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कौन है Pieter Friedrich? टूलकिट मामले में ‘फैक्टचेकर’ के साथ क्यों आ रहा ISI कनेक्शन वाले आदमी का नाम?

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को ‘टूलकिट’ मामले में बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक़ भारत के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर चलाए गए इस अभियान में एक विदेशी मूल के संदिग्ध एक्टिविस्ट का नाम सामने आ रहा है। ‘टूलकिट’ की आड़ में भारत के खिलाफ़ रचे गए अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र की जाँच में पीटर फ्रेडरिच (Pieter Friedrich) नाम के व्यक्ति की भूमिका सामने आई है।

पुलिस का कहना है कि भारत के रक्षा एजेंसियों को 2006 से ही पीटर फ्रेडरिच की तलाश है, जब यूपीए की सरकार सत्ता में थी। पीटर का नाम भजन सिंह भिंडर या इकबाल चौधरी की कंपनी में भी शामिल था और तभी से ही वह जाँच एजेंसियों के रडार पर था।

भजन सिंह भिंडर आईएसआई की K2 डेस्क का प्रबल समर्थक/प्रस्तावक था। पीटर के भिंडर से सम्पर्क में आने की सबसे बड़ी वजह थी – वो ‘इनफो वॉर ऑपरेशन’ (info war operation) चलाता था और खुफ़िया जानकारियों का लेन-देन करता था। 

पुलिस के मुताबिक़ इस प्रकरण में शामिल सभी ने ‘टूलकिट’ पूरी सावधानी से बनाई है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक और अहम बात कही, वो ये कि इस टूलकिट में प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स का नाम भी शामिल है। इसमें सिर्फ मामले के आरोपित ही साबित कर पाएँगे कि क्यों टूलकिट में पीटर फ्रेडरिच का नाम मौजूद है। इसके पहले ग्रेटा थनबर्ग और दिशा रावी के बीच व्हाट्सएप चैट भी सामने आई थी। 

स्वीडन की कथित जलवायु परिवर्तन ‘एक्टिविस्ट’ ग्रेटा ने सोशल मीडिया पर भारत विरोधी ‘टूलकिट’ साझा की थी। इसके बाद दिशा ने उससे कहा था, “क्या कुछ समय के लिए हम इस मुद्दे पर कोई बात नहीं करें। मैं इस पर वकीलों से बात करने जा रही हूँ।” रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिशा रावी और निकिता जैकब ने पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के धलीवाल के साथ ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लिया था, जिसने पहले ही खुद को ‘खालिस्तानी समर्थक’ बताया था।

मीटिंग में उन्होंने गणतंत्र दिवस के पहले ट्विटर पर प्रोपेगेंडा फैलाने और ‘स्टॉर्म’ (storm) लाने की योजना पर चर्चा की थी। जिसके बाद देश की राजधानी में तथाकथित ‘किसानों’ ने विरोध प्रदर्शन की आड़ में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया। हमने पहले उन मीडिया संस्थानों और फैक्ट चेकर्स पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि जिनका नाम टूलकिट में शामिल है। ऑल्टन्यूज़ का ज़ुबैर उनमें से ही एक है। वहीं दिशा रावी फ़िलहाल पुलिस हिरासत में है।        

पाखंडी बाबा, महिला भक्तों के साथ यौन संबंध… आमिर खान के बेटे जुनैद खान की डेब्यू फिल्म ‘महाराजा’ की कहानी

आमिर खान (Aamir Khan) की पहली पत्नी रीना दत्ता के बेटे जुनैद खान जल्द बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं। जुनैद खान की डेब्यू फिल्म की शूटिंग 15 फरवरी से शुरू हो गई है। इस फिल्म का नाम ‘महाराजा’ है और यह सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है।

इस फिल्म में जुनैद के साथ शालिनी पांडे, शरवरी वाघ और जयदीप अहलावत भी काम कर रहे हैं। फिल्म की शूटिंग शुरू होने पर जुनैद की बहन इरा ने एक फोटो शेयर की है, जिसमें वो भाई जुनैद को फूलों का गुलदस्ता देती नजर आ रही हैं।

