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लवजिहाद आरोपित उवैश अहमद 5 दिनों से चल रहा था फरार: नए कानून के तहत यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनने के बाद बरेली में दर्ज हुए पहले मुकदमे में गिरफ्तारी हो गई है। देवरनिया थाने में 28 नवंबर को ‘लव जिहाद’ का पहला मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे आरोपित उवैश को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अरोपित उवैश अहमद को बुधवार को अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

बरेली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लव जिहाद के आरोपित की गिरफ्तारी की जानकारी साझा की है।

उवैश पर आरोप है कि वह एक हिन्दू लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाकर उस पर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। इतना ही नहीं लड़की की शादी कहीं और हो जाने के बाद भी आरोपित उसे जान से मारने की धमकी भी दे रहा था। योगी सरकार द्वारा लाए गए विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2020 को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में यह पहला केस दर्ज हुआ था।

बरेली के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार पांडे ने कहा, ‘‘जिले की बहेड़ी पुलिस ने रिछा रेलवे फाटक के पास से आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बरेली के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संसार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को बताया, ‘‘जिले के थाना देवरनिया के गाँव शरीफ नगर में रहने वाली एक युवती का आरोप था कि आरोपी उसे तीन साल से परेशान कर रहा था और विवाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था।’’

गौरतलब है कि लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में पुलिस को कहा है कि उनकी बेटी इंटर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उवैस के संपर्क में आई थी। उवैस ने उसे अपने जाल में फँसाया और जब लड़की ने 2019 में बीए में एडमिशन लिया तो वह उसे बहलाकर अपने साथ भोपाल ले गया।

उस समय लड़की के घरवालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की थी। गाँव में एक पंचायत बैठी थी और उसमें निर्णय लिया गया कि मुकदमा दर्ज नहीं करवाया जाएगा और उवैस उनकी लड़की को वापस कर देगा।

युवती के वापस आते ही उसके परिजन ने जून 2020 में उसकी शादी किसी दूसरी जगह कर दी, इससे बौखलाया आरोपित अक्सर उसके पिता के घर पहुँच कर धमकी देता था। पिछले शनिवार को भी उसने पिता को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी। अंत में परिवार ने तंग आकर शिकायत करवाई।

पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए परिजनों को बताया था कि हाल में जो अध्याधेश (विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’) जारी हुआ है, उसकी धारा 3 व 5 के तहत यह मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके अलावा आईपीसी की अन्य धाराएँ भी उवैस के ख़िलाफ़ लगाई गई हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार चल रहा था। जिसको 5 दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। और उसे 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

‘अपनी 12 बीघा जमीन PM मोदी को देना चाहती हूँ’ – 85 साल की बुजुर्ग महिला का ‘सीरियस’ वीडियो हो रहा वायरल

हर राजनेता को समझने के दो सबसे बड़े पैमाने हैं, पहला उसकी लोकप्रियता और दूसरा उसकी स्वीकार्यता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दोनों ही मामलों में देश और दुनिया के तमाम नेताओं से कहीं आगे हैं। ताज़ा मामले में देश के प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और स्वीकार्यता सामने आई है। उत्तर प्रदेश की 85 वर्षीय वृद्ध महिला अपनी पूरी संपत्ति प्रधानमंत्री के नाम करना चाहती हैं और इसके पीछे की वजह बेहद भावनात्मक है। 

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 85 वर्षीय बिट्टन देवी का कहना है कि उनके पति की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। उनके परिवार में दो बेटे और बहु हैं और वह उनका बिलकुल ध्यान नहीं रखते हैं।

बिट्टन देवी ने कहा कि सालों बीत गए लेकिन वह जानने का प्रयास तक नहीं करते हैं कि वह किस हालात में हैं और उनकी मूलभूत आवश्यकताएँ कैसे पूरी होती हैं। उनका जीवनयापन केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही वृद्धा पेंशन से हो रहा है। यही वजह है कि वह अपनी कुल 12 बीघा ज़मीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम करना चाहती हैं। 

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर उनका वीडियो भी खूब चर्चा में बना हुआ है। इसमें वह साफ़ तौर पर कहती हुई नज़र आ रही हैं कि उनके पति की मृत्यु के बाद वह बहुत परेशान थीं। उनके बच्चे उनका बिलकुल ध्यान नहीं रखते हैं, प्रधानमंत्री मोदी पेंशन देते हैं तो काम चलता है, इसलिए वह अपनी पूरी ज़मीन प्रधानमंत्री मोदी के नाम करना चाहती हैं। अपनी यह गुज़ारिश लेकर वह मैनपुरी तहसील के अधिवक्ता कृष्ण प्रताप सिंह के चेंबर में गई थीं। 

उन्होंने अधिवक्ता से इस मुद्दे पर बात की और कहा कि वह 12 बीघा ज़मीन प्रधानमंत्री मोदी के नाम करना चाहती हैं। यह बात मौके पर मौजूद हर किसी के लिए हैरान करने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अधिवक्ता और मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं थीं। 

