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‘कोहली के बिना इनका क्या होगा… ऑस्ट्रेलिया 4-0 से जीतेगा’: 5 बड़बोले, जिनकी आश्विन ने लगाई क्लास

अब जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ही ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दिया है, आइए हम 5 बड़बोलों की बात करते हैं। ये वो 5 बड़बोले हैं, जिन्हें रविचंद्रन आश्विन ने अपने ताज़ा ट्वीट से आइना दिखाया है। हालिया सीरीज में 3 मैचों की 5 इन्निंग्स में 12 विकेट लेने वाले आश्विन अपने मुखर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। तीसरे टेस्ट मैच के दौरान जब ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टीम पेन ने उन्हें गाबा में आने की धमकी दी, तो आश्विन ने भी उन्हें उसी अंदाज़ में जवाब दिया।

उन बड़बोलों में सबसे पहले बात माइकल क्लार्क की। उन्होंने कहा था, “क्या आप सोच सकते हैं कि विराट कोहली के बिना इस बल्लेबाजी क्रम के साथ भारत अगले दो मैचों में किस तरह का प्रदर्शन करने वाला है?” उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि भारत का बल्लेबाजी क्रम गहरी मुसीबत में है। लेकिन, अंतिम मैच में भारत ने दोनों पारियों में कुल मिला कर 665 रन बनाए और क्लार्क सहित सभी बड़बोलों को जवाब दे दिया।

अब बात करते हैं रिकी पोंटिंग की, जिनकी आजकल की कमाई का एक बड़ा हिस्सा भारत से मिलता है क्योंकि वो दिल्ली कैपिटल्स के मुख्य कोच हैं। वही ‘दिल्ली कैपिटल्स’ जिसके बल्लेबाज ऋषभ पंत ने ऑस्ट्रेलिया के मुँह से जीत छीन लिया। पोंटिंग ने कहा था कि विराट कोहली नहीं हैं तो ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज में व्हाइटवॉश भी कर सकता है। एक हार के बाद भारतीय टीम को ऊपर उठाने के लिए कोई नहीं है, ऐसा उनका मानना था। 4-0 का सपना देख रहे पोंटिंग का ऑस्ट्रेलिया 1-2 से हार गया।

जैसा कि सचिन तेंदुलकर ने कहा, हमें हर सेशन में एक नया हीरो देखने को मिला। तीसरे बड़बोले भी ऑस्ट्रेलिया के ही पूर्व कप्तान हैं, जिनका नाम है मार्क वॉ। उन्होंने कहा था, “मुझे तो लग ही नहीं रहा है वो (भारत) कैसे इस सीरीज में वापस आएँगे, खासकर एडिलेड में तीन दिनों में ही मिली इस तरह की हार के बाद।” उन्होंने भी 4-0 से ऑस्ट्रेलिया के सीरीज जीतने की भविष्यवाणी कर डाली थी, लेकिन गलत साबित हुए।

चौथे बड़बोले हैं माइकल बेवन, जिन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज में भारत को पूरी तरह दबा कर रख देगा। उन्होंने भी अपने साथियों की तरह की 4-0 वाली भविष्यवाणी को आगे बढ़ाया था। पूर्व विकेटकीपर ब्रैड हाडिन तो यहाँ तक कह बैठे कि एडिलेड में ही भारत के पास सीरीज जीतने का एक मौका था, जो उसे गँवा दिया। उन्होंने कहा था कि भारत के लिए अब नतीजे पलटना एकदम ही मुश्किल होगा।

लेकिन, इन सबकी भविष्यवाणी उलटी हो गई। आश्विन ने ‘लेफ्ट हैंड साइड (LHS) नॉट इक्वल टू राइट हैंड साइड (RHS)’ लिख कर इन पाँचों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अब OZ (ऑस्ट्रेलिया) टूर का समापन हो रहा है। साथ ही आश्विन ने पिछले एक सप्ताह से मिले प्यार और समर्थन के लिए लोगों का आभार जताया। इसीलिए कहते हैं, क्रिकेट हो या राजनीति, ज्यादा बोलना और पक्षपाती ढंग से विश्लेषण बुरा होता है।

इस सीरीज में चेतश्वर पुजारा भी चमके। चौथे टेस्ट मैच के दौरान 11 बार गेंद से उनके शरीर को निशाना बनाया गया या फिर शरीर पर आकर लगी, लेकिन वो टस से मस नहीं हुए। सीरीज उनके लिए बल्ले से बहुत अच्छा न रहने के बावजूद वो सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में चौथे नंबर पर हैं। उन्होंने 33.88 के औसत से 426 रन बनाए। भारत की तरफ से उनसे ज्याद रन सिर्फ ऋषभ पंत ने बनाया। शुभमण गिल के रूप में भारत को एक नया टेस्ट बल्लेबाज मिला।

