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तिरंगे पर थूका, कहा- पेशाब पीओ; PM मोदी के लिए भी आपत्तिजनक बात: भारतीयों पर हमले के Video आए सामने

प्रवासी भारतीयों ने ब्रैम्प्टन (Brampton) में भारत-कनाडाई संबंधों के मद्देनजर सोमवार को तिरंगा और मैपल कार रैली का आयोजन किया। रैली में 100 से ज्यादा कारें भारत और कनाडा के ध्वज के साथ शामिल थीं। यह खुशनुमा माहौल तब बिगड़ गया जब कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने रैली में शामिल लोगों से गाली-गलौच की। भारत की वाहवाही देख ट्रैफिक जाम कर रैली में शामिल लोगों को प्रताड़ित किया।

इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसमें खालिस्तानी समर्थक भारत के समर्थन में रैली करने वालों को तंग कर रहे हैं, उन्हें परेशान कर रहे हैं और तिरंगे का अपमान करते हुए कह रहे हैं कि जाकर वे पेशाब पिएँ।

एक वीडियो में देख सकते हैं कि खालिस्तानी जोर से भारतीय समर्थक को धक्का देता है और वीडियो बनाने वाला कहता है कि वह जाकर पेशाब (मूत) पिए। धक्का देने के बाद खालिस्तानी समर्थक पूछता है अब तो खुश है? जाकर पेशाब पी, पेशाब तुझे ताकतवर नहीं बनाएगा %^$।

एक अन्य वीडियो में खालिस्तानी गुंडे शांतिपूर्ण रैली में न केवल भारतीयों के लिए अपमानजनक शब्द बोल रहे हैं बल्कि नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इस वीडियो को REACH नाम के अकाउंट ने शेयर किया है, जिसमें दर्शाया कि कैसे हिंदू, कनाडाई सांसद व खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह के क्षेत्र में रहते हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि भारतीयों को गालियाँ, धमकियाँ खुलेआम मिल रही हैं।

इस हमले को लेकर कहा जा रहा है कि इसे एनडीपी नेता व खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह के करीबियों ने करवाया है। ऐसा क्यों? दरअसल, इस पूरी घटना के पीछे मास्टरमाइंड का नाम जोधवीर धालीवाल है। धालीवाल कोई और नहीं बल्कि जगमीत सिंह का रिश्तेदार है। सिंह की पत्नी की बहन का पति यानी उसका साढू है।

जगमीत सिंह और उसकी पत्नी के साथ जोधवीर धालीवाल (साभार: REACH)

REACH के अनुसार, जोधवीर भी खालिस्तानी समर्थक है जो अक्सर जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन करता रहता है। एक तस्वीर में उसका जरनैल सिंह के प्रति प्रेम देख सकते हैं कि उसने खालिस्तानी आतंकी का टैटू अपने हाथ में बनवाया हुआ है।

जरनैल सिंह के टैटू के साथ जोधवीर (साभार: REACH)

रीच के अनुसार, भारतीयों पर हुए हमले के पीछे धालीवाल का सबसे बड़ा हाथ था। जगमीत सिंह के समर्थकों ने उसका पूरा पूरा साथ दिया। एक वीडियो है जिसमें जोधवीर को भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर थूकते देखा जा सकता है। वीडियो में उसकी पत्नी मंजोत भी तिरंगे को गाली दे रही है। साथ ही पीएम मोदी को भी उलटा-सीधा कह रही है।

REACH के मुताबिक वीडियो में नजर आया कार नंबर बताता है कि कार धालीवाल की ही थी। इसके अलावा धालीवाल वीडियो में लोगों पर हमला करता भी दिख रहा है। भारतीय समर्थक को धक्का देकर गिराते उसे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है।

इन सभी सबूतों से ये बात साफ है कि जगमीत सिंह के समर्थकों ने ब्रैम्प्टन में हुई रैली में हिंसा फैलाई। भारतीयों और तिरंगे को अपमानित किया। ये सब तब हुआ जब कई भारतीय मिल कर कनाडा में जगमीत सिंह का विरोध कर रहे हैं, उस पर इल्जाम लगा रहे हैं कि वह कनाडा के लोगों को भड़का रहा है।

जगमीत सिंह ने फैलाई रैली में हिंसा?

