यह खबर तो बहुत पहले से ही सामने आ चुकी है कि देश में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को खालिस्तानी तत्वों द्वारा हाइजैक किया जा चुका है। जिसका पहले भी साबुत सामने आए और आज भी सबूत मिला। लुधियाना में किसानों के चक्का जाम के दौरान एक ट्रैक्टर पर जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर के साथ एक ध्वज लगा हुआ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है।
न्यूज एजेंसी एएनआई ने लुधियाना के चक्का जाम की एक वीडियो जारी की है जिसमें एक ट्रैक्टर पर लगे झंडे में जरनैल सिंह भिंडरावाले जैसी तस्वीर दिख रही है। साथ ही कथिततौर भीड़ द्वारा ‘मोदी मर जा… हाय हाय’ के नारे भी लगाए जा रहे हैं। किसान आंदोलन में भिंडरावाले की तस्वीर दिखने से पंजाब में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्मा सकता है।
#WATCH: A flag with a portrait bearing resemblance to Bhindranwale seen on a tractor at a ‘Chakka jam’ protest in Ludhiana pic.twitter.com/d6lFT0IoPC
वीडियो मे एक तरफ लोग गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं कुछ लोग नारे भी लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा वहाँ खड़े एक ट्रैक्टर पर खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाला एक झंडा लगा हुआ दिखाई दे रहा है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शनिवार को बुलाए गए चक्का जाम में खालिस्तानी तत्व भी हिस्सा ले रहे थे?
बता दें कि जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारा गया भिंडरावाला सिखों के धार्मिक समूह दमदमी टकसाल का प्रमुख था। भिंडरावाला ने सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की माँग की थी। इतना ही नहीं खालिस्तानी अलगाववादी उसे अपना आदर्श मानते हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे कथित ‘किसानों’ ने आज (6 फरवरी 2021) ‘चक्का जाम’ का आह्वान किया था। यह चक्का जाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर पूरे देश में दोपहर 12 से 3 बजे के बीच करने का ऐलान था। हालाँकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का भरोसा देने के बावजूद सरकार ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की आड़ में हुए उपद्रव को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाबल पूरी तरह मुस्तैद थे।
गौरतलब है कि हालिया सोशल मीडिया पर खालिस्तानी समर्थक धालीवाल का एक वीडियो वायरल हुआ था। आरोप है कि धालीवाल के संगठन पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन ने ही स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘टूलकिट’ को बनाया था। ताकि भारत को विश्व में बदनाम किया जा सके।
वायरल वीडियो में खालिस्तानी समर्थक धालीवाल द्वारा भारत विरोधी भड़काने वाले बयानों को सुना जा सकता है। क्लिप में वह कहता है, “यदि कृषि कानून कल वापस हो जाते हैं, तो यही हमारी जीत नहीं होगी। कृषि कानूनों की वापसी के साथ जंग की शुरुआत होगी और इसका अंत यहीं नहीं होगा। किसी को यह मत बताने दीजिए कि यह लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ खत्म हो जाएगी, क्योंकि वे इस आंदोलन से ऊर्जा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आप पंजाब से अलग हो, और आप खालिस्तान आंदोलन से अलग हो, आप नहीं हो।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, धालीवाल का यह वायरल वीडियो 26 जनवरी को भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान शूट किया गया था। हालाँकि, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तापमान के बीच उन्होंने आज नदिया जिले के नवद्वीप में ‘परिवर्तन यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। जेपी नड्डा ने कहा कि मुझे पश्चिम बंगाल की जनता का रुख साफ नजर आ रहा है कि परिवर्तन आएगा और कमल खिलेगा। यहाँ से TMC का जाना तय हो चुका है।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “ये माँ, माटी, मानुष के नाम पर आई सरकार ने बंगाल की जनता के साथ धोखा किया। 10 साल में ममता सरकार में माता को लूटा गया, बंगाल की अस्मिता पर आघात पहुँचाया गया, माटी की इज्जत भी नहीं की गई और मानुष की रक्षा नहीं की गई। यहाँ आया क्या तानाशाही। प्रशासन का राजनीतिकरण, पुलिस का क्रिमिनलाइजेशन और भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनाइजेशन हुआ।”
ये मां, माटी, मानुष के नाम पर आई सरकार ने बंगाल की जनता के साथ धोखा किया। यहां आया क्या तानाशाही। प्रशासन का राजनीतिकरण, पुलिस का क्रिमिनलाइजेशन और भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनाइजेशन हुआ : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा #WestBengalpic.twitter.com/RLGQuriNAj
परिवर्तन यात्रा से पहले एक रैली को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, “बंगाल की संस्कृति को ममता जी नहीं संभाल सकती, इसकी सुरक्षा बीजेपी के कार्यकर्ता करेंगे। ममता जिस तरह मेरे नाम के आगे विशेषण लगाती हैं, वो बताता है कि आपने बंगाल की संस्कृति का निरादर किया है।”
