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लाइव TV में दिख गया सच तो NDTV ने यूट्यूब वीडियो में की एडिटिंग, दंगाइयों के कुकर्म पर रवीश की लीपा-पोती

कृषि कानून के विरोध में किसान प्रदर्शनकारियों ने हर जगह भारत की थू-थू करवा दी, लेकिन NDTV पत्रकार रवीश कुमार अब भी हिंसक तत्वों के कुकर्मों पर लीपा-पोती करके उसे ढकने की कोशिशों में लगे हैं। सड़कों पर हुई हिंसा, लाल किला पर जमा भीड़, तिरंगे का अपमान और घायल पुलिसकर्मियों की तस्वीरें जहाँ कल दोपहर से सोशल मीडिया पर तैर रही हैं, वहीं रवीश कुमार अब भी यही प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह सारी अराजकता को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कह दिया जाए।

अपनी इन्हीं कोशिशों को सफल करने के लिए रवीश का और उनके संस्थान का एक नया कारनामा उजागर हुआ है। दरअसल, रवीश के लाइव शो कवरेज में उनके रिपोर्टर ने ग्राउंड से रिपोर्ट दी जिसमें दंगाई स्वयं बता रहे थे कि अधिकारों की लड़ाई के लिए वह हिंसा कर रहे हैं। मगर, जब शो की वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हुई तो उससे वो सेक्शन बिलकुल गायब था।

शो की क्लिप में देख सकते हैं कि रवीश कुमार ने उस सेक्शन की जगह एक वायरल होती वीडियो का इस्तेमाल किया। किंतु ये बताना जरूरी नहीं समझा कि कैसे उसमें प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस पर हमला बोल रहे हैं और उनके चलते पुलिस को दीवारों से नीचे छलांग मारनी पड़ रही है।

यूट्यूब पर अपलोड वीडियो में एनडीटीवी ने खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए उसी सेक्शन को हटाया, जिसमें लाल किले पर पहुँचे लोग बता रहे थे कि वह वहाँ क्यों आए हैं।

रवीश ने कहा – किसान उग्र नहीं हुए, जोश में थे

बात यही खत्म नहीं हुई। रवीश ने कथित किसानों के उग्र बर्ताव को नजरअंदाज करते हुए कहा कि प्रदर्शन तो बहुत शांतिपूर्ण तरह से शुरू हुआ था। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बेकाबू हुई, लाल किले पर अधिक से अधिक ट्रैक्टर आने लगे। रवीश ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी उग्र नहीं थे बल्कि केवल जोश में थे। अगर ऐसा नहीं होता तो लाल किले को खासा नुकसान पहुँच सकता था।

उनके मुताबिक किसानों का तलवार के साथ सड़कों पर आना, लाल किला कब्जाना, घोड़े पर सवार हो पुलिस को खदेड़ना, पुलिस को जानबूझकर मारना, महिला कर्मचारी से बदसलूकी… ये सब उग्र बर्ताव का नतीजा नहीं होता। इसे जोश कहा जाता है।

उग्र ट्रैक्टर रैली ने दिया एंबुलेंस को रास्ता- NDTV

एनडीटीवी के प्रोपगेंडे की हद देखिए कि जब पूरी दिल्ली जानती है कि किसान आंदोलन के कारण सड़कें किस प्रकार बाधित रहीं, तब वह सारी बात घुमाकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को जगह दी, जबकि सच्चाई यह थी कि वो एंबुलेंस भी उसी ट्रैक्टर रैली के कारण असुविधा झेल रही थी।

गौरतलब हो कि दिल्ली में कल सैंकड़ों की संख्या में किसान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर सभी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई। फिर सड़कों पर अराजकता फैला कर कानून अपने हाथ में लिया। उन्होंने न केवल अपने तय मार्ग बदले बल्कि संसद और लाल किला की ओर मार्च भी किया।

इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया व आँसू गैस के गोले छोड़े। मगर, दंगाई ने पुलिस को ही पीटना शुरू कर दिया। पूरी हिंसा ट्रैक्टर रैली में शामिल दंगाइयों की मनमानी के चलते भड़की। फिर भी एनडीटीवी ऐसे घटिया कोशिशों में लगा रहा कि वह अपने दर्शकों को बरगला कर सारा ठीकरा प्रशासन व पुलिस पर फोड़ सके।

26 जनवरी के दिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘कश्मीर वापस लेंगे’ के नारे: अरशद, इमरान समेत 4 गिरफ्तार

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जहाँ पूरे देश में 26 जनवरी को लेकर खुशी का माहौल था, उस समय जयपुर-भोपाल ट्रेन में पाकिस्तान जिंदाबाद और कश्मीर वापस लेंगे जैसे नारे लगाए गए। इस घटना के बाद पुलिस ने 4 युवकों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए चारों युवक उज्जैन से अजमेर जा रहे थे।

आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153(ख)(1)(क) के अंतर्गत कार्रवाई हुई है। इसके तहत 3 साल की सजा का प्रावधान है। चारों आरोपितों की ट्रेन के अंदर बैठे एक वीडियो भी सामने आई है। हालाँकि इसमें वह नारे लगाते नहीं दिखाई दे रहे।

दैनिक भास्कर के अनुसार, सोमवार रात जयपुर-भोपाल एक्सप्रेस उज्जैन जंक्शन से 8.20 पर छूटी थी। इसके बाद कोच नंबर डी-2 में कुछ युवकों को राष्ट्रविरोधी बातें करते सुना गया। जब अन्य यात्रियों ने इस पर आपत्ति जताई, तो चारों युवक व उनके साथ के लोग मारपीट पर आमादा हो गए।

बात बढ़ी तो अन्य यात्रियों ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। लेकिन तब तक सभी आरोपित फरार होने की कोशिश करने लगे। जब ट्रेन रात 9:20 पर नागदा जंक्शन पहुँची, तो वहाँ जीआरपी ने चार युवकों को हिरासत में ले लिया। वहीं इनके कुछ साथी फरार हो गए।

टीआई ने घटना के संबंध में बताया कि पकड़े गए युवकों में शाजापुर का अरशद और इमरान खान और उज्जैन के आगर रोड सम्राट नगर निवासी जैदखान व खंदार मोहल्ला निवासी साहेबुद्दीन हैं। चारों और फरार हुए उनके साथी अजमेर जा रहे थे।

बता दें कि इस पूरे मामले में उज्जैन के अंकपात मार्ग निवासी सूरज सेन ने शिकायत करवाई है। सूरज ने आरोपितों पर इल्जाम लगाया कि वह, देश विरोधी बातें कर रहे थे, इसलिए पहले उन्होंने उन सबको ऐसा करने से मना किया। लेकिन बात मानने की बजाय युवकों ने उन्हीं के साथ मारपीट शुरू कर दी।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का मामला दिल्ली के खान मार्केट से सामने आया था। स्थानीय लोगों की शिकायत पर पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घटना में शामिल दो पुरुषों, एक नाबालिग और तीन महिलाओं को पकड़ा था। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने यहाँ किराए पर बाइक्स लीं और एक-दूसरे से रेस लगाने लगे। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे का नाम देशों के नाम पर रखा, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था।

अब पूरे देश में ‘किसान’ करेंगे विरोध प्रदर्शन, हिंसा के लिए माँगी ‘माफी’… लेकिन अगला निशाना संसद को बताया

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के शुभ मौके पर हुई ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली के कारण 153 पुलिसकर्मी घायल हुए और जगह-जगह हिंसा हुई। अब भी किसान नेता अपनी गलती न मानते हुए बेशर्मी से हिंसा का बचाव कर रहे हैं, पुलिस पर ही दोष मढ़ रहे हैं और पूरे देश में प्रदर्शन की धमकी दे रहे हैं। राकेश टिकैत की भी बयानबाजी चालू है। किसान संगठनों ने कहा है कि वो केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और इसे पूरे देश में फैलाएँगे।

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि फ़रवरी 1, 2021 को जब देश की संसद में बजट पेश किया जा रहा होगा, तब वो फिर से संसद की तरफ मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हुई जबरदस्त हिंसा के बावजूद ये योजना स्थगित नहीं की गई है। हालाँकि, जनता व पुलिस को हुई परेशानी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट और पुलिस-प्रशासन इस बार सख्त रवैया अख्तियार कर सकता है।

अब तक किसान संगठनों को जो भी थोड़ा-बहुत समर्थन मिल रहा था, इस पूरे दिन के हुड़दंग के बाद उनसे पूछे जा रहे सवालों का वो अजीबोगरीब जवाब दे रहे हैं। अब ये किसान नेता कह रहे हैं कि विरोध प्रदर्शन देशव्यापी हो गया है और वो तीनों कानूनों को खत्म करने के साथ-साथ MSP की गारंटी वाली माँग पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार से बजट सेशन शुरू हो रहा है और ये किसान नेता इस उम्मीद में बैठे हैं कि विपक्षी नेता संसद में उनका बचाव करेंगे।

भाजपा और केंद्र सरकार ने भले ही इस पूरी हिंसा पर कोई आधिकारिक बयान न दिया हो, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय कानून-व्यवस्था को पुनः स्थापित करने की प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ज़रूर किसान नेताओं के उस वादे की याद दिलाएगी, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन के शांतिपूर्ण रहने की बात की थी। पंजाब एक ऐसा राज्य है जो संवेदनशील है, पाकिस्तान की सीमा से सटा है और खालिस्तानी अलगाववादी ताकतें सिर उठा रही हैं – यही कारण है कि किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्रशासन सख्त नहीं हुआ।

