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FREE में UPSC/NDA/JEE/NEET की कोचिंग: UP सरकार का बड़ा फैसला, IAS-IPS लेंगे क्लास

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने निर्णय लिया है कि अब वो युवा प्रतिभा के ‘अभ्युदय’ का बीड़ा उठाएगी। ये उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर सीएम योगी की युवाओं को सौगात है। सीएम योगी की इस पहल के तहत अब आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारी भी छात्रों की क्लास लेंगे। मंडल स्तर पर अभ्युदय कोचिंग सेंटर खोले जाएँगे और टेबलैट के साथ मासिक 2000 रुपए का स्टाइपेंड भी मिलेगा। UPSC, NEET और JEE के छात्रों को फ्री कोचिंग मिलेगी।

अर्थात, अब यूपी सरकार सिविल सेवा, नीट, जेईई – इन सबकी तैयारी निःशुल्क कराएगी। ‘साहब’ अब ‘गुरुजी’ बन कर शिक्षा देंगे। योगी सरकार अब यूपी के बच्चों को ‘अफसर’ बनने की तैयारी कराएगी। अब छात्रों को न तो निजी कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस भरने की जरूरत है, न ही अपना घर छोड़ कर दूसरे शहर जाने की मजबूरी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक ऐसी योजना शुरू करने जा रही है, जिसमें आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारी सीधे उन्हें कोचिंग देंगे, वह भी पूरी तरह निःशुल्क।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना

इस नई योजना का नाम है ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’। इसकी पूरी कार्ययोजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीधी निगरानी में तैयार की जा रही है। उत्तर प्रदेश दिवस के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस योजना की घोषणा करते हुए बताया कि बसंत पंचमी से इसकी कक्षाएँ शुरू करने की तैयारी है।

इस कोचिंग में ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल और लेक्चर आदि तो उपलब्ध होंगे ही, ऑफलाइन क्लास में आईएएस और पीसीएस परीक्षा के लिए प्रशिक्षु आईएएस, आईपीएस, आईएफएस (वन सेवा), पीसीएस अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा

जबकि एनडीए और सीडीएस की परीक्षा के लिए प्राचार्य, उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल द्वारा गाइडेंस मिलेगी। नीट और जेईई के लिए अलग कक्षाएँ चलेंगी। अधिकारियों के अलावा, विभिन्न विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी अतिथि व्याख्याता के तौर पर आमंत्रित किए जाएँगे।

विषय चयन से लेकर तैयारी से जुड़ी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल उत्तर प्रदेश के करीब 4-5 लाख छात्र यूपीएससी, यूपीपीएससी, विभिन्न पीएससी, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

इनमें बड़ी संख्या अभावग्रस्त अथवा वित्तीय संसाधनों की कमी वाले परिवार के बच्चों की होती है। ऐसे बच्चों के लिए योगी सरकार की यह कोशिश बड़ा सम्बल प्रदान करेगी। इस कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विषय का चयन, परीक्षा की तैयारी के तरीके, टिप्स, प्रश्नों के उत्तर लिखने की विधि, सामान्य अध्ययन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, विषय विशेषज्ञ की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न विषयों की कक्षाएँ भी चलेंगी।

इन कक्षाओं में प्रतिभाग करने के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों द्वारा राज्य स्तरीय लर्निंग प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया जाएगा। पंजीकृत छात्रों को कक्षाओं की समय-सारणी एवं वर्चुअल क्लासेज की लिंक उपलब्ध कराई जाएगी। प्रति सप्ताह एक साक्षात कक्षा एवं एक वर्चुअल कक्षा अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। हर वर्ष अगस्त महीने में प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर पंजीकृत छात्रों के लिए एक एप्टीट्यूड एवं सामान्य अध्ययन से सम्बंधित टेस्ट लिए जाएँगे।

टेस्ट से चयन, टेबलेट और स्टाइपेंड भी

इस टेस्ट के आधार पर 300 अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा, जिसमें से 100 अभ्यर्थी आईएएस/पीसीएस के लिए होंगे, जबकि सीडीएस, एनडीए, जेईई एवं नीट के लिए 50-50 अभ्यर्थी होंगे। इन सभी अभ्यर्थियों को डिजिटल कंटेंट एक्सेस करने के लिए एक टेबलेट, शिक्षण सामग्री एवं स्टाइपेंड के रूप में 5 माह तक 2000 रुपए प्रति माह की दर से राशि उपलब्ध कराया जाएगी।

