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जो लॉकडाउन में छूट के बावजूद भी भरते रहे EMI, उन्हें सरकार दे रही है ब्याज का पैसा वापस

लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा EMI पर मिली छूट (मोरेटोरियम) ने कोरोना महामारी के दौरान लोगों को काफी राहत देने का काम किया। वहीं ऐसे समय पर भी एक बड़ा वर्ग ऐसा भी रहा, जिसने सुविधा का फायदा नहीं उठाया और ईमानदारी से अपनी EMI भरी। वहीं अब सरकार ने उपहार के तौर पर ऐसे लोगों को कैशबैक देने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम का फायदा 2 करोड़ तक का लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को होगा।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार (24 अक्टूबर, 2020) को कहा कि अगर किसी कर्जदार ने लोन मोरेटोरियम के दौरान लगातार किस्त चुकाई है तो उसे बैंक से अनुग्रह राशि (Ex Gratia) या कैशबैक मिलेगा। 2 करोड़ रुपए तक का कर्ज लेने वाले छोटे उद्यमी या व्यक्तियों को इसका फायदा मिलेगा। बता दें कि सरकार ने 2 करोड़ तक के लोन पर मोरेटोरियम के दौरान ब्याज पर ब्याज में छूट की घोषणा की थी।

यानी, सरकार की इस स्कीम के तहत, 1 मार्च 2020 से 31 अगस्त 2020 तक की लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर ग्राहकों से ब्याज पर वसूला गया ब्याज वापस किया जाएगा। 

इस स्कीम के तहत कर्जदारों को छह महीने के सिंपल लोन इंट्रेस्ट में डिफरेंस का लाभ मिलेगा। ऋणदाताओं में बैंक, सरकारी बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रोफाइनेंस संस्थान शामिल हैं। साथ ही 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज पर छह महीने के लिए दी गई मोहलत के दौरान संचयी ब्याज यानी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर राशि का भुगतान सरकार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आरबीआई की तरफ से कर्ज लौटाने को लेकर दी गई मोहलत के तहत 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज पर ब्याज छूट योजना को जल्द से जल्द लागू करने का निर्देश दिया था। उसके बाद यह दिशानिर्देश आया है।

वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार कर्जदार संबंधित ऋण खाते पर योजना का लाभ ले सकते हैं। यह लाभ एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 की अवधि के लिए है। इसके अनुसार जिन कर्जदारों के ऊपर 29 फरवरी तक कुल ऋण 2 करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वे योजना का लाभ उठाने के लिये पात्र होंगे।

इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन कर्ज, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), टिकाऊ उपभोक्ता सामन के लिए लिया गया कर्ज और खपत के लिये लिया ऋण आएगा।

दिशानिर्देश के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थान पात्र कर्जदारों के ऋण खाते में मोहलत अवधि के दौरान ब्याज के ऊपर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर की राशि डालेंगे। यह उन सभी पात्र कर्जदाताओं के लिये है, जिन्होंने आरबीआई द्वारा 27 मार्च, 2020 को घोषित योजना के तहत पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से कर्ज लैटाने को लेकर दी गयी छूट का लाभ उठाया।

वित्तीय संस्थान संबंधित कर्जदार के खाते में रकम डालकर उसके भुगतान के लिए केंद्र सरकार से दावा करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी खजाने पर इस योजना के क्रियान्वयन में 6,500 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

FATF में Pak के साथ 39 में से मात्र 1 देश, खलीफा बनने के ख्वाब में दिया समर्थन

‘फायनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)’ में 39 में से मात्र एक देश ने पाकिस्तान का समर्थन किया है और वो है तुर्की, जो इस्लामी एकजुटता की बातें करते हुए नया खलीफा बनना चाहता है। एक तुर्की ने ही पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ से हटाए जाने के लिए वोट किया, बाकी सब ने विरोध किया। हालाँकि, पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना रहेगा। ये एक नया ‘इस्लामी कट्टरपंथी नेक्सस’ की ओर इशारा कर रहा है, जिसका मसीहा तुर्की होगा।

रेसेप तैयप एर्दोगान के नेतृत्व वाला तुर्की अब पाकिस्तान के साथ मिल कर इस्लामी मुल्कों का एक नया समूह बनाने का प्रयास कर रहा है, जो सऊदी अरब पर निर्भर नहीं होगा। ओटोमन साम्राज्य की तर्ज पर नई इस्लामी धुरी बनाने में जुटे एर्दोगान ने अजरबैजान की भी युद्ध में मदद की और उसके पुराने दुश्मन अर्मेनिया के खिलाफ हथियार उठाने के लिए उसे भड़काया। हालाँकि, रूस ने बीच में पड़ के एक बड़े युद्ध को फ़िलहाल के लिए रोक लिया।

तुर्की के अलावा बाकी सारे देश चाहते थे कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना रहे, क्योंकि वो कई मानकों पर खड़ा नहीं उतरा था और न ही उसने तय मानकों को पूरा करने के लिए कोई प्रयास किया। अब फ़रवरी 2021 में इसकी समीक्षा होनी है। उसने कुल 27 में से 21 मानकों में ही किसी तरह खुद को सही साबित किया। पेरिस में अक्टूबर 21-23 को ये बैठक हुई। हालाँकि, इससे पहले ‘इंटरनेशनल कोऑपरेशन रिव्यू ग्रुप (ICRG)’ की भी बैठक हुई थी

इस बैठक में तकनीकी रूप से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर करने के लिए सिर्फ सऊदी अरब, तुर्की और चीन ने उसका समर्थन किया था। लेकिन, इसके बाद हुई FATF की पूर्ण बैठक में पाकिस्तान का एक ही साथी रह गया और वो है तुर्की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आशंका है कि तुर्की दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा, तनाव और अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है और इसमें पाकिस्तान उसका साथ दे रहा है।

