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59 कारसेवक जला दिए गए थे जिंदा… उस गोधरा कांड का मुख्य आरोपित रफीक हुसैन गिरफ्तार, 19 साल से था फरार

पुलिस ने 19 साल बाद गोधरा साबरमती एक्सप्रेस नरसंहार कांड के मुख्य आरोपित रफीक हुसैन भटुक को गोधरा शहर से गिरफ्तार कर लिया है। 51 वर्षीय रफीक हुसैन भटुक 2002 से फरार चल रहा था। बता दें कि इस घटना में 59 कारसेवकों की मौत हुई थी, जब मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन के एक कोच में आग लगा दी गई थी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पंचमहल जिले की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने कहा कि 51 साल का रफीक हुसैन भटुक गोधरा कांड के आरोपियों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था जोकि पूरी साजिश में लिप्त था। उन्होंने बताया कि रफीक हुसैन भटुक पिछले 19 सालों से फरार चल रहा था।

गुप्त सूचना के आधार पर गोधरा पुलिस ने रविवार (14 फरवरी) रात को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सिग्नल फलिया के एक घर में छापेमारी की और भटुक को वहाँ से गिरफ्तार किया।”

पाटिल ने बताया, “भटुक आरोपितों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जिन्होंने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन कोच को जलाने की पूरी साजिश रची थी, जिसके लिए उसने भीड़ को उकसाया और ट्रेन के कोच को जलाने के लिए पेट्रोल का इंतजाम किया था। जाँच के दौरान नाम सामने आने के तुरंत बाद वह दिल्ली भाग गया था।”

बता दें कि गोधरा कांड के मुख्य आरोपित के खिलाफ हत्या एवं दंगा फैलाने समेत अन्य आरोप भी हैं। पाटिल ने कहा कि वो आगे की जाँच के लिए गोधरा रेलवे पुलिस को उसे सौंप देंगे।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड में 59 कारसेवक मारे गए थे, जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। भटुक ने ही इस पूरी घटना की साजिश रची थी। जिसके चलते जिंदा कारसेवकों को आग में झोंक दिया गया था। आज भी इस घटना को याद कर लोगों के रूह कांप जाते है।

‘गुलामी की मानसिकता वालों ने लिखा इतिहास, राष्ट्र रक्षक सुहेलदेव को नहीं दिया मान’: PM मोदी ने किया शिलान्यास

उत्तर प्रदेश के बहराइच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महाराजा सुहेलदेव मेमोरियल का शिलान्यास किया। इस दौरान वहाँ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष पंचायत चुनाव और अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। यूपी का राजभर समुदाय खुद को महाराज सुहेलदेव का वंशज मानता है। इस दौरान सीएम योगी ने भी राजा सुहेलदेव को याद किया।

उन्होंने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के लिए इतना बड़ा कार्यक्रम किया है और दुनिया को उनकी शौर्य गाथा बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि ये आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांता से इस धरती को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले धर्मरक्षक महाराजा सुहेलदेव की पावन जयंती का कार्यक्रम है। उन्होंने कार्यक्रम में पीएम मोदी का भी स्वागत किया।

सीएम योगी ने कहा, “भारतीय स्वाभिमान, संस्कृति और शाश्वत सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले महान शासक, ‘राष्ट्र रक्षक’ महाराजा सुहेलदेव जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि श्रद्धांजलि। आपका पराक्रम और संघर्ष हमें राष्ट्र आराधना के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।” बता दें कि राजा सुहेलदेव पर अमिश त्रिपाठी ने एक पुस्तक भी लिखी है, जिस पर फिल्म बनाने की योजना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान अपने पराक्रम से मातृभूमि का मान बढ़ाने वाले, राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव की जन्मभूमि और ऋषि मुनियों ने जहाँ तप किया, बहराइच की उस पुण्यभूमि को नमन करते हुए लोगों को बसंत पंचमी की मंगलकामनाएँ दी। उन्होंने कामना की कि माँ सरस्वती भारत के ज्ञान-विज्ञान को और समृद्ध करें। उन्होंने कहा कि ये आधुनिक और भव्य स्मारक, ऐतिहासिक चित्तौरा झील का विकास, बहराइच पर महाराजा सुहेलदेव के आशीर्वाद को बढ़ाएगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि आज महाराजा सुहेलदेव जी के नाम पर बनाए गए मेडिकल कॉलेज को एक नया और भव्य भवन भी मिला है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ वो नहीं है, जो देश को गुलाम बनाने वालों, गुलामी की मानसिकता के साथ इतिहास लिखने वालों ने लिखा, भारत का इतिहास वो भी है जो भारत के सामान्य जन में, भारत की लोकगाथाओं में रचा-बसा है। जो पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि बीते कुछ सालों में देश भर में इतिहास, आस्था, अध्यात्म, संस्कृति से जुड़े जितने भी स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनका बहुत बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देने का भी है। उत्तर प्रदेश तो पर्यटन, तीर्थाटन दोनों के मामले में समृद्ध भी है और इसकी क्षमताएँ भी अपार हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के अनेक ऐसे सेनानी हैं, जिनके योगदान को अनेक वजहों से मान नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि चौरी-चौरा के वीरों के साथ जो हुआ, वो क्या हम भूल सकते हैं? महाराजा सुहेलदेव और भारतीयता की रक्षा के लिए उनके प्रयासों के साथ भी यही प्रयास किया गया।

‘जम्मू कश्मीर को 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद में झोंका, PM मोदी मेरे आदरणीय’: PDP के पूर्व सांसद

