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कॉन्ग्रेस नेता नगमा ने फैलाई फेक न्यूज, CAA विरोधी प्रदर्शनकारी अल्वी को बताया वाजपेयी की भतीजी

अभिनेत्री और कॉन्ग्रेस नेता नगमा ने मंगलवार (6 अक्टूबर 2020) को फेक न्यूज को हवा देते हुए बीजेपी सरकार की आलोचना करने वाली एक महिला को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी बताया। मोदी सरकार को घेरने की जल्दबादी में नगमा ने इस महिला के वीडियो को ट्वीट किया। महिला मोदी सरकार पर कथित वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगा रही थी।

हिन्दी में लिखे गए अपने ट्वीट में कॉन्ग्रेस नेता नगमा ने कहा, “अटल जी की भतीजी कह रही है ये देश को बाँटने की भयंकर साज़िश आरएसएस और भाजपा का एजेंडा है और वे इस पर अमादा है। देश की एकता और अखंडता को गोदी मीडिया के साथ मिल कर बर्बाद कर रहे हैं। नौजवानों को रोज़गार देने में ये विफल रहे हैं। किसानों को बर्बाद कर दिया है और बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।” 

(साभार – ट्विटर, नगमा)

इसके अलावा तमाम इंटरनेट यूज़र्स और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता-समर्थकों ने भी यह वीडियो साझा किया। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अटल जी की भतीजी मोदी सरकार की आलोचना कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यही वीडियो क्लिप इस साल की शुरुआत में लोगों ने खूब साझा की थी, जब देश में सीएए और एनआरसी का विरोध अपने चरम पर था। उस वक्त भी वीडियो शेयर करने वालों का यही कहना था कि महिला पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की भतीजी है।     

साभार – इंडिया टुडे

असल तथ्य यह है कि वीडियो में नज़र आने वाली महिला अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी नहीं है। उसमें साफ़ देखा जा सकता है कि वीडियो का स्रोत ‘HNP News’ है। महिला का असली नाम अतिया अल्वी है और वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती है। वायरल वीडियो इस साल के जनवरी महीने में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बनाया गया था, जब सीएए और एनआरसी का विरोध हो रहा था। 

इन तथ्यों के आधार पर स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस नेता नगमा द्वारा इस महिला के बारे में किया गया दावा गलत है। बहुत जल्द यह बात सुर्ख़ियों में आ गई कि उनके द्वारा किया गया दावा झूठा है, इसके बावजूद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया।

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बाबा का ढाबा: बूढ़े दंपति की आँखों में आँसू देख मदद को उमड़े लोग, लौट आई खुशी

पिछले एक दो दिनों से सोशल मीडिया पर एक बूढ़े दंपति का वीडियो खूब चर्चा में है। जितना चर्चा में रहा उतना ही लोगों ने उस वीडियो पर संवेदना जताई और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। दंपति दिल्ली स्थित मालवीय नगर में एक छोटा सा ढाबा चलाते हैं और उस पर सामान्य भोजन देते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दोनों बेहद भावुक और असहाय नज़र आ रहे हैं।  

दरअसल, वृद्ध दंपति आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र रहे हैं और किसी इंटरनेट यूज़र ने उनका वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ बूढ़े दंपति के लिए मदद माँगने का सिलसिला, जिसके तहत सोशल मीडिया पर मौजूद लाखों लोग वीडियो साझा करते हुए उनकी मदद के लिए आगे आए। एक ही दिन के भीतर बूढ़े दंपति का वीडियो लाखों करोड़ों तक पहुँच गया। बहुत से लोगों ने उनका निजी तौर पर सहयोग किया जिससे उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में ग्राहक मिलें। 

गुरूवार (8 अक्टूबर 2020) की सुबह तक बहुत से लोग मदद के लिए खुद मालवीय नगर स्थित उनके ढाबे पर पहुँचे। आम लोगों ने इस घटना के ज़रिए साबित कर दिया कि इंसानियत पर भरोसा बरकरार रहना चाहिए। जहाँ एक तरफ यह घटना संवेदना और सहयोग की मिसाल है वहीं इस पर हमें आत्म चिंतन करने की भी आवश्यकता है। हमारे घर और मोहल्लों के आस-पास इस तरह के तमाम ‘बाबा का ढाबा’ होंगे, शायद यही सही समय है उन तक पहुँचने का। 

पड़ोस की कोई आम दुकान ही क्यों न हो? उसमें कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर होगा जो प्रतिदिन हमारे इस्तेमाल में आता है। चीन से फैले कोरोना वायरस ने हम सभी को बुरी तरह प्रभावित किया है, इस मुश्किल दौर में सभी संघर्ष कर रहे हैं। बहुत से लोगों का व्यापार बंद हो चुका है, बहुत से लोगों की नौकरियाँ छूट गई हैं। सभी के लिए हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे में यह सबसे सही समय है पड़ोस के उन अंकल के पास जाने का जो साइकिल पर छोले-भठूरे बेचते हैं या पड़ोस में इडली बेचने वाले कोई अंकल। छोटी से छोटी चीज़ों के हमारे आस-पास मौजूद चीज़ें, हम वहाँ जा कर उनकी मदद कर सकते हैं। 

भले कोरोना वायरस के चलते हालात बदतर ही क्यों न हों अगर सालों नहीं तो हालात सामान्य होने में महीनों लगने ही वाले हैं। यह भी हो सकता है कि हालात पहले की तरह होना इतना आसान भी न हो, जब से मास्क हमारे लिए सामान्य इकाई बना है। महामारी ने हमें एक चीज़ सिखाई है कि जीवन पूरी तरह अप्रत्याशित है। हमारी तरफ से की गई मदद की छोटी सी कोशिश भी बहुत कुछ बदल सकती है। महामारी के इस मुश्किल दौर से अगर कोई चीज़ हमें बाहर निकाल सकती है तो वह सिर्फ हमारी दयालुता ही है। 

फोटो फीचर: नभः स्पृशं दीप्तम्- IAF के 88वें स्थापना दिवस पर देखिए ‘वायुवीरों’ के शौर्य की झलक

