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राइट टू प्रोटेस्ट का मतलब यह नहीं कि कभी भी, कहीं भी बैठ जाएँ: SC ने शाहीन बाग प्रदर्शन पर पुनर्विचार याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ धरने को लेकर अपने पुराने फैसले पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध का अधिकार ‘कभी भी’ और ‘हर जगह’ नहीं हो सकता। 12 ऐक्टिविस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट से अक्टूबर 2020 के उस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी, जिसमें शीर्ष अदालत ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग के प्रदर्शनों को अवैध ठहराया था।

अदालत ने कहा कि धरना-प्रदर्शन लोग अपनी मर्जी से और किसी भी जगह नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि विरोध जताने के लिए धरना प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में दिए गए फैसले को बरकरार रखा। 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में फैसला सुनाया था कि धरना-प्रदर्शन के लिए जगह चिन्हित होनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति या समूह इससे बाहर धरना-प्रदर्शन करता है, तो नियम के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को हटाने का अधिकार पुलिस के पास है। धरना प्रदर्शन से आम लोगों की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। धरने के लिए सार्वजनिक स्थान पर कब्जा नहीं किया जा सकता।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में शाहीन बाग के प्रदर्शन को गैर कानूनी बताया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने कनिज़ फातिमा सहित 12 ऐक्टिविस्ट्स की ओर से दायर याचिका में मामले की सुनवाई खुली अदालत में करने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।

जस्टिस एसके कॉल, अनिरुद्ध बोस और कृष्ण मुरारी की तीन जजों वाली पीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा, “विरोध करने का अधिकार हर जगह और किसी भी वक्त नहीं हो सकता। कुछ विरोध-प्रदर्शन कभी भी शुरू हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले धरना प्रदर्शनों के लिए किसी ऐसे सार्वजनिक स्थान पर कब्जा नहीं किया जा सकता, जिससे दूसरों के अधिकार प्रभावित हों।”

कोर्ट ने टिप्पणी की कि संविधान विरोध-प्रदर्शन और असंतोष व्यक्त करने के अधिकार देती है, लेकिन कुछ कर्तव्यों की बाध्यता के साथ। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हमने सिविल अपील में पुनर्विचार याचिका और रिकॉर्ड पर विचार किया है। हमने उसमें कोई गलती नहीं पाई है।

गौरतलब है कि साल 2019 में दिल्ली का शाहीन बाग सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में सामने आया था। कोरोना वायरस महामारी के चलते बीते साल मार्च में लगाए गए लॉकडाउन के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शन खत्म हो गया था। प्रदर्शन में शामिल लोग और आलोचक इस कानून को ‘मुस्लिम विरोधी’ बता रहे थे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ करीब 100 दिनों तक लोग सड़क रोक कर बैठे थे। दिल्ली को नोएडा और फरीदाबाद से जोड़ने वाले एक अहम रास्ते को रोक दिए जाने से रोज़ाना लाखों लोगों को परेशानी हो रही थी। इतना ही नहीं दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की साजिश भी शाहीन बाग में ही रची गई थी।

एक्सक्लूसिव: खतरे में कॉन्ग्रेस के हजारों समर्थकों की निजी जानकारी, वॉलंटियर्स बहाली के लिए बनाई गई वेबसाइट में बड़े सिक्योरिटी लूपहोल्स

जमीन पर विलुप्त होती कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने सोशल मीडिया कैम्पेन को मजबूत करने के लिए 5 लाख ‘सोशल मीडिया वॉरियर्स’ की भर्ती की घोषणा की थी। अब खुलासा हुआ है कि कॉन्ग्रेस के इस ऑनलाइन अभियान में कई सिक्योरिटी लूपहोल्स हैं। पार्टी के आईटी सेल ने इस मामले में सीधे-सादे आईटी सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल करने तक की जहमत नहीं उठाई, जिससे वेबसाइट से हजारों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के डेटा लीक होने की आशंका है।

अपनी ऑनलाइन आर्मी के लिए आवेदनों को स्वीकृत करने के लिए पार्टी ने एक नई वेबसाइट बनाई है। अब ये वेबसाइट एक तरह से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की एक सार्वजनिक डेटाबेस बन कर रह गई है, जहाँ उनमें से कइयों के फोन नंबर, पता, ईमेल, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और अन्य व्यक्तिगत सूचनाओं के विवरण पड़े हुए हैं। आशंका है कि ये ऑनलाइन अभियान अब कहीं एक साइबर स्कैम में न बदल जाए।

