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फरहान भाई, रिया चक्रवर्ती को जमानत मिली है क्लीन चिट नहीं आप चिल करिए

एक तरफ जहाँ अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित हत्या और ड्रग्स मामले की आरोपित रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत मिल गई, वहीं जमानत मिलने पर उनके समर्थक ऐसे खुश हो रहे है मानो की उन्हें क्लीन चिट मिल गई हो। इसी कड़ी में बॉलीवुड कलाकार फरहान अख्तर ने ट्वीट करते हुए न्यूज़ एंकर्स पर गुस्सा तो निकाला ही है, साथ ही रिया चक्रवर्ती के परिवार से माफी माँगने की भी बात कही है।

फरहान अख्तर ने रिया चक्रवर्ती को जमानत मिलने पर बिना समय गँवाए ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “क्या वो एंकर्स अब माफी माँगेंगे, जिन्होंने रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार पर आरोप लगाए थे। मुझे नहीं लगता। लेकिन अब उन्हें गोल पोस्ट शिफ्ट करते हुए जरूर देखना। वे इसके लिए कुख्यात हैं…”

जमानत मिलने और क्लीन चिट मिलने में फर्क होता है

फरहान के इस ट्वीट को देखकर ऐसा लग रहा मानों वह जमानत मिलने और आरोपों से बरी होने के अंतर को भूल गए हों। और शायद वह ये भी नहीं जानना चाहते हैं कि जमानत मिलने पर भी रिया के खिलाफ उसी तरह की कानूनी कार्रवाई जारी रहेंगी जैसे कि चल रही थीं। बस वो अब न्यायिक हिरासत से बाहर हैं। यही नहीं, NCB ने भी अभी रिया की जमानत के खिलाफ अदालत जाने की बात कही है। लेकिन फरहान अख्तर मानो अपनी भड़ास निकालने की जल्दबाजी में थे।

फरहान अख्तर के इस ट्वीट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी उनके जम कर मजे लिए हैं। किसी ने उन्हें जमानत का मतलब सिखाया तो किसी ने रिया से शादी करने तक की भी बात तक कह डाली।

बता दें कि रिया के जेल से बाहर आने पर सिर्फ फरहान अख्तर ही नहीं अनुभव सिन्हा, शिबानी दांडेकर, स्वरा भास्कर, हुमा कुरैशी जैसे और कई बॉलीवुड कलाकारों ने ट्वीट करते हुए इस कदर खुशी जाहिर की मानो कोर्ट ने रिया को सारे आरोपों से बरी कर दिया हो। शायद इन सभी ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि NCB ने रिया के जमानत को कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कही है।

रिया की जमानत पर NCB देगी कोर्ट को चुनौती

गौरतलब है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती की जमानत के विरोध में सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देने की बात कही है। NCB के पास रिया की जमानत के विरोध में अपने तर्क हैं।

जमानत का विरोध करते हुए अनिल सिंह ने कहा, “मैं यह बताना हूँ कि यह एक ड्रस सिंडिकेट है और वे सभी आपस में जुड़े हैं। अब तक गिरफ्तार किए गए सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और यह एक सिंडिकेट है। सभी लगातार खरीदारी कर रहे थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिया को सशर्त जमानत दी है। वहीं, रिया के भाई शोविक और एक अन्य की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है।”

उल्लेखनीय है कि रिया चक्रवर्ती को 1 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। इस जमानत के साथ कई तरह की शर्त है। जिसका रिया चक्रवर्ती को भी पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा कि रिया को प्रत्येक 10 दिन बाद पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और रिहा होने के बाद उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। विदेश यात्रा में जाने से पहले रिया को कोर्ट की अमुमति लेनी होगी। अगर रिया को ग्रेटर मुंबई छोड़ना होगा तो उन्हें अपने जाँच अधिकारी से इजाजत लेनी होगी।

फाँसी से झूलता मिला पूर्व CBI निदेशक और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल का शव, चिट्ठी में बताई वजह

नागालैंड के पूर्व राज्यपाल व पूर्व सीबीआई निदेशक अश्वनी कुमार का शव शिमला स्थित उनके घर पर फाँसी के फंदे से झूलते मिला। शिमला के पुलिस अधीक्षक मोहित चावला ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि अश्वनी कुमार का शव उनके घर में फंदे से झूलता पाया गया। बता दें अश्विनी कुमार सीबीआई चीफ रहने से पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजीपी रह चुके थे।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि जिंदगी से तंग आकर अगली यात्रा पर निकल रहा हूँ। खुदकुशी की इस घटना से हर कोई स्तब्ध है। मोहित ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि यह हैंगिंग का मामला है और इसकी जाँच की जा रही है।

