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CM योगी के 4 साल: अपराध मुक्त UP में मुठभेड़ की 7791 घटनाएँ, 135 अपराधी ढेर, अब तक 16000 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ की सरकार अक्सर जीरो टॉलेरेंस की बातें करती हैं। ऐसे में भाजपा की सरकार आने के बाद से पुलिस और अपराधियों के बीच कई मुठभेड़ हुए हैं, जिनमें आत्मरक्षा में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और कई अपराधी मारे गए।

विपक्ष उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की संख्या को लेकर अक्सर सरकार को घेरता है और तमाम तथ्यों के सामने आने के बावजूद उन्हें फर्जी बताता है। ‘दैनिक जागरण’ के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 4 वर्ष में उत्तर प्रदेश में अब तक 135 अपराधी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

इस वर्ष पिछले ढाई महीने में हुई ऐसी कई मुठभेड़ों में 6 अपराधी ढेर हो गए। वार्षिक आँकड़ों की बात करें तो 2017 में पुलिस और अपराधियों की मुठभेड़ में 28, वर्ष 2018 में 41, वर्ष 2019 में 34 जबकि वर्ष 2020 में 26 अपराधी मारे गए हैं। इनमें 111 ऐसे थे, जो इनामी बदमाश थे।

इनमें से कइयों की तलाश पुलिस को पहले से ही थी और वो फरार चल रहे थे। पुलिस को देखते ही या खुद को घिरा हुआ पाते ही उन्होंने शस्त्रों का प्रयोग शुरू किया और आत्मरक्षा व आम नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा के लिए हुई जवाबी कार्रवाई में उनकी मौत हो गई। कई बार पुलिस घायल अपराधियों को इलाज के लिए अस्पताल ले गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पिछले साल विकास दुबे कांड सुर्खियों में था। विकास दुबे पर 5 लाख का इनाम था। उसने अपने गुर्गों के साथ मिल कर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। ऐसे खूँखार अपराधी के अलावा भी UP पुलिस ने कुछ ऐसे अपराधियों का समाज से सफाया किया है, जो इनामी बदमाश थे, जिनका इलाके में खौफ था।

UP पुलिस के साथ मुठभेड़ में तीन ऐसे बदमाशों की भी जान गई, जिन पर ढाई लाख रुपए का इनाम था। दो लाख रुपए के इनामी दो बदमाश, डेढ़ लाख रुपए के इनामी तीन बदमाश, एक लाख रुपए के इनामी 18 बदमाश, 75 हजार का इनामी एक बदमाश और पचास हजार के इनामी 46 बदमाश इन मुठभेड़ों में ढेर हुए।

इन सबके अलावा 25 हजार रुपए के इनामी 20 बदमाश, 15 हजार रुपए के इनामी 11 बदमाश, 12 हजार रुपए के इनामी चार बदमाश तथा पाँच हजार रुपए का इनामी एक बदमाश UP पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में चलाई गई गोली का शिकार हुआ।

सबसे अधिक अपराधी मेरठ में मारे गए हैं, जहाँ ये संख्या 18 है। अब तक पुलिस और अपराधों के बीच राज्य में हुई 7791 मुठभेड़ों में 16000 से अधिक अपराधी गिरफ्तार हुए हैं। इनमें से 3000 बदमाश ऐसे हैं, जो पुलिस की गोली से घायल हुए। इनमें से अधिकतर को अस्पताल में भर्ती करा कर उनकी जान बचाई गई।

हाल ही में बलरामपुर की एक जनसभा में AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि योगी सरकार में एनकाउंटर में मारे गए अपराधियों में 37% मुस्लिम हैं, जबकि राज्य में मुस्लिमों की जनसंख्या 18-19% है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी ‘ठोक दो’ जैसी बातें करते हैं।

अगस्त 2020 में डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस पर विशेष वर्ग के लोगों के एनकाउंटर किए जाने के आरोप पर कहा था कि इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं और अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होता है। उन्होंने बताया था कि पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सभी का आपराधिक इतिहास रहा है और कई तो पुलिस कर्मियों की हत्या में शामिल थे। जाति या सांप्रदायिक आधार पर अपराधियों के साथ भेदभाव नहीं किया गया है।

राकेश टिकैत और ‘किसान’ गैंग में अकेले लगाया ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद… भारत माता की जय’ का नारा: Video Viral

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक आदमी है। वो भीड़ के बीच में है और ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ के साथ-साथ ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहा है।

