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‘अखंड भारत बनाने के लिए PM मोदी नहीं कटा रहे दाढ़ी-बाल’: ज्योतिषी के दावे से उड़े पाकिस्तानियों के होश

सोशल मीडिया पर मोदी को लेकर पाकिस्तान का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक पाकिस्तानी ज्योतिषी को भारत के प्रधानमंत्री के बारे अजीबोगरीब दावे और निष्कर्ष निकालते हुए देखा जा सकता है। बता दें, यह शो पिछले साल 31 दिसंबर को नियो टीवी नेटवर्क पर प्रसारित किया गया था, हालाँकि यह अब वायरल हो गया है।

ज्योतिषी ने दावा किया, “नवंबर 2019 के बाद से मोदी का बुरा समय चल रहा है। नरेंद्र मोदी के मुख्य ज्योतिषियों में से एक संस्थापक (भाजपा के) है उनका नाम मुरली मनोहर जोशी है। जो ज्योतिषी का इनका पूरा मंडप चलाता है।” जानकारी के लिए बता दें जोशी फिजिक्स के प्रोफेसर थे, कोई ज्योतिषी नहीं थे। हालाँकि, वह व्यक्ति यहीं नहीं रुका। उसने पीएम मोदी के बारे में अपनी मनगढंत कहानी को चालू रखा।

उसने आगे कहा, “भारतीय प्रधानमंत्री जानबूझकर अपनी दाढ़ी नहीं कटा रहे है, न बाल काट रहे है और वह ‘अखंड भारत’ के सपने को हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से ‘हवन’ कर रहे है। साथ ही मोदी के गुरु ने बताया है कि वह नंबर के 1 नेता हैं और कल्कि के अवतार हैं।” भारत की योजनाओं से परेशान, ज्योतिषी ने आशा व्यक्त की कि पीएम मोदी अखंड भारत ’बनाने की अपनी योजनाओं में सफल न हो।

वहीं पाकिस्तानी कमेंटेटर और पत्रकार नायला इनायत द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में यह कहते हुए सुना जा सकता है, ”आपने देखा होगा कि पीएम मोदी ने अपनी दाढ़ी और मूंछें बढ़ाई हैं। इसका उद्देश्य मराठा नायक (छत्रपति शिवाजी महाराज) से मिलता जुलता है। यह वही शासक है जिसने औरंगजेब के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मोदी उनकी नकल करने की कोशिश कर रहे हैं। वह अपनी छवि बनाने के लिए कोई न कोई हिमाकत कर सकता है और ये लगातार जारी रखने की प्रक्रिया है।”

गौरतलब है कि अगर हम इस मामले में भारत की बात करे तो वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और पत्रकार बरखा दत्त ने भी पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते दाढ़ी के बारे में लंबी चर्चा की थी।

शशि थरूर ने कहा कि दिन पर दिन पीएम मोदी की दाढ़ी-मूँछ बढ़ती ही जा रही है, वो ऐसा कर के दिखाना चाहते हैं कि वो नए भारत के ‘ऋषिराज’ हैं। पीएम एक राजर्षि की भूमिका में खुद को प्रदर्शित करना चाहते हैं, जो भगवा वस्त्र पहने हुए हैं। इसके बाद बरखा दत्त ने भी इसे ‘मॉडर्न पॉलिटिक्स’ बताया।

उन्होंने कहा कि आप क्या दिखाना चाहते हैं, क्या सन्देश देना चाहते हैं और कैसी छवि प्रदर्शित करना चाहते हैं- ये सब आजकल की आधुनिक राजनीति का अंग बन गए हैं। इसके बाद शशि थरूर को इस बात से समस्या हो गई कि पीएम मोदी संप्रदाय विशेष की टोपी क्यों नहीं पहनते? उन्होंने दावा किया कि वो हर धार्मिक आयोजन में उनके प्रतीक चिह्नों को अपनाते हैं लेकिन इस्लामी चिन्हों से दूर भागते हैं।

शशि थरूर ने कहा कि ‘ऋषिराज’ वाली छवि दिखाने के पीछे कारण ये है कि वो खुद को एक पवित्र व्यक्ति के रूप में दिखा सकें, जो एक राजा भी है। बकौल थरूर, पीएम मोदी चाहते हैं कि लोग उन्हें एक ऐसे ऋषि के रूप में जानें, जो एक योद्धा भी है। बरखा दत्त ने भी शशि थरूर की बातों का समर्थन किया।

इच्छाधारी आंदोलनजीवी योगेन्द्र यादव और NDTV ने फैलाई फ़ेक न्यूज़: अनजाने में की कृषि क़ानूनों की प्रशंसा

कृषि क़ानून का विरोध सिर्फ झूठ पर आधारित है, यह बात एक बार फिर से साबित हो गया है। ऐसा ही एक झूठा दावा करते हुए आंदोलनजीवी योगेन्द्र यादव ने कहा कि कृषि सुधार क़ानूनों से किसानों का नुकसान हुआ है।

किसान संगठन और विपक्षी दल के नेता लगातार दावा कर रहे थे कि कृषि सुधार क़ानूनों का एपीएमसी पर प्रभाव पड़ेगा। इस दावे को सही साबित करने के लिए इच्छाधारी आंदोलनकारी योगेन्द्र यादव ने एक दस्तावेज़ पेश किया, जिसमें मध्य प्रदेश स्थित तमाम मंडियों से इकट्ठा किए गए टैक्स की जानकारी थी। 

दस्तावेज़ों के मुताबिक प्रदेश की 7 मंडियों से लिया गया शुल्क पिछले साल जनवरी महीने की तुलना में इस साल जनवरी महीने से काफी कम था। योगेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जानना चाहते हैं कि कैसे नए कृषि क़ानून एपीएमसी को प्रभावित करते हैं।

जनवरी 2020 में कुल 88 करोड़ रुपए मंडी शुल्क इकट्ठा किया गया था लेकिन जनवरी 2021 में यह राशि सिर्फ 21 करोड़ रुपए थी। इन आँकड़ों का उल्लेख करते हुए इच्छाधारी आंदोलनकारी ने पूछा, “क्या इसे नकारात्मक प्रभाव माना जाएगा मोदी जी?” 

