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घोटालेबाज लालू के लिए लिबरल गैंग का रूदन चालू, पेड ट्वीट्स की बाढ़: सैकड़ों चंदा बाबू जैसे पीड़ितों का दोषी ‘मसीहा’ कैसे?

‘सामाजिक न्याय’ – इन दो शब्दों ने बिहार का उतना नुकसान किया है, जितना शायद ही किसी ने किया हो। बिहार में 15 वर्ष के जंगलराज के दौरान तमाम आपराधिक वारदातें हुईं, अपराधियों को सत्ता का खुला समर्थन मिला और विकास परियोजनाओं को ठप्प कर दिया गया। अंत में उपलब्धि गिनाई गई कि हमने ‘सामाजिक न्याय’ किया, जो न दिखता है और न महसूस होता है। इसी तरह अब सजायाफ्ता लालू यादव के बीमार होने पर उन्हें ‘सामाजिक न्याय’ का मसीहा बताने वाले फिर से सामने आ गए हैं।

लालू यादव ने 15 वर्षों तक बिहार में सरकार चलाई थी और इस दौरान राज्य के हर जिले में किसी न किसी बड़े गुंडे को उसका संरक्षण प्राप्त था। सीवान के शहाबुद्दीन के बारे में तो सबको पता है, लेकिन बृजबिहारी प्रसाद से लेकर लालू के सालों साधु-सुभाष यादव तक, कोई ऐसा इलाका न था, जहाँ लालू ने गुंडे नहीं पाल रखे थे। 3 बेटों को खोने वाले चंदा बाबू अकेले नहीं थे, बिहार में 15 वर्षों के जंगलराज के ऐसे अनगिनत पीड़ित हैं।

दरअसल, ताज़ा खबर ये है कि बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण बिहार का पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव को राँची के रिम्स से दिल्ली के एम्स में स्थानांतरित किया जा रहा है। उसे होना तो बिरसा मुंडा जेल में चाहिए था, लेकिन उसने सजा का अधिकतर हिस्सा अस्पताल में और यहाँ तक कि रिम्स डायरेक्टर के बँगले में भी बिताया। आज 82 विधायकों/विधान पार्षदों और 5 राज्यसभा सांसदों वाली पार्टी का मुखिया होते हुए भी वो अपनी कर्मों की सज़ा भुगत रहा है।

लालू यादव को एयर एम्बुलेंस से शनिवार (जनवरी 23, 2021) को रात पौने 9 बजे दिल्ली लाया गया। इसके बाद उसे एम्स में कार्डियो-न्यूरो सेंटर में भर्ती कराया गया। कहा जा रहा है कि लालू यादव के खून में शुगर का लेवल बढ़ गया है और उसकी दोनों किडनियाँ भी कुछेक प्रतिशत ही काम कर रही हैं। उसे न्यूमोनिया भी है और उसके फेंफड़ों में पानी भर गया है। शुक्रवार को उसके बेटे तेजस्वी ने भी उससे मुलाकात की और बेहतर इलाज के लिए माँग उठाई।

शुक्रवार की रात ही पत्नी राबड़ी देवी ने भी बेटे तेज प्रताप यादव के साथ उससे मुलाकात की। परिजनों ने लगभग 5 घंटों तक उससे मुलाकात की। लालू यादव को हार्ट की बीमारी भी है। उसकी उम्र भी 72 वर्ष हो गई है। पिछले दो दिनों से उसे साँस लेने में भी समस्या हो रही है। लालू यादव कोई संत नहीं है बल्कि वो चारा घोटाला मामले में जेल में बंद है। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार आने के बाद उसे वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा था।

शुरू है पेड ट्वीट्स का कारोबार

इन सबके बीच प्रोपेगंडा पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने पूछा, “सांप्रदायिक दंगों और आतंकवाद के आरोपित संसद में बैठे हैं और दलितों-पिछड़ों के मसीहा लालू यादव जेल में हैं। ये कैसा इंसाफ़ है? ये कहाँ का इंसाफ़ है?” ‘पत्रकार’ आरफा को पता होना चाहिए कि ये कोर्ट का इंसाफ है। मार्च 2018 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उसे 14 वर्षों की सज़ा सुनाई थी। चारा घोटाला के एक नहीं, कई मामले हैं। एक मामले में उसे 7 वर्ष जेल की सजा अलग से मिल रखी है।

लालू यादव बीच में कई बार तिकड़म भिड़ा कर जमानत पाने में भी कामयाब रहा और उसने 2014 लोकसभा चुनाव और 2015 विधानसभा चुनाव में धुआँधार चुनाव प्रचार किया था। 2015 में उसने नीतीश कुमार के साथ सत्ता भोगनी शुरू की और अपने बेटों का करियर सेट किया। उसका घर फिर से राज्य की राजनीति का प्रमुख अड्डा बन गया था। अब एक घोटालेबाज और अपराधियों के संरक्षक के लिए लोग घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं।

