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‘फ्लैट पर बुलाया, नशे वाला ड्रिंक पिला कर बलात्कार किया’: पूर्व TMC सांसद मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाअक्षय के खिलाफ FIR दर्ज

मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाअक्षय उर्फ़ मिमोह पर बलात्कार का आरोप लगा है। मुंबई पुलिस ने एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद उनकी पूर्व-पत्नी योगिता बाली और बेटे महाअक्षय चक्रवर्ती के खिलाफ बलात्कार के मामले में FIR दर्ज किया। गुरुवार (अक्टूबर 15, 2020) की रात ओशिवारा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। 38 वर्षीय पीड़िता ने इन दोनों पर धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए हैं।

पीड़िता ने बताया कि वो 2015 से लेकर 2018 तक महाअक्षय चक्रवर्ती के साथ रिलेशनशिप में थी। पीड़िता के अनुसार, उस दौरान उन्होंने वादा किया था कि वो उससे शादी करेंगे। उसने आगे कहा कि इसी अवधि में वो एक बार अँधेरी वेस्ट स्थित के आदर्श नगर में स्थित महाअक्षय के फ्लैट पे गई। इस फ्लैट को 2015 में ही खरीदा गया था। आरोप है कि इस दौरान महाअक्षय ने उसे नशे वाला सॉफ्ट ड्रिंक पिलाया और शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए बाध्य किया।

पीड़िता का आरोप है कि बलात्कार के बाद जब वो गर्भवती हो गई, तब बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता मिथुन के बेटे महाअक्षय चक्रवर्ती ने उसे एबॉर्शन कराने को कहा और इसके लिए पिल्स भी दिए। पीड़िता ने बताया कि वो हमेशा महाअक्षय को उनके शादी के वादे के बारे में याद दिलाती रही लेकिन जनवरी 2018 में उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि वो पीड़िता से शादी नहीं कर सकते। इसके बाद से ही दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया।

पीड़िता इसके बाद दिल्ली अपने फैमिली फ़्रेंड के पास रहने चली गई। वहाँ जून 2018 में बेगमपुर पुलिस स्टेशन में मिथुन चक्रवर्ती की पत्नी और बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने आईपीसी की धारा-376 (बलात्कार) और धारा-313 (महिला से सहमति लिए बिना बच्चा गिराना) के तहत मामला दर्ज कर के इसे क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया। बाद में दिल्ली की एक अदालत से दोनों आरोपितों को अग्रिम जमानत मिल गई।

मार्च 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता से कहा कि वो अपनी शिकायत वहाँ दर्ज कराए, जिस थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में ये घटना हुई। इसी मामले में महिला ने जुलाई 2020 में मुंबई में FIR दर्ज करवाया। इसमें आईपीसी की 376 (2) (n) (बार-बार रेप), धारा-328 (जहरीले पदार्थ से नुकसान पहुँचाना), धारा-417 (धोखाधड़ी) और धारा-506 (आपराधिक धमकी) जैसे मामले जोड़े गए हैं। महाअक्षय ‘हॉन्टेड 3D’ और ‘लूट’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।`

बता दें कि मिथुन चक्रवर्ती ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने मात्र 3 दिन ही संसद में अपनी हाजिरी दर्ज कराई थी। उन्होंने न कोई प्रश्न पूछे थे और न ही किसी बहस में हिस्सा लिया था। दिसंबर 2016 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें अप्रैल 2014 में राज्य सभा भेजा गया था और उनका कार्यकाल मात्र पौने 4 वर्षों का ही रहा।

मुस्लिम व्यक्ति ने दारुल उलूम से पूछा- क्या उसकी शादी जैसा तनिष्क विज्ञापन में दिखाया गया वैसे हो सकती है? मिला ये चौकाने वाला जवाब

एक मुस्लिम व्यक्ति ने दारुल उलूम देवबंद को एक पत्र लिखा। इस पत्र में मुस्लिम व्यक्ति ने गंगा-जमुनी तहजीब को ध्यान में रखते हुए एक हिंदू महिला के साथ प्रस्तावित अपने विवाह को लेकर इस्लामी मदरसा को मार्गदर्शन करने के लिए कहा। इस्लामी मौलवियों से पूछे सवालों में मुस्लिम व्यक्ति ने बताया कि उसने एक हिंदू महिला को शादी के लिए प्रपोज किया। उसने आगे कहा कि महिला उसके साथ शादी करने के लिए तो तैयार हो गई, लेकिन उसने इसके लिए कुछ शर्तें रखी है।

मुस्लिम व्यक्ति के सामने हिंदू महिला द्वारा रखी गईं आठ शर्तें इस प्रकार हैं– 

  1. वह शादी से पहले या बाद में एक मुस्लिम के रूप में अपना धर्म परिवर्तन नहीं करवाएगी। वह जिंदगी भर हिंदू ही रहेगी।
  2. उसे बिना किसी बाधा के ससुराल में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करने की अनुमति दी जाएगी और कोई भी उसके धर्म और विश्वास में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  3. शादी के बाद उसका नाम मुस्लिम नाम में नहीं बदला जाएगा।
  4. उसे कभी भी बुर्का पहनने के लिए नहीं कहा जाएगा।
  5. मैं (उसका पति) दूसरी पत्नी को तब तक स्वीकार नहीं कर सकता, जब तक वह मेरी पत्नी रहेगी।
  6. तलाक के लिए तीन तलाक की प्रक्रिया हमारे मामले में लागू नहीं होगी। हमारे मामले में  हिंदुओं में होने वाली तलाक की प्रक्रिया लागू होगी।
  7. चूँकि लड़की का परिवार शादी के बाद उसके साथ सभी संबंधों को तोड़ देगा, इसलिए वह चाहती है कि मेरे परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के सामने शादी करने से पहले निकाहनामा की सामान्य प्रक्रिया के माध्यम से शादी की जाए और निकाहनामा में उपरोक्त शर्तें होनी चाहिए।
  8. यह विवाह कानूनी रुप से वैध हो, इसके लिए वह चाहती है कि मैं शादी से पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम धार्मिक अधिकारियों से लिखित अनुमति और अनुमोदन ले लूँ।
The Darul Uloom Deoband question

हिंदू महिला की शर्तों के अनुसार, मुस्लिम व्यक्ति ने इस्लामी मौलवियों को दो प्रश्नों का एक सेट दिया। उन्होंने कहा, “मैं फिर से आपसे अनुरोध करता हूँ कि हमें जल्द जवाब दें, ताकि हम निर्णय ले सकें कि हम शादी करें या फिर एक-दूसरे को भूल जाएँ। आपके शीघ्र जवाब के लिए मैं जीवन भर आपका आभारी रहूँगा।”

