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जमुई से BJP प्रत्याशी श्रेयसी सिंह से चुनावी मुद्दों पर बातचीत। BJP’s Shreyasi Singh interview

बिहार की वैसी जगहों से ऑपइंडिया लगातार आप तक ग्राउंड रिपोर्ट्स ला रहा है, जो बिहार की असली कहानी बताती हैं। इसी शृंखला में मैं आज बिहार के जमुई गया जहाँ मैंने भाजपा प्रत्याशी श्रेयसी सिंह से चुनावी मुद्दों को लेकर बातचीत की। 

इस दौरान हमने उनसे उनके आदर्शों और विकास के पैमाने को जानने की कोशिश की। हमने श्रेयसी से यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने बीजेपी को ही क्यों चुना, जबकि उनके पास कई विकल्प थे। इसके अलावा, उन्होंने जमुई जैसी मुश्किल सीट को ही क्यों चुना, इस पर भी विस्तार से बातचीत की।

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‘लालू के रेल’ की तरह ही था बिहार का ‘चरवाहा विद्यालय’: जिस काम में लगे 6 विभाग, वो बना शराब, जुआ और ताश का अड्डा

लालू प्रसाद यादव के 15 साल के जंगलराज के दौरान अगर बिहार का सबसे ज्यादा किसी क्षेत्र में नुकसान हुआ, तो वो है – शिक्षा। शिक्षा के क्षेत्र में बिहार इतना पीछे चला गया, जिसकी कीमत उसे आज तक भुगतनी पड़ रही है। उस दौरान लालू यादव ने लाइमलाइट के लिए ‘चरवाहा विद्यालय’ जैसे प्रयोग तो किए, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। हाँ, बिहार की साक्षरता दर ज़रूर पानी माँगती हुई नज़र आई।

बिहार में मुजफ्फरपुर स्थित तुर्की में लालू यादव ने पहले ‘चरवाहा विद्यालय’ का उद्घाटन किया था। आज भी जाकर अगर आप इसकी हालत देखें तो आपको तरस आएगा। लालू यादव ने दावा किया था कि मवेशी चराने वाले बच्चे यहाँ पढ़ेंगे। लेकिन, वो इसका जवाब नहीं दे पाए कि आखिर बच्चे गाय-भैंस-बकरी चराएँगे ही क्यों? बच्चे सिर्फ शिक्षा क्यों नहीं लेंगे? सरकार का दावा था कि मवेशी चराने वाले बच्चे अपने जानवरों को आसपास छोड़ कर इस विद्यालय में पढ़ेंगे।

इसके लिए शिक्षकों की भी तैनाती की गई थी। लालू यादव द्वारा इसका उद्घाटन सुर्खियाँ भी बना था। गोपालगंज से लेकर गोरौल तक, हर जगह चरवाहा विद्यालय खुले। एक तरह से लालू यादव की सरकार ने बच्चों के मवेशी चराने को मान्यता दे दी और ये धारणा बना दी कि शिक्षा ज़रूरी हो या नहीं, लेकिन उनका मवेशी चराना ज़रूरी है। साथ ही उन्हें ज़िंदगी भर के लिए ‘चरवाहा’ के रूप में सीमित रखने का प्रयास किया।

लालू यादव ने ‘ओ गाय चराने वालों, भैंस चराने वालों.. पढ़ना-लिखना सीखो।‘ नारे के साथ बिहार या भारत ही नहीं बल्कि देश से बाहर भी अपनी सुधारवादी छवि बनाने की कोशिश की और 1-2 वर्षों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन उसके बाद न तो शिक्षकों का कोई अता-पता था और न ही छात्रों का। जिन छात्रों को गाय-भैंस चराने को कहा जाए और साथ ही चारा काट कर ले जाने की ड्यूटी भी हो, वो भला पढ़ेंगे कैसे?

उनकी शिक्षा के लिए अगर पहले से ही मौजूद विद्यालयों को संसाधन-संपन्न बनाया गया होता, या फिर नए भवन बनवा कर अच्छे शिक्षकों की भर्तियाँ होती, तो शायद बात बन सकती थी। बच्चों को आर्थिक सहायता दी जाती पढ़ने के लिए, तो तस्वीर दूसरी होती। लेकिन, लालू यादव को खबर बनवानी थी। मुजफ्फरपुर में ‘चरवाहा विद्यालय’ के लिए 25 एकड़ की भूमि दी गई थी और इसका उद्घाटन दिसंबर 23, 1991 में हुई थी।

वहीं जनवरी 15, 1992 से ये विद्यालय चालू हो गया था। विद्यालय में 5 शिक्षक, ‘नेहरू युवा केंद्र’ के 5 स्वयंसेवी और इतने ही एजुकेशन इंस्ट्रक्टर्स की तैनाती की गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका इतना प्रचार किया गया था कि अमेरिका और जापान तक से टीमों को बुला कर यहाँ घुमाया गया था। लालू यादव हमेशा से मार्केटिंग को लेकर नए तरकीब निकालते रहे हैं, ताकि वो चर्चा में बने रहें। अपने रेल मंत्रित्व काल में भी उन्होंने यही किया।

उनके रेल मंत्री रहते रेलवे के मुनाफे के किस्से दुनिया भर में मशहूर हुए। उन्होंने खुद की ‘मैनेजमेंट गुरु’ की छवि बना दी और तमाम घोटालों और 15 साल के जंगलराज के बावजूद सफ़ेद कुर्ते-पाजामे और संसद में मजाकिया बयान दे-दे कर उन्होंने मीडिया में अपनी छवि चमकाई। जबकि हुआ ये था कि लालू के दौर में रेल के पास कैश सरप्लस (नकद अधिशेष) 88,669 करोड़ रुपए बताया गया और मीडिया में इसकी खूब वाहवाही ली गई।

