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‘ईसाई बनो भाग जाएगी बीमारी, दूर हो जाएगी गरीबी’: रामनवमी के दिन प्रलोभन देकर बिलासपुर में धर्मांतरण की कोशिश, प्रार्थना सभा के नाम पर जुटाए थे 50+ हिंदू-पास्टर समेत 6 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईसाई मिशनरियों का खेल जोरों पर है। यहाँ धर्मांतरण के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच, रामनवमी के दिन हिंदूवादी संगठनों ने सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में प्रार्थना सभा के नाम पर हो रहे धर्मांतरण का भंडाफोड़ कर दिया। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुँचकर जमकर नारेबाजी की और हंगामा मचाया। जिसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने पास्टर दीपक सिंह सिदार समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

धर्मांतरण की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुँची। पुलिस के पहुँचते ही माहौल और तनावपूर्ण हो गया। सरकंडा थाना प्रभारी नीलेश पांडेय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पूछताछ में पता चला कि दीपा गोटेल अपने घर में प्रार्थना सभा करवा रही थीं। वहाँ पास्टर दीपक सिंह सिदार और उनकी पत्नी पूजा सिदार लोगों को मजहबी ज्ञान दे रहे थे। मौके से पुलिस ने दीपा गोटेल, दीपक सिंह सिदार, पूजा सिदार, गुरुविंदर सिंह, शिवकुमार धीवर और मधु कुमार केंवट को पकड़ा और थाने ले आई।

टीआई नीलेश पांडेय ने बताया, “शिकायत मिली थी कि प्रार्थना सभा के बहाने धर्मांतरण हो रहा है। जाँच के बाद छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।” ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी भी इसकी पुष्टि करती है।

पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है, “निखिल आश्रम, अटल आवास में दीपा गोतेल एवं पास्टर दीपक सिंह सिदार और उसकी पत्नी पूजा सिदार के साथ ही गुरुविंदर सिंह, शिवकुमार धीवर और मधु कुमार केवरा के साथ करीब 50 लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।”

हिंदू संगठन के कार्यकर्ता राम सिंह ठाकुर ने कहा, “हर रविवार को बहतराई के अटल आवास में प्रार्थना सभा होती है। रामनवमी के दिन भी चंगाई सभा के बहाने हिंदुओं को बुलाया गया था। ये लोग लालच देकर भोले-भाले लोगों का धर्म बदलवाते हैं।” उन्होंने कहा कि कोनी, सकरी, सिविल लाइन और मस्तूरी के बाद अब सरकंडा में भी ये खेल शुरू हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

स्थानीय लोगों में से एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये लोग पहले प्रलोभन देते हैं, फिर धीरे-धीरे दबाव बनाते हैं। हमारे मोहल्ले के कई लोग इन सभाओं में जा चुके हैं।” हिंदू संगठनों का कहना है कि बिलासपुर को धर्मांतरण का हब बनाने की साजिश रची जा रही है, और वो इसे रोकने के लिए हर कदम उठाएँगे।

एफआईआर की कॉपी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईसाई मिशनरी लंबे समय से सक्रिय हैं। अभी कुछ समय पहले भी पादरी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। उस समय हिंदुओं को देवी-देवताओं के खिलाफ ऊल-जलूल बोलकर भ्रमित किया जा रहा था। बहरहाल, पुलिस अब मामले की गहराई से जाँच कर रही है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है।

पाकिस्तान के भिखारियों से परेशान सऊदी अरब, भारतीय मुस्लिमों को भी हज के लिए नहीं देगा वीजा: जानिए क्यों 14 देशों के ज़ाइरीन पर लगाया बैन

हर साल लाखों मुस्लिम हज और उमराह के लिए सऊदी अरब जाते हैं। लेकिन, इस बार सऊदी सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए भारत समेत 14 देशों के लोगों के लिए वीज़ा जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि इन देशों के कई लोग वीज़ा नियमों का पालन नहीं करते और हज में बिना पंजीकरण किए शामिल हो जाते हैं। इस बार सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अब बिना रजिस्ट्रेशन हज में शामिल पाए गए तो पाँच साल तक सऊदी अरब में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अधिकारियों को हज यात्रा के सुचारू और सुरक्षित संचालन की गारंटी के लिए सख्त वीज़ा नियम लागू करने का निर्देश दिए है। यह प्रतिबंध जून के मध्य तक रहेगा। लगभग उसी समय, जब इस साल की हज यात्रा समाप्त होगी। जिन वीजा पर रोक लगाई गई है, उनमें उमराह वीजा के साथ-साथ बिजनेस और फैमिली विजिट वीजा भी शामिल हैं।

किन देशों पर लगी है पाबंदी?

सऊदी सरकार ने अधिकारिक तौर पर बताया कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, मिस्र, मोरक्को, इथियोपिया, अल्जीरिया, इराक, जॉर्डन सूडान ट्यूनिशिया और यमन के नागरिकों के लिए वीज़ा पर रोक लगाई गई है। अब इन देशों के मुस्लिम नागरिकों को 13 अप्रैल, 2025 तक ही उमराह वीज़ा मिलेगा। इसके बाद हज खत्म होने तक वीज़ा नहीं दिया जाएगा।

क्यों लगाना पड़ा प्रतिबंध?

सऊदी अधिकारियों ने यह कदम लोगों को आधिकारिक अनुमति के बिना हज करने की कोशिश करने से रोकने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे भीड़ और अव्यवस्था बढ़ती है, जिससे गंभीर हादसे होते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग हज या उमराह के नाम पर भीख माँगने जैसे काम में भी शामिल पाए गए हैं।

कई लोग उमराह या टूरिस्ट वीज़ा लेकर सऊदी अरब पहुँचते थे और वहाँ रुककर हज में भी हिस्सा लेते थे जबकि हर देश के लिए हज का एक तय कोटा होता है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन होता है बल्कि सुविधाओं पर बोझ भी बढ़ता है।

पिछले साल हज में हुई कई मौतें

बता दें कि वर्ष 2024 के हज के दौरान भारी भीड़ और गर्मी के चलते लगभग 1301 लोगों की मौत हुई थी। सऊदी सरकार का मानना है कि नियम तोड़ने वाले यात्रियों के कारण ये हादसा हुआ था। बिना रजिस्ट्रेशन के भाग लेने वालों की वजह से भीड़ बढ़ी, जिससे स्वास्थ्य और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था बिगड़ गई। इसी को देखते हुए 2025 की आगामी हज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए वीज़ा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

हज यात्रा पर जाने वाले भारतीयों की मौत का आँकड़ा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक हज यात्रा के लिए सऊदी अरब जाते हैं। साल 2024 में एक लाख 75 हजार लोग हज के लिए गए थे, जिसमें 98 भारतीयों ने जाने गँवाई थी। साल 2023 में 187 नागरिकों की हज यात्रा के दौरान मौत हुई थी। इस्लाम के 5 स्तंभों में से हज प्रमुख स्तंभ माना जाता है। जो मुस्लिम लोग शारीरिक और वित्तिय रूप से सक्षम हैं उन्हें हज पर जाना अनिवार्य होता है।

