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कॉन्ग्रेस को राहुल गाँधी ने दिए ₹54 हजार, सिब्बल से मिले ₹3 करोड़: प्रदर्शन की तरह चंदा भी गिरा

भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission) ने 2019-20 में कॉन्ग्रेस को मिले चंदे से जुड़ी एक रिपोर्ट पिछले दिनों जारी की थी। इससे पता चलता है कि अस्तित्व के संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस की वित्तीय हालत भी पतली है। पार्टी 2019-2020 में महज 139.01 करोड़ रुपए का ही चंदा जुटाने में सफल रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार गिरावट आई है। इससे पहले पार्टी को कुल 146 करोड़ रुपए का चंदा प्राप्त हुआ था।

संबंधित कानूनों के प्रावधानों के तहत राजनीतिक दलों को हर साल लोगों, कंपनियों, इलेक्टोरल ट्रस्ट और संगठनों से मिले 20,000 रुपए से अधिक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है।

ईसीआई साइट पर उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को 30 दिसंबर, 2020 को जानकारी दी कि 2019-20 में पार्टी को 139 करोड़ रुपए का योगदान मिला है।

Congress’s contribution report for 2019-20 uploaded on the official ECI site

यह राशि 2018-19 में एकत्र की गई राशि की तुलना में कम है।

Congress’s contribution report for 2018-19 uploaded on the official ECI site

इस रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि पार्टी की स्थापना के बाद से ही इसका कमान सँभालने वाली गाँधी परिवार का योगदान इसमें नाममात्र ही है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी फंड में 50,000 रुपए दिए हैं जबकि उनके बेटे और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने 54,000 रुपए का ही योगदान दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं, जिन्होंने अगस्त 2020 में सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर बड़े संगठनात्मक बदलावों की माँग की थी, ने पार्टी आलाकमान के बराबर या उनसे ज्यादा योगदान पार्टी फंड में दिया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और G-23 के सदस्य कपिल सिब्बल ने 2019-2020 के बीच पार्टी कोष में सबसे अधिक तीन करोड़ रुपए का योगदान दिया। कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में कपिल सिब्बल के अलावा, पार्टी फंड में योगदानकर्ता के रूप में जी -23 के अन्य पाँच सदस्य भी शामिल हैं। ‘जी23’ के अन्य सदस्यों में से आनंद शर्मा, शशि थरूर और गुलाम नबी आज़ाद ने 54-54 हजार रुपए, मिलिंद देवड़ा ने एक लाख रुपए और राज बब्बर ने एक लाख आठ हजार रुपए दिए हैं।

इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, स्वर्गीय मोतीलाल वोरा, स्वर्गीय अहमद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री परनीत कौर और अधीर रंजन चौधरी ने भी राहुल गाँधी जितना ही, यानी कि 54,000 का योगदान पार्टी फंड में दिया था।

मजेदार बात यह है कि पिछले साल मार्च में कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी वित्त वर्ष 2019-20 में पार्टी को 54 हजार रुपए दिए थे।

उल्लेखनीय है कि जिन कॉरपोरेट्स ने कॉन्ग्रेस पार्टी के फंड में योगदान दिया उनमें प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust) का 31 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा योगदान है। उसके बाद बिजनेस हाउस आईटीसी (Business House ITC) ने 13 करोड़ रुपए और आईटीसी इन्फोटेक ने 4 करोड़ रुपए का दान किया है।

2020 में UPSC परीक्षा का आखिरी अटेम्प्ट गँवा चुके अभ्यर्थी न करें चिंता: मोदी सरकार ने दिया एक और अवसर

अक्टूबर 2020 में अपना आखिरी अटेम्प्ट देने वाले यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम के अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार ने राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने अदालत को बताया कि कोविड-19 महामारी के चलते फैसला लिया गया है कि ऐसे अभ्यर्थी एक दफा और यानी 2021 में भी सिविल परीक्षा दे सकते हैं।

इससे पूर्व केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि वह सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं होने से अपना आखिरी मौका गँवा देने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने के पक्ष में नहीं है। केंद्र ने यह भी साफ किया था कि राहत उम्र सीमा से बाहर हो चुके अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगी। 