जबकि असलियत यह है कि ये राशि 39,411 करोड़ रुपए थी। यूपीए-2 के दौरान रेल मंत्री बनीं ममता बनर्जी ने ‘लालू के रेल’ की पोल खोली। सोचिए, एक सरकार अपने ही पिछले कार्यकाल के एक मंत्री की असलियत को सामने लाने के लिए ‘श्वेत पत्र’ लाने को विवश हो गई। एकाउंटिंग (लेखा परीक्षा) के उस वक़्त जो नियम-कायदे थे, उन्हें ही बदल डाला गया। कुछ यही हाल लालू यादव ने 15 सालों में बिहार की शिक्षा का भी किया था।

इसी तरह चरवाहा स्कूल को चलाने की जिम्मेदारी कृषि, सिंचाई, उद्योग, पशु पालन, ग्रामीण विकास और शिक्षा विभाग को दी गई थी। अब आप सोचिए, 6 विभागों को एक विद्यालय चलाने की जिम्मेदारी दी गई, वो भी उस बिहार में, जहाँ भ्रष्टाचार चरम पर था। फंड्स कौन से विभाग में कहाँ अटके रहेंगे और फाइलें कितने समय में एक दफ्तर से दूसरे तक का समय तय करेंगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

लेकिन, वो तो लालू यादव थे। उन्होंने बच्चों को मध्याह्न भोजन, दो पोशाकें, किताबें और मासिक छात्रवृत्ति के रूप में 9 रुपए देने की घोषणा की थी। भले ही आज से 30 वर्ष पहले 9 रुपए की वैल्यू ज्यादा रही होगी, लेकिन क्या इतने कम की छात्रवृत्ति से बच्चे पढ़ सकते हैं? एक सुस्त प्रशासन के सुस्त अधिकारियों को एक नकारे राजनीतिक नेतृत्व के अंदर उन्हें काम करना था, जो संभव नहीं हो पाया।

बाद में राजद कहने लगी कि बाहर के लोगों ने इसकी खूब तारीफ की लेकिन यहाँ के लोगों ने इस इस कदम को बदनाम किया, दुष्प्रचार किया। उस समय लालू यादव के साथ रहे जीतन राम माँझी, जो बाद में बिहार के मुख्यमंत्री भी बने, ने बीबीसी को बताया था कि ये एक ‘आईवॉश’ था, जिसका कोई व्यावहारिक लक्ष्य नहीं था और लालू यादव ने समाज को बेवकूफ बनाया। सब उनसे स्कूल-कॉलेज खोलने को कहते रहे और वो नज़रअंदाज़ करते रहे।

लालू यादव इसकी चर्चा के बाद बिहार में ‘पहलवान विद्यालय’ खोलने की बातें करने लगे, जहाँ उनके हिसाब से पढ़ाई के साथ-साथ लड़ाई (कुश्ती) भी होगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCIRT) ने अपने सर्वे में पाया था कि ये सभी विद्यालय जुआ, शराब और ताश खेलने वालों के अड्डे बन गए थे। लालू यादव 113 ‘चरवाहा विद्यालय’ खोलने की योजना बनाई थी। उन्होंने भोजपुरी में क्लास भी ली थी।

इस दौरान भी लालू यादव बच्चों को सलाह देते रहे कि वो अपने जमींदारों को ‘मालिक’ कहना छोड़ें, जो अच्छी बात है, लेकिन, वो खुद पूरे बिहार का ‘मालिक’ बन कर समाज को नियंत्रण में रखना चाहते थे। तभी तो आज भी जब राजद नेताओं और लालू यादव के सुपुत्रों से पूछा जाता है कि उन 15 सालों में क्या हुआ तो वो कहते नहीं थकते कि ‘सामाजिक न्याय’ हुआ। हालाँकि, ये क्या है, ये वो लोग आज तक नहीं समझा पाए।

जनसंघ: ‘राष्ट्रवाद’ को आवाज देने वाला पहला राजनीतिक दल, जिसके कार्यकर्ता सीमा से सियासत तक डटे रहे

देश के एक राजनीतिक दल से कितनी आशा की जानी चाहिए? एक राजनीतिक दल संकट के दौर में देश और देश की जनता के लिए कितनी अहम भूमिका निभाता है? इन सवालों के जवाब तलाशने पर पता चलता है कि जनता हर राजनीतिक दल का चुनाव करने से पहले उन्हें भरपूर आज़माती है। ऐसा ही एक जाँचा और परखा गया राजनीतिक दल है जनसंघ जिसकी पहचान आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी के रूप में होती है। वही राजनीतिक दल जिसकी पहचान किसी ज़माने में ‘दिया और बाती’ चिन्ह से होती थी। 

साल 1951 में आज ही के दिन, यानी 21 अक्टूबर को जनसंघ की स्थापना हुई थी। इसके बाद जितना कुछ हुआ वह पुरानी पीढ़ी के लिए इतिहास था और नई पीढ़ी के लिए वर्तमान। जनसंघ ने बीते अनेक दशकों में ऐसी कई वजहें दी जिनके आधार पर जनसंघ को जानना और समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है। चाहे वह जनसंघ का राजनीतिक इतिहास हो या युद्ध के दौरान निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका, नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक सभी ने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी भरपूर निभाई। 

