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नेपाल में चीन पैंतरे नाकाम, कम्युनिस्ट पार्टी ने कार्यकारी PM ओली को पार्टी से निकाला

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की आंतरिक लड़ाई रोकने की चीन की तमाम कोशिशें नाकाम हो गई हैं। कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाल कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है। ओली पर चीनी इशारे पर सरकार चलाने के आरोप लगते रहे हैं।

ओली को निकलने का फैसला पार्टी की सेंट्रल कमेटी की मीटिंग में लिया गया है। प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने ANI से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है।”

हिमालयन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओली की सदस्यता खत्म करने का फैसला पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और माधव कुमार नेपाल की कमेटी ने किया। रविवार (जनवरी 24, 2021) को पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इस पर मुहर भी लगा दी गई। पार्टी में ओली के हालिया फैसलों को लेकर काफी नाराजगी थी। उनसे सफाई माँगी गई, लेकिन वे कमेटी के सामने पेश ही नहीं हुए। नेपाल में इसी साल मार्च से अप्रैल के बीच नए चुनाव हो सकते हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ का के अनुसार, ओली को पार्टी की बैठक में आने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन ओली ने पार्टी मीटिंग में हिस्सा लेने से इनकार करते हुए पार्टी के विभाजन की धमकी दे डाली थी

ओली जिस तरीके से सरकार चला रहे थे उसका पार्टी का एक गुट लंबे समय से विरोध कर रहा था। इस गुट के नेताओं का कहना था कि ओली पूरी तरह से नाकाम साबित हो चुके हैं और अपनी नाकामी छुपाने के लिए भारत विरोधी बातें कर रहे हैं। जो नेता ओली का विरोध कर रहे थे उनमें नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्री, पुष्प कमल दहल, माधव कुमार नेपाल और झाला नाथ खनाल भी शामिल थे।

इनमें पुष्प कमल दहल, जो प्रचंड के नाम से मशहूर हैं, वे पार्टी के सह अध्यक्ष भी हैं। पिछले वर्ष प्रचंड और ओली के बीच का विवाद काफी बढ़ गया था। उस  वक्त पार्टी के नेताओं का सामना करने से केपी ओली बच रहे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि स्थाई समिति के 45 में से 30 सदस्य उनके खिलाफ हैं। 

बता दें कि जब से ओली ने 275 सदस्यों वाली संसद को भंग किया है, उन्हें पहले ही पार्टी की सेंट्रल कमिटी के चेयरमैन पद से हटाया जा चुका था, लेकिन वह इसके सदस्य बने हुए थे। बता दें कि पीएम ओली की सिफारिश पर संसद भंग करने के बाद नेपाली राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी वहां 30 अप्रैल और 10 मई को ताजा चुनाव करवाने की घोषणा भी कर चुकी हैं। इस बीच नेपाली संसद को भंग करने का मामला नेपाली सुप्रीम कोर्ट के पास भी विचाराधीन है। ओली की इस कार्रवाई को उनका विरोधी खेमा असंवैधानिक बता रहा है।

कम्युनिस्ट पार्टी का विवाद समाप्त करने के लिए चीन काफी सक्रिय था। उसके एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल आकर शीर्ष नेताओं से बात की थी, लेकिन वे भी सहमति बनाने में नाकाम रहे थे।

बिशप का गोपनीय पत्रः चर्च समर्थक कैंडिडेट को टिकट दें, ईसाई कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करेंगे

केरल की सत्ताधारी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से आगामी विधानसभा चुनावों में एक चर्च समर्थित उम्मीदवार को टिकट देने की सिफारिश कर एक कैथोलिक बिशप विवादों में घिर गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, बिशप जैकब मनथोदाथ ने 11 जनवरी को सीपीआई के राज्य सचिव कनम राजेंद्रन को एक ‘गोपनीय पत्र’ लिखा। इसमें इस्साक वर्गीज (Issac Varghese) नाम के एक कैथोलिक उद्योगपति को टिकट देने की सिफारिश की गई थी। पत्र में कैथोलिक बिशप ने सीपीआई नेता को आश्वासन दिया कि अगर वर्गीज को पलक्कड़ जिले के मन्नारक्कड़ निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया जाता है तो ईसाई कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करेंगे।

