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श्री जगन्नाथ मंदिर की 35000 एकड़ जमीन बेचे जाने पर आया प्रशासन का स्पष्टीकरण, रिपोर्ट्स को बताया- भ्रामक और विकृत

श्री जगन्नाथपुरी मंदिर की 35000 एकड़ जमीन से जुड़ी खबर वायरल होने के बाद मंदिर प्रशासन ने सामने आकर स्पष्टीकरण दिया है। प्रशासन ने बताया है कि मंदिर की भूमि बेचे जाने की खबरें पूर्ण रूप से फर्जी और प्रेरित हैं। इन्हें मीडिया में गलत तरह से रिपोर्ट किया गया।

पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर कार्यालय (SJTA) ने इस संबंध में लगातार ट्वीट शेयर किए हैं। इसमें उन्होंने बताया कि मंदिर की जो जमीन लंबे समय से अलग-अलग लोगों के कब्जे में हैं, उसको लेकर साल 2003 में ‘एकीकृत नीति’ बनाई गई थी। अब उसी के अनुसार मंदिर कमेटी द्वारा जमीन का निपटान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एकीकृत नीति का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की जमीन की रक्षा करना था। अब तक 2001 से 2010 तक, 291 एकड़ भूमि का निपटान किया गया और 2011 से 2021 तक 96 एकड़ एकड़ भूमि का निपटान किया गया है। जमीन का उपयोग जनता के लाभ के लिए जैसे स्कूलों, मेडिकल कॉलेज, सड़कों आदि के रूप में किया गया।

SJTA ने कहा कि जगन्नाथ महाप्रभु की 35,000 एकड़ जमीन को बेचने की रिपोर्टिंग पूरी तरह से गलत और प्रेरित है। हम ओडिशा के लोगों और भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों से ऐसी रिपोर्टिंग से गुमराह न होने का आग्रह करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार और अन्य को सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि के आवंटन के बारे में निर्णय जगन्नाथ मंदिर समिति द्वारा लिया जाता रहा है।  

बता दें कि मंदिर प्रशासन की यह प्रतिक्रिया उन खबरों के जवाब में आई है जिसमें दावे किए जा रहे थे कि मंदिर 35000 एकड़ जमीन बेची जा रही है। दरअसल, मंगलवार को कानून मंत्री प्रताप जेना ने इस मामले पर बयान दिया था। उन्होंने बताया था कि पूर्व राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी और जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति से स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार ने मंदिर की 35,272 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा था कि भगवान जगन्नाथ के नाम पर 24 जिलों में 60,426 एकड़ जमीन की पहचान की गई है, ये जमीनें पूरे राज्य में फैली हैं। इनमें करीब 395 एकड़ बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में है। इन जमीनों में से अबतक मंदिर प्रशासन द्वारा 34,876 एकड़ जमीन पर सफलतापूर्वक दावा किया जा चुका है, इनके फंड मंदिर में जमा करवाए जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि इस खबर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही हिंदुओं मंदिर और उनपर सरकार के नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई थी। मंदिर से जुड़ी इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि जिन लोगों ने 30 साल से अधिक समय से मंदिर की जमीन का अतिक्रमण किया है, वे रुपए देकर भूमि पर कब्जा कर सकते हैं। 30 साल से कम और 20 साल से ज्यादा रहने वाले लोग 9 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से ले सकते हैं। ऐसे ही 20 से भी कम लेकिन 12 साल से ज्यादा रहने वालों को 15 लाख रुपए देकर जमीन का अधिकार मिल जाएगा।

दिल्ली से निकाले गए तो मेवात में बनाया ठिकाना, नूँह के मुस्लिम रोहिंग्या घुसपैठियों को दे रहे पनाह: रिपोर्ट

हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोग रोहिंग्या घुसपैठियों को आश्रय दे रहे हैं। यह एक मुस्लिम बहुल इलाका है। साथ ही यह इलाका पशुओं की तस्करी सहित विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों के लिए भी पहचान रखता है।

