Home Blog Page 3961

कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में पुलिस ने नागा साधु को बुरी तरह टॉर्चर किया, गुप्तांग पर मारी लाठी, लूट लिया कैश

कॉन्ग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिसवालों द्वारा नागा साधु को निर्दयतापूर्वक पीटने का मामला सामने आया है। नागा साधु को बुरी तरह मारने के बाद पुलिसवालों ने उनके पास से सभी दस्तावेज, 1.25 लाख रुपए नकद, 12 हजार रुपए कीमत का मोबाइल फोन और चाँदी के बर्तन लूटकर उन्हें घायल अवस्था में थाने के बाहर फेंक दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित संत की पहचान जूना अखाड़े के योगी गंगापुरी के रूप में हुई है। वो केरल के त्रिवेंद्रम से बिलासपुर अपने सहयोगी साधु शम्भू महाराज से मिलने के लिए आए थे। उन्होंने AC सेकेंड कोच की टिकट ले रखी थी। उन्हें चकरभाटा रेलवे स्टेशन के पास स्थित अनुसुइया धाम आश्रम में जाना था। बिलासपुर पहुँचने के बाद रेलवे स्टेशन के बाहर वह नहाने लगे।

इसी दौरान वहाँ पहुँचे दो पुलिसवालों ने शक के आधार पर उन्हें हिरासत में ले लिया और वे दोनों नागा संत को तोड़वा पुलिस स्टेशन ले गए। ये जानते हुए भी कि संत को छत्तीसगढ़ी भाषा नहीं आती है। इन पुलिसवालों ने उनसे वहाँ की स्थानीय भाषा में बातचीत की। नहीं समझ पाने पर बुरी तरह से पीटा।

पुलिस की पिटाई से बुरी तरह से घायल संत योगी गंगापुरी घायल अवस्था में रोते हुए रास्ते पर जा रहे थे। उन्हें इस अवस्था में देख रेलवे के एक अधिकारी प्रमोद नागई ने उन्हें रोका। पहले तो उन्हें लगा कि ये कोई मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति हैं। लेकिन, जैसे ही उन्हें यह पता चला कि वो एक संत हैं, नागई अपने घर से कपड़े लाए और उन्हें पहनने के लिए दिया। योगी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह कपड़े नहीं पहनने के नियमों से बँधे हुए हैं।

बाद में रेलवे अधिकारी साधु को अपने घर ले गए और उनके घावों की मरहम पट्टी की। बाद में वह उन्हें उस आश्रम में भी ले गए जहाँ उन्हें जाना था। मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ता पीड़ित संत को थाने ले गए।

सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिसवालों ने नागा साधु के गुप्तांगों पर लाठियाँ मारी थी। न्यूज चैनल ने इस घटना का वीडियो यू-ट्यूब पर शेयर अपलोड किया है, जिसमें पुलिस की निर्दयता को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस मामले में योगी गंगापुरी के साथ अन्य हिंदू संगठनों ने बिलासपुर रेंज के आईजी रतनलाल दांगी से शिकायत कर इंसाफ की गुहार लगाई है। ‘

योगी गंगापुरी ने पुलिस से उनके प्रमाणपत्र वापस करने की माँग की है, जो उन्हें जूना अखाड़ा ने जारी किया था। हालाँकि, पुलिस वालों ने केवल उनका मोबाइल फोन लौटाया, बाकि सारा सामान वापस नहीं किया।

सचिन वाजे को मीठी नदी लेकर पहुँची NIA, गोताखोरों ने निकाले हार्ड डिस्क, CPU, नंबर प्लेट समेत कई अहम सबूत

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में जाँच करते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी रविवार (मार्च 28, 2021) को निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के साथ मीठी नदी पहुँची। यहाँ गोताखोरों की मदद से NIA को नदी में से नंबर प्लेट और डीवीआर समेत कई अहम सुराग हाथ लगे।

समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि NIA मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर वाजे को लेकर गई। वहाँ गोताखोरों ने नदी से एक गाड़ी की नंबर प्लेट और अन्य सामान बरामद किया। कहा जा रहा है कि वाझे ने ही पूछताछ में NIA को बताया कि उसने सबूतों को नष्ट करने के लिए मीठी नदी में फेंक दिया था। 