बता दें कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही एक अभ्यार्थी रचना सिंह ने 4 अक्टूबर 2020 को हुई यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा छूट जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कोर्ट में सरकार से एक अतिरिक्त मौका दिए जाने की गुहार लगाई थी। 

इस याचिका में कुछ अन्य अभ्यार्थी भी शामिल थे जो संकट/लॉकडाउन आदि के चलते परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। इनकी ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पक्ष रख कर दलीलें दी थीं।

इसके बाद 29 जनवरी को सुनवाई में पीठ ने सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से सवाल किए थे कि सिर्फ इस बार के लिए अतिरिक्त अवसर दिया जाता है तो कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिलेगा और यूपीएससी के गठन होने के बाद से अब तक कितनी बार इस तरह की छूट दी गई है?

फिर 1 फरवरी की सुनवाई में शीर्ष अदालत को सॉलिस्टर जनरल ने बताया कि अतिरिक्त अवसर दिए जाने पर कुल 3308 उम्मीदवारों को इसका लाभ मिलेगा। जिस पर पीठ ने कहा कि अधिकतम आयु सीमा में बदलाव किए बिना एक बार छूट देने से 3300 से अधिक उम्मीदवारों को राहत मिलेगी। 

मालूम हो कि 30 सितंबर 2020 को न्यायालय ने कोविड-19 महामारी और देश के कई राज्यों में बाढ़ के चलते 4 अक्टूबर को होने वाली UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2020 को स्थगित करने से इंकार कर दिया था। जिसके चलते प्रारंभिक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों में से 100 से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे थे जिनका यह आखिरी अटेम्प्ट था।

इन अभ्यर्थियों ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर सिर्फ एक बार की छूट के तौर पर 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने की माँग की थी। कुछ अभ्यर्थियों ने कहा है कि कोविड-19 से जुड़ी ड्यूटी में लगने के कारण उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल पाया। जबकि कुछ का कहना था कि दूर-दराज के इलाके में खराब इंटरनेट सुविधा के चलते उन्हें ऑनलाइन अध्ययन सामग्री नहीं मिल सकी। 

दिल्ली पुलिस ने गूगल से माँगा वो सभी IP Address, जिन्होंने तैयार की भारत विरोधी प्रोपेगेंडा प्रोटेस्ट की ‘टूलकिट’

दिल्ली पुलिस ने कल (4 फरवरी 2021) उन लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की थी, जिन्होंने ‘टूलकिट’ (toolkit) दस्तावेज़ को साझा किया था जो साबित करता है कि किसान आंदोलन को मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन ‘सुनियोजित’ था। अब दिल्ली पुलिस ने गूगल (google) से आईपी एड्रेस (IP address) या लोकेशन (location) माँगी है, जिससे यह पता चल सके कि असल में किसने टूलकिट को अपलोड (upload) किया था। 

यानी दिल्ली पुलिस ने गूगल से कहा है कि वह ऐसे लोगों की तकनीकी लोकेशन ट्रेस (trace) करे, जिन्होंने राजधानी दिल्ली में दंगे भड़काने के लिए टूलकिट को सबसे पहले गूगल ड्राइव (google drive) पर साझा किया था। जिसे बाद में स्वीडन की जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी साझा किया था, जो अंत में भारत के खिलाफ बड़ी साज़िश के रूप में सामने आया था। 

दरअसल, ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया था। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया था। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया था कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।  

इसके बाद उसने एक और ट्वीट किया, जिसमें गूगल डॉक्युमेंट की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आन्दोलन को हवा देने वाले सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल और तमाम रणनीति दर्ज थीं। यह गूगल डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा था कि जो लोग मदद करना चाहते हैं यह ‘टूलकिट’ उनके लिए है। इस लिंक में भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने की कार्ययोजना का विवरण था।