बताया जाता है कि दिल्ली से बाहर किए गए ज्यादातर रोहिंग्या ने हरियाणा में पनाह ली है।विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हरियाणा में रोहिंग्याओं की मौजूदगी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या को तुरंत रिहा करने और उन्हें प्रत्यर्पित करने से रोकने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से याचिका दायर की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा सरकार राज्य में बसे अवैध रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के प्रयास कर रही है। सरकार इनके दस्तावेजों की पड़ताल की योजना बना रही है। हालाँकि इस प्रक्रिया में थोड़ा वक्त लग सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 600-700 रोहिंग्या परिवार राज्य में बसे हैं। करीब 2 हजार रोहिंग्या के अकेले मेवात जिले में होने की बात कही जा रही है। लेकिन, विहिप का मानना है कि ये संख्या वास्तविकता से काफी काम है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का दावा है कि यह संख्या लाखों में हैं। हरियाणा में रहने वाले ज्यादातर रोहिंग्या कथित तौर पर मेवात (नूँह), फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल और यमुना नगर जिलों में बसे हैं। राज्य के अन्य जिलों में भी रोहिंग्या हैं, लेकिन उनकी पहचान करना मुश्किल है क्योंकि इनमें से ज्यादातर ने फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनवा रखे हैं।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में सख्ती के बाद रोहिंग्याओं के पंजाब की तरफ जाने की भी खबरें आई थीं। जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि विहिप 2008 से ही देश से रोहिंग्या मुस्लिमों को निकाले जाने को लेकर प्रयास कर रहा है। उस समय दिल्ली से निकाले जाने के बाद ये रोहिंग्या हरियाणा और उत्तर प्रदेश चले गए और वहाँ अपनी बस्तियाँ बसा ली। अब इन्हें मेवात में मुस्लिमों द्वारा पनाह दी जा रही है।

2008 में रोहिंग्या चाहते थे कि भारत में स्थायी तौर पर रहने के लिए उन्हें रिफ्यूजी का दर्जा दिया जाए। इसको लेकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। उस समय बंसल ने केंद्र सरकार को 40 पन्नों का पत्र लिखकर इन्हें रिफ्यूजी का दर्जा नहीं देने का आग्रह किया था। साथ ही इससे होने वाले खतरों को लेकर भी आगाह किया था। विहिप के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा था कि इनके विभिन्न देशों के आतंकी संगठनों से संपर्क होने की भी आशंका है।

रिपोर्ट में बंसल के हवाले से बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने देश में रहने वाले रोहिंग्या की संख्या 40 हजार के करीब बताई है, लेकिन असल संख्या लाखों में हो सकती है। कथित तौर पर ज्यादातार रोहिंग्या हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं।

हरियाणा सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) का समर्थन किया था और राज्य में इसे लागू करने की सोच रही है। इसके लिए राज्य सरकार परिवारों के परिचय पत्र और उनका डाटा तैयार करने की दिशा में काम भी कर रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी एनआरसी का समर्थन करते हुए कहा था कि कानून किसी बाहरी को देश में रहने की इजाजत नहीं देता है। उन्हें अवैध प्रवासियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

बंगाल में फिर हुई BJP कार्यकर्ता की हत्या, पेड़ से लटका मिला शव: पार्टी ने कहा- ये प्रजातंत्र की हत्या, जनता देगी जवाब

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हिंसा का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। राज्य में आज (मार्च 18, 2021) एक और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की लाश पेड़ से झूलती मिली। मृतक की पहचान विकास नस्कर के रूप में हुई। वह दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दक्षिण के निवासी थे।

भाजपा की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, “विकास नस्कर की हत्या हुई है। वह बूथ नंबर 57 का बीजेपी का कार्यकर्ता थे।” भाजपा का कहना है कि यह केवल एक युवक की हत्या नहीं है, ये प्रजातंत्र की हत्या है। बंगाल की जनता इसका जवाब देगी।

मालूम हो कि एक तरफ सोनारपुर में विकास पर हमला हुआ, दूसरी ओर नंदीग्राम से बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को जहाँ सोनाचूड़ा रोड शो में शामिल होना था, वहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए और एक बीजेपी कार्यकर्ता के सिर पर लाठी से प्रहार किया गया।

इससे पूर्व भाटपाड़ा के जगदाल इलाके में बुधवार को अर्जुन सिंह के आवास सह कार्यालय ‘मजदूर भवन’ को निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में करीब 15 जगहों पर टीएमसी कैडरों ने बम फेंके। सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया गया।

बंगाल के बाद असम में PM मोदी ने भरी हुंकार

उल्लेखनीय है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के बढ़ते आतंक को बंगाल में देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुलिया में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि इन चुनावों में टीएमसी साफ हो जाएगी। 

वहीं असम में रैली के दौरान अपनी बात रखते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने इस बात पर गौर करवाया कि जैसे आज बंगाल में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट साथ हैं। वहीं केरल में दोनों के बीच कुश्ती चल रही है। उन्होंने पूछा कि असम में भी कॉन्ग्रेस किसके भरोसे हैं? उन्हीं लोगों के, जिनसे स्थानीय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता दशकों से लड़ रहे हैं। अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने असम में हुए विकास कार्यों, वहाँ की संस्कृति पर बात की। साथ ही 5 सालों में हुए कार्यों के बारे में बताया।

