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स्वामी विवेकानंद: भारतीय संस्कृति का दुनिया में डंका बजाने वाले राष्ट्रपुरुष का हर दिन होना चाहिए मनन

उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक तुम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते। कर्तव्यपथ पर लगातार डटे रहने का ऐसा ध्येय वाक्य शायद दूसरा नहीं रचा जा सका। आधुनिक दुनिया में सबसे पहले और सबसे मजबूती से भारतीय संस्कृति का डंका बजाने वाले सही मायनों में भारत के राष्ट्रपुरुष स्वामी विवेकानंद का आज जन्मदिन है।

स्वामी विवेकानंद ने वैज्ञानिक सोच और तर्क से हिंदू धर्म को जोड़ दुनिया को जो संदेश दिया उसकी प्रतिध्वनि का नाद आज भी ब्रह्मांड में गूँज रहा है। शिकागो की उस प्रसिद्ध धर्म संसद में ‘मेरे भाइयों और बहनों’ का उनका आह्वान आज भी दुनिया में भाईचारे का संदेश दे रहा है। आज जरूरत है भारत के इस राष्ट्रपुरुष की सीखों पर हर दिन मनन की।

दुनिया हमेशा याद रखेगी कहानी जीतेंद्रीय नरेंद्र की

‘नरेंद्र’ यानी वह मनुष्य जिसने अपनी इन्द्रियों पर विजय पा ली हो। 12 जनवरी, 1863 को एक ऐसे ही महापुरुष का जन्म हुआ जिसने ना केवल भारतवर्ष के लिए एक मिसाल कायम किया बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अद्वितीय प्रतिभा के कारण एक महान विद्वान, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक के रूप में स्थापित हुए।

हम उसी महापुरुष की बात कर रहें हैं, जिनका नाम स्वामी विवेकानंद है, जिन्हें बचपन में ‘नरेंद्र’ (नरेन्द्र नाथ दत्त) के नाम से पुकारा जाता था। युवा चेतना को जागृत करने तथा नैतिक मूल्यों के विकास हेतु प्रतिबद्ध, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक दर्शन एवं मूल्यों को सुदृढ़ तथा उसकी उचित व्याख्या करने, भारतीयता के भाव के प्रखर प्रवक्ता, अध्यात्म और वैज्ञानिकता के समन्वयक तथा मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान हेतु स्वामी विवेकानंद का नाम सदैव याद किया जाता है।

आज का दिन ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद अपने विचारों एवं आदर्शों की वजह से हमेशा युवाओं के ऊर्जा के एक अमूल्य स्रोत के रूप में सदैव विद्यमान हैं, जिन्हें हम पढ़कर सदैव रोमांचित व गौरवान्वित हो जाते हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों और आदर्श ने सिर्फ भारतवर्ष बल्कि सम्पूर्ण विश्व के युवाओं को प्रभावित व प्रेरित किया है। परंतु एक प्रश्न खड़ा हो उठता है कि क्या सही मायने में हम युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात करते हैं या केवल प्रेरणास्रोत भर मान लेने से काम हो जाता है?

यह हम सभी जानते हैं कि अगर युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के एक भी गुण को आत्मसात कर लें तो वही बहुत बड़ी बात होगी। स्वामी विवेकानंद कहते थे, “एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।”

विवेकानंद का सबसे प्रसिद्ध तथा चर्चित संदेश -“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”, अर्थात उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाओ, कमोबेश हर युवा के दिल में एक चित्र के रूप में शोभायमान होना चाहिए। ताकि हम प्रतिदिन उठकर अपने दिल में उस चित्र को देखें और ऊर्जा से लबरेज हो जाएँ। युवा वर्ग केवल इसी संदेश को ही सही मायने में अपना ले तो एक व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

व्यक्ति जब तक अंदर से दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नहीं होगा तब तक संदेश मात्र से न तो स्व-निर्माण होगा और न ही राष्ट्र निर्माण में योगदान संभव हो पाएगा। विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण हेतु युवाओं के सामर्थ्य, उचित शिक्षा तथा चरित्र निर्माण पर विशेष बल देते हैं। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र-निर्माण में शिक्षा के महत्व को लेकर कहते थे कि युवाओं को सशक्त तथा सामर्थ्यवान बनाने के लिए शिक्षा एक मूल साधन है। विवेकानंद का मानना था कि युवा वर्ग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें और जो भी वो पाना चाहते हैं उसके लिए सही देशा में प्रयास करके उसे प्राप्त करें।