पिछले हफ्ते की बात करें तो कई भारतीयों ने जगमीत सिंह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि किसान आंदोलन के कारण खालिस्तानी उन्हें निशाना बना रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन के दौरान सबके हाथों में कनाडाई झंडा था और वह समुदायों में नफरत फ़ैलाने का विरोध कर रहे थे

बता दें कि भारत में चल रहे किसान आंदोलन के मद्देनजर कनाडा में सिखों को भड़काने का काम हो रहा है। जगमीत सिंह खुद इस मुद्दे में घुस-घुस कर भारतीय सरकार के ख़िलाफ़ वैश्विक प्रोपेगेंडा चलाने का काम कर रहा है। उस पर न केवल भारत में चल रहे किसान आंदोलन को फंड करने का इल्जाम है, बल्कि उसे लेकर ये भी कहा जा रहा है कि उसी के कारण रिहाना ने भारत विरोधी ट्वीट किया।

अब संभव है कि अपने ख़िलाफ़ उठ रही आवाजों के विरोध में जगमीत सिंह ने ब्रैम्प्टन में हुई रैली पर भारतीयों के ऊपर हमला करवाया हो, क्योंकि कई NRI लंबे समय से उसके कार्यालय के बाहर खड़े होकर उसका विरोध करते रहे हैं।

कौन है जगमीत सिंह?

जगमीत सिंह को जिम्मी धालीवाल के नाम से भी जाना जाता है। भारत से कनाडा में जाकर बसने वाले इस खालिस्तानी समर्थक का जन्म 1979 में हुआ था। वहाँ वकालत के बाद इसने राजनीति शुरू की। साल 2017 में नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ा। 2019 में इसे वहाँ का सांसद चुना गया। 

जगदीप को उसकी खालिस्तानी विचारधारा के कारण पहचाना जाता है। वह अक्सर भारत के विरोध में और खालिस्तान के समर्थन में आवाज उठाता रहता है। साल 2014 में भारत सरकार ने उसे वीजा देने से मना किया था। भारत सरकार का कहना था कि वह अपने मानवाधिकारों का इस्तेमाल अपना एजेंडा चलाने के लिए करता है। जगदीप सिंह पहला ऐसा पश्चिमी सांसद है, जिसे देश में आने से रोका गया। इसके बाद साल 2015 में एनडीपी सदस्य ने सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तान रैली की थी, जिसमें जरनैल सिंह के पोस्टर दिखे थे। साल 2016 में जगमीत सिंह ने खालिस्तानी समर्थन में सेमिनार में भाग लिया था। 

अंदर शाहिद-बाहर असलम, दिल्ली दंगों के आरोपित हिंदुओं को तिहाड़ में ही मारने की थी साजिश

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल हुए दंगों के आरोपितों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में ही मारने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दो हिंदू आरोपितों को मर्करी (पारा) देकर मारने की साजिश रची गई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पूरी साजिश का भंडाफोड़ किया है।

पत्रकार राजशेखर झा ने ट्वीट कर बताया है कि शाहिद नाम का एक सजायाफ्ता कैदी इसे अंजाम देने वाला था। आज तक ने स्पेशल सेल के सूत्रों के हवाले से बताया है कि शाहिद ने जेल में रहते प्लान बनाया था। उसने जेल के बाहर मौजूद असलम से मरकरी की डिमांड की थी। साजिश की भनक लगने पर स्पेशल सेल ने टेक्निकल सर्विलांस रखना शुरू किया और साजिश को नाकाम किया। मरकरी के साथ आरोपित को दबोच लिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहिद ने 2015 में दिल्ली के ख्याला में महिला से बलात्कार किया था। उसके बाद महिला और उसके 2 बच्चों की हत्या कर दी थी। राजशेखर झा के मुताबिक जिनकी हत्या की जानी थी उन्हें दंगों के दौरान एक हत्या और मस्जिद को निशाना बनाने की घटना में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया है कि मर्करी जब्त कर पुलिस ने दोनों आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 से 25 फरवरी के दौरान हिंदू विरोधी दंगों में करीब 53 लोग मारे गए थे। 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। मारे गए लोगों में 15 साल के लड़के से लेकर आईबी के कॉन्स्टेबल तक थे। कुछ ने अपनी आँखों के सामने जीवन भर की कमाई को स्वाहा होते देखा। दंगाइयों ने न हिंदुओं की संपत्ति को छोड़ा था न उनके धार्मिक स्थलों को।

दंगों की अब तक की जॉंच से यह बात सामने आई है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा को अंजाम देने की पूरी प्लानिंग की गई थी। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान दंगों को लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी। ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफी सहित 18 के खिलाफ दंगों के सिलसिले में पिछले दिनों ही दिल्ली की एक अदालत ने यूएपीए के तहत आरोपों का संज्ञान लिया था।

