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बीजद के निष्कासित विधायक को अधिकारियों ने घर से उठाया, पत्नी ने कहा- अगर मेरे पति को कुछ हुआ तो CM जिम्मेदार

ओडिशा के गोपालपुर क्षेत्र के विधायक व बीजेडी से निष्कासित नेता प्रदीप पाणिग्रही को क्राइम ब्रांच की इकोनोमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने आज उनके घर से उठा लिया है। पाणिग्रही की पत्नी सुजाता ने यह जानकारी देते हुए कहा कि गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को उनके पति को 4 लोग SUV में लेकर गए हैं, जिन्होंने खुद को क्राइम ब्रांच EOW से बताया।

ओटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सुजाता पाणिग्रही ने कहा, “बिना किसी नोटिस या वारंट के उन्होंने मेरे पति को उठा लिया। क्या मेरा पति एक नक्सली या आतंकवादी हैं जिनसे अधिकारियों द्वारा गलत व्यवहार किया गया है। अगर सरकार ने नक्सलियों के मामले में ऐसी ही सख्ती दिखाई होती तो समस्या अब तक नहीं होती।”

सुजाता का कहना है कि उनके पति को निशाना बनाकर जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्राइम ब्रांच से आए लोगों को इस तरह उनके पति को एक अनजान जगह ले जाने की क्या जरूरत थी। उनका कहना है, “मुझे अपने पति की लोकेशन के बारे में नहीं पता चल पा रहा है। अगर मेरे पति को कुछ भी हुआ तो मुख्यमंत्री इसके लिए जिम्मेदार होंगे।”

संबाद इंग्लिश के अनुसार सुजाता कहती हैं, “सरकार का दावा है कि मेरे पति के बैंक खाते में 2.5 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। मुझे यह मंजूर है। हम उस पर स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार हैं। अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दिए बिना, सरकार ने हम पर अनुचित दबाव डाला।”

गौरतलब है कि दागी आईएफएस अधिकारी अभय कांत पाठक के साथ कथित संबंधों के लिए निष्कासित, प्रदीप ने अपने निष्कासन के बाद बीजेडी सरकार की भ्रष्टचार से जुड़ी पोल पट्टी खोलने की धमकियाँ मीडिया इंटरव्यू में कई बार दी थीं। उन्होंने दावा किया था कि राज्य सरकार मिड-डे मील प्रोग्राम के दाल वितरण में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार कर रही है।

बता दें कि इससे पहले भ्रष्टाचार पर कवरेज करने को लेकर ओडिशा के स्थानीय चैनल ओटीवी पर भी इस तरह की कार्रवाई हो चुकी हैं। पिछले दिनों ऐसे मामले आए जब चैनल के अधिकारियों ने अमित शाह से मदद माँगी।

पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया तुर्की, सीरियन आतंकियों को कश्मीर भेजने का प्लान: ग्रीस पत्रकार का दावा

पाकिस्तान की मदद करने के लिए अब तुर्की ने सीरिया के आतंकी समूहों को कश्मीर भेजने का निर्णय लिया है। यह खुलासा ग्रीस के एक मशहूर पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट में पत्रकार ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन पाकिस्तान की मदद के लिए कश्मीर में सीरिया के आतंकियों को भेजने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आतंकी समूहों से बात भी की है।

एंड्रियास माउंटजौरौली का यह लेख ग्रीस की न्यूज वेबसाइट Pentapostagma पर प्रकाशित है। इसमें उन्होंने लिखा है कि सीरियन नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने कुछ दिन पहले ही अपने साथी आतंकियों से कहा है कि तुर्की यहाँ से कश्मीर में अपने कुछ यूनिट्स को तैनात करना चाहता है। 

पत्रकार का दावा है कि उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर नियंत्रण करने वाली सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन है। उनके अनुसार इम्सा का कहना है कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य हथियारबंद गिरोहों से इस बारे में बात कर रहे हैं और कमांडरों से ऐसे लोगों के नाम बताने को कह रहे हैं जो कश्मीर जाना चाहते हैं।