मुस्लिम लड़के द्वारा पूछे गए प्रश्न इस प्रकार हैं-

  1. क्या उसकी शर्तों के साथ की गई शादी मुस्लिम समुदाय के लिए स्वीकार्य होगी और निकाहनमा में उसकी शर्तों को उल्लेखित किया जा सकता है?
  2. क्या इस तरह की शादी कानूनी और हमारे परिवार के सदस्यों के लिए उचित होगी?
Darul Uloom Deoband question

मुस्लिम लड़के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब काफी जल्दी आ गए। इस्लामी मौलवी ने इसका उत्तर देते हुए स्पष्ट कर दिया कि ऐसा मिलन इस्लाम में स्वीकार्य नहीं है। दारुल उलूम देवबंद ने कहा, “ये सभी शर्तें इस्लाम के खिलाफ हैं।” उन्होंने कहा, “शर्तें निकाह पत्र में लिखा हो या नहीं हो, मगर यह मान्य नहीं होगा।” मुस्लिम व्यक्ति को सलाह दी गई- “एक दूसरे को भूल जाओ और आपको इस्लाम धर्म के खिलाफ कोई भी काम नहीं करना चाहिए।” दारुल उलूम देवबंद ने मुस्लिम लड़के को सांत्वना देते हुए कहा, “धैर्य रखो, आपको जल्द ही शादी के लिए सुंदर और मनपसंद मुस्लिम लड़की मिल जाएगी।”

Darul Uloom Deoband answer

मुस्लिम पुरुष और दारुल उलूम देवबंद के बीच इस बातचीत से स्पष्ट है कि हाल ही में तनिष्क के विज्ञापन में लव जिहाद को सामान्य बनाने के लिए जिस तरह की हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष के बीच विवाह दिखाया गया है वह पूरी तरह से काल्पनिक है।

ऐसा मिलन, जहाँ मुस्लिम परिवार, हिंदू परंपराओं का जश्न मनाता है, वास्तविक जीवन में ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है क्योंकि शादी के लिए हिंदू महिला को इस्लाम कबूलना अनिवार्य है। हमने मुस्लिम लड़के से शादी के बाद हिंदू महिला द्वारा धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर हत्या, बलात्कार जैसे कई जघन्य अपराध होते देखे हैं।

वीडियो बनाने के लिए ज़िंदा गाय को बनाया शेर का चारा, मुख्य आरोपित मयूद्दीन कादरी फरार, 5 गिरफ्तार

गुजरात के गिर जंगल में एक शेर को भूखा रख कर उससे जबरदस्ती गाय का शिकार करवाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने सिर्फ मनोरंजन और एक अवैध शो बनाने के लिए वीडियो शूट किया। इस मामले में पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है जबकि मुख्य आरोपित अभी भी फरार है। इन लोगों ने शेर के सामने गाय को चारे के रूप में पेश किया, ताकि वो इस शिकार को मनोरंजन हेतु कैमरे में कैद कर सकें।

वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय काफी असहाय नजर आ रहे हैं और कुछ दूरी पर कुछ लोग अपने फ़ोन से वीडियो शूट कर रहे हैं। वीडियो में शेर, उस गाय को मारने की कोशिश कर रहा है। बताया गया है कि आरोपितों ने शेर को भी कई दिनों तक भूखा रखा, ताकि वो गाय को देखते ही उस पर टूट पड़े। शेर को प्रताड़ित करने और जंगल के रिजर्व्ड क्षेत्र में बिना अनुमति घुसने के आरोप में 5 आरोपित दबोचे गए हैं।

शेर के सामने गाय को जानबूझ कर डालने की घटना गुजरात स्थित जमवाला के पास स्थित घंटवाड गाँव की है, जहाँ ये वीडियो शूट किया गया। जूनागढ़ वाइल्डलाइफ सर्कल के अधिकारी इसकी जाँच कर रहे हैं। वीडियो में कुछ बाइक्स भी खड़ी दिख रही हैं, जिससे पता चलता है कि कुछ लोगों को इस अवैध शो को दिखाने के लिए खास तौर पर लाया गया था और उनका उद्देश्य मनोरंजन के अलावा और कुछ नहीं था। वन विभाग का कहना है संभव है कि मोटी रकम के एवज में ये अवैध शो आयोजित किया गया हो।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “ये लोग जिस तरह कैमरों के साथ तैयार थे, इसे देख कर ऐसा लग रहा है कि यह उनके लिए रूटीन जैसा है। हो सकता है कि उन्होंने शेर को भी कुछ दिनों से भूखा रखा हो और मोटी रकम के एवज में यह शो आयोजित किया हो।” ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) दुष्यंत वसावदा ने बताया कि मुख्य आरोपित मयूद्दीन कादरी की तलाश जारी है।

उन्होंने इसे आपराधिक मामला बताते हुए कहा कि आरोपितों ने इस तरह से इसे अंजाम दिया, जैसे उन्हें पता हो कि शेर किस तरफ से आने वाला है। उन्हें जंगल के रास्तों के बारे में भी पता था। गिरफ्तार किए गए मुकेश सिंघड़, दिलीप सिंघड़, दिलीप लालकिया, भाना सिंघड़ और सतीश नगरलिया का कोविड टेस्ट नेगेटिव आया है। अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। इनमें से 4 कोडिनार स्थित घंटवाड़ के रहने वाले हैं, जबकि एक गिर गढला स्थित जमवाला का निवासी है।

इससे पहले केरल में एक गर्भवती हथिनी को किसी ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था। ये मामला कई दिनों तक चर्चा में रहा था और पशु अधिकार की रक्षा के लिए आवाज़ उठे थे। कुछ स्थानीय लोगों ने मई 25, 2020 को उक्त हथिनी को गाँव में आते हुए देखा था और 27 मई को पूरे दिन पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई थी। मुँह में पटाखे फटने से उसे गहरे घाव हो गए थे और उस जगह पर सेप्सिस हो गया था।

भारत में खड़ा कर रहे थे ISIS का सहयोगी आतंकी संगठन: कोर्ट ने नफीस, अबू और अमजद समेत 15 आरोपितों को सुनाई सजा

भारत में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (ISIS) का ब्रांच खोलने की कोशिश में लगे 15 आतंकियों को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सजा सुनाई है। इनलोगों की साजिश थी कि युवाओं को भड़का कर उन्हें ISIS में शामिल किया जाए। इन सभी को 10 से 5 साल तक की सजा सुनाई गई। ये मामला 2015 का है, जिसकी जाँच NIA ने की है। एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपित भारत में ISIS का एक सहयोगी संगठन तैयार कर रहे थे

