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दुनिया के ‘सबसे अमीर’ इंसान ने भारत में खोली कंपनी, बेंगलुरु में रजिस्टर हुई TESLA

अमेरिका की मशहूर इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने भारत आने का निर्णय ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कंपनी की ईकाई बेंगलुरु में होगी। यहाँ वह अपना न केवल रिचर्स एंड डेवलेपमेंट (R&D) यूनिट खोलेगी बल्कि मैन्युफैक्चरिंग का भी काम करेगी।

टेस्ला मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से इस यूनिट को पंजीकृत किया गया है। इसे 8 जनवरी को शामिल किया गया है। कंपनी ने यहाँ अपने निदेशकों को भी चुन लिया है। इनके नाम वैभव तनेजा, वेंकटरांगम श्रीराम, और डेविड जॉन फेंस्टीन हैं।

बता दें कि दिसंबर 2020 में एक ट्विटर यूजर के ट्वीट का जवाब देते हुए टेस्ला प्रमुख एलोन मस्क (Elon Musk) ने कहा था कि टेस्ला भारत में 2020 तक भले ही न हो लेकिन ये 2021 में जरूर वहाँ होगी। इससे पहले कंपनी ने 2020 में यह पुष्टि की थी कि कंपनी भारत में लॉन्च ऑपरेशन करना चाहती है।

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में टेस्ला के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा था कि कंपनी 2021 की शुरुआत तक भारत में अपना परिचालन शुरू कर देगी।

उन्होंने यह भी कहा था कि टेस्ला द्वारा भारत में परिचालन शुरू करने के बाद विनिर्माण के दृष्टिकोण से इसके बारे में बात करना बेहतर होगा। जैव-ईंधन, इथेनॉल, मेथनॉल, जैव-सीएनजी, जैव-डीजल, आदि के क्षेत्र में बहुत सारे शोध चल रहे हैं, जो भारत में प्रमुख ब्रांडों को लाएँगे।

उन्होंने बताया था कि अमेरिकी ऑटो प्रमुख टेस्ला की अगले साल (वर्तमान वर्ष 2021) से भारत में अपनी कारों के लिए इसकी वितरण सुविधा (बिक्री केंद्र) होगी और माँग को देखते हुए वह यहाँ विनिर्माण (manufacturing ) स्थापित करने पर ध्यान देंगे। उनका कहना था कि भारत में अगले 5 वर्षों में दुनिया में सबसे बड़ा ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) निर्माता बनने की क्षमता है।

भारतीय क्षमता पर बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र का इरादा 2030 तक, निजी कारों के लिए 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक कारों के लिए 70 प्रतिशत, बसों के लिए 40 प्रतिशत, और दो और तीन-पहिया वाहनों के लिए 80 प्रतिशत विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करके इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री करने का है, जिससे भारत में EV (इलेक्ट्रिक व्हेकिल) बाजार के विकास की संभावना होगी।

आपको बता दें कि एलोन मस्क अमेजन वाले जेफ बेजोस को पछाड़ते हुए दुनिया के सबसे धनी आदमी बन गए थे। हालाँकि 1-2 दिन के भीतर ही फिर से बेजोस दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन बैठे।

सेक्स, कामुकता, शराब और रिलेशनशिप की बातें: VJ असेन बादशाह सहित चेन्नई में 3 यूट्यूबर्स गिरफ्तार

ग्रेटर चेन्नई की पुलिस ने 3 यूट्यूबर्स को गिरफ्तार किया है। वो यूट्यूब पर ‘चेन्नई टॉक्स’ नामक चैनल चलाते हैं। चैनल के एक वीडियो में ये लोग एक महिला के साथ सेक्स और शराब पीने के बारे में चर्चा कर रहे थे, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। 200 वीडियो वाले इस चैनल के अधिकतर वीडियो वॉक्स-पॉप फॉर्मेट में हैं, जिसमें कई लोगों से अलग-अलग मुद्दों पर बात की जाती है और उन्हें एडिट कर के एक साथ लाया जाता है।

पुलिस का कहना है कि इनमें से अधिकतर वीडियोज में युवक-युवतियाँ सेक्स, कामुकता, रिलेशनशिप और शराब पीने को लेकर चर्चा करते दिखते हैं। शास्त्री नगर पुलिस ने बताया कि ये लोग अधिकतर अपने वीडियो को बसंत नगर बीच पर शूट करते थे। कैमरा और माइक्रोफोन लेकर लोगों से सवाल पूछे जाते थे। पुलिस ने चैनल के मालिक दिनेश (31), वीजे असेन बादशाह (23) और कैमरापर्सन अजय बाबू (24) को गिरफ्तार किया है।

इन सबके खिलाफ सार्वजनिक रूप से अश्लीलता फैलाने के साथ-साथ यौन शोषण का भी आरोप लगाया गया है। कुछ लोगों ने इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने कहा कि बीच पर ये लोग प्रैंक वीडियो शूट कर रहे थे और रोकथाम के लिए आए लोगों को गाली दे रहे थे। पुलिस ने कहा कि महिलाओं से उनके व्यक्तिगत जीवन के डिटेल्स भी पूछे जाते थे। इसी तरह के एक वीडियो में देखी गई एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

महिला इस वीडियो में खुल कर बात करती दिख रही है। लेकिन, उसका कहना है कि इसके वायरल होने के बाद उसे ‘स्लट-शेमिंग’ का सामना करना पड़ा और कई लोगों ने उसे गालियाँ बकीं। महिला का कहना है कि चैनल ने कमेंट्स डिसेबल करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। महिला ने वीडियो के लिए 1500 रुपए लेने की बात कबूल करते हुए कहा कि वीडियो का स्क्रिप्ट ही वायरल होने के लिए तैयार किया गया था।

