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‘बेच दो, बेच दो, सब बेच दो’: बजट के साथ ही लिबरलों का पेट दर्द शुरू

बजट 2021-22 का ऐलान होते ही लिबरलों की उछल कूद शुरू हो गई। संसद में वित्त मंत्री के पहुँचने से लेकर उनके बजट भाषण तक यह गिरोह ट्विटर पर सक्रिय रहा। अपने-अपने मतलब का बिंदु खोज कर प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट गया।

वकील प्रशांत भूषण ने लिखा, “वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि हमारे पैसों का 35000 करोड़ रुपया प्राइवेट वैक्सीन कंपनियों में उन अप्रमाणित वैक्सीनों पर उस समय लगाया जाएगा जब भारत में कोरोना के कारण लोग मर रहे हैं। मगर यह वो पैसा उन गरीब प्रवासियों को नहीं दे सकते जिन्होंने अपनी नौकरियाँ खो दी हैं या फिर उन्हें जो अपनी फसलों के लिए MSP माँग रहे हैं। वाह वित्त मंत्री साहिबा”

वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह खुद कुछ नहीं लिख पाईं, मगर जो कोई भी बजट 2021 में कमियाँ छाँट रहा है, उसको रीट्वीट कर वह लिबरल गिरोह के बीच नंबर बढ़ा रही हैं।

अजीत खुराना लिखते हैं, “75 साल से अधिक उम्र के लोगों के बारे में वित्त मंत्री ने जो कहा है, उसके बहुत से लोगों ने गलत अर्थ लगा लिए हैं। इन्हें आयकर से छूट नहीं दी है। कर रिटर्न दाखिल करने से छूट है।” रोहिणी सिंह ने इसे भी रीट्वीट किया है।

अंशुमन तिवारी लिखते हैं, “इस तरह से सरकारी संपत्ति‍यों की बिक्री पहली बार भारत में शुरू होगी। संसाधनों पर बजट का दबाव दिख रहा है। DIPAM ने पहले से सूची बना रखी है और बिकने वाली सरकारी संपत्ति‍यों के लिए मंत्रालयों से सहमति ली जा चुकी है। यदि इस साल बिक्री हुई तो घाटा कम रखने में मदद मिलेगी।”

अजीत अंजुम इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहते हैं, “बेच दो, बेच दो, सब बेच दो।”

शशि थरूर ने बजट पर तंज कसते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार मुझे उस गैरेज मैकेनिक की याद दिलाती हैं जो अपने क्लाइंट से कहता है- मैं आपकी ब्रेक ठीक नहीं कर सकता था इसलिए मैंने हॉर्न को तेज कर दिया है।’”

‘मराठा नहीं, कन्नड़ थे छत्रपति शिवाजी महाराज, उद्धव ठाकरे को इतिहास का ज्ञान ही नहीं’

कर्नाटक और महाराष्ट्र के नेताओं के बीच चल रहा आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब दूसरे स्तर पर पहुँच गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद को पिछले दिनों गहरा कर दिया था। अब कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री गोविंद करजोल ने कहा है कि छत्रपति शिवाजी महाराज कन्नड़ थे। उन्होंने शिवसेना प्रमुख को इतिहास की शिक्षा लेने की भी सलाह दी।

करजोल ने कहा कि उद्धव ठाकरे को इतिहास का ज्ञान ही नहीं है। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी के पूर्वज बेल्लियप्पा एक कन्नड़ थे। वो कर्नाटक के गदग जिले के सोरतूर के रहने वाले थे। एक ऐसा समय आया था जब गदग को भारी सूखे और अकाल का सामना करना पड़ा। तब बेल्लियप्पा को वहाँ से पलायन कर महाराष्ट्र का रुख करना पड़ा। उनके ही वंश की चौथी पीढ़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ।”

कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री ने बेलगावी में मीडिया के सामने ये बयान दिया। उन्होंने कहा कि बेलगावी, करवाल और निप्पाणी सहित 800 गाँवों पर कर्नाटक के दावे की 1968 में गठित महाराज कमिटी ने पुष्टि की थी। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र की ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार की तीनों पार्टियों (शिवसेना, कॉन्ग्रेस और NCP) में जो आंतरिक कलह चल रही है, उससे ध्यान भटकाने के लिए सीएम उद्धव ने कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद पर बयान दिया।