गुरुवार (5 फरवरी 2021) को दिल्ली पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की थी जिन्होंने ‘टूलकिट’ शेयर किया था। दिल्ली पुलिस ने इस बारे में बयान जारी करते हुए बताया था कि एफ़आईआर में ग्रेटा थनबर्ग का नाम नहीं शामिल किया है। एफ़आईआर ‘अज्ञात लोगों’ पर दर्ज की गई है जिसमें मुख्य आरोप है, तमाम समूहों के बीच नफ़रत भड़काना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना। क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने मुद्दे पर कहा था, “शुरूआती जाँच में पता चला है कि टूलकिट ‘खालिस्तानी समर्थक समूह’ पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (Poetic Justice Foundation) द्वारा तैयार की गई थी। 

दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर 

दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 ए (अलग-अलग समूहों या धर्मों के बीच नफ़रत फैलाना), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 124 ए के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस का इस मुद्दे पर कहना है कि एफ़आईआर टूलकिट बनाने वालों के खिलाफ दर्ज की गई है और फ़िलहाल इस मुद्दे पर जाँच जारी है। 

इसके पहले भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने विदेशी चेहरों से कहा था कि वह कृषि सुधार क़ानूनों पर टिप्पणी करने या प्रोपेगेंडा फैलाने से पहले इससे जुड़े प्रावधानों को अच्छे से समझ लें। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की थी। 

ऑपइंडिया ने इस बारे में पहले ही रिपोर्ट्स प्रकाशित की थीं जिसमें बताया गया था कि रिहाना और ग्रेटा द्वारा किया गया ट्वीट अचानक नहीं आया था। बल्कि यह भारत के खिलाफ मिथ्या प्रचार की रणनीति के तहत सुनियोजित था, ऐसी रणनीति जो भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए रची गई थी।      

‘वह रोज दारू पीता है, लड़की बाजी करता है… मेरे दो बच्चों को कैद कर रखा है’: उद्धव के मंत्री धनंजय मुंडे नए विवादों में घिरे

उद्धव सरकार में मंत्री व नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता धनंजय मुंडे फिर विवादों में हैं। इस दफा उनके ख़िलाफ़ शिकायत उनकी लिव इन पार्टनर करुणा शर्मा ने की है। दोनों के दो बच्चे हैं। पिछले दिनों करुणा की ही बहन रेनू शर्मा ने एनसीपी नेता पर बलात्कार का आरोप लगाया था।

करुणा ने धनंजय मुंडे पर उनके बच्चों को कैद किए रखने का इल्जाम लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुंडे ने उनके दो बच्चों को अपने बंगले ‘चित्रकूट’ में 3 महीने से ‘कैद’ कर रखा है। उन्होंने दावा किया कि जब वह 24 जनवरी को बच्चों से मिलने गईं तो 30-40 पुलिसकर्मियों की बड़ी टीम ने उन्हें बंगले में प्रवेश करने से रोक दिया।

बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित करुणा ने पुलिस महानिदेशक हेमंत नगराले के पास अपनी शिकायत दी है। उन्होंने कहा है, “मेरी छोटी बेटी 14 साल की है और बंगले पर कोई महिला केयरटेकर भी नहीं है। धनंजय मुंडे का चाल-चलन अच्छा नहीं है। वह रोज लड़की बाजी करता है और दारू पीता है। दोनों बच्चों को मेरे खिलाफ भड़काता है और नशे में उनके सामने कपड़े उतारकर नंगा हो जाता है। इसलिए बच्चों के साथ कुछ भी हुआ तो उसके लिए धनंजय मुंडे जिम्मेदार होंगे।”

अपनी शिकायत में महिला ने कहा है कि यदि उन्हें उनके बच्चों से मिलने नहीं दिया गया तो वह 20 फरवरी 2021 से आमरण अनशन पर बैठेंगी। इसके लिए उन्होंने चित्रकूट बंगले के सामने, मंत्रालय के सामने या आजाद मैदान में बैठने के लिए अनुमति माँगी है। साथ ही मुंडे के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की है।

अपनी शिकायत में उन्होंने मुंडे के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 376, 377, 420, 471, 324, 363, 506, घरेलू हिंसा की धारा 18, 19 व आईटी एक्ट दांपत्य अधिकार की धारा 9 के तहत मामला दर्ज करने को कहा है।