इन यूट्यूबर्स के खिलाफ IPC की धारा-294(b) (किसी भी सार्वजनिक स्थान या उसके आस पास कोई अश्लील गाना या बातचीत), 354(b) (किसी शख्स द्वारा जबरन किसी महिला के कपड़े उतरवाना या फिर इसके लिए उकसाना), 509 (किसी स्त्री की एकान्तता का अतिक्रमण, किसी शब्द का वस्तु के प्रदर्शन से महिला को ठेस पहुँचाना) और 506 (ii) (किसी को देख लेने की धमकी) के साथ-साथ तमिलनाडु में महिला अपराध के खिलाफ बने कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उनके सारे उपकरणों को जब्त कर के आरोपितों को जुडिशल कस्टडी में भेज दिया गया है। चैनल पर 7 करोड़ से अधिक व्यूज आ चुके हैं। पुलिस चैनल को डिलीट करने के लिए भी प्रयास कर रही है। हालाँकि, वीडियो में क्या अवैध था, इस सम्बन्ध में पुलिस ने मीडिया को कुछ नहीं बताया है। पुलिस ने बताया कि चैनल के लोग ही वीडियो में आसपास से गुजरते लोगों का भी रोल करते थे और इसे नेचुरल रूप में दिखाते थे।

नवंबर 2020 में भी एक यूट्यूबर को गिरफ्तार किया गया था। बिहार मूल के यूट्यूबर राशिद सिद्दीकी ने 4 महीनों में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के मामले में फ़ेक न्यूज़ का फैलाकर 15 लाख रुपए कमाए थे। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने बारे में झूठे दावों के कारण उस पर 500 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। 25 वर्षीय राशिद सिद्दीकी सिविल इंजिनियर था और उसके चैनल पर 3.70 लाख सब्सक्राइबर्स थे। 

10वीं की लड़की के साथ रेप, मूक-बधिर थी… पहचान से बचने के लिए दोनों आँखें भी फोड़ी: बिहार में मधुबनी की घटना

बिहार के मधुबनी में रेप की एक वीभत्स घटना ने सभी को चौंका दिया है। हरलाखी थाना क्षेत्र के एक गाँव में एक नाबालिग मूक-बधिर लड़की के साथ न सिर्फ बलात्कार किया गया, बल्कि बलात्कारी ने किसी नुकीली चीज से उसकी दोनों आँखें फोड़ डालीं। जहाँ पीड़िता की एक आँख लगभग ख़त्म ही हो गई है, दूसरी आँख भी गंभीर रूप से जख्मी है। ये घटना मंगलवार (जनवरी 12, 2021) की है। ग्रामीणों में चर्चा है कि इस घटना में एक नहीं, और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

छात्रा थूमहानी नदी के किनारे एक खेत में अपनी बकरी को खिलाने के लिए पेड़ के पत्ते तोड़ने गई थी। वहाँ पहले से मौजूद एक युवक ने उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया। विरोध करने पर खेत में पड़ी किसी नुकीली चीज से उसकी आँखों पर हमला कर दिया। घटना के बाद वो छात्रा को बेहोशी की हालत में खेत में ही पड़ा छोड़ कर फरार हो गया। जब कुछ ग्रामीण गेहूँ के खेत को देखने आए तो उन्होंने बेहोश पीड़िता को वहाँ पड़ा देखा।

इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत इलाज के लिए PHC उमगाँव में भर्ती कराया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे मधुबनी सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, क्योंकि पीड़िता की हालत बहुत ज्यादा गंभीर थी। देर शाम मधुबनी सदर अस्पताल ने भी हाथ खड़े कर दिए और उसे दरभंगा रेफर कर दिया गया। पीड़िता दसवीं की छात्रा है और उसके पिता गाँव में ही मजदूरी का कार्य कर के गुजर-बसर करते हैं।

पुलिस का कहना है कि उसने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। हरलाखी के थानाध्यक्ष प्रेम लाल पासवान ने इसकी पुष्टि की है। छात्रा के परिजन फ़िलहाल उसके साथ ही हैं। थानाध्यक्ष ने कहा कि आगे छात्रा और पीड़ित परिजनों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। FIR दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने दोषियों को न बख्शने का आश्वासन दिया है। पीड़िता के भाई का बयान दर्ज कर लिया गया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उमगाँव के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर अजित कुमार सिंह ने बताया कि पीड़िता को जब यहाँ लाया गया था, तब उसकी हालत काफी गंभीर थी। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान भी वो होश में नहीं आई थीं। उन्होंने किसी नुकीली चीज से वार किए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि एक आँख पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। स्पीडी ट्रायल के साथ-साथ पीड़ित परिवार की सरकारी प्रावधानानुसार मदद की घोषणा की गई है।

मधुबनी में नाबालिग का रेप (वीडियो साभार: ज़ी बिहार-झारखण्ड)

बिहार में अपराध बढ़ गया है और आए दिन ऐसी कई घटनाएँ सामने आ रही हैं। खुद भाजपा के नेता अपराध में वृद्धि होने की बात स्वीकार करते हुए नीतीश कुमार से गृह मंत्रालय छोड़ने के लिए कह रहे हैं। बिहार में BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी खुलेआम राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं। भाजपा सांसद छेदी पासवान भी इस पर मुखर हैं। ऐसे में राज्य सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिस्री सलमान ने नाबालिग हिन्दू लड़की को फँसाया, घर भी पहुँचा, लोगों ने दम भर मारा: राना अयूब ने कहा – ‘भारत गंदा देश’

प्रोपेगंडा पत्रकार राना अयूब ने एक बार फिर से अपना कट्टर इस्लामी चेहरा दिखाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भला-बुरा कहा है। दरअसल, सलमान अंसारी नाम का एक युवक बेंगलुरु से 17 वर्षीय एक नाबालिग हिन्दू लड़की का पीछा करते हुए उससे मिलने बरेली आ पहुँचा, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों ने उसकी पिटाई कर के उसे पुलिस को सौंप दिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राना अयूब ने दावा किया कि भारत अब आधिकारिक रूप से एक गंदा देश बन गया है।

हुआ यूँ कि बेंगलुरु में रहने वाला 21 वर्षीय सलमान अंसारी लखीमपुर खीरी की एक हिन्दू नाबालिग लड़की से सोशल मीडिया के माध्यम से बातें करता था। बरेली पहुँचने पर पुलिस ने उसे ‘रोकथाम नजरबंदी (Preventive Detention)’ में रखा। उसे रविवार (जनवरी 10, 2021) की शाम को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया गया और रात में थाने में ही रखा गया। स्थानीय हिन्दू कार्यकर्ताओं ने उस पर ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध बनाए गए कानून के तहत कार्रवाई करने की माँग की है।