इस फोटो के साथ इरा खान ने लिखा है, “जुन्नू, यह उसका पहला प्ले या पहला शो या हमारा साथ में पहला प्ले नहीं था बल्कि… आज उसकी शूटिंग का पहला दिन है। और मुझे यह तस्वीर बहुत पसंद है। वह पिछले कुछ सालों से ऐक्टिंग में है लेकिन फिर भी अभी मेरे लिए नया है। उसने मेरे प्ले में भी काम किया है तो मैं उससे ऊपर हूँ… लेकिन किसी और चीज से बढ़ कर मैं उसकी छोटी बहन हूँ।”

अपनी पोस्ट में इरा ने आगे लिखा, “उसका प्रफेशनलिजम बेहतरीन है। मैं उसके लिए बेहद उत्साहित हूँ और उसे सभी को पीछे छोड़ते हुए देखना चाहती हूँ और उन सभी को इसकी प्रॉपरनेस से परेशान करना चाहती हूँ। (उसने मुझे फिल्म के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है। बहुत इरिटेटिंग है, मैं अंदर की बात जानना चाहती हूँ) और उसके बाद मैं सेट पर जाकर उसे परेशान और शर्मिंदा करूँगी।”

बात करें फिल्म की कहानी की तो अभी तक आई खबरों के मुताबिक, यह फिल्म एक पीरियड ड्रामा फिल्म है। फिल्म में साल 1862 के एक मशहूर बाबा के केस को दिखाया जाएगा। इस केस में एक पाखंडी बाबा मशहूर जर्नलिस्ट और समाजसेवी करसनदाल मलीजी पर उनके संप्रदाय को बदनाम करने का आरोप लगाएगा।

खबरें हैं कि इस फिल्म में पत्रकार समाज सुधारक करसनदास मलजी का रोल जुनैद खान करेंगे। वहीं इस फिल्म में ‘पाताल लोक’ फेम जयदीप अहलावत (Jaideep Ahlawat) भी एक मुख्य किरदार में होंगे। जयदीप का रोल फिल्म में जादूनाथजी बृजनाथजी महाराज होगा, जिसका महिला भक्तों के साथ यौन संबंध होगा। जुनैद उसके कारनामे को सबके सामने लाएँगे।

गौरतलब है कि हाल ही में आमिर खान की बेटी इरा खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इन्स्टाग्राम’ पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा कीं। तस्वीर में उनके साथ नुपुर शिखरे मौजूद थे और तस्वीर का कैप्शन था, “It is honour to make promises to him” (उसके साथ वादे करना गर्व की बात है)। इरा खान के इस पोस्ट के चलते इस बात की लगभग पुष्टि हो चुकी है कि वह नुपुर शिखरे को डेट कर रही हैं। इरा खान द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में देखा जा सकता है कि दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा रहे हैं।

फेसबुक पोस्ट को लेकर हयात खान की शिकायत पर भूषण सोनी गिरफ्तार, मजहबी भावना को ‘ठेस’ का आरोप

गुजरात के सोनगढ़ में पुलिस ने सोमवार (फरवरी 15, 2021) को एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर घृणा भरे संदेश (हेट स्पीच) और आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करने के आरोप में 32 वर्षीय भूषण सोनी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि हयात खान पठान नामक व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत के बाद संदेशों और तस्वीरों को भी इंटरनेट से हटा दिया गया है। आरोपित भूषण सोनी सूरत में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता है और वह सोनगढ़ का निवासी है।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि कथित घृणा संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करके धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों को लेकर रमणिया पार्क सोसाइटी के निवासी भूषण सोनी के खिलाफ रविवार को तापी जिले के सोनगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी।

पुलिस ने हयात खान की शिकायत के आधार पर धर्म, जाति, जन्म स्थान, और भाषा के आधार पर सोनी के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के संबंध में आईपीसी 153 (ए) के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा, धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के लिए 295 (ए) के अंतर्गत भी केस दर्ज किया गया है।

पुलिस ने कहा कि भूषण सोनी के पोस्ट को विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप्स पर कई बार शेयर किया गया था, जिसके बाद कई लोग सोनगढ़ पुलिस स्टेशन पहुँचे और पुलिस से आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

सोनगढ़ पुलिस इंस्पेक्टर एचसी गोहिल ने कहा, “सोनी को रविवार को अपने फेसबुक पेज पर अभद्र पोस्ट अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने हमारे निर्देशों पर अपने अकाउंट से इन संदेशों को हटा दिया है। हमें पता चला है कि करीब एक साल पहले भी उसने अपने फेसबुक पेज पर इस तरह के अभद्र संदेश और तस्वीरें डाली थीं। उस समय, कोई भी पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई थी और स्थानीय निवासियों द्वारा उन्हें इस तरह की हरकत दोबारा ना करने की भी सख्त सलाह दी गई थी।”

