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36 करोड़ रुपए का कुत्ता: कैसे खर्च करना है, कितना खर्च करना है – सब लिखित में है

इंटरनेट पर अक्सर ऐसी चीज़ों पर बहस छिड़ी रहती है, जिनके बारे में सोचना तक मुश्किल होता है। फ़िलहाल इंटरनेट पर एक ऐसी ही चीज़ वायरल हो रही है। खबर है 8 साल के एक मादा कुत्ते की। वो 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 36 करोड़ रुपए की मालकिन है

लूलू (Lulu) नाम है इस मादा कुत्ते का। बॉर्डर कॉली (Border Collie) नस्ल के इस मादा कुत्ते को 36 करोड़ रुपए अपनी मालिक की मृत्यु के बाद मिला है। अमेरिका के टेनेसी (Tennessee) स्थित नैशविले (Nashville) की रहने वाली बिल डोरिस (Bill Dorris) की मृत्यु पिछले साल हुई थी। उन्होंने 5 मिलियन डॉलर अपने कुत्ते के नाम किए थे। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ डोरिस (88) की इच्छा यही थी कि यह राशि एक ट्रस्ट को सौंपी जाएगी, जो लूलू की देखभाल करेगा। डोरिस ने सबसे पहले लूलू को अपनी दोस्त मार्था बार्टन (Martha Burton) के हवाले किया था। इसके अलावा महीने के हिसाब से उसका खर्च भी दिया था।

मार्था ने लूलू और डोरिस के बीच रिश्तों को लेकर भी कई बातें बताई। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता इस बारे में क्या सोचा जाए, जिससे सब कुछ समझाया जा सके। फ़िलहाल के लिए बस इतना ही कहा जा सकता है कि उसे (डोरिस) अपने कुत्ते से कहीं ज़्यादा प्यार था।”      

फ़िलहाल डोरिस की सम्पत्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उसके दोस्तों ने खुलासा किया है कि रियल एस्टेट से लेकर निवेश क्षेत्र तक डोरिस की सम्पत्ति बहुत ज़्यादा थी। इसका सीधा मुनाफ़ा किसी और को नहीं बल्कि लूलू को होगा।

इस मामले में एक और अहम बात है कि इतनी बड़ी राशि का यह मतलब नहीं है कि इसे किसी भी तरह या कितना भी खर्च किया जा सकता है। लूलू के वर्तमान मालिक को सिर्फ उतना ही खर्च करने की अनुमति होगी, जितनी उसकी महीने भर की आवश्यकताएँ हैं। 

मार्था का कहना है कि 5 मिलियन डॉलर एक कुत्ते पर खर्च करने के लिए बहुत होते हैं लेकिन वह प्रयास करती रहेगी। इसके अलावा कुत्ते की हर बातों का ख़याल रखते हुए उसकी सारी ज़रूरतों को वो पूरा करेंगी।

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब एक मालिक ने अपने कुत्ते के लिए इतनी मोटी रकम छोड़ी हो। फ़िलहाल इस बारे में कोई बात सामने नहीं आई है कि लूलू के मरने बाद 36 करोड़ की राशि का क्या होगा।  

पश्चिम बंगाल में BJP नेता पर बम से हमला, हाल ही में TMC छोड़ भाजपा में हुए थे शामिल

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं पर हमले की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही है। अब भाजपा नेता फिरोज कमाल गाजी पर हमला हुआ है। ‘बाबू मास्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले फिरोज की कार पर शनिवार (फरवरी 13, 2021) को क्रूड बम से हमला किया गया। ये हमला तब हुआ, जब वो राजधानी कोलकाता की तरफ जा रहे थे। गाजी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है।

उन्हें बसीरहाट में स्थानीय स्तर के प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है। ये क्षेत्र नॉर्थ 24 परगना जिले में पड़ता है। उन पर हमला तब हुआ, जब वो मिनखा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले बसंती हाइवे से गुजर रहे थे। उन्हें कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। भाजपा की राज्य यूनिट ने आरोप लगाया है कि ये हमला TMC के गुंडों ने किया है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने हॉस्पिटल जाकर उनसे मुलाकात की हालचाल लिया।

