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‘आपसे विनती है कि बंगाल में TMC के प्रचार के लिए न आएँ’: कॉन्ग्रेस नेता ने शरद पवार और तेजस्वी को लिखी चिट्ठी

पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार से सूबे में चुनाव प्रचार न करने की गुजारिश की है। उन्होंने ऐसी ही गुजारिश बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव से भी की है।

दरअसल, पवार और तेजस्वी ‘स्टार कैंपेनर’ के रूप में पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करने वाले हैं, जबकि कॉन्ग्रेस राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ चुनाव मैदान में है। ऐसे में प्रदीप ने दोनों से गुजारिश की है कि यदि संभव हो तो दोनों नेता तृणमूल के लिए प्रचार करने से बचें।

‘प्रचार नहीं करेंगे तो आपका आभारी रहूँगा’

NCP सुप्रीमो पवार को लिखे पत्र में भट्टाचार्य ने कहा, “मेरी जानकारी में आया है कि आपने सत्तारुढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रचार करने के लिए बतौर स्टार प्रचारक पश्चिम बंगाल आने के लिए हामी भरी है, ताकि सूबे में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी जीत सुनिश्चित की जा सके। पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस पार्टी तृणमूल से एक राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में स्टार कैंपेनर के रूप में आपकी उपस्थिति पश्चिम बंगाल के आम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। इसे देखते हुए यदि आप पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करने से बचते हैं तो मैं आपका बेहद आभारी रहूँगा।”

साभार: सोशल मीडिया

‘सूबे में TMC से हमारी राजनीतिक लड़ाई’

वहीं, भट्टाचार्य ने तेजस्वी को लिखे पत्र में कहा है, “मुझे पता चला है कि आपने सत्तारुढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रचार करने के लिए बतौर स्टार प्रचारक पश्चिम बंगाल आने के लिए हामी भरी है, ताकि सूबे में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी जीत सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस पार्टी तृणमूल से एक राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में एक स्टार कैंपेनर के रूप में आपकी उपस्थिति पश्चिम बंगाल के आम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। इसे देखते हुए यदि आप तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार न करने का फैसला लेते हैं तो मैं आपका बेहद आभारी रहूँगा।”

बता दें कि शरद पवार और तेजस्वी यादव दोनों ने ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नैतिक समर्थन देते हुए उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की बात कही है, जबकि क्रमशः महाराष्ट्र और बिहार में इन नेताओं का कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है। बिहार में आरजेडी के साथ कॉन्ग्रेस और वाम का गठबंधन है तथा महाराष्ट्र में एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस एकजुट होकर सरकार चला रही है।

जगन्नाथ मंदिर के 35,000 एकड़ से अधिक जमीन बेचने की तैयारी में ओडिशा सरकार, 315.337 एकड़ जमीन पहले ही बिका

ओडिशा सरकार ने राज्य और 6 अन्य राज्यों में भगवान जगन्नाथ से संबंधित 35,272 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानून मंत्री प्रताप जेना ने मंगलवार (मार्च 16, 2021) को विधानसभा में बताया।

भाजपा विधायक मोहन चरण मांझी के एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए, जेना ने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक समिति की सिफारिशों के अनुसार, सरकार मंदिर की 35,272.235 एकड़ भूमि की संपत्ति बेचने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

जेना ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैले 60,426.943 एकड़ के मालिक हैं। जिसमें से, मंदिर प्रशासन 34,876.983 एकड़ में राइट्स ऑफ राइट्स (RoR) तैयार कर सकता है। मंत्री ने विधानसभा को बताया, “आयोग की सिफारिश के अनुसार, राज्य सरकार की अनुमोदित नीति (समन नीति) के अनुसार जमीन बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।”

बता दें कि सरकार पहले ही कटक शहर में भारती मठ भवन सहित जगन्नाथ की 315.337 एकड़ जमीन बेच चुकी है और जमीन की बिक्री से अर्जित 11.20 करोड़ रुपए मंदिर कॉर्पस फंड में जमा किए गए हैं।

इसी तरह, ओडिशा के बाहर 6 राज्यों में पहचान की गई 395.252 एकड़ जमीन को बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य से जिला कलेक्टरों को पत्र लिखा है।