15 नवंबर 1950 को जन्मे अश्विनी कुमार ने अपनी शुरुआती शिक्षा किन्नौर के आदिवासी जिले में स्थित कोठी गाँव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पूरी की थी। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज, देहरादून में पढ़ाई की और सरकारी कॉलेज, नाहन, हिमाचल प्रदेश से 1971 में स्नातक किया।

1973 में भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) में शामिल होने के बाद, उन्होंने प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के सदस्य के रूप में कई प्रमुख पदों पर कार्य किया। जुलाई 2008 से नवंबर 2010 तक सीबीआई निदेशक के रूप में कार्य करते हुए, उन्हें कई हाई-प्रोफाइल मामलों को सुलझाने के लिए श्रेय दिया गया।

इसके बाद, उन्होंने मणिपुर और नागालैंड के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया। कुमार को 1989 में सराहनीय सेवाओं के लिए भारतीय पुलिस पदक और 1999 में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

‘क्या तुम नंगी सोती हो’: नाबालिग छात्राओं को गंदे मैसेज भेजने वाले बाइबिल उपदेशक ने कहा- ‘वो मतलब नहीं था’

ईसाई मिशनरी स्कूलों में बाइबिल की शिक्षा देने वाली संस्था ‘स्क्रिप्चर यूनियन (SU)’ के तमिलनाडु के निदेशक सैम जयसुंदर ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप के कुछ दिनों बाद अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उसके मैसेज को नाबालिग छात्राओं द्वारा गलत तरीके से पढ़ा गया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, सैम जयसुंदर ने कहा कि लड़कियों के साथ बातचीत में उसका इरादा ‘दुर्भावनापूर्ण नहीं’ था।

आरोपित सैम ने वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट की प्रमाणिकता पर कोई सवाल नहीं उठाए। उसने कबूल किया कि वो छात्राओं के साथ बात किया करता था, हालाँकि उसने अपना बचाव करते हुए कहा कि उसके मैसेज को गलत तरीके से पढ़ा गया था।

सैम जयसुंदर ने कहा, “मेरे इरादे दुर्भावनापूर्ण नहीं थे। मेरे कुछ संदेश गलत तरीके से पढ़े गए।” ईसाई संगठन ने अब सैम और एक अन्य आरोपित रूबेन क्लेमेंट के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की है।

गौरतलब है कि सैम जयसुंदर को उसके पद से हटा दिया गया है। वह तमिलनाडु में कई वर्षों तक ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का डायरेक्टर था। ये कई ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते हुए उन्हें वीडियो कॉल करने और अकेले में मिलने की माँग करते हुए उन्हें आलिंगन करने की इच्छा जता रहा था। ये सब 2016 से ही चल रहा था और अब कई लड़कियों ने आगे आकर इसका खुलासा किया है।

सैम जयसुंदर छात्राओं को फँसाने के लिए उनके पहनावे के बारे में पूछता था और ‘मिनी स्कर्ट में’ तस्वीरें भेजने को कहता था। वेल्लोर की ईसाई मिशनरी स्कूलों की कई छात्राओं ने उसके खिलाफ आवाज़ उठाई थी। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद SU के बोर्ड मेंबर्स ने रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को एक इमरजेंसी बैठक बुलाई।

स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, एक लड़की से उसने पूछा कि क्या तुम कभी नंगी (फिर समझाते हुए उसने फिर पूछा- ‘बिना कपड़ों के?’) सोती हो? साथ ही वो लड़कियों को ‘स्वीटी’ कहते हुए उनसे फ्री होकर बात करने को कहता भी दिख रहा है। एक 14 वर्षीय लड़की से उसने पूछा कि क्या वो और उसके साथी लड़का-लड़की एक-दूसरे को गले लगाते हैं? सैम ने नाबालिग से पूछा कि क्या किसी ने उसे आलिंगन में लिया है या किस किया है?

TRP के लिए न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्टिंग पर केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा- TV रेटिंग पर पुनर्विचार की जरूरत

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को टीवी चैनलों के TRP रेस को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हमें टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट या टीआरपी-उन्मुख कार्यक्रमों की वर्तमान प्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। सरकार को मीडिया और प्रेस की स्वतंत्रता में विश्वास है, लेकिन मीडिया को यह सुनिश्चित करने के लिए एक तरीके से काम करना चाहिए कि इसकी स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की जाती है।

बता दें टीआरपी एक टूल है जिसका उपयोग इम्प्रूवमेंट को मापने के लिए कुछ हज़ार दर्शकों के घरों में टेलीविज़न सेट से जुड़े डिवाइस के माध्यम से प्रोग्राम की लोकप्रियता को देखा जाता है।

