Home Blog Page 4222

गॉंधी परिवार के एक और पुराने ‘राजदार’ का निधन, नेशनल हेराल्ड केस में भी आरोपित थे मोतीलाल वोरा

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का 93 साल की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार मोतीलाल वोरा (Motilal Vora) के स्वास्थ्य में परेशानी होने के कारण कल, रविवार (दिसंबर 20, 2020) रात उन्हें एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। कल ही उनका जन्मदिन था।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी ट्वीट कर कहा, ”वोरा जी एक सच्चे कॉन्ग्रेसी और अद्भुत इंसान थे। हम उन्हें बहुत मिस करेंगे। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदना है।”

मध्य प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री, वोरा छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य थे। उन्होंने 2018 तक 16 वर्षों के लिए अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा फेरबदल के बाद यह पद एक अन्य वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को सौंप दिया गया था।

अक्टूबर माह में ही कोविड -19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद गत 25 नवंबर को अहमद पटेल का गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वरिष्ठ अहमद पटेल के बाद मोतीलाल वोरा का निधन हुआ है। दोनों ही सोनिया गाँधी के साथ छाया की तरह रहे। 1995 के यूपी के कुख्यात गेस्ट हाउस कांड के समय मोतीलाल वोरा ही गवर्नर भी थे।

2019 के आम चुनावों के बाद राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र की घोषणा के बाद मोतीलाल वोरा को पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई थी। इसके बाद ही सोनिया गाँधी को पार्टी अध्यक्ष चुना गया।

मोतीलाल वोरा नेशनल हेराल्ड नेशनल हेराल्ड मामले में भी सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, ऑस्कर फर्नाडीज, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया कंपनी के साथ आरोपित थे। मोतीलाल वोरा AJL के मैनेजिंग डायरेक्‍टर थे। इस कंपनी पर गाँधी परिवार का दखल है। यही AJL ही नेशनल हेराल्‍ड अखबार को चलाता है।

इस अखबार को साल 1939 में जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था जबकि वर्ष 1956 में AJL एक कंपनी बनी। साल 2008 में इसके सारे पब्लिकेशंस बंद कर दिए गए। तब कंपनी पर 90 करोड़ रूपए का कर्ज था।

इंग्लैंड में कोरोना का खतरनाक प्रकार, भारत सरकार ने बंद की सभी उड़ान: यूरोपीय देशों के बॉर्डर भी सील

इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम) में कोरोना वायरस के एक नए प्रकार ( new strain of coronavirus) का पता चला है। कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण दर बहुत ज्यादा है। इस खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने जरूरी कदम उठाते हुए इंग्लैंड से आने वाली सभी उड़ानों को 31 दिसंबर की रात 11 बज कर 59 मिनट तक सस्पेंड कर दिया है।

भारत सरकार द्वारा लगाया गया यह सस्पेंशन 22 दिसंबर की रात 11 बज कर 59 मिनट से लागू होगी।

22 दिसंबर की रात 11 बज कर 59 मिनट से पहले पहुँचने वाली फ्लाइट से आए सभी यात्रियों का एयरपोर्ट पर ही RT-PCR टेस्ट किया जाएगा।

भारत में इस नए खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज सोमवार (21 दिसंबर 2020) को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। यह मीटिंग जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप के साथ हुई।

इस मीटिंग के बाद अरविंद केजरीवाल से लेकर अशोक गहलोत तक ने इंग्लैंड से आने वाली फ्लाइट को बंद करने का अनुरोध भारत सरकार से किया। हालाँकि ये वही राजनेता हैं, जो पहले के लॉकडाउन को लेकर राजनीति भी करते रहे हैं।

इंग्लैंड के अलावा कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण नीदरलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भी पाया गया है। नीदरलैंड और बेल्जियम ने कोरोना वायरस के नए प्रकार का पता चलने के बाद इंग्लैंड से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। इनके अलावा कई अन्य देश भी इंग्लैंड की उड़ानों पर रोक को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। यूरोप के कई देशों ने इंग्लैंड बॉर्डर को सील कर दिया है।

इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर क्रिस विट्टी ने कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में कहा, “हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बता दिया है। साथ ही कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में समझने के लिए उपलब्ध जानकारी का अध्ययन कर रहे हैं। हालाँकि फिलहाल इस बात को साबित करने का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है कि वायरस का यह नया प्रकार अधिक घातक है या नहीं।”

नहीं रहा बाबा का ढाबा… खोला उन्होंने नया रेस्टोरेंट: CCTV कैमरा और स्टाफ, मिली थी जान की धमकी

पिछले कुछ दिनों में बेहद चर्चा में रहे ‘बाबा का ढाबा’ (Baba ka Dhaba) के मालिक 80 वर्षीय कांता प्रसाद ने अब दिल्ली स्थित मालवीय नगर में एक नया रेस्टोरेंट शुरू कर दिया है। ये नया रेस्टोरेंट उन्होंने अपने ढाबे के ही पास शुरू किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांता प्रसाद ने कहा, “हम बहुत खुश हैं, भगवान ने हमें आशीर्वाद दिया है। मैं मदद के लिए लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, मैं उनसे मेरे रेस्तराँ आने की अपील करता हूँ। हम यहाँ भारतीय और चायनीज फ़ूड बनाएँगे।”

गौरतलब है कि नए रेस्टोरेंट में बाबा ने सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी कैमरा भी लगवाया है। हाल ही में कांता प्रसाद ने बाताया था कि उनकी जान को खतरा है और उनको कुछ दिनों से जान से मारने की धमकी दी जा रही है। लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों से परेशान होकर ढाबा मालिक कांता प्रसाद ने मालवीय नगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि कुछ जलनखोर लोग उन पर हमला कर रहे हैं क्योंकि वह रातोरात फेमस हो गए थे। प्रसाद ने कहा कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं है।

बताया जा रहा है कि ढाबा मालिक कांता प्रसाद ने अपने नए रेस्टोरेंट में 2 से 3 लोगों का स्टाफ भी रखा है। बाबा का कहना है कि वो इस नए रेस्टोरेंट में भी खुद ही खाना बनाएँगे।

पिछले महीने दिल्ली के जिस ‘बाबा का ढाबा’ ने देशभर में सुर्खियाँ बटोरीं, वह कुछ समय बाद ही पैसों के हेरफेर के आरोप में विवाद का भी विषय बन गया था। जिसके चलते बाबा को दुनिया भर में मशहूर करने वाले यूट्यूबर गौरव वासन ने ढाबा मालिक 80 वर्षीय बुजुर्ग कांता प्रसाद पर मानहानि का आरोप लगाया। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में ‘बाबा का ढाबा’ से जुड़े मामले की जाँच के बीच यूट्यूबर गौरव वासन ने कहा कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है।

हालाँकि, बाबा का ढाबा के मालिक का कहना है कि अब अगर वो गलत साबित हुए तो गौरव वासन से माफ़ी माँग लेंगे क्योंकि आखिरकार गौरव ने उनकी मदद की है। बाबा का ढाबा के मालिक ने आरोप लगाया था कि गौरव ने उन्हें दान में मिली सारी रकम नहीं सौंपी।

गौरव का दावा था कि उन्होंने ढाबा मालिक को 3.78 लाख रुपए की राशि सौंपी थी। वासन ने ‘बाबा का ढाबा’ के मालिक का वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड किया था जिसके बाद यह वीडियो वायरल हुआ और लोग ढाबा मालिक कांता प्रसाद की मदद के लिए आगे आए थे। हालाँकि वीडियो वायरल होने के करीब एक महीने बाद ढाबा मालिक कांता प्रसाद ने इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर गौरव वासन के खिलाफ पैसों की हेराफेरी की शिकायत दर्ज कराई थी।

नई ‘गऊ प्रेमी’ प्रियंका गाँधी फेक न्यूज में उलझीं: कभी केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पकाया था बछड़ा

प्रियंका वाड्रा गाँधी ने नया कीर्तिमान रचा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। लेकिन अफ़सोस! जिस मुद्दे पर रोष जताते हुए पत्र लिखा गया है, उससे जुड़ी जानकारी की तस्दीक नहीं की गई। पत्र में प्रियंका गाँधी ने लिखा है कि वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही गाय की लाशों की तस्वीर देख कर काफी निराश हैं। 

पत्र में उन्होंने बताया कि मृत गायों की यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के ललितपुर की है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि गायों की मृत्यु कैसे हुई। फिर भी वह इस निष्कर्ष पर पहुँच गईं कि संभावित रूप से उनकी मृत्यु भुखमरी की वजह से हुई है। 

कुछ समय बाद पता चला कि ख़बर फ़र्ज़ी (फ़ेक) है और ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश के आधिकारिक फैक्ट चेकिंग हैंडल आईपीआरडी (IPRD) ने ट्वीट करते हुए कहा कि ललितपुर गोशाला के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (Chief Veterinary Officer) के मुताबिक़ गोशाला के भीतर, बाहर या आस-पास के क्षेत्र में गाय की कोई लाश नहीं मिली है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को बहुत समय नहीं बचा है इसलिए कॉन्ग्रेस का गाय के प्रति स्नेह और समर्पण तत्काल प्रभाव से बढ़ गया है। प्रियंका गाँधी को कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाता है। पर गऊ प्रेम दिखाने के लिए व्याकुल प्रियंका फ़ेक न्यूज़ के फेर में उलझ कर रह गईं।    

ठीक इसी तरह प्रियंका गाँधी के यशस्वी भ्राता राहुल गाँधी भी देश के बड़े चुनावों के दौरान मंदिर-मंदिर भागने का अभ्यास करते हुए नज़र आते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने बिना देर किए गोरक्षा के मसले पर कॉन्ग्रेस का मूल चरित्र और पाखण्ड सार्वजनिक कर दिया। 

शलभमणि त्रिपाठी ने उस घटना का उल्लेख किया जब केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर आम जनता के सामने गाय के बछड़े की हत्या की और उसे पका कर खाया भी। यह निकृष्ट घटना साल 2017 में हुई थी। इसे अंजाम देते हुए पर्याप्त बर्बरता की गई थी इसलिए मुद्दे पर देशव्यापी विरोध हुआ था। घटना के लगभग 3 साल बाद उसी कॉन्ग्रेस को गाय की चिंता सता रही है। आखिरकार 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जो हैं।    

गजवा ए हिंद आएगा… कश्मीर को जीतेंगे, इंशाल्लाह काफिला बढ़ता (बाकी बचे भारत की ओर) रहेगा: शोएब अख्तर का वीडियो वायरल

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर को लेकर पिछले दिनों कुछ धारणाएँ निर्मित हुई थीं। उन्हें लेकर माना जा रहा था कि वह दोनों देशों के बीच शांति बहाल करवाने वाली आवाजों में से एक हैं। उन्होंने जब दानिश कनेरिया के साथ पाक टीम में हुए भेदभाव पर आवाज उठाई, तब भी भारतीय मीडिया ने उन्हें प्रमुखता से कवर किया। इसके बाद अभी हाल में वह उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने वेंटिलेटर के लिए भारत से अपील करते हुए इंसानियत को देश और मजहब से ऊपर बताया।

अब पूरे दुनिया में रावलपिंडी एक्सप्रेस नाम से मशहूर पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज  शोएब अख्तर की सच्चाई क्या है? ये एक बड़ा सवाल है। क्या वाकई वह वैसे ही हैं, जैसा कि उन्होंने अपने बयानों से खुद को दर्शाया या फिर वह केवल गुडबुक्स में रहने का प्रयास कर रहे हैं और उनकी हकीकत वो है, जो उनकी एक वायरल वीडियो में नजर आ रही है।

जी हाँ, सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो की तारीख पुख्ता नहीं है लेकिन इसे यूट्यूब पर एक साल पहले अपलोड किया गया था और अब यह ट्विटर पर जम कर शेयर की जा रही है। इस वीडियो को देख कर वो सारे भ्रम दूर होते हैं, जो पिछले दिनों शोएब अख्तर के लिए निर्मित कर लिए गए थे। इस वीडियो में वह इस्लामी कट्टरपंथ के परिचायक बने नजर आ रहे हैं और गजवा ए हिंद का बखान कर रहे हैं।

समा टीवी को दिए इंटरव्यू में शोएब कहते हैं, “ये हमारी पाक किताब में लिखा है कि गजवा ए हिंद आएगा। अटक की नदी दोबारा खून से लाल रंग की होगी। अफगानिस्तान की सेना अटक पहुँचेंगी। उसके बाद शमल मशरिक से सेनाएँ उठेंगी। अलग-अलग दल उज्बेकिस्तानन आदि से पहुँचेंगे… जो लाहौर तक फैले ऐतिहासिक क्षेत्र खोरासन को दर्शाता है। बाद में वह ताकतें कश्मीर को जीतेंगी और फिर बाद इंशाल्लाह काफिला बढ़ता (बाकी बचे भारत की ओर) रहेगा।”

बता दें कि शमाल मशरिक एक उर्दू शब्द है, जिसका इस्तेमाल अरब पेनिसुला से उत्तर में स्थित भौगोलिक क्षेत्र बताने के लिए किया जाता है।

गौरतलब है कि शोएब अख्तर द्वारा वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा उन्हीं आतंकियों द्वारा भी प्रयोग की जाती है, जो भारत पर हमला करते हैं। कई हमले गजवा-ए-हिंद के तहत अब तक भारत में किए जा चुके हैं। इसी नारे के तहत समुदाय के युवकों का ब्रेनवॉश होता है और फिर उन्हें आत्मघाती हमलावर बनाया जाता है।

कहते हैं कि इस नारे का मतलब समझाते हुए इस्लामी कट्टरपंथी युवकों को कयामत से पहले होने वाले एक युद्ध का पाठ पढ़ाया जाता है, जो हिंदू और मुस्लिमों में होगा और उसमें हिंदुओं के भारत पर मुस्लिम फतह हासिल करेंगे।

इस्लामी भविष्यवाणाी के मुताबिक सीरिया से यह लड़ाई शुरू होगी। काले झंडे के साथ फौज खुरासन से आएगी और भारत को एक इस्लामी मुल्क में तब्दील किया जाएगा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक इसी गजवा ए हिंद के मकसद को पूरा करने के सपने देखते हैं। ऐसे ही मनसूबों के चलते है वह देश के अल्पसंख्यकों को काफिर मानते हैं और इस्लाम कबूल करवाना अपना मजहबी कर्तव्य मानते हैं।

कॉन्स्टेबल इबरार ने महिला और उसकी 3 साल की बच्ची को किया अगवा: रो-रोकर मदद माँगते पति का Video वायरल

पाकिस्तान में बहुसंख्यक आबादी के अत्याचारों की सूची असंख्य है। हाल में वहाँ एक मामला उजागर हुआ जिसमें एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने ईसाई समुदाय की महिला आयशा और उसकी 3 साल बेटी का अपहरण कर लिया। महिला का पति सुल्तान मसीह जब पुलिस के पास पहुँचा तो आला अधिकारियों ने सुनवाई की बजाए यह कहकर उसे लौटा दिया कि उसकी पत्नी ने कॉन्स्टेबल से निकाह कर लिया है।

अपनी पत्नी की निकाह के बारे में सुनने के बाद सुल्तान मसीह का बुरा हाल है। उसने रोते हुए एक वीडियो जारी की है, जो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो को पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने भी शेयर किया है।

राहत लिखते हैं, “एक ईसाई सुल्तान मसीह अपनी 3 साल की बेटी और अपनी पत्नी आयशा की तस्वीरों को दिखाते हुए रो रहा है, जिन्हें बलात्कार और धर्म परिवर्तन के लिए पाकिस्तान के पंजाब की इस्लामिया कॉलोनी बहावलपुर, से अपहरण कर लिया गया। यहाँ धर्मांतरण केसों में कोई तलाक, इच्छा या कानूनी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती।”

बता दें कि, सुल्तान इस वीडियो में अपना नाम पता और कम्युनिटी बताते हुए जानकारी देते हैं, “मेरी बीवी आयशा किरण जिसकी उम्र 30 साल है और मेरी बेटी मल्का सुल्तान जिसकी उम्र तीन साल है, दोनों 6 दिसंबर से घर से लापता हैं। जब मैंने दोनों की तलाश शुरू की तो मुझे पता चला कि मेरी बीवी औऱ मेरी बेटी को मोहम्मद इबरार नाम के कॉन्स्टेबल ने अगवा कर लिया है। इसकी बाबत मैंने एक एप्लीकेशन डीपीओ को दी। फिर वो एप्लीकेशन डीएसपी साहब को दी गई।”

सुल्तान कहते हैं कि अगले दिन जब वह डीएसपी के पास गए तो उन्हें बताया गया कि उनकी बीवी ने कॉन्स्टेबल मोहम्मद इबरार के साथ निकाह कर लिया है। इसके बाद उनके सामने उनकी बीवी के धर्म परिवर्तन और निकाह का प्रमाण पेश किया गया। वह वीडियो में बोलते हैं, “मेरे साथ बहुत जुल्म हुआ है। मेरी मुसलमान भाई-बहनों से, तमाम ईसाई भाई-बहनों और वर्तमान हुकूमत से अपील है कि मेरे बच्चों को मुझे वापस दिलवा दिया जाए।”

यहाँ बता दें कि ये अपहरण, धर्म परिवर्तन की कहानी सिर्फ आयशा या उनकी बेटी की नहीं है। अभी हाल में एक अन्य ईसाई नाबालिग लड़की का अपहरण का मामला भी पाक के लाहौर से आया है। जहाँ एक 42 साल के व्यक्ति ने बलात्कार और धर्म परिवर्तन के लिए 13 साल की बच्ची का अपहरण कर लिया।

शक के दायरे में किसान संगठन की विदेशी फंडिंग: 2 महीने में आए लाखों, खुद के अकाउंट में पैसा डालना चाहते हैं नेता

दिल्ली में चल रहा तथाकथित किसान आंदोलन अपने 25वें दिन में प्रवेश कर गया है। सरकार लगातार बातचीत का प्रस्ताव दे रही है, लेकिन किसान संगठनों ने अड़ियल रवैया अपना रखा है। आंदोलन को खालिस्तानी, इस्लामी कट्टरपंथी और अतिवादी वामपंथी ताकतों द्वारा हाइजैक किए जाने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। लालच देकर महिलाओं को सड़क पर लाने की बात भी सामने आई है। अब भारतीय किसान यूनियन (BKU एकता-उग्राहन) की विदेशी फंडिंग शक के घेरे में है।

तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाने वाले BKU (एकता-उग्राहन) ने दावा किया है कि उसे एक केंद्रीय एजेंसी ने उस रजिस्ट्रेशन का विवरण साझा करने को कहा है, जिसके तहत उसे विदेशी फंडिंग पाने की अनुमति मिली हुई है। BKU (एकता-उग्राहन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहन ने कहा कि NRIs और भारतीयों से उसे अपार समर्थन मिल रहा है, जिस कारण केंद्रीय एजेंसियाँ उसे निशाना बना रही है।

उन्होंने पूछा कि विदेश में ट्रक चलाने से लेकर मजदूरी करने वाले लोगों तक अगर हमें डोनेशन भेज रहे हैं तो इसमें समस्या क्या है? BKU (एकता-उग्राहन) का दावा है कि उसे पिछले 2 महीनों में 8 लाख रुपए की फंडिंग मिली है, लेकिन उसे इसका कोई अंदाज़ा नहीं है कि इसमें से कितना विदेश से आया है। 6 दिसंबर 2020 को BKU (एकता-उग्राहन) ने एक अपील जारी कर विरोध-प्रदर्शन को आगे बढ़ाने हेतु फंडिंग की अपील की थी।

अब संगठन चाहता है कि उसे डोनेशन के रूप में जितनी भी धनराशि मिली है, उसे भारतीय किसान यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरिकलाँ के व्यक्तिगत बैंक एकाउंट में ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने इसकी पुष्टि की है कि उनका बैंक खाता FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत रजिस्टर्ड है। ‘पंजाब एंड सिंध बैंक’ के फॉरेन एक्सचेंज विभाग ने भी बैंक खाते में आ रही फंडिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख थी, लेकिन अब वो भी चली गई। विशेषज्ञों का भी कहना है कि BKU (एकता-उग्राहन) ने FCRA के नियमों का पालन नहीं किया है, ऐसे में उसे आई विदेशी फंडिंग वापस दानदाताओं के एकाउंट्स में लौट सकती है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि बिना केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष रजिस्ट्रेशन कराए कोई भी व्यक्ति या संगठन विदेशी फंडिंग नहीं प्राप्त कर सकता।

फ़िलहाल BKU (एकता-उग्राहन) ने अपने वकीलों से एक जवाब तैयार करने को कहा है। संगठन को लग रहा है कि विदेशी फंडिंग के लिए उसे सरकारी एजेंसियों से समन मिल सकता है, इसलिए पहले से ही जवाब की तैयारी की जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार बैंकों से जानकारी माँग रही है कि उसे कितनी फंडिंग मिली है। हालाँकि, सरकार की तरफ से ऐसा कुछ नहीं कहा गया है।

कुछ दिनों पहले इसी तरह ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU) के भानु गुट के नेताओं में तकरार की खबर आई थी। प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने किसान नेता व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह की बात मानने से इनकार कर दिया था। अब कई किसान सड़कों पर तीनों कृषि कानूनों के समर्थन में भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा है कि ये कानून किसानों के हित में हैं और वो भी इसके समर्थन में बैठे रहेंगे।

व्यंग्य: अयोध्या में मस्जिद की जगह स्कूल या अस्पताल बनाने की माँग, गरीब देंगे दुआ

बाबरी न रही मगर अब अयोध्या में बाबरी से भी चार गुना बड़ी मस्जिद बनने जा रही है। बताया जा रहा है कि पाँच एकड़ जमीन पर मस्जिद के साथ ही अस्पताल भी बनाया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ पर एक समय में दो हजार लोग नमाज पढ़ सकेंगे। लेकिन देश का उदारवादी वर्ग इस सबसे बेहद नाराज है।

लिबरल समुदाय का कहना है कि एक ओर जहाँ उन्हें हर साल धरना-प्रदर्शन के लिए नई जगह तलाश करनी पड़ रही हैं, क्या समुदाय विशेष की ये जिम्मेदारी नहीं थी कि वह धरना प्रदर्शनकारियों के नाम यह पाँच एकड़ जमीन कर देती।

वामपंथी, लिबरल्स और फेसबुक एनार्किस्ट गिरोह का कहना है कि जहाँ वो हमेशा ढपली बजा बजाकर मंदिर और मस्जिद की जगह अस्पताल, स्कूल बनाने की वकालत करते रहे, ऐसे में पाँच एकड़ जमीन पर मस्जिद का बनाया जाना उनके मानवाधिकारों की निर्मम हत्या है।

एक प्रगतिशील लिबरल और ट्विटर विचारक ने कहा कि मस्जिद की जगह यहाँ पर मानवाधिकार कार्यालय भी बनाया जा सकता था लेकिन इतनी बड़ी जगह को मजहब के नाम पर कुर्बान कर दिया जाना बताता है कि हम आज भी कितने पिछड़े हुए हैं। ‘वोक सुशील’ ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि एक समाज के तौर पर शर्मिंदा हैं।

गौरतलब है कि मस्जिद को पृथ्वी की तरह ही गोल आकार में बनाया जाना तय हुआ है। ऐसे में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हैरानी जताते हुए कहा है कि अगर कोई मजहब पृथ्वी को आज तक चपटा मानता आया है, उसकी ही एक पाक जगह को गोल बनाकर उसे पृथ्वी का आकार बताना देश में बढ़ती हुई असहिष्णुता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि जरुर इस आकृति को बनाने के पीछे आरएसएस का भी हाथ है।

समुदाय विशेष का वर्ग ऐसा भी है को अभी तक भी इस पाँच एकड़ जमीन को भीख में मिली जमीन बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया रख रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर इस पूरी जमीन को गरीबों के रहने के लिए बनाया जाता तो गरीब भी मजहब वालों को दुआ देते। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लोगों को बीच में टोकते हुए कहा कि शेल्टर होम बनाने का आइडिया सबसे पहले उन्होंने ही दिया था।

लिबरल्स का कहना है कि वो इसके खिलाफ भी धरना-प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं क्योंकि फिलहाल सभी लोग कथित किसान आंदोलन में किसानों के साथ सेल्फी लेने में व्यस्त हैं। लिबरल्स गिरोह का कहना है कि वो अयोध्या में बनने जा रही मस्जिद की जगह गरीबों के लिए स्कूल और पूरी पाँच एकड़ जमीन पर अस्पताल बनाने के लिए जमकर ढपली बजाएँगे और इंटरनेट पर पिटीशन दायर करेंगे। कुछ लोगों को यह भी भय है कि नई मस्जिद के लिए नींव खोदते समय कहीं बुनियाद में बैठा बाबर बिरियानी बनाते ना मिल जाए।

ग्रामीणों को लालच देकर करा रहे थे धर्मांतरण, प्रेयर न करने पर दुर्व्यवहार: 3 ईसाई मिशनरी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के बाद अब आजमगढ़ से ईसाई धर्मांतरण कराने में लिप्त 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दीदारगंज के डीह कथौली गाँव में ईसाई धर्मांतरण कराने के लिए 3 लोग पहुँचे थे, जिन्हें सूचना मिलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय भाजपा नेता अशोक यादव ने इस मामले में थाने में तहरीर दी है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

इन तीनों को रविवार (दिसंबर 20, 2020) को दबोचा गया। अशोक यादव ने अपनी शिकायत में कहा है कि तीनों गाँव में ही एक घर में रुके थे और लोभ-लालच देकर लोगों का धर्मांतरण करवा रहे थे। सूचना पर जब वे वहाँ पहुँचे तो उन्हें भी प्रेयर करने को कहा गया। प्रेयर न करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। शोर मचाने पर तीनों वहाँ से भागने लगे, लेकिन मुस्तैद ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया।

आजमगढ़ पुलिस ने मौके से इसाइयत से सम्बंधित कई दस्तावेज भी बरामद किए हैं। प्रभारी निरीक्षक संजय ने जानकारी दी है कि पकड़े गए अभियुक्त वाराणसी, जौनपुर और आजमगढ़ के निवासी हैं। गाँव के ही त्रिभुवन यादव के यहाँ आयोजित प्रार्थना सभा में तीनों पहुँचे थे। पुलिस इन्हें थाने लेकर आई। फूलपुर के सीओ जितेन्द्र कुमार ने भी थाने में इनसे पूछताछ की। आरोपितों के नाम बालचंद जायसवाल, अशोक और नीरज हैं।

इससे 1 दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ईसाई धर्मांतरण के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। सूरजपुर थाना क्षेत्र में 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जो हिन्दू परिवारों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराते थे। गिरफ्तार आरोपितों में एक दक्षिण कोरिया की महिला भी शामिल है। उसे इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। जो लोग धर्म परिवर्तन के लिए तैयार होते थे, उन्हें तुरंत मोटा पैकेज दिया जाता था। बच्चों की पढ़ाई के लिए किताब से लेकर स्टेशनरी के समानों तक उपलब्ध कराए जाते थे।

बच्चों के अंग-भंग कर सूरदास के गाने! जी नहीं… इसाइयों ने खोजा था चर्च के लिए यह अमानवीय तरीका

परिभाषा के हिसाब से संवाद दोतरफ़ा होता है। मतलब एक पक्ष बोल रहा हो और दूसरा सिर्फ सुने, ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन अगर आप अखबार जैसे माध्यमों से परिचित हैं तो आप जानते होंगे, अखबार की बात तो आप खरीद कर पढ़ते हैं, मगर आपकी बात अखबार तक पहुँचे, ऐसा कम ही होता है। सिर्फ एक पक्ष की सुनी जाती है। ऐसा दो समुदायों के मिलने पे भी होता है।

अक्सर विजेता के गुण-दोष, हारने वाला समुदाय आसानी से अपना लेता है। हारने वालों की शायद ही कोई चीज़ विजेता सीखते हैं। जैसे विजेता रिलिजन की 13 संख्या को अशुभ मानने की परंपरा, या रविवार के अवकाश की परंपरा तो भारत ने आसानी से अपना ली मगर यहाँ की परम्पराएँ शायद ही उधर गई होंगी।

ऐसा ज्ञान-विज्ञान में ही नहीं, संगीत-कला के क्षेत्र में भी होता है। कई बार हारने वालों की चीज़ें हड़प ली जाती हैं। बाद में उन्हें श्रेय देने से भी इनकार कर दिया जाता है। विजेताओं की चीज़ें कैसे आती हैं, उसे देखना हो तो स्लमडॉग मिलियनैर फिल्म के शुरुआत का एक दृश्य याद कीजिए। वहाँ भिखारी बनाने वाला एक गिरोह कुछ बच्चों को गाना गाने पर जाँच के देखता है।

फिल्म का मुख्य किरदार जब अच्छा गाता पाया जाता है तो बहला-फुसला के उसे एक कमरे में ले जाते हैं। वहाँ धोखे से उसे बेहोश करके, चम्मच से उसकी आँखें निकालने वाले होते हैं! गिरोह का इरादा था कि अंधे को गाकर भीख ज्याद मिलेगी।

मुझे यकीन है कि उस दृश्य को देख कर ज्यादातर लोग काँप उठे होंगे। अंग्रेजी में जिसे नेल बाइटिंग सिचुएशन कहते हैं, वही कह कर ज्यादातर अख़बारों ने उसका जिक्र किया होगा। विकलांग करके गवाने की भयावह, घृणित परंपरा! ये जो विकलांग करवा कर गाना गवाने की परंपरा है, वो ईसाई रिलिजन से आई है।

आज जैसा आप बच्चों के जन्म, शादी पर, गाने वाले हिजड़ों को देखते हैं, वैसा कुछ होने का जिक्र भी भारतीय ग्रंथों में नहीं आता। भारत के, मतलब हिन्दुओं का पुराना इतिहास देखेंगे तो किसी को विकलांग बना देना ताकि वो गा कर कमा सके, ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलेगा। ये चर्च से आई परंपरा है। होता क्या था कि इस रिलिजन में स्त्रियों को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं।

जाहिर है ऐसे में स्त्रियों को चर्च में गाने की इजाजत तो हरगिज़ नहीं दी जा सकती। लेकिन जो क्रिसमस या ऐसे अवसरों पर क्वायर की परिपाटी थी, उसमें गाने के लिए स्त्रियों वाली आवाज भी चाहिए होती थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 9 साल की आस-पास की उम्र में बच्चों को अंग-भंग कर के हिजड़ा बनाने की परंपरा शुरू हुई।

फिर इन बंध्याकरण किए बच्चों की लंबी ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू होती थी। कई बार ये गरीब घरों के बच्चे होते थे। कम से कम खाने का इंतजाम होगा, इसलिए इस घृणित कृत्य के लिए माँ-बाप अपने बच्चे दे देते थे। हालाँकि प्रजनन क्षमता को ख़त्म कर देना अच्छा गायक हो जाने की गारंटी नहीं होती थी।

फिर ये भी था कि इस अमानुषिक कृत्य के बाद बच्चे के जीवित बचने की संभावना भी क्षीण होती थी। जो करीब 10 फीसदी बच्चे जीवित बच पाते, उनकी गाने की क्षमता हो, आवाज अच्छी हो ये भी जरूरी नहीं होता था। इसलिए कुछ भूखमरी से भी मरे ही होंगे।

