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नक्सलवाद कोरोना ही है, राजद-कॉन्ग्रेस नया कोरोना आपके बीच छोड़ना चाहते हैं: योगी आदित्यनाथ

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए आए उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ का बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को बिहार में दूसरा दिन था। बुधवार को उन्‍होंने जमुई, भोजपुर के तरारी तथा पटना के पालीगंज विधानसभा क्षेत्रों में जनता से राष्‍ट्रीय जनांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रत्‍याशियों के लिए वोट माँगे।

इस दौरान उन्होंने वहाँ की जनता को संबोधित करते हुए कहा, “बीमारी में बचाव ही सर्वोत्तम उपाय है और ये बचाव वैसे ही जैसे इस भोजपुर क्षेत्र के लोगों ने नक्सलवाद से बचाव किया था। ये नक्सलवाद भी तो एक कोरोना ही है। इसका संक्रमण भी बहुत तेज फैलता है। लेकिन आपने बचाव किया, तो नक्सलवाद स्वाहा हो गया। ऐसे ही बचाव अगर कोरोना से करेंगे, तो कोरोना हमेशा के लिए समाप्त होगा।”

सीएम योगी ने कहा कि अब राम मंदिर बनने से पहले परिवारवाद, नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद व जातिवाद का भी राम नाम सत्य होगा। अब कोई नहीं कह सकता कि भारत तेरे टुकड़े होंगे, क्योंकि भारत अब एक श्रेष्ठ भारत है। हमारे लिए जनता ही परिवार है, लेकिन उनके लिए परिवार ही पार्टी और पार्टी ही बिहार है। कॉन्ग्रेस और आरजेडी आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं। कॉन्ग्रेस गरीबों का राशन डकारती रही तो आरजेडी ने बेजुबान जानवरों का चारा भी नहीं छोड़ा। दोनों राजनीतिक दल नहीं, परिवार हैं। इनके एजेंडे में परिवार ही सर्वोपरि है।

श्रेयसी सिंह के समर्थन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा करते हुए कहा जो भी भारत के हितैषी हैं वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता पाकिस्तान की तारीफ करते हैं। कुछ लोग को कश्मीर से धारा 370 हटाने पर बहुत पीड़ा हुई। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और ओवैसी को इतनी पीड़ा हुई थी वे बार-बार इसका विरोध करते रहे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी जानते हैं कि भारत के खिलाफ अगर कुछ भी करेंगे तो भारत की सेना घुसकर मारेगी।

इसके बाद आज की तीसरी जनसभा पटना के पालीगंज विधानसभा में थी जहाँ बोलते यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज बिहार पर ज़िम्मेदारी है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में काफी हद तक कोरोना से लड़ाई जीत चुके हैं। राजद और कॉन्ग्रेस एक नए कोरोना के रुप में भाकपा माले को लेकर आपके बीच छोड़ना चाहते हैं, ये कोरोना से कम नहीं है। 

अपनी रैली में सीएम योगी आदित्यनाथ ने नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा कि बीजेपी ने 12 करोड़ गरीबों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाया। 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए का सालाना स्वास्थ्य बीमा का कवर भी प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार ने दिलाया। हमारे गठबंधन का तो एक ही संकल्प है कि हमारे लिए पूरा देश ही परिवार है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए तो एक ही परिवार सब कुछ है। रही आरजेडी की बात तो इनके पोस्टरों में चार लोगों को छोड़ कभी किसी पाँचवें को जगह नहीं मिली। ऐसे लोगों को नकारें और विकास के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के हाथों को मजबूत करें।

साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जब भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था तो कॉन्ग्रेस के नेता कहा करते थे कि हम तब तक कुछ नहीं करेंगे जब तक कि पाकिस्तान परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करता। लेकिन अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भारतीय जवानों के सर्जिकल स्ट्राइक के डर से दुनिया में भागे-भागे फिर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने किया जातीय हिंसा भड़काने के आरोपित PFI सदस्य सिद्दीक कप्पन की मदद का वादा, परिवार से की मुलाकात