सन् 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के द्वारा प्रस्तुत भाषण कमोबेश सभी को याद है। उनके भाषण ने पूरे विश्व का दिल जीत लिया था, आज भी हम सभी उन बातों को याद कर रोमांचित हो उठते हैं। स्वामी विवेकानंद केवल एक महान महापुरुष नहीं बल्कि एक सोच है। और हम युवाओं को इस सोच को आत्मसात करने की जरूरत है।

भारत युवाओं वाला राष्ट्र है। अतः भारतवर्ष का भविष्य हम युवा वर्ग के ऊपर निर्भर करता है। आज हमें सोचने की जरूरत है कि अगर हम स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं आदर्शों को को सही रूप में अपनाना चाहते हैं, अनुसरण करना चाहते हैं तो हमारा हर दिन ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ होना चाहिए। विवेकानंद इस बात के प्रतीक हैं कि हम भारतीय अगर उनकी राह पर चले तो हमें विश्वगुरु बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। विश्वगुरु बनने का मार्ग स्वामी विवेकानंद 19वीं सदी में ही प्रशस्त कर गए हैं। अब जरूरत है 21वीं सदी में उनके बताए मार्ग पर चलने और नए भारत को गढ़ने की।

सोमनाथ पर स्याही फेंकने वाले को कॉन्ग्रेस MLA ने ₹51000 की माला पहनाकर किया सम्मानित, ‘पूजनीय योगी’ को बताया ‘बेस्ट CM’

आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक सोमनाथ भारती पर हुई कार्रवाई को रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक राकेश सिंह ने सही ठहराया है। इसको लेकर वो योगी सरकार के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अपशब्दों व विवादित बयान के मामले में सोमनाथ भारती पर रासुका व देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

इसके साथ ही राकेश सिंह ने सोमनाथ भारती पर स्याही फेंकने वाले हिन्दू युवा वाहिनी के जिला संयोजक जितेंद्र सिंह को 51 हजार रुपए और माला पहना कर सम्मानित भी किया है। इस कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा –

“कल हमारे प्रदेश के देवतुल्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर दिल्ली के आम आदमी पार्टी के पूर्व न्याय मंत्री ने अभद्र टिप्पणी की थी और उसका जवाब जितेंद्र ने उनके मुँह पर कालिख पोतकर बहुत अच्छे से दिया। इसीलिए मैंने सोचा कि इसको 51 हजार रुपए देकर सम्मानित किया जाए। इसने रायबरेली का, पूरे हिन्दू समाज का सम्मान बचाया। ऐसे ईमानदार और कर्मठ मुख्यमंत्री के साथ जो उन्होंने अभद्रता की थी, उसका उनको फल मिल गया।”

गौरतलब है कि रायबरेली सदर के गेस्ट हाऊस में सोमवार (जनवरी 11, 2021) को उस समय हंगामा हो गया जब दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती के ऊपर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओ का विरोध का सामना करना पड़ा। हिन्दू युवा वाहिनी के संयोजक जितेंद्र ने विधायक के ऊपर काली स्याही फेंकने को लेकर भी हंगामा हो गया। 

इस बात को लेकर विधायक और पुलिस में एक दूसरे को देखने की धमकी देने लगे। विधायक सोमनाथ भारती ने कोतवाल से उनकी वर्दी उतरवाने तक की बात कही थी। इस बात को लेकर मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को कॉन्ग्रेस के हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश सरकार की तारीफ करते नजर आए और उन पर उन्होंने AAP विधायक पर देशद्रोह जैसे मुकदमा लगाने की भी बात कही है। 

राकेश सिंह ने आम आदमी पार्टी के विधायक पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को बोले कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसा ईमानदार और पूजनीय मुख्यमंत्री शायद ही किसी प्रदेश में होगा और AAP पार्टी के विधायक, जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की भर्त्सना की अपशब्दों का प्रयोग किया ऐसे विधायक के ऊपर कठोर से कठोर कार्रवाई करें और देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की जगह जगह पूजा होती है। वह लोग उनको भगवान की तरह पूजते हैं। 

उन्होंने कहा कि इतना ईमानदार और कर्मठ और पूजनीय आज तक उत्तर प्रदेश में कोई मुख्यमंत्री नही हुआ है ना आगे होगा। यह पूछे जाने पर कि वो कॉन्ग्रेस के विधायक हैं और कॉन्ग्रेस लगातार भाजपा का विरोध करती है और वो बीजेपी के मुख्यमंत्री की तारीफ कर रहे हैं, इस पर उनका कहना था, “मैं कॉन्ग्रेस का विधायक बना हूँ 40 साल के बाद। मैं जन्म से हिंदू और हिंदुस्तानी हूँ। सीएम योगी और मेरे विचार मिलते हैं, इसलिए मैं उनका समर्थन करता हूँ। उनसे ज्यादा ईमानदार कॉन्ग्रेस में एक भी नेता नहीं है, जितना योगी आदित्यनाथ हैं।”