सूत्रों ने कहा कि 12 वीं सदी के मंदिर में पश्चिम बंगाल में अधिकतम 322.930 एकड़ और महाराष्ट्र में 28.218 एकड़, मध्य प्रदेश में 25.110 एकड़, आंध्र प्रदेश में 17.020 एकड़, छत्तीसगढ़ में 1.700 एकड़ और बिहार में 0274 एकड़ जमीन है। मंत्री ने कहा कि बाघा क्षेत्र में लगभग 100 एकड़ की पहचान की गई है और सरकार प्रत्येक वर्ष शेयरधारियों से धान की मात्रा एकत्र कर रही है। इस उद्देश्य के लिए एक खामारी बाघा में लगी हुई है, जबकि एक अन्य खामारी डोहियन में लगी हुई है, जो क्षेत्र में स्थित जमीन जायदादों की देखभाल के लिए है, उन्होंने कहा, दोचियान क्षेत्र से एकत्र धान भी हर साल बेचा जाता है।

इसके अलावा, खुरदा में स्थित 582.255 एकड़ जमीन लीज के आधार पर ओडिशा काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (OCDC) को दी गई है। बदले में, सरकार को हर साल निगम से 3 लाख रुपए मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों ने 30 साल से अधिक समय तक मंदिर की जमीन पर कब्जा किया है, उन्हें मंदिर की जमीन को कब्जे में लेने के लिए प्रति एकड़ 6 लाख रुपए देने होंगे। जिन लोगों ने मंदिर भूमि का अधिग्रहण 30 साल से कम समय के लिए किया है, लेकिन 20 से अधिक वर्षों के लिए, उन्हें भूखंड खरीदने के लिए प्रति एकड़ 9 लाख रुपए का भुगतान करना होगा।

इसके अलावा, जिन व्यक्तियों ने 20 साल से कम समय से मंदिर के भूखंडों पर कब्जा किया है, लेकिन 12 साल से अधिक के लिए प्रति एकड़ 15 लाख रुपए का भारी भुगतान करना होगा। कानून मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सुधार लाने और जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी विभिन्न घटनाओं की जाँच के लिए चार आयोगों का गठन किया है।

पैनल न्यायमूर्ति बीके पात्रा आयोग, बीडी शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति, न्यायमूर्ति पीके मोहंती आयोग और न्यायमूर्ति बीपी दास आयोग हैं। उन्होंने कहा कि आयोगों द्वारा की गई विभिन्न सिफारिशों को लागू करने के लिए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद मंदिर के मुख्य प्रशासक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।

मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह का होमगार्ड विभाग में तबादला, हेमंत नागराले बने नए पुलिस आयुक्त

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का ट्रांसफर हो गया है। उनका तबादला होमगार्ड विभाग में किया गया है। उनकी जगह पर हेमंत नागराले को मुंबई का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने इसकी जानकारी दी।

बता दें कि इससे पहले परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। परमबीर सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। लेकिन इस बार मामला कुछ ज़्यादा ही गंभीर है। सोमवार (मार्च 16, 2021) को मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को एंटीलिया बम कांड मामले में उनकी बेगुनाही का समर्थन करने के लिए सैकड़ों ट्वीट किए गए थे। इनमें से ज्यादातर ट्वीट्स में दावा किया गया कि परमबीर सिंह को ‘स्कॉर्पियो कार विवाद’ में ‘घसीटा’ गया।

पिछले दिनों एनआईए के अधिकारियों ने 25 फरवरी को एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियों खड़ी करने की घटना में इस्तेमाल की गई सफेद इनोवा कार को मुंबई पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में ट्रेस किया। करीब से देखने पर उन्होंने पाया कि यह वही सफेद इनोवा कार है, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो के साथ किए जाने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक इस कार पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था।

इससे पहले रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर परमबीर सिंह का नाम चर्चा में आया था। मीडिया चैनल ने बताया था कि मुंबई पुलिस ने चैनल के न्यूजरूम में एडिटोरियल एक्सेस की माँग की थी। मुंबई पुलिस के इस कदम को भारतीय मीडिया के इतिहास में ‘अभूतपूर्व’ कदम बताते हुए मीडिया चैनल ने कहा कि परमबीर सिंह चैनल में काम करने वाले हर पत्रकार की जानकारी, उनका पता और लॉग इन आइडी की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने न्यूजरूम में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर डिटेल्स, ब्रॉडकास्ट रनडाउन डिटेल, शिफ्ट इंचार्ज की जानकारी, न्यूज डेस्क के वीकली शेड्यूल की कॉपी और उन टेक्निशियन की जानकारी भी माँगी थी जिन्हें न्यूजरूम सॉफ्टवेयर के बारे में ज्ञान हो। 