8 फ़रवरी 2021 को राहुल गाँधी के एक वीडियो संदेश के साथ इस वेबसाइट को लॉन्च किया गया था। कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने व्यक्तिगत डिटेल्स भर कर आवेदन दिया। लेकिन, उन्हें नहीं पता था कि इस प्रक्रिया में कई लूपहोल्स हैं। पिछले 5 दिनों से ये ऑनलाइन सिक्योरिटी लूपहोल्स ज्यों के त्यों बने हुए हैं। इस वेबसाइट ‘incsmw.in’ पर वॉलंटियर्स को अपने व्यक्तिगत विवरण सहित शैक्षिक योग्यता के बारे में भी बताना था।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के डेटा हुए लीक

उन्हें बताना था कि वो प्रतिदिन कितने घंटे पार्टी के लिए ऑनलाइन कार्य करने में सक्षम हैं। इस व्यक्तिगत डेटा को केवल कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके आईटी सेल द्वारा आंतरिक प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन अब ये सबके सामने खुलेआम लीक हो रहा है। ट्विटर यूजर ‘@rsgovin’ ने इस बारे में खुलासा किया। हालाँकि, उसने कार्यकर्ताओं के संपर्क डिटेल्स छिपा दिए ताकि कार्यकर्ताओं को कोई परेशान या प्रताड़ित न करे।

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, न सिर्फ बिहार बल्कि इसी तरह से कई अन्य प्रदेशों के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के भी व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक हो गए हैं। ऑपइंडिया ने भी जब उक्त ट्विटर यूजर के दावे की पुष्टि के लिए डिटेल्स चेक किए तो पाया कि सच में कॉन्ग्रेस की वेबसाइट पर कार्यकर्ताओं का सार्वजनिक डेटा लीक होने से उनकी सूचनाएँ रिस्क पर हैं। इन कार्यकर्ताओं ने तो विश्वास किया था कि पार्टी उनके डिटेल्स सुरक्षित रखेगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

ट्विटर यूजर @rsgovin ने एक थ्रेड में बताया है कि वेबसाइट पर जिनलोगों ने डाटा डाला है, उनकी निजी जानकारियॉं खतरे में है। यूजर ने कहा कि कुछ तकनीकी क्वेरीज के बाद कोई भी व्यक्ति इन डिटेल्स को प्राप्त कर सकता है। उसने वेबसाइट पर डाले गए कुछ विवरण की जॉंच की तो उसे सही पाया। यूजर ने बताया है कि कॉन्ग्रेस की इस वेबसाइट के सिक्योरिटी प्रोटोकाल्स इतने कमजोर हैं कि एडमिनिस्ट्रेटर एरिया में भी लॉगइन किया जा सकता है। ऑपइंडिया की खबर लिखे जाने तक भी ये लूपहोल्स बने हुए थे और कॉन्ग्रेस ने इसे दुरुस्त नहीं किया था।

रिंकू शर्मा के परिजनों के लिए लोगों ने जुटाए ₹40 लाख: न्याय के लिए VHP का देशव्यापी अभियान, 2500 जगहों पर दी जाएगी श्रद्धांजलि

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मंगोलपुरी में रिंकू शर्मा की हत्या के बाद पीड़ित परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए ऑनलाइन अभियान शुरू किया है। इसके जरिए खबर लिखे जाने तक 40 लाख रुपए जुटाए गए थे। क्राउडकैश नामक वेबसाइट और फिल्म निर्माता मनीष मुंद्रा द्वारा दी गई 5 लाख की रकम को मिला कर इतनी धनराशि आई है। इस रकम को पीड़ित परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

मनीष मुंद्रा ने यहाँ तक वादा किया है कि अगर जनता कुल मिला कर 90 लाख रुपए जुटा देती है तो फिर वो इसमें 10 लाख जोड़ कर इसे 1 करोड़ रुपए कर देंगे। कपिल मिश्रा ने भी इसके लिए 1 करोड़ की धनराशि जुटाने का लक्ष्य रखा है। कपिल मिश्रा ने संकल्प जताया कि हम न तो परिवार को अकेला पड़ने देंगे और न ही कमजोर। उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मदद तो दूर, अब तक संवेदना के एक शब्द तक नहीं कहे हैं।

