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राहुल गाँधी को लद्दाख आना चाहिए था, हम भी उनके चुटकुलों पर हँस लेते: BJP सांसद नामग्याल

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी पर निशाना साधा है। लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव को लेकर भाजपा सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गाँधी को चुनाव प्रचार में जरूर आना चाहिए था। इससे लेह के लोगों को चुटकुले सुनकर हँसने का मौका मिल जाता।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नामग्याल ने कहा, “मैं अनुरोध करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को लद्दाख में राहुल गाँधी (चुनाव प्रचार के लिए) को लाना चाहिए था। हमारे लोग भी थोड़ा चुटकुले सुनते, हँसते-खिलखिलाते। नहीं ला पाए। अफसोस की बात है। उन्हें (कॉन्ग्रेस) सोनिया गाँधी को भी लेह भी लाना चाहिए था, हम सुनना चाहते थे कि मैडम जी के क्या विचार हैं?”

वह आगे कहते हैं, “हम भी उनके मुँह से सुनना चाहते हैं कि 70 वर्षों में लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा न दिला पाने के बारे में उनके पास बोलने के लिए क्या बचा है।”

वह कहते हैं कि जब गुलाब नबी आजाद ने 8 जिले बनाए तब भी लद्दाख को एक भी जिला नहीं दिया। यूटी का दर्जा कैसे देते। कॉन्ग्रेस पार्टी के पास न लाने की क्षमता है, न वह लेकर आ सकते हैं और लाने का कोई फायदा है। भाजपा ने जनता को संदेश दिया कि वह लद्दाख के साथ हैं। यहाँ के लोगों के साथ हैं। अलग अलग मंत्रियों ने यहाँ आकर गाँव-गाँव जाकर केवल चुनाव प्रचार नहीं किया बल्कि गाँव के हालात देखे, लोगों की मानसिकता जानने की कोशिश की, इसलिए भाजपा यहाँ अपने नेताओं को ला पाई। वह यहाँ के हालातों को जानेंगे और उनकी बात भी रखेंगे।

पिछले साल लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) घोषित होने के बाद वहाँ पहली बार यह चुनाव हो रहा है। उल्लेखनीय है कि लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की 26 सीटों पर आज सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हुए थे, जो शाम चार बजे तक चले। वहाँ कुल 94 उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला 89776 मतदाता करेंगे। मतगणना 26 को होगी और उसी दिन परिणाम भी आ जाएँगे। 

नवरात्र के अपमान पर Eros Now के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, क्षमा माँगने से भी लोगों का गुस्सा नहीं हुआ शांत

हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले इरोज नाउ (Eros Now) को किसी भी कीमत पर लोग माफ करने को तैयार नहीं है। क्षमा पत्र जारी करने के बावजूद सोशल मीडिया पर कई ऐसी FIR की कॉपी देखने को मिल रही हैं जिसमें इरोज नाउ के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज है।

मुंबई में भाजपा प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने Eros Now के ख़िलाफ़ दर्ज शिकायत की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “साइबर अपराध और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के संबंध में इरोज नाउ और प्रोड्यूसर क्रिशिका लुल्ला के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की। बहुत जल्द इसका फॉलो अप भी किया जाएगा।”

इससे पहले सुरेश ने इरोज नाउ को कहा था कि वह लगातार हिंदुओं की भावनाओं को आहत कर रहे हैं। अब जल्द ही कोर्ट में मुलाकात होगी।

इसी तरह वकील चांदनी शाह ने भी हिंदुओं की भावना आहत करने के मामले में शिकायत करवाई है। अपने ट्विटर पर उन्होंने बताया, “जैसा कि मैंने वादा किया था, मैंने आईटी एक्ट की धारा 67 (ए) के साथ आईपीसी की 153 (ए), 295 (ए), 504, 505, 506 में शिकायत दर्ज की है।” उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि उन्होंने @ArreTweets, @Arresai, @sharan_saikumar, http://arre.co.in पर शिकायत करवाई है।

गौरतलब है कि इरोज नाउ ने हिंदुओं के पवित्र पर्व नवरात्रि पर आपत्तिजनक तस्वीरें साझा करने के लिए इससे पहले आज सुबह क्षमा पत्र जारी किया था। उन्होंने लिखा था कि वह हर धर्म संस्कृति का बराबर सम्मान करते हैं, उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।

