प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका यात्रा से खफा वहाँ का चरमपंथी इस्लामी आतंकी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश में खून की होली खेल रहा है। पीएम मोदी के वापस लौटते ही इस संगठन ने चटगाँव स्थित ब्राम्हनबरिया में जमकर हिंसा की। हिफाजत के समर्थकों ने कई मंदिरों को तोड़ने के बाद अब यहाँ मंदिर में रखी माँ काली और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को तोड़ दिया है।
इस्लामी चरमपंथियों के इस दंगे में 10 से भी ज्यादा लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। इन्होंने प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के पार्टी कार्यालय समेत पुलिस स्टेशन, आम दफ्तरों और बसों में जमकर तोड़फोड़ की। बांग्लादेश में चरमपंथियों ने एक ट्रेन के 15 डिब्बों को तहस-नहस कर दिया। कट्टरपंथी इस्लामी आतंकियों का खौफ ऐसा कि गाँव, शहर, पुलिस स्टेशन और ऑफिस धू-धू कर जलते रहे। लेकिन, फायर ब्रिगेड की टीम चाहकर भी वहाँ नहीं जा सकी।
श्री श्री आनंदमयी काली मंदिर पर हमला
श्री श्री आनंदमयी काली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष आशीष पॉल ने बताया कि हम डोल पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में पूजा कर रहे थे। इसी दौरान हिफाजत-ए-इस्लाम के करीब 200 से 300 हथियारबंद लोग मंदिर का गेट तोड़कर अंदर घुस आए। हमने काली माँ की मूर्ति को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने हमें ढकेलकर काली माँ की मूर्ति को तोड़ दिया।
पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा के विरोध में यह इस्लामी चरमपंथी संगठन बीते 4 दिन से बंग्लादेश की सड़कों पर हिंदुओं का खून बहा रहा है। वहाँ के गृहमंत्री ने इन्हें चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी को भी बलवा करने की इजाजत नहीं है। हिफाजत अगर अपनी हिंसा नहीं रोकता है तो सरकार सख्त कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।
इससे पहले बीते 17 मार्च को हिफाजत ए इस्लाम के नेतृत्व में हजारों की भीड़ ने समानगंज जिले के ‘शल्ला उपजिला’ इलाके के नवागाँव में हमला कर दिया था। हजारों चरमपंथियों गांव में 88 घरों और 8 मंदिरों को नष्ट कर दिया था।
मामला केवल इतना था कि हिफाजत के नेता की सोशल मीडिया पर आलोचना कर दी थी। मौलाना ने अपने भाषण में बंगबंधु मुजीबुर रहमान की मूर्ति लगाने का विरोध किया था। हद तो तब हो गई जब इस्लामी चरमपंथियों के दवाब में आकर पुलिस ने हिंदू युवक को ही गिरफ्तार कर लिया।
How many more Hindus in Bangladesh will cry like this! Where is d end of this torture?
Thousands of Mslims attacked, vandalized & looted a Hindu village in Noagaon village of Shalla upazila in Sunamganj at 9am today.