राहुल गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कथित पत्रकार व PFI सदस्य सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) के परिवार से मिलकर उनकी मदद का आश्वासन दिलाया है। केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक को हाथरस मामले के मद्देनजर उत्तर प्रदेश जाते समय टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया गया था। उस पर PFI से जुड़े होने और जातीय हिंसा फ़ैलाने की कोशिश के आरोप हैं। सिद्दीक कप्पन इस वक्त उत्तर प्रदेश की मथुरा अस्थायी जेल में बंद है।

सूचना के अनुसार, आज कालापेट्टा के रेस्ट हाउस में कप्पन के घरवालों ने राहुल गाँधी से मुलाकात की। इस समय कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष वहाँ दौरे पर गए हुए हैं। परिवार ने इस मुलाकात में राहुल गाँधी से पूरे मामले में हस्तक्षेप की माँग करके पत्रकार की जल्द रिहाई करवाने की गुहार लगाई।

कॉन्ग्रेस सांसद से मुलाकात के बाद कप्पन की पत्नी रेहानथ ने बताया कि राहुल गाँधी उनके पति को रिहा कराने के लिए हर तरह से तैयार हो गए हैं। कथित पत्रकार की पत्नी ने यह भी कहा कि उनके पति को पुलिस ने हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया था और अब वह उनके लिए चिंतित हैं क्योंकि वकील भी उनसे नहीं मिल पा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हाथरस जाते हुए पिछले दिनों सिद्दीक कप्पन के साथ 3 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके ख़िलाफ़ संगीन अपराध करने की मंशा रखने के शक में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत मामला दर्ज हुआ था। बाद में यह केस राजद्रोह और आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज कर लिया गया। 7 अक्टूबर को इन चारों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और अब उनकी हिरासत फिर बढ़ा दी गई है।

ज्ञात हो कि 6 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए चारों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), आईपीसी की 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। fIR में बताया गया था कि अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीकी कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।

यहाँ बता दें कि राहुल गाँधी द्वारा कप्पन की रिहाई पर हस्तक्षेप की बात सामने आते ही उनपर सवाल उठने लगे हैं। यूपी सीएम के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा,

“छुप कर हुई मुलाक़ात के बाद हाथरस के बहाने, यूपी को जलाने के खेल में कॉन्ग्रेस के हाथ का इससे बड़ा सुबूत क्या हो सकता है, भला। राहुल जी और उनकी कॉन्ग्रेस हर हाल में हिंदुओं को विखंडित करना चाहते हैं, PFI के दंगाइयों और CAA के बलवाइयों से कॉन्ग्रेस का रिश्ता अब तो जगज़ाहिर है।”

पेरिस: ‘घटिया अरब’ कहकर 2 बुर्के वाली मुस्लिम महिलाओं पर चाकू से हमला, कुत्ते को लेकर हुआ था विवाद

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाने पर पेरिस में एक शिक्षक की इस्‍लामी कट्टरपं‍थी द्वारा गला काटने की घटना के बाद पेरिस में एफिल टॉवर के नीचे दो मुस्लिम महिलाओं को कई बार चाकू मारकर घायल कर दिया गया। इस दौरान ‘घटिया अरब’ (Dirty Arabs) कहकर उन्‍हें गाली भी दी गई। इस बीच फ्रांस की पुलिस ने दो संदिग्‍ध महिलाओं को इस हमले के बाद गिरफ्तार किया है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने जिन महिलाओं को हिरासत में लिया है, वे ‘श्वेत महिलाएँ’ हैं और ‘यूरोप की लग रही’ हैं। पेरिस के अभियोजकों ने कहा कि इन महिलाओं के खिलाफ अब हत्‍या के प्रयास का मुकदमा चलेगा। इस हमले में घायल महिलाओं की पहचान अल्‍जीरिया मूल की फ्रांसीसी महिला केन्‍जा और अमेल के रूप में हुई है। केंजा को 6 बार चाकू मारा गया और उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है