‘जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP)’ से राज्यसभा सांसद के रूप में हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले नज़ीर अहमद लावे ने कहा है कि जम्मू कश्मीर पर सिर्फ 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद थोपा। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्लाह की ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ और कॉन्ग्रेस पार्टी ने मिल कर जम्मू कश्मीर को आतंकवाद के रास्ते में झोंक दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों की गलतियों का खामियाजा आज भी जनता भुगत रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक हजारों मासूम बेगुनाह इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में जम्मू कश्मीर ने अपने हजारों नौजवानों को खो दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को इसकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ रही है। नज़ीर ने कहा कि इन दोनों पार्टियों के किए का फायदा पाकिस्तान ने उठाया। यही आतंकवाद की वजह है।

बकौल PDP नेता नज़ीर अहमद लावे, इन्हीं कारणों से देश और दुनिया का जम्मू कश्मीर के प्रति नजरिया बदल गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है और जब भी सदन में या पीएम के सामने व्यक्तिगत रूप से कोई बात रखने का मौका मिला तो उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया है। उन्होंने पीएम मोदी को जानकारी दी कि जम्मू कश्मीर बेहद ही गरीब राज्य है। उन्होंने कहा,

“जम्‍मू कश्‍मीर का विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म करने, अनुच्‍छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्‍य के विभाजन से वहाँ के लोग विकास की दौड़ में और पीछे हो गए हैं। इस फैसले का अब तक कोई फायदा सामने नहीं आया है और आएगा भी नहीं। ये सबसे बड़ा नुकसान वहाँ की जनता को हुआ है। इससे जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की भावनाएँ जुड़ी हैं। मैंने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए मजबूती से अपनी बात उठाई थी।”

उन्होंने कहा कि उनकी मुहिम विफल रही। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होंने संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत ही अपनी बात उठाई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को दोबारा सही समय पर राज्य का दर्जा देने का वादा किया है, लेकिन ऐसा किया ही क्यों गया? उन्होंने पीएम मोदी को ‘आदरणीय’ बताते हुए कहा कि वो हमेशा गंभीरता से उनकी बातों को सुनते थे।

बता दें कि इस संसद सत्र में गुलाम नबी आज़ाद, शमशेर सिंह, नज़ीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फयाज राज्यसभा से रिटायर हुए हैं। पीएम मोदी ने भी चिंता जताई थी कि गुलाम नबी आज़ाद के बाद इस पद को जो भी नेता संभालेंगे, उन्हें उनसे मैच करने में काफी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा था कि आज़ाद अपने दल के साथ-साथ अपने देश और सदन की भी चिंता करते थे। उन्होंने इस दौरान उस आतंकी हमले को भी याद किया, जिसमें 8 गुजराती पर्यटकों की मौत हो गई थी।

‘वो किसान है.. मृदुभाषी है.. कुत्ता घुमाती है’: दिशा रवि के लिए एक हुए वामपंथी, दिल्ली पुलिस HQ के सामने होगा प्रदर्शन

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से ट्वीट की गई टूलकिट को भले ही डिलीट कर दिया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस अब इसके तह तक पहुँच रही है। लेकिन, इसके आरोपितों के पक्ष में वामपंथी गोलबंद होने लगे हैं और समर्थन में उतर आए हैं। जहाँ ‘द प्रिंट’ ने दिशा रवि की महिमा के गुण गाए हैं, वहीं कविता कृष्णन सरीखे पीटर फ्रेडरिक के बचाव में उतर आए। उन्होंने दावा किया कि पीटर अमेरिका और दुनिया को RSS की ‘तानाशाही नीतियों’ के बारे में बताता है।

कविता ने लिखा कि पीटर फ्रेडरिक को इसके लिए धन्यवाद किया जाना चाहिए, क्योंकि वो तथ्यों के साथ दुनिया को भाजपा की ‘नाजी स्टाइल की तानाशाही’ के बारे में बता रहा है। वहीं ‘द प्रिंट’ ने बेंगलुरु से गिरफ्तार की गई क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को मृदुभाषी और एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद से प्रेरित बताया। उसके दोस्तों के हवाले से लिखा गया कि वो इकोलॉजिकल कंजर्वेशन का काम करती है और जलीय जीवन पर रिसर्च करती है।

‘द प्रिंट’ ने किया दिशा रवि का गुणगान

उसे क्लाइमेट चेंज के लिए संघर्ष करने वाला बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि उसका मैसूर में एक पारिवारिक फार्म है, जहाँ वो अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ जाती है। पड़ोसियों के हवाले से उसे ‘जर्मन शेफर्ड कुत्ता घुमाने वाली लड़की’ बताया गया है। उसके साथियों के हवाले से कहा गया है कि उन लोगों का खालिस्तानी संगठनों से कोई लिंक नहीं है। जबकि संगठन FFF के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज किए गए थे।

वहीं ‘न्यूजलॉन्ड्री’ वालों ने तो इन चीजों को छिपाने के लिए फिर से उसी तरह कपिल मिश्रा के नाम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जैसे दिल्ली दंगों के समय ताहिर हुसैन जैसे आरोपितों के लिए किया गया था। मेघनाद ने एक खबर लिख कर दावा किया कि उसने ‘हिन्दू इकोसिस्टम’ के टेलीग्राम ग्रुप के कई कंटेंट्स एक्सेस किए हैं। दिल्ली में मार डाले गए रिंकू शर्मा के पीड़ित परिवार की मदद करने वाले कपिल मिश्रा को फिर से निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ की उपाध्यक्ष रही कवलप्रीत कौर ने लोगों को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन के लिए बुलाया है, ताकि दिशा रवि की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया जा सके। ये प्रदर्शन मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को दोपहर में होगा। इतिहासकार एस इरफ़ान हबीब ने तो दिशा की तुलना भगत सिंह से कर डाली। वहीं बेंगलुरु में दिशा रवि के समर्थन में वामपंथियों ने प्रदर्शन किया।

