Home Blog Page 3977

NDTV ने राजस्थान में कोरोना वैक्सीन की कमी को लेकर फैलाया झूठ: PIB ने खोली पोल, बताया फर्जी

देश भर में कोरोना टीकाकरण का काम जोरों पर है। देश भर में सभी राज्य कोरोना टीकाकरण को भारत सरकार के निर्देश पर लगातार चला रहे हैं। भारत सरकार की तरफ से हर प्रदेश सरकार को कोरोना का टीका उनकी माँग के अनुरूप मुहैया कराया जा रहा है। राजस्थान में भी कोरोना का टीकाकरण कार्यक्रम शानदार तरीके से चलाया जा रहा है। 

इस सब के बीच NDTV की एक खबर ने सनसनी फैला दी। इस खबर में इस बात का दावा किया गया कि कोरोना के टीके का स्टॉक राजस्थान के पास खत्म हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से अभी राजस्थान की माँग के बाद भी उसे टीका मुहैया नहीं कराया गया है। अगर दो दिन के अंदर टीके का स्टॉक राजस्थान के पास नहीं पहुँचा तो राज्य में टीकाकरण अभियान रूक जाएगा।

Screengrab of the tweet by NDTV

इसको लेकर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा के बयान का हवाला दिया गया। डॉक्टर रघु शर्मा ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से मार्च महीने के लिए 67 लाख कोरोना वैक्सीन डोज की खपत की बात बताई थी और कहा था कि उनको 60 लाख कोरोना वैक्सीन डोज की जरूरत है। 

उन्होंने ये भी कहा था कि राज्य के पास केवल मंगलवार तक के टीकाकरण के लिए कोरोना वैक्सीन की डोज पड़ी हुई है। उन्होंने ये भी कहा था कि राजस्थान की देश के कुल वैक्सीनेशन में पच्चीस फीसदी भागीदारी है। यह भागीदारी आबादी के हिसाब से है। ऐसे में प्रदेश को ज्यादा मात्रा में कोरोना के टीके की डोज चाहिए।

पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने भी NDTV के इस दावे को फेक बताया है। राजस्थान के पास कोरोना वैक्सीन के टीके की कमी नहीं है और ना ही उसके टीकाकरण की गति को धीमा किया जाएगा। जितनी आवश्यकता होगी उतना वैक्सीन डोज राज्य को उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया कि यह हर राज्य के लिए लागू है। माँग के हिसाब से उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान रखकर उसकी पूर्ति करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार इसके लिए हर राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क में है।

खास कर राजस्थान को लेकर स्थिति को स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि वर्तमान में राज्य में COVID-19 वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। राजस्थान को 37.61 लाख खुराक की आपूर्ति की गई है और अभी तक केवल 24.28 लाख खुराक का उपयोग किया गया है। इसके बाद भी केंद्र सरकार नियमित रूप से वैक्सीन आपूर्ति की व्यवस्था बनाए हुए है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि केंद्र ने पहले ही राज्य को कोरोना वैक्सीन की 85,000 आपातकालीन खुराक मुहैया करा दी है।

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कोरोना वायरस वैक्सीन की कमी के फर्जी दावे को डीडी न्यूज ने भी खारिज कर दिया।

NDTV ने स्पष्टीकरण जारी कर विरोधाभास की वजह बताई

पोल खुलने के बाद NDTV ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि एनडीटीवी ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री की टिप्पणी की सूचना दी। उन्होंने कहा, “हमारे पास तीन दिनों के लिए टीके हैं… हमें ड्राइव के रूप में जारी रखने के लिए मार्च में 60 लाख वैक्सीन चाहिए। यदि हमें टीके नहीं लगे, तो ड्राइव बीच में ही रुक सकती है।”

पहले मंच से चंडी पाठ फिर मजार पर चादरपोशी: नंदीग्राम महासंग्राम में ममता ने खेला ‘हिन्दू-मुस्लिम कार्ड’