रिपोर्ट से आतंकियों को कश्मीर जाने के लिए 2000 डॉलर की राशि देने की बात भी सामने आई है। आतंकियों को कहा जा रहा है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।

बता दें कि इससे पहले तुर्की ने आर्मीनिया के साथ लड़ाई में खुलकर अजरबैजान का साथ दिया था। इतना ही नहीं, फ्रांस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने भी इस पर खुलासा करते हुए कहा था कि तुर्की ने सीरिया में अपने सहयोगी आतंकी संगठन के लड़ाकों को काराबाख में लड़ाई के लिए तैनात किया था। साथ ही युद्ध के लिए काफी पैसा भी मुहैया करवाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की राष्ट्रपति खुद को मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा नेता बनाना चाहते हैं। वह खुद के कद को बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं। पत्रकार का दावा है कि पाकिस्तान और तुर्की एक दूसरे को सहयोग देकर दूसरे देशों की जमीन कब्जाना चाहते हैं। हाल में ही शील्ड ऑफ मेडेटेरियन युद्धाभ्यास के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान तुर्की पहुँचे थे।

रिपोर्ट कहती हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति पाक की सहायता से ग्रीस की जमीन हथियाने की फिराक में हैं, यही कारण है कि वह कश्मीर के मुद्दे पर उनकी सहायता के लिए आतंकी गुटों को भेजने की योजना बना रहे हैं।

‘आमी किलिकी भाषा जानी’: ममता बनर्जी ने हिडेन टैलेंट से उठाया पर्दा तो लोग उड़ाने लगे मजाक, देखें वीडियो

पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव होने से पहले बयानों पर पलटवार होने शुरू हो गए हैं। इस बीच ममता बनर्जी की भी एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री के बंगाली बोलने पर जवाब दिया है और अपने हिडेन टैलेंट से पर्दा उठाते हुए कहा है कि उन्हें तमाम तरह की भाषाएँ आती हैं लेकिन उन्होंने कभी इसे बताना जरूरी नहीं समझा।

दरअसल, पीएम मोदी ने इस रविवार को अपने मन की बात में एक बंगाली में पंक्ति कही थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई भाषाएँ जानने का दावा किया। उन्होंने कहा,

“मैं गुजराती बोल सकती हूँ। जब मैं वियतनाम गई थी तो मैंने वियतनामी सीखी थी। मुझे रूस तीन बार जाने के बाद थोड़ी-थोड़ी रूस भाषा भी आती है। मैं नागालैंड की भाषा जानती हूँ, वहाँ मैंने लंबे समय काम किया। मुझे मणिपुरी आती है, आसामी आती है, ओडिया, पंजाबी, मराठा, बंगला भी पता है। मैं हिंदी, उर्दू, गोरखा, नेपाली भी जानती हूँ, लेकिन मैंने कभी ये सब दर्शाया नहीं।”

अब ममता बनर्जी की यह वीडियो वायरल हो रही है। लोग इस वीडियो को लेकर तंज कस रहे हैं। एक यूजर का कहना है कि ममता बनर्जी अपने ऑफिस नबना में ट्यूशन की क्लास दे सकती हैं।

कुछ अन्य इसे मीम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इन यूजर्स का कहना है कि ममता बनर्जी का बयान ऐसा लग रहा है जैसे वह ट्रांस्लेटर की जॉब माँग रही हों।

एक ओडिशा का यूजर इस वीडियो को देख हैरान होता है कि उनके खुद के मुख्यमंत्री को ओडिया नहीं आती लेकिन ममता बनर्जी को इतनी सारी भाषाएँ आती हैं और साथ में ओडिया भी। वह लिखता हैं, “यहाँ हमारे मुख्यमंत्री नवीन बाबू हैं जो ओडिया भी नहीं जानते, लेकिन इन्हें ओडिया समेत इतनी भाषाएँ आती हैं। लेजेंड ममता दीदी।”

कुछ यूजर्स ने उन्हें बहुभाषी अनुवादक की नौकरी के लिए अप्लाई करने को भी कहा। किसी ने उनकी इस खासियत को जानकर बाहुबली फिल्म के कैरेक्टर कालकेय का वीडियो शेयर किया और कैप्शन में लिखा, “आमी किलिकी भाषा जानी (मैं कालकेय की भाषा जानती हूँ।)”

बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का उल्लेख करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि जब पब्लिक स्पीच देते हैं तब टेलीप्रॉम्पटर पर सब लिखा रहता है। आप बस पढ़ते हैं। जनता को वो देखने को नहीं मिलता। कुछ ही लोग उसे देख पाते हैं। पहले ऐसा यूएसए और यूके में होता था। अब हम ये तकनीक भारत में भी देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पलटवार करने के चक्कर में बंगाल सीएम का दिया गया बयान अब लोगों के लिए मजाक बन गया है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि भाषा को लेकर वह पहली बार हँसी की पात्र नहीं बनी है। इससे पहले वह Kaa Kaa chi chi chi chi chi chi स्लोगन के कारण भी ट्रोल हुई थीं।

लव जिहाद जैसा कुछ किया तो बर्बाद कर दूँगा, किसानों के हित में भी CM शिवराज ने दिया बड़ा बयान

कृषि बिल को लेकर घमासान खत्म नहीं हुआ है। किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। किसानों के बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को कहा कि किसान के यहाँ जितनी पैदावार होगी राज्य की तरफ से उसे खरीद लिया जाएगा।

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मैंने तय किया है कि जितनी पैदावार किसान की यहाँ होगी उतनी खरीद ली जाएगी। लेकिन अगर बाहर से कोई आया, अगल-बगल के राज्यों से बेचने या बेचने का प्रयास भी किया तो उसका ट्रक राजसात करवाकर उसे जे़ल भिजवा दिया जाएगा।”

किसान के हित में किसान कल्याण योजना के तहत दी जानी वाली राशि को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के खाते में राशि को डायरेक्ट ट्रांसफर की जाएगी। और साथ ही किसानों का सरकार पर भरोसा बनाए रखने के लिए कहते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण एवं उत्थान के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

इसके अलावा यूपी की योगी सरकार की ही तरह एमपी सरकार भी लव जिहाद को लेकर सख्ती दिखाई है। सीएम शिवराज ने लव जिहाद पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार सभी धर्मों और जातियों की है।

सीएम ने कहा, “हमारे राज्य में कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ कुछ भी घृणित करने की कोशिश करेगा तो उन्हें मैं छोड़ूँगा नहीं। अगर कोई धार्मिक परिवर्तन करता है या ‘लव जिहाद’ जैसा कुछ करता है उन्हें भी सजा मिलेगी।”

‘लव जिहाद’ कानून के खिलाफ SC में 2 याचिकाएँ दाखिल, कहा- किसी को फँसाने के लिए ये बनेगा शक्तिशाली उपकरण

उत्तर प्रदेश में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए लाए गए धर्मांतरण अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिका दाखिल करके चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में माँग की गई है कि अध्यादेश को असंवैधानिक घोषित करके इसे लागू न करने का निर्देश दिया जाए।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ग्रूमिंग जिहाद को रोकने के लिए योगी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 को मंजूरी दी थी।

ऐसे में इसके ख़िलाफ कई लोगों ने आवाज उठाई और इसको संविधान के ख़िलाफ़ बताया। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में एक याचिका दिल्ली के एक वकील की है और दूसरी दिल्ली व प्रयागराज में वकालत पढ़ रहे छात्रों की है।

इन याचिकाओं में कहा गया है कि ये उत्तर प्रदेश का लव जिहाद कानून और उत्तराखंड का कानून आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले निजता के अधिकार और आर्टिकल 25 के तहत मिलने वाले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि संसद के पास मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है और यदि यह अध्यादेश लागू किया जाता है तो यह बड़े पैमाने पर जनता को नुकसान पहुँचाएगा और समाज में अराजक स्थिति पैदा करेगा।

