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6 लोग (3 औरत+2 मर्द+1 नाबालिग) और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारेः खान मार्केट में हुई घटना की पड़ताल कर रही दिल्ली पुलिस

दिल्ली के खान मार्केट मेट्रो स्टेशन के पास 24 जनवरी की रात 1 बजे के करीब, 6 लोगों ने कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। स्थानीय लोगों ने पुलिस से इसकी शिकायत की। शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घटना में शामिल दो पुरुषों, एक नाबालिग और तीन महिलाओं को थाने ले गई।

पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने यहाँ किराए पर बाइक्स लीं और एक-दूसरे से रेस लगाने लगे। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे का नाम देशों के नाम पर रखा, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि नारे “हल्के-फुल्के अंदाज” में लगाए गए थे। वहीं समूह ने बताया कि वे कम आवाज़ में नाम ले रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें यह बोलते हुए सुन लिया और पुलिस को सूचित कर दिया।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बताया, तुगलक रोड पुलिस स्टेशन को एक पीसीआर कॉल आई। जिसमें उन्होंने बताया कि खान मार्केट मेट्रो स्टेशन के पास’ पाकिस्तान जिंदाबाद ’के नारे लगाए गए हैं। लोकेशन पर पहुँचकर पुलिस को मौके पर तीन महिलाएँ, दो पुरुष और एक किशोर नीले रंग की युलु बाइक के साथ मिले।

पुलिस का कहना है कि रेस के दौरान जिस शख्स का नाम पाकिस्तान के नाम पर रखा गया था, उसकी हौसलाअफजाई के दौरान पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिए। ये लोग परिवार के साथ इंडिया गेट के आसपास घूमने आए थे और युलु बाइक किराए पर ली थी। मजे करने के लिए आपस में रेस लगा रहे थे। मजे-मजे में इन लोगों ने धीमी आवाज में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिए। हालाँकि मामले में पुलिस की तहकीकात जारी है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी के मद्देनजर दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है और संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तानी आतंकवादी और नक्सली आतंकवादी हमला और दुष्प्रचार फैलाने के लिए चल रहे किसान विरोध प्रदर्शनों का सहारा ले सकते हैं। गणतंत्र दिवस पर प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस और किसान यूनियनों के बीच मामला काफी गरम है। यूनियन का दावा है कि पुलिस ने उन्हें अनुमति दे दी, लेकिन वहीं दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन किया है।

चुनने की आजादी बेटियों का अधिकार, समानता की हकीकत को पुरुषों को स्वीकार करना होगा

बेटियाँ आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। अपनी मेहनत के बल पर वह दुनिया भर में अपने नाम का परचम लहरा रही हैं। समाज में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 24 जनवरी को ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ (National Girl Child Day) मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य लड़कियों के सम्मान और महत्व को बढ़ावा देना है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2008 में इसकी शुरुआत की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने इस अवसर पर देश की बेटियों को शुभकामनाएँ दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “आज का दिन विशेष रूप से बालिकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम करने वाले सभी लोगों की सराहना करने और यह सुनिश्चित करने का दिन है कि वह सम्मान और अवसर प्राप्त करें।” 

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय बालिका दिवस पर, हम अपनी देश की बेटी और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों को सलाम करते हैं। केंद्र सरकार ने कई पहल की हैं, जो बालिकाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित हैं। इसमें शिक्षा तक पहुँच, बेहतर स्वास्थ्य सेवा शामिल है।”

मोदी सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का अब असर दिखने लगा है। भारत के सेक्स अनुपात में जबरदस्त सुधार हुआ है। साल 2014-15 में जन्म के समय प्रति एक हजार लड़कों पर 918 लड़कियाँ थी। साल 2019-20 में यह आँकड़ा सुधर कर अब 934 तक पहुँच गया है।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर इस अभियान की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई थी। मोदी सरकार ने इस योजना के जरिए समाज में लड़कियों के जन्म को लेकर मौजूद पूर्वाग्रहों को तोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के कारण ज्यादातर लड़कियाँ स्कूल जाने लगी हैं।

इन अभियानों से लोगों की मानसिकता को बदलने में मदद मिली है। खासकर, ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर काफी जागरुकता आई है। समाज के लोगों की मानसिकता पर इन अभियानों का काफी असर हुआ है। अब लोग लड़कियों को लड़कों के बराबर सम्मान और अधिकार दे रहे हैं।

वर्तमान समय में भी केंद्र और राज्य सरकारें लड़कियों को समानता का हक दिलाने के लिए विभिन्न योजनाएँ व कार्यक्रम चला रही हैं, जिनके चलते समाज में जागरुकता फैली है और लोगों ने लड़कियों की महत्ता को समझा है। पहले जहाँ लोग अपनी बच्चियों को घर से बाहर नहीं निकलने देते थे वहीं आज विभिन्न क्षेत्रों में लड़कियों की भागीदारी देखी जा सकती है।