पाकिस्तान को ISI के जरिए भारत और अफगानिस्तान में आतंकवाद फैलाने का अनुभव है, जिसका सहारा तुर्की ले रहा है। साथ ही वो ईरान और सीरिया से लेकर लीबिया और अजरबैजान में भी अशांति फैलाने के लिए जी-जान से लगा हुआ है। वो पूरे मध्य-पूर्व में अपना दबदबा चाहता है। तुर्की सबसे झगड़ा भी मोल ले रहा है। सीरिया और अजरबैजान के मुद्दे पर वो रूस से भिड़ा हुआ है। शरणार्थियों के मुद्दे पर यूरोप से उसकी नहीं बनती।

और अब जम्मू कश्मीर के मामलों पर उलटे-सीधे बयान देकर वो भारत के साथ दुश्मनी बढ़ा रहा है। यहाँ तक कि उसे अमेरिका से भी अपने सम्बन्ध खराब कर लिए हैं, क्योंकि वो भी रूस से हथियार व तकनीक ख़रीदता है। चीन आज दुनिया में बड़ी व्यापारिक शक्ति है लेकिन उसके बीजिंग से भी रिश्ते अच्छे नहीं हैं। पाकिस्तान रक्षा सहयोग के लिए अब तुर्की पर निर्भर होता जा रहा है। साथ ही वो जम्मू कश्मीर व इस्लाम के मामले में समान राग अलापते हैं।

FATF ने इस बात को माना कि पाकिस्तान लश्कर-ए तैयबा के संस्थापक आतंकी हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े सरगना मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा।साथ ही आतंकी जकीउर रहमान लखवी के संगठन पर भी उसने कोई कार्रवाई नहीं की। इन तीनों को यूएन ने आतंकी घोषित कर रखा है। भारत ने भी क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरना शुरू कर दिया है।

हाल ही में अभिनेता आमिर खान भी अपने तुर्की दौरे को लेकर चर्चे में आए थे। भारत विरोध का गढ़ बन रहे तुर्की में वे अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग कर रहे थे। तुर्की की प्रथम महिला एमिनी एर्दोगन से उन्होंने मुलाकात भी की थी। तुर्की की मीडिया का कहना था कि आमिर खान वहाँ की तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सिनेमा के लिए एडवांस फ़ैसिलिटी और वर्कफोर्स कैपेसिटी से खुश हैं। इसे लेकर भारत में उनका विरोध भी हुआ था।

Alt News: ‘आसमानी गणित’ के सहारे COVID-19 पर भारत की बेहतर स्थिति को फर्जी साबित करने की बचकाना कोशिश

कई महीनों तक COVID-19 के ‘केरल मॉडल’ का महिमामंडन करते रहने के बावजूद उसे सफल साबित करने में नाकामयाब रहे फैक्ट चेक के नाम पर मजहबी विचारधारा का प्रचार करने वाली स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ को नया सरदर्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई स्पीच ने दिया है। ऑल्टन्यूज़ ने बेहद घटिया हिंदी में दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनिंदा आँकड़ों के जरिए COVID-19 महामारी के मामले में भारत की स्थिति को बेहतर बताने का प्रयास किया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 20 अक्टूबर को ही त्योहारों से पहले कोरोना वायरस के बारे में चेतावनी जारी करते हुए अपने भाषण में कहा था कि भारत में कोरोना वायरस के कारण मृत्यु दर प्रति 10 लाख लोगों पर 83 है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राज़ील में ये आँकड़ा 600 से ऊपर है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अब तक 10 करोड़ के करीब परिक्षण किए हैं और भारत अन्य देशों के मुकाबले कोरोना वायरस महामारी से बचने में कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

ऑल्टन्यूज़ का दर्द है कि भाषण के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही आँकड़ों को रखा और अपने इस कथित फैक्ट चेक में कहा है कि उन्होंने इन आँकड़ों की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका या फिर यूनाइटेड किंगडम और ब्राजील के साथ क्यों की गई?

यह बात और है कि खुद ऑल्टन्यूज़ अपने इसी गंदी हिंदी में लिखे शब्दों के संग्रह, जिसे वो ‘फैक्ट चेक’ का नाम देते हैं, में इन्हीं देशों से भारत की तुलना करते हुए भ्रम को स्थापित करने का बचकाना और विफल प्रयास करते हैं। वास्तव में, ऑल्टन्यूज़ के इस फैक्ट चेक का पहला दोष तो यही है।

ऑल्टन्यूज़ ने पहले खुद ही आपत्ति जताई कि ब्रिटेन और अमेरिका से तुलना क्यों की गई ?

‘फैक्ट चेक’ करने के नाम पर ऑल्टन्यूज़ ने यह तुलना अमेरिका और ब्रिटेन के साथ सिर्फ इस कारण की क्योंकि भारत विश्व में कोरोना परीक्षण करने वाले देशों में दूसरे स्थान पर है। लेकिन यह दिखाने के लिए, कि भारत में कम परीक्षण हुए हैं, ऑल्टन्यूज़ ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ भारत की तुलना करना जरुरी समझा।

इसी रिपोर्ट में खुद ऑल्टन्यूज़ ने ही अमेरिका और ब्रिटेन से तुलना कर ऑल्टन्यूज़ ने थूककर चाटने का काम किया है

ऑल्टन्यूज़ ने मोदी सरकार के आँकड़ों को सेलेक्टिव बताया है। जबकि भारत में कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु के मामले में प्रति मिलियन में होने वाली मौत के मामले में भारत विश्व या अमेरिका, या फिर ब्रिटेन के औसत से कहीं बेहतर दशा में है।

