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बजाज को लगता है कोरोना हो जाए, पर स्वदेशी वैक्सीन नहीं लेनी हैः NDTV पर कॉन्ग्रेस के करीबी उद्योगपति का प्रलाप

आपको याद होगा कि ‘बजाज ऑटो’ के प्रबंध निदेशक (MD) राजीव बजाज ने कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को गलत ठहराया था। अब उन्होंने फिर से NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन जैन से बात करते हुए अपने भारत-विरोधी रुख को प्रदर्शित किया है। उन्होंने यहाँ कोरोना लॉकडाउन और वैक्सीन पर नकारात्मकता फैलाई।

NDTV ने अपने शो में उन्हें बतौर गेस्ट स्पीकर बुलाया था, जहाँ उनसे भारत में बनी कोरोना की दोनों वैक्सीन, हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2021 और Q3FY21 में उनकी कम्पनी ‘बजाज ऑटो’ को हुए रिकॉर्ड आर्थिक लाभ के सम्बन्ध में कई सवाल पूछे गए। इस दौरान कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के करीबी बताए जाने वाले राजीव बजाज ने मोदी सरकार को भी लपेटे में लिया।

भारत विरोधी और पीएम मोदी की आलोचना करने वाले गिरोह के सदस्य के रूप में पहचाने जाने वाले राजीव बजाज ने दावा किया कि भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अनपढ़, जाहिल और अनुशासनहीन है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो लॉकडाउन पर दिए अपने बयान पर कायम हैं, तो उन्होंने कहा कि भारत सरकार कोरोना महामारी से निपटने में और इसके बाद आई आर्थिक गिरावट को ठीक करने में विफल रही है।

एक तरफ जहाँ ‘बजाज ऑटो’ रिकॉर्ड प्रॉफिट कमा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके MD ने भारत की अर्थव्यवस्था के खस्ताहालत में होने की बात कही। उन्होंने भारत को एक ‘युवा और स्वस्थ’ देश बताते हुए कहा कि लॉकडाउन की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को एक सोची-समझी और परिस्थितियों के हिसाब से तैयार की गई रणनीति अपनानी चाहिए थी। राजीव बजाज लॉकडाउन को खतरनाक भी बता चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इससे संक्रमण का ग्राफ नहीं गिरा बल्कि अर्थव्यवस्था का ग्राफ फ्लैट हो गया। उन्होंने दोनों स्वदेशी वैक्सीन के बारे में कहा कि उनसे जुड़े रिस्क ज्यादा हैं और फायदे कम। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के समर्थन और विरोध की बजाए बीच में खड़े होकर इसकी समीक्षा करनी चाहिए कि क्या इसके नुकसान, इसके फायदों को दबा देते हैं? उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में बनाए गए ये वैक्सीन सुरक्षित नहीं हैं।

इस पर पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने भी कहा कि जहाँ वैक्सीन 99% सुरक्षित है, 1-2% मामलों में इससे जुड़ा बड़ा खतरा भी हो सकता है। बजट पर टिप्पणी करते हुए बजाज ने कहा कि अपने 30 वर्ष के करियर में उन्होंने कभी बजट को सुना तक नहीं है।

यहाँ ये आश्चर्य की बात है कि जब वो बजट के बारे में कुछ जानते ही नहीं हैं, फिर इस मामले पर उन्हें ‘एक्सपर्ट’ बनाकर NDTV अपने शो में क्यों लेकर आया? अपनी कम्पनी को हो रहे बड़े लाभ पर उन्होंने कहा कि इसका देश की अर्थव्यवस्था के अच्छे या बुरे होने से कोई लेना-देना नहीं है। मोदी विरोधी रुख को देखते हुए उनके ये बयान आश्चर्यचकित करने वाले नहीं हैं, लेकिन अब उन्होंने भारत का नाम दुनिया में बदनाम करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