नभः स्पृशं दीप्तम् (Touch the Sky with Glory): IAF के स्थापना दिवस के अवसर पर हर साल की तरह इस बार भी देश आज गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर 88वीं वर्षगाँठ मना रहा है। देश में हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस (Indian Air Force Day) मनाया जाता है। वायुसेना दिवस के मौके पर इस बार भी शानदार परेड और भव्य IAF ने एयर शो का आयोजन किया गया।

हिंडन बेस पर वायुसेना ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया, और राफेल विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाते देखा गया। इस बार एयरफोर्स के बेड़े में राफेल को भी शामिल किया गया है।

वायुसेना दिवस के मौके पर सबसे पहले चिनूक हेलिकॉप्टर, अपाचे हेलिकॉप्टर, ग्लोबमास्टर, सुखोई समेत कई लड़ाकू विमानों ने अपना शौर्य दिखाया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि राफेल, अपाचे, चिनूक भारतीय वायुसेना को बदल देगा।

उन्होंने कहा, “राफेल, अपाचे और चिनूक को शामिल कर आधुनिकीकरण की चल रही प्रक्रिया भारतीय वायुसेना को सामरिक बल में बदल देगी। हमें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में, भारतीय वायु सेना प्रतिबद्धता और क्षमता के अपने उच्च मानकों को बनाए रखना जारी रखेगी।”

चिनूक

चिनूक विमान

राफेल

राफेल लड़ाकू विमान के साथ थ्री फॉर्मेशन में जगुआर लड़ाकू विमान भी नजर आए,

तेजस

राफेल के फौरन बाद देशी विमान तेजस ने आसमान में अपना जलवा दिखाया।

तेजस (फाइल फोटो)

सूर्यकिरण टीम

अगला नंबर सूर्यकिरण टीम का था –

सूर्यकिरण टीम के अंतर्गत कई लड़ाकू विमान आते हैं। इस टीम में विंग कमांडर अर्जुन यादव समेत अन्य वायुवीर शामिल रहे।

टीम सूर्यकिरण

टीम सारंग

टीम सारंग के करतब के साथ ही आज का समारोह समाप्त हुआ

2 बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला, गवाह बनने पर तीसरे की भी कर दी हत्या: आज भी शहाबुद्दीन के भय के बीच जीते हैं चंदा बाबू

आज हम एक ऐसे बुजुर्ग दम्पति की बात करने जा रहे हैं, जिनके दो बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला गया। इस मामले में उनका तीसरा बेटा गवाह था लेकिन इससे पहले कि वो अदालत पहुँचता, उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, इस मामले में आरोपित का उस समय कुछ नहीं हो पाया, क्योंकि उसका नाम था – सैयद शहाबुद्दीन। वही शहाबुद्दीन, जिसके नाम से ही सीवान और आसपास के इलाक़े थर-थर काँपते थे। वो दम्पति हैं – चंदा बाबू और उनकी पत्नी कलावती।

वो बुजुर्ग दम्पति आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। भगवान और न्यायालय पर अभी भी उन्हें पूरा भरोसा है, लेकिन उन्हें ज़िंदगी में ठोकरों से सिवा कुछ नहीं मिला। शहाबुद्दीन भले ही जेल में है लेकिन वहाँ से अक्सर उसकी तस्वीरें आती रहती हैं। लालू यादव से उसकी जेल से ही फोन पर बातचीत हुई थी, जिसका ऑडियो वायरल हुआ था। बन्दूक के बल पर कभी वहाँ शासन करने वाला शहाबुद्दीन चुनावों में भी बार-बार जीता।

सैयद शहाबुद्दीन और सीवान में उसका साम्राज्य

सीवान एक ऐसा शहर है, जहाँ 90 के दशक में और इक्कीसवीं सदी की शुरुआत के दशक में सिर्फ मोहम्मद शहाबुद्दीन की ही तूती बोलती थी। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया। अब जब शहाबुद्दीन जेल में है, उसकी पत्नी हीना शहाब 2009, 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधा राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। फ़िलहाल वो छोटेलाल गुप्ता नामक वामपंथी नेता का अपहरण कर के उन्हें गायब कराने सहित कई मामलों में जेल की सज़ा भुगत रहा है। ये इतर बात है कि यही वामपंथी दल आज राजद के साथ गठबंधन बना कर विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि शहाबुद्दीन ने सिर्फ लोकसभा चुनाव ही जीता, इससे पहले वो जीरादेई विधानसभा क्षेत्र से 2 बार विधायक चुना जा चुका है। उसे उसके समर्थक ‘साहेब’ कह कर बुलाते हैं। सजायाफ्ता गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूट के इतने मामले दर्ज हैं कि उसके सामने बड़े से बड़े अपराधी भी छोटे लगें। और सबसे बड़ी बात तो ये है कि बिहार का ये गैंगस्टर शिक्षित है, काफी पढ़ा-लिखा है।

आर्ट्स से मास्टर्स की डिग्री लेने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन ने राजनीतिक विज्ञान में पीएचडी की डिग्री ले रखी है। शुरू में उसने जनता दल के टिकट पर दो विधानसभा चुनाव जीते लेकिन लालू प्रसाद द्वारा राजद के गठन के साथ ही उसका प्रभाव बढ़ता ही चला गया। उस समय कहा जाता था कि मोहम्मद शहाबुद्दीन जो भी करे, उसे क़ानूनी कार्रवाइयों से छूट प्राप्त है और उसे सत्ता का पूर्ण संरक्षण मिला हुआ है।

जिस तरह से उत्तर प्रदेश में विकास दुबे ने 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया था, उसी तरह शहाबुद्दीन भी पुलिसकर्मियों को मार डालता था और उस पर कार्रवाई तक नहीं होती थी। ऐसा ही एक वाकया मार्च 2001 में हुआ, जब उसने एक पुलिस अधिकारी को ही पीट दिया। स्थानीय राजद नेता को गिरफ्तार करने गई पुलिसकर्मियों को पकड़-पकड़ कर उसके समर्थकों ने पिटाई की, जिससे इलाक़े में हड़कंप मच गया। मुठभेड़ में 2 पुलिसकर्मी सहित 8 लोग मारे गए थे।