पंजाब में चुनाव भी होने हैं, ऐसे में उस वक़्त गड़बड़ी की आशंका भी है। किसानों के लाख प्रयास के बावजूद उनका विरोध प्रदर्शन पंजाब और दिल्ली से सटे हरियाणा-उत्तर प्रदेश के इलाकों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। महिला किसान अधिकार मंच की कविता कुरुगंटी ने कहा कि ये उपद्रवी किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। ऑल इंडिया किसान सभा के पी कृष्णा प्रसाद को लगता है कि अब दूसरे राज्यों के किसान भी उत्साह में आकर सड़कों पर निकलेंगे।

ये सभी इस उम्मीद में चल रहे हैं कि अब ये आंदोलन पैन-इंडिया हो जाएगा। यानी अब ये किसान नेता हिंसा में भी राजनीति की खेती कर के मोदी सरकार के खिलाफ अपने अंध-विरोध को किसानों के हित में आए कृषि कानूनों के सहारे हवा देना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि मीडिया में भले ही उनकी करतूतों के कारण नकारात्मक कवरेज मिली, ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे में पता तो चला। इसीलिए, अब देश भर में अराजकता की तैयारी है।

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू से पल्ला झाड़ते हुए उसे भाजपा का कार्यकर्ता बता दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उसकी तस्वीर होने का दावा किया। जबकि वो बरखा दत्त सरीखों को इंटरव्यू दे-दे कर भिंडरवाला का बचाव करने में लगा हुआ था। राकेश टिकैत ने कहा कि ये किसानों का आंदोलन है और किसानों का ही रहेगा। उन्होंने दावा किया कि बैरिकेडिंग तोड़ने वालों को ये जगह छोड़नी होगी और अब वो इस आंदोलन का हिस्सा नहीं रहेंगे।

अब डैमेज कंट्रोल के लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं क्योंकि उन्हें सरकारी कार्रवाई के साथ-साथ जनभावनाओं का भी भय है। राकेश टिकैत ने दावा किया कि उन्होंने सभी आंदोलनकारियों को अपनी छड़ी लाने को कहा था, जिसमें झंडे लगे हों। लाठी-डंडों से पुलिस की पिटाई होने पर उन्होंने कहा कि आप मुझे एक भी ऐसा झंडा दिखा दीजिए, जिसमें छड़ी न हो, वो अपनी गलती स्वीकार लेंगे। उन्होंने कहा:

“हमारे किसानों के कई ट्रैक्टर वापस नहीं आए हैं। हमारे ट्रैक्टरों को पुलिस ने तोड़फोड़ डाला है। अब पुलिस को उन ट्रैक्टरों को बनवा कर हमें वापस देना होगा और नुकसान की भरपाई करनी पड़ेगी। हम जानकारी जुटा रहे हैं कि कितने ट्रैक्टर तोड़े गए। हिंसा पुलिस ने की या किसी ने भी, हम इसकी निंदा करते हैं। सबका सहयोग रहा है – किसानों का, पुलिस का। गलती पुलिस की है। उन्होंने रूट गलत दिया। बेचारे किसानों को क्या पता कि कहाँ डाइवर्जन है, कहाँ ओवरब्रिज है। वो भटक गए।”

उधर अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में खालिस्तान समर्थकों ने कानून के विरोध में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया और खालिस्तानी झंडे लहराए। वॉशिंगटन के प्रमुख प्रदर्शनकारियों में से एक, नरेंद्र सिंह ने कृषि कानूनों को ‘भारत के मानव अधिकारों और लोकतंत्र का उल्लंघन’ कहा। वह बोले कि वो लोग हर साल 26 जनवरी को काला दिवस के रूप में मनाते हैं, लेकिन इस साल हम भारत में किसानों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

अब्दुल ने 14 साल की लड़की से रेप किया, वीडियो भी बनाया… उसका अब्बा धर्म परिवर्तन कर निकाह के लिए बनाया दबाव

उत्तर प्रदेश के बलिया में 14 साल की एक लड़की का रेप करने के बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में पुलिस ने 22 साल के अब्दुल रहमान को पकड़ा है। रहमान ने 11 जनवरी 2021 को जबरन लड़की के घर में घुस कर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस दौरान उसने उसकी वीडियो क्लिप भी बनाई थी, जिसे दिखा कर वह बार-बार उससे शारीरिक संबंध बनाने की बात कर रहा था। रहमान का अब्बा पीड़िता पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बना रहा था।

पुलिस ने अब इस केस को लव जिहाद समेत अन्य उपयुक्त धाराओं में दर्ज करके रहमान और उसके अब्बा को अरेस्ट कर लिया है। दोनों को जेल भेजा जा चुका है। किशोरी के परिजनों ने शिकायत की थी कि अब्दुल के परिजन किशोरी को धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के लिए धमका रहे थे।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक डॉ विपिन ताडा ने बताया कि बलिया शहर कोतवाली क्षेत्र में अब्दुल रहमान उर्फ गोलू बीती 11 जनवरी को एक घर में घुसा तथा 14 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार किया। आरोपित ने उससे जबरन शारीरिक संबंध बना कर उसकी वीडियो भी बनाई तथा वीडियो क्लिप दिखा कर फिर से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाने लगा।

