Sunday, July 5, 2020
Home विविध विषय भारत की बात ऑपरेशन ब्लू स्टार: जब सेना को स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाने पड़े टैंक, जिसके कारण...

ऑपरेशन ब्लू स्टार: जब सेना को स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाने पड़े टैंक, जिसके कारण मारी गईं इंदिरा गाँधी

"मुझे बताया गया था कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि अगले दो-चार दिन में खालिस्तान की घोषणा हो जाएगी। जिसके बाद पंजाब पुलिस खालिस्तान में मिल जाएगी। फिर दिल्ली और हरियाणा में जो सिख हैं वो फौरन पंजाब की ओर बढ़ेंगे और हिंदू पंजाब से बाहर निकलेंगे। 1947 की तरह दंगे हो सकता है। पाकिस्तान भी सीमा पार कर सकता है, यानी पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलग होने की घटना भारत में दोहराई जा सकती है।"

ये भी पढ़ें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 36वीं बरसी है, 3 से 6 जून 1984 तक भारतीय सेना द्वारा चलाए गए इस सैन्य ऑपरेशन का मकसद अमृतसर (पंजाब) में हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराना था और इसमें अहम भूमिका निभाई थी अजीत डोभाल ने, जो कि आज देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।

भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया था और इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने भारत से पंजाब को अलग करवाने की योजना बनाई। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने इस काम के लिए पंजाब में सिख आतंकवाद और कट्टरपंथ को हवा दी और भिंडरांवाले को अपना हथियार बनाया जिसके नेतृत्व में अलगाववादी ताकतों को पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिल रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीछे जो बातें सबसे अहम रहीं, उनमें खालिस्तानी अलगाववादियों के पंजाब की स्वायत्तता की माँग का उग्र रूप में सामने आना प्रमुख वजह रहा।

नतीजा यह हुआ कि पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की माँग तेजी से जोर पकड़ने लगीं थीं। गलियों में आवाजें सुनाई पड़ रही थीं- ‘पंजाब को भारत से अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार रहें।’ इसकी एक तरह से आधिकारिक घोषणा तब हुई जब मार्च, 1981 को एक नए स्वायत्त खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब पर फहराया गया।

पंजाब में बिगड़ते हालातों के बीच 1982 में इंदिरा गाँधी ने एक बड़ा राजनैतिक फैसला लिया और गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को राष्ट्रपति बना दिया। वही जेल सिंह जिन्होंने गृह मंत्री रहते 1981 में भिंडरांवाले की रिहाई की घोषणा करते हुए कहा था कि भिंडरांवाले के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय उन पर मूक दर्शक बनने का आरोप भी लगे थे।

जनरैल सिंह भिंडरांवाले चरमपंथी के रूप में उभरने लगा था

आखिर एक दिन जनरैल सिंह भिंडरवाले ने हथियारों से लैस आतंकवादियों के साथ स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया। सभी हालातों को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने समझौते के प्रयास किए, लेकिन जब कोई समझौता नहीं हो पाया तो उन्होंने फैसला किया कि अब कार्रवाई की जाए और स्वर्ण मंदिर को भिंडरांवाले के हाथ से निकाला जाए।

ऑपरेशन ब्लू स्टार

01 जून को खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने तत्कालीन सरकार के साथ किसी भी समझौते में विफल होने के बाद आखिर में 3 जून को भारतीय सुरक्षा बलों को स्वर्ण मंदिर घेरना पड़ा। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि जून 03, 1984 को हजारों भक्त गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाने के लिए अमृतसर में इकट्ठे होने वाले थे।

हरिमंदिर साहब परिसर में भिंडरांवाले और उसके साथियों की मोर्चाबंदी और परिसर के बाहर सुरक्षाबलों की मोर्चाबंदी ने अमृतसर के उस इलाके को छावनी की शक्ल दे दी।

4 जून को सेना ने मंदिर में छुपे आतंकियों की स्थिति जानने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी थी, जिसके बाद 5 जून को आतंकियों और सेना में जमकर टकराव हुआ, भारी गोलीबारी और संघर्ष में 83 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गँवाई और 249 घायल हुए थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने किया था। जनरल बरार ने इस बारे में कहा था –