2010 में बने इस संगठन को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई और सऊदी अरब के शेखों का समर्थन हासिल है। वही इसे फंडिग करते हैं। 2017 में इसी संगठन ने ग्रीक देवी की मूर्ति बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय में देखने के बाद प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना था कि बांग्लादेश में इस्लाम को कमजोर करने के लिए ये एक साजिश है। बाद में वह मूर्ति न्यायालय से हटानी पड़ी थी।
दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को परिभाषित करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गई है। इसी के साथ राष्ट्रीय राजधानी में सरकार के बजाय उप राज्यपाल की ताकतों में और इजाफा हो गया है।
केंद्र सरकार ने इस कानून के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 के मुताबिक अब दिल्ली की निर्वाचित सरकार को किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उपराज्यपाल से सलाह लेनी पड़ेगी। कहा जा रहा है इससे केजरीवाल सरकार की चिन्ताएँ बढ़ गई हैं।
President Kovind gives assent to National Capital Territory of Delhi (Amendment) Act 2021
इसको लेकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि इस कानूनी संशोधन से केंद्रशासित राज्य में शासन के कामकाज को लेकर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
पिछले हफ्ते ही संसद में पारित हुआ था विधेयक
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में राज्यपाल की शक्तियों में इजाफा करने वाले इस विधेयक को 22 मार्च को लोकसभा और 24 मार्च को राज्यसभा से पारित किया गया था। इसे केजरीवाल ने लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया था।
President Ram Nath Kovind gives his assent to Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021. The Bill amends certain powers and responsibilities of the Legislative Assembly and the Lieutenant Governor. pic.twitter.com/D96c2UdyRH
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने इस विधेयक पर हो रही आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए कहा था कि इसके कोई राजनीतिक अर्थ नहीं हैं। इसे केवल वर्तमान अधिनियम की खामियों को दूर करने के लिए लाया गया है। इन संशोधनों से निर्वाचित सरकार के संवैधानिक अधिकारों पर कोई आँच नहीं आएगी।
इसको लेकर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था, ‘विधेयक के पास होने से पता चलता है कि भाजपा सरकार सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कामों से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग इस बात को कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मोदी के विकल्प हो सकते हैं। ये बिल मुख्यमंत्री केजरीवाल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाया गया है।’
Passing of the Bill shows that PM Modi’s BJP govt is feeling insecure with Arvind Kejriwal & his work. People have started saying that Arvind Kejriwal can be an option to Modi ji. The Bill has been brought to stop Kejriwal ji from moving ahead: Delhi Dy CM on GNCTD Amendment Bill pic.twitter.com/VcqhsgV6B5
केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 के मुताबिक अब दिल्ली की निर्वाचित सरकार को किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उपराज्यपाल से सलाह लेनी पड़ेगी।
फुटबाल की दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और बेहतरीन फुटबाल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने ‘हिन्दू समर्थकों’ को होली की शुभकामनाएँ दी। क्लब की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर प्रारंभ हो गया। एक बड़े वर्ग ने कहा कि होली सिर्फ हिंदुओं का त्योहार नहीं है।
28, मार्च को फुटबाल क्लब यूनाइटेड ने ट्वीट करके अपने ‘हिन्दू समर्थकों’ को होली की शुभकामनाएँ दी। क्लब ने लिखा, “हमारे हिन्दू समर्थकों के लिए एक रंग-बिरंगी होली।” इस कैप्शन के साथ ‘हैप्पी होली’ के संदेश वाली एक फोटो भी पोस्ट की गई।
एक यूजर ने तो ‘शेम ऑन यू’ लिखकर क्लब की आलोचना की।
Holy fuck. These handles now started to wish Hindus not Indians. Wow man either the propoganda works or this is really some elite pleasing shiz. Shame on you @ManUtdhttps://t.co/BDaakCKZih
हालाँकि, क्लब के इस पोस्ट पर की गई आलोचना सही नहीं है। यह सत्य है कि होली केवल हिन्दू नहीं मनाते बल्कि पूरी दुनिया में यह त्योहार अन्य पंथों के लोग भी पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं किन्तु यह भी सत्य है कि होली एक हिन्दू त्योहार है जो भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की हिरण्यकश्यप पर महान विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