पत्र के मीडिया में लीक होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। लोगों ने चर्च और बिशप के राजनीतिक झुकाव पर सवाल उठना शुरू कर दिया है। कॉन्ग्रेस समर्थक मैथ्यू जेवियर ने कहा, “एक बिशप को अपनी पार्टी चुनने का अधिकार है। लेकिन उनका एक राजनीतिक पार्टी के टिकट के लिए किसी की सिफारिश करने की सराहना नहीं की जा सकती है।”

केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) के उप सचिव, फादर जैकब पालकप्पिली ने विवाद से खुद को अलग करते हुए कहा है कि चर्च सभी राजनीतिक दलों से पर्याप्त दूरी बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि चर्च लंबे समय से इस बात पर अडिग है और बिशप जैकब की टिप्पणियाँ उनके निजी विचार हैं। हालाँकि सोशल मीडिया पर आलोचनाओं के बावजूद बिशप ने पत्र लिखने का कारण नहीं बताया है।

गौरतलब है कि 140 सीटों वाली केरल विधानसभा के आगामी चुनावों से पहले कई राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए मजहबी नेताओं के पास पहुँच रहे हैं। ऐसे में कैथोलिक बिशप का यह पत्र काफी बातों से पर्दा उठता है। माना जाता है कि केरल की जनसंख्या में 18% ईसाई हैं और वे सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य में ईसाइयों को पारंपरिक रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थक माना जाता है।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी फिलहाल तमिलनाडु दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन राहुल गाँधी तमिलनाडु के इरोड पहुँचे। यहाँ पर उनके भाषण के दौरान एक अजीब घटना घटी। राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

रिपोर्टों के अनुसार, 35 वर्षीय प्रोफेसर मोहम्मद इमरान रविवार (जनवरी 24, 2021) को राहुल गाँधी द्वारा दिए गए भाषणों का उत्साहपूर्वक अनुवाद कर रहे थे। राहुल गाँधी के भाषण को अभी कुछ ही मिनट हुआ था कि वह अचानक से बेहोश हो गए। जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि किस कारण से कॉन्ग्रेस की रैली में प्रोफेसर बेहोश हो गए।

राहुल गाँधी ने इरोड में भाषण भी ‘जबरदस्त’ दिया। उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर भारत के किसान, श्रमिक और मजदूर मजबूत होते, तो भारत को सीमाओं पर सेना, नौसेना और वायु सेना को तैनात करने की आवश्यकता नहीं होती, खासकर इंडो-चाइना बॉर्डर पर। उन्होंने दावा किया था कि अगर किसानों और मजदूरों को सुरक्षा और अधिकार दिया गया तो चीन भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ करने की हिम्मत नहीं करेगा।

दिनाकरन की रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल गाँधी द्वारा दिए गए भाषण का अनुवाद करने के बाद, अनुवादक इमरान ने अपना होश खो दिया और घटनास्थल पर बेहोश हो गए। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

राहुल ने यहाँ पर रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वह यहाँ पर ‘मन की बात’ बताने नहीं आए हैं, बल्कि तमिलनाडु के लोगों की समस्याएँ सुनने आए हैं। राहुल गाँधी ने रोड शो के दौरान कहा, “मैं यहाँ आपको ये बताने नहीं आया हूँ कि क्या करना चाहिए या अपने मन की बात करने नहीं आया हूँ। मैं यहाँ आपको सुनने आया हूँ, आपकी समस्याओं को सुनकर उन्हें सुलझाने में मदद करने आया हूँ।”

तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की अस्तित्व की लड़ाई

1967 में तमिलनाडु की सत्ता से बाहर होने के बाद कॉन्ग्रेस कभी वापसी नहीं कर पाई। 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के हिस्से में सिर्फ 8 सीटें आई थीं। अभी राज्य में AIADMK की सरकार है। इस बार कॉन्ग्रेस के DMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की अटकलें हैं।

