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‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ ना’

सुप्रीम कोर्ट में उस समय सभी की नजरें भारत के सबसे लोकप्रिय वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से एक हरीश साल्वे की तरफ घूम गईं, जब उन्होंने एक महिला का केस मुफ्त में लड़ने के लिए हामी भर दी। हुआ यूँ कि एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी की पत्नी सुप्रीम कोर्ट में एक मामले को लेकर आईं और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे से आग्रह किया कि उनके मामले में एक वकील को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) बना दिया जाए।

दरअसल, जो आरोपित वकील रखने की वित्तीय स्थिति में नहीं हैं, उन्हें सरकारी खर्च से कोर्ट ही वकील मुहैया करा देता है और इस प्रकार सुनवाई आगे बढ़ती है। केस में किसी भी स्टेज में एमिकस क्यूरी को बहाल किया जा सकता है। कई मामलों में कोर्ट की सहायता के लिए ऐसी नियुक्ति होती है। इस शब्द का अर्थ ही होता है – न्यायालय का मित्र। सम्बंधित मामले में वो कोर्ट को क़ानूनी पहलुओं की जानकारी देता है।

इसी तरह उक्त महिला ने भी सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि उनके पास वकील को देने के लिए रुपए नहीं हैं। महिला ने बताया कि उसकी बेटी लंदन में रहने के लिए भी संघर्ष कर रही है। साथ ही पूछा कि क्या इस मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में हरीश साल्वे को नियुक्त किया जा सकता है? हरीश साल्वे से जब CJI ने पूछा कि क्या वो इसके लिए तैयार हैं, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया।

याचिकाकर्ता महिला ने एक बार फिर कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। इसके बाद हरीश साल्वे ने कहा कि वो इस केस में एमिकस क्यूरी के रूप में नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता की तरफ से बतौर अधिवक्ता पैरवी करेंगे। उन्होंने कहा कि वो ये सार्वजनिक भलाई के लिए कर रहे हैं, याचिकाकर्ता को रुपयों को लेकर तनाव लेने की कोई ज़रूरत नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता महिला ने कहा – “ओह! सत्य हमेशा विजयी होता है।

विभिन्न खबरों की मानें तो हरीश साल्वे एक सुनवाई के लिए 15-30 लाख रुपयों के बीच फी लेते हैं और कई बार ये बात इस पर निर्भर करता है कि केस कितना जटिल है और क्लाइंट कौन है। रतन टाटा की भी वो पहली पसंद थे। मुकेश अम्बानी के खिलाफ जब राम जेठमलानी और मुकुल रोहतगी जैसे वकील थे, तब हरीश साल्वे ने उन्हें केस जिताया था। सामान्यतः सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने वाले साल्वे ज़रूरत पड़ने पर हाईकोर्ट्स में भी सुनवाइयों में हिस्सा लेते हैं।

तलोजा जेल से रिहा होने के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने भी लाइव शो में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के प्रति आभार व्यक्त किया था। साल 2018 के सुसाइड केस में बेल दिलाने के लिए हरीश साल्वे ने ही उनके केस को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था और अपने तर्कों से वो अर्णब को जमानत दिलाने में सफल भी हुए। उन्होंने बताया कि साल्वे ने उनका केस कोर्ट में लड़ने के लिए न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया

सितम्बर 2019 में पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बाँसुरी ने कुलभूषण जाधव को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मौत की सज़ा से बचाने वाले भारत के वकील हरीश साल्वे को उनकी फीस का वह एक रुपया भेंट किया, जो अपनी आकस्मिक मृत्यु के महज़ कुछ घंटे पहले स्वराज ने साल्वे से आकर अगले दिन ले जाने के लिए कहा था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान के खिलाफ दलीलें देकर हरीश साल्वे ने जाधव को फाँसी के फंदे से बचाया था।

‘सलामत अंसारी और प्रियंका हमारे लिए हिन्दू-मुस्लिम नहीं, वो साथ रह सकते हैं’ – इलाहाबाद HC

देश भर में कई मामले सामने आने के बाद ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ क़ानून बनाने के लिए चल रही तैयारियों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि सभी नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार तो है ही, साथ ही क़ानून दो बालिग़ व्यक्तियों को स्वेच्छा से एक साथ रहने की अनुमति प्रदान करता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो व्यक्ति चाहे विपरीत सेक्स के हों या समान सेक्स के हों, उन्हें संविधान अनुमति देता है कि वो अपनी मर्जी से साथ रहें। अदालत ने कुशीनगर निवासी सलामत अंसारी और प्रियंका खरवार मामले की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की और कहा कि बालिग़ स्त्री-पुरुषों को साथ रहने का अधिकार क़ानून ही देता है। साथ ही कहा कि उनके शांतिपूर्ण जीवन में दखल देने का अधिकार न तो किसी व्यक्ति, और न ही किसी परिवार को है।

अदालत ने यहाँ तक कहा कि कोई सरकार भी उनके जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सलामत और प्रियंका ने मुस्लिम रीति-रिवाज से परिवार की मर्जी के खिलाफ अगस्त 2019 में निकाह किया था। प्रियंका के परिवार ने सलामत पर आरोप लगाया कि उनकी बेटी को बहला-फुसला कर ले जाया गया है, जिसके बाद आरोपित के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही थी। जस्टिस पंकज नकवी और विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेच ने इसकी सुनवाई की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहाँ तक कहा कि अदालत तो सलामत और प्रियंका को हिन्दू-मुस्लिम के रूप में देखती ही नहीं है। दर्ज की गई FIR को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि ये प्रियंका की मर्जी है कि वो किससे मिलना चाहती हैं और किससे नहीं। लेकिन, साथ ही कोर्ट ने प्रियंका से भी कहा कि वो अपने परिवार की बेटी होने के कारण उनके साथ उचित सम्मान और शिष्टाचार का व्यवहार करें।

‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ पर चहुँओर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ये तो व्यक्ति की पर्सनल लिबर्टी का हिस्सा है और उसमें अगर कोई हस्तक्षेप कर के उसका अतिक्रमण करता है, तो ये दो लोगों के बीच ‘फ्रीडम ऑफ चॉइस’ का उल्लंघन है।

सरकारी वकील का कहना था कि शादी के लिए धर्मांतरण के कारण इस निकाह की क़ानूनन कोई वैधता नहीं है, इसीलिए कोर्ट इस पर ‘एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जजमेंट’ देने से बचे। साथ ही कोर्ट ने अंसारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अतिशयोक्तिपूर्ण और गलत तरीके से प्रेरित करार दिया।

हाल ही में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अगले सत्र में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ कानून को लेकर बिल लाने की बात कही थी। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार भी इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवौसी ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा है तो स्पेशल मैरिज एक्ट को तब खत्म कर दें।

‘बलूचिस्तान को कश्मीर बना रहे हैं भारतीय NSA, वो गंदा युद्ध लड़ रहे’: अजीत डोभाल के खिलाफ Pak में भय का माहौल

पाकिस्तान में भी अजीत डोभाल को लेकर भय का माहौल बन गया है। पाकिस्तानी अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में मुल्क के रिटायर्ड एयर मार्शल और पूर्व एम्बेस्डर शहजाद चौधरी ने एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अजीत डोभाल ‘गंदे हथकंडे’ अपना रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के साथ NSA बनाए गए अजीत डोभाल ख़ुफ़िया विभाग के दक्ष व अनुभवी व्यक्ति हैं और 90 के दशक में 6 वर्षों तक पाकिस्तान में रहे हैं।

शहजाद चौधरी के अनुसार, अजीत डोभाल ने उस दौरान पूरे पाकिस्तान का दौरा किया था और अपने देश के प्रति अपनी ड्यूटी को निभाते हुए समाज के कई वर्गों में भारत और उसके अभियान के लिए सहानुभूति और समर्थन को लेकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। उन्होंने कबूल किया है कि पाकिस्तानी समाज में भारतीय कूटनीतिज्ञ खासे लोकप्रिय हैं। वो लिखते हैं कि लौटते ही डोभाल ने ‘कश्मीर इंतिफाद’ का सफलतापूर्वक निपटारा किया।

वो लिखते हैं कि बतौर NSA डोभाल ने अपने कर्तव्यों की फेरहिस्त में जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान को सबसे ऊपर रखा हुआ है। पाकिस्तान की समझ से भारत-पाकिस्तान संबंधों की नीतियाँ साउथ ब्लॉक में न बन कर NSA द्वारा बनाई जाती हैं और यही चिंता उसे खाए जा रही है। चौधरी का दावा है कि एक सेमिनार में अजीत डोभाल ने कहा था कि पाकिस्तान से निपटने के लिए आक्रामक नीति अपनानी होगी, जिसमें पाकिस्तानियों को एसेट की तरह प्रयोग में लाना होगा।

उनका कहना है कि 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद ज़रूर भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के आरोप लगाए थे, लेकिन अजीत डोभाल ने इस प्रक्रिया को एक इंडस्ट्री के रूप में बदल दिया है। उनकी चिंता है कि अब भारत ने नीति बना ली है कि कश्मीर में जो भी होगा, उसके बदले पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कई घाव दिए जाएँगे। उनका दावा है कि अजीत डोभाल बलूचिस्तान को एक नया जम्मू कश्मीर बनाना चाहते हैं, उसे विवादित क्षेत्र बनाना चाहते हैं। रिटायर्ड पाकिस्तानी एयर मार्शल ने लिखा:

“भारत ने ‘नौसेना अधिकारी’ कुलभूषण जाधव के पकड़े जाने के बाद उनके इशारों पर कराची और बलूचिस्तान में स्थित भारत के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। अफगानिस्तान में सड़क-रेल का जिस तरह से विकास किया जा रहा है और भारत वहाँ जैसे सक्रिय है, RAW के लिए आवागमन की पूरी सुविधा विकसित कर ली गई है। भारत के ‘प्रोपेगंडा’ के सामने पाकिस्तान संघर्ष ही कर रहा है। डोभाल की योजना के अनुसार, बलूच विद्रोहियों के साथ RAW मिल कर काम कर रहा है। अनुछेद-370 और धारा-35A को निरस्त करना भी अजीत डोभाल की योजना का हिस्सा था। अगर कोई युद्ध गन्दा है तो, आप स्वच्छ तरीके से इससे नहीं लड़ सकते।”

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि कुलभूषण जाधव एक कारोबारी थे, जिनका अवैध तरीके से अपहरण कर के पाकिस्तानी फ़ौज ने उन पर भारतीय जासूस होने के आरोप लगा फाँसी की सजा सुना दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस फैसले को रोक दिया। पाकिस्तानी विश्लेषक का लिखना है कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ अपनाई गई रणनीति को अब अजीत डोभाल लद्दाख में चीन के खिलाफ आजमा रहे हैं।

उन्होंने आशंका जताई है कि भारत एक ‘दुश्मन’ है और वो यही कार्य करेगा, जो दुश्मन करते हैं। उन्होंने लिखा कि ये एक युद्ध है, जिसे पाकिस्तान को जीतना होगा। साथ ही पाकिस्तान की रणनीति को फिर से तैयार करने की ज़रूरत पर बल दिया। और दावा किया कि जम्मू कश्मीर का आखिरी चैप्टर अभी लिखा जाना है। इस लेख से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में अजीत डोभाल को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।