अंत में अधिवक्ता ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में जिलाधिकारी से बात करेंगे, तब कहीं जाकर बिट्टन देवी ने बात मानी। हालाँकि बुजुर्ग महिला अपनी बात पर टिकी हुई हैं और इस कारण से अधिवक्ता ने उन्हें दो दिन बाद वापस आने की बात भी कही है। फ़िलहाल बुजुर्ग महिला का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति स्नेह पूरे सोशल मीडिया पर चर्चा का कारण बना हुआ है।        

बेंगलुरु दंगे में आरोपित एक और फरार कॉन्ग्रेसी नेता रकीब जाकिर को क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में हुए दंगों के मामले में मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व कॉर्पोरेटर रकीब जाकिर को सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अपराध आयुक्त संदीप पाटिल ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता रकीब जाकिर को बुधवार (3 दिसंबर, 2020) देर रात गिरफ्तार किया गया था। बेंगलुरु हिंसा के मामले में आरोपित ठहराए जाने के बाद से ही कॉन्ग्रेस नेता फरार चल रहे थे।

बता दें जाकिर बेंगलुरु दंगों के मामले में गिरफ्तार होने वाला दूसरे कॉर्पोरेटर है। इससे पहले सीसीबी अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मेयर आर संपत राज को गिरफ्तार किया था। लगभग डेढ़ महीने से भी पहले से जाकिर संपत के साथ फरार चल रहा था। हालाँकि, पूर्व मेयर ने एफआईआर को रद्द करने और अग्रिम जमानत खारिज करने के अपने प्रयासों के बाद 17 नवंबर को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया था।

कथित तौर पर, जाकिर और संपत दोनों नगरहोल के पास एक ही फार्महाउस में छिपे हुए थे। दो हफ्ते पहले केंद्रीय क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस नेता संपत राज के करीबी रियाजुद्दीन को गिरफ्तार किया था। खुद को छुपाने और फरार आरोपित की मदद करने के आरोप में रियाजुद्दीन को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

गौरतलब है कि आरोपित रियाजुद्दीन खुद फरार था और साथ ही संपत राज की मदद करने और उसे शरण देने के आरोप में 7 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। जाहिर तौर पर वह कॉन्ग्रेस नेता राज को नगरहोल के पास एक फार्महाउस में ले गया था और उसे कुछ दिनों के लिए वहाँ छिपा दिया था।

बता दें कि राज इस साल अगस्त में बेंगलुरु दंगों को भड़काने के साजिशकर्ताओं में से एक है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा बेंगलुरु दंगों के मामले में दायर आरोप-पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता संपत राज ने अपनी ही पार्टी के दलित विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति को निशाना बनाने के लिए जाकिर और अन्य कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जैसे SDPI से हाथ मिलाया था।

उल्लेखनीय है कि 850 पन्नों की दायर चार्जशीट में CCB ने 52 लोगों को आरोपित बनाया है। इस चार्जशीट में 30 से अधिक चश्मदीदों के बयान हैं। जाँच एजेंसी ने कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व मेयर संपत राज को 51वें और जाकिर हुसैन 52वें नंबर पर आरोपित घोषित किया है।

बेंगलुरु दंगा

बेंगलूरु में 11 अगस्त को डीजे हल्ली और केजे हल्ली पुलिस स्टेशन की सीमाओं के बीच लगभग 8:30 बजे हिंसक दंगे को अंजाम दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर के बाहर 1000 से ज्यादा लोग जमा थे, जिन्होंने कथित रूप से फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने पर घर पर हमला कर दिया था। बता दें यह पोस्ट असल में कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन ने पोस्ट किया था।

पुलिस ने स्थिति को अगले दिन यानी 12 अगस्त तक अपने नियंत्रण में किया। इस दंगे में तीन लोग मारे गए और 60 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। वहीं दंगों में 300 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।

UP में फिल्म सिटी पर महाराष्ट्र की सत्ता में ‘आग’: NCP का प्रदर्शन, CM ठाकरे ने कहा – ‘ईर्ष्या नहीं कर रहे लेकिन…’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 200 करोड़ रुपए के लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड को लॉन्च करने के लिए मुंबई में थे। उन्होंने गौतम बुद्ध नगर जिले में यूपी की आगामी फिल्म सिटी में निवेश पर चर्चा करने के लिए कई फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की। इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने अभिनेता अक्षय कुमार से भी बातचीत की है। हालाँकि उनके इस दौरे ने मुंबई के सत्तारूढ़ पार्टी गठबंधन में हलचल मचा दी है।

राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना के नेताओं ने उनकी यात्रा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सीएम योगी मुंबई से फिल्म उद्योग को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