26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली को दिल्ली पुलिस की हरी झंडी, SFJ ने कहा-भिंडरावाले के पोस्टर लहराना

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2021) पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (इंटेलिजेंस) दीपेंद्र पाठक ने यह जानकारी दी। वहीं खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने किसानों से इस रैली के दौरान भिंडरावाले और बेअंत सिंह का पोस्टर लहराने की अपील की है।

पाठक ने बताया कि किसानों को सुरक्षा इंतजामों के साथ ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत दी गई। गणतंत्र दिवस समारोह संपन्न होने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच यह रैली निकलेगी। रैली टिकरी, सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करेगी।

इस बीच खबर आ रही है कि खालिस्तानी समर्थित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने किसानों से आग्रह किया है कि वे 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाले और इंदिरा गाँधी के हत्यारे बेअंत सिंह की विशाल तस्वीर का प्रदर्शन करें। 

बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या 31 अक्टूबर, 1984 को नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास में कर दी गई थी। दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। ऐसा ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए किया गया था। यह ऑपरेशन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छुपे सिख कट्टरपंथी जरनैल भिंडरावाले और उसके सशस्त्र अनुयायियों को बाहर निकालने के लिए चलाया गया था। इंदिरा गाँधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के उठे। इन दंगों में हज़ारों लोगों की जान गई थी।

पिछले दिनों किसानों के प्रदर्शन स्थल से एक ऐसी वीडियो सामने आई थी, जिससे इसमें खालिस्तानी ताकतों की घुसपैठ के संकेत मिले थे। इस वीडियो में एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।

गणतंत्र दिवस पर कई देश विरोधी संगठन किसानों की ट्रैक्टर परेड की आड़ में अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में हैं। यही नहीं कुछ कट्टरपंथी संगठनों के लोग भीड़ का फायदा उठाकर खालिस्तान आंदोलन की मुहिम को भी हवा दे रहे हैं। इस बात की तस्दीक सिंघु बार्डर पर लहरा रहे खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाला व आतंकी जगतार सिंह हवारा के फोटो कर रहे हैं।

सिंघु बार्डर पर राष्ट्रीय राजमार्ग के बीचोंबीच लगे जरनैल सिंह भिंडरावाला के पोस्टर चीख-चीख कर कह रहे हैं कि किसान आंदोलन पर अब खालिस्तान समर्थकों ने कब्जा कर लिया है। गणतंत्र दिवस पर परेड निकालने के लिए गाँवों के रास्ते शुक्रवार को दिल्ली पहुँचे ट्रैक्टर-ट्रालियों पर भिंडरावाला के पोस्टर लगाए गए थे।

इससे पहले खालिस्तानियों ने ऐलान किया था दिया कि 26 जनवरी 2021 को जो कोई भी खालिस्तान का झंडा इंडिया गेट पर लहराएगा, उसे $2.5 लाख से नवाजा जाएगा। किसानों को यह कहकर भी लालच दिया गया कि जो कोई भी ऐसा करेगा उसे कानूनी सहायता दी जाएगी और यूके में बतौर शरणार्थी रहने का प्रबंध भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि प्रोटेस्ट के 15वें दिन एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसने साबित कर दिया था कि पूरे आंदोलन को वामपंथियों-खालिस्तानियों ने हाइजैक कर लिया है। तस्वीर में नजर आया था कि किसान महिलाएँ हाथ में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों और अर्बन नक्सलियों की रिहाई माँग रही थी। पोस्टर के सभी चेहरे वही थे जो सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे थे। लोगों ने ये देख कर पूछा था कि क्या ये लोग भी अब किसान बन गए हैं।

सरकारी कार्यक्रम में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ तो ‘जय श्री राम’ से दिक्कत क्यों: Video शेयर कर ममता से BJP ने पूछा

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से सवाल किया है कि जब वे सरकारी कार्यक्रम में इस्लामिक इबादत कर सकती हैं, तो उन्हें ‘जय श्री राम’ बोलने में दिक्कत क्यों होती है? 