बेशक दस्तावेज़ में दिखाया गया था कि मध्य प्रदेश में मंडी से मिलने वाले शुल्क में 66.75 फ़ीसदी की गिरावट आई थी लेकिन इसका कृषि क़ानूनों से कोई लेना देना नहीं था। क्योंकि इन्होंने जिस तरह का दावा किया है कि नए कृषि क़ानूनों का खेती की उपज पर प्रभाव पड़ रहा है, ऐसा सम्भव नहीं है। वो इसलिए क्योंकि भले कृषि क़ानून पिछले साल सितंबर के दौरान संसद में पारित किए गए लेकिन इन्हें लागू किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।  

12 जनवरी 2021 को देश की सबसे बड़ी अदालत ने कृषि क़ानून के विरोध को देखते हुए इस पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था। अदालत ने इस मुद्दे पर हल निकालने के लिए एक समिति का गठन भी किया है। इसका ये मतलब हुआ कि अगर कृषि क़ानून लागू किए भी गए होते तो 12 जनवरी से ही उनके लागू किए जाने पर रोक लगा दी गई थी। इस जानकारी के आधार पर ये बात भी साफ़ हो जाती है कि मंडी के शुल्क में आई गिरावट की वजह कृषि सुधार क़ानून नहीं हो सकती है। 

इसकी एक और वजह ये हो सकती है कि राज्य सरकार ने पिछले साल मंडी शुल्क घटा दिया था। अक्टूबर 2020 में मध्य प्रदेश सरकार ने शुल्क 1.70 फ़ीसदी से 0.50 फ़ीसदी कर दिया था। यानी लगभग 70 फ़ीसदी की कटौती, जो कि इकट्ठा किए गए शुल्क से मेल खाता है, जिसमें जनवरी के दौरान 67 फ़ीसदी की गिरावट आई थी। व्यापारियों की हड़ताल के बाद प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया था, उनका कहना था कि शुल्क बहुत ज़्यादा है। 

मंडी शुल्क में कटौती, किसानों के लिए अच्छा या बुरा?

योगेन्द्र यादव द्वारा किया गया मंडी शुल्क का ज़िक्र दिखाता है कि उन्हें कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद तमाम लोगों ने ट्विटर पर उन्हें बताया कि अगर टैक्स कम इकट्ठा हुआ है इसका मतलब यह हुआ कि किसानों को कम टैक्स देना पड़ रहा है। अगर इन तथ्यों को किनारे रखते हुए हम यह मान भी लें कि इकट्ठा किए गए शुल्क में कमी कृषि क़ानूनों की वजह से आई है।

ऐसे में ‘किसान’ नेताओं को कृषि क़ानूनों की तारीफ़ करनी चाहिए न कि इसकी आलोचना। क्योंकि इसके मायने यह हुए कि किसान एपीएमसी से निजी ख़रीददारों की तरफ जा रहे हैं जहाँ कोई मंडी शुल्क ही नहीं है। एपीएमसी मंडियों का विकल्प अभी भी मौजूद है, लेकिन किसान मंडियों की जगह निजी ख़रीददारों और निजी बाज़ारों की तरफ जा रहे हैं। तो वह टैक्स का भुगतान नहीं करके अधिक कीमत पाने का विकल्प चुन रहे हैं। 

NDTV ने भी फैलाया झूठ 

इच्छाधारी आंदोलनजीवी योगेन्द्र यादव की तरह ही NDTV ने भी मध्य प्रदेश में मंडी शुल्क में आई कमी को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की और इसके लिए नए कृषि सुधार क़ानूनों को ज़िम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट में इस तथ्य को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है, सुप्रीम कोर्ट ने इन क़ानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगाई है।

एनडीटीवी ने रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र नहीं किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मंडी के रेट में कटौती की है, जबकि वो खुद इस बारे में पहले रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक़ किसान एपीएमसी मंडी जाने की जगह अन्य विक्रेताओं के पास जा रहे हैं। यानी किसानों को अन्य जगहों पर बेहतर दाम मिल रहे हैं इसलिए वह मंडियों की तरफ नहीं जा रहे हैं। फिर भी रिपोर्ट झूठे दावे पेश करने से पीछे नहीं हटती है और निराधार दावे करती है।       

हिंदू-मुसलमान पर शाह ने ओवैसी को घेरा, अधीर के तंज पर किया पलटवार: कहा- हमें 17 महीने हुए, आपने 70 साल क्या किया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कश्मीर में 70 सालों तक शासन करने वाली पार्टियों को घेरा तो एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। चर्चा के बाद विधेयक को पारित कर दिया गया। अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक का राज्य के दर्जे से कोई संबंध नहीं है और उपयुक्त समय पर जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा, ”यहाँ कहा गया कि अनुच्छेद 370 हटाने के वक्त जो वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ? मैं उसका जवाब जरूर दूँगा लेकिन पूछना चाहता हूँ कि अभी तो अनुच्छेद 370 को हटे हुए केवल 17 महीने हुए हैं, आपने 70 साल क्या किया उसका हिसाब लेकर आए हो क्या? तीन परिवार के लोग ही वहाँ शासन करें, इसलिए अनुच्छेद 370 पर जोर दिया गया। जिन्हें पीढ़ियों तक देश में शासन करने का मौका मिला, वे अपने गिरेबाँ में झाँककर देखें, क्या आप हमसे 17 महीने का हिसाब माँगने के लायक हैं या नहीं।”

गृह मंत्री ने कहा कि ओवैसी अफसरों का भी हिंदू-मुस्लिम में विभाजन करते हैं। क्या एक मुस्लिम अफसर हिंदू जनता की सेवा नहीं कर सकता या हिंदू अफसर मुस्लिम जनता की सेवा नहीं कर सकता? उन्होंने कहा कि अफसरों को हिन्दू-मुस्लिम में बाँटते हैं और खुद को सेक्युलर कहते हैं। गौरतलब है कि एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू कश्मीर में आबादी के हिसाब से मुस्लिम अफसरों की संख्या कम होने का आरोप लगाया था। 

मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार कम किए जाने को लेकर कॉन्ग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, ”ओवैसी जी ने अभी कहा कि 2G से 4G कनेक्टिविटी विदेशियों के दबाव में बहाल की है। ओवैसी जी को पता नहीं जिसका वह समर्थन करते थे वह यूपीए सरकार जा चुकी है। अफवाहें ना फैलाई जाएँ। हमने इंटरनेट पर रोक इसलिए लगाई थी कि हमें कुछ समय चाहिए था। अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए ऐसा करना पड़ा।”

शाह ने कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी को भी लपेटे में लेते हुए कहा, “आप हमें पूछ रहे हो? आपने तो मोबाइल ही बंद कर दिए थे और 20 साल तक बंद कर दिए थे। वाजपेयी जी ने आकर खोला था। कहाँ गए थे उस वक्‍त सारे अधिकारी? जो विदेशी दबाव का आरोप लगा रहे हैं उनसे हम पूछना चाहते हैं कि किसके दबाव में इतने सालों तक 370 तक लगाए रखा?”

गृह मंत्री अमित शाह की स्पीच के बाद कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन ने कहा, “सुबह वित्त मंत्री ने स्पीच दिया और दोपहर में हमारे गृह मंत्री ने स्पीच दिया। दोनों ही बजट स्पीच है। एक हिन्दुस्तान के बजट का और दूसरा जम्मू-कश्मीर का बजट। देखिए, जब सूरज उगता है तो उसके पहले थोड़ा अंधेरा रहता है। उस दौरान मुर्गी चिल्लाने लगती है क्योंकि उसको यह सोच रहता है कि उसके चिल्लाने से ही सवेरा होता है।”

इसके जवाब में अमित शाह ने कहा, “भाषण जब मंत्री का समाप्त होता है जो भी बिल को पायलट करते हैं। तब रिप्लाई पिन पॉइंटेड होना चाहिए। इसमें मुर्गी अंडा, मुर्गा नहीं आता है।”

इस दौरान गृह मंत्री ने कहा, ”मैं इस सदन को फिर से एक बार कहना चाहता हूँ कि कृपया जम्मू कश्मीर की स्थिति को समझें। राजनीति करने के लिए कोई ऐसा बयान न दें, जिससे जनता गुमराह हो। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख को राजनीति का हिस्सा हम न बनाएँ। बहुत सारी चीजें हैं राजनीति करने के लिए। मगर ये देश का संवेदनशील हिस्सा है, उनको कई घाव लगे हैं और उनको मरहम लगाना हमारा काम है।”

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा नहीं कर पाई। इसलिए वो विस्थापित हुए। वो अपने देश में हीं विस्थापित हो गए। मोदी सरकार कश्मीरी पंडितों की मदद कर रही है। नि: शुल्क राशन, 3 हजार नौकरियाँ दे दी गई हैं। 2022 तक 6000 लोगों कश्मीर घाटी में घर के साथ बसा देंगे। 44,000 कश्मीरी पंडितों के परिवारों को जिनके पास राहत कार्ड है, उन्हें 13,000 रुपए प्रति महीने सरकार देती है।

खालिस्तानी चैनल पर ब्रिटेन में 50 हजार पाउंड का जुर्माना: भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, लाल किला को आग में घिरा दिखाने का दंड

ब्रिटेन में मीडिया पर निगरानी रखने वाली संस्‍था ने खालिस्तान समर्थक चैनल -खालसा टीवी ल‍िमिटेड (KTV) पर 50 हजार पाउंड का जुर्माना लगाया है। चैनल को हिंसा का समर्थन करने वाले एक म्‍यूजिक वीडियो का प्रसारण करने और आतंकी संदर्भ दिखाने के लिए दोषी पाया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटिश मीडिया नियामक – ऑफ़िस ऑफ़ कम्युनिकेशंस (ऑफकॉम) ने शुक्रवार को प्रो खालिस्तानी चैनल के खिलाफ यह आदेश जारी किया, जो 2019 में शुरू हुए जाँच के परिणाम पर आधारित है।

अपने आदेश में ब्रिटिश मीडिया नियामक ने निर्देश दिया है कि केटीवी उसकी जाँच को लेकर ऑफकॉम का बयान प्रसारित करे और चेतावनी दी है कि वह म्यूजिक वीडियो या उसके नियमों के उल्लंघन में पाए जाने वाले चर्चा कार्यक्रम का प्रसारण फिर न करे।

ऑफकॉम संस्था ने अपने आदेश में कहा, “हमारे प्रसारण नियमों का पालन करने में विफल रहने के लिए Ofcom ने KTV खालसा टेलीविजन लिमिटेड पर 20000 पाउंड और 30000 पाउंड का वित्तीय दंड लगाया है। 20000 पाउंड का जुर्माना म्‍यूजिक वीडियो से संबंधित है। 30000 पाउंड का जुर्माना एक चर्चा कार्यक्रम से संबंधित है।”

ऑफकॉम ने बताया, वीडियो और शो ने भारत के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की वकालत की और सिख अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने वाले हिंसक कार्यों का महिमामंडन किया। उन्होंने सिख धर्म की आलोचना करने वाले के खिलाफ हिंसा करने तथा एक आतंकी समूह को वैध ठहराने को प्रोत्‍साहित किया। म्यूजिक वीडियो में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तस्वीरें भी शामिल थी।

बता दें वीडियो में इंदिरा गाँधी की तस्‍वीर में उनके मुँह से खून गिर रहा है। इस तस्‍वीर में कैप्‍शन लिखा, “दुष्‍ट महिला तुमने निर्दोषों का खून प‍िया।” इस वीडियो में गाना बज रहा था, ‘योद्धा तुम्‍हारे साम्राज्‍य का नाश कर देंगे।’ इसमें लाल किले को जलता हुआ दिखाया गया था।