उन्होंने कहा कि उनके दोस्त बाबू मास्टर पर TMC के आपराधिक तत्वों ने काफी बेरहमी से हमला किया है। उन्होंने कहा, “मैं इस बात को लेकर निश्चित हूँ कि इस हमले की तस्वीरें आपने ज़रूर देखी होंगी। हार मत मानिए! ये सिर्फ तृणमूल की हताशा को दिखाता है।” इस हमले में गाजी को काफी गहरे जख्म आए हैं। उनकी कार को पहले स्पीड ब्रेकर पर रोका गया, फिर क्रूड बम से हमला किया गया।

भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल में पार्टी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की गृह मंत्री भी हैं, ऐसे में वो इस घटना पर बाकी की ऐसी घटनाओं की तरह चुप्पी साधे रहेंगी। इसे 1 दिन पहले ही भाजपा के कार्यकर्ताओं के ऊपर गर्म पानी डाल दिया गया था, जिससे उनकी स्किन पर जख्म आ गए थे। अमित शाह के बंगाल दौरे के आसपास ही ये घटनाएँ हुईं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि  कोविड-19 वैक्सीन अभियान का काम पूरा होते ही सीएए पर अमल की दिशा में सरकार बढ़ेगी। बंगाल के मतुआ में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात क थीही। वहीं इंडिया टुडे के कॉन्क्लेव में उन्होंने दावा किया था कि बंगाल में बीजेपी 200 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि सीएए से किसी भी रूप में भारतीय अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गलवान-पांगोंग का दौरा करेंगे सांसद, सरकार को भेज दिया प्रस्ताव… लेकिन चीन-चीन रटने वाले राहुल गाँधी गायब

रक्षा मामलों पर संसदीय स्टैंडिंग समिति के अध्यक्ष जुएल ओराँव ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को कहा कि उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि 30 सदस्यीय दल को गलवान घाटी और पांगोंग झील भेजा जाए, जहाँ कई महीनों से भारत-चीन के बीच तनाव चल रहा है। ये संसदीय समिति मई 15 के बाद पूर्वी लद्दाख के इन इलाकों का दौरा कर सकती है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इस बैठक से नदारद रहे।

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल ओराँव की अध्यक्ष वाली इस समिति में बतौर सदस्य राहुल गाँधी भी शामिल हैं, लेकिन उनकी संसदीय समिति की बैठकों और क्रियाकलापों में हिस्सेदारी न के बराबर ही रहती है। संसदीय पैनल के ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC)’ दौरे के लिए अभी केंद्र सरकार की अनुमति मिलनी बाकी है। जिस बैठक में इस पर विचार-विमर्श हुआ, उसमें राहुल गाँधी शामिल नहीं हुए।

ओराँव ने कहा कि सरकार सीमावर्ती इलाकों में स्थिति की समीक्षा करते हुए संसदीय समिति के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करेगी और फिर अपना निर्णय बताएगी। ये बैठक करीब 10 दिनों पहले हुई थी और प्रस्ताव को लोकसभाध्यक्ष के पास भी भेज दिया गया है। ये वही संसदीय समिति है, जो इससे पहले नाथुला पास, तमांग और भारत-बांग्लादेश सीमाओं का दौरा कर चुकी है। समिति ने दक्षिणी सीमाओं का भी दौरा किया है।

ओडिशा के सुंदरगढ़ से पाँचवी बार सांसद चुने गए जुएल ओराँव ने कहा, “एक तो राहुल गाँधी रक्षा मामलों पर गठित संसदीय समिति की बैठकों में नहीं आते, ऊपर से अगर वो कभी आते भी हैं तो बैठक के एजेंडे की जगह बाहरी मुद्दों पर बात करने लगते हैं। हालाँकि, इन सबसे हमारी कमिटी की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ता।” बता दें कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था कि चीन अपनी सेना को पीछे हटाने के लिए राजी हो गया है।

