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आत्मनिर्भर किसान भारत की रीढ़, कोरोना काल में रिकॉर्ड उत्पादन: PM मोदी ने की 1000 e-NAM मंडियों की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार (फरवरी 04, 2021) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चौरी-चौरा शताब्दी समारोह में हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। अपने सम्बोधन की शुरुआत पीएम मोदी ने चौरी-चौरा के बलिदानियों को श्रद्धाजंलि देकर की। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मानिभर किसानों’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने कोरोनो वायरस के समय रिकॉर्ड कृषि उपज दर्ज की। उन्होंने आगे कहा कि फसल उगाने वाले हमारे देश के लोकतंत्र की रीढ़ हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 100 वर्ष पहले चौरी चौरा में जो हुआ वो सिर्फ एक आगजनी की घटना या एक थाने में आग लगा देने की घटना नहीं थी, चौरी चौरा का संदेश बहुत बड़ा और व्यापक था। उन्होंने कहा कि आग सिर्फ थाने में नहीं लगी थी, आग जन-जन के मन में लगी थी। यह देश के सामान्य नागरिकों का स्वत: स्फूर्त संग्राम था।

पीएम मोदी ने कहा, “आज से शुरू हो रहे कार्यक्रम पूरे साल आयोजित किए जाएँगे। इस दौरान चौरी-चौरा के साथ ही हर गाँव, हर क्षेत्र के वीर बलिदानियों को भी याद किया जाएगा। जब देश आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, उस समय ऐसे समारोह का होना इसे और भी प्रासंगिक बना देता है।

किसानों की तरक्की के लिए सरकार के उपायों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने किसानों के हित में कई कदम उठाए हैं। किसानों के लिए मंडियों को लाभदायक बनाने के लिए 1,000 और मंडियों को e-NAM से जोड़ा जाएगा।”

वहीं, इस ऐतिहासिक घटना पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 4 फरवरी 1922 को स्वाधीनता संघर्ष में यहाँ पुलिस और स्थानीय जनता के बीच संघर्ष में पुलिस की गोली से स्वाधीनता के लिए संघर्ष करने वाले 3 सेनानी शहीद हुए थे। उसके बाद 228 पर ब्रिटिश हुकुमत ने मुकदमा चलाया था जिनमें 225 को सजा दी गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें

  • चौरी चौरा शताब्दी के इन कार्यक्रमों को लोकल कला, संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। ये प्रयास भी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति हमारी श्रद्धांजलि होगी।
  • सामूहिकता की जिस शक्ति ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा था, वही शक्ति भारत को दुनिया की बड़ी ताकत भी बनाएगी। सामूहिकता की यही शक्ति आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूलभूत आधार है।
  • कोरोना काल में भारत ने दुनिया के 150 से ज्यादा देशों के नागरिकों की मदद के लिए दवाइयाँ भेजी। दुनिया के अलग-अलग देशों से अपने 50 लाख से अधिक नागरिकों को स्वदेश लाने का काम किया। भारत ने अनेक देशों के हजारों नागरिकों को सुरक्षित उनके देश भेजा।
  • आज भारत खुद कोरोना की वैक्सीन बना रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों से भी तेज़ गति से टीकाकरण कर रहा है। भारत मानव जीवन की रक्षा के लिए दुनिया भर को वैक्सीन पहुँचा रहा है। तो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की आत्मा को गर्व महसूस होता होगा।
  • बजट के पहले कई दिग्गज यह कह रहे थे कि देश ने इतने बड़े संकट का सामना किया है तो सरकार को टैक्स बढ़ाना ही पड़ेगा, देश के आम नागरिक पर बोझ डालना ही पड़ेगा, लेकिन इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। बल्कि सरकार ज्यादा से ज्यादा खर्च करेगी।
  • इस बजट में देशवासियों पर कोई बोझ नहीं बढ़ाया गया। बल्कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ज़्यादा से ज़्यादा खर्च करने का फैसला लिया है। ये खर्च देश में चौड़ी सड़के बनाने के लिए होगा, नई बसें और रेल चलेगी, युवाओं को ज़्यादा अच्छे अवसर मिले उसके लिए बजट में अनेक फैसले लिए हैं।
  • महामारी की चुनौतियों के बीच भी हमारा कृषि क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ा और किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन करके दिखाया। हमारा किसान अगर और सशक्त होगा, तो कृषि क्षेत्र की प्रगति और तेज होगी।
  • कोरोना काल में भारत ने जिस तरह से इस महामारी से लड़ाई लड़ी है। आज उसकी तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। अब देश का प्रयास है कि हर गांव, कस्बे में भी इलाज की ऐसी व्यवस्था हो कि हर छोटी मोटी बीमारी के लिए शहर की तरफ न भागना पड़े।
  • हमारे देश की प्रगति का सबसे बड़ा आधार हमारे किसान भी रहे हैं। चौरी-चौरा संग्राम में हमारे किसानों की सबसे बड़ी भूमिका थी, किसान आगे बढ़ें, आत्मनिर्भर बने इसके लिए पिछले 6 सालों में किसानों के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं।
  • अब e-NAM से और 1000 मंडियाँ जोड़ी जाएँगी। ग्रामीण क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया गया है। इसका सीधा लाभ देश के किसान को होगा। ये सभी फैसले हमारे किसान को आत्मनिर्भर बनाएँगे, कृषि को लाभ का व्यापार बनाएँगे।
  • हमें संकल्प लेना है- देश की एकता हमारे लिए सबसे पहले है। देश का सम्मान हमारे लिए सबसे बड़ा है। इसी भावना के साथ हमें हर एक देशवासी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।