“मुझे बताया गया था कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि अगले दो-चार दिन में खालिस्तान की घोषणा हो जाएगी। जिसके बाद पंजाब पुलिस खालिस्तान में मिल जाएगी। फिर दिल्ली और हरियाणा में जो सिख हैं वो फौरन पंजाब की ओर बढ़ेंगे और हिंदू पंजाब से बाहर निकलेंगे। 1947 की तरह दंगे हो सकता है। पाकिस्तान भी सीमा पार कर सकता है, यानी पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलग होने की घटना भारत में दोहराई जा सकती है।”

जनरल बरार ने आपने अपनी किताब में भी इस बात का जिक्र किया कि इस ऑपरेशन के बारे में उन्हें पता नहीं था। तब वो मेरठ में थे और 90 इनफैंट्री डिविजन को कमांड कर रहे थे। उन्होंने लिखा है कि मई 30 की शाम उन्हें फोन आया कि जून 01 को चंडीमंदिर एक मीटिंग के लिए पहुँचना है, जबकि उसी शाम उनका प्रोग्राम मनीला जाने का था, टिकटें बुक हो चुकी थीं लेकिन इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।

इस ऑपरेशन के दौरान बरार को महसूस हुआ था कि स्वर्ण मंदिर में छुपे अलगाववादियों के पास राकेट लॉन्चर जैसे हथियार थे और तमाम प्रयासों के विफल होने और भीतर मौजूद खालिस्तानी आतंकियों की तैयारी को देखकर साफ था कि वो आत्मसमर्पण के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं। तब तक भारतीय सुर्ख बल भी अपने कई जवानों को खो चुकी थी। ऐसे में मेजर जनरल केएस बरार के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे टैंक बुलाने की माँग की।

बरार ने भी यह बात मानी की अब इसके अलावा कोई अन्य उपाय फिलहाल उनके पास नहीं था। वो चाहते थे कि सुबह होते ही यदि इस ऑपरेशन की खबर फ़ैल गई तो पंजाब उबल पड़ेगा, इसलिए वो इन्तजार भी नहीं करना चाहते थे।

आख़िरकार बरार ने सरकार से टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत माँगी। परमिशन मिलते ही मौके पर टैंक बुलाए गए और सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर टैंक ने पहला गोला दागा।

आखिरकार जून 06, 1984 को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत की खबर आई, जिसने अप्रैल 1983 से ही स्वर्ण मंदिर को अपना हेडक्वार्टर बना लिया था, और सेना इस मंदिर को अलगावादियों के चंगुल से मुक्त करने में सफल रही। हालाँकि सिखों के इस पवित्र मंदिर में सेना के ऑपरेशन ने दुनियाभर के सिखों को नाराज कर दिया था।

इसी सैन्य ऑपरेशन का परिणाम यह हुआ कि अक्टूबर 31, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। इंदिरा गाँधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के उठे। इन दंगों में हज़ारों लोगों की जान गई।

ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 493 आतंकी मारे गए थे और 86 घायल हुए थे, जबकि गिरफ्तार किए गए आतंकियों की संख्या 1592 थी। जून 06, 1984 का वह दिन था, जब अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में की गई भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का नाम दिया गया।

ऑपरेशन ब्लैक थंडर

ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ समय बाद ऑपरेशन ब्लैक थंडर (Operation Black Thunder) को अंजाम दिया गया, जिसका मकसद स्वर्ण मंदिर से बाकी आतंकवादियों को बाहर निकालना था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के करीब 4 साल बाद एक बार फिर खालिस्तान समर्थक आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त के पास पहुँच गए।

यही वो समय था, जिसमें भारत के वर्तमान NSA अजित डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वर्ण मंदिर में छुपे हुए आतंकवादियों के बारे में पता लगाने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान अजीत डोभाल रिक्शे वाले की भेष में स्वर्ण मंदिर के अंदर गए। इस ‘रिक्शावाले’ को खालिस्तानियों को ये विश्वास दिलाने में दस दिन लग गए कि उसे आईएसआई ने उनकी मदद के लिए भेजा है।