ये सब तब हो रहा है, जब राहुल गाँधी के अधिकतर भाषणों में चीन ही मुद्दा बना रहता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘डरपोक’ बताते हुए कई बार आरोप लगाया है कि उन्होंने भारत की जमीन चीन को दे दी है। उन्होंने कहा था कि ताज़ा समझौता ‘गिव एंड टेक’ का नहीं, बल्कि सिर्फ ‘गिव’ का है। साथ ही कहा था कि पीएम मोदी की चीन के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने पूछा कि पीएम मोदी ने भारत की जमीन ‘चीन को क्यों दे दी?’

पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचाने वालों की खैर नहीं, अब सीएम खट्टर ने कहा- लाएँगे ‘वसूली’ कानून

किसान आंदोलन के बीच हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर का बड़ा बयान सामने आया है। जिसमें वह यूपी केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे आंदोलन की आड़ में उपद्रव मचाने वाले दंगाइयों को लेकर सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करने का अधिकार नहीं है, हम इससे संबंधित क़ानून लेकर आ रहे हैं।

बता दें, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने आज (13 फरवरी, 2020) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आंदोलन पर भी चर्चा हुई। सीएम ने कहा, “किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करने का अधिकार नहीं है, हम इससे संबंधित क़ानून लेकर आ रहे हैं।”

सीएम खट्टर ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को धरनों और किसान पंचायतों को लेकर सारी जानकारी दी है। मनोहरलाल खट्टर ने बताया कि जो भी आंदोलनकारी भविष्य में पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचाएगा, वही उसकी भरपाई करेगा। इसके लिए विधानसभा के सत्र में कानून लेकर आएँगे। मंत्रिमंडल विस्तार पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा उसकी जानकारी दे दी जाएगी।

गौरतलब है कि पिछली बार सीएम ने आंदोलनजीवियों पर प्रकाश डालते हुए कहा था, कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए आंदोलन कर रहे हैं कि उन्हें केंद्र के कानूनों के खिलाफ विरोध करना है।

उल्लेखनीय है कि देश की राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को कथित किसानों ने ट्रैक्टर रैली की आड़ में जमकर उत्पात मचाया, तोड़फोड़ की और लाल जिले की प्राचीर पर चढ़कर तिरंगे का अपमान करते हुए धार्मिक झंडा फहरा दिया था। जिसके बाद अब इस मामले में गहन जाँच के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम गिरफ्तार दीप सिद्धू और इकबाल सिंह को आज लाल किला लेकर पहुँची थी। जहाँ लाल किले पर हुई घटना के सीन को रीक्रिएट किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा उकसाने के आरोपितों दीप सिद्धू और इकबाल सिंह को लेकर दिल्ली पुलिस शनिवार को उन रास्तों पर गई, जहाँ-जहाँ से उपद्रवी लाल किले तक पहुँचे थे। लाल किले के भीतर दोनों कहाँ-कहाँ गए और क्‍या-क्‍या किया और किस प्रकार हिंसा के बाद ये लोग लौटकर गए। पुलिस ने यह जानने के लिए सीन रीक्रिएट किया है।

पुलिस के अनुसार, 26 जनवरी को लाल किले में हुई हिंसा और अराजकता के पीछे मुख्य रूप से दीप सिद्धू का हाथ था। उसे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के दल ने सोमवार की रात को हरियाणा में करनाल बाइपास के पास से गिरफ्तार किया था।

ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी भी लापता, 14 FIR के संबंध में 122 गिरफ़्तारी: संयुक्त किसान मोर्चा का दावा

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर 75 दिनों से अधिक समय से किसान आंदोलन जारी है। 26 जनवरी के मौके पर किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया था, जिसकी आड़ में किसानों ने राष्ट्र की राजधानी में जमकर उत्पात मचाया। अब किसान नेताओं ने दावा किया कि ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी भी लापता हैं।

दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार (13 फरवरी, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया है कि किसानों को फर्जी मामलों में फँसाया जा रहा है, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। किसानों ने तय कर लिया है कि अब वो यहीं रहेंगे। आंदोलन बंद नहीं होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया, “26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में शामिल हुए 16 किसान अब भी लापता हैं। गणतंत्र दिवस की घटना की न्यायिक जाँच होनी चाहिए।” किसान नेताओं ने दावा किया है, “14 एफआईआर के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 122 किसानों को गिरफ्तार किया है। संयुक्त मोर्चा गिरफ्तार किसानों को कानूनी और वित्तीय सहायता देगा।”

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “भारत सरकार झूठ बोलकर सारे देश को गुमराह कर रही है। सरकार कह रही है कि हमें बताया नहीं जा रहा कि इन क़ानूनों में काला क्या है, सरकार के साथ 11 बैठक करके 3 बार एक-एक क्लॉज पर बता चुके हैं कि इनमें काला क्या है।”

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस पर कहा, “ये आंदोलन जन मुक्ति आंदोलन है, लोग बंधक हैं उनको रिहा कराना है, इसी वजह से महापंचायत की जा रही है।” बता दें इतने दिनों से चल रहे आंदोलन पर कई तरह के सवाल उठने लग गए है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं पर इसकी फंडिंग को लेकर उनकी संपत्तियों का ब्यौरा भी इकट्ठा किया जा रहा। जिस पर टिकैत ने कहा, “मुझे नहीं पता कितने की प्रॉपर्टी बताई गई है, मेरे पास तो कुछ नहीं है।”

राकेश टिकैत ने कहा, “संयुक्त किसान मोर्चा पूरी तरह से एकजुट है। 23 फरवरी तक के कार्यक्रम निर्धारित हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं। आंदोलन पूरी मजबूती से चलता रहेगा, हम अपनी रणनीति बना रहे हैं। किसानों को हताश होने की जरूरत नहीं है।”

‘मुँह दबाना, कपड़े उतारना, रेप करना अकेले आदमी के लिए असंभव’- जैसे फैसले देने वाली जज का कार्यकाल 1 साल और बढ़ा

बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों में दो विवादास्पद फैसले सुनाने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की जज पुष्पा गणेदीवाला का कार्यकाल अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर एक साल और बढ़ गया है। जस्टिस पुष्पा का नया कार्यकाल 13 फरवरी से प्रभावी हो गया है। बता दें, एडिशनल जस्टिस के रूप में उनका कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त होना था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन जामदार ने उन्हें आज पद की शपथ दिलाई। अगर जस्टिस गणेदीवाला की सेवा को विस्तार नहीं दिया जाता तो उन्हें फरवरी में जिला न्यायपालिका में वापस जाना पड़ता। बॉम्बे हाईकोर्ट आने से पहले 2019 तक वे यहीं थी।

बहरहाल, न्यायमूर्ति गणेदीवाला को स्थायी न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को 20 जनवरी को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने एक बैठक में मंजूरी दे दी थी। कॉलेजियम की सिफारिश थी कि उन्हें (न्यायमूर्ति गणेदीवाला को) दो साल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर एक नया कार्यकाल दिया जाए।

हालाँकि, गणेदीवाला द्वारा हाल ही दिए गए विवादास्पद फैसले पर हुए बवाल को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर कहा कि उन्हें एक साल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर एक नया कार्यकाल दिया गया है। बता दें, आमतौर पर किसी स्थायी न्यायाधीश पद पर पदोन्नत किए जाने से पहले अतिरिक्त न्यायाधीश को दो साल के लिए नियुक्त किया जाता है।

गौरतलब है कि जस्टिस गनेडीवाल की हाल ही में POCSO एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसस) के दो मामलों को लेकर दिए फैसलों की वजह से काफी आलोचना हुई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अपने एक फैसले में कहा था कि ‘स्किन टू स्किन’ स्पर्श हुए बिना या कपड़ों के ऊपर से नाबालिग पीड़िता को ‘स्पर्श करना’ पॉक्सो कानून (POCSO Act) या यौन अपराधों पर बाल संरक्षण कानून के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता।

