Home Blog Page 3977

सचिन वाजे ने पुलिस कमिश्नर मुख्यालय के अंदर से चलाई ‘अवैध वसूली का धंधा’, रेस्टोरेंट मालिकों से वसूले लाखों: रिपोर्ट

हाल ही में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने गिरफ्तार असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे से कई बार मुलाकात की और उन्हें हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था।

मिड-डे ने एक रिपोर्ट में इंडियन होटल और रेस्तरां एसोसिएशन (एएचएआर) के सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा कि निलंबित पुलिस अधिकारी ने वास्तव में पैसा वसूलना शुरू कर दिया था। एएचएआर के सूत्रों के मुताबिक वाजे, परमबीर सिंह के पत्र लिखने से दो महीने पहले ही रेस्तरां और बार मालिकों से पैसा इकट्ठा कर चुका था।

होटल मालिकों में से एक ने बताया कि वाजे क्रॉफोर्ड मार्केट में पुलिस आयुक्त कार्यालय के परिसर के अंदर CIU कार्यालय में होटल व्यवसायियों से पैसे निकालने की अपनी दुकान चला रहा था।

होटल व्यवसायी ने कहा कि वाजे फूड और ड्रिंक बिजनेस से उद्यमियों को बुलाता था और उन्हें इस बात के लिए आश्वस्त करता था कि SSB के अधिकारी उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी नहीं करेंगे, मगर इसके बदले में वे उन्हें हर महीने पैसे देंगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने होटल व्यवसायियों को यह आश्वासन भी दिया कि यदि वे नियमित रूप से उन्हें भुगतान करते हैं तो वे कानूनी पेचों से बाहर रहेंगे।

साल 2004 से निलंबित चल रहे सचिन वाजे को कोरोना महामारी में पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता का हवाला देते हुए पिछले साल महाराष्ट्र सरकार ने बहाल कर दिया था। इस दौरान वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। वाजे की बहाली और हाई-प्रोफाइल मामलों को असाइन करने की परिस्थितियाँ भी जाँच के दायरे में हैं। बता दें कि निलंबित होने के बाद वाजे शिवसेना में शामिल हो गए थे।

‘वे गाली दे रहे थे, कहा हमें दे दो, काट देंगे’: दलित सुमित की माँ की जुबानी सुनिए ‘काले खाँ’ की पूरी कहानी

दलित युवक सुमित के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया।

ऑपइंडिया ने इस मामले पर विस्तृत जानकारी लेने के लिए सुमित की माँ से बात की। सुमित की माँ ने बताया कि उन दोनों का 3-4 साल से चक्कर चल रहा था। उन्होंने बताया कि सुमित की उम्र 22 साल है। वह घर में सबसे छोटा और शरीफ है। उसकी मुहल्ले में कभी किसी के साथ लड़ाई नहीं हुई। उसे किसी तरह की बुरी लत नहीं है।

सुमित की माँ ने बताया, “एक दिन उसने मुझसे कहा कि मम्मी मैं उससे (मुस्लिम लड़की) प्यार करता हूँ। आप उसके घर जाकर माँ-पापा से मेरे लिए रिश्ता माँग लो। हम घर के 5-6 लोग उनके घर गए, हाथ जोड़े। उनसे कहा कि इससे हमारे बच्चे भी खुश हैं और आपके बच्चे भी खुश हैं। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, उनकी शादी कर दो। या फिर तुम उसकी शादी कहीं और कर दो, हम अपने लड़के को रोक लेंगे। उन लोगों ने हमें जलील किया। भं* कहा। हमारी जाति को लेकर बोला।”

उन्होंने आगे बताया, “लड़की पूरी तरह से बिगड़ गई। उसने रोते हुए कहा कि वो उसी से शादी करेगी। उसी के साथ रहेगी और अगर उन्होंने उनकी शादी नहीं की तो वो कुछ कर लेगी। हम बस उनकी बात सुन कर आ गए। हमने कोई लड़ाई नहीं की। बच्चे दोनों राजी हैं। आर्य समाज से भी शादी हुई है, कोर्ट मैरेज भी हुआ है। पुलिस ने सुरक्षा भी दिया है।”

सुमित की माँ ने बताया, “मुस्लिम भीड़ ने उस थाने को ही घेर लिया था, जहाँ पर उनमें राजीनामा हुआ था। जब भीड़ ने उनको पूरी तरह से घेर लिया तो पुलिस ने सुरक्षा के मद्दे नजर लड़के के परिजनों को अंदर बुला लिया। वो लोग गाली-गलौज कर रहे थे। कह रहे थे कि लड़की को दे दो, काट देंगे। अब हमारे काम की नहीं रही। इसने ईमान खो दिया।”