इस मामले में दोषी पाए गए नफीस खान को 10 साल कारावास की सजा दी गई है, जबकि अबु अनस, मुफ्ती अब्दुल सामी और मुदाबीर मुस्ताख शेख को 7 साल कारावास की सजा दी गई है। वहीं दोषी अमजद खान को 6 साल जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। इन सबके अलावा अब्दुल्ला खान, नजमुल हुदा, मोहम्मद अफलज, सुहेल अहमद, मोहम्मद अलीम, मोइनुदीन खान, आसिफ अली और सैयद मुजाहिद को 5 साल कारावास की सजा दी गई है।

इस संगठन का नाम जुनेद-उल-खलीफा रखा गया था और ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम युवाओं को गुमराह कर इसमें शामिल करने की साजिश रची गई थी। ये सभी लोग ISIS के सरगना और आतंकी संगठन के ‘मीडिया प्रमुख’ यूसुफ अल हिंदी उर्फ अरमान उर्फ अनजान भाई के इशारे पर यह काम कर रहे थे। इस मामले में कुल 19 आरोपितों को NIA ने गिरफ्तार किया था। अगर इन्हें नहीं गिरफ्तार किया जाता तो भारत में कई आतंकी हमले हो सकते थे।

इस संगठन में लोगों को मजहब के नाम पर कट्टर बना कर जोड़ा जा रहा था और मजहब के नाम पर आतंक मचाने की साजिश रची जा रही थी। इनमें से कई तो ISIS में शामिल होने के लिए मिडिल-ईस्ट पहुँच भी चुके थे लेकिन उनमें से भी कई को धर-दबोचा गया था और उन्हें भारत वापस लाया गया। इस मामले में कुल 16 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र पटियाला हाउस कोर्ट में विशेष NIA जज के सामने पेश किया गया था।

अरबी भाषा में आरोपितों द्वारा अप्रैल 2013 में गठित किए गए संगठन का नाम है ‘अल दौलतुल इस्लामिया फिल इराक वल शाम’। इब्राहिम अव्वद अल-बद्री उर्फ अबु बक्र अल-बगदादी को इसका मुखिया बनाया गया था। शुरू में तो ये अलकायदा के समर्थन से चलता था लेकिन बाद में अलकायदा इससे अलग हो गया। ISIS का कुल बजट 200 करोड़ डॉलर का बताया जाता है। भारत में भी ये पाँव पसारने की कोशिश में लगा रहता है।

हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने चेन्नई के अहमद अब्दुल कादिर (40) और बेंगलुरु के इरफ़ान नासिर (33) को भी गिरफ्तार किया था। दोनों ही इस्लामिक स्टेट (आईएस) मॉड्यूल के संदिग्ध हैं और इन पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल कराने के लिए फंडिंग उपलब्ध कराने का आरोप है। अब्दुल कादिर तमिलनाडु के चेन्नई स्थित एक बैंक में बतौर बिज़नेस एनालिस्ट (विश्लेषक) काम करता था। वहीं नासिर बेंगलुरु में बतौर चावल व्यापारी काम करता था।

क्या दिल्ली में वाकई इन कश्मीरी मुस्लिम महिलाओं को ‘आतंकवादी’ कहा गया? जानिए फिजा ‘नूर’ भट्ट मामले का सच

दक्षिण पूर्वी दिल्ली की एक महिला ने अपनी मकान मालिक (लैंडलेडी) पर मारपीट का आरोप लगाया और ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह कश्मीरी है। इस घटना के एक दिन बाद इस तरह की कई जानकारी सामने आई हैं जो इन संदिग्ध दावों से पर्दा उठाती है। 

शुक्रवार (16 अक्टूबर 2020) को तमाम मीडिया समूहों ने ख़बर प्रकाशित की जिसके मुताबिक़ नूर भट्ट नाम की कश्मीरी महिला पर हमला हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा बताया गया था कि एक कश्मीरी महिला के साथ उसकी मकान मालिक ने दिल्ली के लाजपत नगर में मारपीट की। 

नूर भट्ट ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए इस घटना की जानकारी दी और लिखा कि उनकी मकान मालिक एक ऐसे व्यक्ति के साथ आई थी जिसे उसने कभी नहीं देखा था। इसके अलावा नूर भट्ट ने कहा कि उन्हें आतंकवादी भी कहा गया क्योंकि वह कश्मीर से है। इसके बाद नूर भट्ट ने दावा किया कि पूरी घटना पुलिस वालों के सामने हुई मकान मालिक ने उनके कई सामान भी चुराए। 

नूर भट्ट द्वारा अपनी मकान मालिक पर लगाए गए आरोप

नूर भट्ट ने अपने ट्वीट में लिखा, “मेरी मकान मालिक एक ऐसे व्यक्ति के साथ मेरे घर में दाखिल हुई है जिसे मैंने इस जीवन में कभी नहीं देखा है और वह मुझे व मेरे दोस्तों को आतंकवादी कह कर बुला रही है। वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि हम कश्मीर से हैं और इतना कुछ पुलिस वालों के सामने हो रहा है। इन्होंने उत्पात किया, तोड़ फोड़ करते हुए दाखिल हुए, हमारे रुपए और सामान भी उठाए।” 

नूर भट्ट ने यह भी दावा किया कि महान मालिक के साथ मौजूद आदमी ने उसे पुलिस के सामने धक्का दिया और इस दौरान उनकी मकान मालिक ने उस पर हमला भी किया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो कश्मीरी बहनों ने यह घर किराए पर लिया था, जिसमें से एक बहन जो मामले में खुद को भुक्तभोगी बता रही है। उसने कहा कि घर का ताला तोड़ा गया और घर की कई कीमती चीज़ें चुराई गई। जैसे ही नूर भट्ट ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ट्विटर पर साझा की वैसे ही ‘लिबरल-सेक्युलर’ मीडिया ने ‘व्यथित कश्मीरी महिला’ पर ख़बर बनाना शुरू कर दिया। 

इसके बाद मामला जैसे ही वायरल हुआ तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स भी कश्मीरी महिला के समर्थन में आगे आए और उस पर हमले और उसे आतंकवादी बुलाए जाने वाली बात का विरोध किया। क्योंकि पीड़िता ‘कश्मीरी महिला’ थी इसलिए वामपंथी लिबरल्स और इस्लामियों ने घटना पर रुदन और नैरेटिव स्थापित करना शुरू कर दिया।  