हालाँकि, चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अगुवाई वाली देश की शीर्ष कोर्ट ने इस फैसले पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी। क्योंकि यह समाज में गलत उदाहरण स्थापित करेगा।

इसके बाद एक और मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की एकल पीठ ने यह फैसला दिया था कि किसी लड़की का हाथ पकड़ना और आरोपित का पैंट की जिप खोलना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज ऐक्ट, 2012 (POCSO) के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता।

जस्टिस पुष्पा ने एक रेप के मामले में यह फैसला सुनाया था। दरअसल, इस मामले में निचली अदालत ने 26 साल के आरोपित को रेप का दोषी पाया था, लेकिन जस्टिस पुष्पा ने उसे बरी कर दिया। जस्टिस पुष्पा ने तर्क दिया, “बिना हाथापाई किए युवती का मुँह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना एक अकेले आदमी के लिए बेहद असंभव लगता है।”

भारत ने Corona Vaccine के 229.7 लाख डोज दूसरे देशों को भेजे, देश में आज से कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लगना शुरू

भारत ने कोरोना महामारी के दौर में भी विश्व के अन्य देशों के प्रति हमेशा की तरह मदद का हाथ बढ़ाया है। अब तक विश्व समुदाय के लिए 229.7 लाख यानी सवा दो करोड़ से ज्यादा कोरोना टीकों की खुराक की आपूर्ति की जा चुकी है।  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शुक्रवार (फरवरी 12, 2021) को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीकों की 64.7 लाख डोज अनुदान के तौर पर मुहैया कराए गए हैं, जबकि 165 लाख डोज व्यावसायिक आधार पर दिए गए। उन्होंने बताया कि आने वाले सप्ताहों में हम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका व प्रशांत महाद्वीप के अन्य देशों को भी कोरोना के टीके उपलब्ध कराएँगे। 

इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया कि सीरिया की सरकार के अनुरोध के जवाब में भारत सरकार सीरिया को उसकी खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए 2000 मीट्रिक टन चावल देने जा रही है। 1000 मीट्रिक टन चावल की पहली खेप सीरिया को भारतीय राजदूत द्वारा दी जा चुकी है। बचा चावल 18 फरवरी तक सीरिया के पास पहुँचने की उम्मीद है।

संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अब तक हमने दुनिया को कुल 229.7 लाख खुराक की आपूर्ति की है। इनमें से 64.7 लाख खुराक अनुदान सहायता के तौर पर भेजी गई है जबकि 165 लाख खुराक की आपूर्ति वाणिज्यिक आधार पर की गई है।’’ 

श्रीवास्तव ने कहा कि भेंट के तौर पर कोरोना वायरस टीके की खुराकें बांग्लादेश (20 लाख), म्यांमार (17 लाख), नेपाल (10 लाख), भूटान (1.5 लाख), मालदीव (एक लाख), मॉरीशस (एक लाख), सेशेल्स (50,000), श्रीलंका (पाँच लाख), बहरीन (एक लाख), ओमान (एक लाख), अफगानिस्तान (पाँच लाख), बारबडोस (एक लाख) और डोमिनिका (70,000) को भेजी गई हैं। 

उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक आधार पर ब्राजील (20 लाख), मोरक्को (60 लाख), बांग्लादेश (50 लाख), इजिप्ट (50,000), अल्जीरिया (50,000), दक्षिण अफ्रीका (10 लाख), कुवैत (दो लाख), यूएई (दो लाख) को टीके की आपूर्ति की गई है। उन्होंने कहा कि आगामी हफ्तों में अफ्रीका, लातिन अमेरिका, केरीकॉम, प्रशांत क्षेत्र समेत अन्य देशों को टीके की आपूर्ति की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि भारत में सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। आए दिन भारत में कोरोना के नए मामलों में भी गिरावट आ रही है। भारत की कोविड से लड़ाई अब सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है। अब कोरोना के टीकाकरण का अभियान शुरू हुए 28 दिन हो चुके हैं। 16 जनवरी को भारत के टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। शनिवार (फरवरी 13, 2021) को दूसरी डोज लगाने का काम भी शुरू हो गया है।  जिन लोगों ने टीकाकरण के पहले दिन 16 जनवरी को टीका लगाया था, उन्होंने शनिवार को दूसरी खुराक लिया।