संघ प्रमुख मोहन राव भागवत की मौजूदगी में बुधवार को पत्रकार और साहित्यकार माणिकचंद वाजपेयी ‘मामाजी’ के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा, “पहले पीत पत्रकारिता ऐसा एक शब्द होता था। फिर पेड न्यूज, फिर फेक न्यूज हुआ। अब टीआरपी पत्रकारिता हो गई है। पहले एक प्राइवेट संस्था टैम टीआरपी निकालती थी जो बताती थी कि कौन से चैनल पर कौन सा कार्यकम ज्यादा देखा जा रहा है। ​फिर टीवी वालों ने अपना सिस्टम बनाया जिसे बार्क नाम दिया। तब मैंने कहा था कि ये एक अच्छा सेल्फ ​रेग्युलेशन है। इसे करना चाहिए लेकिन अब उसमें शामिल लोग ही आकर शिकायत कर रहे हैं। जो संस्थापक थे वो ही शिकायर्ता हो गए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “आज टीआरपी के हमले के कारण पिछले दो सप्ताह या दो महीने में कैसी रिपोर्टिंग हुई है। पत्रकारिता कहाँ तक पहुँच गई है। ये टीआरपी का अनावश्यक बोझ मीडिया को कभी न कभी बंद करना पड़ेगा, सुधारना पड़ेगा या उसे कुछ अच्छा रूप देना पड़ेगा।”

जावड़ेकर ने कहा, “लोकप्रियता गिनने की मशीन और तरीका होना चाहिए। लेकिन उसके कारण लोग अपना कार्यक्रम बदलें। उकसाने वाली खबरें चलाएँ ये तो पत्रकारिता नहीं होगी। सरकार मीडिया और मीडिया की आजादी पर विश्वास रखती है। मीडिया अपनी स्वतत्रंता पर संयम से कैसे काम करे, इस पर नियंत्रण खुद तैयार करे।”

उन्होंने कहा, सरकार किसी का अधिकार नहीं हथियाना चाहती है, आजादी पर आँच नहीं आने देना चाहती। लेकिन एक रिस्पांसिबल जर्नलिज्म हो। वो रिस्पांसिबिलिटी खुद तय करनी होती है इसके लिए किसी के हुक्म की जरूरत नहीं होती है। हमारी इच्छा है एक रिस्पांसिबल जर्नलिज्म हो।

रिया की जमानत पर NCB देगी कोर्ट को चुनौती, कोर्ट ने दिया पासपोर्ट जमा करने का आदेश

ड्रग्स कनेक्शन को लेकर कई दिनों से न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को भले ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने सर्शत जमानत दे दी, लेकिन अभी भी उनकी परेशानियाँ कम नहीं हुई। दरअसल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अब रिया चक्रवर्ती की जमानत के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। NCB के पास रिया की जमानत के विरोध में अपने तर्क हैं।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद कहा, “इस केस में कानून से जुड़े कई तरह के सवाल हैं। इसलिए एनसीबी रिया चक्रवर्ती की जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील करेगी।”

जमानत का विरोध करते हुए अनिल सिंह ने कहा, “मैं यह बताना हूँ कि यह एक ड्रस सिंडिकेट है और वे सभी आपस में जुड़े हैं। अब तक गिरफ्तार किए गए सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और यह एक सिंडिकेट है। सभी लगातार खरीदारी कर रहे थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिया को सशर्त जमानत दी है। वहीं, रिया के भाई शोविक और एक अन्य की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है।

जमा करना होगा पासपोर्ट

गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती को 1 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। इस जमानत के साथ कई तरह की शर्त है। जिसका रिया चक्रवर्ती को भी पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा कि रिया को प्रत्येक 10 दिन बाद पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और रिहा होने के बाद उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। विदेश यात्रा में जाने से पहले रिया को कोर्ट की अमुमति लेनी होगी। अगर रिया को ग्रेटर मुंबई छोड़ना होगा तो उन्हें अपने जाँच अधिकारी से इजाजत लेनी होगी।

ड्रग्स मामले में अनिल सिंह ने अदालत में कहा था कि रिया ना सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स खरीदती थीं बल्कि वो उसे फाइनांस भी करती थीं। यानी कि वो अवैध ड्रग्स तस्करी सिंडिकेट में शामिल थीं जो समाज के लिए घातक है। कोई भी हत्या या गैर इरादतन हत्या की वारदात एक परिवार को प्रभावित करती है जबकि मादक पदार्थों का नशा पूरे समाज को प्रभावित करता है।

रिया चक्रवर्ती की जमानत पर उनके वकील सतीश मानेशिंदे ने कहा रिया को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था। तीनों केंद्रीय एजेंसियों- CBI, ED और NCB- की मिलीभगत से यह किया गया है।