(साभार – Aisha Khan)
(साभार – Anoo Bhuyan)

सिर्फ वामी लिबरल्स और इस्लामी ही नहीं बल्कि दिल्ली महिला आयोग की मुखिया स्वाति मालीवाल जो कि ‘आप’ की नेता हैं, वह भी घटना का संज्ञान लेकर मामले में कूद पड़ी। उन्होंने कहा, “यह हैरान करने वाला और शर्मनाक है। दिल्ली महिला आयोग उनके संपर्क में है और जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई की जाएगी।” 

स्वाति मालीवाल ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को सूचना भेजी कि वह मामले को अपने स्तर से देखें। भले नूर भट्ट ने अपनी मकान मालिक पर कई तरह के आरोप लगाए लेकिन इस मामले से संबंधित ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं जो इन आरोपों में विरोधाभास पैदा करते हैं। 

ऑपइंडिया से बात करते हुए तरुणा मखीजा (मकान मालिक) जिन पर नूर भट्ट ने मारपीट का आरोप लगाया, उन्होंने बताया कि लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। बल्कि कश्मीरी महिला का सही नाम नूर भट्ट है भी नहीं। ऑपइंडिया द्वारा खंगाली गई पासपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला का असल नाम फिज़ा मंज़ूर भट्ट है। इसके अलावा उसने अपना नाम नूर भट्ट भी रखा हुआ है। 

तरुणा मखीजा के मुताबिक़ फेमस्टे (Femstay) द्वारा संचालित आवासीय योजना में शयान मोहम्मद और फिज़ा मंज़ूर (नूर भट्ट) नाम के कश्मीरी युवाओं ने किराए पर घर लिया था। ऑपइंडिया द्वारा हासिल किये गए घर के अनुबंध (rent agreement) के अनुसार, नूर भट्ट ने अपनी बहन युहाना मंज़ूर और शयान के 2 जून 2020 से उस आवास में रह रहीं थी। इसका किराया 55 हज़ार रुपए महीना तय है।             

मखीजा ने आरोप लगाया कि दोनों बहनें पिछले 4 महीने से वहाँ रह रही थीं और कभी समय से किराया नहीं देती थीं। इसके अलावा उनका बर्ताव भी बहुत नकारात्मक था और उन्होंने हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में काफी उपद्रव किया था। इसके अलावा दोनों बहनों ने काम करने वाली मेड को उसके रुपए नहीं दिए उलटा उस पर चोरी का आरोप लगा दिया। इसके बाद मखीजा ने बताया दोनों बहनों ने पिछले कई महीनों से बिजली का बिल भी नहीं चुकाया है जो कि अब 70 से 75 हज़ार रुपए हो चुका है। इसके बाद उस घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया जिसके बाद उन्होंने बिजली की चोरी शुरू कर दी। 

तरुणा मखीजा ने यह भी बताया कि जब से इन कश्मीरी महिलाओं ने उनके अपार्टमेन्ट में रह रही हैं तब से उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसके अलावा दोनों बहनों ने पूरी सोसाइटी में उत्पात मचा रखा था और तेज़ गाने बजाती थीं जिससे बाकी लोगों को परेशानी होती थी। मखीजा ने बताया, “हमें अक्सर शिकायत मिलती थी कि कश्मीरी बहनों के कई दोस्त वहाँ आते हैं और उनके हाथ में बंदूकें तक होती हैं। और तो और वह गोलीबारी भी करते थे। एक बार तो इन्होंने एक मेड की साइकल भी तोड़ दी थी।”

यह उन शिकायतों का स्क्रीन शॉट है जो पास में रहने वाले लोगों ने कश्मीरी बहनों के खिलाफ की है। शिकायत के अनुसार चौथी मंज़िल पर रहने वाली दोनों बहनों ने पास में काम करने वाली मेड की साइकल तोड़ दी थी।

नूर भट्ट के विरुद्ध की गई लोगों की शिकायत

तरुणा मखीजा के अनुसार दोनों कश्मीरी बहनें किराया देने के मामले में भी बेहद लापरवाह थीं। अगस्त महीने में उनसे किराया माँगने पर उनमें से एक युहाना ने शोषण का मामला दर्ज कराने की धमकी दी। इस स्क्रीनशॉट में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि नूर भट्ट की बहन युहाना ने तरुणा को गालियाँ दी शोषण का मामला दर्ज कराने की धमकी भी दी। 

कश्मीरी महिला और उनकी मकान मालिक के बीच बातचीत

इस तरह की तमाम शिकायतें मिलने के बाद मकान मालिक तरुणा माखीजा ने उन्हें बकाया राशि देकर घर खाली करने की बात कही। ऑपइंडिया से बात करते हुए तरुणा मखीजा ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अमर कॉलोनी पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में लापरवाही करते हुए कहा कि वह इस मामले में समझौता कर लें। इसके बाद तरुणा मखीजा ने अमर कॉलोनी पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत की जानकारी भी साझा की। 

इसके अलावा कश्मीरी बहनें बिजली के बिल का भुगतान भी नहीं करती थीं। दोनों को लगभग 62360 रुपए बिजली बिल का भुगतान करना था इसके बावजूद दोनों ने बिल का भुगतान करने से मना कर दिया था। नतीजतन बिजली विभाग ने बिजली कनेक्शन बंद कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि दोनों बहनों ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ हाथापाई भी की थी। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि बिजली का कनेक्शन काटने आए कर्मचारी को दोनों बहनें अपशब्द कहती हैं और उसके साथ धक्का-मुक्की करती हैं।  

दोनों बहनों के पास मकान मालिक तरुणा मखीजा पर लगाए गए मारपीट के आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत तक नहीं है। इसके अलावा ऑपइंडिया को एक और ऐसा वीडियो मिला है जिसे देख कर नूर भट्ट द्वारा लगाए गए आरोप और खोखले साबित होते हैं। 

इस वीडियो में मकान मालिक को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि कश्मीरी महिलाओं ने बिजली विभाग के कर्मचारी के साथ हाथापाई की। इसके बाद एक कश्मीरी युवा गुस्साते हुए कहता है, “क्या आप एक कश्मीरी छात्र को आतंकवादी कह रही हैं?” जबकि पूरे वीडियो में आतंकवादी जैसा कोई शब्द उपयोग नहीं किया गया है। यानी कश्मीरी महिलाओं ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए। 