जनसंघ का चुनावी इतिहास

1951 में स्थापना के बाद जनसंघ के सामने कई तरह की चुनौतियाँ थीं, जिसमें सबसे बड़ी चुनौती थी साल 1952 में होने वाले पहले लोकसभा चुनाव। ऐसा दौर जब देश में केवल 4 राष्ट्रीय राजनीतिक दल थे, देश के पहले चुनाव हुए और जनसंघ को 3 सीटें हासिल हुई। एक बात सुनिश्चित हुई कि देश में एक ऐसा राजनीतिक दल है जिसकी प्रस्तावना राष्ट्रवाद है। 1957 में देश के दूसरे लोकसभा चुनाव हुए और नतीजे आने पर दो विशेष बातें हुई, पहला जनसंघ को पिछली बार से 1 सीट ज्यादा हासिल हुई और स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार सांसद चुने गए। तीसरे और चौथे लोकसभा चुनावों में जनसंघ का प्रदर्शन अप्रत्याशित था, 1962 के लोकसभा चुनावों में जनसंघ को 14 सीट हासिल हुई और 1967 के चुनावों में 35 सीटें।

इसके बाद जनसंघ को हासिल होने वाले परिणामों की सूरत बेहतर ही हुई, 1971 में हुए पाँचवे लोकसभा चुनावों में जनसंघ को 22 सीट मिली। फिर आया आपातकाल का दौर। आपातकाल के बाद 1977 में हुए छठे लोकसभा चुनावों में जनसंघ ने जनता पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा। जनता पार्टी को कुल 295 सीट हासिल हुई और देश के तथाकथित सेक्युलर राजनीतिक दल ‘कॉन्ग्रेस’ को करारी हार का सामना करना पड़ा। 30 महीने की इस सरकार के बाद 1980 में सातवें लोकसभा चुनाव हुए और इसमें जनसंघ को 35 सीटें हासिल हुई और साथ चुनाव लड़ रही जनता पार्टी को 31। फिर 6 अप्रैल 1980 में जनसंघ ने भारतीय जनता पार्टी की सूरत ली जो फ़िलहाल हमारे देश का सत्ताधारी दल है। 

जनसंघ के सामने आई चुनौतियाँ

ऐसे तो जनसंघ ने काल खंड में अनेक राजनीतिक समस्याओं का सामना किया लेकिन हर बड़ी मुश्किल से सकारात्मक नतीजे ही हासिल किए। जनसंघ देश का पहला राजनीतिक दल था जिसने ज़मींदारी और जागीरदारी का विरोध किया। जनसंघ ने ही जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर तत्कालीन सरकार के रवैये का खुल कर विरोध किया। जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ही नारा था, “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे – नहीं चलेंगे।” इसके अलावा भारत ने जितनी बार पड़ोसी मुल्कों से युद्ध लड़ा उतनी बार जनसंघ ने अपनी उपयोगिता साबित की। सवाल उठता है कि सेनाओं के युद्ध में राजनीतिक दलों की कैसी भूमिका? 

1962 में जब चीन ने भारत पर हमला किया तब जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने सिविक और पुलिस ड्यूटी का किरदार निभाया। यही वजह थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने साल 1963 के दौरान हुई गणतंत्र दिवस की परेड में इन कार्यकर्ताओं को मार्च करने के लिए बुलाया। 1965 के दौरान लाल बहादुर शास्त्री जी की सरकार में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में एक बार फिर जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने वही भूमिका निभाई। इस बार कार्यकर्ताओं ने सैन्य मार्गों की सुरक्षा तक की और यह सिलसिला 1971 के दौरान इंदिरा गाँधी की सरकार में हुए युद्ध तक जारी रहा। 

अटल और आडवाणी ने निभाई अहम भूमिका

जनसंघ के सामने विसंगतियाँ भी कभी कम नहीं रही और चुनौतियों का यह सिलसिला देश की स्वतंत्रता के बाद से ही शुरू हो गया था। तमाम राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के और कॉन्ग्रेस की सरकार के बीच खुद का अस्तित्व स्थापित करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी। पहले और दूसरे चुनावों में 3 और 4 सीटें जीतने के बावजूद जनसंघ का संघर्ष जारी रहा। 1968 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद जनसंघ के सामने सबसे बड़ा संकट नेतृत्व का था और फिर 1969 में अध्यक्ष चुने गए अटल बिहारी वाजपेयी। इसके बाद फिर लोकसभा चुनाव हुए और अटल जी की अगुवाई में जनसंघ ने देश की जनता को नारा दिया, “गरीबी के खिलाफ जंग।” 

इसी बीच लाल कृष्ण आडवाणी भी उभर कर आमने आए, पहली बार सांसद बने और फिर जनसंघ के अध्यक्ष। 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान भी जनसंघ ने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई। 1977 में आम चुनाव हुए और महागठबंधन जनता पार्टी की सरकार बनी, अटल जी विदेश मंत्री बने और आडवाणी सूचना एवं प्रसारण मंत्री। भले सरकार 30 महीने में गिर गई पर 1980 में हुए सातवें लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने एक बार फिर 35 सीट जीत कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद जनसंघ ने भारतीय जनता पार्टी बनी, जिस पार्टी ने 1984 के चुनावों में 2 सीट जीती उसने ही 1989 के चुनावों में कुल 85 सीट हासिल की।        

जनता पार्टी के मुखिया जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के दौर में जनसंघ के लिए एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “यदि जनसंघ सांप्रदायिक है तो मैं भी सांप्रदायिक हूँ।” इसके बाद जनसंघ/भारतीय जनता पार्टी ने जितनी लड़ाइयाँ लड़ी वह खुद में ऐतिहासिक थीं। चाहे वह 1990 के दौरान राम मंदिर के लिए सोमनाथ और अयोध्या के बीच रथ यात्रा हो या 1996 में 13 दिन और 1998 में 13 महीने की सरकार।

इस राजनीतिक दल के सामने विपरीत हालात कभी कम नहीं हुए, इसके बावजूद जनसंघ की मौजूदगी और प्रासंगिकता बराबर बनी रही। देश के राजनीतिक इतिहास में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है लेकिन याद चर्चा और स्मरण उनका ही किया जाता है जिन्होंने जनता को निराश नहीं किया हो। अतीत कैसा भी रहा हो वर्तमान जनसंघ (आज की भाजपा) ही है। 