2004 के चुनाव में तो स्थिति ये थी कि शहाबुद्दीन के जेल में होने के बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान जिसने भी विपक्षी उम्मीदवारों के पोस्टर-बैनर भी टाँगे वो गायब हो गया। इस चुनाव में न जाने कितने अपहरण और हत्या की वारदातें हुईं। जेल से निकल कर अस्पताल में शिफ्ट हुए शहाबुद्दीन जिससे चाहे उससे मिल सकता था। उसके लिए कोई रोकटोक नहीं थी। उस चुनाव में विपक्ष एक तरह से था ही नहीं।

जब चुनाव हुए तो साइलेंट वोटर्स का भी बोलबाला रहा और जदयू उम्मीदवार ने 2 लाख से भी ज्यादा (33%) मत पाकर शहाबुद्दीन को तगड़ी फाइट दी, भले ही वो जीत गया। शाहबुद्दीन के ईगो को इससे ठेस पहुँची और उसके बाद जदयू कार्यकर्ताओं की हत्याएँ शुरू हो गईं। जिस गाँव में जदयू उम्मीदवार को ज्यादा मत मिले थे, वहाँ का मुखिया ही मारा गया। जदयू उम्मीदवार के घर पर ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। वो जदयू उम्मीदवार आज सीवान के सांसद हैं और भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष भी।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर हुई थी हत्या

शहाबुद्दीन को उसके तीन सहयोगियों सहित जिस मामले में हाईकोर्ट से उम्रकैद की सज़ा मिली और जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरक़रार रखा गया, वो यही मामला है। रंगदारी नहीं देने और अपनी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया।

फिर अगस्त 16, 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई। इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 वर्ष लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया और ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी।

आप सोच सकते हैं कि जो व्यक्ति महज 10-12 फ़ीट लम्बाई-चौड़ाई वाली जमीन के लिए एक ही परिवार के तीन बेटों की हत्या कर सकता है, वो कितना खूँखार रहा होगा और उसने अपने हर एक चुनाव में विपक्षियों को खामोश करने के लिए कितने खून बहाए होंगे। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई, जब अगस्त 2004 के पहले सप्ताह में सीवान के गोशाला रोड निवासी चंदा बाबू के निर्माणाधीन मकान में बनी एक दुकान पर असामाजिक तत्वों ने कब्जे की कोशिश की।

इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रयास चल ही रहे थे कि गुंडे चंदा बाबू के घर पर पहुँच गए और उन्होंने पूरे परिवार को मारना-पीटना शुरू कर दिया। अपने घर में रखे तेजाब का इस्तेमाल कर के किसी तरह पूरे परिवार ने अपनी जान बचाई। आत्मरक्षा के लिए फेंके गए तेजाब से 2 गुंडे जख्मी हो गए और यहीं से उनके मन में प्रतिशोध की ऐसी आग भड़कने लगी कि उसका अंजाम इतना भयावह होगा, किसी ने सोचा तक नहीं था।

आखिरकार दोनों भाइयों की एसिड से ही नहला कर हत्या कर दी गई। राजीव रौशन ने बताया था कि उनके सामने ही उनके दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कोर्ट में बयान दिया था कि उनके सामने ही उनके मरे हुए भाइयों के शवों को टुकड़े-टुकड़े कर के बोरे में डाला गया और दफ़न कर दिया गया था। फिर 2015 में जब भाजपा और जदयू का गठबंधन हुआ, उसके 2 दिन बाद ही राजीव रौशन की भी हत्या कर दी गई।

चंदा बाबू आज भी अपनी जान का भय लिए जीते हैं। उनके पास न तो आमदनी का कोई स्रोत है और न ही उनकी सुरक्षा के लिए कुछ व्यवस्था की गई है। हाँ, उन्हें 2 बॉडीगॉर्ड्स ज़रूर मिले हैं लेकिन उनका कहना है कि वो कुछ नहीं कर सकते, शहाबुद्दीन अंततः उन्हें मरवा ही डालेगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं शहाबुद्दीन की पत्नी हीना शहाब इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी मानती हैं।

शहाबुद्दीन, सत्ता के संरक्षण में पला सबसे बड़ा अपराधी

कहते हैं, मोहम्मद शहाबुद्दीन की जिस भी चीज पर नज़र होती थी, उसे पाने के लिए वो कुछ भी कर सकता था। और जब बात संपत्ति की हो तो वो और उसके गुर्गे कितने भी खून बहाने से नहीं हिचकते थे। चंदा बाबू के बेटों से भी उसने 2 लाख की रंगदारी माँगी थी। रंगदारी न मिलने पर उसकी नज़र उस दुकान पर थी। साथ ही सीवान में चंदा बाबू की कुछ जमीनें थीं, जिसे वो हर हाल में लेना चाहता था।

ये वो समय था, जब शाहबुद्दीन के पास वो सारे हथियार और उपकरण थे – जो आम आदमी रख ही नहीं सकता है। उसने बिहार में एके-47 के इस्तेमाल को आम बनाया। शहाबुद्दीन के घर पर जब 2005 में पुलिस की छापेमारी हुई तो वहाँ से कई एके-47 हथियारों के अलावा नाइट विजन गॉगल्स और लेजर गाइडेड गन्स के अलावा कई ऐसी चीजें मिली, जिन्हें रखने के अधिकार सिर्फ सेना के पास थे, आम आदमी के पास नहीं।

यूपीए-1 की सरकार के दौरान उसे दिल्ली में न सिर्फ बंगला मिला हुआ था बल्कि वो संसद भी नियमित रूप से जाता-आता था। उसे गिरफ्तार करने गई बिहार पुलिस दिल्ली में 3 महीने तक ख़ाक छानती रही। बिहार के तत्कालीन डीजीपी डीपी ओझा ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि शहाबुद्दीन की पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के साथ संपर्क थे। उसे गिरफ्तार करने के एक-दो नहीं बल्कि 8 गैर जमानती वारंट जारी हुए थे, जी हाँ – आठ।