दिसंबर 2019 में राजीव बजाज ने एक वाकया सुनाया था कि कैसे भाजपा सरकार ने उनकी मदद की थी। बजाज की कार प्रोजेक्ट Qute 8 सालों से केंद्र सरकार अनुमोदन के लिए पड़ी हुई थी। राजीव ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 8 सालों से लंबित बजाज के ऑटो व्हीकल Qute को अप्रूवल दिया। राजीव ने इसके लिए नीति आयोग को भी धन्यवाद दिया था। उनके पिता राहुल बजाज भी मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।

4 साल के बच्चे को चू#$* कहने वाली स्वरा भास्कर आज रो रही ग्रेटा की उम्र का रोना, लिबरल गैंग भी पीछे-पीछे

विदेशी प्रोपेगेंडा में भारत सरकार के हस्तक्षेप ने लेफ्ट-लिबरलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तिलमिला कर अब वह राष्ट्रवादियों पर गुस्सा उतार रहे हैं। जैसे ही सरकार ने विदेशी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की, देश के कई अन्य लोगों को हिम्मत मिली। नतीजतन उन्होंने भी आगे आकर पूरे पाखंड की निंदा की। उनकी यह नाराजगी पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण और संवैधानिक थी। लेकिन कुछ अन्य ‘भारतीयों’ से यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

बॉलीवुड में कभी एक्ट्रेस के तौर पर काम करने वाली फुल टाइम ट्रोल स्वरा भास्कर का भी कुछ यही हाल था। उन्होंने गायिका रिहाना, प्रोटेस्टर ग्रेटा और पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा के पुतले जलाए जाने की घटनाओं की निंदा की। ग्रेटा की तो उम्र का हवाला देकर उसका विरोध कर रहे लोगों को चुप कराने की कोशिश हुई।

स्वरा के अनुसार ग्रेटा सिर्फ़ 18 साल की है और यह लोगों को अधिकार नहीं देता कि उसका पुतला जलाया जाए।

ध्यान रहे कि ये वही स्वरा भास्कर हैं जिन्होंने यूट्यूब के कॉमेडी शो ‘SON OF ABISH’ के एपिसोड में एक बाल कलाकार को चू#&% कह दिया था। स्वरा ने बताया था कि अपने एड शूट में उनकी मुलाकात 4 साल के बाल कलाकार से हुई, जिसने उन्हें आंटी कहा और उसे सुन उन्होंने बच्चे को चू*&^ कहा। शो में स्वरा ने बच्चों की तुलना शैतान से की थी और शो के होस्ट ने इस पर सहमति भी जताई थी।

इसके अलावा बच्चों की डॉक्सिंग करने वाले ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के लिए भी स्वरा ने खूब आवाज उठाई थी। पिछले साल जुबैर पर ट्विटर यूजर जगदीश सिंह ने अपनी पोती के साथ वाली फोटो को हाइलाइट करने का इल्जाम लगा था, जिस पर कट्टरपंथी बलात्कार की धमकी दे रहे थे। ऐसे में स्वरा ने निंदा करने की बजाय जुबैर को समर्थन दिया था।

स्वरा की तरह कई अन्य लिबरल ट्विटर यूजर भी ग्रेटा की उम्र पर प्रोपेगेंडा चलाते दिखे। पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी ग्रेटा की उम्र को हाइलाइट किया और सरकारी तंत्र को कोसा। 

एनडीटीवी के एंकर विष्णु सोम ने भी ग्रेटा को 18 साल का बता कर दिल्ली पुलिस की एफआईआर को हाइलाइट किया है और उसके लिए संवेदना जगाने की कोशिश की है।

ध्रुव राठी और वामपंथी वकील प्रशांत भूषण भी इसमें कैसे पीछे छूट सकते हैं।

बता दें कि आज ये सब लिबरल सिर्फ़ इसलिए बिदके हुए हैं, क्योंकि विदेशी षड्यंत्र के ख़िलाफ़ देश ने एकजुटता दिखाई है। ग्रेटा की उम्र पर रोना रोने वाले ये वही लोग हैं, जिन्होंने एक 16 साल की लड़की को टारगेट बना लिया था क्योंकि उसने जेएनयू के भारत विरोधी प्रोपेगेंडेबाज कन्हैया कुमार को खुली डिबेट की चुनौती दी थी।