अब्दुल की इन्हीं हरकतों से तंग आकर पीड़िता ने 13 जनवरी को सारी बातें अपने माता-पिता को बताई। फिर, उसके पिता ने बलिया शहर थाने में अब्दुल रहमान उर्फ गोलू के विरुद्ध आईपीसी की कई धाराओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। जानकारी के अनुसार इस केस में अब्दुल के ख़िलाफ़ बलात्कार, घर में घुसने के आरोप, पॉस्को एक्ट व उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के अंतर्गत नामजद मुकदमा दर्ज हुआ।

बाद में, पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश जारी किया और आरोपित को पकड़ने के लिए टीमें गठित की। मंगलवार को अब्दुल रहमान उर्फ गोलू व उसके पिता कलीम को बलिया शहर कोतवाली क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक दोनों कहीं भागने की फिराक में थे। इन्हें पकड़ने के बाद न्यायालय में पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया।

यहाँ बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रशासन को लव जिहाद मामलों में सख्ती से निपटने के आदेश दिए हुए हैं। हाल में सीतापुर जिले में नाबालिग लड़की का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में एसीजेएम कोर्ट ने आरोपित की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। जिसके बाद लव जिहाद आरोपित की संपत्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई और सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में घर और जमीन को संलग्न किया गया। साथ ही उसकी वैन भी जब्त कर ली गई।

राजस्थान में महादेव मंदिर के 75 वर्षीय सेवादार की हत्या: हाथ-पाँव रस्सी से बँधे, मुँह में ठूँस डाला था कपड़ा

राजस्थान के करौली में पुजारी की हत्या के 4 महीने के भीतर अब राजधानी जयपुर के एक मंदिर में सेवादार की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। ये वारदात सोडाला इलाके में राकड़ी स्थित मेहरा समाज के राकेश्वर महादेव मंदिर की है। सोमवार (जनवरी 25, 2021) की देर रात को मंदिर के 75 वर्षीय वृद्ध सेवादार (केयरटेकर) गिरिराज मेहरा की हत्या कर दी गई। उनके मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था और हाथ-पाँव रस्सी से बाँध डाले गए थे।

मंगलवार की सुबह 6:30 बजे कुछ महिलाएँ जब पूजा के लिए पहुँची तो उन्होंने देखा कि मंदिर का कपाट बंद था, जबकि उस समय तक उसे खोल दिया जाता था। उक्त मंदिर आजाद नगर कॉलोनी में स्थित है। इसका संचालन ‘महरा समाज सेवा समिति’ करता है। जब महिलाओं के काफी आवाज़ लगाने के बाद भी मंदिर का दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने सेवादार गिरिराज मेहरा के बेटे राजेंद्र को फोन किया।

आधे घंटे बाद सुबह के 7 बजे राजेंद्र मंदिर में पहुँचे। जब वो दीवार फाँद कर मंदिर के भीतर घुसे तो उन्होंने देखा कि उनके पिता की लाश पड़ी हुई थी। उनका शव एक बिस्तर पर पड़ा हुआ था। हाथ-पाँव बाँधने के लिए प्लास्टिक की नई रस्सी का इस्तेमाल किया गया था। न सिर्फ मुँह में कपड़ा ठूँस डाला गया था, बल्कि चेहरा भी कपड़े से ढका हुआ था। पुलिस को वारदात के बारे में सूचित किया गया। घटनास्थल पर 50 पुलिसकर्मियों की टीम पहुँची।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा और डीसीपी साउथ हरेंद्र महावर वहाँ पर डॉग स्क्वायड, एफएसएल टीम और फिंगर प्रिंट टीम को लेकर जाँच के लिए पहुँचे। मृतक गिरिराज मेहरा विगत 10 वर्षों से मंदिर में बतौर सेवादार कार्यरत थे। मंदिर से मात्र आधा किलोमीटर दूर ही उनका घर है, जहाँ वो अपनी पत्नी, दो बेटों व अन्य परिजनों के साथ रहते थे। वो रात्रि को प्रतिदिन 8 बजे मंदिर का कपाट बंद कर दिया करते थे।

अन्य दिनों की भाँति सोमवार को भी उनका बेटा उनके लिए भोजन लेकर आया था और फिर चला गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि सेवादार गिरिराज का सबसे अच्छा व्यवहार व रिश्ते थे, ऐसे में रंजिश की आशंका नहीं है। पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए कहा कि कमरे के नजदीक मंदिर के ऑफिस के ताले टूटे हुए थे। मंदिर के पास स्थित पार्क में कुछ नशाखोर भी बैठते हैं, जिन्हें असामाजिक तत्व बताया जा रहा है।