पंजीकृत अभ्यर्थियों में जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल होंगे, उन्हें माँग के आधार पर लखनऊ एवं हापुड़ में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित केंद्रों में आवासीय सुविधा के साथ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

अभ्यर्थियों को सहजता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्टडी मैटेरियल मिल सके, इसके लिए राज्य स्तर पर मंडलायुक्त लखनऊ के निर्देशन में ई-लर्निंग कन्टेन्ट प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर विभिन्न अधिकारियों द्वारा परीक्षा की तैयारी संबंधी अपने अनुभव साझा करते हुए वीडियो अपलोड किए जाएँगे। इसके अलावा, परीक्षा की तैयारी से संबंधित टिप्स सामग्री, पुस्तकों आदि से संबंधी मार्गदर्शन देते हुए वीडियो अपलोड होगा।

लाइव सेशन एवं सेमिनार भी होंगे। ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म पर छात्र अपनी जिज्ञासाएँ एवं प्रश्न भी सब्मिट कर सकेंगे। यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित विषय वस्तु सामग्री एवं क्यूरेटिव कन्टेन्ट उपलब्ध होगा, जिसके लिए ख्याति प्राप्त संस्थाओं की सामग्री इकट्ठा की जा रही है। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित होगी। यह टास्क फोर्स राज्य और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के सहयोग से कक्षाओं का रोस्टर तैयार करेगी।

सीएम योगी की इस योजना में हर मंडल मुख्यालय पर निःशुल्क ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रशिक्षण तथा विभिन्न परीक्षाओं के पाठ्यक्रम व परीक्षा पैटर्न आदि के संबंध में अभ्यर्थियों को पूरी जानकारी दी जाएगी। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) द्वारा क्वेश्चन बैंक, प्रश्नोत्तरी आदि भी तैयार कर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा।

कोर्स कंटेंट यूट्यूब से भी लिया जाएगा। साथ ही, विभिन्न उच्च स्तरीय कोचिंग संस्थाओं के स्टडी मैटेरियल भी मुहैया कराए जाएँगे। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन व समन्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी को दी गई है।

2 गायों की जान बचाने के लिए लोको पायलट ने बीच में रोकी ट्रेन, मीडिया वाले ने बनाया Video, हो गया Viral

तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रेल पायलट ने इंसानियत की नई मिसाल की है। आमतौर पर जहाँ रेल की रफ्तार के बीच में आने वाले जानवरों के चीथड़े रेलवे पटरियों पर दिखने काफी आम होते हैं और लोग भी इस बात को मानते हैं कि चलती ट्रेन के बीच में आने के बाद कोई नहीं बचता। वहीं कोयंबटूर में हिसार एक्सप्रेस के ड्राइवर ने यह बात साबित कर दी है कि यदि मन में दया का भाव हो तो यह काम भी संभव है।

शायद ट्रेन में बैठे यात्रियों को इस बात की भनक भी न लगी हो कि बीच रास्ते पर उनकी ट्रेन के रुकने का क्या मतलब है। लेकिन इस दौरान उस ट्रेन के ड्राइवर ने समय सीमा की परवाह किए बिना दो जीवों की जान बचाई और फिर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया।

पूरी घटना पलक्कड़ स्टेशन पर शनिवार (जनवरी 25, 2021) की दोपहर 12:40 की है। पीआर राजेश नामक कैमराैमन के कैमरे से कैद हुई एक वीडियो में देख सकते हैं कि स्टेशन छोड़ने के बाद ट्रेन आगे जा रही है। तभी थोड़ी दूर पर दो गाय घूमते हुए पटरी पर बीच में खड़ी हो जाती है। रेल पायलट ट्रेन रोकता है। गाड़ी से उतरता है। पहले उन्हें वहाँ से भगाता है, फिर दोबारा रेल को लेकर आगे बढ़ता है।

वीडियो में तेज हॉर्न की आवाज सुनाई दे रही है। ड्राइवर को साफ देखा जा सकता है कि वो कैसे गायों को ट्रैक से भगाने की कोशिश करता है। मगर दोनों गाय ट्रैक से जाने की बजाय ट्रैक पर भागने लगती हैं। फिर ड्राइवर खुद उनके पीछे भागता है और जब गाय एकदम वहाँ से निकल जाती है तब वह दोबारा ट्रेन में चढ़ता दिखता है।