उत्तर-पश्चिम कर्नाटक स्थित बीजापुर (विजयपुरा) के रहने वाले करजोल ने उद्धव ठाकरे को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिन छत्रपति शिवाजी के नाम पर उनकी पार्टी का नामकरण किया गया है और जो इस पार्टी के प्रमुख आइकॉन हैं, वही कन्नड़ हैं। शिवजी भोंसले (1630-1680) को कोंकण के रायगढ़ में 1674 में मराठा साम्राज्य का छत्रपति घोषित किया गया था। उन्होंने औरंगज़ेब की गुलामी से एक बड़े क्षेत्र को स्वतंत्रता दिलाई थी।

हाल ही में उद्धव ने कहा था कि जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला नहीं दे देता, तब तक कर्नाटक की राज्य की सीमा पर मराठी भाषी लोगों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए।

किसानों को ₹75060 करोड़ का भुगतान, MSP से डेढ़ गुना ज्यादा: बजट 2021 में कृषि कर्ज 16.5 लाख करोड़ रुपए

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच साल 2021-22 के बजट में सरकार ने कृषि कर्ज़ लक्ष्य को इस साल 16.5 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। यह लक्ष्य पिछले साल तक 15 लाख करोड़ रुपए था। MSP से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा भुगतान दर्ज की गई।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस साल गेहूँ किसानों को 75,000 करोड़ रुपए मिले और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के लिए 40,000 करोड़ रुपए तय किए गए। इसके अलावा MSP पर फसल खरीद का कार्य तेजी से जारी है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को पर्याप्त भुगतान किए जाने के मामले में बढ़ोत्तरी हुई है। 2020-21 में किसानों को कुल 75,060 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

सरकार ने कहा कि वह किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। MSP में मूलभूत परिवर्तन किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्पादन लागत का डेढ़ गुना कीमत सुनिश्चित करना है। सरकार ने बताया कि फसल खरीद का कार्य तेजी से चल रह है। 2013-14 में किसानों को कुल 33, 874 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ था और 2020-21 में किसानों को कुल 75,060 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ।

इसी प्रकार गेहूँ उत्पादन करने वाले लाभान्वित किसानों की संख्या 2019-20 में 35.57 लाख से बढ़कर 2020-21 में 43.36 लाख हो गई है।

कपास के किसानों को मिलने वाली राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 2013-14 के 90 करोड़ रुपए से बढ़कर (27 जनवरी 2021 को) 25,974 करोड़ रुपए हो गई।

सरकार ने किसानों को ऋण देने की राशि को 15 लाख करोड़ से बढ़ाकर 16 लाख 5 हजार करोड़ रुपए तक कर दिया है। इसके तहत पुशपालन, मात्यसिकी और डेयरी क्षेत्र में जोर होगा। माइक्रो इरिगेशन फंड को 5000 करोड़ तक बढ़ाया जा रहा है। वहीं ऑपरेशन ग्रीन के दायरे का विस्तार हो रहा है। इसके तहत जल्‍दी खराब होने वाले 22 और उत्‍पादों को शामिल किया जाएगा। आने वाले साल में सरकार का लक्ष्य E-NAM से एक हजार और मंडियों को जोड़ना है।

मालूम हो कि मोदी सरकार हर बजट में कृषि लोन के लक्ष्य को बढ़ाती है। मगर, फिर भी सरकार हर बार अपने लक्ष्य से अधिक लोन किसानों को देती है। वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार का टारगेट 10 लाख करोड़ का था, लेकिन किसानों को कुल 11.68 लाख करोड़ रुपए कर्ज दिया गया।

पिछले वर्ष के बजट में वित्त मंत्री ने कहा था कि कृषि, ग्रामीण विकास, सिंचाई और सम्बद्ध कार्यों पर 2.83 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे क्योंकि किसान और ग्रामीण गरीबों पर सरकार मुख्य रूप से ध्यान देना जारी रखेगी। वित्त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा था कि सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 6.11 करोड़ किसानों का बीमा करके सरकार उनके जीवन में उजाला कर चुकी है।