वीडियो इसलिए वायरल हो रहा है क्योंकि जिस भीड़ के बीच में वो इंसान अकेला नारा लगा रहा है, वो भीड़ ‘किसानों’ की भीड़ है। उसी भीड़ में ‘किसान’ नेता राकेश टिकैत भी है।

यह वायरल वीडियो कब की है, इसके बारे में पता नहीं। लेकिन इसकी शुरुआत में राकेश टिकैत की जयकार को आप सुन सकते हैं। फिर अचानक से लगभग 20 सेकंड के बाद एक आदमी जोर-जोर से तेज आवाज में ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’… ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ बोलने लगता है।

राकेश टिकैत और उसके समर्थक स्तब्ध रह जाते हैं। कुछ देर के लिए वे चुपचाप इस आदमी को देखते हैं। फिर वो सब मोदी विरोधी नारे लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन ये अकेला इंसान उस भीड़ से ज्यादा जोर से चिल्लाते हुए ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’… ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाता रहता है।

यह वायरल वीडियो कहाँ शूट किया गया, यह भी स्पष्ट नहीं है। देखने में कोई रेलवे स्टेशन जैसा प्रतीत हो रहा है।

राकेश टिकैत के बारे में बता दें कि वो हाल ही में पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने के लिए बंगाल गए थे। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ टीएमसी को समर्थन दिया है।

गीता और बबीता की बहन रितिका फोगट ने की आत्महत्या: फाइनल में सिर्फ 1 पॉइंट से हारीं, नहीं सह पाईं गम

गीता और बबीता फोगट की बहन रितिका फोगट ने एक कुश्ती टूर्नामेंट के फाइनल मैच में मिली हार के कारण आत्महत्या कर ली है। रितिका, गीता और बबीता की ममेरी बहन थीं।

रितिका फोगट के बारे में बताया जा रहा है कि कुश्ती टूर्नामेंट के फाइनल में हार का गम वो नहीं सह पाईं, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। उन्होंने स्टेट सब-लेवल जूनियर, जूनियर वुमन एंड मेन रेसलिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। ये टूर्नामेंट राजस्थान के भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में चल रहा था।

मार्च 12-14 के बीच हुए इस टूर्नामेंट के फाइनल मैच में रितिका मात्र एक पॉइंट के कारण हार गईं। इसके बाद वो अवसाद में चली गई थीं और फिर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

बताया जा रहा है कि द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित और गीता व बबीता के पिता महावीर फोगट भी उस टूर्नामेंट स्थल पर मौजूद थे। फोगट बहनों के ऊपर ‘दंगल’ फिल्म भी बनी थी, जिसमें आमिर खान ने महावीर फोगट का किरदार अदा किया था।

रितिका भी गीता और बबीता की तरह कुश्ती में नाम कमाना चाहती थीं और इसके लिए वो मेहनत भी कर रही थीं। रितिका ने पंखे में दुपट्टा बाँध कर फाँसी लगा ली।

रितिका फोगट के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है। गीता और बबीता की एक और कजन बहन विनेश फोगट भी टोक्यो ओलम्पिक के दावेदारों में शामिल हैं और वो देश की उम्दा फ्रीस्टाइल रेसलर्स में से एक हैं।

बता दें कि गीता और बबीता की बहन ऋतू फोगट भी कुश्ती की दुनिया में नाम कमा रही हैं। उन्होंने MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) विधा की कुश्ती में नाम रोशन किया है। साथ ही वो प्रतिष्ठित ‘ONE चैम्पियनशिप’ का हिस्सा भी बनी थीं।

‘शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था, तभी की आसिफ की पिटाई’: जमानत पर छूटने के बाद श्रृंगी यादव का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित मुस्लिम बहुल क्षेत्र डासना के शिव-शक्ति मंदिर में आसिफ नाम के एक किशोर की पिटाई के बाद मंदिरों को बदनाम करने का सिलसिला चल पड़ा है। लेकिन, जिस तरह से महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कुछ तथ्यों के जरिए वामपंथी मीडिया गिरोह की बखिया उधेड़ी है, उसके बाद से कई दावे सामने आए हैं। अब श्रृंगी यादव ने आरोप लगाया है कि आसिफ शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था।

‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए श्रृंगी यादव ने बताया कि वो लड़का झूठ बोल रहा है कि वो पानी पीने के लिए मंदिर के भीतर घुसा था। उन्होंने कहा कि मंदिर में कई शिवलिंग मौजूद हैं। आसिफ को पीटने के मामले में गिरफ़्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए श्रृंगी यादव ने बताया कि उसने उस लड़के को शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल में पेशाब करते हुए देखा था। साथ ही इस तथ्य को दोहराया कि अगर उसे पानी पीना होता तो वो मंदिर के बाहर कई चापाकल और नल हैं, उनमें से पी लेता।