भले ही आज देश की बेटियाँ हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहीं है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी बालिकाओं का जन्म परिवार पर बोझ माना जाता है, लेकिन समाज में बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत में एक लड़की का बड़ा होना आसान नहीं है। एक महिला और एक कामकाजी महिला होना और भी कठिन है। कई बार तो ऐसा भी कहा जाता है कि अगर आप पुरुष नहीं हैं तो यह दुनिया की सबसे खतरनाक जगह है। यहाँ पर लैंगिक विभाजन बहुत अधिक है, हालाँकि यह धीरे-धीरे बंद हो सकता है।

ऐसे देश में जहाँ यौन अपराध हर सुबह अखबारों के पहले पेज पर होते हैं, वहाँ हजारों अनदेखी, अपरिचित महिलाओं ने लैंगिक पूर्वाग्रह और अपमान के साथ रहना सीख लिया है। उन्हें लगता है कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। पिछले साल सरकार ने सेना में महिलाओं को अधिक समानता देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि महिलाएँ कमांडिंग पदों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि पुरुष सैनिक उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। 

यह भी तर्क दिया गया कि अलग-अलग शारीरिक मानदंडों की वजह से तैनाती के लिए महिला और पुरुष अफसरों को समान नहीं आँका जा सकता। अधिक पारिवारिक जरूरत, युद्धबंदी बनाए जाने का डर और युद्ध की स्थिति में महिला अफसरों पर संदेह जैसे अनेक कारणों से कहा गया कि वे इस कार्य के योग्य नहीं हैं। सौभाग्य से अदालत ने इन ओछे और लैंगिक भेदभाव वाले तर्कों को खारिज कर दिया और आदेश दिया था कि अब पुरुषों की ही तरह महिलाएँ भी स्थायी कमीशन पा सकेंगी।

गरीब और मध्यम वर्ग की लाखों महिलाएँ सामाजिक निंदा के डर से आज भी एक प्रेमहीन व नाखुश विवाह में फँसी हैं। यह खासकर भारत के उन हिस्सों में हो रहा है, जहाँ पर परंपराएँ सुनिश्चित करती हैं कि किससे शादी करनी है यह तय करने में महिलाओं की इच्छा न्यूनतम हो। यह फैसला समुदाय या फिर परिवार के बड़े लोग करते हैं और इसकी वजह प्रेम के अलावा ही होती है। मान्यता यह है कि प्रेम शादी के बाद होना चाहिए न कि अन्य तरीके से। 

यह सच है कि अधिक से अधिक महिलाएँ अब खुद का अधिकार जता रही हैं। वे चाहे अपनी पसंद का साथी चुन रही हों जाति, समुदाय, गोत्र या फिर कुछ मामलों में तो लिंग को भी नकार रही हैं। यही नहीं वे इस विचार को भी खारिज कर रही हैं कि ‘शादी जरूरत है।’ अधिक से अधिक महिलाएँ कैरियर चुन रही हैं, ताकि उनमें एक गर्व की भावना आए।

उन्हें इस बात का डर नहीं लगता कि समाज उनके बारे में क्या सोचेगा। शिक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता ने उन्हें यह चुनने का अधिकार दिया है, दंभ नहीं। यह लैंगिक न्याय की चाहत से आया है। यह सही है कि परिवार टूट रहे हैं। लेकिन ये इसलिए टूट रहे हैं कि महिलाएँ अब उस विवाह को छोड़ने से डर नहीं रही हैं, जो चल नहीं पा रहा है। यह खुद को बचाने की भावना से आता है, दंभ से नहीं। दंभ तो वह है जब पुरुष मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकते हैं। दंभ तब होता है, जब विधवाओं का सामजिक तिरस्कार होता है। या तब होता है, जब दहेज न लाने पर दुल्हनों को जला दिया जाता है। 

एक आधुनिक कार्यस्थल पर अवसरों व वेतन में असमानता और महिलाओं के प्रति व्यवहार दंभ है। लैंगिक समानता की लड़ाई जारी रहेगी। असल में तो यह गति पकड़ेगी। पुरुषों को अब समानता की हकीकत में रहना सीखना होगा। परंपराओं को नए सामाजिक बदलावों बीच से रास्ता निकालकर यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएँ वह सब कुछ कर सकें जो पुरुष कर सकते हैं और वह भी बिना इस डर के कि उनसे पूछताछ होगी या सजा मिलेगी।

अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगी-

दुश्मनों का मुकाबला डटकर कर सकती है “बेटियाँ”

मत बाँधों बेड़ियों में ऊँची उड़ान भर सकती है “बेटियाँ”