बता दें कि नवरात्र के मौके पर इरोज नाउ ने इस तरह की कई तस्वीरें साझा की थीं, जो सांस्कृतिक त्योहार के दृष्टिकोण से आपत्तिजनक थीं और हिन्दू पर्व का अपमान करते थे। जबकि अन्य मज़हब के त्यौहारों पर यही इरोज नाउ ने बेहद धर्म निरपेक्ष तरीके से शुभकामनाएँ दी थीं। 

इसी दोहरे रवैये को देखते हुए ट्विटर पर सुबह से #BoycottErosNow ट्रेंड कर रहा था। कई नामी हस्तियों ने इसे शेयर किया था। लोग लगातारआपत्तिजनक तस्वीरें शेयर करते हुए पूछ रहे थे कि क्या जैसा इरोज नाऊ ने नवरात्रि के लिए किया, क्या वैसे ही शुभकामनाएँ किसी और मजहब के त्योहार पर दे सकता है? इसके अलावा क्षमा पत्र के बाद दर्ज हुई हालिया शिकायतें भी इसी ओर इशारा करती हैं कि सोशल मीडिया पर लोग अब ऐसे घटिया प्रयोगों को फैलने से रोकने के लिए अग्रसर हैं, ताकि हिंदुओं के त्योहारों का मजाक बनाकर चर्चा में आने वालों को सबक मिल सके।

UP: पुलिस ने 200 लोगों के बौद्ध बनने की खबर बताई फर्जी, सरकारी योजना के कागज को कहा धर्मांतरण का सर्टिफिकेट

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ख़िलाफ़ चल रही एक और बड़ी साजिश से पर्दा उठा है। हाल में कुछ रिपोर्ट्स आई थीं कि वाल्मिकी समुदाय के लोगों ने आर्थिक तंगी व उत्पीड़न के कारण बौद्ध धर्म अपना लिया। यह भी दावा किया गया कि हाथरस की घटना के बाद गाजियाबाद में इस घटना के विरोध में कथित दलित समुदाय के तकरीबन 200 से ज्यादा लोगों ने धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपना लिया। अब इसी मामले में ताजा खुलासे से पता चला है कि यह सब मात्र उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के ख़िलाफ़ एक साजिश थी

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में धर्मांतरण की खबरें आने के बाद एक स्थानीय भाजपा नेता ने इस खबर को फेक न्यूज करार दिया, जिसके बाद प्रशासन ने अपनी जाँच शुरू की। पड़ताल में पता चला कि पूरा केस ही झूठा है और कहीं भी किसी प्रकार के धर्मांतरण के सबूत नहीं मिले। इसके अलावा, किसी तरह का कोई सर्टिफिकेट, पंजीकरण नंबर आदि भी जाँच के दौरान नहीं मिला है जिससे धर्म परिवर्तन की खबर सही साबित होती।

धर्म परिवर्तन मामला

खबरों में दावा किया गया था कि 14 अक्टूबर को आर्थिक तंगी व उत्पीड़न से तंग आकर 50 दलित परिवारों के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि यह मामला साहिबाबाद पुलिस थाने के करेरा गाँव का है, जहाँ लोगों को धर्म परिवर्तन के बाद सर्टिफिकेट भी दिए गए।

इस संबंध में एक स्थानीय व्यक्ति मोंटू वाल्मिकी ने पुलिस थाने में शिकायत करवाई थी। अपनी शिकायत में मोंटू ने कहा था कि धर्मांतरण की पूरी कहानी केवल समाज में अशांति फैलाने के लिए गढ़ी गई। जब पुलिस ने इस मामले में जाँच की तो आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ और यह भी पता चला कि लोगों को सरकारी योजनाओं के बहाने कागज प्रस्तुत किए गए थे और बाद में उन्हें ही धर्मांतरण के कागज कह दिया गया।

पुलिस की जाँच रिपोर्ट

सिटी एडीएम शैलेंद्र सिंह ने एसपी के साथ इलाके के निरीक्षण में धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं पाया। अपनी जाँच रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि उन्हें कोई धर्म परिवर्तन के सबूत नहीं मिले और न ही कोई पंजीकरण नंबर मिला।