उन्होंने बताया कि आसिफ के साथ एक और लड़का था, जो टोपी पहन कर आया हुआ था। चश्मदीद रहे श्रृंगी ने बताया कि उसने उस लड़के को ही सबसे पहले देखा था, जो दरवाजे पर खड़ा था। उन्होंने कहा कि वो लड़का अपनी पैंट की चेन खोल कर गलत हरकतें कर रहा था। उस समय कई हिन्दू महिला श्रद्धालु भी मंदिर में आए हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लड़के अक्सर उलटी-सीधी हरकतें करने के लिए आते रहते हैं।

मंदिर के आसपास मुस्लिम समाज के युवकों द्वारा छेड़खानी का आरोप दोहराते हुए यादव ने कहा कि कुछ दिनों पहले दारुल उलूम देवबंद से कुछ लड़के आए थे और उन्होंने अपना नाम गलत बताया था। चेतावनी दिए जाने के बाद वो चले गए थे। उन्होंने बताया कि कुछ दी दिनों पहले भगवन परशुराम की प्राचीन प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई थी। साथ ही ये भी कहा कि यहाँ मंदिर के पास आकर लड़के गुंडागर्दी करते हैं।

वहीं ‘पाञ्चजन्य’ से बातचीत करते हुए महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि पिछले 5 दिनों से सभी लोग मंदिर के पीछे पड़े हुए हैं और कह रहे है कि पानी पीने आए बच्चे को पीट दिया। उन्होंने कहा कि ये बात अगर होती तो ये बुरी बात है लेकिन वो हिन्दुओं से कहना चाहते हैं कि क्या सच में वो पानी पीने आया था? उन्होंने कहा कि बाहर से दिखाई भी नहीं देता है कि अंदर कोई नल है। उन्होंने कहा कि वो उसे ‘बच्चा’ नहीं मानते।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने ‘पाञ्चजन्य’ से की बातचीत

इसके बाद महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि उनके शिष्य श्रृंगी यादव ने जमानत पर छूटने के बाद उन्हें सच्चाई बताई है कि असल में आसिफ मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था। इसके बाद श्रृंगी यादव ने उसे पकड़ा। उन्होंने पूछा कि क्या हमारे भगवान इसीलिए हैं ताकि उनके ‘बच्चे’ आकर पेशाब करें? उन्होंने कहा कि 95% मुस्लिमों वाले इलाके में मंदिर में उनके प्रवेश का बोर्ड लगाना उनकी मजबूरी है।

यति नरसिंहानंद सरस्वती पिछले 15 वर्षों से वहाँ महंत हैं। उन्होंने हिन्दुओं को अपनी पीड़ा समझने की बात करते हुए पुलिस पर आरोप लगाए कि मंदिर में 4 बार डकैती की घटनाओं में कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि वो मुस्लिमों के दबाव में थे। उन्होंने कहा कि बसपा विधायक असलम चौधरी ने भी देख लेने की धमकी दी है। उनके अनुसार वहाँ लोग रोज नरक झेल रहे हैं, उसे महसूस करना और दूर से सहानुभूति जताने में अंतर है।

हाल ही में विधायक असलम चौधरी ने कहा था, “डासना मंदिर हमारे पूर्वजों का मंदिर है। यह मंदिर हमारे पूर्वजों ने बनाया है। यहाँ पर कुछ गुंडे प्रवृत्ति के लोग आ गए। कुछ लोगों ने बाहर से आकर मंदिर पर कब्जा करना चाहा और तरह-तरह की एक्टीविटी करके यहाँ के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। हम इन गुर्गों को बताना चाहेंगे कि मंदिर हमारी विरासत है। हम पानी पीने भी जाएँगे, अपनी मंदिर की देख-रेख करने भी जाएँगे। मैं मंदिर में जाऊँगा। मैं देखता हूँ कि कौन रोकता है।”

मौलाना इरशाद रशीद को गुजरात पुलिस ने किया पानीपत से गिरफ्तार: सोमनाथ में गजनवी को इस्लाम का गौरव बताने पर कार्रवाई

सोमनाथ मंदिर के पास खड़े होकर उसे लूटने वाले महमूद गजनवी को इस्‍लाम का नेक बंदा बताने वाला वीडियो बनाकर उसे वायरल करने वाले इरशाद रशीद को हरियाणा के पानीपत से गिरफ्तार कर लिया गया है। वायरल वीडियो में वह कहता है कि आज गजनवी को चोर लुटेरा कहा जाता है लेकिन वह इस्‍लाम का गौरव है।