लड़के की माँ ने कहा कि अगर उनकी बेटी जाती है तो ले जाए, लेकिन लड़की ने जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि डर की वजह से राजीनामा के बाद उन्हें अपने घर लेकर नहीं आई। उन लोगों ने उनके घर में तोड़फोड़ की। घर में आग लगाने की कोशिश की। अगर उस दिन घर पर वो लोग होते वो मार दिए जाते। पुलिस काफी सुरक्षा के साथ उन्हें भीड़ से बचाकर लाई। मामले में 4-5 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ गाँव में शनिवार रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। मुस्लिमों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी डंडों और तलवार के साथ हिन्दुओं की संपत्ति को तहस-नहस किया।

दलित युवक के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया जैसे किसी का इन्हें डर ही न रहा हो।

गोवा हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकर से अजान पर लगाया रोक: नूरानी, सफा, सुन्नी शाही मदीना मस्जिद पर निगरानी के आदेश

गोवा में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दरअसल, यह आदेश वरुण प्रीओलकर नाम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। वरुण मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं, मगर दिन में पाँच बार मस्जिदों से आने वाले लाउडस्पीकर की शोर की वजह से वह अपना काम नहीं कर पा रहे थे। 

पंडितवाड़ा में नूरानी मस्जिद, सफा मस्जिद, सुन्नी शाही मदीना मस्जिद, मस्जिद सहित आसपास की मस्जिदों से दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर के शोर में काम करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। ये मस्जिदें इस्लाम के विभिन्न संप्रदायों से संबंधित हैं, जिनमें शिया और सुन्नी शामिल हैं, लेकिन अशांति का स्वरूप एक ही है।

इसके बाद वरुण ने अपनी जॉब बचाने और मानसिक शांति के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच का रुख किया और मस्जिदों द्वारा अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने न्वाइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स 2000 के अनुसार अपने मौलिक अधिकार का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने वरुण की शिकायत को दूर करने और तीन महीने के भीतर मामले को निपटाने के लिए एडिशनल कलेक्टर को निर्देश देते हुए रिट जारी की।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष एक शिकायत का मामला दर्ज किया गया था, जो वरुण की शिकायत को सुनने और मस्जिदों से प्रतिक्रिया माँगने के बाद मस्जिदों के खिलाफ लाउडस्पीकर / पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग नहीं करने का निर्देश देते हुए आदेश पारित किया है। इसमें कहा गया है कि वो संबंधित अधिकारी से अनुमति लिए बिना इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं। पुलिस को भी निर्देशित किया गया है कि वह उक्त मस्जिदों पर नियमित निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि वे उक्त आदेश का अनुपालन करें।

गौरतलब है कि इससे पहले मस्जिद में लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर प्रयागराज की वीसी की चिट्ठी पर जिले के आईजी ने सख्त एक्शन लिया था। उन्होंने रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाए जाने के आदेश दिए थे। आईजी का कहना था कि पॉल्युशन एक्ट के तहत रात 10 बजे से सुबह के 6 बजे कर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह से बैन है। 

मुस्लिम भीड़ का तलवारों से हमला, घरों में आग लगाने की कोशिश, भं* कहा: सुनें सराय काले खाँ की पीड़िता को

दलित युवक के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार (मार्च 20, 2021) रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया। 50 से अधिक की संख्या में बस्ती में घुसी मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की कुल तीन गलियों को निशाना बनाया और तलवार लाठी डंडे और पत्थरों के साथ जमकर हमला कर दिया। रात के 11 बजे के बाद अचानक हुए इस हमले से बस्ती में रहने वाले लोग सहम गए हैं।

ऑपइंडिया ने इस बाबत वहाँ के पीड़ितों से बात की पीड़ित महिलाओं ने उस रात की भयावह दास्ताँ को बयाँ किया। उन्होंने बताया कि हमलावर उनके घर में घुस गए थे। हमलावरों के हाथों में तलवार, चाकू, छूरी, बंदूकें और डंडे आदि थे। पीड़ितों का कहना है कि चूँकि वो लोग जगे हुए थे, इसलिए बच गए। हमलावरों ने महिलाओं के बाल पकड़ कर भी खींचे। जिससे उन्हें चोटें भी आई। जब उन्होंने बच्चों को अंदर करके दरवाजा लगाने की कोशिश की तो हमलावरों ने बाल पकड़ कर खींचा।