जम्मू कश्मीर में बड़ी साजिश के तहत आए 4 जैश आतंकियों के नगरोटा में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद से दोनों देशों के बीच फिर तनाव का माहौल है। BSF के डायरेक्टर जनरल राकेश अस्थाना ने जवानों को आदेश दिया है कि वो जम्मू कश्मीर के साम्बा और राजौरी सेक्टर में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर गश्त में तेज़ी और सतर्कता लाएँ, क्योंकि वहाँ आतंकियों के कुछ अन्य सुरंगों के भी मिलने की आशंका है।

चीन और पाकिस्तान के लिए बुरी खबर: जो बायडेन ने भारत के पुराने मित्र को बनाया अमेरिका का नया विदेश मंत्री

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने अपनी टीम के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसी क्रम में एंटोनी ब्लिंकन को ‘सेक्रेटरी ऑफ स्टेट’ बनाया गया है। अर्थात, वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के नए विदेश मंत्री होंगे। ये भारत के लिए अच्छी, तो पाकिस्तान और चीन के लिए बुरी खबर है। वो पहले से ही जो बायडेन की विदेशी नीतियों को बनाने वाली टीम के मुखिया रहे हैं। वो जो बायडेन के उपराष्ट्रपति के कार्यकाल में उनके NSA भी रह चुके हैं।

वो ‘स्टेट फॉरेन रिलेशन कमिटी’ के स्टाफ डायरेक्टर भी रहे हैं। फिर वो डिप्टी सेक्रेटरी बन गए। उनके पिता हंगरी में एम्बेस्डर रहे थे। उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के विदेशी मुद्दों पर स्पीच लिखने से अपने करियर की शुरुआत की थी। मध्य-पूर्व, चीन, यूरोप, ईरान और भारत को लेकर जो बायडेन की रणनीतियों के पीछे एंटोनी ब्लिंकन ही रहे हैं। भारत-अमेरिका परमाणु करार के समय उन्होंने सीनेट में इसके पक्ष में माहौल तैयार किया था

तब बराक ओबामा तक इस करार को सीनेट में पास करने से हिचक रहे थे और डेमोक्रेट पार्टी के फार लेफ्ट वर्ग में एकमत नहीं था, तब उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। इस साल की शुरुआत में हडसन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भारत के साथ रिश्तों पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करना और भारत-अमेरिका संबंधों में गहराई लाना जो बायडेन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक होगी।

उन्होंने कहा था कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत-अमेरिका के रिश्ते का महत्व है और इसीलिए वैश्विक मुद्दों पर स्थिरता के लिए इस पर आगे बढ़ना ज़रूरी है क्योंकि ये काफी लोकतांत्रिक होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पेरिस क्लाइमेट समझौते के वक्त भारत को उसमें शामिल करने में तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बायडेन ने बड़ी भूमिका निभाई थी, क्योंकि भारत और चीन के बिना इस समझौते का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।

उन्होंने कहा था कि भारत को हमने समझाया कि वो इस समझौते में आने के बाद ज्यादा समृद्ध और सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि ये कठिन था लेकिन भारत को मनाने में हम कामयाब रहे। साथ ही बताया कि अगर भारत इसका हिस्सा नहीं बनता तो वैश्विक चुनौतियों का समाधान नहीं हो पाता। पेरिस समझौते, WHO और ईरान JCPOA से डोनाल्ड ट्रम्प ने नाता तोड़ लिया था। नए अमेरिकी राष्ट्रपति इन तीनों में फिर से अमेरिका को वापस लेकर जाएँगे।

एंटोनी ब्लिंकन का मानना है कि जम्मू कश्मीर या अन्य मुद्दों पर, जिनमें दोनों देशों के बीच सहमति न हो, उस पर भारत जैसे देश से खुल कर बात की जा सकती है। चीन और पाकिस्तान में उनकी नियुक्ति को लेकर नाराजगी देखने को मिल सकती है। 58 वर्षीय एंटोनी ब्लिंकन ने याद किया था कि अमेरिका और भारत के रक्षा पार्टनर बनने के पीछे जो बायडेन का भी योगदान था।

उन्होंने ये भी कहा था कि न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बल्कि अन्य वैश्विक संगठनों में भी भारत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि जिस तरह सीमा से लेकर आर्थिक मोर्चों तक चीन आक्रामक होकर गलत तरीके से फायदा उठा रहा है, उससे हमें निपटना है। साथ ही वो आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की भी वकालत करते रहे हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भारत को मुख्य पार्टनर बताते हैं।

उधर चीन की कम्युनिस्ट सरकार के एक सलाहकार का कहना है कि चीन को इस ग़लतफ़हमी को दूर कर लेना चाहिए कि जो बायडेन प्रशासन के अंतर्गत उसके अमेरिका के साथ रिश्ते अपने-आप सुधरने लगेंगे। उसने चेताया कि उनके अंतर्गत अमेरिका अब चीन के खिलाफ और ज्यादा सख्त रवैया अपना सकता है। उसका मानना है कि वो अच्छे और पुराने दिन अब चले गए हैं। SCMP के अनुसार, 40 साल पहले एक-दूसरे के देश में दूतावास स्थापित होने के बाद दोनों के रिश्ते सबसे बुरी स्थिति में हैं।

पाकिस्तान से आकर पीर खुशहाल ने 100 बीघे पर बनाया था चिल्लागाह, थे 400 कमरे… योगी प्रशासन ने चलवाया बुल्डोजर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा किए हुए पीर खुशहाल के अवैध चिल्लागाह पर बुल्डोजर चला कर उसे जमींदोज कर दिया। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान से आए पीर खुशहाल ने भोंपा थाना क्षेत्र में साल 1964 में इस जमीन को लीज पर लेकर इस पर 100 बीघा में अवैध निर्माण करवा लिया था। यहाँ कथित तौर पर 400 कमरे और इबादतगाह था। 

प्रशासन ने लीज खत्म होने पर पीर खुशहाल के परिवार को नोटिस भेजा था लेकिन जब उसे खाली नहीं किया गया तो अल्टीमेटम देकर उस पर जेसीबी चलवाने का काम शुरू हुआ

इस दौरान पीर की बीवी ने इस कार्रवाई का विरोध किया लेकिन अधिकारियों ने हाईकोर्ट और नियम का हवाला देकर जमीन को खाली करवाया और शुरु में आरामगाह में बने दस कमरों के आगे बने बरामदे व आगे के हिस्से को गिराकर प्रशासन टीम लौट आई। इसके बाद इस आवासीय महल को गिराने का काम लगातार चला। पिछले दिनों इस निर्माण के 50 कमरे ध्वस्त किए गए।

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान से आए पीर खुशहाल की मृत्यु साल 2017 में हुई थी। उसके घर वालों ने इस अवैध निर्माण में उसकी मजार भी बनाई हुई है। जब पिछले हफ्ते कई आला अधिकारियों समेत प्रशासन की टीम बिहारगढ़ में बने चिल्लागाह पर पहुँची तो पीर खुशहाल की बीवी नाजिया अफरीदी ने इसका विरोध किया और कहा कि धर्मस्थल को नहीं तोड़ा जा सकता

हालाँकि, अफसरों ने नाजिया को साल 2005 में जमीन की लीज पूरी होने की बात बताई और कहा कि ध्वस्तीकण की कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह जमीन खाली करा कर वापस वन विभाग को सौंपी जाएगी। अगस्त महीने में इसके लिए नोटिस चिपकाया जा चुका है। अब जमीन को खाली कराने का काम हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पीर खुशहाल की जमीन के मामले को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने 19 अगस्त 2020 को जिलाधिकारी सेल्वा जे को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया कि वर्ष 1975 में दी गई जमीन के आवंटन का समय 31 अक्तूबर 2005 को पूरा हो गया। 

उन्होंने कहा कि पीर खुशहाल की मृत्यु भी हो चुकी है। कोर्ट में भी इस जमीन को लेकर कोई मामला नहीं है। कोर्ट ने कहा प्रशासन वन विभाग की इस जमीन को तत्काल खाली कराए। इस पत्र के बाद ही विभाग की जमीन को खाली कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। जब लंबे समय तक वन विभाग की जमीन खाली नहीं हुई तो मंत्री संजीव बालियान ने फिर डीएम और डीएफओ से पूछा कि जमीन को खाली नहीं कराने के पीछे किसका दबाव है।

इसके बाद चिल्लाहगाह भूमि पर अवैध निर्माण को गिराने का काम 11 नवंबर को शुरू हुआ। वन क्षेत्राधिकारी ने हाल में बताया कि पीर खुशहाल की बीवी ने आवासीय महल को खाली करना शुरू कर दिया है। परिसर में बनी मस्जिद और पीर बाबा की मजार वैसी की वैसी बनी रहेगी। बाकी सभी निर्माण कार्य को ध्वस्त किया जाएगा।

हिंदुओं के तीर्थ के पास मिली पाकिस्तानी पीर को जमीन: राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ

गौरतलब हो कि इस अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ दिव्य कुमार सोती ने यह जानकारी ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने बताया है कि पीर खुशहाल को मिली वन विभाग की जमीन हिंदुओं के तीर्थ शुक तीर्थ के बिलकुल नजदीक है, जहाँ राजा परीक्षित को संन्यासी शुक ने श्रीमद्भगवत गीता का पाठ सुनाया था।

वह कहते हैं कि अब सोचिए कितने लोगों ने भारत पर राज किया कि हम भारतीयों को वन विभाग में जाने के लिए अनुमति लेनी होती है और पीर खुशहाल को 100 बीघा जमीन लीज पर मिल गई।

उन्होंने पाकिस्तान में हिंदुओं की हालत को याद दिलाया और कहा कि उन्हें झोपड़ी भी नसीब नहीं होती जबकि यहाँ पाकिस्तान के पीर ने वन विभाग की जमीन पर 400 कमरे बना लिए।

उन्होंने बताया कि इलाके में स्थानीय लोग इस आवासीय महल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर बात करते रहे हैं। यहाँ से ट्रक लोड होकर एलपीजी और डीजल सप्लाई का काम भी हुआ है। लेकिन, इस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दिव्य कुमार सोती बताते हैं कि पीर की 3 पत्नियाँ थीं, जिनमें एक पाकिस्तानी और एक अफगानिस्तानी थी।

फ्रॉड फैक्टचेकर प्रतीक सिन्हा, AltNews का एक और कारनामा: गूगल सर्च को ही सच मान कर फैला रहा झूठ

खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले AltNews के प्रतीक सिन्हा ने एक बार फिर से फैक्टचेक के नाम पर झूठ फैलाया है। फेसबुक पर ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने उसे ‘कपटपूर्ण घोटालेबाज’ बताते हुए उसकी पोल खोली है। प्रतीक सिन्हा ने इस बार जम्मू कश्मीर में एक हिन्दू संन्यासी की तस्वीर को लेकर झूठ फैलाया। ‘ट्रू इंडोलॉजी (TI)’ ने आरोप लगाया कि वामपंथी कम दिमाग वाले होते हैं, इसीलिए उन्हें मूर्ख बनाने वाले प्रतीक सिन्हा को डोनेशन मिलता है और उसका कारोबार चलता है।

दरअसल, हुआ यूँ कि ट्विटर पर प्रतीक सिन्हा ने ‘ट्रू इंडोलॉजी’ के एक दावे का फैक्टचेक किया। अब ‘ट्रू इंडोलॉजी’ का ट्विटर हैंडल सस्पेंडेड है, ऐसे में खुले सांड की तरह प्रतीक सिन्हा ने ये सोच कर झूठ फैला दिया कि इसका जवाब देने वाला तो ट्विटर पर है ही नहीं। उसने दो तस्वीरें शेयर की और दावा किया कि ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने जम्मू कश्मीर के एक हिन्दू संन्यासी की तस्वीर शेयर की थी और दावा किया था कि वो बर्फ में बैठा हुआ है।

इसके बाद सिन्हा ने एक अन्य तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि वो संन्यासी बर्फ में तो बैठा ही नहीं हुआ था, इसीलिए ये दावा झूठा है। उसने ‘Getty Images’ का एक लिंक शेयर कर के अपनी बात साबित करने का भी प्रयास किया। TI ने इस बात पर आपत्ति जताई कि प्रतीक सिन्हा ने उसके लिए ‘ट्रू फ़्रॉडॉलॉजी’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही कहा कि रैंडम रिवर्स गूगल सर्च को ही वो फैक्टचेक समझता है।

प्रतीक सिन्हा और उसकी वेबसाइट AltNews की हमेशा से आदत रही है कि वो गूगल रिवर्स इमेज सर्च को ही असली फैक्टचेक समझता है और उसकी नजर में किताबों या ऐसी किसी चीज का कोई अस्तित्व ही नहीं है, जो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो या फिर जिनके बारे में उसे कुछ अंदाज़ा ही न हो। रिसर्च के नाम पर वो एक रिवर्स गूगल सर्च मार लेता है, बस। लेकिन, उसे पता होना चाहिए कि दुनिया इससे इतर भी है।

जिस तस्वीर को लेकर पूरा विवाद हुआ, वो ‘कश्मीर: न्यू सिल्क इंडस्ट्री’ नामक पुस्तक से लिया गया है। सिल्क व्यापारी सर थॉमस वार्डले की इस पुस्तक का प्रकाशन 1904 में हुआ था और उसमें उनके मित्र जॉफ्री डब्ल्यू मिलियम्स की क्लिक की हुई तस्वीरें थीं। इसी किताब के पेज संख्या 376 पर वो तस्वीर है, जिसके बारे में TI ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा था और उसे पोस्ट किया था। इस तस्वीर का कैप्शन है – “Holy man, Dal Lake, sitting in the snow in Winter“.

इसका अर्थ हुआ, ‘पवित्र व्यक्ति, डल झील, ठण्ड के मौसम में बर्फ के बीच बैठा हुआ‘ जबकि प्रतीक सिन्हा का दावा है कि उस तस्वीर में बर्फ तो है ही नहीं। TI ने आरोप लगाया कि एक भी पुस्तक न पढ़ने वाले प्रतीक सिन्हा को न तो जम्मू कश्मीर और न ही वहाँ के मौसम के बारे में कोई जानकारी है। अब प्रतीक सिन्हा ने ‘Getty Images’ का जो स्कीनशॉट डाला, वो बताता है कि इस तस्वीर को 1910 में लिया गया था। जबकि उसी प्लेटफॉर्म में एक और रूप में ये तस्वीर मौजूद है और उसकी तारीख 1990 है।

TI ने फेसबुक पोस्ट के जरिए प्रोपेगंडा का दिया जवाब

तो प्रतीक सिन्हा ने एक ऑनलाइन विदेशी सेकेंडरी सोर्स की मदद लेकर इस तस्वीर को झुठलाना चाहा। आखिर वो इससे साबित क्या करना चाहता था? TI के मुताबिक, इससे उसका हिन्दूफोबिया सामने आता है। उसकी सोच है कि आखिर एक हिन्दू साधु इस तरह का दुष्कर कार्य कर भी कैसे सकता है? यूट्यूब पर ऐसे न जाने कितने ही वीडियोज हैं, जिनमें भारी बर्फ के बीच साधुओं को भक्ति में मगन देखा जा सकता है।

लेकिन, एक बार सोचने लायक है कि प्रतीक सिन्हा ने जिस ‘Getty Images’ का लिंक शेयर किया, उसमें तो कहीं नहीं लिखा है कि उक्त हिन्दू संन्यासी बर्फ में नहीं बैठा हुआ है? फिर उसने इतने आत्मविश्वास के साथ ऐसा दावा कैसे कर दिया? प्रतीक सिन्हा को ये तक नहीं पता कि ठण्ड के मौसम में डल झील के पास कैसी स्थिति रहती है? वहाँ बर्फ़बारी की क्या स्थिति होती है और आसपास की पहाड़ी चोटियों पर कितना बर्फ होता है?

वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब प्रतीक सिन्हा ने इस तरह का झूठ फैलाया है। उसकी और जुबैर की जोड़ी के साथ-साथ दोनों की वेबसाइट AltNews पर भी कई बार इस तरह के झूठ पाए गए हैं। इसी तरह से उसने अर्णब गोस्वामी को लेकर दावा किया था कि वो पत्रकार नहीं है। साथ ही राहुल और प्रियंका गाँधी हँसते हुए हाथरस जा रहे थे तो उसका झूठा फैक्टचेक कर दिया। उस पर ऐप के जरिए निजी सूचनाएँ इकट्ठा करने का भी आरोप है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर भी वो झूठ फैला चुका है। जुबैर पर तो एक बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना से जुड़ा मामला भी दर्ज हुआ था। ISRO अध्यक्ष की पूजा करते हुए तस्वीर आने के बाद वो बौखला गया था। Altnews ने तो पीएम मोदी के जन्मदिवस पर ख़ुशी मनाने वाली मुस्लिम महिलाओं के मुस्लिम होने के सर्टिफिकेट को ही ‘रद्द’ कर दिया था। AltNews की एक के बाद एक कई करतूतों को लेकर आप ऑपइंडिया पर पढ़ सकते हैं।

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

झारखंड के हजारीबाग जिले के बहेरा गाँव से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला उजागर हुआ है। वहाँ एक दलित विधवा के साथ एक मुस्लिम युवक ने अपना नाम अर्जुन बताकर शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला ने शादी की बात कही तो उसने अपनी सच्चाई उगली और शर्त रखी कि अगर महिला को उससे शादी करनी है तो धर्म परिवर्तन करना होगा। युवक का असली नाम मोहम्मद रहीम है।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने मोहम्मद रहीम के ख़िलाफ मुकदमा दायर कर लिया है। पुलिस ने पड़ताल में पाया है कि युवक बिहार के मुजफ्फरपुर जिला का निवासी है। बहेरा गाँव की महिला ने जब थाने में आवेदन किया तो उसने पुलिस को बताया कि रहीम अपना नाम अर्जुन बताकर उसके संपर्क में आया था। कई बार दोनों में कहा सुनी हुई लेकिन रहीम उससे बात करता रहा।

महिला ने उसे कई बार बात करने से भी मना किया लेकिन अर्जुन बनकर रहीम ने उसे शादी का लालच दिया। देखते ही देखते विधवा उसके झाँसे में फँस गई। 

महिला के मुताबिक, बीते 15 नवंबर को रहीम उसके घर पहुँचा और लगातार 5 दिन तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 20 नवंबर को जब शादी की कोई बात किए बिना वह उसके घर से जाने लगा तो पीड़िता ने उस पर दबाव बनाया। उसकी बात सुनकर रहीम ने अपनी सच्चाई बताई।

उसने कहा कि अगर महिला को उससे शादी करनी है तो पहले इस्लाम कबूल करना होगा। उसने अपना नाम रहीम बताते हुए कहा कि वह मुस्लिम है, इसलिए जब तक वह इस्लाम नहीं कबूलेगी, वह उससे शादी नहीं करेगा। 

युवक की बात सुनते ही महिला ने शोर मचाया तथा ग्रामीणों की मदद से रहीम को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया गया। महिला ने भी बाद में थाने में अपना बयान देते हुए बताया कि रहीम उसे दो महीने से कॉल कर-कर के तंग करता था। बात करने से मना करने पर वह शादी का प्रलोभन देता था।

गौरतलब हो कि इससे पहले मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का केस सामने आया था। वहाँ पीड़िता ने सोशल मीडिया पर मिले मकसूद के ऊपर आरोप लगाया कि उसने खुद के शादीशुदा होने की बात युवती से छिपाई और प्रेम जाल में फाँस कर उसका शारीरिक शोषण करता रहा।

इतना ही नहीं, युवती को बड़े-बड़े सपने दिखाकर मकसूद ने उस पर इस्लामी रीति रिवाज सीखने और कुरान आदि पढ़ने के लिए भी मानसिक दबाव बनाया। बाद में महिला की माँ से भी मकसूद संपर्क में आया और उससे भी बातचीत करके शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया।

आतंकियों के सुरंग से कमांडर राठौड़ ने निकाली चौंकाने वाली चीजें, भारत ने P-5 राष्ट्रों को सौंपा Pak की करतूतों का कच्चा चिट्ठा

BSF के डायरेक्टर जनरल राकेश अस्थाना ने सोमवार (नवंबर 23, 2020) को जवानों को आदेश दिया कि वो जम्मू कश्मीर के साम्बा और राजौरी सेक्टर में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर गश्त में तेज़ी और सतर्कता लाएँ, क्योंकि वहाँ आतंकियों के कुछ अन्य सुरंगों के भी मिलने की आशंका है। इधर भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन शृंगला ने P-5 राष्ट्रों के राजदूतों को जम्मू कश्मीर में हुई हालिया मुठभेड़ और पाकिस्तान की करतूतों के बारे में बताया।

जम्मू कश्मीर में गुरुवार (नवंबर 19, 2020) को मारे गए चारों आतंकियों के पास से भारी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद भी मिले थे। उन्होंने 200 मीटर की एक सुरंग के सहारे भारत में प्रवेश किया था। BSF के जवानों ने रेंगते हुए उस सुरंग को खँगाला। अब क्षेत्र में ऐसे अन्य सुरंगों की खोज जारी है। कृष्ण पक्ष (अँधेरी रात) में बाहर निकलने से पहले सभी आतंकी उस सुरंग में ही छिपे हुए थे।

उस सुरंग में रेंगते हुए घुस कर उसके बारे में सारी जानकारी पता लगाने वाले 173 बटालियन के कमांडर राठौड़ ने वहाँ से कुछ खाने-पीने की चीजें निकालीं, जिनमें बिस्किट के पैकेट्स भी शामिल थे। जिस ‘मास्टर क्यूजीन कपकेक’ कम्पनी का बिस्किट प्राप्त हुआ, उसे लाहौर में बनाया जाता है। उस पर मई 2020 का मैन्युफैक्चरिंग डेट अंकित था और नवंबर 17, 2020 का एक्सपायरी डेट। यह भी साफ़ है कि एक पाकिस्तानी रेंजर उन्हें निर्देशित कर रहा था, ताकि वो सुरक्षित बाहर निकल कर तबाही मचा सकें।