गुजरात के गीर सोमनाथ जिले में स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से करीब आधे किलोमीटर दूर खड़े होकर मौलाना इरशाद रसीद ने एक वीडियो बनाकर वायरल किया जिससे हिंदू धर्म के लोगों की भावनाएँ आहत हुई। सोमनाथ ट्रस्‍ट के प्रबंधक विजय सिंह चावडा ने इस संबंध में पुलिस को एक शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपित को हरियाणा के पानीपत से गिरफ्तार कर लिया है। 

बताया जा रहा है कि आरोपित इरशाद रशीद पानीपत के कुटानी रोड पर स्थित मदरसे का टीचर है। वहीं, उसके कुछ परिचितों का कहना है कि मौलाना अक्सर व्हाट्सएप और फेसबुक पर वह इस तरह की आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड करता रहता है। इससे पहले भी वह कई बार ऐसी भड़काऊ हरकतें कर चुका है, कई लोगों ने उसे समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वह नहीं माना।

बता दें कि इरशाद 2016 से ‘जमाते आदिला हिंद’ नाम से एक इस्लामी यूट्यूब चैनल चला रहा है। कट्टरपंथी इस्लामवादी अतीत में कई बार हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने और सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने के लिए अपने इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर चुका है। महमूद गजनवी के महिमामंडन वाला इरशाद रशीद का वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने नाराजगी जताई थी और कट्टरपंथी इस्लामवादी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

मौलाना का नंबर उसके यूट्यूब चैनल से मिला और फिर मोबाइल नंबर ट्रेस करते हुए गुजरात पुलिस की एक विशेष टीम हरियाणा के पानीपत पहुँची। मौलाना को इसकी जानकारी हो गई थी, उसे गिरफ्तार करने गुजरात पुलिस पानीपत आ रही है। इसके चलते उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया था और घर से भाग निकला था। हालाँकि, गुजरात पुलिस की टीम ने पूरी रात उसकी तलाश की और आखिरकार उसे उसके एक परिचित के घर से गिरफ्तार कर लिया

हालाँकि पुलिस ने अधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है। मौलाना रशीद ने पुलिस में शिकायत होने के बाद एक और वीडियो जारी कर माफी माँगते हुए कहा कि उसने यह वीडियो ऐसे ही बना लिया था। किसी की भावना को आहत करने का उसका उद्देश्‍य नहीं था।

इरशाद रशीद ने अपने वीडियो मैसेज में कहा, “मेरा इरादा भारतीयों या मेरे गुजराती भाइयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना या हिंदू पूजा स्थल का अपमान करना नहीं था। चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या चर्च हो, यह सभी हमारे पूजा स्थल हैं। मेरा इरादा मंदिर का अपमान करने या किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था।”

यह वही समुद्र है जो पाकिस्‍तान को भारत से जोड़ता है

गौरतलब है कि मौलाना इरशाद का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें वह समुद्र किनारे खड़े होकर हाथ के इशारे से सोमनाथ मंदिर की ओर इशारा करते हुए यह कहते हुए नजर आता है कि यह वही सोमनाथ मंदिर है जिसे महमूद गजनवी व मुहम्‍मद कासिम ने फतह किया था।

कासिम ने अपने सेना के साथ इसी सागर को पार कर भारत को जीत लिया था। वह यह भी बताता है कि यह वही समुद्र है जो पाकिस्‍तान को भारत से जोड़ता है। गजनवी को इस्‍लाम का नाम रोशन करने वाला तथा इतिहास में एक गौरवशाली महान पुरुष बताते हुए इरशाद आगे कहता है कि इनके इतिहास को पढ़ना व पढ़ाना चाहिए। पुलिस ने उसकी पहचान कर ली थी तथा अब खबर है कि उसे हरियाणा के पानीपत से दबोच लिया है।

3 महीने बाद भी आपके पास रिपब्लिक TV के खिलाफ कोई सबूत नहीं: बॉम्बे HC ने मुंबई पुलिस को TRP मामले में फटकारा

महाराष्ट्र सरकार को बुधवार (मार्च 17, 2021) को बड़ा झटका लगा है। दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को पाया कि मुंबई पुलिस को तीन महीने से अधिक समय तक मामले की जाँच करने के बावजूद फर्जी टीआरपी घोटाला मामले में रिपब्लिक टीवी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