उसने क़ानून को चकमा देने के लिए हर तरकीब आजमाई। कभी उसने फिट होते हुए भी बीमारी का बहाना बना कर कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया तो कभी सांसद होने के कारण पुलिस की गिरफ़्तारी से बचता रहा। कभी गवाहों की ही हत्या हो गई तो कभी पीड़ित ही मुकर गए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 100 से अधिक शव तो उसके प्रतापपुर स्थित कोठी में ही गाड़े गए हैं। ये वही लोग हैं, जिनकी हत्या करवा दी गई।

जुलाई 2009 में तो सेशन जज वीबी गुप्ता को ही धमकी मिल गई। शहाबुद्दीन के वकील महताब आलम ने पहले तो उन्हें लालच दिया, फिर जान की धमकी देने पर उतर आया। अंततः पटना हाईकोर्ट के आदेश पर वकील के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ। जेलर को भी उसके समर्थकों ने ‘तड़पा-तड़पा कर मारने’ की धमकी थी। फ़िलहाल वो जेल में हैं, लेकिन उसके भय से जो सीवान में दूषित माहौल बना था, उसका असर अब तक पूरी तरह मिटा नहीं है।

माँ-भाई ने ही पीटा… हमने पीड़िता के साथ गलत काम नहीं किया: हाथरस केस के आरोपितों ने जेल से पत्र लिखा

हाथरस की घटना के सभी चारों आरोपितों ने जेल से एसपी को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए न्याय की माँग की है। इस पत्र में आरोपितों ने लिखा है कि पीड़िता की माँ और भाई ने ही पीड़िता की पिटाई की, जिस कारण उसकी मौत हो गई।

इस पत्र में लिखा है कि पीड़िता की मुख्‍य आरोपित संदीप से दोस्‍त थी और वो फोन पर भी एक-दूसरे से बात करते थे। यह दोस्‍ती उसके घरवालों को पसंद नहीं थी और इसी नफरत में परिवार के लोगों ने ही उसे मार दिया।

पत्र में हाथरस कांड के चारों आरोपितों – लवकुश, रवि, रामकुमार उर्फ रामू और संदीप उर्फ चंदू, चारों के हस्ताक्षर और उनके अँगूठे के निशान भी हैं। आरोपितों ने इस पत्र में कहा है कि उन्हें झूठे आरोप में फँसाया गया है। इन सभी ने पत्र के माध्यम से यूपी पुलिस से निष्पक्ष जाँच की माँग की है। उन्‍होंने एफआईआर में अलग-अलग दिन आरोपितों के नाम बढ़ाने और धाराएँ जोड़ने का भी उल्‍लेख किया है।

आरोपितों द्वारा एसपी को लिखा गया पत्र

मुख्‍य आरोपित संदीप की ओर से दावा किया गया है कि उसकी पीड़िता से अक्‍सर बातचीत होती थी। उल्लेखनीय है कि संदीप और पीड़िता के परिवार के फोन कॉल डिटेल्‍स (CDR) में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों नंबरों के बीच 100 से अधिक बार बातचीत हुई थी। हालाँकि, पीड़िता का परिवार कॉल रिकॉर्ड की बात को भी झूठ बता रहा है। इस पत्र में संदीप ने दावा किया कि पीड़िता उसके गाँव की लड़की थी, जिससे उसकी दोस्ती थी।

इस पत्र में चारों आरोपितों की ओर से लिखा है, “हम लोगों की मुलाकात के साथ कभी-कभी फोन पर बात भी होती थी। हमारी दोस्ती उसके घरवालों को पसंद नहीं थी। घटना के दिन मेरी उससे खेतों पर मुलाकात हुई उसके साथ उसकी माँ और भाई थे। उसके कहने पर मैं तुरंत घर चला गया और वहाँ अपने पिता के साथ पशुओं को पानी पिलाने लगा।”

“.. बाद में मुझे गाँव वालों से पता चला कि हमारी दोस्ती को लेकर उसके माँ और उसके भाई ने उसके साथ मार-पीट की। जिससे उसे गंभीर चोट आई थी और बाद में उसकी मौत हो गई।मैंने कभी भी उसके साथ गलत काम नहीं किया ना ही उसे मारा। लड़की के परिवार वालों ने झूठे आरोपों में हम चार लोगों को जेल भिजवा दिया। हम सभी लोग निर्दोष हैं।”

हाथरस कांड

गौरतलब है कि 19 वर्षीय पीड़िता का उसके गाँव में 14 सितंबर को चार लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार और हमला किया गया था। हालाँकि, यूपी पुलिस ने बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपों से इंकार किया था और फोरेंसिक रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई है।

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ की अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

ताइवान ने भारतीय मीडिया से कहा कि वो चीन को &₹ $£# कह दें, लेकिन ‘गेट लॉस्ट’ पर रुक गया

बुधवार (7 अक्टूबर 2020) को ताइवान और चीन के बीच शब्दों की लड़ाई छिड़ गई। दरअसल, दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने भारतीय मीडिया को संबोधित करते हुए लिखा कि उन्हें ‘वन चाइना’ नीति का अनुसरण करना चाहिए। 10 अक्टूबर को ताइवान का राष्ट्रीय दिवस है, इस मौके से कुछ दिन पहले दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने भारतीय मीडिया से कहा कि वह ताइवान को एक अलग ‘देश’ नहीं कहें।

अपने पत्र में चीनी दूतावास ने लिखा, “हम मीडिया साथियों (भारतीय) को एक बात याद दिलाना चाहते हैं कि पूरी दुनिया में केवल एक ही चीन है। चीनी गणतंत्र के लोगों की सरकार पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र वैधानिक संस्था (सरकार) है।” इसके बाद चीन ने अपने पत्र में लिखा कि हम इस बात की आशा करते हैं कि जहाँ तक ताइवान का सवाल है भारतीय मीडिया, भारत सरकार के मत पर बनी रहेगी। साथ ही ‘वन चाइना’ के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करेगी। ताइवान को राष्ट्र (देश), चीनी गणतंत्र (रिपब्लिक ऑफ़ चाइना) या चीन स्थित ताइवान के किसी नेता को राष्ट्रपति के तौर पर प्रचारित नहीं किया जाए। इससे आम लोगों के बीच गलत संदेश जाता है, ऐसा नहीं होना चाहिए।”