यूपी में सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण

दरअसल सितंबर में योगी आदित्यनाथ की यूपी सरकार ने गौतम बुद्ध नगर में फिल्म सिटी के लिए 1000 एकड़ जमीन आवंटित किया था। 22 सितंबर को मुख्यमंत्री ने लखनऊ में कई फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की, जिनमें फिल्मकार सुभाष घई, ओम राउत (तानाजी के निर्देशक), तमिल अभिनेता रजनीकांत और उनकी बेटी सौंदर्या, गायक कैलाश खेर और उदित नारायण शामिल थे।

वहीं एनसीपी कार्यकर्ताओं ने 2 दिसंबर को आगामी फिल्म सिटी के खिलाफ यूपी में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने 2 दिवसीय यात्रा के लिए मुंबई पहुँचे योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारे भी लगाए।

एनसीपी ने आरोप लगाया कि सीएम योगी महाराष्ट्र के फिल्म उद्योग को ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। और वे किसी भी कीमत पर यह नहीं होने देंगे। एनसीपी नेताओं ने मीडिया से कहा कि योगी का मुंबई में स्वागत है लेकिन मुंबई से फ़िल्म सिटी को किसी भी कीमत पर शिफ्ट नहीं होने देंगे। एनसीपी के माजिद ने यहाँ तक ​​दावा किया कि बॉलीवुड निवेशक मुंबई छोड़ना पसंद नहीं करेंगे।

इतना ही नहीं, हद तो तब हो गई जब एनसीपी ने यह मानते हुए कि यूपी के सीएम योगी बॉलीवुड के फिल्म उद्योग को अपने राज्य में ले जाएँगे तो उन्होंने इसका विरोध भी करना शुरू कर दिया। यह समझ में नहीं आता है कि वे उस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे, क्योंकि भारत में कई फिल्मी शहर हैं और यह बताने के लिए कोई कानून नहीं है कि सिनेमा उद्योग के निवेशक दूसरे राज्य में निवेश नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 2 दिसंबर को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष किया और कहा कि कोई भी महाराष्ट्र से कोई उद्योग नहीं ले जा सकता है। उद्धव ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र कॉम्पिटिशन से नहीं डरता है लेकिन कोई जबरन यहाँ से बिजनस लेकर नहीं जा सकता है। इसकी इजाजत नहीं होगी। हम किसी की प्रगति से ईर्ष्या नहीं कर रहे लेकिन यह फेयर कॉम्पिटिशन के जरिए होना चाहिए।”

उद्धव ने कहा कि जो कोई भी उद्योग को ले जाने की कोशिश करेगा, वह सफल नहीं होगा क्योंकि महाराष्ट्र की मैग्नेटिक मजबूती काफी शक्तिशाली है जो चीजों को यहाँ से जाने से रोकेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सीएम योगी राज्य में फिल्म सिटी की स्थापना की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए सुभाष घई, बोनी कपूर, ज़ी स्टूडियो के जतिन सेठी, टी-सीरीज़ के भूषण कुमार, रणदीप हुड्डा, जिमी शेरगिल, कोमल नाहटा और राज कुमार संतोषी सहित अन्य लोगों से मिलेंगे। वह चर्चा करेंगे कि फिल्म निर्माताओं के लिए फ़िल्म सिटी और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कौन-कौन सी सुविधाएँ शामिल की जानी चाहिए।

मैं नई फिल्म सिटी बना रहा हूँ: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र की अपनी यात्रा पर शिवसेना के संजय राउत की टिप्पणियों का करारा जवाब देते हुए कहा था कि वह महाराष्ट्र राज्य से कुछ भी नहीं ले जा रहे और वह उत्तर प्रदेश में एक नई फिल्म सिटी का निर्माण कर रहे हैं। बता दें कि राउत ने चेतावनी दी थी कि मुंबई फिल्म सिटी को दूसरी जगह पर शिफ्ट करना आसान नहीं है।

विकिपीडिया का ‘भारत विरोधी एजेंडा’: जम्मू कश्मीर का गलत नक्शा, सरकार ने दिया तस्वीर हटाने का आदेश

भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने विकिपीडिया को अपनी वेबसाइट से एक लिंक हटाने का आदेश दिया है, जिसमें जम्मू कश्मीर का गलत मानचित्र दिखाया गया है। सूत्रों की मानें तो यह आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) सेक्शन 69ए के तहत जारी किया गया है। 

यह मुद्दा एक ट्विटर यूज़र द्वारा ट्विटर पर उठाया गया था, जिसमें उसका कहना था कि भारत सरकार विकिपीडिया की इस हरकत पर संज्ञान ले, जिसमें भारत का गलत मानचित्र दिखाया गया है। 

ट्विटर यूज़र छत्रसाल सिंह ने कहा कि विकिपीडिया का पेज, जिस पर भारत-भूटान रिश्तों को लेकर दिखाए गए भारत के मानचित्र में जम्मू कश्मीर की स्थिति गलत दिखाई गई थी। मानचित्र में दिखाया गया था कि गिलगिट बाल्टिस्तान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन भारत का हिस्सा नहीं है। 