खबरों के मुताबिक, जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पितले की बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मुंबई पुलिस दो चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी रिपब्लिक के खिलाफ सबूत जमा करने में विफल रही है। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि रिपब्लिक टीवी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

कोर्ट ने पाया, “यह एफआईआर अक्टूबर 2020 की है। हम मार्च 2021 में हैं। हमने मामलों में खिचड़ी पक रही है’ देखा है। उनके सिर पर तलवार क्यों लटकी रहती है? आप पिछले 3 महीनों से जाँच कर रहे हैं और आपके पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उनका तर्क यह है कि वे हमेशा इस डर में रहते हैं कि उनके खिलाफ कुछ कार्रवाई हो सकती है, जैसा उनके कर्मचारियों के साथ पहले कार्रवाई हो चुकी है।”

‘अर्नब गोस्वामी का नाम क्यों नहीं?’

जाँच में देरी पर सवाल उठाते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह भी माँग की कि चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी या किसी भी रिपब्लिक टीवी पत्रकार सहित याचिकाकर्ताओं को अभी तक मामले में आरोपित क्यों नहीं बनाया गया है।

रिपब्लिक टीवी द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद यह टिप्पणियाँ सामने आईं कि मुंबई पुलिस ने जानबूझकर गोस्वामी और अन्य को अभी तक आरोपित नहीं बनाया है, ताकि वे केस को खत्म करने के लिए अदालतों को स्थानांतरित करने में सक्षम न हों।

बेंच ने मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, “अगर आप जल्दी से हमारे प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पा रहे हैं… एक उचित स्तर पर, हमारे पास और भी प्रश्न होंगे। तो क्या आप उनका जवाब देंगे? हमें पता नहीं है कि आप किसे ब्रीफ कर रहे हैं या किनसे निर्देश ले रहे हैं।”

मुंबई पुलिस ने जाँच को खुला रखने के लिए रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं लिया

इससे पहले, एआरजी के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदरगी ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस द्वारा पूरी जाँच का उद्देश्य अन्य चैनलों के खिलाफ जानकारी होने के बावजूद रिपब्लिक टीवी को निशाना बनाना है।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने दावा किया कि भले ही दो चार्जशीट हों, लेकिन चैनल के खिलाफ कुछ भी पर्याप्त नहीं था। मुंदरगी ने कहा कि मुंबई पुलिस ने अभी तक रिपब्लिक या उसके कर्मचारियों को चार्जशीट में आरोपित नहीं बनाया है ताकि वे जाँच को खुला रख सकें। एआरजी आउटलियर मीडिया और गोस्वामी ने पिछले साल हाईकोर्ट से संपर्क किया था, जिसमें रिपब्लिक टीवी के खिलाफ फर्जी टीआरपी घोटाले में राहत देने के लिए याचिका दायर की गई थी।

फर्जी TRP घोटाला

8 अक्टूबर को, मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कई चैनलों ने अपनी टीआरपी रेटिंग बढ़ाने के लिए दुर्भावनापूर्ण व्यवहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपब्लिक टीवी मुख्य आरोपितों में से एक है। यह शिकायत हंसा समूह द्वारा दायर की गई थी जिसने BARC के लिए TRP रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों को इंस्टॉल किया था।

‘सचिन वाजे और परमबीर जैसे लोग मोहरे, असली खेल किसी और हाथ’: फडणवीस ने किया ‘बड़ी मछली’ की तरफ इशारा

महाराष्ट्र की राजनीति में मनसुख हिरेन की मौत के मामले में गहमागहमी बढ़ती जा रही है। बुधवार (मार्च 17, 2021) को मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह का तबादला कर दिया गया और हेमंत नागराले को यह पद सौंपा गया। वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस वार्ता कर इस मामले में राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मनसुख हिरेन की मौत को हत्या करार दिया। फडणवीस ने कहा कि यह बात सामने आनी चाहिए कि हाईप्रोफाइल मामला वाजे को सौंपने के पीछे वजह क्या रही? 