नाजिया की परीक्षा न छूटे, इसलिए बढ़ाई गई ट्रेन की स्पीड: भाई अनवर के ट्वीट पर रेलवे ने घंटे भर पहले पहुँचाई ट्रेन

भारत सरकार के कई मंत्रालय अब आम लोगों की सुविधा के लिए भी तत्पर रहते हैं। फिलहाल इसी सूची में अब नाम आया है रेल मंत्रालय का। रेलवे ने एक आम नागरिक की मदद के लिए खुद आगे आकर सामान्य परिस्थितियों से ऊपर उठ कर काम किया।

एक छात्रा को परीक्षा देने के लिए वाराणसी जाना था। वो जिस ट्रेन से वाराणसी जा रही थीं, वह लगभग 2:30 घंटे देरी से चल रही थी। परीक्षा छूटने वाली थी। तभी उसने सोशल मीडिया की मदद ली, रेलवे से गुहार लगाई। रेल मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए सक्रियता दिखाई। ट्रेन की रफ़्तार बढ़ाई गई और ट्रेन समय से पहले वाराणसी पहुँच गई

नाजिया तबस्सुम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली छात्रा हैं। वाराणसी के वल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कॉलेज में उनकी डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की परीक्षा का केंद्र था। परीक्षा 12 बजे से शुरू होनी थी।

उनका आरक्षण (रिजर्वेशन) छपरा-वाराणसी सिटी एक्सप्रेस (05111) में उत्तर प्रदेश के मऊ से था। ट्रेन का मऊ पहुँचने का समय सुबह के 6:25 था लेकिन ट्रेन वहाँ 2 घंटे 53 मिनट की देरी से (9 बज कर 18 मिनट) पर पहुँची। नाजिया ने इस बारे में अपने भाई अनवर जमाल से बात की। 

अनवर ने भारतीय रेलवे को टैग करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में उसने अपनी बहन की परीक्षा की समय सारिणी (टाइम टेबल) भी साझा की। उसने ट्वीट में अपनी समस्या भी लिखी और बताया कि ट्रेन लगभग ढाई घंटे देरी से चल रही है। ऐसे में उसकी बहन की परीक्षा छूट सकती है, उसकी मदद की जाए।

ट्वीट में ट्रेन और टिकट से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसके ठीक बाद रेलवे के ट्विटर हैंडल ने अनवर से उससे संपर्क करने की जानकारी माँगी। संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन देते हुए अनवर से कहा कि ट्रेन समय से पहुँच जाएगी। इस मामले को लेकर कंट्रोल रूम को सूचित किया गया और तत्काल प्रभाव से ट्रेन की रफ़्तार बढ़ाई गई।

नतीजा यह निकला कि जो ट्रेन ढाई घंटे की देरी से चल रही थी, वह समय से पहले (लगभग 11 बजे) ही वाराणसी पहुँच गई। जैसे ही नाजिया परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई, उनके भाई ने ट्वीट करके भारतीय रेलवे का आभार जताया।

इस संबंध में उत्तर पूर्वी रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि छात्रा की मदद नियमानुसार की गई है। बलिया फेफना रेलखंड पर प्रस्तावित स्पीड ट्रायल के वजह से कम किया गया था।            

पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन: किसानों को भड़काने के लिए कनाडा के खालिस्तानी समूह की भयानक रणनीति, है NDTV ‘कनेक्शन’ भी