हिंदू लड़कियों को झाँसा दे शारीरिक शोषण करने वाला आफताब गिरफ्तार, अश्लील वीडियो से बनाता था धर्म परिवर्तन का दबाव

उत्तर प्रदेश के मेरठ के मवाना थाना पुलिस ने बलरामपुर जिले के मोहम्मद आफताब अहमद को गिरफ्तार किया है। इस पर आरोप है कि यह दो लड़कियों को नौकरी दिलाने के बहाने लेकर आया और बाद में उनका शारीरिक शोषण करके उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। ये दोनों लड़कियाँ बस्ती जिले की हैं। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से दोनों को छुड़ा लिया है। आफताब ने कथिततौर पर इनकी अश्लील वीडियो भी बनाई थी।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि आफताब अहमद बलरामपुर जिले में गौरा थाना क्षेत्र का निवासी है। उसके कब्जे से दो लड़कियाँ मिली हैं। इनकी उम्र 15 और 22 वर्ष है। आफताब के खिलाफ बस्ती के रुदौली थाने पर IPC की धारा 363, 366 के तहत केस दर्ज था। उसको अब बस्ती पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि आफताब लड़कियों को नौकरी का झाँसा देकर अपने जाल में फँसाता है। 3 साल से वह 22 साल की युवती के संपर्क में था। इसी के जरिए वह 15 साल की नाबालिग लड़की से संपर्क में आया और फिर दोनों को नौकरी दिलाने के बहाने मथुरा ले आया। मथुरा से ये दोनों के साथ मवाना पहुँचा। इसके बाद यहाँ शारीरिक शोषण करके उनकी अश्लील वीडियो बनाई और ब्लैकमेल करके इन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।

कुछ समय पहले इस संबंध में हिंदू संगठनों ने पुलिस को शिकायत दी और उसी आधार पर उसके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई हुई। फिलहाल आरोपित बस्ती पुलिस की हिरासत में है। आगे की कार्रवाई भी पुलिस करेगी। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि आफताब कई साल से मेरठ के मवाना क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था। वह यहाँ पर आए दिन लड़कियों को लाता था। कुछ लोग कई बार उससे पूछते तो वह उन लड़कियों को अपनी रिश्तेदार बताता था।

इतना ही नहीं आफताब ऐसी लड़कियों की तलाश करता था जो नौकरी की तलाश में घूम रही हों। उसके बाद वह उनसे दोस्ती करता था। फिर नौकरी का झाँसा देता था और फिर शारीरिक संबंध बनाकर उनकी वीडियो बना लेता था। इस वीडियो के सहारे वह ब्लैकमेल करके उन पर धर्म परिवर्तन का दवाब बनाता था। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट में आफताब अकेला नहीं है, कुछ और लोग भी हो सकते हैं।

पंत ने मैच जिताया लेकिन पुजारा ने 11 गेंदे शरीर पर झेलीं, देखिए वीडियो

आपको याद होगा जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 2018-19 के दौरे के दौरान टेस्ट सीरीज जीती थी। 4 मैचों की उस सीरीज में अगर दोनों तरफ से किसी भी बल्लेबाज ने सबसे ज्यादा रन बनाए थे तो वो थे चेतेश्वर पुजारा। उन्होंने 4 मैचों की 7 इन्निंग्स में 74.43 की बल्लेबाजी औसत से 521 रन ठोके थे। इस टूर में चेतेश्वर पुजारा ने 50 चौके लगाए थे। 3 शतक और एक अर्धशतक के साथ उन्होंने धमाल मचा दिया था, जिसमें 193 रनों की एक बड़ी पारी भी शामिल थी।

इस बार वो बल्लेबाजी से उस तरह का कमाल तो नहीं दिखा पाए लेकिन फिर भी इस सीरीज में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा गेंदें उन्होंने ही खेली। वो पुजारा ही थे, जो दीवार की तरह ऑस्ट्रेलिया की घातक तेज गेंदबाजों की तिकड़ी (मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंस) के सामने खड़े रहे और समय-समय पर भारत के लिए मैच बचाने में योगदान दिया। हालाँकि, इस सीरीज में दुनिया के नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज कमिंस ने उन्हें परेशान ज़रूर किया।

अगर ब्रिस्बेन में हुए अंतिम मैच की बात करें तो चेतेश्वर पुजारा ने चौथी पारी में भारत को जिताने में अहम् भूमिका निभाई। भले ही युवा शुभमण गिल और ऋषभ पंत ने इस मैच को भारत की झोली में डालने में बड़ा योगदान दिया, लेकिन पुजारा एक तरफ से खड़े थे। भारतीय टीम के अन्य बल्लेबाजों को पता था कि मैच को ड्रॉ कराने के लिए एक दीवार खड़ी है। पुजारा ने भी निराश नहीं किया।