पत्र के अगले हिस्से में चीनी दूतावास ने लिखा, “ताइवान चीन का एक अभिन्न अंग है। दुनिया के जितने भी देशों के चीन के साथ कूटनीतिक सम्बंध हैं उन्हें चीन की ‘वन चाइना पालिसी’ के प्रति समर्पित होकर सम्मान करना चाहिए। भारत सरकार का खुद इस मुद्दे पर पिछले कई वर्षों से यही नज़रिया रहा है।”

दरअसल, ताइवान के व्यापार कार्यालय (ट्रेड ऑफिस) ने भारत के समाचार पत्रों में अपने राष्ट्रीय दिवस (10 अक्टूबर) का पूरे पन्ने का विज्ञापन प्रकाशित करवाया था। इसके बाद चीन की तरफ से यह प्रतिक्रिया आई थी। विज्ञापन में ताइवान के राष्ट्रपति त्साइ इंग वेन की तस्वीर लगी थी और उसके साथ कैप्शन लिखा हुआ था, “Taiwan and India are natural partners (चीन और भारत स्वाभाविक सहयोगी हैं)।”

चीन द्वारा यह निर्देश जारी किए जाने के बाद ताइवान ने भी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया जारी की। बुधवार को ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ़ वू ने कहा कि वह आशा करते हैं कि भारतीय मीडिया चीन को एक जवाब देगी, “Get Lost” (दफ़ा हो जाओ)। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने पूरे जवाब में लिखा, “भारत पूरे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहाँ की प्रेस – मीडिया और आम लोग स्वच्छंद अभिव्यक्ति पसंद लोग हैं। ऐसा लगता है कि वामपंथी चीन सेंसरशिप थोप कर महाद्वीप में दखल देना चाहता है।” 

इसके बाद ताईवानी सांसद वांग टिंग यंग ने चीनी दूतावास की इस हरकत पर उसकी आलोचना की। उन्होंने लिखा, “इस बारे में गलती करने की कोई ज़रूरत नहीं है। यह दुनिया में ताइवान की यथास्थिति से सम्बंधित विषय नहीं है बल्कि यह चीन का प्रेस की अभिव्यक्ति पर सार्वजनिक हमले का विषय है। जब प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में होती है तब हर तरह की आज़ादी पर ख़तरा होता है।” 

चीन का राष्ट्रीय दिवस या समानांतर रूप से मनाया जाने वाला ताइवान का राष्ट्रीय दिवस 10 अक्टूबर को आयोजित होता है। यह वूचैंग (wuchang) के उभरने और चीन के किंग (Qing) साम्राज्य की समाप्ति का प्रतीक है, इसके बाद ही देश (ताइवान) का गठन हुआ था। 

परिवार के बीच रिश्तेदार बनकर मीडिया में बयान दे रहे थे भीम आर्मी के लोग, India Today कर रहा है चंद्रशेखर का महिमामंडन

हाथरस मामले में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर और उनके कार्यकर्ताओं की भूमिका शुरुआत से ही संदिग्ध बनी हुई है। इसी बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है कि भीम आर्मी के तीन लोग पीड़िता के घर उनके रिश्तेदार बनकर रहे हैं। जब पुलिस को इसकी भनक लगी तो सब एक-एक कर गायब होने लगे। इनमें एक युवती भी थी।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की 29 सितंबर की सुबह मौत के बाद भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर सफदरजंग अस्पताल पहुँच गया था और उन्होंने अपने सैकड़ों उपद्रवी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस घटना पर जमकर उत्पात मचाया।

प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ने भी कहा कि पोस्टमॉर्टम हाउस में लड़की के शव को भीम आर्मी के चंद्रशेखर और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भीड़ इकट्ठा कर घेर लिया था और लगभग दस घंटे तक रोके रखा। रास्ते में भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने शव छीनने का भी प्रयास किया था।

पीड़िता के अंतिम संस्कार के बाद से ही युवती के परिवार के साथ भीम आर्मी से जुड़ी एक युवती व दो पुरुष रह रहे थे। वे शुरुआत से ही खुद को परिवार का रिश्तेदार बताकर मीडिया को बयान दे रहे थे, जिनके निशाने पर प्रशासन और सरकार ज्यादा रही।

बाहरी लोगों के खुद को रिश्तेदार बताने की बात पर पुलिस को तब संदेह हुआ जब पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देने की बात हुई। इसके लिए परिवार में कौन-कौन हैं इसकी जानकारी ली गई। जिससे परिवार में रिश्तेदार बनकर रह रहे लोग चिंतित हो गए।

परिवार के सदस्यों का विवरण निकालने पर बाहर से रह रही एक युवती मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को घर से चली गई। उसके साथ दो और लोगों के भी जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि युवती को लेने मध्य प्रदेश के नंबर की बाइकें आई थीं। यह नंबर जबलपुर का लग रहा है जिस कारण यह शक के घेरे में आ गई। उनका कहना है कि इतनी दूर से आई बाइक शंका पैदा करती है।

हालाँकि, परिवार ने किसी भी दल के लोगों के परिवार में रहने की बात से इंकार किया है। परिवार का कहना है कि उनके समाज के ही कुछ लोग उनके साथ रहने आए थे। विनीत जायसवाल, एसपी हाथरस, का कहना है कि भीम आर्मी के लोग जब पीड़िता से मिलने आए थे, तो एक युवती को वहीं छोड़ गए थे, यह जानकारी खुफिया सूत्रों से मिली थी। पुलिस के अनुसार, वह युवती बार-बार मीडिया के सामने परिवार की सुरक्षा और पलायन की बात कह रही थी।

पुलिस ने जब उनसे उनकी निजी जानकारी माँगने की कोशिश की तो युवती ने कुछ नहीं कहा और इसके बाद वह परिवार के साथ नजर नहीं आई। ध्यान देने की बात यह है कि इस मामले में जातीय संघर्ष कराने की साजिश की जानकारी भी खुफिया तंत्र को मिली थी। एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें 50 लाख रूपए दिलाने का दबाव सरकार पर बनाने की बात भी दो लोग कर रहे थे।