बंगाल विधानसभा चुनाव की सबसे हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम से ममता बनर्जी ने हुँकार भर दी है। पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा कि हिंदू कार्ड नहीं खेले। वह भी हिंदू धर्म की ही बेटी हैं। हालाँकि, इसके कुछ देर बात ही वह शमशाबाद मजार पर भी पहुँची और चादरपोशी भी की। इसके बाद ममता बनर्जी ने हरि मंदिर और दुर्गा मंदिर में भी दर्शन किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी हर वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही हैं।

ममता बनर्जी बुधवार (मार्च 10, 2021) को यहाँ से पर्चा दाखिल करेंगी और फिर वापस नंदीग्राम आ जाएँगी और 11 मार्च को शिवरात्रि के अवसर पर शिव की पूजा कर कोलकाता जाएँगी और उसी दिन चुनावी घोषणा पत्र जारी करेंगी।

इससे पहले मंगलवार (मार्च 9, 2021) को एक जनसभा में ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। साथ ही बीजेपी को हिंदुत्व की राजनीति पर नसीहत भी दी। इस अवसर पर ममता बनर्जी ने चंडी पाठ किया और शिव की भी स्तुति की। 

बीजेपी के हिंदू कार्ड पर ममता बनर्जी ने कहा, “मैं भी हिंदू हूँ और मेरे साथ हिंदू कार्ड मत खेलो! मैं सुबह चंडी पाठ करके घर से निकलती हूँ। मैं चंडी पाठ सुना रही हूँ, जो हिंदू-मुसलमान कर रहे हैं सुन लें। पाँव खींच खींचकर झूठ मत बोलिए। आने वाले दिनों में नंदीग्राम का मॉडल तैयार करूँगी। जनता से ममता ने कहा कि एक अप्रैल को उनको अप्रैल फूल कर दीजिएगा। एक अप्रैल को खेला होबे। चुनाव बाद देखूँगी कि जीभ में कितना जोर है। मिठाई खाइए जीभ की कटुता मिटेगी।”

ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे बाहरी लोग कहा जाता है, गुजरात के लोग बाहरी नहीं हैं। गुजरात के गुंडा बाहरी नहीं है। यदि मैं बाहर की हूँ, तो मुख्यमंत्री कैसे हूँ? मेरे साथ हिंदू कार्ड नहीं खेलें। मैं भी हिंदू बेटी हूँ। पहले आप बताएँ कि आप हिंदू हैं या नहीं। मैं भी सुबह घर से चंडी पाठ करके ही निकलती हूँ। मुझसे हिंदू धर्म को लेकर प्रतियोगिता करें।

गौरतलब है कि पिछले दिनों शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान के बिना हमारा भारत एक इस्लामी मुल्क बन गया होता। उन्होंने कहा कि अगर मुखर्जी नहीं होते तो हम बांग्लादेश में रह रहे होते। बेहला के मुचिपारा में आयोजित रैली में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अगर TMC तीसरी बार सत्ता में आ जाती है तो वो बंगाल को कश्मीर बना देगी।

‘औरंगजेब ने हिंदुओं को नहीं मारा’: Rutgers यूनिवर्सिटी ने वामपंथी इतिहासकार के बतोलेबाजी को बताया- अकादमिक स्वतंत्रता

छात्रों के एक समूह ने रटगर्स-नेवार्क विश्वविद्यालय (Rutgers-Newark University) को एक याचिका देते हुए विवादित इतिहासकार और प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के (Audrey Truschke) के खिलाफ हिंदू धर्म के अपमान के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया, मगर संस्थान ने कार्रवाई करने के बजाय ‘हिंदू विरोधी’ टिप्पणी को ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ बताते हुए इसे सही ठहराया। ‘Hindu on Campus’ ग्रुप ने याचिका को ट्विटर पर शेयर किया।