रविवार (जनवरी 24, 2021) को बंगाल बीजेपी ने वीडियो ट्वीट करते हुए कहा, “अगर सीएम ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल सरकार के किसी कार्यक्रम में इस्लामिक प्रार्थना कर सकती हैं, तो उन्हें जय श्री राम बोलने में दिक्कत क्यों होती है? तुष्टिकरण? उन्होंने बंगाल को बदनाम किया और नेताजी की जयंती के मौके पर अपने आचरण से नेताजी की विरासत का अपमान किया।”

इस वीडियो में ममता बनर्जी इस्लामिक इबादत करती दिख रही हैं। ये वीडियो कब का है यह साफ़ नहीं है। वीडियो में वह अल्लाह का नाम लेते हुए ला इलाहा इल्लल्लाह… कहती सुनाई पड़ती हैं।

विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ.सुरेंद्र जैन ने ट्वीट कर कहा है, “जय श्री राम कहने से पहले केवल रावण अपमानित महसूस करता था। अब सेकुलर माफिया अपमानित होता है। क्या हार का डर इतना हताश कर देता है कि आप देश की आत्मा को अपमानित कर देते हैं? राहुल गाँधी, ममता बनर्जी, शरद पवार राम भारत की आत्मा हैं, जिनके नाम जप से देश को गर्व होता है।”

इससे पहले पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट करते हुए कहा था, “ममता बनर्जी ने बहुत ही पवित्र मंच पर ‘जय श्री राम’ के नारे पर राजनैतिक एजेंडा सेट किया। हम इसकी निंदा करते है, नेताजी की 125वीं जयंती के मंच जहाँ प्रधानमंत्री उपस्थित हो वहाँ चुनाव को देखते हुए राजनैतिक एजेंडा सेट करना अल्पसंख्यक लोगों को खुश करने की तुष्टिकरण की नीति है।”

गौरतलब है कि शनिवार को पश्चिम बंगाल में नेताजी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विक्टोरिया मेमोरियल में पराक्रम दिवस का समारोह चल रहा था। इस मौके पर राज्य की सीएम ममता बनर्जी भी पहुँची थी। जब ममता बनर्जी मंच पर लोगों को संबोधित करने पहुँची, कार्यक्रम स्थल ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूँजने लगा।

जिसके बाद अपनी बौखलाहट भाजपा पर निकालते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, “सरकार के कार्यक्रम की गरिमा होनी चाहिए। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। आपको किसी को आमंत्रित करने के बाद उसकी बेइज्‍जती करना शोभा नहीं देता है। विरोध के रूप में मैं कुछ भी नहीं बोलूँगी।”

निकिता तोमर को गोली मारते कैमरे में कैद हुआ था तौसीफ, HC से कहा- मैं निर्दोष, यह ऑनर किलिंग

फरीदाबाद के सनसनीखेज निकिता तोमर हत्याकांड के मुख्य आरोपित तौसीफ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में घटना की दोबारा जाँच की माँग करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। आरोपित ने दावा किया है कि निकिता के परिजनों ने अपने अपराध को छिपाने के लिए, उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह मामला लव जिहाद का नहीं, बल्कि ऑनर किलिंग का है। हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

तौसीफ की ओर से पेश वकील महक साहनी ने दावा किया है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है। लव जिहाद के नाम पर उसे गलत तरीके से फँसाया जा रहा है। वकील ने दावा किया कि जिस व्यक्ति ने तोमर को गोली मारी थी, उसका मुँह पूरी तरह से ढका हुआ था और नंबर प्लेट तो कोई भी बदल सकता है। केवल एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी दिखाते हुए बिना किसी सबूत के उसको गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में अग्रवाल कॉलेज के बाहर 21 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर की दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दरअसल, आरोपित तौसीफ (Tauseef) ने निकिता को गाड़ी में खींचने की कोशिश की लेकिन जब वो असफल रहा तो उसने उसे गोली मार दी थी। वहीं वीडियो में अन्य आरोपित मोहम्मद रिहान द्वारा तौसीफ को कार में वापस खींचते देखा जा सकता है। यह पूरी घटना CCTV में भी कैद हो गई थी, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