KTV टेलीविज़न चैनल को यूनाइटेड किंगडम में सिख समुदाय द्वारा खालसा टेलीविज़न लिमिटेड के लाइसेंस के तहत बड़े पैमाने पर प्रसारित किया जाता है।

ऑफकॉम ने KTV के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद एक जाँच शुरू की थी। जिसमें उनके संगीत वीडियो और चर्चा कार्यक्रम ” के जरिए अपराध और हिंसा को प्रोत्साहित या उकसाने की भावना थी।

खालसा टीवी द्वारा जुलाई 2018 में म्‍यूजिक वीडियो ‘बग्‍गा एंड शेरा’ के गाने को प्रसारित किया गया था। नियामक ने कहा कि वीडियो में संदर्भित व्यक्तियों में शामिल बग्गा और शेरा, खालिस्तानी आतंकवादी जगतार सिंह जौहल और KLF के पूर्व नेता हैं।

वीडियो में, दो करैक्टर ब्रिटेन में हत्याओं को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं, जोकि उन वास्तविक लोगों की छवियों के साथ जुड़े हुए हैं जिन्हें राजनीतिक कारणों के चलते हत्या का दोषी या आरोपित ठहराया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले एनआईए ने भारत में लक्षित हत्याओं को अंजाम देने के प्रयासों के लिए सिख कार्यकर्ताओं रमनदीप सिंह बग्गा और हरदीप सिंह शेरा सहित केएलएफ से जुड़े कई व्यक्तियों को दोषी ठहराया था।

ऑफकॉम ने अपनी जाँच के बाद पाया था कि म्‍यूजिक वीडियो में अप्रत्यक्ष तौर पर ब्रिटेन में रहने वाले सिखों को हिंसा के लिए कहा जा रहा था, यहाँ तक कि हत्या करने के लिए उकसाया गया था।

वहीं, एक चर्चा कार्यक्रम, जिसे 30 मार्च, 2019 को प्रसारित किया गया था, उसका नाम पंथक मसले था, जिसमें Ofcom ने पाया कि उसमें भी खुले तौर पर ना सही, लेकिन उकसाया गया था।

वहीं खालिस्तान समर्थक नेटवर्क ने 30 मार्च, 2019 को एक लाइव शो – ‘पंथक मसले’ नाम से एक चर्चा कार्यक्रम को प्रसारित किया था। दरअसल, इस कार्यक्रम ने कई मेहमानों को आपत्तिजनक विचारों को बढ़ावा देने के लिए एक मंच की पेशकश की थी, जिसमें खुले तौर पर ना सही, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को हिंसा के लिए उकसाया गया था।

शो के दौरान पैनलिस्ट में से एक बलदेव सिंह ने बब्बर खालसा का जिक्र करते हुए कहा, “हमारा किसी के साथ कोई तर्क नहीं है… बब्बर खालसा के साथ हम खाते हैं और उनके साथ पीते हैं, हम सभी के उन सबके साथ अच्छे संबंध हैं।”

उल्लेखनीय है कि बब्बर खालसा एक आतंकवादी संगठन है जो हिंसक साधनों के माध्यम से भारत में एक स्वतंत्र सिख राज्य बनाने का इरादा रखता है। जिसकी वजह से देश में कई आतंकवादी हमले हुए थे और कई नागरिकों ने अपनी जान गँवा दी थी।

दो बेटों की मौत के बाद पोती को पढ़ाने के लिए दादा ने बेच दिया घर, ऑटो रिक्शा बनी लाइफ-लाइन: मदद को आगे आए लोग

मुंबई में एक ऑटो ड्राइवर की दिल को छू जाने वाली कहानी सामने आई है। एक ऑटो ड्राइवर ने अपनी पोती को पढ़ाने के लिए अपना घर तक बेच दिया। दो बेटे की मौत के बाद उसके बच्चों और पत्नी की जिम्मेदारी सँभाल रहे बुजुर्ग देसराज जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ ने अपने फेसबुक वॉल पर देसराज की कहानी को साझा किया है और बताया कि उन्हें अपनी पोती को पढ़ाने के लिए क्या-क्या संघर्ष करने पड़े हैं। 

ऑटो ड्राइवर देसराज ने ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ को दिए इंटरव्यू में बताया, “6 साल पहले मेरा बड़ा बेटा घर से गायब हो गया। वह हर दिन जैसे काम के लिए जाता था, वैसे ही उस दिन भी गया, मगर कभी लौटा नहीं है। एक सप्ताह बाद लोगों को उसकी डेडबॉडी ऑटो में मिली। उसकी मौत के साथ कुछ हद तक मैं भी मर ही गया था, मगर जिम्मेदारियों की भार की वजह से मुझे शोक का भी समय नहीं मिला और अगले दिन ही मैं ऑटो चलाने सड़क पर निकल गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मगर दो साल बाद एक और दुख का पहाड़ टूटा और मैंने अपना दूसरा बेटा भी खो दिया। जब मैं ऑटो चला रहा था, तभी एक कॉल आई- ‘आपके बेटे का शव प्लेटफॉर्म पर मिला है, सुसाइड कर लिया है उसने।’ दो बेटों की चिताओं को आग दिया है मैंने, इससे बुरी बात एक बाप के लिए और क्या हो सकती है? अब मेरे पास बहुओं और चार बच्चों की जिम्मेदारी है, जिसकी वजह से मैं अभी भी काम कर रहा हूँ। दाह संस्कार के बाद मेरी पोती, जो उस वक्त 9वीं कक्षा में थी, मुझसे पूछा- दादाजी, क्या मैं स्कूल छोड़ दूँगी?’ मैंने अपनी सारी हिम्मत जुटाई और उसे आश्वस्त किया, कभी नहीं! आप जितना चाहें पढ़ाई करें।”