याद हो तो साल 2016 में जाह्नवी ने जेएनयू के कन्हैया कुमार को खुली डिबेट के लिए ललकारा था। उस समय कन्हैया ने पीएम पर इल्जाम लगाए थे। इसके बाद जाह्नवी को बुरी तरह ट्रोल किया गया था।

यही सब देख कर पता चलता है कि स्वरा जैसों के लिए ग्रेटा जैसे बाल प्रोटेस्टर्स की उम्र से कोई लेना-देना नहीं है जब तक वह उनके एजेंडे पर फिट न बैठे। आज जब भारतीय उसकी निंदा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उसने भारत के खिलाफ़ माहौल बनाने वालों का खुल कर साथ दिया, तब ये गिरोह उसकी उम्र का उदाहरण देकर लीपापोती करने में लगा है।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे गिरोह को सिर्फ़ एक उम्र ही ऐसा फैक्टर लग रहा है, जिसकी वजह से ग्रेटा की आलोचना नहीं होनी चाहिए। वह ये भूल गए हैं कि हाल में विदेशी षड्यंत्र की पोल खोलने वाले टूलकिट को ग्रेटा ने ही अपने ट्विटर पर साझा किया था।

‘किसान आंदोलन से ₹1,00,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान’: यूपी-उत्तराखंड में चक्का जाम से टिकैत पीछे हटे

दिल्ली की सीमाओं पर ढाई महीने से चल रहे किसान आंदोलन के बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार (6 फरवरी 2021) को पूरे देश में 3 घंटे के लिए चक्का जाम का ऐलान किया है। इस बीच केवल दो राज्यों में चक्का जाम नहीं होगा। ये 2 राज्य- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया, “उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं है, बाकी दिल्ली के बाहर पूरे देश में रोड ब्लॉक की जाएँगी। इसका कारण है कि दिल्ली में उन लोगों को कभी भी जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सकता है।”

6 फरवरी को किसानों द्वारा किए जाने वाले चक्का जाम को कॉन्ग्रेस ने अपना समर्थन दिया है। वहीं हरियाणा में राज्य सरकार ने स्थिति को देखते हुए हर तरह के इंटरनेट को बंद कर दिया है। सरकार ने वॉयस कॉल को छोड़कर इंटरनेट सेवाओं (2जी/3जी/4जी/सीडीएमए/जीपीआरएस), एसएमएस सेवाओं (केवल ब्लक एसएमएस) और मोबाइल नेटवर्क पर दी जाने वाली सभी डोंगल सेवाओं को बंद करने की अवधि 6 फरवरी, 2021 शाम 5 बजे तक के लिए बढ़ा दी है।

इस बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक बयान में किसान आंदोलन के कारण होने वाले नुकसान के बारे में बताया है। CAIT के अनुसार, 70 दिनों के किसान आंदोलन से व्यापार में 1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इसमें से 70,000 Cr माल से संबंधित है जो दूसरे राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले थे। वही 40 हजार करोड़ बाहर जाने वाले थे।

संघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि आंदोलन से मुख्य रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के थोक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। व्यावसायिक नुकसान झेलने वाली प्रमुख वस्तुओं में FMCG उत्पाद, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, आयरन एंड स्टील, टूल्स, पाइप एंड पाइप फिटिंग्स, मशीनरी इक्विपमेंट्स एंड इम्प्लीमेंट्स, मोटर्स एंड पंप्स, बिल्डर हार्डवेयर, केमिकल्स, फर्नीचर और फिक्स्चर, लकड़ी और प्लाईवुड, खिलौने, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडलूम आदि शामिल हैं।