चौथे टेस्ट मैच के दौरान 11 बार गेंद से उनके शरीर को निशाना बनाया गया या फिर शरीर पर आकर लगी, लेकिन वो टस से मस नहीं हुए। सीरीज उनके लिए बल्ले से बहुत अच्छा न रहने के बावजूद वो सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में चौथे नंबर पर हैं। उन्होंने 33.88 के औसत से 271 रन बनाए। भारत की तरफ से उनसे ज्याद रन सिर्फ ऋषभ पंत ने बनाया। चेतेश्वर पुजारा एक जुझारू खिलाड़ी का नाम है और उन्होंने इसे इस सीरीज में कई बार साबित किया।

इस सीरीज में शुभमण गिल ने भी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच में पहली बार कदम रखा था। जहाँ तक इस मैच की बात है, ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में मारनस लाबुशेन की शतक की मदद से 369 रनों का स्कोर खड़ा किया था। नटराजन और शार्दुल ठाकुर ने 3-3 विकेट लिए। भारत ने पहली बारी में शार्दुल और सुंदर के पचासों की मदद से 336 रन बनाए। हेजलवुड ने 5 विकेट लिए। लेकिन, दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया को भारत ने 394 पर समेट दिया। अंतिम पारी में भारत ने सफलतापूर्वक लक्ष्य को चेज कर लिया।

WhatsApp पर सरकार हुई सख्त, CEO को 4 पन्नों का पत्र लिख कर माँगा जवाब

व्हाट्सएप (Whatsapp) की नई प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स के डेटा को फेसबुक के अन्य प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज से जोड़ने को लेकर लगातार बहस जारी है। आईटी मंत्रालय में फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Whatsapp की नई पॉलिसी के प्रभाव पर आंतरिक चर्चा (इंटर्नल डिस्कशंस) चल रही हैं। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मैसेजिंग ऐप की गोपनीयता नीति में हालिया बदलावों के बारे में व्हाट्सएप के सीईओ विल कैथार्ट को पत्र लिखते हुए नई नीतियों में बदलाव को वापस लेने का आदेश दिया है।

सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोबाइल मैसेंजर ऐप के सीईओ को कथित तौर पर गोपनीयता, डेटा ट्रांसफर और शेयरिंग पॉलिसी के बारे में सरकार के सवाल का जवाब देने के लिए कहा गया है। सरकार ने व्हाट्सएप के सीईओ को चार पन्नों का पत्र लिख कर जवाब माँगा है।

भारत सरकार ने Whatsapp को मैसेजिंग ऐप की गोपनीयता नीति में बदलावों को यह कहते हुए वापस लेने के लिए कहा है कि एकतरफा बदलाव उचित और स्वीकार्य नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, व्हाट्सएप की सेवा और गोपनीयता नीति के प्रस्तावित बदलाव ‘भारतीय नागरिकों की पसंद और स्वायत्तता के लिए निहितार्थ के बारे में गंभीर चिंताएँ पैदा करते हैं।’ मंत्रालय ने व्हाट्सएप को प्रस्तावित बदलावों को वापस लेने और सूचना की गोपनीयता, पसंद और डेटा सुरक्षा की स्वतंत्रता पर अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने को कहा है।

यह कहते हुए कि भारतीयों का उचित सम्मान किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, “व्हाट्सएप की सेवा की शर्तें और गोपनीयता में कोई भी एकतरफा बदलाव उचित और स्वीकार्य नहीं होगा।” मंत्रालय ने यूजर्स की सूचना सुरक्षा की चिंताओं को उठाया क्योंकि व्हाट्सएप की नई नीति में अन्य फेसबुक कंपनियों के साथ बिजनेस अकाउंट के यूजर्स के मेटाडेटा को साझा करने का प्रस्ताव है।

विल कैथार्ट (Will Cathcart) को कड़े शब्‍दों में लिखे गए इस पत्र में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इनफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मिनिस्‍ट्री ने कहा है कि पूरी दुनिया में व्‍हाट्सएप के सबसे ज्‍यादा यूजर भारत में हैं और इसकी सेवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा बाजार है।

मंत्रालय ने आगे व्हाट्सएप के ‘ऑल-ऑर-नथिंग’ दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई, जो यूजर्स को नई सेवा शर्तों और गोपनीयता नीतियों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करता है। मंत्रालय ने व्हाट्सएप से पूछा है कि वे ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव क्यों लेकर आए हैं जब भारत की संसद पहले से ही पर्सनल डेटा संरक्षण विधेयक पर विचार कर रही है।

यह विधेयक, जो संसद के दोनों सदनों की ज्वाइंट सेलेक्ट कमिटी द्वारा विचार के एक अग्रिम चरण पर है, डेटा प्रोसेसिंग के संबंध में ‘उद्देश्य सीमा’ (purpose limitation) के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है। उद्देश्य सीमा का सीधा सा मतलब है कि कंपनियाँ केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए यूजर्स के डेटा का उपयोग कर सकती हैं, जिसके लिए उसने यूजर्स से सहमति ली है।