होटल चाँद में अनवर और इब्राहिम बना रहे थे थूक वाली तंदूरी रोटी, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद के बाद थूक लगाकर रोटी बनाने का मामला अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आया है। सोशल मीडिया पर फिर एक वीडियो वायरल होना शुरू हुई है जिसमें दो युवक थूक कर तंदूरी रोटियाँ बना रहे हैं। 

वीडियो में नजर आने वाले दोनों युवकों की पहचान सबी अनवर और इब्राहिम के तौर पर हुई है। दोनों पश्चिमी दिल्ली में चलती सड़क के किनारे तंदूरी रोटी बनाते हुए उस पर थूक रहे हैं। पुलिस ने इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 269/270/272/273/34 के तहत ख्याला थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी प्रशांत किशोर ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी ट्विटर से मिली थी और उन्होंने इस पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस से मामले की पुष्टि करवाई। पड़ताल में पता चला कि ये वीडियो ख्याला इलाके में स्थित होटल चाँद की है। आमिर नाम का व्यक्ति वह होटल चलाता है।

डीसीपी ने बताया कि इस होटल में दो लड़के काम करते हैं- सबी अनवर और इब्राहिम। दोनों किशनगंज बिहार से आते हैं। सफेद बनियान में नजर आने वाला इब्राहिम है। वही वीडियो में रोटी पर थूकते भी दिख रहा है। दोनों के विरुद्ध आईपीसी की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। साथ ही होटल चलाने वाले के विरुद्ध भी एक्शन लिया गया है।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में थूक कर रोटी बनाए जाने की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। पकड़े गए आरोपित नौशाद ने खुलासा किया था कि वो पिछले 10-15 वर्षों से विभिन्न शादी समारोहों में इस तरह की हरकत कर रहा था। 

उसके बाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से रोटी बनाते समय तंदूर में थूक लगाने का वीडियो सामने आया था। पुलिस ने वीडियो की जाँच में आरोपित की पहचान मोहसिन के तौर पर की थी। बात बढ़ने पर वह मुरादनगर स्थित अपने घर से फरार हो गया था। हालाँकि बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

मुंबई के नए CP हेमंत नागराले की भी विवादों से यारी: टॉर्चर करने, अप्राकृतिक सेक्स और आय से अधिक संपत्ति जैसे लग चुके हैं आरोप

महाराष्ट्र में जब से महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी है, मुंबई पुलिस लगातार विवादों में है। एंटीलिया केस में सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए उससे राज्य सरकार और मुंबई पुलिस दोनों की जमकर किरकिरी हुई। डैमेज कंट्रोल के मकसद से परमबीर सिंह को हटा दिया गया। उनकी जगह हेमंत नागराले को मुंबई का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया।

पदभार सँभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए नागराले ने कहा था कि मुंबई पुलिस कठिन दौर से गुजर रही है। लेकिन, रिकॉर्ड बताते हैं कि परमबीर सिंह की तरह ही नागराले भी विवादित रहे हैं

नागराले 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। मुंबई का पुलिस कमिश्नर बनाए जाने से पहले वे महानिदेशक (तकनीकी और कानूनी) थे। वे मूल रूप से महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती गाँव के रहने वाले हैं। विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। पहले इसे विश्वेश्वरैया रिजनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नागपुर के नाम से जाना जाता था। उन्होंने मुंबई के जमनलाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से मॉस्टर आफ फाइनेंस की पढ़ाई की है।

अकादमिक शिक्षा पूरी होने के बाद नागराले सिविल सेवाओं की परीक्षा में शामिल हुए और आईपीएस बने। 1998 में डेपुटेशन पर सीबीआई (CBI) में जाने से पहले पुलिस में विभिन्न भूमिकाओं का निवर्हन किया। वे सीबीआई में मार्च 1998 से सितंबर 2002 तक रहे।

सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई केस की तफ्तीश की। इनमें 130 करोड़ रुपए का बैंक ऑफ इंडिया केस, जिसमें केतन पारिख संलिप्त था और 1800 करोड़ रुपए का माधवपुरा को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम, जिसे हर्षद मेहता स्कैम के नाम से भी जाना जाता है, प्रमुख हैं। अपने लंबे करियर के दौरान नागराले को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल, विशेष सेवा पदक सहित कई पुरस्कार मिले हैं। वे जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में कई मेडल भी जीत चुके हैं।