गौरतलब है कि धनंजय मुंडे और उनकी लिव इन पार्टनर में काफी समय से कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों जब करुणा की बहन रेनू शर्मा ने मुंडे पर रेप का आरोप लगाया तो उन्होंने (धनंजय ने) अपनी सफाई देते हुए करुणा से अपने रिश्तों का खुलासा किया था। उन्होंने यह भी बताया था,

“ साल 2019 से करुणा, उसकी बहन रेनू और भाई ब्रिजेश ने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू किया और मुझसे पैसे माँगने लगे। उन्होंने मुझे मारने की धमकी भी दी। 12 नवंबर 2020 को मैंने इस बाबत एक शिकायत भी करवाई थी। रेनू ने फर्जी और बदनाम करने वाले आरोप सोशल मीडिया पर पोस्ट करने शुरू किए। सारे आरोप निराधार हैं और सब कुछ उनके पैसे लेने के लिए करुणा और ब्रिजेश के प्लान का हिस्सा है।”

इसके बाद मालूम हुआ कि करुणा और धनंजय ने बंबई हाईकोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने एक मध्यस्थ के जरिए आपसी विवाद सुलझाने का फैसला किया है। दूसरी ओर ये भी खबर आई कि गायिका रेनू शर्मा ने भी धनंजय मुंडे के खिलाफ दायर की गई अपनी शिकायत को वापस ले लिया। मगर, ताजा शिकायत से पता चलता है कि ये मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है न ही कोर्ट से बाहर इसे सुलझाने के प्रयास हो रहे हैं।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर (2020) में मुंडे ने हाई कोर्ट में मानहानि का एक मुकदमा दर्ज कर अनुरोध किया था। उसमें कहा गया था कि महिला को उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर उनकी निजी तस्वीरें एवं वीडियो पोस्ट करने से रोकने का आदेश दिया जाए। अदालत ने 16 दिसंबर को दिए अंतरिम आदेश में महिला को निर्देश दिया था कि वह अगले आदेश आने तक मुंडे की कोई निजी तस्वीर या वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड न करे।

ट्वीट के बदले रिहाना को मिले थे ₹18 करोड़, खालिस्तानी कनेक्शन भी आया सामने: रिपोर्ट

किसान आंदोलन के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए अभियान के पीछे कनाडा स्थित पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) संगठन की ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ सामने आई है। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें सिक्योरिटी एस्टेब्लिशमेंट सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि इस अभियान को ‘कनाडा के नेताओं और कार्यकर्ताओं’ का समर्थन था।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक , सूत्रों का मानना ​​है कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।

सूत्रों का मानना है कि एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किया गया टूलकिट भारत को बदनामी करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। धालीवाल, मरीना पैटरसन, पीआर फार्म्स में रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम करने वाली अनीता लाल, कनाडा में विश्व सिख संगठन के निदेशक और कनाडाई सांसद जगमीत सिंह जैसे लोगों ने जनता को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

अनीता लाल पोएट्री जस्टिस फाउंडेशन की सह-संस्थापक भी हैं। इस संगठन का नाम ग्रेटा थुनबर्ग द्वारा साझा किए गए टूलकिट में प्रमुखता से शामिल है। बता दें, यह पूरा मामला रिहाना द्वारा किसान विरोध-प्रदर्शन के पक्ष में ट्वीट करने के बाद शुरू हुआ है। उसने एक ट्वीट करते हुए लोगों से पूछा कि हम लोग क्यों नहीं इनके बारे में बात कर रहे हैं।

वहीं रिहाना के ट्वीट के बाद ही एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग और पोर्न स्टार मिया खलीफा भी भारत के इस मसले में कूद गई और अपना ज्ञान देना शुरू कर दिया। जब स्कूल छोड़ कर एक्टिविस्ट बनी ग्रेटा ने विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करने के बारे में अधिक जागरूकता फैलाने के लिए टूलकिट को साझा किया, तो इसने सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग का खुलासा कर भारत को बदनाम करने की इस साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।

टूलकिट से खुलासा हुआ कि यह अभियान नवंबर 2020 से चल रहा है। 23 और 26 जनवरी पर इनकी बड़े स्तर पर इस प्रोपेगेंडा फैलाने की योजना थी। बता दें, भारत के लिए यह दोनों दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं।