याचिका में सभी हिंदुओं को ‘कामुक और सेक्स के लिए आसक्त’ एवं ‘गाय का पेशाब पीने वालों’ के रूप में प्रदर्शित करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के ने मुगल राजा औरंगजेब द्वारा हिंदुओं के नरसंहार को नजरअंदाज किया गया है।

मंगलवार (मार्च 9, 2021) को जारी एक बयान में, विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के का समर्थन किया है। इसमें प्रोफेसर को हटाने की माँग की गई है। विवादास्पद इतिहासकार के समर्थन को और अधिक सही ठहराने के लिए, रटगर्स ने छात्रवृत्ति में शामिल ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ के महत्व का हवाला दिया।

विश्वविद्यालय ने कहा, “छात्रवृत्ति कभी-कभी विवादास्पद होती है, खास कर तब जब यह इतिहास और धर्म के इंटरफेस पर होती है, लेकिन प्रोफेसर ट्रुस्के के रूप में इस तरह की छात्रवृत्ति को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता, कठोर रूप से अकादमिक उद्यम के केंद्र में है।” हिंदू विरोधी प्रोफेसर पर नकेल कसने के बजाय रटगर्स ने हिंदू समुदाय को सांत्वना देने का विकल्प चुना।

Statement released by Rutgers-Newark

इसमें कहा गया है, “रटगर्स ने न सिर्फ दृढ़ता से हिंदू समुदायों के सभी सदस्यों के कैंपस में पढ़ाई करने की व्यवस्था की है, बल्कि ऐसा माहौल दिया है जिसमें वे न केवल सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपनी धार्मिक पहचान को भी समर्थन दे सकते हैं।” विवादित इतिहासकार के हिंदूफोबिक टिप्पणी के लिए निंदा करने की बजाय उसका पूर्ण समर्थन किया।

Screengrab of Audrey Truschke’s tweet

‘इतिहासकार’ ने जोर दिया, “रटगर्स प्रशासन ने समर्थन का एक बयान जारी किया है। रटगर्स विवादास्पद विषयों सहित अकादमिक स्वतंत्रता का समर्थन करता है। मेरे द्वारा निर्देशित चिंताओं और खतरों को तत्काल समाप्त करने के लिए मैं अपने विश्वविद्यालय प्रशासन को धन्यवाद देती हूँ।”

ऑड्रे ट्रूस्के ने हिंदू नरसंहार से इनकार किया, रटगर्स ने इसे ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ बताया

विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के समूह ने याचिका में बताया कि ऑड्रे ट्रुस्के ने मुगल अत्याचारी औरंगजेब द्वारा किए गए हिंदू नरसंहार को नकारने और उसे कम करके दिखाने की दिखाने की भरपूर कोशिश की। उसने दावा किया था, “इस तरह की संख्या अक्सर अतिरंजित होती है क्योंकि वास्तव में यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि उस समय भारत में कितने लोग मौजूद थे; और उस समय के लोगों ने यह संख्याएँ बताई!”

जबकि सच्चाई यह है कि कई भरोसेमंद सोर्स का अनुमान है कि अकेले औरंगजेब द्वारा कुल 4.6 मिलियन हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी। याचिका में जोर दिया गया, एक जिम्मेदार इतिहासकार होने का दावा करने वाली प्रोफेसर ट्रुस्के ने ऐसे भयावह आँकड़ों को व्हाइटवॉश करने का फैसला किया।

अन्य उदाहरणों में, प्रोफेसर ट्रुस्के ने मुगल राजा का यह कहकर बचाव किया कि उसने नष्ट करने की तुलना में अधिक हिंदू मंदिरों की रक्षा की और उसने मुगल राज्य के कुलीन स्तरों पर हिन्दुओं की भागीदारी बढ़ाई।” ऑड्रे ट्रूस्के का हिंदू-विरोधी रुख नया नहीं है। 2018 में, ‘प्रख्यात’ इतिहासकार ने यह दावा किया था कि भगवान राम को ‘अग्निपरीक्षा’ के दौरान देवी सीता ने एक ‘मेसोजिनिस्ट पिग’ कहा था। इस टर्म का प्रयोग अक्सर खुद को बहुत ज़्यादा फेमिनिस्ट घोषित करने वाली वामपंथी सोच की महिलाएँ करती हैं। ऊपर अपने इसी घटिया सोच का माँ सीता पर थोपा गया है।