वामपंथी कह रहे ‘हत्या’, TMC बता रही ‘आत्महत्या’ – मैदूल इस्लाम मामले में कॉन्ग्रेसी भी घेर रहे ममता बनर्जी को

पश्चिम बंगाल में 11 फरवरी को वाम मोर्चे द्वारा राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ की ओर कूच करने के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प में घायल हुए डीवाईएफआई के एक कार्यकर्ता की सोमवार (फरवरी 15, 2021) सुबह मौत हो गई। इससे राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

माकपा ने युवा कार्यकर्ता की मौत के लिए तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे ‘हत्या’ करार दिया है। वहीं, राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने इसे ‘आत्महत्या’ बताया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि बांकुड़ा जिले के कोतुलपुर के निवासी मैदूल इस्लाम मिद्दा का दक्षिण कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।

उन्होंने बताया कि मिद्दा की हालत लगातार बिगड़ रही थी और सुबह अत्यधिक रक्तस्राव से उनकी मौत हो गई। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शेक्सपीयर सरनी पुलिस थाने में मिद्दा की मौत के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम हर पहलू को ध्यान में रख कर मामले की जाँच कर रहे हैं। शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा।’’ इस बीच, माकपा ने मिद्दा की मौत के लिए तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। माकपा के नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘यह हत्या का मामला है। मार्च के दौरान जिस तरह से छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, यह दर्शाता है कि तृणमूल सरकार डरी हुई है और चिंतित है।’’ 

पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए, सुजान चक्रवर्ती ने कहा, “यह सिर्फ एक मौत नहीं है, यह एक हत्या है- सरकार ने एक युवा को मार डाला है, जो अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाला था और सभी के लिए शिक्षा और नौकरी की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहा था।”

भाजपा के प्रदेश प्रमुख दिलीप घोष ने भी मिद्दा की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए तृणमूल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। यह दर्शाता है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ने सभी चीजों पर नियंत्रण खो दिया है। पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है।’’

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पंचायती मामलों के मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने कहा, ‘‘कोई भी मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उस दिन पुलिस ने बहुत समझदारी से कार्रवाई की। मुझे लगता है कि यह आत्महत्या का मामला है।’’

गौरतलब है कि मार्च के दौरान वामदल की युवा शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हो गई थी। पुलिस ने इस दौरान कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, आँसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें भी की थीं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य इकाई के अध्यक्ष श्रीजन भट्टाचार्य ने कहा, “पुलिस की क्रूरता के कारण उनकी मृत्यु हुई।” 

माकपा के राज्य सचिव सूरज कांता मिश्रा और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता अब्दुल मन्नान ने भी आरोप लगाया है कि लाठीचार्ज के दौरान लगी चोटों से मिद्दा की मौत हुई। कॉन्ग्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने कहा, “एक युवा कार्यकर्ता, जिसने सभी के लिए शिक्षा और नौकरी की माँग की थी, नबन्ना की रैली के दौरान पुलिस द्वारा पीटा गया था और आज उनकी मृत्यु हो गई – हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।”

श्रीराम दलितों की आस्था का केंद्र: राम मंदिर निर्माण के लिए अंबेडकर महासभा ट्रस्ट ने दान की चाँदी की ईंट

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए देश का हर हिस्सा आगे आ रहा है। देश के तमाम वर्ग और तमाम तरह के संगठन इस व्यापक अभियान में सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में अंबेडकर महासभा ट्रस्ट सामने आया है। ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को चाँदी की ईंट प्रदान की है।

अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने रविवार (14 फरवरी 2021) को चाँदी की शिला भेंट की। उन्होंने कहा, “हमने राम मंदिर ट्रस्ट को चाँदी की ईंट भेंट की है। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रभु श्रीराम दलितों की आस्था का केंद्र हैं। आदिवासी समुदाय के लोग भगवान राम के साथ थे, जब वह 14 वर्ष के वनवास पर गए थे। हमारी इच्छा है कि अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के लिए भव्य मंदिर का निर्माण हो।”