पुलिस को आशंका है कि मंदिर पार्क में आकर नशा करने वाले किसी व्यक्ति के साथ सेवादार की टोका-टोकी या बहस हुई होगी, जो हत्या का कारण बना। चोरी के एंगल से भी जाँच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि वारदात में किसी स्थानीय व्यक्ति का हाथ हो सकता है। या फिर हत्या के कारण को छिपाने के लिए इसे चोरी का रूप दिया गया हो सकता है। फ़िलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है।

अक्टूबर 2020 में राजस्थान के करौली जिला स्थित सपोटरा तहसील के बूकना गाँव में पुजारी बाबूलाल वैष्णव की मौत के मामले ने प्रदेश में हलचल मचा दी थी। प्रशासन इस मामले को शुरुआत में ‘आत्मदाह’ बताती रही थी। पुजारी ने मौत से पहले ही आरोपित कैलाश का नाम ले लिया था, बावजूद इसके उसे गिरफ्तार करने में पुलिस ने 24 घंटे का समय लगा दिया था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने पीड़ित परिवार की मदद की थी।

लहराया गया खालिस्तानी झंडा, लगे भारत विरोधी नारे: वॉशिंगटन में किसान समर्थन की आड़ में खालिस्तान की माँग

कृषि कानून के विरोध की आड़ में खालिस्तान की माँग सामान्य हो चली है। गणतंत्र दिवस पर पंजाब के किसानों का हिंसात्मक रूप व मनमानी देखने के बाद हर ओर जहाँ पूरे आंदोलन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में खालिस्तान समर्थकों ने कानून के विरोध में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया और खालिस्तानी झंडे लहराए।

समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी तस्वीरों में देख सकते हैं कि कई लोगों के हाथों में खालिस्तान के झंडे थे। कुछ पर लिखा है कि हम किसान हैं आतंकी नहीं।

वॉशिंगटन के प्रमुख प्रदर्शनकारियों में से एक, नरेंद्र सिंह ने कृषि कानूनों को ‘भारत के मानव अधिकारों और लोकतंत्र का उल्लंघन’ कहा। वह बोले कि वो लोग हर साल 26 जनवरी को काला दिवस के रूप में मनाते हैं, लेकिन इस साल हम भारत में किसानों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में खालिस्तानी समर्थक समय-समय पर अपनी ओर से खालिस्तान की माँग करते रहते हैं। 1 माह पहले भारतीय दूतावास के पास महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर खालिस्तान का झंडा लहराया गया था। जिसे देख इस बार दूतावास और गाँधी मूर्ति के चारों ओर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

यदि भारत में 26 जनवरी को हुई अराजकता पर बात करें तो मालूम हो कि गणतंत्र दिवस पर कथित किसानों के हिंसक प्रदर्शन के कारण 153 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें से 2 आईसीयू में भर्ती हैं। पुलिस ने कल की घटना के संबंध में 7 एफआईआर दर्ज की हैं।

वहीं दिल्ली की सीमाओं पर अब अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शाम को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, केंद्रीय गृह सचिव और IB के चीफ से मुलाकात कर स्थिति की समीक्षा की।

केंद्रीय गृह मंत्रालय पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है। ITO, नांगलोई कर गाजीपुर में अधिक संख्या में जवानों की तैनाती होगी। 10 CRPF की कंपनियाँ और 5 अन्य सशस्त्र बलों की कंपनियाँ दिल्ली के लिए रवाना हो गई हैं।

ट्रैक्टर पलटने के बाद जिंदा था ‘किसान’, प्रदर्शनकारी अस्पताल नहीं ले गए… न पुलिस को ले जाने दिया: ‘Times Now’ का खुलासा

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की राजधानी में घुस कर ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों ने दिन भर हिंसा की। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई। वो ट्रैक्टर से स्टंट मारते हुए पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ रहा था, लेकिन अपनी ही ट्रैक्टर पलटने के कारण खुद उसके नीचे आ गया। अब ‘टाइम्स नाउ’ की पद्मजा जोशी ने इस घटना को लेकर बड़ा खुलासा किया है।

उन्होंने कहा, “इस महीने की शुरुआत में जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई कर रहा था तो CJI बोबडे ने कहा था कि अगर कुछ गलत हो जाता है तो उस खून के भागी हम लोग नहीं बनना चाहते। आज जो भी हुआ है, वो इन्हीं प्रदर्शनकारियों के हाथों पर लगा हुआ खून है। एक 24 साल के युवा किसान की मृत्यु हो गई और लोगों ने इसे पुलिस के अत्याचार के रूप में दुष्प्रचारित किया। लेकिन, वास्तविकता में जो हुआ वो बात कुछ और ही है।”