सऊदी अरब ने पाकिस्तानी भिखारियों को दी चेतावनी

सऊदी अरब ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान को उमराह के बहाने देश में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर चेतावनी दी। पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, “सऊदी हज मंत्रालय ने पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय को चेतावनी जारी की, जिसमें पाकिस्तानी भिखारियों को उमराह वीजा के तहत राज्य में प्रवेश करने से रोकने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।”

इसके जवाब में पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने ‘उमराह अधिनियम’ को लागू करने की योजना बनाने की घोषणा की ताकि उन्हें कानूनी निगरानी में लाया जा सके।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सऊदी राजदूत नवाफ बिन सईद अहमद अल-मल्की को आश्वासन दिया कि सऊदी अरब में भिखारियों को भेजने वाले जिम्मेदार आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। संघीय जांच एजेंसी (FIA) को इस कार्रवाई का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया है, जिसका उद्देश्य उन माफियाओं को खत्म करना है जो राज्य में भिखारियों के अवैध प्रवेश की सुविधा प्रदान करते हैं।

रामनवमी की तैयारी कर रहे थे हिंदू, हिस्ट्रीशीटर वाजिद शहंशाह ने BJP का झंडा फाड़ दी जातिसूचक गालियाँ : अहमदाबाद की पीर कमाल मस्जिद के पास की घटना

एक तरफ रविवार (6 अप्रैल 2025) को पूरा देश रामनवमी का त्योहार मना रहा था, तो दूसरी तरफ गुजरात के अहमदाबाद में एक कुख्यात मुस्लिम उपद्रवी ‘वाजिद शहंशाह’ शहर की शांति भंग कर रहा था।

वाजिद शहंशाह ने अहमदाबाद के दानीलिमडा में रामनवमी पर आयोजित कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हिंदुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं को जमकर गालियाँ दी और मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठी कर बवाल की कोशिश की।

दरअसल, रविवार (6 अप्रैल 2025) को रामनवमी के त्योहार के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस भी था। इस मौके पर अगले दिन यानी सोमवार (7 अप्रैल 2025) को पीरकमल मस्जिद के पास स्वामीनारायण हॉस्टल के मैदान में दानीलिमडा विधानसभा क्षेत्र का कार्यकर्ता सम्मेलन भी आयोजित किया जाना था। इसके साथ ही त्योहार का जश्न भी मनाया जाना था। इसकी तैयारियों के लिए दानीलिमडा वार्ड के बीजेपी अध्यक्ष भौमिक और अन्य कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल के पास बीजेपी के झंडे लगा रहे थे और लहरा रहे थे। इसी बीच वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात दंगाई मौके पर पहुँचा और उसने बीजेपी के झंडों को न सिर्फ उतारा, बल्कि फाड़कर फेंकने भी लगा।

यही नहीं, उसने बीजेपी कार्यकर्ताओं को जमकर गालियाँ भी दी। इस दौरान भौमिक व अन्य लोगों ने जब उसे रोकने की कोशिश की, तो वो जातिसूचक गालियाँ भी देने लगा और धक्का देकर उन्हें वहाँ से भगा दिया। इस दौरान ही दोनों ही तरफ से लोग जुटने लगे। जिसमें काफी संख्या मुस्लिमों की रही। हालाँकि इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शहंशाह की कारगुजारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर शहंशाह और उसके साथी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमलावरों की पहचान और उनकी कारगुजारियों के वीडियो और तस्वीर वाले सबूत भी मुहैया कराए। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे ऑपइंडिया के पत्रकार ने पुलिस से भी बातचीत की, जिसमें दानीलिमडा पुलिस के पीआई रावत ने कहा कि पुलिस आरोपितों को जल्द पकड़ेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

जातिसूचक गालियों के साथ ही पीएम के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग

इस मामले में FIR दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत की। शिकायतकर्ता भौमिक सोखड़िया दानीलिमडा के बीजेपी वार्ड अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, “सोमवार के कार्यक्रम के लिए मैं कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के झंडे लगा रहा था। उसी समय वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात बदमाश वहाँ पहुँचा। उसने गालियाँ देते हुए झंडे उखाड़ फेंके। हमारे विरोध करने पर उसने मुझे धक्का दिया और जातिसूचक गालियाँ देने लगा। उसने पीएम मोदी को लेकर भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया।”

भौमिक ने आगे कहा, “जब पार्टी कार्यकर्ता वहाँ इकट्ठे हुए, तो शहंशाह वहाँ से भाग गया। मैंने दानीलिमडा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।” उन्होंने कहा कि आरोपित कुख्यात बदमाश है और उसके खिलाफ पहले भी पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में पुलिस उसे गिरफ्तार कर उसका जुलूस निकाले, तब जाकर लोगों में पुलिस का भरोसा कायम होगा।

ब्याज का धंधा और कई अवैध गतिविधियों को अंजाम देता है शहंशाह

एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपित कई असामाजिक गतिविधियों में शामिल है। वो गरीबों को ऊँची ब्याज दर पर पैसे देता है और पैसे न चुकाने वालों को मारता-पीटता है। कई बार उसके खिलाफ दानीलिमडा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन उसकी पहुँच के चलते उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उस व्यक्ति ने कहा कि पुलिस इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, क्योंकि स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद और अन्य विपक्षी नेताओं से उसके अच्छे संबंध है। कई बार पार्षद के कहने पर उसे थाने से छोड़ा जा चुका है।

इस घटना को बीते कई घंटों का समय हो चुका है, इसके बावजूद आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। ऑपइंडिया ने इस मामले में दानीलिमडा पुलिस स्टेशन के पीआई रावत से संपर्क किया, तो उन्होंने आरोपित को जल्द पकड़ने की बात कही। अब देखना ये है कि ऐसे आपराधिक किस्म के लोगों के खिलाफ पुलिस क्या कदम उठाती है।

लालू की लालटेन में तेल भरने को तैयार नहीं राहुल गाँधी, NSUI के लिए PK ने दी कुर्बानी: क्या कन्हैया के बहाने बिहार में तीसरा मोर्चा बनाने चली कॉन्ग्रेस?

बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसकी गहमा-गहमी शुरू हो चुकी है। एक तरफ़ भाजपा है जो महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में जीत के बाद उत्साहित है। वहीं दूसरी तरफ़ राजद है जो जातीय राजनीति खेलकर सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी है। मैदान में कॉन्ग्रेस भी है, जो राज्य में एक नए चेहरे को स्थापित करने में जुटी है। इनके अलावा LJP और HAM हैं जो NDA गठबंधन का हिस्सा हैं, यहाँ तक कि वक़्फ़ बिल पर भी भाजपा को इन दोनों दलों का समर्थन था। वामपंथी भी हैं, CPI(ML) का बिहार के कुछ जिलों में अच्छा प्रभाव है।

एक पार्टी VIP भी है जो निषाद समाज के वोटों पर अपना दावा ठोकती है। वहीं अब राज्य की राजनीति में ‘जन सुराज पार्टी’ के नाम से नए दल का भी आगमन हुआ है, जो राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ बटोर रहा है। ये प्रशांत किशोर की पार्टी है, जो कभी लालू-नीतीश दोनों के क़रीबी रहे हैं। बिहार में ताज़ा समीकरण ये है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के शक्ति-प्रदर्शन ने राजद को बेचैन कर दिया है। क्या लालू यादव कभी कॉन्ग्रेस के किसी चेहरे को उभरता हुआ देख पाएँगे? फिर तेजस्वी यादव का क्या होगा?

कन्हैया कुमार को राहुल गाँधी का पूरा आशीर्वाद, RJD के लिए खतरा

मामला कुछ यूँ है कि सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को राहुल गाँधी ने बेगूसराय में कन्हैया कुमार के साथ पदयात्रा में हिस्सा लिया। इस पदयात्रा का नाम ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ रखा गया है। बेगूसराय में सुभाष चौक से लेकर हर-हर महादेव चौक तक की यात्रा में राहुल गाँधी के साथ उतनी भीड़ तो नहीं उमड़ी, लेकिन वो एक सन्देश ज़रूर देकर गए। जगह-जगह फूल बरसाकर उनका स्वागत किया गया। सोशल मीडिया में भी पार्टी ने बिहार के संघर्ष और आवाज़ की उम्मीद इसी यात्रा को बताया। राजद और लालू परिवार ने इस यात्रा से दूरी बनाई रखी।

बेगूसराय से लौटकर राहुल गाँधी ने राजधानी पटना में 2 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में उन्होंने हिस्सा लिया, वहीं पार्टी के प्रदेश मुख्यालय ‘सदाकत आश्रम’ में भी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं से बातचीत की। कॉन्ग्रेस के भीतर बिहार में बड़े दिनों के बाद इतनी गहमा-गहमी दिख रही है। लोकसभा चुनाव 2024 के समय से ही राहुल गाँधी ‘संविधान बचाओ’ का नारा देते रहे हैं, वो लगातार OBC/SC/ST की बातें करते रहे हैं, ऐसे में क्या एक बार फिर से बिहार चुनाव में ये पैंतरे रंग दिखाएँगे?

ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा, लेकिन महागठबंधन में ज़रूर इस रंग का असर दिखने लगा है। देशभर में I.N.D.I. गठबंधन तो फुस्स हो गया, लेकिन बिहार में अबतक राजद-कॉन्ग्रेस-वामदलों का गठबंधन चला आ रहा है। लालू यादव कभी किसी कॉन्ग्रेस नेता को बिहार में शक्तिशाली होते हुए नहीं देखना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले पप्पू यादव ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने से पहले लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ बैठक की थी, लेकिन पूर्णिया लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव जमकर पप्पू यादव पर ही हमलावर रहे।

पप्पू यादव निर्दलीय लड़कर जीते, लेकिन उन्होंने कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ी। अब कन्हैया कुमार के रूप में एक नया और चर्चित चेहरा उभर रहा है। कन्हैया कुमार फरवरी 2016 में JNU में लगे भड़काऊ नारों से ही सोशल मीडिया में चर्चित चेहरा रहे हैं, कॉन्ग्रेस में आने के बाद से ही उन्हें पार्टी की बड़ी बैठकों का हिस्सा बनते हुए देखा गया। वो बिहार के बेगूसराय से आते हैं, मीडिया और जनता के सामने बोलने में बेबाक हैं, ऐसे में पहली बार CM बनने के लिए जद्दोजहद कर रहे 2 बार के डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव शायद ही उन्हें भाव दें।

प्रशांत किशोर के साथ गठबंधन में जा सकती है कॉन्ग्रेस

ऐसे में अगर मोलभाव की मेज पर तेजस्वी यादव कॉन्ग्रेस को भाव नहीं दे रहे हैं, तो फिर अब पार्टी के पास क्या विकल्प होगा? कॉन्ग्रेस पार्टी के पास एक विकल्प ये हो सकता है कि वो PK के साथ गठबंधन में जुड़े। कॉन्ग्रेस पार्टी के पास आज भी हर इलाक़े में कैडर है, पार्टी बिहार में आज़ादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रही है। वहीं, PK के पास सोशल मीडिया हाइप और रणनीति है। प्रशांत किशोर ने पटना में मुस्लिमों का सम्मेलन किया था, वो वक़्फ़ बिल का विरोध कर चुके हैं, ईद-इफ्तारी में भी वो ख़ूब दिखाई दिए थे – ऐसे में कॉन्ग्रेस को उनसे गठबंधन में शायद ही कोई ऐतराज हो।

2024 में 4 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव में 2 सीटों पर जसुपा को प्रत्याशी बदलने पड़े थे, फिर भी पार्टी 10% से अधिक वोट पाने में कामयाब रही थी। हाँ, उसके बाद विधान पार्षदी के उपचुनाव में ज़रूर ‘जन सुराज पार्टी’ राजद-जदयू से आगे रही थी। हाल ही में पटना यूनिवर्सिटी में भी छात्र संघ के चुनाव हुए हैं, जिसमें अध्यक्ष पद पर ABVP जीती है। संयुक्त सचिव पद पर जसुपा की प्रत्याशी मात्र 182 वोटों से पीछे रह गई। राजद की करारी हार हुई, वहीं युवाओं में प्रशांत किशोर की पार्टी को लेकर उत्साह दिखा। अध्यक्ष पद पर प्रशांत किशोर ने NSUI को समर्थन दिया था।

हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस द्वारा लिए गए कुछ फ़ैसलों को भी देखें तो ऐसा लगता है जैसे पार्टी बिहार में अपना स्वतंत्र जनाधार बढ़ाने की चेष्टा कर रही है। सभी 40 सांगठनिक जिलों में नए अध्यक्ष बनाए गए। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को पद से हटा दिया गया। अखिलेश यादव UPA काल में राजद नेता थे और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भी। उन्हें लालू यादव के क़रीबी नेताओं में गिना जाता था, ऐसे में ये भी माना गया कि उन्हें हटाने के पीछे सोच यही थी कि कॉन्ग्रेस लालू यादव और राजद से अलग अपनी मजबूत पहचान बनाए।