CPI की सुचेता डे ने हास्यास्पद रूप से दिशा रवि के खिलाफ कार्रवाई को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से जोड़ते हुए आरोप लगा दिया कि बेटियों को जेल में डाला जा रहा है। कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ ने दावा किया कि दिशा रवि किसान परिवार से है। प्रशांत भूषण ने भी दिशा रवि की गिरफ़्तारी के खिलाफ बयान जारी किया। झूठे आरोप लगाए कि सिर्फ ‘टूलकिट बनाने के लिए’ गिरफ़्तारी हुई है।

उधर निकिता जैकब ने बयान जारी कर कहा है कि वो टूलकिट सिर्फ एक ‘सूचना पैकेज’ था और उसका उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं था। निकिता ने ये भी कहा कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के लिए समर्थन जुटाया और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उसने कहा है कि जो इस आंदोलन के बारे में सब कुछ जानना चाहते थे, उनके लिए ये टूलकिट तैयार किया गया। जैकब वैश्विक पर्यावरण संगठन ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन (XR)’ से जुड़ी हुई है। उसने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान के हिसाब से इस टूलकिट को तैयार करना वैध है।

भारत की कूटनीति के आगे बेबस ड्रैगन: पैंगोंग के उत्तरी किनारों से उखाड़े तंबू, ध्वस्त किए बंकर-शेल्टर

भारत की कूटनीति के आगे चीनी सेना को झुकना पड़ा। दोनों देशों के बीच कई महीने से चल रहे गतिरोध के बाद स्थिति सामान्य करने की कवायद तेज हो गई है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने आखिरकार पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर फिंगर 4 क्षेत्र को खाली करना शुरू कर दिया है, जिस पर उसने पिछले साल कब्जा कर लिया था और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति में बदलाव किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने फिंगर 5 और फिंगर 8 के बीच अपने कई शेल्टर्स और ढाँचे को भी हटा लिया है। साथ ही चीनी सैनिक अपने रहने के लिए बनाए गए शेल्टर (आश्रय) को भी नष्ट कर रहे हैं और अन्य संरचनाओं को भी हटा रहे हैं, जो उन्होंने कब्जे के दौरान स्थापित की थी। चीनी सेना के रुख को देखते हुए भारत ने भी नरमी दिखाते हुए अपने जवानों की संख्या कम कर दी है।

कहा जा रहा चालबाज चीनी सेना द्वारा उठाया गया यह कदम 10 महीनों से चल रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में दोनों देश के सेना अधिकारियों द्वारा लगातार बातचीत और सैनिकों के पीछे हटने संबंधी समझौते के अनुसार हो रहा है।

समझौते के मुताबिक, चीनी सैनिक फिंगर 8 पर वापस चले जाएँगे और भारतीय सेना पैंगोंग झील के उत्तरी तट के फिंगर 2 और 3 के बीच धन सिंह थापा पोस्ट पर वापस आ जाएगी। इसके साथ ही पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे से तैनाती भी वापस ले ली जाएगी। इसके अलावा, पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त सहित सैन्य गतिविधियों पर एक अस्थायी रोक होगी, जब तक कि स्थिति समान्य न हो जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि पैंगोंग लेक के दक्षिणी किनारे से टैंक भी हटा दिए गए हैं। दक्षिणी तट पर कुछ इलाकों में दोनों सेनाओं के टैंकों के बीच केवल 100 मीटर की दूरी ही रह गई थी, अब उन्हें दोनों तरफ से पूरी तरह वापस खींच लिया गया है और अब वे कुछ किलोमीटर दूर हैं।

बता दें, पैंगोंग झील में पास स्थित पर्वत को कई सैन्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिसे फिंगर्स कहा जाता है। असल में यह पर्वत उंगलियों की तरह दिखते भी है। झील के उत्तरी किनारे को आठ फिंगर्स में बाँटा गया है। भारत ने फिंगर 8 तक अपने क्षेत्र का दावा किया है और चीन फिंगर 4 तक अपने दावों पर अड़ा है।

दोनों देशों के इन दावों के चलते सेना कई बार सेना कई बार इन क्षेत्रों में आमने-सामने आ जाती है और पिछले कुछ महीनों से तो दोनों सेनाएँ कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति में बनी हुई है। वहीं सैनिकों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आती है।

गौरतलब है कि 2020 कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में पैंगोंग झील पर चीन की सेना ने अपना दावा ठोकना चाहा था। जिसका भारतीय सेना ने पुरजोर विरोध किया था। वहीं यह विरोध इस कदर बढ़ गया था कि 15 जून को चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। 20 भारतीय सैनिक इस हमले में शहीद हो गए। हालाँकि, चीन के कितने सैनिक मारे गए, उसने खुलासा नहीं किया।

यूपी पुलिस की पिस्टल छीन भाग रहा था, एनकाउंटर में ढेर हुआ ‘मौत का डॉक्टर’: पूर्व MLA की हत्या सहित 70 मामले थे दर्ज