मुस्लिम समुदाय के हमलावरों ने दरवाजे पर ईंटें और तलवारें मारी। जिससे कुछ हद तक कई गेट भी टूटे। उन्होंने आग लगाने की भी कोशिश की। वो गाड़ियों से पेट्रोल निकाल रहे थे, मगर लोगों ने देख लिया और छत से कुछ भारी फेंक कर मारा, जिसके बाद वो वहाँ से भागे। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जब लोग थोड़े से आक्रामक हुए तो वो लोग पीछे हटे और बगल वाली गली में गए। वहाँ पर भी उन लोगों ने हमला किया, जहाँ पर 4-5 लोगों को चोटें आई है।

उन्होंने बताया कि हमला करने वाली मुस्लिम भीड़ में शामिल शबीना नाम की महिला ने उनके कौम (जाति) को गाली दी और धमकी दी कि वो खून की होली खेलेगी। उसने हमें भं* कहा। उसने कहा कि जो भी मुहल्ला वाला बोलेगा, वो पिटेगा। पीड़ितों ने न्याय की माँग की है। उनका कहना है कि उन्होंने उनके कौम को गाली दी है, इस पर एक्शन लिया जाए। उन्होंने कहा कि वो प्रशासन से माँग करती हैं कि सभी हमलावरों (वो लड़की भी, जिसका नाम शबीना है, जिसने खून की होली खेलने की धमकी दी) को सजा हो।

इसके साथ ही गली में जितनी भी तोड़-फोड़ हुई है, उसकी भरपाई भी चाहिए। उन्होंने कहा कि वो इतने ज्यादा डरे हुए हैं कि दो दिन से काम पर नहीं जा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं वो उनके पीछे बच्चों को न कुछ कर दें। उन्हें अकेला पाकर उन पर भी हमला कर सकते हैं।

चश्मदीदों ने हमें बताया कि मस्जिद की गली की तरफ से ईंट-पत्थर लेकर घुसे और बाल्मीकि बस्ती तोड़फोड़ के बाद ईंट-पत्थरों से भरी हुई थी। अभी भी वहाँ पर जगह-जगह पर ईंट-पत्थरों को आप वीडियो में देख सकते हैं। चश्मदीदों ने हमें वो गली दिखाया, जहाँ पर ईंट-पत्थर जमा था। इतना ही नहीं, चश्मदीदों ने हमें बताया कि पुलिस और मीडिया के आने से पहले उनको डरा-धमका कर पत्थरों को हटा दिया गया था।

उन्होंने बताया किउस रात पूरी गली पत्थरों से भरी हुई थी। चारों तरफ पत्थर ही पत्थर था। उन लोगों ने 30 से ज्यादा गाड़ियों का भी नुकसान किया। सारी गाड़ियाँ फिलहाल पुलिस चौकी में खड़ी हैं। उन लोगों ने बताया कि मस्जिद के पास कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। इन लोगों ने वहीं से ईंट-पत्थर लिया और उसके बाद दलित बस्ती में घुस कर आतंक मचाया।

गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ गाँव में शनिवार रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। मुस्लिमों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी डंडों और तलवार के साथ हिन्दुओं की संपत्ति को तहस-नहस किया।

‘जल प्रदूषण से पेट खराब होता है, ममता के क्षेत्र में 3 मौतों को प्रदूषित जल से जोड़ना गलत’: मेयर फिरहाद हकीम

16 मार्च को दक्षिण कोलकाता में भवानीपुर के शशि शेखर रोड क्षेत्र के लगभग 50 लोग प्रदूषित जल के सेवन के पश्चात बीमार हो गए। भवानीपुर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भवानीपुर के वार्ड नंबर 73 एवं वार्ड नंबर 74 में आपूर्ति किया जाने वाला जल निकट के किसी सीवेज निकास तंत्र (Drain) के संपर्क में आने के कारण प्रदूषित हो गया। परिणामस्वरूप लगभग 50 नागरिक गंभीर रूप से डायरिया से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती हो गए। कई नवजात भी इस प्रदूषित जल के कारण संक्रमित हुए हैं। दो दिनों के अंतराल में ही संक्रमितों की संख्या बढ़कर 55 हो गई। इस प्रदूषित जल के कारण 3 लोगों की मौत हो गई जिनमें एक 5 वर्ष का बच्चा भी शामिल है।