विकिमीडिया कॉमन्स (Wikimedia Commons), विकिपीडिया से जुड़ी तमाम तरह की मीडिया फाइल्स रखने वाली विकिपीडिया समूह की साइट पर यह तस्वीर मौजूद है। इसमें देखा जा सकता है कि यह तस्वीर मैंगोस्टार (Mangostar) नाम के विकिपीडिया यूज़र ने बनाई और साझा की। यह तस्वीर अभी से लगभग एक दशक पहले मई 2008 के दौरान अपलोड की गई थी। 

विवादित नक्शा (साभार – Wikimedia Commons)

विकिमीडिया के पेज पर देखा जा सकता है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल विकिपीडिया के तमाम अन्य भाषा के पेजों पर अलग-अलग लेखों में किया जा रहा है। यह तस्वीर एशिया के कई देशों के टेम्पलेट का इस्तेमाल करके बनाई गई थी, जिसमें ऊपर बताए गए क्षेत्रों को भारत के मानचित्र का हिस्सा नहीं दिखाया गया है। यूज़र ने अपनी तरफ से पेश किए गए मानचित्र में भारत और भूटान के मानचित्र को बहुत कम सीमित ही रंगा था और इसे भारत-भूटान रिश्तों को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया था। 

25 नवंबर को इस ट्वीट का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 27 नवंबर 2020 को विकिपीडिया के लिए आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि यह पेज जल्द से जल्द हटाया जाए क्योंकि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करता है। उल्लेखनीय है कि अगर विकिपीडिया भारत सरकार के मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश पर सक्रियता नहीं दिखाती है तो वह सूचना प्राद्यौगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69ए के तहत कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

अभी तक विकिपीडिया ने वह विवादित मानचित्र अपने पेज से नहीं हटाया है। बता दें कि विकिपीडिया पर मौजूद विषय-वस्तु पूरी तरह ‘यूज़र जनरेटेड’ होती है। विकिपीडिया खुद पर मौजूद विषय-वस्तु में बदलाव नहीं करती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विकिपीडिया इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।          

प्रयोगधर्मी, वैज्ञानिक कृषि करने वाले राज नारायण जी से अजीत भारती की बातचीत | Keshabe micro training centre

ऑपइंडिया इस हफ्ते लगातार आपको बिहार में कृषि करने वाले छोटे-बड़े किसानों व खेती करने वाले जानकारों से मिलवा रहा है। इसी क्रम में आज हमारी बातचीत हुई बेगूसराय के केशाबे गाँव में प्रयोगधर्मी, वैज्ञानिक कृषि करने वाले राज नारायण से। राज नारायण का एक पूरा फार्म है, जहाँ बाहर उन्होंने एक बोर्ड लगाया है और उस पर लिखे सदविचार से पता चलता है कि उनकी खेती विनोभा भावे और महात्मा गाँधी के दर्शन से प्रेरित है।

राज नारायण बताते हैं कि विनोभा और गाँधी जी का मूल रूप से संदेश था- ‘जीवन सरल हो, सादगी पूर्ण हो और आत्मनिर्भर हो’ बस इसीलिए वह कोशिश करते हैं कि उनकी खेती और उनका जीवन भी इसी दर्शन पर चले। उनका कहना है कि वह बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहते, चाहे जरूरत संसाधनों को लेकर ही क्यों न हो। उन्होंने आत्मनिर्भर होने के लिए अपना मिशन तैयार किया है। इस मिशन में उन्होंने संसाधन स्वावलंबन व संसाधन संरक्षण को शामिल किया है और वह लगातार इसका उपयोग अपनी खेती में कर रहे हैं।

पूरी बातचीत का वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

हंगरी की कैटालीन कारिको, जिन्हें कभी किया था डिमोट, आज उनकी तकनीक पर ही मिला विश्व को पहला कोरोना वैक्सीन

कोरोना महामारी से जंग के ख़िलाफ़ लड़ने में पिछले एक साल में हर देश ने अपना योगदान दिया। बुधवार (दिसंबर 2, 2020) को इस बीच जब फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को यूके में अप्रूवल मिला तो हर जगह हैरानी के साथ खुशी की लहर दौड़ गई। ये पहली मैसेंजर आरएनए (mRNA) वैक्सीन है।

इस वैश्विक कामयाबी को दिलाने में अलग-अलग देश व क्षेत्र के दिग्गजों ने अपनी अहम भूमिका निभाई और ऐसे कार्य को संभव कर दिखाया जिसके लिए उनका नाम भविष्य में हमेशा याद किया जाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कोरोना वैक्सीन इस साल के भीतर लाने के पीछे चार नाम बेहद महत्तवपूर्ण हैं। 

1.हंगरी की कैटालिन कारिको (Katalin Kariko) 

2.तुर्की के उर साहिन (Ugur Sahin)

