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केरल सोना तस्करी मामले में कई राज खोलने वाले पत्रकार की संदिग्ध मौत: तेज गति से जा रही ट्रक ने मारी टक्कर, CCTV फुटेज वायरल

केरल में पत्रकार एसवी प्रदीप (SV Pradeep) की एक सड़क दुर्घटना के कारण मौत हो गई। केरल सोना तस्करी मामले को लेकर वो खासे मुखर थे और इस पर लगातार रिपोर्टिंग भी कर रहे थे। तिरुवनंतपुरम में पत्रकारिता करने वाले एसवी प्रदीप (SV Pradeep) सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को शाम 4 बजे एक ट्रैफिक सिग्नल के पास काराक्कमण्डप्पम में सड़क दुर्घटना के शिकार हुए और उनकी मौत हो गई। बाइक से जा रहे पत्रकार को उसी दिशा में जा रही एक गाड़ी ने टक्कर मारी।

उनकी रहस्यमयी तरीके से हुई मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वो न सिर्फ केरल की सत्ताधारी LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) सरकार, बल्कि लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ भी खासे मुखर थे। केरल में सोना तस्करी की आँच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक जा पहुँची है। केरल के इस ताज़ा ‘हिट एंड रन’ मामले की बात करें तो पीछे से तेज गति से आ रही एक ट्रक ने पत्रकार की बाइक को ठोकर मार दी।

पुलिस ने इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी निकाला है, जिसमें देखा जा सकता है कि पत्रकार एसवी प्रदीप (SV Pradeep) को एक SML ट्रक ने टक्कर मारी। इस फुटेज में पत्रकार टक्कर लगने के साथ सड़क पर पड़े हुए दिखते हैं और तेज गति से ट्रक भाग निकलता है। असिस्टैंट कमिश्नर के नेतृत्व में इस मामले की जाँच के लिए टीम गठित कर दी गई है। पुलिस ने ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है।

पत्रकार SV Pradeep की दुर्घटना का CCTV फुटेज

एसवी प्रदीप को इससे पहले कई बार धमकियाँ मिल चुकी थीं। उन्होंने हाल ही में पिनाराई विजयन सरकार की तरफ उँगली उठाते कई इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स मीडिया में लाई थी, जो केरल के सोना तस्करी मामले से जुड़ा हुआ था। कहा जा रहा है कि वो इस मामले में एक बड़ा खुलासा करने वाले थे। हाल ही में केरल के इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी उनकी आलोचना की थी। वो न्यूज़ 18, जय हिन्द, मीडिया वन, मंगलम और कैराली जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके थे।

निमोरा पुलिस थाने में पीड़ित परिजनों ने शिकायत दर्ज करा कर उन्हें मिली धमकियों के आधार पर हत्या की आशंका जताई है। केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन, केरल भाजपा के अध्यक्ष के सुरेंद्रन, और नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने इस मामले में जाँच की माँग की है। केरल पुलिस ने एक जॉय नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर के ट्रक को जब्त कर लिया है। सुरेंद्रन ने कहा है कि मृत पत्रकार कई राज खोलने वाले थे।

सितम्बर 2020 में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के संयोजक बेनी बेहानन ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पद से हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि जब से मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठने शुरू हुए हैं, पिनराई का पद पर बने रहना अनुचित है। उनका दावा था कि सीएमओ के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और पिनराई को जाँच में सहयोग करना चाहिए।

किसान संगठनों को पार्टी बना कर उन पर कल अदालती प्रक्रिया शुरू की जाए: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली-हरियाणा सीमा पर किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में गत वर्ष के शाहीनबाग मामले का हवाला दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि हम एक कमिटी गठित करेंगे ताकि विषयों पर चर्चा की जाए। कोर्ट ने कहा कि हम किसान और सरकार, दोनों का पक्ष सुनकर कल सुनवाई करेंगे।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और इसे आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप चाहते हैं बॉर्डर खोल दिए जाएँ? जिस पर वकील ने कहा कि अदालत ने शाहीनबाग केस के वक्त कहा था कि सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि किसान संगठनों ने सरकार को लिखित में जवाब देते हुए संशोधनों को ठुकरा दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा है कि वो किसान संगठनों का पक्ष सुनेंगे, साथ ही, सरकार से पूछा कि अब तक इस विषय पर समझौता क्यों नहीं हो पाया? अदालत की ओर से अब किसान संगठनों को नोटिस दिया गया है, अदालत का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर जल्द से जल्द समझौता होना चाहिए। अदालत ने सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाने को कहा है, ताकि दोनों आपस में मुद्दे पर चर्चा कर सकें।

अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्दे सहमति से सुलझाए जाएँ। केंद्र, पंजाब, हरियाणा को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस देकर किसानों से जुड़ी याचिका पर तीनों से कल तक जवाब माँगा है। कल भी सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।