यह और कोई नहीं यह कॉन्ग्रेस के विधायक राकेश सिंह का कहना है,जो कि रायबरेली के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के छोटे भाई भी हैं जबकि एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भाजपा में है और वर्तमान में हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह भाजपा का पक्ष लेते नजर आ रहे हैं। इससे यह भी लग रहा है कॉन्ग्रेस के विधायक अपनी ही पार्टी के का विरोध कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के योगी की तारीफ कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ‘कॉन्ग्रेस के दलालों होश में आओ’ के नारे लगाए, पार्टी प्रभारी के सामने चली कुर्सियाँ

बिहार की राजधानी पटना में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का मामला सामने आया है। एक बैठक के दौरान पार्टी के लोगों में आपस में ही कहासुनी हो गई। समाचार एजेंसी एएनआई ने पूरी घटना की वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”पटना में कॉन्ग्रेस इंचार्ज भक्त चरण दास की बैठक में तनातनी का माहौल हो गया।”

एजेंसी के अनुसार, ये आपसी झड़प विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार और टिकट डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर शुरू हुई। बाद में मामला हाथापाई तक पहुँच गया और बैठक में मौजूद लोग एक दूसरे से गाली गलौच करने लगे। मंच से सबको चुप कराने का भी प्रयास हुआ लेकिन बात और बिगड़ गई।

वीडियो में देख सकते हैं कि आपसी कहासुनी के बीच वहाँ मौजूद लोग धक्का-मुक्की करने लगते हैं। इस दौरान मंच की ओर कुर्सी भी फेंकी जाती है। नारेबाजी होती है। तभी एक व्यक्ति बीच में आकर कहता है, “कॉन्ग्रेस के दलालों होश में आ जाओ।”

बता दें कि पार्टी प्रभारी बनने के बाद भक्त चरण दास अपनी तीन दिवसीय बिहार यात्रा पर बिहार की राजधानी पटना में मौजूद हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को भी वह सदाकत आश्रम में किसान मोर्चा के साथ बैठक करने गए

बैठक के शुरू होते ही वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं की आपस में कहा सुनी हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि भक्त चरण दास सबसे शांत होने की अपील करते लगे लेकिन अन्य सभी लोग आपसी बहस में उलझ गए।

इससे पूर्व, कल भी एक बैठक के दौरान भक्त चरण दास के सामने पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा था। सभी कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस को मिली हार के कारण प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। यही कारण था कि सोमवार मौका मिलते ही उन्होंने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को बदलने की माँग की।

वहीं, अपनी बैठक में कार्यकर्ताओं को हंगामा करता देख भक्त चरण दास ने पहले उन्हें शांत कराया और फिर उनकी समस्याओं को सुनते हुए हर मसले पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

1000 गर्लफ्रेंड्स वाले बलात्कारी मुस्लिम उपदेशक को हुई 1075 साल की जेल, रेप कर के खिलाता था गर्भ निरोधक दवाएँ

तुर्की में अदनान ओकतार नामक एक मुस्लिम नेता को इस्ताम्बुल की अदालत ने 1075 वर्षों के कड़े कारावास की सज़ा सुनाई है। मजहबी उपदेशक अदनान अपनी 1000 गर्लफ्रेंड्स के साथ ज़िंदगी बिता रहा था। हालाँकि, उनमें से अधिकतर महिलाओं ने उस पर बलात्कार और जबरन सम्बन्ध बनाने के आरोप लगाए हैं। वो तुर्की में मुस्लिमों के एक पंथ का मजहबी मुखिया है। यौन शोषण से लेकर देशविरोधी जासूसी तक, पिछले 1.5 वर्ष से उस पर ये मामले चल रहे थे।

अदनान ओकतार महिलाओं का सार्वजनिक रूप से भी सम्मान नहीं करता था और उनके लिए ‘बिल्लियाँ’ शब्द का इस्तेमाल करता था। अब तक उसके 236 अनुयायियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके संगठन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। उसके खिलाफ सैन्य जासूसी, प्रताड़ना, अपहरण, फोन टैपिंग, धोखाधड़ी, धमकी, हत्या का प्रयास, जालसाजी और यौन शोषण के आरोप भरे पड़े हैं।