गोरखपुर ‘लव जिहाद’ मामले में मोइनुद्दीन गिरफ्तार, मुन्नू यादव बनकर की थी हिंदू युवती से शादी

गोरखपुर में एक शख्स के खिलाफ लव जिहाद का केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि मोइनुद्दीन नाम के युवक ने नाम बदलकर एक हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाया और फिर शादी की। बाद में जब भेद खुला तो युवती ने शिकायत दर्ज कराई।

घटना गोरखपुर के बुदहट थाना क्षेत्र का है, यहाँ रहने वाली एक युवती की संत कबीर नगर के भेलाभार गाँव के मुन्नू (मोइनुद्दीन) से मुलाकात हुई। दोनों को प्यार हुआ और घर से भाग कर शादी कर ली। कुछ दिनों बाद जब मोइनुद्दीन ने युवती पर धर्म परिवर्तन का दवाब बनाना शुरू किया तो युवती को सच्चाई का पता चला। मुन्नू यादव के मोइनुद्दीन निकलने पर युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई।

दूसरी शादी की तैयारी में था मोइनुद्दीन

धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद युवती अपने मायके में रह रही थी। इसी बीच युवती को मोइनुद्दीन के दूसरे विवाह की तैयारी की बात पता चली। शनिवार को वह निकाह करने के लिए बारात लेकर जा रहा था। युवती ने इसकी सूचना डायल 112 पर दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

मुकदमा दर्ज कर भेजा गया जेल

एसपी साउथ एके सिंह ने बताया कि रविवार को युवती की तहरीर पर मोइनुद्दीन उर्फ मुन्नू यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध ऐक्ट 2020 की धाराओं समेत जालसाजी, मारपीट, धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के महोबा से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला सामने आया। महोबा शहर की कोतवाली पुलिस ने आरोपित मुन्ना खाँ उर्फ असफाक खान को गिरफ्तार किया। उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई थी। उस पर हिंदू बनकर 21 साल की एक लड़की को प्रेम जाल में फँसाने और फिर किडनैप कर उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप था।

वहीं उत्तर प्रदेश के बलिया में 14 साल की एक लड़की का रेप करने के बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में पुलिस ने 22 साल के अब्दुल रहमान को पकड़ा था। रहमान ने 11 जनवरी 2021 को जबरन लड़की के घर में घुस कर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस दौरान उसने उसकी वीडियो क्लिप भी बनाई थी, जिसे दिखा कर वह बार-बार उससे शारीरिक संबंध बनाने की बात कर रहा था। रहमान का अब्बा पीड़िता पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बना रहा था।

कमलनाथ ने अलका लाम्बा से कहा- ‘अभी तो मैं जवान हूँ’, बीजेपी नेता की चुटकी- उनकी जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस बूढ़ी हो गई

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार (मार्च 8, 2021) को महिला कॉन्ग्रेस के एक कार्यक्रम में पहुँचे। यहाँ उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा की तारीफ की और अपने जवान होने का दावा भी। अब कमलनाथ के इस बयान पर भाजपा नेता चुटकी ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कमलनाथ बार-बार खुद के जवान होने के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को महिला कॉन्ग्रेस ने एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें अलका लांबा मुख्य अतिथि थीं। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने अलका लांबा की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, ”मैं अलका लांबा को तब से जानता हूँ जब वह 18 साल की थी। मैं इसकी शादी में भी गया था।” पीछे से अलका लांबा ने बताया कि 27 साल हो गए। इस पर कमलनाथ ने कहाकि बताओ 27 साल हो गए।

फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में अलका लांबा की ओर इशारा करते हुए कहा, ”भई अब समय को कोई नहीं रोक सकता। तुम्हारी भी उम्र हो गई और मेरी भी उम्र हो गई, लेकिन यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (मार्च 10, 2021) सुबह मीडियाकर्मियों से बातचीत में महिला दिवस के मौके पर कमलनाथ के बयान को आपत्तिजनक बताया।

उन्होंने कहा कि कमलनाथ बार-बार खुद को जवान साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। पहले भी सागर में वह मंच से कूद गए थे। नरोत्तम मिश्रा ने ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को लेकर दिए उनके बयान को भी याद किया। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा कि वह इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन सच्चाई यह है कि कमलनाथ की जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया इस्तीफा, नए CM के लिए इन नामों की अटकलें हुईं तेज

उत्तराखंड बीजेपी में चल रहे घमासान के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार (मार्च 9, 2021) शाम राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि रावत कुछ देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में जानकारी भी देंगे।

ऐसा कहा जा रहा है कि सीएम के इस्तीफा देने के बाद पर्यवेक्षकों की देख रेख में विधायकों की बैठक में नया सीएम चुना जाएगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत के पद छोड़ने की अटकलों के साथ ही इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि उत्तराखंड का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?

सीएम की रेस में ये नाम आगे

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर तीन नाम सामने आ रहे हैं। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत का नाम सीएम की रेस में आगे है। तीनों में से किसी एक को नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालाँकि, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस सिलसिले में संघ के प्रमुख नेताओं से मुलाकात भी की थी। कहा जा रहा है कि नए सीएम के लिए सतपाल महाराज के नाम पर भी चर्चा चल रही है।

बता दें कि सीएम रावत ने सोमवार (मार्च 8, 2021) को दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की। बीजेपी उपाध्यक्ष रमन सिंह और पार्टी महासचिव दुष्यंत सिंह गौतम ने राज्य के दौरे से वापस आने के बाद पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। दोनों केंद्रीय नेताओं ने राज्य में बीजेपी कोर समूह के सदस्यों से बातचीत की थी। सीएम रावत सांसद अनिल बलूनी के आवास पर भी गए थे।

‘मेरे पति की हत्या में शामिल है सचिन वाजे’: हिरेन की पत्नी के बयान के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में गूँजा ‘खूनी सरकार’ का नारा

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित बहुमंजिला घर एंटीलिया के बाहर खड़ी मिली संदिग्ध कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मुद्दा अब महाराष्ट्र विधानसभा में भी गूँज रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ़्तारी की माँग की है। विधानसभा में ‘ये सरकार खूनी है’ का नारा भी गूँजा।

सचिन वाजे वही पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। सचिन वाजे को 90 के दशक के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है। अब तक 60 से अधिक अपराधियों के एनकाउंटर में उनका नाम आया है। कोल्हापुर जिले से आने वाले सचिन 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं। 1992 में उनका ट्रांसफर ठाणे में हुआ और उसके बाद वो क्राइम ब्रांच का हिस्सा बन गए।

ख्वाजा यूनिस के मौत के मामले में 2004 में उन्हें निलंबित भी किया गया था। इसके बाद 2007 में उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर 2008 में शिवसेना जॉइन कर ली थी। जब उद्धव ठाकरे की सरकार आई तो उन्हें फिर से पुलिस सेवा में वापस लाया गया क्योंकि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था। उन्होंने एक मराठी किताब भी लिखी है और उन पर ‘रेगे’ नामक मराठी फिल्म भी बन चुकी है। अंबानी को धमकी वाला ममला उन्हें ही सौंपा गया था।