नड्डा ने कहा, “मैं देख रहा हूँ कि बंगाल की जनता ने टोलाबाजी की सरकार, कटमनी वाली सरकार, भ्रष्टाचार की सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंकना तय कर लिया है। यहाँ सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। यहाँ स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। अब बंगाल में कमल खिलेगा और बंगाल में विकास होगा, ये मेरा आपसे वादा है।”
मैं देख रहा हूं कि बंगाल की जनता ने टोलाबाजी की सरकार, कटमनी वाली सरकार, भ्रष्टाचार की सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंकना तय कर लिया है: मालदा में रोड शो के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा pic.twitter.com/L4FmXCgqwG
उन्होंने आगे कहा कि, बीजेपी ने तय किया है कि परिवर्तन यात्रा के माध्यम से बंगाल की जनता को जगाएँगे, उनको बताएँगे। बल्कि मुझे तो लगता है कि अब बंगाल की जनता जाग चुकी है। टीएमसी ने यहाँ भ्रष्टाचार को संस्थागत बना दिया था, प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया और पुलिस के साथ-साथ उसका इस्तेमाल क्रिमिनल एक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
वहीं बंगाल में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर नड्डा ने ममता सरकार को घेरते हुए कहा कि बंगाल में आज महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहा है। रेप के केस सबसे ज्यादा बंगाल में हो रहे हैं, घरेलू हिंसा सबसे ज्यादा बंगाल में हो रही है। बंगाल की मुख्यमंत्री एक महिला है, फिर भी महिलाओं की इज्जत न हो, तो बंगाल को परिवर्तन चाहिए।
रोड शो के दौरान ममता सरकार को विकास की राह में रोड़ा बताते हुए नड्डा ने कहा, “जो हर्षोल्लास मैं देख रहा हूँ वो बताता है कि मोदी जी के काम जो उन्होंने किए हैं और जो उन्होंने बंगाल को देने का प्रयास किया है, जिसे ममता जी ने रोकने का काम किया है। उससे यहाँ की जनता त्रस्त और दुःखी है।”
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बनर्जी के तानाशाह रवैए को लेकर कहा, “ममता बनर्जी अपने जिद और ईगो के कारण मोदी के पीएम किसान सम्मान कार्यक्रम को लागू नहीं होने दिया। हमारे बंगाल के 70 लाख किसान 14,000 रुपए के सहयोग से वंचित रहे। जब 25 लाख किसानों ने केंद्र को खुद अर्जी भेज दी तो कहती हैं कि मैं भी लागू करूँगी लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।”
आज जब बंगाल के करीब 25 लाख किसानों ने केंद्र सरकार को पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए अर्जी भेजी, तो ममता जी कहती हैं कि मैं भी योजना लागू करूंगी। ममता जी अब चुनाव आ गए हैं। अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत: पश्चिम बंगाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा https://t.co/b725i47mlH
जय श्री राम के नारे पर ममता बनर्जी की बौखलाहट पर कटाक्ष करते हुए भाजपा नेता ने कहा, “जब हम बोलते हैं तो सामने से नारे लगते हैं जय श्री राम। जब मैं यहाँ आया तो हेलीपैड से सारे रास्ते मैं हाथ हिलाता था तो उधर से कहते थे जय श्री राम और ममता दी को जय श्री राम से इतना गुस्सा क्यों आता है। किसानों की सेवा की होती तो ये दिन देखने को नहीं मिलती।”
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, “बंगाल की जनता के स्वास्थ्य की चिंता मोदी जी ने की थी। अब ममता जाएगी, रास्ते का रोड़ा खत्म होगा और मोदी जी का आयुष्मान भारत बंगाल की जनता को मिलेगा।” उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से बंगाल में सरकार चल रही है, उसमें कोई भी व्यक्ति सरकार के विरोध में बोले, तो उसे जेल में डालने का काम ममता जी कर रही हैं। जिसने भी ममता जी के विरोध में बोला उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
बंगाल की जनता के स्वास्थ्य की चिंता मोदी जी ने की थी। अब ममता जाएगी, रास्ते का रोड़ा खत्म होगा और मोदी जी का आयुष्मान भारत बंगाल की जनता को मिलेगा: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा #WestBengalpic.twitter.com/pM4kdBd8rK
संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) में शामिल होकर भाषण देते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने यूनियन बजट की आलोचना की और इसे दृष्टिकोण रहित बताया। उन्होंने कहा, “भारत का पहला पेपरलेस बजट 100 फ़ीसदी विज़नलेस बजट भी है। इस फर्जी बजट की नीति है भारत को बेचना।”
ब्रायन का कहना था कि सरकार ने रेलवे, हवाई अड्डे और बंदरगाह बेच दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी कई आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने भारतीय रेलवे पर पश्चिम बंगाल में 31 परियोजनाओं को आश्रय देने का आरोप लगाया। इसके अलावा कई परियोजनाओं को एसपीवी (SPV) मॉडल के अंतर्गत लेकर आने की भी आलोचना की, जिसमें राज्य सरकार भी हितधारक (stakeholder) बन जाती है। टीएमसी सांसद के मुताबिक़ रेलवे संघीय ढांचे (federalism) के मामले में असफल रहा है। क्योंकि एसपीवी प्रणाली के तहत राज्य सरकार को परियोजना का 50 फ़ीसदी खर्च उठाना होता है। जबकि इसके पहले तक परियोजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी।
India’s first paperless budget is also a 100% visionless budget.Theme of the fake budget is Sell India!
Railways:sold Airports:sold Ports: sold Insurance: sold PSUs:23 sold!
Common people ignored. Farmers ignored.