जब भारत के खिलाफ चल रहे इस पूरे प्रोपेगेंडा का खुलासा हुआ तो देश के खेल जगत और मनोरंजन जगत के तमाम दिग्गजों ने खुलकर इसका विरोध किया। साथ ही लोगों से ऐसे विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए कहा। जिसके बाद ट्विटर पर #IndiaAgainstPropaganda #IndiaTogether नाम से हैशटैग ने काफी ट्रेंड किया।

गौरतलब है कि ग्रेटा थुनबर्ग ने जो दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे एजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी था। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक सामग्री भरपूर है।

राम मंदिर निर्माण के लिए भिखारियों ने इकट्ठा कर दिए ₹2425, कहा- खुद को रोक न सके

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की खबर के बाद से देश के कोने-कोने से हर वर्ग के लोग चंदा दे रहे हैं। ऐसे में झारखंड से कुछ ऐसे रामभक्त सामने आए हैं जिनकी श्रद्धा आपके भी दिल में घर कर जाएगी। ये कोई साधारण राम भक्त नहीं है। इनका गुजर बसर स्वयं भीख माँग माँगकर चलता है, लेकिन बावजूद इसके इन्होंने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये भिखारी झारखंड के रामगढ़ जिला मुख्यालय स्थित लेप्रोसी कॉलोनी में रहते हैं। यहाँ की एक निवासी सरस्वती देवी ने बताया कि वे लोग रोज भीख माँग और कचरा बीन पर जीवन-यापन करते हैं। मगर बात जब राम मंदिर की आई तो वे लोग खुद को रोक नहीं पाए। कॉलोनी के रहने वाले जीतू महतो ने भी भगवान राम के प्रति आस्था और श्रद्धा दिखाते हुए राम मंदिर के लिए 1 हजार रुपए दान दिए।

लेप्रोसी कॉलोनी में चंदा लेने गए राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने ऐसी श्रद्धा देख कहा कि समाज का हर वर्ग राम मंदिर निर्माण के वास्ते बढ़-चढ़कर चंदा दे रहा है। सभी भव्य राम मंदिर के सपने को साकार होते देखना चाहते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी ही खबर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से सामने आई थी। वहाँ एक आदिवासी महिला देवकू बाई जो भीख माँगती थीं, उन्होंने सौ रुपए की चिल्लर मंदिर निर्माण में दान दी थी। विकास नगर के कार्यकर्ताओं को एक-एक रुपए की चिल्लर सौंपते हुए उन्होंने कहा कि चाहे जितना भी समय लग जाए पर भगवान आते जरूर हैं।

इसी प्रकार अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ऋषिकेश नीलकंठ पैदल मार्ग पर गुफा में रहने वाले 83 वर्षीय संत स्वामी शंकर दास ने बीते दिनों एक करोड़ रुपये का दान दिया था। स्‍वामी शंकर दास ने अपने गुरु टाट वाले बाबा की गुफा में मिलने वाले श्रद्धालुओं के अनुदान से यह रकम जुटाई थी। वह वहाँ पिछले 60 वर्षों से गुफा में रह रहे हैं।

कृषि कानूनों में ‘काला’ क्या है? ‘खून से खेती’ सिर्फ कॉन्ग्रेस ही कर सकती है, BJP नहीं: राज्यसभा में जमकर बरसे कृषि मंत्री

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के मसले पर शुक्रवार (5 फरवरी, 2021) को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कहा कि भारत सरकार लगातार किसानों से बात करने में लगी हुई है। दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। लेकिन सिर्फ कॉन्ग्रेस है जो खून से खेती कर सकती है।

किसान आंदोलन को मुद्दा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले विपक्षी पार्टियों पर आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राज्यसभा में जमकर बरसे। उन्होंने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। खून से खेती सिर्फ कॉन्ग्रेस ही कर सकती है, भारतीय जनता पार्टी खून से खेती नहीं कर सकती।”

केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हमने किसान संगठनों के साथ 12 दौर की वार्ता की, उनके विरुद्ध कुछ नहीं कहा और बार-बार यही कहा है कि आप क्या बदलाव चाहते हैं वो हमें बता दीजिए। भारत सरकार कानूनों में किसी भी संशोधन के लिए तैयार है इसके मायने ये नहीं लगाए जाने चाहिए कि कृषि कानूनों में कोई गलती है। पूरे एक राज्य में लोग गलतफहमी का शिकार हैं। किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन ले जाएँगे।”

वहीं मोदी सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानून को काला कानून बताने वाले विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूँगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा। मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है?”