अब मृतक मनसुख हिरेन की पत्नी ने इस मामले में सचिन वाजे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ही उनके पति की उस स्कॉर्पियो कार का प्रयोग कर रहे थे, जो एंटीलिया के बाहर मिली थी। बकौल विमला हिरेन, वाजे ने उनके पति से इस मामले में गिरफ्तार हो जाने को कहा था और जमानत दिलाने का आश्वासन भी दिया था। ATS ने इस मामले में उनका बयान दर्ज किया है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में उस बयान और FIR की कॉपी के आधार पर दावा किया गया है कि विमला हिरेन के अपने पति की हत्या होने की आशंका जताई है और कहा है कि इसमें सचिन वाजे का भी हाथ है। मनसुख हिरेन ने बताया था कि उक्त गाड़ी फरवरी 17 को ही चोरी हो गई थी। उसमें से जिलेटिन की छड़ें भी मिली थीं, जिससे बम बनाया जाता है। विमला ने कहा कि उनके पति तनाव में रहते थे क्योंकि वाजे उन पर गिरफ्तार होने का दबाव बना रहे थे।

उनका कहना है कि मार्च 4 को उनके पति ने बताया था कि वो कांदिवली पुलिस थाने में इंस्पेक्टर तावड़े से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे को वाजे का नंबर भेजा था और कहा था कि अगर कोई भी समस्या हो तो उन्हें कॉल कर ले। अगले दिन उनके गायब होने की रिपोर्ट परिजनों ने दर्ज कराई और कुछ ही घंटों बाद उनकी लाश मिली। उनके बयान के बाद फड़नवीस ने वाजे की गिरफ़्तारी की माँग की है।

उन्होंने कहा कि वाजे को हत्या नहीं तो सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया ही जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो इसका अर्थ है कि कोई उन्हें बचा रहा है। उन्होंने कहा कि मनसुख हिरेन के मोबाइल फोन का अंतिम लोकेशन धनंजय तावड़े के घर के बाहर बता रहा था, जो 2017 में वाजे के साथ एक रंगदारी के मामले में फँसा था। जबकि तावड़े अब कह रहा है कि वो वाजे को नहीं जानता और वाजे ने अपन ऊपर लगे आरोपों की जानकारी होने से इनकार किया है।

इन सबके अलावा ये भी पता चला था कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा था कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

न्यूड फोटोशूट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से शर्लिन चोपड़ा को मिली अंतरिम जमानत, थाने में प्रतिदिन देनी होगी हाजिरी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा को गिरफ़्तारी से राहत देते हुए उन्हें प्री-अरेस्ट बेल प्रदान किया है। सोमवार (मार्च 8, 2021) को उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम प्रारंभिक जमानत दी। उनके खिलाफ मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने मामला दर्ज किया था। उन पर न्यूड फोटोशूट और इंटरनेट पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के आरोप हैं। अगर शर्लिन चोपड़ा को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें 25,000 रुपए के व्यक्तिगत मुचलके पर छोड़ा जाएगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा को जमानत देते हुए आदेश दिया है कि वो मुंबई पुलिस की जाँच में सहयोग करें। उन्हें मार्च 15-17 तक प्रत्येक दिन पुलिस थाने में उपस्थिति दर्ज करानी पड़ेगी। इसके बाद पुलिस मार्च 23 को कोर्ट को इस बारे में रिपोर्ट सौंपेगी। सुनवाई के लिए अगली तारीख़ मार्च 23 को तय की गई है। अंतरिम जमानत की याचिका पर जस्टिस PD नाइक के कोर्ट ने सुनवाई की। अभिनेत्री ने अधिवक्ता चरणजीत चंद्रपाल के माध्यम से याचिका दायर की थी।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वो अपनी जाँच के दौरान इन फोटोग्राफी को निर्देशित करने वाले डायरेक्टर से पूछताछ करना चाहते थे, जिसने उन दृश्यों को शूट किया था। उन्हीं दृश्यों के खिलाफ ये केस दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि जब तक शर्लिन चोपड़ा उस बारे में पूरा विवरण साझा नहीं करती हैं, तब तक वो इस अश्लील कंटेंट्स की तह तक नहीं पहुँच पाएँगे, जो कई वेबसाइट्स पर मुफ्त में उपलब्ध हैं।