26/11 हमलों के वक्त नागराले MSEDCL में डेपुटेशन पर थे। बचाव अभियान के जरिए बंधकों को सुरक्षित जगह पहुँचाना और घायलों को अस्पताल ले जाना उनकी जिम्मेदारी थी। रिपोर्टों के मुताबिक हमले के वक्त नागराले ताज होटल में दाखिल हुए थे और घायलों को बाहर लाए थे। इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने आरडीएक्स से भरा एक बैग भी बरामद किया था। उनके पूर्ववर्ती परमबीर सिंह सहित कुछ और अधिकारियों पर इसी दौरान लापरवाही बरतने के आरोप रहे हैं।

अब बात नागराले से जुड़े विवादों की। ऐसा ही एक मामला कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा है। इस संबंध में नागराले की पूर्व पत्नी प्रतिमा ने शिकायत की थी। 1990 में शादी करने के बाद दोनों का फरवरी 2009 में तलाक हो गया था। इसके बाद प्रतिमा ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर नागराले पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया।

प्रतिमा का आरोप था कि नागराले ने उनके नाम से तीन बैंक खाते खोल रखे हैं, जिससे बेनामी लेन-देन की गई। यह भी आरोप लगाया कि नागराले ने कई करोड़ की 12 संपत्ति राज्य के चार जिलों में उनके या अपने नाम से खरीदी है। बचाव में नागराले ने कहा था कि बदले की नीयत से शिकायत की गई है। उन्होंने कहा था कि संपत्ति और बैंक खाते की जानकारी प्रतिमा के इनकम टैक्स रिटर्न्स में है, लिहाजा इसे राज्य सरकार के सामने घोषित किए जाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी दलीलें खारिज करते हुए राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो से इस मामले की जाँच को कहा था

इसके अलावा पत्नी ने नागराले पर शारीरिक और मानसिक यातना देने के भी आरोप लगाए गए थे। तलाक से पहले 2008 में प्रतिमा ने उनके खिलाफ शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर करने की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिमा के आरोपों के जवाब में नागराले ने कोर्ट को बताया था कि वह एक मानसिक अवसाद से पीड़ित है और इसकी वजह से उन पर झूठे आरोप लगा रही है।

आखिरकार BJP के हुए पर्दे के ‘राम’ अरुण गोविल, लोगों ने कहा- अबकी सही पार्टी का किया चुनाव, बंगाल में करेंगे प्रचार

रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में भगवान राम की भूमिका निभाकर लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले अरुण गोविल आज (मार्च 18, 2021) भारतीय जनता पार्टी के साथ आधिकारिक तौर पर जुड़ गए। उन्होंने भाजपा मुख्यालय में पहुँचकर पार्टी की सदस्यता ली।

5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले अरुण गोविल का बीजेपी से जुड़ना बेहद अहम है। वह पार्टी के लिए बंगाल में प्रचार भी करेंगे। उन्होंने आज पार्टी से जुड़ने के पहले अपने ट्विटर पर एक ट्वीट भी किया। इसमें उन्होंने कहा था, “समस्त बड़ी गलतियों की तह में अहंकार ही मूल कारण होता है।”

उल्लेखनीय है कि अरुण गोविल के भाजपा से जुड़ने के बाद लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस बार सही पार्टी का चुनाव किया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि गोविल अपनी सादगी के साथ जिस तरह पर्दे पर छाए वैसे ही राजनीति में भी छाप छोड़ेंगे।

बता दें कि 1988 में  कॉन्ग्रेस ने अरुण गोविल, की लोकप्रियता को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास किया था। एक इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद यह स्वीकारते हुए देखे गए थे कि कॉन्ग्रेस ने रामायण के पात्र का इस्तेमाल एक कलाकार के रूप में नहीं बल्कि ‘राम’ के रूप में करना चाहती थी ताकि लोग वीपी सिंह के खिलाफ मतदान कर सकें। कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करते समय रामायण के पात्र ने यह कहते हुए प्रचार किया था कि भगवान राम का नाम लेकर कॉन्ग्रेस को वोट करें।