वहीं रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।

राजस्थान: वेंटीलेटर पर भर्ती महिला के प्राइवेट पार्ट छूकर रात भर नर्सिंग स्टाफ करता रहा अश्लील हरकत, रोती रही पीड़िता

राजस्थान की राजधानी जयपुर में बने शैल्बी अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती एक महिला मरीज के यौन शोषण का मामला सामने आया है। नर्सिंग स्टॉफ खुशीराम ने सोमवार (मार्च 17, 2021) को महिला के साथ उस समय बदसलूकी की, जब उसका ऑपरेशन करके उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। 

खुशीराम उस दौरान अस्पताल में ड्यूटी पर था। उसने महिला की हालत का फायदा उठाते हुए उससे अश्लील हरकत की। महिला होश में थी, लेकिन मुँह पर मास्क होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पाई। खुशीराम उसे छू छूकर घटिया हरकतें करता रहा। पूरी रात उसके प्राइवेट पार्ट्स पर भी हाथ लगाया।

सुबह जब दूसरा स्टाफ वहाँ आया तो पीड़िता ने महिला नर्स को आपबीती बतानी चाही, मगर खुशीराम ने उसे धमका दिया। बाद में जब महिला मरीज का पति उसे देखने पहुँचे तो उसने लिख कर अपनी सारी बात बताई। 

पत्नी के यौन उत्पीड़न की बात समझते ही पति आग बबूला हो गया। उसने तुरंत पुलिस में शिकायत करवाई। शिकायत में पति ने बताया कि सोमवार देर रात को उसकी पत्नी की तबीयत खराब होने पर वह उसे चित्रकूट में स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर पहुँचा, जहाँ पर महिला की स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे आईसीयू में भर्ती कर लिया।

तबीयत खराब होने की वजह से शाम को उनकी पत्नी का ऑपरेशन किया गया। चूँकि, आईसीयू में किसी का रुकना अलाउड नहीं था। इसलिए अस्पताल की तरफ से कहा गया कि जरूरत पड़ने पर उनको बुला लिया जाएगा, जिसे सुन महिला का पति घर चला गया।

अगली सुबह जब वह अस्पताल में आया तो पत्नी परेशान थी। उसने रोते हुए कुछ कुछ इशारों में बताने की कोशिश की, लेकिन मुँह पर मास्क के कारण वह नहीं बोल पाई, फिर हाथ में एक कागज दिया गया तो महिला ने अपने साथ हुई बदसलूकी के बारे में बताया।

महिला ने लिखा कि रात के समय मेल वॉर्ड बॉय उसके पास आया और बेहोशी की अवस्था में समझकर उसके शरीर के साथ छेड़छाड़ करने लगा। उसके प्राइवेट पार्ट्स को भी छुए। वेंटिलेटरपर होने के कारण महिला उस युवक का विरोध नहीं कर पाई और रात भर रोती रही।

बता दें कि अस्पताल में सेवाकर्मी की ओर से हुई ऐसी शर्मसार हरकत पर डीसीपी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल में सीसीटीवी को चेक किया और आरोपित की पहचान करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित करौली के नादौती का रहने वाला है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि राजस्थान से महिलाओं के यौन उत्पीड़न का इन दिनों ये कोई पहला मामला नहीं है, जहाँ आम जन की सेवा के नाम पर किसी महिला की अस्मत पर प्रहार हुआ हो। इससे पहले 8 मार्च को प्रदेश के अलवर जिले में एक पुलिस अधिकारी पर महिला से थाने में दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। वहीं 14 मार्च को एक एसीपी पर एक दुष्कर्म पीड़िता के साथ जबरदस्ती करने का मामला उजागर हुआ था।

कर्नाटक: मस्जिदों-दरगाहों में रात 10 से सुबह 6 तक लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध, SDPI ने किया विरोध

कर्नाटक राज्य वक्फ बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा कि राज्य भर में मस्जिदों और दरगाहों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच अज़ान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाए।

