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दिल्ली की जनता को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने को लेकर केजरीवाल ने नहीं दिखाया ‘इंट्रेस्ट’, कहा- ‘सोचेंगे’

कोरोना की वैक्सीन मुफ्त हो या इसके लिए सरकार कीमत वसूले, इस मुद्दे पर लंबी बहस चल पड़ी है। बीजेपी द्वारा बिहार में सत्ता में आने पर हर व्यक्ति को मुफ्त कोरोना वैक्सीन की घोषणा के बाद कई दलों ने कहा है कि उन्हें भी केंद्र से नि:शुल्क कोरोना वैक्सीन मिले। हालाँकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली के लोगों के लिए कोरोना वायरस वैक्सीन मुफ्त देने के मुद्दे पर गैर-कमिटेड नजर आ रहे हैं।

शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से कहा कि पूरे देश को फ्री वैक्सीन मिलनी चाहिए, ये पूरे देश का अधिकार है। केजरीवाल ने कहा कि सारे लोग कोरोना से परेशान हैं। इसलिए हर भारतीय को कोरोना का वैक्सीन मिलनी चाहिए। हालाँकि खुद दिल्ली के लोगों को मुफ्त टीके उपलब्ध कराने के बारे में उन्होंने कहा कि टीका विकसित होने के बाद सरकार इस पर निर्णय करेगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केजरीवाल ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दो फ्लाईओवरों का उद्घाटन करने के बाद संवाददाताओं से कहा, “जब टीका आएगा तब हम इस बारे में विचार करेंगे। तब देखेंगे कि इसकी क्या कीमत है और यह कितने लोगों को मुहैया कराई जा सकती है।”

अरविंद केजरीवाल की विमुखता दिल्ली में कोरोना वायरस वैक्सीन के संबंध में उनकी सरकार की नीति को स्पष्ट रूप से बता रही है। चूँकि स्वास्थ्य ‘राज्य’ का विषय है, इसलिए दिल्ली सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह कोरोना वायरस वैक्सीन के देश भर में लॉन्च होने के बाद दिल्ली के लोगों का उचित टीकाकरण सुनिश्चित करे।

हालाँकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुफ्त में वैक्सीन प्रदान करने और केंद्र में जिम्मेदारी को स्थानांतरित करने के प्रयास के बारे में बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं हैं। देश भर में मुफ्त टीके उपलब्ध कराने के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के हमले के बीच केजरीवाल का गैर जिम्मेदाराना बयान आया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को आगामी चुनावों के लिए बिहार में भाजपा के घोषणापत्र को जारी करते हुए कहा कि बीजेपी बिहार में मुफ्त कोरोना वायरस टीके का वादा करती है। जिस तरह से दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने चुनाव से पहले फ्री पानी, फ्री बिजली का वादा किया था, उसी तरह बीजेपी ने फ्री टीका का वादा किया है।

उन्होंने कहा कि जब भी टीका उपलब्ध होगा, बिहार के लोगों को मुफ्त में दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया कि केवल बिहार के निवासी ही टीका प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे और यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा था कि अन्य राज्यों को टीका नहीं मिलेगा।

हालाँकि, ट्रोल और कॉन्ग्रेस समर्थक ‘ऑनलाइन कार्यकर्ताओं’ ने भाजपा और केंद्रीय मंत्री पर हमला करने के लिए अपनी कोरी कल्पना का सहारा लिया। उनमें से कई लोगों ने COVID-19 के मुफ्त टीकाकरण देने के सरकार के कदम को को ‘क्रूर’ कदम बताया। अन्य विरोधियों ने यह कहकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी कि टीका अन्य राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं।

दरअसल, सच्चाई यह है कि चुनाव से पहले बिहार को केंद्र से खास तवज्जो नहीं मिल रही है। जब भी वैक्सीन विकसित होगी, केंद्र सभी राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी, फिर यह राज्य सरकारें तय करेंगी कि इसे मुफ्त में दिया जाए या लोगों से इसके लिए शुल्क लिया जाए।

टीकाकरण राज्य का विषय है। उन्होंने बताया कि अन्य सभी टीकाकरण कार्यक्रमों की तरह, केंद्र राज्यों को मामूली दर पर टीके प्रदान करेगा। इसमें भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित दोनों राज्य शामिल होंगे। फिर यह राज्यों पर निर्भर है कि वे टीके नि:शुल्क लगाएँ या इसके लिए शुल्क लें।

स्वास्थ्य ‘राज्य’ का विषय है और बिहार में बीजेपी ने सत्ता में आने पर नि:शुल्क टीका देने का वादा किया है। इसी तरह, गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल या तो सभी के लिए टीके मुफ्त करने का विकल्प चुन सकते हैं या फिर अपने नागरिकों से इसके लिए शुल्क ले सकते हैं।