15000 स्कूलों पर फोकस, 100 नए सैनिक स्कूल, लेह में केंद्रीय विश्वविद्यालय: बजट 2021 में शिक्षा पर विशेष ध्यान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को संसद में आम बजट पेश किया। उन्होंने नए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में केंद्रीय विश्वविद्यालय की घोषणा की। शिक्षा क्षेत्र में 15,000 नए स्कूलों को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही 100 नए सैनिक स्कूलों की भी स्थापना की जाएगी। आदिवासी क्षेत्रों में नए विद्यालय खुलेंगे। उच्च-शिक्षा के लिए एक संस्था का गठन होगा, जिसके लिए नए नियम बनेंगे।

बजट में नई शिक्षा नीति पर भी बात की गई और कहा गया कि इससे अब तक अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श की एक बड़ी प्रक्रिया भी अपनाई गई है, जिस कारण इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली। जो 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाने हैं, उसके लिए NGOs, राज्य सरकारों और प्राइवेट स्कूलों के साथ परस्पर सहयोग करते हुए संभव होगा। साथ ही ‘एजुकेशन फॉर ऑल’ की बात भी की गई।

आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के लिए एकलव्य स्कूलों को 38 करोड़ रुपए मुहैया कराए गए हैं। साथ ही युवाओं के प्रशिक्षण के लिए भी बजट बढ़ाने का भी प्रस्ताव किया गया। इससे युवाओं को रोजगार के ज्यादा मौके मिलेंगे। जिन नए 15,000 स्कूलों को और मजबूत व साधन संपन्न किया जाना है, उन्हें नई शिक्षा नीति के हिसाब से विकसित किया जाएगा।

वरिष्ठ नागरिकों को नहीं भरना होगा ITR, प्रवासी मजदूरों को घर खरीदने में छूट: बजट 2021 में करदाताओं को ये सौगात

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को आम बजट पेश किया, जिसमें इनकम टैक्स को लेकर भी अहम ऐलान किए गए। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बीते साल के बजट में नए टैक्स विकल्प का ऐलान किया था। जो लोग पुराने टैक्स स्ट्रक्चर में नहीं रहना चाहते हैं, उनके लिए नया टैक्स विकल्प लाए गए थे। नए टैक्स सिस्टम को 7 स्लैब्स में बाँटा गया था। अब सरकार ने करदाताओं के लिए आगे के ऐलान किए हैं।

वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स रिटर्न्स पर छूट दी गई है। जो 75 वर्ष से ऊपर की उम्र के हैं, उनके लिए ‘Compliance Burden’ कम दिया गया। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक केवल इंटरेस्ट से ही कमाई कर रहा है, या फिर पेंशन ही उसकी एकमात्र कमाई है – तो, ऐसी स्थिति में उन्हें किसी भी प्रकार के टैक्स रिटर्न्स फाइल करने की ज़रूरत नहीं है। इसे बुजुर्गों के लिए टैक्स में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

इन सबके अलावा टैक्स रिटर्न्स के असेसमेंट को अब 6 वर्षों की बजाय 3 वर्षों में ही रीओपन किया जा सकता है। छोटे करदाताओं के लिए ‘फेसलेस डिस्प्यूट रिजोल्यूशन कमिटी’ के गठन का ऐलान किया गया। साथ ही डिजिटल लेन-देन के लिए टैक्स ऑडिट थ्रेसहोल्ड बढ़ाया गया। FPIs के लिए डिविडेंट टैक्स बर्डेन को भी घटाया गया है। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 1 साल तक पेमेंट का ब्याज घटाया गया।

जो माइग्रेंट मजदूर हैं, उन्हें नोटफाइड अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए टैक्स में छूट मिलेगी। साथ ही एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियों को भी टैक्स से छूट देने का ऐलान किया गया है। हालाँकि, होम लोन की शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार करदाताओं पर कम से काम बोझ पड़े, इसके लिए प्रतिबद्ध है। औसत करदाता के हाथ में अधिक रुपए आने से अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

