस्लिम नाराज नहीं होता, बल्कि सभी हँसते हुए हुरियारों को बतौर त्यौहारी कुछ रुपए देकर उन्हें विदा करते हैं। ये कार्यक्रम कई घंटों तक चलता है। हुरियारे मुस्लिम परिवारों के घरों के बाहर यही सब दोहराते हुए फगुआ वसूलने के बाद ही वहाँ से हटते हैं।

गौरतलब है कि यहाँ 40 हजार की आबादी में सिर्फ 2 हजार हिंदू भाई खुलकर जश्न बनाते हैं और अपनी परंपरा को निभाते हैं। यह भी कहा जाता है कि यह परंपरा तब से चली आ रही है जब पूरा गाँव कभी हिन्दू बहुल था। कालांतर में नवाबी दौर में ज़्यादातर लोगों ने इस्लाम अपना लिया लेकिन यह परंपरा बची रही। खैर, भारत विविधताओं से भरा है ऐसे में ऐसी कोई परंपरा बची है तो तारीफ योग्य है। अगर इतनी सहिष्णुता हो तो भला त्यौहार मनाने में किसे समस्या होगी।

बंगाल को मिनी पाकिस्तान बना देंगी ‘बेगम’, ममता को मुबारकबाद देने की आदत पड़ गई है: सुवेन्दु अधिकारी

नंदीग्राम से भाजपा के प्रत्याशी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रतिद्वंदी सुवेन्दु अधिकारी ने ममता पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है कि वे जिस प्रकार ईद की ‘मुबारकबाद’ देती हैं वैसे ही होली की भी ‘मुबारकबाद’ दे रही हैं।

अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि आप बेगम (ममता बनर्जी) को वोट देंगे तो वह बंगाल को मिनी पाकिस्तान बना देंगी। अधिकारी ने यह बात नंदीग्राम के खोदांबरी में कही। यह जगह उस स्थान से थोड़ी ही दूर है, जहाँ ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित कर रहीं थी।

मुबारकबाक देने की है आदत :

अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी की आदत मुबारकबाद देने की हो गई है। तुष्टिकरण करते हुए वो अब होली की मुबारकबाद भी देने लगी हैं, जैसे ईद की मुबारकबाद देती हैं। अधिकारी ने वहाँ उपस्थित लोगों से कहा कि उन्हें (ममता बनर्जी) वोट मत देना अन्यथा वो बंगाल को एक मिनी पाकिस्तान बना देंगी।

पहले चरण के मतदान पर अपनी राय देते हुए अधिकारी ने कहा कि पूरा मतदान ‘पोरिबोर्तन’ पर हुआ है और पहले चरण में भाजपा सभी 30 सीटें जीतेगी।


अधिकारी ने ममता बनर्जी पर यह आरोप भी लगाया कि अब उन्हें हार का भय है जिस कारण अब वे मंदिरों में जाने लगी हैं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन पर योगी आदित्यनाथ जैसा शासन लागू करने की बात कहते हुए अधिकारी ने यह भी कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर योगी आदित्यनाथ जैसा प्रशासन बंगाल में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब यूपी बदल सकता है तो बंगाल क्यों नहीं।

वहीं दूसरी ओर नंदीग्राम में सभा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि लालच अच्छी बात नहीं है। वो न घर के रहेंगे न घाट के। ममता का इशारा सुवेन्दु अधिकारी की ओर था।

नंदीग्राम में है सबसे रोचक चुनाव :

नंदीग्राम में बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार एक अप्रैल को मतदान होने वाला है इसलिए ममता बनर्जी ने भी अपने क्षेत्र में डेरा डाल रखा है। नंदीग्राम में ममता के प्रतिद्वंदी के रूप में सुवेन्दु अधिकारी हैं जो कभी ममता के काफी करीबी हुआ करते थे। राज्य की इस सीट पर सबसे रोचक व काँटे का मुकाबला है।

बुरा न मानो होली है, जोगीरा सा रा रा : फागुन के गीत, जोगीरा, चैतावर और धमार, आज भूल रहे हैं लोग

होली का माहौल हो और जोगीरा न हो तो कैसे चलेगा। जोगीरा को बनारस में कबीरा भी कहते हैं। जोगीरा अवधी, भोजपुरी, बनारसी काव्य नाटक की एक मिश्रित विधा होती है, इसमें हास्य और व्यंग्य का ज़बरदस्त पुट होता है।