अन्य फेसबुक कंपनियों के साथ भारतीय यूजर्स के डेटा के इस व्यापक एकीकरण से व्हाट्सएप के लिए इस सिद्धांत का पालन करना मुश्किल हो जाएगा, अगर यह विधेयक जल्द ही कानून बन जाता है। मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और भारत के लिए अलग गोपनीयता नीतियों पर भी आपत्ति जताई है।

पत्र में यह बताते हुए कि भारत में दुनिया में व्हाट्सएप का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार है, कहा गया है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए यह भेदभावपूर्ण व्यवहार व्हाट्सएप द्वारा भारतीय नागरिकों के हितों के लिए सम्मान की कमी दर्शाता है। इस संदर्भ में, सरकार व्हाट्सएप को याद दिलाती है कि भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए उसके पास एक संप्रभु अधिकार है और वह किसी भी कीमत पर उससे समझौता नहीं करेगा।

भगवान राम के चित्र वाले बैनरों को हटाया, कचरा उठाने वाली गाड़ी में डाल कर ले गए: BJP ने दर्ज कराई शिकायत

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने औरंगाबाद पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद नगर निगम द्वारा नियुक्त कुछ ठेकेदारों ने भगवान राम के चित्र वाले बैनर हटा दिए है और उन्हें कचरा इकट्ठा करने वाले वाहन में ले जाया गया है। इससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं है।

आपको बता दें कि बीजेपी नेताओं ने इन्हीं बैनर्स के द्वारा श्री राम मंदिर के लिए चंदा एकत्रित करने की शुरुआत की थी, जिनका प्रशासन ने ये हश्र किया है। भाजपा के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि उन बैनरों पर, अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए चंदा एकत्र करने का आह्वान किया गया था, मगर आपसी मतभेद के चलते प्रशासन ये हथकंडे अपना रहा है। 

यह बैनर शहर के हिंदू राष्ट्र चौक, मल्हार चौक और अन्य इलाकों में लगाए गए थे। जिनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ प्रभू के मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करना था, ना कि कोई प्रपंच करना। मगर प्रशासन ने इऩ्हें ना सिर्फ हटाया है बल्कि कचरा ढोने वाली गाड़ी में इन्हें ले जाकर हिंदूओं की धार्मिक भावनाएँ भी आहत की हैं। भाजपा नेताओं ने एक ज्ञापन में कहा, “इन बैनरों में कुछ भी उत्तेजक नहीं था, जिससे कोई विवाद पैदा होता।”

पुंडलिक नगर पुलिस स्टेशन के सहायक निरीक्षक घनश्याम सोनवणे ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत का आवेदन मिला है। उन्होंने कहा, “तथ्यों की जाँच की जाएगी और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” 

औरंगाबाद के इन ठेकेदारों पर कार्रवाई की माँग तेज हो गई है। बीजेपी का कहना है कि भगवान राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं। इसलिए ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भगवान के पोस्टर को इस तरह कूड़ा गाड़ी में ले जाने का मुद्दा गर्मा गया है। कार्यकर्ताओं ने ये भी कहा कि अगर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। 

गौरतलब है कि औरंगाबाद शहर का नाम बदलने को लेकर शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (MVA) की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा था, “कॉन्ग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का विचार है कि औरंगाबाद को संभाजीनगर (Sambhaji Nagar) का नाम नहीं दिया जाना चाहिए।” 

राउत ने कहा कि औरंगजेब धर्मनिरपेक्ष नहीं था वो एक क्रूर प्रशासक था। वहीं इस पर पलटवार करते हुए कॉन्ग्रेस के बड़े नेता बाला साहेब थोराट ने कहा कि महाराष्ट्र और केंद्र में पिछले कई साल तक रहे लोग अब नाम बदलने को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी की 173 एकड़ जमीन हुई UP सरकार के नाम दर्ज, आजम खान को झटका

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान को एक बड़ा झटका मिला है। खबर है कि उनकी जौहर ट्रस्ट की 173 एकड़ (70 हेक्टेयर) जमीन यूपी सरकार के नाम दर्ज हो गई है। राजस्व अभिलेखों में जमीन से जौहर ट्रस्ट का नाम काट कर यूपी सरकार के नाम पर चढ़ा दिया गया है।

सपा सांसद आजम खान के ख़िलाफ़ 16 जनवरी 2021 को एडीएम प्रशासन जेपी गुप्ता के कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। मौजूदा जानकारी के अनुसार अखिलेश सरकार में जौहर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी बनी हुई है।

आरोप है कि इसकी खरीद के दौरान उचित शर्तों का पालन नहीं किया गया। बाद में इसी को आधार बनाकर भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयोजक आकाश सक्सेना द्वारा शिकायत की गई।। जाँच हुई तो आरोप सही पाए गए।