CAIT के महासचिव ने दिल्ली उपराज्यपाल अनिल बैजल को भी पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने 26 जनवरी को किसानों का हिंसक रवैया याद दिलाते हुए अपील की है कि सुरक्षा सुनिश्चित की जाए कि दोबारा वह सब दोहराने की गुंजाइश ही न रहे।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने की जिद्द की थी। जब बहुत समझाने पर वह नहीं माने तो उन्हें तय रूट बताकर अनुमति दी गई। लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में कथित प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह हिंसा की। लाल किले पर धार्मिक झंडा फहरा दिया। इन घटनाओं में 300 से अधिक पुलिस वाले घायल हुए थे।

जम्मू-कश्मीर में 4G मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल, केंद्र सरकार ने लिया फैसला

जम्मू-कश्मीर में करीब डेढ़ साल बाद 4G मोबाइल इंटरनेट सेवा फिर से बहाल कर दी गई है। प्रधान सचिव रोहित कंसल (बिजली और सूचना) ने बताया कि पूरे जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने का फैसला लिया गया है।

बता दें कि जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद 5 अगस्‍त, 2019 से इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई के मद्देनज़र भारत सरकार ने यह फैसला लिया है। संसद ने पिछले साल 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को रद्द कर जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया था।

370 हटने के बाद कश्मीर में इंटरनेट सेवाएँ सस्‍पेंड कर दी गई थीं। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रतिबंधित करने के पीछे कथित रूप से अलगाववादियों और पाकिस्तानी आतंकवादियों को वजह बताया था, जोकि किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते थे।

गौरतलब है कि 2जी इंटरनेट सेवा को 25 जनवरी 2020 को बहाल किया गया था। इसके बाद उधमपुर और गांदरबल में 16 अगस्त 2020 को हाई स्पीड इंटरनेट सेवा ‘ट्रायल बेसिस’ पर शुरू की गई थी, जिसे आज भी बरकरार रखा गया है। लेकिन बाकी जिलों में 2जी इंटरनेट सेवा ही जारी थी।

देश के लिए खड़े हुए सचिन तेंदुलकर तो युवा कॉन्ग्रेसियों ने पोती कालिख: कॉमरेड और इस्लामी ट्रोल भी एक्टिव

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे कथित किसान आंदोलन के नाम पर विदेशी प्रोपेगेंडा को हवा मिलने के बाद भारत की कई नामी हस्तियों ने विदेशी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ होकर देश के साथ एकजुटता दिखाई। बुधवार को इसी लिस्ट में एक नाम क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर का जुड़ा। सचिन ने भी फर्जी प्रोपेगेंडा के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद की थी।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। बाहरी ताकत दर्शक हो सकते हैं, लेकिन भागीदार नहीं। भारतीय नागरिक भारत के बारे में जानते हैं। हम एक राष्ट्र के तौर पर एकजुट रहें।”

अब बाहरी ताकतों के ख़िलाफ़ सचिन के आवाज उठाते ही कुछ लोगों में हलचल मच गई। सोशल मीडिया पर केरल वाले यूजर्स का एक धड़ा तो खुलकर न केवल सचिन का विरोध करने लगा, बल्कि देश के साथ खड़े होने के लिए उनका अपमान भी किया जाने लगा।

केरल के कोच्चि में शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सचिन तेंदुलकर के कट आउट पर कालिख पोत दी। इसके बाद जमकर नारेबाजी की।

इस बीच कई यूजर्स ने रूस की टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा से माफी माँगनी शुरू कर दी है, जिसने एक दफा ये कहा था कि वह सचिन तेंदुलकर को नहीं जानती। शारपोवा ने 7 साल पहले एक प्रश्न के जवाब में अपनी बात कही थी, जब उनसे उनके मैच के दौरान सचिन की उपस्थिति पर पूछा गया था। 

इस घटना के बाद वर्चुअल स्पेस पर कई लोगों ने मारिया शारापोवा को उलटा सीधा बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लोगों ने पूछा था कि आखिर सदी से महान क्रिकेटर को कैसे वह जानने से इनकार कर सकती हैं। दिलचस्प बात यह थी कि ये धड़ा केरल से ही था।