आज की सुनवाई की कुछ अहम बातें –

  • आप सभी लोग एक साथ बैठें। सदस्यों की एक अस्थायी सूची तैयार करें। किसानों के साथ सरकार का जुड़ाव ऐसा नहीं होगा कि ऐसा लगता है।
  • खंडपीठ ने एसजीआई को निर्देश दिया कि वह एक समिति बनाए, जिसमें सरकार के सदस्यों और भारतीय किसान संघ के सभी सदस्य शामिल हों जो वार्ता में शामिल हों और एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुँचें।SGI ने कहा- सरकार तैयार थी और तैयार है। लेकिन कठिनाई यह है कि उनका कहना बस यह है कि या तो आप कानूनों को निरस्त करते हैं या नहीं। इनकी या तो हाँ है या नहीं। वो बस ‘हाँ या ना’ की तख्तियां लेकर आते हैं। मंत्री बात करने गए थे, उन्होंने मंत्रियों को भी अपनी पीठ दिखाई।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप चाहते हैं बॉर्डर खोल दिए जाएँ। जिस पर वकील ने कहा कि अदालत ने शाहीन बाग केस के वक्त कहा था कि सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने वकील को टोकते हुए कहा कि वहाँ पर कितने लोगों ने रास्ता रोका था? कानून व्यवस्था के मामलों में मिसाल नहीं दी जा सकती है। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या किसान संगठनों को केस में पार्टी बनाया गया?

CM योगी को हराने के लिए अभी से घेराबंदी: ओवैसी कर रहे गठबंधन, AAP भी है मैदान में

उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनावों में योगी सरकार को हराने के लिए रणनीति बननी अभी से शुरू हो गई है। हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में भाजपा से करारी शिकस्त पाने के बाद AIMIM ने तय किया है कि वह यूपी की ओर कूच करेंगे। पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए यह घोषणा की। 

उन्होंने यूपी चुनावों के लिए बताया कि उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन कर रही है। उन्होंने बुधवार को पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से मिलकर मीडिया से भी बात की। गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी से बातचीत का सवाल पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा, “हम दोनों (वह और ओम प्रकाश राजभर) आपके सामने बैठें हैं। हम साथ में खड़े हैं और हम उनके नेतृत्व में काम करेंगे।”

यहाँ उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने भी साल 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में लड़ने का फैसला किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने हाल में ऐलान करते हुए बताया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

ओवैसी की नजर भी यूपी विधानसभा चुनावों में इसीलिए बनी हुई है क्योंकि यहाँ काफी मुस्लिम बाहुल्य सीटें है। यही कारण है कि उन्हें अपने विस्तार की संभावनाएँ नजर आ रही हैं। इससे पहले ओवैसी अपनी किस्मत बिहार चुनाव में आजमा चुके हैं। वहाँ पहली बार में AIMIM ने 5 सीटें जीती थी। इसके अलावा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ओवैसी की पार्टी का वोट शेयर भी बढ़ा हुआ देखा गया था।

इसी तरह हाल में हुए गोवा के जिला पंचायत चुनावों में आम आदमी पार्टी ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी। हालाँकि, AAP का केवल 1 सीट से खाता खुल पाया था, बाकी बहुमत भाजपा को मिला था।

बात करें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की तो उन्होंने पिछले चुनावों में भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। लेकिन अब पार्टी से अलग होने के बाद वह अपनी राजनीति की जमीन बचाने के लिए ओवैसी से गठबंधन कर चुके हैं। उन्होंने जनभागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है। इसमें बाब सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी, राष्ट्रीय उदय पार्टी, राष्ट्रीय उपेक्षित समाज पार्टी और जनक्रांति पार्टी शामिल है।

‘सनातन धर्म को नकारात्मक ढंग से पेश किया’: सैफ अली खान के खिलाफ केस दर्ज, सीता हरण को ठहराया था जायज

रामायण को लेकर अभिनेता सैफ अली खान का विवादित बयान देना अब उन पर भारी पड़ रहा है। फिल्म ‘आदिपुरुष’ में मुख्य विलेन लंकेश का किरदार निभा रहे अभिनेता के खिलाफ उत्तर प्रदेश के जौनपुर में केस दर्ज किया गया है। जौनपुर के अडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में इस मामले की सुनवाई की जाएगी। उनके साथ-साथ ‘आदिपुरुष’ और ‘तान्हाजी’ के निर्देशक ओम राउत के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है।

इस मामले में सुनवाई के लिए बुधवार (दिसंबर 23, 2020) की तारीख तय की गई है। ये याचिका सिविल कोर्ट के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने दायर की है। खुद को सनातन धर्म का अनुयायी बताते हुए उन्होंने कहा है कि सैफ अली खान की टिप्पणियों से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि जहाँ अयोध्या के राजा रहे श्रीराम को अच्छाई का प्रतीक माना जाता है, वहीं लंकापति रावण को बुराई के रूप में देखा जाता है।