द न्यूज मिनट के अनुसार, कैमरापर्सन राजेश (मनोरमा न्यूज पल्क्कड़ ब्यूरो) इस घटना के दौरान रेलवे ट्रैक के पास थे और ट्रेन के निकलने का इंतजार कर रहे थे, तभी वह इस घटना के गवाह बने। उन्होंने बताया, “एक कार्यक्रम था, जिसे मैं कवर करने के लिए आया था। मैं क्रॉसिंग को पार करने का इंतजार कर रहा था। लेकिन रेलवे क्रॉस करने के दौरान यह सब हुआ।”

पल्लकड़ रेलवे विभाग ने बताया, “यदि ट्रेन रफ्तार में होती तो ऐसा संभव नहीं था। हम इस वीडियो को देख कर खुश हैं। अधिकारियों ने दया भाव दिखाया। ये घटना सौभाग्य से तब हुई, जब ट्रेन धीरे थी। अगर रफ्तार तेज होती और इस तरह जानवर सामने आ जाते तो स्वभाविक रूप से यह संभव नहीं था।”

छठी बीवी ने सेक्स से किया इनकार तो 7वीं की खोज में निकला 63 साल का अयूब: कई बीमारियों से है पीड़ित, FIR दर्ज

गुजरात में एक व्यक्ति की छठी बीवी ने उसके साथ सेक्स करने से इनकार कर दिया। यह तब हुआ जब उसे पता चला कि उसके शौहर की पहले से ही 5 बीवियाँ हैं। इसके बाद उक्त व्यक्ति अब सातवीं बीवी की खोज में निकल गया है।

ये घटना गुजरात के सूरत की है। यहाँ के रहने वाले 63 वर्षीय अमीर किसान अयूब देगिया को ये चिंता खाए जा रही है कि उसे सातवीं बीवी मिलेगी भी या नहीं। उसे पहले से ही हृदय रोग और डायबिटीज है।

हाल ही में अयूब ने छठी बार शादी की थी। लेकिन छठी बीवी ने उसके साथ बिस्तर साझा करने से ही इनकार कर दिया। सितम्बर 2020 में जब दुनिया में कहीं लॉकडाउन था तो कहीं कोरोना वायरस से प्रकोप से उबरने की चेष्टा… ठीक उसी समय अयूब निकाह कर रहा था। कपलेथा गाँव का रहने वाला अयूब दिसंबर आते-आते छठी शादी के 4 महीने में ही फेल होने के बाद सातवीं बीवी की तलाश में निकल पड़ा।

जिस महिला से उसने निकाह किया था, वो उससे 21 वर्ष छोटी थी। महिला ने कहा कि वो उसके साथ कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकती। TOI की खबर के अनुसार, अयूब ने कहा – “उसने मुझे अपने साथ सोने ही नहीं दिया। वो हमेशा इन्फेक्शन की बातें करती रहती थी। मुझे हार्ट सम्बंधित बीमारी है। डायबिटीज है। कई अन्य बीमारियाँ भी हैं। मुझे त्वरित रूप से एक बीवी की ज़रूरत है, जो इन स्थितियों में मेरा ख्याल रख सके।”

जानने वाली बात ये है कि अयूब देगिया की पहली बीवी भी अभी ज़िंदा है और वो उसी गाँव में अपने 5 बेटे-बेटियों के साथ रहती है। उन सभी की उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच है। अयूब ने हाल में जिससे निकाह किया, वो रंदर की रहने वाली है। जब निकाह के बाद उसने खोजबीन की तो उसे ये जान कर धक्का लगा कि अयूब की तो पहले से ही 5 बीवियाँ हैं और उसका नंबर छठा है। उसने पिछले सप्ताह महिला पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।

आरोपित अयूब को इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा-498A (शादी के बाद महिला के साथ क्रूरता) के तहत बुक किया गया है। महिला का कहना है कि उसे अँधेरे में रखा गया। महिला ने दावा किया कि अब वो फिर से किसी अन्य महिला के साथ रह रहा है। गाँव वालों के हवाले से छठी पत्नी ने बताया कि वो कुछ महीनों तक किसी महिला से रिश्ते रखता है और फिर उसे छोड़ देता है। ये क्रम चलता ही रहता है।

अधिवक्ता चंद्रेश जोबनपुत्रा ने कहा कि दिसंबर में अयूब ने पीड़िता को उसकी बहन के घर पर छोड़ दिया और कहा कि वो शहर से आ रहा है। लौटने पर उसने उसे वापस लेने आने का आश्वासन भी दिया। जब वो लौटा ही नहीं तो पीड़िता पुलिस के पास गई। शुरुआत में उसने पीड़िता से निकाह के लिए उसके परिवार से ये कहते हुए संपर्क किया था कि वो एक विधवा से निकाह कर के उसे सशक्त करना चाहता है,।