लालू यादव के बारे में ये भी बता दें कि उनकी जो भी डीलिंग होती है, वो सीधे सोनिया गाँधी से फोन पर बात करने के बाद, शायद यही कारण है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा राज्य में भेजे गए प्रभारियों को भाव नहीं देते। 2021 में लालू यादव ने कॉन्ग्रेस द्वारा प्रभारी बनाकर भेजे गए भक्त चरण दास को ‘भकचोन्हर’ बता दिया था। अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस के वर्तमान प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने बीमार लालू यादव से मुलाक़ात की है। बताया गया था कि वो लालू के स्वास्थ्य की जानकारी लेने गए थे।

क्षेत्रीय साथियों को डरा रही कॉन्ग्रेस, मुस्लिम वोटों पर भी नज़र

ख़ैर, इन तमाम चर्चाओं के बीच एक चीज तो तय लग रही है कि कॉन्ग्रेस और राजद में डील फाइनल नहीं हो पाई है, सीट बँटवारे को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है। दिल्ली में AAP की हार का श्रेय भी कॉन्ग्रेस के चुकी है, भले ही आँकड़े इसकी पुष्टि न करते हों। यूपी में अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस पार्टी को भाव देना बंद करते हुए ये तक कह दिया है कि कॉन्ग्रेस अब ख़त्म हो चली है। ऐसे में कॉन्ग्रेस क्षेत्रीय दलों को ये डर दिखा रही है कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो भले वो ख़ुद जीते न जीते, इन्हें तो हरा ही देगी।

‘हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे’ वाले सिद्धांत पर चल रही कॉन्ग्रेस का PK से पहले भी नाता रहा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में प्रशांत किशोर कॉन्ग्रेस के लिए कार्य कर चुके हैं। एक बार तो उन्हें कॉन्ग्रेस में लेकर अध्यक्ष तक बनाए जाने की चर्च उठी थी, लेकिन फिर सामने आया था कि राहुल गाँधी को वो ख़ास पसंद नहीं हैं। प्रशांत किशोर ने बिहार में पदयात्रा की है, लोगों से दान भी लिया है, मुस्लिमों को भी रिझाया है, लालू और मोदी पर एक साथ हमला बोला है – ऐसे में आश्चर्य न हो अगर दोनों कल को साथ में चुनाव लड़ते हुए दिखें।

दलित-पिछड़ा, संविधान, आरक्षण – RJD से टकराते कॉन्ग्रेस के मुद्दे

कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर भी राहुल गाँधी दोहरा रहे हैं कि पार्टी ने पिछड़ों को प्राथमिकता दी है, ‘अपर कास्ट’ के लोगों को हटाया है। राजद प्रवक्ता भी बार-बार पिछड़ा की रट लगाते रहते हैं। ऐसे में बिहार में उतरकर कॉन्ग्रेस का उसी पिच पर खेलने का अर्थ है सीधे RJD से टकराव मोल लेना। 9 अप्रैल को गुजरात में पार्टी का अधिवेशन भी होने जा रहा है, बिहार चुनाव से पहले इसे भी शक्ति-प्रदर्शन के रूप में ही देखिए। वहाँ भी संविधान, पिछड़ा और आरक्षण की बातें ही की जाएँगी।

इसका एक कारण ये भी है कि बिहार में नीतीश कुमार दलितों का उपवर्गीकरण कर महादलित का दर्जा बहुत पहले दे चुके हैं, वहीं राज्य में मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा अधिकतर पिछड़े समाज को ही मिला है, ख़ासकर महिलाओं को। उधर 11 अप्रैल को प्रशांत किशोर पटना के गाँधी मैदान से ‘बिहार बदलाव रैली’ की शुरुआत करेंगे। बिहार की राजनीति अभी उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ कोई किसी का दोस्त नहीं दिख रहा, यहाँ तक कि नीतीश कुमार भी भाजपा के लिए मजबूरी ही हैं। उनके हाल के कुछ वायरल वीडियोज ने भाजपा की टेंशन भी बढ़ाई है।

फिर भी, महादलित और महिला वोट बैंक नीतीश कुमार के साथ है और यही उनके चेहरे की ताक़त है। लालू परिवार के भ्रष्टाचार से पीड़ित रहे बिहार में नीतीश कुमार का इस मामले में ‘क्लीन’ नज़र आते हैं। तो क्या इस बार बिहार में एक तरफ भाजपा, जदयू, लोजपा और HAM, एक तरफ कॉन्ग्रेस और PK और एक तरफ राजद व वामदल दिखाई दे सकते हैं? इस त्रिकोणीय लड़ाई में VIP वाले मुकेश सहनी किधर जाएँगे? वो 60 सीटें माँग रहे हैं, कम से कम महागठबंधन में राजद के रहते तो ये संभव नहीं है।

जिस ‘मिशन अस्पताल’ पर धर्मांतरण-मानव तस्करी के दाग, वहाँ ‘लंदन का डॉक्टर’ बन सर्जरी कर रहा था नरेंद्र यादव: 7 मौतों के बाद सामने आया मामला

दमोह के मिशन अस्पताल में डॉक्टर नरेंद्र जॉन केम उर्फ नरेन्द्र यादव के खिलाफ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई है। दरअसल, डॉक्टर ने इस अस्पताल में 15 मरीजों की हार्ट सर्जरी की थी जिसमें से 7 मरीजों की मौत हो गई। मामले की जाँच सीएमएचओ अशोक जैन की अगुवाई में डॉक्टर विशाल शुक्ला और डॉक्टर विक्रांत चौहान कर रहे हैं। ये दोनों जिला अस्पताल के डॉक्टर हैं। जाँच में सामने आया है कि मरीजों की मौत एन्जियोप्लास्टी के दौरान हुई। मृतक मरीजों में से 2 की पहचान अभी नहीं हो पाई है जबकि बाकी 5 मृतकों के परिजनों को पत्र लिख कर अस्पताल बुलाया गया है। जाँच की टीम इनसे बात करेगी। इनका बयान भी राष्ट्रीय मानवाधिकार की टीम दमोह सर्किट हाउस में दर्ज करेगी।

मिशन अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। अस्पताल पर मानव तस्करी और धर्मांतरण जैसे आरोप लगे हैं। इस मामले में दावा किया जा रहा है कि डॉक्टर नरेन्द्र जॉन केम यानी डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एन जॉन केम के नाम से प्रैक्टिस की। वह मूल रूप से उत्तराखंड का रहनेवाला है। उसने 15 मरीजों के हार्ट का ऑपरेशन किया जिसमें से 7 मरीजों की मौत हो गई। पूछताछ शुरू होने से पहले ही डॉक्टर नरेन्द्र यादव फरार हो गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मामले को 4 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा।

हालाँकि दो महीने पहले सीएमएचओ ने इस मामले की शिकायत की थी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक तिवारी के मुताबिक, “डॉक्टर नरेन्द्र ने जनवरी-फरवरी 2025 में 15 मरीजों की एजियोप्लास्टी की थी। इनमें से 7 मरीजों की मौत हो गयी। कई परिजनों ने उनसे इस मामले में बात की। लेकिन उन्होने गंभीरता से नहीं लिया जिसके बाद मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लिया”