लखनऊ के पॉश विभूतिखंड इलाके में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपित और कुख्यात शूटर गिरधारी विश्वकर्मा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराया। जब ये एनकाउंटर हुआ, तब खरगापुर इलाके में हत्या में प्रयुक्त असलहे की तलाश के लिए यूपी पुलिस गिरधारी को लेकर पहुँची थी। उससे पहले उसे गिरफ्तार किया जा चुका था। गिरधारी विश्वकर्मा ने यूपी पुलिस का असलहा छीन कर भागने की कोशिश की थी।

इसके बाद पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हुई, जिसमें वो मारा गया। गिरधारी ने पुलिस से बचने के लिए वही तरीका अपनाया, जो कानपुर के बिकरू कांड के आरोपित विकास दुबे ने अपनाया था। विकास दुबे भी इसी तरह के एनकाउंटर में मारा गया था। गिरधारी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे यूपी लाया गया। आउटर नॉर्थ जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस ने रोहिणी इलाके से उसे दबोचा था।

फिर गिरधारी को कानूनी कार्रवाई पूरी कर के लखनऊ लाया गया। रविवार (फरवरी 14, 2021) की रात यूपी पुलिस की टीम उस असलहे की बरामदगी के लिए उसे लेकर घटनास्थल तक पहुँची थी, जिसका उपयोग हत्याकांड में किया गया था। यूपी पुलिस अपने वाहन से गिरधारी को लेकर गई थी। वहाँ गाड़ी से उतरते समय ही उसने इंस्पेक्टर अख्तर उस्मानी का पिस्टल छीन कर पुलिस पर हमला कर दिया। फिर पिस्टल छीन कर भागने लगा।

पुलिस टीम के साथ SI अनिल सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने उसका पीछा किया। गिरधारी तब तक झाड़ियों में छिप कर भागने की फिराक में था। घटना की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दी गई, जिसके बाद लखनऊ के एसीपी ईस्ट समेत कई थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और गिरधारी को आत्मसमर्पण करने को कहा गया। घेराबंदी में वो लगातार लूटी हुई पिस्टल से फायरिंग कर के पुलिसकर्मियों को निशाना बनाता रहा।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिससे वो घायल हो गया। पुलिस ने इलाज के लिए उसे पास में स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के इमर्जेंसी वॉर्ड में पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सितम्बर 2019 में वाराणसी के तहसील सदर में माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी नितेश सिंह बबलू की दिनदहाड़े हुई हत्या में भी वो आरोपित था। उसे अपराध जगत में ‘डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता था।

गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ़ कन्हैया जुलाई 19, 2013 में आजमगढ़ के जीयनपुर कस्बे में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू सहित दो लोगों की हत्या में भी आरोपित है। वो अपने गिरोह डी-11 के सरगना आजमगढ़ के छपरा सुल्तानपुर निवासी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह का सबसे खास शॉर्प शूटर बन गया था। उस पर 70 से भी अधिक मामले दर्ज हैं। पूर्वांचल के एक माफिया सांसद का भी वो करीबी था।

‘टूलकिट सिर्फ सूचना पैकेज, किसानों को विलेन बनाया जा रहा’: बेल के लिए HC पहुँची निकिता, ISI से जुड़ा तार

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (फरवरी 16, 2021) को बताया कि वो इस बात की जाँच कर रहे हैं कि ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्वीट की गई टूलकिट में पीटर फ्रेडरिक का नाम कैसे जुड़ा। पीटर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का आदमी है। गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा में इन सबने मिल कर साजिश रची थी। पीटर 2006 से ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। डॉक्यूमेंट में उसका नाम भी शामिल था।

2006 में उसका नाम तब सामने आया था, जब उसने ‘कश्मीर-खालिस्तान (K2)’ के लिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले भजन सिंह भिंडर उर्फ़ इक़बाल चौधरी के साथ जुड़ा था। पीटर के हैंडल से एक ट्वीट भी किया गया, जिसमें कहा गया कि वो खालिस्तान का समर्थन नहीं करता है और ये सब मोदी सरकार द्वारा फैलाया गया एक मानसिक जंजाल है, ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। इस मामले में बेंगलुरु की तथाकथित क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि गिरफ्तार की जा चुकी है।

मुंबई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। दोनों फरार अभियुक्तों की तलाश जारी है। उक्त टूलकिट डॉक्यूमेंट में कई ऐसे हाइपरलिंक थे, जो खालिस्तान से जुड़े थे। दिशा ने टेलीग्राम से उसे ग्रेटा को भेजा। प्रियंका गाँधी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता दिशा की गिरफ़्तारी का विरोध कर चुके हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तक ने इसका विरोध किया।

पत्र जिस भिंडरावाले से जुड़ा हुआ है, उसका नाम हथियारों और ड्रग्स की अवैध सप्लाई में आ चुका है। पीटर का नाम टूलकिट में उन लोगों में शामिल था, जिन्हें फॉलो करने को कहा गया था। इस टूलकिट में कई गूगल ड्राइव्स, गूगल डॉक्स और अन्य वेबसाइट्स के लिंक्स थे। इनमें एक खालिस्तानी वेबसाइट ‘askindiawhy.com’ भी शामिल है। इस टूलकिट को सोशल मीडिया के ‘प्रभावशाली’ लोगों के बीच साझा किया गया था।

जनवरी 11 को हुई ज़ूम मीटिंग में टूलकिट के प्रचार-प्रसार के बारे में सब कुछ तय किया गया था। पुलिस का कहना है कि निकिता और शांतनु की गिरफ़्तारी के बाद ही इस मामले में अधिक खुलासा हो पाएगा। अब निकिता ने बयान जारी कर कहा है कि वो टूलकिट सिर्फ एक ‘सूचना पैकेज’ था और उसका उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं था। निकिता ने ये भी कहा कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के लिए समर्थन जुटाया और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