जानकारी के अनुसार, नदी से गोताखोरों को 2 सीपीयू, 1 प्रिंटर, 1 लैपटॉप और 1 हार्ड डिस्क मिला। इसके अलावा दो नंबर प्लेट बरामद हुए हैं, जिन पर एक ही नंबर MHO2FP1539 लिखा है। जाँच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो ये सारी चीजें एंटीलिया और मनसुख हिरेन केस से जुड़ी हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन मामले में सचिन वाजे के बाद अब उसके करीबी एपीआई रियाज काजी की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। इस फुटेज में वह विक्रोली में नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते हुए पाया गया। 

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रियाज काजी ने नष्ट करने के इरादे से दुकान के मालिक से डीवीआर फुटेज माँगा। मालिक के साथ बातचीत के बाद उसे डीवीडी और एक कंप्यूटर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

एनआईए और एटीएस दोनों द्वारा रियाज काजी को एंटीलिया बम कांड की जाँच और व्यापारी मनसुख हिरेन की हत्या में अपनी भूमिका जानने के लिए कई बार तलब किया गया है। इससे पहले, रियाज काजी को ठाणे में सचिन वाजे के आवास परिसर से सीसीटीवी फुटेज एकत्र करते देखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों को कथित तौर पर रियाज काजी पर शक है कि सचिन वाजे को फर्जी नंबर प्लेट खरीदने और अहम सबूत नष्ट करने में मदद मिली है।

‘हम BJP और RSS को कुचल कर टुकड़े-टुकड़े कर देंगे’: चेन्नई में राहुल गाँधी ने दी धमकी

पंजाब में भाजपा विधायक के साथ बदसलूकी की तस्वीरें हर जगह सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चेन्नई में भाजपा और आरएसएस को फिर धमकी दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल ने कहा, “हम भाजपा और आरएसएस को कुचल कर टुकड़े-टुकड़े कर देंगे (We will smash the BJP and the RSS into smithereens)।”

राहुल,  इससे पहले भी कई बार आरएएस पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कुछ समय पहले आरएसएस द्वारा संचालित स्कूलों की तुलना पाकिस्तान में चलने वाले इस्लामी संगठन व मदरसों से की थी। जबकि हकीकत ये है कि आरएसएस द्वारा चलाए जाने वाले विद्या भारती स्कूल राज्य या फिर केंद्र सरकार द्वारा संबद्ध हैं। वहीं मदरसों का मुख्यधारा स्कूलिंग और शिक्षा से संबंध हो, ये कहीं भी जरूरी नहीं होता। 

अपने बयान में राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव गठबंधन को तमिलनाडु के लोगों के साथ बताया। उन्होंने कहा कि DMK अध्यक्ष स्टालिन CM बनेंगे। स्टालिन और कॉन्ग्रेस कभी भी उन विचारधाराओं और ताकतों के साथ समझौता नहीं करेगी जो तमिलों और तमिलनाडु के हित के खिलाफ हैं। आगे राहुल ने तमिलनाडु को भारत के नींव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि बाकी राज्यों में चुनाव हैं तो उन्होंने अपनी बात सुधार करते हुए कहा कि बाकी राज्य भी महत्तवपूर्ण हिस्से हैं, मगर तमिलनाडु उनमें प्रमुख है।

भाजपा पर आगे हमला बोलते हुए राहुल गाँधी को कहते सुना जा सकता है, “मैंने एक तस्वीर देखी कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि अमित शाह के पैर छू रहा है। इस तरह का रिश्ता बीजेपी में ही संभव है जहाँ आपको बीजेपी नेताओं के पैर छूने पड़ते हैं, जहाँ नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने झुकना पड़ता है।” 

आगे राहुल ने कहा, “जब मैं प्रधानमंत्री को तमिलनाडु के सीएम को कंट्रोल करते हुए देखता हूँ, सीएम को चुपचाप उनके पैर छूते देखता हूँ, तो मैं इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ। तमिलनाडु के सीएम अमित शाह के सामने झुकना नहीं चाहते हैं, लेकिन उन्होंने जो भ्रष्टाचार किया है, उसकी वजह से वह मजबूर हैं।”