रेलवे को ₹1.10 करोड़, 2022 तक 8500 km सड़क प्रोजेक्ट: बजट 2021 में विकास की बातें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 वित्तीय वर्ष का आम बजट पेश करते हुए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति देने का काम किया। उन्होंने कहा कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत 13000 किमी से अधिक की सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 3800 किमी का निर्माण अब तक हो चुका है। मार्च 2022 तक 8500 किमी और सड़कों के निर्माण हो जाएँगे।

इसी प्रकार उन्होंने तमिलनाडु में 3500 किमी कॉरिडोर का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने बताया कि केरल में 65000 करोड़ के निवेश से 1100 किमी हाइवे, पश्चिम बंगाल में 95,000 करोड़ की लागत से 675 किमी हाइवे और असम में अगले तीन साल में 1300 किमी हाइवे निर्माण किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी देते हुए कहा राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार की जाएगी। मेट्रो रेल का 702 किमी पहले से ही परिचालन शुरू हो गया है। 1,016 किमी में पर काम चल रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए विस्टाडोम कोच की शुरूआत होगी।

सरकार की ओर से रेलवे को कुल 1.10 लाख करोड़ रुपए का बजट दिया गया। भारतीय रेलवे के अलावा मेट्रो, सिटी बस सेवा को बढ़ाने पर फोकस करेगा। इसमें 18 हजार करोड़ रुपए की लागत लगाई जाएगी। कोच्चि, बंगलूरू, चेन्नई, नागपुर, नासिक में मेट्रो प्रोजेक्ट को बढ़ावा मिलेगा। इसी प्रकार सरकार की ओर से 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक लागत की स्कीम लॉन्च की जा रही है, जो देश में बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का काम करेगी।

बता दें कि पिछले साल देश में इंफ्रास्ट्रकचर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा निवेश किया था। केंद्रीय सरकार ने साल 2020 में भारत के बुनियादी ढाँचे को बढ़ाने और नौकरियों का सृजन करने के लिए, सरकार ने 103 ट्रिलियन इन्फ्रा परियोजनाएँ शुरू की थीं।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि इस वित्त वर्ष में अब तक हर दिन औसतन 28.56 सड़क का निर्माण किया गया है, जो पिछले साल मार्च के आखिर तक 28 किलोमीटर था। इस साल आठ से 18 जनवरी तक देश में 547 किमी सड़कों का निर्माण किया गया है।

मंत्रालय ने कहा है कि इस वित्त वर्ष के आखिर तक औसतन हर दिन कम से कम 40 किलोमीटर सड़क का निर्माण होगा। इतना ही नहीं नितिन गडकरी ने बताया है कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में अब तक लगभग एक हजार किलोमीटर ज्यादा राजमार्ग बनाए गए हैं।

इसी प्रकार रेलवे के ढाँचागत विकास की बात करें तो पिछले साल यानी 2020 के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था, जो 2019 वित्त वर्ष की तुलना में 8.3 फीसदी ज्यादा था। इस साल मंत्रालय ने 75 हजार करोड़ रुपए के बजटीय आवंटन की माँग की। सरकारी अधिकारियों की उम्मीद थी कि इस साल परियोजनाओं को देखते हुए बजट में रेलवे और सड़क परिवहन को अब तक का सर्वाधिक आवंटन मिल सकता है।

इससे पूर्व पीएम मोदी भी संकेत दे चुके थे कि अब आर्थिक मोर्चे पर स्थिति तेजी से बदलेगी। उन्होंने कहा था कि महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई और विकास को पुनर्जीवित करने पर अब उनका ध्यान केंद्रित है और इसे सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्यूफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में सुधारों की एक सीरीज शुरू की गई है, जिससे इकोनॉमी को विकास का रास्ता मिलेगा।