अब तक हम सभी लोग यही मानकर चल रहे थे कि नवम्बर माह से चल रहे ये किसान आन्दोलन सिर्फ अन्नदाताओं की कृषि कानूनों से नाराजगी का ही परिणाम है। लेकिन वामपंथी एक्टिविट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से किए गए ट्वीट में जो दस्तावेज सामने आए हैं, उससे किसान आंदोलनों के मूल में छिपे खालिस्तान समर्थकों के तार भी एक के बाद एक कर सामने आने लगे हैं।

किसान आन्दोलन का खाका तैयार करने वाली इस ‘टूल किट’ की तह में जाने पर ये सभी एक ही स्रोत पर मिलते नजर आते हैं और वो है खालिस्तान के विचार के समर्थन के जरिए भारत विरोध। इन दस्तावेजों में भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ किसान आंदोलन के नाम पर की जा रही साजिश का अजेंडा कई चरणों में दिया गया है। इसमें अब ऐसे ही कनाडा आधारित एक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का भी जिक्र सामने आया है, जिसका किसान विरोध को भड़काने में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

पोएटिक जस्टिस फॉउंडेशन का रोल

भारत के किसानों के विरोध के खिलाफ वैश्विक अभियान के पीछे कनाडा का ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसकी वेबसाइट से वास्तविकता का पता चलता है कि यह सब सामान्य से कहीं अधिक भयावह है।

दरअसल, इन डॉक्यूमेंट को पढ़ने से पता चलता है कि ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ (Poetic Justice Foundation) नामक समूह ने भी लोगों को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। दिलचस्प बात ये है कि इस समूह द्वारा एक वेबसाइट तैयार की गई है जिसका नाम है ‘आस्क इण्डिया व्हाय’ यानी, ‘भारत से पूछो, क्यों’?

कनाडा का यह छोटा सा संगठन ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ किस तरह से लोगों को भड़काने का काम कर रहा है, इसका उदाहरण उन्हीं की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया व्हाय’ पर नजर आ रहे हैं। इसमें लिखा गया है कि सरकार किसानों की जान ले रही है।

साथ ही, 1984 में हुए दंगों का डर भी लोगों के बीच रखा गया है, जिसका उद्देश्य यह भय पैदा करना है कि सरकार किसानों के दमन के लिए फिर ऐसा कुछ कर सकती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात है कि हाल ही में ट्विटर पर एक ऐसा भी अजेंडा चलाया गया था, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के नरसंहार की तयारी कर रहे हैं।

ग्रेटा थनबर्ग ने जो एक दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे अजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी है। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थन वाली सामग्री भरपूर मौजूद है।

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पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का इन्स्टाग्राम अकाउंट

03 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने जो डॉक्यूमेंट ट्वीट किए, उन दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ द्वारा ही किसानों के आंदोलन के लिए विरोध प्रदर्शन की सामग्री और सोशल मीडिया टेम्पलेट बनाए गए थे।

Poetic Justice Foundation
आन्दोलन में भूमिका को लेकर पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का विवरण

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस संगठन ने 26 जनवरी की हिंसा को लेकर भी खूब माहौल बनाया था-

पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का इन्स्टाग्राम अकाउंट

इस संगठन ने अपनी वेबसाइट ‘AskIndiaWhy’ पर लिखा है, “हम सबसे सक्रिय रूप से #FarmersProtest में शामिल हैं, जिसने दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों को किसानों के प्रति भारत की दमनकारी नीतियों के लिए एक विद्रोह के रूप में सक्रिय किया है।”

किसानों के विरोध को इस संगठन ने ‘दुनिया के सबसे लम्बे चले किसान आंदोलनों में से एक’ के रूप में बताया है, जैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा।

भारत सरकार पर हमला करते हुए यह संगठन कहता है, “प्रधानमंत्री मोदी के फासीवादी शासन में भारत ने खुद को एक क्रूर हिंदू राष्ट्रवादी शासन के रूप में पेश किया है।”

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खुद को खालिस्तानी बताते हैं इस संगठन के ‘एक्टिविस्ट’

इस डॉक्यूमेंट में एमओ ढोलीवाल नाम के एक व्यक्ति का भी जिक्र सामने आया है, जो कि पोएटिक जस्टिस फॉउंडेशन’ का एक सदस्य है। एमओ ढोलीवाल ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर सितंबर, 2020 में खुद को खालिस्तानी समर्थक बताया है। इस पोस्ट में ढोलीवाल ने ‘स्वतंत्र पंजाब’ की जमकर वकालत भी की है।