राजद की आईटी सेल लगी काम पर

और हाँ, आरफा खानुम शेरवानी जिन पर दंगों में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए संसद में बैठे होने की बातें कर रही हैं, उनके पीछे लालू यादव की साझेदारी वाली यूपीए सरकार ने ही कई जाँच एजेंसियों को लगाया था। सीबीआई ने दिन-दिन भर बिठा कर पूछताछ की थी। 10 वर्षों तक सारे तिकड़म आजमाने के बावजूद कुछ भी साबित नहीं हुआ। हाँ, जबरदस्ती आरोप लगाने वाले ज़रूर जनता की अदालत में नंगे हो गए।

कुछ लोगों का मानना है कि राजद की आईटी सेल खासी मजबूत है और ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स’ को रुपए देकर लालू यादव के पक्ष में ट्वीट करवाए जा रहे हैं। कारण ये कि जैसा आरफा ने लिखा, वैसा ही हूबहू सैकड़ों लोगों ने ट्विटर पर लिखा है। अदालत का भी सम्मान न करने वाले इन लोगों ने लालू यादव को ‘गरीबों का मसीहा’ बताया, जबकि बिहार के गरीब पिछले 15 वर्षों से उसे और उसकी पार्टी को नकारते आ रहे हैं।

लालू यादव के मामले में अदालत का भी सम्मान नहीं?

अब बीमार लालू यादव की तस्वीरें शेयर कर के सहानुभूति बटोरी जाएगी। कुछ कट्टर जातिवादियों को सक्रिय किया जाएगा। हो सकता है कि अराजकता का माहौल भी बनाया जाए, क्योंकि राजद के गुंडे अब भी गुंडे ही हैं। अंतर बस इतना है कि तेजस्वी यादव अच्छी-अच्छी बातें करते हैं और लिबरल गैंग के दुलारे बन गए हैं। लेकिन, एक भ्रष्टाचारी के लिए बेशर्म तरीके से बैटिंग करना और फिर खुद को निष्पक्ष बताना कैसी चाल है?

कुछ लोग लालू यादव को मानवता के नाते छोड़ने की बातें कर रहे हैं। तो फिर पूरे देश की ही जेलों को ‘मानवता के नाते’ क्यों न खाली कर दिया जाए? यहाँ सवाल ये उठता है कि हजारों लोगों के रंगदारी, अपहरण और हत्या के दौरान अपराधियों को संरक्षण देने वाले सत्ताधीश के लिए बैटिंग करने वाले किस मुँह से भाजपा नेताओं या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हैं? उनका तर्क सीधा है – अगर हाफिज सईद भी मोदी के खिलाफ है तो उसे भी संत बना दो।

लालू यादव को संत बनाया जा रहा है। वो बेचारा नहीं है, बल्कि 15 वर्षों तक बिहार में और कई वर्षों तक केंद्र में सत्ता का धुरी बन कर रहने वाला एक ऐसा घाघ राजनेता है, जो घोटाला कर के सज़ा काट रहा है। उस पर आरोप साबित हुए हैं। झारखंड में ‘अपनी सरकार’ आई तो नियमों को ताक पर रख कर उसे VIP ट्रीटमेंट देने के आरोप लगे हैं। यानी वो तो एक आम अपराधी की तरह सज़ा भी नहीं काट रहा है।

एक सजायाफ्ता कैदी को इलाज के लिए बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए और लालू यादव को वो सब दिया जा रहा है, वरना आपने कब किसी आम कैदी को रिम्स निदेशक के बँगले में रहते या तुरंत एम्स में भर्ती कराते हुए देखा है? लालू यादव के लिए पेड ट्वीट्स का अभियान शुरू हो गया है। सहानुभूति की आड़ में मोदी-शाह को विलेन साबित किया जा रहा है। बहाना वही – ‘लालू यादव ने समाजिक न्याय’ किया।

‘पूजा भारती ने खुद बाँध लिए हाथ-पैर, डैम में कूद कर ली आत्महत्या’: झारखंड पुलिस के बयान से गहराया सस्पेंस

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती पूर्वे की हत्या के मामले में झारखंड पुलिस ने खुलासा किया है। डीआईजी एवी होमकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के बताया कि पूजा ने आत्महत्या की थी, ऐसा अब तक की जाँच में सामने आया है। छात्रा के बैग और कमरे से मिले कागजातों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि वो काफी अवसाद में थी। पुलिस ने कहा कि अभी ठोस नतीजों पर पहुँचना बाकी है, क्योंकि कई बिंदुओं पर जाँच अभी भी जारी है।

पुलिस के अनुसार, छात्रा के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं और छात्रा ने खुद ही अलग-अलग रस्सियों का इस्तेमाल कर के अपने हाथ-पाँव बाँध लिए होंगे, इसीलिए उसके लाश के हाथ-पाँव बँधे हुए मिले। ये घटना जनवरी 12, 2021 को हुई थी। रामगढ़ के पतरातू डैम में मेडिकल छात्रा पूजा भारती की लाश तैरती हुई मिली थी। गोड्डा की रहने वाली पूजा भारती कुछ दिनों पहले ही फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा देने घर से कॉलेज आई थी।