हालाँकि, पुलिस ने अगले ही दिन एक व्यक्तिगत बेल बॉन्ड के आधार पर उसे जमानत दे दी। बेंगलुरु में बतौर एसी मिस्त्री कार्यरत मुस्लिम युवक ने 2019 से ही बरेली की हिन्दू लड़की का ऑनलाइन पीछा करना शुरू किया था और उससे दोस्ती कर ली थी। अब नाबालिग लड़की के जन्मदिन पर वो वहाँ उससे मिलने आना चाहता था। वो फ्लाइट से बरेली आया। उसके पास से ढेर सरे गिफ्ट आइटम्स भी मिले।

उसने अपने साथ एक सॉफ्ट टॉय (टेडी बियर), काफी सारे चॉकलेट्स और मिठाइयाँ ला रखी थीं। लखनऊ लैंड करने के बाद वो सीधा लड़की के घर के लिए निकल गया। लड़की ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया। वहाँ किशोरी के परिजनों ने उससे पूछा कि वो कौन है। कुछ स्थानीय लोग भी वहाँ जुट गए। वहाँ कुछ लोगों ने इसे ‘जबरन धर्मांतरण’ का प्रयास करार देते हुए उसकी पिटाई की और डायल 112 पर फोन कॉल कर के पुलिस को इसके बारे में सूचना दे दी।

उसके साथ उसका एक साथी भी आया था, जो लोगों के डर से भाग निकला। वो गौरीबाजार थाना क्षेत्र के पखरा का रहने वाला है। उसने सोशल मीडिया पर बात कर के लड़की को फाँसा था और उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया था। ये एकतरफा प्यार का मामला बताया जा रहा है। बातचीत के दौरान उसे ऐसा लगता था कि लड़की भी उसके प्यार में है, इसीलिए वो फ्लाइट से सीधा उससे मिलने पहुँच गया।

पुलिस को सलमान ने बताया कि वो मूल रूप से देवरिया का रहने वाला है। उसके पास मात्र 1500 रुपए और बेंगलुरु-लखनऊ फ्लाइट का टिकट था। सदर कोतवाली SHO सुनील कुमार ने TOI को बताया कि वो लड़की से मिलने आया था। उन्होंने बताया कि लड़की के परिवार वालों ने उक्त युवक से खतरा जताया है, लेकिन उन्होंने कोई FIR नहीं दर्ज कराई। वो लड़की का पीछा कर के उसे नुकसान पहुँचा सकता था, इसीलिए पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था।

इन सबके बावजूद राना अयूब ने इसे ‘प्रेम’ का मामला बताते हुए कहा कि एक मुस्लिम युवक हिन्दू लड़की के साथ ‘डेट’ पर आया और स्थानीय लोगों से उसे पीटा, फिर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्होने पूछा कि सीएम योगी को 2024 में एक चांस देना चाहिए? लड़की के परिवार वालों ने ही उससे खतरा जताया है, फिर भी अयूब चाहती हैं कि नाबालिग हिन्दू लड़की को किसी अनजान शख्स के साथ भेज दिया जाए और सारे नियम-कानून सिर्फ इसीलिए ताक पर रख दिए जाएँ, क्योंकि युवक मुस्लिम है।

ये पहली बार नहीं है जब राना अय्यूब ने इस तरह अपना कट्टर चेहरा दिखाया हो। बाबरी मस्जिद मामले में आरोपितों को क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने अदालत पर ही सवाल उठाते हुए कहा था, “Yee..न्याय..भारत के स्टाइल में“। साथ ही उन्होंने लिखा था कि हम (मुस्लिम) साँस भी नहीं ले सकते। इससे पहले वो मस्जिद में हिन्दू तिवक द्वारा तोड़फोड़ करने जैसी फर्जी खबरें फैला कर भी मुस्लिमों को भड़का चुकी हैं।

इस अमेरिकी इंटरनेट प्रोवाइडर ने लिया फेसबुक-ट्विटर को ब्लॉक करने का फैसला, ट्रंप पर लगे बैन से हैं ग्राहक नाराज

ट्विटर और फेसबुक द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंड सस्पेंड करने के बाद से सोशल मीडिया को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच अब खबर आ रही है कि अमेरिका के उत्तरी इडाहो (Idaho) के इंटरनेट प्रोवाइडर Your T1 WIFI ने तय किया है कि वह अपनी WIFI सेवा से फेसबुक और ट्विटर को ब्लॉक कर रहा है। इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनी ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। Your T1 WIFI का कहना है कि ऐसा वह अपने सेंसरशिप के दावों के कारण कुछ ग्राहकों के लिए कर रहे हैं।

बता दें कि Your T1 WIFI संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी इडाहो और स्पोकेन एरिया में इंटरनेट प्रदान करता है। इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनी द्वारा यह कदम ट्विटर और फेसबुक के राष्ट्रपति ट्रम्प का अकाउंट ब्लॉक करने के बाद आया है।

शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) को डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड करने के बाद ट्विटर ने कहा था, “डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट के हालिया ट्वीट को देखने के बाद हमने उनके अकाउंट को स्थायी रूप से हिंसा को और भड़काने के जोखिम को देखते हुए सस्पेंड कर दिया है।”

Your T1 WIFI का कहना है कि उन्होंने ग्राहकों की डिमांड पर यह फैसला लिया है। उनके पास फेसबुक और ट्विटर को ब्लॉक करने को लेकर कई ग्राहकों के कॉल आए थे, जिसके बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। कंपनी ने बताया कि उनका यह नियम बुधवार (जनवरी 13, 2021) से लागू होगा।

इंटरनेट कंपनी ने ग्राहकों को एक नोट पोस्ट करते हुए कहा कि यह विश्वास करने लायक बात नहीं है कि एक वेबसाइट या सोशल नेटवर्किंग साइट के पास यह अधिकार है कि आप जो भी देखें और पोस्ट करें और वो आपसे जानकारी छिपाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि यह फेसबुक और ट्विटर को अपनी इंटरनेट सेवा पर केवल उन ग्राहकों के लिए ब्लॉक करेंगे, जिन्होंने इसकी माँग की है।