उसने कहा है कि जो इस आंदोलन के बारे में सब कुछ जानना चाहते थे, उनके लिए ये टूलकिट तैयार किया गया। जैकब वैश्विक पर्यावरण संगठन ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन (XR)’ से जुड़ी हुई है। उसने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान के हिसाब से इस टूलकिट को तैयार करना वैध है। जैकब के अनुसार, XR द्वारा ही इस टूलकिट को तैयार किया गया और इसके नेटवर्क में फैलाया गया। दिशा का संगठन ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर (FFF)’ भी XR का पार्टनर है।

निकिता जैकब और शांतनु मुलुक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका भी दायर कर दी है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। निकिता ने हाईकोर्ट से माँग की है कि उसे 4 हफ़्तों के लिए गिरफ़्तारी से राहत दी जाए, किसी भी पुलिस कार्रवाई से उसे अंतरिम राहत मिले और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वो FIR की कॉपी उससे शेयर करे। शांतनु मुलुक ने जो ईमेल बनाया, वही उस टूलकिट का ऑनर था।

निकिता जैकब ने अपनी जमानत याचिका में ये भी कहा है कि वो किसानों को ‘विलेन बनाए जाने’ और तीनों कृषि कानूनों से ‘होने वाले नुकसान’ को लेकर चिंतित थी। उसने कहा कि उसका कोई राजनीतिक, मजहबी या आर्थिक एजेंडा नहीं है। याचिका में दावा किया गया है कि आजकल महिलाओं के लिए दूसरे राज्यों में यात्रा करना कठिन है, क्योंकि इससे FIR हो जाती है। उसने आरोप लगाया कि ‘सोशल मीडिया ट्रॉल्स’ उसके फोन नंबर्स और व्यक्तिगत इन्फो सबको बाँट रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक़, इस प्रकरण में शामिल सभी ने ‘टूलकिट’ पूरी सावधानी से बनाई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक और अहम बात कही, वो ये कि इस टूलकिट में प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स का नाम भी शामिल है। इसमें सिर्फ मामले के आरोपित ही साबित कर पाएँगे कि क्यों टूलकिट में पीटर फ्रेडरिक का नाम मौजूद है। इसके पहले ग्रेटा थनबर्ग और दिशा रवि के बीच व्हाट्सएप चैट भी सामने आई थी। 

बसंत सिर्फ ऋतु नहीं, ज्ञान की उपासना से लेकर काम और मोक्ष का जीवंत उत्सव भी है

बसंत पंचमी हर वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसे माघ पंचमी भी कहते हैं। आज (फरवरी 16, 2021) बसंत पंचमी का त्योहार पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। विश्व में बेशक ऋतुओं का कोई स्पष्ट वर्गीकरण न हो पर भारत में वर्ष को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता है, उनमें वसंत अर्थात जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सोने सी चमकने वाली सरसों के पीले फूलों की चादर सी बिछ जाती है, नाना प्रकार के मनमोहक फूलों से प्रकृति धरती का शृंगार करती है। जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं है, कोयल की कूक से दिशाएँ गूँजने लगती हैं।

आमतौर पर बसंत के बारे में अब की पीढ़ी ये सब किताबों में पढ़ती है क्योंकि प्रकृति आज की पीढ़ी के लिए या तो टीवी में मौजूद है या फिर किताबों में। अब की पीढ़ी की कल्पनाएँ भी इतनी उर्वर नहीं कि उनकी कल्पनाओं में भी ऐसा बसंत हो! कहाँ है आपका बसंत? अपने फ़्लैट में मत खोजिए, ना ही शहरों की अट्टालिकाओं में, प्रकृति की गोद में ही बसंत से मुलाक़ात होगी।

चलिए आज की उन पीढ़ियों को बसंत से मुलाकात कराता हूँ। बसंत, बसंत पंचमी, मदनोत्सव, सरस्वती पूजा, कुम्भ का शाही स्नान, होली की प्रारम्भिक शुरुआत, शमशान में मौत के तांडव पर भारी जीवन उत्सव – बसंत यह सब कुछ है। यह लेख आज की उस व्यस्त पीढ़ी के लिए भी है, जो एक बार फिर जीवन के उत्सव में खो जाने को तैयार हैं।

ऋतु बसंत से जुड़ी पौराणिक मान्यता

आपको पता ही होगा कि बसंत ऋतु का सम्बन्ध प्रेम भाव से है, प्रेम को जिन्होंने हर रूप में अंगीकार किया ऐसे देव भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा का शास्वत पाठ भी सनातन की ही देन है। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी के नाम से भी उल्लेखित किया गया है।


देवी भगवती माँ सरस्वती

कहते हैं कि सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों में प्रमुख मनुष्यों की रचना की। पर ब्रह्मा अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कहीं न कहीं कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। वह दिन बसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य उत्सव मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

सरस्वती को बागेश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। मधुर संगीत और सुरों की सृजनकर्ता होने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।

बसंत: काम मानवता का हिस्सा है

बसंत को ऋतुओं का राजा यूँ ही नहीं कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, कामदेव ही इस मौसम को बेहद रूमानी कर देते हैं। आमतौर पर कामदेव को प्रेम का देवता माना गया है। इन्हें रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मनमथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत, पुष्पवान और पुष्पधंव नामों से जाना जाता है।