अब यही वजह है कि मात्र सचिन के देश के साथ खड़े भर हो जाने से यही केरल वाले अपनी गलती का पश्चताप कर रहे हैं। तेंदुलकर पर नाराजगी दिखाने के लिए इन्होंने शारापोवा से माफी माँगी है। हैरानी की बात यह है कि भारत के तमाम मीडिया हाउसों ने ऐसी हरकत की निंदा करने की बजाय अप्रत्यक्ष रूप से उनको सराहते हुए अपनी रिपोर्ट पब्लिश की है।

नीचे कुछ रिपोर्ट के शीर्षक उदाहरण के साथ हैं।

द हिंदू

इंडियन एक्सप्रेस

सीएनएन न्यूज 18

क्या शारापोवा को माफी दिलवाने में कॉमरेडों, कॉन्ग्रेस समर्थकों और इस्लामी ट्रोल का हाथ है?

भारत में हो रही घटनाओं के बीच मारिया शारापोवा पर केरल के सोशल मीडिया यूजर्स के ऐसे पोस्ट साफ तौर पर बताते हैं कि ये सब भारत के खेल जगत दिग्गजों  को निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा अभियान है, खासकर सचिन को, क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

पूरा पैटर्न देखें तो ये सोशल मीडिया यूजर्स ज्यादा से ज्यादा शारापोवा की टाइमलाइन पर जाकर सचिन की छवि मटियामेट करने में लगे हैं। खास बात यह है कि इनमें कुछ कॉमरेड हैं, कुछ कॉन्ग्रेस समर्थक और कई केरल के इस्लामी ट्रोल हैं।

यहाँ कुछ सोशल मीडिया अकाउंट हैं, जिन्होंने शारापोवा से गिड़गिड़ा कर माफी माँगी। 

 कॉमरेड

केरल में वामपंथी पार्टियों में से एक दल लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के समर्थक सचिन तेंदुलकर पर निशाना साधने वाले पहले थे। हमने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि इस सूची में कई और नाम हैं।

ये कुछ माफी हैं, जो एलडीएफ समर्थकों ने शारापोवा के अकाउंट पर उनसे माँगी:

एक अन्य मुस्लिम यूजर व एलडीएफ के सक्रिय कार्यकर्ता ने शारापोवा को सॉरी कहा।

उबैद को देख पर भी ऐसा लगा कि वह भी इन वामपंथियों में से एक है।

आशिक इब्न ने तो तेंदुलकर को जोकर कहकर रूसी ख़िलाड़ी से माफी माँगी।

कॉन्ग्रेस समर्थक

इस सूची में केरल में विपक्ष में बैठी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट भी शामिल है, जिसका नेतृत्व कॉन्ग्रेस करती है। देश को शर्मसार करते हुए इसके लोगों ने मारिया के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगी।

एक समर्थक ने लिखा कि शारापोवा सही कह रही थी कि वो सचिन को नहीं जानती। नियत ने इसे सही साबित कर दिया कि लोगों को सचिन को नहीं जानना चाहिए था।

लतीफ ने तो यहाँ तक कहा कि सचिन हर किसान को खारिज कर चुके हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने इस मुद्दे पर एक भी पोस्ट नहीं किया।

कई आप समर्थक भी शारापोवा की टाइमलाइन पर माफी माँगते दिखे।

इसके बाद इस्लामी ट्रोल्स ने भी सचिन के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने से गुरेज नहीं किया।

अब उक्त ट्वीट्स से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि केरल में अधिकतर सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से खुश नहीं है भारतीय खेल के दिग्गज देश के साथ खड़े हों। उनका ये रवैया बताता है कि वह अपने राजीतिक नैरेटिव को बढ़ाने के लिए अपने देश के आत्मसम्मान के साथ भी खिलवाड़ कर सकते हैं।

कश्मीर का मुनीब जुटाता था पैसा, आतंकी खरीदते थे गोला-बारूद: कतर से लैंड करते ही एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादी मुनीब सोफी को शुक्रवार (5 फरवरी, 2021) को गिरफ्तार किया। ओवरग्राउंड वर्कर मुनीब जम्मू-कश्मीर के बिजबेहाड़ा का रहने वाला है। कतर से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे पुलिस ने अरेस्ट कर लिया।