डायरिया के इस कहर के परिणामस्वरूप कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) ने लोगों को आपूर्ति का जल उपयोग न करने का निर्देश दिया और जल के टैंकरों को भवानीपुर भेजने का प्रबंध किया।

प्रदूषण मृत्यु का कारक नहीं : फिरहाद हकीम

कोलकाता के मेयर और तृणमूल के नेता फिरहाद हकीम का कहना है, “प्रदूषण तो हुआ है, मैं इससे सहमत हूँ किन्तु घबराहट का माहौल बनाया गया। किसी की प्रदूषित जल के सेवन से मृत्यु होना सामान्य नहीं है। प्लास्टिक के कारण उत्पन्न हुई रुकावट के कारण सीवेज जल आपूर्ति को प्रदूषित कर सकता है। इसके कारण पेट में समस्या हो सकती है किन्तु मौतों को जल के प्रदूषण से जोड़ना गलत है।”

(Video Courtesy: Youtube/ABP Ananda)

कोलकाता नगरपालिका निगम (KMC) ने जल प्रदूषण को नकारा

केएमसी के सदस्य मैनाक मुखर्जी ने तो यहाँ तक कह दिया है कि जल प्रदूषित ही नहीं हुआ था। मैनाक ने बताया, “हमनें जल के नमूने को स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जाने वाली प्रयोगशाला में भेजा। वहाँ से हमें जल में किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं मिला।” हालाँकि, स्थानीय नागरिकों द्वारा नल से बदबूदार और गंदे जल की आपूर्ति की शिकायत की गई। निगम प्राधिकरण द्वारा भूमिगत जल प्रणाली में लीकेज की खोज प्रारंभ कर दी गई है।

भवानीपुर में जल प्रदूषण से हुई मौतों के विरुद्ध भाजपा का विरोध प्रदर्शन :

भाजपा ने जल प्रदूषण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए भाजपा नेता शशि अग्निहोत्री ने कहा, “वार्ड नंबर 73, मुख्यमंत्री का निवास स्थान है। यहाँ उनके साथ पार्टी के समन्वयक और चेयरमैन भी हैं। इसके पश्चात भी ऐसी घटना हुई। हमारा प्रदर्शन इसी लापरवाही के विरुद्ध है।”

जल गुणवत्ता की जाँच के लिए सेन्सर :

भवानीपुर मे हुई मौतों के पश्चात आवासीय अवसंरचना विकास निगम ने जल की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ओवरहेड टैंकों में सेन्सर लगाने का निर्णय लिया है। संस्था ने निर्देशित किया है कि न्यू टाउन एरिया में सार्वजनिक शौचालयों एवं ओवरहेड टैंकों की सफाई की जाए।

एक कर्मचारी के अनुसार न्यू टाउन क्षेत्र में 23 ओवरहेड टैंक हैं जिनमें से नौ टैंकों में जल गुणवत्ता की जाँच के लिए स्मार्ट सेन्सर लगाए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट प्रत्येक 24 घंटे में तैयार की जाएगी।

सपने में पीर बाबा का हुक्म और… सुबह दूसरे के खेत में बनाने लगा मजार, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के मैनाठेर थाना क्षेत्र के इमरतपुर उधो गाँव में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति को पुलिस ने किसी और के खेत में पीर की मजार बनाने के आरोप में हिरासत में ले लिया है।

पुलिस के अनुसार, उन्हें सोमवार (21 मार्च) को सुंदरलाल से शिकायत मिली कि ताहिर नाम का एक मुस्लिम शख्स उसके खेत में पीर की मजार का निर्माण कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मौके पर पहुँची और आरोपित को हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही शांति भंग करने के आरोप में उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

पुलिस ने जब इस मामले में ताहिर से पूछताछ की तो उसने बेहद हैरान कर देने वाली बात बताई। ताहिर ने बताया कि बीती रात उसके सपने में पीर बाबा आए थे। उन्होंने सुंदरलाल के खेत में मजार के निर्माण का हुक्म दिया था। इसलिए वह सुंदरलाल के खेत में मजार बनवा रहा था। वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश था।

हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी धर्म और आस्था के नाम पर जमीन हड़पने के कई मामले सामने चुके हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में एक मामला सामने आया, जहाँ मुस्लिमों ने धार्मिक आस्था के नाम पर हिंदुओं की जमीन को हड़प कर उसे कब्रिस्तान में बदल दिया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सड़कों के किनारे जमीनों का अतिक्रमण करके बनाए गए अवैध धार्मिक ढाँचों को हटाने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के निर्णय के आधार पर यह आदेश पारित किया गया था। प्रशासन ने प्रदेश में ऐसी इमारतों को हटाना शुरू कर दिया है।

67वें नेशनल फिल्म अवार्ड का ऐलान, सुशांत की ‘छिछोरे’ को बेस्ट फिल्म, कंगना को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड

67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आज ( मार्च 22, 2021) ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने साल 2019 में बनी फिल्मों के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा की है। एन चंद्रा ने पुरस्कारों का ऐलान किया। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘छिछोरे’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म चुना गया है। कंगना रनौत को बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड मनोज बाजपेयी और धनुष को मिला है।

कंगना रनौत को ‘मणिकर्णिका’ और ‘पंगा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया है। मनोज बाजपेयी को हिन्दी फिल्म भोंसले और धनुष को तमिल फिल्म असुरन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया है। बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का पुरस्कार पल्लवी जोशी को दिया गया है। एन इंजीनियर्ड ड्रीम को नॉन फीचर कैटेगरी में बेस्ट फिल्म का अवार्ड मिला है।

बेस्ट फीचर फिल्म का अवार्ड मलयालम मूवी मरक्कर अराबिक्काडालिंटे सिम्हन को मिला है। बेस्ट नॉन फीचर फिल्म वाइल्ड कर्नाटक (डेविड एटेनबरो) है। वहीं हिंदी की बेस्ट फिल्म छिछोरे चुनी गई है। मेल कैटगरी में बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड ‘केसरी’ के गाने ‘तेरी मिट्टी’ के लिए बी. प्राक को मिला है। सोहिनी चट्टोपाध्याय को बेस्ट फिल्म समीक्षक का अवॉर्ड दिया गया है। वहीं मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट सिक्किम को चुना गया है।

बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड बहत्तर हूरें के लिए संजय पूरण सिंह चौहान को दिया गया है। बेस्ट स्क्रीन प्ले (डॉयलॉग राइटर) विवेक रंजन अग्निहोत्री को ताशकंद फाइल फिल्म के लिए मिला है। बेस्ट चिल्ड्रन फिल्म का अवार्ड हिन्दी फिल्म कस्तूरी को मिला है। स्पेशल मेंशन पुरस्कार ‘बिरियानी’, ‘जोना की पोरबा’ (आसमिया), ‘लता भगवान करे’ (मराठी), ‘पिकासो’ (मराठी) को मिला है। 

नेशनल फिल्म अवार्ड की पूरी लिस्ट

बेस्ट नैरेशन- वाइल्ट कर्नाटका
बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर- विषाख ज्योति
सविता सिंह को फिल्म सौंसी के लिए बेस्ट सिनेमैटोग्रॉफर का मिला
नॉक नॉक नॉक के लिए बेस्ट डायरेक्ट सुधांशु सरिया
बेस्ट एनिमेशन फिल्म- राधा
बेस्ट नॉन फीचर फिल्म- एन इंजीनियर्ड ड्रीम, हेमंत गाबा द्वारा प्रोड्यूस की हुई

फीचर फिल्म के लिए अवॉर्ड का ऐलान

स्पेशल मेंशन- बिरियानी (मलयालम), जोनाकि पोरवा (असमिया), लता भगवानकरे (मराठी), पिकासो (मराठी) 
बेस्ट हरियाणवी फिल्म- छोरियां छोरों से कम नहीं
बेस्ट छत्तीगढ़ी फिल्म- भुलन दी मेज
बेस्ट तेलुगु फिल्म- जर्सी
बेस्ट तमिल फिल्म- असुरन
बेस्ट पंजाबी फिल्म- रब दा रेडियो 2
बेस्ट मलियाली फिल्म- कला नोत्तम
बेस्ट मराठी फिल्म- बारडो
बेस्ट हिंदी फिल्म- छिछोरे

बेस्ट फीमेल प्लेबैक- सावनी रवींद्र को फिल्म बारदो के गाने रान बेटल
बेस्ट मेल प्लेबैक- पी प्राक को फिल्म केसरी के गाने तेरी मिट्टी
बेस्ट एक्ट्रेस- कंगना रनौत को फिल्म पंगा और मणिकर्णिका
बेस्ट एक्टर- मनोज बाजपेयी को फिल्म भोसले, फिल्म असुरन के लिए अभिनेता धनुष
बेस्ट डायरेक्टर- संजय पूरे सिंह चौहान को भट्टर हूरेन 