पूरे मामले पर एसडीएम कोर्ट में मुकदमा चला और 16 जनवरी को कोर्ट ने जमीन को सरकार को वापस देने का आदेश दिया। अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी-सिविल) अजय तिवारी ने कहा, “ट्रस्ट ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें उन्हें सिर्फ इस शर्त के आधार पर 12 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद की अनुमति दी थी गई कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।”

एडीजीसी ने कहा, “अदालत ने इससे पहले सीतापुर जेल में बंद ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान को नोटिस और समन जारी किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”

बता दें कि अदालत के हालिया आदेश का पालन करते हुए एसडीएम सदर प्रवीण कुमार के इस फैसले के बाद साढ़े बारह एकड़ जमीन तो यूनिवर्सिटी के पास रहेगी, लेकिन करीब 173 एकड़ जमीन (70 हेक्टेयर) राज्य सरकार के नाम दर्ज की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आकाश सक्सेना का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में 1 साल पहले शिकायत की थी। इसमें उनका कहना था कि आजम खान की यूनिवर्सिटी में 173 एकड़ जमीन जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिन शर्तों पर दी गई थी, उनमें से किसी को भी पूरा नहीं किया गया। आजम खान द्वारा किसी भी शर्त का पालन नहीं किया गया। 

वह जाँच रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहते हैं कि जौहर ट्रस्‍ट की इस जमीन पर जौहर विश्वविद्यालय का काम चल रहा है, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई कार्य न होने की बात भी सामने आई है।  उन्होंने माँग की थी कि, चूँकि एक बहुत बड़ा हिस्सा यूनिवर्सिटी का सरकार द्वारा निहित किया जा रहा है। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी को टेकओवर कर लेना चाहिए।

इस्लामी रीति-रिवाज से दफनाने के लिए चाहिए आतंकियों की लाशें, पुलिस ने परिवार वालों से कहा – ‘सवाल ही नहीं उठता’

जम्मू कश्मीर पुलिस ने दिसंबर 30, 2020 को लावेपुरा में मारे गए तीनों आतंकियों के शवों को उनके परिवार को सौंपने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वो तीनों आतंकवादी से और इससे जुड़े सबूत जल्द ही उनके परिजनों के साथ साझा किया जाएगा। सोमवार (जनवरी 18, 2021) को इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) विजय कुमार ने ये जानकारी दी। तीनों को श्रीनगर के बाहर के इलाके लावेपुरा में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था और उनके शव दफना दिए गए थे।

अतहर मुश्ताक, अज़ाज़ अहमद गनी और जुबैर अहमद लोन को 2 दिनों तक पुलिस ने घेर रखा था लेकिन बार-बार आत्मसमर्पण के लिए कहे जाने के बावजूद उन तीनों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में वो मारे गए। तीनों के परिवार सशस्त्र बलों के दावों को नकार रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वो न सिर्फ आतंकवादी थे, बल्कि आतंकियों की मदद भी कर रहे थे। अब तक पुलिस ने इससे जुड़े 60% सबूत इकट्ठे कर लिए हैं।

IGP ने बताया कि जब शत-प्रतिशत सबूत इकट्ठे कर लिए जाएँगे, फिर उनके परिजनों से उसे शेयर किया जाएगा। इन तीनों ने कैसे आतंक का रास्ता अपनाया और उनकी करतूतें क्या थीं, इन सब के बारे में परिजनों को जानकारी दी जाएगी। परिजन कह रहे हैं कि उन्हें इस्लामी रीति-रिवाज से दफनाने के लिए इन आतंकियों की लाशें चाहिए, लेकिन पुलिस ने कहा है कि उन्हें लाशें सौंपे जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

पुलिस ने कहा कि दफ़न करने की प्रक्रिया तो संपन्न हो गई है, वो भी इन तीनों के परिजनों के सामने। तीनों के माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्य और मजिस्ट्रेट भी प्रक्रिया के समय मौजूद थे। सेंट्रल कश्मीर के सोनमर्ग स्थित एक कब्रिस्तान में तीनों को दफनाया गया था। कोरोना वायरस संक्रमण के सामने आने के बाद से ही परिवार वालों को मृत आतंकियों के शव दफनाने के लिए नहीं दिया जा रहा है।

IGP ने कहा कि कोरोना की समस्या घाटी में अब भी बनी हुई है। अगर किसी नागरिक की किसी वजह से मौत होती है तो उस मामले में कुछ निश्चित प्रोटोकॉल हैं, जिन्हें फॉलो किया जाता है। लेकिन, आतंकियों के मामले में अगर परिजनों को शव दे दिए जाते हैं तो हजारों की संख्या में लोग आ जुटते हैं, जो ठीक नहीं है। इसके बाद पुलिस को उन्हें रोकने में खासी दिक्कत आती है। पुलिस ने कहा कि दूरदर्शी हितों को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।