इसलिए, ऑल्टन्यूज़ ने इसकी तुलना एशिया से की, जहाँ कि इस वायरस के जनक राष्ट्र चीन ने वायरस से जुड़ी लगभग हर जानकारी पर भ्रम फैलाया है और झूठ बोलते हुए अपने आँकड़ों को दुरुस्त बताने का काम करता आया है।

इसके अलावा, COVID-19 में भारत की स्थिति दिखाते हुए, प्रोपेगेंडा फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ ने केस फेटलिटी रेट (CFR) यानी, मृत्यु दर की तुलना नहीं की, क्योंकि भारत में मृत्यु दर भी विश्व के औसत, एशिया के औसत, ब्रिटेन और अमेरिका के औसत से कम है। यही तथ्य पीएम मोदी ने भी अपने उस भाषण में रखे, जिसका फैक्ट चेक करने ऑल्टन्यूज़ निकला था। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि भारत की रिकवरी दर अधिक और मृत्यु दर कम है।

लेकिन अगर ऑल्टन्यूज़ इन आँकड़ों को रखता तो यह उनके अजेंडा के विपरीत होता। जबकि ऑल्टन्यूज़ को तो यह साबित करना है कि भारत कोरोना वायरस महामारी से निपटने में असफल रहा है।

ऑल्टन्यूज़ के इस फर्जीवाड़े को अंकुर सिंह ने सामने रखा है –

इस कथित फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ की गणित के खेल को अगर समान्य शब्दों में समझना चाहें तो ऑल्टन्यूज़ ने भारत की प्रति मिलियन मृत्यु दर की तुलना एशिया से और प्रति मिलियन जाँच दर की तुलना अमेरिका और ब्रिटेन के साथ की है। ऐसा करने के पीछे ऑल्टन्यूज़ के क्या कारण थे, उन्होंने इसके लिए किस ‘डाटा इंटेलिजेंस यूनिट’ की सहायता ली और क्यों ली, यह कॉन्ग्रेस पोषित फैक्ट चेकर्स का मसीहा ही बेहतर जानता होगा।

ऑल्टन्यूज़ ने इन सभी फर्जीवाड़ों और आसमानी गणित के सहारे ऑल्टन्यूज़ ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी ने चुनिंदा आँकड़ों के माध्यम से ये दिखाने की कोशिश की है कि अन्य विकसित देशों के मुकाबले भारत कोरोना वायरस महामारी से लड़ने में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

‘Q. कश्मीर किस देश का हिस्सा है? A. कश्मीर चीन में स्थित है’ – अमेज़न के Alexa का जवाब, सोशल मीडिया पर गुस्सा

हाल ही में ट्विटर ने भारतीय सीमा के अंतर्गत आने वाले लेह और लद्दाख को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का हिस्सा बताया था। इसी तरह अमेज़न की आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्विस एलेक्सा (Alexa) ने भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। 

एक ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि एलेक्सा ने कश्मीर को चीन का हिस्सा बताया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद टेक कंपनी अमेज़न विवादों से घिर गई। ट्विटर यूज़र ने कहा, “एलेक्सा कश्मीर किस देश का हिस्सा है? इसके जवाब में AI प्रायोजित एलेक्सा ने कहा, “यह आपके सवाल का जवाब हो सकता है, कश्मीर चीन में स्थित है।” 

इसके बाद एक और ट्विटर यूज़र ने कश्मीर की यथास्थिति के बारे में जानने का प्रयास किया। इस बार भी एलेक्सा का जवाब लगभग वैसा ही था, “यह आपके सवाल का जवाब हो सकता है, कश्मीर चीन में स्थित है।” 

ऑपइंडिया ने खुद एलेक्सा के बारे में सोशल मीडिया पर किए गए इन दावों की पुष्टि की। यह गलती एलेक्सा के हिन्दी संस्करण तक ही सीमित है। जब यही सवाल अंग्रेज़ी भाषा में पूछा जाता है तब एलेक्सा का जवाब होता है, “कश्मीर उत्तर पूर्वी भारत का हिस्सा है।” 

कैसे काम करता है एलेक्सा?   

रिपोर्ट्स की मानें तो एलेक्सा मशीन लर्निंग अल्गोरिदम (machine learning algorithm) और दर्जनों ‘सवाल-जवाब तकनीक’ की मदद से लोगों के सवाल का जवाब देता है। AI प्रायोजित वर्चुअल सहयोगी एलेक्सा डेटा के आधार पर मान्य जानकारी देता है, जिसे सवालों के जवाब देने के लिए बेहतर प्रक्रिया माना जाता है। उल्लेखनीय बात है कि अमेज़न कोई ब्राउज़र नहीं है, इसलिए उसके पास ऐसे मामलों पर सीमित जानकारी होनी चाहिए। एलेक्सा माइक्रोसॉफ्ट के सर्च इंजन बिंग (Bing) का इस्तेमाल करता है और इनकी साझेदारी कुछ ‘पूरक वस्तुओं’ तक ही सीमित है। 

साल 2019 में अमेज़न ने एलेक्सा के लिए एक नया फ़ीचर जारी किया, जिसका नाम था ‘एलेक्सा एन्सर्स’ जिससे लोगों को उसके पास मौजूद जानकारी मिल पाए। विश्वसनीय सूत्रों की जगह अन्य यूज़र्स द्वारा दिए जाने वाले इस तरह के जवाबों पर वैधानिक चेतावनी होनी चाहिए। जिस तरह यूट्यूब और रेडिट पर मौजूद इस तरह का ‘यूज़र बेस्ड कंटेंट’ फ़ेक न्यूज़ और राजनीतिक एजेंडे से भरा होता है, ठीक वैसे ही यह भी सोचने वाली बात है कि एलेक्सा की जानकारी किस स्तर तक तोड़-मरोड़ कर पेश की गई है। 