इस याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कानून स्पेशन मैरेज एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और समाज में डर पैदा करता है। इसके अलावा, इस बात का भी उल्लेख है कि इस अध्यादेश के जरिए किसी भी व्यक्ति को गलत तरीके से फँसाने का काम भी होगा और यह अध्यादेश ऐसे बुरे तत्वों के लिए शक्तिशाली उपकरण बनेगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण अध्यादेश आने के बाद बरेली के एक लव जिहाद केस में आज उवैश खान नामक लड़के की पहली गिरफ्तारी हुई। उवैश पर आरोप है कि वह शादीशुदा महिला पर धर्म परिवर्तन करके शादी का दबाव बना रहा था।

एफआईआर के मुताबिक, वह लड़की को पिछले तीन साल से प्रताड़ित कर रहा था और उसकी शादी के बाद उसके घर में घुसकर धमकी दे आया था कि वो उसकी शादी तुड़वाकर खुद निकाह करेगा। आज गिरफ्तारी के बाद उवैश को अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

‘ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूँ’: कंगना और दिलजीत दोसांझ में ट्विटर पर छिड़ी जंग

कंगना रनौत और दिलजीत दोसांझ के बीच किसान आंदोलन को लेकर ट्विटर पर जंग छिड़ गई हैं। यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसांझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

असल मे यह जुबानी जंग शाहीन बाग प्रदर्शन की दादी बिलकिस की वजह से छिड़ी है, जिनका कंगना ने किसान प्रदर्शन में शामिल होने पर मजाक उड़ाया था। यही मजाक कई पंजाबी एक्टर को नागवार गुजरा, जिनमें दिलजीत भी शामिल है।

कंगना ने दिलजीत के एक ट्वीट पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए लिखा, “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।”

अब दिलजीत ने इस पर पलटवार करते हुए लिखा, “तूने जितने लोगों के साथ फिल्म की तू उन सबकी पालतू है…? फिर तो लिस्ट लंबी हो जाएगी मालिकों की…? ये बॉलिवुड वाले नहीं पंजाब वाले हैं… झूठ बोलकर लोगों को भड़काना और इमोशंस से खेलना आप अच्छे से जानती हो।”

मामला यहीं नहीं खत्म हुआ। कंगना ने दिलजीत को इस पर जवाब दिया, “ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूँ, ज्यादा मत उछल, मैं कंगना रनौत हूँ तेरे जैसी चमची नहीं, जो झूठ बोलूँ, मैंने सिर्फ और सिर्फ शाहीन बाग वाली प्रोटेस्टर पर कमेंट किया है, अगर कोई गलत साबित कर दे तो माफी माँग लूँगी।” इसके बाद दिलजीत ने कंगना को जवाब दिए हैं। हालाँकि, कंगना ने इसे बाद में डिलीट कर दिया।

जब कंगना ने एक जवाब में लिखा था- “पंजाबी समझ आती है मुझे जिन्होंने दिल्ली में दंगे करवाए। खून की नदियाँ बहाईं उनको बचाते हुए शर्म नहीं आती? तुझे क्या शर्म आएगी, करण जौहर कैसे काम देता है, सबको पता है।”

वहीं दिलजीत ने इससे पहले पोस्ट में कंगना को कहा था, “बात क्या हो रही है और ये जा किधर रही है। दिमाग ठीक है तेरा? बात न घुमा, सीधा जवाब दे। जो भौंकी है तू हमारी माँओं के लिए। आके हमारी उन माँओं से बात कर जिन्हें तूने 100 रुपए का कहा, सारी हीरोइनगिरी निकाल देंगी।”

ट्वीट के जरिए दिलजीत और कंगना एक दूसरे पर लगातार हावी होते दिख रहे हैं। एक और पोस्ट में दिलजीत ने कंगना को लेकर लिखा- “आजा आजा, ओए बददिमाग, बदतमीज। बात हो रही है उसकी जिस माँ को तूने 100 रुपए दिहाड़ी वाला कह के फोटो डाली थी। उसका जवाब सुन लिया या दोबारा भेजूँ। ऐसे ही बात न घुमा। जोड़-तोड़ बॉलीवुड में चलता हेागा तेरा, पंजाबियों के साथ नहीं चलना।”