कृषि मंत्री बोले कि नए एक्ट के तहत किसान अपने सामान को कहीं भी बेच सकेगा। यदि एपीएमसी के बाहर कोई ट्रेड होता है, तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार का एक्ट राज्य सरकार के टैक्स को समाप्त करता है, मगर राज्य सरकार का कानून टैक्स देने की बात करता है। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो टैक्स लेना चाह रहा है, आंदोलन उनके खिलाफ होना चाहिए मगर यहाँ उल्टी गंगा बह रही है।

कॉन्ग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ लोग मनरेगा को गड्ढों वाली योजना कहते थे। जब तक आपकी सरकार थी उसमें गड्ढे खोदने का ही काम होता था। लेकिन मुझे ये कहते हुए प्रसन्नता और गर्व है कि इस योजना की शुरुआत आपने की लेकिन इसे परिमार्जित हमने किया।”

उन्होंने कहा, “कई बार विपक्ष की तरफ से ये बात सामने आती है कि आप कहते हैं कि सब मोदी जी की सरकार ने किया है पिछली सरकारों ने तो कुछ भी नहीं किया। मैं इस मामले में ये कहना चाहता हूँ कि इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है। मोदी जी ने सेंट्रल हॉल में अपने पहले भाषण में और 15 अगस्त को भी उन्होंने कहा था कि मेरे पूर्व जितनी भी सरकारे थी उन सबका योगदान देश के विकास में अपने-अपने समय पर रहा है।”

मोदी सरकार के कामों को लेकर राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गाँव, गरीब और किसान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले कल में भी रहेगी। किसान की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के माध्यम से 6,000 रुपए का योगदान दिया। आज हम ये कह सकते हैं कि दस करोड़ 75 लाख किसानों को 1,15,000 करोड़ रुपए डीबीटी से उनके अकाउंट में भेजने का काम किया है।”

भारत, अमेरिका के बाद अब ईरान ने भी पाकिस्तान को घर में घुसकर धोया, सर्जिकल स्ट्राइक कर छुड़ा लाया अपने 2 सैनिक

पाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया है। इस बार ईरान ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर अपने 2 सैनिकों को छुड़ाया है। बताया जा रहा है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पाकिस्तान में घुसकर अपने सैनिकों को रिहा करा लिया। ईरान की फोर्स ने दावा किया है कि पाकिस्तान के अंदर एक खुफिया ऑपरेशन में अपने दो सैनिकों को छुड़ा लिया गया है।

इसके साथ ही, पाकिस्तान की सीमा के अंदर जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला अब ईरान तीसरा देश बन गया है। इससे पहले, अमेरिका और भारत ने पाकिस्तान पर ऐसे सर्जिकल स्ट्राइक किए थे। जानकारी के मुताबिक, सर्जिकल स्ट्राइक को मंगलवार (जनवरी 02, 2021) रात अंजाम दिया गया था।

बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में कई पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं, जो आतंकवादियों को कवर फायर दे रहे थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुफिया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान के काफी अंदर जाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसमें उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे से अपने दो सैनिकों को भी छुड़ा लिया है।

आईआरजीसी ने बताया कि ईरान के सैनिकों ने बलूचिस्तान में घुसकर जैश अल-अदल के कब्जे से अपने सैनिकों को मुक्त कराया है। इसी अल-अदल आतंकी संगठन ने ही भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को भी अगवा किया था। जिसके बाद आतंकी संगठन ने कुलभूषण को पाकिस्तानी एजेंसी को सौंप दिया। कुलभूषण तभी से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं और भारतीय विदेश मंत्रालय लगातार उन्हें मुक्त कराने की कोशिश में लगा है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी सर्जिकल स्ट्राइक की पुष्टि की है। बयान में कहा गया है कि आतंकी समूह की ओर से अगवा किए गए दो बॉर्डर गार्ड्स को मुक्त कराने के लिए मंगलवार को सफलतापूर्वक इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