  

₹10 लाख प्रति सुनवाई: अर्नब गोस्वामी के खिलाफ लड़ाई में कपिल सिब्बल होंगे महाराष्ट्र की उद्धव सरकार के वकील

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने आपराधिक मामला दायर किया था। इस ‘रिट पेटिशन’ पर सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे की सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल बतौर अधिवक्ता हिस्सा लेंगे। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करने के लिए कपिल सिब्बल को 10 लाख रुपए और वकील राहुल चिंटिस को 1.5 लाख रुपए प्रति सुनवाई दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

महाराष्ट्र की ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार के गृह मंत्रालय ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की फी के लिए फंड्स जारी करने के लिए आदेश भी दे दिया है। इसमें बताया गया है कि प्रत्येक सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल को 10 लाख रुपए बतौर पेमेंट दिए जाएँगे। सुनवाई और सुनवाई पूर्व होने वाले विमर्श के लिए ये रुपए दिए जाएँगे। ये मामला पालघर में हुई 2 संतों की हत्या से जुड़ा हुआ है।

अर्नब गोस्वामी ने उस दौरान न सिर्फ महाराष्ट्र सरकार, बल्कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उनके खिलाफ महाराष्ट् सहित देश भर में दर्जनों FIR किए गए थे। तब उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी। अर्नब गोस्वामी ने अपने शो में सोनिया गाँधी को ‘अंतोनिया माइनो’ कह कर बुलाया था, जिसके बाद उग्र कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी कार पर हमला भी किया था।

अर्नब गोस्वामी के साथ 11 घंटे तक पूछताछ भी हुई थी। इसके बाद बांद्रा में मजदूरों के जुटने के बाद भी अर्नब ने सवाल उठाए थे, तब उनके खिलाफ फिर से FIR दर्ज की गई। नवीं मुंबई में ‘रिपब्लिक’ के एक पत्रकार को हिरासत में लेने का आरोप भी महाराष्ट्र पुलिस पर लगा था। हाल ही में आरोप लगा कि चैनल के एक अन्य पत्रकार प्रदीप भंडारी को भी मुंबई पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लेने की कोशिश की थी।

इधर महाराष्ट्र में ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और लोकप्रिय पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ बड़ी साजिश किए जाने का खुलासा हुआ है। शरद पवार की NCP के प्रवक्ता और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक का एक स्टिंग सामने आया है, जिसमें वो भविष्यवाणी करते दिख रहे हैं कि TRP स्कैम मामले से अर्नब गोस्वामी इतने हताश हो जाएँगे कि अंत में उन्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी।

3.5 साल में 125 अपराधी मारे गए, 2607 घायल हुए: योगी सरकार ने 122 बलिदानी पुलिसकर्मियों के परिजनों को दिए ₹26 करोड़

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस लाइन में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने यूपी के पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया और आँकड़े गिनाते हुए बताया कि उनकी सरकार की अपराध और अपराधियों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है, जिसके परिणाम स्वरूप विभिन्न जनपदों में दुर्दांत अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान 20 मार्च 2017 से 5 अक्टूबर 2020 तक कुल 125 अपराधी मुठभेड़ में मारे गए और 2,607 घायल हुए।

उन्होंने अपनी सरकार बनने के बाद से अब तक, यानी साढ़े 3 साल तक के आँकड़े गिनाते हुए बताया कि कैसे उनकी सरकार ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की है। ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीरगति को प्राप्त हुए सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि बलिदानी पुलिसकर्मियों के परिवार के साथ सरकार खड़ी हैं। अब तक ऐसे 122 परिवारों को कुल 26 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।

सीएम योगी ने जानकारी दी कि कानपुर स्थित बिकरू गाँव में विकास दुबे के साथ हुए एनकाउंटर में बलिदान हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों को 50 लाख की जगह 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी गई। पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिसकर्मियों को विभिन्न पदक दिए गए। इस दौरान उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस की भी सराहना की। यूपी सीएम योगी ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिसकर्मियों को सराहा।

2019-20 में उत्तर प्रदेश पुलिस के 9 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। सीएम योगी ने कोरोना से निपटने के लिए यूपी पुलिस द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिला बटालियन के लिए भी 3687 पद सृजित किए गए हैं। 1 सितंबर 2019 से 31 अक्तूबर 2020 तक देश भर में कुल 264 पुलिस के जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जिन्हें याद किया जा रहा है। यूपी के 9 में से 8 बिकरू कांड में ही बलिदान हुए।

इस मौके पर बिकरू कांड में वीरगति को प्राप्त हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा, सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह, सब इंस्पेक्टर महेश कुमार यादव, सब इंस्पेक्टर नेबूलाल, सिपाही जितेन्द्र कुमार पाल, सुल्तान सिंह, राहुल कुमार और बबलू कुमार के परिजनों को सम्मानित किया गया। सुल्तानपुर जिले में तैनात हेड सिपाही जितेन्द्र कुमार मौर्य के परिजनों को भी सम्मानित किया गया, जो अक्टूबर 3, 2019 को वीरगति को प्राप्त हुए थे।

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को बलरामपुर में ‘मिशन शक्ति’ की शुरूआत भी की थी। शारदीय से वासंतिक नवरात्र तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन दिलाना है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कह दिया था कि महिलाओं, बेटियों, नाबालिग बच्चों और अनुसूचित जाति के लोगों के विरुद्ध अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं। 

पाकिस्तान: PM इमरान खान ने अप्रैल में गेहूँ मँगवाया था, अब रो रहा है कि उसकी बात कोई सुनता ही नहीं!