इस मामले में रामगढ़ और हजारीबाग, दो-दो जिलों की पुलिस टीमें गठित कर के जाँच शुरू की गई। रामगढ़, हजारीबाग और गोड्डा में खाक छानने के बाद भी पुलिस को सबूत पाने में सफलता नहीं मिली। रामगढ़ के एसडीपीओ प्रकाश चंद्र ने कुछ दिनों पहले खुलासा किया था कि ऐसा प्रतीत होता है कि मेडिकल छात्र की हत्या कहीं और की गई होगी और बाद में शव को लार पतरातू डैम में फेंक दिया गया होगा।

परिजनों का कहना है कि पूजा भारती की हत्या हुई है। पुलिस अब तक की जाँच में छात्रा का मोबाइल फोन भी बरामद नहीं कर पाई है। पुलिस को जाँच में पता चला कि परीक्षा के दिन वो अपने हॉस्टल से ऑटो लेकर बस स्टैंड पहुँची थी। इसके बाद वो हजारीबाग से बस से राँची के लिए निकली। बस से राँची आकर वो पतरातू डैम क्यों गई और कैसे, इस बारे में अब तक पुलिस ने कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया है।

झारखंड के डीजीपी एमवी राव ने 72 घंटे के भीतर इस मामले की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया था। अब इस काण्ड को दो हफ्ते होने को आए हैं। पूजा भारती पूर्वे मामले में न्याय के लिए राज्य में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस के कुछ अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं तो कुछ अलग-अलग बातें बोल रहे हैं। पोकलेन मशीन से खोजबीन के बाद भी डैम में छात्रा का मोबाइल फोन नहीं मिला। अब सीबीआई जाँच की माँग जोर पकड़ रही है।

कुछ दिनों पहले इस मामले में रवि पांडेय को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने युवती के फेसबुक पोस्ट पर अश्‍लील टिप्‍पणी करने वाले इस युवक को गिरफ्तार किया था। मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी में हुए पोस्टमॉर्टम में पूजा भारती के पेट से पानी निकला। डॉक्टर्स का कहना था कि मरे हुए व्यक्ति के पेट में पानी नहीं पहुँच पाता है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूजा भारती को जिन्दा ही बाँधकर पानी में फेंक दिया गया।

नागा साधु की पीट-पीट कर हत्या, उनके कुत्ते भी घायल: 25 वर्ष की आयु में लिया था संन्यास

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक नागा साधु की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। ये घटना शनिवार (जनवरी 23, 2021) को दियोरिया कला थाना क्षेत्र के सिंधौरा गाँव में हुई। एसपी जय प्रकाश ने जानकारी दी है कि दियोरिया पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर के छानबीन शुरू कर दी है। मृतक नागा साधु सिंधौराय गाँव में नहर किनारे स्थित एक मंदिर के पास झोपड़ी डाल कर रहा करते थे।

सुबह में जब साधु की भांजी खेतों को देखने गई तो उसने देखा कि नागा साधु मृत अवस्था में पड़े हुए हैं। सूचना मिलने पर वहाँ पर पुलिस भी पहुँची, जिसने कानूनी कार्रवाई करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पीड़ित परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी का दावा तो किया है, लेकिन अब तक उनकी पहचान ही सामने नहीं आई है।

60 वर्षीय मृतक सोमपाल बंडा थाना क्षेत्र के ताजपुर गाँव के रहने वाले थे। उन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में ही संन्यास लेकर नागा साधु की तरह जीवन-यापन करने का फैसला लिया था। वो अविवाहित थे। उन्‍होंने निगोही शाखा नहर की पटरी पर छोटा सा मंदिर बनाया था और वहीं पर अपना एक छोटा सा बसेरा बना कर रहने लगे थे। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दी कि नागा साधु काली माता के पुजारी थे।

उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए 2 कुत्ते भी पाल रखे थे। वो कुत्ते हमेशा उनके पास ही रहते थे और अपरिचित लोगों को उनके पास नहीं जाने देते थे। हालाँकि, उनका गाँव में कभी किसी से कोई विवाद रहा ही नहीं, जिसने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आरोप है कि अज्ञात बदमाशों ने अचानक कुटिया पर हमला बोल दिया और उनकी पिटाई की। उनके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।

घटना की अगली सुबह परिजनों को इस बारे में पता चला, जिससे मौके पर ग्रामीणों की बड़ी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने घटनास्थल की भी बारीकी से जाँच-पड़ताल की है। वो निगोही ब्रांच नहर के पास बनवाई मंदिर में रोज पूजा-अर्चना किया करते थे।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मृत साधु के पास उनके कुत्ते को भी घायल अवस्था में देखा। कुत्तों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया होगा लेकिन बदमाशों ने उनकी भी पिटाई कर दी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस घटना को जल्द ही वर्कआउट कर के सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की हत्या को लेकर खुलासा हुआ था कि आदिवासियों को सुनियोजित तरीके से हिंदू संतों के खिलाफ भड़काया जा रहा है। तमिलनाडु में एक साधु के आत्महत्या की भी खबर आई थी। राजस्थान में एक पुजारी को जला कर मार डाला गया था। उत्तर प्रदेश के ही बुलंदशहर और सुल्तानपुर में साधुओं की हत्या की खबरें आई थीं। सुल्तानपुर में साधु का शव पेड़ से लटका मिला था।