हालाँकि अमेज़न अपने इस नए फीचर को लेकर शुरुआत से ही बेहद आशावादी रहा है। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए अमेज़न ने राजनीतिक सवालों को लेकर जाँच सतर्कता बरती और इसमें अपवोट और डाउनवोट प्रक्रिया शामिल की। इसके बावजूद एलेक्सा कश्मीर के मूल स्थान को लेकर अपनी गलती दूर नहीं कर पाया। इसकी एक बड़ी वजह यह हो सकती है कि उनके उच्च गुणवत्ता वाले विश्वसनीय सूत्रों में कोई परेशानी हो। 

सोशल मीडिया पर विरोध के बाद अमेज़न की सफाई 

मामले पर विवाद बढ़ने के बाद अमेज़न ने इस मुद्दे को लेकर ट्विटर पर सफाई पेश की, 

ट्वीट में लिखा था, “मामला हमारी जानकारी में लेकर आने के लिए धन्यवाद। हमने इस मामले की जानकारी संबंधित समूह को दे दी है, जिससे वह इस पर आगे शोध कर सकें। भविष्य में किसी भी तरह की मदद के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। हम आपके लिए हमेशा उपलब्ध हैं।” 

गूगल असिसटेंट बताता है कश्मीर की सटीक स्थिति

इसके बाद एक ट्विटर यूज़र ने ठीक यही सवाल गूगल नेस्ट मिनी से किया, जो गूगल असिसटेंट की मदद से जवाब देता है। यूज़र ने पूछा, “ओके गूगल कश्मीर किस देश में स्थित है?” गूगल असिसटेंट ने जवाब दिया, “विकिपीडिया के मुताबिक़ 5 अगस्त 2019 तक जम्मू कश्मीर भारत का राज्य था। फिर इसे दो केंद्र शासित राज्यों में बाँट दिया गया, जम्मू कश्मीर और लद्दाख।” 

गूगल की प्रतिक्रिया एलेक्सा के जवाब की तुलना में काफी विरोधाभास पैदा करती है। एलेक्सा के विपरीत गूगल एक ऐसा सर्च इंजन है, जो करोड़ों वेब पेज की मदद लेता है। इसका मतलब यह हुआ कि गूगल ने यह जवाब उन तमाम वेब पेज से निकाल कर अपनी साईट पर रखा होगा। 

हालाँकि गूगल ने इस सवाल का जवाब सही दिया लेकिन सावधानी के लिए इसकी जाँच जरूर की जानी चाहिए क्योंकि इसका स्रोत विकिपीडिया है। विकिपीडिया ने इस सवाल का जवाब भले सही दिया है लेकिन इस तरह की तमाम घटनाएँ सामने आई हैं, जब एक ऑनलाइन यूज़र ने भ्रामक जानकारी साझा की और कभी-कभी तो पूरी तरह झूठी जानकारी तक साझा की। 

ट्विटर ने लद्दाख को बताया था चीन का हिस्सा

ट्विटर पर लाइव सेशन करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक नितिन ए गोखले को यह पता चला था कि ट्विटर ने भारतीय सीमा के तहत आने वाले लद्दाख को चीन का हिस्सा बताया था। स्ट्राट न्यूज़ ग्लोबल के संस्थापक गोखले ने कहा कि उन्होंने अपनी लोकेशन बतौर ‘हॉल ऑफ़ फेम लेह’ स्थापित की है। वीडियो के स्क्रीनशॉट में लिखा था, “नितिन गोखले लाइव थे, चीन स्थित जम्मू कश्मीर से।” 

ट्विटर की इस हरकत पर राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक ने कहा कि भारत सरकार को इस मामले को लेकर ट्विटर पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने यूज़र्स ने भी अनुरोध किया कि वह ट्विटर से इस बात की शिकायत दर्ज कराएँ, जिससे वह अपनी इस गलती में सुधार करे। बड़े पैमाने पर विरोध होने के बाद ट्विटर ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा था कि यह एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ था। 

मंगलवार को नितिन ए गोखले ने एक बार फिर लाइव सेशन किया था लेकिन इस बार लेह स्थित कुशोक बकुला रिम्पोची हवाई अड्डे से। हैरान कर देने वाली बात थी कि ट्विटर ने कथित तौर पर तकनीकी गड़बड़ी में सुधार नहीं किया था जबकि ट्विटर को इस बात का अंदाज़ा था कि इस मुद्दे पर असल हालात कितने संवेदनशील हैं। हालाँकि ट्विटर ने लेह को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना में शामिल नहीं किया बल्कि इस क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश, जम्मू कश्मीर का हिस्सा बताया।     

‘कमलनाथ लुच्चा-लफंगा, सड़क किनारे बैठे शराबी की भाषा बोलते हैं’ – इमरती देवी ने किया पलटवार

हाल ही में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री इमरती देवी के लिए ‘आइटम’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इमरती देवी ने कमलनाथ के इस बयान का जवाब दिया है। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कमलनाथ पर टिप्पणी की है। भाषण के दौरान इमरती देवी ने कहा कि जिस तरह की भाषा कमलनाथ ने इस्तेमाल की, ऐसी भाषा सड़क किनारे बैठने वाले शराबी इस्तेमाल करते हैं। 

मध्य प्रदेश की 28 सीट पर होने वाले उपचुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस लगातार जनसभाएँ कर रही हैं। इस कड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इमरती देवी ने यह बयान दिया। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “अगर पूर्व मुख्यमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं तो मैं भी बहुत कुछ कह सकती हूँ। कुछ इस तरह के लोग होते हैं शराबी, जो सड़क किनारे बैठे रहते हैं और लड़कियों पर टिप्पणी करते हैं कि वह देखो ‘आइटम निकल रही।’ इस तरह की भाषा का उपयोग करने के बाद कमलनाथ भी लुच्चे-लफंगे बन गए।” 