दिल्ली के पूर्व मंत्री मिश्रा ने ऐलान किया कि वे सोमवार (फरवरी 14, 2021) को पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि रिंकू शर्मा अपने घर में अकेला कमाने वाले थे, जिन्होंने हमारे लिए अपने जीवन को बलिदान कर दिया। फ़िलहाल हैदराबाद में जनसम्पर्क कर रहे कपिल मिश्रा दिल्ली लौटने के बाद पीड़ित परिवार से मिलेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका दर्द जाना था।

उधर विश्व हिंदू परिषद ने ऐलान किया है कि रामभक्त रिंकू शर्मा को बजरंग दल के कार्यकर्ता रविवार (फरवरी 14, 2021) को देशव्यापी श्रद्धांजलि देंगे। बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सिंह सोलंकी ने बताया कि जिला केंद्रों सहित लगभग 2500 स्थान पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिए जाएँगे। VHP न्याय के लिए पूरे देश में अभियान चलाएगी।

विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने परिजनों से मिलने के बाद कहा कि पिछले कुछ समय से मुस्लिम समाज में आक्रामकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “बात-बात पर हमले भी बढ़ रहे हैं। इस्लामिक जिहादी खुलेआम हिंदुओं की मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। इन सबके बावजूद पुलिस-प्रशासन व देश की सेक्युलर बिरादरी मूकदर्शक बनी हुई है। दुर्भाग्य से पुलिस-प्रशासन द्वारा अपनी नाकामी को छुपाने हेतु नई-नई कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं। स्थानीय पुलिस ने यदि समय पर कार्यवाही की होती तो रिंकू आज अपने परिजनों के बीच होता।”

मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि हमलावर रिंकू शर्मा को परिवार सहित जिंदा जलाने की फिराक में थे। रिंकू शर्मा की माँ राधा ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने किचन से गैस सिलिंडर निकाल लिया था और उसमें आग लगाने की कोशिश की थी, ताकि पूरे घर को जलाया जा सके और आग में झुलस कर पूरे परिवार की मौत हो जाए। वो गैस सिलिंडर में आग लगाने ही जा रहे थे, तभी रिंकू की माँ ने अपने बेटों के साथ मिल कर किसी तरह आरोपितों से सिलिंडर छीन लिया। 

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने राहुल गाँधी के फाड़े पोस्टर, काफिला रोक कर दिखाए काले झंडे

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) की राहुल गाँधी के पोस्टर फाड़े और विरोध में नारे लगाए। श्रीगंगानगर में उनका काफ़िला रोक कर काले झंडे भी दिखाए। राहुल गाँधी राजस्थान के दो दिवसीय दौरे पर थे और इस दौरान उन्हें कृषि क़ानूनों पर भाषण भी देना था। दो दिवसीय दौरे के पहले दिन राहुल गाँधी ने पीलीबंगा और श्रीगंगानगर में रैलियों को सम्बोधित किया। 

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए जयवीर सिंह नाम के किसान ने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि यह दौरा उनके राजनीतिक मुनाफ़े के लिए किया गया है, वह किसानों की समस्याओं पर कोई बात नहीं कर रहे हैं। राहुल गाँधी सिर्फ किसानों को मूर्ख बनाने का प्रयास कर रहे थे। जयवीर सिंह ने कहा, “हम पिछले 3 महीनों से कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं लेकिन आज जो हुआ उसे कॉन्ग्रेस रैली कहा जाना चाहिए। ये लोग किसानों का झंडा लेकर हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं। जब हमने 1 नवंबर को कृषि क़ानूनों के विरोध में मार्च निकाला था तब कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को जयपुर में दाख़िल होने की अनुमति नहीं दी थी। ये लोग कह रहे हैं कि भाजपा सरकार किसानों में दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दे रही है, तो इनकी (कॉन्ग्रेस) सरकार कैसे अलग हुई?” 