Rich get richer,nothing for middle class,poor get poorer (1/3)
— Derek O’Brien | ডেরেক ও’ব্রায়েন (@derekobrienmp) February 1, 2021
मोदी सरकार के रेलवे बजट को आम बजट मिलाने के फैसले को लेकर टीएमसी सांसद ने कहा कि अब कोई अलग रेलवे बजट नहीं है।
रेल मंत्रालय ने ब्रायन की बातों का करारा जवाब देते हुए मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले की वकालत की। इस मुद्दे पर जारी किए गए बयान में रेलवे मंत्रालय ने कहा कि अब रेलवे के खर्च आम बजट के साथ पेश किए जाते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि रेलवे के संसाधनों में कटौती की जाती है। मंत्रालय का कहना है कि बजट विलय के फैसले ने रेलवे को सरकारी नीतियों के केंद्र में लाया है और अधिकांश क्षेत्रीय आवंटन सुनिश्चित किए हैं। बयान के मुताबिक़, “विलय के फैसले की वजह से मल्टी मोडाल ट्रांसपोर्ट प्लानिंग (multi modal transport planning) में मदद मिली है। जो 1.07 लाख करोड़ रुपए की मदद से स्पष्ट है जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 53 फ़ीसदी अधिक है।”
पश्चिम बंगाल को नज़रअंदाज़ करने के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने जानकारी दी। जिसके मुताबिक़ पश्चिम बंगाल में आधारभूत संरचना और सुरक्षा परियोजनाओं के अंतर्गत 2021-22 में 6636 करोड़ का बजट जारी किया गया है जो कि अभी तक का सबसे बड़ा बजट है। यह पिछले साल की तुलना में 26 फ़ीसदी ज़्यादा है और 2009-14 की तुलना में लगभग 51 फ़ीसदी ज़्यादा है।
पश्चिम बंगाल के लिए जारी की गई परियोजनाओं की जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि प्रदेश को 53 परियोजनाएं दी जा रही हैं। जिसमें से 34 का टोकन आवंटन पूरा हो चुका है। इसमें से कुछ परियोजनाएं 45 साल पुरानी, लगभग 1974-75 के बीच की हैं जिन्हें भूमि अधिग्रहण, प्रदेश सरकार या स्थानीय कारणों के चलते टाला जा रहा था। अब इनके लिए धनराशि का आवंटन इनकी प्रगति और प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है। इसलिए अब एक परियोजना में किसी तरह की समस्या आती है तो मंत्रालय उसके लिए धनराशि आवंटित नहीं करेगा।
इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ परियोजनाओं के लिए एसपीवी प्रोजेक्ट लागू करने का कारण भी बताया है। फ़िलहाल कुछ परियोजनाओं का खर्चा केंद्र सरकार ही उठाती है और कुछ को तमाम कारणों की वजह से एसपीवी के दायरे में रखा गया है। यह मॉडल रेलवे में संसाधनों की बढ़ोतरी करने के लिए तैयार किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि एसपीवी की मदद से राज्य सरकारों को आर्थिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
राज्य सरकारें भी ऐसे प्रोजेक्ट चाहती हैं जो जनता की माँग पर आधारित होते हैं। ऐसे प्रोजेक्ट नहीं चाहती हैं जो रेलवे के लिए फ़ायदेमंद होते हैं। एसपीवी प्रणाली के तरह राज्य सरकारों को परियोजनाओं का चुनाव करने की आज़ादी होगी और निजी सहायता, मुफ़्त ज़मीन और वायबिलीटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding) की मदद से बेहतर बनाने का विकल्प होगा।
इन परियोजनाओं के लिए रेलवे मंत्रालय मुफ़्त ज़मीन और 50 फ़ीसदी खर्च की साझेदारी के विकल्प पर विचार कर रहा है। इसकी वजह से परियोजना में शामिल हित धारकों में समन्वय स्थापित होगा और प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा रेल मंत्रालय ने उस आरोप को भी खारिज कर दिया है कि मंत्रालय ने पिंक बुक जारी नहीं की है। मंत्रालय के मुताबिक़ यह 3 फरवरी को जारी की गई थी और पब्लिक डोमेन पर मौजूद है।
दरअसल, रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से पहले ही निवेदन किया था कि वो भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने और क्षेत्रीय समस्याओं का जल्द से जल्द निस्तारण करे। जिसकी वजह से रेलवे के लगभग तीन दर्जन प्रोजेक्ट रुके हुए हैं लेकिन ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि वह ममता बनर्जी से निवेदन करना चाहते हैं वह प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन प्रदान करें।
रेल मंत्री के मुताबिक़ राज्य सरकार की वजह से इन परियोजनाओं में समय लग रहा है, पहले वामपंथी सरकार और अब तृणमूल सरकार। 45 वर्ष पुरानी परियोजनाएं रुकी हुई हैं। पहले रेल मंत्रालय ने बिना ज़मीन और फंड्स की उपलब्धता देखे प्रोजेक्ट आवंटन कर दिया था। इसकी वजह से रेलवे के बहुत से प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। लेकिन अब प्रक्रिया बदल चुकी है, अब रेलवे सिर्फ तब प्रोजेक्ट शुरू करता है अगर उसके पास ज़मीन होती है।
बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने उस 19 वर्षीय लड़के को सुनाई जाने वाली दस साल के कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया है, जिस पर अपनी चचेरी बहन के साथ रेप का आरोप था। इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का तर्क यह है कि नाबालिग की सहमति (Minor consent) पर कानूनी नजरिया साफ नहीं है। दरअसल, 19 साल के लड़के को अपने साथ रहने वाली नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया गया था।
जानकारी के मुताबिक लड़की की उम्र 15 साल है और वह आठवीं कक्षा में पढ़ती है। लड़की दो सालों से अपने चाचा के घर पर रह रही थी। सितंबर 2017 में लड़की ने अपनी एक दोस्त को बताया कि उसके चचेरे भाई ने उसको गलत तरीके से हाथ लगाया था, जिसके बाद से उसके पेट में दर्द रहने लगा है। उसकी दोस्त ने उसकी यह बात अपनी क्लास टीचर को बताई।
पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए ये बयान
जब टीचर ने पीड़ित लड़की से इस बारे में पूछा तो लड़की ने टीचर को अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी और बताया कि उसका चचेरा भाई उसके साथ क्या करता है। तीन मार्च 2018 को उस लड़के के खिलाफ FIR दर्ज की गई। लेकिन जब FIR के बाद बच्ची का मेडिकल चेकअप किया गया, तो कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई।
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि साल 2017 के सितंबर, अक्तूबर और फिर 2018 की फरवरी में उसके चचेरे भाई ने उसके साथ यौन शोषण किया। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पीड़ित बच्ची का बयान दर्ज किया गया। बयान में पीड़िता ने यह भी बताया कि यह सहमति से किया गया कार्य था और केवल एक बार नहीं, बल्कि चार-पाँच बार। लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए बयान में कहा कि उसने जो बयान पुलिस के सामने दिए थे, वे टीचर के आग्रह पर दिए गए थे।