कई लोगों ने इस हमले की तस्‍वीरें भी शेयर की

अमेल को भी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है और उनके हाथों की सर्जरी हुई है। इस हमले के बार में आधिकारिक सूचना नहीं आने से सोशल मीडिया पर लोगों में जमकर उबाल देखा गया। कई लोगों ने इस हमले की तस्‍वीरें भी शेयर की हैं। हमले की यह घटना रविवार रात की बताई जा रही है। पेरिस पुलिस ने एक बयान जारी करके कहा कि 18 अक्‍टूबर को रात करीब 8 बजे पुलिस को सूचना मिली कि दो महिलाएँ चाकू के हमले में घायल हैं।

पेरिस पुलिस के सूत्रों ने डेली मेल को बताया कि चाकू से हमला करने के मामले में हत्‍या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जाँच जारी है। हमले की शिकार हुई एक महिला ने अपना चेहरा बुर्के से ढक रखा था। केंजा ने बताया कि वो वॉक करने के लिए गए थे। एफिल टॉवर के पास एक हल्‍के अंधेरे वाला पार्क है और वो वहाँ पर थोड़ा घूमने लगे।

कुत्ते के भौंकने को लेकर शुरू हुआ था विवाद

केंजा ने कहा, “जब हम घूम रहे थे, उसी समय दो कुत्ते हमारी तरफ आ गए। इससे हमारे बच्‍चे डर गए। मेरी कजिन अमेल ने बुर्का पहन रखा था। उसने कुत्ते की साथ आई दो महिलाओं से अनुरोध किया कि बच्‍चे डर रहे हैं, इसलिए वे अपने कुत्ते को थोड़ा दूर लेकर चली जाएँ। इस अनुरोध के बाद कुत्ते की मालकिन ने जाने से मना कर दिया और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।” इसके बाद कुत्‍ते के साथ आई महिलाओं ने कथित रूप से चाकू निकला और केंजा तथा अमेल पर हमला कर दिया।

गौरतलब है कि 15 अक्बूर को स्कूल टीचर सैमुअल पेटी ने छात्रों के साथ पैगंबर कार्टून को लेकर चर्चा की। इसके बाद पेरिस में सड़क पर उनकी गला काटकर हत्या कर दी। इसके विरोध में फ्रांस की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। टीचर के सर्मथन में फ्रांस की सड़कों पर रैलियाँ निकाली गईं, जिसमें कई बड़े नेताओं ने भी भाग लिया।

47 वर्षीय इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को फ्रांस ने अपना सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने का फैसला किया है। यह घोषणा मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) की सुबह बीएफएम टीवी को दिए एक इंटरव्यू में वहाँ के शिक्षा मंत्री जीन-मिशेल ब्लैंकर (Jean-Michel Blanquer) ने की। इस सर्वोच्च पुरस्कार का नाम ‘ला लिगियन डी ऑनर’ (Legion d’Honneur) है।

2015 में भी हुआ था विवाद

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर इससे पहले वर्ष 2015 में विवाद हुआ था। उस दौरान फ्रांस के शार्ली एब्दो पत्रिका के दफ्तर पर हमला किया गया था और 12 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

शीना बोरा की गुमशुदगी के बारे में जानते थे परमबीर सिंह, फिर भी नहीं हुई थी FIR

रिपब्लिक चैनल से जारी विवाद के बीच मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के करियर से जुड़े कई खुलासे सामने आए और चर्चा का विषय हैं। इसी कड़ी में अब परमबीर सिंह का नाम शीना बोरा केस से भी जुड़ गया है और पता चला है कि वो शीना बोरा की गुमशुदगी के बारे में भी जानते थे।

शीना बोरा केस सबसे पेचीदा और रहस्यमयी मामलो में से एक है। शीना बोरा के अचानक गायब होने व हत्या का पता चलने की इस घटना को 4 साल बीत गए हैं। बाद में जाकर इस केस में उनकी माँ इंद्राणी मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था। इंद्राणी काफी समय तक शीना को अपनी बहन बताती थीं।

24 अप्रैल 2012 को शीना ने मुंबई मेट्रो वन लिमिटेड कंपनी से छुट्टी ली और छुट्टी लेने के कुछ देर बाद ही उसने ईमेल के जरिए रिजाइन दे दिया। वह अपनी माँ इंद्राणी मुखर्जी (INX मीडिया की पूर्व सीईओ) के पति पीटर मुखर्जी (स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ) के बेटे राहुल मुखर्जी के साथ रिलेशन में थीं। इंद्राणी हमेशा उन्हें लेकर कहती थी कि वह उनकी बहन हैं। 