उसने दावा किया था कि इस्लाम में ये जायज है। उसने पीड़िता को 2 लाख रुपए के कीमत वाले गहनों के साथ-साथ एक घर देने का भी वादा किया था। बाद में वो अपने इस वादे से मुकर गया। अयूब देगिया पुलिस को इस बात का जवाब देने में अक्षम रहा है कि उसने अपनी सभी बीवियों को क्यों छोड़ दिया।

पुलिस अधिकारी स्मिता पारगी के अनुसार, अयूब ने कहा कि उसकी छठी बीवी उसकी शारीरिक ज़रूरतें पूरा करने में अक्षम रही है, सेक्स नहीं करती है, इसीलिए उसने उसे छोड़ दिया। सभी के बयान दर्ज कर के पुलिस ने जाँच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जिन्ना की बहन का पार्क बेच देगी इमरान सरकार, कंगाली से बचने के लिए Pak को चाहिए 500 अरब रुपए

कर्ज के तले दबे पाकिस्तान की हालत अब दिन पर दिन खस्ता होती जा रही है। बावजूद ऐसी स्थिति के वह कर्ज उतारने की जगह अधिक लोन लेने के विकल्पों पर गौर फरमा रहा है। मीडिया की खबरों के अनुसार, अब पाकिस्तान की इमरान सरकार राजधानी इस्लामाबाद के सबसे बड़े पार्क को गिरवी रख कर 500 बिलियन रुपए का लोन लेने के जुगाड़ में है। 

यह पार्क इस्‍लामाबाद के F-9 सेक्‍टर में है, जिसे गिरवी रखने का प्रस्ताव मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इस पार्क का नाम मुल्क की ‘मदर-ए-मिल्लत’ फातिमा जिन्ना के नाम पर है।  फातिमा पाकिस्तान के ‘सबसे बड़े नेता’ मोहम्मद अली जिन्ना की बहन थीं। वर्तमान में यह पार्क 759 एकड़ में फैला हुआ है और देश के सबसे हरे-भरे इलाकों में स्थित है।

पाक मीडिया समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली बैठक को मंगलवार को इमरान खान के कार्यालय की ओर से आयोजित किया जाएगा। रिपोर्ट बताती है कि वित्‍तीय कंगाली की वजह से इमरान खान सरकार संघीय सरकार की संपत्ति एफ-9 पार्क को गिरवी रखेगी। इससे उसे 500 अरब रुपए लोन मिल जाएगा। कहा जा रहा है कि इस काम को करने के लिए इस्‍लामाबाद की कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने पहले ही अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल कर लिया है। 

ज्ञात हो कि इससे पहले भी पाकिस्‍तान की कई सरकारें विभ‍िन्‍न संस्‍थानों और इमारतों को गिरवी रख चुकी हैं लेकिन इस बार इमरान सरकार दो कदम आगे चल कर मोहम्‍मद अली जिन्‍ना की बहन के नाम पर रखे पार्क को गिरवी रखने जा रही है।

बता दें कि इमरान सरकार का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान से अपने 3 बिलियन डॉलर जल्द से जल्द वापसी करने की माँग कर चुका है और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से मिलने के बाद भी वह अपने फैसले से नहीं हिला। अरब ने तो पाकिस्तान पर कार्रवाई करते हुए वहाँ के श्रमिकों को काम का वीजा जारी करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और सबसे हैरानी की बात यह है कि पाक के विदेश मंत्री द्वारा बातचीत के बावजूद उन्होंने इस प्रतिबंध को नहीं हटाया है।

RSS को ‘निकरवाला’ बोला राहुल गाँधी ने, ‘लिकरवाला’ सुन जनता हुई ‘मस्त’: इस लेटेस्ट Video में है बहुत मजा

राहुल गाँधी एक पैकेज हैं, एंटरटेंमेंट पैकेज… खास कर जब वो बोलते हैं, तो बहुत मजा देते हैं। उनकी रैलियों के मजे देने वाले वीडियो आप खोजेंगे एक मिलेंगे ग्यारह! अब एक और वीडियो जुड़ गया है, एकदम लेटेस्ट।

24 जनवरी 2021 यानी रविवार का दिन था। वायनाड सांसद राहुल गाँधी तमिलनाडु के धारापुरम में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। तभी का है यह मजेदार वीडियो

