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शिवसेना गुंडों ने बुजुर्ग के साथ मारपीट कर पहनाई साड़ी, बनाया वीडियो: CM ठाकरे की आलोचना पर राजनीतिक गुंडई

महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के गुंडों ने वरिष्ठ नागरिक शिरीष कटेकर के चेहरे पर कालिख पोत दी। शिवसेना कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शिरीष कटेकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की आलोचना की है। ये घटना पंढरपुर की है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जब शिवसेना के गुंडों ने विरोधियों के बाल मुँड़ दिए हों या फिर उनके चेहरे पर स्याही की पुताई कर दी हो। शिरीष कटेकर न सिर्फ वरिष्ठ नागरिक हैं बल्कि भाजपा के नेता भी हैं।

सार्वजनिक रूप से एक वरिष्ठ नागरिक के साथ मारपीट की जाती है और हद यह कि इस घटना के बारे में शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में भी खबर भी प्रकाशित की गई। इतना ही नहीं, उक्त भाजपा नेता को जबरदस्ती साड़ी भी पहनाया गया।

पीड़ित वरिष्ठ नागरिक और भाजपा नेता का नाम शिरीष कटेकर है, जो जिले में पार्टी के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। भाजपा यहाँ बिजली बिल में बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन कर रही थी, जिसके बाद शिवसेना ने आक्रामक रुख अपना लिया।

पंढरपुर की पुलिस ने बीच-बचाव और हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। हालाँकि, इस घटना के कारण इलाके में तनाव व्याप्त है। शुक्रवार (फ़रवरी 5, 2021) को पूरे राज्य में भाजपा ने बिल बिल बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन किया था। ‘महाराष्ट्र राज्य विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL)’ के दफ्तरों का घेराव किया गया। इसमें शिरीष कटेकर भी शामिल थे।

उन्होंने भाषण देते हुए आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे घर में ही बैठे रहते हैं और बाहर नहीं निकलते। इसके बाद कुछ शिवसैनिक पहुँचे और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने पूरे पंढरपुर में भी बंद की चेतावनी दी है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में भी इस सम्बन्ध में खबर प्रकाशित किया गया। भाजपा का आरोप है कि अब तक किसी शिवसेना नेता द्वारा घटना की निंदा न करना दर्शाता है कि इस घटना को उनका समर्थन प्राप्त है।

इसी तरह दिसंबर 2019 में शिवसेना की एक कार्यकर्ता ने पूरे बोतल भर इंक एक बुजुर्ग व्यक्ति के ऊपर सिर्फ़ इसीलिए उड़ेल दिया था, क्योंकि उसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए पोस्ट लिखा था। महिला ने जब उस व्यक्ति पर इंक डाला, तब वो फोन से बात कर रहा था।

‘किसान आंदोलन पर क्यों चुप हो’ – बॉलीवुड वालों को नसीरुद्दीन ने ललकारा… लेकिन SSR मामले में खुद चुप रह बताया था बचकाना

किसान आंदोलन पर हर क्षेत्र के लोगों का प्रोपेगेंडा और प्रचार जारी है। हाल ही में इस तथाकथित ‘आंदोलन’ को भारत के खिलाफ़ दुष्प्रचार का ज़रिया बना दिया गया। ताज़ा मामले में बॉलीवुड के कई नाम भी इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने के लिए आगे आए हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड कलाकार नसीरुद्दीन शाह ने ‘किसान आंदोलन’ पर अपनी राय पेश की। नसीरुद्दीन के मुताबिक़ बॉलीवुड के अन्य कलाकारों को भी इस पर बात करनी चाहिए। 

सोशल मीडिया पर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह कहते हैं, “खामोश रहना, जुल्म सहना, जुल्म करने के बराबर ही है। और हमारे बड़े-बड़े जो धुरंधर लोग हैं फिल्म इंडस्ट्री के, वो खामोश बैठे हैं। इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि वो बहुत कुछ खो सकते हैं। अरे भाई, जब आपने इतना धन कमा लिया है कि 7 पुश्तें बैठ कर खा सकती हैं तो कितना खो लोगे अब।”

एक साक्षात्कार में बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह आगे कहते हैं, “जब सब कुछ तबाह हो चुका होगा तो आपको अपने दुश्मनों का शोर सुनाई नहीं देगा। बल्कि अपने दोस्तों की खामोशी ज़्यादा चुभेगी। मुझ पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, यह कहने से काम नहीं चलेगा। अगर किसान कड़कड़ाती सर्दी में बैठे हैं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, यह नहीं कह सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि किसानों का ये आंदोलन फैलेगा और आम लोग भी इसमें शामिल होंगे। खामोश रहना जुल्म करने वाले की तरफदारी करना है।” 

किसान आंदोलन के मुद्दे पर बॉलीवुड कलाकारों से बात करने की अपील करने वाले नसीरुद्दीन शाह कुछ दिन पहले सुशांत सिंह राजपूत मामले पर बहस को बचकाना बता चुके हैं। तब पता नहीं क्यों… लेकिन उन्होंने इसे अनावश्यक बताया था। इंग्लिश में इसके लिए उन्होंने बोला था – ‘Why are we washing dirty underwear in public?’