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अब अगर इस तमाम आंदोलन की क्रियाविधि और इसे नेटवर्क पर एक और नजर दौड़ाएँ तो पता चलता है कि यह सब कितना सुव्यवस्थित तरीके से किया गया। आपको याद ही होगा कि किसान आंदोलन के बीच दिल्ली सीमा पर मौजूद ‘किसानों’ के लिए ‘ट्रॉली टाइम्स’ नाम का एक समाचार पत्र भी शुरू किया गया था।

किसान विरोध का NDTV कनेक्शन

इस ट्रॉली टाइम्स के ‘स्तम्भकार’ वामपंथी समाचार चैनल एनडीटीवी के भी स्तम्भकार हैं। इनमें से एक नाम है हरजेश्वर पाल सिंह का। हरजेश्वर पाल ‘ट्रॉली टाइम्स’ के लिए लिखते हैं और हरजेश्वर पाल ही NDTV के लिए भी लिखते हैं और ‘दी क्विंट’ के लिए भी।

श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, चंडीगढ़ में इतिहास के प्रोफेसर हरजेश्वर पाल सिंह कहते हैं कि आर्थिक कारणों ने गायकों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मजबूर किया है। प्रोफेसर पाल स्वतंत्र विचार रखने के लिए स्वतंत्र भी हैं। हालाँकि, यह तमाम नेटवर्क वामपंथ के रास्ते से होते हुए किसान आन्दोलन में अपनी दस्तक देकर खालिस्तान के विचार के एकीकरण पर ही जोर देते नजर आते हैं।

ग्रेटा थनबर्ग की एक छोटी सी भूल ने इस तमाम अजेंडा की पोल खोलकर रख दी है। अभी ये देखना बाकी है कि इस वामपंथी ‘टूलकिट’ से और क्या प्रपंच बाहर निकलने बाकी हैं।

छत्तीसगढ़ में 16 साल की आदिवासी लड़की से गैंगरेप, पत्थरों से मार पिता की भी हत्या: अब्दुल सहित 6 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 16 साल की नाबालिग के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। नाबालिग की हत्या के बाद आरोपितों ने पत्थर से कूच कर उसकी हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपितों ने पीड़िता के पिता और उनकी चार साल की पोती को भी जान से मार दिया। 

कोरबा जिले के एसपी अभिषेक मीणा ने इस घटना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वारदात 29 जनवरी 2021 को लेमरू पुलिस थाना अंतर्गत गधुपरोदा गाँव में अंजाम दी गई थी। फ़िलहाल इस घटना के कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोपितों की पहचान संतराम मझवार (45), अब्दुल जब्बार (29), अनिल कुमार सारथी (20), परदेसी राम पनिका (35), आनंद राम पनिका (25) और उमाशंकर यादव (21) के रूप में हुई है। मामले के सारे आरोपित सतरेंगा गाँव के रहने वाले हैं।

नाबालिग के पिता गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपित संतराम मंझवार के यहाँ जुलाई 2020 से मवेशी चराने का काम करते थे। वह मूल रूप से बरपानी गाँव के रहने वाले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित मंझवार 29 जनवरी को पीड़िता, उनके पिता और 4 साल की पोती को दो पहिया वाहन से घर छोड़ने के लिए जा रहा था।

इसी दौरान मंझवार कोरई नाम के गाँव के पास रुका। उसने वहाँ शराब पी। तभी उसके अन्य साथी भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद आरोपितों ने मिल कर पीड़िता, उनके पिता और पोती को गधुपरोदा स्थित पहाड़ी के जंगलों में ले गए। ठीक यहीं पर सभी आरोपितों ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया। 

बलात्कार के बाद आरोपितों ने तीनों पर डंडे और पत्थरों से कई बार हमले किए और उन्हें जंगल में छोड़ कर फ़रार हो गए। तीनों के घर वापस नहीं लौटने की वजह से परेशान परिजनों ने लेमरू पुलिस थाने में तीनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू करके 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ शुरू की। आरोपितों द्वारा दिए गए बयान के आधार पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, जहाँ ये वारदात अंजाम दी गई थी। उस समय सिर्फ पीड़िता ज़िंदा थी, बाकी दो लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। पुलिस पीड़िता को स्थानीय अस्पताल लेकर गई लेकिन गंभीर चोटों की वजह से उसकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नाबालिग ‘पहाड़ी कोरवा जनजातीय समुदाय’ की सदस्य थी, जो कि विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) की श्रेणी में आता है। पुलिस ने घटनाक्रम में आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 302, 376 (2) जी, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातीय (अत्याचार निवारण अधिनियम) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।            

पुलिस के लिए DTC बस नहीं – केजरीवाल सरकार का आदेश… लेकिन किया ‘किसानों’ के लिए रात में पानी की व्यवस्था