लॉकडाउन के समय अधिक बढ़ी लोकप्रियता

पिछले साल लॉकडाउन के बाद दूरदर्शन पर शुरू किए गए रामायण के प्रसारण ने अरुण गोविल समेत अन्य कलाकारों को नई पीढ़ी के बीच भी लोकप्रिय कर दिया था। उस समय रामायण को एक ही दिन में में 77 मिलियन (यानी 7.7 करोड़) दर्शक मिले थे। वहीं ‘रामायण’ ने सबसे अधिक टीआरपी का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। टीआरपी के मामले में इस धारावाहिक ने पिछले 5 साल के हर रिकॉर्ड को तोड़ दिया था और मात्र 4 दिन के भीतर 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले थे, तभी रामायण में किरदार निभाने वाले सभी कलाकारों के सोशल मीडिया फैन्स में भी एक औचक बढ़ौतरी देखने को मिली थी।

जहाँगीरपुरी में 15 साल की लड़की का धर्मपरिवर्तन करवाकर होने जा रहा था निकाह, DCW ने मौके पर पहुँचकर रोका

दिल्ली के अमन विहार के बाद अब जहाँगीर पुरी से एक नाबालिग लड़की के धर्मपरिवर्तन और निकाह करवाने का मामला सामने आया है। दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने स्वयं मौके पर पहुँचकर इस निकाह को रुकवाया। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी इस दौरान मौके पर मौजूद रहीं।

DCW के प्रवक्ता राहुल ताहिलियानी के ट्वीट के मुताबिक, लड़की का धर्मपरिवर्तन कर निकाह करवाया जा रहा था। लेकिन स्वाति मालिवाल के नेतृत्व में पहुँची टीम ने पुलिस के साथ मिल कर विवाह रुकवा दिया।

राहुल के ट्वीट में शेयर की गई वीडियो में स्वाति मालीवाल लड़की के घरवालों से बात करती दिखाई दे रही हैं। वह कहती हैं, “दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में एक 15 साल की लड़की का निकाह कराया जा रहा था। जैसे ही हमें ये पता चला, हमारी टीम ने मौके से पहुँचकर उस निकाह को रुकवा दिया।”

घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मालीवाल ने कहा, “मुझे बहुत दुख होता है कि आज भी इस देश में, यहाँ तक की देश की राजधानी में बच्चों के बालविवाह करवाए जा रहे हैं। ये बहुत ही शर्म की बात है और ऐसे लोग जो बच्चों से उनके बचपन छीन लेते हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। इस केस में भी मैं दिल्ली पुलिस से अनुरोध करूँगी, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए और जो लड़की है उसके पुनर्वास पर दिल्ली महिला आयोग काम करे।”

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर शिकायत दर्ज कर ली है और बच्ची के परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया है, इसके अलावा जिस लड़के के साथ बच्ची का निकाह करवाया जा रहा था, उसके परिवार वालों को भी पुलिस अपने साथ लेकर गई है। दोनों परिवार जहाँगीर पुरी के एच ब्लॉक के पास की झुग्गियों में रहते थे।

मालूम हो कि इससे पहले दिल्ली के अमन विहार के वार्ड संख्या 41 में ऐसे ही मामले को लेकर विवाद हुआ था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि एक नाबालिग हिंदू लड़की का धर्मांतरण कर निकाह 40 साल के मोहम्मद इंतजार हुसैन से करावाया जा रहा था। वे दिल्ली पुलिस पर सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगा रहे थे। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस कह रही थी कि दोनों नाबालिग हैं जबकि लड़की की आयु 17 वर्ष बताई जा रही थी और वह 7वीं कक्षा में पढ़ती थी।

बंगाल में मंदिर की 30 बीघा जमीन पर कब्ज़ा करके बना दिया कब्रिस्तान, बनाई नकली कब्रें, गाँव में हिन्दुओं की नाकाबंदी: रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के नदिया में माता के मंदिर की जमीन हथिया कर उस पर कब्रिस्तान बनाने की बात सामने आई है। आरोप है कि जब कोरोना वायरस संक्रमण से पूरा देश जूझ रहा था और लॉकडाउन लगाया गया था, तब वहाँ मंदिर की 30 बीघा जमीन हथिया कर उसे कब्रिस्तान में तब्दील कर दिया गया। स्थानीय मुस्लिम समाज पर जमीन के अवैध कब्जे का आरोप लगा है। ये घटना पश्चिम बंगाल में नदिया के घोसपाड़ा इलाके की है।

‘न्यूज़ नेशन’ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय दोनों समुदायों में बहस इस बात को लेकर शुरू हुई कि ये भूमि सरकारी है या फिर किसी समुदाय विशेष की और फिर दोनों पक्ष सबूत के रूप में दस्तावेज दिखाने लगे, लेकिन ये बहस जल्द ही मारपीट में बदल गई। वीडियो में लोगों को लड़ते हुए देखा जा सकता है, जिसमें बुजुर्ग महिलाएँ भी शामिल हैं। जहाँ हिन्दू समाज ने कहा कि ये सरकारी भूमि है और सार्वजनिक है, मुस्लिम समाज ने कागज़ उनके पास होने की बात कही।