खबरों के मुताबिक, सोफी मारे गिराए गए पाकिस्तानी आतंकवादी वलीद भाई के लिए काम कर रहा था।
कश्मीर जोन पुलिस ने मुनीब सोफी के बारे में ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए लिखा है “कुलगाम पुलिस ने जैश ए मोहम्मद के सहयोगी ‘मुनीब सोफी’ को इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। वह आज ही कतर से प्रत्यर्पित होकर नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचा था। वह पाकिस्तान के आतंकी वलीद भाई के लिए काम कर रहा था, जिसे पिछले साल एक एनकाउन्टर में मार गिराया गया था।”

वलीद भाई पाकिस्तान का JeM IED (इम्प्रूव्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विशेषज्ञ था, जोकि आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए घाटी में काम करता था। वह जम्मू-कश्मीर पुलिस के सबसे वांछित आतंकवादियों के लिस्ट में भी शामिल था।

जुलाई 2020 में जम्मू और कश्मीर के दक्षिणी कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में वलीद भाई और जैश-ए-मोहम्मद दो अन्य आतंकियों को मार गिराया था। आईजीपी ने तब कहा था कि वलीद भाई दक्षिण कश्मीर में चार कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशन के दौरान बच निकला था।

पुलिस ने एक बयान में कहा है कि गिरफ्तार किए गए ओवरग्राउंड वर्कर की भूमिका प्राथमिकी संख्या 58/2020 में धारा 13, 18, 19, 38, 39 यूएलए (पी) अधिनियम के तहत सामने आई थी। उक्त मामले में गिरफ्तार किए गए अभियुक्त ने पुलिस को बताया था कि वह अन्य ओवरग्राउंड वर्करों के साथ कश्मीर के विभिन्न जिलों से जैश-ए-मोहम्मद के लिए पैसा इकट्ठा कर रहा था।

मुनीब सोफी एकत्रित धन का इस्तेमाल पाकिस्तान में वलीद भाई के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए करता था। इससे पहले कुलगाम पुलिस ने मुनीब के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया गया था और गैर-जमानती वारंट भी निकाला था।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को सुरक्षाबलों ने पुलवामा जिले से JeM के दो ओवरग्राउंड वर्कर्स को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस अधिकारी ने बताया,“सेना और सीआरपीएफ के साथ पुलिस ने अवंतीपोरा क्षेत्र से अभियुक्त संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी साथियों को गिरफ्तार किया जो आतंकियों को रहने और खाने-पीने में मदद करते थे।”

2 बच्चों के अब्बा इरशाद ने 8 साल की मौसेरी बहन से किया रेप, फिर ब्लेड से गला रेत खेत में फेंक दिया

बिहार के भोजपुर में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। मोहम्मद इरशाद ने नाबालिग मौसेरी बहन के साथ दुष्कर्म किया और पकड़े जाने के डर से ब्लेड से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी। हत्यारे ने बच्ची का शव गाँव की ही खेत में फेंक दिया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना भोजपुर जिले के बिहिया गाँव की है। आरोपित भाई मोहम्मद इरशाद घुमाने के बहाने अपनी 8 साल की नाबालिग बहन को खेत में ले गया और फिर मौका पाकर उसके साथ बलात्कार किया। जब दर्द से कराहती बच्ची बेहोश हो गई तब आरोपित ने वापस गाँव आकर ब्लेड खरीदा और घटनास्थल पहुँचकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

परिजनों के मुताबिक, देर रात तक जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों को उसकी चिंता हुई। उन्होंने बार-बार इरशाद से उसके बारे में पूछा। इरशाद ने बताया कि वह आ जाएगी। कहीं खेल रही होगी। शुक्रवार (5 फरवरी 2021) सुबह ग्रामीणों को खून से लथपथ बच्ची की लाश खेत में मिली। परिजनों ने गाँववालों को जानकारी दी कि मौसेरा भाई मो. इरशाद गुरुवार शाम उसे अपने साथ ले गया था।