पढ़ाई के लिए और पैसे कमाने के लिए उन्होंने देर तक काम करना शुरू कर दिया। सुबह 6 बजे घर से निकलने वाले देसराज आधी रात के बाद ही घर वापस आ पाते हैं। महीने के 10 हजार रुपए कमाने वाले देसराज 6 हजार रुपए अपने पोते-पोतियों के स्कूल पर खर्च करते हैं और 4 हजार में 7 लोगों के परिवार का गुजारा करते हैं।

दिल्ली के स्कूल में दाखिला कराने के लिए बेच दिया घर

उन्होंने कहा, “ज्यादातर दिन हमारे पास खाने के लिए मुश्किल से ही कुछ होता है। एक बार जब मेरी पत्नी बीमार हो गई, तो मुझे उसकी दवाएँ खरीदने के लिए घर-घर जाकर भीख माँगनी पड़ी। लेकिन पिछले साल जब मेरी पोती ने मुझे बताया कि उसकी 12वीं बोर्ड में 80% अंक आए हैं, तो मैं उस दिन खुशी से आसमान में उड़ने लगा, पूरे दिन मैंने अपने सभी ग्राहकों को मुफ्त सवारी दी।”

इसके बाद जब उनकी पोती ने कहा कि वह बी.एड कोर्स के लिए दिल्ली जाना चाहती है। तो देसराज के सामने एक बार फिर से बड़ी समस्या खड़ी हो गई। देसराज को पता था कि वह इतने पैसे नहीं जुटा पाएँगे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने घर को बेच दिया और पोती को दिल्ली के स्कूल में दाखिला करवा दिया। इसके बाद देसराज ने अपनी पत्नी, पुत्रवधू और अन्य पोते को उनके गाँव में एक रिश्तेदार के घर भेज दिया। खुद मुंबई में अपना ऑटो चलाते हैं। अब ये ऑटो ही उनका घर है। 

मदद के लिए लोग आए आगे

अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए देसराज ने कहा, “अब एक साल हो गया है और ईमानदारी से कहूँ तो जीवन खराब नहीं है। मैं अपने ऑटो में खाता हूँ और सोता हूँ और दिन के दौरान मैं अपने यात्रियों को बैठाता हूँ। बस बैठे-बैठे कभी पैर में दर्द हो जाता है। मगर मेरी पोती मुझे फोन करती है और मुझे बताती है कि वह अपनी कक्षा में प्रथम आई है तो और मेरा सारा दर्द मिट जाता है। मैं उसके शिक्षक बनने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ, ताकि मैं उसे गले लगा सकूँ और कह सकूँ, ‘तुमने मुझे गौरवान्वित किया है।’ जिस दिन मेरी पोती टीचर बनेगी, मैं तो पूरे हफ्ते सबको फ्री राइड दूँगा। वह हमारे परिवार में पहली ग्रेजुएट बनने जा रही है।” देसराज की ये दिल को छू जाने वाली सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग उनकी मदद के लिए आगे आए हैं।

हॉस्पिटल में ताजुद्दीन ने गला दबाया, जाहिद ने चाकू और धँसा दी: रिंकू शर्मा के भाई और माँ की जुबानी निर्मम हत्या की कहानी

दिल्ली के मंगोलपुरी में 10 फरवरी 2021 की रात बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा पर घर में घुसकर हमला किया गया। अगले दिन अस्पताल में उनकी मौत हो गई। ऑपइंडिया ने इस मामले में रिंकू शर्मा के परिवार से विस्तृत बात की, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। रिंकू के भाई मन्नू ने ऑपइंडिया को बताया कि पड़ोस में रहने वाले नसरूदीन, ज़ाहिद, ताजुद्दीन के परिवार ने अपने दोस्तों इस्लाम, मेहताब और अन्य के साथ मिलकर रिंकू शर्मा की हत्या कर दी।

रिंकू शर्मा के भाई मन्नू के मुताबिक राम मंदिर शिलान्यास के बाद से ही पड़ोस में रहने वाले नसरूदीन के परिवार से उनके भाई की अक्सर कहासुनी हुआ करती थी। इसको लेकर दोनों परिवारों के बीच काफी समय से मतभेद था। पहले भी कई बार ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने, हनुमान चालीसा का पाठ कराने, गली में दीप जलाने को लेकर मुस्लिम परिवार ने गाली-गलौज और मारपीट की थी।

राम मंदिर शिलान्यास के बाद रिंकू शर्मा की नसीरुद्दीन, ताजुद्दीन, जाहिद के परिवार से कहासुनी हो गई थी। करीब 6 महीने पहले हुई इस घटना के दौरान आरोपितों ने रिंकू शर्मा को देख लेने की धमकी दी थी। लेकिन बाद में लाली के परिवार (मुस्लिम परिवार) ने रिंकू की माँ राधा देवी से माफ़ी माँग ली थी। इस वजह से उस समय उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की।

मन्नू ने ऑपइंडिया को बताया कि हर मंगलवार हनुमान चालीसा पढ़ने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने और भैया के ‘जय श्री राम’ कहने के कारण उन्होंने हत्या की ये साजिश रची। मन्नू शर्मा ने बताया कि हमलावर पाँचों भाई के साथ उनकी बीवी और परिवार के अन्य सदस्य भी थे। उनकी संख्या करीब 30-40 थी। मन्नू ने बताया कि रिंकू को जब वे लोग अस्पताल ले जा रहे थे तब भी इन लोगों ने उन्हें रास्ते में रोकने की कोशिश की थी। ज़ाहिद, ताजुद्दीन सहित मुस्लिम परिवार के कुछ लोग पहले ही संजय गाँधी हॉस्पिटल पहुँच गए थे। वहाँ उन्होंने पहले इलाज में बाधा पहुँचाने की कोशिश की। फिर सबूत मिटाने के लिए वे पीठ में धँसी चाकू ले जाना चाहते थे। मन्नू के अनुसार;

जब रिंकू को ICU ले जाया जा रहा था तो उसके पीठ में धँसी चाकू को निकाल कर ले जाने की कोशिश हुई। ज़ाहिद ने चाकू को पकड़ कर जोर से खींचा। नहीं निकली तो उसे घूमा दिया, जिससे वह रिंकू शर्मा की पीठ में और गहरे धँस गई।