होली पर आधारित विकिपीडिया पेज का स्क्रीनशॉट।
लेकिन, यहाँ आलोचना की वजह यह थी कि जैसे क्रिसमस ईसाईयों का त्यौहार है लेकिन अब सब मनाते हैं। इसलिए सामान्यतया कोई नहीं कहता कि सिर्फ ईसाईयों को क्रिसमस की शुभकामनाएँ। तो यहाँ सिर्फ हिन्दू मेंशन करके शुभकामना देना ही क्लब के आलोचना की मुख्य वजह बनी।
आज भारत भर में होली का त्योहार पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भारत के प्रमुख मंदिरों में भी धूम-धाम से होली मनाई जा रही है। वृंदावन, महाकालेश्वर समेत देश के कई मंदिरों में भक्त अपने आराध्य के संग होली मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द समेत कई अन्य नेताओं ने लोगों को शुभकामनाएँ दी हैं।
होली के त्योहार का भगवान श्री कृष्ण से बड़ा ही गहरा संबंध है। यही कारण है कि ब्रज धाम की होली अपने आप में ही दिव्य और अलौकिक है। भगवान श्री कृष्ण से जुड़े क्षेत्रों जैसे नंदगाँव, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और राधारानी के क्षेत्र बरसाने की होली विश्व प्रसिद्ध है और दुनिया भर से लोग यहाँ होली खेलने के लिए आते हैं।
आज वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में भी होली का उत्सव मनाया जा रहा है। भारत के कोने-कोने से भक्त बाँके बिहारी मंदिर पहुँचे हुए हैं। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण का विग्रह त्रिभंग अवस्था में है जिस कारण उन्हें बाँके बिहारी कहा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आनंद, उमंग, हर्ष और उल्लास का यह त्योहार हर किसी के जीवन में नए जोश और नई ऊर्जा का संचार करे।
आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं। आनंद, उमंग, हर्ष और उल्लास का यह त्योहार हर किसी के जीवन में नए जोश और नई ऊर्जा का संचार करे।
राष्ट्रपति कोविन्द ने भी होली की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा, “होली के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएँ। रंगों का त्योहार होली, सामाजिक सौहार्द का पर्व है और लोगों के जीवन में खुशी, उत्साह व आशा का संचार करता है। मेरी कामना है कि उमंग और उल्लास का यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विविधता में निहित राष्ट्रीय चेतना को और शक्ति प्रदान करे।”
होली के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। रंगों का त्योहार होली, सामाजिक सौहार्द का पर्व है और लोगों के जीवन में खुशी, उत्साह व आशा का संचार करता है। मेरी कामना है कि उमंग और उल्लास का यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विविधता में निहित राष्ट्रीय चेतना को और शक्ति प्रदान करे।
भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने भी होली के अवसर पर ट्वीट करके कहा, “समस्त देशवासियों को ‘होली’ के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। रंग-उमंग, एकता और सद्भावना का यह महापर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य लाए।”
समस्त देशवासियों को ‘होली’ के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
रंग-उमंग, एकता और सद्भावना का यह महापर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य लाए। pic.twitter.com/5ZAdWKjEJ3
होली – इसका मतलब यह पहचानना है कि जीवन दरअसल बहुत उल्लासमय प्रक्रिया है। इस दिन देश भर में लोग एक-दूसरे को रंगों से सराबोर कर देते हैं। इस दिन लोग सिर से पाँव तक अलग-अलग रंगों में रंगे होते हैं, जो यह दर्शाता है कि जीवन का मूल तत्व है, उल्लास।
इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं।
इसके अतिरिक्त प्राचीन चित्रों, भित्तिचित्रों और मंदिरों की दीवारों पर इस उत्सव के चित्र मिलते हैं। विजयनगर की राजधानी हंपी के 16वीं शताब्दी के एक चित्रफलक पर होली का आनंददायक चित्र उकेरा गया है। इस चित्र में राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित रंग और पिचकारी के साथ राज दम्पत्ति को होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है। 16वीं शताब्दी की अहमदनगर की एक चित्र आकृति का विषय वसंत रागिनी ही है। इस चित्र में राजपरिवार के एक दंपत्ति को बगीचे में झूला झूलते हुए दिखाया गया है। साथ में अनेक सेविकाएँ नृत्य-गीत व रंग खेलने में व्यस्त हैं। वे एक दूसरे पर पिचकारियों से रंग डाल रहे हैं।
मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें 17वीं शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है। शासक कुछ लोगों को उपहार दे रहे हैं, नर्तकियाँ नृत्य कर रही हैं और इस सबके मध्य रंग का एक कुंड रखा हुआ है। बूंदी से प्राप्त एक लघुचित्र में राजा को हाथी दाँत के सिंहासन पर बैठा दिखाया गया है जिसके गालों पर महिलाएँ गुलाल मल रही हैं।
आज भले ही कुछ लोग विभेद करने की कोशिश करें लेकिन प्राचीन काल से ही भारत भूमि का ये प्रसिद्ध त्यौहार हर धर्म-वर्ग के लोगों को लुभाता रहा है। सुप्रसिद्ध पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक इस्लामी कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं दूसरे मजहब वाले भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं।
अकबर का अपने रानियों के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है। शाहजहाँ के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था।
इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य में दर्शित कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तृत वर्णन मिलता है।
भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से पीटती हैं। इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है। कुमाऊँ की गीत बैठकी में शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। यह सब होली के कई दिनों पहले शुरू हो जाता है।
गोपियों संग होली खेलते माधव (साभार-exotic india)
इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं।
प्राचीन काल के संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह रास का वर्णन है। अन्य रचनाओं में ‘रंग’ नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें हर्ष की प्रियदर्शिका व रत्नावली तथा कालिदास की कुमारसंभवम् तथा मालविकाग्निमित्रम् शामिल हैं। कालिदास रचित ‘ऋतुसंहार’ में पूरा एक सर्ग ही ‘वसन्तोत्सव’ को अर्पित है। भारवि, माघ और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है। चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ में होली का वर्णन है। भक्तिकाल और रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है।
आदिकालीन कवि विद्यापति से लेकर भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकर, जायसी, मीराबाई, कबीर और रीतिकालीन बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवियों को यह विषय प्रिय रहा है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं। पद्माकर ने भी होली विषयक प्रचूर रचनाएँ की हैं। इस विषय के माध्यम से कवियों ने जहाँ एक ओर नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेली गई अनुराग और प्रीति की होली का वर्णन किया है, वहीं राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कर डाला है।
सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं। आधुनिक हिंदी कहानियों प्रेमचंद की राजा हरदोल, प्रभु जोशी की अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा की एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थी की होली मंगलमय हो तथा स्वदेश राणा की होली में होली के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं। भारतीय फ़िल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है। इस दृष्टि से शशि कपूर की उत्सव, यश चोपड़ा की सिलसिला, वी शांताराम की झनक झनक पायल बाजे और नवरंग इत्यादि उल्लेखनीय हैं।
भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, लोक तथा फ़िल्मी संगीत की परम्पराओं में होली का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है, हालाँकि ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें जैसे चलो गुंइयां आज खेलें होरी कन्हैया घरआज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोकप्रिय बंदिश है खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी भारतीय शास्त्रीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें होली के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं। बसंत, बहार, हिंडोल और काफ़ी ऐसे ही राग हैं।
होली पर गाने-बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन-जन पर इसका रंग छाने लगता है। उपशास्त्रीय संगीत में चैती, दादरा और ठुमरी में अनेक प्रसिद्ध होलियाँ हैं। होली के अवसर पर संगीत की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगीत की एक विशेष शैली का नाम ही होली है, जिसमें अलग अलग प्रांतों में होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा होता है।
जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है। उनकी एक प्रसिद्ध होली है आज रंग है री मन रंग है, अपने महबूब के घर रंग है री। इसी प्रकार शंकर जी से संबंधित एक होली में दिगंबर खेले मसाने में होली कह कर शिव द्वारा श्मशान में होली खेलने का वर्णन मिलता है। भारतीय फिल्मों में भी अलग अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किये गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। ‘सिलसिला’ के गीत रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसेऔर ‘नवरंग’ के आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार, को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
हरियाणा की धुलंडी में भाभी-देवर के बीच छेड़ने-पिटाने की प्रथा है। हालाँकि, यह छेड़-छाड़ हँसी-ठिठोली के रूप में प्रतीकात्मक तौर पर होती है, न कि इसकी सामान्य परिभाषा के हिसाब से। बंगाल की दोल जात्रा चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। जुलूस निकलते हैं और गाना-बजाना भी साथ रहता है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र की रंग पंचमी में सूखा गुलाल खेलने, गोवा के शिमगो में जुलूस निकालने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पंजाब के होला मोहल्ला में सिक्खों द्वारा शक्ति प्रदर्शन की परंपरा है।
तमिलनाडु की कमन पोडिगई मुख्य रूप से कामदेव की कथा पर आधारित वसंतोत्सव है जबकि मणिपुर के याओसांग में योंगसांग उस नन्हीं झोंपड़ी का नाम है जो पूर्णिमा के दिन प्रत्येक नगर-ग्राम में नदी अथवा सरोवर के तट पर बनाई जाती है। दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के लिए होली सबसे बड़ा पर्व है, छत्तीसगढ़ की होरी में लोक गीतों की अद्भुत परंपरा है और मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है भगोरिया, जो होली का ही एक रूप है। बिहार का फगुआ जम कर मौज मस्ती करने का पर्व है और नेपाल की होलीमें इस पर धार्मिक व सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है।
इसी प्रकार विभिन्न देशों में बसे प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में अलग अलग प्रकार से होली के श्रृंगार व उत्सव मनाने की परंपरा है जिसमें अनेक समानताएँ और भिन्नताएँ हैं।
कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल (मार्च 27, 2021) पंजाब में अबोहर के भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला बोलते हुए बीच सड़क पर उनके कपड़े फाड़ दिए। घटना मलोट में घटी। कुछ ही देर में हमले की वीडियो हर जगह वायरल हो गई। वीडियो में देख सकते हैं कि कितनी मुश्किल से भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस ने अरुण नारंग को उग्र प्रदर्शनकारियों से बचाया।
मेरे पहुँचते ही हुआ मुझ पर हमला- अरुण नारंग
आज ऑपइंडिया ने इस घटना की बाबत भाजपा विधायक अरुण नारंग से संपर्क किया। नारंग ने हमसे बातचीत में अपने ऊपर हुए हमले को कॉन्ग्रेस की नाकामयाबी करार देते हुए कहा कि उनकी प्रेस वार्ता कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश पंजाब के मलोट में आयोजित की गई थी। जैसे ही वह वहाँ पहुँचे हमलावरों ने हमला बोल दिया।
किसी प्रकार की नारेबाजी के बारे में जब हमने नारंग से पूछा तो उन्होंने कहा कि हमले से पहले कोई नारा नहीं दिया गया। लेकिन जैसे ही वह गाड़ी से बाहर निकले, हमलावर चिल्लाने लगे कि ये रहा भाजपा विधायक, ये रहा।
‘मैं हमेशा किसानों के साथ हूँ और किसान मेरे साथ’
नारंग ने बताया कि उन्होंने इस मामले में शिकायत दर्ज करवा दी है। पार्टी उनके साथ है और हमलावरों पर उपयुक्त कार्रवाई होगी। नारंग ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह हमेशा से किसानों के हित में थे। उनके विधानसभा क्षेत्र में किसान उनके साथ हैं।
हमलावरों पर बात करते हुए उन्होंने बताया, “जिन्होंने मुझ पर हमला किया उन्होंने भले ही किसान संघ का झंडा लिया था लेकिन वे गुंडे थे। मेरे क्षेत्र के किसान मेरे दोस्त हैं और वे मुझे भली भाँति जानते हैं।”
गुंडों की पहचान करने के लिए जाँच जरूरी
नारंग ने हमलावरों की पहचान को लेकर कहा कि ये जाँच का विषय है। वहीं बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत के बयान, जिसमें उन्होंने भाजपा को इस हमले का जिम्मेदार बताया, उस पर अपनी बात रखते हुए नारंग ने कहा कि जाँच के बाद ही हमलावरों की पहचान हो पाएगी। वह बोले, “उनकी (हमलावर) पहचान और फंडिग का स्रोत जाँच का विषय है। पुलिस को पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे कौन है।”
‘सत्ता में लौटने के लिए कॉन्ग्रेस भड़का रही विरोध प्रदर्शन’
अरुण नारंग के अनुसार, साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पाने के लिए अमरिंदर सिंह की सरकार इस प्रदर्शन का इस्तेमाल कर रही है। वह किसानों को भड़का रहे हैं और केंद्र सरकार के प्रति भ्रम पैदा कर रहे हैं।