मंत्रालय ने बताया कि कम से कम एक बार कोरोना के टीकाकरण के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए शेड्यूल 20 फरवरी तक किया जाना है। स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कोरोना के टीकाकरण का राउंड अप 25 फरवरी तक समाप्त हो जाएगा। वहीं, फ्रंटलाइन वर्करों (पुलिस व अन्य प्रशासन के अधिकारियों) के टीकाकरण की शेड्यूलिंग 1 मार्च के लिए तय की गई है। जिन्हें किसी भी कारण से टीका नहीं लगाया गया, उनके लिए राउंड अप 6 मार्च तक रखा गया है। बता दें कि देश में अब तक 20.40 करोड़ से ज्यादा कोरोना जाँच की जा चुकी है।

दीप सिद्धू और इकबाल सिंह को लेकर लालकिले पर पुलिस ने किया क्राइम सीन रिक्रिएट: 26 जनवरी हिंसा की जाँच तेज

देश की राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को कथित किसानों ने ट्रैक्टर रैली की आड़ में जमकर उत्पात मचाया, तोड़फोड़ की और लाल जिले की प्राचीर पर चढ़कर तिरंगे का अपमान करते हुए धार्मिक झंडा फहरा दिया। वहीं अब इस मामले में गहन जाँच के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम गिरफ्तार दीप सिद्धू और इकबाल सिंह को आज लाल किला लेकर पहुँची, जहाँ लाल किले पर हुई घटना के सीन को रीक्रिएट किया गया।

बता दें, हिंसा उकसाने के आरोपितों दीप सिद्धू और इकबाल सिंह को लेकर दिल्ली पुलिस शनिवार को उन रास्तों पर गई, जहाँ-जहाँ से उपद्रवी लाल किले तक पहुँचे थे। लाल किले के भीतर दोनों कहाँ-कहाँ गए और क्‍या-क्‍या किया और किस प्रकार हिंसा के बाद ये लोग लौटकर गए। पुलिस ने यह जानने के लिए सीन रीक्रिएट किया है।

पुलिस के अनुसार, 26 जनवरी को लाल किले में हुई हिंसा और अराजकता के पीछे मुख्य रूप से दीप सिद्धू का हाथ था। उसे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के दल ने सोमवार की रात को हरियाणा में करनाल बाइपास के पास से गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी से पहले दीप सिद्धू लगातार वीडियो के माध्यम से बयान जारी कर रहा था। पता चला था कि पंजाबी एक्टर जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करता है, उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है। ये महिला मित्र भारत से बाहर विदेश में बैठकर सिद्धू के वीडियो अपलोड करती थी। इसके पीछे सिद्धू की चाल जाँच एजेंसियों को भटकाने की थी। वो पेशेवर अपराधियों की तरह ‘खेल’ रहा था।

गौरतलब है कि हिंसा के बाद, दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू, जुगराज सिंह, गुरजोत सिंह और गुरजंत सिंह पर एक-एक लाख रुपए के नकद इनाम की घोषणा की थी जबकि जसबीर सिंह, बूटा सिंह, सुखदेव सिंह और इकबाल सिंह पर 50,000-50,000 रुपए इनाम रखा। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और करीब 500 पुलिसकर्मियों सहित कई घायल हुए थे।

लॉकडाउन में मामूली गलती करने वालों पर CM योगी मेहरबान: वापस होंगे 2.5 लाख से अधिक केस

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण में लॉकडाउन के दौरान मामूली या हल्की गलती करने वालों पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा दिल दिखाया है। लॉकडाउन के दौरान कोविड प्रोटोकॉल में छोटी गलती करने वालों के खिलाफ प्रदेश सरकार केस वापस लेगी।