अदनान ओकतार को प्लास्टिक सर्जरी कराई हुई महिलाओं के साथ टीवी शोज में डांस करना भी खासा पसंद था। सुनवाई के दौरान उसके खिलाफ एक के बाद एक कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। छापेमारी के दौरान उसके घर से 69,000 गर्भ-निरोधक गोलियाँ निकलीं। उसने खुद ही जज को बताया था कि उसकी 1000 गर्लफ्रेंड्स हैं। उसने अदालत को यह भी बताया था कि महिलाओं के दिल में उसके दिल में लगातार प्यार उमड़ता रहता है और एक मुस्लिम की यही तो खूबी है।

उसने इसे ‘प्यार’ नाम देते हुए कहा था कि मनुष्य के लिए ये सबसे खास होता है। वो कहता था कि उसके पास बाप बनने की असाधारण क्षमता है। अदनान का ‘N9’ नाम का टीवी चैनल भी चलता है और वह कई सेक्स स्कैंडल्स में भी लिप्त रहा है। महिलाओं ने बताया कि अदनान ओकतार ने कई महिलाओं का यौन शोषण कर के जबरन गर्भ-निरोधक गोलियाँ खिलाई हैं। तुर्की के कई अन्य मजहबी नेताओं ने उसकी निंदा की थी।

नाबालिगों के साथ भी अदनान ने बलात्कार किया था। तुर्की में इसके गैंग के लोग सबसे पहले किसी सुन्दर युवती को फाँसते थे और फिर उसके साथ रेप कर के उसे कहते थे कि इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया है। फिर ब्लैकमेल कर के इस्लाम को लेकर उन महिलाओं को उलटी-सीधी शिक्षाएँ दी जाती थीं। 1980 के दशक में कुछ अमीर अनुयायियों को उसने लुभाया था। वो यूनिवर्सिटी ड्रॉपआउट भी है। प्रासीक्यूटर ने बताया कि भारी मेकअप वाली महिलाओं को लेकर वो पागल था।

अरुंधति रॉय ने ‘किसान आन्दोलन’ को बताया बस्तर के नक्सलियों के ‘संघर्ष’ जैसा

दिल्ली सीमा पर जारी किसान विरोधी आंदोलन को बिचौलियों, खालिस्तानियों के साथ ही वामपंथी और अन्य इस्लामी तत्वों द्वारा हाइजैक किए जाने के बाद इसकी विश्वसनीयता खो चुकी है। PFI का समर्थन मिलने के बाद अब अनुभवी प्रदर्शनकारी और भारत विरोधी लेखिका अरुंधति रॉय किसान विरोध वाली जगह पर उपद्रव करने के लिए पहुँच गई है।

9 जनवरी को अरुंधति रॉय ने बहादुरगढ़ में एक धरना-प्रदर्शन स्थल पर बीकेयू के सदस्यों की एक सभा को संबोधित किया। किसानों से बात करते हुए उन्होंने अपने सामान्य लहजे के साथ शुरू किया कि कैसे ‘गोदी मीडिया’ ने पहले ही उन्हें एक नक्सली और राष्ट्र-विरोधी के रूप प्रचारित किया, इसलिए वह पहले किसानों से ‘मिलने नहीं’ आई, ताकि कहीं उन्हें भी उनकी तरह की नक्सली न साबित कर दे। हालाँकि, चूँकि मीडिया ने पहले ही उन्हें ‘आतंकवादी’ के रूप में ब्रांडेड कर दिया है, इसलिए अब वह उनसे मिलने आई है।

दिलचस्प बात यह है कि वास्तव में मीडिया ने इन प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ को समर्थन दिया है और जिसने भी वैध सवाल उठाए हैं, उन्हें बदनाम किया। उदाहरण के लिए, जब खालिस्तानी तत्व प्रधानमंत्री की हत्या के बारे में बयान दे रहे थे, तो मीडिया ने देखा और उन लोगों को बदनाम किया जो खालिस्तानियों की उपस्थिति के बारे में सवाल पूछ रहे थे। इसके अलावा, जब ये बात सामने आई थी कि अधिकांश किसानों को उन तीन कृषि कानूनों के बारे में पता ही नहीं है, जिसका ये विरोध कर रहे थे, तब भी मीडिया ने इनसे सहानुभूति दिखाते हुए इनका समर्थन किया था।

अरुंधती रॉय कहती है कि पूरा देश ‘किसानों’ को दिल्ली की सीमा पर देख रहा है और उन पर अपनी उम्मीदें टटोल रहा है। उसने कहा कि किसानों ने उन वास्तविकताओं को जमीन पर लाया है, जिसे उसके जैसे लोग पिछले 20 वर्षों से लिख रहे थे। याद दिला दें कि अरुंधति रॉय वही लेखिका हैं जिन्होंने सशस्त्र आतंकवादियों और नक्सलियों को ‘बंदूकों के साथ गाँधीवाद’ की संज्ञा दी थी।