जानने लायक बात यह है कि सुशांत सिंह राजपूत हत्या/आत्महत्या मामले में ड्रग्स एंगल भी निकल कर सामने आया है। कई लोग (नामी-गिरामी) इसके चपेट में आए हैं, पुलिस और नारकोटिक्स ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं। जानने लायक बात यह भी है अनुपम खेर ने नसीरुद्दीन शाह को सुशांत सिंह राजपूत मामले के दौरान ही जम कर लताड़ा था। तब अनुपम खेर ने कहा था, “आप जिन पदार्थों का सेवन करते हैं, उसके चलते आप निर्णय नहीं कर पाते कि देश में क्या सही है और क्या ग़लत।”

जहाँ एक तरफ नसीरुद्दीन शाह, पंजाबी गायक/अभिनेता दिलजीत दोसांझ और जैज़ी बी जैसे लोग किसान आंदोलन को लेकर पूरे ज़ोर-शोर से मिथ्या प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड के कई बड़े नामों ने इसकी आड़ में हो रहे प्रपंच को भी निशाना बनाया है। 

अभिनेता अक्षय कुमार ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “किसान देश का अभिन्न अंग हैं। उनकी समस्याओं को हल करने के प्रयास जारी हैं। किसी भेद पैदा करने वाले की बातों पर ध्यान देने की जगह हम मिल कर एक सौहार्दपूर्ण संकल्प का समर्थन करते हैं।” 

इसके अलावा बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने भी किसान आंदोलन की आड़ में हो रहे दुष्प्रचार को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “भारत या भारत की नीतियों के खिलाफ हो रहे किसी भी तरह के प्रोपेगेंडा में फँसने की ज़रूरत नहीं है। एक साथ खड़े रहना हमारे लिए फ़िलहाल बहुत ज़रूरी है।”      

‘मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद को पूरी तरह हटाया जाए’: अदालत ने स्वीकार की याचिका, सभी पक्षों को नोटिस

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अतिक्रमण कर औरंगज़ेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए दायर की गई याचिका को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही अब इस मामले में अन्य पक्षकारों के जुड़ने के बाद सुनवाई चालू हो जाएगी। कोर्ट ने शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) को शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, मथुरा में जिला राजकीय अधिवक्ता संजय गौड़ ने जानकारी दी है कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला ने याचिका को सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने वाद को स्वीकार करने योग्य माना और इसकी विस्तृत सुनवाई भी होगी। सभी पक्षों को मार्च 8, 2021 तक अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ेगा।

जिन्हें समन जारी किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के सचिव, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रबंधन न्यासी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव शामिल हैं। ज्ञात हो कि पुराने केशवदेव मंदिर के देवता ठाकुर केशव देव जी महाराज विराजमान की तरफ से उनके सेवायत पवन कुमार शास्त्री/गोस्वामी ने ये याचिका अदालत में दायर की है। याचिका में 3 अनुरोध किए गए हैं:

  • शाही ईदगाह मस्जिद वाली जमीन समेत कटरा केशव देव मंदिर परिसर के संपूर्ण 13.7 एकड़ जमीन पर दावा। पूरे मंदिर परिसर के प्रबंधन का अधिकार मिले। दलील दी गई है कि उनके पूर्वज दशकों से बतौर पुजारी भगवान की सेवा में लगे हैं। उन्होंने खुद को मंदिर का वास्तविक सेवायत बताते हुए इसकी विरासत के प्रबंधन योग्य बताया।
  • श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के बीच हुए समझौते का अनुमोदन करने वाले मथुरा अदालत के 1967 के फैसले को रद्द किया जाए। इसके तहत ही मस्जिद को मंदिर के नजदीक बनाए रखने की अनुमति दी गई थी।
  • शाही ईदगाह प्रबंधन समिति एवं लखनऊ स्थित सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष को मौजूदा स्थान से मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया जाए।

इससे पहले जिला जज मथुरा साधनी रानी ठाकुर की कोर्ट में 12 अक्टूबर को इस सम्बन्ध में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था। उनका कहना था कि इस समय जहाँ मस्जिद है, कभी वहाँ कंस का कारागार था और वहीं पर कृष्ण का मंदिर था। मुगलों ने इसे तुड़वा कर वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी।