किसानों के नाम पर राहुल गाँधी की राजनीतिक रैली: किसान 

जयवीर सिंह ने कहा कि किसान राहुल गाँधी से बात करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मिलने की अनुमति माँगी। अनुमति भले दी गई थी, लेकिन बाद में किसानों को उनसे मिलने नहीं दिया गया था। जयवीर सिंह के अनुसार, “वह (राहुल गाँधी) हमसे मिले बिना बच्चों की तरह चले गए, इसलिए हमने उनके पोस्टर फाड़े और हम ये फिर से करेंगे।” एक और किसान ने कहा कि राहुल गाँधी किसानों से बात नहीं करना चाहते थे, वह सिर्फ अपनी रैली में भीड़ इकट्ठी करना चाहते थे। किसानों का आरोप है कॉन्ग्रेस ने यह रैली सिर्फ अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए की थी। इसके लिए उन्होंने किसान आंदोलन का इस्तेमाल किया। 

कैसे कॉन्ग्रेस ने दी आंदोलन की चिंगारी को हवा 

यह दिलचस्प है कि किसानों ने जयपुर में राहुल गाँधी का विरोध तब किया जब कॉन्ग्रेस किसानों के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने में लगी हुई है। कॉन्ग्रेस के लिए सिर्फ एक बात अहमियत रखती है, कैसे इस मौके का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए किया जाए। कॉन्ग्रेस पहले इन्हीं क़ानूनों की वकालत कर रही थी। अब वही कॉन्ग्रेस प्रदर्शनकारियों का पूरा समर्थन कर रही है। 

हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने ऐसी टिप्पणी की जो हमेशा की तरह एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड’ ही साबित हुआ। उन्होंने कहा था, “इस मामले का कोई अंत नहीं है। सरकार अपने अभिमान में ऐसा सोचती है कि वह किसानों को लाचार कर सकती है, लेकिन किसानों को बेवकूफ़ नहीं बनाया जा सकता है। भारत के किसान प्रधानमंत्री से ज़्यादा जानते हैं। इस मुद्दे का इकलौता हल यही है कि सरकार कृषि सुधार क़ानूनों को वापस ले।” 

इसके पहले राहुल गाँधी ने कहा था कि 3 कृषि क़ानूनों के चलते भारत का कृषि क्षेत्र 2-3 उद्योगपतियों के पास चला जाएगा। इस तरह की निराधार बयानबाज़ी के भीषण परिणाम हुए थे, पंजाब में तमाम जियो (jio) टावर्स में तोड़फोड़ की गई थी। खुद पंजाब के मुख्यमंत्री ने पूरे फसाद का विरोध किया था, लेकिन असल में उनकी ही पार्टी ने इस पूरे विवाद को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।  

आंदोलन के दौरान कॉन्ग्रेस ने खूब डर पैदा किया जिसकी वजह से खालिस्तानी तत्व खुल कर सामने आए और उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर आंदोलन को हिंसात्मक रूप दे दिया। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस ने पूरे षड्यंत्र को खुद बढ़ावा दिया वहीं खुद जयपुर में किसानों को प्रवेश की अनुमति तक नहीं दी। एक तरफ कॉन्ग्रेस आक्रामक होकर प्रधानमंत्री मोदी सरकार पर हर तरह के हमले कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी सरकार वाले राज्यों को इन सबसे दूर रखना चाहती है।   

टिकरी बॉर्डर पर ‘किसानों’ ने दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल पर किया हमला, सिर में गंभीर चोटें

टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के एक कॉन्स्टेबल पर ‘किसानों’ द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्स्टेबल जितेंद्र राणा पर शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को हमला किया गया। उनके पैर और सिर में गंभीर चोंटे आई हैं।

एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उन पर हमला उस वक्त किया गया जब वे लापता किसानों के पोस्टर चिपका रहे थे। राणा नागलोई थाने में तैनात हैं। उनकी ड्यूटी टिकरी बॉर्डर पर लगी थी।

रिपोर्टों के मुताबिक राणा कुछ समझ पाते उससे पहले ही तथाकथित आंदोलनकारी ‘किसानों’ ने उन पर हमला कर दिया। हमले की वजह से उन्हें कई टाँके भी लगे हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को उपद्रवी समझ लिया था, क्योंकि वह वर्दी में नहीं थे। हमले के बाद मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने राणा को बचाया।       