पुलिस द्वारा बार-बार समन दिए जाने के बावजूद शर्लिन चोपड़ा उसके समक्ष पेश नहीं हो रही थीं। उन्होंने डर जताया था कि अगर वो पूछताछ में शामिल होने थाने जाती हैं तो उन्हें वहाँ गिरफ्तार किया जा सकता है। महिला अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दायर किया गया ये मामला पिछले साल का है। शर्लिन चोपड़ा पहले सेशन कोर्ट गई थीं, जहाँ उन्हें राहत नहीं मिली। रिटारर्ड कस्टम ऑफिसर मधुकर केनी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

मधुकर केनी ने अपनी शिकायत में कहा था कि शर्लिन चोपड़ा फ्री वेबसाइट्स पर अश्लील कंटेंट पोस्ट करती हैं जो गलत है। उन्होंने शिकायत में कहा था कि अगर गूगल पर शर्लिन चोपड़ा का नाम डाला जाए तो अश्लील वीडियो आते हैं। इसके बाद उन्होंने कुछ वीडियोज डाउनलोड कर साइबर सेल को सौंपे थे। वहीं इस पूरे मामले में शर्लिन चोपड़ा के वकील ने उनका पक्ष रखते हुए कहा है कि अभिनेत्री ने किसी को भी इस बात की अनुमति नहीं दी है कि उनके आर्टिकल्स को पब्लिश करे और वो वीडियो चुराए हुए हैं।

पंजाब के पूर्व AAP विधायक सुखपाल सिंह खैरा के ठिकानों पर ED की छापेमारी: मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी केस में एक्शन

मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और पंजाब के मौजूदा विधायक सुखपाल सिंह खैरा के चंडीगढ़ स्थित घर समेत कई ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत छापेमारी की है।

रिपोर्टों के अनुसार, PMLA मामला मादक पदार्थों की तस्करी और नकली पासपोर्ट से जुड़ा हुआ है। ईडी के अधिकारी खैरा के बैंक लेनदेन और संपत्ति के कागजात को भी देख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पंजाब के पाँच स्थानों, दिल्ली के दो स्थानों और चंडीगढ़ के एक स्थान पर तलाशी ली गई। ईडी के अधिकारी मंगलवार (मार्च 9, 2021) सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-5 में सुखपाल सिंह खैरा के घर पहुँचे और उनकी संपत्ति की तलाशी ली। कपूरथला में उनके पैतृक घर पर भी छापा मारा गया। उनका बेटा, महिताब सिंह, जो चंडीगढ़ में रहता है, अपने पैतृक गाँव में था।

ईडी अधिकारियों के वाहनों को मौके पर पहुँचने के बाद महिताब ने अपनी कार निकाली और वहाँ से चले गए। इस बीच, खैरा ने निर्दोष होने की दलील दी और कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय ने उसके चचेरे भाई सह कोषाध्यक्ष कुलबीर सिंह से भी पूछताछ की।

खैरा AAP के साथ अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। 2019 में, उन्होंने अपनी पंजाब एकता पार्टी शुरू की और राज्य विधानसभा में 2 सीटें जीतीं। वह केंद्र सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद करने के लिए बनाए गए नए कृषि कानूनों के भी मुखर आलोचक रहे हैं। खैरा के वकील ने अब आरोप लगाया है कि उन्हें किसानों का समर्थन करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब खैरा विवादों में हैं। इससे पहले वर्ष 2015 में उनके खिलाफ ड्रग्स तस्करी के मामले में भी मामला दर्ज किया गया था। फाजिल्का कोर्ट ने कुछ ड्रग्स तस्करों की गिरफ्तारी के बाद खैरा को समन किया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तस्करों से 2 किलो हेरोइन, 24 जीबी बिस्किट, दो पाकिस्तानी सिम कार्ड और एक देशी पिस्टल बरामद की थी। खैरा पर आरोप है कि वह अपने पर्सनल सेक्रेटरी के फोन से तस्करों से बात किया करते थे।