यही रिक्शावाला ऑपरेशन ब्लैक थंडर से ठीक दो दिन पहले स्वर्ण मंदिर के अहाते में घुसा और जब 2 दिन बाद स्वर्ण मंदिर से बाहर निकला तो उनके पास आतंकियों के हथियारों से लेकर, उनकी योजना, लड़ाकों की छिपे होने की सटीक जानकारी अजीत डोभाल के पास थीं। अजित डोभाल के इस कारनामे से ही ऑपरेशन सफल रहा और पंजाब सिख आतंकवादियों के प्रभाव से मुक्त हो पाया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के चार साल बाद स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को बाहर निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ चलाया गया था। यह ऑपरेशन ब्लू स्टार से कहीं ज्यादा कुशलतापूर्वक बिना किसी रक्तपात और मंदिर को नुकसान पहुँचाए ही सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अंततः सिख लोगों के बीच बढ़ रहे उग्रवादी खालिस्तानी आंदोलन की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को समाप्त कर पंजाब से आतंकवाद के संकट को समाप्त किया। इन सभी कारकों के कारण ब्लैक थंडर को 1984 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ब्लू स्टार की तुलना में अधिक सक्षम और क्लीनर ऑपरेशन के रूप में देखा गया, जिसने सिख समुदाय पर विशेष प्रभाव छोड़ा।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

ख़ास ख़बरें

हॉस्पिटल से ₹4.21 लाख का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ ₹1.2 लाख: मनोज इलाज की जगह ‘कैद’

मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित हैं। दोनों का इलाज भी इसी हॉस्पिटल में। उनके बिल को लेकर...

CARA को बनाया ईसाई मिशनरियों का अड्डा, विदेश भेजे बच्चे: दीपक कुमार को स्मृति ईरानी ने दिखाया बाहर का रास्ता

CARA सीईओ रहते दीपक कुमार ने बच्चों के एडॉप्शन प्रक्रिया में धाँधली की। ईसाई मिशनरियों से साँठगाँठ कर अपने लोगों की नियुक्तियाँ की।

नक्सलियों की तरह DSP का काटा सर-पाँव, सभी 8 लाशों को चौराहे पर जलाने का था प्लान: विकास दुबे की दरिंदगी

विकास दुबे और उसके साथी बदमाशों ने माओवादियों की तरह पुलिस पर हमला किया था। लगभग 60 लोग थे। जिस तरह से उन लोगों ने...

बकरीद के पहले बकरे से प्यार वाले पोस्टर पर बवाल: मौलवियों की आपत्ति, लखनऊ में हटाना पड़ा पोस्टर

"मैं जीव हूँ मांस नहीं, मेरे प्रति नज़रिया बदलें, वीगन बनें" - इस्लामी कट्टरपंथियों को अब पोस्टर से भी दिक्कत। जबकि इसमें कहीं भी बकरीद या...

उनकी ही संतानें थी कौरव और पांडव: जानिए कौन हैं कृष्ण द्वैपायन, जिनका जन्मदिन बन गया ‘गुरु पूर्णिमा’

वो कौरवों और पांडवों के पितामह थे। महाभारत में उनकी ही संतानों ने युद्ध किया। वो भीष्म के भाई थे। कृष्ण द्वैपायन ने ही वेदों का विभाजन किया। जानिए कौन थे वो?

‘…कभी नहीं मानेंगे कि हिन्दू खराब हैं’ – जब मानेकशॉ के कदमों में 5 Pak फौजियों के अब्बू ने रख दी थी अपनी पगड़ी

"साहब, आपने हम सबको बचा लिया। हम ये कभी नहीं मान सकते कि हिन्दू ख़राब होते हैं।" - सैम मानेकशॉ की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा एक किस्सा।

प्रचलित ख़बरें

जातिवाद के लिए मनुस्मृति को दोष देना, हिरोशिमा बमबारी के लिए आइंस्टाइन को जिम्मेदार बताने जैसा

महर्षि मनु हर रचनाकार की तरह अपनी मनुस्मृति के माध्यम से जीवित हैं, किंतु दुर्भाग्य से रामायण-महाभारत-पुराण आदि की तरह मनुस्मृति भी बेशुमार प्रक्षेपों का शिकार हुई है।

गणित शिक्षक रियाज नायकू की मौत से हुआ भयावह नुकसान, अनुराग कश्यप भूले गणित

यूनेस्को ने अनुराग कश्यप की गणित को विश्व की बेस्ट गणित घोषित कर दिया है और कहा है कि फासिज़्म और पैट्रीआर्की के समूल विनाश से पहले ही इसे विश्व धरोहर में सूचीबद्द किया जाएगा।

काफिरों को देश से निकालेंगे, हिन्दुओं की लड़कियों को उठा कर ले जाएँगे: दिल्ली दंगों की चार्ज शीट में चश्मदीद

भीड़ में शामिल सभी सभी दंगाई हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे और कह रहे थे कि इन काफिरों को देश से निकाल देंगे, मारेंगे और हिंदुओं की लड़कियों को.......