जैश उल-अदल या जैश अल-अदल एक सलाफी जिहादी आतंकी संगठन है, जो मुख्यतौर पर दक्षिणी-पूर्वी ईरान में सक्रिय है। यह आतंकवादी संगठन ईरान में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर कई हमले कर चुका है।

बलूचिस्तान में निर्दोष लोगों के नरसंहार के लिए इस आतंकी संगठन को पाकिस्तानी सेना से पूरा समर्थन मिलता है। ईरान द्वारा मुक्त कराए गए ईरानी बॉर्डर गार्ड्स के जवानों को 2018 में अगवा किया गया था और पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह ने पाकिस्तान में तब से बंधक बना रखा था। अब सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए उन्हें छुड़ा लिया गया है। इस ऑपरेशन को बलूचिस्तान प्रांत में अंजाम दिया गया।

दलाल, संघी कुत्ता और भी बहुत कुछः राम मंदिर के लिए दान दिया तो उदय प्रकाश के ‘अपने’ हुए बेगाने

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान चल रहा है। इसके लिए घर-घर जाकर लोगों से दान माँगा जा रहा है। आम से लेकर खास तक इसमें योगदान कर रहे हैं। लेकिन, वामपंथियों और इस्लामवादियों को यह नहीं सुहा रहा। कवि उदय प्रकाश को भी इस जमात ने राम मंदिर के लिए दान देने पर जमकर खरी-खोटी सुनाई है। वैसे उदय प्रकाश कभी इस जमात की ऑंखों के तारे होते थे।

उदय प्रकाश ने दान की जानकारी अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए गुरुवार (फरवरी 4, 2021) को दी। उन्होंने लिखा  “आज की दान-दक्षिणा। अपने विचार अपनी जगह पर सलामत।”

बता दें कि उदय प्रकाश पत्रकार होने के साथ-साथ शिक्षाविद, कवि और आलोचक भी हैं। उन्होंने साल 2015 में कन्नड़ साहित्यकार एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिया था। उस समय वह वामपंथी गिरोह के प्रिय चेहरों में से एक थे। लेकिन जब उन्होंने राम मंदिर के लिए दान देने का प्रमाण दिया, तो यही लोग उन पर बिफर गए।

जगदीप सिंह ने कहा, “बहुत से प्रगतिशीलों का पतन बुढ़ापे में होते देख रहे हैं। खैर आपका व्यक्तिगत मसला है। आप स्वतंत्र हैं। इससे जाहिर होता है अवस्था के अनुसार व्यक्ति के सरोकार बदल जाते हैं। आपके लिखे को आपके व्यक्तित्व से अलग करके ही देखना होगा।”

शेषनाथ पांडे लिखते हैं, “कहीं कुछ भी ठीक नहीं चल रहा सर। आपका यह कदम ‘ठीक नहीं चलने देने’ की तरफ धकेल रहा है। विनम्र असहमति आप से।”

फैक अतीक किदवई कहते हैं, “मुस्लिमों पर ये किसी अट्टहास से कम नहीं है।”

मजदूर झा ने कहा, “आपने जो किया उस पर बात हो सकती है लेकिन आपकी दलीलें तो दलाली है। आप जैसे दलित चिंतको की आखिरी परिणति यही है। राजेन्द्र जी ने कहा था कि रोना बंद कीजिए और अपने समाज के लिए काम कीजिए। लेकिन आपको तो कायराना आँसू टपकाने की आदत है। डूब मरो और सिम्पैथी कार्ड खेलो।”

लेखक अनुराग अनंत लिखते हैं, “उदय सदैव उदय नहीं होता वह अस्त भी होता है। यह दौर आँखों से पर्दा हटने का दौर है। मैं भीतर से इस नतीज़े पर पहुँच रहा हूँ कि कोई भी व्यक्ति सेलिब्रिटी नहीं। कोई हीरो नहीं। कोई आदर्श नहीं। सब बस हैं। जैसे होना चाहते हैं वैसे हैं। जैसे आप इस समय नृत्य करना चाहते हैं और आप कर रहे हैं।”