एक और वीडियो में देखा जा सकता है कि कश्मीरी महिलाओं के दोस्त तरुणा मखीजा द्वारा किराया माँगे जाने पर उनका मज़ाक बनाते हैं। 

इसके अलावा कश्मीरी महिलाओं ने आरोप लगाया कि मकान मालिक तरुणा मखीजा ने उनके साथ मारपीट की फिर दोनों ने अपनी चोट भी दिखाई। कश्मीरी महिलाओं का यह भी आरोप था कि तरुणा माखीजा ने उनका फर्नीचर भी ले लिया। इसके जवाब में तरुणा मखीजा का कहना था कि उन्होंने इस तरह की कोई हरकत नहीं की और अगर ऐसा है तो वह मेडिकल परीक्षण के लिए आगे आ सकती हैं। अभी नूर भट्ट का मेडिकल परीक्षण होना बाकी है। उन्होंने यह भी बताया कि फर्नीचर उनकी फर्म का है और उन्होंने कश्मीरी महिलाओं को सामान के साथ अपार्टमेन्ट किराए पर दिया था। 

एक और वीडियो में देखा जा सकता है कि कश्मीरी महिलाएँ शयान के साथ मिल कर सड़क पर उपद्रव कर रही हैं। इसके बाद दोनों ने आरोप लगाया कि बिजली और पानी नहीं होने की वजह से उनकी बिल्ली मर गई।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कश्मीरी बहनें मकान मालिक तरुणा मखीजा के साथ बिल के भुगतान मुद्दे पर बहस कर रही हैं। उनका कहना था कि उनकी बिल्ली मर गई इसलिए तरुणा मखीजा को खुश रहना चाहिए कि वह कुछ किराया तो दे रही हैं। 

इन सभी तस्वीरों और वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कश्मीरी महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप सच से काफी दूर हैं। बल्कि ऑपइंडिया को जितने दस्तावेज़ मिले हैं और आस-पास रहने वाले लोगों ने जो आरोप लगाए उसके आधार पर कश्मीरी महिलाओं ने सभी के साथ दुर्व्यवहार किया, तरुणा मखीजा के साथ अभद्रता की, किराए और बिल का भुगतान भी नहीं किया। 

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मकान मालिक तरुणा मखीजा का इस मुद्दे पर क्या कहना है। 

(नोट: हमने नूर भट्ट से भी बात करने का प्रयास किया लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनकी तरफ से जवाब मिलने के बाद उस पक्ष की ख़बर प्रकाशित की जाएगी)।                             

NEET में आए बराबर नंबर फिर भी शोएब आफताब की 1 रैंक और आकांक्षा सिंह की 2: जानिए क्या है कारण

‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET) की परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मामला ये है कि ओडिशा के एक लड़के और दिल्ली की एक लड़की को इस परीक्षा में सामान मार्क्स ही आए, फिर भी ओडिशा के लड़के को पहला स्थान दिया गया और दिल्ली की लड़की को दूसरा। NEET ने शुक्रवार (अक्टूबर 16, 2020) को रिजल्ट्स जारी किए, जिसमें ओडिशा के शोएब आफताब ने AIR 1 प्राप्त किया और आकांक्षा सिंह को दूसरा स्थान मिला।

अगर रैंक लिस्ट देखें तो पता चलता है कि दिल्ली की आकांक्षा सिंह को भी इतने ही नंबर आए थे। दोनों ने ही पूरे मार्क्स, यानी 720 हासिल किए। लेकिन, शोएब की ऑल इंडिया रैंक 1 थी और आकांक्षा की 2। इसके बाद सोशल मीडिया में लोगों ने बहस शुरू कर दी कि आखिर इसका कारण क्या है। दोनों ही अनारक्षित कैटेगरी से हैं और उन्होंने सारे विषयों में समान नंबर ही हासिल किए हैं। इसीलिए, ये लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।

NEET रैंक लिस्ट

दरअसल, यहाँ पर NTA की ‘टाई ब्रेकिंग पॉलिसी’ लागू होती है, जहाँ समान नंबर आने पर रैंक अलॉट करने के सम्बन्ध में कुछ नियम तय किए गए हैं। इसमें परफॉरमेंस और बेसिक एलिजिबिलिटी के आधार पर रैंक तय किया जाता है। NTA के एक अधिकारी ने बताया कि इस पॉलिसी के तहत अगर दो अभ्यर्थियों को समान नंबर आ जाते हैं तो बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषय में उनके मार्क्स के आधार पर उनकी रैंक तय होती है।

अगर इससे भी बात नहीं बनी तो देखा जाता है कि किसके कितने जवाब गलत हैं और इस आधार पर रैंक दी जाती है। चूँकि शोएब आफताब और आकांक्षा सिंह के नंबर समान हैं, उन्होंने पूरे नंबर हासिल किए हैं, यहाँ किसी विषय में आगे-पीछे होने या फिर सवालों के सही-गलत होने की संख्या में अंतर होने की कोई सम्भावना ही नहीं है। NTA के नियमों के अनुसार, यहाँ अंत में उम्र के हिसाब से रैंक तय की जाती है।

टाई होने पर अंत में ज्यादा उम्र के अभ्यर्थी को रैंकिंग में प्राथमिकता

जिसकी उम्र ज्यादा होगी, उसका स्थान या रैंक ऊपर होगी। 18 वर्षीय शोएब आफताब की उम्र आकांक्षा सिंह से ज्यादा है, इसीलिए उन्हें पहली रैंक दी गई। NEET की परीक्षा में 15.97 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 7,71,500 ने क्वालीफाई किया है। परीक्षा के लिए उपस्थित हुए 13.6 लाख छात्रों में से 8.8 लाख लड़कियाँ थीं। अंग्रेजी सहित 11 भारतीय भाषाओं में NEET की परीक्षा ली गई।

मुन्नवर, साहिल अशरफ की शिकायत पर कंगना और उनकी बहन के खिलाफ मुंबई में FIR: राजद्रोह, सांप्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप

बॉलीवुड कलाकार कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के ट्वीट और इंटरव्यू के माध्यम से कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा फैलाने के लिए दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई की बांद्रा कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद FIR दर्ज की गई। मुन्नवर अली और साहिल अशरफ सैयद नामक दो व्यक्तियों ने मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।

टाइम्स नॉउ की रिपोर्ट के मुताबिक कास्टिंग डायरेक्टर ने याचिका में आरोप लगाया है कि कंगना और उनकी बहन ने बॉलीवुड के हिंदू और मुस्लिम कलाकारों के बीच खाई पैदा की है। वह लगातार आपत्तिजनक ट्वीट कर रही हैं जिससे न केवल धार्मिक भावनाएँ आहत हुई बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में कई लोग इससे आहत हैं।