ऊपर लगे ट्वीट के वीडियो को देखें। लगभग 56 सेकंड के आस-पास इसमें राहुल गांधी आरएसएस का जिक्र करते हैं। वो कहते हैं, “नागपुर के निकरवाले राज्य का भविष्य कभी नहीं तय कर सकते।”

मामला यहाँ तक ठीक है। लेकिन राहुल को सुनने वाली जनता के लिए एक अनुवादक रखा गया था। उसने संदर्भ समझा ही नहीं और निकरवाला के बजाय उसने लिकरवाला सुन कर इसका तमिल अनुवाद कुछ ऐसा करके जनता को सुनाया – “नागपुर के शराब बेचने वाले राज्य का भविष्य कभी नहीं तय कर सकते।”

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस गलत अनुवाद की ओर इशारा भी किया। लोगों ने यह भी बताया कि कैसे तमिल न समझने के कारण राहुल गाँधी आगे भी लोगों को मजे देते रहे।

राहुल गाँधी के अनुवादक मो. इमरान बेहोश

राहुल गाँधी ने तमिलनाडु दौरे पर कल (24 जनवरी, 2021) ही एक और खतरनाक भाषण दिया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर भारत के किसान, श्रमिक और मजदूर मजबूत होते, तो भारत को सीमाओं पर सेना, नौसेना और वायु सेना को तैनात करने की आवश्यकता नहीं होती, खासकर इंडो-चाइना बॉर्डर पर।

लेकिन यह भाषण इतना खतरनाक था कि अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

‘लता मंगेशकर ने 1947 में नेहरू के लिए गाया था ऐ मेरे वतन के लोगों’: विशाल डडलानी ने बताया इतिहास – Fact Check

संगीतकार और गायक विशाल डडलानी ने दावा किया है कि देश की महान गायिका लता मंगेशकर ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना गाया था। उन्होंने ऐसा कह के अपने इतिहास और सामान्य ज्ञान, दोनों की समझ प्रदर्शित कर दी है। जबकि विशाल डडलानी अपने जोड़ीदार शेखर रवजियानी के साथ मिल कर 5 दर्जन से भी अधिक फिल्मों में संगीत तैयार कर चुके हैं।

दरअसल, ये मामला सोनी टीवी पर आ रहे गायिकी के रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ के 12वें सीजन का है। शो में एक प्रतिभागी ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना गाया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विशाल डडलानी ने कहा, “ये गाना खुद लता जी ने 73-74 वर्ष पहले 1947 में पंडित नेहरू के लिए गाया था, जब देश आज़ाद हुआ था। अगर दुनिया में कोई सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ गाना है तो ये है। लता जी की तरह तो ये गाना कोई नहीं गा सकता, लेकिन आपको इस कोशिश के लिए बधाई।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जम कर किरकिरी हुई। आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए कई चुनावों में प्रचार कर चुके विशाल डडलानी इससे पहले भी कई बार विवादों में रह चुके हैं। ‘इंडियन आइडल’ के मौजूदा सेशन में जहाँ आदित्य नारायण होस्ट की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं विशाल डडलानी के अलावा संगीतकार हिमेश रेशमिया और गायिका नेहा कक्कर भी बतौर जज इसमें हिस्सा ले रही हैं।

अब आपको बताते हैं कि विशाल डडलानी के दावों में कितना दम है। दरअसल, ये गाना न तो 1947 में गाया गया था और न ही पंडित नेहरू के लिए। दरअसल, कवि प्रदीप ने ये गाना उन बलिदानी सैनिकों की याद में लिखा था, जिन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सीमा पर अपनी जान न्यौछावर कर दी थी। इस गाने को 1963 में लिखा गया था और युद्ध के मात्र 2 महीनों बाद गणतंत्र दिवस के दौरान इसे गाया गया था।

इस तरह से लता मंगेशकर ने ये गाना जनवरी 26, 1963 को पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और पीएम नेहरू की मौजूदगी में एक बड़े जनसमूह के सामने गाया था। उनके इस लाइव परफॉरमेंस को इतना उम्दा माना जाता है कि कोई रिकॉर्डिंग भी इसकी शायद ही बराबरी कर पाए। इस तरह ये गाना किसी खास राजनेता के लिए नहीं, बल्कि देश की सेना के लिए था। इस गाने से जो भी रुपए मिले, उसे पूरी टीम ने बलिदानी सैनिकों के परिवारों को समर्पित कर दिया था।