गौरतलब है कि ट्विटर और फेसबुक पर पहले से ही पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से इन कम्पनियों ने लगातार फ्री स्पीच पर हमला किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग सितंबर 2018 की उस घटना को याद कर रहे हैं, जब एक महिला एक्टिविस्ट लॉरा लूमर ने कैपिटल हिल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ चल रही सुनवाई में घुस कर ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी को खरी-खोटी सुनाई थी। उन्होंने CEO जैक को पक्षपात वाला रवैया त्यागने की चेतावनी दी थी और आरोप लगाया था कि ट्विटर विरोधी विचारधारा के लोगों को सेंसर करने में लगा हुआ है।

पिछले दिनों फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लकी ने दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के सामने दावा किया था कि राजधानी दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को रोका जा सकता था, अगर फेसबुक ने सही समय पर दंगों को भड़काने वाले कंटेंट को रोका होता। उन्होंने बताया कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारों पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इसके चलते कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। 

कई लोगों को ‘सूअर’ लिखने से लेकर ‘जय श्री राम’ को अभिवादन स्वरूप लिखने तक के लिए फेसबुक ने ब्लॉक किया है। एक यूजर ने बताया था कि आप अगर संस्कृत में कोई मंत्र लिखते हैं, और कोई उसे ‘हेट स्पीच’ कह कर रिपोर्ट कर दे, तो फेसबुक त्वरित कार्रवाई करते हुए आपका अकाउंट सस्पेंड कर देगा। उल्लेखनीय है कि फेसबुक पर पहले भी दक्षिणपंथ के प्रति पूर्वग्रह रखने के आरोप लगते रहे हैं।

क्या स्वामी विवेकानंद ने गीता फेंक कर फुटबॉल खेलने की बात कही थी?

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने युवाओं को एक सन्देश दिया था कि ‘गीता पढ़ने से बेहतर है कि फुटबॉल खेलो’। स्वामी जी का युवाओं से किया गया यह एक विशेष आह्वान अक्सर विवाद और चर्चा का विषय रहता है। वामपंथी बुद्धिपिशाच उनके इस बयान को अपना ध्येय साधने के उद्देश्य से करते आए हैं, जबकि कुछ सनातनी भी अक्सर इस बयान के भ्रम में पड़ कर भड़क उठते हैं, बिना ये समझे कि वास्तव में स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य के गहरे निहितार्थ क्या थे।

स्वामी विवेकानंद के इस बयान को तोड़ मरोड़कर सामने रखने और अपने उद्देश्यों को पूरा करने का यह प्रयास इस बार जॉय भट्टाचार्य द्वारा किया गया है। जॉय भट्टाचार्य ने स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर उनके इस कथन को कोट करते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “आप गीता के अध्ययन की तुलना में फुटबॉल के माध्यम से स्वर्ग के ज्यादा करीब होंगे। स्वामी विवेकानंद, आज के दिन 1863 में पैदा हुए थे। उन्होंने 1880 में टाउन क्लब का प्रतिनिधित्व करते हुए एक बार 7 विकेट भी लिए थे। संयोग से, हाल ही में टाउन क्लब से निकला हुआ कोई खिलाड़ी, जिसने कामयाबी हासिल की वह मोहम्मद शमी है।”

निश्चित ही, जॉय भट्टाचार्य का उद्देश्य यहाँ पर ना ही गीता का महिमामंडन, या स्वामी विवेकानंद का स्मरण करना नहीं था। जॉय का इशारा स्वामी विवेकानंद के कथन को धूर्तता से रखते हुए यह साबित करना था कि गीता पढ़ना एक बेकार काम है और फुटबॉल बेहतर विकल्प है। अगर आशय इस तरफ इशारा न करता तो जॉय को किसी फुटबॉलर का नाम लिखना चाहिए था न कि फुटबॉल का उदाहरण दे कर एक मुस्लिम खिलाड़ी का। मोहम्मद शमी भारत के बेहतरीन क्रिकेटर हैं, इसमें दोराय नहीं है, लेकिन जॉय भट्टाचार्य क्या हैं, वह भी दिख रहा है।

कई बार लोग ज्यादा स्मार्ट दिखने के चक्कर में अपनी फजीहत कराते हैं। जब संदर्भ का ज्ञान न हो, तो व्यक्ति को फोटो पर ‘योर कोट्स’ टाइप की बातें लिख कर लहरिया लूट लेना चाहिए, क्योंकि ज्योंहि आप उससे बाहर टाँग फैलाते हैं, आपकी ज्ञानरूपी चादर के पतले होने के कारण छेद दिखने लगता है। जाहिर है कि स्वामी जी ने यह बात किसी खास संदर्भ में कही होगी क्योंकि अगर यह वाक्य संदर्भहीन होता तो विवेकानंद का नाम पेले और मैराडोना के साथ लिया जाता, न कि सनातन दर्शन के स्वर्णिम स्तम्भ के रूप में।

क्या था स्वामी विवेकानंद का ‘गीता के बजाय फुटबॉल’ से आशय

क्या वास्तव में स्वामी विवेकानंद के ‘गीता के बजाय फुटबॉल’ वाले कथन का अर्थ वही है, जैसा कि कुछ लोग अपनी कुटिलता के जरिए साबित करने का प्रयास करते हैं? इसके लिए उस किस्से को समझना बेहद जरुरी है, जहाँ से स्वामी विवेकानंद के गीता को लेकर दिए गए इस बयान की शुरुआत हुई।

वास्तव में, यह बांग्ला भाषा में गीता के गेय पदों का काव्य रूपांतरण करने वाले आचार्य सत्येन्द्र बनर्जी थे, जिन्होंने बचपन में स्वामी विवेकानंद से गीता पढ़ने की इच्छा व्यक्त की थी। इस पर स्वामी जी ने उनसे कहा था कि उन्हें पहले 6 माह तक फुटबॉल खेलना होगा, निर्धनों और असहायों की मदद करनी होगी तभी वो उनसे गीता पाठ की बात रखने के लायक होंगे।