‘कॉन्ग्रेस ने किसानों की हत्या करवाई, देश विरोधी ताकतों से फंडिंग, राकेश टिकैत दुर्योधन’: बाबा टिकैत के दोस्त

दिवंगत किसान नेता महेंद्र टिकैत के सहयोगी रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने आजकल चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को खरी-खरी सुनाई है। बुजुर्ग किसान नेता ने महेंद्र टिकैत के बेटे राकेश टिकैत की भी आलोचना की। चौधरी ने ‘आज तक’ पर रोहित सरदाना के शो में कहा कि महेंद्र टिकैत उनके पिता तुल्य थे और जब वो उनके साथ आंदोलन करते थे, तब राकेश टिकैत पुलिसकर्मी हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि 1988 में जब बिजली और पानी बिल के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे थे, वो अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन था।

बता दें कि तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार को किसानों की 35 सूत्री माँग के आगे झुकना पड़ा था। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उस वक़्त की कॉन्ग्रेस सरकार ने आंदोलन की भोजन-पानी की सप्लाई-लाइन तोड़ दी थीं और ट्रैक्टर से भोजन ले कर आ रहे किसानों की हत्या करा दी गई थी। उन्होंने कहा कि तब कई घायल भी हुए थे। उन्होंने इसे याददाश्त में रखने की नसीहत देते हुए कहा कि प्रियंका गाँधी मुजफ्फरनगर जा रही हैं तो राजेंद्र नामक दिवंगत किसान के परिजनों से भी मिलें, जिसकी तब ‘पुलिस ने हत्या कर दी’ थी।

महेंद्र टिकैत के सलाहकार रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने प्रियंका गाँधी से माफी माँगने की माँग की। उन्होंने बताया कि अब जब रोज महापंचायत हो रही है, हरियाणा का दर्द कुछ और है। उन्होंने कहा कि उनके यहाँ रिवाज है कि अगर बहू को कुछ कहना होता है तो लड़कियों के द्वारा कहवाया जाता है। उन्होंने कहा कि ये कहीं पंचायत कर लें और राजनीति कर लें लेकिन हमें ये याद रखना चाहिए कि राकेश टिकैत अपने पिता की मौजूदगी में 2 चुनाव लड़ चुके हैं। उनके अनुसार,

“दिल्ली में धरना देकर बैठ जाओ या कहीं बैठ जाओ, किसान अन्नदाता तो है लेकिन वो अन्न के साथ-साथ ऐसे जवान भी पैदा करता है, जो सीमा पर पहरे देते हैं। हम ठेकेदार नहीं पैदा करते। हमारा निवेदन राकेश टिकैत से है कि वापस आकर मिल-बैठ कर बात कर लीजिए। हर लड़ाई में युद्ध-विराम होता है। ईराक और यमन में भी हुआ था। दोबारा सोचो कि तुमने क्या खोया, क्या पाया। मैं इन कृषि कानूनों के समर्थन में हूँ। मंडी समिति वाले शिकारी कुत्ते बन गए थे। हमें इन कानूनों से अब फायदा महसूस हो रहा है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग तो हमारी पहले से हो रही है? MSP तो अनिवार्य है, लेकिन गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?”

चौधरी वीरेंद्र सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ को लेकर रखी अपनी बात (देखें 33:30 के बाद से)

वीरेंद्र सिंह ने इससे पहले भी कहा था कि राकेश टिकैत में दुर्योधन की आत्मा आ गई है और अभी श्रीकृष्ण स्वयं आ जाएँ तब भी वो कुछ नहीं सुनेंगे। 1992-2002 तक भारतीय किसान यूनियन के मुजफ्फरनगर इकाई के जिलाध्यक्ष रहे वीरेंद्र ने कहा कि इन आंदोलन को वही देश विरोधी ताकतें फंडिंग कर रही है, जो CAA विरोधी प्रदर्शनों को कर रही थी। उन्होंने इसे जिद, बालहठ और बचकाना बताते हुए कहा कि ‘बाबा टिकैत’ ज़िंदा होते तो लाल किले पर 26 जनवरी को जो हुआ, वो न होता।

उन्होंने राकेश टिकैत को 26 जनवरी की घटना के लिए आत्मसमर्पण करने की सलाह देते हुए कहा था कि उन्हें केंद्र सरकार किसान समझ रही है, लेकिन वो किसान हैं ही नहीं। उन्होंने कहा कि देश के साथ गद्दारी हो रही है। उन्होंने कहा कि बाबा टिकैत के कुर्ते में जेब नहीं थी, जबकि आजकल के किसान नेताओं के पास कई-कई जेबें हैं। उन्होंने दावा किया कि इन किसान नेताओं के पास सरकार से वार्ता के लिए कोई तर्क ही नहीं है।