24 तारीख के बाद शीना कभी किसी को नहीं नजर आईं। माना गया कि उनकी हत्या उसी रात हुई। इंद्राणी व उनके पूर्व पति संजीव खन्ना के ऊपर इसका इल्जाम लगा। कहा जाता है कि हत्या से पहले इंद्राणी ने उस जगह की रेकी भी कर ली थी जहाँ शव को फेंका जाना था। उन्होंने उसके शव को अपने घर वर्ली में भेजा जहाँ उसके शव को कथिततौर पर सूटकेस में भरा गया। अगले दिन उसे मुंबई के नजदीक रायगढ़ ले जाया गया और फिर उस बैग को आग लगा दी गई।

23 मई 2012 को पेन तहसील के ग्रामीणों ने बदबू आने और शव मिलने की शिकायत करवाई। शव ऐसे जला था कि उसको पहचाने जाने का कोई सुराग नहीं मिला।  3 साल बाद जब इंद्राणी का ड्राइवर श्यामवर राय किसी दूसरे केस में फँसा तो उसने शीना बोरा केस का खुलासा किया।

शीना के गायब होने की बात जानते थे परमबीर सिंह

अब रिपोर्ट्स बताती हैं कि 24 अप्रैल 2012 को शीना जब गायब हुई तो राहुल मुखर्जी और इंद्राणी, परमबीर सिंह के पास गए। वह उस समय कोंकण रेंज के आईजी हुआ करते थे। उन्होंने राहुल से शीना के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करवाने को कहा भी, जिसका मतलब साफ है कि उन्हें शीना की गुमशुदगी की बात पता थी। लेकिन दिलचस्प चीज यह है कि वह रिपोर्ट कभी फाइल ही नहीं हुई।

26/11 और परमबीर सिंह का नाम

पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त हसन गफ्फूर ने कई पुलिस अधिकारियों पर आतंकवादी के ख़िलाफ एक्शन न लेने का इल्जाम लगाया था। हालाँकि परमबीर सिंह ने इसके बाद उन्हें मानहानि के इल्जाम में कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी और खुद का बचाव यह कहकर किया था कि जब वह होटल ताज व ओबरॉय में थे तब कई चैनल ने उन्हें टीवी पर दिखाया। यहाँ बता दें कि 26-11 के दौरान टीवी पर प्रसारण का आतंकियों को बहुत फायदा मिला था।

‘बुरा पुलिस’ कहने पर परमबीर सिंह ने पूर्व मुंबई कमिश्नर से मँगवाई थी माफी

साल 2018 के जुलाई में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त जूलियो रिबेरो ने एक लेख लिखा था जिसमें बताया गया था कि दो अधिकारी पुलिस आयुक्त की पोस्ट के लिए लड़ रहे हैं। इस आर्टिकल में सिंह का बिना नाम लिए दो प्रतिद्वंदियों को ‘अच्छा पुलिस’- ‘बुरा पुलिस’ कहा था। बाद में ऐसा माना गया था कि इस लेख में जिसे बुरा पुलिस कहा गया वह परमबीर सिंह ही थे। इस लेख पर कार्रवाई करते हुए सिंह ने रिबेरो से माफी मंगवाई थी और उन्हें धमकी भी दी थी।

साध्वी प्रज्ञा के कारण भी आए चर्चा में

परमबीर सिंह अपने करियर में साध्वी प्रज्ञा के कारण भी सुर्खियों में आए थे। उस समय वह एटीएस हुआ करते थे। साध्वी प्रज्ञा ने इल्जाम लगाया था कि उन्हें एटीएस द्वारा यातनाएँ दी गईं ताकि वह ‘भगवा आतंकवाद मामले’ में जुर्म को कबूलें। साध्वी प्रज्ञा ने गंभीर आरोप लगाते हुए यह तक कहा था कि उन्हें गैर कानूनी हिरासत में लिया गया और 13 दिन तक प्रताड़िता किया गया। 