इंडिया टुडे कर रहा है भीम आर्मी के उपद्रवियों का महिमामंडन

गौरतलब है कि भीम आर्मी पार्टी संस्थापक चंद्रशेखर और 400 से 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ महामारी एक्ट और आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर हाथरस में सीआरपीसी की धारा 144 के उल्लंघन का आरोप है। भीम आर्मी शुरू से ही PFI के साथ मिलकर इस घटना का राजनीतिकरण करने पर तुली हुई है।

वहीं, न्यूज़ चैनल ‘इंडिया टुडे’ भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर का महिमामंडन करने का भी कारनामा कर रही है। पिछले कुछ माह में यह देखा जा रहा है कि यह वही इंडिया टुडे है जो कुछ ही दिनों पहले दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह की मौत में सामने आए ड्रग सिंडिकेट से जुड़े होने की आरोपित रिया चक्रवर्ती को भी ‘क्लीनचिट‘ देते नजर आया था। यही चैनल कभी दाऊद इब्राहिम को ‘पीड़ित’ साबित करना चाहता था।

हाल ही में इंडिया टुडे की पत्रकार का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था जिसमें उन्हें हाथरस मामले में पीड़ित परिवार को जबरदस्ती मनचाहा बयान देने के लिए उकसाते हुए भी सुना गया।

राफेल, चिनूक, अपाचे आने से बढ़ी भारत की ताकत: वायुसेना के 88वीं वर्षगाँठ पर PM मोदी, राष्ट्रपति और रक्षामंत्री ने दी बधाई

आज 88वाँ भारतीय वायुसेना स्थापना दिवस मनाया जा रहा है, इसका आयोजन उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद स्थित हिंडन हवाई बेस पर किया जा रहा है। 88वीं वर्षगाँठ के अवसर पर दुनिया भारतीय वायुसेना की शक्ति का नज़ारा देख रही है। इस शक्ति प्रदर्शन में सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय है हाल ही शामिल हुआ ‘राफेल’ लड़ाकू विमान। इस मौके पर देश के कई अहम लोगों ने विशेष दिन की शुभकामनाएँ दी। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य लोग शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मौके पर भारतीय वायुसेना को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के सभी वीर योद्धाओं को बहुत-बहुत बधाई। आप न सिर्फ देश के आसमान को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आपदा के समय मानवता की सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। माँ भारती की रक्षा के लिए आपका साहस, शौर्य और समर्पण हर किसी को प्रेरित करने वाला है।” 

इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी वायुसेना को इस अवसर की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “जिस तरह राफेल, अपाचे और चिनूक को शामिल करके आधुनिकरण हुआ है उसके ज़रिए भारतीय वायुसेना एक अजेय शक्ति के रूप में बन कर उभरेगी। इस बात को लेकर आश्वस्त हूँ कि आने वाले समय में भारतीय वायुसेना इस तरह अपने समर्पण और क्षमता के उच्च मानदंड बरकरार रखेगी। भारतीय वायुसेना दिवस पर हम गर्व से हमारे योद्धाओं, वरिष्ठों और इस परिवार से जुड़े लोगों का सम्मान करते हैं। देश हमारे आसमान को सुरक्षित रखने, मानवीय सहायता प्रदान करने और आपदाओं के वक्त में मौजूद रहने के लिए भारतीय वायुसेना का आभारी है।” 

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएँ दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “नभ:स्पर्शं दीप्तं। आपकी कीर्ति से आकाश दीप्तिमान हो। वायुसेना दिवस पर भारतीय वायुसेना के वायु योद्धाओं, अधिकारियों, सैनिकों, उनके परिजनों तथा भूतपूर्व वायुसैनिकों को बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आपका यश आसमानों को छुए।”

इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर इस विशेष दिन की शुभकामनाएँ दी।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मुझे इस बात पर पूरा भरोसा है कि भारतीय वायु सेना हमारे आकाश की रखवाली करेगा। आप हमेशा प्रसन्न रहें ऐसी आशा है। देश को अपने महिला एवं पुरुष वायु सैनिकों पर गर्व है और हम वायु सेना की तरक्की को नमन करते हैं। यह प्रतिकूल हालातों का सामना करने और चुनौतियों के लिए तैयार है। हम इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि आधुनिकरण और स्वदेशीकरण के ज़रिए भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बराबर बढ़ती रहे।” 

जब सीमा पार किए बिना ही भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए: कहानी अनूठे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की

भारतीय वायुसेना ने एक से बढ़ कर एक ऐसे कारनामें किए हैं, जिनकी गिनती की जाए और उनकी शौर्य गाथा के बारे में बताया जाए तो वर्षों लग जाए। गोवा को आज़ाद कराना हो या श्रीलंका में थलसेना का साथ देना हो, कारगिल का ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ हो या 2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक, भारतीय वायुसेना के कारनामों का कोई जोड़ नहीं। यहाँ हम बात करेंगे कि कैसे कारगिल में भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में पाकिस्तान को धूल चटाया।

कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना को मदद के लिए पहली बार मई 11, 1999 को कहा गया, जब उसके हैलीकॉप्टर्स की ज़रूरत महसूस की गई। इसके बाद 25 मई को भारतीय वायुसेना को कारगिल के पाकिस्तानी घुसपैठियों पर हमला करने की अनुमति मिली, लेकिन बिना ‘लाइन ऑफ कण्ट्रोल (LOC)’ को पार किए। लेकिन, उस समय भारतीय वायुसेना पर कितना दबाव था – इसे हमें समझने की ज़रूरत है, तभी हम इस कामयाबी को ठीक तरह से समझ पाएँगे।

कारगिल का ‘ऑपरेशन सफेद सागर’: भारतीय वायुसेना की शौर्य गाथा

उस दौरान भारतीय वायुसेना पर इस बात का खासा दबाव था कि वो केवल हमलावर हैलीकॉप्टर्स का ही इस्तेमाल करें, लेकिन, वायुसेना तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को ये समझाने में कामयाब रही कि हैलीकॉप्टर्स से हमले के लिए माहौल बनाने हेतु ‘फाइटर एक्शन’ की ज़रूरत है। ये ऑपरेशन दुनिया में अपनेआप में ऐसी कठिन परिस्थिति में पहला हवाई ऑपरेशन था, जिसकी सफलता की गूँज आज भी सुनाई पड़ती है।