सनातन परम्परा में काम कभी वर्जित नहीं रहा, कामुकता हमेशा से मानवता का एक अभिन्न हिस्सा रही है। इसी वजह से आज मानवता का अस्तित्व है। अगर गुफा में रहने वाले मानव ने इसे त्याग दिया होता तो क्या आज हम होते। यह हमेशा से है और रहेगी, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि काम आपकी चेतना पर हावी हो जाए। कहा गया है कि अगर काम आपकी चेतना पर शासन करने लगे, तो आप एक विवश इंसान हो जाएँगे। फिर आपके और किसी जानवर के बीच कोई फर्क ही नहीं रह जाएगा।

खजुराहो: बाहर काम भीतर शांति

भारतीय संस्कृति ही है जहाँ खजुराहों और कोणार्क जैसे मंदिर हैं जो काम पर विजय के प्रेरक हैं। मंदिर के बाहर यौनरत मुद्राएँ हैं लेकिन कहीं भी मंदिर के भीतर इस तरह की कामोत्तेजक सामग्री नहीं है। यह प्रतीकात्मक रूप से हमेशा बाहरी दीवारों पर ही मिलेगी। इसके पीछे जो सनातन सोच है वह यह है कि अगर आप यह महसूस करना चाहते हैं कि भीतर क्या है तो आपको अपनी भौतिकता या शारीरिक पहलू को यहीं बाहर छोड़ देना होगा। शारीरिक पहलू आसान होते हैं, ये बाहर ही हैं। लेकिन जो भी उसके परे है, वह तब तक उतना वास्तविक महसूस नहीं होता जब तक कि वह आपके अनुभव में न आ जाए। भारतीय परम्परा में ऐसे हर संभव साधनों का निर्माण किया गया, जिनका भौतिकता को कम करने में प्रयोग किया जा सके और जीवन की उच्चतर संभावनाओं के प्रति लोगों को ज्यादा संवेदनशील बनाया जा सके। सनातन परम्परा में बिना प्रयोग किए किसी भी चीज को अस्वीकार नहीं किया गया। पूरा जीवन ही उत्सव है यहाँ और जिसने भी जीवन को पूरी उत्सवधर्मिता से जिया, वो ईश्वर के रूप में पूजनीय है।

वासुदेव श्रीकृष्ण ने दिया था वर

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूँ भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

पारंपरिक रूप से बसंत पंचमी बच्चों के विद्यारम्भ के लिए शुभ है। इसलिए देश के अनेक भागों में इस दिन बच्चों की पढाई-लिखाई का श्रीगणेश किया जाता है। बच्‍चे को प्रथमाक्षर यानी पहला शब्‍द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है। आन्ध्र प्रदेश में तो इसे विद्यारम्भ पर्व ही कहते हैं।

पतंगबाज़ी का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा।

ज्ञान की देवी भगवती सरस्वती

यों तो माघ का यह पूरा माह ही उत्साह से परिपूर्ण है, पर वसंत पंचमी का पर्व प्राचीनकाल से ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की विशेष कृपा का दिन है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन माँ शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बही खातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और माँ  सरस्वती की वंदना से करते हैं।

शिक्षा जो जीवन का पाठ पढ़ाए

आमतौर पर आज जिस तरह से मशीनी शिक्षा के हम आदी होते जा रहे हैं उतना ही असली शिक्षा से कहीं दूर भी होते जा रहे हैं। शिक्षा जो जीवन समृद्ध करे, विवेकवान, विचारवान बनाए। आज अधिक से अधिक लोग पढ़ तो रहे हैं, पूरा जीवन सूचनाओं के संग्रहण में खपा दे रहें हैं इस आशंका में कि हो सकता है शायद कभी जीवन में ये सब काम आए। ऐसे लोगों की पूरी ज़िन्दगी आपाधापी में बीत रही है। वे एक दिन जीने की आस में जीवन का सौंदर्य खो रहे हैं। न किसी काम में ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और न ही ठीक से उत्सवों का ही आनंद उठा पाते हैं।

ज्ञान प्राप्त होने के बाद व्यक्ति को ज्यादा शांत और ज्यादा विचारशील होना चाहिए। लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है। भारतीय परंपरा के अभिन्न अंग ये उत्सव जीवन को ज्यादा गहराई के साथ महसूस करने के लिए शुरू किए गए थे।

समस्या यह है कि लोगों ने जीवन को ज्यादा गहराई के साथ देखने की आदत ही खो दी है। आज जीवन इतना उथला हो चुका है कि उसमे गहराई बची ही नहीं है। परिणाम स्वरूप लोग हर चीज को केवल सतही नजरिए से ही देखने के आदी हो गए हैं।

ध्यान से देंखे तो जीवन की प्रक्रिया में ही शिक्षा है। आज हम जिसे शिक्षा कहते हैं, अगर वह जीवन से अलग है तो उसे हम शिक्षा नहीं कह सकते। क्योंकि अगर जीवन ही नहीं रहा तो शिक्षा किस काम की।