मृतकों के परिजनों ने बताई कहानी

एंजियोप्लास्टी के बाद मिशनरी अस्पताल में जिन मरीजों की मौत हुई उसमें से एक रहीसा बेग के बेटे नबी का दावा है कि 12 फरवरी को उसकी माँ को हार्ट अटैक आया था। आनन-फानन में नबी अपनी माँ को लेकर नजदीक के अस्पताल में पहुँचा। माँ की हालत गंभीर थी इसलिए रहीसा बेग को मिशन अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया। डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने बताया कि रहीसा बेग के दिल में दो ब्लॉकेज हैं एक 80% है और दूसरा 90% इसलिए एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। भोपाल ले जाने की बात जब बेटे नबी ने की तो डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने यहीं ऑपरेशन करने की बात कही। मरीज के परिजनों से 50 हजार रुपए जमा करवाए गए। यहाँ तक कि क्या इलाज किया जा रहा है इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। 15 फरवरी को रहीसा बेग की एंजियोप्लास्टी की गई और आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

एक अन्य मरीज सुमरत सिंह का कहना है कि वे मिशन अस्पताल अपने चाचा को लेकर आए थे। चाचा होश में थे। उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया गया। अस्पताल के कई स्टाफ मिलकर चाचा का सीना दबा रहे थे। कुछ देर बार स्टाफ चले गए। परिजनों से कई सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए और कहा कि मरीज को वेंटिलेटर पर रखना होगा। हमने वार्ड में दरवाजे के शीशे से झांका तो देखा कि चाचा शांत थे। उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर शाम 4 बजे तक इलाज का दावा करते रहे इसके बाद कर्मचारियों ने पूछने पर कहा कि चाचा की मौत हो चुकी है। इसके बाद शव सौंप दिया गया. सुमरत सिंह का कहना है कि जब चाचा की मौत पहले हो चुकी थी तो वेंटिलेटर पर क्यों शाम तक रखा? डॉक्टरों ने चाचा को बगैर देखे सिर्फ कर्मचारी के कहने पर मौत की पुष्टि कैसे कर दी?

अस्पताल ने दी सफाई

मिशन अस्पताल की प्रभारी प्रबंधक पुष्पा खरे के मुताबिक जाँच अधिकारियों ने जो भी दस्तावेज माँगे उसे दे दिए गए हैं। इंटीग्रेटेड वर्कफोर्स इंक्वायरी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी। 1 जनवरी को डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने मिशन अस्पताल ज्वाइन किया था। अस्पताल का कहना है कि उन्होने सीधे भर्ती नहीं ली थी इसलिए डिग्री को लेकर वे कुछ नहीं कह सकते।

अस्पताल मालिक पर लगा था मानव तस्करी का आरोप

इस मुद्दे को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाने वाले प्रियंक कानूनगो के मुताबिक सेंट्रल इंडिया क्रिश्चन द्वारा संचालित मिशन अस्पताल का संचालक और सर्वेसर्वा डॉक्टर अजय लाल नर्सिंग होम भी चलाता है। डॉक्टर लाल ने आधारशिला नाम से समाजसेवी संस्था भी चलाई थी जिसे पहले मिड इंडिया क्रिश्चियन मिशन नाम से जाना जाता था। संस्थान के पास ही बाल भवन अनाथालय भी था। 7 अगस्त 2024 को डॉक्टर लाल पर मानव तस्करी के आरोप लगे। उसे घर पर नजरबंद कर दिया गया लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही परिवार समेत विदेश फरार हो गया। अनाथालय को फिलहाल बंद कर दिया गया है।

मिशन अस्पताल 10 सालों से चल रहा है जहाँ 131 बेड हैं। अस्पताल के पास ऑक्सीजन प्लांट भी है इसके अलावा पैथ लैब, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट, इमरजैंसी, ट्रॉमा सेंटर, ऑपरेशन थियेटर समेत तमाम सुविधाएँ हैं।

अंडमान के जिस द्वीप पर पहुँचने की कोशिश में बाणों से बेध दिया गया था ईसाई प्रचारक, अब वहाँ अमेरिकी यूट्यूबर कोक छोड़ आया: जानिए क्यों है यह सेंटिनल जनजाति के लिए खतरनाक?

अंडमान निकोबार का उत्तरी सेंटिनल द्वीप एक बार फिर से चर्चा में है। यहाँ रहने वाली दुनिया की सबसे संवेदनशील सेंटिनल जनजाति से संपर्क की कोशिश में एक अमेरिकी यूट्यूबर को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 साल के अमेरिकी यूट्यूबर मिखाइलो विक्टरोविच पोल्याकोव अपनी जान जोखिम में डालकर इस प्रतिबंधित द्वीप तक पहुँच भी गया। उसने सेंटिनल लोगों से मिलने की कोशिश की, लेकिन कोई नहीं मिला, जिसके बाद उसे द्वीप पर ही नारियल और डाइट कोक छोड़ दिया। हालाँकि बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

मिखाइलो कोई आम यूट्यूबर नहीं है। तालिबान जैसे खतरनाक इलाकों में वीडियो बना चुके इस शख्स ने 29 मार्च 2025 को जीपीएस और मोटर से लैस हवा वाली नाव से कुर्मा डेरा बीच से 25 मील का सफर तय किया। 9 घंटे की थकाऊ यात्रा के बाद वह सेंटिनल द्वीप के उत्तर-पूर्वी तट पर पहुँचा।

वहाँ उसने दूरबीन से जनजाति के लोगों को ढूँढने की कोशिश की, एक घंटे तक सीटी बजाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर उसने नारियल और डाइट कोक छोड़कर वापस लौटने का फैसला किया। मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था। एक मछुआरे की नजर उस पर पड़ गई और पुलिस को खबर मिलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

तीसरी बार पहुँचा था सेंटिनल लोगों के पास

पुलिस ने बताया कि मिखाइलो ने यह खतरनाक कदम पहले भी उठाया था। अक्टूबर 2024 और जनवरी 2025 में भी वह इस द्वीप पर जा चुका है। इस बार उसने जेमिनी इन्फ्लेटेबल डिंगी नाव का इस्तेमाल किया, जो हल्की और आसानी से ले जाई जा सकती है।

उसके होटल से गो प्रो कैमरा, दूरबीन और लाइफ जैकेट जब्त किए गए। होटल वालों ने उसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी जिद के आगे हार मान ली। अब वह कानूनी पचड़े में फँस गया है, क्योंकि सेंटिनल द्वीप पर बिना अनुमति जाना भारतीय कानून के खिलाफ है।