लेकिन, पत्रकार ने दावा किया कि जब मुस्लिम समाज से उसने कागज़ात दिखाने को कहा तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि जबरन भूमि पर कब्ज़ा करने के प्रयास पूरे पश्चिम बंगाल के कई इलाके में चल रहा है। मारपीट में लाठियाँ भी चलीं। एक स्थानीय हिन्दू व्यक्ति ने बताया, “यहाँ बाउंड्री बना दी गई है। मुस्लिमों ने गेट लगा दी। यहाँ पहले कोई कब्रिस्तान था ही नहीं। बाउंड्री न होने के कारण लोगों की आवाजाही थी।”

आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान में नकली कब्रें तैयार कर दी हैं, ताकि उस जमीन पर कोई और कुछ न कर सके। आरोप है कि उन्होंने बाउंड्री खड़ी कर के गाँव का रास्ता रोक दिया है। हिन्दुओं का कहना है कि उनका उत्पीड़न हो रहा है और अपने ही गाँव में उनकी नाकाबंदी कर दी गई है। एक बुजुर्ग ने बताया कि ये हिन्दुओं की जमीन है जहाँ सावन में मेला लगता था और पूजा होती थी।

बुजुर्ग ने कहा कि लॉकडाउन में जोर-जबरदस्ती से किए गए कब्जे के कारण अब वहाँ हिन्दू जा ही नहीं सकते। एक महिला ने बताया कि पहले वो लोग मंदिर में जाकर अगरबत्ती जला कर पूजा कर सकते थे, लेकिन अब नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि केवल हिन्दू होने के कारण उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा है। ‘न्यूज़ नेशन’ का दावा है कि कब्रिस्तान में मंदिर के अवशेष अब भी हैं और मूर्तियाँ पड़ी हुई हैं, पूजा-पाठ के संकेत हैं।

वहाँ अब भी सिन्दूर और रोली जैसी चीजें देखी जा सकती हैं। चुनावी माहौल में रंग चुके बंगाल के घोसपाड़ा के स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यहाँ कब्रिस्तान होना चाहिए था तो असली कब्रें क्यों नहीं हैं, दिखाने के लिए नकली क्यों बनाई गईं? कुछ हिन्दुओं ने कहा कि रास्ता बंद हो जाएगा तो उन्हें भागने को मजबूर होना पड़ेगा, पलायन करना पड़ेगा। एक महिला कनकलता घोष का कहना है कि ये जमीन उनके पति की हुआ करती थीं, जिनकी मौत के बाद इस पर कब्ज़ा कर लिया गया।

महिला ने बताया कि हमारे घर के लोग पहले वहाँ जाते थे और पूजा-पाठ करते थे, लेकिन अब उन लोगों ने सब रोक दिया है। महिला ने बताया, “वो लोग कहते हैं कि यहाँ हिन्दुओं का आना मना है।” जबकि एक मुस्लिम बुजुर्ग ने बताया कि वो बचपन से देख रहा है कि यहाँ मिट्टी का घर था और कब्रिस्तान नहीं था। हिन्दुओं ने इसके लिए प्रशासन पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, किसी भी समुदाय ने जमीन के कागजात नहीं दिखाए।

रामपुर: निकाह की दावत के लिए घर में हो रही थी गोकशी, दूल्हा यासीन समेत 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के रामपुर के टांडा में गोकशी के आरोप में एक दूल्हा अपने परिजनों समेत निकाह वाले दिन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शादी के घर से करीब एक क्विंटल गोमाँस पकड़ा और ऐसे उपकरण भी बरामद किए जिनसे जानवर काटे जाते हैं। सभी आरोपित जेल भेज दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला टांडा के लालपुर कला गाँव का है। देर रात पुलिस को मुखबिर ने जानकारी दी कि एक शादी वाले घर में गोकशी चल रही है। सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची और घर में गायों को कटते देख हैरान रह गई। पुलिस ने फौरन घर की घेराबंदी कर परिवार के 6 लोगों को पकड़ा।

गिरफ्तार किए गए लोगों में अब्दुल सलाम, बाबू हाजी, मोहम्मद रफी, भूरा, मोहम्मद इस्लाम और मोहम्मद यासीन शामिल है। यासीन के ही निकाह की दावत के लिए गोकशी हो रही थी। पुलिस ने बताया कि बुधवार (17 मार्च 2021) को होने वाले दावत-ए-वलीमा के लिए गोकशी हो रही थी। पुलिस ने सभी के खिलाफ गोकशी की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है।