इस पर जब बालक ने स्वामी विवेकानंद से पूछा कि गीता तो एक धार्मिक ग्रंथ है, फिर इसके ज्ञान के लिए फुटबॉल खेलना क्यों जरुरी है? इस पर स्वामी जी ने अपने जवाब में कहा, “गीता वीरजनों और त्यागी व्यक्तियों का महाग्रंथ है। इसलिए जो वीरत्व और सेवाभाव से भरा होगा, वही गीता के गूढ़ श्लोकों का रहस्य समझ पाएगा।”

06 माह तक स्वामी जी के बताए तरीकों का अनुसरण करने के बाद जब बालक वापस स्वामी के पास लौटे, तो स्वामी विवेकानंद ने उन्हें गीता का ज्ञान दिया। विवेकानंद के फुटबॉल खेलने का असल मायनों में यही मतलब रहा होगा कि स्थूल शरीर प्रखर विचारों का जनक नहीं हो सकता।

यदि हम अपने आस-पास की दिनचर्या को ही देखें तो सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से लेकर टेलीविजन, नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार आदि देखने तक, कुछ पढ़ने से लेकर कहीं घूमने तक, अक्सर हम लोग मात्र एक दर्शक की तरह ही जीते हैं। हम असलियत में किसी भी चीज का हिस्सा नहीं होते। जिन पुस्तकों को हम पढ़ रहे होते हैं, हम वह किरदार नहीं होते, ना ही टीवी पर क्रिकेट देखते समय हम वो खिलाड़ी होते हैं। कुल मिलकर हम ‘मैदान’ से नदारद ही रहते हैं।

स्वामी विवेकानंद ने भी यही कहा था। असल में विवेकानंद का यह कथन उन्हीं की पुस्तक ‘कोलंबो से अल्मोड़ा तक व्याख्यान’ (Lectures from Colombo to Almora) का एक हिस्सा है। स्वामी जी के शब्दों में,

“हम कई चीजों की बात तोते की तरह करते हैं, लेकिन उन्हें कभी नहीं करते; बोलना और न करना हमारी आदत बन गई है। उसका कारण क्या है? शारीरिक कमजोरी। इस तरह का कमजोर मस्तिष्क कुछ भी करने में सक्षम नहीं है; हमें इसे मजबूत करना चाहिए। सबसे पहले, हमारे युवा मजबूत होने चाहिए। धर्म बाद में आएगा। मजबूत बनो, मेरे युवा मित्र; मेरी आपको यही सलाह है। गीता के अध्ययन की तुलना में आप फुटबॉल के माध्यम से स्वर्ग के नजदीक होंगे। ये साहसी शब्द हैं; लेकिन मुझे उनसे कहना है, क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ। मैं जानता हूँ कि जूता कहाँ पर चुभता है। मुझे थोड़ा अनुभव हुआ है। आप अपने बाइसेप्स, अपनी मसल्स को थोड़ा मजबूत करके गीता को बेहतर समझेंगे। आप अपने अंदर थोड़े से मजबूत रक्त से कृष्ण की महान प्रतिभा और कृष्ण की ताकत को बेहतर समझ सकेंगे। आप उपनिषदों को बेहतर समझेंगे, जब आपका शरीर आपके पैरों पर दृढ़ होता है, और आप अपने आप को पुरुष के रूप में महसूस करते हैं। इस प्रकार हमें अपनी आवश्यकताओं के लिए इन्हें लागू करना होगा।”

स्वामी जी किसी को गीता फेंकने और सिर्फ फुटबॉल खेलने के लिए नहीं कह रहे हैं। वह कह रहे हैं कि स्वस्थ शरीर उसी ‘कर्म योग’ की पूर्ति के लिए आवश्यक है, जिसका वर्णन गीता में भगवान कृष्ण ने भी दिया।

जॉय भट्टाचार्य जैसे लोग सैकड़ों हैं, जिन्हें स्वामी विवेकानंद के सभी आदर्शों में आपत्ति नजर आ ही जाती हैं। यह वही लोग हैं, जो जेएनयू में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा से छेड़खानी करने वाली मानसिकता का समर्थन करते हैं और उन्हें इसमें हिंसा और घृणा का अंश नजर नहीं आता।

स्वामी जी के विचारों में ये जमात आज तक भी गीता, स्वर्ग और फुटबॉल के भ्रामक विवरण के अलावा अपने वैचारिक टार के पोषण के लिए कुछ और नहीं तलाश पाए हैं। गीता का विस्तार और स्वामी विवेकानंद का दर्शन अभी वामपंथ की पहुँच की सभी सीमाओं से बहुत आगे है। लेकिन क्रन्तिकारी और प्रगतीशीलों को पहले यह तय करना होगा कि क्या वे किसी एक ऐसे व्यक्ति के प्रगतिशील विचारों को स्वीकार कर पाएँगे, जिसके सर पर भगवा था?

भ्रष्टाचार में साथ न देने पर नगर पंचायत अध्यक्ष रहमत जहाँ के शौहर शफी अहमद ने पीटा, दिया तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में नगर पंचायत अध्यक्ष रहमत जहाँ ने अपने पति पर तीन तलाक देने का आरोप लगाया है। रहमत जहाँ का यह भी आरोप है कि उनके पति ने उनकी पिटाई भी की है। मारपीट में जख्मी रहमत जहाँ को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाने की नौबत भी आ गई। रहमत को उनके पति शफी अहमद ने सिर्फ इसलिए तीन तलाक दे दिया क्योंकि वो अपने पति के कहने पर भ्रष्टाचार के काम नहीं कर रही थीं।

इस मामले पर मुरादाबाद (ग्रामीण) के SP ने बताया, “आरोप है कि तीन तलाक दिया गया है और बदसलूकी का प्रयास किया गया है। FIR दर्ज़ कर ली गई है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।” शफी अहमद पहले खुद भी पंचायत का चेयरमैन था। जिला अस्पताल में इलाज करा रहीं रहमत जहाँ का कहना है कि उनके पति के भाई, बहनोई और कुछ अन्य रिश्तेदारों ने भी उनके साथ बदसलूकी की है। 