कथित तौर पर, कंगना रनौत के खिलाफ राजद्रोह और ईशनिंदा के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए, 153 ए, 124 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

इस शख्स ने कोर्ट में कंगना के काफी सारे ट्वीट भी रखे थे। जिसमें पालघर में साधु की लिंचिंग को लेकर कहा गया था कि कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं मुंबई पुलिस को ‘बाबर की सेना’ कहने वाले ट्वीट का भी जिक्र किया गया है। इसके साथ ही शिकायत में कहा गया था कि कंगना रनौत ने देश में कोरोना वायरस फैलाने के लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार ठहराया था।

कुछ दिनों पहले कर्नाटक पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बताया गया कि तुमकुर स्थित अदालत ने यह निर्देश कंगना के ट्वीट को लेकर जारी किए थे, जिनमें कथित रूप से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को निशाना बनाया गया था। आरोप था कि कंगना ने विरोध कर रहे किसानों का अपमान किया।

अधिवक्ता एल रमेश नाइक की शिकायत के आधार पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने क्याथसंद्रा पुलिस स्टेशन के निरीक्षक को बॉलीवुड अभिनेत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। 

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 155 (3) के तहत आवेदन देकर जाँच की माँग की है। वकील नाइक भी क्याथासांद्र से आते हैं, उन्होंने एक्ट्रेस के खिलाफ आपराधिक केस के बारे में एक समाचार एजेंसी से कहा कि कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पुलिस स्टेशन को आदेश दिया है कि वे एक्ट्रेस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू करें।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि कंगना द्वारा उनके ट्विटर अकाउंट से पोस्ट की गई उपरोक्त सामग्री का स्पष्ट उद्देश्य उन लोगों को अपमानित करना है जो किसान बिल का विरोध कर रहे हैं।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि इस ट्वीट से विभिन्न समूहों के बीच टकराव हो सकता है। यह कहा गया था कि न तो पुलिस अधिकारी और न ही सरकार ने इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने/जाँच करने के लिए कोई कार्रवाई शुरू की थी और उपरोक्त नामजद आरोपितों के खिलाफ कोई भी मामला दर्ज करने में विफल रही। इसलिए शिकायतकर्ता ने अभिनेत्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 504, 108 के तहत अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करने माँग की।

ईसाई पादरी ने किया रेप.. पुलिस ने दबाव के कारण FIR दर्ज करने में लगा दिए 9 दिन: पूर्व CBI निदेशक ने CM जगन को लिखा पत्र

सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को पत्र लिख कर तिरुपति में गरीब परिवार की एक 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार के मामले में गिरफ्तारी में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। एफआईआर के अनुसार, पीड़िता आरोपित ईसाई पादरी के यहाँ नौकरी करती थी। एक दिन वो झाँसे से उसे लेकर किसी सुनसान स्थान पर गया और बलात्कार किया। आरोपित एक ईसाई पादरी है।

पूर्व सीबीआई निदेशक ने अपने पत्र में लिखा कि चूँकि आरोपित ईसाई मिशनरी समूह का हिस्सा है, जो धर्मान्तरण के कार्य में लगा हुआ है और उसका अच्छा-खासा प्रभाव है। उसने पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। सीबीआई के पूर्व निदेशक नागेश्वर राव ने आरोप लगाया कि इस मामले में राजनीतिक व अन्य दबावों के कारण पुलिस उसके प्रति नरमी बरत रही है। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने में ही पुलिस ने 9 दिन की देरी लगा दी, जिससे आरोपित के प्रभाव के बारे में पता चलता है।

उन्होंने इस दौरान सीएम रेड्डी को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 9, 2020 को जारी किए गए निर्देशों के बारे में याद दिलाया, जिसमें महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के मामले में कुछ अनिवार्य कदम के बारे में बताया गया था। सभी राज्य सरकारों को ये निर्देश जारी किए गए थे। उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले में सही और पक्षपात रहित जाँच होनी चाहिए। साथ ही आरोपित को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने सीआरपीसी की धाराओं के तहत पीड़िता को मुआवजा देने की भी माँग की। उन्होंने लापरवाही बरतने के आरोप में तिरुपति के एसपी अवुला रमेश रेड्डी के खिलाफ अनुशासत्मक कार्रवाई करने की भी माँग की। तिरुपति पुलिस ने नागेश्वर राव के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कहा कि उनकी शिकायत को निवारण हेतु भेज दिया गया है। पूर्व सीबीआई निदेशक ने इसे ‘मैकेनिकल रिप्लाई’ बताते हुए याद दिलाया कि शिकायतकर्ता वो नहीं हैं, बल्कि पीड़िता और उसका परिवार है – जिन्होंने FIR दर्ज कराई।

हालाँकि, इस घटना के 12 दिन बाद और FIR दर्ज होने के 9 दिन बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया। पूर्व सीबीआई निदेशक का आरोप है कि तिरुपति के एसपी ने इस मामले को लेकर किए गए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न सिर्फ उनके बारे में प्रोफेशनल तरीके से बात की, बल्कि पुलिस की निष्क्रियता और इस मामले में बरती गई ढिलाई को भी नकार दिया। साथ ही, तिरुपति पुलिस ने अपना ट्वीट भी डिलीट कर लिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने आशंका जताई कि तिरुपति में एक प्रभावशाली ईसाई पादरी द्वारा एक गरीब लड़की का बलात्कार किए जाने के मामले में एसपी का ये रवैया उनके बारे में शक और संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि इतने दिन बाद FIR का दर्ज होने और आरोपित की गिरफ्तारी में देरी बताती है कि मटेरियल एविडेंस मिट गए हैं और ऐसा आरोपित को बचाने के लिए किया गया है। उन्होंने आईपीसी की धारा की बात करते हुए याद दिलाया कि ऐसी लापरवाही होने पर पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी इस मामले में धारा-201 (सबूतों को मिटाना), धारा-217 (आरोपित को बचाने के लिए क़ानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज करना), धारा-218 (आरोपित को सज़ा से बचाने के ले रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी करना) और धारा-221 (जानबूझ कर आरोपित की गिरफ़्तारी में चूक करना) के तहत आरोपित बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सीएम से एसपी को तुरंत सस्पेंड करने के साथ-साथ इस मामले क क़ानूनी जाँच के लिए आग्रह किया है।