बोर्ड ने पिछले सप्ताह जारी परिपत्र में कहा, “शोर के परिवेश मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य के साथ, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 लागू हैं। रात के समय में लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाएगा, जिसका मतलब रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक होगा।”

वक्फ बोर्ड ने पाया कि जेनरेटर सेट, लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के कारण कई मस्जिदों और दरगाहों के आस-पास बढ़ते परिवेश के शोर का मानव स्वास्थ्य और लोगों के मनोवैज्ञानिक कल्याण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

इसके अलावा, परिपत्र ने कहा कि ‘साइलेंस जोन’ के पास कोई भी उल्लंघन दंड के लिए उत्तरदायी होगा। हालाँकि, वक्फ बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि अज़ान पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए निर्दिष्ट समय के दौरान केवल लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध है।

सर्कुलर में कहा गया है, “जो भी ध्वनि एम्पलीफायर या विस्फोट उत्सर्जक पटाखों का उपयोग करता है, एक साइलेंट जोन में लाउडस्पीकर या सार्वजनिक प्रणाली का उपयोग करता है, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम -1986 के प्रावधानों के तहत दंड के लिए उत्तरदायी है।” 

लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अज़ान, महत्वपूर्ण घोषणाओं के लिए किया जाना चाहिए

आदेश में आगे कहा गया है, “स्थानीय पर्यावरण अधिकारियों के परामर्श से संस्था में न्वाइज-गवर्निंग तंत्र स्थापित किया जा सकता है। निर्धारित सीमा के भीतर एम्पलीफायर को संचालित करने के लिए संस्थानों का प्रबंधन म्यूज़िन (जिस व्यक्ति को मस्जिद में नमाज़ अदा करने के लिए कहता है) को प्रशिक्षित करेगा।

आदेशों में आगे कहा गया है कि दिन के दौरान उपयोग किए जाने वाले लाउडस्पीकर परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार होने चाहिए, और उनसे अनावश्यक शोर नहीं होना चाहिए। लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अज़ान और महत्वपूर्ण घोषणाओं जैसे कि मृत्यु, दफनाने का समय, चंद्रमा के दर्शन आदि के लिए किया जाएगा।

वक्फ बोर्ड ने कहा कि प्रबंधन को फल देने वाले छायादार पेड़ों और सजावटी पौधों के रोपण के लिए मस्जिद और दरगाहों के खुले स्थानों का उपयोग करना चाहिए। आदेश में कहा गया, “एक साफ और स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जाएगा। धार्मिक परिसर में भीख माँगना छोड़ दें, इसके बजाय, संस्थान स्तर पर परामर्श और परोपकारी उपाय किए जा सकते हैं।”

19 दिसंबर, 2020 को आयोजित 327 वीं बैठक के दौरान वक्फ बोर्ड ने ये महत्वपूर्ण फैसले लिए। निकाय ने कर्नाटक में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया और “इसने सर्वसम्मति से मस्जिद और दरगाह के प्रबंधन के बीच जागरूकता पैदा करने का संकल्प लिया।”

इस्लामी संगठनों ने वक्फ बोर्ड पर बोला हमला

राज्य में इस्लामिक संगठनों को वक्फ बोर्ड का यह फैसला रास नहीं आया। कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन SDPI ने उनके अधिकार क्षेत्र को खत्म करने के लिए वक्फ बोर्ड पर हमला किया है। एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल हन्नान ने कहा कि बोर्ड को कुरान, नमाज और अजान पर फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को सरकार, निजी क्षेत्र और राजनेताओं द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण करने वाली वक्फ संपत्तियों से निपटना चाहिए।

मौलवियों और इमामों ने वक्फ बोर्ड पर कर्नाटक की भाजपा सरकार के दबाव में इस तरह का फैसला लेने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई, 2017 को सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान एक समान परिपत्र जारी किया गया था।

15 साल के मुहम्मद बिन कासिम पर राजा दाहिर की बेटियों ने लगाए थे रेप के आरोप: जानिए क्या हुआ खलीफा के दरबार में