UP देश का पहला राज्य, IAF के लिए सड़क पर बना दी 3 एयर स्ट्रिप: पूर्वांचल Expressway पर भी उतरेंगे लड़ाकू विमान

उत्तर प्रदेश अब 3-3 एयरस्ट्रिप वाला देश का पहला राज्य बन गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर भी एयरस्ट्रिप बनकर तैयार हो गई है। यहाँ वायुसेना के विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग की जा सकेगी। बता दें कि इससे पहले यमुना एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भी हवाई पट्टियाँ बनाई गई हैं, जहाँ ट्रायल भी किए जा चुके हैं।

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने कूरेभार के पास बनाई गई इस हवाई पट्टी के बारे में अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा, “पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 3300 मीटर लंबी एयर स्ट्रिप का काम पूरा हो गया है। इस पर हर श्रेणी का जहाज उतारा जा सकता है।”

उन्होंने भारतीय वायु सेना से कहा, “हम वायुसेना से अनुरोध करेंगे कि वो जल्द एयर स्ट्रिप पर जहाज उतार कर इसे टेस्ट करें। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के पूरे होने पर प्रदेश के पूर्वी छोर से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे,मध्य में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और पश्चिम में यमुना एक्सप्रेस-वे से पूरे UP को एक्सप्रेस-वे से पार कर सकेंगे।”

आने वाले समय में यह एयरस्ट्रिप देश की सेना के लिए काफी मददगार साबित होंगी। भारतीय सेना आसानी से एक्सप्रेस-वे के एयर स्ट्रिप पर लड़ाकू विमानों को इमरजेंसी लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले आगरा एक्सप्रेस-वे पर मिराज-2000, जगुआर, सुखोई-30 और विशालकाय हरक्यूलिस जैसे विमान उतारे जा चुके हैं।

इसके अलावा भारतीय वायुसेना यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा एक्सप्रेस-वे के रनवे का परीक्षण कर चुकी है। इसी तर्ज पर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की एयर स्ट्रिप तैयार होने के बाद इसका भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। वहीं जरूरत पड़ने पर उत्तर प्रदेश के तीनों एक्सप्रेस-वे के रनवे भारतीय सेना के लिए उपलब्ध रहेंगे।

गौरतलब है कि भारतीय सेना ने लंबे समय से पाकिस्तान और चीन से युद्ध के खतरे को चिन्हित किया है। जहाँ एक तरफ चीन से सीमा विवाद है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का आक्रामक रवैया। भारत के खिलाफ दोनों एक ही समय में सक्रिय हैं। इसके चलते सरकार सशस्त्र बलों के लिए बुनियादी ढाँचे के विकास पर जोर दे रही है। किसी भी प्रकार के जंग के हालातों में यूपी की ये एयरस्ट्रिप सेना के लिए काफी कारगर साबित होंगी।

राधे के मर्डर में सास साबिरा और साला जावेद गिरफ्तार: शौचालय में मिला था गला रेता शव, 6 महीने पहले शहनाज से की थी शादी

उत्तर प्रदेश की नोएडा सेक्टर-39 पुलिस ने राधे चौहान नामक व्यक्ति की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में मृतक की सास साबिरा और साले जावेद को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में साले ने आरोप लगाया कि मृतक ने उसकी बहन के साथ बलात्कार का प्रयास किया था। राधे चौहान ने 6 महीने पहले शहनाज नामक मुस्लिम युवती से शादी की थी। अब साले ने स्वीकार किया है कि उसने ही अपने जीजा की चाकू से गला रेत कर हत्या कर डाली।

पुलिस ने आरोपितों को अदालत में पेश किया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने जानकारी दी है कि जनवरी 12 की सुबह बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास शौचालय में सेक्टर-55 निवासी राधे चौहान की लाश मिली थी। शव का गला रेता हुआ था। मृतक के साले और सास को सेक्टर-37 के पास से दबोचा गया। इनकी पहचान भाटिया मोड़ दौलतपुरा गाजियाबाद निवासी जावेद और साबिरा के रूप में हुई है।

आरोपितों के पास से मृतक का एक बैक बैग भी मिला है, जिसमें एक गर्म जर्सी, एक नीली जींस पेंट, एक ट्रैक सूट अपर, एक टी-शर्ट, एक काली जैकेट थी। पुलिस ने इन सभी चीजों को बरामद कर विवरण पंजीकृत कर लिया है। जावेद ने दावा किया है कि उसका जीजा नशेड़ी था, जिस कारण उसकी पत्नी उससे अलग रहा करती थी। साथ ही उसने ये भी आरोप लगाया कि वो अपनी छोटी साली पर गंदी नजर रखता था।