बता दें, मृतका निकिता ने घटना के एक माह पहले ही आरोपित तौसीफ के खिलाफ छेड़खानी और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी। हालाँकि, बाद में परिवार ने मामला वापस ले लिया था। इसके बाद उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि तौसीफ ने उसे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया और उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा था।

निकिता के परिजनों ने बताया था कि तौसीफ 12वीं क्लास तक निकिता के साथ ही पढ़ता था। उसने कई बार दोस्ती के लिए दबाव भी बनाया था और वो उसका धर्मांतरण भी करना चाहता था। दोस्ती और जबरन निकाह से इनकार किए जाने के कारण तौसीफ ने वर्ष 2018 में एक बार निकिता का अपहरण भी कर लिया था। हालाँकि, तब बदनामी के डर से परिजनों ने किसी तरह समझौता कर लिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित तौसीफ कॉन्ग्रेस नेता कबीर अहमद का पोता है, जो 1975 में हरियाणा के नूंह विधानसभा क्षेत्र और 1982 में टाउरू निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। वे लगभग 20 वर्षों तक खानपुर और रायसिका के सरपंच भी थे। खानपुर और रायसिका हरियाणा के मेवात जिले की नूंह तहसील में स्थित हैं।

इसके अलावा तौसीफ के चाचा खुर्शीद अहमद हरियाणा के कॉन्ग्रेस सांसद और हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री थे। खुर्शीद अहमद के बेटे और तौसीफ के चचेरे भाई आफताब अहमद कॉन्ग्रेस पार्टी के टिकट पर नूंह, मेवात से विधायक चुने गए थे और मंत्री भी रह चुके हैं।

शिवपुरी बाबा की समाधि को पहले हरे रंग से पोता, पढ़ी नमाज और अब मस्जिद निर्माणः बीजेपी MLA के दखल पर रुका काम

उत्तर प्रदेश के बिठूर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने शनिवार (23 जनवरी 2021) को एक विवाद में दखल देते हुए मस्जिद का निर्माण कार्य रुकवाया, जिसमें स्थानीय पुलिस भी मदद कर रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा विधायक अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे और निर्माण रोकने को कहा।

इस घटना पर सांगा का कहना था, “धर्मनगरी बिठूर में कुछ लोग मंदिर के स्थान पर मस्जिद बनाने का प्रयास कर रहे थे, स्थानीय पुलिस तक इसमें शामिल थी। इस मामले की जानकारी मिलते ही मैंने और वहाँ के आम लोगों ने मिल कर ग़ैरक़ानूनी निर्माण कार्य रुकवाया।” बिठूर विधायक ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह थानाध्यक्ष (एसओ) की ज़िम्मेदारी थी कि वह विवाद से जुड़े दोनों पक्षों को बुलाते और दोनों के बीच समझौते के ज़रिए समस्या का हल निकालने की कोशिश करते।

वहीं एसओ का कहना था कि वह शीर्ष अधिकारियों के आदेश पर ऐसा कर रहा था। इस पर विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने कहा कि वह अपने अधिकारिओं से बता सकता है। मौके पर विधायक पहुँच गए हैं और वह अवैध निर्माण की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भाजपा विधायक सांगा के मुताबिक़ इस तरह के प्रयास सिर्फ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए किए जाते हैं। 

अभिजीत सिंह सांगा का कहना था कि बिठूर क्षेत्र के एक भी मुस्लिम ने इस मुद्दे पर चिंता नहीं जताई थी। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उनसे मुलाक़ात की थी और कहा भी था कि विवादित जगह से जुड़ा जो फैसला भी लिया जाएगा वह उसका पालन करेंगे। हिन्दुओं का कहना है वह जगह असल में शिवपुरी बाबा की समाधि है। कई वीडियो में एसओ को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि धमकी देने के लिए कुछ लोगों पर मामला दर्ज कर लिया गया है। 