₹2000 में ‘गंदी बात’ वाली हिरोइन की पोर्न, अपलोड की थी खुद की 87 वीडियो: गिरफ्तार

मुंबई में अभिनेत्री और मॉडल गहना वशिष्ठ को पोर्न वीडियो शूट कर के अपनी वेबसाइट पर डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस को पोर्न इंडस्ट्री के एक बड़े नेटवर्क के बारे में पता चला है, जिसमें कई अभिनेत्री, प्रोडक्शन कंपनियाँ और ऐसे मॉडल्स शामिल हो सकते हैं। ये सभी मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स पर पोर्न फ़िल्में शूट कर के डालते रहे हैं। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है।

वो हिंदी और तेलुगु सिनेमा की फिल्मों के अलावा कई एडवर्टाइजमेंट वीडियोज में भी देखी जाती रही हैं। उनसे शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) की शाम को पूछताछ की गई। उन्होंने अपनी वेबसाइट पर 87 पोर्न/अश्लील-आपत्तिजनक वीडियोज अपलोड की थी, जिन्हें देखने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना होता था। चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए 2000 रुपए देने होते थे। उन्हें रविवार को कोर्ट में पेश किया जाना है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें 3 ऐसे पीड़ितों की शिकायत मिली है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन पोर्न वीडियोज शूट करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मलाड के मढ़ द्वीप स्थित ग्रीन पार्क बंगलो में तलाशी ली। इसके बाद यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा। इन एप्स के सब्सक्रिप्शन से जुटाए गए 36 लाख रुपए एक बैंक अकाउंट में मिले, जिसे सीज कर दिया गया।

पुलिस को वहाँ एक पीड़िता भी मिली, जिसे पुनर्वास गृह में भेजा गया है। यास्मीन प्रोडूसर/डायरेक्टर थी, सैफी कैमरामैन था, प्रतिभा ग्राफिक डिजाइनर थी, जोशी वीडियो में अभिनय करता था और ठाकुर अस्सिस्टेंट था। पुलिस को एक HD वीडियो कैमरा, 6 मोबाइल फोन्स, 1 लैपटॉप, स्पॉटलाइट, कैमरा स्टैंड, पोर्न कंटेंट वाला मेमोरी कार्ड और और पोर्न वीडियो शूट के स्क्रिप्ट्स मिले हैं। इन्होंने ‘फिल्मों में अभिनय’ के नाम पर नए चेहरों के लिए विज्ञापन भी दिया था।

गहना वशिष्ठ को हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय OTT वेब सीरीज के लिए साइन किया गया था। गहना वशिष्ठ डाइबिटीज से पीड़ित रही हैं और नवंबर 2019 में उन्हें हार्ट अटैक भी आया था, जिसके बाद वो कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। वो कोमा में जाते-जाते बची थीं। उन्होंने एकता कपूर के ‘Alt Balaji’ की वेब सीरीज ‘गन्दी बात’ में अहम किरदार निभाया था। साथ ही वो ‘Ullu’ एप की सीरीज में भी दिखी थीं। वो ‘Nuefliks’ की ‘मदहोशी’ में भी नजर आई थीं।

अर्णब गोस्वामी का ट्विटर हैंडल @arnab_5222, लगाए मुंबई के DCP पर घटिया आरोप: पैरोडी हैंडल को असली समझ केस दर्ज

मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अभिषेक त्रिमुखे ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया है कि अर्णब गोस्वामी ने ट्विटर पर उनके खिलाफ टिप्पणियाँ की और बयान दिए। इसके लिए उन्होंने ट्विटर हैंडल ‘@arnab_5222‘ का भी जिक्र किया है। आइए, देखते हैं डिफेमेशन सूट में इस सम्बन्ध में क्या लिखा गया है।

इसके ‘Annexure B’ में लिखा है कि उपर्युक्त ट्विटर हैंडल को ‘मुख्य आरोपित (अर्णब गोस्वामी)’ द्वारा चलाया जाता है इसके 1.802 लाख (अब 2.001 लाख) फॉलोवर्स भी हैं। दावा किया गया है कि इस हैंडल से कई मानहानिजनक ट्वीट्स किए गए और जो बातें टीवी न्यूज़ टेलीकास्ट के दौरान कही जाती हैं, उन्हीं भड़काऊ चीजों को इस ट्विटर हैंडल के माध्यम से एक बड़ी ऑडियंस के समक्ष दोहराया जाता है और फिर से सर्कुलेट किया जाता है।