सीएम योगी के इस सराहनीय फैसले को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस केस वापसी के फैसले से करीब ढाई लाख से अधिक लोग लाभांवित होंगे। सीएम योगी ने कहा कि कोरोना वायरस के नियंत्रण को लेकर लॉकडाउन लगाया गया था। लॉकडाउन के दौरान कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करने वालों को पकड़ कर पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। 

सीएम ने कहा कि आम जनता पर करीब ढाई लाख मुकदमे दर्ज किए गए थे जिन्हें अब वापस लिया जाएगा। इन सभी के खिलाफ मास्क न पहनने या स्तरीय मास्क न पहनने जैसे मामले में केस दर्ज हैं। इसके साथ ही कहीं-कहीं पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर भी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अब इन प्रकरणों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहनीय फैसला लिया है। 

इससे पहले योगी सरकार कोरोना गाइड लाइन का पालन न करने और लॉकडाउन तोड़ने को लेकर व्यापारियों पर दर्ज मुकदमे हटाने का भी ऐलान कर चुकी है। सीएम योगी के इस फैसले से लोगों को काफी राहत मिली है।

कोर्ट कचहरी के नहीं लगाने होंगे चक्कर

सीएम योगी के लॉकडाउन में आम जनता पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने के फैसले के बाद लोगों को बड़ी राहत मिली है। लोगों को अब कोर्ट-कचहरी के झंझट से छुटकारा मिल गया है। इससे पहले यूपी सरकार प्रदेशभर के व्यापारियों पर भी कोविड-19 और लॉकडाउन तोड़ने को लेकर दर्ज किए गए मुकदमे वापस ले चुकी है। तभी से सरकार आम जनता पर भी दर्ज मुकदमे वापस लेने का विचार कर रही थी। 

ऐसा करने वाला यूपी देश का पहला राज्य

कोविड-19 प्रोटोकॉल और लॉकडाउन उल्‍लंघन के मुकदमे वापस लेने की घोषणा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्‍य है। अब आम जनता पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के फैसले के बाद भी यूपी पहले पायदान पर पहुँच गया है। सरकार मुकदमे वापस लेने के साथ ही व्यापारियों को भविष्‍य में ऐसी स्थितियों में विशेष एहतियात बरतने की चेतावनी भी दे चुकी है। इन मुकदमों की वापसी से पुलिस और न्‍यायालय से भी बोझ कम होगा और उन्‍हें आवश्‍यक चीजों की जाँच के लिए मौका मिल सकेगा।  

लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर दर्ज हुए थे मुकदमे

कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ने और लॉकडाउन के उल्लंघन के कारण राज्य के हजारों व्यापारियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। इससे व्यापारी परेशान थे। कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा था कि अब इन व्यापारियों को कोविड-19 और लॉकडाउन तोड़ने के मामलों में पुलिस और कचहरी की दौड़ नहीं लगानी होगी। कहाँ-कितने व्यापारी और लोगों को इससे राहत मिलेगी, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि करीब एक लाख व्यापारियों पर कोविड उल्लंघन के मुकदमे दर्ज किए गए थे।

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के दिशा निर्देशन में यूपी ने कोरोना के खिलाफ सफलता हासिल की है। सकारात्‍मक कोविड मैनेजमेंट के साथ कोरोना मुक्‍त प्रदेश की ओर बढ़ते यूपी के कदम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में कोरोना का रिकवरी रेट 98 प्रतिशत हो गया है।

‘अखंड भारत बनाने के लिए PM मोदी नहीं कटा रहे दाढ़ी-बाल’: ज्योतिषी के दावे से उड़े पाकिस्तानियों के होश

सोशल मीडिया पर मोदी को लेकर पाकिस्तान का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक पाकिस्तानी ज्योतिषी को भारत के प्रधानमंत्री के बारे अजीबोगरीब दावे और निष्कर्ष निकालते हुए देखा जा सकता है। बता दें, यह शो पिछले साल 31 दिसंबर को नियो टीवी नेटवर्क पर प्रसारित किया गया था, हालाँकि यह अब वायरल हो गया है।