‘जिस लिफ्ट में ऑस्ट्रेलियन, उसमें हमें घुसने भी नहीं देते थे’ – IND Vs AUS सीरीज की सबसे ‘गंदी’ कहानी, वीडियो वायरल

मेहमान क्या होता है, यह शायद ऑस्ट्रेलियन को नहीं मालूम! अगर होता तो IND Vs AUS सीरीज में भारतीय खिलाड़ियों के साथ जो व्यवहार किया गया, वो नहीं होता। रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच आर श्रीधर के साथ यूट्यूब बातचीत में इससे जुड़ी घटना सुनाई।

ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने बताया कि भारतीय क्रिकेटरों को सिडनी में लिफ्ट में प्रवेश करने की अनुमति सिर्फ तब थी, अगर उसके अंदर पहले से कोई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी न हो। एक भी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के लिफ्ट में होने पर भारतीय टीम के किसी भी प्लेयर को लिफ्ट में घुसने नहीं दिया जाता था।

ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ियों और वहाँ के क्रिकेट प्रशासन से लेकर मैच देखने आए दर्शकों तक के नस्लभेदी रवैये से पूरी दुनिया वाकिफ है। पहले टेस्ट में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद ‘क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है’ वाली लाइन को भारतीय टीम ने चरितार्थ किया। लेकिन यह ऑस्ट्रेलिया को पचा नहीं।

ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट प्रशासन ने टीम इंडिया को अस्थिर करने के लिए बायो-बबल से लेकर तरह-तरह के रोक-टोक लगाए। वहीं दूसरी ओर उसके खुद के खिलाड़ी FREE होकर घूम रहे थे।

इन्हीं उल्टी-पुल्टी रोक-टोक का जिक्र पहली बार अश्विन ने किया, जिसका जिक्र समाचार या मीडिया के माध्यम से हम तक नहीं पहुँच पाया था। अश्विन ने फील्डिंग कोच श्रीधर को बताया कि भारतीय क्रिकेटरों को सिडनी में लिफ्ट में प्रवेश करने की तब तक अनुमति नहीं थी, जब तक ऑस्ट्रेलियाई टीम का कोई भी सदस्य पहले से ही लिफ्ट के अंदर हो। अश्विन ने बताया:

“हम सिडनी पहुँचे। उन्होंने हम सब पर गंभीर प्रतिबंध लगा रखे थे। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई टीम दोनों ही बायो-बबल में थे। लेकिन जब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी लिफ्ट में होते थे, तो भारतीय खिलाड़ियों को इसके अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।”

अश्विन ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के हर एक प्लेयर के लिए यह ‘बहुत बुरा अनुभव’ था। इसके बाद उन्होंने कहा:

“हमें उस समय बहुत बुरा लगा। हम एक ही बायो-बबल में थे। लेकिन लिफ्ट में एक साथ नहीं जा सकते थे। हम सबके लिए यह सोच और समझ पाना बहुत मुश्किल था।”

अमित शाह ने किया ‘आयुष्मान CAPF’ का शुभारंभ: 28 लाख से अधिक जवान देश में कहीं भी करा पाएँगे इलाज

नेताजी सुभाष चंद्र की 125वीं जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार (23 जनवरी, 2020) को असम के गुवाहाटी में सीएपीएफ कर्मियों और उनके आश्रितों के लिए आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान अमित शाह ने कहा, नेताजी ने नारा दिया था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा। ये नारा आज भी देश के युवाओं में चेतना और उत्साह को भरता है। राष्ट्रभक्ति को बढ़ावा देता है।

गृह मंत्री ने ‘आयुष्मान सीएपीएफ’ योजना शुरूआत करते हुए कहा, “CAPF के सभी जवानों और उनके परिवारों के लिए आयुष्मान CAPF योजना शुरू हो रही है। इसके लिए आज से अच्छा दिन नहीं हो सकता था। सुभाष बाबू ऐसे व्यक्तित्व थे जिसको किसी ने कोई अवॉर्ड नहीं दिया, जनता उनके साथ नेताजी का सम्मान जोड़कर उनको याद करती है।”

आयुष्मान भारत योजना की जानकारी देते हुए शाह ने कहा, “आयुष्मान CAPF योजना के तहत CAPF के लगभग 10 लाख जवान और अधिकारी और 50 लाख के आसपास उनके परिवार और परिजन देश के अंदर 24 हज़ार अस्पतालों में सिर्फ कार्ड लेकर उसे स्वैप करके इलाज करा सकते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह योजना जवानों के लिए काफी कारगर साबित होगी। जिसके तहत, सीएपीएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के लगभग 28 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को ‘आयुष्मान भारत: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (एबी पीएम-जेएवाई) में शामिल किया जायेगा।