स्वच्छ भारत और पोषण अभियान 2.0 लॉन्च, बंगाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए ₹25000 करोड़: बजट 2021 की अहम घोषणाएँ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में कई बड़े ऐलान किए हैं। जिन 42 शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा है, वहाँ प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 2217 करोड़ रुपए दिए गए हैं। साथ ही देश के ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर’ को भी बढ़ाया गया है। ये पिछले वर्ष 4.39 लाख करोड़ रुपए था, जबकि अब ये 5.54 लाख करोड़ रुपए होगा। साथ ही ‘मिशन पोषण 2.0’ का भी ऐलान किया गया।

इसके तहत न्यूट्रिशन कंटेंट की डिलीवरी और आउटकम पर विशेष जोर दिया जाएगा। 1,10,055 लाख करोड़ रुपए भारतीय रेलवे को दिए गए। भारतीय रेलवे ने 2030 तक के लिए एक प्लान तैयार किया है। ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देते हुए लॉजिस्टिक खर्च को कम किया जाएगा। पिछले वर्ष जो सुरक्षा के लिए प्रबंध किए गए थे, उसका फल अब दिख रहा है। वित्त मंत्री ने आटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम का ऐलान किया।

5 ट्रिलियन डॉलर की अगर अर्थव्यवस्था बनानी है तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी दोहरे अंकों में विकास करना होगा। वित्त मंत्री ने इस पर जोर दिया कि हमारी विनिर्माण कम्पनियाँ वैश्विक सप्लाई चेन का एक अभिन्न हिस्सा बनें। 5.35 लाख करोड़ रुपए के भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत 13,000 किलोमीटर सड़कों के लिए 3.3 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इनमें से 3800 Km बन चुके हैं। बाकी के लिए 8500 करोड़ रुपए जारी किए गए।

पश्चिम बंगाल में नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि 25,000 करोड़ रुपए की लागत से पश्चिम बंगाल में 675 Km राजमार्ग का निर्माण किया जाएगा। वहीं, 65,000 करोड़ रुपए के निवेश से केरल में 1,100 Km राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य चालू होगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि 1.03 लाख करोड़ रुपए के निवेश से तमिलनाडु में 3,500 Km के राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जाएगा।

अगले 5 वर्षों में 1,41,678 करोड़ रुपये के व्यय के साथ स्वच्छ भारत के दूसरे चरण का क्रियान्वयन किया जाएगा। ‘शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ के अंतर्गत 2021 तक 5 वर्षों की अवधि में 1,41,678 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय आवंटन के साथ इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि कोरोना काल में 5 मिनी बजट पेश किए गए। आठ करोड़ लोगों क मुफ्त गैस, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया गया।

चीन में अब उइगर भाषा में शिक्षा भी नहीं, चायनीज ही ‘स्टैण्डर्ड’: आपस में भी बात करने पर प्रतिबंध

चीन में अब उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहा अत्याचार दूसरे स्तर पर पहुँच गया है। अब शी जिनपिंग की सरकार को उइगर भाषा से भी समस्या है। शिनजियांग के सभी शैक्षणिक संस्थानों से उइगर भाषा को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब कहीं भी, कोई भी स्कूल या कॉलेज, उइगर भाषा में शिक्षा नहीं दे सकता है। ‘रेडियो फ्री एशिया (RFA)’ ने इसका खुलासा किया है। खुद चीन के अधिकारियों ने ही इस बात की पुष्टि की है।

बताया गया है कि उत्तर-पश्चिम चीन के शिनजियांग उइगर ऑटोनोमस रीजन (XUAR) में स्थित केप्लिन काउंटी के पास अब उइगर भाषा में कोई भी कोर्स उपलब्ध नहीं है। ये सब तब हो रहा है, जब वहाँ केवल उइगर मुस्लिमों की आबादी ही रहती है और चीन में ऐसा कानून भी है, जिसके तहत किसी भी नागरिक को दो भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने की छूट है। RAF उइगर सेवा को इस सम्बन्ध में ऑडियो रिकॉर्डिंग्स मिले हैं।