3. तुर्की के ओजलोम टुरैसी  (Ozlem Tureci)

4. ग्रीस निवासी और फाइजर सीईओ अल्बर्ट ब्रुला (Albert Bourla)

हंगरी की कैटालिन कारिको 

साल 1995 में हंगरी की रहने वाली कैटालीन कारिको को यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया से डिमोट किया गया था। वह उस समय mRNA पर ही रिचर्स कर रही थीं। उनकी रिचर्स लोगों को वास्तविकता से परे लगती थी और जिसके कारण उनके प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए कभी पैसे और प्रोत्साहन नहीं दिया गया।

उस समय वह चुप रहीं और अपनी काली गाड़ी 1200 डॉलर में बेचकर अपने पति बच्चों के साथ अमेरिका आ गईं। उन्होंने उस समय भी पीछे मुड़कर नहीं देखा जब उन्हें डिमोट किया गया और तब भी कुछ नहीं कहा जब उनका कंधा कैंसर की चपेट में आ गया। वह जानती थीं कि उनके काम को एक दिन तवज्जो जरूर मिलेगी। आज कोरोना काल में बनी फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन ने यह साबित कर दिया कि वह बिलकुल सही थीं। ये दोनों वैक्सीन उसी mRNA तकनीक पर आधारित हैं जिस पर कारिको सालों पहले काम कर रही थी।

उर साहिन

तुर्की के रहने वाले उर साहिन और पत्नी ओजलोम टुरैसी वैज्ञानिक आंत्रप्रेन्योर हैं। सादगी का जीवन जीने वाले साहिन अपने कार्यालय से थोड़ी दूर एक छोटे कमरे में गुजर बसर करते हैं और अपने काम पर साइकिल से जाते हैं। मात्र 4 वर्ष की आयु में वह माता-पिता के साथ जर्मनी के कलोन में आ गए थे। इसके बाद वह डॉक्टर बने और उन्होंने अपनी रिसर्च ट्यूमर सेल में इम्युनोथेरेपी पर की। शुरुआत में वह कैंसर के इलाज के लिए मोनोकोलेन एंटीबॉडी पर रिसर्च कर रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने mRNA तकनीक पर रिसर्च करनी शुरू कर दी।

फाइजर प्रमुख अल्बर्ट कहते हैं कि साहिन एक असामान्य सीईओ हैं उन्हें केवल विज्ञान की परवाह है। बिजनेस की बात करना उनके बस की नहीं है। वहीं साहिन कहते हैं कि विश्वास और निजी रिश्ते बहुत महत्तवपूर्ण होते हैं। उनहोंने बर्लिन में एक कॉन्फ्रेंस में दो साल पहले कहा था कि ये तकनीक नई महामारी में जल्द ही वैक्सीन लाने में कारगर होगी। उनके शब्द आज के संदर्भ में सही और सटीक साबित हुए। 

ओजलोम टुरैसी

साहिन की पत्नी और उनकी सहकर्मी ओजलोम टुरैसी का जन्म तुर्की के रहने वाले भौतिक वैज्ञानिक के घर में हुआ था। उनका सपना नन बनने का था लेकिन बाद में उन्होंने मेडिसीन की पढ़ाई की और इसी बीच उनकी मुलाकात साहिन से हो गई। दोनों में काम का जुनून इतना अधिक था कि वह शादी के ठीक बाद रिसर्च के लिए अपनी लैब पहुँच गए थे। टुरैसी ने साहिन के साथ मिल कर mRNA पर रिसर्च की थी। आज जब वैक्सीन बनी है तो इस दंपत्ति की चर्चा हर ओर है।

फाइजर सीईओ अलबर्ट ब्रुला

ग्रीस निवासी अलबर्ट ब्रुला फाइजर के सीईओ और साथ ही मशहूर इम्युनोजिस्ट भी हैं। उन्होंने 25 साल अपनी कंपनी को दिए और जब कोरोना का समय आया तो उन्होंने सरकार से इस वैक्सीन पर शोध के लिए पैसा लेने से भी मना कर दिया। उन्होंने अपने वैज्ञानिकों को छूट दी और बॉयनटेक के साथ मिल कोविड की वैक्सीन तैयार की। 

दरअसल, उनका मकसद सिर्फ इस शोध को राजनीति से दूर रखना था इसलिए उन्होंने सरकार से पैसे नहीं लिए। उन्होंने कहा भी, “मैं अपने वैज्ञानिकों को नौकरशाही के दबाव से दूर रखना चाहता था। जब आप किसी से पैसा लेते हैं तो उसमें कई दबाव भी रहता है।”

‘कृषि कानून से गूगल व्हाट्सएप को मिलेगा फायदा’: पंजाब के कॉन्ग्रेस सांसद का अजीबोगरीब दावा

केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा सीमा सिंधु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है। इस बीच, कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो सोशल मीडिया यूजर को कंफ्यूज करता नजर आ रहा है।