एसपी सिटी ने बताया कि जो नाम और नंबर दिखाए गए वह मैच नहीं करते थे और कुछ लोगों ने तो उन्हें खाली पन्ना तक दिखाया। उन्होंने कहा कि उन्हें वाल्मीकि समुदाय के लोगों से एक ज्ञापन जरूर मिला था, और अब उनकी समस्याओं को जल्द सुना जाएगा।

भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर लगाए आरोप

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र में गंदी राजनीति का इल्जाम आम आदमी पार्टी पर लगाया है। भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि इलाके में कोई धर्मांतरण नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ISI और दाऊद इब्राहिम के बीच सांठगांठ देश में अस्थिरता और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन के लिए पवन नामक व्यक्ति को 10 लाख रुपए का भुगतान किया गया था।

यहाँ बता दें कि मीडिया में धर्म परिवर्तन की यह खबर आने के बाद वामपंथी गिरोह ने बड़ी तेजी से इसे आगे बढ़ाया। सत्यहिंदी के सह संस्थापक व पूर्व AAP नेता आशुतोष ने समाचार पत्र की कटिंग शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें उम्मीद है इसे आरएसएस पढ़ रही होगी। आशुतोष ने ट्वीट में लिखा कि योगी सरकार और यूपी में भाजपा के लिए गंभीर आत्मनिरीक्षण की जरूरत है।

मोदी सरकार सिर्फ बिहार को देगी मुफ्त कोरोना वैक्सीन? जानिए क्या है सच्चाई

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का घोषणा पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि जैसे ही कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार हो जाएगी वैसे ही उसका वितरण बिहार के लोगों में होगा और वह भी मुफ्त। लोगों ने दावा किया है कि मोदी सरकार सिर्फ बिहार को ही मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराएगी।

लेकिन वित्त मंत्री द्वारा जारी किया गया बयान बहुतों की समझ के दायरे से कोसों दूर था। इसके अलावा, बहुत से लोगों ने इसे निर्दयी फैसला बताया क्योंकि इसके तहत कथित तौर पर सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। 

अपना प्रलाप जारी रखते हुए इन्हीं लोगों ने कहा कि ऐसे में पीएम केयर्स फंड की क्या उपयोगिता है?

जैसा कि पत्रकार महोदया को इस संबंध में जानकारी नहीं थी और वह ऐसे अहम मामलों की जानकारी रखती भी नहीं होंगी, भारत में वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया पीएम केयर्स फंड की मदद से ही की जा रही है। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थक ट्रॉल्स की कल्पनाएँ भी हवा से बातें करने लगी और उनका आदतन प्रलाप शुरू हो गया। उनका कहना था कि क्या चुनाव के समयानुसार वैक्सीन की उपलब्धता तय होगी। 

इसी तरह अन्य ट्रॉल्स ने गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आम नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात कही।

हालाँकि यह मसला है भी नहीं, भारत में टीकाकरण कुछ इस तरह काम करता है: 

राज्य सरकार का विषय है टीकाकरण

भारतीय जनता पार्टी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने इस बात की जानकारी ट्विटर पर साझा की। उन्होंने बताया कि कोरोना का टीका उपलब्ध कराना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है –

उन्होंने बताया कि अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी योजनाओं की तरह भारत सरकार राज्य सरकारों को कम से कम दामों पर टीका उपलब्ध कराएगी। इस दायरे में भाजपा शासित और गैर भाजपा शासित दोनों तरह के राज्य आते हैं इसलिए यह राज्य सरकार की मर्ज़ी है कि वह वैक्सीन के लिए रुपए लेते हैं या नहीं। टीका (वैक्सीन) राज्य सरकार का विषय है इसलिए भाजपा सरकार ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि सरकार बनाने पर राज्य के लोगों को मुफ्त में टीका उपलब्ध कराएँगे। ठीक इसी तरह गैर भाजपा शासित प्रदेश जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल यह निर्णय लेने के लिए स्वच्छंद हैं कि वह अपने नागरिकों को मुफ्त में टीका देना चाहते हैं या नहीं। 

इस तुलना लॉकडाउन के दौरान चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेन से भी की जा सकती है जो मजदूरों के लिए शुरू की गई थी और इसके ज़रिए मजदूर घर जा सकते थे। भारतीय रेलवे ने इस योजना के तहत ट्रेन चलाने के लिए राज्य सरकारों से कम से कम रुपए लिए थे। यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता था कि वह श्रमिक ट्रेन से आने वाले मजदूरों से किस हद तक कीमत वसूलते थे। इसका मतलब यह है कि चुनाव के चलते बिहार को किसी तरह का विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों को कम से कम दामों पर वैक्सीन उपलब्ध कराएगी, इसके बाद यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है कि वह इसके लिए कोई कीमत वसूलना चाहते हैं या नहीं।           