फडणवीस ने आरोप लगाया कि मनसुख हिरेन की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि हिरेन को मारने के बाद शव को खाड़ी में फेंका गया। लो टाइड की वजह से शव बहा नहीं, अगर शव हाई टाइड में चला जाता तो मिलता ही नहीं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हिरेन के फेफड़ों में पानी नहीं है। अगर हिरेन की मौत पानी में डूबने से हुई होती तो फेफड़ों में पानी दिखता। इससे साफ है कि हिरेन की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनसुख हिरेन का गला घोटने की जानकारी सामने आई है। 

शिवसेना के नेताओं के साथ नजर आता था वाजे

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सचिन वाजे मनसुख हिरेन को जानते थे। उन्होंने कहा कि वाजे मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और शिवसेना के मंत्रियों के साथ नजर आते थे। उन्होंने दावा किया कि वाजे को वसूली के लिए लाया गया था और साजिश के तहत वाजे ने ही मनसुख से पूछताछ की थी। उन्होंने माँग की कि इस मामले की जाँच एटीएस को नहीं करनी चाहिए बल्कि एनआईए के हाथ में दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह और सचिन वाजे बहुत छोटे लोग हैं। इसकी जाँच होनी चाहिए कि इनके पीछे कौन लोग हैं।

वाजे और परमबीर छोटे लोग, इनके पीछे कौन…

फडणवीस ने कहा कि ये पूरा मामला अकेले सचिन वाजे के बस की बात नहीं थी। सचिन वाजे और परमबीर सिंह जैसे लोग बहुत छोटे हैं। उन्होंने कहा कि इनके पीछे कौन लोग हैं कौन इन्हें नियंत्रित कर रहे हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि शिवसेना ने सचिन वाजे के लिए दबाव बनाया। मनसुख हिरेन की वाजे से लगातार बातचीत हुई थी। सचिन वाजे वसूली के लिए बदनाम था। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री सचिन वाजे का बचाव क्यों कर रहे हैं। मुंबई में अपराध का राजनीतिकरण हुआ। 

सचिन वाजे को नौकरी में वापस क्यों लिया गया?

भाजपा नेता ने कहा कि मुंबई में जिलेटिन स्टिक से भरी एक कार पाई गई और जिस प्रकार से पुलिस महकमे से इस प्रकार की गाड़ी प्लांट की जाती है और उसके बाद की घटनाओं में सबसे बड़ी कड़ी मनसुख हिरेन का जिस प्रकार से खून किया जाता है, ऐसा मुंबई और महाराष्ट्र के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। फडणवीस ने कहा कि अगर रक्षा करने वाले इस तरह अपराधी तत्व बन जाएँ तो सुरक्षा कौन करेगा ये सवाल है? इसमें सबसे अहम सवाल ये है कि एपीआई सचिन वाजे को नौकरी में वापस क्यों लिया गया?

कोरोना के बहाने की गई सचिन वाजे की बहाली

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने आरोप लगाया कि कोरोना के बहाने वाजे की बहाली की गई। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे साल 2004 में सस्पेंड हुए, 2007 में उन्होंने वीआरएस (ऐच्छिक सेवानिवृत्ति) दिया लेकिन उनके ऊपर चल रही इन्क्वायरी के चलते उनका वीआरएस स्वीकार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि साल 2018 में जिस समय वो मुख्यमंत्री थे उस समय शिवसेना की ओर से दबाव बनाया जा रहा था कि एपीआई सचिन वाजे को फिर एक बार सरकार की सेवा में लिया जाए। लेकिन उन्होंने सचिन वाजे को बहाल नहीं किया था।

जानिए क्या है इस विवाद के पीछे का पूरा मामला

वाजे दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के निकट 25 फरवरी को विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो कार मिलने के मामले में जाँच के केंद्र में हैं। अंबानी के घर के निकट मिली विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो कार के मालिक तथा कारोबारी मनसुख हिरेन की पत्नी ने आरोप लगाया था कि वाजे ने कुछ समय के लिए उस कार का इस्तेमाल किया था। हिरेन ने दावा किया था कि उनकी कार कुछ दिन पहले चोरी हो गई थी। इसके बाद हिरेन की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई और उनका शव ठाणे में मिला था। हिरेन की मौत के बाद मामले की जाँच एनआईए को सौंप दी गई है।

अजान से ‘खलल’ पर आमने-सामने सपा और बीजेपी, मौलाना सैफ अब्बास की अपील- अर्जी वापस लें VC

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की कुलपति द्वारा अजान को लेकर उठाए गए सवालों पर अब राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने प्रयागराज के डीएम को चिट्ठी लिख कहा है कि मस्जिद की अजान से उनकी नींद में खलल पड़ता है, ऐसे में एक्शन लिया जाए। अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। समाजवादी पार्टी ने कहा है कि भाजपा सिर्फ धर्म-जाति के मसले पर राजनीति करना चाहती है। 