अजित पवार को क्लिन चिट देकर बने थे चर्चा का हिस्सा

गौरतलब हो कि परमबीर सिंह 1988 बैच के आईपीएस हैं। फरवरी में उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त चुना गया। इससे पहले वह गैर भ्रष्टाचार ब्यूरों के डीजी हुआ करते थे। वह पिछले साल भी अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लिन चिट देने के कारण चर्चा में आए थे।

हिन्दू त्योहारों पर वामी-जिहादी गिरोह से कैसे निपटें?| Ajeet Bharti on Tackling Hinduphobia during festivals

भारत में हिंदुओं के हर त्योहार के पहले वामपंथियों, जकातियों, इस्लामी कट्टरपंथियों का एक गिरोह अचानक से सक्रिय हो जाता है। वह हर त्योहार में ये ज्ञान देने लगता है कि कहाँ क्या गलत है? इनके ऐसा करने का एक ही उद्देश्य होता है गाली सुनना और फिर इसको लेकर विक्टिम कार्ड खेलना। महिला होने का मतलब ये नहीं कि बेहूदगी करते रहो और सामने वाला सहता रहे कि ये तो महिला है, इसे कैसे जवाब दें?

हाल ही में कठुआ कांड में कुख्याति पाने वाली दीपिका नामक वकील ने किसी के द्वारा बनाए गए कार्टून को शेयर किया, जसमें नवरात्रि को लेकर भद्दा सा चित्रण था। दीपिका ने स्पष्ट रूप से लिखा नहीं था कि वो अपनी व्यथा कह रही है या कुछ और। अगर उनके घर में ऐसा होता है तो मेरी सहानुभूति उनके साथ है, अगर नहीं तो समाज के बारे में बेहूदगी दिखाने की आवश्यकता नहीं है।

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गया के केनार चट्टी गाँव के कारीगर, जो अब बन चुके हैं मजदूर। Bihar Elections Ground Report: Wazirganj, Gaya

बिहार की वैसी जगहों से ऑपइंडिया लगातार आप तक ग्राउंड रिपोर्ट्स ला रहा है, जो वहाँ की असली कहानी बताती है। इसी शृंखला में मैं आज गया जिले के केनार चट्टी गाँव गया। जो पहले बर्तन उद्योग के लिए जाना जाता था, अब वो मजदूरों का गाँव बन चुका है।

हमने इस मुद्दे पर यहाँ के स्थानीय निवासी से बात की और जानने की कोशिश की कि इस तरह के हालत कब और क्यों बन गए। उन्होंने बताया कि जहाँ 20 साल पहले 40-50 घर इस उद्योग में शामिल थे, वहीं अब महज 4-5 घर ही इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस उद्योग से संबंधित हर जानकारी हमारे साथ साझा की। 

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रवीश की TRP पर बकैती, कश्मीरी नेताओं का पक्ष लेना | Ajeet Bharti on Ravish’s TRP, Kashmir leaders

पिछले 10 दिनों में रवीश कुमार ने जिन मुद्दों पर बात की, उसमें सबसे मुख्य मुद्दा TRP है। जिस पर उन्होंने पत्रकारिता को लेकर ज्ञान दिया कि TRP का कोई मतलब रह गया। इसके बाद बिहार चुनाव और फिर राहुल गाँधी को एक साहसी नेता बताते हुए उनमें काफी संभावनाएँ देखी। उसके बाद नक्सलियों के ऊपर किस तरह से फर्जी केस बनाकर फँसा दिया जाता है, इस पर बात की। उन्होंने पीएम के ऊपर भी फब्तियाँ कसीं।

TRP पर ज्ञान देते हुए उन्होंने बहुत ही गूढ़ बातें कहीं। उन्होंने दर्शकों को सख्त बनने के लिए कहा। TRP पर रवीश ने पूछा कि मीटर दलित-मुस्लिम के घर है कि नहीं? अगर केबल वाले मीटर की तार काट देंगे तो फिर तो लोग उनका शो कैसे देखेंगे? रवीश यह बात नहीं स्वीकार पा रहे हैं कि उनकी स्वीकार्यता अब खत्म हो चुकी है। वो टॉप 10 चैनल से भी बाहर हैं।

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TRP मामले की जाँच अब CBI के पास, UP में दर्ज हुई अज्ञात आरोपितों के खिलाफ शिकायत