अब सवाल यह है कि कोई शिक्षा कैसे प्राप्त करता है। एक शख़्स जो कभी स्कूल नहीं गया। जो अपने खेतों में काम करता है, क्या आप उसे अशिक्षित कहेंगे? जमीन के बारे में वह आपसे ज्यादा जानता है। फसलों, मौसम, प्रकृति जैसी चीजों के बारे में उसकी जानकारी भी आपसे कहीं ज्यादा है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, “आप जितने संवेदनशील होंगे, आप उतनी ही सीमा तक जीवन को जान पाएँगे। तो ऐसे में जीवन के प्रति अपने को ज्यादा संवेदनशील बनाने के लिए हमें कुछ करना नहीं चाहिए? अगर हम संवेदनशील नहीं होंगे तो हम बिल्कुल नहीं जान पाएँगे। चूँकि हमारे अंदर संवेदनशीलता है, इसलिए जब मच्छर भी काटता है तो हमें पता चल जाता है। मान लीजिए आपकी त्वचा मोटी है, उसमें कोई संवेदनशीलता नहीं है। ऐसे में अगर आपको मच्छर काटता है तो आपको पता ही नहीं चलेगा। अस्तित्व को जानने के लिए चीजों को ध्यान से देखना होगा। जो भी हमारे इर्द-गिर्द है उसे ध्यान से देखकर ही आत्मसात किया जा सकता है। तब आप ज्यादा संवेदनशील होंगे। आप जितना ज्यादा संवेदनशील होंगे उतने ही अधिक जागरूक होंगे, जितने अधिक जागरूक होंगे उतना ही अधिक जीवन के करीब होंगे।”

बसंत अर्थात उत्सवों का मौसम

बसंत के आगमन के साथ ही होली, जो भारत का एक विशेष पर्व है, इसकी औपचारिक शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से ही हो जाती है। रंगों-उमंगों का त्यौहार रंगोत्सव ब्रज में वसंत पंचमी के दिन से शुरू हो जाएगा। भारत तथा विभिन्न देशों में मनाया जाने वाला यह उत्सव अगले पचास दिन तक चलेगा। ब्रज में बसंत पंचमी के दिन मंदिरों में ठाकुरजी को गुलाल अर्पण कर, रसिया, धमार आदि होली गीतों का गायन प्रारम्भ हो जाता है और मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों पर भी गुलाल के छींटे डाले जाते हैं।  

प्राचीन परम्पराओं के अनुसार, मंदिरों में होली की तैयारियों के साथ ही आम समाज में भी होली का आगाज़ हो जाता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णमासी की रात होलिका जलाए जाने वाले स्थानों पर होलिका के प्रतीक के रूप में रेड़ गाड़ दिया जाता है जो इस बात का भी प्रतीक है कि ब्रज में अब होली के पारम्परिक आयोजन शुरू हो गए हैं।


बरसाने की लट्ठमार होली

इसी दिन, राधारानी के गाँव बरसाना में बैलगाड़ियों पर शोभायात्रा निकाली जाती है। महाशिवरात्रि पर्व पर दूसरी और फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन तीसरी शोभायात्रा निकाली जाती है। फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन बरसाना में लट्ठमार होली खेली जाती है जो ब्रज की 50 दिन चलने वाली होली का प्रमुख आकर्षण है।

फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगपंचमी भी कहा जाता है। इस दिन वृन्दावन में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर सहित सभी मंदिरों में गुलाल के स्थान पर ठाकुरजी को टेसू के फूलों से बने रंग के छींटे देकर ब्रज में गीले रंगों की होली शुरू हो जाती है। यही रंग प्रसाद रूप में भक्तजनों पर भी छिड़का जाता है।

महाशमशान में मृत्यु के मंच पर जीवन का उत्सव

बनारस में इसी दिन बाबा विश्वनाथ दरबार में भी होली की शुरुआत होती है। महाकाल से लेकर महाशमशान तक रंगों के उत्सव के रूप में बसंत की शुरुआत मृत्यु के मंच पर जीवन का उत्सव मनाने की सीख महादेव की नगरी काशी की ही देन है।

‘मायानगरी की राजनीति.. कलियुग में गलत करने वाला ही राजा है’: सुशांत के साथ काम कर चुके अभिनेता की संदिग्ध मौत

2016 में आई बायोपिक फिल्म ‘एम० एस० धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम कर चुके बॉलीवुड अभिनेता संदीप नाहर ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा। पिछले कुछ महीनों में कई बॉलीवुड अभिनेताओं ने आत्महत्या की है, जिसमें अब उनका नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने आत्महत्या से पहले एक वीडियो भी अपने फेसबुक अकाउंट से शेयर किया, जिसमें उन्होंने एक नोट लिख रखा था।

ये वीडियो काफी डिस्टर्ब कर देने वाला था। संदीप नाहर ने फेसबुक पर लिखे नोट में न सिर्फ अपने संघर्षों के बारे में बताया बल्कि बॉलीवुड में हावी राजनीति को लेकर भी दुःख जताया। अपने नोट में उन्होंने लिखा था, “2 साल से मेरा जीवन एकदम बदल गया है और मैं ये बातें कभी किसी से शेयर भी नहीं कर सकता। दुनिया को लगता है कि उनका सब कुछ कितना अच्छा रहा है, क्योंकि वो हमारे सोशल मीडिया पोस्ट्स और स्टोरीज देखते हैं।”

उन्होंने आगे लिखा था, “ये सब कुछ झूठ होता है। हो सकता वो किसी के कहने पर ये सब डालता हो। दुनिया को अच्छा दिखाने के लिए और अपनी इमेज अच्छी बताने के लिए डालता हो। लेकिन, ऐसा नहीं है। हमारी बिलकुल नहीं बनती। कंचन 2 सालों से बोलती रहती है कि आत्महत्या कर लूँगी और तुम्हें फँसा दूँगी। देखो, आज ये नोट आ गया है। आज ये नौबत आ गई है कि मुझे ये स्टेप उठाना पड़ रहा है।”