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज़

समाजवादी पार्टी के अनुराग भदौरिया ने बयान दिया कि जब से भाजपा की सरकार बनी है, सिर्फ जाति-धर्म की बात हो रही है रोज़गार पर जोर नहीं दिया जा रहा है। किसी शिक्षा संस्थान को इस तरह के मसले पर जोर नहीं देना चाहिए।

वहीं, भाजपा के प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव का कहना है कि नमाज़ करना अधिकार है, लेकिन कोर्ट पहले ही कह चुका है कि लाउडस्पीकर लगाना निजता का हनन है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि लाउडस्पीकर का प्रयोग करना संवैधानिक रूप से उचित नहीं है।

मौलाना ने भी की शिकायत की निंदा

इसी मसले पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास का भी बयान आया है, उन्होंने कहा कि अज़ान तो सिर्फ 2-3 मिनट के लिए ही होती है। शिकायत करने वालों को ये भी कहना चाहिए था कि जो सुबह आरती होती है, इससे भी उनकी नींद खराब होती है। मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा कि सिर्फ अजान के लिए ऐसी शिकायत करना बिल्कुल गलत है, ऐसे में मैं मानता हूँ कि उन्हें इस शिकायत को वापस लेनी चाहिए।

मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सूफियान निजामी ने इस विवाद पर कहा कि हमारे मुल्क में हर मजहब के लोग रहते हैं, कहीं मस्जिद की अजान होती है तो कहीं मंदिर में भजन-कीर्तन होते हैं। अगर कोई कहता है कि सिर्फ अजान के कारण ही नींद में खलल होता है, तो ये ठीक नहीं है। 

मौलाना सूफियान निजामी बोले कि इलाहाबाद में कुंभ के दौरान, होली के दौरान या किसी अन्य त्योहार में भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होता है लेकिन किसी ने कोई चिट्ठी नहीं लिखी। ऐसे में ये सिर्फ एक साजिश का हिस्सा है कि अजान को बंद करवाया जाए।

आपको बता दें कि प्रयागराज की इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की कुलपति संगीता श्रीवास्तव ने 3 मार्च को डीएम को चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने कहा कि अजान के कारण उनकी नींद टूटती है और इसके बाद उनके काम में खलल पड़ता है। इसी को लेकर पूरा विवाद हो रहा है। कुलपति की चिट्ठी पर डीएम का कहना है कि उचित कार्रवाई की जाएगी।  

‘आपसे विनती है कि बंगाल में TMC के प्रचार के लिए न आएँ’: कॉन्ग्रेस नेता ने शरद पवार और तेजस्वी को लिखी चिट्ठी

पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार से सूबे में चुनाव प्रचार न करने की गुजारिश की है। उन्होंने ऐसी ही गुजारिश बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव से भी की है।

दरअसल, पवार और तेजस्वी ‘स्टार कैंपेनर’ के रूप में पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करने वाले हैं, जबकि कॉन्ग्रेस राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ चुनाव मैदान में है। ऐसे में प्रदीप ने दोनों से गुजारिश की है कि यदि संभव हो तो दोनों नेता तृणमूल के लिए प्रचार करने से बचें।

‘प्रचार नहीं करेंगे तो आपका आभारी रहूँगा’

NCP सुप्रीमो पवार को लिखे पत्र में भट्टाचार्य ने कहा, “मेरी जानकारी में आया है कि आपने सत्तारुढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रचार करने के लिए बतौर स्टार प्रचारक पश्चिम बंगाल आने के लिए हामी भरी है, ताकि सूबे में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी जीत सुनिश्चित की जा सके। पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस पार्टी तृणमूल से एक राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में स्टार कैंपेनर के रूप में आपकी उपस्थिति पश्चिम बंगाल के आम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। इसे देखते हुए यदि आप पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करने से बचते हैं तो मैं आपका बेहद आभारी रहूँगा।”

साभार: सोशल मीडिया

‘सूबे में TMC से हमारी राजनीतिक लड़ाई’

वहीं, भट्टाचार्य ने तेजस्वी को लिखे पत्र में कहा है, “मुझे पता चला है कि आपने सत्तारुढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रचार करने के लिए बतौर स्टार प्रचारक पश्चिम बंगाल आने के लिए हामी भरी है, ताकि सूबे में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी जीत सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस पार्टी तृणमूल से एक राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में एक स्टार कैंपेनर के रूप में आपकी उपस्थिति पश्चिम बंगाल के आम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। इसे देखते हुए यदि आप तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार न करने का फैसला लेते हैं तो मैं आपका बेहद आभारी रहूँगा।”