हालाँकि, उसके भाषण का सबसे खतरनाक पहलू बाद में आता है। वह कहती है कि सरकार उनके साथ जो भी कर रही है या करने जा रही है, वो ठीक वैसा ही जैसा उन्होंने  ‘बस्तर में लड़ने वालों के साथ’ किया। किसानों से बात करते समय उन्होंने यह कहते हुए बस्तर के नक्सलियों के कार्यों का बचाव किया कि वे ‘लड़ाई’ लड़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने आदिवासियों के जल, जंगल, ज़मीन को छीन लिया और इसे बड़े उद्योगपतियों को दे दिया। वह फिर कहती है कि किसानों के साथ वही खेल खेला जा रहा है।

यह बयानबाजी और कितनी खतरनाक है, इसे 2018 के साक्षात्कार से समझा जा सकता है, जो कि पहाड़ सिंह ने ऑपइंडिया को दिया था। पहाड़ सिंह एक नक्सली थे, जिन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने 18 साल तक जंगल में लड़ाई लड़ी थी।

पहाड सिंह ने कहा कि ये ‘निठल्ले बुद्धिजीवी’ आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और जल, जंगल, ज़मीन के बारे में बयानबाजी करके उन्हें भी नक्सलवाद का लालच दिया गया था।

उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार तेंदू के पत्तों को इकट्ठा करते समय जंगलों में पहली बार नक्सलियों को देखा था। उन्होंने कहा कि नक्सली आदिवासियों से संपर्क करते थे और दावा करते थे कि वे जनजातीय अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। आदिवासी अस्मिता। नक्सली आदिवासियों को बताते थे कि सरकार भ्रष्ट है और आदिवासियों को रोज़गार देने में असमर्थ है इसलिए उन्हें उनकी गरिमा के लिए लड़ने के लिए उनके साथ जुड़ना चाहिए।

पहाड सिंह से पूछा गया था कि वह ‘बेरोजगार बुद्धिजीवियों’ द्वारा प्रदर्शित विरोधाभास के बारे में क्या सोचते हैं क्योंकि वे एक ओर दावा करते हैं कि सरकार द्वारा आदिवासियों को ब्राह्मणवादी दमन द्वारा दबाया जा रहा है और दूसरी ओर आदिवासी स्वयं श्रम का उपयोग करते हैं। उनका जवाब था कि नक्सल नेताओं की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। वे जनजातीय अधिकारों और शक्तियों के बारे में प्रचार करते हैं, जबकि वे आदिवासी आबादी की बुनियादी संरचनाओं और जरूरतों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।

यह पूछे जाने पर कि ‘चार मंजिल’ (एक पहाड़ी जहां बॉलर के साथ सेंट्रल कमेटी के सदस्य या नक्सली विचारक बैठते हैं) में बैठे आदिवासियों पर हुकूमत करने और शासन करने वाले लोग कौन हैं, उन्होंने जवाब दिया कि आदिवासी अधिकारों और न्याय पर बात करने वाले पाखंडी हैं। उनके पास शक्ति थी, उनके पास हथियार थे। जिन आदिवासियों की वे भर्ती करते हैं, उन्हें दुनिया की वास्तविकताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, उनमें से कई ऐसे निर्दोष हैं, जिन्होंने अपने जीवन में कभी ट्रेन नहीं देखी थी, ऐसे लोगों का उनकी सेवा के लिए शोषण किया जाता है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी यह भी नहीं जानते हैं कि गाँव का मुखिया कौन है, माओ की विचारधारा क्या है, यह समझना भूल जाते हैं। वे भरोसा करते हैं कि उन्हें जल, जंगल, ज़मीन’ के नाम पर मनाया जा सकता है। वह कहते हैं कि जबकि बाकी दुनिया विज्ञान और विकास के साथ आगे बढ़ रही है, आदिवासियों के उत्थान के लिए एक असफल विचारधारा कैसे हो सकती है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि पहाड सिंह ने खुद को शहर में 18 वर्षों में पहली बार देखा था।

पहाड़ सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं और यही कारण है कि नक्सली नेता वन क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करते हैं। वे जंगलों से प्राप्त हर प्राकृतिक उत्पाद और खनिज के लिए ठेकेदारों और व्यापारियों से हिस्सेदारी की माँग करते हैं। करोड़ों रुपए जमा होते हैं और इसमें से कोई भी आदिवासियों या निचले कैडर नक्सलियों के पास नहीं जाता है। सारा पैसा उच्च समिति को जाता है। 