मुहम्मद बिन कासिम का नाम इतिहास को जानने वाले लोगों ने सुना होगा। एक ऐसा इस्लामी आक्रांता, जिसका जीवनकाल मात्र 20 वर्षों का ही था लेकिन उसने ऐसे-ऐसे कुकृत्य किए कि इतिहास उसे आज भी लानतें भेजता है। सिंध के राजा दाहिर के साथ हुए उसके युद्ध को भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम के सबसे शुरुआती आक्रमणों में से एक माना जाता है। पाकिस्तान में उसे लेकर आज भी बहस होती है क्योंकि पाकिस्तानी एक हिन्दू राजा दाहिर को भला कैसे अपना पूर्वज मान सकते हैं।

अरब के मुहम्मद बिन कासिम ने जब सिंध पर हमला कर के वहाँ कब्ज़ा किया, तब वो मात्र 15-17 वर्ष का था। मुहम्मद बिन कासिम की सेना में मुस्लिम थे, अरब के। राजा दाहिर की सेना में भारतीय थे। जब उसने सिंध को जीत कर आगे बढ़ने की तैयारी की तो साथ में भारतीयों को भी अपनी फ़ौज में जोड़ता चला गया। जो गरीब थे और जिनके पास रुपए कमाने के लिए कोई जरिया नहीं था, उसे फ़ौज में लेकर कासिम ने युद्ध लड़ना शुरू किया।

सिंध की इतिहास की एक पुस्तक है चचनामा। उसमें वर्णन है कि कैसे मुस्लिमों ने सिंध पर कब्ज़ा किया। इसे अली अहमद ने लिखा था। इसमें बताया गया है कि जब युद्ध में राजा दाहिर मारे गए, तो उसके बाद उनकी दो बेटियों को बंदी बना लिया गया। मुहम्मद बिन कासिम ने उन दोनों को दमिश्क (डमस्कस) भेज दिया, जो उस वक़्त उमय्यद वंश की राजधानी थी। आज आतंक से पीड़ित ये जगह सीरिया की राजधानी है।

राजा दाहिर की दोनों बेटियाँ युवा ही थीं। कुछ ही दिनों बाद इस्लाम के खलीफा ने उनके बारे में सुना और दोनों को अपने दरबार में बुलाया। राजा दाहिर की बड़ी बेटी का नाम सूर्यदेवी और छोटी बेटी का नाम परमालदेवी था। खलीफा वालिद बिन अब्दुल मलिक सूर्यदेवी के सौंदर्य को देख कर मोहित हो गया और उसके भीतर हवस की आग जाग उठी। इसके बाद उसने आदेश दिया कि परमालदेवी को वहाँ से ले जाया जाए। तत्पश्चात उसने राजा दाहिर की बड़ी बेटी सूर्यदेवी के साथ जोर-जबरदस्ती शुरू कर दी।

वहाँ खलीफा को पता चला कि मुहम्मद बिन कासिम ने दोनों बहनों को 3 दिनों तक बंधक बना कर रखा था और इस दौरान कासिम ने उनका रेप भी किया था। ये जानने के बाद खलीफा का खून खौल उठा और उसने तुरंत कलम, दवात और कागज़ मँगाई। असल में तो खलीफा इस बात से नाराज था कि मुहम्मद बिन कासिम ने सूर्यदेवी के ‘सतीत्व’ को भंग कर दिया है, जबकि ऐसा करने का अधिकार सिर्फ उसे, यानी खलीफा को ही था। वो इस बात से नाराज था कि उससे पहले किसी ने रेप क्यों किया।

उसने तुरंत आदेश जारी किया कि मुहम्मद बिन कासिम जहाँ भी और जिस भी अवस्था में हो, उसे कच्चे खाल में सिलकर खलीफा के दरबार में पेश किया जाए। इसके बाद खलीफा का आदेश मानते हुए उसके सैनिकों ने उसे बैल के चमड़े में सिलकर एक ट्रंक में डाल दिया और डमस्कस के लिए निकल गए। कहते हैं कि खलीफा के आदेश के मुताबिक उसने ही सैनिकों से ऐसा करने को कहा था। हालाँकि, रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जिस अल्लाह के नाम पर उसने मारकाट और खून-खराबा मचाया था, वो उसे ही प्यारा हो गया। खलीफा उसकी लाश देख कर खुश हुआ।

हालाँकि, इस्लामी इतिहास के हिसाब से लिखा गया चचनामा इसके बाद ये भी लिखता है कि सूर्यदेवी ने अपने पिता राजा दाहिर की हत्या का बदला लेने के लिए खलीफा से झूठ बोला था और इसका पता चलते ही खलीफा ने दोनों बहनों को घोड़े की पूछ से बाँधकर तब तक घसीटे जाने की आज्ञा दी, जब तक उनकी मौत न हो जाए। इतिहासकारों में कासिम की मौत के कारण को लेकर मतभेद है। एक वर्ग कहता है कि उसके ही चचेरे भाई हज्जाज ने गुटबाजी कर के खलीफा को उसके खिलाफ भड़काया था।

कई वर्षों तक सिंध और मुल्तान अरब के शासन में रहा। खलीफाओं के कमजोर पड़ते ही वहाँ के क्षेत्र स्वतंत्र होते चले गए। यहाँ आजकल दावा किया जाता है कि 18 वर्ष के कम उम्र में व्यक्ति ‘नाबालिग’ होता है और बच्चा होता है, लेकिन ये भी तथ्य है कि उस ‘बच्चे’ की परवरिश किस माहौल में हुई है और उसे क्या सिखाया गया है, उसके क्रियाकलाप उस पर ही निर्भर करते हैं। इसीलिए, इस्लामी आक्रांताओं में से लगभग सारे मूर्तिभंजक और क्रूर हत्यारे हुए।

30 ब्रा-पैंटी चुराने वाले मोहम्मद अक्कास को UP पुलिस ने दबोचा, लड़कियों ने बाहर कपड़े सुखाने कर दिए थे बंद

उत्तर प्रदेश के मेरठ में लड़कियों के अंडरगारमेंट्स चुराने वाले दूसरे आरोपित मोहम्मद अक्कास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले एक आरोपित रोमिन अब्बासी की गिरफ्तारी हुई थी। उसके पास से पुलिस को चोरी किए गए अंडरगार्मेंट्स भी बरामद हुए थे।

मोहम्मद अक्कास की गिरफ्तारी की सूचना मेरठ पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से दी है। पुलिस ने बताया कि अक्कास ने पकड़े जाने के बाद अपनी घिनौनी मानसिकता का खुलासा किया। उसने कहा कि अभी तक उसने अपने साथियों के साथ 30 से ज्यादा घरों से महिलाओं के अंडरगार्मेंट चोरी किए हैं।

सभी इल्जाम स्वीकारते हुए मोहम्मद अक्कास ने बताया कि वह पहले अपने दोस्तों के साथ ऐसी महिलाओं के घर को तलाशता था, जो बाहर कपड़े सुखाती हों। फिर मौका देख कर वहाँ से उनके कपड़े चुरा लेता था।

पुलिस ने पड़ताल में ये भी पाया कि मोहम्मद अक्कास सिर्फ़ अंडरगार्मेंट्स चोरी करने के मामले में आरोपित नहीं हैं बल्कि वाहन चोरी केस में भी वांछित है। पुलिस को पहले से ही उसकी व उसके अब्बा आशीक अली की तलाश थी। अक्कास की गिरफ्तारी के साथ ही उसकी एक अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी है।

37 सेकेंड की इस वीडियो में वह स्कूटी से आकर एक घर के बाहर सूख रहे महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स चुराते दिख रहा है। उसकी वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय महिलाओं में इतना डर है कि उन्होंने बाहर कपड़े सुखाने भी बंद कर दिए हैं।

गौरतलब है कि सदर थाना क्षेत्र में लड़कियों के अंडरगार्मेंट चोरी होने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मोहम्मद रोमिन को गिरफ्तार किया था। रोमिन ने भी पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उसने बताया था कि इस कृत्य के पीछे का कारण उनकी कामुकता थी। उन्होंने मिलकर कम से कम 10 अंडरगार्मेंट्स चुराए थे।

बता दें कि पूरा मामला 14 फरवरी को संज्ञान में आया था। जब कुछ लोगों ने इकट्ठा होकर सदर थाना क्षेत्र में अपनी शिकायत लिखवाई थी। लोगों को लगा था कि शायद ये सब काम वशीकरण की मंशा से किया जा रहा हो, लेकिन रोमिन ने गिरफ्तार होकर अपनी घिनौनी मानसिकता की सच्चाई उजागर की थी और अब अक्कास ने भी सारे आरोप स्वीकार कर लिए हैं।

आगरा में कुल्हाड़ी से साधु शिव गिरि की बेहरमी से की गई हत्या, हनुमान मंदिर परिसर में मिला खून से सना शव