प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के लिए एक बजे रात अपने विधायक को भेज कर पानी की व्यवस्था करवाने वाले अरविंद केजरीवाल ने नया फ़रमान जारी किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात की गई डीटीसी (DTC) बसों को तत्काल प्रभाव से डिपो में लौटने का आदेश दिया है।

दिल्ली के परिवहन विभाग ने डीटीसी को निर्देश दिया है कि दिल्ली पुलिस को दी गई 576 बसें वापस की जाएँ। दरअसल ‘किसान आंदोलन’ को मद्देनज़र रखते हुए तैनात किए गए पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही के लिए लो फ्लोर डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया गया है।

‘किसान आंदोलन’ में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 576 डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिल्ली सरकार ने डीटीसी से इस मुद्दे पर रिपोर्ट माँगी थी। जिसमें यह पता चला कि 20 फ़ीसदी से अधिक बसें विशेष किराए पर चल रही हैं। 

26 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के दौरान काफी बसें क्षतिग्रस्त हुई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ विशेष किराए पर चल रही डीटीसी बसों को वापस बुलाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा एक और अहम फैसला लिया गया है, जिसके मुताबिक़ डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए पुलिस या किसी भी सुरक्षा एजेंसी को दिल्ली सरकार से अनुमति लेनी होगी।

दिल्ली के परिवहन मंत्री और डीटीसी बोर्ड के चेयरमैन कैलाश गहलोत के अनुसार अब से विशेष किराए पर डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए दिल्ली सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा 26 जनवरी को हुई हिंसा को देखते हुए दिल्ली सरकार और व्यवस्थाएँ देख सकती है।

डीटीसी में कुल 3762 बसें हैं, जिसमें 3400 बसों से सेवाएँ ली जाती हैं। 26 जनवरी को अवकाश होने की वजह से सिर्फ 1975 बस सेवाएँ दे रही थीं। इसमें सरोजिनी नगर, वजीरपुर और गाजीपुर डिपो की लगभग 40 बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। नतीजतन उस दिन शाम को सिर्फ 900 बसें बाहर भेजी गई थीं।

डीटीसी श्रेणी में सिर्फ लो फ्लोर बसें ही मौजूद हैं, इनके बड़े आकार के अलावा इंजन बंद होने के समय इन्हें खिसकाना लगभग नामुमकिन है। इसकी वजह से इन बसों का इस्तेमाल सड़कें जाम करने के लिए किया जाता है। 

ट्विटर पर जेल-जुर्माना दोनों? ‘मोदी-नरसंहार’ पर नहीं माना सरकार का आदेश, म्यांमार में पूरा फेसबुक ही बैन

‘अपनी पॉलिसी, अपना प्रोपेगेंडा’ – वाली मनमानी बड़ी-बड़ी IT कंपनियों की शायद अब नहीं चलने वाली है। बुधवार (3 फरवरी 2021) को केंद्र सरकार ने ट्विटर को स्पष्ट कह दिया है कि ‘किसान’ प्रदर्शन को लेकर जितने भी भड़काऊ ट्वीट हैं, उन्हें हटाया जाए वरना जेल और जुर्माना दोनों के लिए कंपनी तैयार रहे।

केंद्र सरकार ने 257 अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश ट्विटर को दिया था। ये सभी अकाउंट #ModiPlanningFarmerGenocide (किसानों के नरसंहार के लिए मोदी की प्लानिंग) नाम से हैशटैग चला रहे थे।

ट्विटर ने केंद्र सरकार की शिकायत पर शुरुआत में इन 257 अकाउंट्स पर रोक (withheld) लगाई थी। 1 फरवरी 2021 को लगाई गई यह रोक लगभग एक मजाक था। क्योंकि यह कुछ मिनटों-घंटों में ही हटा लिया गया। कंपनी ने ‘फ्री स्पीच’ और ‘समाचार के लायक कंटेंट’ का हवाला देकर इन अकाउंट्स को रिस्टोर कर दिया था।

IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को ट्विटर के बारे में कहा – “ट्विटर एक माध्यम है। वह सरकार का आदेश मानने के लिए बाध्य है। ऐसा नहीं करने पर कानून के अनुसार उस पर कार्रवाई करने के लिए सरकार स्वतंत्र है। नरसंहार के लिए उकसाना ‘फ्री स्पीच’ नहीं हो सकता। यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है। “

भड़काऊ कंटेंट को माध्यम देकर लोगों तक फैलाने के लिए IT एक्ट के सेक्शन 69A (3) के तहत ट्विटर इंडिया के सीनियर ऑफिसर को 7 साल तक की जेल और कंपनी पर जुर्माना – दोनों का प्रावधान है।