ग्रामीणों ने बताया कि नाबालिग बच्ची के नीचे का कपड़ा फटा हुआ था और गुप्तांग पर खून के धब्बे थे। उसका गला कटा हुआ था। बगल में कई ब्लेड पड़े थे। स्थानीय लोगों ने कहा किसी धारदार हथियार से उसका गला रेता गया था। बच्ची की हालत देख आगबबूला हुए गाँववालों ने इरशाद को जमकर पीटा और सख्ती से पूछताछ की। इरशाद ने गाँव वालों के सामने बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या की बात कबूल ली।

इसके बाद परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बारे में बताते हुए SP हरकिशोर राय ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित इरशाद 2 बच्चों का बाप है। वह खुद अपने रिश्तेदार के घर में रहता है। मृतक बच्ची का परिवार और उसका घर अगल-बगल में ही है। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम सिविल सर्जन सह प्रभारी अधीक्षक के द्वारा गठित चार डॉक्टरों का टीम ने किया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की जाँच की जाएगी।

‘7 दिन में शांतिपुर छोड़ो, नहीं तो हत्या के जिम्मेदार खुद होगे’: बीजेपी में गए MLA को दीवारों पर लिखकर धमकी

पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले राज्य में राजनीतिक हिंसा और सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में भगदड़ जोरों पर है। हाल ही में टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए विधायक अरिंदम भट्टाचार्य को खुलेआम धमकी दी जा रही है।

दीवारों पर लिखा गया है, “7 दिन में शांतिपुर छोड़ो वरना अपनी हत्या के लिए तुम खुद जिम्मेदार होगे।” अरिंदम ने इस घटना की जानकारी होने पर चुनौती स्वीकार करते हुए कहा है, “मैं शांतिपुर छोड़कर नहीं जाऊँगा।”

नदिया के शांतिपुर में दीवारों पर लिखकर भट्टाचार्य को हत्या की धमकी दी गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा नदिया से शनिवार (6 फरवरी 2021) को राजव्यापी परिवर्तन रथ यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं। पार्टी ने इस तरह की घटना की निंदा की है। राज्य की स्थिति देखते हुए चुनाव आयोग से सेंट्रल फोर्स की तैनाती की माँग की है।

जानकारी के अनुसार बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद स्वप्नदास गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव आयोग को पत्र लिख कर सेंट्रल फोर्स को राज्य में तैनात करने की माँग की है। चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने यह माँग इसलिए उठाई है ताकि इलेक्शन निष्पक्षता के साथ संपन्न हों। पार्टी ने कहा है कि ऐसे पुलिस कर्मी भी पूरी प्रक्रिया से दूर रहने चाहिए जिन पर बीते समय में किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होने का आरोप हो।

अरिंदम भट्टाचार्य को दी जा रही धमकी को लेकर बीजेपी महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा है, “ये कैसी कानून-व्यवस्था। बंगाल में किस तरह का लोकतंत्र चल रहा है, ये उसी का एक नमूना है। शांतिपुर नादिया की दीवारों पर विधायक श्री अरिंदम भट्टाचार्य को खुली धमकी लिखी है, ‘7 दिन में शांतिपुर छोड़ दो, नहीं तो तुम्हारे खून के जिम्मेदार तुम खुद होगे।’ तृणमूल का जनताविहीन लोकतंत्र।”

टूटे दाँत, कटा गला, शरीर पर आधे कपड़े: कोलकाता में 8 साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या

कोलकाता के जोरबगान में गुरुवार (फरवरी 5, 2021) को एक 8 साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बच्ची बुधवार को अपने मामा के घर घूमने गई थी। उसी दिन शाम को वह लापता हो गई। बहुत ढूँढने पर गुरुवार को एक इमारत में उसकी लाश मिली। रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के शव पर आधे कपड़े थे। उसका गला कटा हुआ था। दाँत तोड़ दिए गए थे और बालों को नोचा गया था। उसकी हालत ऐसी थी जैसे उसका यौन उत्पीड़न हुआ हो।