डॉ. निर्मल के मुताबिक़ समाज के अन्य वर्गों की तरह दलित समाज भी अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर काफी उत्साहित है। जिस तरह न्यायपालिका, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, दलित समाज उसका आभारी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अंबेडकर महासभा का आभार जताते हुए कहा कि देश की जनता इस अभियान के लिए खुले मन से दान कर रही है। 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण के आर्थिक सहयोग के लिए 14 जनवरी से 27 फरवरी तक देशव्यापी अभियान चला रहा है। इस दौरान ट्रस्ट और तमाम हिन्दू संगठनों के सदस्य 5 लाख गाँवों के लगभग 12 करोड़ परिवारों तक पहुँचेंगे। हाल ही में ख़बर आई थी कि मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में अब तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा हो चुके हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को इस बात की जानकारी दी थी।

हाल ही में झारखंड में भीख माँग कर गुजर-बसर करने वालों ने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। जिसमें एक वृद्ध और गरीब महिला राम मंदिर के लिए दान करने का निवेदन कर रही थी। वीडियो में कार्यकर्ता वृद्ध महिला से कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह सिर्फ 10 रुपए ही दान करें। इसके बावजूद गरीब नज़र आने वाली वृद्ध महिला अनुरोध करती है कि वह 20 रुपए ही दान करेगी।

TikTok स्टार पूजा की आत्महत्या, 14 ऑडियो क्लिप्स और ठाकरे सरकार के मंत्री संजय राठौड़ का ‘कनेक्शन’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने टिकटॉक स्टार पूजा चव्हाण आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना के नेता संजय राठौड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने और गिरफ्तार करने की माँग की है। 

उनका कहना है कि संजय ने पूजा को आत्महत्या के लिए उकसाया है और इस बात की जाँच की जानी चाहिए। देवेंद्र फडणवीस के अनुसार अगर पूजा के परिजन इस मामले में शिकायत नहीं कर रहे हैं तो पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए खुद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पुलिस के ऊपर सरकार की तरफ से किसी तरह के दबाव होने की भी आशंका जताई।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूजा चव्हाण मामले की जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, यह भी कहा कि जाँच पूरी होने तक किसी निर्दोष को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। 

गौरतलब है कि पुणे शहर में 8 फरवरी की रात टिकटॉक स्टार पूजा चव्हाण ने इमारत की तीसरी मंजिल से कूद कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। हालाँकि पुलिस को पूजा चव्हाण के पास से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। पूजा अपने भाई के साथ पुणे में रह कर स्पोकन इंग्लिश की पढ़ाई कर रही थी।

पूजा की आत्महत्या के साथ विदर्भ के मंत्री संजय राठौड़ का नाम जोड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि पूजा के संजय राठौड़ के साथ प्रेम संबंध थे। इस संबंध को आत्महत्या की वजह माना जा रहा है। अब इस मामले की जाँच के लिए बीजेपी ने आक्रमक रवैया अख्तियार कर लिया है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूजा चौहान आत्महत्या मामले में राज्य के डीजीपी हेमंत नागराले को पत्र लिख कर इस पूरे मामले की गहन जाँच करने की माँग की। पत्र के साथ उन्होंने 14 ऑडियो क्लिप्स भी भेजे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि पुलिस को इस मामले की जाँच गंभीरता से करनी चाहिए।

देवेंद्र फडणवीस ने यह भी माँग की है कि वायरल हो रहे ऑडियो क्लिप में आवाज किसकी है? और किस संदर्भ में बात की जा रही है? इन तमाम बातों से पर्दा उठना बहुत जरूरी है। इसके अलावा यह भी जाँच होनी चाहिए कि पूजा ने कहीं उकसावे की वजह से तो आत्महत्या नहीं की है?

भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र भेजा था। मामले में आवाज उठाने के बाद भातखलकर ने ठाकरे सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। भातखलकर ने ट्वीट किया, “पूजा चव्हाण की संदिग्ध आत्महत्या मामले में अपनी आवाज उठाने के बाद मुझे कल से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। ठाकरे सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह मॉब रूल तेज हो गई है। सरकार द्वारा प्रायोजित गुंडों को यह पता होना चाहिए कि मुझे धमकी देकर डराया नहीं जा सकता।”