इसके पहले कंगना ने पोस्ट में लिखा था- “ओए डम्बो, बात वही है जब किसी की सिटीजनशिप गई ही नहीं तो शाहीन बाग दादी ने किसके कहने पे प्रोटेस्ट किए? जब एमएसपी हटाया ही नहीं तो फिर वही दादी किसके भेजने पे फार्मर्स प्रोटेस्ट में हिस्सा ले रही हैं। कौन किसको पीछे से प्रॉम्प्ट करता है जब वह बोलती है।”

दरअसल, किसान आंदोलन को लेकर कंगना रनौत ने अपने एक और ट्वीट में शाहीन बाग का जिक्र करते हुए लिखा था, “शर्मनाक… किसानों के नाम पर हर कोई अपनी रोटियाँ सेंक रहा है। आशा है कि सरकार ऐसे राष्‍ट्र विरोधी तत्‍वों को फायदा उठाने का मौका नहीं देगी और फिर से शाहीन बाग जैसे हालात बनाने से रोकेगी।”

‘गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा…’- दीवारों पर ग्राफिटी लिखने वाले मो नजीर को मेंगलुरु पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक के मेंगलुरु में एक अपार्टमेंट की दीवारों पर संघियों और मनुवादियों को धमकी भरी भयावह बातें लिखने के मामले में पुलिस ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को एक मोहम्मद नजीर नामक युवक को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर आरोपित को जॉमेटो का डिलीवरी ब्वॉय बताया जा रहा है।

हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स में बस ये लिखा है कि नजीर तीर्थहल्ली का रहने वाला है और ऑनलाइन खाना डिलीवर करने का काम करता है।

बता दें कि एक हफ्ते पहले मेंगलुरु में 28 नवंबर को पुलिस चौकी की दीवार पर एक ग्राफिटी देखी गई थी। इसमें लिखा था, “गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा।” 

इसके अलावा इससे पहले एक अपार्टमेंट की दीवार पर लिखा गया था, “हमें इस बात के लिए मजबूर नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियों का सामना करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद लेनी पड़े।” आगे लश्कर के समर्थन में लिखा था, “‘लश्कर जिंदाबाद।”

मामले के उजागर होने के कुछ समय बाद ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात की थी। पुलिस ने हमें तब विस्तार से जानकारी देते हुए कहा था कि पहली ग्राफिटी मेंगलुरु के सर्किट रोड स्थित अपार्टमेंट पर बनाई गई। जिसके बाद कदरी पुलिस थाने ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच शुरू है।

इसके कुछ समय बाद पुलिस ने बताया था कि ग्राफिटी को ढक दिया गया है और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से संबंधित अन्य धाराओं के तहत अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया जा चुका है। 

इस ग्राफिटी की तस्वीर सामने आने के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे। ऐसे में एसडीपीआई ने इस कृत्य के लिए हिंदुत्व कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया था। SDPI ने कहा था कि संघ परिवार की भूमिका इसमें संदिग्ध है। दक्षिण कन्नड़ में SDPI की अध्यक्ष अतौल्ला जोकट्टे ने कहा था कि ऐसा इलाके की शांति भंग करने के लिए हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मेंगलुरू की दीवारों पर लिखी गई ये बातें बिलकुल ऐसी थीं जैसे पाकिस्तान के लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में उतरे थे। तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के हज़ारों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में रावलपिंडी की सड़कों पर उतरे थे। उनका विरोध इस मुद्दे पर था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने के अधिकार का बचाव किया था। 

PFI नेताओं के 26 ठिकानों पर ED की छापेमारी: दंगों-अराजक गतिविधियों की फंडिंग के मामले में चला अभियान

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इस संबंध में ईडी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया। 

सिर्फ यही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय ने सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत शंकरपुर में पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सनाउल्लाह के घर छापा मारा। यह छापा सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान फंडिंग को लेकर मारा गया था। फ़िलहाल ईडी इस संबंध में पीएफ़आई के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है, छापेमारी के दौरान ईडी को क्या हासिल हुआ इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है। ईडी की कार्रवाई के दौरान सनाउल्लाह अपने आवास पर नहीं मौजूद थे।   