कोर्ट ने नाबालिगों की सहमति पर दिया यह तर्क
निचली अदालत की तरफ से लड़के को दोषी ठहराए जाने के बाद लड़के ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की और जमानत की माँग की। तथ्यों को देखने के बाद न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि हालाँकि कानून में नाबालिगों की सहमति को वैध नहीं माना गया है, लेकिन नाबालिगों के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंधों पर कोई कानूनी स्पष्टता नहीं है या कानूनी नजरिया साफ नहीं है।
न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, “मैं इस तथ्य से भी अवगत हूँ कि नाबालिगों के बीच सहमति से यौन संबंध एक कानूनी अस्पष्ट क्षेत्र रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की दृष्टि में एक वैध सहमति नहीं माना जाता है।” न्यायालय ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि पीड़िता ने अपना बयान पलटा था और यहाँ तक कि उसकी माँ अभियोजन पक्ष से भी नहीं मिली थी।
बेंच ने आगे कहा कि ट्रायल के दौरान भी आरोपित को जमानत दी गई थी और उसने इसका दुरुपयोग नहीं किया था। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आरोपित की सजा को रद्द कर दिया है और लड़के को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट तय समय में लड़के की अपील पर सुनवाई करेगा।
गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 19 जनवरी को अपने एक फैसले में कहा था कि ‘स्किन टू स्किन’ स्पर्श हुए बिना या कपड़ों के ऊपर से नाबालिग पीड़िता को ‘स्पर्श करना’ पॉक्सो कानून (POCSO Act) या यौन अपराधों पर बाल संरक्षण कानून के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता। हालाँकि चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अगुवाई वाली देश की शीर्ष कोर्ट ने इस फैसले पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी।
इसके बाद एक और मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की एकल पीठ ने यह फैसला दिया कि किसी लड़की का हाथ पकड़ना और आरोपित का पैंट की जिप खोलना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज ऐक्ट, 2012 (POCSO) के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता।
बुधवार (जनवरी 29, 2021) को बॉम्बे हाई कोर्ट का एक और फैसला सामने आया। ये भी रेप से जुड़ा मामला था। इस मामले में भी निचली अदालत ने 26 साल के आरोपित को रेप का दोषी पाया था, लेकिन जस्टिस पुष्पा ने उसे बरी कर दिया। जस्टिस पुष्पा ने तर्क दिया, “बिना हाथापाई किए युवती का मुँह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना एक अकेले आदमी के लिए बेहद असंभव लगता है।”
पुडुचेरी पुलिस ने 43 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का प्रस्ताव दिया था। उसने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को मारने के लिए तैयार है अगर कोई उसे इस काम के लिए 5 करोड़ रुपए दे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित आर्यनकुप्पम गाँव का रहने वाला है। फेसबुक पर विवादित पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गुरुवार (4 फरवरी, 2021) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने अपने पोस्ट में लिखा था कि, यदि कोई उसे 5 करोड़ रुपए दे तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कर देगा।
दरअसल, एक कार चालक ने फेसबुक पोस्ट पढ़ने के बाद तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी थी। जिसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति के फेसबुक अकाउंट को ट्रेस किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। शख्स की पहचान 43 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी सत्यनंदम के रूप में हुई है।
आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया। जहाँ कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सत्यनंदम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1) और 505 (2) के तहत सार्वजनिक शरारतों के लिए बयान देने और शत्रुता, घृणा को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत पालने वाले ‘बुद्धिजीवियों’ की उस लिस्ट में NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार भी शामिल हो गए हैं जो भारत के आंतरिक मामले में रिहाना जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के दखल देने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना, जिसका भारत के साथ कोई संबंध नहीं है, ने पिछले दिनों देश के आंतरिक मामले में नाक घुसेड़ने की कोशिश की थी। पिछले 3 महीनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे तथाकथित किसानों के पक्ष में उनके ट्वीट से यह पता चला कि उनका समर्थन एक समन्वित अभियान का हिस्सा था। जब भारत के खिलाफ चल रहे इस पूरे प्रोपेगेंडा का खुलासा हुआ तो देश के खेल जगत और मनोरंजन जगत के तमाम दिग्गजों ने खुलकर इसका विरोध किया। साथ ही लोगों से ऐसे विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए कहा। जिसके बाद ट्विटर पर #IndiaAgainstPropaganda #IndiaTogether नाम से हैशटैग ने काफी ट्रेंड किया।
इस मसले पर NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार, जिन्होंने अपने शानदार करियर में झूठ के अलावा कुछ नहीं बोला, ने सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में भारत सरकार के समर्थन में खड़े फिल्मी कलाकार और भारतीय क्रिकेटर्स पर भी उन्होंने निशाना साधा। जबकि भारतीय हस्तियों ने वही किया, जो इस स्थिति में प्रत्येक देशवासी को करना चाहिए।
रवीश कुमार का फेसबुक पोस्ट
रवीश कुमार ने लिखा, “एक पॉप स्टार के ट्वीट से क्यों हिल गई भारत सरकार। हमारे फ़िल्म कलाकारों को देखिए। जिन साठ प्रतिशत किसानों से देश बनता है। सीमाएँ सुरक्षित होती हैं। उन किसानों के लिए नहीं बोले। लेकिन रिहाना के ट्वीट से सारे के सारे सरकार को बचाने आ गए। लगता है इन लोगों ने दिल्ली की सीमाओं पर कीलें देखी नहीं हैं, हाइवे के बीच में खोदी जा रही खाई नहीं देखी हैं, वरना वे उसका भी समर्थन कर देते। किसान आंदोलन ने विदेशों में भारत सरकार की छवि खराब की है। आंतरिक मामला बता कर एकजुटता दिखाने का प्रयास घबराहट में लिया गया है। एक पॉप स्टार की इतनी ताकत कि पूरी भारत सरकार अकेली पड़ गई। गोदी मीडिया अकेला पड़ गया तो अक्षय कुमार से लेकर लता मंगेशकर को बुलाना पड़ गया।”