बता दें कि कंचन शर्मा उनकी पत्नी हैं, जिनके बारे में संदीप नाहर ने लिखा है कि वो उनके पास्ट को लेकर हमेशा उनसे लड़ाई करती रहती थीं। उन्होंने लिखा है कि उनकी पत्नी उनकी इज्जत नहीं करती थी, गाली देती थी और परिवार के बारे में भला-बुरा कहती थी। उन्होंने लिखा था कि उनके लिए अब ये सब सुनना बर्दाश्त से बाहर हो गया था। उन्होंने बॉलीवुड को ‘मायानगरी’ बताते हुए लिखा कि यहाँ बहुत राजनीति होती है।

उन्होंने लिखा कि लोग उम्मीद देकर आपका वक़्त बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने लिखा, “बाद में आपको प्रोजेक्ट से निकाल दिया जाता है, एग्रीमेंट वगैरह होने के बाद भी। यहाँ लोग बिलकुल भी प्रैक्टिकल नहीं हैं। कोई इमोशन नहीं है। दिखावे की झूठी ज़िंदगी जीते हैं। वो वक़्त ही अच्छा था जब कच्चे घर होते थे और लोगों के बीच प्यार था। सब अपने-अपने में लगे रहते थे। आजकल सब अपने होकर भी पराये हैं।”

संदीप नाहर ने अपने दुःखों के बारे में बताते हुए लिखा था, “भीड़ में अकेला जीना भी एक कला है। ये कलियुग का दौर है। जो गलत कर रहे हैं, वो राजा हैं। वो खुश हैं। ईमानदारी से अच्छा व्यवहार करने से यहाँ लोग आपको छोटा समझते हैं। ऐटिटूड दिखाने वाले को सलाम करते हैं। अलग मामला है। बस अब मेरा दिल नहीं करता जीने का।” गोरेगाँव क्षेत्र में संदीप नहर कथित आत्महत्या को लेकर मुंबई पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच की बात कही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

अपनी सुसाइड नोट में संदीप ने लिखा था, “ये स्वर्ग और नरक.. शादी के बाद ही वो महसूस होता है। लेकिन, मैं पिछले 2 वर्षों से नरक भोग रहा हूँ। अनजाने में किसी का दिल दुखाया तो हाथ जोड़ कर माफ़ी। खुश रहिए और दूसरों को भी खुश रखिए। जैसी ज़िंदगी आप खुद जीना चाहते हैं, वैसी दूसरों को भी दीजिए। किसी को जबरन कैद में रख कर प्यार हासिल नहीं किया जा सकता। गलत शादी होने से काफी लोगों को मरते देखा है मैंने।”

बहन से ही ना करने लगे डेटिंग… खौफ में जी रहा 24 साल का लड़का क्योंकि पिता ने 500 बार डोनेट किया है स्पर्म

अमेरिका स्थित ऑरेगोन के रहने वाले 24 वर्षीय ज़ेव फोर्स (zave fors) की कहानी जितनी विचित्र है उतनी ही फनी भी। उसे हाल ही में पता चला कि उसके पिता ने लगभग 500 बार स्पर्म डोनेट (sperm donate) किया है।

फोर्स इस बात से इतना सहम गया कि उसने डेटिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया। उसे इस बात का डर था कि कहीं वो अपने ही सिब्लिंग्स (उसके पिता की संतान) से न टकरा जाए। 

पिछले कुछ सालों में फोर्स ने ऐसे 8 लोगों को खोजा है लेकिन उसे अभी तक नहीं पता है कि असल में उसके कितने भाई-बहन हैं। उसका सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं उसका सम्बंध उसके पिता की संतान से ही न बन जाए।

हाल ही में फोर्स ने अपना डीएनए टेस्ट कराया था, तब उसे पता चला कि उसके साथ स्कूल जाने वाला डैरन मक्लेन कोलन (Daron McLennan-Colon) उसका भाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उसे इतना याद था कि डैरन उसके साथ स्कूल जाता था लेकिन रिश्ते का अंदाज़ा नहीं था। 

इस बारे में बात करते हुए फोर्स ने बताया, “वो स्कूल में मुझसे 2 साल बड़ा था। भले लोग दावा करते हैं कि इस तरह के टकराव की सम्भावनाएं कम होती हैं लेकिन फिर भी मुझे शक के दायरे में रहना पड़ता है। मेरे अन्य भाई बहनों के साथ भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ है। वो एक-दूसरे के बेहद नज़दीक रहते थे। डैरन को भी ये बात जान कर हैरानी हुई कि उसका जन्म इस प्रक्रिया से हुआ है और नज़दीक ही उसकी बहन रहती है। उनमें से किसी के लिए भी इस बात पर भरोसा करना आसान नहीं था।”

टेस्ट के बाद फोर्स ने Ancestry.com की मदद से अपने पिता को ट्रेस किया। तब उसे पता चला कि उसके पिता ने बीते एक दशक में सैकड़ों बार स्पर्म डोनेट किया है और उनके लगभग 50 से ज़्यादा बच्चे हैं।

फोर्स का कहना है, “क्योंकि मुझे नहीं पता कि मेरे कितने भाई-बहन हैं, इसकी वजह से मेरी डेटिंग लाइफ तबाह हो गई है। जब मैं टिंडर या कोई और डेटिंग एप चलाता हूँ तो मुझे नहीं पता होता है कि कौन मुझसे सम्बंधित है या कौन नहीं है। मेरे हर रिश्ते में एक अजीब तरह का ख़तरा बना रहेगा। अपने हर पार्टनर का जेनेटिक परीक्षण करने के बावजूद मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हो पाऊँगा कि हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है।”

फ़िलहाल फोर्स की अपने परिवार को लेकर खोज जारी है।