ठीक इस जगह पर पहले भी सांप्रदायिक तनाव के हालात बन चुके हैं। लगभग तीन हफ्ते पहले इस निर्माण को सफ़ेद और हरे रंग से पेंट कर दिया गया था, इसके बाद दूसरे समूह के लोगों ने इस पर अलग रंग चढ़ा दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक़ 18 जनवरी को अज्ञात कुछ लोगों पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और उस जगह पर नमाज़ पढ़ने के लिए मामला दर्ज किया गया था।

₹118 करोड़ की अवैध संपत्ति, 4.5 Kg सोना मिला: ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के 25 ठिकानों पर पड़ा था छापा

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने ईसाई मजहब के प्रचारक पॉल दिनाकरन के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद उसकी 118 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। तमिलनाडु के ईसाई प्रचारक और उसकी कई संस्थाओं के खिलाफ बड़ी रकम की धोखाधड़ी और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने और कर चोरी के कई आरोप हैं। विभाग ने उसके 25 ठिकानों पर छापा मारा था, जिसके बाद ये खुलासा हुआ।

उसके पास से 4.5 किलो सोना भी मिला, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। साथ ही 120 करोड़ रुपए की ऐसी आय का पता चला, जिसका कोई पुष्ट दस्तावेज नहीं था। सोना उसके घर से ही पाया गया।

चेन्नई और कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था ‘Jesus Calls Ministries’ से जुड़े 25 ठिकानों पर बुधवार (जनवरी 20, 2021) को छापा मारा गया था। सुबह 6 बजे ही शुरू हुई छापेमारी में 200 के करीब इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने अलग-अलग टीमों में बँट कर एक साथ 25 ठिकानों पर छापेमारी की। उसकी संस्थाओं को विदेशी फंडिंग भी जम कर मिली थी, जिसे लेकर जाँच की जा रही है।

बता दें कि ‘Jesus Calls Ministries’ और ‘Karunya University’ की स्थापना पॉल दिनाकरन के पिता डीजीएस दिनाकरन ने की थी। उनका 2008 में निधन हो गया था। इसके बाद दोनों संस्थानों की कमान ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के हाथ में आ गई थी। इस परिवार का तमिलनाडु में खासा प्रभाव है और सभी सत्तारूढ़ दलों के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। जब डीजीएस दिनाकरन का निधन हुआ था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और नेता प्रतिपक्ष जे जयललिता, इन दोनों बड़े नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की थी।

गौरतलब है कि पॉल दिनाकरन, टीवी पर लगातार ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने और उसके जरिए फंड इकट्ठा करने वाले डीजीएस दिनाकरन का बेटा है। पॉल तमिलनाडु में ईसाई धर्म प्रचारक के रूप में जाना जाता है। उसके काफी फॉलोवर्स हैं और वो ईसाई प्रचार-प्रसार के लिए कई संगठन भी चलाता है। आईटी विभाग को दिनाकरन और जीसस कॉल्स के खिलाफ टैक्स चोरी और विदेशी फंडिंग में अनियमितता की शिकायत मिली थी।

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक फैसला सुनाया है, जिसके मुताबिक़ सिर्फ ग्रोपिंग (groping, किसी की इच्‍छा के विरुद्ध कामुकता से स्‍पर्श करना) को यौन शोषण नहीं माना जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक इसके लिए शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) होना चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फैसला उस आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसे एक नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण करने लिए जेल की सज़ा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के मुताबिक सिर्फ नाबालिग लड़की की छाती को छूना यौन शोषण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपित ने ज़्यादती के इरादे से शारीरिक संपर्क के ज़रिए पीड़िता के कपड़े उतारे होते या उसके अंडरगारमेंट्स में हाथ डालने का प्रयास किया होता, तब इसकी श्रेणी वही होती। जस्टिस पुष्पा गानेडीवाला की एक जज वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया, जिसमें एक युवक को एक नाबालिग के यौन शोषण के आरोप में सज़ा सुनाई गई थी।