इस काम के लिए पोप क्लेमेंट (अष्टम) ने 1599 में लिखित इजाज़त दी थी ताकि “कैस्ट्रटी” चर्च में गा पाएँ। पूरे दो सौ अस्सी साल बाद यानी 1878 में, पोप लियो ने, “कैस्ट्रटी” को चर्च में गाने देने से मना कर दिया था। स्त्रियाँ चर्च में ना आ सकें, इसलिए कैस्ट्रटी बनाने का घृणित कार्य चर्च करता रहा। स्त्रियों को चर्च के अन्दर जगह दिए बिना, अपने लिए ऊँचे स्वरमान (pitch) का गायन जुटाने का ये उनका तरीका था।

नहीं ग़लतफ़हमी मत पालिए! 1599-1878 के दौर में पूरे 26 पोप हुए हैं, यानी इस दौर में 26 बार ये आदेश दोहराया गया होगा। इनमें से दो पोप को ब्लेस्ड (Pious IX और Innocent XI) घोषित किया गया है। दो को केनोनाइजेशन (यानी संत घोषित करने की प्रक्रिया का शुरूआती चरण), के लिए जाँचा-परखा जा रहा है।

इनमें से कई प्रसिद्ध भी हुए थे। शायद सबसे प्रसिद्ध कास्ट्रटो 17वीं सदी के अंत का कार्लो ब्रोस्की था, जिसे फरिनेल्ली नाम से प्रसिद्धि मिली। इस पर 1994 में एक फिल्म भी बनी थी। इनकी प्रसिद्धि का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि स्वीडन की रानी क्रिस्टीना इनकी आवाज़ की ऐसी दीवानी थी कि उन्होंने पोलैंड के साथ युद्धविराम करवा दिया था!

दो हफ्ते तक कास्ट्रटो फेर्री आकर गा सके, इसके लिए युद्ध रुका रहा। चर्च अपने क्वायर के लिए ऐसे जबरन बनाए गए हिजड़ों को रख सके, इसके लिए अक्सर न्यू टेस्टामेंट का एक हिस्सा सुनाया जाता है। इस हिस्से के मुताबिक औरतों को सभाओं और चर्च में बोलना नहीं चाहिए (Corinthians 14:34-35 और Timothy 2:11-12)।

सन 1789 के दौर में सिर्फ रोम के चर्च क्वायर में गाने वाले 200 से ज्यादा कैस्ट्रटी थे। इन्हें चर्च ने 19वीं सदी में कहीं जाकर रखना बंद करना शुरू किया। सन 1870 में, पोप के शासित इलाके में कसाई और नाइयों द्वारा इस बर्बर बंध्याकरण को आदेश से बंद कर दिया गया था। 1878 में पोप लियो (13वें) ने नए कैस्ट्रटो को चर्च में काम ना देने का आदेश दिया।

इस तरह 1900 में सिस्टाइन चैपल और यूरोप के दूसरे कैथोलिक क्वायर में गाने वाले सिर्फ 16 कैस्ट्रटी बचे। सन 1903 में पोप पियस दशम के अधिकारिक प्रतिबंध पर ये वैटिकन में बंद हुआ। चर्च के आखरी कैस्ट्रटी अलेस्संद्रो मोरेस्की, की मृत्यु सन 1922 में हुई।

चर्च के गाने की इस अमानुषिक प्रथा की वजह से, इटली में, अंदाजन हर साल तीन से 5000 बच्चों का बंध्याकरण किया जाता था। उनमें से एक प्रतिशत, केवल 1% ही गायक बन पाते थे। इसके कारण ऑपेरा की परम्पराओं में ऐसे रोल लिखे जाते थे, जो कैस्ट्रटो गायक ही कर पाएँ, जैसे हान्डेल का ऑपेरा (operas of Handel)। ऐसे ऑपेरा जब आज मंचित किए जाते हैं, तो कोई स्त्री-पुरुष के कपड़ों में मुख्य किरदार निभाती है। कुछ ऐसे भी हैं (Baroque operas) जो कि इतने मुश्किल हैं, जिन्हें आज किया ही नहीं जाता।

हो सकता है आपको ऑपेरा पसंद हो तो कभी आपने इनका नाम सुना हो, नहीं तो ढूँढने के लिए गूगल है ही।

बाकी क्रिसमस है, जब आप क्वायर सुनेंगे तो इस प्रथा के अमानुषिक, बर्बर और वीभत्स इतिहास को भी याद कर लीजिएगा। मनुष्यता मरी ना हो तो गाने और रोने की आवाज में फर्क जरूर कर पाएँगे! सुन रहा है ना तू… रो रहा हूंँ मैं…