जावेद ने आरोप लगाया कि राधे चौहान ने एक बार उसकी छोटी बहन के साथ बलात्कार करने का प्रयास भी किया था। उसने इन सभी वजहों को राधे की हत्या की साजिश रचने का कारण बताया। घटना वाले दिन वो सेक्टर-22 में राधे के पास पहुँचा, जहाँ से वो उसे किसी तरह सोम बाजार लेकर जाने में कामयाब रहा। वहाँ उसे जम कर शराब पिला दी और साथ ही ‘फ्लूड’ का नशा भी करवाया।

इतने करने के बाद वो राधे सीधे को बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास एक शौचालय के अंदर ले गया, जहाँ उसने चाकू से गला रेतकर राधे की हत्या कर डाली। उसका शव खून से लथपथ पाया गया था। 27 वर्षीय राधे चौहान सेक्टर-55 के एक झुग्गी बस्ती में रहा करता था। पुलिस को मृतक की जेब और शौचालय के अंदर से चाकू मिले थे। उसके घरवालों ने बताया था कि वो पिछले 2 महीने से घर से बाहर था।

जाह्नवी कपूर की फिल्म की शूटिंग में ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ का फिर अड़ंगा, कहा- बाहर निकलो और हमारा समर्थन करो

करीब दो हफ्ते पहले कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पंजाब में फिल्म ‘गुड लक जेरी’ की शूटिंग कर रही बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर का घेराव किया था। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर पटियाला में फिल्म की शूटिंग में व्यवधान डाला है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ‘प्रदर्शनकारी’ शूटिंग स्थल पर पहुँच कर ‘गुड लक जेरी’ के शूटिंग के खिलाफ़ नारे लगाने लगे। उन्होंने माँग उठाई कि जाह्नवी कपूर अपने होटल से निकल के बाहर आएँ और किसान आंदोलन का समर्थन करें। प्रदर्शनकारियों ने ‘भावुक अपील’ करते हुए कहा कृषि क्षेत्र सभी को प्रभावित करता है। इसके आधार पर जाह्नवी कपूर और बॉलीवुड कलाकारों को किसान आंदोलन का समर्थन करना चाहिए। 

प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ शूटिंग में बाधा ही नहीं डाली, बल्कि जबरन उस होटल में दाखिल हुए जिसमें फिल्म की कास्ट और क्रू मौजूद थी। तथाकथित किसानों द्वारा किए गए इस उपद्रव के बाद इस फिल्म की शूटिंग को एक दिन के लिए रोकना पड़ गया। इसके अलावा कथित किसानों/प्रदर्शनकारियों ने इस मुद्दे पर बॉलीवुड के लोगों की चुप्पी पर असहमति भी जताई और आगे भी पटियाला में होने वाली शूटिंग को रोकने की चेतावनी दी। 

इसके पहले 11 जनवरी 2021 को प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने अभिनेत्री और शूटिंग क्रू को घेर कर किसान आंदोलन के समर्थन में स्टेटस डालने का दबाव बनाया था। एसएचओ बलविंदर सिंह ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों ने शूटिंग रोकी और निर्देशक से कहा कि बॉलीवुड अभिनेताओं ने न तो किसानों के समर्थन में कुछ कहा और न ही इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी की। जब निर्देशक ने आश्वासन दिया कि जाह्नवी कपूर इस मुद्दे पर टिप्पणी करेंगी तब प्रदर्शनकारी वापस लौटे। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रदर्शनकारियों ने धमकी तक दी थी कि अगर जाह्नवी कपूर ने दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन के समर्थन में बयान नहीं दिया तो वह शूटिंग नहीं होने देंगे। जब जाह्नवी कपूर ने इन्स्टाग्राम पर स्टोरी डाली इसके बाद ही प्रदर्शनकारी शूटिंग वाली जगह से हटे। जाह्नवी कपूर ने अपनी स्टोरी में लिखा था, “किसान हमारे देश के दिल में हैं। मैं देश का पेट भरने में उनके योगदान और उनकी भूमिका को जानती हूँ। उम्मीद करती हूँ कि वह जल्द ही किसी नतीजे पर पहुँचेंगे जो किसानों के हित में होगा।”    

5-10-100 रुपए वाले पुराने नोट अगले महीने से बंद, RBI ने खुद बताया, मीडिया में भी छपी खबर – Fact Check

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अधिकारियों के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने खबर चलाई कि अब 100, 10 और 5 रुपए के नोट चलन में नहीं रहेंगे और बंद हो जाएँगे। RBI के असिस्टेंट जनरल मैनेजर बी महेश के हवाले से ये खबर चलाई गई। कहा गया कि मार्च-अप्रैल तक इन नोटों की मान्यता ख़त्म कर दी जाएगी, जिससे बाद ये वैध नहीं रहेंगे। यानी, खबरों में कहा गया कि ये नोट स्वतः ही डेमोनेटाइज हो जाएँगे।

याहू न्यूज़ और सियासत सहित अन्य मीडिया संस्थानों ने लिखा कि जिला पंचायत के नेत्रवती हॉल में डिस्ट्रिक्ट लीड बैंक (DLB) द्वारा आयोजित डिस्ट्रिक्ट लेवल सिक्योरिटी कमिटी (DLSC) और डिस्ट्रिक्ट लेवल करेंसी मैनेजमेंट कमिटी (DLCMC) की बैठक को सम्बोधित करते हुए बी महेश ने कहा कि व्यापारी अब 10 रुपए के सिक्कों को स्वीकार करने में हिचक रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये जाली हैं।

साथ ही उन्होंने 10 रुपए के सिक्के को लेकर जागरूकता फैलाने की ज़रूरत पर भी बल दिया। बता दें कि 2019 से ही RBI नए तरह के 100 रुपए के करेंसी नोट प्रिंट कर रहा है। नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से देश में 2000 और 200 रुपए के नोट जारी किए गए थे। 2019 में एक RTI से पता चला था कि RBI ने 2000 रुपए के नए नोट को प्रिंट करना बंद कर दिया है। 2019-20 में ऐसे नोट प्रिंट नहीं हुए। 200 रुपए के नोट को फोकस में रखा गया।

ख़त्म हो जाएँगे 100, 50 और 5 रुपए के पुराने नोट?

वहीं याहू न्यूज़ ने रिजर्व बैंक के असिस्टेंट जनरल मैनेजर बी मीणा के हवाले से 5, 10 और 100 रुपए के नोट बंद किए जाने की खबर प्रकाशित की। हालाँकि, इसमें कहा गया कि भले ही 100 रुपए के पुराने नोट प्रिंट किए जा रहे हैं, लेकिन इसका अभी भी लीगल टेंडर बना रहेगा। अर्थात, इसका प्रयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर भी लगातार 100 रुपए के पुराने नोट की वैधता ख़त्म होने की बात फ़ैल रही है।

100 रुपए के नोट ख़त्म होने को लेकर मीडिया में खूब चली खबर

अब आइए जानते है कि इन ख़बरों की सच्चाई क्या है। ‘नवभारत टाइम्स’ के अनुसार, इन ख़बरों से घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि ये चलन में बने रहेंगे। इन्हें चलन से हटाने की फ़िलहाल कोई योजना ही नहीं है। NBT ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रवक्ता के हवाले से लिखा कि जब तक 100, 10 और 5 रुपए के नोट चलने लायक होंगे, चलते रहेंगे। बैठक में कही गई बातों को मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया था।

जहाँ तक कटे-फ़टे और मैले नोटों को चलन से बाहर करने की प्रक्रिया है, ये पूर्व से ही नियमित रूप से होती आई है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। खराब नोट जैसे ही RBI के पास पहुँचते हैं, वो उसे चलन से बाहर कर देता है और उसकी जगह नए नोट प्रिंट किए जाते हैं। अधिकारी ने कहा था कि ऐसे ही कटे-फ़टे नोट बैंकों से वापस लिए जाएँगे, लेकिन इन मीडिया वालों ने समझ लिया कि नोट चलन से बाहर हो जाएँगे।

’69 साल की महिला सेक्स कर सकती है, लेकिन शादी नहीं’ – जज ने सुनाया फैसला, लेकिन क्यों?

डेमेंशिया (dementia) से पीड़ित 69 वर्षीय महिला को ‘केयर होम’ निवासी युवक (कथित बॉयफ्रेंड) के साथ सेक्स करने की अनुमति कोर्ट ने दे दी है। फैसला सुनाते हुए जज ने यह भी कहा कि महिला युवक के साथ सेक्स कर सकती है लेकिन उससे शादी नहीं कर सकती।

‘डेमेंशिया’ बुजुर्गों में बेहद आम बात है, जिसमें भूलना, याददाश्त कमज़ोर होना, सोचने-समझने की क्षमता कम होना जैसे लक्षण नज़र आते हैं। दरअसल बुजुर्ग महिला ने युवक के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद काउंसिल सोशल सर्विसेज़ ने इस मामले में न्यायालय के दखल की माँग उठाई।

इस दौरान एक मनोवैज्ञानिक ने महिला का परीक्षण किया था और सेक्स को लेकर उनकी जानकारी परखने के लिए सवाल भी पूछे थे। जिसके बाद जस्टिस पूल ने कहा कि महिला ‘यौन संबंध बनाने को लेकर’ फैसला लेने की स्थिति में है। 

जज ने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि 69 वर्षीय महिला यह फैसला लेने की स्थिति में नहीं है कि उसे युवक से शादी करनी है या नहीं। न ही महिला को इस बात की समझ है कि शादी के दौरान किस तरह के आर्थिक और न्यायिक समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं।

जज के मुताबिक़ इस बात के सबूत मौजूद हैं कि महिला को इसका अंदाज़ा नहीं है कि तलाक के बाद उसके रुपयों और संपत्ति का क्या होगा। लेकिन महिला इस स्थिति में ज़रूर है कि वह ‘यौन संबंध बनाने’ या ‘दूसरों से संपर्क में रहने’ के मुद्दे पर फैसला ले सके। 

इंग्लैंड की एक अदालत में इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, “इस मुद्दे पर फैसला सुनाने में देरी अफ़सोसजनक है क्योंकि महिला उस युवक के साथ प्रेम संबंध नहीं बना पा रही।” पिछले कुछ महीनों में 69 वर्षीय महिला की युवक से काफी बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों की नजदीकियाँ बढ़ीं।

जस्टिस पूल ने महिला का परीक्षण करने वाले मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। मनोवैज्ञानिक का इस मुद्दे पर कहना था कि महिला ने ‘यौन संबंधों की प्रकृति और संरचना’ को लेकर औसत समझ दिखाई। महिला को इस बात का भी अंदाजा था कि इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। 

महिला को STD (sexually transmitted disease) से होने वाले खतरे का अनुमान था। इस पर महिला का कहना था, “मुझे ऐसी बीमारी न तो हुई है और न ही मैं ऐसी बीमारी चाहती हूँ।” इससे बचाव को लेकर पूछे गए सवाल पर महिला ने जवाब दिया, “कॉन्डोम का इस्तेमाल करके STD से बचा जा सकता है।”

अंत में जज ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में महिला की पहचान नहीं की जा सकती है और मामले से जुड़े काउंसिल की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।  

जो बायडेन के राष्ट्रपति बनते ही कैपिटल हिल के सामने हजारों मुस्लिमों ने पढ़ी जुमे की नमाज, फोटो वायरल – Fact Check

अमेरिका में जो बायडेन ने राष्ट्रपति का पद संभालते ही पहले 17 एक्जक्यूटिव आदेश पर हस्ताक्षर किए। इनमें से कई पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किए गए फैसलों को पलटने से सम्बंधित थे। इनमें सबसे ज्यादा ‘मुस्लिम ट्रेवल बैन’ को ख़त्म करना वायरल हुआ। इसके तहत कुछ खास देश के नागरिकों को अमेरिका यात्रा की अनुमति नहीं थी। इसी बीच सोशल मीडिया पर कैपिटल हिल के सामने जुमे की नमाज पढ़ते हजारों मुस्लिमों की तस्वीरें वायरल हो गई।

‘मुस्लिम ट्रेवल बैन’ के तहत 7 इस्लामी मुल्कों के लोगों को अमेरिका में यात्रा से प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन 2017 के इस फैसले को अब पलट दिया गया है। इस पर सोशल मीडिया के माध्यम से कई मुस्लिमों ने ख़ुशी जताई। सोशल मीडिया पर वायरल कैपिटल हिल के सामने मुस्लिमों द्वारा नमाज पढ़ी जाने की तस्वीरों के बारे में दावा किया जा रहा है कि जो बायडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद आए पहले शुक्रवार को ऐसा हुआ।

फेसबुक पर भी वायरल हुआ दावा

रवींद्र भारतीय नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, “जो बायडेन का नया अमेरिका – कैपिटल हिल के सामने जुमे के दिन”। इसी तरह सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इसे अमेरिका में बदली सत्ता के बाद का प्रभाव बताया और लिखा कि मुस्लिम अब खुलेआम कैपिटल हिल इमारत के सामने हजारों की संख्या में नमाज पढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे शेयर करते हुए अमेरिका में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर भी आवाज़ उठाई।

अब आइए आपको बताते हैं कि इन तस्वीरों की सच्चाई क्या है। दरअसल, ये दावा भ्रामक है। जो तस्वीर शेयर की जा रही है, वो एक दशक से भी ज्यादा पुरानी है। सितम्बर 25, 2009 को ‘इस्लाम ऑफ कैपिटल हिल’ नमाज कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के आयोजकों का दावा था कि वो अमेरिका के मुस्लिमों और नॉन-मुस्लिमों के बीच एकता बढ़ाने और उनके साथ मिल कर काम करने के उद्देश्य से इसे आयोजित किया गया।

‘इस्लाम ऑन कैपिटल हिल’ नामक इस कार्यक्रम की तस्वीरें तब की कई मीडिया रिपोर्ट्स में उपलब्ध हैं। इस तरह की एक तस्वीर ‘Getty’ इमेज सर्विस पर भी है, जिसे फोटोग्राफर अलेक्स वोंग ने लिया है और उस पर भी 2009 की वही तारीख अंकित है। न्यू जर्सी के एलिजाबेथ में स्थित दारुल इस्लाम मस्जिद ने इसका आयोजन किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा आपसी सहयोग के लिए दिए गए एक भाषण से प्रभावित होकर ऐसा किया गया था।

हाल ही में पद संभालने के कुछ ही देर बाद बायडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने कहा था कि प्रतिबंध ‘हमारे देश पर एक दाग से कम नहीं था और यह ज़ेनोफोबिया (अपरिचित या विदेशियों को पसंद ना करना) और धार्मिक दुश्मनी ही थी’। 2017 में ट्रंप के कार्यालय में पहले सप्ताह से ही लागू, मुस्लिम प्रतिबंध ने शुरू में सात मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों- ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन से यात्रा को प्रतिबंधित कर दिया था।

‘शबरी के राम’ से लेकर ट्रांसजेंडर समुदाय की कलाओं तक: UP दिवस में इस बार ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’

उत्तर प्रदेश दिवस (Uttar Pradesh Day) राज्य की स्थापना के दिन की ख़ुशी में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। हर वर्ष जनवरी 24 को न सरकार, बल्कि राज्य की जनता भी अलग-अलग हिस्सों में अपने-अपने तरीके से इसे मानती है। 1950 में यही दिन था, जब यूनाइटेड प्रोविन्सेज का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश रखा गया था। 4 वर्ष पूर्व 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने निर्णय लिया कि इसे यूपी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

इसका विचार सबसे पहले राज्यपाल राम नाइक के मन में आया था, जिनके प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने ये निर्णय लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इस वर्ष भी इस जश्न में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को शामिल होना चाहिए। जनवरी 24 से लेकर जनवरी 26 तक 3 दिनों तक पूरा राज्य जश्न में डूबा होगा और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को इस बार के यूपी दिवस के थीम के रूप में चुना गया है।

इस दौरान राज्य को अपने कारनामों से गर्व की अनुभूति कराने वाले लोगों को याद किया जाएगा और सम्मानित किया जाएगा। जिन लोगों ने उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किया है, उन्हें ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। इसमें महिलाओं, किसानों और कलाकारों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। ये ऐसे लोग होंगे, जिनकी प्रतिबद्धता और प्रयासों के कारण राज्य आत्मनिर्भर बन कर उभर रहा है।

3 दिनों के इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा उद्देश्य है – स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान दिला कर उन्हें सम्मानित करना। जैसे, फोक म्यूजिक, संस्कृति और समाज के उत्थान के जुड़े कार्यों, देश के प्रति वफादारी और अन्य कारनामों से प्रदेश का नाम ऊँचा करने वाले लोगों को सम्मान दिया जाना है। इस दौरान कई कार्यक्रम होंगे, जिसमें राज्य की कलाकृतियाँ, उत्पादों, गाने और नाटकों को एक बड़ा मंच मिलेगा।

इस दौरान ‘शिल्प मेला’ और ‘शबरी के राम’ नाटक, एसिड अटैक पीड़िताओं की दर्द को बयाँ करते नाटक और ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा दिखाई जाने वाली कलाओं का प्रदर्शन होना है। इन कार्यक्रमों में राज्य की स्थानीयता का ध्यान रखा जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी राज्य को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम और लीलाधर श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि का प्रदेश, भारत का हृदय प्रदेश, भारतीय संस्कृति का उद्गम स्थल’ बताते हुए लोगों को बधाई दी।

विभिन्न नेताओं ने उत्तर प्रदेश दिवस की दी बधाई

इस दौरान खेल जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार तथा रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार दिया जाएगा। दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार एवं नंद बाबा पुरस्कार दिए जाएँगे। कृषि विभाग द्वारा तीन किसानों को भी पुरस्कृत किए जाने की भी योजना है। विभिन्न योजनाओं का लाभ भी नागरिकों को पात्रता के आधार पर मिलेगा। कइयों को ऋण भी दिया जाना है।

इधर दिल्ली में भी गणतंत्र दिवस की परेड में उत्तर प्रदेश की झाँकी बेहद खास होगी। यूपी की ओर से अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की महिमा और भव्यता का प्रदर्शन गणतंत्र दिवस परेड की झाँकी में किया जाएगा। परेड के लिए राम मंदिर और दीपोत्‍सव की झलक वाली झाँकी तैयार हो गई है। परेड में अयोध्या की धरोहर, भव्य राम मंदिर की प्रतिकृति, दीपोत्सव की झलक और पौराणिक ग्रंथ रामायण के विभिन्न हिस्सों की झाँकी प्रदर्शित की जाएगी।

इमरान की अवन्तिका से शादी और बेटी भी… अब दोस्त की बीवी लेखा से ‘रिश्ते’ के लिए किराए का घर: आमिर की राह पर भाँजा

आमिर खान के भांजे, बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान और उनकी पत्नी अवन्तिका मलिक अलग हो चुके हैं। कुछ महीने पहले ही दोनों ने इस बात की जानकारी साझा की थी। तभी से इस मुद्दे पर अफ़वाहों का बाज़ार गर्म था कि इसके पीछे क्या वजह रही होगी।

कयास लगाए जा रहे थे कि इमरान खान का फ़िल्मी करियर प्रभावित होने का कारण दोनों का अलग होना है लेकिन असल वजह कुछ और ही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों के बीच रिश्तों में आई दरार की वजह इमरान खान के जीवन में आई एक महिला है। 

बॉलीवुड में अक्सर टूटने वाले रिश्तों की कहानी लगभग ऐसी ही होती है, जिसमें अहम भूमिका तीसरे किरदार की होती है। यहाँ उस तीसरे किरदार का नाम है लेखा वॉशिंगटन! रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोनों काफी समय से एक दूसरे से संपर्क में हैं।

लेखा के पति पाब्लो चटर्जी और इमरान खान बहुत अच्छे दोस्त थे लेकिन तब इमरान और लेखा के रिश्ते की भनक किसी को नहीं लगी थी। जब अवन्तिका ने घर छोड़ दिया, तब इमरान ने लेखा का परिचय अपने जान-पहचान वालों से कराना शुरू किया। 

इसका प्रभाव इमरान खान के जीवन पर ही नहीं बल्कि लेखा की निजी ज़िंदगी पर भी पड़ा। फ़िलहाल दोनों परिवारों के हालात बहुत बेहतर नहीं हैं। इतना ही नहीं, इमरान खान ने लेखा से मिलते रहने के लिए उनके लिए अपने घर (पाली हिल बांद्रा) के नज़दीक एक किराए का घर भी लिया है।

लेखा वॉशिंगटन बॉलीवुड फिल्म ‘मटरू की बिजली का मन डोला’ में इमरान खान की दोस्त का किरदार भी निभा चुकी हैं। रिपोर्ट्स में यहाँ तक दावा किया गया है कि आधिकारिक रूप से तलाक हो जाने के बाद इमरान अपने इस नए रिश्ते के बारे में खुल कर बात कर सकते हैं। 

काफी समय तक एक दूसरे को डेट करने के बाद इमरान और अवन्तिका ने 2011 में शादी की थी। दोनों की एक बेटी भी है, जो 2014 में पैदा हुई थी। अवन्तिका सोशल मीडिया पर अक्सर मनोबल बढ़ाने वाले बातें साझा करती हैं।

बुधवार (20 जनवरी 2021) उन्होंने एक बड़ा कथन साझा किया था, जिसमें उनका कहना था कि वह ‘फँसा हुआ’ महसूस कर रही हैं। अवन्तिका ने अपनी एक दोस्त द्वारा भेजा गया ब्रियाना वेस्ट (Brianna Wiest) का कथन अपनी इन्स्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। 

स्टोरी में लिखा था, “एक दिन आप पीछे देखेंगे तब आपको जादू नज़र आएगा। आपको याद नहीं रहेगा कि आप किस कदर फँसे हुए थे या कितना पीछे रह गए थे या आपने जिस तरह अलग करने का सोचा था। आपको अपने भीतर मौजूद अनिश्चितता में भी क्षमता नज़र आएगी, खो जाने में भी पाए जाने का अवसर नज़र आएगा। अपनी असुविधा में बदलाव करने का अवसर नज़र आएगा, ऐसा बदलाव जिसके ज़रिए आप ऐसा इंसान बन पाएँगे, जो आपको असल में होना चाहिए। अगर आपके पास ऐसा एक भी ख़याल नहीं है जो अँधेरी और शांत रातों में सुकून नहीं दे सकता है, कृपया इसे होने दें – एक दिन आप पीछे देखेंगे तब आपको एक जादू नज़र आएगा।”     

इमरान खान के मामा और बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की कहानी बहुत अलग नहीं है। आमिर खान ने 1986 में रीना दत्त से शादी की थी, जिसे आमिर के परिवार वालों ने स्वीकार नहीं किया था क्योंकि वह मुस्लिम नहीं थी। इनके दो बच्चे (जुनैद और इरा) भी हैं। दिसंबर 2002 में आमिर खान ने तलाक की अर्ज़ी दे दी, जिसके बाद दोनों का 16 वर्षों का वैवाहिक जीवन ख़त्म हो गया था। इसके बाद आमिर खान ने 28 दिसंबर 2005 को किरण राव से शादी की।

imran khan estranged his wife avantika because of friend’s wife lekha washington