रहमत के मुताबिक उनके पति ने उनसे तीसरी शादी की थी। इससे पहले वो अपनी 2 बीवियों को छोड़ चुका है। उनका कहना है कि मारपीट की वजह से उनके पैर और कमर में गंभीर चोट लगी है। रहमत ने बताया कि वह पिछले 9 महीने से अपने पति से अलग रह रही हैं। रविवार (जनवरी 10, 2021) देर रात पति शफी अपने अन्य परिजनों के साथ उनके घर आया और उन्हें एक साथ तीन तलाक दे दिया।

रहमत का यह कहना है कि भोजपुर नगर पंचायत की सीट महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से शफी अहमद ने चुनाव मैदान में उन्हें उतारा था। वह चुनाव जीत भी गईं। पंचायत अध्यक्ष का आरोप है कि शफी अहमद उनके हस्ताक्षर से कुछ गलत आवंटन करने लगा, जिसका उन्होंने विरोध किया था। इस पर शफी ने उनके साथ मारपीट की है।

वहीं इस मामले पर एसपी देहात विद्या सागर मिश्र ने बताया, “इस संबंध में उनके द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना भोजपुर पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। मामले में निष्पक्ष रूप से विवेचनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हमारे पास आई तहरीर में कोई पार्टी नहीं लिखा हुआ है। हमारे पास उन्होंने पीड़िता के रूप में एप्लीकेशन दिया है, जिसके आधार पर हमने एफआईआर दर्ज कर ली है। आगे हम विधिक कार्रवाई करेंगे।”

Tooter CEO ने PM मोदी सहित अन्य नेताओं के फर्जी वैरिफाइड अकाउंट खोल कर BJP पर ही लगाया बदनाम करने का आरोप

टूटर (Tooter) नामक एक भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को लेकर जारी बहस के बीच इसके CEO ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। हालाँकि, वो काफी सुसंगत नहीं लगता। पिछले दिनों यह आरोप लगा था कि टूटर ने पीएम मोदी, पीएमओ और अमित शाह समेत अन्य मंत्रियों के वेरिफाइड अकाउंट खुद ही बनाए हैं और पीएम मोदी टूटर पर नहीं हैं। अब सीईओ ने बीजेपी आईटी सेल अमित मालवीय पर टूटर को ‘बदनाम’ करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि पीएम मोदी के टूटर पर होने की अफवाह के फैलते ही भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 11 जनवरी को ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी दी थी कि ना ही पीएम मोदी, ना ही गृह मंत्री अमित शाह और किसी भाजपा नेता ने टूटर पर अकाउंट बनाए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अमित शाह, भाजपा, इसकी राज्य इकाइयाँ, जेपी नड्डा आदि, जिनका भी टूटर पर आधिकारिक अकाउंट दिखा रहा है, उनका भी इस प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं है।

इस ट्वीट का जवाब देते हुए, टूटर के सीईओ, श्री नंदा, ने ट्विटर पर कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर ‘रिसर्च’ करने में 24 घंटे का समय लिया और फिर 3 ट्वीट में इसका जवाब दिया।

ऐसे में जब सब इसका इंतजार कर रहे थे कि सीईओ माफी माँगेंगे और नहीं तो कम से कम कई नेताओं के अनधिकृत अकाउंट के खोले जाने पर विवरण देंगे। मगर इसके विपरीत उन्होंने अमित मालवीय के ट्वीट को ‘लापरवाह, भ्रामक और गलत’ बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने अमित मालवीय से ट्वीट भी डिलीट करने के लिए कहा।

अपने तीसरे और आखिरी ट्वीट में नंदा ने कहा कि अमित मालवीय ने यह कहकर कि पीएम मोदी टूटर पर नहीं है, उनका ‘आधिकारिक अकाउंट’ अनधिकृत है, उन्होंने प्रधानमंत्री को आहत किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीएम मोदी ‘आत्मनिर्भर भारत’ को प्रमोट करते हैं और उनका कहना है कि वो स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लेकर आए हैं।

हालाँकि तीन ट्वीट में, नंदा ने इस बात की कोई व्याख्या नहीं की कि टूटर सरकारी अधिकारियों, पार्टी के अधिकारियों और यहाँ तक कि पीएमओ और पीएम मोदी के अनधिकृत खातों को क्यों खोल रखा है। यह वास्तव में विचित्र कदम है क्योंकि ऐसे में इन प्रभावशाली लोगों के नाम पर किसी भी तरह का ट्वीट किया जा सकता है, जो कि खतरनाक हो सकता है। 

इससे पहले हमने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि टूटर ने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के वेरिफाइड अकाउंट खुद ही बनाए हैं और पीएम मोदी टूटर पर नहीं हैं। हमने पाया था कि शायद टूटर किसी तकनीक के जरिए पीएम मोदी द्वारा किए गए ट्वीट्स को स्वयं ही ‘टूट’ कर पोस्ट करता है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब आर वैद्य ने टूटर के सीईओ नंदा से पूछा था कि उनका टूटर पर एक वेरिफाइड अकाउंट कैसे है और लोग उन्हें खुद ही कैसे फ़ॉलो कर रहे हैं, जबकि उन्होंने कभी अपना अकाउंट टूटर पर बनाया ही नहीं। इस पर नंदा ने उन्हें ‘द्रोणाचार्य’ बताते हुए अस्पष्ट तरीके से जवाब दिया और उनसे इनबॉक्स में संदेश शेयर करने की अपील की। हालाँकि सीईओ के मुताबिक इस मुद्दे के बारे में बोलना उसे ‘बदनाम’ करना है।

आखिर ‘टूटर’ है क्या?

‘टूटर’ द्वारा ‘हमारे बारे में/अबाउट अस’ सेक्शन में दी गई जानकारी के अनुसार, “हमारा मानना ​​है कि भारत में एक स्वदेशी सोशल मीडिया नेटवर्क होना चाहिए। इसके बिना हम अमेरिकी ट्विटर इंडिया कंपनी की सिर्फ एक डिजिटल कॉलोनी हैं, और यह किसी भी तरह से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन होने से अलग नहीं है। टूटर हमारा स्वदेशी आंदोलन 2.0 है। इस आंदोलन में हमसे जुड़ें। हमसे जुड़ें!”

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय कोई व्यक्ति टूटर से जुड़ता है, उन्हें स्वतः ही टूटर पर मौजूद तीन अकाउंट्स को फ़ॉलो करना होता है – टूटर के सीईओ, आर वैद्य और एक ’न्यूज’ नाम का अकाउंट।

वास्तव में, ‘टर्म्स ऑफ़ सर्विस’ में उल्लेख किया गया है कि वेबसाइट से संबंधित मामलों में, किसी भी विवाद या दावों को अमेरिका के राज्य पेंसिल्वेनिया के आंतरिक कानूनों के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि जब ‘टूटर’ लॉन्च किया गया था, तो उन्होंने किसी अन्य वेबसाइट से अपने नियमों और शर्तों को कॉपी किया होगा।

गोहत्या की सूचना पर पहुँची महिला कांस्टेबल को गले में फंदा डालकर घसीटा: वसीम, आफरीन समेत 10 पर केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मवाना थानाक्षेत्र में गोवंश काटे जाने जाने की सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर आरोपित परिवार के सदस्यों ने हमला बोल दिया। एक महिला सिपाही को आरोपितों ने दबोचकर जान से मारने की नीयत से गले में रस्सी का फँदा डाल कर घसीटा, जिसको अन्य पुलिसकर्मियों ने काफी मुश्किल से बचाया।

पुलिस टीम पर हमले की सूचना पर तुरंत ही आसपास के थानों से पुलिस फोर्स भेजी गई। मौके से दो महिलाओं सहित तीन को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही, वहाँ से तीन कुंतल माँस, अवशेष तथा औजार व तीन बाइक बरामद करने का दावा किया गया है। थाना प्रभारी ने 10 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। 

मामले में उवेश, महराज, आफरिन, वसीम कुरैशी, डिर्रा उर्फ फिरोज कुरैशी, अमजद कुरैशी, फुरकान कुरैशी, इकराम कुरैशी, जैद कुरैशी, आफाक कुरैशी समेत कुल दस आरोपितों के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास, गोकशी, साजिश रचने व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सठला गाँव में पशुओं के कटान की सूचना मिली थी। मुखबिर द्वारा प्राप्त इस सूचना के आधार पर पुलिस फोर्स के साथ मौके पर दबिश दी गई तो वहाँ पर पशुओं का कटान होता मिला। जैसे ही मकान का दरवाजा खुलवाया गया तो कटान कर रहे लोग उग्र हो गए। आरोपितों ने हाथों में लिए चाकू-छुरे पुलिस दल पर तान दिए और जान से मारने की नीयत से पुलिस फोर्स पर हमला बोल दिया। पुलिस फोर्स को धक्का देते हुए आरोपित छतों पर चढ़ गए और धमकी देने लगे। 

इस दौरान पुलिस ने हिम्मत कर एक आरोपित को दबोच लिया। लेकिन दो आरोपित महिलाओं ने एक महिला कांस्टेबल को दबोचकर उसके गले में रस्सी का फँदा डालकर जान से मारने का प्रयास किया। पीड़ित कांस्टेबल को अन्य पुलिसकर्मियों ने बचाया। स्थिति से आला अधिकारियों को अवगत कराया। आसपास के थानों की पुलस मौके पर पहुँच गई।

वो मीडिया हाउस जिसके लिए लादेन था पिता-पति, विवेकानंद को लिखा – सिगार पीने वाला

एक मीडिया संस्थान है, जिसके लिए ओसामा बिन लादेन किसी का ‘पिता-पति’ था। उसी मीडिया संस्थान के लिए स्वामी विवेकानंद ‘सिगार पीने वाला सन्यासी’ है। वामपंथी मीडिया का आतंकियों का महिमामंडन करना किसी से छुपा नहीं है। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती कि कोई व्यक्ति, मीडिया या मानसिक रूप से स्थिर व्यक्ति ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकी का गुणगान करते हुए समाज में यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करेगा कि वह कैसा पति और पिता था। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह की ही एक टुकड़ी- ‘द क्विंट’ (The Quint) ने तो ऐसा ही किया है। और इसी दी क्विंट की हिंदू धर्म के प्रकाश को विदेशों तक पहुँचाने वाले स्वामी विवेकानंद एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ लगते हैं।

पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना रियाज नायकू का परिचय गणित शिक्षक के रुप में कराने वाले ‘दी क्विंट’ को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर यह बताने की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई कि वह एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ थे। ‘दी क्विंट’ ने 12 जनवरी को विवेकानंद के जन्मदिन पर एक लेख अपडेट और दोबारा शेयर किया है, जिसका शीर्षक Swami Vivekananda Jayanti: Cigar-Smoking Monk Is Still Relevant है। इस लेख में उन्होंने स्वामी विवेकानंद को ‘अपरंपरागत सन्यासी’ करार देते हुए ‘सिगार पीने वाला’ बताया।

हैरानी की बात ये है कि नि:स्वार्थ भाव से अपने राष्ट्र ‘भारत’ और अपनी संस्कृति से अत्यंत स्नेह और प्रेम करने वाले विवेकानंद को दी क्विंट ने सिर्फ एक ‘सिगार पीने वाले भिक्षु’ के रुप में प्रदर्शित किया। हालाँकि, क्विंट ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचार की कुछ सकारात्मक बातें भी बताई हैं, लेकिन उनका मुख्य ध्यान इसी पर था और ऐसा लगता है कि उनकी एकमात्र पहचान सिर्फ उनकी सिगार थी।

क्विंट ने स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन ही उनकी इस ‘खूबी’ के बारे में चर्चा के लायक समझा जबकि लादेन और रियाज नाइकू जैसे आतंकियों के महिमामंडन के लिए दी क्विंट जैसे मीडिया गिरोहों को शायद ही कोई विशेष दिन की जरुरत महसूस होती हो। खैर, आतंकियों का महिमामंडन करने वाले मीडिया गिरोहों का इस तरह से लिखना अचंभित करने जैसा बिलकुल भी नहीं है।

‘द क्विंट’ में प्रकाशित लेख का अंश

9/11 आतंकी हमले को करीब दो दशक का वक्त बीत चुका है लेकिन आज भी उसका नाम आते ही दहशत का मंजर आँखों के सामने छा जाता है। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने आतंकी हमले को अंजाम दिया था। साल 2011 में अमेरिका ने अपने ऊपर हुए आतंकी हमले का बदला ले लिया और ओसामा बिन लादेन मारा गया।