TRP में गड़बड़ी का मामला अब CBI के हाथ में आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की सिरफारिश के बाद लखनऊ पुलिस से जाँच का सारा जिम्मा CBI ने ले लिया है। इस संबंध में हजरतगंज थाने में कमल शर्मा नाम के शख्स ने शिकायत करवाई थी। वह ‘गोल्डन रैबिट’ कंपनी के सीआईओ हैं। यह शिकायत अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज हुई थी।

इस केस को आईपीसी की धारा 120(ब), 34, 406, 408, 409, 420, 463, 465, 486 के तहत दर्ज किया गया था। इसके अलावा इसमें आरोप लगाया गया था कि टीआरपी में फर्जी साधनों का उपयोग करके टीआरपी हेरफेर को अंजाम दिया गया।

टीआरपी स्कैम में दर्ज हुई एफआईआर
टीआरपी स्कैम में दर्ज हुई एफआईआर

एफआईआर में BARC को लेकर कहा गया कि चूँकि BARC, जिसने 2015 में अपना काम शुरू किया था, वह भारत में TRP रेटिंग मुहैया कराने वाली एक मात्र संस्था बनी हुई है, ऐसे में उसका विश्वसनीय और पारदर्शी होना अनिवार्य है।

टीआरपी स्कैम में दर्ज हुई एफआईआर
टीआरपी स्कैम में दर्ज हुई एफआईआर

इसमें लिखा कि अगर BARC कुछ चैनलों के लिए साजिश के तहत टीआरपी संबंधित डेटा जोड़कर काम करता है तो भारत में प्रोग्राम प्रोडक्शन, विज्ञापन व अन्य चीजों के नतीजे गंभीर हो सकते हैं। इससे उस चैनल, जिसके लिए टीआरपी में हेरफेर की गई हो, उसको गलत रूप से वित्तीय लाभ भी हो सकता है।

अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें पता चला है कि कई चैनल और ब्रॉडकास्ट कंपनियों के साथ इन सबमें कई अज्ञात नाम हैं, जिन्होंने फायदा उठाने के लिए टीआरपी में हेरफेर की। सूचना से खुलासा हुआ है कि अज्ञात आरोपितों ने जानबूझकर एक साजिश के तहत व साझा इरादे के साथ न केवल टीआरपी से छेड़छाड़ की बल्कि घरों की पहचान भी लीक कर दी।

FIR में कहा गया कि इस तरह की गहरी साजिश किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकती। इसमें कई अज्ञात आरोपित हैं जो टीआरपी में गड़बड़ी करने के लिए एक इरादे के साथ इकट्ठा हुए और उद्देश्य की पूर्ती के लिए साजिश रची व उसे गलत तरह से हासिल भी किया। इसमें गलत टीआरपी के कारण विज्ञापनदाताओं को भ्रमित करके विज्ञापन के पैसे लेने की भी बात है। साथ ही ये भी कहा गया कि अगर चैनल की सही टीआरपी दिखाते तो उन्हें विज्ञापन के पैसे कभी नहीं मिलते।

शिकायत में ये भी कहा गया कि अगर टीआरपी के मुताबिक विज्ञापन दिए जाते हैं जैसे जितनी ज्यादा टीआरपी उतनी अधिक विज्ञापन का शुल्क, तो यह प्रत्यक्ष रूप से विश्वासघात है। इसके बताया गया है कि जहाँ मीटर लगाए जाते हैं वह भी गोपनीय होता है और इसका जिम्मा उस शख्स पर होता है जो उसे इंस्टाल करता है। उस व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह कोई गोपनीय सूचना लीक न करे और अगर वह ऐसा करता है तो यह गोपनीय के अनुबंध और विश्वासघात का अपराध है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपी सरकार ने इस संबंध में सीबीआई जाँच की माँग की थी। उससे पहले महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने टीआरपी केस में ही यह बात स्वीकार की थी कि टीआरपी मामले में दर्ज की गई एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं है। कोर्ट में उनके वकील ने भी माना कि रिपब्लिक आरोपित नहीं हैं। बता दें कि महाराष्ट्र राज्य और मुंबई पुलिस की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे। अर्नब गोस्वामी ने इस संबंध में मुंबई पुलिस कमिश्नर पर परमबीर सिंह पर 200 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा ठोका है।