जाँच अधिकारी ने बताया, “घटनास्थल पर खून से सना चाकू, लड़की के चार दाँत, बालों का गुच्छा साफ तौर पर बताते हैं कि बच्ची ने मरने से पहले हत्यारे से काफी संघर्ष किया होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है या नहीं ये रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा। ऐसा लग रहा है कि हत्यारे बच्ची को पहले से जानते थे।

मृतक की मामी ने बताया कि वह तीसरी क्लास में पढ़ती थी और बुधवार को अपनी नानी से मिलने आई थी। मगर जब रात करीब 8 बजे वह गायब हो गई तो उसकी तलाश शुरू की गई। गुरुवार की सुबह एक स्थानीय, जब पड़ोस की छत पर गया तो उसने बताया कि बच्ची यहाँ है। इसके बाद बच्ची के पिता पुलिस का कॉल आने के बाद भाग कर वहाँ गए। वह कहते हैं कि उसे देख, “मुझे पता चल गया था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है। मैं सिर्फ़ न्याय ही माँग सकता हूँ।”

कुछ लोग पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने बच्ची को सही समय पर खोजना नहीं शुरू किया। वहीं जाँच अधिकारी के अनुसार प्राथमिक जाँच बताती है कि बच्ची के बुधवार को गायब होने के बाद उसका यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में एक आदमी या एक समूह ने उसकी हत्या कर दी।

बता दें कि घटना को लेकर स्थानीयों में काफी गुस्सा है। इस दौरान झड़प की बात भी सामने आई है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया है। उन्होंने ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध अब भी चिंता का विषय है। वही राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पंजा का कहना है कि ये घटना बेहद अफसोसजनक है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर हैं। जो भी इन सबमें शामिल होगा उसने अधिकतम सजा दिलवाई जाएगी।

‘असली जंग कानून वापसी के बाद’: ग्रेटा का टूलकिट बनाने वाले खालिस्तानी का वीडियो वायरल

कृषि कानून के खिलाफ हो रहा ‘आंदोलन’ अब अलग ही दिशा पकड़ चुका है। स्‍वीडिश ऐक्टिविस्‍ट ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘टूलकिट’ को बनाने का शक पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) पर है। कनाडा बेस्‍ड इस संस्‍था का फाउंडर खालिस्तानी एमओ धालीवाल है। कहा जा रहा धालीवाल किसानों के प्रदर्शन के सहारे भारत में खालिस्तानी आंदोलन को हवा देने की ताक में है। सोशल मीडिया पर धालीवाल का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

वीडियो में खालिस्तानी समर्थक धालीवाल द्वारा भारत विरोधी भड़काने वाले बयानों को सुना जा सकता है। वायरल क्लिप में वह कह रहा है, “यदि कृषि कानून कल वापस हो जाते हैं, तो यही हमारी जीत नहीं होगी। कृषि कानूनों की वापसी के साथ जंग की शुरुआत होगी और इसका अंत यही नहीं होगा। किसी को यह मत बताने दीजिए कि यह लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ खत्‍म हो जाएगी, क्योंकि वे इस आंदोलन से ऊर्जा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपको बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आप पंजाब से अलग हो, और आप खालिस्तान आंदोलन से अलग हो, आप नहीं हो।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धालीवाल का यह वायरल वीडियो 26 जनवरी को भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान शूट किया गया था। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

गौरतलब है कि ग्रेटा थुनबर्ग ने जो दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी था। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक सामग्री भरपूर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशों में भारत विरोधी अभियान चलाने के लिए पॉप स्टार रिहाना को अलगाववादी एमओ धालीवाल के पीआर फार्म की तरफ से 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया गया था। बताया जाता है कि धालीवाल, मरीना पैटरसन, पीआर फार्म्स में रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम करने वाली अनीता लाल, कनाडा में विश्व सिख संगठन के निदेशक और कनाडाई सांसद जगमीत सिंह जैसे लोगों ने जनता को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।