शादाब आनंद लिखते हैं, “हिंदी साहित्य का बड़ा वर्ग अंदर से हमेशा साम्प्रदायिक रहा है, हम जिसे प्रगतिशील धड़ा समझते हैं उनमें भी ऐसे लोग भरे पड़े हैं। शर्मनाक।”

विजेंद्र सोनी कहते हैं, “थोड़ा सा पाने के चक्कर में बहुत कुछ खो दिया, वैसे भी उदय प्रकाश के आगे सिंह लगाना इस समय उनके अपने इलाके की फौरी जरूरत है।”

अब्बास पठान ने लिखा है, “इसी बिना रीढ़ के साहित्यकार वर्ग पर अक्सर मैं लानत भेजता रहता हूँ। क्या आपकी कलम में ये पूछने की हिम्मत है कि इससे पहले किया गया अरबों रुपये का चन्दा किधर है और ऐसी कौनसी इमारत का नक्शा जारी कर दिया गया है, जिसकी लागत 5000 करोड़ आने वाली है।”

6 फरवरी को ‘शांतिपूर्ण’ चक्का जाम का राकेश टिकैत का ऐलान, 26 जनवरी की हिंसा देख दिल्ली पुलिस मुस्तैद

कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध बीते 72 दिनों से जारी है और कथित ‘आंदोलन’ की आड़ में अराजकता की कई घटनाएँ सामने आईं। इस बात की सटीक मिसाल थी 26 जनवरी 2021 को राजधानी दिल्ली में हुई ‘ट्रैक्टर रैली’ जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया था कि 6 फरवरी को दोपहर 12 बजे से दिन के 3 बजे तक चक्का जाम किया जाएगा। अब इस बारे में राकेश टिकैत ने बयान दिया है। उनका कहना है कि ये चक्का जाम 'शांतिपूर्ण' होगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 6 फरवरी के चक्का जाम पर अपने समर्थकों से अपील की। अपील में उन्होंने कहा कि जो लोग प्रदर्शन स्थल पर नहीं आ सकते हैं, वह जहाँ कहीं भी हैं वहाँ रह कर ‘शांतिपूर्ण तरीके’ से चक्का जाम करें। चक्का जाम के दौरान किसी भी तरह की हिंसा और उपद्रव नहीं होना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों की किसानों के ‘चक्का जाम’ को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक जारी है। पुलिस अपनी तरफ से हर आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है।    

इसके पहले संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा था कि 6 फरवरी को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन होगा और इस दौरान वह रास्तों को बंद भी करेंगे। सरकार कुछ भी सुनने के लिए तैयार नही हैं ऐसे में अपनी बात पहुँचाने का इकलौता तरीका यही बचता है। किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने भी चक्का जाम को लेकर कहा था, “देश के तमाम प्रदेशों और शहरों के राजमार्गों पर 6 फरवरी को चक्का जाम किया जाएगा। प्रदर्शनकारी पहले ही दिल्ली में बैठे हुए हैं इसलिए यहाँ चक्का जाम के हालात नहीं होगे। देश के अन्य क्षेत्रों में कल (6 फरवरी 2021) चक्का जाम किया जाएगा।” 

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को लेकर अभी तक कुल 38 FIR दर्ज़ की जा चुकी है और 84 आरोपितों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। यह जानकारी शनिवार (जनवरी 30, 2021) को दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई थी। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में किसान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए और काफी जगह तोड़-फोड़ हुई थी। 

इस दौरान सबसे बड़ा विवाद लाल किले पर फहराए गए झंडे और वहाँ हुई तोड़-फोड़ को लेकर हुआ था। लाल किला परिसर में हजारों प्रदर्शनकारियों ने घुसकर वहाँ मौजूद सामानों को तोड़ा और प्राचीर के पास एक धार्मिक झंडा फहरा दिया था। इस दौरान झड़प में करीब 300 से अधिक पुलिसवाले घायल हो गए थे। इस घटना की दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जाँच कर रही है। कई टीमों को दोषियों की पहचान करने में लगाया गया है।