दावा किया गया है कि उन ट्वीट्स का कोई सन्दर्भ ही नहीं हैं और उन्हें जानबूझ कर याचिकाकर्ता को बदनाम करने के लिए फैलाया गया है। साथ ही ‘Annexure C’ में उन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स भी डाले गए हैं। इसके बाद 6 ट्वीट्स की सूची पेश की गई है, जो इस हैंडल द्वारा किया गया था। दावा किया गया है कि उनके पास इन सभी के स्क्रीनशॉट्स मौजूद हैं। आइए देखते हैं किन ट्वीट्स को उन्होंने मानहानि वाला माना है।

अर्णब गोस्वामी के ट्विटर हैंडल को लेकर किया गया दावा

पहला ट्वीट अगस्त 16, 2020 की है। इसमें पूछा गया है कि पुलिस की सर्विस ज्वाइन करने से पहले मुंबई के DCP ने देश की सेवा करने की शपथ ली थी या फिर महाराष्ट्र के राजनेताओं की? साथ ही इसमें हैशटैग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुशांत सिंह राजपूत की मौत की CBI जाँच की माँग की गई है। दूसरा ट्वीट अगस्त 7 का है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपित रिया चक्रवर्ती मुंबई के DCP के साथ पिछले 1 वर्ष से संपर्क में थीं।

इसमें दावा किया गया है कि ये वही DCP हैं, जिन्होंने सुशांत के परिवार के निवेदन को दो-दो बार ठुकरा दिया। इसे ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए ‘वॉरियर फॉर SSR’ का हैशटैग भी लगाया गया है। इस ट्वीट में पुलिस पर जाँच के नाम पर 55 दिनों तक नाटक करने का आरोप लगाते हुए DCP पर ‘मानसिक रोगी’ महेश भट्ट को चाय पर बुलाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही सवाल दागा गया था कि रिया का असली कारोबार क्या है?

उसी दिन किए गए तीसरे ट्वीट में एक खबर का जिक्र किया गया है, जिसके अनुसार मुंबई पुलिस के DCP अभिषेक त्रिमुखे ने रिया चक्रवर्ती को पूछताछ के लिए बुलाया है। साथ ही पूछा गया है, “देश मुझे बताए, मात्र 21 सेकेंड्स की कैसी पूछताछ?” चौथे ट्वीट में DCP से रिया के संपर्कों और उनके बीच हुई कॉल्स और संदेशों का विवरण माँगा गया है। 5वें ट्वीट में इसी आरोप को दोहराया गया है। पेश किए गए अंतिम ट्वीट में रिया और DCP के बीच कई बार कुछ सेकेंड्स की बात होने का दावा करते हुए पूछा गया है कि कौन सी सूचनाएँ आरोपित को दी गईं?

इसे अर्णब गोस्वामी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल होने का किया गया दावा

जब हमने इस यूजरनेम वाले ट्विटर हैंडल को चेक किया तो इस पर स्पष्ट लिखा है कि ये एक ‘अनाधिकारिक पैरोडी हैंडल’ है। साथ ही इसे ‘फैन पेज’ भी बताया गया है। इस पर कोई ब्लू टिक भी नहीं है। इस हैंडल से कंगना रनौत, नीता अम्बानी और सोनू निगम के पैरोडी/फेक हैंडल्स से किए गए ट्वीट्स भी रीट्वीट किए जाते हैं। इंस्टाग्राम पर भी ऐसा ही हैंडल बना कर रखा गया है। कहीं नहीं लिखा है कि इसे अर्णब गोस्वामी चलाते हैं।

असली बात ये है कि अर्णब गोस्वामी न तो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैं और न ही उनकी तरफ से कोई टीम या फैन पेज है, जो उनका प्रतिनिधित्व करता हो। उनके बयान को ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ और ‘रिपब्लिक भारत’, इन दोनों मीडिया संस्थानों के हैंडलों के जरिए ही जारी किया जाता है। ट्विटर पर वो चर्चा में ज़रूर रहते हैं लेकिन उनका कोई ट्विटर हैंडल नहीं।

पालघर में नौसेना के जवान को जिंदा जलाया, हो चुकी थी सगाई… 3 महीने बाद थी शादी: पिता को न्याय की उम्मीद

महाराष्ट्र का पालघर विवादों से पिछा नहीं छुड़ा पा रहा। साधुओं की मॉब लिंचिंग के बाद अब यहाँ एक और हत्या की गई है। इंडियन नेवी के 27 साल के जवान को जिंदा जला दिया गया।