बेस्ट पॉपुलर फिल्म- महर्षि
इंदिरा गाँधी अवॉर्ड फॉर बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर- हेलन (मलयालम) 
बेस्ट फीचर फिल्म- मलयाली फिल्म Marakkar Arabikkadalinte- SimHam को मिला

कोरोना की वजह से टल गए थे अवॉर्ड

सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार ‘ए गाँधीयन अफेयर: इंडियाज क्यूरिस पोर्ट्रेयल ऑफ लव इन सिनेमा’ को मिला है। 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा 3 मई 2020 को होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण बीते साल ये संभव न हो सका, जिसके बाद अब इनकी घोषणा की गई है। बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मातहत काम करने वाली संस्था डायरेक्टोरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल की तरफ से ये पुरस्कार दिए जाते हैं।

मस्जिद के पास से ईंट-पत्थर लेकर शुरू हुआ हमला: दिल्ली के सराय काले खाँ में दलित बस्ती पर आतंक की कहानी

दिल्ली के सराय काले खाँ इलाके में मुस्लिम युवती और हिंदू युवक की शादी से नाराज होकर कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों ने युवक के घर और मोहल्ले में तोड़फोड़, मारपीट की और धमकी दी। घटना शनिवार (मार्च 20, 2021) की है।

ऑपइंडिया ने इस मामले पर चश्मदीदों से बात करने की कोशिश की। उन्होंने हमें बताया कि मस्जिद की गली ईंट-पत्थरों से भरी हुई थी। अभी भी वहाँ पर जगह-जगह पर ईंट-पत्थरों को आप वीडियो में देख सकते हैं।

चश्मदीदों ने हमें वो गली दिखाया, जहाँ पर ईंट-पत्थर जमा था। इतना ही नहीं, चश्मदीदों ने हमें बताया कि पुलिस और मीडिया के आने से पहले उनको डरा-धमका कर पत्थरों को हटा दिया गया था।

उन्होंने बताया कि पूरी गली पत्थरों से भरी हुई थी। चारों तरफ पत्थर ही पत्थर था। उन लोगों ने 30 से ज्यादा गाड़ियों का भी नुकसान किया। सारी गाड़ियाँ फिलहाल पुलिस चौकी में खड़ी हैं। उन लोगों ने बताया कि मस्जिद के पास कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। इन लोगों ने वहीं से ईंट-पत्थर लिया और उसके बाद दलित बस्ती में घुस कर आतंक मचाया।

पीड़ितों ने हमें बताया कि हमलावरों के हाथों में तलवार, चाकू, छूरी और डंडे आदि थे। हमलावर घर में घुस गए और पीड़ितों का कहना है कि चूँकि वो लोग जगे हुए थे, इसलिए बच गए। उन्होंने आग लगाने की भी कोशिश की। कई लोगों को चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि हमला करने में शामिल शबीना नाम की महिला ने उनके कौम (जाति) को गाली दी और धमकी दी कि वो खून की होली खेलेगी।

कौम (जाति) को गाली देने के खिलाफ एक्शन की माँग

पीड़ितों ने न्याय की माँग की है। उनका कहना है कि उन्होंने उनके कौम को गाली दी है, इस पर एक्शन लिया जाए। उन्होंने कहा कि वो प्रशासन से माँग करती हैं कि सभी हमलावरों (वो लड़की भी, जिसका नाम शबीना है, जिसने खून की होली खेलने की धमकी दी) को सजा हो।

इसके साथ ही गली में जितनी भी तोड़-फोड़ हुई है, उसकी भरपाई भी चाहिए। उन्होंने कहा कि वो इतने ज्यादा डरे हुए हैं कि दो दिन से काम पर नहीं जा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं वो उनके पीछे बच्चों को न कुछ कर दें। उन्हें अकेला पाकर उन पर भी हमला कर सकते हैं।

गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के सराय काले खाँ गाँव में शनिवार रात मुस्लिम समुदाय के 50 से अधिक उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया। मुस्लिमों की उग्र भीड़ ने इलाके की दलित बस्ती में घुसकर आधे घंटे तक लाठी डंडों और तलवार के साथ हिन्दुओं की संपत्ति को तहस-नहस किया।