राहुल के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर उनकी चुटकी ली। बिन सोचे समझे दिए गए बयानों पर यूजर्स ने निशाना साधा और ऐसी तस्वीरों की लाइन लगा दी जब तमाम लोग उनके और उनकी माँ यानी सोनिया गाँधी के आगे झुकते नजर आए। एक तस्वीर में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम टीएस देव, राहुल के पाँव छू रहे हैं। इस पर अभिषेक सिंह लिखते हैं, “चलो आपने ये स्वीकार कर लिया कि छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम घपलेबाज थे और आपने उन्हें पाँव छूने को मजबूर किया।”

बता दें कि तमाम तस्वीरों में पाँव को छुआते नजर आने वाले राहुल गाँधी ने तमिलनाडु की जनता को संबोधित करते हुए कहा, “मैं यह देख नहीं सकता कि इतनी बड़ी भाषा और समृद्ध परंपरा वाले तमिलनाडु के सीएम अमित शाह और नरेंद्र मोदी के पैर छुएँ। ये तस्वीर देखकर मुझे गुस्सा आया कि एक नेता इन लोगों के सामने झुक रहा है, और यही कारण है कि मैं आज यहाँ हूँ। मैं तमिल लोगों के साथ एक रिश्ता, बराबरी का रिश्ता चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तमिलनाडु, तमिलनाडु से चले, दिल्ली से नहीं।”

जीटीबी अस्पताल से फरार हुआ कुख्यात गैंगस्टर कुलदीप मान उर्फ ​​फैजा पुलिस एनकाउंटर में मारा गया, छिपाने वाला गिरफ्तार

दो लाख रुपए के ईनामी गैंगस्टर कुलदीप मान उर्फ फैजा को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। वह गुरुवार को राजधानी के जीटीबी अस्पताल में हुई गोली-बारी के बाद मौके से फरार हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस उसकी तलाश में लगी थी कि स्पेशल सेल को उसके रोहिणी सेक्टर-14 के तुलसी अपार्टमेंट छिपे होने की खबर मिली।

‘दिन भर उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के बाद शनिवार दोपहर 1:45 बजे पूरे इलाके की घेराबंदी करने के बाद इंस्पेक्टर सुनील राजन और रविंदर जोशी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने उस पर छापा मार दिया। पुलिस ने उससे आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन, खुद को घिरा पाकर उसने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में वह ढेर हो गया। उसे छुपाने वाले को भी पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया है।’

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक गैंगस्टर कुलदीप मान पुलिस की गोली से घायल हो गया था, जिसके बाद उसे अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जीटीबी अस्पताल से कैसे फरार हुआ था फैजा

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फैजा जेल में बंद गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ ​​गोगी का करीबी था। गुरुवार को उसे इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल लाया गया था। लेकिन, जैसे ही पुलिस टीम उसे लेकर अस्पताल पहुँची लगभग 10 हथियारबंद हमलावरों ने हमला किया। उन्होंने पुलिस टीम पर मिर्च पाउडर फेंका। दोनों तरफ से 20 राउंड फायर भी किए गए। अधिकारियों के मुताबिक इस गोलीबारी में हमलावरों में से एक अंकेश को पीठ में गोली लगी और वह गिर गया जबकि एक अन्य आरोपी रवि को सीने में दो गोली लगी और उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ दिनों पहले ही पुलिस को सूचना मिली थी गैंगस्टर काला राणा ने बैंकॉक में किसी प्रियव्रत से संपर्क कर उसे व्यक्तिगत तौर पर फैजा की मदद करने को कहा था। लेकिन, बीते 6 मार्च तो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने प्रियव्रत को बवाना में नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद काला राणा ने अंकेश से बातकर उसे फैजा की मदद करने के लिए कहा था, जब वह अस्पताल पहुँचे। पुलिस के मुताबिक, बुधवार को अंकेश सरस्वती विहार के एक होटल में रुका और गुरुवार को मुकरबा चौक से उसने अपने दो साथियों को साथ लिया और अस्पताल पहुँचा।