‘…कभी नहीं मानेंगे कि हिन्दू खराब हैं’ – जब मानेकशॉ के कदमों में 5 Pak फौजियों के अब्बू ने रख दी थी अपनी पगड़ी

"साहब, आपने हम सबको बचा लिया। हम ये कभी नहीं मान सकते कि हिन्दू ख़राब होते हैं।" - सैम मानेकशॉ की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा एक किस्सा।

इजरायल ने बर्बाद किया ईरानी परमाणु ठिकाना: घातक F-35 विमानों ने मिसाइल अड्डे पर ग‍िराए बम

इजरायल ने जोरदार साइबर हमला करके ईरान के परमाणु ठिकानों में दो विस्‍फोट करा दिए। इनमें से एक यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और दूसरा मिसाइल निर्माण केंद्र।

नेपाल के कोने-कोने में होऊ यांगी की घुसपैठ, सेक्स टेप की चर्चा के बीच आज जा सकती है PM ओली की कुर्सी

हनीट्रैप में नेपाल के पीएम ओली के फँसे होने की अफवाहों के बीच उनकी कुर्सी बचाने के लिए चीन और पाकिस्तान सक्रिय हैं। हालॉंकि कुर्सी बचने के आसार कम बताए जा रहे हैं।

हॉस्पिटल से ₹4.21 लाख का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ ₹1.2 लाख: मनोज इलाज की जगह ‘कैद’

मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित हैं। दोनों का इलाज भी इसी हॉस्पिटल में। उनके बिल को लेकर...

उत्तराखंड: रात में 15 साल की बच्ची को घर से उठाया, जुनैद और सुहैब ने किया दुष्कर्म

रेप की यह घटना उत्तराखंड के लक्सर की है। आरोपित एक दारोगा के सगे भाई बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

उस रात विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस के साथ क्या-क्या हुआ: घायल SO ने सब कुछ बताया

बताया जा रहा है कि विकास दुबे भेष बदलने में माहिर है और अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखता। राजस्थान के एक नेता के साथ उसके बेहद अच्छे संबंध की भी बात कही जा रही है।

अपने रुख पर कायम प्रचंड, जनता भी आक्रोशित: भारत विरोधी एजेंडे से फँसे नेपाल के चीनपरस्त PM ओली

नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है।

काली नागिन के काटने से जैसे मौत होती है उसी तरह निर्मला सीतारमण के कारण लोग मर रहे: TMC सांसद कल्याण बनर्जी

टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर विवादित बयान दिया है। उनकी तुलना 'काली नागिन' से की है।

‘अल्लाह ने अपने बच्चों को तनहा नहीं छोड़ा’: श्रीकृष्ण मंदिर में मालिक ने की तोड़फोड़, ‘हीरो’ बता रहे पाकिस्तानी

पाकिस्तान के स्थानीय मुसलमानों ने इस्लामाबाद में बन रहे श्रीकृष्ण मंदिर में तोड़फोड़ मचाने वाले मलिक को एक 'नायक' के रूप में पेश किया है।

रोती-बिलखती रही अम्मी, आतंकी बेटे ने नहीं किया सरेंडर, सुरक्षा बलों पर करता रहा फायरिंग, मारा गया

कुलगाम में ढेर किए गए आतंकी से उसकी अम्मी सरेंडर करने की गुहार लगाती रही, लेकिन वह तैयार नहीं हुआ।

CARA को बनाया ईसाई मिशनरियों का अड्डा, विदेश भेजे बच्चे: दीपक कुमार को स्मृति ईरानी ने दिखाया बाहर का रास्ता

CARA सीईओ रहते दीपक कुमार ने बच्चों के एडॉप्शन प्रक्रिया में धाँधली की। ईसाई मिशनरियों से साँठगाँठ कर अपने लोगों की नियुक्तियाँ की।

पाकिस्तानी घोटाले से जुड़े हैं हुर्रियत से गिलानी के इस्तीफे के तार, अलगाववादी संगठन में अंदरुनी कलह हुई उजागर

सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफ को पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन को लेकर गड़बड़ियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सुरक्षाबलों ने ओडिशा के कंधमाल में 4 नक्सलियों को किया ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में चार नक्सलियों के मारे जाने की खबर है।

हमसे जुड़ें

234,622FansLike
63,120FollowersFollow
269,000SubscribersSubscribe