रावण को ‘मानवीय दृष्टिकोण’ से प्रदर्शित करने की बात करते हुए सैफ अली खान ने दावा किया था कि ‘आदिपुरुष’ में सीता हरण को भी जायज ठहराया जाएगा। उनके बयान पर विरोध होने के बाद उन्होंने माफ़ी माँग ली थी। अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में दावा किया है कि सैफ अली खान ने अपने इंटरव्यू में सनातन धर्म में आस्था को नकारात्मक ढंग से पेश करने का प्रयास किया है।

उन्होंने अपनी याचिका में कई लोगों के नाम बतौर गवाह शामिल किए हैं। उनका कहना है कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने इस इंटरव्यू को ऑनलाइन देखा और उनकी धार्मिक भावनाएँ भी आहत हुई हैं। विवाद होने पर सैफ अली खान ने अपने बयान पर ‘गंभीरतापूर्वक’ माफ़ी माँगने की बात करते हुए कहा था कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था और वो अपने बयान को वापस लेते हैं। उन्होंने स्वीकारा था कि लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं।

दिसंबर 6, 2020 को दिए गए इस बयान के खिलाफ कोर्ट को 6 गवाहों के नाम सौंपे गए हैं। हिमांशु श्रीवास्तव जौनपुर नगर कोतवाली क्षेत्र के जोगियापुर मोहल्ला के निवासी हैं और दीवानी न्यायालय में बतौर अधिवक्ता कार्यरत हैं। ये अर्जी अधिवक्ता उपेंद्र विक्रम सिंह के माध्यम से दायर की गई है। इस अर्जी के आधार पर CrPc की धारा 156 (3) पर मामला दर्ज हुआ है। इसके तहत किसी भी संज्ञेय मामले की जाँच करने के लिए एक मजिस्ट्रेट को पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को निर्देशित करने का अधिकार है।

सैफ के बयान पर आक्रोशित मुकेश खन्ना ने भी कहा था, “मैं देख रहा हूँ कि अभी भी हमारे फिल्मकार हमारे धार्मिक किरदारों के साथ छेड़छाड़ करने की अवांछनीय कोशिश में लगे हुए हैं। मुझे बताया गया है कि हमारे सैफ अली खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है, अपनी एक आने वाली फिल्म ‘आदिपुरुष’ के किरदार के बारे में, कि उन्हें लंकेश रावण का रोल करने में बहुत मजा आया, दिलचस्प लगा। उनके हिसाब से वो उन्हें मानवीय और मनोरंजक बना रहे हैं। दयालु दिखा रहे हैं।”

‘मादर#$… अगर दोबारा ये देखा तो गई तेरी नौकरी’: कोरोना नियम को लेकर टॉम क्रूज ने सेट पर जम कर गाली दी

हॉलीवुड के मशहूर सुपरस्टार टॉम क्रूज़ (Tom Cruise) को अभी तक आपने केवल उनकी स्मार्टनेस और एक्टिंग के आधार पर जज किया होगा। लेकिन, अब उनकी एक ऑडियो लीक हुई है, जिसमें वह अपनी फिल्म के क्रू मेंबर्स को बुरी तरह डाँट रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऑडियो में वो कोरोना नियम को तोड़ने वालों पर चिल्ला रहे हैं। 

द सन की रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटर स्क्रीन के सामने दो लोगों को पास-पास खड़ा देख उन्हें इतना गुस्सा आया और उन्होंने कहा, “अगर मैंने दोबारा तुम दोनों को ये करते हुए देख लिया तो तुम दोनों को कोई नहीं बचा पाएगा।”

ऑडियो में क्रूज हॉलीवुड के मायने बताते हुए कहते हैं, “हम सर्वोच्च मानक (Gold standard) हैं। वह हमारे कारण हॉलीवुड में वापस फिल्में बना रहे हैं क्योंकि वो हम पर विश्वास करते हैं और हम लोग क्या कर रहे हैं? मा*****& मैं रात भर हर स्टूडियो, बीमा कंपनियों और प्रोड्यूसर्स के साथ फोन पर लगा हूँ और वो भी अपनी फिल्म बनाने के लिए हमारी ओर देख रहे हैं। हमारे कारण हजारों जॉब तैयार होती हैं। मैं तुम्हें दोबारा ये सब करते हुए न देखूँ।”

क्रूज के शब्द पढ़ कर समझा जा सकता है कि ब्रिटेन में फिल्म के सेट पर COVID-19 दिशा-निर्देशों को लागू करने के बारे में वो कितने सख्त हैं। उन्होंने अपने उन क्रू मेंबर्स को डाँटा है, जो कोरोना गाइडलाइन को फॉलो नहीं कर रहे थे।