दरअसल, लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में NDTV इंडिया से बात की।

एनडीटीवी इंडिया से बात करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कानून किस प्रकार किसान विरोधी है। बिट्टू ने दर्शकों को किसान बिल के बारे में बताते हुए बेहद ही विशेषज्ञता के साथ यह दावा किया कि यह कानून किसान को लाभान्वित नहीं करेगा, बल्कि इससे गूगल और व्हाट्सएप जैसे दिग्गज तकनीक लाभान्वित होंगे।

बिट्टू के अनुसार, मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन सिर्फ एक किसान विरोध नहीं है, बल्कि “देश के 80 प्रतिशत से अधिक लोगों का आंदोलन” है। कॉन्ग्रेस सांसद ने दावा किया कि हाल ही में पास किए गए कृषि कानूनों से न केवल कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा, बल्कि देश के खुदरा क्षेत्र को भी नुकसान होगा क्योंकि यह रिलायंस, गूगल, व्हाट्सएप जैसे बड़े उद्योगपतियों को बड़ी मात्रा में गेहूँ और चावल खरीदने में सक्षम बनाता है और बड़े पैमाने पर शोषण का कारण बनता है।

इतना ही नहीं कॉन्ग्रेस सांसद ने शो के दौरान यह दावा करके दर्शकों को गुमराह करने का काम भी किया कि मोदी सरकार द्वारा इन तीन कृषि बिलों के पारित होने के साथ किसानों की जमीनें छीन ली जा रही हैं।

हालाँकि, उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि गूगल जैसे तकनीकी दिग्गज नए कृषि कानूनों के साथ गेहूँ की जमाखोरी क्यों करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि पंजाब के आंदोलनकारी किसानों की ऐसी कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई है जिसने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है। दरअसल, आंदोलन में हिस्सा ले रही कई लोगों को तो यह भी नहीं पता कि वे प्रदर्शन क्यों कर रहे है और कितनों को तो कानून के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।

जिनमें से कुछ तो आंदोलन के पीछे की वजह चीनी कोरोना वायरस बोल रहे है, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी है जो महामारी के बीच सरकार द्वारा पारित सभी बिलों का विरोध कर रहे। वहीं ऐसे लोगों के सामने कृषि कानूनों के संबंध में कॉन्ग्रेस सांसद के अजीबोगरीब दावे बहुत चौकाने वाले नहीं है।

बंगाल के लिए बीजेपी का मास्टर प्लान: 5 दिसंबर को 1 करोड़ परिवारों तक पहुँचेंगे कार्यकर्ता, खोलेंगे ममता सरकार की पोल

बिहार चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद देश का सत्ताधारी दल भाजपा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गया है। भाजपा इन चुनावों में कोई कसर छोड़ने की सूरत में नहीं नज़र आ रही है यही कारण है कि संगठन ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। तृणमूल कॉन्ग्रेस की ‘आउटरीच योजना’ का सामना करने के लिए भाजपा ने एक नया कार्यक्रम तैयार किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा लगभग 1 करोड़ परिवारों तक पहुँचेगी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस बीच भाजपा प्रदेश की ममता सरकार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को उजागर भी करेगी। 

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम चला रही है। उसकी तर्ज पर भाजपा के कार्यकर्ता 5 दिसंबर को एक करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुँचेंगे। भाजपा के इस कार्यक्रम का नाम ‘आर नोय अन्याय’ (अब और अन्याय नहीं) तय किया गया है।” दिलीप घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार में भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आए हैं। 

इस तरह के मामलों को उजागर करने के लिए प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता घर घर जाएँगे और पत्रक वितरण करेंगे। इसके अलावा लोगों को इस बात की जानकारी देंगे कि कैसे उन्हें अनेक केंद्रीय योजनाओं जैसे किसान सम्मान निधि और आयुष्मान रोजगार योजना जैसी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। किस तरह केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के आम नागरिकों के लिए जन हितैषी योजनाएँ बनाती है लेकिन प्रदेश सरकार की वजह से उसका लाभ यहाँ के आम लोगों तक नहीं पहुँच पाता है।        

दिलीप घोष के मुताबिक़ यह संगठन के कार्यक्रम का दूसरा चरण होगा। पहले चरण में भाजपा के कार्यकर्ता जून जुलाई के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र लेकर एक करोड़ परिवारों के बीच गए थे। इस पत्र में भाजपा सरकार की उपलब्धियों और जनहित योजनाओं का उल्लेख किया गया था। तृणमूल कॉन्ग्रेस के बगावती सांसदों और विधायकों से जुड़े सवाल पर दिलीप घोष ने कहा- 

“मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि जो नेता प्रदेश के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लेकर आना चाहता है उसके लिए हमारे दरवाज़े पूरी तरह खुले हुए हैं। वैसे भी अगर उनके 10-12 विधायक पहले ही हमारा समर्थन कर चुके हैं तब अन्य के हमारे साथ आने में क्या समस्या है। अगर तीन सांसद हमारे साथ आ चुके हैं तो अन्य के आने में क्या समस्या हो सकती है, जो अच्छे बदलाव लाने के लिए तैयार है उसका स्वागत है।”   

तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा बाहरियों को पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़वाने पर भी दिलीप घोष ने कई बातें कहीं। उन्होंने कहा, “क्या बिड़ला, गोयनका, जिंदल या मित्तल का प्रदेश के विकास में योगदान नहीं है? यहाँ पर उद्योग किसने लगाए? वह यहाँ पर पीढ़ियों से मौजूद हैं। उत्तरी बंगाल के टी गार्डेन में काम करने वाले ज़्यादातर लोग छत्तीसगढ़ और झारखंड के हैं और जूट मिल में काम करने वाले ज़्यादातर लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं।” 

अंत में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “आखिर कब यहाँ के लोग महात्मा गाँधी का सम्मान करेंगे। कुछ तो उन्हें अपने गले में टाँग कर राजनीति करते हैं, गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘बाहरी’ कैसे हो गए? वह इस देश के प्रधानमंत्री, हम सभी के प्रधानमंत्री हैं।” दरअसल 2021 विधानसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए ममता बनर्जी की सरकार ने आगामी दो महीनों में जनता से जुड़ने के लिए अपना सबसे बड़ा आउटरीच कार्यक्रम शुरू किया था।       

‘स्टैचू ऑफ यूनिटी या ताजमहल?’ – स्टैचू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा पर्यटकों के आँकड़े चिढ़ा रहे ध्रुव राठी को

इस मुल्क में एक बौद्धिक जमात ऐसी है, जिसके ज्ञान का कोई अंत नहीं है। ऐसे ही एजेंडापरस्त जमात के स्थायी सदस्य का नाम है ध्रुव राठी। धर्म से लेकर राजनीति और राजनीति से लेकर तकनीक तक हर सम-सामयिक मुद्दे के स्वघोषित विशेषज्ञ हैं – ध्रुव राठी।

खुद को वैचारिक स्तर पर ‘इंटेलेक्चुअल’ सिद्ध करने की होड़ में तथ्यों और तर्कों को ‘टाटा-गुड बाय’ बोलते हुए इन्होंने ‘स्टैचू ऑफ़ यूनिटी’ पर जम कर मिथ्या प्रचार किया था। तमाम दलीलों की मदद से साबित करने का भरपूर प्रयास किया था कि ‘स्टैचू ऑफ़ यूनिटी’ कितनी असफल परियोजना है। 

अब एक रिपोर्ट सामने आई है। यह राठी के दावों को सिरे से ख़ारिज करती है। रिपोर्ट का शीर्षक ही यही है कि ‘स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी’ की तुलना में ‘स्टैचू ऑफ़ यूनिटी’ को देखने के लिए ज़्यादा पर्यटक आ रहे हैं।

कोरोना वायरस के पहले तक इसे देखने के लिए लगभग 13 हज़ार पर्यटक हर महीने आ रहे थे जबकि पिछले महीने स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी को देखने के लिए 10 हज़ार पर्यटक ही आए। इतना ही नहीं, इसकी मदद से 3000 स्थानीय दलित लड़के/लड़कियों को रोज़गार मिला है और लगभग 10000 अन्य लोगों को भी रोज़गार मिला है।।         

अफ़सोस ध्रुव राठी की कपोल कल्पना सही साबित हुई भी नहीं और स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की उपयोगिता और प्रासंगिकता दोनों सफल हुई। वामपंथी ब्रिगेड के अहम सदस्य ध्रुव राठी ने 1 नवंबर 2018 को अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया था।

वीडियो की शुरुआत में इस स्टैचू पर तंज कसने का सतही प्रयास करते हुए उसने कहा, “दुनिया का सबसे लंबा स्टैचू हमारे देश में होगा। हमारे लिए कितने गर्व की बात होगी, दुनिया हमें सम्मान की निगाह से देखेगी।” इसके बाद कई पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आइए देखते हैं स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की सच्चाई क्या होगी। 

ध्रुव राठी ने सबसे पहले स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की तुलना चीन के बुद्ध स्टैचू, स्प्रिंग टेम्पल से कर दी। फिर बताया कि उसके प्रोजेक्ट में 55 मिलियन डॉलर खर्च हुए और प्रतिमा की लागत 18 मिलियन डॉलर थी, यानी यह कितनी कम कीमत में बन गया। इसके बाद ध्रुव राठी ने बताया कि सरदार पटेल की प्रतिमा पर कितने ‘ज़्यादा रुपए’ (180 मिलियन डॉलर) खर्च हुए। सबसे पहली बात, तुलना के लिए मिला क्या? चीन की प्रतिमा! और दूसरी बात, चीन स्थित बुद्ध की प्रतिमा की ऊँचाई 128 मीटर है उसकी तुलना सरदार पटेल की प्रतिमा 182 मीटर से क्यों? 