जोगीरा आमतौर पर भारतीय काव्य विधा का अव्यवसायिक संकलन है। इसमें हिंदी, उर्दू, भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी आदि पचास से अधिक भाषाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यह मुख्यतः चैत्र मास में होली के अवसर पर ही गाया जाता है। असल में होली खुलकर और खिलकर खेलने और कहने की परंपरा भी है। यही कारण है जोगीरे की तान में आपको सामाजिक विडम्बनाओं और विद्रूपताओं पर तंज देखने को मिल जाता है। चुनावी माहौल में तो राजनीति भी अछूती नहीं रहती। होली की मस्ती के साथ जोगीरा अपने आसपास के समाज पर भी चोट करता हुआ नज़र आता है।

होली गीत: साभार-मालिनी अवस्थी


जोगीरा की शुरुआत कब हुई, इसका ठीक-ठीक कोई इतिहास नहीं मिलता। फिर भी ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति जोगियों की हट साधना, वैराग्य और उलटबासियों का मजाक उड़ाने से शुरू होकर सामाजिक विद्रूपताओं पर चोट करने तक पहुँचा। ढोलक और मजीरे की तान पर अब तो ताशे भी खूब बजने लगे हैं जिसकी ताल पर मूलतः इसे ग्रुप में गाया जाता है।

आमतौर पर वसंत पंचमी से शुरू होकर चैत माह के आगमन तक ढोलक, झाल, झांझ, करताल जैसे वाद्य यंत्रों की सुमधुर धुन पर कभी हर शाम गाँवों के मंदिरों पर ग्रामीण टोली बनाकर होली के गीतों की तान छेड़ देते थे। देर रात तक चलने वाले इस आयोजन में धीरे-धीरे गाँव के और लोग जुड़ते जाते थे। वाद्य यंत्रों को बजाने और गाने वाले भी बीच में बदलते जाते थे। लेकिन यह सुर लहरी मध्य रात्रि के बाद तक जारी रहती थी। फागुन के गीत, जोगीरा, चैतावर, धमार इत्यादि के माध्यम से रात परवान चढ़ती थी। होली वाले दिन तो इस तरह की महफ़िल पूरे परवान पर रहती थी।

इसमें प्रश्नोत्तर शैली भी पाई जाती है, जिसके माध्यम से निर्गुण को समझाने के लिए गूढ़ अर्थयुक्त उलटबासियों का सहारा लेने वाले काव्य की प्रतिक्रिया में उन्हें रोजमर्रा की घटनाओं से जोड़कर रचा जाता है। वैसे परंपरागत जोगीरा काम-कुंठा के विरेचन का साधन भी है। इसमें एक तरह से काम अंगों और प्रतीकों का भरमार है। संभ्रांत और प्रभुत्व वर्ग को जोगीरा के बहाने गरियाने और उन पर गुस्सा निकालने का यह निराला ही तरीका होता है। यह एक तरह का विरेचन ही है। जिसके बाद गदगद हो, मनुहार करते हुए कह भी दिया जाता है बुरा न मानो होली है।

होली में जबरदस्त जुगलबंदी: साभार- दिनेश लाल यादव निरहुआ

होली का जोगीरा हो या सामान्य बातचीत। यह काशीवासियों को ख़ास बनाता है। कबीरा और जोगीरा कहे जाने का जिन्हें इतिहास पता होगा, वे लोग स्वाभाविक रूप से ज्यादा मजा ले सकेंगे। सामान्य जोगीरा में सीधे-सादे रूप में बात कही जाती है। तीसरे लाइन में सम्पुट या मुखड़े के रूप में सा रा रा कहा जाता है।

होली है और होली में अगर कुछ मस्ती ना हो तो रंग कुछ फीका लगने लगेगा तो आइए, पढ़िए कुछ खास जोगिरा… लेकिन हाँ, बुरा न मानिएगा, होली है।

सा रा रा रा रा रा रा रा रा, जोगीरा सा रा रा रा, बा भाई बा, बा खिलाड़ी बा…..

सामान्य जोगीरा —

हिंदुस्तानी सेना को जब आ जाता है तैश,
उड़े हवा में हाफिज वाफिज, पानी माँगे जैश…
जोगीरा सा रा रा रा रा।

जब-जब भारत पर मंडराए पाकिस्तानी बाज
घर में घुस कर ठोंके उनको अभिनंदन जाँबाज़…
जोगीरा सा रा रा रा रा।

ट्वीट-ट्वीट कर सबको घेरें, करते सबको तंग
देख नतीजे गठबंधन के फिर खुद भी रह गए दंग
जोगीरा सा रा रा रा रा।

पप्पू हारे, माया हारी, हार गए अखिलेश,
साहब अब तो नाचो गाओ, गायब हुआ कलेश
जोगीरा सा रा रा रा रा।