क्या आप राहुल गाँधी और ओवैसी से देश के हितों की कल्पना करते हैं: योगी आदित्यनाथ

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों बिहार चुनावों के मद्देनजर रैलियाँ कर रहे हैं। कल रामगढ़ से शुरू हुई उनकी रैली अब जमुई तक पहुँच चुकी है। इस बार इस क्षेत्र से भाजपा की ओर से श्रेयसी सिंह उम्मीदवार हैं। उनके पक्ष में जमुई की जनता को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने राहुल गाँधी और ओवैसी को जमकर आड़े हाथों लिया।

उन्होंने कहा, “इस समय राहुल और ओवैसी पाकिस्तान की तारीफ कर रहे हैं। क्या आप इन दोनों से देश की हितों की कल्पना करते हैं? क्या ये देश का हित करेंगे? देश के दुश्मन जो भारत के अंदर आतंकवाद फैला रहा हो, जो उसके हित की बात कर रहा हो, उससे उम्मीद ही क्या कर सकते हैं?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रैली में कहा कि जो भी भारत के हितैषी हैं वे प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता पाकिस्तान की तारीफ करते हैं। कुछ लोगों को कश्मीर से धारा 370 हटाने पर बहुत पीड़ा हुई। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और ओवैसी को इतनी पीड़ा हुई थी वे बार-बार इसका विरोध करते रहे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी जानते हैं कि भारत के खिलाफ अगर कुछ भी करेंगे तो भारत की सेना घुसकर मारेगी।

उन्होंने लालू प्रसाद यादव के जंगलराज वाले दौर की तुलना नीतीश कुमार के समय से करते हुए कहा, “आज जो राशन मोदी और नीतीश जी के कारण गरीबों को प्राप्त हो रहा है, आखिर ये राशन लालू के शासनकाल में गरीबों को क्यों नहीं मिल पाता था? जिन लोगों ने गरीबों का राशन खाया क्या आप उन लोगों से उम्मीद करते हैं कि वो आप लोगों को रोज़गार देंगे?”

अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशी श्रेयसी सिंह की तारीफ की और कहा कि उन्होंने हर जगह जमुई का नाम रौशन किया है। अब वह पहला कदम बढ़ाकर राजनीति में आई हैं, अपने पिता के नक्शे कदम पर चलना चाहती है। उनके पास विकास के लिए विजन है।

आगे सीएम योगी ने राजद के तेजस्वी यादव पर हमला करते हुए पूछा, “राजद के युवराज 10 लाख युवाओं को रोजगार देने की बात करते हैं। उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि 15 वर्षों के शासनकाल में उनके पिता और माता जी ने कितने को नौकरी दी। अगर गरीबों के उत्थान के लिए थोड़ा भी सोचा होता तो गरीबों का मकान, गैस कनेक्शन से लेकर सारी सुविधाएँ मिल गई होती। राजद के पोस्टर में एक ही परिवार के 4 लोगों का फोटो है। रघुवंश बाबू इसी का विरोध किया करते थे।” उन्होंने कहा कि वैसे लोगों के लिए परिवार ही देश है जो सर्वोपरि है।

मुख्यमंत्री ने सबका साथ सबका विकास का आह्नान दोहराते हुए कहा, “सबका साथ, सबका विकास हमारा मंत्र है। हमारे लिए पूरा देश परिवार है, देश हित सर्वोपरि है। लेकिन बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनके लिए परिवार ही पार्टी है, पार्टी ही देश है। उससे बाहर ये देख ही नहीं सकते।”

बंद किया गया पेरिस का मस्जिद, हमास समर्थित समूह भी भंग: शिक्षक सैमुअल की श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहेंगे राष्ट्रपति मैक्रों

फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक इतिहास के शिक्षक सैमुअल की सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी की पढ़ाई के दौरान छात्रों को पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था। इस वारदात के बाद घृणा फैलाने वालों और इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच फ्रांस ने पेरिस के बाहर स्थित एक मस्जिद को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ‘The Grand Mosque of Pantin’ पर ताला जड़ दिया गया है।