अमित शाह ने सभी सीएपीएफ के जवानों और उनके परिजनों को एक हेल्थ कार्ड देने की बात कहते हुए कहा, “हर साल सीएपीएफ के जवानों का स्वास्थ्य परीक्षण होगा। हेल्थ कार्ड से आपको अपनी स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियाँ कभी भी प्राप्त हो सकेंगी। सीएपीएफ के जवान, पुलिस के जवान कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति पर खड़े रहे। कई जवान इस बीच संक्रमित भी हुए, कई जवानों ने अपनी जान भी गँवाई। मैं सभी जवानों के बहुत-बहुत बधाई देता हैं कि आपने इस लड़ाई में सफल भूमिका निभाई।”

बता दें कि इस स्कीम का उद्देश्य आयुष्मान योजना की सूची में शामिल अस्पतालों में कैशलेस और पेपरलेस मेडिकल ट्रीटमेंट प्रदान करना है। इस आयुष्मान CAPF योजना का लाभ देशभर के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों और उनके परिवार को मिलागा, इस योजना के तहत उनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।

गुवाहाटी में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रााधिकरण (एनएचए) और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर गृह मंत्री शाह, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत विश्व सरमा मौजूद थे।

बहन को फुफेरे भाई कासिम से था इश्क, निक़ाह के एक दिन पहले बड़े भाई फिरोज ने की हत्या: अश्लील फोटो बनी वजह

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सगे भाई फिरोज ने निक़ाह के एक दिन पहले अपनी बहन फिरदौस की गोली मारकर हत्या कर दी। खबर के अनुसार, युवती की रविवार (जनवरी 24, 2021) को बारात आनी थी, लेकिन शनिवार (जमनरी 23, 2021) की सुबह युवती के प्रेमी कासिम ने उसकी कुछ अश्लील तस्वीरें भाई को मोबाइल पर भेज दी थी, ताकि उसका निकाह रुक जाए, जिस पर बौखलाए भाई ने उसे मौत के घाट उतार दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में इस्लामनगर इलाके की है। इस्लामुद्दीन की 19 वर्षीय बेटी फिरदौस के निक़ाह की तैयारियों में पूरा परिवार जुटा हुआ था। तभी शनिवार की सुबह घर में टूथपेस्ट कर रही फिरदौस को अचानक उसके बड़े भाई फिरोज ने तमंचे से गोली मार दी। जिससे उसकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मामले को लेकर पुलिस ने बताया कि फिरोज की बहन का खुर्जा निवासी उसके फुफेरे भाई कासिम से चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जिसके बारे में पता चलते ही परिजनों ने उसका निकाह किसी और से तय कर दिया।

प्रेमिका फिरदौस का निकाह कहीं और तय होने पर उसका प्रेमी फुफेरा भाई कासिम आग बबूला हो गया और परिजनों को ब्लैकमेल करने के लिए उसने फिरोज के पास उसकी बहन की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें मोबाइल पर भेज दी। जिसको देखने के बाद उसके भाई का खून खौल उठा और घर में काफी हंगामा हुआ। हालाँकि, परिजनों ने उसे समझा बुझा कर शांत करा दिया था। लेकिन गुस्से से बौखलाए भाई ने शनिवार सुबह दोस्त के तमंचे से बहन के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी।

सीओ कोतवाली अरविंद चौरसिया ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार करते हुए उसके पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया तमंचा बरामद कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना को लेकर पुलिस कासिम को भी गिरफ्तार करने उसके घर पहुँची थी, हालाँकि, वह मौके से फरार था। इसके अलावा पुलिस फिरोज को पिस्टल देने वाले दोस्त की भी तलाश कर रही है।

योगेंद्र यादव का दावा- गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली की मिली अनुमति, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

किसान नेताओं ने शनिवार (जनवरी 23, 2021) को दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन ट्रैक्टर रैली करने की अनुमति दे दी है। जानकारी के मुताबिक किसान नेता अभिमन्यु कोहर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस से मुलाकात की थी और उन्हें ट्रैक्टर रैली की अनुमति मिल गई है।

किसानों ने कहा है कि वह ट्रैक्टर परेड निकालेंगे, लेकिन वह शांतिपूर्वक निकलेगा। ‘इच्छाधारी प्रदर्शनकारी’ योगेन्द्र यादव ने कहा कि हमारे परेड के लिए दिल्ली पुलिस के साथ एग्रीमेंट तय हुआ है। इसके तहत रूट तय हुए हैं। इस संबंध में आखिरी डीटेल पर आज रात तक काम पूरा कर लिया जाएगा।

यादव ने कहा, “बैरिकेड्स हटाए जाएँगे और हम दिल्ली में प्रवेश करेंगे। किसानों के ट्रैक्टर परेड से गणतंत्र दिवस के परेड या सुरक्षा इंतजाम पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा। किसानों का ट्रैक्टर परेड ऐतिहासिक होगा।”

किसान गणतंत्र परेड के नाम से होने वाला इस ट्रैक्टर परेड को लेकर भारतीय किसान यूनियन के गुरनाम सिंह चादुनी ने कहा है कि ट्रैक्टर रैली में भाग लेने वाले किसान भाइयों से अपील है कि वह परेड में अनुशासन बनाए रखेंगे और कमिटी की तरफ से जारी गाइडलाइन का पालन करेंगे, ताकि गणतंत्र दिवस के परेड में किसी को कोई परेशानी न हो।