इस ऑडियो में वहाँ के एक व्यक्ति ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर ये जानकारी दी, क्योंकि उसे डर है कि नाम सामने आने के बाद चीन का प्रशासन उसे छोड़ेगा भी नहीं। उसने अपने शहर के शिक्षा ब्यूरो को एक फोन कॉल किया था और पूछा था कि वो अपने पड़ोसियों के बच्चों का दाखिला कहाँ कराए? उसने बताया था कि उक्त पड़ोसी किसी प्रताड़ना कैम्प में बंद है। दोनों बच्चों की उम्र 5 और 7 वर्ष है।

इसके बाद केप्लिन एजुकेशन ब्यूरो के अधिकारी ने उसे दोनों बच्चों को अपने दफ्तर में लाने को कहा। जब उस व्यक्ति ने पूछा कि बच्चों को किस भाषा में शिक्षा दी जाएगी, तो अधिकारी ने बताया कि शिनजियांग में चीन की राष्ट्रीय भाषा ‘मेंडेरियन चाइनीज’ में ही शिक्षा दी जाती है। जब उस व्यक्ति ने पूछा कि क्या इन बच्चों को उइगर भाषा में शिक्षा दी जा सकती है, तो अधिकारी ने कहा कि यहाँ एक ही ‘स्टैण्डर्ड भाषा’ है और वो है चाइनीज।

केप्लिन के काउंटी इंटरमीडिएट स्कूल में भी यही व्यवस्था है। उसने बताया कि अब उइगर भाषा में शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ तक कि स्कूलों में बच्चों, शिक्षकों या माता-पिता का उइगर भाषा में बोलने की भी अनुमति नहीं है। स्कूल के शिक्षकों-कर्मचारियों को आपस में भी इस भाषा में बात नहीं करनी है। अब जब अमेरिका ने भी चीन में चल रहे इस दमनकारी अभियान को ‘नरसंहार’ कह दिया है, इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार आवाज़ें उठ रही हैं।

बता दें कि अमेरिका ने चीन की इस तरह से भर्त्सना अब तक नहीं की थी, जैसा हाल ही में उइगर मामले में किया गया है। यूएस ने कहा था कि एक राष्ट्रीय, एथ्निकल, रेसियल और धार्मिक समूह को बर्बाद किया जा रहा है। स्टेट डिपार्टमेंट के कई अधिकारी और अधिवक्ता इस पर कई दिनों से बहस कर रहे थे, लेकिन रिपोर्ट ट्रम्प प्रशासन के अंतिम दिन पेश की गई थी। इस मामले में भी अमेरिका के कई अधिकारी आमने-सामने थे। कुछ चीन पर कड़े प्रतिबंध की वकालत नहीं भी करते।

स्वास्थ्य के लिए ₹64000 करोड़, पिछली बार के मुकाबले 137% की वृद्धि: हेल्थ सेक्टर को ‘निर्मला वैक्सीन’

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को आम बजट पेश किया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बड़ी घोषणाएँ हुईं। पूरा का पूरा 2020 कोरोना वायरस के बीच निकला और लॉकडाउन में PM केयर्स के फंड्स से वेंटिलेटर्स खरीदे गए। टीके के लिए भी फंड्स जारी किए गए। ऐसे में, उम्मीद थी कि इस वर्ष के बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। और ऐसा ही हुआ है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि भारत के पास कोरोना महामारी के दो टीके हैं, दो और टीके जल्दी ही आने वाले हैं। उन्होंने बताया उन्होंने कहा कि सरकार ने सबसे संवेदनशील वर्गों को सहारा देने के लिए, PMGKY, तीन आत्मनिर्भर पैकेज और बाद में की गईं घोषणाएँ अपने आप में 5 मिनी बजट के समान थीं। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर पैकेजों ने ढाँचागत सुधारों की हमारी गति को बढ़ाया।

उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीन के लिए 35,000 करोड़ रुपए के बजट का आवंटन किया गया है। WHO के स्थानीय मिशन को भारत में लॉन्च किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछली बार के बजट के मुकाबले इस बार 137% अधिक का फंड रखा गया है। केंद्र सरकार ने ‘आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ का ऐलान किया है, जिसके लिए 64180 करोड़ रुपए के भारी बजट का प्रबंध किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट 2021-22 छः स्तंभों पर आधारित है। इनमें हेल्थ एंड वेलबिइंग (Health & wellbeing), वित्तीय पूँजी (Financial capital), समावेशी विकास (Inclusive growth), मानव पूंजी (Human capital), इनोवेशन एंड आरएंडडी (Innovation & R&D) और मिनिमम इंटरवेंशन्स (Minimum interventions) शामिल हैं। इन सब पर जोर दिया जाएगा।