बता दें कि भारत सरकार के जिस पत्र का जिक्र सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव ने किया है, उसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कहा था कि अपराध होने के बाद महिला किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकती है और बाद में उस ‘जीरो एफआईआर’ को सम्बंधित थाने में ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही FIR न दर्ज करने पर पुलिस अधिकारियों के लिए भी दंड का प्रावधान है। साथ ही जाँच के लिए पुलिस को 2 महीने का समय देने की बात कही गई थी। इसमें दिए गए दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • CrPc की धारा 173 में बलात्‍कार से जुड़े मामलों की जाँच दो महीनों में करने का प्रावधान है। गृह मंत्रालय ने इसके लिए एक ITSSO नामक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है, जहाँ से मामलों की मॉनिटरिंग की जा सकती है।
  • सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A के अनुसार, बलात्‍कार या यौन शोषण के मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़‍िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल से जाँच करवाई जानी चाहिए।
  • इंडियन एविडेंस ऐक्‍ट की धारा 32(1) के अनुसार, मृत व्‍यक्ति का बयान जाँच में महत्वपूर्ण तथ्‍य होगा।
  • फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनका पालन किया जाना चाहिए।
  • अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्‍याय संभव नहीं है। ऐसे में, अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए।
नेताओं की मौजूदगी में कार्यक्रम में जाता है आरोपित पादरी

इधर आंध्र के तिरुपति में गरीब परिवार की लड़की से बलात्कार के आरोपित पादरी की गिरफ़्तारी के लिए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है। आरोपित पादरी का नाम मल्लेम देवसहयम बताया जा रहा है। टाउन क्लब जंक्शन पर विश्व हिन्दू परिषद् और RSS के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि स्थानीय SI हिमाबिंदु ने शिकायत दर्ज कराने आई पीड़िता के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया और संवेदनहीन रवैया अपनाया।

सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों से स्पष्ट है कि आरोपित पादरी जगह-जगह कार्यक्रमों में जाकर उसे सम्बोधित करता है। उसके धर्मान्तरण में भी लिप्त होने की बात सामने आ रही है। क्रिसमस से लेकर ‘गुड फ्राइडे’ जैसे ईसाई त्योहारों के मौके पर वो उपदेश देता है। एक क्रिसमस के मौके पर उसके द्वारा 400 साड़ियाँ बाँटने की तस्वीरें सामने आ हैं। उस कार्यक्रम में विधायक और विधान पार्षद से लेकर मेयर तक उपस्थित थे।

स्थानीय लोगों ने एसपी पर लगाया राजनीतिक महत्वकाँक्षा के चलते मामले में नरमी बरतने का आरोप

वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि तिरुपति के एसपी रमेश की कुछ राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ हैं। दावा किया जा रहा है कि वो अगले विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाने वाले हैं। लोगों का मानना है कि ‘वोट बैंक की राजनीति’ और अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए आरोपित पादरी के साथ नरमी बरती जा रही है। ऑपइंडिया ने एसपी रेड्डी से संपर्क कर उनकी प्रतिक्रिया जानने के प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो पाई।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: रैंक में सुधार के साथ 102 से 94वें स्थान पर पहुँचा भारत, 14% जनसंख्या है कुपोषित

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (Global Hunger Index) GHI-2020 की रिपोर्ट जारी हो गई है और भारत ने सूचकाँक में पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा सुधार दिखाया है। पिछली बार, यानी वर्ष 2019 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में शामिल 117 देशों में से भारत की रैंकिंग 102 थी। वहीं वर्ष 2020 में भारत को 107 देशों में से 94 वाँ स्थान दिया गया है। हालाँकि, अभी भी सिर्फ 13 देश ही ऐसे हैं, जिनसे भारत आगे है। ये देश – रवांडा, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया, मोजाम्बिक और चाड आदि हैं।

‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ और ‘Welthungerhilfe’ संयुक्त रूप से मिलकर ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट हर साल जारी करते हैं। इसे वैश्विक, क्षेत्रीय और विभिन्न देशों में भूख को मापने और ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूख का स्तर अभी भी गंभीर स्थिति में है। हालाँकि पिछले एक साल में भारत ने पर्याप्त प्रगति भी की है। भारत ने अपने GHI स्कोर (ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर) में भी सुधार किया है।

2019 में भारत का GHI स्कोर 30.3 था, 2020 में भारत ने अपने स्कोर को 27.2 तक सुधार लिया है।

GHI score 2019 में

हालाँकि वर्ष 2020 में, GHI स्कोर 27.2 हो गया है।

GHI score 2020 में

गौरतलब है कि जिस पैमाने को ‘गंभीर’ माना जाएगा, वह दोनों वर्षों में एक जैसा है। दोनों पैमानों का कहना है कि 20.0 से 34.9 के बीच का स्कोर देश को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाएगा।

बता दें कि भारत में काफी वर्षों के बाद इसमें सुधार देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14% जनसंख्या कुपोषण की शिकार है। वहीं, भारत के बच्चों में ‘स्टंटिंग रेट’ 37.4% है। ‘स्टन्ड’ बच्चे वो कहलाते हैं जिनकी लंबाई उनकी उम्र की तुलना में कम होती है और जिनमें भयानक कुपोषण दिखता है।

कैसे तय होती है रैंकिंग

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के तमाम देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत ब्योरा होता है। जैसे- लोगों को किस तरह का खाद्य पदार्थ मिल रहा है, उसकी गुणवत्ता और मात्रा कितनी है और उसमें कमियाँ क्या हैं। हर साल अक्टूबर में ये रिपोर्ट जारी की जाती है।

GHI रिपोर्ट में भूख की स्थिति के आधार पर देशों को 0 से 100 के बीच अंक दिए गए हैं। इस रिपोर्ट में 0 अंक होने का अर्थ ‘सबसे अच्छा’ और भूख की स्थिति का नहीं होना है। रिपोर्ट में 10 से कम अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत कम समस्या है। इसी प्रकार से रिपोर्ट में 20 से 34.9 अंक का मतलब भूख का गंभीर संकट है। रिपोर्ट में 35 से 49.9 अंक का मतलब हालत बहुत ही चुनौतीपूर्ण है और 50 या इससे ज्यादा अंक का मतलब है कि देश में भूख की बहुत ही भयावह स्थिति है। इस रिपोर्ट में भारत को 27.2 मिले हैं जबकि 2019 में 30.3 अंक मिले थे। 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स एक ऐसा मामला रहा है, जो भारत में हर साल मीडिया की सुर्खियाँ और राजनीतिक पार्टियों को मुद्दा बनाने में मदद करता है। कॉन्ग्रेस ने वर्ष 2019 में दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को तब बर्बाद कर दिया। जब कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में थी तब भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में ‘उदारवादी’ श्रेणी में था, जबकि 2014 के बाद से ही भारत को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया।