दिल्ली पुलिस ने अब एक बयान जारी किया है जो कि किसान नेता के दावे के विपरीत हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि प्रस्तावित रैली के मार्गों के संबंध में उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

वहीं सोनीपत पुलिस ने कहा है कि उन्होंने ट्रैक्टर परेड के लिए पर्याप्त उपाय किए हैं और पर्याप्त संख्या में मैनपावर तैनात किए गए हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने पर किसान अड़े हुए थे लेकिन दिल्ली पुलिस उन्हें रैली निकालने से रोकने की कोशिश कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट में भी किसान आंदोलन के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस पर फैसला पुलिस को लेना होगा।

बता दें कि किसान संगठन राजधानी के आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड के लिए अड़े हुए थे। लेकिन दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया था कि गणतंत्र दिवस की वजह से उनके लिए सुरक्षा दे पाना संभव नहीं हो सकेगा और आउटर रिंग रोड की जगह अलग अलग रूट्स के विकल्प दिए थे। यह बात अलग है कि दिल्ली पुलिस के साथ कई दौर की बातचीत के बाद भी किसी तरह का अंतिम नतीजा नहीं निकल पाया था। इस संबंध में शनिवार को होने वाली बैठक पर हर किसी की नजर थी।

दिल्ली एनसीआर में निकलने वाली ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए कई राज्यों के किसान दिल्ली आ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता जोगेंद्र तालु ने शनिवार को दावा किया कि 26 जनवरी को भिवानी जिले से पाँच हजार ट्रैक्टर दिल्ली में प्रस्तावित किसानों की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए रवाना होंगे। 

इससे पहले किसान नेताओं की सरकार के साथ बातचीत शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) को फिर बेनतीजा ही रही। सरकार और किसान के बीच मीटिंग खत्म होने के बाद सरकार ने स्पष्ट कहा कि किसानों को आखिरी प्रस्ताव दिया गया है। सरकार की तरफ से किसान और सरकार के बीच अगली मीटिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है।

किसानों के लंबे समय से चले आ रहे इस आंदोलन पर शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा था कि ऐसी कई ताकते हैं तो आंदोलन को और आगे तक चलाना चाहती हैं। उनका इरादा है कि बातचीत से कुछ अच्छा निकलकर सामने न आए। ऐसी ताकतों से किसानों को दूर रहना चाहिए।

कॉन्ग्रेस ने योगी सरकार को घेरने के लिए शेयर किया महिला का वीडियो, यूपी पुलिस पर लगाए झूठे आरोप: जानें क्या है सच

हाल ही में इंटरनेट पर उत्तर प्रदेश का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें एक महिला यूपी पुलिस के अधिकारियों से दो हमलावरों से उसे बचाने की गुहार लगा रही थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल वीडियो में महिला, अधिकारियों से चीख-चीखकर आरोपितों को गिरफ्तार करने की माँग कर रही थी। जब पुलिस अधिकारियों में से एक ने उसे बताया कि दोषियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद महिला हमलावरों की ओर इशारा करते हुए कहती है कि उन्हें गिरफ्तार करो।

इस मामले में सरकार को घेरने का मुद्दा पाकर कॉन्ग्रेस पार्टी ने तुरंत योगी सरकार पर हमला बोला और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए ट्विटर पर घटना का वीडियो शेयर किया।

वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों का दौर भी शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस पार्टी से सहानुभूति रखने वाले एक कथित पत्रकार ने यूपी पुलिस पर कटाक्ष करते हुए घटना का वीडियो शेयर किया। पत्रकार देवेश पांडे ने दावा किया कि गुंडों द्वारा महिला को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसके मुँह से खून निकलने लगा।

गौरतलब है कि जिस भ्रामक दावे के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए चित्रित करने का प्रयास किया वह असल में उनकी सोच के बिल्कुल विपरीत निकला।

क्या सच में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा किया गया दावा सच है?

आज तक पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) देर रात जब महिला ने पुलिस को लखनऊ की सड़कों पर गश्त करते देखा, तो उसने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और दो लोगों द्वारा मारपीट किए जाने की शिकायत की।

जब पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गई, तो महिला अपने पहले के बयान से पीछे हट गई और आरोपितों के खिलाफ दिए गए अपने बयान से मुकर गई। उसने कहा कि गिरफ्तार किए गए शख्स में से एक उसका भाई है और दूसरा उसका पति है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले में दोनों आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की। Police Commissionerate Lucknow ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से जानकारी दी है कि महिला ने तहरीर देने से मना कर दिया है, लेकिन दोनों अभियुक्तों के विरूद्ध निरोधात्मक कार्यवाही की जा रही है ।

पुलिस डीसीपी सेंट्रल ज़ोन सोमेन वर्मा के मुताबि‍क, दो युवक, एक युवती के साथ हज़रतगंज चौराहे पर बवाल कर रहे थे। युवती सड़क पर गिर गई थी और उसके मुँह से खून निकल रहा था। वर्मा ने कहा कि जब महिला से बाद में घटना के बारे में पूछा गया तो वह तो कुछ बता नहीं पा रही थी और गोलमोल जवाब दे रही थी। इस दौरान तीनों नशे की हालत में थे।