कारगिल के पर्यावरण को समझे बिना हमें इस ऑपरेशन में आई दिक्कतों को जानने में परेशानी होगी। उस समय तक ऐसा कोई एयरक्राफ्ट डिजाइन ही नहीं किया गया था, जो कारगिल जैसी ऊँची और कठिन जगह पर संचालित किया जा सके। हालाँकि, रिजर्व पॉवर की उपलब्धता वहाँ काम करने के लिए सबसे बड़ी चीज थी और इसी मामले में मिग और मिराज जैसे एयरक्राफ्ट्स को वहाँ हमले के लिए सबसे उपयुक्त माना गया।

वहाँ पर्यावरण की समस्याओं के कारण किसी भी फाइटर एयरक्राफ्ट की परफॉरमेंस वैसी नहीं रहती, जैसी उसकी समुद्र तल की ऊँचाई वाली जगह पर रहती है। वायुमंडल में तापमान व घनत्व का ऊपर-नीचे होना इन एयरक्राफ्ट्स के लिए समस्या का विषय होता है क्योंकि इन चीजों को ध्यान में रख कर उन्हें तैयार ही नहीं किया जाता था। ऊपर से ऐसी परिस्थितियों में परिणाम भी कम्प्यूटराइज्ड कैलकुलेशन से काफी अलग आते हैं।

उन पहाड़ों पर अगर निशाने में चूक हुई और हमला कुछ ही यार्ड की दूरी पर हुआ, फिर भी टारगेट को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। जबकि, समतल सरफेस में ऐसा नहीं होता है। वहाँ निशाने से हल्का दूर हुआ हमला भी टारगेट को तबाह कर सकता है। इसीलिए, ऐसी जगहों पर एक्यूरेसी काफी ज्यादा मायने रखती है, वो भी ‘पिनपॉइंट एक्यूरेसी’। इसीलिए, ऐसी जगहों पर एक हल्की सी गलती के लिए जरा सी भी गुंजाइश नहीं है।

जल्द ही भारतीय वायुसेना को भी इन्हीं दिक्कतों का सामना करना पड़ा और ऑपरेशन के कुछ ही दिन में एक Mi-17 और एक चॉपर को दुश्मनों ने मार गिराया। इससे इतना तो पता चल ही गया कि यहाँ आर्म्ड हैलीकॉप्टर्स की जगह फाइटर्स की आवश्यकता है। इसीलिए वायुसेना ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया। दिक्कत ये आ रही थी कि पायलट्स को भी किसी चलायमान एयरक्राफ्ट तो दूर की बात, एक स्थिर टारगेट तक को पहचानने में खासी मुश्किल आ रही थी।

बदली रणनीति के बाद जब भारतीय वायुसेना ने हमला बोला तो दुश्मन को खासा नुकसान हुआ। बिना LOC को पार किए ही दुश्मन की संपत्ति को क्षति पहुँचाई गई। साथ ही कई घुसपैठी भी मारे गए। दुश्मन जमीन पर राशन-पानी तक के लिए भी तरस गया और उसके रसद की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद खुद भारतीय सेना के मुख्यालय से आए एक सन्देश में वायुसेना की तारीफ करते हुए कहा गया था:

“आपलोगों ने काफी अच्छा काम किया है। मिराज में बैठे आपके अधिकारियों ने अपने ‘प्रेसिजन लेजर बॉम्ब्स’ का प्रयोग कर के टाइगर हिल क्षेत्र में दुश्मन के बटालियन के मुख्यालय को निशाना बनाया और इसमें बहुत बड़ी सफलता मिली। इस हमले में 5 पाकिस्तानी अधिकारी मारे गए और उनका कमांड और कण्ट्रोल सिस्टम तबाह हो गया। इसके परिणाम ये हुआ कि भारतीय सेना पूरे टाइगर हिल क्षेत्र पर भ्रमण कर रही है। अगर यही गति रही तो इस संघर्ष का जल्द ही अंत हो जाएगा। “

जब भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के सप्लाई कैम्प्स को निशाना बनाना शुरू किया, तो इससे भारतीय थलसेना का काम आसान होता गया। ध्यान देने वाली बात तो ये है कि शायद ही जमीन पर ऐसा कोई ऑपरेशन हुआ, जिसमें वायुसेना ने पहले स्ट्राइक न किया हो। इसी तरह 15 कॉर्प्स और AOC, जम्मू-कश्मीर के समन्वय ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी। थलसेना ने जहाँ-जहाँ ज़रूरत पड़ी, वायुसेना को स्ट्राइक के लिए कहा।

पाकिस्तान इस पूरे संघर्ष में वायुसेना से बचने के लिए अलग-अलग सप्लाई रूट्स की तलाश में लगा रहा और इससे पहले कि उनकी योजना धरातल पर उतर पाती, तब-तब वायुसेना ने उनके नए रूट्स का काम तमाम कर डाला। और इस संघर्ष में जितनी भारत को क्षति हुई, उससे कई गुना ज्यादा क्षति पाकिस्तान को पहुँची। एक तरह से ये एक नया ट्रेंड था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए।

कैसे सफल हुआ ये ऑपरेशन

तत्कालीन वायुसेनाध्यक्ष और एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत ने तब बताया था कि जैसे ही उन्हें इस संघर्ष में जाने की अनुमति मिली, सीमा पर रडार सिस्टम को सक्रिय करते हुए तैयारियाँ शुरू कर दी गईं क्योंकि आशंका थी कि दुश्मन हमारी उड़ान में बाधा डाल सकता है। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में इन सब तैयारियों के लिए काफी समय होना चाहिए, लेकिन भारतीय वायुसेना ने 12 घंटे से भी कम समय में इसे अंजाम देकर नया कीर्तिमान रच दिया।