आटे के दाम उच्चतम स्तर पर पहुँचने के साथ ही पाकिस्तान के कई इलाकों में इन दिनों आटे की किल्लत चल रही है। इसी के चलते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने समय से गेहूँ आपूर्ति न होने पर मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को अधिकारियों को फटकार लगाई। संघीय कैबिनेट की बैठक में अध्यक्षता करते हुए इमरान खान ने स्थिति को देखते हुए अपना गुस्सा भी व्यक्त किया।

पाकिस्तानी समाचार पत्र ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, इमरान खान ने गेहूँ के आयात पर बात करते हुए कहा कि अगर इस साल जुलाई में 1.5 टन गेहूँ आयात किया जाता तो स्थिति औसत होती। यहाँ स्पष्ट कर दें कि डॉन की खबर में हो सकता है कि आँकड़े लिखते हुए कोई गलती हुई हो क्योंकि एक देश के लिए खाद्य सामग्री के रूप में 1.5 टन बहुत कम है, मुमकिन है कि वह 1.5 करोड़ टन की ओर इशारा कर रहे हों।

डॉन ने अपनी रिपोर्ट में एक अज्ञात सूत्र का हवाले से कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे प्रशासनिक नाकामी बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संकट का अंदाजा था था और उन्होंने अप्रैल में गेहूँ के लिए आदेश भी दिए थे, लेकिन तब भी इसका पालन नहीं हुआ। उन्होंने माना कि ब्यूरोक्रेसी ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) के डर से इस आदेश का पालन नहीं किया और यह भी माना कि अब इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार पर आ गई है।

एक अन्य सूत्र ने बैठक की बात का खुलासा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के सलाहकार ने भी इस बात की शिकायत की कि ब्यूरोक्रेशी ने NAB के डर से फाइलों को साइन नहीं किया।

सोमवार को हुए एक कार्यक्रम में इससे पहले प्रधानमंत्री इमरान ने कहा था कि इस साल अनुमान से परे बारिश हुई, खासकर गेहूँ की कटाई के मौसम में, जिससे फसल कम पैदा हुई और कीमत में वृद्धि हो गई।

बैठक में बताया गया कि पंजाब सरकार हर दिन 17,000 से 20,000 टन गेहूँ जारी कर रही है और माँग के अनुसार कमोडिटी के स्टोरों में भी आपूर्ति की जा रही है। यह भी बताया गया कि सिंध सरकार चालू माह में मिलों को 85,000 टन गेहूँ जारी कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की स्थिति को बयां करते कुछ वीडियो सामने आए थे। इस वीडियो से पता चला था कि पाकिस्तान के कई हिस्सों में आटा 75 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कई जगहों पर तो आटे की किल्लत के कारण कुछ ही दुकानों पर आटा उपलब्ध होने की वजह से दुकानों पर लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं। 

इसी दौरान एक शख्स आटा नहीं मिलने के कारण इतना दुखी और निराश हो गया कि वह अपना सिर पीट-पीट कर रोने लगा। जब मीडिया उसे कवर करने पहुँची तो उसने मीडिया के कैमरे के सामने अपना रोना-गाना शुरू कर दिया और इमरान खान सरकार को कोसते हुए अपने दुखड़े सुनाने शुरू कर दिए।

दरअसल, वह व्यक्ति कई दिनों से आटे के लिए तरस रहा था लेकिन उसे कहीं आटा नहीं मिला अंत में वह बेचारा रोने लगा। उसने वायरल वीडियो में बताया कि उसने व उसके परिवार बच्चों ने 3 दिनों से खाना नहीं खाया है। उसने बताया कि अपने बच्चों के कारण 3 दिनों से दौड़ रहा है पर उसे कहीं आटा नहीं मिल रहा है। 

वीडियो में वह व्यक्ति रोते हुए कहता है, “मैं अपने बच्‍चों के लिए तीन दिनों से दौड़ रहा हूँ लेकिन आटा नहीं मिल रहा है। 15 रुपए में एक रोटी मिल रही है। हम गरीब लोग कहाँ जाएँ, कहाँ से खाएँ। आटे के लिए इतना पैसा कहाँ से दूँ, दवाइयाँ कहाँ से खरीदूँ। हम सूखी रोटी भी खाने को तैयार हैं लेकिन वह भी नहीं मिल रही है। 3 दिन से मारा मारा फिर रहा हूँ आटे के पीछे।”

‘अर्नब इतने हताश हो जाएँगे कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी’: स्टिंग में NCP नेता और उद्धव के मंत्री नवाब मलिक का दावा

महाराष्ट्र में ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और लोकप्रिय पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ बड़ी साजिश किए जाने का खुलासा हुआ है। शरद पवार की NCP के प्रवक्ता और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक का एक स्टिंग सामने आया है, जिसमें वो भविष्यवाणी करते दिख रहे हैं कि TRP स्कैम मामले से अर्नब गोस्वामी इतने हताश हो जाएँगे कि अंत में उन्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी।

हाल ही में एक कॉन्ग्रेस नेता का भी स्टिंग सामने आया था, जिसमें वो कह रहे थे कि उद्धव ठाकरे अर्नब गोस्वामी से खफा हैं और उनके चैनल ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ को नीचे गिराने के लिए IAS-IPS अधिकारियों की एक टीम का गठन किया है। कॉन्ग्रेस नेता ने दावा किया था कि इन सबके पीछे NCP के संस्थापक-अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व-मुख्यमंत्री शरद पवार का हाथ है। अब ‘रिपब्लिक’ के अंडरकवर रिपोर्टर ने नवाब मलिक से सच्चाई उगलवाई।