100 मदरसे-50 हजार छात्र, गीता-रामायण की करनी ही होगी पढ़ाई: मीडिया के दावों की हकीकत

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने 2 मार्च 2021 को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा पाठ्यक्रमों की अध्ययन सामग्री जारी की। इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में भ्रामक जानकारी फैलाए जाने का काम धड़ल्ले से किया गया।

सोशल मीडिया पर तो कुछ लोगों ने NIOS की नई कोशिश पर ऊँगली उठाई ही, लेकिन कुछ मीडिया संस्थान भी झूठ फैलाने में पीछे नहीं रहे। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ने एक रिपोर्ट छापी जिसमें बताया कि NIOS गीता, रामायण को मदरसों में पहुँचा रही है। हालाँकि खबर अपना असर दिखाती, इससे पहले ही सरकार ने इसकी हकीकत बता दी। पीआईबी फैक्टचेक के अनुसार सरकार ने इस खबर को पूर्ण रूप से भ्रमित करने वाला बताया है।

पीआईबी ने लिखा, टाइम्स ऑफ इंडिया का दावा गलत है और इसे गलत तरह से पेश किया गया है। NIOS द्वारा उपलब्ध कराए गए विषयों में से शिक्षार्थी के पास यह चयन करने का हक है कि उसे उतने विषयों में से कौन से सब्जेक्ट का कॉम्बिनेशन पढ़ना है।

शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा किया गया कि टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा सच्चाई से छेड़छाड़ की गई और तथ्य को गलत तरह से पेश किया गया, ये सब दुर्भावनापूर्ण इरादा जान पड़ता है। इसमें यह भी साफ किया गया कि NIOS मदरसों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान देता है। 

इस प्रावधान के तहत शिक्षार्थी को आधिकारिक एजुकेशन सिस्टम की तरह तमाम विषय ऑफर किए जाते हैं। इसमें से वे अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी कॉम्बिनेशन चुन सकते हैं।

प्रेस रिलीज में कहा गया कि लगभग 100 मदरसों के 50 हजार छात्र NIOS से जुड़े हैं। प्लान किया जा रहा है कि NIOS से 500 और मदरसे जोड़े जाएँ और ये भी पूर्ण रूप से सिर्फ़ मदरसों की माँग पर होगा।

अब शिक्षा मंत्रालय के बयान के बाद ये तो साफ है कि NIOS ने शिक्षा प्रणाली में कुछ बदलाव जरूर किए हैं लेकिन इतने भी नहीं कि मदरसों के छात्रों पर उनकी मर्जी के बिना कोई विषय थोपा जाए। नए विषय वैकल्पिक हैं। ये जरूरी नहीं कि मदरसे के छात्र इन्हें पढ़ें ही। इसलिए ये दावा कि उन्हें गीता महाभारत पढ़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, बिलकुल गलत है।

बता दें कि NIOS उन दो राष्ट्रीय बोर्डों में से एक है, जो प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर ओपन और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पाठ्यक्रम संचालित करता है। NIOS ने ,भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर 15 कोर्स तैयार किए हैं, जिसमें वेद, योग, विज्ञान, संस्कृत भाषा, व्यावसायिक कौशल, रामायण, गीता और पाणिनि-प्रवर्तित महेश्वरा सूत्र शामिल हैं। ये पाठ्यक्रम प्राथमिक शिक्षा के क्लास 3, 5 और 8 के बराबर हैं।

केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने मंगलवार को नोएडा स्थित एनआईओएस के केंद्रीय मुख्‍यालय में इसका स्‍टडी मैटिरियल जारी करते हुए कहा था, “भारत प्राचीन भाषाओं, विज्ञान, कला, संस्‍कृति और परंपरा की खान है। अब देश अपनी प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करके ज्ञान के क्षेत्र में सुपरपावर बनने को तैयार है। हम इन कोर्सों के लाभ को मदरसों और विश्‍व में मौजूद भारतीय समाज तक पहुँचाएँगे।”

अनुराग कश्यप, तापसी पन्नू और अन्य के ठिकानों पर लगातार दूसरे दिन रेड, ED का भी कस सकता है शिकंजा

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप, अभिनेत्री तापसी पन्नु और अन्य के यहाँ लगातार दूसरे दिन 4 मार्च को भी आयकर विभाग की छापेमारी जारी है। कश्यप, पन्नू, विकास बहल और मधु मंटेना के मुंबई, पुणे सहित अन्य जगहों पर 22 ठिकानों पर 3 मार्च को छापेमारी की कार्रवाई शुरू हुई थी।