कुणाल कामरा का फैन है अ#ह के नाम पर सर कलम करते रहने की धमकी देने वाला नदीम सैयद

पेरिस में इस्लामी कट्टरपंथ का शिकार हुए इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को आज पूरा फ्रांस श्रद्धांजलि दे रहा है। देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी घटना के बाद साफ संदेश दिया है कि वह इस्लामी कट्टरता के सामने नहीं झुकेंगे। लेकिन इसके जवाब में नदीम सैयद ने कहा है कि वो अल्लाह के नाम पर सर कलम करते रहेंगे। नदीम के सोशल मीडिया इतिहास से पता चलता है कि वो कुनाल कामरा का भी फैन है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 22 अक्टूबर को ट्वीट करते हुए कहा– “हम नहीं रुकेंगे प्रोफ़ेसर (We will continue, professor)”। उनके इस ट्वीट पर देश विदेश से सैंकड़ों प्रतिक्रियाएँ आईं। इनमें कुछ कट्टरपंथियों की भी थी और कई भारतीय भी शामिल थे। इन्हीं में से एक नाम निकल कर आया नदीम सैयद।

नदीम सैयद, भारत से भी है और उन लोगों में भी शामिल है जिन्होंने ट्वीट पर अपनी कट्टर मानसिकता का परिचय दिया। इसने फ्रांस राष्ट्रपति के ट्वीट के जवाब में लिखा, “इंशाअल्लाह, हम सर कलम करते रहेंगे। (We will continue to behead, God willing)”

इस ट्वीट को देखने के बाद कई लोग हैरान रह गए और सक्रिय ट्विटर यूजर्स ने इसकी जानकारी जुटानी शुरू की। BefittingFacts नाम से ट्विटर यूजर ने नदीम सैयद की प्रोफाइल देखते हुए पाया कि ये नदीम सैयद जो पैगंबर का अपमान करने वालों के सिर कलम करने की धमकियाँ सरेआम दे रहा है, वह तो कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा का फैन है। 

जी हाँ, नदीम ने इसी साल जून में कुणाल की क्लिप शेयर करते हुए लिखा था, “मेरा पसंदीदा” इस कैप्शन के साथ उसने तीन हँसने वाले इमोजी भी लगाए थे।

अब इसी कुणाल कामरा के फैन का रिप्लाई (जो फ्रांस राष्ट्रपति के ट्वीट पर दिया) वायरल होने लगा है। नदीम सैयद ने लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद अपनी प्रोफाइल भी डिसेबल कर ली है। लेकिन, सोशल मीडिया पर नदीम को लेकर व उसके कुणाल कामरा के फैन लिस्ट में शामिल होने पर लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, “देश कोई भी हो पर इन शांतिदूतों की सोच एक ही होती है।”

एक यूजर का कुणाल कामरा जैसे लोगों से पूछना है कि क्या नदीम सैयद इस्लाम का समर्थक ही है? क्योंकि उसके मुताबिक तो इस्लाम शांति का मजहब है और नदीम ने उसे गलत साबित कर दिया।

बता दें कि वामपंथी प्रोपगेंडाबाजों के प्रति ऐसे कट्टरपंथियों का झुकाव समय समय पर देखने को मिलता रहता है। पिछले दिनों हमने देखा था कि हिंदू देवी देवताओं को गाली देने वाली हीर खान रवीश कुमार, अभिसार शर्मा और पुण्य प्रसून्न वाजपेयी की कट्टर समर्थक थी। वह अपने दर्शकों से अपील भी करती थी कि जाकर इन पत्रकारों को फॉलो करें। हालाँकि, यह कहना सम्भव नहीं होगा कि ऐसे लोगों के आदर्श क्या इन्हें इस कट्टरता के लिए प्रेरित करते हैं या फ्री ये लोग स्व-प्रेरणा से ऐसा फैसला लेते हैं।

Video: मजार के अंदर सेक्स रैकेट, नासिर उर्फ़ काले बाबा को लोगों ने रंगे-हाथ पकड़ा