ज्योतिषी ने दावा किया, “नवंबर 2019 के बाद से मोदी का बुरा समय चल रहा है। नरेंद्र मोदी के मुख्य ज्योतिषियों में से एक संस्थापक (भाजपा के) है उनका नाम मुरली मनोहर जोशी है। जो ज्योतिषी का इनका पूरा मंडप चलाता है।” जानकारी के लिए बता दें जोशी फिजिक्स के प्रोफेसर थे, कोई ज्योतिषी नहीं थे। हालाँकि, वह व्यक्ति यहीं नहीं रुका। उसने पीएम मोदी के बारे में अपनी मनगढंत कहानी को चालू रखा।

उसने आगे कहा, “भारतीय प्रधानमंत्री जानबूझकर अपनी दाढ़ी नहीं कटा रहे है, न बाल काट रहे है और वह ‘अखंड भारत’ के सपने को हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से ‘हवन’ कर रहे है। साथ ही मोदी के गुरु ने बताया है कि वह नंबर के 1 नेता हैं और कल्कि के अवतार हैं।” भारत की योजनाओं से परेशान, ज्योतिषी ने आशा व्यक्त की कि पीएम मोदी अखंड भारत ’बनाने की अपनी योजनाओं में सफल न हो।

वहीं पाकिस्तानी कमेंटेटर और पत्रकार नायला इनायत द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में यह कहते हुए सुना जा सकता है, ”आपने देखा होगा कि पीएम मोदी ने अपनी दाढ़ी और मूंछें बढ़ाई हैं। इसका उद्देश्य मराठा नायक (छत्रपति शिवाजी महाराज) से मिलता जुलता है। यह वही शासक है जिसने औरंगजेब के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मोदी उनकी नकल करने की कोशिश कर रहे हैं। वह अपनी छवि बनाने के लिए कोई न कोई हिमाकत कर सकता है और ये लगातार जारी रखने की प्रक्रिया है।”

गौरतलब है कि अगर हम इस मामले में भारत की बात करे तो वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और पत्रकार बरखा दत्त ने भी पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते दाढ़ी के बारे में लंबी चर्चा की थी।

शशि थरूर ने कहा कि दिन पर दिन पीएम मोदी की दाढ़ी-मूँछ बढ़ती ही जा रही है, वो ऐसा कर के दिखाना चाहते हैं कि वो नए भारत के ‘ऋषिराज’ हैं। पीएम एक राजर्षि की भूमिका में खुद को प्रदर्शित करना चाहते हैं, जो भगवा वस्त्र पहने हुए हैं। इसके बाद बरखा दत्त ने भी इसे ‘मॉडर्न पॉलिटिक्स’ बताया।

उन्होंने कहा कि आप क्या दिखाना चाहते हैं, क्या सन्देश देना चाहते हैं और कैसी छवि प्रदर्शित करना चाहते हैं- ये सब आजकल की आधुनिक राजनीति का अंग बन गए हैं। इसके बाद शशि थरूर को इस बात से समस्या हो गई कि पीएम मोदी संप्रदाय विशेष की टोपी क्यों नहीं पहनते? उन्होंने दावा किया कि वो हर धार्मिक आयोजन में उनके प्रतीक चिह्नों को अपनाते हैं लेकिन इस्लामी चिन्हों से दूर भागते हैं।

शशि थरूर ने कहा कि ‘ऋषिराज’ वाली छवि दिखाने के पीछे कारण ये है कि वो खुद को एक पवित्र व्यक्ति के रूप में दिखा सकें, जो एक राजा भी है। बकौल थरूर, पीएम मोदी चाहते हैं कि लोग उन्हें एक ऐसे ऋषि के रूप में जानें, जो एक योद्धा भी है। बरखा दत्त ने भी शशि थरूर की बातों का समर्थन किया।