उसने नवाब मलिक से पूछा कि ‘रिपब्लिक’ को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जिसके जवाब में NCP मुंबई के अध्यक्ष ने दावा किया कि अर्नब गोस्वामी खुद को पागल बना रहे हैं, उनके चैनल को कोई निशाना नहीं बना रहा। उन्होंने दावा किया कि अर्नब खुद की बनाई वास्तविकता में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि अर्नब को लगता है कि सब ऐसे ही चलता है और जब एक दिन उसे पता चलता है कि सब झूठ है, तो वो कुछ भी कर सकता है।

नवाब मलिक ने दावा किया कि अर्नब गोस्वामी एक फोबिया से ग्रसित हैं। उन्होंने कहा, “ये दुनिया जालसाजी से नहीं चलती है। वो अब TRP मामले में फँस चुके हैं।” जब उनसे कहा गया कि BARC के पत्र में तो ‘इंडिया टुडे’ का नाम है और ‘रिपब्लिक’ का नाम है ही नहीं, तो मलिक ने कहा कि जाँच में सब पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि अर्नब इसमें स्पष्ट रूप से फँस चुके हैं और इसका असर उनकी मानसिक अवस्था पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “बात ये है कि अर्नब गोस्वामी को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ये एक प्रकार का पागलपन है, जो बाद में फोबिया बन जाता है और फिर मानसिक उन्माद का रूप ले लेता है।” साथ ही उन्होंने कहा कि अर्नब के खिलाफ जितने भी केस चल रहे होंगे, उनसे हताश होकर वो आत्महत्या करने को विवश हो जाएँगे। नवाब मलिक के इस स्टिंग के बाद अब महाराष्ट्र सरकार इस मामले में घिर गई है।

रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को कहा था कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी TRP मामले में आरोपित नहीं हैं। इसके बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर 200 करोड़ रुपए के मानहानि के मुक़दमे की बात कही है।   

वामपंथन कविता कृष्णन ने ‘लव जिहाद’ से जताई अनभिज्ञता, कहा- मुझे एक भी केस नहीं मिले, ये लीजिए पढ़िए हाल के 10 से अधिक मामले

वामपंथी कविता कृष्णन ने मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के बीच हुई बैठक पर अपनी नाराजगी जताई।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बैठक पर ट्वीट किया था, “हमारी अध्यक्ष रेखा शर्मा श्री भगत सिंह कोशियारी से मिली। महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने बैठक में महिलाओं की सुरक्षा पर बात की। इसमें कोविड केंद्रों में महिलाओं के साथ हो रही छेड़छाड़, बलात्कार सहित लव जिहाद के मामले सम्मिलित थे।”

अब इस ट्वीट में उल्लेखित किए गए ‘लव जिहाद’ शब्द से सीपीआई (एमएल) सदस्य आहत हो गईं। उन्होंने आयोग अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शर्मसार किया है। 

कविता कृष्णन ने पूछा कि लव जिहाद क्या है? क्या अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला से प्रेम करता है तो वह लव जिहाद है? कविता ने यह भी लिखा कि रेखा शर्मा की हिम्मत कैसे है कुर्सी पर बने रहने की। कृष्णन ने दावा किया कि उन्हें एक भी ऐसे केस नहीं मिले जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू बनकर महिला के साथ रिश्ता बनाया हो और उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया हो।

कविता कृष्णन ने लव जिहाद केसों पर कैसे अनभिज्ञता जताई

लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर अनजान बनते हुए कविता कृष्णन जैसी वामपंथी महिला ने न केवल इन केसों पर अपनी अनभिज्ञता जताई बल्कि दावा किया कि उनकी रिसर्च में ऐसा कोई केस उनके सामने नहीं आया जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू महिला के साथ पहचान छिपा कर धोखा किया हो। उन्होंने अपनी बात रखते हुए रेखा शर्मा को कट्टर तक लिखा।

अब बता दें कि लव जिहाद एक ऐसी स्थिति है जहाँ मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला को फँसाने के लिए उनसे झूठ बोलता है। वह या तो अपनी पहचान छिपाकर या अपना धर्म छिपाकर गैर मुस्लिम महिला के साथ संबंध बनाता है। कई बार लड़की को जब देर से हकीकत पता चलती है तो या तो उसे प्रताड़ित किया जाता है या फिर उसे मार दिया जाता है। कई बार महिला का जबरन धर्मांतरण करवा कर भी उसे नारकीय यातनाएँ दी जाती हैं।

यह कोई एक तकनीकी या कानूनी शब्दावली नहीं है, बल्कि इस शब्द का प्रयोग उन परिस्थितियों को देखकर किया जाता है जहाँ गैर मुस्लिम महिला पर मजहब परिवर्तन जैसे दबाव बनाए गए हों। कई बार कुछ पीड़िताएँ आपबीती सुनाते समय इस शब्द का प्रयोग नहीं करती, लेकिन उनके साथ हुए अन्याय की पूरी कहानी इस लव जिहाद शब्द को परिभाषित कर देती है।

कई महिलाएँ खुशकिस्मत होती हैं जो लव जिहाद की वीभत्सता का शिकार होने से पहले कट्टरपंथियों के चंगुल से निकल जाती हैं और दुनिया को हकीकत बताती हैं। मगर, कई दर्दनाक किस्से ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुनाने के लिए लड़कियाँ जिंदा तक नहीं बच पाती।

आज कविता कृष्णन, जिन्हें लव जिहाद के मामले रिसर्च करने पर भी नहीं मिल रहे, उनके लिए हम कुछ केस लेकर आए हैं ताकि लव जिहाद शब्द का अर्थ उन्हें व उन जैसे लोगों को समझ आ सके।

वसीम अहमद ने दिनेश रावत बन दिया हिंदू लड़की को धोखा

हाल में, मेरठ में वसीम अहमद नाम के युवक के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज हुआ था। लड़की ने अपनी शिकायत में कहा था कि युवक ने उसे हिंदू बन कर प्रेम के जाल में फँसाया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए, बाद में उसकी वीडियोज भी वायरल कर दीं। लड़की ने शिकायत में कहा था कि वसीम ने उसे अपनी पहचान दिनेश रावत के रूप में बताई थी।