रवीश कुमार विदेशी हस्तियों की निंदा करने वाले भारतीय हस्तियों से नाराज थे
एक अन्य फेसबुक पोस्ट में, रवीश कुमार ने उन भारतीय हस्तियों पर कटाक्ष किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा की गई टिप्पणियों के आलोक में एकता का आह्वान किया और उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में मध्यस्थता करने की निंदा की। उन्होंने लिखा, “लोकतंत्र भीतर पहनने वाला बनियान नहीं है जो अंदर की बात है।” उन्होंने कहा कि इन भारतीय हस्तियों ने इतने लंबे समय तक एक शब्द नहीं बोला, लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने किसानों के साथ एकजुटता दिखाई, वे यह कहने लगे कि यह भारत का आंतरिक मामला है।
रवीश कुमार का फेसबुक पोस्ट
खैर, मोदी सरकार के लिए वामपंथी मीडिया और प्रोपेगेंडा फैलाने वालों की नफरत कोई नई बात नहीं है। NDTV के पत्रकार और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार, जो इस ब्रिगेड का हिस्सा हैं, ने लगातार केंद्र सरकार को एक क्रूर दमनकारी शासन के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है, भले ही इसके लिए उन्हें फेक न्यूज या प्रोपेगेंडा का सहारा ही क्यों न लेना पड़ा हो।
रवीश कुमार ने लाल किले पर हुई हिंसा पर की लीपापोती
हाल ही में, रवीश कुमार ने दंगाइयों द्वारा की गई बेलगाम हिंसा की भयावहता पर लीपापोती करने का प्रयास किया, जिन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगे का अपमान किया। देश के खिलाफ तथाकथित किसानों द्वारा हिंसक अपमान के बावजूद विवादास्पद न्यूज एंकर रवीश कुमार ने उनके हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को ‘शांतिपूर्ण आंदोलन’ का नाम देकर दंगाइयों के करतूत को ढँकने की कोशिश की। इतना ही नहीं, NDTV ने दंगाइयों को यह कहते हुए मानवतावादी दिखाने का भी प्रयास किया कि उन्होंने ट्रैक्टर रैली की हिंसक भीड़ में एंबुलेंस को बाहर जाने का रास्ता दिया।
26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने 3 और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित बुराड़ी और लाल किले पर हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल थे। बता दें, लाल किला हिंसा मामले की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच अब तक हिंसा में शामिल 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।
इससे पहले दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हिंसा में शामिल धर्मेंद्र सिंह हरमन को गिरफ्तार किया था। धर्मेंद्र सिंह हरमन ने ही लाल किले के गुंबद पर धार्मिक झंडा लहराने के लिए दंगाइयों को उकसाया था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआइटी द्वारा गिरफ्तार धर्मेन्द्र सिंह हरमन दिल्ली दंगे के दौरान शाहीनबाग में हुए उपद्रव में भी काफी सक्रिय था।
26 जनवरी को लाल किले में वीडियो फुटेज में देखे गए हरमन ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लाल किले पर झंडे को फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का लाइव स्ट्रीम किया था। पुलिस ने कहा कि हरमन सिंघु सीमा पर पिछले दो महीनों से किसानों के आंदोलन में जा रहा था।
दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने वीडियो फुटेज प्राप्त करने के बाद हरमन को गिरफ्तार किया था, जहाँ उसे एक कार के ऊपर बैठे देखा जा सकता है और भीड़ को लाल किले पर सिख झंडा फहराने के लिए उकसा रहा है। एक अन्य वीडियो फुटेज में, हरमन को गणतंत्र दिवस के दंगों में भाग लेते हुए भी देखा गया था, जहाँ दंगाइयों ने उपद्रव किया था।
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस लाल किले और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में उत्पात मचाने वालों दंगाइयों की कुंडली खंगालने में जुटी है। 26 जनवरी को भड़की हिंसा में सैकड़ों दंगाइयों ने दिल्ली में प्रवेश किया। उन दंगाइयों में से कई ट्रैक्टर चलाकर लाल किले पर पहुँचे और लाल किले के गुंबदों पर धार्मिक ध्वज फहराया। इन तथाकथित किसानों ने क्रूरता से पुलिस अधिकारियों पर लाठियों, लोहे की छड़ों, ईंटों और पत्थरों से हमला किया था, जिससे लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
एसआईटी इन दंगाइयों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जोर-शोर से कर रही है, और उन्हें दबोचने के लिए मोबाइल का डेटा छान रही है। इसी क्रम में, 3 फरवरी को, SIT ने हिंसा में शामिल लगभग 20 दंगाइयों की तस्वीरें जारी कीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस की हिंसा से संबंधित अब तक जनता से 1,700 से अधिक वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। दिल्ली पुलिस ने अब दंगाइयों को पकड़ने के लिए संबंधित सामग्री का विश्लेषण करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली है।
दिल्ली पुलिस ने अभिनेता-कार्यकर्ता और खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू के ठिकाने की सूचना देने के लिए 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है, जो गणतंत्र दिवस के दंगों का मुख्य आरोपित भी है।
ग्रेटा थनबर्ग ने पिछले दिनों गलती से खालिस्तानियों का ‘टूलकिट’ डॉक्यूमेंट लीक कर दिया था। इससे उस वैश्विक षड्यंत्र की पोल खुल गई, जिसका मकसद भारत विरोधी एजेंडे का प्रचार और किसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी जैसी हिंसा को हवा देना था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने भी ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में कई ट्वीट किए हैं।
मीना हैरिस के साथ-साथ पूर्व ‘पोर्नस्टार’ मिया खलीफा और जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता कही जाने वाली ग्रेटा थनबर्ग और गायिका रिहाना भी इस प्रपंच में शामिल थीं। जब से भारत सरकार ने साजिश के मूर्त रूप लेने से पहले ही हस्तक्षेप कर करारा जवाब दिया है, तब से मीना हैरिस बौखला सी गई हैं। मीना हैरिस इस बात से नाराज हैं कि भारत में उनके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन क्यों हो रहा है। उनके पोस्टर्स क्यों जलाए जा रहे हैं?