पुलिस अधिकारी माघो सिंह बिष्ट ने बताया, सभी के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपितों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। दूल्हे की गिरफ्तारी के बाद निकाह कैंसिल हो गया। पुलिस के अनुसार इस संबंध में थाना टांडा पर आईपीसी की धारा 3/5/8 गौवध निवारण अधिनियम पंजीकृत किया गया है। 

गौरतलब है कि कुछ समय पहले घर में गोकशी का ही एक मामला यूपी के फतेहपुर जिले से आया था। वहाँ खागा के मजरे खैरई में एक घर में गोकशी करने पर 10 आरोपित पकड़े गए थे। पुलिस को उनके पास से पूरा ढाई क्विंंटल गोमाँस बरामद हुआ था।

प्रभारी निरीक्षक ने इस मामले में बताया था कि जब वह जबरील नाम के युवक के घर की घेराबंदी करने लगे तो आरोपित भागने लगे। पुलिस ने तभी घर से 10 लोगों को गिरफ्तार किया और करीब 250 किलोग्राम माँस, चार चाकू, दो कुल्हाड़ी, एक तराजू-बांट, मवेशी के अंगों के अवशेष बरामद किए थे।

‘वो चाहते हैं कि एक-एक हिन्दू महिला उनकी रखैल बने’: YouTube ने हटाया यति नरसिंहानंद सरस्वती का वीडियो

वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) का एक बार फिर से हिन्दू विरोधी रवैया सामने आया है। डासना शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के इंटरव्यू के एक वीडियो को YouTube ने हटा दिया। ये सब इसके बावजूद किया गया, जब कई जगह उनके शब्दों को सावधानी के लिए बीप कर दिया गया था। डासना मंदिर में आसिफ नाम के एक 15 साल के लड़के की पिटाई के बाद वामपंथी मीडिया ने दावा किया था कि वो मंदिर के भीतर पानी पीने गया था।

उक्त वीडियो ‘Dopolitics’ नामक यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुआ था, जिसे हजारों लोगों ने देखा था। हालाँकि, फेसबुक पर उनके इंटरव्यू का ये वीडियो अभी भी मौजूद है, जिसे साढ़े 9 लाख लोग देख चुके हैं। इस वीडियो में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाके में एक मंदिर के होने का दर्द बयाँ किया है और साथ ही ‘पानी पीने के कारण पिटाई होने’ वाले नैरेटिव को ध्वस्त किया है।

महंत ने इस वीडियो में बताया था कि वो उस मीडिया से दूर रहना चाहते हैं, जो उनकी बातें सुन कर उसका उलटा मतलब निकाल कर दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि आज एक 14 साल का मुस्लिम लड़का पिट गया तो दुनिया भर की मीडिया यहाँ आ रही है लेकिन इससे पहले महंतों की हत्याएँ हुईं, उन्हें भगाया गया, 4 बार मंदिर में डकैती हुई और छेड़खानी की कई शिकायतें आईं, तब मीडिया यहाँ सुध लेने नहीं आया।

उन्होंने कहा कि इस मंदिर में महंतों की ऐसी हत्याएँ हुई हैं कि उनकी लाशें तक नहीं मिली। उन्होंने मुस्लिमों पर 16 बीघे का श्मसान कब्जाने का भी आरोप लगाया। महंत सरस्वती ने बताया कि आज़ादी से पहले मंदिर की 250 बीघा जमीन थी, जिसमें से अधिकतर पर कब्जा होने के बावजूद मीडिया नहीं आया। उन्होंने पूछा कि क्या हिन्दुओं के जीवन की कीमत नहीं? उन्होंने कहा कि मीडिया को ‘लव जिहाद’ नहीं दिखाई देती।

इस दौरान उन्होंने श्रीराम कॉलोनी के एक तिवारी जी की कहानी सुनाई, जो उनके मुताबिक पुलिस में थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को एक मुस्लिम भगा कर ले गया और वो व्यक्ति आज मसूरी में रह रहा है, लेकिन लड़की का कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ ऐसा हो सकता है तो आम आदमी के साथ सोच लीजिए। उन्होंने बसपा विधायक असलम चौधरी के बेटे पर मंदिर में हिन्दू लड़की से बदतमीजी करने व धमकी देने का आरोप लगाया।