लड़की के बयान में कहा गया था कि वसीम ने उसे शादी का झाँसा दिया था, मगर बाद में बताया कि उसके दो बच्चे हैं। शिकायत में पीड़िता ने ये भी कहा था कि जब उसने वसीम से इन सबके पीछे वजह पूछी तो उसने कहा, “मैंने तुम्हें धोखा दिया क्योंकि मैं तुम्हें सबक सिखाना चाहता था।”

गोल्डी बन निजामुद्दीन ने विधवा को दिया धोखा

22 अगस्त 2020 को 25 साल की विधवा ने निजामुद्दीन नामक शख्स के खिलाफ़ शिकायत करवाई। इसमें उसने बताया कि निजामुद्दीन ने उससे अपना मजहब छिपाकर संबंध बनाए और उसे गर्भवती बनाया। उसने अपनी पहचान पहले गोल्डी बताई थी मगर बाद में पता चला वह मुस्लिम है। इस हकीकत के खुलने के बाद वह उसे प्रताड़ित करने लगा। कुछ दिन बाद निजामुद्दीन और उसके घरवालों ने महिला को घर से बाहर कर दिया। हर ओर से आस खत्म होने के बाद महिला थाने पहुँची और धोखेबाजी का मुकदमा दर्ज करवाया। 

पहचान छिपाकर खुर्शीद और अंसारी नें हिंदू बहनों को बनाया निशाना

सितंबर माह में दिल्ली के ओखला से एक लव जिहाद का केस सामने आया। खुर्शीद और अंसारी ने दो हिंदू बहनों को निशाना बनाया। जब लड़कियों को इस संबंध में मालूम चला तो उन्होंने किसी भी प्रकार के रिश्ते को रखने से मना कर दिया, तब इन युवकों ने पार्किंग का बहाना बनाकर लड़की के परिवार पर हमला बोल दिया। इस घटना में लड़की के पिता की टाँग टूट गई थी। उनका इलाज एम्स में चला था।

प्रिया और कशिश को मार कर शमशाद ने दफनाया उन्हीं के घर में

मेरठ के भूड़भड़ाल से माँ बेटी की हत्या मामला भी पिछले दिनों खूब चर्चा में था। प्रिया और कशिश की हत्या करने वाला शमशाद साल 2013 में प्रिया से अमित गुर्जर बनकर मिला था। बाद में सच्चाई खुलने पर उसने रो रोकर प्रिया को अपने साथ रखे रखा। कुछ दिन बाद पता चला कि उसकी एक बीवी भी है। विवाद बढ़ने पर शमशाद ने प्रिया और कशिश को मौत के घाट उतारकर उनके ही घर में दफना दिया । इस केस में प्रिया की सहेली चंचल की सक्रियता ने शमशाद को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया था।

कॉन्ग्रेस नेता समीर खान पर हिंदू नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

साल 2020 के सितंबर में एक नाबालिग लड़की सतना थाने पहुँची और उसने कॉन्ग्रेस नेता समीर खान उर्फ सिकंदर पर मामला दर्ज करवाया। लड़की ने कॉन्ग्रेस नेता समीर पर यौन शोषण का आरोप लगाया। खान के ख़िलाफ़ शिकायत में लड़की ने कहा कि उसने उसे सिकंदर बन कर मुलाकात की और बाद में उसे फार्म हाउस बुलाया। वहाँ समीर ने उसका रेप किया व उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं। फिर करीब 3 साल तक उसका शोषण करता रहा। आखिरकार लड़की ने तंग आकर पुलिस को इस संबंध में बताया और मामला दर्ज हुआ

शौकत अली ने साहिल कुमार बन रचाई शादी, बाद में करने लगा प्रताड़ित

शौकत अली ने भी नेहा नाम की हिंदू महिला को झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर उसे आर्थिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। सोशल मीडिया पर वायरल अपनी वीडियो में नेहा ने कहा था कि जयपुर में काम करते हुए वह शौकत के संपर्क में आई और उसने उसे अपनी पहचान कश्मीरी हिंदू साहिल कुमार के रूप में बताई। शादी के 6 महीने बाद शौकत अली उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा और उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर उसका शोषण भी किया।

शिबू अली बना सचिन, लड़की पर किया चाकू से हमला

लव जिहाद के अन्य मामले में शिबू अली हिंदू महिला से सचिन कहकर मिला। इस केस में तो लड़की ने अपनी पूरी कहानी सोशल मीडिया पर सुनाई थी। पीड़िता ने कहा था कि जब मुस्लिम युवक की सच्चाई उजागर हुई तो उसे परेशान किया जाने लगा। उससे मारपीट करके उसका धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं , उसे गौमाँस खिलाने के लिए व मौलवी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को भी कहा गया। जब महिला शिबू के चंगुल से भाग निकली तब भी शिबू ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और अपनी नाफरमानी करता देख महिला पर चाकू से हमला किया।

कानपुर में पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करने के मामले

यूपी के कानपुर में हिंदू नाबालिग के साथ भी लव जिहाद का मामला सामने आया। गोपाल नगर में रहने वाली पीड़ित के परिवार ने बजरंग दल के रामजी तिवारी की मदद से फतेह अली खान उर्फ आर्यन मेहरोत्रा के खिलाफ़ अपनी शिकायत करवाई। उन्होंने बताया कि कैसे कलावा पहनकर, तिलक लगाकर वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मंदिर में जाता था।

एक अन्य मामला कुछ दिन पहले ही कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया था। जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा। इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के खिलाफ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है। 

अनवर ने अनु बन हिंदू महिला को फँसाया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा। सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।