कहीं रंग है, कहीं भंग है, कहीं मचा हुड़दंग
मफलर वाले सीएम साहब, झेल रहे हैं व्यंग्य
जोगीरा सा रा रा रा रा।

रुक गया हाथी, भटका पंजा, साइकल चकनाचूर
खिला कमल है, हो गई होली, वोट मिला भरपूर
जोगीरा सा रा रा रा रा।

मोदी जी ने अलग ही ढंग से, ऐसा किया कमाल
अबकी होली, भगवा होली, नहीं चली कोई चाल
जोगीरा सा रा रा रा रा।

रोए मुलायम, आजम रोए, बचा ना कोई काम
अब तो भगवा राज हो गया, बोलो जय श्रीराम…
जोगीरा सा रा रा रा रा।

नतीजों के बाद पीएम मोदी के खास भाषण पर जोगीरा…
साहब बोले जीत है सबकी, खेलो होली संग
नहीं रहा अब कोई पराया, पंजा हो गया तंग
जोगीरा सा रा रा रा रा।

बा जोगीरा बा , बा भाई बा

एक जोगीरा कुछ ‘भटके’ हुए नौजवानों के नाम…

इधर चीन है, उधर पाक और अंदर नक्सलवाद
भारत माँ को गाली देकर ये करते बकवास
जोगीरा सा रा रा रा रा।

पूँछ पटक कर कुक्कुर खाए, चाट-चाट बिलार
सफाचट्कर माल्या खाया, खोज रही सरकार
जोगीरा सा रा रा रा।

सावन मास लुगइया चमके, कातिक मास में कुक्कूर
फागुन मास मनइया चमके, करे हुकुर-हुकुर
जोगीरा सा रा रा रा रा।

बनवा बीच कोइलिया बोले, पपीहा नदी के तीर
अँगना में भउजइया डोले, जैसे झलके नीर
जोगीरा सा रा रा रा रा।

बुआ रोए भतीजा रोए, रोए केजरीवाल
चौराहे पर पाकेट फाड़कर, राहुल करे बवाल
जोगीरा सा रा रा रा।

हाथी भटका पंजा भटका साइकिल चकना चूर
खिला कमल है शान निराली, ख़ुशी मिले भरपूर
जोगीरा सा रा रा रा।

सवाल-जवाब के फॉर्म में जोगीरा

चुनावी माहौल हो और बनारस का बात हो तो देखिए जोगीरा में भी बनारसी क्या-क्या कह जाते हैं। एक से बढ़ कर एक चुनावी तंज, सवाल-जवाब की श्रृंखला में नीचे वीडिओ में पूरा आनन्द उठाइए जोगीरा का, बस ध्यान रहे बम-बम भोले की काशी में रंग-अबीर लगा के कहते- बुरा न मानो होली है।

ताल द भइया, मोदी का चल रहा भौकाल रे, विपक्षी का चेहरा हुआ लाल लाल रे…..
सवाल- कोई कहत बा आलू से सोना बनाइब
कोई कहत बा 15 लाख ले आइब

जवाब-

आलू से सोना तू जईहा बनइबा
वही दिन पी एम क कुर्सी तू पइबा

15 लाख जबले सबके न दिआइब
पीएम के पद से न उनके हटाइब

जोगीरा की बनारस में विशेष परम्परा है, आनन्द उठाइए बनारसी मस्ती का

जोगीरा: साभार- सुनील छैला बिहारी

पासपोर्ट रद्द हुआ तो बोलीं महबूबा मुफ़्ती- CID रिपोर्ट पर मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताकर पासपोर्ट किया कैंसिल

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर उन्हें राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए पासपोर्ट जारी नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है।

महबूबा ने श्रीनगर के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी का लेटर ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पासपोर्ट कार्यालय ने सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर मुझे पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया है। इसमें मुझे भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। यह अगस्त 2019 के बाद से कश्मीर में पाई गई सामान्य स्थिति का स्तर है कि पूर्व मुख्यमंत्री को पासपोर्ट जारी करना देश की संप्रभुता के लिए खतरा है।”

पासपोर्ट ऑफिस द्वारा जारी पत्र

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती पर मनी लाँन्ड्रिंग का केस चल रहा है। इसी केस में बीते गुरुवार को ईडी की टीम ने उनसे 5 घंटे तक पूछताछ भी की थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने मुफ्ती के श्रीनगर स्थित घर से 23 दिसंबर 2020 को एक डायरी बरामद की थी, जिसमें कई प्रकार के वित्तीय लेनदेन का जिक्र था। जाँच एजेंसी इसी की पड़ताल में लगी हुई है।