बांग्लादेश में मोदी दौरे के बाद कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिरों को बनाया निशाना, ट्रेनों-बसों को भी किया क्षतिग्रस्त

बांग्लादेश में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय दौरे के बाद अब वहाँ कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिर पर हमला बोला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बांग्लादेश से पीएम मोदी के लौटने के बाद हिंसा बढ़ गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस्लामिक गुटों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई, जिसके चलते कट्टरपंथी समूह और उग्र हो गए। रविवार को पूर्वी बांग्लादेश में एक ट्रेन को भी हिफाजत-ए-इस्लाम नाम के कट्टरपंथी समूह द्वारा निशाना बनाया गया।

रॉयटर्स के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस्लामी समूह के लोगों ने रविवार को एक ट्रेन पर हमला किया। इंजन रूम के साथ लगभग हर कोच को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसके अलावा रविवार को राजशाही के पश्चिम जिले में दो बसों में आग लगाई, जबकि सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ झड़प में उन पर पत्थरबाजी की।

एक पत्रकार ने एजेंसी को बताया, “ब्राह्मणबरिया इस वक्त जल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अंधाधुंध आग लगाई और प्रेस क्लब पर भी हमला किया गया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष सहित कई घायल हुए। हम अत्यधिक भय में हैं और बहुत असहाय महसूस कर रहे हैं। कई हिंदू मंदिरों पर भी हमला हो रहा है।“

पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारी सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए लकड़ी और रेत के बैगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने इन पर रबर की गोलियों और आँसू गैस से जवाबी कार्रवाई की है, जिसके चलते नारायणगंज में दर्जन से ज्यादा घायल हैं।

बता दें कि पीएम मोदी बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित जश्न के मौके पर वहाँ पहुँचे थे। लेकिन हिफाजत ए इस्लाम जैसे इस्लामिक गुटों ने वहाँ उनका विरोध शुरू कर दिया। कट्टरपंथी समूहों ने पीएम मोदी पर मुसलमानों के खिलाफ होने का आरोप लगाया और दो दिन हिंसा भड़काते रहे।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के ढाका पहुँचने पर शुक्रवार को मदरसों से निकलकर कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने वहाँ जमकर उत्पात मचाया था। इस दौरान थाने पर पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ हुई और थाने में आग लगाने का भी प्रयास किया गया। हालातों को काबू करने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। जिसके बाद ओपन फायरिंग में 5 लोग मारे गए। इनमें से 4 लोग हिफाजत-ए-इस्लाम संगठन के थे। 

वाजे का सहयोगी रियाज काजी नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते कैमरे में कैद, सबूत नष्ट करने का आरोप: रिपोर्ट्स

महाराष्ट्र राज्य को हिलाकर रख देने वाले सचिन वाजे मामले में ताजा घटनाक्रम में उनके करीबी एपीआई रियाज़ काज़ी को सीसीटीवी फुटेज में विक्रोली में नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते हुए पाया गया है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रियाज काजी ने नष्ट करने के इरादे से दुकान के मालिक से डीवीआर फुटेज माँगा। मालिक के साथ बातचीत के बाद उसे डीवीडी और एक कंप्यूटर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

एनआईए और एटीएस दोनों द्वारा रियाज काजी को एंटीलिया बम कांड की जाँच और व्यापारी मनसुख हिरेन की हत्या में अपनी भूमिका जानने के लिए कई बार तलब किया गया है। विक्रोली की एक दुकान पर बनाई गई कई नंबर प्लेट एनआईए द्वारा जब्त की गई कारों से बरामद हुईं हैं। 

इससे पहले, रियाज काजी को ठाणे में सचिन वाजे के आवास परिसर से सीसीटीवी फुटेज एकत्र करते देखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों को कथित तौर पर रियाज काजी पर शक है कि सचिन वाजे को फर्जी नंबर प्लेट खरीदने और अहम सबूत नष्ट करने में मदद मिली है।

कई सबूत नष्ट किए गए

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में मुख्य आरोपित सचिन वाजे ने कथित तौर पर एनआईए के सामने स्वीकार किया है कि उसने पाँच मोबाइल फोन नष्ट कर दिए। अधिकारियों को संदेह है कि वाजे कम से कम 13 मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा था।