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक साधु की धारदार हथियार से बेहरमी से हत्या कर दी गई है। जिसके कारण इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों ने मंदिर परिसर में शव को देखा जिसके बाद यूपी पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई। फिलहाल पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की जाँच करने में जुटी हुई है।

मंदिर परिसर में लहूलुहान मिला शव

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के न्यू आगरा जिले में स्थित मऊ गाँव का है। जहाँ पर यमुना नदी के किनारे जंगलो में हनुमान जी का मंदिर है। इसी मंदिर में ‘शिव गिरि’ नाम के साधु पूजा-अर्चना किया करते थे और मंदिर में ही रहते भी थे। सुबह हुई तो वहाँ पर रहने वाले लोगों ने मंदिर परिसर में खून से लथपथ साधु के शव को देखा। जिसके बाद लोगों ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुँच कर शव को कब्जे में लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने बताया कि शिव गिरी पिछले 30 साल से मंदिर में पुजारी थे। मूलत: फतेहपुर सीकरी के गाँव खेड़ा भोपुर के निवासी थे।

SP सिटी का बयान

आगरा के SP सिटी ने बताया कि न्यू आगरा थाना क्षेत्र के मऊ गाँव में एक साधू की हत्या की खबर मिली थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मौके से कुल्हाड़ी भी बरामद हुई है जिससे हत्या की बात सामने आ रही है। मुकदमा दर्ज करके जाँच की जाएगी। अभी कोई कारण सामने नहीं आया है।

आगरा के SP सिटी रोहन पी बोत्रे ने बताया कि साधु की हत्या कुल्हाड़ी से काटकर की गई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। एसपी ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस को आशंका है कि किसी नशेबाज ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस को मंदिर परिसर में देसी शराब का खाली क्वार्टर भी पड़ा मिला। पुजारी के सिर के पिछले हिस्से में प्रहार किया गया था। मौके पर संघर्ष के निशान भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि मंदिर पर रात को एक या दो लोग ही आए थे। उन्होंने ही वारदात को अंजाम दिया।  

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन इलाके में दो साधुओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। दोनों साधु गोवर्धन मार्ग पर मौजूद गिरिराज बगीचा के पीछे बने आश्रम में रहते थे। आश्रम में रामायण का पाठ कर रहे दोनों साधुओं ने अपने एक और साथी के साथ सुबह की चाय पी थी। जिसके बाद तीनों के ही मुँह से झाग निकलता हुआ देखा गया। बताया गया कि आश्रम में ही मौजूद गाय के दूध से चाय बनाकर इन लोगों ने पी थी, जिसके बाद यह घटना हुई।

‘सद्दाम और गद्दाफी ने भी जीते थे चुनाव, RSS की विचारधारा मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी’: राहुल गाँधी

राहुल गाँधी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को दिए अपने हालिया इंटरव्यू में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पर ये कहकर निशाना साधा कि सद्दाम हुसैन और मोहम्मद गद्दाफी ने भी तो चुनाव जीता था। केंद्र सरकार को लेकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि सद्दाम हुसैन और गद्दाफी को भी वोट की जरूरत नहीं थी, उन्होंने सत्ता पर कब्जा करने के लिए चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया था।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पिछले दिनों वी-डेम इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के हवाले से देश के लोकतांत्रिक न होने को लेकर दावे किए थे। इसी पर ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशुतोष वार्ष्णेय (Professor Ashutosh Varshney) ने उनकी टिप्पणी पर सवाल किए, जिसके जवाब में राहुल गाँधी ने उक्त बात कही।

हालाँकि, राहुल की बात पर गौर देने से पहले ये जानना दिलचस्प है कि जिस गद्दाफी का उन्होंने उदाहरण दिया, वह सन् 1969 में लीबिया में सैन्य तख्तापलट होने के कारण नेता चुना गया था। उसने शासन पाने के लिए ब्रिटिश समर्थित नेता इदरीस को सत्ता से उखाड़ फेंका था, न कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से कुर्सी पर अधिकार पाया था।

इसी तरह से सद्दाम हुसैन को साल 2003 में अमेरिकी फोर्स ने पकड़ा था। साल 2006 में वह मानवता के विरुद्ध किए गए अपराधों का दोषी पाया गया था। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई थी।