इसके बाद इमरती देवी ने कहा कि उन्हें (कमलनाथ) को शर्म नहीं आई कि हम नेता हैं, मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं, फिर भी वह हमारे लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “माई के दिन (नवरात्र) चल रहे थे, भगवती के दिन चल रहे थे और भगवती के सामने इस तरह की भाषा बोली तो आप देख लीजिएगा मध्य प्रदेश के भीतर इस जीवन में कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं आएगी। 28 की 28 सीट भाजपा सरकार की होगी, भाजपा ही चुनाव जीतेगी और जनता को भाजपा के साथ ही रहना है, अपनी नेता इमरती देवी के साथ रहना है।”

दरअसल मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने इमरती देवी पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद इस मुद्दे पर विवाद शुरू हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा था, “आप तो उसे मुझसे ज्यादा पहचानते हैं, आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है।” (इतना कहने के बाद श्री कमलनाथ ने जनता की तरफ देखा, खिलखिला कर हँसे, फिर दोहराया ये क्या आइटम है, और मुस्कुराए, उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और ठहाके लगाए।)  

बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा था, “सुरेंद्र राजेश हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूँ, आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, “यह क्या आइटम है।”

आपको बता दें कि इमरती देवी, उन पूर्व विधायकों में से एक हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है। 

तमाम विवाद के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने इस बयान पर माफ़ी माँगना तो दूर बल्कि इसे सही करार दिया। उन्होंने अपनी तरफ से जारी की गई सफाई में कहा था, “हम सब आइटम हैं। इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं है। हम आइटम नंबर की तरह चिह्नित किए जाते हैं। बेरोजगारी जैसे मुख्य मुद्दे से भटकाने के लिए शब्दों को गलत तरह से पेश किया।”

कितना आवश्यक है माँ दुर्गा को हर नवरात्र में सैनिटरी पैड पर उकेरना?

देशभर में आज यानी, 24 अक्टूबर के दिन शारदीय नवरात्रि पर माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना हो रही है। हर घर में अष्टमी की पूजा और व्रत रखा जा रहा है। ऐसे में देश के कुछ ऐसे गिरोहों का सक्रीय होना भी स्वाभाविक है जो सालभर हिन्दू घृणा अफीम खाकर सोए रहते हैं और हिन्दू त्योहारों पर उनमें अपनी कुत्सित मानसिकता का योगदान देने के उद्देश्य से पुनर्जीवित हो जाते हैं।

ऐसे ही उदाहरण दुर्गा पूजा के अवसर भी लगभग हर साल ही देखने को मिलते हैं। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ग्राफिक चित्र भी देखा जा सकता है, जिसमें दुर्गा माता के चित्र को महिलाओं द्वारा मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सैनिटरी पैड पर उकेरा गया है।

ऐसा ही एक पोस्टर पीसी दास नाम के एक युवक ने बांग्ला में लिखे एक संदेश के साथ फेसबुक पपर शेयर किया है। पीसी दास ने इसमें कैप्शन लिखा है, “माँ दुर्गा भी एक माँ हैं। वो इस विश्व की माँ हैं। यह चित्र ड्रॉ कर के सारे संसार की माताओं को सम्मानित करने का प्रयास किया है।”

ऐसे घटिया नैरेटिव को दिशा देने वालों में पीसी दास अकेला नहीं है। ऐसे कई अन्य उदाहरण मौजूद हैं, जो बेहद शालीन नजर आकर अपनी विचारधारा के जहर को सामान्य बना देने का हर सम्भव प्रयास करते हैं –

वास्तव में देखा जाए तो ना ही सैनिटरी पैड में कोई विवाद जैसी बात है और ना ही दुर्गा माता को महिलाओं की दिनचर्या से जोड़ने के इस संदेश में। समस्या उस विषैले विचार से है, जो ऐसे ख़ास अवसरों में ही ख़ास तरीके से हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ नैरेटिव तैयार करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही, इस चित्र में समस्या का मूल माँ दुर्गा को हर त्योहार पर सिर्फ और सिर्फ पीरियड्स के रक्त के साथ जोड़कर प्रदर्शित कर उनके व्यक्तित्व को समेटने का प्रयास करना है।

दुर्गा को सनातन धर्म में बेशक माँ, बेटी और बहन का दर्जा दिया है और इसी वजह से उनके स्वरुप को सिर्फ नवरात्र या फिर दुर्गा पूजा के दिन ही नहीं बल्कि साल के पूरे 365 दिनों ही उन्हें पूजनीय माना गया है। लेकिन हर अवसर पर माँ दुर्गा के अस्तित्व की तुलना या उसके विवरण को महज पीरियड या सैनिटरी पैड में समेट देना इस संस्कृति का हिस्सा नहीं है। साथ ही, यह सरदर्द हिन्दुओं का ही है किवह कब और किस दिन उन्हें किस स्वरुप में पूजते हैं, ना कि किसी निकृष्ट और नास्तिकता का पाखंड करने वाले मजहबी वामपंथी का! वामपंथियों और उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।

निश्चित ही, ऐसे चित्र बनाने वाले कलाकार का प्रयास हिन्दू धर्म के हित में या आस्था के कारण किसी देवी-देवता के प्रति आभार प्रकट करना बिलकुल भी नहीं होता है। उनका प्रयास सिर्फ और सिर्फ एक परम्परा को खंडित करने के लिए समानांतर नैरेटिव स्थापित करने का होता है और इसके लिए कला का सहारा प्रपंचकारी वामपंथी हमेशा से ही लेते ही आए हैं।