बीड में रहती थी पूजा चव्हाण

मूलतः बीड जिले के परली में रहने वाली 22 साल की पूजा पुणे में पढ़ाई करने के लिए आई थी। अपने भाई के साथ वह पुणे के हडपसर इलाके में रहती थी। 8 फरवरी को पूजा ने सोसायटी के तीसरे फ्लोर से कूद कर अपनी जान दे दी थी। पूजा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। वो महमंद इलाके के हैवेन पार्क नाम की सोसाइटी में रहती थी।

Oh God का मतलब ‘या अल्लाह’… गूगल यही बता रहा, बस 2 स्टेप से कंपनी को बताइए उसकी गलती

गूगल ट्रांसलेशन पर चल रहे विवाद के बीच अब इसी से जुड़ा एक और हिंदी अनुवाद विवाद का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर लोग अब गूगल ट्रांसलेशन द्वारा ‘ओह गॉड’ (Oh God) यानी, ‘हे भगवान’ का हिंदी अनुवाद ‘या अल्लाह’ बताने को लेकर ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल से सवाल पूछ रहे हैं।

एक ट्विटर यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है, “गूगल, ये क्या है?” दरअसल, इस स्क्रीनशॉट में ‘ओह गॉड’ का हिंदी अनुवाद ‘या अल्लाह’ बताया गया है, जिसका कि हिंदी अनुवाद से कोई मेल ही नहीं है।

हाल ही में गूगल ट्रांसलेशन द्वारा ‘गॉड ब्लेस यू’ का हिंदी अनुवाद ‘अस्सलामु अलैकुम’ बताने को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल हुआ था। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस तथ्य को सामने रखा कि जब वो अंग्रेजी में ‘God bless you’ (गॉड ब्लेस यू) लिखते हैं तो गूगल इसका अनुवाद ‘अस्सलामु अलैकुम’ दिखाता है, जिसका हिंदी भाषा से कोई सम्बन्ध ही नहीं है।

लोगों ने गूगल पर हिंदी अनुवाद के नाम पर इस्लामी सामग्री परोसने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका शुद्ध हिंदी में अनुवाद कुछ और होना चाहिए। बता दें कि ‘अस-सलामु अलायकुम’ अथवा ‘अस्सलामु अलैकुम’ अरबी भाषा का अभिवादन है।

इसे बोल कर मुस्लिम लोग एक-दूसरे के लिए ‘खुदा तुम्हें सलामत रखे’ की दुआ करते हैं। अरब के ईसाई भी इन शब्दों का प्रयोग कर लेते हैं। अरब से ही ये शब्द भारत में आ गए और यहाँ भी इसी तरह से मुस्लिमों ने अभिवादन की प्रक्रिया को अपना लिया। मुस्लिम विद्वान मानते हैं कि हदीस के हिसाब से ऐसा किया जा रहा है।

इस संबंध में आप क्या कर सकते हैं

आप इस ट्रांसलेशन के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपको हिंदी अनुवाद के ठीक नीचे दिख रहे ‘Feedback’ (फीडबैक) विकल्प पर क्लिक करना है और गलत ट्रांसलेशन वाला विकल्प चुनना है, जिसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि इसका सही अनुवाद क्या है?

गूगल ट्रांसलेशन के साथ फीडबैक का विकल्प भी देता है

अगर गूगल इसका अनुवाद इस तरह से अरबी भाषा में दिखा रहा है, तो इसे हिंदी में ‘हे भगवान’ या ‘हे ईश्वर’ लिखकर ‘गूगल’ को इस अनुवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

फीडबैक का दूसरा और आखिरी चरण

किसान आंदोलन चलाना है… पैसा हो या शराब, हर तरह से किसानों की मदद करें: महिला कॉन्ग्रेस नेता, वीडियो हुआ वायरल

किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी मोदी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस की महिला नेता के बयान ने पार्टी की किरकिरी करा दी है। हरियाणा में कॉन्ग्रेस की नेता विद्या रानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विद्या रानी किसान आंदोलन में शराब दान करने की बात कह रही हैं। 

वीडियो में कुछ लोगों के बीच मौजूद कॉन्ग्रेस नेता कहती हैं, “हम कई जगहों पर, जींद में पदयात्रा करेंगे। जिससे हमारी कॉन्ग्रेस पार्टी को नई जान मिलेगी। इससे हमारी पार्टी एक नए तरीके से जन्म लेगी। इस बार हम जो हारे हैं, तो हमारा अस्तित्व तो खत्म ही हो चुका था, लेकिन ये आंदोलन जो हमें मिला है ना, ये 26 तारीख को खत्म हो चुका था। लेकिन किसी ना किसी तरह, क्योंकि किसान के इरादे मजबूत हैं। ये दोबारा से खड़ा हुआ और इतनी मजबूती से खड़ा हुआ कि इसको हमें चलाना है। किसानों ने तो अपने तरफ से किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी।”