मीना हैरिस और उनके गुट के लोग अभी भी भारत में हिंसात्मक विद्रोह का समर्थन कर रहे हैं और देश को अस्थिर बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। अपने दोहरे रवैये का प्रदर्शन करते हुए हैरिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को विचित्र और भारत के लोगों को कट्टर करार दिया। बनावटी डर जाहिर करते हुए हैरिस ने कहा कि जो लोग उनका पुतला जला सकते हैं, ऐसे ‘कट्टरपंथी’ उनके साथ भारत में क्या करेंगे ये सोचा जा सकता है।
मीना हैरिस को अपने खिलाफ किया जाने वाला शांतिपूर्ण विरोध ‘कट्टरपंथी’ लगता है। लेकिन यही मीना हैरिस 26 जनवरी को दिल्ली में खेले गए हिंसा के नंगे खेल का समर्थन करती हैं, जिसमें खालिस्तानियों ने 400 पुलिसकर्मियों पर हमला करके उन्हें घायल कर दिया था। इस दौरान दंगाइयों ने तलवार, चाक़ू, पत्थर और डंडों का इस्तेमाल भी किया था और लाल किले पर धार्मिक झंडा भी लहराया था।
भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट
इसके पहले मीना हैरिस सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाती हुई नज़र आई थीं, जिसमें दावा किया गया था कि 23 साल की लेबर राइट ‘एक्टिविस्ट’ नवदीप कौर को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में उन पर अत्याचार किए गए और उनका ‘यौन शोषण’ हुआ।
मीना हैरिस ने नवदीप कौर की बहन द्वारा वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द क्विंट’ पर किए गए दावे को आगे बढ़ाया था। कौर की बहन ने ‘द क्विंट’ से बात करते हुए बताया था कि उसे पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा और उसके गुप्तांगों पर भी चोट के निशान हैं। हालाँकि, हरियाणा पुलिस ने इन सभी दावों को निराधार बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था।
नवदीप कौर मजदूर अधिकार संगठन यूनियन से जुड़ी हुई हैं जो कि किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 12 जनवरी को हरियाणा पुलिस ने उन्हें सिंघु बॉर्डर स्थित प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार किया था। बाद में अदालत ने 2 फरवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके तुरंत बाद मीना हैरिस ने भी क्विंट द्वारा फैलाया गया प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाने में देरी नहीं की। उन्होंने पुलिस का पक्ष समझना भी ज़रूरी नहीं समझा।
दिलचस्प बात ये है कि कैपिटल हिल में हुई हिंसा के बाद मीना हैरिस और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने पूरी मज़बूती के साथ माँग उठाई थी कि हिंसा को अंजाम देने वालों को जेल भेज देना चाहिए। जब वैसी ही घटना भारत में हुई तब उन्होंने यह समझने का प्रयास नहीं किया कि पुलिस का घटना पर क्या कहना है। इस हरकत के ज़रिए मीना हैरिस ने भारत की न्याय व्यवस्था को नीचा दिखाने का प्रयास किया।
मीना हैरिस यहीं रुकी नहीं! अपना मिथ्या प्रचार जारी रखते हुए कमला हैरिस की भतीजी ने एक और झूठी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि भारतीय मीडिया ने उनके खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन का महिमामंडन किया है। हैरिस के मुताबिक़, मीडिया ने एक ‘किसान आंदोलन’ समर्थक महिला के पोस्टर जलाने वालों को बहादुर बना कर प्रदर्शित किया।
मीना हैरिस का ट्वीट
एक भी मीडिया समूह ने मीना हैरिस का विरोध करने वाले राष्ट्रवादियों के लिए इस तरह का शीर्षक प्रकाशित नहीं किया है, बल्कि वामपंथी मीडिया समूह उन राष्ट्रवादियों के दुष्प्रचार में खुल कर सामने आए जो देशहित के लिए खड़े हुए थे। वामपंथी मीडिया समूह विदेशी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने में ही व्यस्त हैं, जिससे भारतीयों की छवि को ही नुकसान हो रहा है।
मीना हैरिस ने ट्वीट में लिखा, “बात सिर्फ कृषि कानूनों की नहीं है। ये एक मुखर अल्पसंख्यक समुदाय की प्रताड़ना से जुड़ा मुद्दा है। ये पुलिस की हिंसा, कट्टर व हिंसक राष्ट्रवाद का मुद्दा है। ये मजदूरों के हितों पर हमला का मामला है। ये वैश्विक दादागिरी है। आप इन्हें आंतरिक मुद्दे बना कर मुझे दखल देने से न रोकें। ये हमारे मामले हैं।”
भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट
एक ऐसी अवसरवादी जिसे कृषि क़ानूनों के बारे में कुछ नहीं पता
मीना हैरिस को भले भारत सरकार के कृषि सुधार क़ानूनों के बारे में बुनियादी जानकारी या समझ नहीं हो, इसके बावजूद वह वैश्विक प्रोपेगेंडा प्रचार का हिस्सा बनीं।
अन्य अंतरराष्ट्रीय चेहरों की तरह मीना हैरिस ने भ्रम फैलाते हुए दावा किया कि दिल्ली में जिस तरह ‘किसानों के साथ अर्धसैनिक बलों ने हिंसा की’, उसकी वजह से उनमें बहुत ज़्यादा गुस्सा है। जबकि आंदोलन की आड़ लेकर हुई अराजकता में साफ़ देखा गया था कि आखिर कैसे दंगाई राजधानी की सड़कों पर उतरे और उन्होंने 400 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था।
भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट
कमला हैरिस के साथ अपने रिश्तों को लेकर अक्सर दिखावा करने वाली मीना हैरिस ने कट्टरपंथी इस्लामियों और भारत विरोधी तत्वों की मदद से भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने का प्रयास करने में लगी हुई हैं। मीना हैरिस की ट्विटर टाइमलाइन ‘किसान आंदोलन’ पर किए गए ट्वीट से भरी पड़ी है जिसके ज़रिए उन्होंने राजधानी दिल्ली में उपद्रव करने वालों का पक्ष लेने का भरपूर प्रयास किया है।
भारत, कृषि क़ानून और हिंसात्मक प्रदर्शन पर मीना हैरिस का ट्वीट
कमला हैरिस के सहारे अपने हित साधने वाली मीना हैरिस
36 वर्षीय मीना हैरिस ने स्टैनफ़ोर्ड और हार्वर्ड (Stanford and Harvard) से वकालत की पढ़ाई की है। इन्हें अमेरिका में पहचान तब मिली जब कमला हैरिस ने कुछ साल पहले उप राष्ट्रपति चुनाव का हिस्सा बनने का फैसला लिया। बीते कुछ सालों में मीना हैरिस पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल करके अपना हित साधने का प्रयास किया है।
इसके अलावा मीना हैरिस ने दो किताबें भी लिखी हैं, ‘एम्बिशीयस गर्ल (Ambitious Girl)’ और ‘कमला एंड मायाज़ बिग आइडिया (Kamala and Maya’s Big Idea)’। मीना ने अपनी किताबें बेचने के लिए भी कमला हैरिस के नाम का इस्तेमाल किया जो बाद में बेस्टसेलर भी बनी। नवंबर 2020 में हुए चुनाव के बाद हैरिस ने कपड़े की कंपनी और एक प्रोडक्शन कंपनी भी शुरू की।
कॉन्ग्रेस सांसद के.सुधाकरन ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मंगलवार (2 फरवरी, 2020) को केरल के मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पिनराई विजयन के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी की। जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।
कॉन्ग्रेस नेता सुधाकरन ने कन्नूर में एक राजनीतिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजयन के हेलीकॉप्टर यात्रा पर कटाक्ष किया था। उन्होंने केरल के सीएम को ताड़ी समुदाय के लोगों से जोड़ते हुए कहा था कि विजयन इतिहास में मजदूर वर्ग के लोगों के ऐसे नेता के रूप में जाने जाएँगे, जिन्होंने एक शानदार जीवन का सुख उठाया है। कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को तय करना है कि यह सम्मान की बात है या अपमान की।
के. सुधाकरन ने कहा, “पिनराई का परिवार क्या है? चेठुकरूदे कुडुम्बम् (Chethukarude kudumbam)। पिनाराई विजयन, ताड़ी-निकालने वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले मजदूर वर्ग में क्रांति भरकर और लाल झंडे को पकड़े हुए आगे बढ़ने वाले, अब वह कहाँ हैं? ताड़ी बनाने वाले परिवार से उठने वाले एक मुख्यमंत्री को यात्रा करने के लिए एक हेलीकॉप्टर की आवश्यकता होती है। वह ऐसा करने वाले केरल के पहले सीएम होंगे।”
गौरतलब है कि पिनाराई विजयन के खिलाफ सुधाकरन द्वारा दिया गया बयान एक जातिवादी टिप्पणी थी। बता दें केरल के सीएम थिया या एझावा (Thiyya or Ezhava) समुदाय के हैं, जिन लोगों को कभी समान अधिकारों से वंचित किया गया था और जिन्होंने परंपरागत रूप से ताड़ी निकालने का काम किया था। भारत सरकार द्वारा ऐसे समुदाय के सदस्यों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि सुधाकरन ग्रामीण विकास और अन्य पिछड़े वर्ग के कल्याण पर संसदीय स्थायी समितियों के सदस्य भी हैं। जिसके चलते उनके जातिसूचक टिप्पणी के लिए उन्हें हर जगह से लताड़ा गया। इसके अलावा लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए यह भी कहा कि वह ताड़ी निकालने वाले लोगों का सहारा लिए बिना केरल के सीएम की शानदार जीवनशैली के बारे में सोच सकते थे।
वहीं उनकी टिप्पणी पर माकपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस नेता का उद्देश्य एक वर्ग के लोगों को नीचा दिखा कर शर्मसार करना था, जिसके चलते वह किसी भी तरह एक सार्वजनिक पद को धारण करने के योग्य नहीं हैं।
वहीं बढ़ते विवाद को देखते हुए सुधाकरन ने अपनी टिप्पणी पर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा, उनका बयान विजयन की जाति पर लक्षित नहीं किया गया था, बल्कि इसका उद्देश्य उनकी वर्तमान ‘भव्य जीवन शैली’ को इंगित करना था।
बता दें, रमेश चेन्नीथला की अगुवाई वाली ‘‘ऐश्वर्य यात्रा’’ के दौरान कॉन्ग्रेस नेता की ओर से की गई जातिगत टिप्पणी ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। कॉन्ग्रेस विधायक और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता चेन्नीथला ने सुधाकरन की आलोचना की और उनसे व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेज करने को कहा।
वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य विधायक शनीमोल उस्मान ने सुधाकरन द्वारा दी गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा। कॉन्ग्रेस पार्टी मामले को शांत करने की पुरजोर कोशिश में लगी है।
हालाँकि, बाद में चेन्नीथला को अहसास हुआ कि सुधाकरन ने किसी तरह की अभद्र टिप्पणी नहीं की है। इसी तरह अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने भी सुधाकरण को अपना समर्थन दिया है।
हेलीकॉप्टर विवाद के पीछे की कहानी
सुधाकरन के हेलीकॉप्टर टिप्पणी का अंदाजा इस बात से लगाया गया था कि पिनाराई विजयन ने दिसंबर 2017 में केरल के थ्रिशूर (Thrissur) में सीपीआई (एम) पार्टी की बैठक में भाग लेने के लिए एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया था। केरल आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा पारित एक आदेश में, सरकार ने साइक्लोन ओखी के लिए राज्य राहत कोष का उपयोग करते हुए 8 लाख रुपए, हेलीकॉप्टर से जाने के लिए भुगतान करने की माँग की थी।
गौरतलब है कि इस मामले पर काफी बवाल हुआ था। जिसके बाद सरकार ने आदेश वापस ले लिया और केरल के सीएम ने आश्वासन दिया कि बकाया भुगतान लोक प्रशासन खाते से किया जाएगा। वहीं पिछले साल हेलीकॉप्टर विवाद एक बार फिर से सामने आया था, जिसमें केरल सरकार ने एक हेलीकॉप्टर की खरीद की थी। हालाँकि, बाद में पिनारयी विजयन ने दावा किया कि आपदा प्रबंधन कार्य के लिए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता थी।
मद्रास हाई कोर्ट ने ईसाई उपदेशक मोहन सी लाजारूस को कड़ी फटकार लगाते हुए उसके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। जस्टिस आनंद वेंकटेश की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी अन्य धर्म के बारे में अपमानजनक बयान देने का अर्थ है घृणा के बीज बोना। अदालत ने कहा कि एक बहुलतावादी समाज में दूसरे पंथों के प्रति सहिष्णुता और सम्मान होना चाहिए।
लाजरूस ‘जीसस रेडीमस मिनिस्ट्री’ नामक संस्था का संस्थापक है। उसने अपने बयान के लिए माफी माँगी, जिसके बाद उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किया गया। इस दौरान उसे कोर्ट ने उससे कहा कि अपने मजहब के लिए उपदेश देने का अधिकार है, लेकिन कुछ सीमाएँ भी हैं, ताकि दूसरों का अपमान न हो। कोर्ट ने ईसाई उपदेशक के बयान की भी निंदा की। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:
“किसी धर्म/पंथ के खिलाफ ज़हर उगलना, या फिर किसी एक संप्रदाय के लोगों के मन में दूसरे संप्रदाय के प्रति घृणा फैलाना- ये सब धर्म के उद्देश्य का ही उल्लंघन करते हैं। धर्म को एक ऐसा माध्यम बनाया गया है, जिसके अंतर्गत मनुष्य सत्य के उच्च-स्तर की तरफ बढ़ सके, विकसित हो सके। याचिकाकर्ता दुनिया भर में अपने अनुयायी होने का दावा करता है। ऐसे लाखों लोग हैं, जो उसका अनुसरण करते हुए उसकी बातों को आँख बंद कर के मानते होंगे।”
अदालत ने कहा कि अगर वो कोई ऐसा बयान देता है कि जिसमें किसी दूसरे संप्रदाय के प्रति अपमान का इरादा हो, तो इससे समाज में घृणा फैलेगी। अदालत ने ये भी याद दिलाया कि हर धर्म के प्रभावशाली लोगों के पास क्षमता होती है कि वो व्यक्ति के आंतरिक विकास को प्रभावित कर सकें। कोर्ट ने कहा कि आध्यात्मिकता ये दिखाने की प्रतिस्पर्धा नहीं है कि हमारा धर्म तुम्हारे से श्रेष्ठ है।
Mohan C Lazarus was not an an apology, just a regret that the video went public and viral. pic.twitter.com/D6ne9tVDz6
— Arjun Sampath 4 HR&CE Ministry (@Indumakalktchi) February 6, 2021
इस दौरान जस्टिस आनंद वेंकटेश ने जीसस क्राइस्ट के शब्दों को भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने किसी अन्य संप्रदाय का अपमान न करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि लोग कुछ मजहबी विचारों के प्रति अंधविश्वास पाल लेते हैं और दूसरों को नीचा दिखाते हैं। उन्होंने भारत में धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित करते हुए सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि समाज में कट्टरवादियों और गलतफहमियों का प्रभाव बढ़ रहा है।
मोहन सी लाजारूस ने हिन्दू धर्म और मूर्तिपूजन के खिलाफ विवादित बयान दिया था। ये मामला 2016 में दिए गए उसके बयान से जुड़ा हुआ था। लाजारूस सुनामी को मूर्तिपूजकों के खिलाफ ईश्वर का गुस्सा मानता है। वह भारत में गरीबी के लिए भी मूर्तिपूजा को ही जिम्मेदार ठहराता रहा है। एक हिन्दू परिवार में जन्म लेने वाले मोहन सी लाजारूस का दावा है कि दिल की बीमारी ठीक होने के बाद वो ईसाई बना।