#ModiPlanningFarmerGenocide के हैशटैग के साथ भड़काऊ कंटेंट ट्वीट करने वालों में प्रमुख नाम थे – किसान एकता मोर्चा, BKU एकता उग्रहन, कारवाँ मैगजिन, सीपाआई नेता मोहम्मद सलीम और कथित एक्टिविस्ट हंसराज मीणा।

सोशल मीडिया पर बैन

युगांडा में राष्ट्रपति ने 12 जनवरी को ट्विटर और फेसबुक के साथ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया। राष्ट्रपति मुसेवेनी ने कहा, “इन प्लेटफॉर्म्स का समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। यदि आप किसी पक्ष को लेना चाहते हैं, तो आप युगांडा में काम नहीं कर सकते, क्योंकि युगांडा हमारा देश है हम उन्हें यह तय करने नहीं दे सकते कि कौन अच्छा है और कौन बुरा।”

म्यांमार में नई-नवेली सैन्य सत्ता ने 4 फरवरी 2021 को फेसबुक को ब्लॉक कर दिया। वहाँ की सरकारी इंटरनेट प्रोवाइडर MPT ने फेसबुक को ही ब्लॉक कर दिया। फेसबुक के साथ-साथ इसके मैसेंजर, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप को भी ब्लॉक किया गया है। MPT के अलावा प्राइवेट टेलिनॉर (Telenor) ने भी म्यांमार सरकार का आदेश मानते हुए फेसबुक को ब्लॉक किया।

मोदी सरकार के कृषि कानून के समर्थन में उतरा बायडेन प्रशासन, कृषि सुधार के लिए बताया जरूरी

भारत द्वारा किए जा रहे कृषि सुधारों के महत्व को समझते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार (फरवरी 03, 2021) को मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया। बुधवार को जारी एक बयान में, बायडेन प्रशासन ने कहा कि वो उन कदमों का स्वागत करता है, जो भारत के बाजारों की कुशलता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा जारी बयान में संकेत दिया गया है कि नया बायडेन प्रशासन भारत सरकार के कृषि क्षेत्र में सुधार के कदम का समर्थन करता है जो कि निजी निवेश और किसानों के लिए बड़े बाजार को आकर्षित करेगा।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका यह स्वीकार करता है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

प्रवक्ता ने कहा, “हम मानते हैं कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान हैं। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही कहा है। हम पार्टियों के बीच किसी भी तरह के मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल करने का ही समर्थन करेंगे। सामान्य तौर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारत के बाजारों की दक्षता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे।”

उल्लेखनीय है कि अमेरिका से पहले वर्ड बैंक और आईएमएफ भी भारत के तीन नए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुका है। किसान इन कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बायडेन प्रशासन का यह बयान भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ की जा रही वैश्विक साजिशों के खुलासे के ठीक अगले दिन ही आया है।

इन आंदोलनों के बीच, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा भड़की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए और केंद्र की तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में अपनी ट्रैक्टर रैली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में उत्पात मचाया।

वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन के बीच, कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी इसे अपना समर्थन दिया। इसमें पॉप सिंगर रिहाना, मिया खलीफा, थनबर्ग आदि ने ट्विटर पर इसे लेकर ट्वीट किए। लेकिन बुधवार (फरवरी 03, 2021) देर शाम ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में ही भातीय लोकतंत्र को बदनाम करने के इस ग्लोबल अजेंडा की भी पोल खोल डाली।

स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।

इस बीच, भारत ने किसानों के विरोध पर विदेशी हस्तियों के बयानों को ‘निहित स्वार्थ समूहों’ का हिस्सा करार दिया। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर समेत बॉलीवुड से लेकर खेल जगत की तमाम हस्तियों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय अजेंडा के खिलाफ ट्वीट किया है।

रिहाना के ट्वीट के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन ट्वीट्स को लेकर बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा, “भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुँच देते हैं। ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”

विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में #IndiaTogether और #IndiaAgainstPropaganda हैशटैग का इस्तेमाल किया।

भारतीय लोकतंत्र को बना दिया टूलकिट: ग्रेटा थनबर्ग की एक गलती ने कर दिया साजिश का खुलासा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन के बीच, कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने अपना समर्थन दिया है। इसमें पॉप सिंगर रिहाना, मिया खलीफा, थनबर्ग आदि ने ट्विटर पर इसे लेकर ट्वीट किए। लेकिन बुधवार (फरवरी 03, 2021) देर शाम ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में ही भातीय लोकतंत्र को बदनाम करने के इस ग्लोबल अजेंडा की भी पोल खोल डाली।