क्रूज आगे कहते हैं, “आप ये सब उन लोगों को बता सकते हैं, जो अपने घरों को खो रहे हैं क्योंकि इंडस्ट्री बंद है। ये सब उनकी टेबल पर खाना नहीं देगा और न ही कॉलेज शिक्षा के लिए पेमेंट देगा। मैं इस कमबख्त इंडस्ट्री के भविष्य के बारे में सोचते हुए हर रात सोता हूँ।”

क्रूज कहते हैं, “माफ करिए, मैं आपकी माफी से बहुत ऊपर हूँ। मैंने आपको बता दिया और अब मैं बिलकुल यही चाहता हूँ, अगर आप ये नहीं करना चाहते तो आप बिलकुल बाहर जाइए। आप जैसे लोग इस इंडस्ट्री को बंद कर रहे हैं। समझे! अगर मैंने ये सब दोबारा देख लिया, तो आप गए।”

बता दें कि क्रूज ने कुछ क्रू मेंबर्स की ओर इशारा करते हुए एक को कहा, “क्या आप उनकी नौकरी के लिए जिम्मेदार होंगे।” अपनी बात को आगे रखते हुए वह कहते हैं, “क्या आप मेरी बात को समझ रहे हैं कि मैं क्या चाहता हूँ? मेरी जिम्मेदारियों को समझ रहे हैं, जो मुझ पर हैं? मैं आप लोगों के कारणों को सुनूँगा लेकिन अगर आप तार्किक नहीं हुए तो आप नौकरी से हाथ धो बैठेंगे। मुझे बस यही कहना है। बस इतना ही। मुझे यकीन है कि आप लोग यहाँ रहेंगे।” 

बता दें कि टॉम क्रूज इस समय मिशन इंपॉसिबल-7 फिल्म की शूटिंग में लगे हैं। पिछले दिनों सेट पर 12 लोगों के कोरोना पॉजिटिव आने से पहले ही शूटिंग डिले हो रखी है। अभी एक हफ्ते पहले ही ब्रिटेन में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई है। ऐसे में वो कोरोना गाइडलाइन को लेकर काफी सख्त हैं। वह सुरक्षा मानकों को पूरा ख्याल रख रहे हैं। उनके मुँह पर हमेशा मास्क रहता है और यही अपील वो बाकियों से भी करते हैं।

केरल में कॉन्ग्रेस को झटका: राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा आगे, BJP कैंडिडेट से हारे कोच्चि के मेयर उम्मीदवार

केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतगणना चालू है। मुख्य लड़ाई कॉन्ग्रेस की UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) और वामपंथी LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) के बीच चल रही है। लेकिन, इन दोनों के बीच भाजपा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कोच्चि कॉर्पोरेशन के नॉर्थ आइलैंड वर्ग में कॉन्ग्रेस के मेयर उम्मीदवार एन वेणुगोपाल मात्र 1 वोट से अपनी सीट भाजपा उम्मीदवार को गँवा बैठे। उन्होंने कहा कि उनकी जीत तय थी लेकिन क्या हुआ, उन्हें भी नहीं पता।

एन वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी के भीतर कोई समस्या नहीं थी, लेकिन वोटिंग मशीन के साथ ज़रूर कोई दिक्कत है। उन्होंने आरोप लगाया कि EVM भाजपा की जीत का कारण हो सकता है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वो इस मामले को लेकर कोर्ट नहीं जाएँगे, लेकिन अपने स्तर से जाँच करेंगे कि आखिर हुआ क्या। राजधानी तिरुवनंतपुरम में UDF 4, LDF 12 और NDA 13 सीटों पर आगे चल रहा है। भाजपा यहाँ मुख्य विपक्ष थी

वहीं केरल स्थानीय निकाय के कोच्चि की बात करें तो यहाँ UDF 27 और LDF 21 सीटों पर आगे चल रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाले NDA यहाँ मात्र 5 सीटों पर ही आगे है। कॉन्ग्रेस के UDF के लिए केरल में कुछ भी अच्छा नहीं जा रहा। ग्राम पंचायत में 327 सीटों पर UDF और 398 सीटों पर LDF आगे चल रहा है। प्रखंड पंचायतों में ये आँकड़ा क्रमशः 55 और 93 हो जाता है। निगमों (म्युनिसिपेलिटी) में ये आँकड़ा 37 और 39 का है। केवल कॉर्पोरेशंस में ही 3-3 की बराबरी है।