अब जाहिर है कि ऐसे तानाशाहों का नाम लेकर राहुल गाँधी पूरे मामले में सिर्फ़ और सिर्फ विदेशी चीजों को घुसाकर अपनी बात को दमदार साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसके अतिरिक्त उनकी बातों का और कोई मतलब नहीं है।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस और शिशु मंदिर सिर्फ़ भारत को तोड़ने के लिहाज से बने हैं और इनका इस्तेमाल जनता से पैसे लेने के लिए किया जाता है। एक और चौंकाने वाले बयान में उन्होंने दावा किया कि आरएसएस की विचारधारा और रणनीति मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के समान है।

संसद सत्र में बंद हुए माइक वाली घटनाओं को उदाहरण देते हुए राहुल गाँधी मानते हैं कि भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके सत्ता हथियाई है। उनके मुताबिक, केंद्र के पास नए आइडिया के लिए कोई भी कोना नहीं है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि 5 लाख आईटी सेल सदस्यों को हायर करने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष आरोप लगाते हैं कि भारत में फेसबुक का हेड भाजपाई है। वह गलत ढंग से चुनावी नैरेटिव को कंट्रोल करता है।

‘अजान से रोज नींद में पड़ती है खलल, कामकाज होता है प्रभावित’: इलाहाबाद विवि की VC ने DM से की त्वरित कार्रवाई की अपील

मशहूर गायक सोनू निगम के लाउडस्पीकर पर अजान न बजाने की अपील करने के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति ने भी यह अपील की है। विवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने प्रयागराज के जिलाधिकारी को पत्र लिख कर कार्रवाई की माँग की है। 

उनका कहना है कि अलसुबह मस्जिद के लाउडस्पीकर से गूँजने वाली अजान की आवाज उनकी दिनचर्या में खलल डाल रही है। इससे उनकी नींद प्रभावित होती है जिससे कि दिन भर उनके सिर में दर्द बना रहता है और कामकाज प्रभावित होता है।

कुलपति ने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा है कि रोज सुबह लगभग साढ़े पाँच बजे उनके आवास के नजदीक के मस्जिद से लाउडस्पीकर पर होने वाली अजान से उनकी नींद इस तरह बाधित हो जाती है कि उसके बाद तमाम कोशिश के बाद भी वह सो नहीं पातीं। जिसकी वजह से उन्हें दिनभर सिरदर्द बना रहता है और कामकाज भी प्रभावित होता है। 

पत्र में एक कहावत का हवाला देते हुए आगे कहा, “आपकी स्वतंत्रता वहीं खत्म हो जाती है जहाँ से मेरी नाक शुरू होती है।” यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है। कुलपति ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी सम्प्रदाय, जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। वह अपनी अजान लाउडस्पीकर के बगैर कर सकते हैं जिससे दूसरों की दिनचर्या प्रभावित न हो। आगे ईद से पहले सहरी की घोषणा भी सुबह चार बजे होगी। यह भी उनके और दूसरों की परेशानी की वजह बनेगा।

साभार: सोशल मीडिया

बड़े स्तर पर कार्रवाई की सराहना

पत्र में कुलपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश (पीआईएल नंबर-570 ऑफिस 2020) का हवाला दिया है। पत्र में उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी की त्वरित कार्रवाई की बड़े स्तर पर सराहना होगी। प्रभावित लोगों को लाउडस्पीकर के तेज आवाज से होने वाली अनिद्रा से निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में सभी वर्ग के लिए पंथनिरपेक्षता और शांतिपूर्ण सौहार्द की परिकल्पना की गई है।

कार्रवाई का आश्वासन

इस बारे में डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि कुछ दिनों पहले एक लेटर मिला था। इस प्रकरण में संबंधित अधिकारी को जाँच कर वैधानिक कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी के अनुसार इस प्रकरण से जुड़ा पत्र प्राप्त हुआ है। नियम संगत कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि यह पहली बार नहीं जब अजान पर इस तरह की बात कही गई है। इससे पहले बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने भी अजान को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि लाउडस्पीकर से दी जाने वाली अजान से उनकी नींद में खलल पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि वे इस धार्मिक कट्टरता को क्यों बर्दाश्त करें। ऐसे करना तो सरासर गुंडागर्दी है।