बुधवार को अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान इन फ़िल्मी हस्तियों से पूछताछ करते हुए कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेजों की जाँच की थी। विभाग के अधिकारी जानना चाहते थे कि आखिर टैक्स चोरी की रकम का बँटवारा कैसे हुआ। इससे क्या-क्या खरीदा गया और कहीं इस रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए देश से बाहर तो नहीं भेजा गया।

अधिकारियों ने जाँच के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को कब्जे में लिया है। कहा जा रहा है कि तापसी और अनुराग के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी छापा मार सकता है। इसके साथ ही छापेमारी में हाथ आए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर जाँच और बढ़ सकती है। संभव है कि अनुराग और तापसी की व्हॉट्सएप चैट भी खँगाली जाए और जिन लोगों ने उनकी फिल्मों में निवेश किया उनसे भी पूछताछ हो।

बता दें कि कल आईटी विभाग ने मुंबई और पुणे में 22 ठिकानों में छापेमारी की थी। इनमें अनुराग कश्यप का फ्लैट और फैंटम फिल्म, जिसकी कमाई पर पूरी जाँच केंद्रित है, उसके दफ्तर पर भी रेड पड़ी। वहीं मधु के आवास पर भी 6 अधिकारी पहुँचे। साथ ही उनकी कंपनी पर भी 8 लोगों ने छापेमारी कर 4 लोगों के अकाउंट सीज कर दिए।

इस रेड की खबर आते ही सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। वहीं कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार का बदला कहा। जबकि केंद्र की मानें तो आईटी रेड कानून के मुताबिक हुई है। प्रशांत भूषण इस रेड से इतना आहत हुए कि उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों को सरकार की ए टीम करार दे दिया।

उन्होंने बीबीसी का कार्टून शेयर करते हुए लिखा, “अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू ने अपने ट्विटर अकाउंट से सरकार के खिलाफ एक-दो ट्वीट क्या किए, कि इनकम टैक्स विभाग उनका अकाउंट देखने पहुँच गया! इनकम टैक्स, एनफोर्समेंट विभाग, एनआईए और पुलिस इस सरकार की ए टीम है।”

वहीं तेजस्वी यादव ने कहा कि पहले तो केवल राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का चरित्र हनन किया गया। अब नाजी सरकार सोशल कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और, कलाकारों को भी धमका रही है।

मालूम हो कि अनुराग कश्यप के समर्थन में महाराष्ट्र सरकार को बोलते देख पायल घोष ने भी तीखी टिप्पणी की है। पायल ने लिखा, “पूरी महाराष्ट्र सरकार अनुराग कश्यप के समर्थन में आ गई है। अब सब स्पष्ट है कि मुंबई पुलिस द्वारा अनुराग कश्यप के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई और मुझे पर्याप्त सबूत उपलब्ध करवाने को कहा।”

गौरतलब है अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू पहले ऐसे बॉलीवुड के जाने-माने चेहरे नहीं है जिन पर आईटी विभाग ने शिकंजा कसा हो। इससे पूर्व एकता कपूर के घर पर भी आईटी ने रेड मारी थी। ये मामला शूटआउट एट वडाला के रिलीज से पहले का है। इसी प्रकार कटरीना कैफ के घर पर भी साल 2011 में छापा पड़ा था। प्रियंका चोपड़ा के घर भी 2011 में छापेमारी हुई थी। इसी तरह 90 के दशक की मशहूर अदाकारा माधुरी दीक्षित के घर भी सालों पहले आईटी रेड पड़ी थी।

मारा गया शार्प शूटर अमजद, साथी भी ढेर: मुख्तार अंसारी के लिए किया था काम, UP पुलिस से एनकाउटंर में काम तमाम

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार (मार्च 3, 2021) को यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने दो शार्प शूटरों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। पड़ताल में पता चला कि इनका संबंध बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी से था। इन्होंने 8 साल पहले उसके साथ काम किया था। हाल में ये माफिया मुन्ना बजरंगी से भी जुड़े थे।

दोनों बदमाशों ने साल 2013 में अपने साथियों के साथ बनारस के तत्कालीन डिप्टी जेलर अनिल कुमार त्यागी की हत्या की थी। दोनों पर ₹50000 का इनाम था। ये प्रयागराज में किसी राजनीतिक व्यक्ति की हत्या करने के इरादे से आए थे।