ये सब इसके बावजूद हो रहा है कि केरल में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए कॉन्ग्रेस की UDF लगातार सत्ताधारी LDF को घेर रही थी। साथ ही सोना तस्करी मामला और CMO के दुबई भ्रष्टाचार कनेक्शन को भी उठाया जा रहा था। केरल के पुलिस एक्ट को जारी कर के वापस लेना और राज्य सरकार के मंत्रियों का केंद्रीय एजेंसियों से पूछताछ होना – इन सब पर मुखर रहने के बावजूद कॉन्ग्रेस की हालत पस्त ही है।

जिला पंचायतों में तो कॉन्ग्रेस की हालत और भी गड़बड़ है। वहाँ UDF मात्र 3 ही सीटों पर आगे चल रही है, जबकि LDF ने 14 पर बढ़त बना रखी है। कोझीकोड कॉर्पोरेशन में LDF, UDF और भाजपा क्रमशः 26, 11 और 5 सीटों पर आगे है। कासरगोड जिले के पेरिया पंचायत में स्थित कलोत वार्ड में 2 कॉन्ग्रेस युवा नेताओं की हत्या पर पार्टी ने इसे मुद्दा बनाया था। वहाँ से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई है।

कन्नूर के जिस धर्मदायम में सीएम पिनाराई विजयन का आवास है, वहाँ के बूथ से CPM उम्मीदवार की जीत हुई है। लेकिन, ट्विस्ट ये है कि यहाँ वामपंथी गढ़ में भी भाजपा उम्मीदवार ने कॉन्ग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है। पलक्कड़ एकमात्र स्थानीय निकाय था, जहाँ भाजपा की सत्ता थी। इस बार भी उसे लीड मिलती दिख रही है। कोच्चि में 10 वर्षों से कॉन्ग्रेस काबिज रही है। इसे में कॉपोरेशन में उसके सबसे बड़े उम्मीदवार की हार हो गई।

‘मुझे डर था कि अनजान रह जाऊँगा, वो…’ – मणिकर्णिका के डायरेक्टर कृष ने कंगना रनौत पर साधा निशाना

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर इन दिनों इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग हमलावर हो रखे हैं। इसी क्रम में अब मणिकर्णिका फिल्म की कॉन्ट्रोवर्सी भी दोबारा उछली है। फिल्म के डायरेक्टर कृष जगरलामुदी (Krish Jagarlamudi) ने एक ओटीटी प्लैटफॉर्म Aha के टॉक शो में कंगना पर इल्जाम लगाए हैं। उनका कहना है कि कंगना ने उनकी फिल्म मणिकर्णिका: दी क्वीन ऑफ झाँसी को हाईजैक किया था।

कृष ने तमिल एक्ट्रेस समांथा अक्कीनेनी के शो ‘सैम जैम’ पर कहा कि फिल्म के दौरान उन्हें डर लग गया था कि हो सकता है वह दुनिया के लिए कोई अनजान मात्र रह जाएँ। उनके अनुसार, कंगना अपने हिसाब से फिल्म चला रही थीं। समांथा का ये शो 18 दिसंबर को टेलीकास्ट होगा।

हाल में ड्रग केस में एनसीबी के शिकंजे में आई अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के साथ शो में पहुँचे फिल्म निर्देशक कृष ने बातचीत में बताया कि वह मणिकर्णिका के विवाद पर एक आखिरी बार बोल रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जब कंगना और उनकी टीम ने फिल्म देखी, उसके दो दिन बाद मुझे कॉल किया। बतौर स्टोरीटेलर, मुझे डर था कि मैं इस दुनिया के लिए अनजान ही रहूँगा। एक आर्टिस्ट के तौर पर हम दुनिया को अपना काम तभी दिखा सकते हैं, जब हमें सही मौका मिले।”

इससे पहले अपने 2019 के एक इंटरव्यू में कृष ने कंगना के उन दावों को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि फिल्म की 70 प्रतिशत शूटिंग उन्होंने की। उनका कहना था, “शुरुआत की आधी फिल्म का कंगना ने केवल 20-25% और आखिर का 10-15% शूट किया है। मैंने गाने शूट नहीं किए और उसके एंट्री सीन नहीं शूट किए। यहाँ तक कि उन्होंने सेकंड हाफ के कई सीन भी बदल डाले, जो मैंने अलग तरह से शूट किए थे।”

इंटरव्यू में कृष ने कहा था, “यदि आप विजेंद्र को भेजे मैसेज देखेंगे, जो अब तक स्टोर हैं, उनसे पता चलता है कि उसका पहले से प्लान था कि वो फिल्म को टेक ओवर करेगी और मैसेज को अपने डिफेंस में दिखाएगी।”

कृष कहते हैं कि जब उन्होंने फिल्म की एडिटिंग खत्म की थी, तब कंगना उनके पास आई थीं और कहा कि उन्हें फिल्म पसंद है। हालाँकि, इसके साथ उन्होंने थोड़ी चिंता जाहिर की। कुछ दिन बाद वह कहने लगीं, “इसका ज्यादा है, उसका ज्यादा है, ये लड़की हावी हो रही है, वो हावी हो रही है।” फिर, उन्होंने कहा, “ये बदलना है, वो बदलना है।” अंत में उन्होंने ये भी कहा कि जो फिल्म उन्होंने यानी कृष ने डायरेक्ट की, वो कमल जैन को पसंद नहीं आई।