विशाल डडलानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। जब CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तब विशाल डडलानी ने प्याज के बढ़ते दाम और हैदराबाद में प्रीति रेड्डी के गैंगरेप व हत्या के आरोपितों के एनकाउंटर को एक ही चश्मे से देखते हुए कहा था कि यह सब ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। इसके कुछ ही दिनों पहले तक डडलानी बलात्कारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने का आरोप लगा कर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे थे।

ThePrint को रूसी विदेश मंत्रालय से पड़ी लताड़, भारत-रूस का नाम ले फैला रहा था फेक न्यूज

शेखर गुप्ता का ‘द प्रिंट’ अब ग्लोबल हो गया है। अब सिर्फ स्थानीय मामले ही नहीं, बल्कि वैश्विक और कूटनीतिक मामलों में भी उसने झूठ और प्रपंच फैलाना शुरू कर दिया है। इस कारण रूस के विदेश मंत्रालय ने उसे जम कर लताड़ लगाई है। ‘द प्रिंट’ ने दावा किया था कि QUAD राष्ट्रों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) से रूस खफा है, इसीलिए पिछले 20 वर्षों में पहली बार भारत-रूस की वार्षिक समिट नहीं होगी।

रूस के विदेश मंत्रालय ने इस खबर को गलत बताते हुए इसे ‘फेक न्यूज़’ और सनसनी पैदा करने के लिए लिखी गई खबर करार दिया। रूस के विदेश मंत्रालय ने लिखा कि दिसंबर 23, 2020 को ‘द प्रिंट’ में आए एक लेख में गलत बातें फैलाई गई, क्योंकि इस मीडिया संस्थान के पीछे जो लोग हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि इससे 2 दिन पहले भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदेशव ने भारत-रूस के द्विपक्षीय और वैश्विक रिश्तों की संपूर्ण समीक्षा की थी।

क्रेमलिन ने कहा कि भले ही कोरोना वायरस संक्रमण के कारण भारत-रूस के बीच होने वाली बैठकों और एनुअल समिट के शेड्यूल में देरी हो गई है, लेकिन ये दोनों देशों के बीच के रिश्तों को बेहतर करने में कोई बाधा नहीं बन सका। यही बात राजदूत ने भी कही थी। रूस ने तभी स्पष्ट कहा था कि जिस तरह से कुछ देशों द्वारा एकता भंग किए जाने की कोशिशों के बावजूद भारत क्षेत्रीय एकता के समावेशी रूप को बढ़ावा दे रहा है, वो तारीफ के लायक है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी साफ़ किया है कि एनुअल समिट में देरी की वजह कोविड-19 वैश्विक महामारी है, कुछ और नहीं। इसके लिए दोनों देशों में सहमति बनी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया। रूस ने कहा कि अब जब भारत के साथ उसके रिश्तों को लेकर हर जगह सकारात्मक बातें हो रही हैं, ‘द प्रिंट’ शून्य से सेंसेशन फैलाने की कोशिश कर रहा है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने ‘द प्रिंट’ को फटकारा

रूस ने ‘द प्रिंट’ को गलत हेडलाइंस की जगह तथ्यों के आधार पर ख़बरें तैयार करने की नसीहत दी। साथ ही कहा कि वो अटेंशन पाने के लिए इस तरह की हरकतें न करे। इससे पहले भारत में रूस के राजदूत निकोलाय कुदशेव (Nikolay Kudashev) ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और शेखर गुप्ता की प्रोपेगेंडा मशीनरी ‘दी प्रिंट’ को भारत और रूस के संबंधों के बारे में अफवाह फैलाने पर फटकार लगाते हुए इसे वास्तविकता से एकदम हट कर बताया था।

कुदशेव ने लिखा था, “रूस और भारत के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी कोविड-19 के बावजूद अच्छी प्रगति कर रही है। हम महामारी के कारण स्थगित किए गए शिखर सम्मेलन के लिए नई तारीखें तय करने के लिए अपने भारतीय दोस्तों के साथ संपर्क में बने हुए हैं। हमें विश्वास है कि यह जल्दी आयोजित किया जाएगा, जबकि रूसी भारतीय संबंध अपने आगे के विकास को जारी रखेंगे।”

कॉन्ग्रेसी सांसद ने कहा- खालिस्तानी कर रहे किसान आंदोलन को हाइजैक, पार्टी के सुर कुछ और ही