पुलिस ने कहा कि महिला बता रही थी कि एक व्यक्ति उसका पति है और दूसरा उसका भाई है। हालाँकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। पुलिस सभी को थाने लाई और शांति भंग की कार्यवाही करते हुए धारा 151 में दोनों व्यक्तियों का चालान कर दिया और युवती को घर भेज दिया।

मदरसा सील करने पहुँची महिला तहसीलदार, काजी ने कहा- शहर का माहौल बिगड़ने में देर नहीं लगेगी, देखें वीडियो

मदरसे का राजस्व शुल्क न जमा करने पर कुर्की करने पहुँची महिला तहसीलदार को काजी अबुल कलाम ने शहर का माहौल बिगाड़ने की धमकी दी है। मामला मध्यप्रदेश के देवास के नुसरत नगर में स्थित एक मदरसे का है। जहाँ राजस्व शुल्क 1.66 लाख रुपए जमा नहीं करने पर कार्रवाई के लिए पहुँचे अधिकारियों को मौलवियों ने दबंगई दिखाते हुए वापस लौटा दिया।

सोशल मीडिया पर इस घटना का पूरा वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें आप देख सकते है कि किस प्रकार महिला तहसीलदार बार-बार वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ लोगों को मामले में कलेक्टर से बात करने के लिए कह रही है। इसके बावजूद लोग उनकी बात को दरकिनार करते हुए उसे धमकाते हुए नजर आ रहे है।

वीडियो में एक काजी कहता है कि आपको समझना चाहिए कि यह एक धार्मिक जगह है। जिस पर महिला अधिकारी कहती है कि मैं आपकी बात से सहमत हूँ आप बस एक बार कलेक्टर से मिलकर आ जाइए और मुझे एक फोन लगवा दीजिए। जिस पर वहाँ मौजूद एक दूसरा युवक कहता है कि चलो बब्बू भाई कर लेने दो बंद अब हम सीधे धरने पर बैठेंगे। बुलाओ सबको। कर लो सील। हम भी देखते हैं। जाओ खबर करो सबको।

वहीं एक मुस्लिम युवक महिला तहसीलदार पर भड़कते हुए कहता है कि आप को नहीं मालूम कि यह धार्मिक जगह है। आप यहाँ अचानक आ गई। क्या आप माहौल खराब करना चाहती हैं। तो आप किस तरह से यहाँ आ गई। आपको यहाँ आने से पहले यहाँ के लोगों से बात करनी चाहिए थी।

महिला अधिकारी बार-बार उन्हें समझाने की कोशिश करती है कि इसमें माहौल खराब करने वाली कौन सी बात है। लेकिन मुस्लिम भीड़ उसकी एक बात भी सुनने को तैयार नहीं थी। ऊपर से लोग उसी पर चीखते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनकी दबंगई को देखते हुए महिला अधिकारी अपने पूरे अमले के साथ वहाँ से लौट जाती है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, देवास के नुसरत नगर में बने मदरसे का शैक्षणिक डायवर्सन करवाया गया, लेकिन 2013-14 से टैक्स जमा नहीं किया गया। मामले को लेकर मदरसे को संचालित करने वाले को लगभग चार-पाँच बार नोटिस भी दिया गया। लेकिन उन पर किसी भी नोटिस का कोई फर्क नहीं पड़ा।

मदरसे के इस रवैए को देखते हुए शनिवार को तहसीलदार पूनम तोमर राजस्व अमले के साथ मदरसे को सील करने पहुँची थी। जिसपर बौखलाए वहाँ के लोग अधिकारियों से ही दबंगई दिखाने और उन्हें धमकाने लगे। कुर्की करने पहुँची टीम ने उनसे सांकेतिक रूप से एक ही कमरा सील करने की बात उनसे कही। लेकिन नाराज काजी अबुल कलाम ने यह कह दिया कि इस कार्रवाई से शहर का माहौल बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।

घटनाक्रम की पूरी जानकारी महिला तहसीलदार पूनम तोमर ने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गणतंत्र दिवस के पहले नोएडा, गाजियाबाद सहित इन 6 जगहों पर बम रखे जाने की अफवाह: यूपी पुलिस अलर्ट

गणतंत्र दिवस से पहले उत्तर प्रदेश में भय और आतंक का माहौल है। उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और इलाहाबाद में इस सप्ताह 6 फर्जी बम रखे जाने की अफवाह के बाद पुलिस सतर्क हो गई है।

पुलिस ने सभी बॉर्डरों पर सघन जाँच शुरू कर दी है और यहाँ के विभिन्न मॉल, बाजार, होटल तथा सामरिक महत्व के प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। आने वाली 26 तारीख को गणतंत्र दिवस को देखते हुए प्रदेश भर में अलर्ट जारी किया गया है। इसी के चलते राजधानी लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त की गई। कई इलाकों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। हालाँकि, पुलिस ने कुछ मामलों के संबंध में एफआईआर दर्ज की है।