वह बताते हैं कि निचले कैडर के नक्सलियों को न तो वेतन मिलता है और न ही लाभ। उनके परिवारों को बताया जाता है कि माओवादी के लिए सेवा निस्वार्थ और समर्पित होनी चाहिए। वह आगे कहते हैं कि शीर्ष नेता और शहरी नक्सली अक्सर बाहरी दुनिया के लिए एक और चेहरा बनाए रखते हैं ताकि सरकार और मीडिया को आदिवासी क्षेत्रों में उनकी गतिविधियों का पता न चले।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ‘जल, जंगल, ज़मीन’ की ट्राफियाँ गरीब वनवासियों को राज्य के खिलाफ हथियार उठाने के लिए लालच देती हैं और अरुंधति रॉय जैसे विचारधारा वाले लोग अच्छी तरह से कमाते हैं।

यह जगजाहिर है कि अरुंधति का प्रयास न केवल प्रदर्शन पर बैठे तथाकथित किसानों को कट्टरपंथी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि वे सरकार के खिलाफ रहें, बल्कि यह भी है कि वो ‘बेरोजगार बुद्धिजीवियों’ के कहने पर उन नक्सलियों का भी बचाव करें जो राज्य के खिलाफ लड़ रहे हैं और पुलिसकर्मियों की हत्या कर रहे हैं।

प्रिय सुप्रीम कोर्ट, अराजकता और नौटंकी को लीगल बनाने के लिए आभार! | Ajeet Bharti video on SC staying farm laws

किसान आंदोलन पर सरकार द्वारा बनाए कानूनों पर रोक लगा कर सुप्रीम कोर्ट ने ब्लैकमेलरों को वैधानिकता प्रदान कर दी है। न सिर्फ अराजकतावादी लोगों को अब ये कहने का मौका मिल गया है कि संसद द्वारा पारित कानून गलत है, बल्कि आगे अब किसी के पास 2000 की भीड़ हो तो वो सरकारों को झुका सकते हैं।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

‘नाबालिग से 1 महीने तक रेप, गुप्तांग में पेट्रोल, सिगरेट से शरीर दागा’: आरोप पर राजस्थान पुलिस ने कहा – ‘मामूली चोट’

राजस्थान से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक नाबालिग लड़के के साथ बलात्कार किए जाने का आरोप लगा है। ये घटना बीकानेर जिले के बज्जू क्षेत्र की है। पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके ही 4 पड़ोसियों ने मिल कर 15 साल के बच्चे का न सिर्फ अपहरण किया, बल्कि 1 महीना तक बँधक बना कर रखा। साथ ही उन पर नाबालिग के साथ कई बार रेप करने का भी आरोप लगाया।

पीड़ित की माँ ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा दिसंबर 15, 2020 को अपने ननिहाल जाने के लिए घर से निकला था। तभी, रास्ते में ही उसके पड़ोसी जसराज बिश्नोई, उसके रिश्तेदार हरीश, सोमराज और विकास ने मिल कर उसका अपहरण कर लिया। आरोप है कि इसके बाद चारों ने पिकअप में पीड़ित बच्चे को बिठा लिया और लूणकरणसर चले गए। वहाँ उसे जबरन शराब पिलाई गई और जम कर मारपीट भी हुई।

पीड़ित परिजनों की शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने बच्चे के गुप्तांग में पेट्रोल डाला और साथ ही उसके शरीर को सिगरेट से भी दागा। जंभेश्वर भादू भाई होटल में नाबालिग के साथ बलात्कार की बात कही गई है। परिजनों ने बताया कि जनवरी 4, 2021 को नाबालिग बच्चा किसी तरह आरोपितों के चंगुल से छूट कर निकला और अपने परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। फिर वो लोग सीधे पुलिस के पास पहुँचे।

बज्जू पुलिस थाने में माँ की शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया है कि जाँच जारी है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीकानेर की एसपी प्रीति चंद्रा ने आरोपित व पीड़ित परिजनों के बीच लम्बे समय से दुश्मनी की बात कही है। पुलिस का कहना है कि बच्चे के गुप्तांग पर व शरीर के अन्य हिस्सों पर ‘मामूली चोटें’ हैं। पीड़ित परिजनों ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की माँग की है।

राजस्थान में पिछले कुछ महीनों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं। अक्टूबर 2020 में आए एक मामले में एक 19 वर्षीय युवती के साथ 8 दिन तक बलात्कार किया गया था। चूरू की इस घटना में 9 लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया था। इसी महीने में आए एक अन्य मामले में भीनमाल क्षेत्र के एक गाँव की दो नाबालिग चचेरी बहनों का अपहरण कर के 4 युवकों ने गैंगरेप किया था। आरोपित दोनों को पहाड़ियों पर फेंक कर भाग गए थे।