हिन्दू धर्म में पीरियड्स या फिर उसके रक्त को यदि अपवित्र माना जाता तो असम में स्थित शक्तिपीठ कामाख्या देवी के मंदिर को वामपंथी क्यों भूल देना चाहते हैं? वह भी तो सनातन संस्कृति का ही अहम् हिस्सा है।

लेकिन बुद्धिपिशाच वामपंथियों के साथ समस्या वास्तव में सिर्फ हिन्दू धर्म या फिर इसकी मान्यताएँ नहीं हैं। ऐसे कुत्सित विचार सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्व की विचारधारा के प्रति कट्टरता और नफरत के परिणामस्वरूप ही जन्म लेते हैं।

ऐसे ही आडंबरों, चित्रों और नारों का इस्तेमाल हर मौके पर किया जाता है। इसी का नतीजा होता है कि हर बलात्कार के मामले में फ़ौरन कह दिया जाता है कि ‘जिस देश में नारी को पूजने की बात करते हैं’, ‘रेपिस्तान’ या फिर ‘कहाँ हैं वो दुर्गा को पूजने वाले’!

यह छोटे-छोटे से कुछ सत्य हैं, हर बार नजरअंदाज करते हुए जिनका सामान्यीकरण कर दिया गया और हम इसके अभ्यस्त होते चले गए। आज कम से कम ऐसे प्रयास करने वालों पर लोग संज्ञान लेने लगे हैं। लोग इन प्रयासों को पहचानने लगे हैं। यही वजह है कि ‘इरोज नाउ’ जैसे दिग्गजों को भी पवित्र नवरात्र के अपमान पर माफ़ी माँगनी पड़ रही है। लेकिन इससे भी बड़ा भय यह है कि इन सबकों को भुला दिया जाता है और अगली बार यही किस्सा किसी नए चेहरे के द्वारा दोहरा दिया जाता है।

भारत का सबसे बड़ा हृदय रोग अस्पताल, मंदिर दर्शन के लिए रोपवे और ‘सूर्योदय योजना’: PM मोदी की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (अक्टूबर 27, 2020) को गुजरात के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक कर के कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए अपने गृह राज्य में 3 बड़ी परियोजनाओं को जनता को सुपुर्द किया। उन्होंने गुजरात के किसानों को ‘सूर्योदय योजना’ का तोहफा दिया। साथ ही जूनागढ़ जिले में गिरनार रोपवे और अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता हृदयरोग संस्थान और शोध केंद्र से संबंद्ध बच्चों के हृदयरोग से संबंधित अस्पताल का उद्घाटन भी किया।

किसानों को रात की बजाए अब सुबह यानी 5 बजे से लेकर रात 9 बजे के दौरान तीन फेज बिजली देने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि गिरनार रोप-वे के शुरू होने से गिरनार पर्वत के ऊपर बने मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 10,000 सीढ़ियाँ नहीं चढ़नी पड़ेंगी। वहीं यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी का 470 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण हो रहा है, जहाँ बिस्तरों की संख्या 450 से बढ़कर 1251 होने वाली है। ये भारत का सबसे बड़ा हृदय रोग अस्पताल होगा।

इस दौरान गुजरात की जनता को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसानों को रात के बजाए जब सुबह, यानी 5 बजे से लेकर रात 9 बजे के दौरान थ्री फेज बिजली मिलेगी, तो ये नया सवेरा ही तो है। उन्होंने गुजरात की विजय रुपानी सरकार को बधाई देते हुए कहा कि बाकी व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बिना, ट्रांसमिशन की बिल्कुल नई कैपेसिटी तैयार करके ये काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अगले 2-3 वर्षों में लगभग साढ़े 3 हज़ार सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों को बिछाने का काम किया जाएगा। साथ ही आने वाले कुछ दिनों तक हज़ार से ज्यादा गाँवों में ये योजना लागू भी हो जाएगी, जिनमें से अधिकतर आदिवासी बाहुल्य इलाकों में हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात ने बिजली के साथ सिंचाई और पीने के पानी के क्षेत्र में भी शानदार काम किया है।

साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि गुजरात में पानी की क्या स्थिति थी। उन्होंने ध्यान दिलाया कि बीते दो दशकों के प्रयासों से आज गुजरात उन गाँवों तक भी पानी पहुँच गया है, जहाँ कोई पहले सोच भी नहीं सकता था। बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, बीते दो दशकों में गुजरात ने आरोग्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है। चाहे वो आधुनिक अस्पतालों का नेटवर्क हो, मेडिकल कॉलेज हों, गाँव-गाँव को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का बहुत बड़ा काम किया गया है। उन्होंने कहा:

“आयुष्मान भारत योजना के तहत गुजरात के 21 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। सस्ती दवाएँ देने वाले सवा 5 सौ से ज्यादा जन औषधि केंद्र गुजरात में खुल चुके हैं। इसमें से लगभग 100 करोड़ रुपए की बचत गुजरात के सामान्य मरीज़ों को भी हुई है। गिरनार पर्वत पर माँ अंबे भी विराजती हैं, गोरखनाथ शिखर भी है, गुरु दत्तात्रेय का शिखर है और जैन मंदिर भी है। यहाँ की सीढ़ियाँ चढ़कर जो शिखर पर पहुँचता है, वो अद्भुत शक्ति और शांति का अनुभव करता है। अब यहाँ विश्व स्तरीय रोप-वे बनने से सबको सुविधा मिलेगी, दर्शन का अवसर मिलेगा। इस नई सुविधा के बाद यहाँ ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु आएँगे, ज्यादा पर्यटक आएँगे। आज जिस रोप-वे की शुरुआत हुई है, वो गुजरात का चौथा रोप-वे है। बनासकाँठा में अंबाजी के दर्शन के लिए, पावागढ़ में, सतपूड़ा में तीन और रोप-वे पहले से काम कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि अगर गिरनार रोप-वे कानूनी उलझनों में नहीं फँसा होता, तो लोगों को इसका लाभ बहुत पहले ही मिलने लग गया होता। उन्होंने इस पर सोच-विचार करने पर बल दिया कि जब लोगों को इतनी बड़ी सुविधा पहुँचाने वाली व्यवस्थाओं का निर्माण, इतने लंबे समय तक अटका रहेगा, तो लोगों का कितना नुकसान होता है। शिवराजपुर बीज को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसे Blue Flag certification मिला है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे स्थलों को विकसित करने पर वहाँ पर्यटक आएँगे और अपने साथ रोजगार के नए अवसर भी लाएँगे। सरदार पटेल स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अब कितना बड़ा टूरिस्ट अट्रेक्शन बन रही है, इस तरफ भी पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया। बता दें कि गिरनार में लगभग 2.13 किलोमीटर की दूरी तय कर लोग रोपवे से मंदिर तक का सफर आठ मिनट में पूरा कर सकते हैं और प्रति घंटे 800 यात्री लाए-जाए जा सकते हैं।

‘ये पत्थर की पूजा है’: दुर्गा पूजा पंडाल में TMC सांसद नुसरत जहाँ के नृत्य व पूजा करने पर भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहाँ ने कोलकाता में दुर्गा पूजा में हिस्सा लिया। उन्होंने सुरुचि संघ दुर्गा पूजा पंडाल में जाकर माता का आशीर्वाद लिया। पश्चिम बंगाल के बसीरहाट से सांसद नुसरत जहाँ ने (शनिवार अक्टूबर 24, 2020) को दुर्गाष्टमी के मौके पर दुर्गा पूजा पंडाल में ‘ढाक’ की ताल पर नृत्य भी किया। वीडियो में उन्हें ‘ढाक’ बजाते हुए और झूमते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, इस्लामी कट्टरवादियों को उनके ऐसा करने से खासी चिढ़ हुई।

सैयद ओमरान हुसैन ने उनकी तस्वीरों पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया, “पैसा, पावर और कुर्सी लोगों से क्या कुछ नहीं कराता!” वहीं एक ट्विटर यूजर ने इसे ‘पत्थर की पूजा‘ करार दिया। वहीं कई लोगों ने उनकी तस्वीरों पर रिप्लाई देते हुए आशंका व्यक्त की कि अब फतवा आता ही होगा। नुसरत जहाँ इससे पहले भी माँ दुर्गा की वेशभूषा में तस्वीरें अपलोड करती रही हैं, जहाँ उन्हें इस्लामी कट्टरवादी गाली भी देते हैं।

इस्लामी कट्टरवादियों को नहीं पसंद आया नुसरत जहाँ का पूजा-पाठ करना

इससे पहले नुसरत जहाँ को सिन्दूर लगाने और परदे में न रहने के कारण भी इस्लामी कट्टरपंथियों की गालियों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। उनके फोटोशूट्स को लेकर उन्हें अक्सर धमकियाँ मिलती रहती हैं। उन्होंने 2019 में कारोबारी निखिल जैन से शादी की थी, जिसके बाद से उन्हें कई बार हिन्दू पर्व-त्योहारों में हिस्सा लेते हुए देखा गया है। सोशल मीडिया पर इसी कारण उन्हें धमकियाँ मिलती हैं।

इससे पहले सितंबर 17, 2020 को अभिनेत्री नुसरत जहाँ ने महालया के मौके पर इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वे देवी दुर्गा का रूप धारण किए हुए नजर आ रही थीं। मोहम्मद नटराज नाम के एक यूजर को उनकी पोशाक पसंद नहीं आई। उसने अपना गुस्सा दिखाते हुए लिखा था, “तुम मजहब के नाम पर एक धब्बा हो। हम ऐसी पोस्ट नहीं देखना चाहते हैं।” वहीं मोहिसुर ने पूछा,”क्या तुम जानते हो कि तुम क्या कर रही हो।” उन्हें मौत की धमकी भी मिली थी।

महबूबा मुफ्ती ने किया तिरंगे का अपमान: पुलिस कमिश्नर को भेजी गई शिकायत, हो रही गिरफ्तारी की माँग

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के विवादित बयान को लेकर हंगामा मचा है। महबूबा मुफ्ती ने देश के तिरंगे झंडे को लेकर विवादित बयान दिया है, जिसकी बीजेपी के साथ-साथ कॉन्ग्रेस ने भी निंदा की है। अब तिरंगा न उठाने का विवादित बयान देने वाली महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एफआईआर की माँग को लेकर पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल की ओर से पुलिस कमिश्नर को भेजी शिकायत में कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काया है। उनके खिलाफ नेशनल ऑनर एक्ट और  धारा 121, 151, 153A, 295, 298, 504 और 505 के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए।

पत्र में जिंदल ने कहा है कि उनकी टिप्पणी – ‘डाकुओं ने हमारा झंडा छीन लिया है’ लोगों को उकसा रही है और इससे नफरत एवं अशांति पैदा करने की स्पष्ट मंशा दिखती है। इसके अतिरिक्त पत्र में महबूबा मुफ्ती का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उनका इरादा यह दिखाने का है कि जम्मू कश्मीर भारतीय क्षेत्र नहीं है, इसका अलग अस्तित्व है। जिंदल द्वारा लिखे गए पत्र में दिल्ली पुलिस कमिश्नर से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