सुनवाई के दौरान जज ने ज़िक्र किया कि पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत ज़्यादती तब होती है, जब एक व्यक्ति किसी बच्चे का गुप्तांग छूने का प्रयास करता है या उसे अपना गुप्तांग छूने के लिए मजबूर करता है।

जस्टिस पुष्पा के मुताबिक़, “अभियोग का यह मामला नहीं है कि आरोपित ने पीड़िता का टॉप हटाया और उसके स्तन दबाए। बल्कि इस मामले में किसी भी तरह का सीधा शारीरिक संपर्क नहीं हुआ है। मिसाल के तौर पर शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का संपर्क।” 

इसके अलावा जज ने कहा, “12 वर्ष की लड़की का स्तन दबाया जाता है। लेकिन इसकी जानकारी नहीं है कि आरोपित ने उसका टॉप हटाया था या नहीं? ना ही यह पक्का है कि उसने टॉप के अंदर हाथ डाल कर स्तन दबाया था! ऐसी सूचनाओं के अभाव में इसे यौन शोषण नहीं माना जाएगा। यह आईपीसी की धारा 354 के दायरे में ज़रूर आएगा, जो स्त्रियों की लज्जा के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में सज़ा की बात करता है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपित नाबालिग को अमरुद का लालच देकर अपने घर ले गया था। जब पीड़िता की माँ आरोपित के घर पहुँची तो उसकी बेटी ने रोते हुए पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद महिला ने आरोपित के खिलाफ़ मामला दर्ज कराया था।                 

‘दीदी पाठ करेंगी… जय श्री राम का विरोध नहीं करेंगी’: ममता बनर्जी को भेजी रामायण, 1 लाख रामनामी पोस्टकार्ड भी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंच पर सम्बोधन देने आईं तो भीड़ में से कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगा दिए, जिसे उन्होंने अपनी बेइज्जती करार देते हुए भाषण देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी ‘ममता बनर्जी को जय श्री राम’ ट्रेंड होने लगा। अब तेजिंदर बग्गा और रामेश्वर शर्मा जैसे नेता इस विवाद में कूद गए हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर और राजधानी भोपाल स्थित हुजूर क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को रामायण की एक प्रति भेजी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में इतने वर्षों के संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने वाला है और यही कारण है कि ममता बनर्जी नाराज़ हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्होंने जो रामायण की पुस्तक भेजी है, ममता बनर्जी उसका नियमित रूप से पाठ करेंगी।

उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो से ये भी अपील की कि वो भगवान श्रीराम के चरित्र को समझें और ‘जय श्री राम’ के नारों का विरोध न करें। उन्होंने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से ममता बनर्जी को रामायण की प्रति भेजे जाने की जानकारी दी। रामेश्वर ने उन पर भगवान श्रीराम के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल की जनता तृणमूल को सबक सिखाने वाली है। उन्होंने सीएम ममता को ‘जय श्री राम’ उद्घोष से नफरत न करने की अपील की।

वहीं दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने भी ऐलान किया है कि वो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आधिकारिक आवास के पते पर 1 लाख ऐसे पोस्टकार्ड भेजने वाले हैं, जिन पर ‘जय श्री राम’ लिखा होगा। उन्होंने लोगों से भी इस पते पर ऐसे पोस्टकार्ड भेजने की अपील की। वहीं भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने सीएम ममता पर नेताजी के अपमान का आरोप लगाया। कैलाश विजयवर्गीय और अनिल विज जैसे फायरब्रांड नेताओं ने भी निशाना साधा।

बता दें, पश्चिम बंगाल में नेताजी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विक्टोरिया मेमोरियल में पराक्रम दिवस का समारोह चल रहा था। इस मौके पर राज्य की सीएम ममता बनर्जी भी पहुँची थी। वहीं जब ममता बनर्जी मंच पर लोगों को संबोधित करने पहुँची, वैसे ही कार्यक्रम स्थल जय श्री राम और भारत माता की जय के नारों से गूँजने लगा। इस दौरान मंच पर पीएम मोदी भी उपस्थित थे