बाइबिल लेकर ईसाई बनाने पहुँचे मिशनरी की गई थी जान

वैसे भी, सेंटिनल जनजाति को दुनिया की सबसे खतरनाक और नाजुक जनजातियों में गिना जाता है, क्योंकि ये लोग बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं चाहते। साल 2018 में अमेरिकी मिशनरी जॉन एलन शाओ ने उनसे मिलने की कोशिश की थी, लेकिन जनजाति के लोगों ने तीर मारकर उसकी जान ले ली। उसके पास से बाइबिल बरामद हुई थी।

सबसे नाजुक लोग, कोक से हो सकती है पूरी प्रजाति खत्म

दरअसल, यह घटना सिर्फ एक साहसिक कहानी नहीं, बल्कि उस नाजुक जनजाति के लिए खतरे की घंटी है, जो बाहरी दुनिया के संपर्क से बचकर हजारों सालों से जिंदा है। ये जनजाति इसलिए भी नाजुक है, क्योंकि इनका इम्यून सिस्टम हमारी आम बीमारियों को झेल नहीं सकता। एक छींक या खाँसी भी इनके लिए मौत का पैगाम बन सकती है। ऐसे में बाहरी दुनिया से आई कोक जैसी चीजों की वजह से पूरी जनजाति का ही सफाया हो सकता है।

इतिहास गवाह है कि यूरोपीय लोगों के संपर्क से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका की कई जनजातियाँ खत्म हो गईं। क्या हम सेंटिनल को भी ऐसे ही खतरे में डाल दें? मिखाइलो की इस हरकत से लोग गुस्से में हैं। सर्वाइवल इंटरनेशनल जैसे संगठन इसे लापरवाही और मूर्खता बता रहे हैं। एक नारियल और कोक की बोतल शायद उसे रोमांचक लगी हो, लेकिन ये जनजाति के लिए जहर से कम नहीं। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है कि उसका मकसद क्या था।

5वें बच्चे को जन्म देते हुए मर गई केरल की आसमाँ, क्योंकि घर में बच्चों को जन्म देने वाली औरतों को ‘बहादुर’ मानते हैं मुस्लिम: ‘कठमुल्लापन’ में अस्पताल नहीं ले गया शौहर सिराजुद्दीन

केरल के मलप्पुरम की रहने वाली 35 साल की आसमाँ की पाँचवें बच्चे को जन्म देते समय मौत हो गई। शनिवार (5 अप्रैल 2025) को चिट्टीपरंबू के किराए के मकान में प्रसव के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी साँसें थम गईं। आसमाँ का शौहर सिराजुद्दीन उसकी मौत के बाद शव को लेकर एर्नाकुलम के पेरुंबवूर अपने घर पहुँचा और चुपचाप दफनाने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया और पेरुंबवूर तालुक अस्पताल भेज दिया। आसमाँ का नवजात बच्चा अभी जिंदगी की जंग लड़ रहा है और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आसमाँ के घरवालों का आरोप है कि प्रसव के दौरान आसमाँ का खून बहुत बह गया, लेकिन सिराजुद्दीन उसे अस्पताल नहीं ले जाया। परिजनों का कहना है कि अगर सिराजुद्दीन वक्त पर अस्पताल ले जाता, तो शायद आसमाँ आज जिंदा होती।

सिराजुद्दीन ‘मदावुर काफिला’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाता है और पारंपरिक चिकित्सा में उसका गहरा यकीन है। वो यूट्यूब पर घरेलू इलाज को लेकर ‘तकरीरें’ करता रहता है। सिराजुद्दीन पर आरोप है कि उसने आसमाँ को जानबूझकर अस्पताल नहीं ले जाया, क्योंकि उसे मॉडर्न मेडिसिन से ज्यादा पुराने तरीकों पर भरोसा था। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या उसकी ये सोच आसमाँ की मौत की वजह बनी।

ये कोई पहला मामला नहीं है, जिसमें घर में बच्चे को जन्म देते समय मौत की बात सामने आई हो। केरल में बीते कुछ समय से मुस्लिम समुदाय के लोग बच्चे को घर में जन्म देने वाली महिलाओं को ‘बहादुर’ बताकर सम्मानित करते रहे हैं, ऐसे में केरल में इस तरह से मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। बीते 5 साल में केरल में करीब 3000 ऐसी मौतें हो गई हैं, जिसमें ‘बहादुर’ बनने की कोशिश में उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया गया। इसमें से भी 1 तिहाई से अधिक मामले अकेले मलप्पुरम से सामने आए हैं।

रिपोर्ट्स की मानें, तो मलप्पुरम और केरल में इस तरह के मामलों में काफी तेजी आई है। अधिवक्ता कुलथुर जयसिंह के सूचना के अधिकार से पता चला कि 2019 से सितंबर 2024 तक केरल में 2931 घरेलू प्रसव हुए, जिनमें अकेले मलप्पुरम में 1244 मामले थे। इस दौरान 18 नवजात बच्चों की भी जान गई।

इसी तरह से कुछ समय पहले कोझिकोड में एक कार्यक्रम हुआ था, जहाँ घर पर प्रसव करने वाली महिलाओं को ‘बहादुर महिला’ कहकर सम्मानित किया गया। वहाँ कहा गया कि वो घर पर डिलीवरी को बढ़ावा नहीं दे रहे, बल्कि ‘प्राकृतिक प्रसव’ की खुशी मना रहे हैं। पुलिस को शक है कि इस्लामी संगठनों से जुड़ा ये आयोजन भी ऐसे मामलों को प्रभावित कर सकता है, हालाँकि अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है।

ऐसे मामलों में अक्सर परिवार का कहना होता है कि प्रसव जल्दी हो गया, इसलिए अस्पताल नहीं ले जा सके, लेकिन सच ये है कि ये पहले से प्लान किए जाते हैं। खासकर मुस्लिम परिवारों में ये चलन तेजी से बढ़ रहा है।

RSS में मुस्लिमों का स्वागत… औरंगजेब के वंशजों का नहीं: मोहन भागवत की दो टूक, कहा – ‘भगवा और भारत माता को स्वीकार करना होगा’

RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत फ़िलहाल वाराणसी दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ संवाद भी किया, संघ में मुस्लिमों एवं जातियों को लेकर जवाब दिया। मोहन भागवत ने कहा कि हम संघ में किसी की जाति नहीं पूछते। RSS में अनुसूचित जाति-जनजातियों के प्रतिनिधित्व के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम किसी से पूछते नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने तब का एक किस्सा भी सुनाया, जब वो नए-नए सरकार्यवाह चुने गए थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख ने बताया कि सुरेश सोनी उस दौरान सह-सरकार्यवाह चुने गए। इस दौरान मीडिया ने चलाया कि भागवत गुट की विजय हुई है, OBC को प्रतिनिधित्व देने के लिए सुरेश सोनी को रखा गया है। बकौल मोहन भागवत, मीडिया रिपोर्ट्स देखकर उन्होंने सुरेश सोनी से पूछा कि क्या वो ओबीसी समाज से आते हैं? इसपर वो मुस्कुराकर रह गए। मोहन भागवत ने कहा कि संघ में ऐसा वातावरण है कि आजतक उन्हें नहीं पता है कि सुरेश सोनी किस जाति से आते हैं।