दलित युवक के मुस्लिम समुदाय की लड़की से शादी करने से नाराज युवती के परिजनों और उनके साथियों ने शनिवार रात सराय काले खाँ गाँव की दलित बस्ती में बेखौफ जमकर उत्पात मचाया जैसे किसी का इन्हें डर ही न रहा हो।

शिवसेना नेता के दामाद हैं महाराष्ट्र ATS के मुखिया, NIA की एंट्री होते ही ‘सुलझा’ ली मनसुख हिरेन की मौत की गुत्थी

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को केस सौंपे जाने के ठीक एक दिन बाद महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ते (ATS) के डीआईजी शिवदीप लांडे ने मनसुख हिरेन के मौत की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया। TV9 की रिपोर्ट के अनुसार लांडे शिवसेना नेता विजय शिवतारे की बेटी ममता शिवतारे के पति हैं। शिवतारे महाराष्ट्र सरकार में जल संसाधन एवं जल संरक्षण राज्य मंत्री रह चुके हैं। 2019 के विधानसभा चुनावों में वे कॉन्ग्रेस के संजय जगताप से पराजित हो गए थे।

एटीएस के डीआईजी शिवदीप वामनाव लांड ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि अति संवेदनशील मनसुख हिरेन मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली गई है। मामला किस तरह सुलझा, इसके बारे में पोस्ट में पर्याप्त जानकारी नहीं है। लांडे ने एटीएस के अपने उन सहकर्मियों की पीठ भी थपथपाई जिनकी कई दिनों की दिन-रात की मेहनत के कारण इस केस की गुत्थी सुलझी। पोस्ट में यह भी बताया गया है कि यह मामला उनके पुलिस करियर के सबसे जटिल मामलों में से एक है।

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

कौन हैं शिवदीप लांडे?

महाराष्ट्र के अकोला में पैदा हुए लांडे के पिता किसान थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। आईपीएस चुने जाने के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला। उनकी पहली पोस्टिंग बिहार के मुंगेर जिले में हुई। वे नक्सल प्रभावित जमालपुर क्षेत्र में भी तैनात रहे। पटना में तैनाती के दौरान उनकी खूब चर्चा हुई और ‘रॉबिनहुड’ का नाम भी मिला।  

लांडे 2015 में एक पुलिसकर्मी को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़कर चर्चा में आए। बेहद फिल्मी तरीके से लाल दुपट्टा में उन्होंने इस कार्रवाई को अंलाम दिया। बिहार में लांडे ‘सिंघम’ और ‘दबंग’ जैसे नाम से भी जाने जाते हैं। उन्होंने कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों को अपना निजी मोबाइल नंबर भी दिया था, जिससे किसी भी आपात स्थिति में वे सीधे उनसे संपर्क कर सकें। लड़कियों की मदद के लिए वे सड़क पर उतरकर खुद मनचलों को सबक सिखाया करते थे। और अब एनआईए के को केस सौंपे जाने के कुछ घंटों के भीतर ही लांडे ने मनसुख हिरेन की मौत की गुत्थी“सुलझा’ ली। इसका ऐलान सोशल मीडिया पोस्ट की जरिए किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मनसुख हिरेन की मौत के मामले में गिरफ्तार क्रिकेट सट्टेबाज नरेश धारे ने सचिन वाजे और मुंबई पुलिस के बर्खास्त कांस्टेबल विनायक शिंदे को पाँच फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। टाइम्स नाउ की एक अन्य रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मनसुख हिरेन फर्जी सिम के माध्यम से आरोपी नरेश के साथ संपर्क में थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मनसुख को 4 मार्च (जिस दिन मनसुख लापता हुए) को एक व्हाट्सएप कॉल आया, जिसकी लोकेशन अहमदाबाद थी जो कि नरेश की लोकेशन भी थी। रिपोर्ट के अनुसार मनसुख हिरेन के ठिकाने की लोकेशन को ट्रैक करने के बाद यह पता चला कि मनसुख की लोकेशन के सबसे निकट शिंदे था। महाराष्ट्र एटीएस ने 11 संदिग्धों को चिह्नित किया है, जिनमें कुछ सट्टेबाज और बर्खास्त पुलिस कर्मचारी भी हैं जो सचिन वाजे के करीबी थे।