इन सबसे बड़ी बात बुद्ध स्टैचू बन कर तैयार हुआ था साल 2008 में यानी स्टैचू ऑफ़ यूनिटी से लगभग एक दशक पहले। खैर लिबरल गैंग का यही तो हुनर है, आम जनता के सामने आधे-अधूरे तथ्यों की ढपली बजाना।

इसके बाद ध्रुव राठी ने ताजमहल का उल्लेख करते हुए बताया कि ताजमहल में जितने पर्यटक आते हैं, उससे हर साल लगभग 25 करोड़ रुपए का ‘रेवेन्यू’ पैदा होता है। इसके बाद ध्रुव राठी ने कहा, “स्टैचू ऑफ़ यूनिटी कोई ताजमहल तो है नहीं, जो 1 मिलियन लोग (10 लाख) हर साल इसे देखने के लिए आएँगे।” सही बात है, इसके शुरू होने के 2 हफ्ते में 128000 लोग आए, वह ‘पर्यटक’ नहीं थे बल्कि वहाँ से गुज़र रहे थे या ताजमहल देखने निकले होंगे, रास्ता भूल कर यहाँ पहुँच गए होंगे।

ध्रुव राठी ने इसके बाद कहा कि स्टैचू ऑफ़ यूनिटी बहुत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नहीं बन पाएगा क्योंकि यह किसी बड़े शहर के आस-पास स्थित नहीं है। साफ़ शब्द थे, “यहाँ लोग आएँगे ही नहीं।” सही बात है, देश की सारी धरोहरें, स्मारक, प्राचीन इमारतें, स्थल, मंदिर और मस्जिद बड़े शहरों में ही स्थित है और देश का सबसे बड़ा शहर आगरा है क्योंकि वहाँ ताजमहल है (ध्रुव राठी के उपरोक्त अनुमान अनुसार)। उनकी ज्ञान गंगा यहीं पर समाप्त नहीं हुई, सस्ते इंटरनेट के माध्यम से कपोल कल्पना का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कहा, “इसमें यूनिकनेस नहीं है” और “यह सुंदर नहीं है।” 

सुंदर नहीं है! गजब का तर्क है। फिर भी इसे 2018 से 2019 के बीच 27 लाख लोग देखने आए। इसी बात के आगे वो पूछते हैं, “अब आप ही सोचिए, लोग मुग़ल आर्किटेक्चर देखना पसंद करेंगे या स्टैचू ऑफ़ यूनिटी?”

एकदम सही बात है ध्रुव राठी, ऐसे नहीं कहोगे तो पता कैसे चलेगा कि आप ‘सेक्यूलर समाज’ से हो। खुद को ‘सूडो सेक्यूलर’ दिखाने की ज़िम्मेदारी भी तो है। ऐसे ही तो तुलना की जाती है, 500 साल पहले बनाई गई चीज़ों (दूसरी चीज़ों को तोड़-फोड़ कर) की हाल ही में बनी चीज़ के समानांतर रख कर। 

वीडियो के अंत में ध्रुव राठी ने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीति का नमूना बता दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी लपेट लिया (पता नहीं क्यों)। क्योंकि ध्रुव राठी ‘प्रलाप’ नामक वायरस की बीमारी से ग्रसित हैं, इसलिए इन्होंने 21 नवंबर 2019 को इसी मुद्दे पर एक और वीडियो बनाया। क्योंकि पिछली वीडियो में ध्रुव राठी के अनुमान अनुसार स्टैचू ऑफ़ यूनिटी को देखने के लिए 10 लाख लोग आ जाते तो बड़ी बात होती, इस बार ज़्यादा कुछ कहने के लिए बचा ही नहीं था। एक साल में लगभग 27 लाख लोग इसे देखने आए थे, जिससे लगभग 80 करोड़ रुपए का रेवेन्यू पैदा हुआ। 

ध्रुव राठी का अनुमान गलत सिद्ध हुआ तो ऐसे में वह इन्फ्लेशन, बैंक में इतना पैसा रख देते तो कितना ब्याज मिल जाता, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट का गणित लगाने लगे। अंत में दोबारा ताजमहल से तुलना करते हुए कहा कि इसे देखने कोई नहीं आएगा और न ही इसकी लागत वसूल हो पाएगी।

लागत वाले प्रश्न का उत्तर तो वक्त ही देगा, ध्रुव राठी जैसे मौसमी जानकार सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं (वह भी सलीके से नहीं)। यूट्यूब की जनता को एंगेज रखना है, खुद को वामपंथी ब्रिगेड की यूथ विंग का मुखिया साबित करना है तो यह सब करना ही पड़ेगा। सरकार को गाली दिए बिना (भले उसका कोई काम अच्छा ही क्यों न हो) पता कैसे चलेगा कि ‘ब्रो’ नवागंतुक बुद्धिजीवी हैं।