ये भी पता चला है कि ये चारों पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के शकरगढ़ में स्थित जैश-ए-मुहम्मद के कैम्प से आए थे। इसके बाद वो रामगढ़ और हीरानगर सेक्टर के बीच स्थित साम्बा जिले के मावा की तरफ बढ़ रहे थे। उन्होंने जटवाल गाँव को अपना पिकअप पॉइंट बनाया था, जिसके साथ पाकिस्तान का नागवाल गाँव है। हालाँकि, भारत की सतर्क सुरक्षा एजेंसियों ने उस ट्रक का पता लगा लिया और भारत एक बड़े आतंकी हमले से बच निकला।

आतंकियों के पास से 1.5 लाख भारतीय रुपए मिले। तार काटने के उपकरण, चीनी ब्लैक स्टार पिस्टल, ग्रेनेड, असॉल्ट रायफल्स, और नाइट्रोसेल्यूलोज तेल ईंधन विस्फोटक मिले, जिनका इस्तेमाल पुलवामा हमले में भी किया गया था। भारत के पास स्पेशल ‘टनल इंस्पेक्शन टीम्स’ हैं, जिन्हें अन्य सुरंगों की खोज में लगाया गया है। उरी और कुपवाड़ा के उत्तर से आतंकियों के घुसने की आशंका के बाद गश्ती बढ़ा दी गई है।

जहाँ सीमा पर सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं है, कूटनीतिक स्तर पर भी भारत ने पाकिस्तान को घेरना शुरू कर दिया है और कई देशों के राजनयिकों को पाकिस्तान की करतूतों के बारे में जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत ने P-5 (यूके, यूएस, रूस, फ़्रांस और चीन) देशों से कहा है कि वो पाकिस्तान पर दबाव बनाएँ कि वो द्विपक्षीय समझौतों का पालन करे और अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं करे।

जापान सहित अन्य देशों के राजनयिकों को भी इस बारे में जानकारी दी गई। खुद विदेश सचिव ने सूचना सम्बंधित दस्तावेज देकर राजनयिकों को आतंकियों से हुई मुठभेड़ और इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ होने को लेकर अवगत कराया। इन ‘इनफार्मेशन डॉकेट्स’ में सारे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी थी। भारत ने दुनिया को ये बताया कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय DDC के चुनावों को रोकने के लिए पाकिस्तान ऐसा कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (नवंबर 20, 2020) गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव और शीर्ष खुफिया अफसरों के साथ नगरोटा एनकाउंटर पर एक समीक्षा बैठक भी की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमारे सुरक्षाबलों ने एक बार फिर अपनी बहादुरी और प्रतिबद्धता दिखाई है और जम्मू कश्मीर में डेमोक्रेटिक एक्सरसाइज को लक्षित करने वाली नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है।

दिल्ली में बुर्का पहन चलाई गोली: बुर्के का प्रयोग घड़ी चुराने से ले कर बम फोड़ने तक में होता रहा है

दिल्ली के चौहान बांगर इलाके से एक महिला को गिरफ्तार किया गया। नाम है – नुसरत। यह एक बंद दुकान पर पिस्टल से 4 गोली चला कर गंदी-गंदी गालियाँ बक रही थीं। इस अपराध के दौरान नुसरत पूरे ‘पारंपरिक’ लिबास मतलब बुर्के में थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार नुसरत नाम की यह औरत फहीम की बंद दुकान की शटर पर गोली चला रही थी। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

वायरल वीडियो में नुसरत को गंदी-गंदी गालियों के अलावा यह कहते सुना जा सकता है कि वो गैंगस्टर नसीर की बहन है। इसी वीडियो में देखा जा सकता है कि जब वो गोली चला रही होती है तो उसके इंतजार में एक बाइक वाला किनारे खड़ा रहता है और फिर उसी पर बैठ कर वो चली जाती है।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ-ईस्ट) वेद प्रकाश सुर्या के अनुसार फहीम के पास किसी शाहरुख नाम के शख्स का मोबाइल फोन बंधक पड़ा हुआ था, जो वो नहीं लौटा रहा था। इसी को लेकर वो फहीम को धमकाने गई थी और गोली चला कर उसे डरा रही थी। इसके लिए उसने लोनी के किसी मकसूद से पिस्टल खरीदी थी।

बुर्का और अपराध

1892 में ओटोमन साम्राज्य में एक व्यक्ति ने बुर्क़े की सहारा लेकर डकैती की कोशिश की। कहते हैं कि उस समय के सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय में बुर्क़े पर प्रतिबंध लगा दिया। अगर आधुनिक दौर की बात करें तो बुर्क़े का सहारा लेकर 1937 में अमीन अल हुसैनी नामक अपराधी फ़िलिस्तीन से बुर्क़ा पहन कर भागने में सफल हुआ और लेबनान जाकर नाज़ी समर्थित गतिविधियों में शामिल रहा। उसके बाद 1948 के एक वाकये में इराक़ी सेना ने बुर्क़ा पहन कर फ़िलिस्तीन में घुसपैठ किया।