भले ही महाराष्ट्र एटीएस ने केस को सुलझा हुआ बात दिया हो किन्तु हमें इंतजार करना होगा कि एनआईए की छानबीन प्रारंभ होने के पश्चात केस कौन सा नया मोड़ लेता है।

मनसुख हिरेन केस एनआईए को

NIA को केस सौंपे जाने के बावजूद ATS ने मनसुख हिरेन की मौत के मामले में दो गिरफ्तारियाँ आज की है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केस एनआईए को ट्रांसफर किए जाने का आदेश जारी होने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि एटीएस कब उसके हवाले करेगी।

मनसुख हिरेन 5 मार्च को मृत मिले थे। 25 फरवरी मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर से जो विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो मिली थी वह हिरेन की ही थी। पहले तो मुंबई पुलिस ने हिरेन की मौत को आत्महत्या बताने की कोशिश की, लेकिन लगातार हुए खुलासों के बाद एटीएस के हवाले यह केस कर दिया गया।

‘सबूत मिटाए जा सकते, बदले की कार्रवाई संभव’: SC में परमबीर सिंह, निष्पक्ष जाँच की माँग- ट्रांसफर को चुनौती

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने अब महाराष्ट्र के गृह मंत्री व NCP नेता अनिल देशमुख के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने ‘बना किसी पूर्वाग्रह, निष्पक्ष और बिना किसी बाहरी दखल वाले’ जाँच की माँग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस मामले में सबूत मिटाए जा सकते हैं, इसीलिए उससे पहले जाँच कराई जाए। उन्होंने खुद को ट्रांसफर के बाद DG (होमगार्ड) बनाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है।

परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फरवरी 2021 से ही गृह मंत्री अनिल देशमुख उन्हें कोई सूचना दिए बिना ही क्राइम इंटेलिजेंस ब्यूरो में रहे विवादित पुलिस अधिकारी (अब निलंबित) सचिन वाजे और सोशल सर्विस ब्रांच में ACP संजय पाटिल जैसे उनके जूनियर अधिकारियों के साथ बैठक कर मुंबई के विभिन्न प्रतिष्ठानों से 100 करोड़ रुपए प्रतिमाह वसूली का टारगेट दे रहे थे।

उन्होंने बताया है कि अगस्त 24/25, 2021 को इंटेलिजेंस कमिश्नर रश्मि शुक्ला ने DGP को अनिल देशमुख द्वारा गलत तरीके से मनमाना ट्रांसफर-पोस्टिंग किए जाने की बात बताई, जिसके बाद DGP ने इस मामले को राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव के समक्ष उठाया। उन्होंने अनिल देशमुख पर कई मामलों में हस्तक्षेप कर के जाँच को मनमाना दिशा में मुड़वाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

परमबीर सिंह ने याचिका में कहा है कि उनके मातहत अधिकारियों को बिना उनके सूचना के बुलाकर मनमाना निर्देश देना गृह मंत्री के रूप में पद का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह से ट्रांसफर-पोस्टिंग और जाँच में हस्तक्षेप को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में ये बातें पहले ही ला चुके हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि एकपक्षीय और अवैध तरीके से उनका ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर के रूप में 2 वर्ष का तय न्यूनतम कार्यकाल पूरा भी नहीं किया था। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में उनका ट्रांसफर दुर्भावना से लिप्त फैसला था। उन्होंने इसे असंवैधानिक के साथ-साथ इंडियन पुलिस सर्विस (काडर) नियमों का भी उल्लंघन करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले का जिक्र किया।

उस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवेदनशील पद और कार्यावधि में किसी अधिकारी के ट्रांसफर के पीछे अच्छे कारण होने चाहिए और इस पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद ही फैसला होना चाहिए। इसलिए, उन्होंने अनिल देशमुख के करतूतों की जाँच के साथ-साथ अपने ट्रांसफर के फैसले पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का निवेदन भी सुप्रीम कोर्ट से किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि देशमुख उनके खिलाफ बदले की भावना से कोई कदम उठा सकते हैं, जिससे उन्हें बचाया जाए।

उधर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NCP के मुखिया शरद पवार ने अपने मंत्री की ‘बेगुनाही’ का सर्टिफिकेट देते हुए देशमुख के फरवरी 2021 में अस्पताल में भर्ती होने, क्वारंटीन रहने जैसे दावे किए। लेकिन, इन दावों पर जब सवाल उठे तो वे जवाब नहीं दे पाए। 15 फरवरी को अनिल देशमुख एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान कॉन्ग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भी उनसे मिला था।