वो आगे कहती हैं, “हर जगह उन्होंने अपने खाने-पीने का जितना हो सका, अपना इंतजाम किया। मैं यही कहूँगी कि हर साथी की जितनी हिम्मत है, चाहे वो पैसे-रूपए से दान कर सकता है, सब्जियों से दान कर सकता है, घी का दान कर सकता है, जैसे शराब का भी कर सकते हैं। सारी तरफ से जिससे जो भी सहयोग बनता है, करें और इस आंदोलन को बढ़ाएँ। ये आंदोलन सिर्फ किसान का नहीं है बल्कि यह आंदोलन हम सबका है और इसका फर्क हम सब पर पड़ेगा।”

उनके इसी बयान पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता डॉक्टर हर्षवर्धन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विद्या रानी का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “और कितना गिरेगी कॉन्ग्रेस? कॉन्ग्रेस नेता विद्या रानी किसान आंदोलनकारियों तक शराब पहुँचाने की बात कर रही हैं। महात्मा गाँधी को आदर्श मानने वाली कॉन्ग्रेस के लिए यह नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। आंदोलन को कहाँ से ऑक्सीजन मिल रहा है, यह अब किसी से छिपा नहीं है।”

विद्या रानी जींद जिले के गाँव दनोदा की रहने वाली हैं। वह कॉन्ग्रेस की टिकट पर 2014 और 2019 में नरवाना से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। दोनों ही बार उनकी हार हुई थी। गौरतलब है कि वर्तमान में जब कथित किसान आंदोलन चुनिंदा नेताओं को छोड़ कर भारी जनसमर्थन नहीं पा रहा है तो इस प्रोटेस्ट को सांप्रदायिक व जातिगत रंग दिया जाने का प्रयास हो रहा है। 

हाल ही में हरसिमरत बादल ने लोकसभा में इस पूरे आंदोलन को सिख बनाम हिंदू का मामला बता दिया था। ये भाषा बिलकुल वैसी ही थी जिस तरह से खालिस्तानी बोलते हैं। उससे पहले साल 2020 के दिसंबर माह में बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत पर ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी करने के मामले में केस दर्ज हुआ था।

वहीं हरियाणा के बहादुरगढ़ के नामी जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि वह 21 अप्रैल को 250-300 लोगों के साथ सिख धर्म अपनाएँगे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, सबको सिख धर्म स्वीकार लेना चाहिए। बता दें कि ये वही नेता हैं जिन्होंने हरियाणा में जाट आरक्षण की आग को भड़काया था।

अयोध्या की तरह मथुरा का विकास, यमुना को स्नान नहीं… आचमन योग्य बनाएँगे: ब्रज क्षेत्र के लिए CM योगी का रोडमैप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (14 फरवरी 2021) को मथुरा-वृंदावन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कान्हा की नगरी मथुरा में हरिद्वार कुंभ के पहले आयोजित होने वाली वैष्णव बैठक में हिस्सा लिया।

वैष्णव बैठक के मंच से मुख्यमंत्री ने मथुरा जिले को 411 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं की सौगात दी। 47 योजनाओं का लोकार्पण और 48 योजनाओं का शिलान्यास भी किया। दरअसल उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन मेले का आयोजन कर रहा है। यह कार्यक्रम पूरे 40 दिनों तक चलने वाला है। योगी आदित्यनाथ के मुताबिक़:

“जब मुझे पहली बार वृंदावन कुंभ का प्रस्ताव मिला, तब देश-दुनिया कोरोना महामारी का सामना कर रही थी। आप सभी जानते हैं कि महामारी की वजह से सभी कार्यक्रम रोकने पड़े थे क्योंकि हमारे पास दो ही विकल्प थे। या तो हम त्यौहार मना सकते थे या लोगों की जान बचा सकते थे। इस लड़ाई में जिस तरह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारी अगुवाई की, वह प्रशंसनीय था। भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसने इस माहामारी का सामना करने के लिए दो वैक्सीन तैयार की है। अब हमारे देश में और अन्य देशों में भी कोरोना वैक्सीन का वितरण किया जा रहा है। इन बातों से हमें साहस मिला कि हम यह आयोजन कर पाए, जो पूरे 12 साल बाद होने वाला है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ कि पहले क्या हुआ था लेकिन अब भाजपा की सरकार है। हमारी सरकार में वृंदावन कुंभ के रूप में वृंदावन बैठक भी वैसे ही होगी, जैसे प्रयागराज कुंभ किया गया था।”  