बता दें कि पीएफ़आई और एसडीपीआई अपनी अराजक गतिविधियों, आपराधिक कृत्यों, जबरन धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों की वजह से संदेह और जाँच के दायरे में रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ईडी ने 9 राज्यों के कुल 26 ठिकानों पर छापेमारी का अभियान चलाया। 

सीएए विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई की भूमिका संदिग्ध

पिछले साल दिसंबर महीने के दौरान हुए सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई पर फंडिंग उपलब्ध कराने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था। इस साल के जनवरी महीने में केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस संबंध में कई दस्तावेज़ भी पेश किए थे जिसमें पीएफ़आई के खातों और प्रदर्शनकारियों के खातों के बीच लेन-देन की पूरी जानकारी मौजूद थी।

दस्तावेज़ में यह लिखा था, “4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच कुल 15 खातों में (10 पीएफ़आई और 5 रेहब इंडिया फाउंडेशन) 1.04 करोड़ रुपए डाले गए थे। इन खातों में पूरी राशि नगद ही डाली गई थी और यह 5 हज़ार से 49 हज़ार के बीच थी। डिपाजिट की जाने वाली को 50 हज़ार से नीचे इसलिए रखा गया था जिससे जमा करने वाले व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आए। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेज़ में यह लिखा हुआ था कि 4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच 15 खातों में से 1.34 करोड़ रुपए नगद NEFT/IMPS के माध्यम से निकाले गए थे। 

वहीं 12 से 21 दिसंबर के बीच उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन हुए थे और इसी बीच एक ही खाते से कुल 90 विदड्राल (निकासी) हुए थे। उस दस्तावेज़ के अगले हिस्से में लिखा था कि रुपए के लेन देन से इतना साफ़ है कि सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई ने आर्थिक भूमिका निभाई है। फ़िलहाल इस पूरे प्रकरण में ईडी की तरफ से जाँच अभियान जारी है। 

पीएफ़आई ने नकारे सारे आरोप 

हालाँकि, इन सभी आरोपों पर पीएफ़आई का साफ़ कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। पीएफ़आई के तमाम लोगों पर दिल्ली दंगों के संबंध में भी जाँच जारी है। हाल ही में पीएफ़आई के 4 सदस्य (केरल का सिद्दीकी कप्पन) को हाथरस प्रकरण में जातीय उन्माद भड़काने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीएफ़आई पर केरल में तमाम तरह के कैम्प चलाने का भी आरोप है। इसकी स्थापना साल 2006 के दौरान केरल में हुई थी।                       

कोरोना वैक्सीन को लेकर राहुल गाँधी गढ़ रहे झूठ, फैला रहे भ्रम: मोदी-विरोध में कॉन्ग्रेसी राजनीति का Fact Check

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत सरकार के ख़िलाफ़ जनता को बरगलाने का ओछा प्रयास किया। उन्होंने जनता को कुछ हेडलाइनों के जरिए भ्रमित किया और मोदी सरकार पर सवाल उठाए।

अपने ट्वीट में उन्होंने तीन बिंदु बताए, जो एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न थे। उनके ट्वीट का उद्देश्य पूर्ण रूप से लोगों को कन्फ्यूज करने का था। सबसे पहले राहुल ने अपने ट्वीट में पीएम मोदी के 29 अक्टूबर को दिए बयान का उल्लेख किया, जिसमें पीएम ने कोरोना वैक्सीन सबको उपलब्ध कराने की बात कही थी। 

पीएम मोदी ने उस दौरान बताया था कि एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह को तैयार किया गया है ताकि वह वैक्सीन प्रबंधन को संभाले और इसका सही चार्ट तैयार करे। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि हर किसी को वैक्सीन मिलेगी, कोई भी भारतीय पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। पीएम मोदी के इस बयान का मतलब था कि किसी भी नागरिक को वैक्सीन के लिए मना नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट करके कहा था कि सबसे पहले सरकार सबसे कमजोर और अग्रिम पंक्तियों के कार्यकर्ताओं की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगी। बाकी देशों में भी इसी क्रम में काम हो रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया था कि कोरोना वैक्सीन का कार्य अभी भी चल रहा है और ट्रायल किए जा रहे हैं।

अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था कि आने वाले समय में पूरे देश को वैक्सीन दी जाएगी। हालाँकि वैक्सीन परीक्षण, उसके उत्पादन और टीका लगाने में आवश्यक टाइम लगेगा, यह पहले समाज के कमजोर वर्गों को दिया जाएगा और फिर अन्य नागरिकों को बाँटा जाएगा। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट कहा था कि जो वैक्सीन लेना चाहेगा, उसे उसके लिए मना नहीं किया जाएगा।

बयानों में इतनी स्पष्टता होने के बावजूद राहुल गाँधी अपनी राजनीति करने के लिए एक हेडलाइन या एक लाइन बताकर लोगों को बरगला रहे हैं। दिलचस्प यह है कि वह केवल इतने पर नहीं रुक रहे। वह इसे बिहार चुनाव से भी जोड़ रहे हैं और भारत सरकार के हालिया बयान से भी।

उनके ट्वीट में ये समझाने की कोशिश हुई है कि पहले कहा गया कि पूरे देश को वैक्सीन मिलेगी, फिर बिहार में कहा गया कि बिहार की जनता को मिलेगी और अब भारत सरकार कह रही है कि हर किसी को वैक्सीन नहीं मिलेगी। राहुल गाधी का पूछना है कि आखिर पीएम बताते क्यों नहीं कि वह किस बात पर स्टैंड ले रहे हैं।

राहुल गाँधी ने जोड़ा बिहार मेनिफेस्टो का मुद्दा और अधिकारी के बयान से की छेड़छाड़

भाजपा के वादों पर भ्रम पैदा करने के लिए राहुल गाँधी ने दो मुद्दों को साथ में जोड़ा। पहले पीएम का बयान और फिर बिहार चुनाव में जनता से किया गया वादा। दरअसल भाजपा ने बिहार चुनाव में जारी किए मेनिफेस्टो में जनता से कोरोना वैक्सीन का वादा किया था, जिस पर कॉन्ग्रेस ने ये कहना चाहा कि भाजपा तो सिर्फ चुनाव देखते हुए बिहार वालों को वैक्सीन देने के लिए कह रही थी, जबकि वास्तविकता में भाजपा का पक्ष बिलकुल साफ था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वह लोगों को वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध करवाएगी।

इस बिंदु को भी अच्छे से समझने और जानने के बाद कि चुनाव में किए वादे कोई भी पार्टी सत्ता में आने के बाद पूरा करती है, राहुल गाँधी ने जनता के बीच भ्रम पैदा किया।

अलग-अलग बयानों को जोड़ने के बाद राहुल गाँधी ने भारत सरकार के हालिया बयान के साथ भी छेड़छाड़ की, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा था कि लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध टीका लगाने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा था कि वह कोरोनो वायरस के खिलाफ पूरे देश में टीकाकरण नहीं कर सकती है। जिसका मतलब है कि सरकार के समर्थन से टीका पहले मुख्य समूह को दिया जाएगा जबकि देश के अन्य नागरिकों को स्वास्थ्य स्थितियाँ देखते हुए किसी भी अन्य मेडिकल प्रोडक्ट की तरह वैक्सीन खरीदने की जरूरत पड़ सकती है।

अब ऑपइंडिया से बात करते हुए सरकारी सूत्रों ने सचिव के बयान पर कहा है कि उसे गलत तरह से पेश किया गया। अधिकारी केवल अपना बयान अनिवार्य टीकाकरण के संदर्भ में दे रहे थे। यहाँ बता दें कि वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा था, “यह एक लोकतंत्र है। यहाँ तक ​​कि अगर आप प्राथमिकता समूह में हैं और संवेदनशील हैं, तो भी आपको टीका लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।”