इसके बाद लंदन, टोरंटों, पुणे, ग्लासगो, फिलाडेल्फिया से ज़ेवरों की चोरी से लेकर, दुकानों से दारू चुराने, लाहौर में चर्चों पर बम फेंकने, कहीं बच्चे चुराने, कहीं किसी आतंकी को जेल से भगाने, सैनिकों और पुलिसकर्मियों को अफ़ग़ानिस्तान में कई बार बम से उड़ाने, पैंपोर पुलिस चीफ़ मंजूर अहमद को मारने, एवम् दसियों बार बैंकों में डाका डालने से लेकर ब्रिटेन से संदिग्ध आतंकी यासिन ओमर का भाग निकलने, पाकिस्तान में 2007 में बन्नू में 15 को मारने, पेशावर चेकप्वाइंट पर तालिबानी महिला के खुद को उड़ाने, रोटरडम में पॉकेटमारी में अचानक वृद्धि आने, कर्बला जाते हुए इस्कंदरिया में इराकी शिया श्रद्धालुओं की सुसाइड बॉम्बिंग, मुंबई हमले, जॉर्डन में 2008-9 में 50 लोगों द्वारा 170 अपराधी वारदातें, सोमालिया के 2009 वाले होटल बॉम्बिंग में, सिंगापुर के आतंकी क़ैदी के भागने में, 2010 में पाकिस्तान के खार में 41 लोगों की सुसाइड बॉम्बिंग में हत्या, उसी दिसंबर में सउदी पुलिस पर गोली चलाने में, 2011 में सोमालिया के आंतरिक मंत्री की हत्या में, उसी साल पाकिस्तान में बम धमाकों की जाँच करती पुलिस टोली पर महिला बमबाजों के हमले में, काबुल के रिसॉर्ट होटल पर हमले में, इस्ताम्बुल पुलिस स्टेशन पर 2015 के सुसाइड बॉम्बिंग में, बोको हरम के जिहादियों के भागने में, सउदी मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में, चैड के अंज़ेमीना बाजार के धमाके में, येमेन के सना में शिया मस्जिद पर हुए हमले में, बलूचिस्तान के इमामबर्गा शिया मस्जिद की सुसाइड बॉम्बिंग में, इंडोनेशियाई बलात्कारी और क़ातिल अनवर के जेल से भागने में, इराक़ के पश्चिमी अनबर इलाके में विस्थापित लोगों के कैम्प पर हुए सुसाइड बॉम्बिंग में पेशावर के कृषि कॉलेज पर हुए तालिबानी हमले में, अफ़ग़ानिस्तान के शिया मस्जिद पर हुए टेरर अटैक में, श्री लंका के ईस्टर हमलों में… सबमें एक ही चीज कॉमन है: बुर्क़ा।

इसमें दसियों मामले ऐसे हैं जो बैंकों में डकैती से लेकर घड़ियाँ छीन कर भागने और बुर्क़े में होने का लाभ उठाकर पॉकेटमारी तक के हैं। पूरे यूरोप और अमेरिका में बैंकों में डाका डालने का यह एक पसंदीदा तरीक़ा है क्योंकि इस पर आप सवाल नहीं कर सकते। सवाल इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि आपको संवेदनहीन से लेकर बिगट और रेसिस्ट तक के टैग झेलने पड़ सकते हैं।

जिस तुर्की के चाँद को देख कर भारत के लोग ईद मनाते थे, वहाँ भी हिजाब या किसी भी तरह के वैसे कपड़े पर प्रतिबंध लगा, हटा और फिर लग गया जिससे लोगों की पहचान छुपती हो। साथ ही ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ़्रान्स, बेल्जियम, ताजिकिस्तान, लातविया, बुल्गारिया, कैमरून, चैड, कॉन्गो-ब्रैज़ाविल, गेबोन, नीदरलैंड्स, चीन, मोरक्को और श्री लंका में बुर्क़े पर प्रतिबंध है।

तमिलनाडु: हिंदू महासभा नेता की घर के बाहर निर्मम हत्या, सुरक्षा देने की माँग पुलिस ने ठुकरा दी थी

तमिलनाडु हिंदू महासभा के राज्य सचिव नागराज की रविवार (नवंबर 22, 2020) को होसुर के आनंद नगर में उनके आवास के पास हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, सुबह 8 बजे उनके आवास के पास एक अज्ञात गिरोह द्वारा उन्हें काट दिया गया। बताया जा रहा है कि अज्ञात बदमाशों ने पहले उन्हें घर से बाहर आने के लिए कहा और फिर बाहर आने पर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी।

वहीं कुछ अन्य रिपोर्टों में बताया गया है कि नागराज सुबह सैर पर निकले थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनके सामने अपनी कार रोक दी और फिर उनके साथ मारपीट करने लगे। जब पीड़ित नागराज ने भागने की कोशिश की, तो आरोपितों ने पीछा किया और सार्वजनिक जगह पर ही उनकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपित वहाँ से भागने में सफल रहे। आरोपितों ने नागराज के सिर और पर पेट पर वार किया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हिंदू महासभा नेता ने पुलिस सुरक्षा माँगी थी

घटना की जानकारी मिलने पर, कृष्णागिरी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी। नागराज के शव को पोस्टमार्टम के लिए कृष्णागिरी सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। कथित तौर पर नागराज ने हत्या से कुछ महीने पहले पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने तब उन्हें सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया था। नागराज के परिवार में पत्नी, बेटा और तीन बेटियाँ हैं।

हत्या के बारे में बात करते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) बंदी गंगाधर ने दावा किया कि शुरुआती रिपोर्ट में भीषण घटना के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि नागराज के हत्यारों को पकड़ने के लिए 6 टीमों का गठन किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमें संदेह है कि नागराज की रियल एस्टेट और मनी-लेंडिंग बिजनेस में प्रतिद्वंद्विता थी।” पुलिस ने सांप्रदायिक या राजनीतिक एंगल को दरकरिनार करते हुए कहा कि अपराध करने वाले 3-5 लोगों के गिरोह पर संदेह है।

सितंबर में कृष्णगिरी में दलित भाजपा नेता की हत्या कर दी गई थी

गौरतलब है कि सितंबर में रंगनाथन नाम के एक दलित भाजपा नेता को कृष्णागिरि के केलमंगलम में उनके घर के बाहर बेरहमी से काट दिया गया था, जब वह अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे। रंगनाथन AIADMK छोड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे और उन्हें कुंडुमारनप्पल्ली गाँव के बीजेपी यूथ विंग अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।