यूपी पुलिस के साथ इन बदमाशों की मुठभेड़ नैनी थाना क्षेत्र के अरैल इलाके में उस समय हुई, जब एसटीएफ सोमेश्वर नाथ मंदिर तिराहा के पास चेकिंग कर रही थी।

सीओ एसटीएफ नवेन्दु सिंह ने बताया कि मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी गैंग के लिए काम करने वाले दो सुपारी किलर के बारे में उन्हें सूचना मिली थी। इसके बाद दोनों को पकड़ने के लिए नाकेबंदी की गई। जब उन्होंने पुलिस के चंगुल में खुद को फँसा पाया तो दोनों ने भागने की कोशिश की और पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए पीछा किया

इसी बीच दोनों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दोनों घायल हो गए। पुलिस फौरन उन्हें अस्पताल लेकर पहुँची, पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस को इनके पास से 30 और 9MM की पिस्टल, जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकल मिली है।

घटना के बाद एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि एनकाउंटर में मारे गए दोनों बदमाशों के नाम राजीव पांडे उर्फ वकील पांडे और एसएच अमजद उर्फ अंगद हैं। ये दोनों आजकल मुन्ना बजरंगी और दिलीप मिश्रा गैंग के लिए काम कर रहे थे।

एसटीएफ के एडीजी ने यह भी जानकारी दी कि पिछले 28 मई को 1 लाख रुपए का इनामी नीरज सिंह गिरफ्तार हुआ था। उसने, मुठभेड़ में मारे गए वकील पांडे के साथ मिल कर आरएसएस के सुजीत सिंह और प्रयागराज के सपा नेता नन्हें खान के दामाद समील अहमद को मारने के लिए रेकी की थी। हालाँकि, नीरज को वारदात अंजाम देने से पहले पकड़ लिया गया था।

चोरी करके बनाया गया दीपिका पादुकोण का Levi’s जीन्स वाला विज्ञापन? Yeh Ballet के डायरेक्टर ने लगाया आरोप

JNU में पीआर स्टंट करने के बाद तमाम आरोपों से घिरी दीपिका पादुकोण एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, इस बार नेटफ्लिक्स फिल्म ‘Yeh Ballet’ के निर्देशक सूनी तारापोरवाला (Sooni Taraporevala) ने लेवाइस जींस के उस विज्ञापन पर प्लेगरिज्म पर आरोप लगाया है, जिसमें दीपिका पादुकोण स्टार चेहरा हैं।

इंस्टाग्राम पर अपनी बात रखते हुए तारापोरवाला ने लिखा, “हाल ही में मेरा ध्यान इस एड की तरफ गया। मैं इसमें अपनी फिल्म Yeh Ballet का सेट देख कर चौंक गई। इस एड का क्रिएशन शैलजा शर्मा ने किया था और शूट खत्म होने के बाद इस सेट को तोड़ दिया गया था। एड में हमारे इस सेट को ही कॉपी करने की कोशिश की गई है।”

सूनी तारापोरवाला (Sooni Taraporevala) ने बताया कि ऐसा कोई स्टूडियो मुंबई में नहीं था, इसलिए इस विज्ञापन के डायरेक्टर ने इसे देखा और हमारे सेट को प्लेगराइज किया।

वह कहती हैं कि क्या ब्रांड और इस एड के डायरेक्टर विदेशों में बिना परमिशन के ऐसा करने की सोच सकते हैं। क्या अगर उनके खुद के क्रिएटिव वर्क के साथ ऐसा किया जाएगा, तो वे इसे बर्दाश्त करेंगे? ये एक बौद्धिक चोरी है। शैलजा शर्मा को अपने क्रिएटिव वर्क का ऐसा हश्र देख, पता नहीं कैसा लग रहा होगा।

सूनी लिखती हैं कि भारत में कॉपी-कैट कल्चर समाप्त होना चाहिए, इसे निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने गुस्से में पूछा – “आप सोचते हैं कि एक विदेशी प्रोडक्शन कंपनी और निर्देशक बेहतर जानते होंगे। क्या आपके पास रचनात्मकता नहीं है? क्या सोच रहे थे आप?”