नोएडा

नोएडा के सेक्टर 63 में शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-63 में बम जैसी कोई चीज देखी गई है। सूचना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए और 26 जनवरी के अलर्ट को ध्यान में रखते हुए पुलिस के आला अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुँचे।

पुलिस ने वहाँ पहुँचकर सावधानी बरतते हुए सबसे पहले यातायात को डायवर्ट करने के साथ ही सुरक्षा घेरा बनाया और मौके पर पहुँचे बम निरोधक दस्ते ने उस बम जैसी चीज का परीक्षण शुरू किया। परीक्षण करने पर पता चला कि उसमें कोई भी डेटोनेटर तथा विस्फोटक पदार्थ नहीं था। पुलिस का कहना है कि यह बम जैसी दिखने वाली चीज किसी शरारती तत्व द्वारा रखी गई थी और यह बम लगे इसलिए उसमें एक घड़ीनुमा वस्तु लगा दी गई थी। पुलिस ने उस वस्तु को वहाँ से हटा दिया।

इससे कुछ देर पहले नोएडा सेक्टर 27 के जाने-माने अस्पताल में बम की सूचना मिलने से हड़कंप मच गया। इसकी सूचना मिलते ही तुरंत पुलिस बल और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुँच गए, हालाँकि करीब दो घंटे की जाँच के बाद जब कोई बम नहीं मिला तो पुलिस बल समेत अन्य जाँच टीमें अस्पताल से रवाना हो गईं। अस्पताल में बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड, और फायर ब्रिगेड भी पहुँचे थे।

अस्पताल के रिसेप्शन पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें बेसमेंट में बम होने की सूचना दी गई थी। अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और कुछ देर के बाद ही बम स्क्वायड और डॉग स्क्वायड की टीम पहुँच गई और जाँच शुरू कर दी। इस दौरान बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को खाली कराया गया। डॉग स्क्वायड की टीम भी जाँच में जुट गई। अस्पताल के बेसमेंट में बम होने की सूचना जैसे ही मरीजों और उनके रिश्तेदारों को मिली तो उनमें अफरा-तफरी मच गई। 

गाजियाबाद

गाजियाबाद के थाना मधुबन बापूधाम क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ हाईवे के नजदीक खाली प्लॉट में सिलिंडर बम मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस ने बुधवार (जनवरी 20, 2021) को सिलिंडर बम बरामद किया, जिस पर एक टाइमर भी लगा था। बम निरोधक दस्ते को बुलवाकर इसे डिफ्यूज करा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

प्रयागराज

प्रयागराज में शुक्रवार सुबह किसी ने ट्वीट करके पुलिस को जानकारी दी कि पीवीआर के अंदर बम रखा है। इस सूचना पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी दिनेश सिंह कई थानों की फोर्स के साथ पीवीआर पहुँचे और उन्होंने पूरी सुरक्षा इंतजाम के साथ पीवीआर को खाली कराया।

सभी दुकानें बंद करा दी गईं और लोगों को बाहर कर दिया गया। यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए यातायात पुलिस को लगा दिया गया। 1:00 बजे पहुँचे बम निरोधक दस्ते ने जाँच शुरू की। एक तरफ जाँच होती रही दूसरी तरफ किसी तरह की अव्यवस्था न फैले पुलिस वाले मॉक ड्रिल बताने में लगे रहे। सूचना गलत मिलने पर पुलिस ने राहत की साँस ली। पुलिस अफसरों का कहना है कि फर्जी सूचना देने वाले की तलाश की जा रही है। अभी तक बदमाशों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

कानपुर

यूपी के कानपुर जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिले के सिनेमाघरों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। सोशल मीडिया पर सिनेमाघरों को बम से उड़ा देने की धमकी पोस्ट किए जाने के बाद पुलिस प्रशासन सकते में आ गया। पुलिस ने फौरन एक टीम बनाई और सिनेमाघरों की तलाशी ली। राहत की बात रही कि सिनेमाघरों में किसी तरह की कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली

पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) दीपक भूकर ने बताया कि किसी ने ट्विटर पर कानपुर के साउथ एक्स मॉल में स्थित सिनेमैक्स और कल्याणपुर के गुरुदेव पैलेस तथा मिराज समेत विभिन्न सिनेमाघरों को बम विस्फोट कर उड़ाने की धमकी दी थी। उन्होंने बताया कि इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए बम निरोधक दस्ता सिनेमाघरों में गया और सघन तलाशी ली, लेकिन कोई भी विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।

बताया जा रहा है कि एक टि्वटर अकाउंट से यह धमकी दी गई थी। इसमें उत्तर प्रदेश पुलिस और कुछ मीडिया संस्थानों को टैग किया गया था। ट्वीट पोस्ट किए जाने के बाद उस अकाउंट को डिलीट कर दिया गया। भूकर ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है।  ट्विटर अकाउंट बनाने और धमकी भरा ट्वीट किए जाने के लिए इस्तेमाल हुए आईपी एड्रेस को तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं।