Home Blog Page 4374

24 घंटे में रिपब्लिक TV के दिल्ली-नोएडा के पत्रकारों को मुंबई के पुलिस थाने में हाजिर होने का आदेश

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ़ अर्नब गोस्वामी द्वारा जारी किए गए बयान में ऐसा कहा गया है कि किस तरह नहीं झुकने की वजह से उनके समाचार चैनल पर अत्याचार जारी है। इसके बाद उन्होंने यह भी लिखा कि मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों को घेरने की रफ़्तार दोगुनी कर दी है। 

अर्नब गोस्वामी के बयान में इस बात का उल्लेख था कि दिल्ली, नोएडा और मुंबई में मौजूद उनके पत्रकारों को 24 घंटे के नोटिस पर बुलाया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे पत्रकार, जो कोरोना वायरस से ठीक हुए हैं उन्हें भी मुंबई पुलिस ने आदेश दिया है कि वह यात्रा करके आएँ और थाने में पेश हों। 

अर्नब गोस्वामी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “उन्होंने (परमबीर सिंह) अपने पुलिस वालों को आदेश दिया है कि वह हर तरह की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। फ़ेक न्यूज़ की मदद लेकर चैनल को धमकाया जा रहा है। जाँच के दौरान उनसे आवाज़ नीचे करने के लिए कहा जाता है, अन्यथा उन पर झूठे मामले दर्ज किए जा सकते हैं। वह हमें तोड़ना चाहते हैं, इतना ही नहीं रिपब्लिक के पत्रकारों से पूछताछ में शामिल कई लोगों में एक शिव सेना का नेता है। उस नेता पर फिरौती के अनेक मामले दर्ज हैं।” 

इसके बाद उन्होंने कहा, “हमारे पत्रकारों ने इस लड़ाई में बने रहने का संकल्प लिया है और उनका नेटवर्क यह जीतेगी। मेरे लिए यह हैरानी की बात है कि महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने 1922 के ब्रिटिश नियम का इस्तेमाल करते हुए यह कार्यवाई की।” महाराष्ट्र सरकार के इस तानाशाही रवैये को मद्देनज़र रखते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि वह स्वनिर्मित मीडिया उद्यमी हैं, इसलिए वह मुंबई में रह कर लड़ाई लड़ेंगे। 

अंत में अर्नब गोस्वामी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह और महाराष्ट्र की उद्धव सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नाइंसाफी की इस लड़ाई में मुंबई ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोग उनके साथ हैं। 

मुंबई पुलिस और रिपब्लिक टीवी के बीच तकरार 

हाल ही में मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी की पूरी एडिटोरियल टीम के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने रिपब्लिक टीवी पर मुंबई पुलिस की मानहानि और उनके लिए असंतोष जताने का आरोप लगाया था। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक नेटवर्क को एक और नोटिस भेजा था, जिसमें उन्होंने वहाँ काम करने वाले हर कर्मचारी की जानकारी और लेन-देन से जुड़ी हर तरह की जानकारी माँगी थी।

21 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एग्जीक्यूटिव एडिटर निरंजन नारायणस्वामी से लगभग 9 घंटे की पूछताछ की थी। इसके अलावा उन्हें हंसा रिपोर्ट का सूत्र न बताने के लिए बार-बार आजीवन कारावास की धमकी देकर डराया जा रहा था। 

मुंबई पुलिस ने एक प्रेस वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रिपब्लिक टीवी टीआरपी में छेड़छाड़ करके घोटाला करता है जबकि खुद मुंबई पुलिस की एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं था। महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय में यह बात स्वीकार कर ली है कि अर्नब गोस्वामी और उनका समाचार समूह टीआरपी घोटाला मामले में आरोपित नहीं है।

रिपब्लिक टीवी ने मुंबई कमिश्नर परमबीर सिंह को झूठे और आधारविहीन आरोप लगाने के लिए 200 करोड़ के मानहानि का नोटिस भेजा। पालघर में साधुओं की लिंचिंग पर रिपोर्टिंग की घटना के बाद से ही मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक नेटवर्क के पीछे पड़ी है।    

‘OTT प्लेटफॉर्म सेल्फ-रेग्युलेशन की अच्छी व्यवस्था करे, फेक न्यूज पर PIB अच्छा कर रही है’ – प्रकाश जावड़ेकर

केंद्रीय मंत्री (पर्यावरण, सूचना एवं प्रसारण, भारी उद्योग) प्रकाश जावड़ेकर ने ऑपइंडिया को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर अपनी बात काफी मुखरता के साथ रखी। इस दौरान उन्होंने इंटरनेट सामग्री के स्व विनियमन (self regulation) पर भी बात की।

केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि डिजिटल मीडियम में फिलहाल किस तरह की चुनौतियाँ हैं? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है और उनका मानना है कि डिजिटल मीडिया खुद ही इसे सेल्फ रेग्युलेट करे, लेकिन अगर उन्हें मदद चाहिए, तो वो मदद करने के लिए भी तैयार हैं।

OTT-internet content self regulation पर प्रकाश जावड़ेकर और अजीत भारती के बीच की बातचीत आप 8:57 से 11:40 के बीच सुन सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “इसके अच्छे और बुरे दोनों तरह के नतीजे आ रहे हैं। इसलिए हमने OTT प्लेटफॉर्म को कहा है कि वो सेल्फ-रेग्युलेशन की अच्छी व्यवस्था करें। डिजिटल मीडिया से भी कह सकते हैं, क्योंकि कंटेंट ऑर्गेनाइज्ड होता है। लेकिन डिसऑर्गेनाइज्ड कंटेंट पर लगाम कसना थोड़ा मुश्किल है। एक मैकेनिज्म बनाइए, जिसकी विश्वसनीयता हो और किसी को भी इससे शिकायत न हो और उसके कारण सुधार होता रहे और अगर कोई नहीं करता है तो क्या करना है, इसका विकल्प हमेशा सरकार के पास खुले होते हैं।”

फेक न्यूज को लेकर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इसके लिए पीआईबी है। वो बहुत अच्छे से फैक्ट चेक करती है। उसकी प्रतिष्ठा भी हो गई है। आगे इसके लिए और सख्त कदम उठाए जाएँगे। इसकी वजह से अनेक चैनल ने फेक न्यूज दिखाना बंद किया, कई चैनलों को माफी माँगनी पड़ी, अनेक अखबारों को माफी माँगनी पड़ी। इसका परिणाम यह हुआ कि अब लोग भी चेक करके ही न्यूज लगाते हैं, बिना सोर्स का न्यूज नहीं लगाते हैं।

केंद्रीय मंत्री से जब पूछा गया कि उन्होंने कम से कम तीन बार विदेशी संस्थाओं को ट्विटर पर तथ्यात्मक रूप से गलत साबित किया है, लेकिन वही चीज मीडिया में नहीं दिखती है कि आपने ऐसा किया है। इस पर वो कहते हैं, “मैं देश-विदेश की हर खबरें देखता हूँ। ऐसे में अगर कोई गलत जानकारी या खबर होती है तो हम उन तक पहुँचाते हैं। ये काम पीआईबी करता है। पीआईबी के ऐसे कुछ प्रयासों को मैं ट्विट्स में बदलता हूँ, लेकिन हर ट्विट्स के द्वारा मैं मंत्रालय नहीं चलाता हूँ।”

370 हटने के बाद लद्दाख का पहला चुनाव, BJP ने मारी बाजी: 26 में 15 सीटों पर जीत, AAP को जीरो

लद्दाख के स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (Ladakh Autonomous Hill Development Council) के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी सफलता हासिल हुई है। कुल 26 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को आधे से अधिक 15 सीटें हासिल हुईं। वहीं कॉन्ग्रेस को 9 सीट हासिल हुई और 2 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव जीता। 

लद्दाख भाजपा अध्यक्ष और 34 वर्षीय सांसद जाम्यांग त्सेरिंग नामग्याल ने ट्वीट करते हुए चुनाव परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि यह भाजपा के लिए बड़ी जीत है, भाजपा एक बार फिर LAHDC का गठन करेगी। 

370 हटने के बाद लद्दाख का पहला चुनाव 

इस चुनाव के साथ सबसे ख़ास बात यही थी कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा मिलने के बाद यह पहला चुनाव था। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) के चुनाव में लेह क्षेत्र में लगभग 65.07 फ़ीसदी मतदान हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अधिकार ने बताया कि छठे लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद लेह का चुनाव पूरे ज़िले में हुआ। 

लेह जिले के छठे पर्वतीय परिषद की 26 सीटों के लिए भाजपा, कॉन्ग्रेस और आप के अलावा कुल 23 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे। इस चुनाव में कुल 94 उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय लगभग 65.07 फ़ीसदी मतदाताओं ने किया। मतदाताओं के लिए भी यह अहम मौक़ा था क्योंकि उन्हें अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर प्राप्त हुआ था। 

चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 89776 थी, जिसमें से 45025 महिला मतदाता थीं। इसके अलावा 26 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 294 मतदान केंद्र बने हुए थे। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, कॉन्ग्रेस और आप आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई और कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में थे।

कुल 94 उम्मीदवारों में से 26-26 भाजपा और कॉन्ग्रेस के थे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के 19 उम्मीदवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी समेत कई क्षेत्रीय दल इस चुनाव में शामिल नहीं हुए थे। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद वहाँ पर पहला लोकतांत्रिक आयोजन था।  

माँ-बाप दाेनों रहे CM फिर भी पास नहीं कर पाए मैट्रिक: तेजस्वी पर योगी आदित्यनाथ की टीम ने यूँ कसा तंज

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर सरगर्मियाँ ज़ोरों पर हैं और ओपिनियन पोल्स (Opinion Polls) का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहाकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर तेजस्वी पर तंज कसा है।

तेजस्वी यादव का बिना नाम लिखे शलभ मणि ने उनकी शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाया है। शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “दो दो धनाढ्य मुख्यमंत्रियों की संतान होते हुए भी जो आज तक खुद मैट्रिक तक पास नहीं कर पाए, वे युवाओं को पढ़ाने, बढ़ाने और रोजगार तक का फॉर्मूला बता रहे, गजब है !!”

बता दें कि तेजस्वी ने वादा किया है कि अगर उनकी सरकार आई तो वह पहली कैबिनेट बैठक में ही दस लाख युवाओं को रोजगार देने के फैसले पर साइन करेंगे। वह अपने हर भाषण में इस बात का जिक्र करते हैं। वह अपनी रैलियाें में शिक्षा, बेरोजगारी, स्कूल और पढ़ाई जैसे मुद्दे जोर-शोर से उठा रहे हैं। शलभ मणि का यह ट्वीट इसी का जवाब है।

इसके अलावा उन्होंने तेजस्वी के भाषण के वीडियो का एक छोटा सा हिस्सा शेयर करते हुए लिखा था, “रोज़गार तो बहाना है, फिर ‘बाबूजी’ जैसा नक्सलवाद ही फैलाना है!!”

शलभ मणि त्रिपाठी ने बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के एक ट्वीट को रीट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था, “ये है तेजस्वी यादव की सभाओं में भीड़ का सच। 300-500 रुपए, खाना पीना और बाइक के लिए तेल का वादा करके लोगों को बुलाया जा रहा है। लेकिन दिया कुछ भी नहीं… गुस्साए लोगों ने कहा, 500 रुपए देकर 5 साल राज करना चाहता है तेजस्वी। वोट मोदी को ही देंगे, जिन्होंने सड़कें दीं, बिजली दी।” ये बातें उन्होंने वीडियो में बोल रहे एक जनता के हवाले से लिखा था।

दरअसल तेजस्वी ने जब चुनावी रैली में 10 लाख नौकरियाँ देने का वादा किया तो विरोधियों ने उनकी आलोचना यही कहकर की कि ‘वो क्या नौकरी देंगे, जिन्होंने कभी खुद कोई नौकरी नहीं की’। इससे पहले भी, कम शिक्षित होने के लिए तेजस्वी पर कटाक्ष किए गए हैं। कक्षा 9 में ही स्कूल छोड़ देने वाले तेजस्वी ने जब उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी, तब भी उनके खिलाफ यही मुद्दा उठा था। लेकिन उनके समर्थकों का जवाब था कि खिलाड़ी खेल के लिए अकादमिक शिक्षा छोड़ते रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने अप्रत्यक्ष रूप से लालू यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि राजद की सरकार ने गरीबों का राशन तो खाया साथ ही गाय और भैंस का चारा भी खा लिया। यूपी सीएम ने इस दौरान बताया कि कैसे उनकी सरकार ने पाकिस्तान के घर में घुसकर भी मारा और भगवान राम का मंदिर भी बनवा दिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान राजद और कॉन्ग्रेस पर खूब तंज कसे और कहा था कि उन्होंने शासन लंबे समय तक किया लेकिन उनका एजेंडा कुछ नहीं था।

गोहत्या: 18 घटनाएँ, जहाँ रंगेहाथ पकड़े गए 87 गौ-तस्कर, जिनसे मिले कुल 2604 गौवंश अवशेष

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) को निर्दोष व्यक्तियों को फँसाने के लिए उत्तर प्रदेश गोहत्या निरोधक कानून, 1955 के प्रावधानों के लगातार दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की।

उक्त अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत गोहत्या और गोमांस की बिक्री के आरोपित रहमुद्दीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा, 

“कानून का निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ दुरुपयोग किया जा रहा है। जब भी कोई मांस बरामद किया जाता है, तो इसे सामान्य रूप से गाय के मांस (गोमांस) के रूप में दिखाया जाता है, बिना इसकी जाँच या फॉरेंसिक प्रयोगशाला द्वारा विश्लेषण किए बगैर। अधिकांश मामलों में, मांस को विश्लेषण के लिए नहीं भेजा जाता है। व्यक्तियों को ऐसे अपराध के लिए जेल में रखा गया है, जो शायद किए नहीं गए थे और जो कि 7 साल तक की अधिकतम सजा होने के चलते प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रायल किए जाते हैं।”

उन 18 घटनाओं की सूची, जहाँ गौ-तस्कर रंगे-हाथों पकड़ाए

1. सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को जारचा थाना क्षेत्र के चोना नहर की पटरी पर पुलिस और गोकशी करने वाले बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें फुरकान अली नामक अपराधी अपने पाँव में गोली लगने से घायल हो गया। पैर में गोली लगने से घायल अपराधी फुरकान अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उक्त अपराधी के पिता का नाम महमूद था, जो मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र स्थित नंगला साहू का निवासी है। फिलहाल वो हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र स्थित बड़ोदा में रह रहा था। वहीं उसका साथी बदमाश मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए पुलिस कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है। उसकी भी गिरफ़्तारी जल्द हो सकती है।

2. जनवरी 2019 को मकसूद खान को राजस्थान की पुलिस ने गो-तस्करी के जुर्म में गिरफ़्तार किया। गो-तस्करी के आरोप में मकसूद के अलावा 6 अन्य लोगों की भी गिरफ़्तारी हुई थी। पुलिस ने मकसूद खान पर यह आरोप लगाया था कि वह ट्रक के पीछे टैंकर में भर कर गायों की तस्करी करता था।

3. रविवार (26 अप्रैल 2020) को गो-तस्करी के एक गिरोह को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया। इस गिरोह में पाँच पशु तस्कर थे। इन पशु तस्करों के नाम नईम फारूक कुरैशी (28), शाहरुख सलीम कुरैशी (23) अल्तमस सलीम कुरैशी (21) सलीम सुलेमान कुरैशी (50) और मुन्ना बशीर सैयद (35) थे। इन पाँचों को महाराष्ट्र के नासिक में पशुओं के अवैध ट्रांसपोर्टिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र में जिस गाड़ी पर लेकर ये मवेशियों का गो-तस्करी करते थे, उस पर ‘जय बजरंग’ लिखा हुआ था।

4.  जून 2020 में असम के दक्षिण सलमार मनकचर जिले से सीमा सुरक्षा बल ने नौ मवेशी तस्करों को पकड़ा। उनके पास से आठ पशुओं के सिर बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए मवेशी तस्करों की पहचान मेहर सैफुल हक, रफीकुल इस्लाम, रफीकुल इस्लाम, सफीदुर इस्लाम, मोहम्मद आफ्टर अली और नूरुद्दीन के रूप में की गई थी और वे सभी दक्षिण सलमारा कंकड़धार जिले के निवासी थे।

5. जून 2020 में हरियाणा के नूंह जिले में छापेमारी के दौरान जब पुलिस आसिफ नाम के एक शख्स के घर पहुँची तो पाया कि 9 लोग टाटा 407 वाहन पर गाय की खाल लोड कर रहे थे। पुलिस को देखते ही सभी आरोपित कार को छोड़ कर भाग गए। आरोपितों की पहचान निन्ना उर्फ निज़ाम, सलामू, दीनू, अहमद हुसैन, बाबुदीन, असर, इलियास और मामन के रूप में हुई। इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। 

पुलिस ने वाहन से तकरीबन 414 गायों की खाल बरामद की। इसके बाद उन्होंने असर के घर में बने एक गोदाम पर छापा मारा, जहाँ से 620 गायों की खालें मिलीं। निज़ामू, फ़ारुख, हसीम के घरों में बने गोदामों पर छापे से कुल 1060 गायों की खालें बरामद हुई। इसके बाद दीनू, अहमद हुसैन, इलियास और मामन के घरों में बने गोदामों पर छापे मारे गए। जहाँ से कुल 478 गायों की खाल मिली। अभियुक्त निन्नह उर्फ निजाम, फारूक, हासिम, दीनू, अल्ली, आसिफ, निजाम, मुस्तकीम, नियाजू कुल 2572 गाय की खाल और एक टाटा 407 के साथ पाए गए थे।

6. हरियाणा के पलवल में सोमवार (जुलाई 28, 2019) की शाम करीब 7:30 बजे कुछ गो तस्करों ने गोपाल नाम के गो रक्षक की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्हें सोमवार (जुलाई 29, 2019) को किसी ने सूचना दी थी कि कुछ लोग गाय की तस्करी कर रहे हैं। जिसके बाद अपनी बाइक लेकर निहत्थे ही वे गायों को बचाने के लिए तस्करों का पीछा करने लगे। परिणाम स्वरुप रास्ते का रोड़ा बनता देख गो तस्करों ने उन्हें गोली मार दी और वहीं उनकी मौत हो गई।

7. जुलाई 2019 में राजस्थान के अलवर जिले में गो तस्करों ने ग्रामीणों पर फायरिंग की। तस्कर की पहचान सलीम खान के रूप में हुई। मंगलवार (जुलाई 30, 2019) की रात 3 तस्कर कच्चे रास्ते से 10-15 गायों को ले जा रहे थे। आस-पास के ग्रामीणों ने पूछताछ की तो गो तस्करों ने फायरिंग शुरू कर दी।

8. राजस्थान के अलवर जिले में रविवार (सितंबर 22, 2019) देर रात गौ तस्करी के आरोप में मुनफेद खान नामक शख्स की पिटाई की घटना सामने आई। पुलिस ने बताया कि देर रात खुसा की ढाणी में भीड़ ने मुनफेद खान को घेरा और उसकी गाड़ी से 7 गोवंश बरामद किए। इस दौरान लोगों का गुस्सा उस पर फूट पड़ा और उन्होंने मुनफेद की जमकर पिटाई कर दी।

9. उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस ने गोवंश का कटान और तस्करी करने के आरोप में 6 लोगों को पकड़ा था। आरोपितों के पास से चार बेसहारा गोवंश, एक महिंद्रा पिकअप, एक सेंट्रो, दो तमंचे, नशे के इंजेक्शन, 2 चॉपर, दो छुरे बरामद किए गए हैं। गिरफ्तारी रविवार (नवंबर 3, 2019) शाम को हुई थी। पकड़े गए आरोपितों की पहचान शाहिद, महफूज, हनीफ, शाहरुख, आरिफ और शानू के रूप में हुई। वहीं, फरार हुए आरोपितों में वसीम, मोमिन, जुल्फिकार,नौशाद और शहजाद का नाम शमिल था। 

10. उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में सिंघावली अहीर थाना और बागपत कोतवाली पुलिस ने रविवार (फरवरी 23, 2020) की रात हुई एक मुठभेड़ के बाद 3 गौ तस्करों को धर दबोचा। पुलिस ने इन तस्करों के पास से बिना नंबर की मारुति स्विफ्ट डिजायर कार, एक बछिया, एक सांड़ के अलावा इंजेक्शन, दो तमँचे, दो कारतूस बरामद किए। इनकी पहचान आदिल और मोहम्मद फिरोज के रूप में हुई थी। जबकि पीछा कर पकड़े गए तीसरे तस्कर का नाम सलमान था।

11. सहारनपुर के नानौता में गुरुवार (29 मार्च, 2019) तड़के हुई गोलीबारी में एक कांस्टेबल और दो गाय तस्कर घायल हो गए। जिन्हें प्राथमिक चिकित्सा दिए जाने के बाद ज़िला चिकित्सालय रेफर किया गया। इसके अलावा पुलिस को चकमा देकर रियासत और अरशद वहाँ से भागने में क़ामयाब हो गए। पकड़े गए घायल तस्करों में एक इरफ़ान है और दूसरा असरफ़ था।

12. नोएडा थाना सेक्टर-20 की पुलिस और स्वाट-1 व स्वाट-2 की संयुक्त टीमों ने नोएडा सेक्टर-8 की रेड लाइट से तीन गौ तस्करों की गिरफ़्तारी की। इनके पास से 10 ज़िंदा कारतूस समेत तीन तमंचे भी बरामद किए। इनकी पहचान आरिफ़, क़ासिम और यासीन के रूप में हुई थी।

13. जुलाई 2019 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पुलिस ने गोकशी में लिप्त एक गैंग के 14 सदस्यों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इनमें गैंग का सरगना महबूब आलम और एक महिला भी थी। उसने घर में हथियार बनाने की फैक्ट्री भी खोल रखी थी।

14. उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार (फरवरी 05, 2020) को कार में गौमांस (बीफ़) ले जाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे ने बताया कि पुलिस ने गंगेरू रोड पर जब एक ऐसी कार को रोका, जिसमें गौमांस को मीट की दुकान ले जाया जा रहा था। जिसके बाद कार सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आरोपितों ने दुकान के मालिक इमरान के लावारिस पशुओं की हत्या में शामिल होने का खुलासा किया।

15. उत्तर प्रदेश नोएडा के गौतम बुद्ध नगर जिले के दनकौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने बुधवार (जुलाई 18, 2019) को खेत में घुसी गाय की हत्या के मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद पर आरोप था कि इन्होंने मंदिर के सामने एक गाय को भाला मारा, जिसके कारण उस गाय की मौत हो गई।

16. उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सेना के जवान रामनरेश उर्फ फौजी की कुछ मुस्लिम युवकों ने पिटाई कर दी। जवान ने गाय को काटने पर आपत्ति जताई थी। साथ ही जय श्री राम का नारा लगाया था। औरैया पुलिस ने इस पर कार्रवाई करते हुए 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। साथ ही रामनरेश उर्फ फौजी के साथ हुए विवाद में वांछित मुख्य अभियुक्त संकरा उर्फ नफीस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

17. उत्तर प्रदेश के बागपत में गोहत्या के मामले में शाहरुख़, इनाम, और कल्लू नाम के 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों को सोमवार (जून 3, 2019) को बागपत जिले के सिटी कोतवाली थाना अंतर्गत पुराण कस्बा इलाके से गिरफ्तार किया गया। इन पर गोहत्या का शक और पशुओं का अवशेष रखने का आरोप था।

18. मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद पहली बार गोहत्या के मामले में 3 आरोपितों, नदीम, शकील और आजम पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई। गिरफ्तार हुए आरोपितों पर कुछ दिन पहले खंडवा जिले में गोहत्या करने का आरोप था। 

गौरतलब है कि 9 जून, 2020 को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोहत्या पर पूर्ण लगाम लगाने के लिए ‘Cow-Slaughter Prevention (Amendment) Ordinance, 2020’ को पास किया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश गो वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020’ को मंजूरी दे दी गई।

जहाँ गोहत्या के आरोपित 7 साल के कारावास की सज़ा के प्रावधान को बढ़ा कर 10 साल कर दिया गया। साथ ही गोहत्या पर लगने वाले जुर्माने को भी 3 लाख रुपए से बढ़ा कर 5 लाख रुपए कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में अब जो भी गोहत्या या जो-तस्करी में संलिप्त होगा, उसके फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पाए जाएँगे। मंगलवार (जून 9, 2020) को यूपी कैबिनेट ने ये फ़ैसला लिया।

भारतीय तिरंगे पर महबूबा मुफ्ती की बयानबाजी पड़ी भारी, पार्टी के 3 नेताओं ने दिया PDP से इस्तीफा

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कुल 3 नेताओं ने महबूबा मुफ़्ती की हरकतों और बयानों का हवाला देते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। पार्टी से इस्तीफ़ा देने वाले तीन नेता टीएस बाजवा, वेद महाजन और हुसैन ए वफ़ा हैं। इन तीनों ने पार्टी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती को दिए गए पत्र (इस्तीफ़े) में वजहों का विस्तार से उल्लेख किया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती को लिखे गए पत्र में इन नेताओं का कहना था कि वह हाल फ़िलहाल में की गई बेमतलब बयानबाजी और हरकतों से सहमत नहीं हैं। इससे आम जनता की देशभक्ति की भावना को ठेस पहुँची है, इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए वह पार्टी का हिस्सा नहीं बने रह सकते हैं।

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने हाल ही में यह बयान देकर विवाद खड़ा किया था। महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती का कहना था कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

14 महीने तक हिरासत में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुई महबूबा मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उनके मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

इसके बाद महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एफआईआर की माँग को लेकर पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल की ओर से पुलिस कमिश्नर को भेजी शिकायत में कहा गया था कि महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काया है। उनके खिलाफ नेशनल ऑनर एक्ट और  धारा 121, 151, 153A, 295, 298, 504 और 505 के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए। 

पत्र में जिंदल ने कहा था कि उनकी टिप्पणी – ‘डाकुओं ने हमारा झंडा छीन लिया है’ लोगों को उकसा रही है और इससे नफरत एवं अशांति पैदा करने की स्पष्ट मंशा दिखती है। इसके अतिरिक्त पत्र में महबूबा मुफ्ती का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उनका इरादा यह दिखाने का है कि जम्मू कश्मीर भारतीय क्षेत्र नहीं है, इसका अलग अस्तित्व है।

‘राजनीतिक हितों के लिए पत्रकारों का दमन’ – TRP स्कैम और महाराष्ट्र सरकार पर प्रकाश जावड़ेकर

महाराष्ट्र सरकार और रिपब्लिक टीवी के बीच बढ़ते विवाद के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने टीआरपी मामले पर अपना बयान दिया है। उन्होंने रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हो रहे हमले (सरकारी, पुलिसिया) के मद्देनजर कहा है कि राजनीतिक हितों के लिए पत्रकारों का दमन बेहद गलत है।

ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती को दिए साक्षात्कार में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से जब टीआरपी स्कैम व किसी खास मीडिया पर हो रहे हमले से संबंधित सवाल पूछा गया, तब उन्होंने अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा, “एक कंप्लेन में किसी का नाम आता है, चार्ज दूसरे पर लगता है। ये मुंबई पुलिस जो कर रही है, मुझे लगता है कि इस तरह से पत्रकारों का दमन अपने राजनीतिक हितों के लिए करना गलत है।”

TRP स्कैम, रिपब्लिक टीवी और मुंबई पुलिस

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से मीडिया में टीआरपी स्कैम का मामला बेहद गरमाया हुआ है। मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार तरीके से रिपब्लिक टीवी का नाम इस स्कैम में लिए जाने के बाद से चैनल इस मुद्दे पर लगातार अपनी रिपोर्टिंग कर रहा है।

वहीं, मुंबई पुलिस को लेकर भी खुलासे हो रहे हैं कि वह टीआरपी स्कैम में रिपब्लिक टीवी का नाम न होने के बावजूद गवाहों से उनके चैनल का नाम जबरन बुलवा रहा है। अभी हाल में मुंबई पुलिस ने मीडिया संस्थान के 1000 कर्मचारियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था, जिसकी जगह-जगह आलोचना हुई।

रिपब्लिक टीवी चैनल के CFO (मुख्य वित्तीय अधिकारी) से संस्थान के हर छोटे-बड़े खर्चे का हिसाब माँगा गया। कर्मचारियों की सैलरी, स्टेशनरी के सामान से लेकर टॉयलेट पेपर तक का खर्चा बताने को कहा गया था।

यहाँ बता दें कि आज केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा टीआरपी मामले पर दिया गया बयान ऑपइंडिया को दिए साक्षात्कार का हिस्सा है। यह बयान केवल पूरे इंटरव्यू का एक छोटा सा भाग है। ऑपइंडिया के साथ बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कई अन्य मुद्दों पर भी बात की है।

महेश भट्ट परिवार पर लड़कियाँ और ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप लगाया जिस ‘बहू’ ने, उसके खिलाफ ₹1 करोड़ की मानहानि

फिल्म निर्माता महेश भट्ट और मुकेश भट्ट ने लवीना लोध के ख़िलाफ़ सोमवार (26 अक्टूबर 2020) को बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। भट्ट भाइयों ने लवीना से 1 करोड़ रुपए हर्जाने की माँग करते हुए मानहानि का केस दर्ज किया है। इसके अलावा कोर्ट से यह गुहार लगाई है कि वह लवीना को झूठ बोलने से, निंदनीय आरोप लगाने से रुकने के आदेश दें।

अब आगे इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर को की जाएगी। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (23 अक्टूबर, 2020) को महेश भट्ट की लीगल टीम ने लवीना लोध के आरोपों को खारिज किया था। साथ ही बयान में लिखा था कि वह लवीना के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

महेश भट्ट की ओर से यह बयान लवीना लोध की हालिया वीडियो पर जारी किया गया था। इसमें उन्होंने भट्ट भाइयों पर गंभीर आरोप लगाए थे और महेश भट्ट को बॉलीवुड का बहुत बड़ा डॉन कहा था।

इसी वीडियो के मद्देनजर बॉम्बे हाईकोर्ट में भट्ट भाइयों के पहुँचने के बाद लवीना लोध के वकील की ओर से भी बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि लवीना महेश भट्ट और मुकेश भट्ट के ख़िलाफ़ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं करेंगी।

उल्लेखनीय है कि लवीना लोध के आरोपों पर विशेष फिल्म ने इंस्टाग्राम पर महेश भट्ट की लीगल टीम द्वारा जारी बयान को शेयर किया था। इस बयान में कहा गया था कि उनके ऊपर लगे आरोप सभी फर्जी हैं और अपमानजनक हैं। इसलिए उनके मुअक्किल इस पर एक्शन लेंगे।

लवीना लोध की वीडियो

23 अक्टूबर को जारी की गई वीडियो में लवीना लोध ने दावा किया था की शादी महेश भट्ट के भाँजे से हुई थी। लेकिन उन्हें समय रहते पता चल गया था कि उनका पति ड्रग तस्कर है। उन्होंने इस सच्चाई को जानने के बाद तलाक का केस फाइल कर दिया। लवीना ने अपनी वीडियो में अमायरा दस्तूर नाम की एक्ट्रेस का नाम भी लिया है।

लवीना ने कहा, “उनके (महेश भट्ट के भाँजे) फोन में अलग-अलग तरह की लड़कियों की तस्वीरें हैं, जिसे वह निर्देशकों को दिखाते हैं और उन लोगों को लड़कियाँ भी सप्लाई करते हैं। इन सबकी जानकारी महेश भट्ट को है।”

महेश भट्ट को लेकर उन्होंने कहा था कि वह इंडस्ट्री के सबसे बड़े डॉन हैं। सारा सिस्टम वही ऑपरेट करते हैं। अगर आप उनके नियमों के हिसाब से नहीं चलते तो वो आपका जीना हराम कर देते हैं। लवीना का कहना था कि महेश भट्ट ने न जाने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। कितने एक्टर्स, कंपरोजर्स, डॉयरेक्टर्स को काम से निकाल दिया है।

दिल्ली में डॉक्टरों, म्युनिसिपल कर्मचारियों को नहीं मिल रही सैलरी: केजरीवाल के घर के बाहर धरने पर बैठे तीनों मेयर

दिल्ली के सभी 3 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के मेयरों ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर के बाहर धरना दिया। उनका आरोप है कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के कर्मचारियों को आम आदमी पार्टी की सरकार सैलरी नहीं दे रही है, जिस कारण उन्हें सड़क पर उतरने को बाध्य होना पड़ा है। मेयरों ने AAP सुप्रीमो से कहा है कि या तो वो अंदर बुला कर उनसे बातचीत करें, नहीं तो वो ऐसे ही विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। उधर डॉक्टरों की सैलरी को लेकर भी हंगामा मचा है।

गुरुवार (अक्टूबर 22, 2020) को भी तीनों म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के डॉक्टरों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। 7 दिनों के भीतर ये उनका दूसरा विरोध प्रदर्शन था। हिंदूराव, कस्तूरबा गाँधी और राजन बाबू अस्पताल के डॉक्टरों ने दिल्ली सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के खिलाफ भी नारेबाजी की और मिल-बैठ कर सैलरी का मुद्दा सुलझाने को कहा।

इन डॉक्टरों को पिछले 3 महीने से सैलरी नहीं मिली है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस आपदा के दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी खतरे डाल कर काम किया लेकिन अब उन्हें ही सैलरी नहीं दी जा रही है। साथ ही सातवें वेतन आयोग के हिसाब से उन्हें कई अन्य भत्ते भी नहीं प्रदान किए गए हैं। ये डॉक्टर पिछले कई सप्ताह से विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब सिर्फ मौखिक आश्वासन काफी नहीं है, एक्शन होना चाहिए।

अब खबर आई है कि दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन इन मेयरों से मुलाकात कर के उनकी बात सुनेंगे। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक के बाद क्या नतीजा निकलता है, इस पर सबकी नजर है। मेयर जय प्रकाश ने पूछा कि दिल्ली सरकार पब्लिसिटी पर करोड़ों रुपए क्यों खर्च कर रही है? उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कुछ नहीं कर रही है और वो सीएम से मिल कर पूछना चाहते हैं कि कब तक वो इस मामले में हरकत में आएँगे।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का कहना है कि दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है। जयप्रकाश ने इसके पीछे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दोषी ठहराते हुए कहा था, “दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है। दिल्ली सरकार ज़िम्मेदार रवैया अपनाते हुए हमारे इस साल के जो 1600 करोड़ रुपए और पिछले साल के 9000 करोड़ रुपए रोक रखे हैं, उसे जारी करे और दिल्ली की जनता के साथ खिलवाड़ न करे।”

एक कुत्ते के साथ रेप, दूसरे के गुप्तांग में डाली 11 इंच की लकड़ी: महाराष्ट्र में हैवानियत की 2 घटनाएँ

मुंबई के पोवई स्थित गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की ‘नूरी’ नाम के मादा कुत्ते के साथ दरिंदगी की घटना अंजाम दी गई है। घटना के बाद उसे उपचार के लिए वर्ल्ड फ़ॉर ऑल (WFA) के पशु स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। हैवानियत का स्तर इतना भयावह था कि उसके गुप्तांग में 11 इंच की लकड़ी डाली गई थी, फ़िलहाल डॉक्टर ने उसे निकाल दिया है। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले के एक आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया है। 

इस मुद्दे की जानकारी देते हुए बॉम्बे एनिमल राइट्स (BAR) के विजय किशोर मोहनानी ने कहा, “22 अक्टूबर 2020 को वहाँ के कई स्थानीय लोगों ने हमें जानकारी दी कि गैलेरिया में नूरी नाम की एक मादा कुत्ता बुरी तरह घायल अवस्था में मिली है। हमें ऐसा लगता है कि किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति जो गैलेरिया में काम करता है या आस-पास ही कहीं रहता है, उसने इस घटना को अंजाम दिया है।”

इसके बाद पोवई पुलिस थाने में घटना के संबंध में अज्ञात लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पशु क्रूरता सुरक्षा अधिनियम 1960 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा जा सकता है, जिसमें मादा कुत्ता असहाय और दयनीय स्थिति में पड़ी हुई है।

पशु कल्याण अधिकारी गीतेन डूडानी ने इस घटना पर कहा, “नूरी की हालत फ़िलहाल स्थित है। सर्जरी की मदद से उसके गुप्तांग में फँसी हुई लकड़ी निकाली जा चुकी है। मुझे इस बात पर संदेह है कि घटना दो या दो से अधिक लोगों ने गैलेरिया के पार्किंग क्षेत्र में रात के वक्त अंजाम दी है। हमने पुलिस से निवेदन किया है कि वह उस क्षेत्र के सभी सीसीटीवी कैमरा की जाँच करें।” 

नीतियों में बदलाव को लेकर ‘इन डिफेंस ऑफ़ एनिमल्स’ (IAD) के कार्यकर्ता विवियन ने कहा कि जिन उपद्रवियों ने इस घटना को अंजाम दिया, वह 50 रुपए जुर्माना भर कर निकल जाएँगे। इसके बाद उन्होंने इस बात पर डर भी जाहिर किया कि सब कुछ ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में अपराधी आम लोगों के साथ भी ऐसी हिंसात्मक हरकत कर सकते हैं। इस बात के समर्थन में उन्होंने कई आँकड़े भी पेश किए। उनका कहना था, “इस तरह की भयावह और विकृत घटनाओं पर कड़ी सज़ा दी जाएगी, सिर्फ तभी समाज का भला हो सकता है।”   

दिहाड़ी मजदूर ने किया कुत्ते के साथ बलात्कार        

रविवार (25 अक्टूबर 2020) को 65 साल के एक व्यक्ति को नवी मुंबई स्थित नेरुल रेलवे स्टेशन पर कुत्ते के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपित का नाम महेंद्र डी पवार था। हैवानियत की यह पूरी घटना स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से सामने आई, इसके बाद उसे पीपुल फ़ॉर एनिमल्स (पीएफ़ए यूनिट 2) के पास भेज दिया गया। 

इस मामले पर जानकारी देते हुए पीएफ़ए के कार्यकर्ता विजया रंगरे ने कहा, “लगभग एक हफ़्ते पहले सीसीटीवी फुटेज सामने आई थी। उसमें साफ़ देखा जा सकता था कि नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के पश्चिमी हिस्से में एक व्यक्ति मादा कुत्ते के साथ हैवानियत कर रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह और उनके सहकर्मी आदित्य पाटिल मौके पर पहुँचे और घटना की खोजबीन शुरू कर दी। बहुत जल्द उन्हें पता चला कि आरोपित का नाम महेंद्र डी पवार था।

जाँच के दौरान उन्हें पता चला कि नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के नज़दीक सोने वाले मजदूर ने रात में शराब पी और मादा कुत्ते के साथ दरिंदगी की। घटना के कुछ समय बाद तक आरोपित की नेरुल स्टेशन के पास तलाश की गई लेकिन उसका कोई पता नहीं चला था। इसके बाद नेरुल पुलिस और पीएफ़ए के समूह ने मिल कर उसे गिरफ्तार किया।

जाँच के दौरान उन्हें पीएफ़ए के कार्यकर्ता ने बताया, “हमने इस घटना के संबंध में सारे इलेक्ट्रॉनिक सबूत और चश्मदीदों के गवाह पुलिस को दे दिए हैं जिससे आरोपित को जेल भेजा जा सके।” इस घटना में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 (1) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।