बता दें कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के नाम पर ‘किसानों’ ने जमकर हिंसा की थी। लाल किले पर धार्मिक झंडा फहरा दिया था। इस हिंसा में 300 से अधिक पुलिसवाले घायल हो गए थे।

जिससे 27 साल पहले की थी पूछताछ, उसने की अजीत डोभाल के दफ्तर की रेकी: आतंकी के खुलासे के बाद NSA की सुरक्षा कड़ी

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आतंकियों के निशाने पर हैं। ताज़ा खुलासे के बाद डोभाल की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक गिरफ्तार आतंकी ने खुलासा किया है कि उसने सरदार पटेल भवन सहित नई दिल्ली के कई हाई प्रोफ़ाइल दफ्तरों की रेकी की थी। आतंकी ने बताया है कि पाकिस्तान के एक हैंडलर के कहने पर उसने ऐसा किया।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2016 में हुए उरी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा हमले के बाद हुए बालकोट एयरस्ट्राइक के बाद से ही अजीत डोभाल आतंकियों के निशाने पर हैं, क्योंकि इन दोनों का खाका तैयार करने में उनकी अहम भूमिका थी। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उन पर बढ़े खतरे के बारे में सुरक्षा एजेंसियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय को आगाह कर दिया गया है।

अजीत डोभाल भारत के उन लोगों में हैं, जिनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। जम्मू-कश्मीर स्थित शोपियाँ के जैश आतंकी हिदायतुल्लाह मलिक को 6 फ़रवरी को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ के दौरान ही सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक वीडियो लगा, जिसमें अजीत डोभाल के दफ्तर की रेकी की गई थी। जम्मू के गंग्याल पुलिस थाने में मलिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

अनंतनाग में गिरफ्तार किए गए मलिक के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार भी जब्त किए गए थे। हिदायतुल्लाह 24 मार्च 2019 को श्रीनगर से दिल्ली के लिए इंडिगो फ्लाइट से निकला था और अजीत डोभाल के दफ्तर के बाहर सुरक्षा तथा CISF की तैनाती के डिटेल्स जुटाए थे। फिर उसने इसका वीडियो अपने पाकिस्तानी आका को भेजा।

उसे अपने आका के बारे में ज्यादा नहीं पता लेकिन वो उसे ‘डॉक्टर’ के नाम से बुलाता है। इसके बाद हिदायतुल्लाह मलिक दिल्ली से एक बस से कश्मीर लौटा। मई 2019 में मलिक को एक आत्मघाती हमले के लिए पाकिस्तानी आकाओं ने ह्युंडई सैंट्रो कार भी दी थी। एक बैंक कैश वैन से उसने नवंबर 2020 में शोपियाँ में इरफ़ान ठोकर, उमर मुस्ताक और रईस मुस्तफा के साथ मिल कर 60 लाख रुपए लूट लिए थे।

उसने पूछताछ में अपने 10 पाकिस्तानी आकाओं के कॉन्टैक्ट डिटेल्स व अन्य विवरण दिए हैं। उसने 2019 में जैश ज्वाइन की थी। पहले वो जमीन पर उसके लिए काम करता था, फिर उसने एक मुखौटा संगठन तैयार किया। बता दें कि 1994 में जब आतंकी अज़हर मसूद (जैश का संस्थापक) गिरफ्तार किया गया था तो अजीत डोभाल ने उससे कड़ी पूछताछ की थी।

रिंकू शर्मा के परिवार को जिंदा जलाने की थी साजिश, अस्पताल ले जाते वक्त भी रास्ता रोककर किया था हमला: रिपोर्ट्स

दिल्ली के मंगोलपुरी में 10 फरवरी 2021 की रात बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा पर घर में घुसकर हमला किया गया था। अगले दिन उनकी मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से इस मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। इनके मुताबिक हमलावरों के निशाने पर रिंकू शर्मा का पूरा परिवार था। इतना ही नहीं सबूतों को मिटाने के इरादे से रिंकू को अस्पताल ले जाते वक्त रास्ता रोका गया था और अस्पताल में भी हमला हुआ था।