इस मामले में खैरा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने भी उनकी माँग ठुकरा दी थी जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए। जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट पर रोक लगा दी थी। इस मामले में 9 ड्रग्स तस्कर गिरफ्तार किए गए थे। वहीं खैरा को समन किए जाने के बाद पीईपी के विधायक को अतिरिक्त आरोपित बनाया गया था।

रिम्स के गद्दे और तकिए लेकर रफूचक्कर हो गए लालू यादव के 10 सुरक्षाकर्मी, अस्पताल प्रबंधन ने राँची SSP से लगाई गुहार

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव अक्सर अजीबोगरीब कारणों से विवादों में रहते हैं। अब खुलासा हुआ है कि लालू यादव की सुरक्षा में लगे जवान अपने साथ तकिया और गद्दा भी लेकर चले गए हैं। बता दें कि चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू यादव के अधिकतर दिन राँची के RIMS में गुजरे हैं और वहाँ उन्हें खास सुविधाएँ दी गई थीं। अब RIMS अस्पताल ने राँची के SSP को पत्र लिख कर गद्दे और तकिए वापस करने की माँग की है।

झारखंड के पुलिस विभाग में इस चिट्ठी के बाद से गहमागहमी देखने को मिल रही है। लालू यादव काफी दिनों तक RIMS निदेशक के बँगले में शिफ्ट किए गए थे। इसका कारण ये था कि कोरोना संक्रमण में उन्हें खतरा था और कुत्तों के भौंकने से उन्हें परेशानी होती थी। उनकी सुरक्षा में तैनात 10 पुलिसकर्मियों की भी सुविधाओं का ध्यान RIMS ही रख रहा था, इसीलिए गद्दे और तकिए भी उन्हें दिए गए थे।

लालू यादव इस दौरान बिहार के विधायकों को फोन कॉल कर-कर के नीतीश कुमार की सरकार गिराने के चक्कर में लग गए, जिसके बाद कोर्ट केस हुआ और उन्हें फिर से पेइंग वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लालू यादव और उनके सुरक्षाकर्मियों ने बँगला खाली तो किया, लेकिन वहाँ से तकिए और गद्दे भी लेकर चले गए। RIMS प्रबंधन ने जब उन जवानों से संपर्क किया तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। तब SSP को पत्र लिखा गया।

अब पुलिस के आला अधिकारियों ने उन पुलिसकर्मियों को आदेश दिया है कि वो अस्पताल की चीजें वापस करें। इनमें 2 हवलदार और 8 आरक्षी पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन जवानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है अगर वो आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी माँगा गया है। खास बात तो ये है कि ये गद्दे और तकिए भी RIMS प्रबंधन ने एक टेंट हाउस से भाड़े पर लिया था। अब रिम्स को उसका अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ेगा।

बता दें कि एक वायरल ऑडियो क्लिप में लालू यादव ने विधायक से कहा था, “अच्छा सुनो। हम लोग तुमको आगे भी आगे बढ़ाएँगे। कल जो स्पीकर का चुनाव है, उसमें हम लोगों का साथ दो। हम लोग तुम्हें मंत्री बनाएँगे। कल तो इसको हम गिरा देंगे।” जब विधायक ने कहा था कि वो पार्टी में हैं तो लालू यादव ने जवाब दिया था कि पार्टी में हो तो अनुपस्थित हो जाओ, कह दो कि कोरोना हो गया है। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद कोर्ट में केस भी हुआ था।