अतहर मुश्ताक के अब्बा ने तो बेलौ गाँव में एक खाली कब्र भी खोद रखी है और उनका कहना है कि वो तब तक वहाँ बैठे रहेंगे, जब तक उनके बेटे की लाश उन्हें नहीं मिल जाती। पुलिस ने बताया है कि एनकाउंटर स्थल से एक असाल्ट राइफल और दो पिस्टल भी मिले हैं, लेकिन परिजन कह रहे हैं कि वो तीनों आम नागरिक थे। जम्मू कश्मीर में इससे पहले भी आतंकियों की ‘अंतिम यात्रा’ में लोगों का जुटान होता रहा है।

इससे पहले पुलिस ने 2 वीडियो जारी किए थे, जिनमें से एक दिसंबर 29 की शाम का है, जबकि एक उसके अगले दिन की सुबह का है। दोनों में ही पुलिस उन तीनों आतंकियों को चेतावनी देती ही दिख रही है, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। आतंकियों ने जिस घर को अपना अड्डा बनाया था, उसे चारों तरफ से घेर लिया गया था। इतनी देर तक चेताए जाने के बावजूद उन्होंने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें मार गिराया गया।

कोहली बाहर, 6 खिलाड़ी चोटिल… फिर भी ऑस्ट्रेलिया में Aussies को हराया: भारतीय खिलाड़ियों ने ढाहा गाबा का किला

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। सलामी बल्लेबाज शुभमण गिल भले ही शतक से चूक गए और भारत की नई दीवार कहे जा रहे चेतेश्वर पुजारा ने अपनी करियर का सबसे धीमा अर्धशतक बनाया, लेकिन फिर भी भारत इस मैच को जीतने में कामयाब रहा। अंत में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली और उनका साथ दिया अपना डेब्यू टेस्ट मैच खेल रहे वाशिंगटन सुंदर ने। इसके साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया से ये टेस्ट सीरीज 2-1 से जीत ली।

इस सीरीज में शुभमण गिल ने भी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच में पहली बार कदम रखा था। जहाँ तक इस मैच की बात है, ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में मारनस लाबुशेन की शतक की मदद से 369 रनों का स्कोर खड़ा किया था। नटराजन और शार्दुल ठाकुर ने 3-3 विकेट लिए। भारत ने पहली बारी में शार्दुल और सुंदर के पचासों की मदद से 336 रन बनाए। हेजलवुड ने 5 विकेट लिए। लेकिन, दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया को भारत ने 394 पर समेट दिया।

इसका कारण रही मोहममद सिराज (5 विकेट) और शार्दुल ठाकुर (4 विकेट) की गेंदबाजी। स्टीव स्मिथ ने जरूर 55 रन बना कर ऑस्ट्रेलियाई पारी को सम्भालना चाहा, लेकिन उन्हें भी सिराज ने चलता किया। इस मैच में रोहित शर्मा ने कुछ अच्छे कैच लिए। वहीं बल्लेबाजी में वो खास कमाल नहीं दिखा सके। अंतिम पारी पूरी तरह युवा गिल और पंत के साथ-साथ पुजारा के नाम रही। अंत में भारत जीतने में कामयाब रहा। पंत ने नाबाद 89 रन बनाए।

ये सीरीज जीत तब आई है, जब ऑस्ट्रेलिया में भारत को तमाम मुश्किलों का समाना करना पड़ा। तीसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने टीम इंडिया के क्रिकेटरों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे वो नाराज़ हो गए थे। ब्रिस्बेन में चौथे और अंतिम टेस्ट मैच से पहले सख्त क्वारंटाइन थोपे जाने से भारतीय क्रिकेटर आक्रोशित थे।

‘नेहरू ने चीनियों को तोहफे में दी थी अरुणाचल की भूमि’ – BJP चीफ जेपी नड्डा ने राहुल गाँधी को उन्हीं के सवाल पर घेरा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी छुट्टियों से लौटने के बाद अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीन द्वारा गाँव बसाने के दावे वाली खबर को शेयर करके मंगलवार (जनवरी 19, 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इस बीच उनका पूरा खेल उन्हीं पर उलटा पड़ गया और एक बार फिर सरेआम उनकी फजीहत हो गई।

हरिभूमि की एक खबर शेयर करते हुए राहुल गाँधी ने लिखा, “उनका वादा याद है- मैं देश नहीं झुकने दूँगा।” दिलचस्प बात यह है कि राहुल का यह ट्वीट ऐसे क्षेत्र को लेकर आया, जिस पर चीन ने नेहरू काल से कब्जा जमाया हुआ है।

उनकी इसी अज्ञानता के कारण ट्विटर पर यूजर तो उनका मजाक उड़ा ही रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने भी फ्रंट पर आकर राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया है। 