पूरी दुनिया में आतंक की कहानी लिखने वाले ओसामा बिन लादेन के परिवार को लेकर ‘द क्विंट’ की सहानुभूति देखने लायक रही है। लादेन की मौत की छठी सालगिरह पर मीडिया हाउस ने जीन सैसन की पुस्तक ‘Growing Up Bin Laden: Osama’s Wife and Son Take Us Inside Their Secret World’ के कुछ अंश छापे थे। जिसमें ओसामा की पत्नी और बेटे ने बताया था कि लोग आतंकवादी पैदा नहीं हैं औ न ही वे एक ही झटके में आतंकवादी बन जाते हैं। इस पूरे लेख का लब्बोलुआब यही था कि ओसामा यूँ ही आतंकवादी नहीं बना था, ये तो परिस्थितियों ने उसे मजबूर किया, वरना वो शर्मीला, विनम्र और शरारती बच्चा था।

आश्चर्य सिर्फ यह है कि पता नहीं आतंक के इस सरगना का गुणगान करने वाले ये मीडिया गिरोह ऐसा कुछ लिखने में क्यों शरमा गए कि वह निर्दोष-निहत्थे लोगों की हत्या के बाद पश्चाताप से भर उठता था और जोर-जोर से रोता था? 9/11 हमले के बाद तो वो अपनी माँ की आँचल में छुप-छुप कर रोता था।

बाहरहाल, यह कोई नई कोशिश नहीं है। क्या कोई भूल सकता है कि आतंकी याकूब मेमन की फाँसी के बाद लिखा गया था- ‘एंड दे हैंग्ड याकूब’ और बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उसे हेडमास्टर का बेटा बताया गया था- कुछ इस अंदाज में कि वह तो एक सुदर्शन सा युवक था, जिसे बंदूकों के साथ फोटो खिंचाने का शौक लग गया था।

खूँखार आतंकियों का महिमामंडन किसी शरारत का नतीजा नहीं, सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति का एक अनिवार्य तत्व खूँखार से खूँखार आतंकी के चित्रण में इस बात को जोड़ना होता है कि किशोरावस्था में तो वह बड़ा ही शर्मीला, किंतु मेधावी किशोर था, लेकिन एक दिन बाजार से, बाग से, स्कूल से लौटते हुए पुलिस ने उसे पीट दिया तो वह क्रोध से भर उठा और उसने बंदूक उठा ली। इसी तरह की कहानियाँ शातिर पत्थरबाजों के बारे में गढ़ी जाती हैं। कश्मीर में जब कभी पत्थरबाज पुलिस की सख्ती का शिकार होते हैं तो कई समाचार माध्यम यह साबित करने में जुट जाते हैं कि वह तो घर के छज्जे में चुपचाप खड़ा था या फिर ट्यूूशन पढ़कर लौट रहा था।

कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के महिमामंडन की रणनीति के वाहक भले ही विदेशी समाचार माध्यम हों, लेकिन उसे खाद-पानी देने का काम भारतीय ही करते हैं। यह एक तथ्य है कि आतंकियों को लेकर संवेदना जगाने और भारत के प्रति परोक्ष-अपरोक्ष रूप से जहर उगलने वाली खबरें भारतीय पत्रकारों ने ही लिखीं। 

अब फर्जी, अधकचरी, अपुष्ट-एकपक्षीय समाचार लिखना बड़ा आसान हो गया है। किसी भी अप्रिय या अस्वाभाविक घटना पर पुलिस, प्रशासन और सरकार की निंदा-भर्त्सना करने या उन्हें गलत बताने वाला एक बयान चाहिए होता है। किसी ऐरे-गैरे-नत्थू खैरे का ऐसा कोई बयान सहज उपलब्ध हो ही जाता है। कुछ मुश्किल होती है तो आरोपित, आतंकी, आक्रांता के परिजनों की सेवाएँ ले ले जाती हैं। कौन भूल सकता है पुलवामा कांड के आत्मघाती हमलावर के बारे में उसके परिजनों के बयानों को?

मीडिया पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि वह अपराध या आतंकवाद के महिमामंडन का लोभ संवरण नहीं कर पाता। यही प्रचार आतंकवादियों के लिए मीडिया आक्सीजन का काम करता है। यह गंभीर चिंता का विषय है। इससे आतंकियों के हौसले तो बुलंद होते ही हैं, आम जनता में भय का प्रसार भी होता है। जाहिर तौर पर देश जब एक बड़ी लड़ाई से मुखातिब है तो खास संदर्भ में मीडिया को भी अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। आज असहमति के अधिकार के नाम पर देश के भीतर कई तरह के सशस्त्र संघर्ष खड़े किए जा रहे हैं, लोकतंत्र में भरोसा न करने वाली ताकतें इन्हें कई बार समर्थन भी करती नजर आती हैं।

कॉन्ग्रेस शासित यूपीए में मुख्यधारा की मीडिया और लुटियंस पत्रकार खुद को इस देश का भाग्यविधता मानने लगे थे। उन्हें यह गुमान था कि वह जनता को जो सच-झूठ दिखाएँगे, जनता उसे ही मानेगी, उन्हें यह गुमान था कि वह जनता और सरकार के बीच वहीं केवल मध्यस्थ हैं, उन्हें यह गुमान था कि वह एक प्रिविलेस क्लास हैं जो हर वह सुविधा भोगने का अधिकारी है, जो वीआईपी श्रेणी में आता है। ऐसे पत्रकारों और मीडिया हाउसों को मोदी सरकार में निराशा हाथ लगी है, जिस कारण वह देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ शत्रुता का भाव बनाए हुए हैं। 

दोहरा चरित्र और एजेंडा आधारित पत्रकारिता के कारण सोशल मीडिया के इस युग में भारतीय मुख्यधारा की मीडिया और पत्रकार आज विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे हैं। हर राष्ट्रविरोधी तत्व, वह चाहे जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले हों या हिज्बुल का आतंकी बुरहान वानी- उनके साथ लुटियंस पत्रकार व मीडिया हाउस खड़े नजर आते हैं।