पाकिस्तान को तो आशंका भी नहीं थी कि भारतीय वायुसेना को भी यहाँ कार्रवाई में लगाया जा सकता है, क्योंकि उसे लगता था कि ये इलाक़ा इतना दुर्गम है कि यहाँ वायुसेना लगाई ही नहीं जाएगी। इतने छोटे से क्षेत्र में सीमित रूप में भारतीय वायुसेना का इस्तेमाल अपनेआप में एक बड़ा चुनौती भरा और दुष्कर कार्य था। एयर मार्शल विनोद पाटनी ने कहा था कि वायुसेना का काम दुश्मन की संरचनाओं को तबाह करने और उनके भूभाग में घुस कर हमले के लिए होता है, लेकिन यहाँ घुसपैठियों को खदेड़ना था।

बकौल पाटनी, समस्या ये थी कि अबकी लक्ष्य काफी छोटे थे क्योंकि सामान्य वायुसेना के ऑपरेशनों में 20,000 फीट की ऊँचाई से राजमार्गों, पुलियों, रेलवे लाइनों और सैनिक अड्डों को तबाह करने के लिए किया जाता है। साथ ही नागरिक लक्ष्यों की ख़ुफ़िया जानकारी भी ठीक से प्राप्त नहीं थी। लड़ाकू विमान की कॉकपिट में बैठे पायलटों ने कैमरों से बाहर की तस्वीरें ली और इस तरह से एक नए तरीके से दुश्मन की चाल का पता लगाया गया।

रात के समय में नीची उड़ानें भरी जा सकती थीं लेकिन ये पायलटों के लिए एक बड़ा ही दुष्कर कार्य था। बावजूद इसके एक भी हवाई दुर्घटना के बिना ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को अंजाम दिया गया। मात्र 3 दिन में कारगिल की पहाड़ियों की संरचनाओं को समझ कर भविष्य के हमलों के लिए योजनाएँ बनाई गईं। लगभग साढ़े 3 महीने में भारतीय वायुसेना ने इस ऑपरेशन के तहत दुश्मन के खिलाफ 1400 से भी अधिक उड़ानें भरी।

ये एक ऐसा ऑपरेशन था, जिसमें संसाधन होते हुए भी सीमित चीजों का ही इस्तेमाल करना था और न ही ये परंपरागत युद्ध था। इसमें पश्चिमी वायु सैनिक कमांड के एक चौथाई संसाधनों का ही उपयोग किया गया। भारतीय वायुसेना ने अपने विमानों को सुरक्षा आवरण दे रखा था, जिससे न तो सीमा पार से कोई उन्हें गिराने का दुस्साहस कर पाया और न ही असंख्य गोलियाँ चलने के बावजूद उनका कुछ हुआ। सच में, ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ अनूठा था, हर मामले में।

शक्ति मलिक हत्या में 7 गिरफ्तार: तेजस्वी-तेज प्रताप को क्लीनचिट, मास्टर माइंड आफताब ने कहा- हमें कोई अफ़सोस नहीं

बिहार पुलिस ने RJD से निष्कासित और पूर्णिया में दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या के आरोप में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। बुधवार (अक्टूबर 07, 2020) को बिहार पुलिस ने इसकी सूचना दी। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से एक आफताब को इस हत्या का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। आफताब ने कहा है कि वह आज का रावण था और उन्हें उसकी हत्या कोई अफ़सोस नहीं है।

इससे पहले, 3 अक्टूबर को पूर्णिया जिले में मारे गए राजद पार्टी के पूर्व सचिव शक्ति मलिक की हत्या के सिलसिले में लालू प्रसाद यादव के बेटों – तेजस्वी और तेजप्रताप यादव सहित छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पूर्णिया पुलिस ने उन्हें आरोपों से क्लीनचिट दी है।

घटना के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक (एसपी) विशाल शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- “हमने एक डायरी बरामद की है, जिसके अनुसार, मलिक ने लोगों को उधार दिया था। हमें बताया गया है कि वह उधार लेने वालों को बाद में ब्लैकमेल करने के लिए ब्लैंक चेक और कोरे स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवाता था। मलिक भारी ब्याज वसूलता था, जिससे उधार लेने वालों को इसे चुकाने में मुश्किल हो जाती थी। 3 अक्टूबर को, शक्ति मलिक ने एक आरोपित को 3-4 घंटे बैठाया और चुनावी तैयारियों के बीच उसे पटना ले जाने के लिए उस पर दबाव बनाया। आखिर में उन्होंने उसे मारने का फैसला किया। आरोपितों ने कहा कि उन्हें अफसोस नहीं है।”

एफआईआर में नामजद छह लोगों के खिलाफ कोई सबूत होने के सवाल पर एसपी ने कहा, “जैसा कि मैंने पहले कहा था कि हम उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, जिनके नाम सबूत के आधार पर सामने आए हैं। छह लोग जो एफआईआर में नामजद थे, उन सभी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। हमने मलिक की हत्या करने वाले सभी सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।”

एसपी ने कहा कि अभी यह भी जाँच की जाएगी कि क्या पुलिस अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए उसकी मदद की है? इससे पहले पुलिस ने बताया कि मलिक को 11 सितंबर को राजद से निष्कासित कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि बिहार चुनाव से पहले पूर्णिया में दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या मामले में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत 6 लोग आरोपित थे। उसके बाद तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

तेजश्वी का नाम आने के बाद मामले ने राजनीतिक शक्ल अख्तियार कर ली थी। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि राजनीतिक कारणों से उसके पति की हत्या करवाई गई है। इस मामले को लेकर खुद तेजश्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सीबीआई जाँच की माँग की थी।

पूर्णिया पुलिस ने इस मामले में जिन 7 लोगों को गिरफ्तार किया है उन्हीं में से एक आरोपित आफताब ने स्वीकार किया है कि शक्ति मलिक की हत्या उन्होंने ही की है। आफताब ने कहा है कि वह आज का रावण था और उन्हें इसका कोई अफ़सोस नहीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आफताब ने कहा कि उन लोगों ने मजबूरी में ऐसा कदम उठाया है, और वो कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं,कानून जो सजा देगी, उसको स्वीकार करेंगे।