बता दें कि ‘Times Now’ के प्रियांक त्रिपाठी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने अपनी आँखों से इस हादसे को देखा। उन्होंने देखा कि जब खून से लथपथ उक्त किसान को दिल्ली पुलिस वहाँ से निकाल कर बचाने की कोशिश कर रही थी और अस्पताल लेकर जा रही थी, तब वहाँ मौजूद ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने ऐसा नहीं करने दिया। पद्मजा जोशी ने संवाददाता प्रियांक के हवाले से ये खुलासा किया और इसे ‘भयावह वास्तविकता’ करार दिया।

‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट में प्रियांक को मौके पर मौजूद देखा जा सकता है और वो पूरे घटनक्रम की कमेंट्री कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दिखाया कि कैसे उक्त किसान प्रदर्शनकारी की ट्रैक्टर पलट गई, जिसके बाद वो बेहोश हो गया। ट्रैक्टर से तेल निकल कर सड़क पर बह रहा था। लेकिन वहाँ ज्यादा से ज्यादा प्रदर्शनकारी जमा हो जाते हैं और वो सभी वहाँ स्थित भाजपा के दफ्तर के पास इकट्ठा होते हैं।

इस दौरान उन्होंने बताया कि इन ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर जम कर पत्थरबाजी भी की है और वो फिर से पथराव पर उतारू हैं, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश में लगी हुई है। उन्होंने भाजपा दफ्तर को भी निशाना बनाया।

लाइव वीडियो में संवाददाता ने बताया कि जहाँ एक्सीडेंट के बाद किसान बेहोश पड़ा था, वहाँ अन्य प्रदर्शनकारी लाठी और तलवार लेकर खड़े होकर पुलिस को धमका रहे थे। उसे इलाज के लिए नहीं ले जाने दिया जा रहा था। ट्रैक्टर पलटने से घायल किसान का पुलिस इलाज कराना चाहती थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के चलते उसकी मौत हुई।

इसी दौरान ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक और फेक न्यूज़ फैला दी थी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया। उन्होंने लिखा था कि लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। लेकिन, असलियत ये थी कि ड्राइवर ने काफी तेज रफ्तार से चल रहे ट्रैक्टर को अचानक से मोड़ दिया, जिसकी वजह से संतुलन बिगड़ गया और ट्रैक्टर पलट गया। अब ट्विटर पर ‘अरेस्ट राजदीप सरदेसाई’ ट्रेंड हो रहा है।

11.5% की आर्थिक वृद्धि दर, 2021 में भारत के लिए IMF का अनुमान: एकमात्र बड़ा देश, जो बढ़ेगा दहाई अंकों के साथ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की अर्थव्यवस्था को अगले वित्तीय वर्ष (2021-22) में 11.5 प्रतिशत तक उछाल देने का अनुमान लगाया। 26 जनवरी 2021 को IMF ने अपनी ताजा वर्ल्ड इकॉनमिक आउटलुक रिपोर्ट में यह दर्शाया है।

दुनिया जब कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है तो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत एकमात्र देश है, जिसकी आर्थिक वृद्धि दर इस साल दहाई अंक में होने का अनुमान है। वैश्विक परिदृश्य देखें तो यह भारत के लिए बड़ी खबर है। साल 2021 के लिए वैश्विक ग्रोथ 5.5% रहने का अनुमान इसी IMF रिपोर्ट में है।

चीन से भी आगे

विकास दर की बात करें तो भारत चीन से भी आगे रहने वाला है। साल 2021 में 8.3% की अनुमानित विकास दर के साथ चीन भारत के बाद दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगी।

तेजी से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था 2022 में भी जारी रहेगी। साल 2022 में भारत की वैश्विक विकास दर 6.8% रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि चीन की विकास दर 5.6% रह सकती है।

पूरी दुनिया का हाल

IMF की वर्ल्ड इकॉनमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार (साल 2021 के लिए) अमेरिकी के लिए 5.1, जापान के लिए 3.1, इंग्लैंड के लिए 4.5, चीन के लिए 8.1, रूस के लिए 3.0 और सऊदी अरब के लिए 2.6 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है।

इसी रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 की बात करें तो फ्रांस में 4.1, इटली में 3.6, स्पेन में 4.7, जापान में 2.4, इंगलैंड में 5, कनाडा में 4.1, चीन में 5.6, सऊदी अरब में 4, ब्राजील में 2.6 और दक्षिणी अफ्रीका में 1.4 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है।

153 पुलिसकर्मी घायल, 7 FIR दर्ज: किसी का सर फटा तो कोई ICU में, राकेश टिकैत ने पुलिस को ही दिया दोष

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों ने जिस तरह से ‘शर्मतंत्र’ का प्रदर्शन किया, उस अराजकता की वीडियो एवं तस्वीरें दुनिया भर में भारत का नाम खराब कर रही हैं। अब दिल्ली पुलिस ने इन मामलों को लेकर 7 FIR दर्ज की है। दिन भर चले हिंसा के इस खेल में 153 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। किसानों ने जगह-जगह पुलिस के साथ झड़प की, जिसमें ये घायल हुए। 2 पुलिसकर्मी लोकनायक अस्पताल और सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर के ICU में भर्ती हैं।

अधिकतर पुलिसकर्मियों के हाथ-पाँव और सिर पर चोटें आई हैं। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे लाल किले में घुसे लाठी-डंडों और तलवारों से लैस प्रदर्शनकारियों के खदेड़ने के कारण पुलिस के जवानों को दीवार कूद-कूद कर जान बचानी पड़ रही है। वहाँ पुलिस के जवानों की लाठी से पिटाई की गई है। इसके बाद ITO और नांगलोई में हिंसा देखने को मिली। दोपहर के कुछ बाद तक घायल पुलिसकर्मियों का आँकड़ा 86 था, जो शाम तक 153 हो गया।

दिल्ली पुलिस के एडिशनल PRO अनिल मित्तल ने बताया कि अधिकतर पुलिसकर्मियों को लाल किला और नांगलोई चौक इलाके में चोटें आई हैं और वो जख्मी हुए हैं। नॉर्थ जिले में 41, ईस्ट में 34, वेस्ट में 27, द्वारका में 30, शाहदरा में 5, आउटर-नॉर्थ में 12 और साउथ जिले में 4 पुलिसकर्मी जख्मी हुए। लोकनायक और सुश्रुत के अलावा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, अरुणा आसफ अली और लाल बहादुर शास्त्री अस्पतालों में इनका इलाज चल रहा है।

दिल्ली गेट स्थित दिल्ली सरकार के लोक नायक हॉस्पिटल में सबसे ज्यादा पुलिसकर्मी भर्ती हैं। वहाँ के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि वहाँ 11 जख्मी पुलिसकर्मी भर्ती हुए हैं। 40 वर्ष के एक पुलिसकर्मी के सिर में गंभीर रूप से जख्म हुआ है। उन्हें ICU में निगरानी के लिए रखा गया है। CT स्कैन रिपोर्ट सामान्य आई है। उन्हें 1 दिन और ICU में रहना पड़ेगा। सुश्रुत में 58 पुलिसकर्मी भर्ती हुए थे, जिनमें से कई डिस्चार्ज भी हुए हैं।

वहाँ भी एक पुलिसकर्मी के सिर में गंभीर चोट आई है, जिसके बाद वो शॉक की अवस्था में हैं। पलवल-फरीदाबाद सीमा पर भी किसान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ हिंसा की। पलवल के एसपी और उनके एक साथी अधिकारी पर तो लगभग ट्रैक्टर चढ़ा ही दिए गए थे, लेकिन वो बाल-बाल बचे। कई बार निवेदन के बावजूद ‘किसानों’ ने पुलिस की एक न सुनी। वहाँ ट्रैक्टर रैली की अनुमति ही नहीं थी। पुलिस लगातार किसान नेताओं से बातचीत की कोशिश करती रही।

दिल्ली के पूर्वी जिले में इस सम्बन्ध में 3 FIR दर्ज की गई है। द्वारका और शाहदरा जिले में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिसकर्मियों की पिटाई, लाल किले में अतिक्रमण, वाहनों की तोड़-फोड़ और हिंसा के मामले में अभी और प्राथमिकी दर्ज होने वाली है। जिस एक किसान की मौत हुई है, वो खुद ट्रैक्टर से बैरिकेडिंग तोड़ने के लिए स्टंट्स करते हुए मारा गया, क्योंकि उसका ट्रैक्टर ही पलट गया। मीडिया के एक वर्ग ने अफवाह फैलाई थी कि वो पुलिस की गोली से मरा।

प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के सम्बन्ध में दिल्ली में पुलिस ने किसान नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कर के उन्हें रूट समझाया था। शाम को राकेश टिकैत ने पुलिस पर गलत रूट बताने के आरोप लगाते हुए कहा कि ‘बेचारे’ किसानों को रास्ता नहीं पता था, इसीलिए वो भटक गए। सुबह 8:30 बजे ही सिंघु सीमा पर 7000 ट्रैक्टर एकत्र हो गए थे। उनकी अगुआई निहंग कर रहे थे। लुटियन जोन में घुसने के लिए पुलिस के जवानों को पीटा गया।

दिल्ली की सीमाओं पर अब अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शाम को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, केंद्रीय गृह सचिव और IB के चीफ से मुलाकात कर स्थिति की समीक्षा की। केंद्रीय गृह मंत्रालय पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है। ITO, नांगलोई कर गाजीपुर में अधिक संख्या में जवानों की तैनाती होगी। 10 CRPF की कंपनियाँ और 5 अन्य सशस्त्र बलों की कंपनियाँ दिल्ली के लिए रवाना हो गई हैं।

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। मंगलवार (जनवरी 26, 2021) सुबह से हुई इस हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों की संख्या 109 हो गई है। दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले जारी बयान में इस हिंसा में 83 पुलिसकर्मी घायल होने की बात सामने आई थी, जिनमें से 55 पुलिसकर्मी LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। दिल्ली पुलिस ने इसकी जानकारी दी। बताया गया कि ये पुलिसकर्मी आईटीओ और लाल किले में किसानों से टकराव के दौरान घायल हुए हैं। पुलिसकर्मियों को एलएनजेपी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। किसानों को काबू करने में लगे पुलिसकर्मी खुद हिंसा का शिकार हो गए। सुबह से चल रही रैली में किसानों ने पूरी दिल्ली को हिला के रख दिया। किसानों के दंगाई रूप ने राजधानी में बवाल मचा दिया।

दिल्ली के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि ट्रैक्टर रैली में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, दिल्ली पुलिस के पीआरओ ईश सिंघल ने बताया कि प्रदर्शनकारी कुछ स्थानों पर हिंसक हो गए। उपद्रवियों के हमले में कई पुलिस कर्मी घायल हो गए। उपद्रवियों ने इस दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचाया। पुलिस ने संयम बरता और जरूरत पड़ने पर ही बल का प्रयोग किया।

पीआरओ ईश सिंघल ने कहा, “किसानों के साथ हुई मीटिंग में कुछ रूट तय किए गए थे। दिल्ली पुलिस ने उसके हिसाब से अपना बंदोबस्त किया। मगर किसान आंदोलनकारी ने इस रूट को नहीं माना। वो तय समय से पहले ही चल पड़े। कई जगह हिंसक घटनाओं को भी अंजाम दिया। जिसमें दिल्ली पुलिस के कई लोग घायल हुए हैं और सार्वजनिक संपत्तियों का भी नुकसान हुआ है। दिल्ली पुलिस ने फिर भी काफी संयम रखा और जरूरत के हिसाब से ही बल का इस्तेमाल किया। अभी भी मेरी किसान प्रदर्शनकारियों से यही अपील है कि वो जो तय रास्ते हैं, उसी से वापस लौट जाएँ और शांति बनाए रखें।”

बता दें कि किसान संगठनों से कई दौर की बातचीत के बाद दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का रूट और समय तय किया गया था। लेकिन किसानों ने समय से पहले ही मनमर्जी से रूट बनाकर ट्रैक्टर परेड शुरू कर दी और कई जगहों पर हिंसा फैलाई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

सूत्रों के मुताबिक 250 बच्चे, जो 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लेने आए थे, वे लाल क़िले में फँस गए थे, डरे सहमे बच्चे क़रीब तीन घंटे तक ठिठुरते हुए में छिपे रहे, रोते रहे, बिलखते रहे, आंदोलनकारियों के हुड़दंग को देख डर से काँपते रहे, थोड़ी देर पहले पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू किया।

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में ट्रैक्टर परेड दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई है। किसान तय रूट को ना मानते हुए आईटीओ और लाल किले जा पहुँचे। लाल किले पर कुछ किसानों ने अपना झंडा भी फहरा दिया। जिसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज करते हुए आँसू गैस के गोले दागे।

ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि आज के ट्रैक्टर रैली के लिए दिल्ली पुलिस ने किसानों के साथ तय हुए शर्तों के अनुसार काम किया और आवश्यक बंदोबस्त किया। दिल्ली पुलिस ने अंत तक काफी संयम का परिचय दिया, परन्तु आंदोलनकारियों ने तय शर्तों की अवहेलना की और तय समय से पहले ही अपना मार्च शुरू कर दिया और साथ ही आंदोलनकारियों ने हिंसा व तोड़-फोड़ का मार्ग चुना, जिसको देखते हुए दिल्ली पुलिस कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयम के साथ ज़रूरी कदम उठाए। इस आंदोलन से जन संपत्ति को काफी नुकसान हुआ है और कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने रखे बैरिकेड्स को किसानों ने ट्रैक्टर से तोड़ दिया। मध्य दिल्ली में बैरिकेड तोड़ने के साथ ही पुलिस वाहनों को भी किसानों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। आईटीओ में कुछ प्रदर्शनकारी एक पुलिसकर्मी को निर्ममता से पीट रहे थे। इस बीच एक हिस्से ने उस पुलिसकर्मी को बचाया भी। ट्रैक्टर पर बैठे प्रदर्शनकारी ने पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाकर कोशिश की। 

आईटीओ में खड़ी सरकारी बसों में तोड़फोड़ की गई। यही नहीं, आईटीओ में ही डीटीसी बस को पलटने का प्रयास हुआ। घोड़े पर बैठे निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दिया। इस प्रदर्शन ने किसानों के बेशकीमती ताज पर एक नायाब ‘काला’ अध्याय जोड़ा है। यह सब कुछ हो रहा है लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि सब शांतिपूर्ण चल रहा है।