लखनऊ में एक चौंकाने वाली घटना में मजार के एक संरक्षक काले बाबा उर्फ़ नासिर को एक सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ‘एशिया नेट न्यूज़’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके के हुसैनाबाद में स्थित जामा मजार के केयर टेकर ‘काले बाबा’ कथित तौर पर इलाज के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करता था और देह व्यापार का धंधा भी चलाता था।

सोशल मीडिया पर नासिर उर्फ़ काले बाबा के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनमें मजार के अंदर बने कमरे में एक महिला और पुरुष को आपत्तिजनक हालत में देखा जा सकता है। यह खुलासा होने पर मौके पर जमा हुई भीड़ नासिर उर्फ़ काले बाबा को मजार से बाहर घसीट लाई और पिटाई के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया।

जाँच में पता चला कि आरोपित नासिर उर्फ काले बाबा नाम का व्यक्ति मजार में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चला रहा था। स्थानीय लोगों को बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) सुबह उस पर शक हुआ तो वह कमरे में गए। वहाँ देखा कि एक महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में लिप्त थे। जिसका वीडियो भी बनाया गया है।

नोट : इस वीडियो में अश्लील दृश्य शामिल हैं, सिर्फ वयस्क ही इसे देखें

काले बाबा इलाज के नाम पर करता था शोषण

रिपोर्ट्स के अनुसार, लोगों ने बताया कि आरोपित नासिर उर्फ़ काले बाबा महिलाओं को इलाज के नाम पर अपने पास बुलाता था और फिर उनके सफेद दाग या बच्चे न होने की समस्या का इलाज करने का दावा करता था। इसी की आड़ में वह महिलाओं से जिस्म का धंधा भी करवाता आया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से उन्हें मजार के अंदर गलत काम होने की शिकायतें मिल रही थी, जिसके बाद अचानक लोग मजार में घुस गए। एसीपी चौक आईपी सिंह ने बताया कि मजार संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा रहा है।

शिया विरोधी दंगों की खबर ट्वीट करने पर ट्विटर ने दिया भारतीय सम्पादक को ‘पाकिस्तानी कानून’ वाला नोटिस

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर विचारधारा को लेकर उसके पूर्वग्रह के कारण अनेकों बार आरोप लगते आए हैं। इस बार ट्विटर ने दक्षिणपंथी पोर्टल ‘ऑर्गनाइज़र’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर की एक रिपोर्ट पर यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि यह पाकिस्तानी कानून का उलंघन करती है।

दरअसल, ‘ऑर्गनाइज़र’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने ट्विटर पर पाकिस्तान में शिया समुदाय के विरोध में सुन्नी समुदाय के प्रदर्शन से सम्बन्धित एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस पर प्रफुल्ल केतकर ने एक ट्वीट करते हुए बताया – “दोस्तों, ट्विटर ने मुझे पाकिस्तान में सुन्नियों का शियाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की ‘ऑर्गनाइजर’ की एक तथ्यों पर आधारित कहानी शेयर करने के लिए नोटिस भेजा है। ट्विटर का दावा है कि इसने पाकिस्तान के कानून का उलंघन किया है। खुद देखिए और ट्विटर के पूर्वग्रहों पर विचार करिए।”

प्रफुल्ल केतकर ने ऑर्गनाइजर की जो रिपोर्ट शेयर की थी उसका शीर्षक था- “काफिर काफिर शिया काफिर, पाकिस्तान में शिया (समुदाय) का उत्पीड़न जारी है।”

यह रिपोर्ट सितम्बर माह में पाकिस्तान में भड़के शिया विरोधी प्रदर्शनों के सम्बन्ध में है। दरअसल, पाकिस्तान के कराची में हजारों लोग शिया-विरोधी प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए थे। सोशल मीडिया पर लोग इससे जुड़े पोस्ट, फोटो और वीडियो शेयर कर रहे थे। इस दौरान ‘शिया काफिर हैं’ के नारे बुलंद किए गए और आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के बैनर लहराए गए। यह संगठन शियाओं की हत्या के लिए ही कुख्यात है।

ऐसे में ट्विटर का एक भारत के नागरिक को पाकिस्तान के नियमों का हवाला देना ट्विटर की कार्यशैली के साथ ही उनकी मंशा पर भी सवाल खड़े करता है। यह ऐसा ही है जैसे स्विट्जरलैंड के कई इलाकों में रात के दस बजने के बाद टॉयलेट में फ्लश करना गैरकानूनी है और यदि भारत में बैठा कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे स्विट्जरलैंड के इस कानून का हवाला देकर धमकाया जा रहा हो।

नया नहीं है ट्विटर का दक्षिणपंथ के प्रति पूर्वग्रह

ट्विटर पर ऐसे आरोप कई बार लगते आए हैं जब उन्होंने किसी मजहब विशेष के लिए दक्षिणपंथियों को निशाना बनाया हो। हाल ही में ट्विटर ने लेह की ‘जियो लोकेशन’ जम्मू कश्मीर, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना में दिखाई थी। यही नहीं, पेरिस में शिक्षक की गला काटकर हत्या करने की घटना की निंदा करने पर ट्विटर ने एक दक्षिणपंथी अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया। ट्विटर ने उसे हेट स्पीच करार दिया था।

चीनी Huawei, ZTE को स्वीडन ने भी प्रतिबंध लगा कर भगाया, कहा – ‘चोरी करके अपनी सेना की ताकत बढ़ा रहा था’

यूरोपीय देशों की तर्ज पर स्वीडन ने भी चीन की दूरसंचार कंपनियों हुआवे और ज़ेटीई (Huawei, ZTE) की 5-जी योजना पर प्रतिबंध लगा दिया है। ख़बरों के मुताबिक़ स्वीडन के दूरसंचार विनियामक ने मंगलवार (20 अक्टूबर 2020) को इस बारे में आदेश जारी करते हुए कहा कि उन्हें सेना और सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से सुझाव मिला है, जिसके बाद दोनों समूहों की 5-जी इंस्टॉलेशन परियोजना और अगले महीने होने वाले स्पेक्ट्रम आवंटन पर पाबंदी लगा दी गई। 

चीन पर जासूसी और तकनीक चोरी का आरोप लगाते हुए स्वीडन के दूरसंचार विनियामक ने दूरसंचार ऑपरेटर्स को आदेश दिया कि वह इन समूहों के बनाए उपकरणों को बाहर करें। इसके अलावा साल 2025 तक यह आदेश पूरी तरह लागू हो जाना चाहिए। इसके बाद स्वीडन के दूरसंचार विनियामक ने कहा कि कुल 4 वायरलेस कैरियर्स आगामी स्पेक्ट्रम आवंटन (5-जी) में फ्रीक्वेंसी के लिए बोली लगाएँगे, इनमें से कोई भी हुआवे या ज़ेटीई का उपकरण इस्तेमाल नहीं करें। चीनी उपकरणों पर प्रतिबंध लगने के बाद स्वीडन के समूह इरिक्सन (Ericsson) और फ़िनलैंड के समूह नोकिया (Nokia) के लिए बाज़ार का दायरा कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा। 

स्वीडन की सुरक्षा सेवा के मुखिया क्लास फ्रिबेर्ग ने कहा, “चीन हमारे देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। चीन हमारे देश से खुफ़िया जानकारी और तकनीक चुरा कर, अनुसंधान और जासूसी करके अपनी सेना की क्षमता बढ़ा रहा था और अर्थव्यवस्था को बेहतर कर रहा था। हमें भविष्य में 5-जी नेटवर्क पर काम करते हुए इन बातों का ख़ास तौर पर ध्यान रखना होगा। हम स्वीडन की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं।”

अमेरिका और यूरोपीय देशों की तर्ज पर स्वीडन ने प्रतिबंधित किया चीन का 5-जी नेटवर्क

पश्चिम के कई देशों द्वारा यह कदम उठाए जाने के बाद स्वीडन ने चीन के दूरसंचार समूहों के 5 जी मॉड्यूल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। जिसमें अमेरिका और यूरोप के कई देश मुख्य हैं यानी स्वीडन में स्थापित होने वाले 5 जी नेटवर्क में चीनी समूहों के उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। अमेरिका समेत यूरोप के कई देशों ने यह कहते हुए चीनी समूह को प्रतिबंधित किया था कि वह बीजिंग से जासूसी करते हैं। 

अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (FCC) ने हुआवे और ज़ेटीई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया था। ऐसा करने का एक बड़ा कारण यह भी था कि अमेरिका के बाज़ार से चीनी निर्माताओं को बाहर करना। इसके पहले मई महीने में अमेरिकी प्रशासन ने हुआवे को अमेरिकी तकनीक और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने से रोक लगाई थी। इस साल के जुलाई महीने में ब्रिटेन सरकार ने कहा था कि 2027 के पहले वहाँ के 5-जी नेटवर्क से हुआवे के सारे उपकरण हटा दिए जाएँगे। ब्रिटेन, यूरोप में ऐसा करने करने वाला पहला देश था। 

क्वालकॉम के साथ मिल 5-जी नेटवर्क पर काम करेगा Jio

चीनी समूह हुआवे पर इतने बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगने के दौरान मुकेश अंबानी के जियो ने भारत में 5 जी नेटवर्क पर काम करने के लिए क्वालकॉम के साथ समझौता किया है। अपने बयान में जियो ने कहा कि अमेरिका की रेडिसिस कॉर्प (Radisys Corp) ने क्वालकॉम के साथ मिल कर भारत में 5जी नेटवर्क की संरचना को स्थापित करने के समझौता किया है। 

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि जियो 5-जी के परीक्षण के दौरान उन्हें 1 जीबीपीएस प्रति सेकेंड की रफ़्तार मिली थी। जियो और क्वालकॉम ने यह भी कहा था कि वह भारत में 5 जी नेटवर्क के फास्ट ट्रैक विकास के लिए और बिना किसी व्यवधान के चलने वाला नेटवर्क बनाने पर काम कर रहे हैं। अमेरिका, दक्षिण कोरिया, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे कुछ ही देश हैं, जहाँ 5 जी इस्तेमाल करने वालों को 1 जीबीपीएस की रफ़्तार मिलती है। 

जियो और क्वालकॉम के साथ आने के बाद भारत को चीन के हुआवे और ज़ेटीई की आवश्यकता नहीं है और न ही इनके उपकरणों की है। यानी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से भी एक ख़तरा टल गया। साल 2021 तक संभावित तौर पर भारत में 5 जी नेटवर्क प्रभावी हो जाएगा।      

‘उस टीचर का गला काट कर कोई अपराध नहीं किया, पैगंबर के अपमान की सजा केवल मौत’ – इस्लामी स्कॉलर अल यूसुफ

पेरिस में इतिहास के शिक्षक सैम्यूल पैटी की हत्या के बाद हर जगह इस कृत्य की निंदा की जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने तो घटना को आतंकी हमला करार दे दिया है। ऐसे में एक इस्लामी बुद्धिजीवी का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह कहते सुने जा रहे हैं कि युवक ने शिक्षक का गला काटकर कोई बड़ा अपराध नहीं किया।

तुर्की चैनल को दिए इंटरव्यू में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स के शेख अल यूसुफ ने कहा कि इस्लामी कानून के मद्देनजर युवक ने कोई गंभीर अपराध नहीं किया। इस्लामी बुद्धिजीवी मानते हैं कि युवक ने ऐसा कुछ नहीं किया जो आपत्तिजनक हो।

अल युसूफ के अनुसार, पैगंबर के अपमान की सजा केवल मौत होती है। युवक की गलती बस ये थी कि उसने खुद दंड देने का फैसला किया। शरीया के अनुसार, ये दंड आईएस (इस्लामिक स्टेट) देता है। वह आगे कहते हैं:

जैसा कि मैंने आपको बताया कि अगर यह साबित होता है कि यह करने वाला चेचन मुस्लिम (Chechen Muslim) था और उसने यह सब पैगंबर मोहम्मद के अपमान के कारण गुस्से में किया , और यदि वह मजहबी था, जिसने शरीया के बचाव में यह कदम उठाया, तो हमें उसका फैसला अल्लाह को करने देना चाहिए। हो सकता है उसने इस्लामी कानून के तहत सजा दी हो।

इस्लामी कट्टरपंथी ने तुर्की चैनल पर बात करते हुए कहा कि लोगों को इस बात पर गौर करना चाहिए कि आखिर किस कारण युवक ऐसा करने के लिए मजबूर हुआ। युवक के पूरे अपराध का सामान्यीकरण करते हुए युसूफ ने कहा कि फ्रांस में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा था, जो ऐसी प्रतिक्रियाओं के लिए उकसा रहा था, जैसा कि फ्रेंच शिक्षक के केस में हुआ।

इस्लामोफोबिया के सिर पूरे कृत्य का ठीकरा फोड़ते हुए इस्लामी बुद्धिजीवी ने कहा कि फ्रांस में इस्लाम के ख़िलाफ़ हमले हो रहे हैं। पिछले दिनों में भी देखने को मिला कि यहाँ इस्लाम, व पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ मीडिया में, राजनीति में, सांस्कृतिक और वैचारिक तौर पर अभियान चल रहा है। इसके साथ ही मजहबी प्रतीकों, जैसे हिजाब पर हमले हो रहे हैं।

मजहबी बुद्धिजीवी ने कहा इस्लाम फ्रांस में दूसरा सबसे बड़ा धर्म था और पहले नंबर पर यूरोप था। पश्चिम के लोग असहज हैं और सोचते हैं कि इन (इस्लाम) पर हमला किया जाना चाहिए। ऐसे लोग नहीं चाहते कि इस्लाम आगे बढ़े। वह आगे कहते हैं:

मैं इन सभी कार्यों के प्रकाश में कहना चाहूँगा कि हमें उन लोगों पर भी नजर डालनी चाहिए जो भड़काने और विकृत करने का कार्य करते हैं व जो पैगंबर मोहम्मद पर हमला करते हैं, वो भी उस देश में जो धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक होने का दावा करता है, मानवाधिकारों, धर्म, मत और विचार के सम्मान का दावा करता है। मुझे नहीं मालूम कि इस्लामी प्रतीकों का दमन, उनका अपमान और उन पर हमला, किस प्रकार का सम्मान है। यही दिक्कत है। शरीया के मुताबिक इस कृत्य पर और उसक जजमेंट पर बात करने से पहले हमारा मत है कि हमें उन सभी शत्रुतापूर्ण और घृणित कार्यों पर ध्यान देना चाहिए जो कई वर्षों से मजहब के खिलाफ हो रहे हैं और उन्हें सरकार का व चरमपंथियों का समर्थन है ताकि पश्चिम में इस्लाम की छवि खराब की जा सके।

गौरतलब है कि कट्टरपंथियों का ऐसा चेहरा हैरान करने वाला नहीं है। जब शार्ली एब्दो पर हमला हुआ, तब भी विश्वभर के इस्लामियों ने ऐसी ही प्रतिक्रिया दी थी। पाकिस्तान में तो सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया था और फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार की बात की थी।

ऐसे ही भारत में भी पैगंबर मोहम्मद पर अपना बयान देने के कारण कमलेश तिवारी को इस्लामी कट्टरपंथ का शिकार होना पड़ा था। कई लोगों ने उनके ख़िलाफ़ मार्च निकाला था और उस समय की यूपी सरकार ने तब उन्हें एनएसए के तहत जेल में भी डाला था। हालाँकि, कानूनी सजा मिलने के बाद उनके ऊपर से खतरा खत्म नहीं हुआ और साल 2019 में उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। पड़ताल में मालूम चला था कि उनकी हत्या की साजिश कई समय से चल रही थी और इसके पीछे दुबई तक के तार जुड़े थे

चीन का पैसा खाने वाले ‘एक्सपर्ट’ जो खाते यहाँ का हैं, गाते उधर का: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Paid experts’ spurious narrative

आप लोगों ने सोशल मीडिया पर देखा होगा कि कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अर्थव्यवस्था डूब रही है, ‘आत्मनिर्भर भारत’ एक स्कैम है। एक्सपर्ट मीडिया चौनलों पर जाकर आत्मनिर्भर भारत के लिए दिए गए पैकेज को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ नकारात्मक तरीके से कैंपेनिंग की जा रही है। भारत के ‘आत्मनिर्भर’ होने पर वामपंथी ‘एक्सपर्ट’ दुखी हैं और यत्र-तत्र-सर्वत्र नकारात्मक बातें लिख-बोल रहे हैं।

हम सभी जानते हैं कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति क्या है? चाहे वो पिछली सरकारों की उदासीनता रही हो या विजन का अभाव रहा हो। शर्ट के बटन से लेकर मोबाइल, आईपैड, ई-रिक्शा की बैटरी, हर कुछ चीन से इम्पोर्ट हो रहा है, क्योंकि यहाँ पर व्यापक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग नहीं हो रही है। चीन हमारे खिलाफ है। वो सीमा पर क्या कर रहा है, ये किसी से छुपा नहीं है। तो आप इसका जवाब कैसे दोगे? हम चरणबद्ध तरीके से उस पर वार करेंगे।

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