बता दें कि शरद पवार और तेजस्वी यादव दोनों ने ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नैतिक समर्थन देते हुए उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की बात कही है, जबकि क्रमशः महाराष्ट्र और बिहार में इन नेताओं का कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है। बिहार में आरजेडी के साथ कॉन्ग्रेस और वाम का गठबंधन है तथा महाराष्ट्र में एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस एकजुट होकर सरकार चला रही है।

जगन्नाथ मंदिर के 35,000 एकड़ से अधिक जमीन बेचने की तैयारी में ओडिशा सरकार, 315.337 एकड़ जमीन पहले ही बिका

ओडिशा सरकार ने राज्य और 6 अन्य राज्यों में भगवान जगन्नाथ से संबंधित 35,272 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानून मंत्री प्रताप जेना ने मंगलवार (मार्च 16, 2021) को विधानसभा में बताया।

भाजपा विधायक मोहन चरण मांझी के एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए, जेना ने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक समिति की सिफारिशों के अनुसार, सरकार मंदिर की 35,272.235 एकड़ भूमि की संपत्ति बेचने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

जेना ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैले 60,426.943 एकड़ के मालिक हैं। जिसमें से, मंदिर प्रशासन 34,876.983 एकड़ में राइट्स ऑफ राइट्स (RoR) तैयार कर सकता है। मंत्री ने विधानसभा को बताया, “आयोग की सिफारिश के अनुसार, राज्य सरकार की अनुमोदित नीति (समन नीति) के अनुसार जमीन बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।”

बता दें कि सरकार पहले ही कटक शहर में भारती मठ भवन सहित जगन्नाथ की 315.337 एकड़ जमीन बेच चुकी है और जमीन की बिक्री से अर्जित 11.20 करोड़ रुपए मंदिर कॉर्पस फंड में जमा किए गए हैं।

इसी तरह, ओडिशा के बाहर 6 राज्यों में पहचान की गई 395.252 एकड़ जमीन को बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य से जिला कलेक्टरों को पत्र लिखा है।

सूत्रों ने कहा कि 12 वीं सदी के मंदिर में पश्चिम बंगाल में अधिकतम 322.930 एकड़ और महाराष्ट्र में 28.218 एकड़, मध्य प्रदेश में 25.110 एकड़, आंध्र प्रदेश में 17.020 एकड़, छत्तीसगढ़ में 1.700 एकड़ और बिहार में 0274 एकड़ जमीन है। मंत्री ने कहा कि बाघा क्षेत्र में लगभग 100 एकड़ की पहचान की गई है और सरकार प्रत्येक वर्ष शेयरधारियों से धान की मात्रा एकत्र कर रही है। इस उद्देश्य के लिए एक खामारी बाघा में लगी हुई है, जबकि एक अन्य खामारी डोहियन में लगी हुई है, जो क्षेत्र में स्थित जमीन जायदादों की देखभाल के लिए है, उन्होंने कहा, दोचियान क्षेत्र से एकत्र धान भी हर साल बेचा जाता है।

इसके अलावा, खुरदा में स्थित 582.255 एकड़ जमीन लीज के आधार पर ओडिशा काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (OCDC) को दी गई है। बदले में, सरकार को हर साल निगम से 3 लाख रुपए मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों ने 30 साल से अधिक समय तक मंदिर की जमीन पर कब्जा किया है, उन्हें मंदिर की जमीन को कब्जे में लेने के लिए प्रति एकड़ 6 लाख रुपए देने होंगे। जिन लोगों ने मंदिर भूमि का अधिग्रहण 30 साल से कम समय के लिए किया है, लेकिन 20 से अधिक वर्षों के लिए, उन्हें भूखंड खरीदने के लिए प्रति एकड़ 9 लाख रुपए का भुगतान करना होगा।

इसके अलावा, जिन व्यक्तियों ने 20 साल से कम समय से मंदिर के भूखंडों पर कब्जा किया है, लेकिन 12 साल से अधिक के लिए प्रति एकड़ 15 लाख रुपए का भारी भुगतान करना होगा। कानून मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सुधार लाने और जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी विभिन्न घटनाओं की जाँच के लिए चार आयोगों का गठन किया है।

पैनल न्यायमूर्ति बीके पात्रा आयोग, बीडी शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति, न्यायमूर्ति पीके मोहंती आयोग और न्यायमूर्ति बीपी दास आयोग हैं। उन्होंने कहा कि आयोगों द्वारा की गई विभिन्न सिफारिशों को लागू करने के लिए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद मंदिर के मुख्य प्रशासक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।