पार्टी के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल का पलटवार करते हुए दावा किया कि जिस जगह पर चीन द्वारा गाँव बसा लेने की बात की जा रही है, वहाँ चीन ने कॉन्ग्रेस के शासनकाल में कब्जा किया था। 

केंद्रीय मंत्री लिखते हैं, “अपने गिरेबान में भी झाँका करो कभी-कभी, किसी दूजे पर गर्द झाड़ देना आसां बहुत होता है! जिन लोकेशन्स का आप जिक्र कर रहे हैं उन पर चीन ने कॉन्ग्रेस के शासन काल में कब्जा किया था। एक राष्ट्रीय नेता संवेदनशील तथ्यों से इतना अनजान कैसे हो सकता है?”

उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्विटर पर सिलसिलेवार कई सवाल राहुल गाँधी से पूछ डाले। उन्होंने कहा, “अब जब राहुल गाँधी अपनी मासिक छुट्टियों से लौट आए हैं तो मैं कुछ सवाल करना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका जवाब देंगे।” 

जेपी नड्डा ने लिखा, “राहुल गाँधी, उनका वंश और कॉन्ग्रेस चीन पर झूठ बोलना कब बंद करेंगे? क्‍या वह इस बात से इनकार कर सकते हैं कि हजारों किलोमीटर भूमि, यहाँ तक कि अरुणाचल प्रदेश की जिस भूमि का वो जिक्र कर रहे हैं, वह किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पंडित नेहरू ने चीनियों को तोहफे में दी थी? बार-बार कॉन्ग्रेस चीन के आगे आत्‍मसमर्पण क्‍यों कर देती है?”

अगले ट्वीट में वह कहते हैं, “क्‍या राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस पार्टी के चीन और उनकी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी से हुए एमओयू को खारिज करने की नीयत रखते हैं? क्‍या वह उनके परिवार के नियंत्रण वाले ट्रस्‍टों को चीन से मिले दान को लौटाने का इरादा रखते हैं? या फिर उनकी नीतियाँ और हरकतें चीनी पैसे और एमओयू से चलती रहेंगी?”

नड्डा ने चीन के अलावा कई और मुद्दों पर राहुल गाँधी से सवाल पूछे। उन्‍होंने लिखा, “राहुल गाँधी ने कोरोना को लेकर देश को हतोत्‍साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज जब भारत सबसे कम सक्रिय मामलों वाले देशों में है और हमारे वैज्ञानिकों ने वैक्‍सीन बना ली है तो उन्‍होंने वैज्ञानिकों को बधाई क्‍यों नहीं दी और एक बार भी 130 करोड़ भारतीयों की सराहना नहीं की?”

उन्होंने किसान आंदोलन में कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर पूर्व अध्यक्ष से सवाल पूछे। उन्होंने लिखा, “कॉन्ग्रेस भारत के किसानों को भड़काना और गुमराह करना कब बंद करेगी? यूपीए ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सालों तक क्यों रोका और एमएसपी क्यों नहीं बढ़ाया? कॉन्ग्रेस सरकार के राज में दशकों तक किसान गरीबी में क्यों रहे? क्या उन्हें किसानों के प्रति सहानुभूति केवल विपक्ष में रहते हुए महसूस होती है?”

वह पूछते हैं, “राहुल गाँधी झूठ फैला रहे हैं कि सभी एपीएमसी मंडियों को बंद कर दिया जाएगा। लेकिन क्या एपीएमसी एक्ट को खत्म करना कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं था? क्या उससे मंडी बंद नहीं होती?”

भाजपा अध्यक्ष आगे कहते हैं कि राहुल गाँधी ने तमिलनाडु में जल्लीकट्टू का आनंद लिया। जब सत्ता में थे, तब उनकी पार्टी ने इस पर प्रतिबंध लगाकर तमिल संस्कृति का अपमान क्यों किया। क्या उन्हें भारत की संस्कृति और लोकाचार पर गर्व नहीं है?

अपने इस सभी प्रश्नों को दाग कर नड्डा ने आखिर में कहा, “उम्मीद है कि राहुल गाँधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन सभी सवालों के जवाब दे पाएँगे। अगर वह नहीं करते तो मैं अपने मेहनती मीडिया साथियों से अपील करता हूँ कि वह ये सवाल उनसे जरूर पूछें। ”

कुतुब मीनार किसने बनवाया? NCERT बिना सबूत के पढ़ा रही – ‘गुलाम वंश के सुल्तानों ने बनवाया’ – RTI से खुलासा

क़ुतुब मीनार परिसर के भीतर प्राचीन काल में कई मंदिरों के अस्तित्व की बात कुछ इतिहासकारों ने भी स्वीकार की है। आपने भी यही पढ़ा और सुना होगा कि कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार को बनवाया था। NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की पाठ्य पुस्तकों में भी छात्रों को यही पढ़ाया जा रहा है। इस मामले में लेखक नीरज अत्री ने एक RTI दायर की थी, जिसके जवाब चौंकाने वाले हैं।