पंजाब के लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा है कि हाल ही में पारित कृषि कानून के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन को खालिस्तानी तत्व हाइजैक करने का प्रयास कर रहे है। बता दें रविवार (24 जनवरी, 2021) को सिंघु बॉर्डर पर कुछ लोगों द्वारा कॉन्ग्रेस नेता के साथ की गई हाथापाई और कड़े विरोध के बाद, उनकी यह टिप्पणी सामने आई है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, हम खालिस्तानी झंडे और नारे लगाने वालों से भयभीत नहीं होंगे। वे (हमला करने वाले) तथाकथित नक्सली, खालिस्तानी या 2020 के लोग (रेफरेंडम 2020) हैं।” उन्होंने आगे दावा किया कि
उपद्रवी लोगों को किसान आंदोलन स्थल पर खालिस्तानी झंडा लहराने और फहराने के लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपए ऑफर किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि जब यही बात सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कही थी, तो कॉन्ग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि सरकार किसानों का अपमान कर रही है। इस बीच, कॉन्ग्रेस पार्टी मामले में दोतरफा खेलने का प्रयास कर रही है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है, “किसान अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। ये लोग हमारे अपने हैं। हम अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

बता दें इन्हीं कॉन्ग्रेस नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पहले हिंसक धमकी देकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था, ”वे (सरकार) सोचते हैं कि हम कुछ समय बाद थक जाएँगे और अपने धरने को छोड़ देंगे। लेकिन नहीं! हम लाशों को ढेर लगा देंगे। हम अपना खून भी देंगे। हम इसके लिए कहीं भी, किसी भी हद तक जा सकते हैं।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता ने कृषि कानूनों के बारे में फर्जी खबरें भी फैलाई थीं और यह दावा किया था कि रिलायंस, गूगल और व्हाट्सएप बड़ी मात्रा में गेहूँ खरीदेंगे और किसानों का शोषण करने के लिए इसे जमा कर के रखेंगे।

रामतीर्थम पहुँची भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की नई प्रतिमा, धड़ से अलग कर दिया गया था 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर

आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में शनिवार (जनवरी 23, 2021) को भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की नई मूर्ति रामतीर्थम मंदिर पहुँची। पुजारियों और अधिकारियों ने मंत्रों के उच्चारण के बीच मूर्ति स्वीकार किया। इस मंदिर में पिछले दिनों उपद्रवियों ने 400 साल पुरानी मूर्ति को खंडित कर दिया था।

उसके तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने काफी कम समय में मूर्तियों को तैयार कर धर्मस्व विभाग के हवाले कर दिया। मूर्तियों को सुरक्षा के बीच एक विशेष कंटेनर से विजयनगरम लाया गया और आंध्र प्रदेश धर्मस्व विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त आयुक्त डी ब्रमरम्बा को सौंप दिया गया। मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि तीनों मूर्तियों को एक विशेष जुलूस में मंदिर में ले जाया गया और अगले तीन दिनों यानी 25 से 28 जनवरी तक, 18 पुजारियों के साथ विशेष पूजा की जाएगी।

एसपी, विजयनगरम जिला कलेक्टर और अन्य उच्च अधिकारियों को मूर्ति स्थापना कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है। एसपी ने कहा, “हम मंदिर में सुरक्षा बढ़ाकर जॉब शुरू करेंगे।”

भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की 3.5 फीट ऊँची मूर्तियों को बनाने के लिए तमिलनाडु के महाबलिपुरम और कांचीपुरम के बीच पटिमला कुप्पम में स्थित एक खदान से लाए गए काले ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है। तीनों मूर्तियों को 12 दिनों के भीतर तराशा गया है। मंदिर अधिकारियों ने 10 दिनों के भीतर मूर्तियों की डिलीवरी के लिए कहा था, लेकिन  SVITSA के मूर्तिकारों ने 15 दिनों का समय माँगा था। हालाँकि उन्होंने 12 दिनों के भीतर मूर्तियों को तराश कर तैयार कर दिया।

इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, SVITSA के प्रमुख वेंकट रेड्डी ने कहा, “ब्लैक ग्रेनाइट, जिसे कृष्णा शिला भी कहा जाता है, का उपयोग TTD द्वारा मूर्तियों को गढ़ने के लिए किया जाता है। उसी पत्थर का इस्तेमाल रामतीर्थम मंदिर के लिए राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियों को बनाने के लिए किया गया है।”