स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।

Greta Thunberg
ग्रेटा द्वारा डिलीट कर दिया गया ट्वीट

ट्वीट में ग्रेटा ने लिखा था कि ‘हम भारत में चल रहे किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।’ इसके बाद उसने एक और ट्वीट किया, जिसमें गूगल डॉक्युमेंट की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आन्दोलन को हवा देने वाले सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल और तमाम रणनीति दर्ज थीं।

Greta Thunberg

यह गूगल डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा था कि जो लोग मदद करना चाहते हैं यह ‘टूलकिट’ उनके लिए है। इस लिंक में भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने क कार्ययोजना का विवरण था। ग्रेटा ने गलती से सार्वजानिक किया हुआ ये ट्वीट तो डिलीट कर दिया लेकिन तब तक लोगों के पास यह डॉक्यूमेंट पहुँच चुके थे।

इस दस्तावेज में उन सभी ट्वीट का जिक्र दिया गया है, जो भारत सरकार पर दबाव बनाने के लिए विभिन्न हस्तियों, समूहों और लोगों द्वारा किए जाने हैं। यहाँ तक कि रिहाना द्वारा जो ट्वीट किया गया, वो भी ठीक उन्हीं शब्दों में है, जैसा कि इस दस्तावेज में रिहाना के नाम से जारी किया गया था।

Greta Thunberg

जब हमने इस दस्तावेज में दी गए कुछ ट्वीट तलाशे, तो हमें ये परिणाम मिले। परिणाम बताते हैं कि यह अभियान कम से कम नवंबर, 2020 से चल रहा है।

Greta Thunberg

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा किए गए ट्वीट के बाद इस टूलकिट के दस्तावेजों की गोपनीयता में बदलाव कर इसे ‘प्राइवेट’ कर दिया गया है, ताकि लोग इसमें छुपी जानकारी ना जुटा सकें। यह भी कहा गया है कि 26 जनवरी के लिए जो योजना तैयार की गई थी, वह पूरी दुनिया और भारत में बिल्कुल वैसी ही रही।

डॉक्यूमेंट की कुछ प्रमुख बातें

  • विरोध प्रदर्शन में भाग लें: 25 जनवरी तक ईमेल द्वारा एकजुटता दिखने वाले फोटो/वीडियो संदेश शेयर करें (दिल्ली की सीमा पर किसानों के लिए एकजुटता संदेश)।
  • डिजिटल स्ट्राइक: #AskIndiaWhy वीडियो/फोटो संदेश – 26 जनवरी को या उससे पहले।कृषि बिल का विरोध करने के लिए प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंक के साथ टैग किया जाना है।
  • 4-5 फरवरी 2021 को ट्विटर स्टॉर्म: 5 फरवरी तक या अधिकतम 6 फरवरी तक फोटो/वीडियो संदेश शेयर करें। गौरतलब है कि ठीक 6 फ़रवरी के दिन ही किसानों ने राष्ट्रव्यापी चक्का जाम की भी घोषणा की है।
  • स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा भारत सरकार पर दबाव बनाने में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश करें।
  • इसमें लोगों को भारतीय दूतावासों, स्थानीय सरकारी कार्यालयों या विभिन्न बहुराष्ट्रीय अडानी और अंबानी कंपनियों के कार्यालयों में एकजुटता विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए भी दिशानिर्देश दिया गया है।

इस बीच, भारत ने किसानों के विरोध पर विदेशी हस्तियों के बयानों को ‘निहित स्वार्थ समूहों’ का हिस्सा करार दिया। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर समेत बॉलीवुड से लेकर खेल जगत की तमाम हस्तियों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय अजेंडा के खिलाफ ट्वीट किया है।

रिहाना के ट्वीट के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन ट्वीट्स को लेकर बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा, “भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुँच देते हैं। ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”

विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में #IndiaTogether और #IndiaAgainstPropaganda हैशटैग का इस्तेमाल किया।

PM मोदी को अपशब्द बोलने के मामले में फिर फँसे राहुल गाँधी: अब लगाने होंगे अयोध्या कोर्ट के चक्कर

कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए उत्तर प्रदेश से बुरी खबर सामने आई है। अयोध्या जिले के एडीजे-प्रथम कोर्ट ने उन्हें राफेल मामले (Rafael) को लेकर नोटिस जारी किया है। राहुल गाँधी को 26 मार्च को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश वकील मुरलीधर चतुर्वेदी की दायर याचिका के तहत दी गई है, जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपशब्द कहने के आरोप लगाए हैं।