केजरीवाल भी गैर- कमिटेड बयान देते हुए अन्य की तरह ही कोरोना वैक्सीन का राजनीतिकरण कर रहे हैं और यह दावा करते हुए केंद्र पर दोषारोपण कर रहे हैं कि उन्होंने मुफ्त में टीकाकरण प्रदान नहीं किया।

मुंबई: अस्पताल के शौचालय में मिला 14 दिन से लापता कोरोना मरीज का सड़ा हुआ शव

मुंबई में कोरोना वायरस को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। मुंबई के सेवरी टीबी अस्पताल में 14 दिन से लापता एक 27 वर्षीय कोरोना संक्रमित मरीज की लाश अस्पताल के ही शौचालय में पाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरीज की पहचान सूर्यभान यादव के रूप में की गई है। 30 सितंबर को गोरेगाँव में एक डॉक्टर द्वारा रेफर किए जाने के बाद वह टीबी अस्पताल आए थे। जिसके बाद यादव को अस्पताल की पहली मंजिल पर कोरोना वायरस वार्ड में रखा गया था। हालाँकि, 4 अक्टूबर को अचानक वह वार्ड से लापता हो गए थे। यादव कोरोनो वायरस संक्रमण के अलावा टीबी से भी पीड़ित थे।

बता दें कि अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज का शव 14 दिनों के बाद टॉयलेट ब्लॉक से बरामद किया गया। शौचालय अन्य रोगियों द्वारा नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता था, इसके बावजूद किसी को इसकी खबर नहीं हुई। कथित तौर पर 14 दिन तक शौचालय में पडे़ रहने की वजह से मरीज का शव इतना खराब हो चुका था, कि उसके लिंग की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 18 अक्टूबर तक किसी भी मरीज या कर्मचारी ने बदबू आने की शिकायत नहीं की।

खबरों के अनुसार, 18 अक्टूबर को अस्पताल के एक वार्ड बॉय ने शिकायत की कि उसे तीन बंद क्यूबिकल्स में से एक से बदबू आने का एहसास हुआ, उसके बाद दीवार फाँदकर देखने पर अंदर शव होने का पता चला। अस्पताल ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी, जिसके बाद शव को केईएम अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। वहीं फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ हरीश पाठक ने मरीज की मौत प्राकृतिक कारणों से होने की पुष्टि की है।

घटना के उजागर होने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस मामले की जाँच के लिए निर्देश दिया है और अस्पताल के 40 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है, जो विशेष वार्ड में काम कर रहे थे।

इस बीच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (आरएके मार्ग पुलिस स्टेशन) सुनील सोहोनी ने बताया, “हम अस्पताल के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाएँगे ताकि यह समझ सके कि यह कैसे हुआ। साथ ही किसी प्रकार की हिंसा या अपराध का पता लगाने के लिए हमने मामले की तहकीकात भी शुरू की है।” यह भी बताया गया कि हाउसकीपिंग स्टाफ कोरोनावायरस वार्ड में प्रवेश करने या बाथरूम की सफाई करने से परहेज किया करते थे।

इस घटना पर बात करते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ ललित कुमार आनंदी ने कहा कि टीबी के मरीजों का अस्पताल से फरार होना आम बात है। उन्होंने दावा किया कि, जब उन्हें पता चला कि मरीज वार्ड से लापता है, जिसके बाद उन्होंने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। टीबी के मरीजों का अस्पताल से फरार होना आम बात है।

डॉ आनंद ने आगे कहा कि, “शौचालय को एक दिन में तीन बार साफ किया जाता है, लेकिन कभी-कभी मरीज इस पर अपना कब्जा जमा लेते हैं, इसलिए क्लीनर चला जाता है। लेकिन मरीज नियमित रूप से उन शौचालयों का इस्तेमाल करते है और उन्होंने शरीर के गलाने की गंध आनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात वार्ड में सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है।

शौचालय के अंदर मृत मिली थी कोरोना वायरस संक्रमित महिला

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र के जलगाँव के एक सरकारी अस्पताल से एक सप्ताह से लापता 82 वर्षीय कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीज अस्पताल के ही एक शौचालय के अंदर मृत पाई गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मई को बुजुर्ग महिला का कोरोनोवायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आया था, जिसके बाद से उसका इलाज जलगाँव सिविल अस्पताल में चल रहा था। वहीं से वह 2 जून को लापता हो गई। महिला के लापता होने के बाद उसके रिश्तेदारों और अधिकारियों ने उसकी तलाश की लेकिन वह नहीं मिली। वहीं 8 दिन बाद अस्पलात के ही शौचालय से उसका शव बरामद किया गया था।

फैक्ट चेक: शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ का आरोप- सरकार सिर्फ बिहार को देगी मुफ्त COVID-19 वैक्सीन

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पार्टी ने भाजपा के खिलाफ नया झूठ फैलाया है। ‘सामना’ ने यह झूठ बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी द्वारा किए गए वादों में बिहार के लोगों के लिए कोरोना की वैक्सीन मुफ्त देने की घोषणा को लेकर फैलाया है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए, ‘सामना’ के संपादकीय में आरोप लगाया गया कि यह COVID -19 वैक्सीन केवल बिहार के निवासियों के लिए उपलब्ध होगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार से सवाल किया गया है कि क्या देश के बाकी राज्य पाकिस्तान में हैं, जो उन्हें कोरोना वैक्सीन नहीं दी जाएगी?

शिवसेना ने आरोप लगाया कि देश के अन्य राज्यों में COVID-19 वैक्सीन नहीं मिलेगी

सामना के लेख में कहा गया, “भारतीय जनता पार्टी की असली नीति क्या है? उनका दिशा-निर्देशक कौन है? प्रधानमंत्री ने वादा किया कि टीका वितरण में जाति, धर्म, प्रांत, राजनीति नहीं होगी। लेकिन अब भाजपा नेताओं ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एक विचित्र कदम उठाया है। वे बिहार के निवासियों को मुफ्त वैक्सीन दे रहे हैं। बाकी राज्यों के नागरिक पाकिस्तान में नहीं रहते हैं।”

क्या अन्य राज्य को COVID-19 वैक्सीन नहीं मिलेगी?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को आगामी चुनावों के लिए बिहार में भाजपा के घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि बीजेपी बिहार में मुफ्त कोरोना वायरस टीके का वादा करती है। जब भी टीका उपलब्ध होगा, बिहार के लोगों को मुफ्त में दिया जाएगा। हालाँकि केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया कि केवल बिहार के निवासी ही टीका प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे और यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा था कि अन्य राज्यों को टीका नहीं मिलेगा।

हालाँकि, ट्रोल और कॉन्ग्रेस समर्थक ‘ऑनलाइन कार्यकर्ताओं’ ने भाजपा और केंद्रीय मंत्री पर हमला करने के लिए अपनी कोरी कल्पना का सहारा लिया। उनमें से कई लोगों ने COVID-19 के मुफ्त टीकाकरण देने के सरकार के कदम को को ‘क्रूर’ कदम बताया। अन्य विरोधियों ने यह कहकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी कि टीका अन्य राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं।

अमित मालवीय ने भ्रम को दूर किया

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बिहार को लेकर उन सभी मिथकों का खंडन कर दिया, जो बीजेपी के चुनावी वादे के बारे में आधे-अधूरे तरीके से सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि टीकाकरण राज्य का विषय है। उन्होंने बताया कि अन्य सभी टीकाकरण कार्यक्रमों की तरह, केंद्र राज्यों को मामूली दर पर टीके प्रदान करेगा। इसमें भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित दोनों राज्य शामिल होंगे। फिर यह राज्यों पर निर्भर है कि वे टीके नि:शुल्क लगाएँ या इसके लिए शुल्क लें। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और बिहार में बीजेपी ने सत्ता में आने पर नि:शुल्क टीका देने का वादा किया है। इसी तरह, गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल या तो सभी के लिए टीके मुफ्त करने का विकल्प चुन सकते हैं या फिर अपने नागरिकों से इसके लिए शुल्क ले सकते हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण प्रदान करने या इसके लिए राशि वसूलने के लिए व्यक्तिगत निर्णय राज्य का होगा। वास्तव में, केंद्र चुनाव से पहले बिहार को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहा बल्कि जब भी वैक्सीन विकसित होगी, केंद्र सभी राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी, फिर यह राज्य सरकारें तय करेंगी कि इसे मुफ्त में दिया जाए या लोगों से इसके लिए शुल्क लिया जाए।

हाथरस कांड में SIT के सदस्य DIG चंद्र प्रकाश की पत्नी ने लगाई फाँसी, तहकीकात में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज हैरान करने वाली घटना घटित हुई। जहाँ पुलिस उप महानिरीक्षक चंद्र प्रकाश की पत्नी ने कथित तौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीआईजी चंद्र प्रकाश की पत्नी पुष्पा प्रकाश ने सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में आज शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) सुबह करीब 11 बजे घर में फंदे से लटककर सुसाइड कर लिया।

खबरों के अनुसार, आनन-फानन में कुछ लोगों द्वारा डीआइजी की 36 वर्षीय पत्नी पुष्पा प्रकाश को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पर डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और जाँच शुरू कर दी है। पुष्पा प्रकाश की आत्महत्या लगाने की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है और न ही मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

हाथरस कांड में SIT के सदस्य हैं DIG चंद्र प्रकाश

2004-बैच के आईपीएस अधिकारी डीआईजी चंद्र प्रकाश वर्तमान में उन्नाव में तैनात हैं। वह यूपी के गृह सचिव भगवन स्वरूप की अध्यक्षता वाली उस तीन सदस्यीय एसआईटी के सदस्य भी हैं, जिसे हाथरस मामले के संबंध में गठित किया गया था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की एक दलित लड़की का चार लोगों ने कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पीड़िता की हालत बिगड़ने के बाद उसे दिल्ली के अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया जहाँ उसने दम तोड़ दिया। मरने से पहले उसने चार लोगों पर बलात्कार का आरोप लगाया था।

पीड़िता की मौत के बाद विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए घटना को चुनावी मुद्दे की तरह इस्तेमाल किया। जहाँ जाति के नाम पर राजनेताओं द्वारा लोगों को बरगलाने का काम भी किया गया। मामले के बढ़ता देख और निष्पक्ष जाँच के लिए योगी सरकार ने आखिरकार अपराध की जाँच के लिए एक सीबीआई जाँच के निर्देश दिए।

गाली-गलौज करने पर महिला ने की मुंबई पुलिस की बीच सड़क पर पिटाई, संजय राउत ने कहा- प्रतिष्ठा का सवाल

एक महिला द्वारा मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल की पिटाई का वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो को देखने के बाद संजय राउत भड़क उठे और उन्होंने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संजय राउत ने कहा कि ये मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा का सवाल है।

ट्विटर पर पिटाई का वीडियो वायरल

मुस्तफा शेख नाम के व्यक्ति ने महिला द्वारा कॉन्स्टेबल की पिटाई का वीडियो ट्विटर पर डाला। उन्होंने लिखा कि ये वीडियो कालबादेवी का है, जहाँ मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेलबल की पिटाई की जा रही है। वीडियो में कॉन्स्टेबल अपनी वर्दी में दिख रहा है और एक महिला उसे कॉलर से पकड़े हुए है और थप्पड़ों की बरसात कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मुस्तफा शेख ने बताया कि एलटी मार्ग पुलिस ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को 30 वर्षीय साद्विका रमाकांत तिवारी को कलाबदेवी के सुरती होटल के पास ऑन ड्यूटी ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल एकनाथ परते के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

शिकायत के अनुसार, साद्विका रमाकांत तिवारी मोहसिन शेख (26) के साथ थी। हेलमेट नहीं पहनने की वजह से कॉन्सटेबल परते ने उन पर जुर्माना लगाया था। इसी बीच उनकी बहस शुरू हुई। देखते ही देखते महिला ने कॉन्सटेबल परते को वर्दी से पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। मामले के सह-आरोपित मोहसिन शेख मारपीट का वीडियो बनाते दिख रहे हैं।

साद्विका तिवारी इस वीडियो में कई बार ट्रैफिक सिपाही को थप्पड़ मारती हुई दिखाई दे रही हैं। महिला ने पुलिसवाले पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वो जुर्माना देने को तैयार थी, लेकिन पुलिसवाले ने बदसलूकी करनी शुरू कर दी। वहीं, पुलिस का कहना है कि महिला ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और परते को बचाया। तिवारी और शेख को गिरफ्तार कर थाने लाया गया।

संजय राउत का रिएक्शन

ये वीडियो देखते ही संजय राउत का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने इसे मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा से जोड़ा और मुंबई पुलिस, विश्वास नगर पुलिस के साथ ही राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को मेंशन करते हुए तुरंत कार्रवाई की बात कही।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

ये वीडियो हजारों बार देखा जा चुका है। कुछ लोग इसे आपसी झगड़े से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग मुंबई पुलिस की कथित बदसलूकी और अकर्मण्यता पर चुटकी ले रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती को भगा-भगा कर पाकिस्तान क्यों भेजना चाहते हैं कश्मीर के जावेद कुरैशी, देखें Video

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के तिरंगा न थामने के बयान पर अब जम्मू कश्मीर की आम जनता में इसकी नाराजगी देखने को मिल रही है। जहाँ एक तरफ स्थानीय हिंदू और मुस्लिम लोगों ने उनके बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में भाजपा नेता जावेद कुरैशी महबूबा मुफ्ती को भगा-भगा कर पाकिस्तान भेजने की बात कहते हुए नज़र आए।

सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में देश के प्रति जावेद कुरैशी का देशप्रेम देखा जा सकता है। शुरुआती वीडियो में जावेद अपने कपड़े फाड़ते और महबूबा मुफ़्ती को चुनौती देते हुए बोलते हैं कि, “कपड़े फाड़ के, ये कपड़े फाड़ के… हिंदुस्तान कहाँ पर बसता है- (दिल की और इशारा करते हुए) दिल में, हिंदुस्तान कहाँ पर बसता है- दिल में, तिरंगे की इज्जत इस दिल में है। इस दिल से इस तिरंगे को कोई निकल नहीं सकता है। मैं कहना चाहता हूँ, अगर आपने (महबूबा मुफ्ती) दोबारा ऐसी कोशिश की ऐसे बयान देने की तो मैं आपको भगा-भगा के पाकिस्तान भेज दूँगा और आप तैयारी कीजिए, पाकिस्तान जाने की। आप इस बात को गोल कर के रखो, मैं जावेद कुरैशी आपको कहता हूँ कि आपको मैं खोटी सियासत यहाँ पर नहीं करने दूँगा।”

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

पूरे भारत पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत सिर्फ़ जम्मू कश्मीर की जमीन चाहता है उसके लोगों को नहीं। इसलिए वह अनुच्छेद 370 के दोबारा बहाल होने तक कोई झंडा नहीं उठाएँगी। उन्होंने पत्रकारों के सामने कहा कि देश के झंडे से उनका संबंध इस झंडे (जम्मू कश्मीर के पुराने) की वजह से है। अब जब पुराना झंडा हाथ में आएगा तभी वह उस झंडे को भी उठाएँगी।

उल्लेखनीय है कि देश के तिरंगे झंडे को लेकर मुफ्ती द्वारा दिए गए विवादित बयान ने हंगामा मचा दिया है, जिसकी बीजेपी के साथ-साथ कॉन्ग्रेस ने भी निंदा की। वहीं तिरंगा न उठाने का विवादित बयान देने वाली महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एफआईआर की माँग को लेकर पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल की ओर से पुलिस कमिश्नर को भेजी शिकायत में कहा गया कि महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काया है। उनके खिलाफ नेशनल ऑनर एक्ट और धारा 121, 151, 153A, 295, 298, 504 और 505 के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए।

दहेज़ के लिए शौहर जफ़र ने पीटकर घर से निकाला, देवर इमरान और जेठ ने किया रेप का प्रयास

उत्तर प्रदेश स्थित पीलीभीत जिले में थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के एक गाँव की महिला ने पुलिस में तहरीर देकर ससुराल वालों पर पिटाई और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि दहेज़ न देने पर उसके देवर ने उसके साथ रेप का प्रयास किया और फिर ससुराल वालों ने पीट-पीट कर घर से निकाल दिया। महिला ने बताया कि देवर इमरान उस पर पहले से ही बुरी नजर रखता था और अक्सर उसके साथ छेड़छाड़ किया करता था।

‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पीड़ित महिला का निकाह 2 साल पहले कोतवाली क्षेत्र के डालचंद मोहल्ला के रहने वाले जफर से हुआ था। निकाह के दौरान मायके पक्ष के लोगों ने अपनी हैसियत के हिसाब से पूरा दान-दहेज़ दिया था, लेकिन ससुराल पक्ष के लोग उससे असंतुष्ट थे। उससे दहेज में चार पहिया गाड़ी और सोने की चेन की माँग की जाती थी। दहेज़ न देने पर महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

उसे जब देवर इमरान द्वारा छेड़छाड़ की बात भी ससुराल वालों को बताई तो उन्होंने मारपीट की। दहेज की माँग पूरी न होने पर उनलोगों ने उसको मारपीट कर घर से निकाल दिया। अक्टूबर 12, 2020 को ससुराल पक्ष के लोग पीड़िता के मायके गए और उसको जबरन ससुराल ले जाने का प्रयास करने लगे। विरोध करने पर महिला के साथ फिर से मारपीट की गई। इंस्पेक्टर अतर सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

पीड़िता की शिकायत के बाद दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में शौहर जफर, देवर इमरान, यासीन, नसरत बेग और फूलबी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उसके जेठ ने भी एक दिन खाना उसे बुरी नीयत से दबोच कर दुष्कर्म का प्रयास किया। शादी के साथ ही विवाहिता पर मायके से कार लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया गया था।

विभाजन के बाद की पहली दिवाली: कबाइलियों के आतंक से J&K को बचाने में RSS की भूमिका

दिवाली का मतलब है ख़ुशियाँ, चारों तरफ रौनक। लेकिन क्या आप जानते हैं जम्मू कश्मीर के राजौरी की दीवाली से जुड़ी ऐसी यादें हैं, जिन्हे याद कर राजौरी के लोग आज भी सिहर उठते है। 11 नवंबर, 1947 को देश में दिवाली मनाई जा रही थी, उस समय राजौरी कबाइलियों की दहशत में जल रहा था। तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। कई महिलाओं ने बेटियों के साथ जहर खा लिया तो कुछ ने कुएँ में छलाँग लगा दी।

7 नवंबर को पाकिस्तानी सेना ने दीवाली के दिन राजौरी शहर पर हमला बोला। सभी लोग राजौरी में तहसील भवन में जमा हो गए थे। जब पाकिस्तानी सेना ने हमला किया तो तहसील भवन के आस पास लोग निहत्थे थे। लेकिन पाकिस्तानी सेना ने राजौरी में इन निहत्थे लोगों के साथ ऐसी मारकाट मचाई कि शहर की गलियाँ लाल हो गई।

पूरे शहर को कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर लिया, हिन्दू घरों को लूटा, महिलाओं का बलात्कार किया या उन्हें अगवा कर लिया गया। राजौरी में रहने वाले लगभग 30 हजार हिंदू और सिखों की या तो हत्या कर दी गई या बुरी तरह घायल कर दिया गया।

पाकिस्तान में जितने भी हिन्दू परिवार थे, उनको बुरी तरह से काटा जाने लगा। माँ-बहनों की इज्जत को सरेआम बेआबरू किया जाने लगा और पाकिस्तान में जिन हिन्दुओं की निर्मम हत्या की गई, उनके शवों को ट्रेनों में लादकर भारत भेजा जाने लगा। उसके बाद भारत में भी इसका प्रतिकार किया गया।

इस दौरान देश को अपनी माँ की भाँति प्यार करने वाले कई संगठन इस हिंसा से देश के लोगों को बचानें में लगे, जिनमें ऐ एक थे राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय, स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री माधव सदाशिव राव गोलवलकर। उन्होंने संघ के शिक्षा बीच में ही छोड़ कर लोगो की सहायता करने की बात कही।

बस फिर क्या था, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने इस सूचना को सुनते ही दिन देखा न रात देखी, बस लग गए लोगों की सहायता के लिए। इस बँटवारे के दौरान संघ के काफी कार्यकर्ताओं ने समाज की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूतियाँ देकर भी समाज की रक्षा की।

27 अक्टूबर 1947 से लेकर 12 अप्रैल 1948 तक कबाइलियों का राजौरी पर कब्जा रहा। ये कबाइली कश्मीर से खदेड़े जाने के बाद राजौरी घुस आए। 13 अप्रैल, 1948 का सूरज ख़ुशियाँ लेकर आया जब भारतीय सेना ने राजौरी को कबाइलियों से मुक्त करा लिया

भारत जब स्वतंत्र हुआ तब देश में छोटी-बड़ी 565 रियासतें थीं। जम्मू-कश्मीर भी उन 565 में से एक रियासत थी और महाराजा हरि सिंह उसके शासक थे। इन सभी रियासतों को भारत में विलीन कराने का श्रेय प्रथम गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को ही जाता है। जूनागढ़, हैदराबाद, भोपाल जैसे पेचीदा मसले भी सरदार पटेल ने बड़ी कुशलता से और जरुरत पड़ने पर बल प्रयोग कर सुलझाए थे। जम्मू-कश्मीर का मसला भी वे बड़ी आसानी से  सुलझा सकते थे। पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस मसले को अपने हाथों में ले लिया और हमेशा के लिए भारत के लिए एक सिरदर्द बना कर छोड़ दिया।

नेहरू को कश्मीर के नेता शेख अब्दुल्ला से बहुत अधिक स्नेह था और अब्दुल्ला के हाथ में राज्य की कमान सौंपने की योजना नेहरू की ही थी। नेहरू ने शेख अब्दुल्ला के प्रति स्नेह के चलते कश्मीर मसले को सरदार पटेल से छीना और उसे सुलझाने के बजाय और भी पेचीदा बना दिया। महाराजा हरि सिंह को नेहरू की इस मंशा का पता चल गया था, इसलिए वे उनके रहते भारत के साथ विलय को लेकर चिंतित थे।

इधर पाकिस्तान सरकार जिन्ना के नेतृत्व में महाराजा पर दबाव बना रही थी, ताकि वे उनके राज्य को पाकिस्तान के साथ मिला दे। पर महाराजा उसके लिए भी तैयार नहीं थे, क्योंकि उनको राज्य के हिन्दू प्रजा की चिंता थी ।

पाकिस्तान ने युद्ध का सहारा लेकर कबाइलियों को कश्मीर पर आक्रमण करने के लिए उकसाना शुरू कर दिया। अब महाराजा खुद को बड़ी मुश्किल में फँसा हुआ पा रहे थे। ऐसे नाजुक दौर में महाराजा की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सामने आया और महाराज को यह समझाने का सफल प्रयास किया कि भारत के साथ राज्य का विलय करने में भी उनकी और राज्य की जनता की भलाई है। 