भाजपा विधायक कहते हैं कि पंजाब में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। कॉन्ग्रेस सरकार, लोकतांत्रित ढंग से चुने गए प्रतिनिधियों को सुरक्षा दिलाने में असमर्थ है। उन्हें विधायकों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है और यदि सुरक्षा ख़िलवाड़ में कोई भाजपा नेता मर भी जाए तो उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है।
नारंग कहते हैं, “लोकतंत्र में हर पार्टी के पास अपने विचार रखने का अधिकार है। लेकिन कॉन्ग्रेस हमें बोलने नहीं दे रही। मैं एक नेता को सुन रहा था जिसका कहना था कि हमें तब तक बोलना ही नहीं चाहिए जब तक उनकी माँगे नहीं मान ली जातीं। ये सब ऐसे नहीं चलेगा। ये लोकतंत्र नहीं है।”
जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा देने में असफल हुए पंजाब सीएम को लेकर नारंग ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा मुहैया करवानी चाहिए, लेकिन वह कुछ नहीं कर रहे। पुलिस उस समय वहीं थी लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।
ऐसा लगा वो मुझे मारना चाहते हैं- नारंग
नारंग ने बताया कि ये स्पष्ट नहीं है कि कौन लोग किसानों को भड़का रहे हैं और भाजपा पर हमले करवा रहे हैं। कल के हमले पर वह बोले, “ऐसा लगा जैसे उनका प्लॉन मुझे मारने का था। हालाँकि उन्होंने किसान संघ के झंडे लिए थे। लेकिन वह गुंडे थे। उनके ख़िलाफ़ जाँच होनी चाहिए और जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।”
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, मतदान का पहला चरण बीतने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार (मार्च 28, 2021) को एक चुनावी रैली में कहा कि इस बार दूसरी होली वोटों की गिनती वाले दिन यानी 2 मई को ‘हरे गुलाल’ से खेली जाएगी।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार मेदिनीपुर जिले के चाँदीपुर में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा, “कल लोगों ने 30 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान किया। हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते। लेकिन चूँकि मतदान 84 प्रतिशत था, इसलिए मैं कह सकती हूँ कि हम बड़ी जीत हासिल करेंगे।”
রস ছাড়া রসগোল্লা খাবে, ৩০-এর মধ্যে নাকি বিজেপি ২৬ পাবে…আমি একটাও বলবোনা কারণ আমি জানি মানুষ আমাদের দিয়েছেন, আমরাই পাবো, আমি নম্বর মানুষকে বলতে দেব – @MamataOfficial
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) March 28, 2021
उन्होंने बिना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए कहा कि एक नेता ने कहा है कि भाजपा 30 में से 26 सीटें जीतेगी। उन्होंने 30 पर ही दावा क्यों नहीं कर दिया। क्या बाकी की सीटें कॉन्ग्रेस और सीपीआई (एम) के लिए छोड़ी हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत पर आश्वस्त होते हुए केंद्रीय सुरक्षाबलों पर इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, “हमारे जिन वोटर्स ने चेहरे पर मास्क नहीं लगाया था उन सबको बाहर भेज दिया गया और उनको धमकी भी दी गई। मैं सुरक्षाबलों से अनुरोध करती हूँ कि ये भाजपा के लिए कैम्पेन करना आपका काम नहीं है। ये आपकी ड्यूटी नहीं है कि आप बंगाल की महिलाओं को डराएँ।”
ममता ने अपने पोलिंग एजेंट्स से किसी कीमत पर पोलिंग बूथ न छोड़ने को कहा। ईवीएम पर अभी से इल्जाम मढ़ते हुए वह बोलीं, “ध्यान रहे कि कुछ जगहों पर आप यदि टीएमसी के लिए वोट करते हैं तो आपका वोट भाजपा को जाता है।”
उन्होंने स्थानीयों को भाजपा के ख़िलाफ़ भड़काते हुए कहा कि लोगों को भाजपा से सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उनके हाथों में बंदूक हैं। दूसरी ओर उन्होंने ये भी कहा, “हमने बंगाल में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की है।” वह बोलीं, “मुझे यकीन नहीं है कि उन्होंने आज क्या योजना बनाई है। लेकिन याद रखें, भले ही वे मुझे मार डालें, मैं भाजपा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के खिलाफ अपनी लड़ाई कभी नहीं छोड़ूँगी।”
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव होने तय हुए हैं। 27 मार्च को इस क्रम में 30 सीटों पर मतदान हो चुका है। बाकी 7 चरण 29 अप्रैल तक चलेंगे। इसके बाद 2 मई को वोटों की गिनती के साथ जीत-हार का फैसला होगा।
सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ एक रैली में तृणमूल सांसद नुसरत जहाँ को पार्टी के कार्यकर्ताओं पर अपना आपा खोते हुए देखा गया। वीडियो में नुसरत को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं एक घंटे से अधिक समय से रैली कर रही हूँ। मैं मुख्यमंत्री के लिए भी इतना नहीं करती। क्या तुम मुझे बेवकूफ बना रहे हो?”
कथित तौर पर यह घटना तब हुई जब नुसरत शनिवार को तृणमूल के अशोकनगर के उम्मीदवार नारायण गोस्वामी के लिए प्रचार कर रहीं थी। हालाँकि, आनंदबाजार डिजिटल ने ये वीडियो जारी करते हुए कहा कि वे स्वतंत्र रूप से वीडियो का सत्यापन नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को पहले चरण का मतदान हुआ, जिसमें बहुत भारी मात्रा में लोग मतदान करने के लिए बाहर निकले। वहीं अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदान 22 अप्रैल को होगा।
केरल के सोना तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल हाईकोर्ट में एक दस्तावेज जमा करवाते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया। इसके मुताबिक आरोपित स्वप्ना सुरेश ने एजेंसी को बताया कि राज्य विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन ‘निजी गंदे इरादों’ से उन्हें अपने फ्लैट पर बुलाते थे।
Kerala gold smuggling case: According to a document submitted by ED in Kerala High Court, accused Swapna Suresh said that State Assembly Speaker P Sreeramakrishnan used to call her to his flat for some ‘personal dirty intentions’
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन को लेकर इस मामले के दो आरोपित ईडी को यह भी बता चुके हैं कि उन्होंने ओमन में एक कॉलेज में निवेश किया हुआ है और उन्होंने ही यूएई वाणिज्य दूतावास अधिकारी के लिए नोटों का बंडल सौंपा था।
बता दें कि एजेंसी ने अपने अधिकारियों के ख़िलाफ़ केरल पुलिस द्वारा दायर एक एफआईआर रद्द करने की माँग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की है। इसी याचिका में उन्होंने सोना तस्करी केस के ब्योरे के साथ श्रीरामकृष्णन एवं अन्य के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संलग्न किया। इसमें आरोपित स्वप्ना सुरेश, संदीप नायर और सरित पीएस के अलावा निलंबित आईएएस अधिकारी एम शिवशंकर का बयान भी शामिल है।
स्वप्ना सुरेश ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष को लेकर खुलासा करने से पहले केरल के सोना और डॉलर तस्करी मामले में कस्टम अधिकारियों के सामने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का नाम लिया था। सुरेश ने बताया था कि मुख्यमंत्री महावाणिज्य दूत (Consulate General) के सीधे संपर्क में थे। उनके अलावा उनकी सरकार के तीन और कैबिनेट मंत्री इस डॉलर की तस्करी के मामले में शामिल थे।
सुरेश के इस चौंकाने वाले बयान के बाद केरल विधानसभा में विपक्षी नेता भी हमलावर हो गए थे। रमेश चेन्निथला का कहना था कि कॉन्ग्रेस द्वारा सोने की तस्करी और डॉलर की तस्करी के मामले में लगाए गए सभी आरोप सही साबित हो रहे हैं।
मामले में लगातार नाम उछलने के कारण पिनरई विजयन ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने राष्ट्रीय जाँच एजेंसियों के पड़ताल के तरीके पर सवाल उठाया था और उन पर बिना किसी उद्देश्य के जाँच का आरोप लगाया था।
उन्होंने लिखा था कि इससे ‘ईमानदार अधिकारी हतोत्साहित’ हो रहे हैं। उनके अनुसार मामले की पूछताछ को रस्सी फेंक कर मछली पकड़ने का अभियान नहीं बनना चाहिए, जिससे केंद्रीय जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता का भारी नुकसान होता है।