सोमनाथ भारती को UP पुलिस ने ‘पेला’, बहुत तेजी से वायरल हो रहा वीडियो: Fact Check

उत्तर प्रदेश जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मौत की धमकी देने वाले आम आदमी पार्टी विधायक सोमनाथ भारती अपने रवैए के चलते पुलिस की हिरासत में है। इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पुलिस द्वारा सोमनाथ भारती हिरासत में पहली शाम तो नहीं ‘पेले’ गए, लेकिन अब पुलिस उन्हें ‘पेलने’ वाली है।

क्या है मामला

ट्विटर पर एक पुलिसकर्मी की वीडियो शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये उस समय की है, जब मीडिया ने रायबरेली पुलिस से सोमनाथ भारती के बारे में पूछा। वीडियो में सुन सकते हैं कि पुलिस अधिकारी मीडिया से बातचीत में कहते हैं, “अभी तो शायद नहीं पेला है। सुबह देखते हैं कि पेलते हैं कि नहीं पेलते।”

‘Ex capt’ नाम के एक ट्विटर अकॉउंट से साझा की गई इस वीडियो पर कई ट्विटर यूजर्स सोमनाथ भारती का मजाक उड़ा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ये वीडियो न तो सोमनाथ भारती से संबंधित है और न ही उत्तर प्रदेश पुलिस के किसी अधिकारी की है। वास्तविकता यह है कि यह वीडियो लगभग 3 साल पुरानी है।

फैक्ट चेक

Zee 24 Taas नाम के यूट्यूब चैनल पर पुलिस अधिकारी की वीडियो 5 अप्रैल 2018 को अपलोड की गई थी। इस वीडियो के अनुसार, जोधपुर सेंट्रल जेल के डीआईजी विक्रम सिंह उस समय सलमान खान के जेल में जाने को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे थे।

वीडियो में सुना जा सकता है कि डीआईजी ने सलमान से जुड़े कई मुद्दों पर मीडिया को बताया। लेकिन 11 मिनट 16 सेकेंड की इस वीडियो में 8 मिनट, 40 सेकेंड पर उनसे किसी पत्रकार ने पूछा कि पिछली बार सलमान खान ने बैरेक में दंड पेले थे, उन्होंने पेंटिंग्स भी की थी, क्या इस बार भी वो दंड पेल रहे हैं?

इस पर डीआईजी कहते हैं, “अभी तो शायद दंड नहीं पेला है। सुबह देखते हैं कि पेलते हैं पेलते कि नहीं।” इस सवाल के बाद भी डीआईजी ने मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए। कुल मिलाकर पुलिस अधिकारी के हाव-भाव, उनके सामने मीडिया चैनल्स के माइक और उनके द्वारा दी जा रही जानकारी से यही साबित होता है कि ये वीडियो सलमान खान की गिरफ्तारी के समय की है, ना कि रायबरेली पुलिस की। सोमनाथ भारती की गिरफ्तारी से या उनके ‘पेले’ जाने की कोई भी साजिश पुलिस नहीं चला रही है।

सोमनाथ भारती से जुड़ा विवाद

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमनाथ भारती कल (जनवरी 11, 2021) सुबह से चर्चा में हैं। रायबरेली में उनके चेहरे पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी। पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता करने पर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बीच सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर कई तरह दावे किए जा रहे हैं। उनसे जुड़े पुराने किस्से दोबारा प्रासंगिक बना दिए गए हैं। कई वीडियो शेयर करके उन पर मीम भी बन रहे हैं।

उनकी यूपी पुलिस को धमकी देते हुए वीडियो भी आई। उन्होंने कहा “आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।”

SC की रोक सरकार की साजिश है आन्दोलन बंद करने की: कोर्ट के फैसले के बाद किसान नेता

दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन में बैठे किसानों की समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को नए कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए आज अपना यह फैसला सुनाया। साथ ही, एक समिति बनाने की भी बात कही। लेकिन इस बीच, अदालत की चिंता को दरकिनार करते हुए किसान नेताओं ने बयान दिया है कि किसान आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ से बात करते हुए कहा, “कानून अपना काम करता रहेगा, लेकिन हमारा आंदोलन चलता रहेगा। हम संतुष्ट नहीं हैं। जब तक बिल वापसी नहीं होगी। हमारी भी घर वापसी नहीं होगी। कानून तो इन्हें वापस करना होगा।”

समिति पर पूछे गए सवाल पर किसान नेता ने कहा, “करेंगे बात करेंगे। सलाह करेंगे। सलाह मशविरा तो कर लेना चाहिए।” इसी प्रकार 26 जनवरी को निकाली गई ट्रैक्टर रैली को लेकर टिकैत ने कहा, “ये रैली होगी और जरूर होगी, देश आजाद हो चुका है उन्हें दिल्ली पुलिस से अनुमति लेने की क्या जरूरत, वह झंडा फहराएँगे और उनको भी देंगे। कोई 26 जनवरी पर झंडा फहराहने की अनुमति लेता है क्या।”

आगे जब कोर्ट में किसान यूनियन की ओर से कोर्ट में अनुपस्थित प्रतिनिधि के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जायज जवाब देने की बजाय कहा, “हाँ, तो छुट्टी पर चले गए होंगे। 15 तारीख की मीटिंग हो जाएगी। तय कर लेंगे फिर।”

टिकैत की तरह ही सिंघु बॉर्डर पर बैठे एक किसान ने भी समाचार एजेंसी एएनआई को कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक का कोई फायदा नहीं है क्योंकि यह सरकार का एक तरीका है कि हमारा आंदोलन बंद हो जाए। यह सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है यह सरकार का काम था, संसद का काम था और संसद इसे वापस ले। जब तक संसद में ये वापस नहीं होंगे हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

इंस्टाग्राम पर यास्मीन ने फँसाया, अल्ताफ की हत्या के बदले करना था मर्डर: खत्म पेट्रोल, एक कॉल और पुलिस ने जिंदा बचाया

मुंबई के मालवाणी में अपहरण और हत्या की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने यास्मीन नाम की एक महिला समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यास्मीन ने सादिक नाम के युवक की मौत के लिए पूरा जाल बिछाया और अपने भाई अल्ताफ की हत्या का बदला लेने के लिए उसका एंबुलेंस में अपहरण किया।

इस बीच पूरी घटना वहाँ मौजूद एक शख्स को खटकी और उसने पुलिस को फोन कर दिया। बाद में पुलिस के प्रयासों से सादिक जिंदा मिल गया। मुंबई पुलिस ने एक्शन में आते हुए अन्य सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार, पूछताछ में आरोपित महिला ने बताया कि 9 जून 2020 को मालवाणी में लोकल ग्रुप एमएम कंपनी और साजिद 313 ग्रुप में ऑटोरिक्शा पार्किंग को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में एमएम कंपनी के मो. सादिक उर्फ मेंटल ने साजिद-313 ग्रुप के मेंबर 24 वर्षीय अल्ताफ शेख की हत्या कर दी और मुंबई से फरार हो गया।

एक दिन अल्ताफ की बहन को मालूम हुआ कि उसके भाई का कातिल सादिक दिल्ली में छिपा हुआ है। जिसके बाद उसने बदला लेने की ठानी। उसने पहले मालवाणी में रहने वाले भाई के दोस्तों से संपर्क किया और फिर अल्ताफ को मारने का षड्यंत्र रचा। इस पूरी वारदात को अंजाम तक पहुँचाने में यास्मीन का साथ फारूख शेख, ओवेश नबिउल्लाह शेख, मो मानिस सैयद, निहाल जाकिर खान और सत्यम पांडे ने दिया।

यास्मीन ने सबको अपने प्लान में शामिल करके पहले इंस्टाग्राम की एक फेक आईडी बनाई और सादिक से दोस्ती का भरोसा दिला कर उसे मुंबई बुला लिया। जब कुछ दिन पहले सादिक वहाँ आया तो यास्मीन ने उसको 9 जनवरी 2021 को छोटा कश्मीर गार्डन के पास मिलने बुलाया। उसी दिन दोपहर में सादिक वहाँ पहुँचा तो पाँचों ने चाकू दिखा कर उसका एंबुलेंस में अपहरण कर लिया।

सबको लगा कि उनका काम प्लान मुताबिक हो गया। मगर, इस बीच घटनास्थल से दूर खड़े आदमी को यह पूरा दृश्य खटका और उसने पुलिस को कॉल लगा दी। इसके बाद जोनल डीसीपी डॉ स्वामी ने इलाके की नाकाबंदी की। अलग-अलग चौराहों पर जाँच शुरू हुई। नतीजतन सारे आरोपित उसी शाम के 7:30 बजे तक पकड़ लिए गए।

पुलिस के अनुसार, जानकारी के बाद उन्हें सादिक के अपहरण का वीडियो मिल गया था। इसके बाद उन्होंने यास्मीन के नंबर का पता लगाया और फिर उसे ट्रेस करते हुए एंबुलेंस का पीछा किया। कुछ ही समय में आरोपित पकड़ में आ गए।

पुलिस का कहना है कि एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म होने पर सभी ने एक इनोवा का इंतजाम कर लिया था। उसमें बैठ कर वह नायगाँव जाने वाले थे। आरोपित महिला की योजना थी कि वह वहाँ के जंगल में ही सादिक की हत्या करेंगे।