झारखंड के राँची के रहने वाले सूरज कुमार इंडियन नेवी में ‘लीडिंग सी मैन’ के तौर पर तैनात थे। वह 30 जनवरी की रात से लापता थे। 6 फरवरी को पालघर के किसी स्थानीय नागरिक ने जले हुए सूरज कुमार को देखा और इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सूरज कुमार के पिताजी मिथिलेश दूबे ने बताया कि उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए। यह बात वो मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने मरने से पहले अपनी किडनैपिंग और जला कर मारने की बात महाराष्ट्र पुलिस को बताई है और उन्हें न्याय चाहिए।

अत्यधिक जलने से मौत

पुलिस ने घायल और जले हुए सूरज कुमार को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। यहीं पर होश में आने के बाद उन्होंने अपने बारे में और किडनैप किए जाने से संबंधित सारी बात पुलिस को बताई थी।

जिला अस्पताल में हालत बिगड़ने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें मुंबई रेफर कर दिया। मुंबई में उन्हें इंडियन नेवी के के अस्पताल INS अश्विनी लाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस संबंध में पालघर के एसपी ने बताया कि तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घोलवड पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 302, 307, 364 ए, 392, 342, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की जाँच जारी है।

राँची से चेन्नै से पालघर

27 साल के सूरज कुमार छुट्टी बिता कर 30 जनवरी को राँची से लौट रहे थे। उन्हें कोयंबटूर के पास INS अग्रणी पर लौटना था। वो फ्लाइट से चेन्नई एयरपोर्ट उतरे और बाहर निकले। रात के लगभग 9 बज चुके थे। यहीं पर 3 लोगों ने उन्हें किडनैप कर लिया

किडनैप करने वालों ने उन्हें रिवॉल्वर दिखा कर कीमती मोबाइल फोन भी छीन लिया था। 3 दिनों तक किडनैपरों ने सूरज कुमार को चेन्नै में ही रखा, सफेद रंग की SUV में घुमाते रहे। इस दौरान 10 लाख रुपए की फिरौती भी उनके परिवार से माँगी गई।

पैसा नहीं मिलने पर और अपने प्लान में कामयाब नहीं होने पर अपराधी सूरज कुमार को पालघर ले गए। शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को पालघर के डहाणू तलासरी के वेवजी इलाके में स्थित जंगल में उन्होंने हाथ-पैर बाँध कर सूरज कुमार के शरीर पर पेट्रोल डाली और आग लगा दी।

सगाई तो हुई लेकिन नहीं हो सकी शादी

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार 15 जनवरी 2021 को सूरज की सगाई हुई थी। इसी साल मई में उनकी शादी होने वाली थी।

क्यों पालघर है विवादों में

पालघर में 2 साधुओं समेत 1 ड्राइवर की लिंचिंग हुई थी। न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस मामले में खुलासा किया था कि पुलिस ने हत्या के बाद कई घंटों तक शवों की सुध नहीं ली थी।

उन्होंने दावा किया था, “पालघर संतों की क्रूर और निर्मम हत्या के बाद उनकी देह 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़ी रही। दरअसल पुलिस वाले हत्या के बाद भाग खड़े हुए थे। रात भर ड्राइवर और दो संतों की हत्या के बाद भी पुलिस ने सुध नहीं ली।”

पालघर में मिशनरियों का प्रभाव होने की बात भी पता चली है। यहाँ 2019 में ही मिशनरियों का एक वीडियो सामने आया था, जो बताता है कि वो धर्मान्तरण के लिए क्या-क्या कर रहे हैं। यहाँ के मिशनरी लगातार लोगों में हिन्दू देवी-देवताओं और साधु-संतों के ख़िलाफ़ ज़हर भरने में लगे रहते हैं।

इस वीडियो में मिशनरी कहते दिख रहे हैं कि गणपति तो हाथी हैं और हनुमान एक बन्दर हैं, ऐसे झूठे भगवान तुम्हें कैसे बचा सकते हैं? साथ ही वो जीसस क्राइस्ट को स्वीकार करने की अपील भी कर रहे हैं।

फरार दीप सिद्धू की विदेशी महिला मित्र कर रही सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड: पुलिस ने किया नया खुलासा

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2021) के दिन लाल किले पर हुई हिंसा के मामले में पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। लेकिन दीप सिद्धू अभी भी पुलिस की पहुँच से दूर है। सिद्धू की तलाश में क्राइम ब्रांच की कई टीमें पंजाब में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने पंजाबी एक्टर के ऊपर एक लाख का इनाम भी घोषित किया है। लेकिन इन सबके बीच दीप सिद्धू की ओर से एक के बाद एक वीडियो संदेश जारी किए जा रहे हैं, जिसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। 