इस बीच दूसरे आरोपित ताजुद्दीन ने रिंकू शर्मा की माँ का गला दबाने की कोशिश की। मन्नू ने बताया कि ताजुद्दीन ने माँ का गिरेबान कस के पकड़ लिया था। भैया (रिंकू) के दोस्तों ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया। ताजुद्दीन और जाहिद ने रिंकू शर्मा के इलाज के लिए गए उनके दोस्तों के साथ भी हाथापाई और गाली-गलौज की।

ऑपइंडिया की रिंकू के भाई मन्नू के साथ विस्तृत बातचीत का हिस्सा :

रिंकू शर्मा की माँ ने बताया कि हमलावरों ने मन्नू को भी बहुत मारा था। सर फूल गया है। गर्दन पर चोट लगी है। मन्नू ने कहा कि मेरे भाई के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा हो उन्हें जल्द से जल्द फाँसी की सजा सुनाई जाएँ। रिंकू की बेहाल माँ का बस बार-बार इतना ही कहना था कि जैसे हम आज रो रहे है वैसे वो भी रोए। जल्दी से जल्दी कार्रवाई हो।

हमने जब रिंकू की हत्या की वजह को लेकर मन्नू से सवाल किया तो उन्होंने कहा, “ये हमेशा से हमारा विरोध करते थे। हम हर मंगलवार हनुमान चालीसा का आयोजन और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करते थे। हमने 5 अगस्त 2020 में राम जन्मभूमि के भूमि पूजन के दौरान एक यात्रा भी निकाली थी और ये उसका भी विरोध कर रहे थे। तभी से ये पीछे पड़े थे भाई के, कहते थे जान से मार देंगे।” बीच में बेसुध माँ भी बोल पड़ीं कि माफी भी माँग ली थी इन लोगों ने। फिर हमने गौर नहीं किया। बोले रिंकू हमारे बच्चे की तरह हैं।

भाई मन्नू ने हत्यारों के बारें में बताते हुए कहा, “ये पाँचों लोग अपने बीवी बच्चों के साथ यहीं रहते है। ये सब ऐसे ही है। लगभग 30-35 लोग घर में घुस गए थे उस दिन, सभी मुस्लिम। कोई पड़ोसी बचाने नहीं आया सिर्फ हम ही बचा रहे थे। भैया के बस 1-2 दोस्त आए थे बचाने। हॉस्पिटल में भी चाकू निकालने की कोशिश की। फिर नहीं निकला तो घुमा दिया जाहिद अली ने। ताजुद्दीन ने मम्मी का गला पकड़ा।” मन्नू ने हत्यारों के परिवार के सदस्यों के नाम बताते हुए कुछ नाम गिनाते हुए कहा, “इनका नाम है नसरुद्दीन, साबूउद्दीन, ताजुद्दीन, सलामुद्दीन, शकरुद्दीन… इनके बच्चे भी इसमें शामिल हैं।”

रिंकू के भाई ने डर के बारे में बताते हुए कहा, “हत्या के बाद इनके घर से कल रात फ़ोन आया था मेरे पास। लेकिन मैंने उठाया नहीं। अभी पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन बाकी फरार हैं।”

आरोपित नसीरुद्दीन , ताजुद्दीन , ज़ाहिद का घर

बर्थडे पार्टी में झगड़े की थ्योरी पर मन्नू ने क्या कहा :

मीडिया में रिंकू शर्मा की हत्या की मुख्य वजह बर्थडे पार्टी में हुए झगड़े को बताया जा रहा है। इस संबंध में मन्नू ने ऑपइंडिया को बताया, “जैसा कि मीडिया में बताया जा रहा कि बिज़नेस या बर्थडे पार्टी को लेकर हत्या की गई, यह सब झूठ है। न हमारा कोई बिज़नेस है, न हम कोई बिज़नेस करते है। हमारे बड़े भाई रिंकू शर्मा हॉस्पिटल में एक लैब टेक्नीशियन थे। जैसा कि न्यूज़ चैनल वाले बता रहे बिज़नेस और बर्थडे पार्टी में हुए झगड़े की वजह से हत्या की गई है, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। सब झूठ बताया जा रहा है।”

सुरक्षा, कार्रवाई और पुलिस के बयान पर मन्नू ने जवाब दिया, “हमारी बात हो गई है SHO जी से। पुलिस कोऑपरेट कर रही है। न्यूज़ चैनलों से हाथ जोड़ कर रिक्वेस्ट है, कृपया झूठी बातें न दिखाएँ। झूठी अफवाए न फैलाएँ। जब बर्थडे पार्टी में झगड़े जैसा कोई मामला है ही नहीं, तो क्यों दिखाया जा रहा है।”

ऑपइंडिया ने संजय गाँधी हॉस्पिटल में हुई घटना पर सवाल किया तो मन्नू ने कहा, “हत्या में शामिल लोग पहले से ही हॉस्पिटल में बैठे हुए थे। जब इमरजेंसी के अंदर भाई को लेकर गए, तो जाहिद अली और ताजुद्दीन वहाँ पहुँचे हुए थे। जाहिद ने चाकू निकालने की कोशिश की। उसने सोचा चाकू निकाल कर भाग जाऊँगा। लेकिन चाकू निकला नहीं। फिर पीठ में चाकू और घुमा कर वह भाग गया।” उसने कहा;

“ताजुद्दीन ने भैया के जो दोस्त बीच-बचाव में आए उन्हें चाटें भी मारे। मम्मी के भी गिरेबान पर हाथ लगाया। ताजुद्दीन, नसरुद्दीन का भाई है जो गिरफ्तार है अभी। ताजुद्दीन पुलिस का मुखबिर भी है। 15000 में काम करता है, अब करोड़ों का मालिक है। गलत काम करता है, सट्टा चलाता है। सारे गलत काम करता है।”