बता दें कि दीपिका पादुकोण का एड 26 फरवरी 2021 को रिलीज हुआ था और नेटफ्लिक्स पर Yeh Ballet पिछले साल आ चुकी है। इस विवाद पर लिवाइस जींस के लिए इस एड की प्रोडक्शन डिजाइनर रुपिन सूचक ने कहा है कि एड के डायरेक्टर नाडिया मर्कार्ड ओटजेन Yeh Ballet जैसा ही सेट चाहते थे। इसलिए ये सेट बनाया गया। इस मामले पर दीपिका पादुकोण की ओर से अभी कोई रिएक्शन नहीं आया है।

‘मुगलों-औरंगजेब ने करवाई मंदिरों की मरम्मत’ – NCERT बिना सबूत के पूरे देश को पढ़ा रहा था, भेजा गया लीगल नोटिस

किताबों में मुगलों का महिमामंडल करने वाली NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्यूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) को भरतपुर के एक RTI कार्यकर्ता ने लीगल नोटिस भेजा है। NCERT को ये नोटिस मुगलों पर अप्रमाणित कंटेंट छापने को लेकर भेजा गया है।

दरअसल, NCERT की कक्षा-12 की इतिहास की पुस्तक में यह दावा किया गया है कि जब (हिंदू) मंदिरों को युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनकी मरम्मत के लिए शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा अनुदान जारी किए गए।

अब इसी दावे को लेकर भरतपुर के एक्टिविस्ट दपिंदर सिंह ने एनसीईआरटी के विरुद्ध ये कदम उठाया है। इससे पहले उन्होंने एक RTI लगाई थी, जिसमें उन्होंने सवाल किया था कि कक्षा 12 की इतिहास की पुस्तक में जो दावे किए गए हैं, उसके स्रोत और उसके पीछे के तथ्य क्या हैं, जिनके आधार पर ये पढ़ाया जा रहा है?

NCERT कक्षा-12 की पुस्तक का हिस्सापेज -234 (हिंदी)

इस आरटीआई के जवाब में जब NCERT ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कहा कि उनके पास इसका कोई रेफरेंस मौजूद नहीं है, तो दपिंदर सिंह ने उन्हें यह नोटिस भेजा। उनका मत है कि आखिर क्यों गलत इतिहास बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। क्यों स्पष्ट तौर पर न केवल बच्चों को खुलेआम बरगलाने का काम हो रहा है बल्कि उनके साथ भी खिलवाड़ हो रहा है, जो किसी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

NCERT कक्षा-12 की पुस्तक का हिस्सा, पेज -234

दपिंदर ने किताब में पढ़ाए जाने वाले कंटेंट में संशोधन की माँग की है। उनका मानना है कि बिना प्रमाण कैसे मुगल शासक जैसे औरंगजेब व शाहजहाँ को महान दिखाया गया। इतिहास तो तथ्यों व सूचनाओं पर आधारित होता है, यदि ऐसे जानकारी दी जाएगी तो ये इतिहास से खिलवाड़ होगा।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में जनवरी में एक आरटीआई लगाई गई थी। याचिकाकर्ता की पहली माँग थी कि वह सोर्स बताया जाए, जिसमें ये बातें कही गई हैं और उन मंदिरों की संख्या बताई जाए, जिन्हें औरंगजेब और शाहजहाँ ने मरम्मत करवाई। NCERT का दोनों सवालों के जवाब में कहना है कि इसकी जानकारी उनके विभाग के पास नहीं है।

इस पर एक एक्टिविस्ट संजीव वकील कहते हैं कि छात्रों को कल्पना आधारित इतिहास पढ़ाया जा रहा है। वह कहते हैं, ” शिक्षा लिहाज से NCERT किताबों को बेंचमार्क समझा जाता है। इन्हें सिविल परीक्षा की तैयारी करने वाले भी पढ़ते हैं और अन्य परीक्षा की तैयारी करने वाले भी। आगामी पीढ़ी को गलत दिशा में ढकेला जा रहा है और इसके परिणाम बहुत भयानक हो सकते हैं।”

भारतीय TV सीरियल का पश्तू में करती थीं डब… ISIS ने तीनों महिला मीडियाकर्मी को गोलियों से भूना

अफगानिस्तान में मंगलवार (मार्च 2, 2021) को ISIS ने 3 महिला पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक अन्य घायल हैं। पूरी वारदात जलालाबाद शहर में घटी। तीनों महिलाएँ रेडियो और टीवी स्टेशन में काम करती थीं।

मृतक मीडियाकर्मियों की शिनाख्त मुर्सल वाहिदी, सादिया सदत और शहनाज के तौर पर हुई। उम्र में तीनों केवल 18 से 20 साल की थीं। इस्लामी आतंकियों ने इन पर हमला तब बोला, जब यह अपने ऑफिस से घर जाने के लिए रवाना हुई थीं।