राज्य की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। सरदार पटेल और महात्मा गाँधी ने भी महाराजा को मनाने का प्रयास किया, पर महाराजा नेहरू की अधिसत्ता को मानने के लिए तैयार नहीं थे। ऐसी स्थिति में गृह मंत्री सरदार पटेल ने राज्य के प्रधानमंत्री मेहरचंद महाजन के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर, जिनको श्री गुरुजी भी कहा जाता था, को सन्देश भेजा कि वे महाराजा को भारत में विलय के लिए मनाने का प्रयास करें।

श्री गुरुजी ने, बिना किसी विलम्ब के सरदार का प्रस्ताव स्वीकार किया और अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर, वे नागपुर से दिल्ली होते हुए सीधे श्रीनगर पहुँचे। मेहरचंद महाजन और पंडित प्रेमनाथ डोगरा जी के मध्यस्थता से श्री गुरुजी और महाराजा हरि सिंह के बीच बैठक तय हो गई।

26 अक्टूबर 1947 को, महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए और इस प्रकार जम्मू-कश्मीर की रियासत भी सम्पूर्ण रूप से भारत का एक अभिन्न हिस्सा बन गई। महाराजा हरि सिंह को मनाने में संघ के सरसंघचालक श्री गुरूजी ने इस प्रकार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद संघ के स्वयंसेवकों ने श्रीनगर के हवाई अड्डे की रात-रात में मरम्मत कर भारतीय सेना के उतरने की व्यवस्था की, अपनी जान पर खेलकर संघ के निडर स्वयंसेवकों ने दुश्मन की सीमा में गिरे गोला-बारूद के बक्से उठाकर अपनी सेना के शिविर में पहुँचाए। जो लोग संघ पर आए दिन उंगलियाँ उठाते हैं, वे जान लें कि संघ के कारण ही जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा बना है। संघ के स्वयंसेवकों ने जो बलिदान दिए उसके कारण पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर को जीतने के मनसूबे कामयाब नहीं हो सके।

अमेरिका ने भारत से की चीनी कंपनी HUAWEI और ZTE को 5G ट्रायल से बाहर करने की माँग

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से ही चीन का विरोध कर रहे अमेरिका ने अब भारत से चीनी कंपनियों को 5G ट्रायल से बाहर रखने के लिए कहा है। चीन के चालबाजियों और धोखेधड़ी को देखते हुए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने भारत में होने वाले 5G ट्रायल और अन्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) नेटवर्क से चाइनीज स्मार्टफोन मेकर हुवावे (HUAWEI) और ZTE को हटाने की माँग की है। हालाँकि, भारत ने सीमा पर विवाद के चलते पहले ही चीन की कंपनियों को 5G ट्रायल से बाहर रखने की योजना बना ली थी।

ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी ग्रेग कैलबेग ने एक ऑनलाइन इवेंट में इन नीतियों पर बात करते हुए कहा कि वो भारत के 5G नेटवर्क और व्यापक आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर से हुवावे, जेडटीई और अन्य अविश्वसनीय कंपनियों से उपकरणों को हटाने और बाहर करने के लिए भारत सरकार को प्रोत्साहित करेंगे। इसके अलावा अमेरिका की तरफ से कम्युनिकेशन नेटवर्क के जोखिमों की समीक्षा करने के लिए भी कहा जाएगा। बता दें अमेरिका और भारत इसी सेक्टर में कमर्शियल सुधार की योजना पर काम कर रहे हैं।

वहीं, इस इवेंट में भारत की ओर से भारतीय दूरसंचार विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल किशोर बाबू, COAI के अधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। जिस दौरान कैलबेग ने कहा कि चीन की कंपनियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि वे अपनी सरकार के इशारों पर काम करती हैं। बता दें, इसी योजना तहत अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर अगले हफ्ते भारत आने वाले हैं।

गौरतलब है कि इस सप्ताह अमेरिकी टेक्नोलॉजी फर्म क्वालकॉम के साथ मिलकर मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली भारतीय टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने अमेरिका में अपनी 5G टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया था। इस सफल परीक्षण की जानकारी अमेरिका के सैन डिएगो में एक वर्चुअल इवेंट के दौरान घोषणा की दी गई थी।