मन्नू शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया, “नसीरुद्दीन, ज़ाहिद, ताजुद्दीन सहित हमलावरों के निशाने पर मेरा पूरा परिवार था। उन्होंने मुझे भी मारा, घर में मम्मी-पापा को भी मारने की कोशिश हुई, जिन्हें मैंने अंदर के कमरे में भेज दिया।”

रिंकू की माँ ने बताया कि हमलावर उनके पूरे परिवार को जिंदा जलाने की फिराक में थे। उन्होंने कहा कि किचन में लगा नया गैस सिलिंडर निकाल लिया था और उसमें आग लगाने की कोशिश की थी, ताकि पूरे घर को जलाया जा सके और आग में झुलस कर पूरे परिवार की मौत हो जाए। रिंकू की माँ ने अपने बेटों के साथ मिल कर किसी तरह हत्यारों से सिलिंडर छीन लिया। रिंकू के भाई मन्नू ने भी ऑपइंडिया को यही बात बताई कि हत्यारों ने उनके घर पर पूरे परिवार को मार डालने के इरादे और साजिश के साथ ही धावा बोला था। उनका मकसद ही था कि उनकी करतूतों का कोई सबूत या गवाह न बचे। इस बीच, शुरुआत में कम्युनल एंगल को नकार रही दिल्ली पुलिस ने मामले की जॉंच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।

पालघर: नौसैनिक सूरज दुबे हत्याकांड में कौन है ये इरफ़ान? जिसका पता लगाने के लिए परिजनों ने की पुलिस से माँग

झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के पूर्वडीहा निवासी नौसेना अधिकारी 27 वर्षीय सूरज दुबे के चेन्नई एयरपोर्ट से अपहरण और फिर महाराष्ट्र के पालघर में जला देने की घटना के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। घटना में किसी इरफान नाम के शख्स के शामिल होने की बात सामने आ रही है। मृतक सूरज के परिजनों ने जाँचकर्ताओं से माँग की है कि वो इस बात का पता लगाएँ कि क्या इस घटना में कोई इरफान नाम का शख्स शामिल था।

सूरज दुबे 30 जनवरी की रात से लापता थे। उनके पिता मिथिलेश दुबे ने 1 फरवरी को झारखंड के चैनपुर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी दर्ज कराई। मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय पुलिस सूरज के दोनों फोन की निगरानी कर रही थी। उसमें से एक फोन में नया सिम कार्ड डालने के बाद सूरज के पिता ने फोन किया। मिथिलेश दुबे ने कहा, “हमने नंबर डायल किया और फोन उठाने वाले ने पूछा, ‘कौन, कौन?’ तो हमने पूछा, ‘तुम कौन?’ और उस आदमी ने जवाब दिया, ‘इरफान’। इसके बाद फोन कट हो गया और सेलफोन को ऑफ कर दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “यह मेरे बेटे की आवाज थी। वह हमें यह बताने की कोशिश कर रहा होगा कि इरफान ने उसे बंदी बना लिया है। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि यह इरफान कौन है।”

दुबे के चचेरे भाई विशाल ने मिड-डे को बताया कि सूरज के व्हाट्सएप नंबर पर लास्ट सीन उपलब्ध नहीं है।। विशाल का कहना है कि या तो हत्यारों ने उनका व्हाट्सएप डिलीट कर दिया है या फिर सेटिंग्स बदल दी है।

वहाँ के स्थानीय संजय इबाद ने बताया कि उनके चाचा साधु इबाद ने ‘बचाओ बचाओ’ की आवाज सुनी थी। सूरज ने पानी माँगा था लेकिन वो लोग इतने डर गए थे कि उन्होंने ग्राम पंचायत, पुलिस और अस्पताल को सूचित किया। इबाद ने कहा कि उन्होंने यह भी बताया कि उनके हाथ बाँध दिए गए थे और आँखों को भी कवर कर दिया गया था। 

ऋण लेने की बात पर मिथिलेश ने कहा, “उसने 8 लाख रुपए का होम लोन लिया था, जिसे वह चुका रहा था। मई में उसकी शादी होने वाली थी। उसने मुझे शादी की व्यवस्था के लिए कुछ पैसे दिए थे।” 

गौरतलब है कि 27 साल के सूरज कुमार छुट्टी बिता कर 30 जनवरी को राँची से लौट रहे थे। उन्हें कोयंबटूर के पास INS अग्रणी पर लौटना था। वो फ्लाइट से चेन्नई एयरपोर्ट उतरे और बाहर निकले। रात के लगभग 9 बज चुके थे। यहीं पर 3 लोगों ने उन्हें किडनैप कर लिया

किडनैप करने वालों ने उन्हें रिवॉल्वर दिखा कर कीमती मोबाइल फोन भी छीन लिया था। 3 दिनों तक किडनैपरों ने सूरज कुमार को चेन्नै में ही रखा, सफेद रंग की SUV में घुमाते रहे। इस दौरान 10 लाख रुपए की फिरौती भी उनके परिवार से माँगी गई।

पैसा नहीं मिलने पर और अपने प्लान में कामयाब नहीं होने पर अपराधी सूरज कुमार को पालघर ले गए। शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को पालघर के डहाणू तलासरी के वेवजी इलाके में स्थित जंगल में उन्होंने हाथ-पैर बाँध कर सूरज कुमार के शरीर पर पेट्रोल डाली और आग लगा दी।

‘किसान आंदोलन’ पर अपने पुराने रुख से पलटे कनाडा के PM ट्रूडो, MEA ने बताया- भारत सरकार के प्रयासों की तारीफ की

कुछ ही दिनों पहले किसान आंदोलन को लेकर भारत में आलोचना झेलने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सुर भी बदल गए हैं। सिर्फ एक कॉल पर कनाडा को कोविड-वैक्सीन देने को राजी हो जाने के बाद जस्टिन ट्रूडो  ने किसान आंदोलन पर ही अब मोदी सरकार के रुख को सराहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अनुराग श्रीवास्‍तव ने बताया कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने किसान आंदोलन पर भारत सरकार के बातचीत के प्रयासों की सराहना की है।

साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि ट्रूडो सरकार कनाडा में मौजूद भारतीय कूटनीतिज्ञों और परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

भारत में किसानों के प्रदर्शन को लेकर रुख बदलने के कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चर्चा में हैं। दूसरी तरफ कनाडा ने बताया है कि जस्टिन ट्रूडो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर वार्ता की और इस दौरान किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे को उठाया गया। उधर, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में किसानों के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है। इस पूरे मामले को लेकर राजनयिक विवाद खड़ा हो सकता है।

इससे पहले भी जब ट्रूडो ने किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे को उठाया था तब भारत ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ताजा बातचीत के बारे में भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अपने कनाडाई समकक्ष जस्टिन ट्रूडो को आश्वस्त किया कि भारत कनाडा के टीकाकरण प्रयासों में पूरा सहयोग करेगा। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ‘मैंने ट्रूडो को आश्वासन दिया है कि भारत कनाडा द्वारा माँगे गए कोविड-19 वैक्सीन्स की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को आश्वस्त करते हुए कहा था, “भारत ने जैसे कई अन्य देशों के लिए किया, ठीक उसी तरह कनाडा के टीकाकरण प्रयासों को सहयोग देने में अपना योगदान देगा।’ बयान के अनुसार, ट्रूडो ने इस अवसर पर कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत की बड़ी औषधीय क्षमता का महत्वपूर्ण योगदान होगा। भारत की इस क्षमता को विश्व के साथ साझा करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

राम मंदिर के लिए ट्रस्ट के खाते में आए ₹1511 करोड़, 27 फरवरी तक चलेगा देशव्यापी अभियान

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने को लेकर देशव्यापी अभियान चल रहा। निधि समर्पण अभियान के तहत कार्यकर्ता घर घर जाकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में अब तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा हो चुके हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को इस बात की जानकारी दी।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया, “पूरा देश अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग कर रहा है। चंदा इकट्ठा करने के अभियान के दौरान हमारा लक्ष्य 4 लाख गाँवों और 11 करोड़ परिवारों तक पहुँचने का है। हमने इस अभियान की शुरुआत 15 जनवरी से की थी और ये 27 फरवरी तक चलने वाला है। इस अभियान के तहत मैं अभी सूरत में हूँ। लोग इस अभियान के तहत ट्रस्ट को दान कर रहे हैं। पूरे 492 सालों के बाद लोगों को अपने धर्म के लिए कुछ बेहतर करने का मौक़ा मिला है।” 

उन्होंने बताया कि इस देशव्यापी अभियान के तहत अभी तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा किए जा चुके हैं। श्रीराम मंदिर के लिए देश के कोने-कोने से हर वर्ग के लोग चंदा देने के लिए आगे आ रहे हैं। हाल ही में झारखंड में भीख माँग कर गुजर-बसर करने वालों ने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए थे।  

इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। जिसमें एक वृद्ध और गरीब महिला राम मंदिर के लिए दान करने का निवेदन कर रही थी। वीडियो में कार्यकर्ता वृद्ध महिला से कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह सिर्फ 10 रुपए ही दान करें। इसके बावजूद गरीब नज़र आने वाली वृद्ध महिला अनुरोध करती है कि वह 20 रुपए ही दान करेगी।

कार्यकर्ता महिला से कहते हैं कि उनके पास सिर्फ 10 रुपए का कूपन है, इस उम्मीद में कि शायद वृद्ध महिला उनकी बात मान जाएगी और 10 रुपए अपने पास रख लेगी। लेकिन वृद्ध महिला अपनी बात पर टिकी रहती हैं और दो कूपन की माँग करती हैं। वृद्ध महिला बताती हैं कि उनके बड़े बेटे का निधन हो चुका है, इसलिए एक कूपन उनके बेटे के नाम का रखा जाए और दूसरा खुद उनके नाम का।

‘गाना’ ने तंजिला को नौकरी से निकाला, रिंकू शर्मा की हत्या के बाद किया था विवादित ट्वीट

म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ ने तंजिला अनीस को नौकरी से निकाल दिया है। उसने बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को असंवेदनशील ट्वीट किया था। इसके जरिए उसने अप्रत्यक्ष तौर पर हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की थी।

‘गाना’ ने सोशल मीडिया में जारी एक बयान में कहा है, “गाना देश के सभी धर्मों और समुदायों को सम्मान करता है। हाल ही में ज्वाइन करने वाली एक कर्मचारी के सोशल मीडिया पोस्ट के आलोक में हमारा कहना है कि यह हमारे मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अब वह कंपनी की कर्मचारी नहीं है।”

इससे पहले तंजिला के खिलाफ चंडीगढ़ में आपराधिक शिकायत की गई थी। साथ ही चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने उसे निकाल बाहर करने की माँग ‘Gaana’ से की थी। गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखकर उनकी कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा था कि भारत विभिन्न धर्मों का पोषण करने वाला देश है, जहाँ कई भाषाएँ और संस्कृतियों के लोग साथ में शांति से निवास करते हैं। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि समय-समय पर कई लोगों ने इस सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने की कोशिश की है और इसमें ताज़ा नाम तंज़िला अनीस का है। उन्होंने कहा कि ‘टाइम्स इंटरनेट’ समूह की ‘Gaana’ की इस पदाधिकारी ने अप्रिय, निंदात्मक और आपत्तिजनक ट्वीट्स किए हैं।

रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर पर तंजिला अनीस पहले ही भी हिंदू भावनाओं को आहत करने वाले पोस्ट कर चुकी है। उसने 2012 में भगवान शिव के लिए आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया था। 2015 में तंजिला ने एक ट्वीट में कहा था कि किसी को भी इस बात के लिए नाराज होना चाहिए शेफ ज्यादातर पुरुष क्यों होते? ज्यादातर पोर्नस्टार महिलाएँ क्यों होती हैं? भारत में अधिक हिंदू क्यों हैं?