सचिन वाजे से बरामद बेहिसाब गोलियाँ

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक विशेष अदालत को सूचित किया था कि उसने पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाजे के घर से 62 बेहिसाब गोलियाँ बरामद की थी। रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए को 30 में से केवल 5 गोलियाँ ऐसी मिलीं जो आधिकारिक तौर पर उसकी सर्विस पिस्टल के लिए आवंटित की गई थीं।

ओवैसी ने बंगाल विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का किया ऐलान: जंगीपुरा और सागरदीघी से उतारे उम्मीदवार, TMC की बढ़ी मुसीबत

पश्चिम बंगाल में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। शनिवार को ओवैसी ने फुरफुरा शरीफ के प्रभावशाली इस्लामी आलिम पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का समर्थन करने की अपनी बात से यू-टर्न ले लिया। इसी के साथ बंगाल में बीजेपी और टीएमसी को टक्कर देने के लिए बना कॉन्ग्रेस, वाम मोर्चा और आईएसएफ का गठबंधन फेल हो गया है।

ओवैसी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मुर्शिदाबाद से करते हुए 2 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया। AIMIM ने नूर महबूब आलम को सागरदीघी और असदुल शेख को जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतार दिया है। ओवैसी ने आने वाले दिनों में अन्य उम्मीदवार भी उतारने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक ओवैसी मुर्शिदाबाद की 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं।

फुरफुरा शरीफ के मौलाना सिद्दीकी को समर्थन देने के सवाल पर AIMIM चीफ ने कहा कि , “किसी की जरूरत नहीं है। हम अपने बल पर चुनाव लड़ेंगे।” ओवैसी का दावा है कि कांग्रेस-लेफ्ट-आईएसएफ के संयुक्त मोर्चा का ये गठबंधन बुरी तरह से फेल होने वाला है, क्योंकि वामपंथियों के कारण मुसलमान परेशान हैं।

PM मोदी पर ओवैसी ने किया कटाक्ष

ओवैसी ने एक रैली में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश में दावा किया है कि उसकी स्वतंत्रता के लिए उन्होंने सत्याग्रह किया था। अगर आपने ऐसा किया है तो फिर मुर्शिदाबाद के लोगों को बांग्लादेशी क्यों कहा जाता है?”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि वह मुसलमानों के लिए काम करने का दावा करती हैं, लेकिन उन्होंने उनके लिए कुछ भी नहीं किया। बंगाल के मुसलमान अभी भी शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ममता दो बार टीएमसी की विधायक बनीं, लेकिन बावजूद इसके शुद्ध पेयजल की कमी है।

ममता द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध को ओवैसी ने ढोंग करार दिया और कहा कि अपनी वोट बैंक की राजनीति चमकाने और मुसलमानों का इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने नारा दिया और भाजपा पर आरोप लगाया कि वह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच राज्य को विभाजित करने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले पिछले साल 2020 में मौलाना अब्बास सिद्दीकी ने खुद को ओवैसी का बड़ा फैन बताया था। आईएसएफ के नेता सिद्दीकी ने कहा था कि वो इसलिए चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं, क्योंकि कुछ लोग धर्म के आधार पर समाज को बाँटने में लगे हुए हैं। 31% वोट शेयर के साथ पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का रुझान काफी मायने रखता है। TMC के नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि अब्बास सिद्दीकी एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता हैं, जिन्होंने कई मौकों पर AIMIM का खुल कर समर्थन किया है।

वहीं ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव 2021 के लिए आदर्श अचार संहित लागू होने से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए 2.60 करोड़ रुपए आवंटित किया। जबकि, ममता सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में वित्त विभाग ने 20 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।” ताकि मुस्लिम वोटों का तुष्टिकरण किया जा सके।

केरल में CPM कैडरों ने BJP उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन के काफिले पर किया हमला, पार्टी कार्यकर्ता घायल

केरल में विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा की वरिष्ठ नेता शोभा सुरेंद्रन और पार्टी कार्यकर्ताओं पर तिरुवनंतपुरम में एक चुनावी रैली के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने शारीरिक हमला किया।

खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा नेता शोभा सुरेंद्रन के काफिले पर हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। शोभा सुरेन्द्रन तिरुवनंतपुरम जिले के काज़ख़ुट्टम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं।

काफिले और बीजेपी कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश में सीपीएम कार्यकर्ताओं ने लापरवाही से मोटरबाइक चलाई। हमलावर कथित तौर पर सीपीएम की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के थे।

हमले के बाद, DYFI सदस्य मौके से भाग गए और CPM बूथ कार्यालय के अंदर शरण ली। भाजपा नेताओं ने सीपीएम बूथ कार्यालय के बाहर विरोध किया और हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, केरल पुलिस ने सीपीएम कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

सुरेंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान एटिंगल में सीपीएम द्वारा अपनाई गई रणनीति अब कजाककुट्टम में दोहराई जा रही है। कड़कम्पल्ली ने पहले कहा था कि वह महिलाओं का सम्मान करता है। लेकिन हमले के बाद, मंत्री के बयान की संवेदनहीनता उजागर हुई।”

केरल में बीजेपी अतिक्रमण कर रही है। दोनों गुट – कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लगातार वाम-गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) आक्रामक है और राज्य में राजनीतिक हिंसा का यह दोहरा उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि भगवा पार्टी के राज्य में फिर से स्थान बनाने की कोशिश को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों में इस्लामवादियों और वामपंथी समूहों ने केरल में कई आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी। केरल में 140 विधायकों को चुनने के लिए 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनके परिणाम 2 मई को घोषित किए जाएँगे।

पंजाब में अरुण नारंग की लिंचिंग के पीछे भाजपा का हाथ, हमारे लोगों ने केवल काले झंडे दिखाए: राकेश टिकैत

पंजाब में कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कल (मार्च 27, 2021) अबोहर से बीजेपी विधायक अरुण नारंग के साथ बीच सड़क पर बदसलूकी की और आज किसान नेता राकेश टिकैत पूरी घटना का ठीकरा भाजपा पर ही फोड़ रहे हैं। बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दावा किया है कि भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला भाजपा ने किया। प्रदर्शनकारी तो सिर्फ़ काले झंडे दिखा रहे थे। 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार टिकैत ने कहा, “हमारे लोग लिंचिंग में शामिल नहीं थे। हमारे लोगों ने काले झंडे जरूर दिखाए लेकिन घटना में उनकी कोई संलिप्ता नहीं है। ये सब किसानों को बदनाम करने के लिए किया गया है।” 

बता दें कि कल अबोहर से भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला करते हुए बीच सड़क पर किसान प्रदर्शनकारियों ने उनके कपड़े फाड़े थे, जिसकी वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में नारंग को बिना कपड़ों के देखा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रेस वार्ता के लिए जाते समय अरुणा नारंग के साथ यह घटना मलोट में हुई। भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शनकारी पहले से ही उनका इंतजार कर रहे थे। नारंग के पहुँचते ही सभी प्रदर्शनकारी उन पर हमलावर हो गए।

पहले उन पर इंक फेंकी गई और कार को भी गंदा किया गया। उस समय तो किसी तरह भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस मिल कर उन्हें एक दुकान के अंदर ले गई। लेकिन वह जैसे ही बाहर आए उन पर दोबारा हमला हुआ। बर्बरता से उनके साथ खींचतान की गई। उनके कपड़े फाड़े गए। उन्हें बीच सड़क पर नंगा कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनकारियों के बर्ताव पर हैरानी इसलिए भी है क्योंकि अरुण नारंग भाजपा पार्टी द्वारा लाए कृषि कानून का विरोध कर रहे थे। यानी वह किसानों के समर्थन में थे। उन्होंने दिसंबर में ही कहा था कि मोदी सरकार को जल्द से जल्द इसका समाधान खोजना चाहिए।

मदरसा-मौलवी, सऊदी शेखों की फंडिंग, ISI की कठपुतली: मोदी विरोधी हिफाजत-ए-इस्लाम के बारे में जानें सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश पहुँचने से पहले ही बांग्लादेशी कट्टरपंथियों ने दौरे का विरोध शुरू कर दिया था। वामपंथी भी इसमें उनके साथ थे। उनके दौरे के दौरान भी हिंसा हुई। उनके भारत लौटने के बाद भी बांग्लादेश से हिंसा की खबरें आ रही हैं।