मोदी सरकार की वैक्सीन पर नीति और राहुल गाँधी के प्रयास

गौरतलब है कि मोदी सरकार लगातार एक पॉलिसी पर काम कर रही है, जिससे देश के हर कोने में वैक्सीन को पहुँचाया जा सके। वैक्सीन कैंपेन चलाने में पहले केंद्र सरकार का फोकस दो चीजों पर है। एक, वैक्सीन बनते ही हर किसी को टीका मिले और कोई इससे अछूता न रहे। दूसरा- वैक्सीन सिर्फ उस तबके के लिए फ्री हो, जो कमजोर हैं और बाकी सबको इसके लिए कुछ पैसे देने पड़ सकते हैं।

इस बात पर ध्यान दीजिए कि वैक्सीन को जनता के बीच फ्री में मुहैया कराना या उनसे राशि लेना सिर्फ राज्य सरकार की इच्छा पर है। राज्य सरकारों पर इसका जिम्मा होगा कि वह केंद्र सरकार से वैक्सीन लेकर उसका फायदा जनता को फ्री में पहुँचाए या कुछ पैसे लेकर। अगर राज्य सरकार जनता को फ्री में वैक्सीन देना चाहेगी तो उन्हें उसके लिए राज्य के खजाने से उसका फंड देना होगा।

ऐसे में दुर्भाग्य यह है कि राहुल गाँधी को कौन और कैसे समझाए? वह हर स्पष्टीकरण के बाद भी लगातार लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और हैरानी तो इस बात की है कि जब पूरा देश कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है, तब राहुल गाँधी जनता को बरगलाना चाहते हैं और अपने झूठे दावों से जनता में भय पैदा करना चाहते हैं। उनके लिए ऐसे अवसर पर भी अपनी राजनीति पहली प्राथमिकता है।

लवजिहाद आरोपित उवैश अहमद 5 दिनों से चल रहा था फरार: नए कानून के तहत यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनने के बाद बरेली में दर्ज हुए पहले मुकदमे में गिरफ्तारी हो गई है। देवरनिया थाने में 28 नवंबर को ‘लव जिहाद’ का पहला मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे आरोपित उवैश को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अरोपित उवैश अहमद को बुधवार को अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

बरेली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लव जिहाद के आरोपित की गिरफ्तारी की जानकारी साझा की है।

उवैश पर आरोप है कि वह एक हिन्दू लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाकर उस पर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। इतना ही नहीं लड़की की शादी कहीं और हो जाने के बाद भी आरोपित उसे जान से मारने की धमकी भी दे रहा था। योगी सरकार द्वारा लाए गए विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2020 को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में यह पहला केस दर्ज हुआ था।

बरेली के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार पांडे ने कहा, ‘‘जिले की बहेड़ी पुलिस ने रिछा रेलवे फाटक के पास से आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बरेली के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संसार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को बताया, ‘‘जिले के थाना देवरनिया के गाँव शरीफ नगर में रहने वाली एक युवती का आरोप था कि आरोपी उसे तीन साल से परेशान कर रहा था और विवाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था।’’

गौरतलब है कि लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में पुलिस को कहा है कि उनकी बेटी इंटर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उवैस के संपर्क में आई थी। उवैस ने उसे अपने जाल में फँसाया और जब लड़की ने 2019 में बीए में एडमिशन लिया तो वह उसे बहलाकर अपने साथ भोपाल ले गया।

उस समय लड़की के घरवालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की थी। गाँव में एक पंचायत बैठी थी और उसमें निर्णय लिया गया कि मुकदमा दर्ज नहीं करवाया जाएगा और उवैस उनकी लड़की को वापस कर देगा।

युवती के वापस आते ही उसके परिजन ने जून 2020 में उसकी शादी किसी दूसरी जगह कर दी, इससे बौखलाया आरोपित अक्सर उसके पिता के घर पहुँच कर धमकी देता था। पिछले शनिवार को भी उसने पिता को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी। अंत में परिवार ने तंग आकर शिकायत करवाई।

पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए परिजनों को बताया था कि हाल में जो अध्याधेश (विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’) जारी हुआ है, उसकी धारा 3 व 5 के तहत यह मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके अलावा आईपीसी की अन्य धाराएँ भी उवैस के ख़िलाफ़ लगाई गई हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार चल रहा था। जिसको 5 दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। और उसे 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।