TMC ने ABP पश्चिम बंगाल का शेयर किया ‘फेक’ एक्जिट पोल: चैनल ने कहा- यह झूठ है, सोशल मीडिया पर ममता का जमकर उड़ा मजाक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियाँ अपने-अपने तरीके से वोटरों को प्रभावित करने में लगी हैं। इसी कड़ी में सोमवार को तृणमूल कॉन्ग्रेस की डिजिटल मार्केटिंग टीम के द्वारा किया गया ‘फेक ट्वीट’ उसकी छीछालेदर करा रहा है।

दरअसल, TMC की डिजिटल टीम के मार्केटर प्रीतम सील ने ABP न्यूज का फेक सर्वे बनाकर ट्वीट कर दिया। इसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के पहले चरण में ममता बनर्जी की TMC को 23-26, BJP को 1-3 और कॉन्ग्रेस-लेफ्ट के गठबंधन को 0-1 सीटें मिलता दिखाया गया था।

हालाँकि, TMC का यह झूठ ज्यादा देर नहीं टिक सका। ABP न्यूज के डिजिटल कंटेट स्ट्रैटजी विभाग के हेड तुषार बनर्जी ने इसे ‘फेक’ करार दे दिया। तुषार ने TMC के ‘फेक’ सर्वे को लेकर ट्वीट किया, “यह झूठा है। कृपया हमें गलत तरीके से पेश करने से बचें। चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक हमारा एक्जिट पोल 29 अप्रैल को आएगा।”

तुषार के यह स्पष्ट करने के बाद भी TMC की डिजिटल मार्केटिंग टीम ने इसे पहले नहीं हटाया। काफी देर बाद किरकिरी होने लगी तो उसे डिलीट कर दिया गया।

हम यहाँ ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि सील नाम का व्यक्ति टीएमसी का कोई सदस्य है या उसकी डिजिटल टीम से जुड़ा कोई मार्केटर है। लेकिन उनकी इस हरकत से न सिर्फ ममता बनर्जी बल्कि पार्टी का भी लोगों ने जमकर मजाक उड़ाया।

बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतेंगे: अमित शाह

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं के चर्चा के बाद मैं ये कह सकता हूँ कि राज्य में पहले चरण की 30 में से 26 से अधिक सीटों पर हम जीत दर्ज करने जा रहे हैं। उन्होंने असम को लेकर कहा कि पार्टी वहाँ पर 47 में 37 सीट पर जीत हासिल करेगी।

ननदोई लोहकन खान के साथ तीसरी निकाह के लिए भागी मुंशीखान की बहु रेशमा, ससुराल के 9 लोगों को खाने में दिया जहर

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक शादीशुदा महिला ने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि सिमार गाँव में एक महिला ने अपने ननदोई से निकाह करने के लिए ससुराल के 9 सदस्यों को खाने में जहर दे दिया। परिवार के सभी सदस्यों का इलाज ग्वालियर में चल रहा है। वहीं, भिंड पुलिस ने रेशमा और उसके प्रेमी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, बरासो थाने के सिमार गाँव में रहने वाली रेशमा नाम की महिला अपने ही ननदोई लोहकन खान के प्रेम में पागल ​हो गई थी। दोनों के बीच ससुराल वाले आड़े आ रहे थे। इन्हें रास्ते से हटाने के लिए रेशमा ने उनके खाने में जहर मिला दिया। बताया जा रहा है कि मुंशीखान की बहू रेशमा की पहले ही दो शादी हो चुकी है। इस घटना के बाद से गाँव में हड़कंप मच गया है।

रेशमा की दूसरी शादी उसके पति के छोटे भाई से कर दी गई थी। इस दौरान रेशमा का उसके ननदोई लोहकन खान से प्रेम हो गया। रेशमा के ससुराल वाले इस प्रेम संबंध का विरोध करते थे। इसी बात से नाराज होकर रेशमा ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर यह खतरनाक वारदात को अंजाम दिया।

ससुराल के लोगों के बेसुध होने के बाद रेशमा अपने प्रेमी के साथ भाग गई। पड़ोसियों ने इसकी सूचना तुरंत बरासो थाना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सभी को उपचार के लिए मेहगाँव अस्पताल भेजा। जहाँ गंभीर हालत देखते हुए सभी को ग्वालियर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। पुलिस दोनों (रेशमा और खान) की तलाश में जुट गई है।

बता दें, 13 साल पहले यूपी के अमरोहा में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया था। एक साथ सात लोगों की हत्या ने जिले समेत पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। फिलहाल, शबनम अभी सलाखों के पीछे है।