प्रयागराज कुंभ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इसकी सराहना तो UNESCO ने भी की थी। उनका कहना था कि इसके पहले भी कुंभ होता था लेकिन पिछली बार हुआ प्रयागराज कुंभ इस बात का प्रमाण था कि कैसे इसका आयोजन बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साधू-संतों के आशीर्वाद की वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की नींव रखी। संत समाज हमेशा इस आंदोलन का हिस्सा था, इस अभियान में पीढ़ियों का योगदान है। ऐसे ही ब्रज क्षेत्र में भी विकास कार्यों को पूरा किया जाएगा। 

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने ब्रज देवरहा बाबा के प्रख्यात संत की स्मृति में स्थापित घाट का भी उदघाटन किया। उन्होंने कहा, “हम 2022 तक यमुना जल को स्नान योग्य नहीं बल्कि आचमन योग्य बनाना चाहते हैं। हमने नमामि गंगे परियोजना में सबसे प्रदूषित शहर कानपुर में गंगा को सीवरविहीन बना दिया तो दिल्ली सरकार ये काम क्यों नहीं कर सकती है। यदि दिल्ली सरकार अपने यहाँ यमुना को शुद्ध कर ले तो उत्तर प्रदेश में यमुना की स्थिति सुधारने की ज़िम्मेदारी हमारी।”

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए ही हुआ है।       

‘आप 2-3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी होंगे… लेकिन लोगों की प्राइवेसी से ज्यादा अहम नहीं’ – WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट

व्हाट्सएप और फेसबुक की नई प्राइवेसी पॉलिसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने फेसबुक और व्हाट्सएप से जवाब माँगते हुए कहा है कि उन्हें ‘डाटा शेयरिंग’ को लेकर अपनी पॉलिसी स्पष्ट करनी चाहिए।

कोर्ट के मुताबिक़ बेशक फेसबुक और व्हाट्सएप 2-3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी होगी लेकिन लोगों की ‘प्राइवेसी’ (निजता) से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने नई प्राइवेसी को लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप दोनों से 4 हफ्ते के भीतर जवाब भी माँगा है। 

दरअसल नई प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद लाखों लोगों ने व्हाट्सएप को अलविदा कहा। इसके अलावा काफी लोगों ने व्हाट्सएप पे पर भी ‘साइन अप’ नहीं किया था।

व्हाट्सएप इस साल जनवरी में नई प्राइवेसी पॉलिसी लेकर आया था, जिस पर काफी विवाद हुआ। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अब इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक और व्हाट्सएप से जवाब माँगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी। 

याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा था कि यूरोप और भारत में पॉलिसी अलग-अलग नहीं हो सकती है। भारत में डाटा की सुरक्षा को लेकर क़ानून बनने वाला है, उसके आने के पहले ही व्हाट्सएप नई पॉलिसी लेकर आया है। हालाँकि इस पॉलिसी पर विरोध बढ़ने के बाद व्हाट्सएप ने इसे लागू करने की तारीख़ बढ़ा कर 14 मई की है। इस मामले पर सरकार ने भी कहा था कि लोगों की प्राइवेसी से समझौता नहीं किया जा सकता है, यह लोगों का अधिकार है। 

शीर्ष अदालत के मुताबिक़ आम जनता दुनिया की किसी भी कंपनी से ज़्यादा अपनी प्राइवेसी को अहमियत देती है, भले वह कंपनी अरबों की ही क्यों हो। वहीं व्हाट्सएप का कहना था कि यूरोप में प्राइवेसी को लेकर विशेष क़ानून है। अगर भारत सरकार इस तरह का क़ानून लेकर आती है तो हम उसका पालन करेंगे।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कर्मण्य सिंह सरीन की याचिका में किए गए अंतरिम आवेदन के आधार पर सरकार और फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप को नोटिस जारी किया।