दैनिक जागरण के संजय सलिल की रिपोर्ट के अनुसार हमलावर रिंकू शर्मा को परिवार सहित जिंदा जलाने की फिराक में थे। रिंकू शर्मा की माँ राधा ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने किचन से गैस सिलिंडर निकाल लिया था और उसमें आग लगाने की कोशिश की थी, ताकि पूरे घर को जलाया जा सके और आग में झुलस कर पूरे परिवार की मौत हो जाए।

खबर के अनुसार, हमलावरों ने घर में घुस कर मृतक के ऊपर लाठी-डंडों से वार करना शुरू कर दिया। वो गैस सिलिंडर में आग लगाने ही जा रहे थे, तभी रिंकू की माँ ने अपने बेटों के साथ मिल कर किसी तरह आरोपितों से सिलिंडर छीन लिया। रिंकू के भाई मन्नू ने भी बताया है कि आरोपितों ने उनके घर पर पूरे परिवार को मार डालने के इरादे और साजिश के साथ ही धावा बोला था।

हमलावर चाहते थे कि उनकी करतूतों का कोई सबूत या गवाह नहीं बचे। मन्नू ने बताया कि हमलावर रिंकू की पीठ में चाकू घोंप कर वहाँ से भाग गए थे। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था तो दोबारा से लौट कर उन्होंने रास्ता रोका और लाठी-डंडे से वार किया।

‘दैनिक जागरण’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

मन्नू ने बताया कि हर मंगलवार हनुमान चालीसा पढ़ने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण उन्होंने ये साजिश की। उन्होंने बताया कि हमलावर पाँचों भाई और उनकी बीवियों के साथ-साथ उनके परिवार वाले भी साथ में थे। उनकी संख्या 30-40 थी। माँ ने बताया कि अधिकतर पड़ोसी छत से देख रहे थे।

मन्नू ने बताया कि आरोपित ताजुद्दीन ने माँ का गला दबाने की कोशिश की और जाहिद ने रिंकू के पीठ में धँसे चाकू को घूमा कर और गहरा धँसा दिया। पुलिस ने 5 लोगों की गिरफ़्तारी की बात कही है। माँ का रो-रो कर बुरा हाल था, जिस कारण उनके गले से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी। परिजनों ने बताया कि हमलावर गाली भी बक रहे थे। उन्हें पहले भी सूचना मिली थी कि हत्या की साजिश रची जा रही थी।

वे पीठ में धँसे चाकू को अपने साथ लेकर जाना चाहते थे, ताकि यहाँ कोई सबूत न रह जाए। साथ ही वो रिंकू शर्मा को अस्पताल भी नहीं पहुँचने देना चाहते थे। ICU की तरफ ले जाए जा रहे रिंकू शर्मा की पीठ में धँसे चाकू को निकाल कर ले जाने की कोशिश हुई। एक हमलावर ने चाकू पकड़ कर जोर से हिला दिया, जिससे वो रिंकू शर्मा के पीठ में और गहरा धँस गया।

आज तक की रिपोर्ट में आकाश नामक चश्मदीद के हवाले से कहा गया है, “जब जाकर देखा तो रिंकू के घर पर अटैक हुआ था। लोग डंडे मार रहे थे। भीड़ बहुत थी। उसकी फैमिली को बचा रहे थे। तभी शोर मचा कि रिंकू को चाकू लग गया है। फिर सब संजय गांधी अस्पताल आए। अस्पताल में जाहिद के मामा तवजुद्दीन ने मेरे साथ बदसलूकी की।”

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रिंकू शर्मा हत्याकांड की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। इससे पहले पुलिस ने कहा था कि मामले में हर एंगल से जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा था कि वह पीड़ित परिवार से लगातार संपर्क बनाए हुए है और उनसे जो भी सूचना मिल रही है, उस पर काम किया जा रहा है। शुरुआत में पुलिस ने कम्युनल एंगल से इनकार किया था।

4 राज्यों के 13 शहरों में ‘किसान नेता’ राकेश टिकैत की प्रॉपर्टी, पेट्रोल पम्प, शोरूम, ईंट भट्ठा सब कुछ: रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़कर राकेश टिकैत के ‘किसान नेता’ बनने की कहानी से हम आपको पहले ही अवगत करा चुके हैं। यह भी बता चुके है कि पिता महेंद्र सिंह टिकैत जिन सुधारों के लिए लड़े थे, राकेश टिकैत आज उसका ही विरोध कर रहे हैं। इतना ही नहीं नए कृषि कानूनों का शुरुआत में स्वागत करने के बाद वे पलट भी चुके हैं