उन्होंने क़स्बे में 95% मुस्लिमों के होने के आरोप को दोहराते हुए कहा कि उनकी हत्या के लिए 5000 मुस्लिमों ने पंचायत की थी, जिसमें AIMIM नेता और विधायक तक शामिल थे। उन्होंने अफगानिस्तान और कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक परिवार में 20-20 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया भी नहीं जाता। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं हिन्दुओं की अंतिम शरण स्थली उनसे छिन न जाए।

उन्होंने डासना मंदिर का इतिहास बताते हुए कहा कि यहाँ महाकाली की प्राचीनतम प्रतिमाओं में से एक है और महाभारतकाल में यहाँ पांडव भी आए थे। साथ ही जानकारी दी कि इस्लामी आक्रांताओं के कारण माँ की प्रतिमा को तालाब में छिपा दिया गया था। उन्होंने बताया कि एक ऐसा समय था, जब रात को मेले में यहाँ हिन्दू श्रद्धालु नहीं आते थे। परिवार के बारे में बात करते हुए महंत ने बताया कि उनके दादाजी एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने कहा,

“मैं कम्युनिस्ट रूस में पढ़ा हूँ। मस्जिदों/मदरसों से मुझे इस्लाम की जानकारी मिली। कई मुस्लिम दोस्त थे मेरे। इस इलाके में हिन्दू बहू-बेटियों का घर में घुस कर रेप की कोशिश की जाती थी। यहाँ मुस्लिम लड़कों की करतूतों की शिकायत करने पर बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाले मौलाना लड़ने आते थे। मैं गणितज्ञ हूँ। 1994 में मैंने एम. टेक कर लिया था। मस्जिदों और मदरसों में मैंने देखा कि मुस्लिम हिन्दुओं की एक-एक बेटी को रखैल बनाना चाहते हैं। वो हिन्दुओं की एक-एक संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।”

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने आगे कहा कि ‘बीप’ के बारे में बोलते हुए पूछा कि जो लोग एक चोर, एक डकैत का अनुसरण करते हैं वो लोग कैसे होंगे? उन्होंने कहा कि उनकी हत्या भी हो जाए तो लोगों को पता चलेगा कि मैं सत्य पर था। उन्होंने ‘जिहादियों के पेरोल’ पर जी रही मीडिया को भी लताड़ा। उन्होंने विश्व धर्म संसद बुला कर इस्लाम के जिहाद पर बात करने की बात कही, जिसमें देश-विदेश के धर्मगुरुओं को बुलाया जाए।

उन्होंने कहा कि अगर 2029 में भारत का प्रधानमंत्री कोई मुस्लिम हुआ तो ये दुनिया भर की एक ऐसी दुर्दांत घटना होगी, जिसके बाद भारत में कोई नॉन-मुस्लिम नहीं बचेगा और ‘इस्लामी भारत’ दुनिया का सबसे बड़ा खतरा होगा। उन्होंने कहा कि देवबंद के दारुल उलूम और तबलीगी जमात के खिलाफ वो लोगों को जागरूक करते रहते हैं। साथ ही दावा किया कि तबलीगी जमात ने 40 देशों को इस्लामी बना दिया।

महंत यति ने कहा कि एक भी मुस्लिम देश किसी एक भी शरणार्थी को बसने नहीं देते हैं, जिसके बाद वो वहाँ बस जाते हैं जहाँ मुस्लिम नहीं हो। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं भाईचारे के कॉन्सेप्ट में भाई वो रहे और चारा हम हो गए। उन्होंने कहा कि संविधान भी उनकी हरकतों पर लगाम नहीं लगा सकता। बकौल यति नरसिंहानंद सरस्वती, देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 40 करोड़ हो गई है क्योंकि उन्होंने आँकड़े छिपाए हैं।

उन्होंने कहा, “हिन्दुओं के बड़े-बड़े घरों में बुजुर्ग रह रहे हैं क्योंकि बच्चे विदेश चले गए, जबकि मुस्लिमों के घर में सोने के लिए भी जगह नहीं है। उनका लक्ष्य है कि वो दुनिया भर के 500 करोड़ काफिरों का क़त्ल करेंगे। मैं माँ और महादेव का भक्त हूँ, लेकिन मैं गीता को मानता हूँ। भगवद्गीता में कहा गया है कि जिसके मन में संशय है, उसका विनाश निश्चित है। गुरु तेगबहादुर मेरे आदर्श हैं, जिन्होंने धर्म के लिए शीश कटा दिया।”

उधर आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया कि उन्होंने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता। उन्होंने कहा कि आसिफ के साथ एक और लड़का था, जो अपनी पैंट की चेन खोल कर गलत हरकतें कर रहा था।