उससे पहले जानते हैं कि NCERT की पुस्तक में लिखा क्या है। इसमें कुतुबमीनार की तस्वीर के साथ दिए गए विवरण में बताया गया है कि कुव्वतुल-इस्लाम मस्जिद और मीनार को 12वीं शताब्दी के अंत में बनवाया गया था। साथ ही लिखा है कि दिल्ली के सुल्तानों द्वारा बसाए गए पहले नगर का जश्न मनाने के लिए इसका निर्माण हुआ। आगे बताया गया है कि इसे इतिहास में दिल्ली-ए-कुहना नाम से जाना जाता है, जिसे हम आज पुरानी दिल्ली कहते हैं।

तत्पश्चात लिखा है कि इस ‘मस्जिद’ को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाना शुरू किया था, जिसे मामलुक साम्राज्य के तीसरे सुल्तान इल्तुतमिश ने पूरा करवाया, जो ऐबक का दामाद था। साथ ही पुस्तक के उस पन्ने में मस्जिद क्या होता है और अरबी में इस शब्द का मतलब क्या है, ये सब समझाया गया है। खुत्बा-ए-जुमा के साथ-साथ नमाज पढ़ने के बारे में भी समझाया गया है। फिर मुहम्मद बिन तुगलक के बनवाए बेगमपुरी मस्जिद का जिक्र है।

इसके बाद ‘Brainwashed Republic: India’s Controlled Systemic Deracination’ नामक पुस्तक लिख चुके नीरज अत्री ने इस मामले में नवंबर 21, 2012 में एक RTI दायर की थी। इस पुस्तक में वो पहले ही पाठ्यक्रम में शामिल भारतीय इतिहास की पुस्तकों की पोल खोल चुके हैं। जिस पुस्तक की यहाँ बात हो रही है, वो NCERT की कक्षा-7 की पुस्तक (ISBN 81-7450-724-8) है, जिसका नाम ‘Our Past 2’ है।

इस पुस्तक के 36वें पेज पर ‘फिगर 2’ बता कर कुतुबमीनार का चित्र है और उपर्युक्त विवरण वहीं पर बाईं तरफ छपा हुआ है। नीरज अत्री का सवाल इस फैक्ट पर था कि इसे दिल्ली के दो सुल्तानों कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाया। उन्होंने इस मामले में 5 सवाल पूछे। क्या रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज या रेफेरेंस है, जिसके आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया कि कुतुबमीनार को इन्हीं दोनों सुल्तानों ने बनवाया था? अगर हाँ, तो कौन सा।

इसके जवाब में NCERT के RTI सेल द्वारा दिसम्बर 11, 2012 को दिए गए जवाब में कहा गया था कि ऐसी कोई सर्टिफाइड कॉपी या दस्तावेज उपलब्ध ही नहीं है। दूसरा सवाल था कि ऐसा कोई शिलालेख या पुरालेखिक सबूत भी है क्या, जिससे ये साबित होता हो? इसका जवाब भी ना में मिला। तीसरे सवाल में उन लोगों के नाम माँगे गए थे, जिनकी अनुशंसा के बाद पुस्तक के उक्त अंश को जोड़ा गया।

इसके जवाब में बताया गया कि सदस्यों, मुख्य सलाहकार, सलाहकार और अध्यक्ष के नाम पाठ्य पुस्तक में ही दिए गए हैं। इन तथ्यों का निरीक्षण कर के इन्हें पास किसने किया? इस चौथे प्रश्न का जवाब था कि प्रोफेसर मृणाल मिरि की अध्यक्षता वाली नेशनल मॉनिटरिंग कमिटी ने इसे अनुमति प्रदान की, जिसका जिक्र पुस्तक में भी है। अंतिम सवाल था कि इस तथ्य को लेकर कोई नोट्स हैं, जिसके जवाब में बताया गया कि विभाग की किसी फाइल्स में ऐसा कुछ भी नहीं है।

बता दें कि अत्री ने एनसीईआरटी में तथ्यों के साथ हुई कई छेड़छाड़ के लिए 100 से भी अधिक आरटीआई लगाई थी। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों के बारे में बताया था कि UPA सरकार के आने के बाद उसमें आर्य-द्रविड़ की थ्योरी परोसी गई, जिससे बच्चों के मन में गलत धारणाएँ बैठीं। अत्री ने ऑपइंडिया को बताया था कि भारत सबसे पुरानी सभ्यता है और हमारे पास गौरव करने के लिए इतनी चीजें हैं, फिर भी हम अकेले देश हैं जो अपने ही बच्चों का आत्मविश्वास ख़त्म करते हैं।