कृष के अनुसार, कंगना ने उनके वर्जन को भोजपुरी फिल्म बता दिया था। जिसके बाद कृष ने थक हार कर पूरे विवाद को विराम देते हुए कहा था, “कंगान और मैं दोनों इतनी जल्दी इस इंडस्ट्री से नहीं जाएँगे। मैं और भी फिल्मों का निर्देशन करूँगा और वो भी। लोगों को पता चलेगा कि कौन कहाँ है। मैं थक गया हूँ कंगना से और पूरे विवाद से।”

गौरतलब है कि मणिकर्णिका फिल्म साल 2019 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के कारण कंगना काफी कॉन्ट्रोवर्सी में भी आईं। उन्होंने कुछ पत्रकारों पर अपने बारे में गलत लिखने का इल्जाम भी मढ़ा। लेकिन अभी हाल में जब महाराष्ट्र सरकार से उनकी तकरार हुई तो सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को जवाब देने के लिए कंगना रनौत ने मणिकर्णिका फिल्म के पोस्टर शेयर करके ये बताया था कि वो पर्दे पर मराठा इतिहास के नायकों को लेकर आईं हैं।

‘…वो गाली नहीं, लोकतंत्र में आलोचना होगी ही’: उद्धव ठाकरे के खिलाफ ट्वीट करने वाली महिला की याचिका पर बॉम्बे HC

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि एक लोकतंत्र में न्यायपालिका की भी आलोचना की जा सकती है और उसे इसके लिए तैयार रहना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि ‘अदालत की अवमानना’ एकदम अंतिम उपाय या हथियार होना चाहिए। मंगलवार (दिसंबर 15, 2020) को एक महिला सुनैना होली द्वारा दायर की गई याचिका पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने ये कहा। महिला को उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य के खिलाफ ट्वीट्स करने पर गिरफ्तार किया गया था।

पीड़िता सुनैना होली अपने खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को रद्द करवाने के लिए कोर्ट पहुँची थीं। जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की पीठ ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को पता है कि आलोचना होने वाली है। ‘अदालत की अवमानना’ को कोर्ट ने अंतिम हथियार करार दिया और साथ ही जजों ने इसे अपनी व्यक्तिगत राय भी बताया। सुनैना के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने दलील दी कि FIR में कोई अपराध साबित नहीं किया जा सका है।

उन्होंने कहा कि सुनैना ने एक विशेषण का प्रयोग किया था, जो गाली नहीं है बल्कि ‘Foolish Emotions’ को भी दर्शाता है। उन्होंने दलील दी कि सिर्फ एक शब्द का प्रयोग करना आपत्तिजनक नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जिसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, उसे और ज्यादा अटेंशन मिल जाता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में एक कॉमेडियन के खिलाफ एक्शन लिया गया, अगर ये नहीं होता तो शायद ही किसी को कुछ पता चलता।

इस पर पीठ ने उन्हें टोका कि ये कॉमेडियन वाला मामला फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीन है। कोर्ट ने कहा कि सभी चीजें नहीं पढ़ी जातीं और इस मामले के विवरण पढ़ने के लिए समय भी नहीं है। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के वकील मनोज मोहिते ने कहा कि आपत्तिजनक ट्वीट्स और टिप्पणियाँ करने वालों के उद्देश्य को देखा जाना चाहिए। HC बेंच ने FOE (अभिव्यक्ति की आजादी) के अधिकार की बात करते हुए कहा कि दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण किए बिना इसका प्रयोग किया जाना चाहिए।

साथ ही याद दिलाया कि इस मूलभूत अधिकार की सुरक्षा के लिए राजनेता, न्यायपालिका, मीडिया और सार्वजनिक ज़िंदगी में जो भी हैं – वो सभी जिम्मेदार हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि भारत में सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले ऐसी आदिवासी समुदाय भी हैं, जिन्हें अपने मूलभूत अधिकारों का पता तक नहीं और उन तक इसे लेकर जागरूकता फैलाना प्रशासन के लिए कठिन कार्य है। कोर्ट ने कहा कि 130 करोड़ के इस देश में हमें बचपन से ही सहिष्णुता के बारे में पढ़ाया जाता रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा,

“हमारे देश में हमें अपने समाज की तरफ देखने की ज़रूरत है। जनसंख्या और सामाजिक संरचनाओं को देखिए। जो विदेशी यहाँ यात्रा करने आते हैं, वो हमारे देश की समरसता को देख कर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। दूसरे देशों से सहिष्णुता को लेकर तुलना कीजिए और देखिए यहाँ कैसे 130 करोड़ लोग साथ मिलजुल कर रह रहे हैं। ये कोई मजाक नहीं है, ये आसान नहीं है। ये सहिष्णुता श्रेयस्कर है।”

गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को अदालत फिर से इस मामले को सुनेगी। वकील चंद्रचूड़ ने यूएस सुप्रीम कोर्ट का आँकड़ा देते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के जज 1 दिन में उतने मामले सुन लेते हैं, जितना अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट 1 वर्ष में सुनता है। उन्होंने कहा कि FIR कोई इनसाइक्लोपीडिया नहीं होता है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पीएम का भी नाम लेता है तो पीएम एक पद है, आलोचना के लिए खुला है।

इससे पहले बॉम्बे HC ने इसी मामले में कहा था कि पूरे समाज के अधिकारों और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच लोगों को संतुलन बनाना ही पड़ेगा। उसने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पूछा कि क्या उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो ट्विटर पर कुछ आपत्तिजनक लिखेंगे। सुनैना द्वारा पोस्ट की गई 3 ट्वीट के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने 3 अलग-अलग FIR दर्ज की थी।

रेप के दोषियों को बना दिया जाएगा नामर्द: पाकिस्तान में नया कानून, कोर्ट की सुनवाई सिर्फ 4 महीने में करनी होगी पूरी

पाकिस्तान में रेप जैसे अपराध से निपटने के लिए एक नया कानून लाया गया है। इस कानून के तहत रेप के दोषी को नपुंसक बनाने का प्रावधान किया गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इस कानून को मंगलवार (दिसंबर 15, 2020) को मंजूरी दी। रेप विरोधी अध्यादेश 2020 (Anti-Rape Ordinance 2020) पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर किए जाने के बाद कहा गया कि इसके लिए पाकिस्तान में स्पेशल कोर्ट बनाए जाएँगे।

इससे पहले इस कानून को पाकिस्तान कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। नए कानून में दोषियों को या लगातार यौन अपराध करने वालों को दवाई देकर नपुंसक बनाने का प्रावधान किया गया है। यह कार्य नोटिफाइड बोर्ड के मार्गदर्शन में होगा।

कानून के अंतर्गत एंटी रेप सेल को घटना की रिपोर्ट होने के 6 घंटे के भीतर पीड़िता की जाँच करवानी होगी और आरोपितों को पीड़िता से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पीड़िता से बात सिर्फ न्यायाधीश और आरोपित की ओर से पेश होने वाले वकील ही कर पाएँगे।

इसके अनुसार, नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (NADRA) के जरिए यौन अपराधियों की देश भर में लिस्ट तैयार की जाएगी। पुलिसकर्मियों या सरकारी अधिकारियों ने किसी मामले की जाँच में लापरवाही बरती तो उन्हें तीन साल की जेल होने का भी प्रावधान इस नए कानून में किया गया है। इसके अलावा लापरवाही करने पर उन पर जुर्माना भी लग सकता है। जाँच से संबधी झूठ बोलने पर दंड देने की बात भी कही गई है।

इस कानून के तहत पाकिस्तान में विशेष अदालतों का गठन होगा और महिलाओं व बच्चों के ख़िलाफ़ दुष्कर्म संबंधी मामलों पर त्वरित कार्रवाई भी होगी, जिसके कारण अदालत की सुनवाई 4 महीने में पूरी हो जाएगी।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के अनुसार पीड़ितों की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा और खुलासा एक दंडनीय अपराध होगा। इमरान खान सरकार की ओर से इन सबके लिए फंड बनाया जाएगा और इसके पैसों का इस्तेमाल करके स्पेशल कोर्ट का गठन होगा। इस काम के लिए संघीय व प्रांतीय सरकारों की ओर से भी फंड जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस काम में गैर-सरकारी संगठनों, आम लोगों के साथ लोकल, नेशनल और इंटरनेशनल एजेंसियों से भी मदद ली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में यह कानून मोटर-वे गैंगरेप के कुछ महीने बाद लाया गया है। इस घटना के बाद से लगातार रेप घटनाओं के ख़िलाफ़ कदम उठाने की माँग सरकार से की जा रही थी। बता दें कि गत सितंबर में कुछ लोगों ने बच्चों के साथ जा रही एक विदेशी महिला की कार हाईवे पर खराब होने के बाद उसका गैंगरेप किया था। इसके अलावा सिंध के काशमोर जिले में महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ रेप की घटना के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने नवंबर में घोषणा की थी कि उनकी सरकार एंटी रेप ऑर्डिनेंस लाएगी।

‘मैं पहले भारतीय हूँ, फिर बंगाली’: शुभेंदु अधिकारी ने TMC को चेताया, समर्थकों ने चालू की दफ्तरों की भगवा पुताई