इधर जम्मू कश्मीर भाजपा ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के ‘देशद्रोही’ बयान के लिए उनकी गिरफ्तारी की माँग की। भाजपा ने कहा कि ‘धरती की कोई ताकत’ वह झंडा फिर से नहीं फहरा सकती और अनुच्छेद 370 को वापस नहीं ला सकती। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना ने संवाददाताओं से कहा, “मैं उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से अनुरोध करता हूँ कि वह महबूबा मुफ्ती के देशद्रोही बयान का संज्ञान लें और उन्हें सलाखों के पीछे डालें।”

उन्होंने कहा, “हम अपने ध्वज, देश और मातृभूमि के लिए अपने खून की हर बूँद का बलिदान करेंगे। जम्मू-कश्मीर हमारे देश का एक अभिन्न अंग है, इसलिए वहाँ केवल एक ही झंडा फहराया जा सकता है और वह है राष्ट्रीय ध्वज।”

रवींद्र रैना ने कहा, “मैं महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को चेतावनी देता हूँ कि आप लोग कश्मीर की जनता को भड़काइए मत। हम किसी को भी शांति और भाईचारे को खत्म करने की इजाजत नहीं देंगे। अगर कुछ भी गलत हुआ तो वो इसका परिणाम भुगतेंगी।” भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यदि कोई “कश्मीरी नेता भारत में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो वे पाकिस्तान और चीन जा सकते हैं।”

वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी महबूबा मुफ्ती के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति (JKPCC) ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा तिरंगे झंडे को लेकर दिए गए बयान की शुक्रवार को कड़ी निंदा की और कहा कि यह स्वीकार करने योग्य नहीं है। इससे लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं।

जेकेपीसीसी के अध्यक्ष रवींद्र शर्मा ने कहा, “ऐसे बयान किसी भी समाज में बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं और अस्वीकार्य हैं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश के सम्मान का प्रतीक है। शर्मा ने कहा, “उन्हें (महबूबा) इस तरह के अपमानजनक बयानों से बचना चाहिए।”

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

14 महीने तक हिरासत में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुई महबूबा मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

कोरोना के इलाज के लिए Oxford यूनिवर्सिटी ने स्वामीनारायण मंदिर से मिलाया हाथ, बोला धन्यवाद

यूनाइटेड किंगडम (UK) के सबसे बड़े स्वामीनारायण मंदिर के साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाथ मिलाया है, ताकि कोरोना वायरस के इलाज के लिए चल रहे ट्रायल और अन्य ट्रीटमेंट माध्यमों को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके। खासकर ब्रिटिश-भारतीय समुदाय के लिए ऐसा किया गया है। श्री स्वामीनारायण मंदिर (नास्डेन टेम्पल) लन्दन के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है, जिसकी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को मदद की ज़रूरत पड़ी।

ऑनलाइन माध्यम से काफी लोग इस मंदिर से जुड़े हुए हैं और वो मंदिर के संतों के उपदेशों को सुनते हैं। अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कहने पर स्वामीनारायण मंदिर ने कोरोना ट्रायल को लेकर चल रही प्रक्रिया और उसे लेकर हुए अध्ययन से सम्बंधित विवरणों से अनुयायियों को अवगत कराया। सन्देश दिया गया कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण हैं, वो ऑनलाइन भी इसके इलाज के लिए जारी ट्रायल में शामिल हो सकते हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘नफ़ील्ड डिपार्टमेंट ऑफ प्राइमरी हेल्थ केयर साइंसेज’ के प्रोफेसर और वैक्सीन ट्रायल के को-लीड क्रिश बटलर ने कहा कि श्री स्वामीनारायण मंदिर द्वारा देश स्तर पर चल रहे इस फ्लैगशिप हेल्थ केयर ट्रायल को कई समुदायों, परिवारों और व्यक्तियों तक पहुँचाया है, जो कि एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने में आसानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि ये ‘प्रिंसिपल ट्रायल’ पूरी तरह डेमोक्रेटिक है और ब्रिटेन में रह रहे अल्पसंख्यक एथनिक समुदाय के लोग इस संक्रमण से काफी बीमार हो जाते हैं, इसीलिए ट्रायल में उन्हें शामिल करना खासा आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारतीयों और यूके की जनसंख्या के अन्य लोगों को शामिल करने से ये ट्रायल और पुष्ट होगा। ट्रायल में शामिल वैज्ञानिकों ने इसके लिए स्वामीनारायण मंदिर का धन्यवाद दिया है।

इस प्रिंसिपल ट्रायल को ‘यूके रिसर्च एंड इनोवेशन (UKRI)’ ने फंड्स उपलब्ध कराए हैं। साथ ही यूके सरकार ने भी अपने विभिन्न विभागों की तरफ से फंड्स उपलब्ध कराए हैं। इसके लिए अब तक 1300 लोगों को तैयार किया गया है, जो इस ट्रायल का हिंसा बनेंगे। इसका उद्देश्य है कि जिन लोगों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है, उनके लिए बेहतर इलाज सुनिश्चित की जाए। बिना अस्पताल में भर्ती हुए इलाज के माध्यमों पर भी खोज चल रही है।

बता दें कि कोरोना वायरस की आपदा के बीच भारत के सारे मंदिर और मठ भी एक ही ध्येय लेकर चले हैं और वो है जनसेवा, यानी राहत-कार्य। पिछले कुछ दिनों में सभी छटे-बड़े मंदिरों ने जनसेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिससे हिन्दू धर्म को गाली देने वाले बेनकाब हो गए। वहीं इसके उलट दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद ने दान देना तो दूर, उल्टा लॉकडाउन का उल्लंघन कर पूरे देश में महामारी फैला दी।