क्या बोले थे राहुल गाँधी

जानकारी के मुताबिक, राहुल गाँधी कुछ समय पहले राफेल को लेकर लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर थे। इस दौरान उन्होंने लड़ाकू विमान से संबंधित दस्तावेज को स्कैम बताया था। वकील ने याचिका में जिक्र किया है कि राहुल गाँधी ने ना सिर्फ कागज को फर्जी बताया, बल्कि पीएम के लिए ‘चौकीदार चोर’ शब्द का इस्तेमाल भी किया था।

सुप्रीम कोर्ट से माँग चुके हैं माफी

बता दें कि राफेल मामले को लेकर राहुल गाँधी पर ये पहला केस नहीं है। इससे पहले उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की जा चुकी है। उन पर कोर्ट की अवमानना का आरोप लगा था। तब राहुल गाँधी ने हलफनामा दायर करके सुप्रीम कोर्ट से माफी माँग ली थी। उन्होंने हलफनामे में लिखा था कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। उनसे गलती हो गई। इसके लिए वह माफी चाहते हैं।

गौरतलब है कि राहुल गाँधी राफेल डील और कई मुद्दों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। वो नोटबंदी पर भी सरकार को घेरने से पीछे नहीं रहे। इस दौरान भी उन्होंने केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार और पीएम मोदी को चौकीदार चोर कहकर संबोधित भी किया।

हाल ही में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला किया और कहा कि चीन भारत में प्रवेश करता है और हमारी जमीन हड़प लेता है। आप उन्हें क्या संदेश देते हैं? कि हम अपने रक्षा व्यय में वृद्धि नहीं करेंगे। आपने इसे 3000-4000 करोड़ रुपए बढ़ा दिया। आपने क्या संदेश दिया? आप भारत में प्रवेश कर सकते हैं और जो चाहें कर सकते हैं, हम अपने रक्षा बलों का समर्थन नहीं करेंगे।

रिहाना, ग्रेटा, मिया खलीफा को सचिन तेंदुलकर का दो टूक जवाब, कहा- भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं

पाॅप सिंगर रिहाना ने किसानों के समर्थन को लेकर जब से ट्वीट किया है, वह भारत में दिग्गजों के निशाने पर आ गई है। सोशल मीडिया पर जहाँ यूज़र्स उन्हें जमकर खरी-खोटी सुना रहे वहीं फेमस सेलेब्रिटीज़ उन्हें भारत के आतंरिक मामलों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘गॉड ऑफ क्रिकेट‘ भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने बाहरी हस्तियों को मुँहतोड़ जवाब दिया है।

पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। उनकी यह यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना, जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और अन्य की ओर से किसान आंदोलन पर की गई टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बाद आई है।

सचिन तेंदुलकर ने लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बाहरी ताकतें दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं। भारतीय भारत को जानते हैं और उन्हें ही भारत के लिए फैसला करना है। आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें। IndiaTogether #IndiaAgainstPropaganda”

वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की और विदेशी हस्तियों को किसान आंदोलन पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करने की सलाह दी।

गौरतलब है कि इससे पहले अमित शाह ने भी इस मामले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके अलावा बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ भी भारत के समर्थन में खुलकर सामने आए और सीधे शब्दों में ट्वीट करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे मतभेद पैदा करने वाले किसी भी चीजों पर ध्यान न दें। इसके बाद से ही ट्विटर पर #IndiaTogether (इंडिया टुगेदर) ट्रेंड कर रहा है। इस ट्रेंड में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर और कई अन्य सितारें शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश के कुछ हिस्सों में किसानों के एक बहुत छोटे से वर्ग को कृषि सुधारों के बारे में कुछ आपत्तियाँ हैं और आंदोलन पर जल्दबाजी में टिप्पणी करने से पहले इस मुद्दे को समझने की जरूरत है।

ट्विटर पर फैल रहे दुष्प्रचार पर लगाम लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसे चर्चित लोगों के ट्वीट को लेकर कहा कि सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और कमेंट्स को लुभाने का तरीका, खासकर यह मशहूर हस्तियों द्वारा किया गया हो, तो यह न तो सटीक है और न ही जिम्मेदाराना है।

इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले हम आग्रह करते हैं कि तथ्यों का पता लगाया जाए और मुद्दों को समझा जाए। भारत की संसद ने पूर्ण बहस और चर्चा के बाद कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी कानून पारित किए।” हालाँकि इस दौरान मंत्रालय की ओर से विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया गया है।

बता दें कि पॉप गायिका रिहाना ने मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे?” इसके साथ ही उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा। वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।