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों आंध्र प्रदेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले की कई घटनाएँ सामने आई हैं। कहीं मूर्तियों को तोड़ा गया, तो कहीं रथों को आग में जलाकर राख कर दिया गया। 27 सितंबर को चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में नंदी की मूर्ति को 26 और 27 सितंबर की रात कुछ बदमाशों ने तोड़ा था। मूर्ति के टुकड़े पास रखी कुर्सी पर बिखरे हुए पाए गए थे।

मुस्लिम बहुल मालवणी में मुंबई पुलिस ने फाड़ दिए थे भगवान राम के पोस्टर, कार्रवाई को लेकर बीजेपी का प्रदर्शन

मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाके मालवणी में भगवान राम के पोस्टर फाड़ने को लेकर बीजेपी ने प्रदर्शन किया। राम मंदिर समर्पण निधि अभियान से जुड़े पोस्टर फाड़ने का आरोप मुंबई पुलिस पर है। शनिवार (24 जनवरी, 2021) को मलाड के मालवणी पुलिस स्टेशन के पास विरोध-प्रदर्शन करने वाले नेता दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मॉंग कर रहे थे।

बता दें कि 15 जनवरी को एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें पोस्टर फाड़ते मुम्बई पुलिस को देखा गया था। मामले के तूल पकड़ने पर सफाई देते हुए पुलिस ने कहा था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ‘मालवणी एक संवेदनशील क्षेत्र है’।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग मालवणी पुलिस स्टेशन के पास इकट्ठा होकर विरोध दर्ज करने पहुँचे और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा कर मामले में सख्त कार्रवाई की माँग की थी। लेकिन पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ दंगे भड़काने का मामला दर्ज कर दिया।

मुंबई पुलिस के रवैए को देखते हुए भाजपा की स्थानीय इकाई ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पोस्टर हटाने का काम बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का है। पुलिस ने जान-बूझकर कर गैरकानूनी तरीके से राम मंदिर के दान के लिए लगे पोस्टर को फाड़ने का काम किया।

उत्तरी मुंबई के भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी और विपक्ष के नेता प्रवीण दारेकर ने शनिवार को मालवणी पुलिस स्टेशन के पास विरोध-प्रदर्शन करते हुए पोस्टर हटाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इसके अलावा भाजपा नेताओं ने मालवणी के मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दुओं को डरा धमका कर घर छोड़ने और बेचने के लिए मजबूर करने और इलाके में चल रहे ड्रग्स के धंधे का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने माँग की कि क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की बदतर स्थिति को देखते हुए यहाँ दो पुलिस स्टेशनों की आवश्यकता है।

शेट्टी ने कहा, “भारत में कोई संवेदनशील क्षेत्र नहीं है। यहाँ तक ​​कि कश्मीर भी अब संवेदनशील क्षेत्र नहीं रह गया है, वह भी भारत का अभिन्न अंग बन गया है। यदि मालवणी एक संवेदनशील क्षेत्र है, तो यह पुलिस की विफलता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें आश्वासन दिया गया है कि पोस्टर हटाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ जाँच शुरू की जाएगी। मैं यह सुनिश्चित करूँगा, कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। अगर कोई पोस्टर गैरकानूनी है, तो उसे हटाना बीएमसी का काम है, पुलिस का नहीं।”

गौरतलब है कि इस मामले में सबसे पहले विहिप कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई थी। विहिप नेता ने उक्त घटना के बारे में नाम न जाहिर करने की शर्त पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि 15 जनवरी, 2021 को डोनेशन ड्राइव के बाद VHP नेता व कार्यकर्ता घर लौट रहे थे। उसी दौरान हमारे कार्यकर्ताओं ने देखा कि मुंबई पुलिस राम मंदिर निधि संकलन के पोस्टर्स को फाड़ रही है। इन पोस्टरों को एक-एक कर हटाया भी जा रहा था।

कुछ विहिप नेताओं ने अपने मोबाइल फोन पर इस घटना को रिकॉर्ड भी कर लिया था। जब मुंबई पुलिस ने अपनी हरकतों को मोबाइल फोन के कैमरे में कैद होते हुए देखा तो उनमें से एक अधिकारी ने एक विहिप नेता की पिटाई शुरू कर दी थी।

जब मुंबई पुलिस से इस घटना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कथित रूप से कहा था कि राम मंदिर के ये पोस्टर्स विवादित थे और इससे स्थानीय लोगों की भावनाएँ भड़क रही थीं। साथ ही ये भी बताया कि उन्हें ‘ऊपर से आदेश’ मिला है कि राम मंदिर समर्पण निधि के पोस्टर्स को हटाया जाए।