हालाँकि, अब एक्टर दीप सिद्धू के बारे में पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है। दावा किया गया है कि पंजाबी एक्टर जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करता है, उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है। 

जानकारी के मुताबिक, दीप सिद्धू वीडियो बनाता जरूर है लेकिन उसे अपलोड उसकी बेहद करीबी महिला मित्र करती है। ये महिला मित्र भारत से बाहर विदेश में बैठकर सिद्धू के वीडियो अपलोड करती है। कहा जा रहा है कि इसके पीछे सिद्धू की चाल जाँच एजेंसियों को भटकाने की है। यानी दीप सिद्धू एक पेशेवर अपराधी की तरह पुलिस के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। 

गौरतलब है कि हाल ही में सिद्धू ने अपने फेसबुक पेज पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कई वीडियो जारी किये थे। जिसमें उसने आरोप लगाया था कि किसान यूनियन के नेता लाल किले में मौजूद थे। उसने कहा कि उसके पास उन नेताओं के वीडियो सबूत हैं जो लाल किले में मौजूद थे और उनके चेहरे ढके हुए थे।

सिद्धू ने दावा किया कि अगर वह उत्तेजित प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित नहीं करता, तो चीजें हाथ से निकल जातीं, लेकिन अब हर कोई उन्हें बलि का बकरा बना रहा है और कह रहा है कि उन्होंने लोगों को लाल किले की ओर बढ़ने के लिए उकसाया।

एक अन्य वीडियो में NDTV का, विशेष रूप से पत्रकार रवीश कुमार का नाम लेते हुए, सिद्धू ने कहा कि उसने सोचा था कि रवीश एक समझदार पत्रकार हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने उसे अपने शो में पेश किया, वह निराशाजनक था। उन्होंने सिर्फ इसलिए कहा क्योंकि रवीश अपने प्राइम टाइम शो में उसके नाम का इस्तेमाल करना चाहते थे, उन्होंने सिद्धू से बात करने और उनका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। उसने यह भी दावा किया कि उन्होंने बरखा दत्त के साथ साक्षात्कार के बाद मीडिया को साक्षात्कार देना बंद कर दिया, क्योंकि वहाँ उसे गलत तरीके से दिखाया गया था।

रचित जाट को गोलियों से भून सिगरेट सुलगाते रहे शारिक़, शादाब, शहजाद: UP पुलिस ने धरा तो रोने लगे, लगेगा NSA

एक तरफ राजनीतिक लाभ लेने के लिए किसान आंदोलन में जाट-मुस्लिम एकता की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के बिजनौर से।

बिजनौर जिले के हल्दौर के कस्बा झालू में सरे बाजार एक युवक रचित जाट को दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया। बेव सीरीज ‘मिर्जापुर’ स्टाइल में सरेबाजार कत्ल करने वाले मुस्लिम हमलावर बेखौफ थे। उन्हें न पुलिस का खौफ था और ही कानून का डर। अपराधी कत्ल कर मौका ए वारदात से भागने के बजाय दुकान के बाहर बैठ गए और आराम से सिगरेट पीते रहे। बीच-बीच में फायरिग कर तमंचे लहराते हुए गवाही देने वालों को जान से मारने की धमकी देते रहे।

मामला हल्दाैर कस्बे झालू में काेतवाली नगर क्षेत्र के गाँव स्याैहारा गिरधर निवासी 27 वर्षीय रचित जाट की गाेलियाें से भूनकर हत्या का है। रचित बाजार में खरीदारी करने गया था। इसी दौरान वहाँ मोहल्ले के ही रहने वाले शारिक, शादाब, शहजाद, शहबाज और एक अन्य युवक पहुँचे। इन्होंने पुरानी रंजिश को लेकर रचित के साथ बहस की और उसके तुरंत बाद ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दी।

रचित गोली लगने के बाद जान बचाने के लिए एक दुकान में घुस गया लेकिन हमलावरों ने इसे दुकान में भी नहीं छोड़ा और इस तरह सबके सामने रचित काे गोलियों से भून डाला। एसपी सिटी डॉक्टर धर्मवीर सिंह हत्या की वारदात की खबर मिलते ही मौके पर पहुँचे। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।





वह यूपी पुलिस के सामने भी लोगों से चिल्ला-चिल्लाकर कहते रहे कि उनका यह वीडियो यूट्यूब पर आना चाहिए। एक आरोपित के फरार होने की बात भी कही जा रही है। बिजनौर के एसपी डॉ धर्मवीर सिंह के मुताबिक चारों आरोपियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की जाएगी। बिजनौर एसपी ने इस मामले की जाँच करा कर 24 घंटे के अंदर कार्यवाही करने का भरोसा दिया है।