जहाँ भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने कह दिया है कि पश्चिम बंगाल के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को पार्टी में शामिल होने वाले हैं, वहीं दूसरी तरफ समर्थकों के व्यवहार से भी लग रहा है कि वो भाजपा कैडर बनने के लिए तैयार हैं। शुभेंदु अधिकारी के दफ्तरों को, जहाँ से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का कामकाज देखा जाता था, अब उन्हें समर्थकों द्वारा भगवा रंग से रंगा जाना शुरू कर दिया गया है।

कुछ ही सप्ताह पहले तक ममता बनर्जी की सरकार में परिवहन, सिंचाई और जल मंत्रालय संभालने वाले शुभेंदु अधिकारी ने हुगली रिवर ब्रिज कमिशन के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देकर TMC सरकार से नाता तोड़ लिया था। अब उन्होंने कहा है कि वो सबसे पहले एक भारतीय हैं, उसके बाद बंगाली। उन्होंने TMC द्वारा भाजपा नेताओं को बाहरी बताए जाने पर जवाब देते हुए कहा कि बंगाल सहित अन्य राज्य भी इसी देश का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि TMC में चंद लोगों को संगठन से भी ज्यादा भाव दिया जाता है। पूर्वी मेदिनीपुर के हल्दिया में स्वतंत्रता सेनानी सतीश चंद्र समांता के जयंती समरोह में जनता को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पूरी तरह भारत का ही हिस्सा है और अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को बाहरी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि न तो तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने सतीश चंद्र को नॉन-हिंदीभाषी सांसद के रूप में ब्रांडिंग की, न ही सतीश चंद्र ने नेहरू को बाहरी बताया।

बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की शिक्षा बीच में ही छोड़ कर स्वतंत्रता संग्राम में कूदे सतीश चंद्र ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘ताम्रलिप्ता राष्ट्रीय सरकार’ के गठन में बड़ी भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता के बाद वो 3 दशकों तक सांसद रहे। शुभेंदु अधिकारी ने पूछा कि पश्चिम बंगाल में आखिर ‘पार्टी का, पार्टी के लिए और पार्टी द्वारा’ वाला शासन क्यों चल रहा है? उन्होंने याद दिलाया कि ये लोकतंत्र है और यहाँ पार्टी की जगह जनता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं किसी भी पद का लालची नहीं हूँ। मैंने जीवन भर जनता के लिए काम किया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने पद की लालसा से ये सब किया है। 2021 विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें करारा जवाब देगी। नंदीग्राम आंदोलन जनता का था। न तो कोई राजनीतिक दल, न ही किसी खास व्यक्ति को इसका फायदा लेने की कोशिश करनी चाहिए।” 49 वर्षीय नेता के इस रुख से तृणमूल खेमे में बेचैनी दिख रही है।

उधर पश्चिम बंगाल के 3 जिलों में प्रखंड स्तर पर स्थित शुभेंदु अधिकारी के दफ्तरों को उनके समर्थकों ने भगवा रंग से रंगना चालू कर दिया है। पहले इन्हीं दफ्तरों से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का कामकाज देखा जाता था। कुछ गाँवों में स्थित उनके दफ्तरों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिन्हें भगवा रंग से रंगा हुआ देखा जा सकता है। ‘दादा का अनुयायी’ पोस्टर लहराते हुए समर्थकों ने मार्च भी निकाला।

उन्होंने एक और बड़ा दावा किया कि हाल के समय में उन पर 11 बार हमले किए गए, लेकिन वो ऐसा करने वालों को चेताना चाहते हैं कि उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा, “मैं आलोचकों को बताना चाहता हूँ कि मेरे साथ जनता है, जिसका मेरे साथ कनेक्शन है। मेरा परिवार 7 लोगों का नहीं है, बंगाल के हर गाँव में पाँत-भात खाने वाला मेरा परिवार है। इंतजार कीजिए, जल्द ही बड़ी घोषणा करूँगा और अपना रुख साफ़ करूँगा।”

पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसी सप्ताह के अंत में कोलकाता जाने वाले हैं। उधर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने निर्णय लिया है कि अब वो शुभेंदु अधिकारी का और मान-मनव्वल नहीं करेगी, भले ही वो पार्टी छोड़ कर कहीं और चले जाएँ।

भाजपा में शामिल होने से पहले शुभेंदु अधिकारी दिल्ली भी जाने वाले हैं। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा भी प्रदान किए जाने की चर्चा चल रही है। TMC ने उन्हें मनाने के लिए सांसद सौगात रॉय को लगाया था, लेकिन जिस तरह से उनसे बातचीत का व्हाट्सप्प चैट सार्वजनिक कर के मीडिया को दे दिया गया, उससे शुभेंदु खासे नाराज हुए।