‘ये ट्रेलर था… तुम्हारी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर सकते हैं’ – बम हमले के बाद इजरायली राजदूत को लेटर-धमकी

इजरायल दूतावास के नजदीक हुए विस्फोट के बाद शक की सुइयाँ ईरान पर टिकी हुई हैं। छानबीन की जा रही है कि आखिर पिछले 1 माह में कौन-कौन ईरानी नागरिक भारत आया। इस बीच पत्रकार आदित्य राज कौल ने अपने ट्विटर पर उस आतंकी की चिट्ठी को शेयर किया है, जिसने भारत में इजरायल दूतावास के बाहर हमला बोला।

यह पत्र भारत में इजरायल दूतावास में राजदूत डॉ रॉन मलका के नाम है। इसमें कहा गया है, “हम तुम्हारी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर सकते हैं।” आतंकी ने लिखा कि दूतावास के बाहर हुआ हमला सिर्फ एक ट्रेलर दिखाया गया है कि हम तुम पर कैसे निगरानी बनाए हुए हैं।

आतंकी का पत्र में कहना है कि इजरायल उनके निशाने पर है। कोई उन्हें नहीं रोक सकता। इजयराली चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन वे (आतंकी) उनकी जिंदगी कभी भी, कहीं भी खत्म कर देंगे। इसमें यह भी लिखा है कि वह इजरायल के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना चाहते हैं। मासूमों का खून नहीं बहाना चाहते।

धमकियाने अंदाज में लिखा कहा गया, “याद रखना, इजरायली आतंकी विचारधारा के हर प्रतिभागी और सहायक को अस्तित्व में नहीं रहने दिया जाएगा। हमारे जाबाँजों (हीरो) द्वारा बड़े और बढ़िया बदले के लिए तैयार हो जाओ।”

इस पत्र के अंत में ईरानी सेना के अधिकारी कासिम सुलेमानी, ईरानी नेता अबु महदी अल-मुहनदीस और ईरानी वैज्ञानिक डॉ मोहसिन फकरेजादेह को शहीद बताकर इनके नामों का उल्लेख किया गया है। आखिर में इजरायली लोगों को कहा गया है कि वे बस अब अपने दिन गिनने शुरू करें।

गौरतलब हो कि दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास बम ब्लास्ट की सुरक्षा एजेसियाँ हर एंगल से जाँच कर रही हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से पिछले एक महीने में दिल्ली आए सभी ईरानी नागरिकों के बारे में जानकारी माँगी है। साथ ही उन ईरानी नागरिकों की लिस्ट भी माँगी है, जो पिछले काफी दिनों से भारत मे रह रहे हैं।

मालूम हो कि इजरायल दूतावास के पास कम तीव्रता के विस्फोट के बाद से ही देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं। ब्लास्ट की घटना के बाद दिल्ली पुलिस शहर में रह रहे ईरानियों की तलाश रही और कुछ से पूछताछ भी की जा रही है। जिन ईरानी नागरिकों के वीजा एक्सपायर हो गए हैं और फिर भी रुके हैं, उनको लेकर FRRO से डेटा लिया गया है।

अब तक कि जाँच से पता चला है कि जब धमाका हुआ था, तो उस इलाके में लगभग 45000 मोबाइल नंबर एक्टिव थे। स्पेशल सेल की टीम घटना से जुड़े सबूतों को बरामद करने के लिए लगातार मौके पर पड़ताल कर रही हैं।

मीडिया सूत्रों का कहना है कि घटनास्थल से मिले पत्र में लिखी धमकी की लिखावट काफी साफ-सुथरी है, जिसे किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं लिखा गया है। यह इस बात का संकेत देती है कि धमाका पहले से की गई योजना के तहत किया गया है।