शुक्रवार (26 मार्च 2021) को मोदी बांग्लादेश पहुँचे थे। उस दिन जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा और आगजनी की थी। इस दौरान हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिसमें चार की मौत हो गई थी। शनिवार को पूरे बांग्लादेश में फेसबुक बंद होने की खबरें मीडिया में आती रहीं।

बांग्लादेश में मचे बवाल के पीछे जिस एक कट्टरपंथी संगठन का नाम प्रमुखता से आ रहा है वह है, हिफाजत-ए-इस्लाम। मोदी की यात्रा के विरोध में शुक्रवार को हिंसा-आगजनी में भी वह शामिल था। शनिवार को चटगाँव से ढाका तक मार्च निकाला। रविवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के इशारे पर काम करने वाले इस कट्टरपंथी संगठन को अपनी गतिविधि जारी रखने के लिए सऊदी अरब से काफी फंडिंग मिलती है।

हिफाजत ए इस्लाम के लोग मोदी विरोध में एकत्रित (साभार: अलजजीरा)

2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन को ISI का पूरा समर्थन है।

बांग्लादेश में मोदी विरोध में एकत्रित हिफाजत ए इस्लाम के लोग (साभार: अलजजीरा)

द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISI के अलावा हिफाजत-ए-इस्लाम को फाइनेंसिंग का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के कट्टरपंथी शेखों के जरिए प्राप्त होता है। इस संगठन की प्रमुख माँग है कि बांग्लादेश को इस्लामी देश करार दिया जाए।

हिफाजत-ए-इस्लाम की स्थापना में हतज़ारी मदरसा के पूर्व डॉयरेक्टर अहमद शफी, वर्तमान अमीर ए हिफाजत अल्लामा जुनैद बाबुनगरी और इस्लामिक पार्टी इस्लामी ओइक्या जोते के चेयरमैन मुफ्ती इजहारुल इस्लाम प्रमुख नाम हैं। इनके अलावा पहली महिला क्वामी मरदसे की संस्थापक और प्रिंसपल अब्दुल मालेक हलीम भी इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं।

इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है। 7 अक्टूबर 2013 में इस संगठन के एक नेता द्वारा संचालित किए जा रहे मदरसे में विस्फोट हुआ था। छापेमारी में विस्फोटक बरामद हुए थे। लेकिन मदरसा प्रशासन का दावा था कि कम्प्यूटर का यूपीएस फटा था। 

ग्रीक देवी की मूर्ति

साल 2017 में इसी संगठन ने ग्रीक देवी की मूर्ति बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय में देख प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना था कि बांग्लादेश में इस्लाम को कमजोर करने के लिए ये एक साजिश है। बाद में वह मूर्ति न्यायालय से हटानी पड़ी थी।

बता दें कि हिफाजत-ए-इस्लाम हमेशा से बांग्लादेश को इस्लामी देश बनाने की पैरवी करता रहा है। साल 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश संविधान से इस्लाम शब्द हटाने की याचिका को स्वीकार किया था, तो इसका विरोध करते हुए धमकियाँ दी थीं। हिफाजत ने कहा था कि देश का राष्ट्र धर्म यदि इस्लाम होगा तो इससे अल्पसंख्यकों के धर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा इस संगठन के तमाम प्रमुख नेताओं पर हत्या, तोड़फोड़, आगजनी जैसे गंभीर आरोप हैं। इस संगठन का कहना है कि संविधान में सर्वेसर्वा अल्लाह को माना जाए और जो कोई भी इस्लाम को बदनाम करे उसके ख़िलाफ़ मौत की सजा का प्रावधान हो। इसके अलावा नास्तिकों और गैर इस्लामी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो। इस्लामी शिक्षा को अनिवार्य करने, अहमदियों को गैर मुस्लिम करार देने और स्कूलों में मूर्तियों पर पाबंदी की माँग वह करता है। साथ ही हर उलेमा और मदरसा छात्र को हर इल्जाम से बाइज्जत बरी करने की भी माँग कर रहा है।