इस दौरान मोहन भागवत ने ये भी कहा कि RSS की शाखा में सबका स्वागत है, मुस्लिमों का भी। लेकिन, साथ ही सरसंघचालक ने जोड़ा कि इसके लिए उन्हें न केवल ‘भारत माता की जय’ के नारे को स्वीकार करना होगा बल्कि भगवा ध्वज का भी सम्मान करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा-पद्धति या धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर RSS कोई भेदभाव नहीं करता है, हर जाति-संप्रदाय के लोगों के लिए संघ के दरवाजे खुले हुए हैं। उन्होंने इस दौरान हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सबका नाम लिया।

हालाँकि, इस दौरान मोहन भागवत ने इस्लामी आक्रांताओं के महिमा-गान पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग ख़ुद को औरंगज़ेब का वंशज मानते हैं, उनके लिए संघ में कोई जगह नहीं है। बता दें कि RSS में पहले से ही ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ चल रहा है। मुहम्मद अफजल इसके राष्ट्रीय संयोजक हैं, वहीं इंद्रेश कुमार मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। मोहन भागवत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत की संस्कृति एक है और ‘भारत माता की जय’ व भगवा ध्वज उस संस्कृति के प्रतीक हैं, इसका सम्मान करना ही होगा।

BJP नेता ने शेयर किया बंगाल में रामनवमी शोभायात्रा पर हमले का वीडियो, उधर TMC सांसद ने रुकवाई हनुमान चालीसा: मिथुन की 9% हिन्दुओं से अपील

पश्चिम बंगाल में हिन्दू विरोधी हिंसा आम हो चली है, पिछले कई वर्षों से चुनाव के दौरान न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाता है बल्कि हिन्दू पर्व-त्योहारों पर हिन्दुओं को भी निशाना बनाया जाता है। केंद्रीय शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों के विकास मामलों के राज्यमंत्री सुकांता मजूमदार ने एक वीडियो शेयर करके आरोप लगाया है कि राजधानी कोलकाता के पार्क सर्कस सेवन पॉइंट एरिया में रामनवमी की शोभायात्रा पर वापसी के समय हमला किया गया। उन्होंने बताया कि गाड़ियों पर सिर्फ़ इसीलिए पत्थर बरसाए गए, क्योंकि उनपर भगवा ध्वज लगे हुए थे।

पश्चिम बंगाल में रामनवमी शोभायात्रा पर हमला

कई गाड़ियों के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हमले के कारण वहाँ भगदड़ मच गया। सुकांता मजूमदार पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने 2 वीडियो शेयर करते हुए आगे बताया कि ये कोई अचानक हुआ हमला नहीं था बल्कि जानबूझकर निशाना बनाया गया, जबकि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की राजनीति ने बंगाल पुलिस को लकवाग्रस्त कर दिया है, हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए एक क़दम तक नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि इस कायराना चुप्पी ने एक चीज तो साफ़ कर दी – है रामनवमी पर पश्चिम बंगाल के हिन्दुओं की एक की दहाड़ ने यहाँ की सत्ताधारी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ममता बनर्जी ने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ‘शांति वाहिनी’ के गठन की घोषणा की थी। सुकांता मजूमदार ने कहा कि ये वाहिनी शांतिपूर्ण नहीं है, वो घबराई हुई और भयभीत है। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष इसी क्षेत्र में इससे भी विशाल रामनवमी शोभायात्रा निकलेगी और जो पुलिस वाले आज चुपचाप देख रहे हैं वो फूल बरसाएँगे।

वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने न केवल भाजपा के दावे को नकार दिया है, बल्कि ये भी कहा है कि उक्त इलाक़े में न तो शोभायात्रा के लिए कोई अनुमति ली गई थी और न ही ऐसी कोई गतिविधि हुई है। पुलिस ने कहा कि वाहन क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली थी, तुरंत मौके पर पहुँचकर स्थिति को सँभाला गया। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा कि जाँच हेतु मामला दर्ज किया जा रहा है। भाजपा नेता तरुणज्योति तिवारी ने पुलिस के वर्जन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्क सर्कस क्रॉसिंग में वक़्फ़ बिल के खिलाफ हुए प्रदर्शन के लिए अनुमति ली गई थी क्या?

‘9% हिन्दू हमें वोट कर दें तो…’: मिथुन चक्रवर्ती

उधर वरिष्ठ अभिनेता व भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए दहाड़ लगाई है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ में दिख चुके अभिनेता ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में वोट न करने वाले 9% हिन्दू मतदाता हमारे साथ खड़े हो जाते हैं तो यहाँ रामराज्य स्थापित हो जाएगा। कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में एक रामनवमी शोभायात्रा में शामिल होते हुए भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य मिथुन चक्रवर्ती ने ये बयान दिया।

मिथुन चक्रवर्ती की आगामी फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स – द बंगाल चैप्टर’ में पश्चिम बंगाल में विभाजन के दौरान हिन्दुओं के हुए नरसंहार का इतिहास दिखाया जाएगा। ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ही इसका निर्देशन कर रहे हैं। उन दोनों फिल्मों में भी मिथुन चक्रवर्ती अहम भूमिका में थे। मिथुन चक्रवर्ती का मानना है कि हिन्दुओं ने एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को वोट नहीं किया तो बांग्लादेश की तरह यहाँ के हिन्दू भी मुश्किल में पड़ जाएँगे। उन्होंने कहा कि TMC फिर जीती तो बंगाल में हिन्दू नहीं बचेंगे।

TMC नेता कल्याण बनर्जी ने रुकवा दी हनुमान चालीसा

उधर संसद में अजीबोगरीब हरकतें करके सुर्खियाँ बटोरने वाले तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने हनुमान चालीसा रुकवा दी और मंदिर की परंपरा का अपमान किया। कल्याण बनर्जी का वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वो हनुमान चालीसा के दौरान पुजारी को बाधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वो पुजारी से पूछते हुए दिखाई दे रहे हैं कि क्या पूरी हनुमान चालीसा पढ़ी जाएगी।

ये वही कल्याण बनर्जी हैं जिन्होंने संसद में वक़्फ़ बिल को मुस्लिम अधिकारों का हनन बताते हुए कहा था कि वक़्फ़ की संपत्तियाँ अल्लाह की हैं।