तीनों मृतक मीडियाकर्मी तुर्की और भारत के नाटकों/सीरियलों को स्थानीय भाषाओं जैसे दारी और पश्तू में डब करती थीं। निजी चैनल एनिकास टीवी (Enikas TV) के समाचार संपादक शोकरुल्ला पासून ने यह जानकारी अलजज़ीरा को दी।

प्रशासन ने बताया है कि वह हत्यारे को पकड़ चुके हैं। पूछताछ में उसने अपना नाम कारी बसर बताया है और खुद के ताल्लुक तालिबान से कहे हैं। हालाँकि तालिबान ने इस हमले में हाथ होने से इनकार किया है।

तालिबान के इनकार करने के बाद ISIS ने इस हमले की खुली जिम्मेदारी ली है। महिलाओं को निशाना बनाने पर ISIS का कहना है कि वह तीनों ऐसे मीडिया स्टेशन में काम करती थीं, जो अफगानी सरकार का वफादार है।

एनिकास टीवी (Enikas TV) के प्रमुख जलमई लतीफी ने बताया कि दो अलग-अलग घटनाओं में महिलाओं को मारा गया। वो उस समय पैदल ऑफिस से घर जा रही थीं। तभी दो लोग आए और उन पर फायरिंग शुरू कर दी। वह तीनों हाई स्कूल ग्रैजुएट थीं और केवल 18-20 साल की थीं।

मालूम हो कि पिछले साल दिसंबर में एक और महिला कर्मचारी को मारा गया था। वह भी एनिकास रेडियो एंड टीवी में काम करती थीं। उन्हें भी जलालाबाद में ही मारा गया था।

एक अमेरिकन एनजीओ SITE इंटेलीजेंस ग्रुप का कहना है कि जलालाबाद के पूर्वी शहर में हुए इस हमले में एनिकास टीवी स्टेशन की महिला कर्मचारियों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। बता दें कि इस हमले में ऐसा दावा करने वाला यह इंटेल ग्रुप जिहादी संगठनों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर बनाए रखने का काम करता है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी इन हमलों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि निर्दोष महिलाओं पर जानलेवा हमले को न केवल इस्लाम बल्कि अफगानिस्तान के कल्चर और शांति के खिलाफ कहा है।

इस हमले के बाद अफगान इंडिपेंडेंट ह्यूमन राइट्स के प्रमुख शहजाद अकबर ने ट्विटर पर कहा, “अफगान महिलाओं को अक्सर निशाना बनाया जाता है और उन्हें मार दिया जाता है… इसे रोकना चाहिए। नागरिकों को मारना और (अफगानिस्तान के) भविष्य को नष्ट करना बंद हो।” 

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबान और ISIS का आतंक अक्सर देखने को मिलता रहता है। यदि सिर्फ़ पिछले 6 माह की बात करें तो रिपोर्ट बताती है कि इस बीच 15 मीडिया कर्मचारियों को मौत के घाट उतारा गया। इसे अलावा कई धार्मिक ज्ञान रखने वालों, कार्यकर्ताओं और न्यायाधीशों पर भी यहाँ हमले होते रहते हैं। कुछ को धमकियों के बाद छिपना पड़ता है तो कुछ भागने को मजबूर होते हैं। 

स्विडन में आतंक: अकेले कुल्हाड़ी से 8 लोगों पर हमला, 3 साल पहले इस्लामी आतंकी ने लॉरी से रौंद डाला था 5 को

स्विडन के एक शहर में ‘आतंकी’ हमला हुआ है। वहाँ बीच सड़क पर एक अकेले व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से तमाम लोगों को निशाना बनाया। हमले में 8 लोग घायल हुए। आतंकी अब पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस की गोली लगने के बाद उसने हथियार छोड़े। पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर रही है। 

प्रधानमंत्री स्टिफन लोफेन ने इस हमले में ‘आंतकी’ हाथ होने का संदेह जताया है। उन्होंने कहा है कि अभी मामले पर जाँच चल रही है। पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई आतंकी उद्देश्य तो नहीं था।

विदेशी समाचार के अनुसार, हमलावर करीब 20 साल का है। उसने 13000 जनसंख्या वाले वेटलैंड में लोगों को अपना शिकार बनाया। ये शहर स्विडन के दूसरे सबसे बड़े शहर से 190 मील की दूरी पर है और राजधानी स्टॉकहाल्म से 210 मील दूर। 