कातिल इस कदर बेखौफ थे कि सनसनीखेज हत्याकांड के बाद दुकान के बाहर गेट पर ही बैठ गए। हवाई फायरिग कर गवाही देने वाले की भी हत्या की धमकी दी। फिर तमंचा लहराते हुए वेब सीरीज स्टाइल में सिगरेट जलाई, धुएँ का छल्ला उड़ाते हुए फिर से हवाई फायरिग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हत्यारोपित 30 मिनट बाद तक मौके पर मौजूद रहे।

सिगरेट सुलगाते हत्यारे

पुलिस मौके पर पहुँची और उन्हें बाइक पर बैठा लिया। इस दौरान बाइक पर बैठते समय भी उनके चेहरों पर कोई खौफ नहीं था। हालाँकि, गिरफ्तारी के बाद अब चारों लड़कों की अकड़ यूपी पुलिस के सामने कम होती दिखने लगी। बताया जा रहा है कि सभी आरोपित बाद में यूपी पुलिस के आगे गिड़गिड़ाने लगे थे।

गौरतलब है कि कृषि कानून के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली बॉर्डर पर दो महीने से ज्यादा समय से किसान आंदोलन जारी है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इस आंदोलन से किसानों की माँग भले ही अभी तक पूरी न हुई हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक चेतना जरूर जगा दी है। जाट और मुस्लिम भी दंगों की बात भूलकर करीब आ गए हैं। लेकिन जमीनी स्तर की कलह इस नैरेटिव को बार-बार झूठलाती नजर आती है।

फिर भी मीडिया में यह माहौल बनाने की कोशिश जारी है कि किसान आंदोलन के चलते लोग अपनी पुरानी रंजिश और अदावत भुलाकर एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ध्यान रहे, साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे ने जाटों और मुस्लिमों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी थी, जिसे अब सात साल के बाद पटने का दावा किया जा रहा था कि आज बिजनौर की यह घटना फिर सामने आ गई है। बताया जा रहा था कि जाट के साथ मुस्लिम, दलित, सिख सहित तमाम समुदाय के लोग किसानों के हक के लिए गाजीपुर बॉर्डर से लेकर पश्चिम यूपी में हो रही महापंचायतों में दिख रहे हैं। हालाँकि इसकी जमीनी वास्तविकता इससे इतर नजर आ रही है।

आगरा में बन रहे मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी के नाम रखने पर उनके वंशज ने की CM योगी की सराहना

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भाजपा सांसद उदयनराजे भोसले ने आगरा में निर्माणाधीन मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को उपहार देते हुए उनके फैसले की सराहना की है। वहीं भाजपा सांसद ने इसका वीडियो अपने ट्विटर एकाउंट पर भी शेयर किया है।

योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2020 को आगरा में 141 करोड़ रुपए में बन रही मुगल संग्रहालय का नाम बदलने का फैसला करते हुए यह ऐलान किया था कि संग्रहालय अब छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जाना जाएगा। यह निर्णय पिछले साल आगरा मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में लिया गया था।

योगी आदित्यनाथ के हवाले से एक प्रेस बयान में कहा गया था, “मुगल हमारे नायक कैसे हो सकते हैं? इसकी जगह शिवाजी का नाम राष्ट्रवाद और आत्मसम्मान की भावना को बढ़ावा देगा।”

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सीएम योगी ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रवादी विचारों को पोषित करने वाली है। गुलामी की मानसिकता के प्रतीक चिन्हों को छोड़, राष्ट्र के प्रति गौरवबोध कराने वाले विषयों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

हालाँकि, आगरा में मुगल संग्रहालय का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से बदलने पर सपा और कॉन्ग्रेस के नेताओं ने सीएम योगी आदित्यनाथ की काफी आलोचना की थी।

गौरतलब है कि आगरा में मुगल संग्रहालय की आधारशिला जनवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी। जब यह पूरा हो जाएगा, तो यह आगरा का चौथा संग्रहालय होगा, जिसमें शहर के सभी ऐतिहासिक स्मारकों का मॉडल रखा जाएगा।

विभिन्न युगों के अनुसार आगरा के डिजिटल मानचित्र भी विभिन्न उत्खनन स्थलों के विवरण के साथ संग्रहालय में रखे जाएँगे। इसमें महाभारत काल के साथ-साथ मुगल बादशाह अकबर के अधीन आगरा का पौराणिक ‘आगरा वन’ भी शामिल होगा। इसके अलावा आगरा के हस्तशिल्प को भी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।