ये मस्जिद फ्रांस की राजधानी पेरिस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक सबअर्ब में स्थित है, जो बाकी इलाकों से थोड़ा पिछड़ा हुआ है। इस मस्जिद ने अपने फेसबुक पेज पर शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या से पहले एक वीडियो जारी कर उनके खिलाफ घृणा फैलाई थी। प्रशासन ने मस्जिद के बाहर इसे बंद किए जाने का नोटिस चस्पा दिया है। फ्रांस में मजहब के आधार पर कट्टर शिक्षा देने वालों और देश की सुरक्षा में संभावित खतरा पैदा करने वाले विदेशियों पर कार्रवाई हो रही है।

इस मस्जिद को 6 महीने के लिए बंद किया गया है और बताया गया है कि ‘आतंकवादी घटनाओं से बचाव के एकमात्र कारण’ के लिए ऐसा किया गया है। फ्रांस के ‘Seine-Saint-Denis’ विभाग ने ये नोटिस जारी किया। ये भी पता चला है कि हत्यारा उस अभिभावक से संपर्क में था, जो शिक्षक के खिलाफ घृणा अभियान चला रहा था। साथ ही हमास के पक्ष में आए हुए पहले के एक आदेश को भी रद्द कर दिया गया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि देशवासी कार्रवाई चाहते हैं और सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। हत्यारे ने व्हाट्सप्प पर उस अभिभावक से चैट किया था, जिसकी बेटी ने पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाने वाले शिक्षक की शिकायत की थी। इसके बाद उस अभिभावक ने इसे ‘पोर्नोग्राफी’ बताते हुए उन्हें बरखास्त करने की माँग के साथ विरोध में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया था। हत्यारा अब्दुल्लाख भी पुलिस की गोली से मारा गया।

इस हत्याकांड के कुछ ही सप्ताह पहले फ्रेंच राष्ट्रपति ने ‘इस्लामी अलगाववाद’ के कारण चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है, जो पूरी दुनिया में ही संकटकाल से गुजर रहा है, सिर्फ फ्रांस में ही ऐसा नहीं है। फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड ने कहा कि देश ‘अंदर के दुश्मनों’ से लड़ रहा है। फ्रांस में सक्रिय हमास का समर्थन करने वाले समूह को भंग कर दिया गया है। उसके मुखिया अब्देलहकीम से पुलिस पूछताछ कर रही है।

वहीं अब मस्जिद के प्रबंधक मोहममद हेंनीचे ने अब वीडियो शेयर करने को लेकर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि ये वीडियो सिर्फ मुस्लिम छात्रों की चिंताओं के लिए शेयर किया गया था। साथ ही दावा किया कि इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। अब ‘Sorbonne’ विश्वविद्यालय में बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को उक्त शिक्षक को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों, पीड़ित परिवार और 400 अतिथि उपस्थित रहेंगे।

मंगलवार को संसद में भी इस घटना के कारण एक मिनट का मौन रखा गया। ‘Conflans-Sainte-Honorine’ में उसी दिन शाम को हजारों लोगों ने जमा होकर ‘मैं भी सैमुअल’ का नारा लगा आकर इस्लामी कट्टरपंथियों का विरोध किया। ‘शार्ली हेब्दो’ के अगले अंक में ‘सिर कटा हुआ गणतंत्र’ नाम से एक शीर्षक भी आने वाला है। इसके संपादकीय में बताया जाएगा कि कैसे ये हत्यारे लोकतंत्र का गला काटना चाहते हैं।

ज्ञात हो कि उधर वहाँ के 4 NGO ने ट्विटर के खिलाफ भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हेट स्पीच पर लगाम लगाने में विफल रहने के कारण उसे कोर्ट में घसीटा गया है। हत्यारे का सन्देश और शिक्षक के मृत शरीर के साथ तस्वीर ट्विटर पर डाली गई थी, जिससे वहाँ के कई संगठन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से खफा हैं। हत्यारे ने अपने ट्विटर अकाउंट से भी आपत्तिजनक चीजें डाली थीं। वहाँ के ये NGO सरकार के साथ खड़े हैं।