लव जिहाद के कुछ अन्य मामले इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ें

कराची में हुए बम धमाके में 3 की मौत: फौज और पुलिस में ठनी, सिंध पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द

पाकिस्तान के कराची में गृह युद्ध का ख़तरा बढ़ता जा रहा है। अब वहाँ के मसकन चौरंगी स्थित इमारत गुलशन-ए-इक़बाल में हुए एक बड़े बम धमाके में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है और 15 घायल हो गए हैं। ये धमाका बुधवार (अक्टूबर 21, 2020) को हुआ। सभी मृतकों और घायलों का इलाज पटेल हॉस्पिटल में चल रहा है। मुबीना टाउन SHO ने बताया कि ये सिलिंडर से किया गया बम धमाका हो सकता है।

धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए बम डिस्पोटल स्क्वाड को लगाया गया है। इमारत की दूसरी मंजिल पे ये धमाका हुआ। आसपास की कुछ इमारतों और वहाँ से गुजर रही गाड़ियों को भी खासा नुकसान पहुँचा है। सिंध के पुलिस प्रमुख ने स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इससे 1 दिन पहले ही शिरीन जिन्ना कॉलोनी में हुए बम धमाके में 5 लोग घायल हो गए थे। वहाँ सायकिल पर IED डाल कर ब्लास्ट किया गया था।

उधर सिंध के IGP मुस्ताक महर ने अपनी छुट्टियों को टाल दिया है और पूरी सिंध की पुलिस को कहा है कि वो अपनी-अपनी छुट्टी की अर्जियों को 10 दिन के लिए किनारे कर दें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में ये निर्णय लिया गया है, जिसके नतीजे PML-N के नेता मोहम्मद सफ़दर की गिरफ़्तारी में हो रहे जाँच के निष्कर्ष पर निर्भर करेंगे। इससे पहले इन सभी ने छुट्टियों की अर्जी दी थी और कहा था कि इस गिरफ़्तारी के बाद प्रोफेशनल तरीके से काम करने में उन्हें दिक्कतें आ रही हैं

सिंध पुलिस का कहना है कि उसके आला अधिकारियों का जिस तरह से अपमान किया गया, उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया, उससे पुलिस महकमा शॉक में है। इसके बाद बिलावल भुट्टो जरदारी के पाकिस्तान की फ़ौज के मुखिया जनरल बाजवा से मुलाकात कर सिंध में सेना के कामकाज पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद सिंध पुलिस के गुस्से को कम करने के लिए फ़ौज ने जाँच का आदेश दिया। वहीं सिंध पुलिस इस अपमान से जल रही है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में यह सारी हलचल ठीक तब शुरू हुई जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रशासन के खिलाफ़ रैली निकाली और नवाज शरीफ के दामाद गिरफ्तार कर लिए गए।  सफदर को तो कोर्ट ने बाद में बेल देकर रिहा कर दिया, पर इस बीच पाकिस्तान आर्मी पर आरोप लगने लगे कि पाक सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया व सिंध प्रांत के पुलिस चीफ मुश्ताक मेहर का अपहरण करके सफदर की गिरफ्तारी के लिए दवाब बनाया।

‘बिलाल ने नाम बदला, टीका लगाता था, हमें लगा हिन्दू होगा’: 8 लाख लेकर भागी छात्रा, परिजनों ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से कथित ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। बरेली में शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को एक लड़की गायब हो गई थी, जिसके परिवार ने आरोप लगाया है कि दूसरे समुदाय के एक युवक ने उससे शादी कर ली है। आरोप है कि ये शादी जोर-जबरदस्ती की गई। भाजपा और विहिप के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के बाद थाने में जाकर विरोध प्रदर्शन किया और मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की

हालाँकि, परिजनों के आरोपों को नकारते हुए लड़की ने एक वीडियो जारी किया है और दावा किया है कि वो बालिग़ है और अपनी मर्जी से गई है। लड़की ने जहाँ जोर-जबरदस्ती की बात नकार दी है, वहीं उसके पिता ने आरोप लगाया है कि वो 8 लाख रुपए और सोने की चैन लेकर फरार हुई है। पिता ने आशंका जताई है कि उनकी बेटी की हत्या की जा सकती है और ये धन के लिए किया गया कृत्य भी हो सकता है।

वहीं स्थानीय हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि लड़की के साथ जोर-जबरदस्ती करके उसे धोखे से ले जाया गया है। प्रदर्शन कर रहे भाजपा और विहिप कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठियाँ भी बरसाईं। लापरवाही और बल-प्रयोग के बाद चौकी इंचार्ज सहित कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरों के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि बरेली का ये मामला ‘लव जिहाद‘ का ही है।

लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी बीएससी की छात्र है और कम्प्यूटर कोचिंग के लिए जाती है। अक्टूबर 17 को जब वो कोचिंग से वापस नहीं आई तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। फिर किसी ने बताया कि एक लड़का उसे ले गया है। पिता का कहना है कि लड़के के माथे पर टीका लगा हुआ था, इसीलिए परिजन समझते थे कि वो हिन्दू होगा। प्रेमनगर की रहने वाली छात्रा से आरोपित ने अपना नाम छिपा कर परिचय बढ़ाया था, ऐसा आरोप है।

आरोपित का नाम बिलाल है, जिसके खिलाफ मामला सामने आने के 3 दिन बाद तक भी कार्रवाई नहीं हुई तो हिन्दू संगठन उग्र हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। एडीजी ने मौके पर पहुँच कर आश्वासन दिया है कि लड़की को 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिया जाएगा। एसएसपी ने बताया कि अभद्रता करने वाला चौकी इंचार्ज निलंबित किया जा चुका है। आरोपित और पीड़िता को अब कोर्ट में पेश किया जाएगा।