रामनवमी पर आक्रांता गाज़ी सालार मसूद के ढाँचे पर लहराया भगवा, गूँजा ‘जय श्री राम’: बोला सुहेलदेव संगठन – हिन्दुओं के हत्यारे की दरगाह ध्वस्त करो

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रविवार (6 अप्रैल, 2025) को रामनवमी के दिन गाजी सालार मसूद की मजार पर भगवा ध्वज लहराए गए। महाराजा सुहेलदेव से जुड़े संगठन के कार्यकर्ताओं ने ऐसा किया। तीन युवकों ने दीवार के सहारे मजार की छत पर चढ़ कर भगवा झंडे लहराए। इस दौरान नीचे अन्य हिन्दू कार्यकर्ता भगवा ध्वज लेकर खड़े थे। इन झंडों पर ‘ॐ’ लिखा हुआ था। मनेंद्र प्रताप सिंह इन युवकों का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने ख़ुद को भाजपा का कार्यकर्ता भी बताया है। उन्होंने गाजी सालार मसूद को एक आक्रांता करार दिया।

गाज़ी सालार मसूद की दरगाह पर भगवा झंडे, गूँजा ‘जय श्री राम’

बकौल मनेंद्र प्रताप सिंह, तीर्थराज प्रयागराज में किसी आक्रांता की कब्र नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उस दरगाह को त्वरित रूप से ध्वस्त किए जाने की माँग करते हुए कहा कि इस जगह को हिन्दुओं को पूजा-पाठ के लिए सौंप दिया जाना चाहिए। सूचना मिलने के बाद यूपी पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन तबतक ये युवक वहाँ से जा चुके थे। ‘सुहेलदेव सम्मान सुरक्षा मंच’ के कार्यकर्ताओं ने डीएम और एसपी को ज्ञापन भी दिया है। जिस गंगापार इलाक़े में ये घटना हुई, वो प्रयागराज शहर से 40 किलोमीटर की दूरी पर है।

इस घटना पर DCP कुलदीप गुणावत का कहना है कि वीडियो की जाँच कराई जा रही है और इसमें दिख रहे युवकों की तलाश हो रही है। दरगाह की छत पर खड़े होकर युवकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए। शाम के करीब 4 बजे बाइक से भगवा ध्वज के साथ इन युवकों ने रैली भी निकाली। रैली में 20 युवक शामिल थे। मनेंद्र प्रताप सिंह ‘करणी सेना’ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, साथ ही वो इलाहाबाद सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र नेता भी रहे हैं। संगठन द्वारा प्रशासन को सौंपे गए पत्र में लिखा है कि बहरिया के सिकंदरा में गाजी सालार मसूद की दरगाह बनी हुई है।

गाजी सालार मसूद को आक्रांता और हिन्दुओं का हत्यारा बताते हुए लिखा गया है कि ये मजार अवैध है, ऊपर से वो कभी सिकंदरा आया ही नहीं था। दावा किया गया है कि यहाँ शिवकंद्रा वाले महादेव, सती बड़े पुरुख का मंदिर था। ज्ञापन में झाड़फूँक के जरिए महिलाओं से अभद्रता और हिन्दुओं का धर्मांतरण के अलावा जमीन पर अवैध कब्जा करने कराने का आरोप लगाया गया है। वहाँ शिव-सती का मंदिर और महाराज सुहेलदेव का पार्क बनाने की माँग की गई है।

बता दें कि मई में लगने वाले वार्षिक नेजा मेले पर रोक लगाते हुए पुलिस ने इस दरगाह पर ताला लगा दिया था। हालाँकि, अंदर काम चलने की वजह से ताला जड़ा गया था और पुलिस ने बताया था कि लोगों की आवाजाही पर कोई रोकटोक नहीं है। गुरुवार (जुमेरात) और रविवार के दिन यहाँ बड़ी भीड़ उमड़ती है। अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर भाजपा पर सांप्रदायिक सियासत करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता हसीब अहमद ने इसे भाजपा द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करार दिया।

कौन था आक्रांता गाज़ी सालार मसूद?

याद दिलाते चलें कि सालार मसूद क्रूर आक्रांता था, जिसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किया और मंदिरों को ध्वस्त किया। इसी कारण उसे ‘गाजी’ (इस्लाम के लिए काफिरों से लड़ने वाला) की उपाधि मिली थी। सालार मसूद गाजी भारत में आक्रमण करने के दौरान जहाँ-जहाँ डेरा डाला था, वहाँ-वहाँ आज मुस्लिमों द्वारा उर्स मनाया जाता है। इनमें मेरठ का नौचंदी मेला, पुरनपुर (अमरोहा) का नेजा मेला, थमला और संभल के मेले प्रमुख हैं।1400 साल पहले सालार मसूद का अब्बा ‘बूढ़े बाबा’ अपनी बीवी और बेटों के साथ अजमेर शरीफ आ गया था।

यहीं पर सालार मसूद गाजी का जन्म हुआ। कहा जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी बीवी वापस अफगानिस्तान चली गई। वहीं, अबू सैयद सालार साहू गाजी बूढ़े बाबा अपने बेटे सैयद सालार मसूद गाजी के साथ बाराबंकी के सतरिख आ गया। यहाँ पर अबू सैयद मर गया और दफना दिया गया। महमूद गजनी के नेतृत्व में सन 1026 ईस्वी में सैयद सालार मसूद गाजी ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर किया था। बहराइच जिला मुख्यालय के पास सालार मसूद का मुकाबला महाराजा सुहेलदेव से हुआ।

महाराजा सुहेलदेव ने 21 अन्य छोटे-बड़े राजाओं के साथ मिलकर उसका सामना किया और आखिरकार इस गाजी का उपाधि धारण करने वाले इस आक्रांता को मार गिराया। वहीं प्रयागराज में गाजी सालार मसूद की मजार पर भगवा ध्वज लहराए जाने पर ALTNews के संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर जैसों ने ‘दरगाह का अपमान’ बताया। हालाँकि, लोगों ने याद दिलाया कि वो एक आक्रांता की याद में बनाया गया ढाँचा भर है। लोगों ने कहा कि ये कोई मस्जिद नहीं है, इसीलिए इसे मस्जिद के अपमान की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता है।

नेजा मेले पर योगी सरकार लगा चुकी है रोक

बता दें कि संभल में गाजी सालार मसूद के नेजा मेले पर रोक लगा दी गई थी। संभल में हर साल नेजा मेला आयोजित किया जाता था। यह मेला आक्रान्ता महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद गाजी की याद में मनाया जाता था। इस बार भी मुस्लिम इसे इसी प्रकार आयोजित करना चाहते थे। हालाँकि, प्रशासन ने इससे इनकार कर दिया। मुस्लिम इस बीच दावा करते रहे कि यह मेला लगातार चलता आया है। इसके बाद ASP ने स्पष्ट कर दिया कि सारे ऐतिहासिक तथ्य सालार मसूद की क्रूरता साबित करते हैं।