हालाँकि यह दावा पूरी तरह से निराधार था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्पष्ट रूप से बताता है कि जीएचआई स्कोर की तुलना एक वर्ष में अन्य देशों के साथ की जा सकती है, लेकिन उनकी तुलना अन्य वर्षों के साथ नहीं की जा सकती है। जीएचआई वेबसाइट का कहना है कि “वर्तमान और ऐतिहासिक डेटा जिस पर जीएचआई स्कोर आधारित हैं, को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों द्वारा लगातार संशोधित और उनका सुधार किया जा रहा है, और प्रत्येक वर्ष की जीएचआई रिपोर्ट इन परिवर्तनों को दर्शाती है। रिपोर्ट के बीच स्कोर की तुलना करने से यह धारणा बन सकती है कि भूख किसी विशिष्ट देश में साल-दर-साल सकारात्मक या नकारात्मक रूप से बदल गई है, जबकि कुछ मामलों में परिवर्तन आंशिक रूप से या पूरी तरह से डेटा संशोधन का प्रतिबिंब हो सकता है। ”

गौरतलब है कि अगर देखा जाए तो 2014 में हंगर इंडेक्स का पैमाना पूरी तरह से अलग था और 2020 का पैमाना अलग है। उदाहरण के लिए 2014 में, 10.0 से 19.9 के पैमाने को ‘गंभीर’ माना जाता था और 2020 में, 20.0 से 34.9 के पैमाने को गंभीर माना जाता है। भारत को 2014 में, 17.8 का स्कोर मिला, जबकि 2020 में भारत को 27.2 का स्कोर मिला।

प्रोपेगेंडा आधारित मीडिया और राजनेताओं के लिए इसका अर्थ यह होगा कि भारत अपने स्कोर में पीछे चला गया जबकि उन्होंने सच्चाई को किनारे रख लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। क्योंकि लगातार इसके पैमाने बदलते रहते हैं। 2014 और 2020 दोनों साल भारत ‘गंभीर स्थिति’ की श्रेणी में था।

CM योगी ने किया ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ, कहा- घोषित दुराचारियों की चौराहों पर लगेगी तस्वीर, बहिष्कार के लिए व्यापक अभियान

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को बलरामपुर में ‘मिशन शक्ति’ की शुरूआत की है। शारदीय से वासंतिक नवरात्र तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन दिलाना है। मुख्यमंत्री ने बलरामपुर से तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ से इसकी शुरुआत की है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”शक्ति की आराधना के पावन अवसर ‘शारदीय नवरात्रि’ के प्रथम दिवस से प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान महिलाओं और बच्चों के प्रति सम्मान तथा सुरक्षा की भावना के प्रसार तथा महिला स्वावलंबन की आवश्यकता को नवीन आयाम प्रदान करने में सहयोगी होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने के लिए, मैंने बलरामपुर से मिशन शक्ति अभियान को शुरु करने का फैसला किया। यह अभियान बलरामपुर में बर्बरता की शिकार हुई बिटिया को सच्ची श्रद्धांजलि है। महिलाओं व बच्चों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव हमारी संस्कृति है। इसी भावना के साथ आज ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ हो रहा है।”

मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिलाओं, बेटियों, नाबालिग बच्चों और अनुसूचित जाति के लोगों के विरुद्ध अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए कि वह गले मे तख्ती लटकाकर माफी माँगते फिरें या प्रदेश छोड़कर भाग जाएँ। आरोपितों के खिलाफ होने वाली कार्रवाईयों की दैनिक रिपोर्टिंग होनी चाहिए व शासन स्तर पर इसकी समीक्षा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि घोषित दुराचारियों की चौराहों पर फोटो लगाई जाएगी और उसके बहिष्कार के लिए भी एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

नवरात्र के पहले दिन महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा के लिए ‘मिशन शक्ति’ के शुभारंभ के साथ सीएम योगी ने ऐलान किया है कि अब यूपी के थानों में महिलाओं की सुनवाई के लिए अलग से इंतजाम किया जाएगा। प्रदेश के 1535 थानों में महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए अलग कमरे बनेंगे। साथ ही वहाँ एक महिला पुलिसकर्मी की तैनाती की जाएगी जो खासतौर पर थाने पर आने वाली महिलाओं की सुनवाई करेंगी। महिलाओं से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराध में लिप्‍त लोगों को कड़ा दंड भोगना होगा।

उन्होंने वादा किया कि बिटिया के दुष्कर्मियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर शीघ्र ही कठोर सजा दिलाई जाएगी। अपराधियों के खिलाफ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। इस मौके पर उन्होंने ऐलान किया कि अब पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत भर्ती बेटियों की होगी। मिशन शक्ति अभियान से 24 सरकारी विभाग तथा अन्तरराष्ट्रीय और स्थानीय सामाजिक संगठन जुड़ेंगे।

इसके पहले मुख्यमंत्री योगी ने जिले के देवीपाटन शक्तिपीठ तुलसीपुर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह माँ पाटेश्वरी का दर्शन किया। मिशन शक्ति अभियान 25 अक्टूब तक चलेगा। इसके बाद अप्रैल तक हर महीने यह अभियान एक-एक सप्ताह के लिए चलाया जाएगा। जिसके लिए तिथिवार थीम निर्धारित की गई है।

महिलाओं व बच्चों से जुड़े मुद्दों पर किया जाएगा जागरुक

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत प्रत्येक माह में एक सप्ताह तक विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मिशन के तहत प्रदेश की 24 करोड़ जनता तक पहुँचकर उन्हें महिलाओं तथा बच्चों से संबंधित मुद्दों पर जागरूक किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ‘मिशन शक्ति’ के तहत नियमित अंतराल पर विभिन्न चरणों में ‘थीम वार’ साप्ताहिक कार्यक्रम चलाए जाएँगे।  

उन्होंने बताया कि 17 से 25 अक्तूबर के बीच प्रस्तावित कार्ययोजना के आधार पर प्रत्येक दिन अलग-अलग विभागों को ‘लीड विभाग’ नामित किया गया है। लीड विभाग को मिशन के अंतर्गत निर्धारित दिन पर अपने विभाग से संबंधित गतिविधियों को पूरे प्रदेश में ‘ग्रैंड-इवेन्ट’ के रूप में आयोजित करना होगा।