अब भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत की प्रॉपर्टी को लेकर डीएनए की एक रिपोर्ट से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जहॉं देश के किसानों की औसत मासिक आय 6400 रुपए है, वहीं उनके कथित नेता की प्रॉपर्टी देश के 4 राज्यों में फैली हुई है।

तमाम शोध रिपोर्ट्स में बताते हैं कि देश के 100 में से 52 किसानों पर औसतन 1,40,000 रुपए का क़र्ज़ है। 2019 में लगभग 10,000 किसानों ने आत्महत्या की थी। लगभग 76 फ़ीसदी किसान इस क्षेत्र को छोड़ना चाहते हैं। सिर्फ 1 फ़ीसदी युवा कृषि क्षेत्र में अपना भविष्य देखते हैं। लेकिन राकेश टिकैत की सम्पति से जुड़े आँकड़े अलग ही कहानी कहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक राकेश टिकैत की सम्पत्ति कुल 4 राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में हैं। इन राज्यों के कुल 13 शहरों में उनकी सम्पत्तियाँ मौजूद हैं। इन शहरों में मुज़फ़्फरनगर, ललितपुर, झांसी, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बदायूं, दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, देहरादून, रुड़की, हरिद्वार और मुंबई शामिल हैं। इन सम्पत्तियों की कुल कीमत 80 करोड़ आँकी गई है। जिस वक्त राकेश टिकैत दिल्ली के बॉर्डर पर बैठ कर किसानों के प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं, उस दौरान भी उनका धंधा पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है। उनके पास ज़मीन, पेट्रोल पम्प, शोरूम, ईंट भट्टा जैसी तमाम चीज़ें हैं।     

राकेश टिकैत ‘किसान नेता’ बनने के पहले दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल थे। 51 वर्षीय टिकैत का विवाह 1985 में सुनीता देवी से हुआ था। इनके बेटे का नाम चरण सिंह और बेटियों का नाम सीमा और ज्योति है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। छोटी बेटी ऑस्ट्रेलिया में रहती है। 8 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में ‘किसान’ आंदोलन के समर्थन में रैली निकाली गई थी और ज्योति टिकैत ने उसमें हिस्सा लिया था। 

कुछ रिपोर्ट्स में यहाँ तक दावा किया जाता है कि राकेश टिकैत के पास हिरण भी है, जो कि गैरकानूनी है। नियमों के मुताबिक़ हिरण समेत अन्य वन्य जीवों को पकड़ना या उन्हें अपने पास रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए 7 साल तक की जेल और 25,000 रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकता है।   

बिहार में प्रशांत किशोर के पुश्तैनी मकान पर चला बुलडोजर, देखने के लिए उमड़ी भीड़: बंगाल में व्यस्त हैं PK

बिहार के बक्सर जिले में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के पुश्तैनी मकान के एक हिस्से पर शुक्रवार (फरवरी 12, 2021) को प्रशासन का बुलडोजर चला। जदयू के नेता रहे प्रशांत किशोर की मकान की चहारदीवारी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में आड़े आ रही थी, इसलिए ये कार्रवाई की गई।

स्थानीय लोग लगातार आरोप लगा रहे थे कि जहाँ रसूखदार लोगों के अवैध निर्माणों को तोड़ने में प्रशासन कोताही बरत रहा है, वहीं आम लोगों के साथ इस मामले में कोई नरमी नहीं दिखाई जा रही है। इसी क्रम में प्रशासन ने प्रशांत किशोर के घर के परिसर की बाउंड्री और अंदर के कुछ हिस्से को ध्वस्त किया है। इन हिस्सों का NH निर्माण के लिए अधिग्रहण हो चुका है, जिसका मुआवजा भी बनकर तैयार है। प्रशांत किशोर के पिता श्रीकांत पांडेय बक्सर के एक बड़े डॉक्टर हुआ करते थे। उन्होंने ही इस मकान का निर्माण करवाया था। उनका 2019 में दिल्ली में निधन हो गया था। फ़िलहाल ये घर खाली है और यहाँ परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता है।

केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि बक्सर-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग-84 के निर्माण का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाना चाहिए, जिस कारण रास्ते में आने वाले हर अवरोध को हटाया जा रहा है। इस दौरान चुरामनपुर के नजदीक स्थित यशोदाब्रह्म स्थान को भी हटाया जाना है, लेकिन यहाँ प्रशासन को विरोध का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों को समझा-बुझाकर भरोसे में लिया और ब्रह्म बाबा को स्थानांतरित किया।

प्रशांत किशोर की संपत्ति पर हुई कार्रवाई को 15 मिनट में जल्दी निपटा दिया गया, क्योंकि लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। अनुमंडल अधिकारी (SDM) केके उपाध्याय ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय राजमार्ग-84 के चौड़ीकरण के दौरान भूमि अधिग्रहण के क्रम में दोनों किनारे पर बने मकान तथा धार्मिक स्थलों को हटाया जा रहा है। भूस्वामियों को मुआवजा दिया जा रहा है, वहीं धार्मिक स्थलों को स्थानांतरित किया जा रहा है।

2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के साथ काम कर चुके प्रशांत किशोर को बिहार में कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएँ दी गई थीं और जदयू में उपाध्यक्ष पद से भी नवाजा गया था। लेकिन, कुछ ही दिनों में नीतीश से उनकी दूरी बढ़ती चली गई। फ़िलहाल वे पश्चिम बंगाल में TMC के लिए काम कर रहे हैं। उनका विरोध करते हुए कई नेताओं ने हाल में तृणमूल छोड़ा है।

‘गाना’ वाली तंजिला के खिलाफ क्रिमिनल कंप्लेन, रिंकू शर्मा हत्या की जाँच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी

दिल्ली के मंगोलपुरी में बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हुई हत्या की जॉंच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी। इस बीच, चंडीगढ़ में म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ की कर्मचारी तंज़िला अनीस के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने माँग की है कि तंज़िला अनीस को कंपनी तुरंत निकाल बाहर करे। तंजिला ने रिंकू शर्मा की बर्बर हत्या के बाद एक ट्वीट किया था। लोगों का आरोप है कि इस ट्वीट के माध्यम से उसने रिंकू शर्मा की हत्या को जायज ठहरने की ठहराने की कोशिश की थी।

गौरव गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कंपनी की कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि वो धर्म की भूमि भारत में जन्म लेने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं, जहाँ हर सजीव वस्तु की पूजा की जाती है, क्योंकि इकोसिस्टम को बनाए रखने में सभी का किरदार है।

उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों का पोषण करने वाला देश है, जहाँ कई भाषाएँ और संस्कृतियों के लोग साथ में शांति से निवास करते हैं। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि समय-समय पर कई लोगों ने इस सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने की कोशिश की है और इसमें ताज़ा नाम तंज़िला अनीस का है। उन्होंने कहा कि ‘टाइम्स इंटरनेट’ समूह की ‘Gaana’ की इस पदाधिकारी ने अप्रिय, निंदात्मक और आपत्तिजनक ट्वीट्स किए हैं।

उन्होंने कहा कि तंज़िला ने अपनी कई ट्वीट्स में हिन्दू देवी-देवताओं को नीचा दिखाया है। उन्होंने प्रशान अग्रवाल से पूछा कि क्या आपकी कंपनी भी अपनी इस पदाधिकारी के विचारों का समर्थन करती है? उन्होंने लिखा कि वे स्वदेशी कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते, इसीलिए उन्हें जानना है कि तंज़िला के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। साथ ही साइबर क्राइम में शिकायत देकर FIR दर्ज करने की माँग भी की गई है।

गौरतलब है कि रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं हुई थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

तंज़िला के खिलाफ आपराधिक शिकायत, FIR दर्ज करने की माँग

उधर, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रिंकू शर्मा हत्याकांड की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। इससे पहले पुलिस ने कहा था कि मामले में हर एंगल से जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा था कि वह पीड़ित परिवार से लगातार संपर्क बनाए हुए है और उनसे जो भी सूचना मिल रही है, उस पर काम किया जा रहा है। शुरुआत में पुलिस ने कम्युनल एंगल से इनकार किया था। लेकिन, लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए निकाली गई रैली के दौरान विवाद की बात सामने आने के बाद जाँच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।