पुलिस ने फिलहाल आरोपित से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। उसे अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस सवालों के जरिए जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर इस हमले के पीछे उसकी क्या मंशा थी। स्विडन की सुरक्षा एजेंसी SAPO इस केस पर काम कर रही है। हर ओर अलर्ट जारी किया गया है।

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने एकदम से चिल्लाने की आवाज सुनी और फिर एक आदमी को स्टोर में घुसते हुए देखा जो चिल्ला रहा था कि उसे मारा गया है। उसके कंधे से खून बह रहा था। लोगों ने उसे तौलिया दिया और प्रेशर देकर खून के बहाव को रोके रखा। इस बीच हमलावर पुलिस द्वारा गोली मार कर गिराया जा चुका था। 

पुलिस ने बताया है कि हमलावर जिंदा है। उसे जानलेवा चोट नहीं आई है, मगर उसने शुरुआत में कोई जानकारी नहीं दी। पुलिस अभी हमलावर की पहचान पता लगाने की कोशिश में जुटी है, लेकिन जो अब तक पता चला है वो यह कि वो व्यक्ति पहले भी छोटे-मोटे जुर्म करता रहा है।

बता दें कि इससे पहले भी स्विडन की कैपिटल स्टॉकहॉम में दो बार अटैक हो चुके हैं। एक साल 2010 में और दूसरा 2017 में। 2010 में, इराक में जन्मे एक जिहादी ने शहर के केंद्र में आत्मघाती बम हमला किया था, जिससे राहगीर घायल हुए थे। वहीं अप्रैल  2017 में, इस्लामिक स्टेट समूह के साथ सहानुभूति रखने वाले एक कट्टरपंथी ने चुराई हुई लॉरी का इस्तेमाल चलती सड़क पर पाँच लोगों को मारने के लिए किया था। हालाँकि बाद में उसकी गिरफ्तारी हो गई थी।

‘इस बार चुनाव बंगाल के भविष्य का, ऐसा करंट लगेगा कि कुर्सी से 2 फुट ऊपर उठ जाएँगी ममता’: नितिन गडकरी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 27 मार्च को होने जा रहा है। चुनाव से पहले मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए बीजेपी के बड़े नेता लगातार यहाँ रैली कर रहे हैं। बुधवार (मार्च 3, 2021) को बांकुरा जिले के जॉयपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा।

रैली में उपस्थित लोगों से गडकरी ने कहा, “चुनाव के दिन आप लोग सुबह उठिएगा…अपने भगवान को याद कीजिएगा… इसके बाद मतदान केंद्रों पर जाकर कमल का बटन दबाइए। ऐसा करंट लगेगा कि ममता जी अपनी कुर्सी से दो फुट ऊपर उठ जाएँगी।”

गडकरी ने कहा, “बस आप लोग यह करंट लगा दो। फिर देखिए पश्चिम बंगाल में विकास का बल्‍ब कैसे आपके घरों में जलता है। बंगाल में दो मई को परिवर्तन होगा। कमल जीतेगा। भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलेगा। तीन मई को हमारे नेता का चुनाव होगा। 4 मई को बीजेपी के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। अब इसे कोई नहीं रोक सकता।”

‘बंगाल के भविष्‍य के लिए है यह चुनाव’

गडकरी ने कहा कि इस बार का चुनाव बीजेपी, टीएमसी, कॉन्ग्रेस और सीपीएम के भविष्य के बारे में नहीं है और न ही यह मोदी जी, अमित शाह, नड्डा जी, राहुल गाँधी या ममता जी के भविष्य को लेकर है। यह बंगाल के लोगों के भविष्य के बारे में है। हम बंगाल की छवि को बदलना चाहते हैं और भारत को नंबर 1 महाशक्ति बनाना चाहते हैं।

‘मुखर्जी का जन्‍म यहाँ तो हम बाहरी कैसे’

बंगाल की मुख्‍यमंत्री पर प्रहार करते हुए गडकरी ने कहा, “ममता जी कहती हैं कि हम (बीजेपी) बाहरी हैं। बीजेपी का गठन जनसंघ की विचारधारा के आधार पर किया गया था, जिसके संस्थापक और हमारे प्रेरणास्‍त्रोत श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ था, फिर हम बाहरी कैसे हैं?”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव आठ चरणों में होंगे जबकि पिछली बार सात चरण में हुए थे। इस बार पहले चरण का मतदान 27 मार्च और अंतिम चरण के लिए वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। वोटों की गिनती 2 मई को होगी।