रिलायंस जियो के प्रेसिडेंट मैथ्यू ओमान ने क्वालकॉम इवेंट में कहा कि क्वालकॉम और रिलायंस की सब्सिडियरी कंपनी रेडिसिस के साथ मिलकर हम 5G टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, ताकि भारत में इसे जल्द लॉन्च किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि चीन से कोरोना महामारी की वजह से बहुत से देशों ने चाइनीज स्मार्टफोन मेकर हुवावे पर प्रतिबंध लगाया दिया था। ऐसे में घरेलू संसाधनों से विकसित रिलायंस जियो की 5जी तकनीक के सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद चीनी कंपनी हुवावे के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा। उम्मीद है कि हुवावे पर प्रतिबंध के चलते बड़ी संख्या में विदेशी कंपनियां और सरकारें 5जी टेक्नोलॉजी के लिए जियो को अपना सकती हैं।

बता दें इससे पहले यूरोपीय देशों की तर्ज पर स्वीडन ने भी चीन की दूरसंचार कंपनियों हुआवे और ज़ेटीई (Huawei, ZTE) की 5-जी योजना पर प्रतिबंध लगा दिया था। स्वीडन की सुरक्षा सेवा के मुखिया क्लास फ्रिबेर्ग ने कहा था कि, “चीन हमारे देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। चीन हमारे देश से खुफ़िया जानकारी और तकनीक चुरा कर, अनुसंधान और जासूसी करके अपनी सेना की क्षमता बढ़ा रहा था और अर्थव्यवस्था को बेहतर कर रहा था। हमें भविष्य में 5-जी नेटवर्क पर काम करते हुए इन बातों का ख़ास तौर पर ध्यान रखना होगा। हम स्वीडन की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं।”

जो लॉकडाउन में छूट के बावजूद भी भरते रहे EMI, उन्हें सरकार दे रही है ब्याज का पैसा वापस

लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा EMI पर मिली छूट (मोरेटोरियम) ने कोरोना महामारी के दौरान लोगों को काफी राहत देने का काम किया। वहीं ऐसे समय पर भी एक बड़ा वर्ग ऐसा भी रहा, जिसने सुविधा का फायदा नहीं उठाया और ईमानदारी से अपनी EMI भरी। वहीं अब सरकार ने उपहार के तौर पर ऐसे लोगों को कैशबैक देने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम का फायदा 2 करोड़ तक का लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को होगा।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार (24 अक्टूबर, 2020) को कहा कि अगर किसी कर्जदार ने लोन मोरेटोरियम के दौरान लगातार किस्त चुकाई है तो उसे बैंक से अनुग्रह राशि (Ex Gratia) या कैशबैक मिलेगा। 2 करोड़ रुपए तक का कर्ज लेने वाले छोटे उद्यमी या व्यक्तियों को इसका फायदा मिलेगा। बता दें कि सरकार ने 2 करोड़ तक के लोन पर मोरेटोरियम के दौरान ब्याज पर ब्याज में छूट की घोषणा की थी।

यानी, सरकार की इस स्कीम के तहत, 1 मार्च 2020 से 31 अगस्त 2020 तक की लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर ग्राहकों से ब्याज पर वसूला गया ब्याज वापस किया जाएगा। 

इस स्कीम के तहत कर्जदारों को छह महीने के सिंपल लोन इंट्रेस्ट में डिफरेंस का लाभ मिलेगा। ऋणदाताओं में बैंक, सरकारी बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रोफाइनेंस संस्थान शामिल हैं। साथ ही 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज पर छह महीने के लिए दी गई मोहलत के दौरान संचयी ब्याज यानी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर राशि का भुगतान सरकार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आरबीआई की तरफ से कर्ज लौटाने को लेकर दी गई मोहलत के तहत 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज पर ब्याज छूट योजना को जल्द से जल्द लागू करने का निर्देश दिया था। उसके बाद यह दिशानिर्देश आया है।

वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार कर्जदार संबंधित ऋण खाते पर योजना का लाभ ले सकते हैं। यह लाभ एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 की अवधि के लिए है। इसके अनुसार जिन कर्जदारों के ऊपर 29 फरवरी तक कुल ऋण 2 करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वे योजना का लाभ उठाने के लिये पात्र होंगे।

इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन कर्ज, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), टिकाऊ उपभोक्ता सामन के लिए लिया गया कर्ज और खपत के लिये लिया ऋण आएगा।

दिशानिर्देश के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थान पात्र कर्जदारों के ऋण खाते में मोहलत अवधि के दौरान ब्याज के ऊपर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर की राशि डालेंगे। यह उन सभी पात्र कर्जदाताओं के लिये है, जिन्होंने आरबीआई द्वारा 27 मार्च, 2020 को घोषित योजना के तहत पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से कर्ज लैटाने को लेकर दी गयी छूट का लाभ उठाया।

वित्तीय संस्थान संबंधित कर्जदार के खाते में रकम डालकर उसके भुगतान के लिए केंद्र सरकार से दावा करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी खजाने पर इस योजना के क्रियान्वयन में 6,500 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।