उल्लेखनीय है कि रिया को एनसीबी ने 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था। रिया पर सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर कलाकार के पैसों की हेर-फेर का भी आरोप है। जिसकी जाँच ईडी कर रही है।

याद दिला दें सुशांत के अकॉउंट्स से जुड़ी जानकारी जुटाते समय ड्रग्स चैट का खुलासा हुआ था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मामला एनसीबी को सौंपा और फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद रिया, शौविक, सैमुअल समेत कई लोग गिरफ्तार कर लिए गए। रिया को अब तक भायखला जेल में बंद किया गया था।

हिंदू धर्म को आतंकवाद से जोड़ने वाली किताब को विरोध के बाद ब्रिटिश स्कूल और प्रकाशक ने हटाया

ब्रिटेन के एक स्कूल की वेबसाइट से ब्रिटिश जीसीएसई धार्मिक स्टडीज वर्कबुक (GCSE religious studies workbook) को हटा लिया गया है। साथ ही प्रकाशक ने भी इसे वापस ले लिया है। यह कदम प्रवासी भारतीयों के विरोध प्रदर्शन के बाद उठाया गया है। प्रवासी भारतीयों का कहना था कि इस पुस्तक में हिंदुओं को आतंकवाद के साथ जोड़ा गया था।

सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) तक यह पुस्तक स्कूल की वेबसाइट पर उपलब्ध थी। इसे वेस्ट मिडलैंड्स के सोलिहुल में एक कंप्रीहेन्सिव माध्यमिक विद्यालय, लैंगली स्कूल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता था। हालाँकि अब स्कूल ने प्रवासी भारतीयों के विरोध के बाद इसे हटा लिया है

वर्कबुक में AQA लोगो था और इसका शीर्षक “GCSE Religious Studies: Religion Peace and Conflict” था। यह एक पुस्तिका थी, जिसमें विश्व के धर्मों के बारे में जानकारी होती है और उसके बाद प्रश्नों का उत्तर देना होता है।

पुस्तक के पृष्ठ चार पर हिंदू धर्म का वर्णन है, जिसमें कहा गया है, “धार्मिक ग्रंथ सिखाते हैं कि धर्म को बनाए रखने के लिए युद्ध को नैतिक रूप से न्यायसंगत बनाने में सक्षम होना आवश्यक है। क्षत्रिय के रूप में अर्जुन अपने कर्तव्य की याद दिलाता है कि वास्तव में धार्मिक युद्ध से बेहतर कुछ भी नहीं है।”

इसमें आगे कहा गया है, “यदि कारण उचित है, तो हिंदू हथियार उठाएँगे। आत्मरक्षा उचित है, इसलिए भारत के पास आक्रामक हथियारों से बचने के लिए परमाणु हथियार हैं। कुछ हिंदू अपनी हिंदू मान्यताओं की रक्षा के लिए आतंकवाद की तरफ रुख कर चुके हैं।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश हिंदू के निकाय, हिंदू फोरम ऑफ़ ब्रिटेन (HFB) के अध्यक्ष ने कहा, “यह हिंदुओं और भारत को बदनाम करने के लिए एक राजनीतिक कदम है। मुझे यकीन है कि जिसने भी यह लिखा है, उसने जानबूझकर ऐसा किया है।”

पटेल और एचएफबी के उपाध्यक्ष रमेश पट्टनी ने इस बाबत AQA को पत्र भेजा। जिसमें उन्होंने इसे ‘आपत्तिजनक’ और ‘गलत’ करार दिया। इसमें उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें प्रकाशित करने का साफ मतलब हिंदुओं के बारे में गलत धारणाएँ सिखाना था।

पत्र में कहा गया है, “आपने धर्म के अर्थ की पूरी तरह से गलत व्याख्या की है और इसे आतंकवाद के रूप में वर्णित किया है। यहाँ तक कि अर्जुन के बारे में भी व्याख्या पूरी तरह से गलत है। पुस्तक में जिस तरह से हिंदू मान्यताओं और प्रथाओं को चित्रित किया गया है, उससे हमें संदेह है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा हो सकता है। 

AQA के एक प्रवक्ता ने कहा, “सोशल मीडिया पर शेयर की गई वर्कबुक का निर्माण हमने नहीं किया था और हमारे ‘लोगो’ (logo) का इस्तेमाल हमारी अनुमति के बिना किया गया था। इसमें कुछ सामग्री एक पाठ्यपुस्तक से आई है। हमने प्रकाशक से बात की है, उन्होंने पुस्तक वापस ले ली है।”

लैंगली स्कूल ने पुष्टि की कि जैसे ही सोमवार को उसे इसके बारे में पता चला, उसने इसे अपनी साइट से हटा दिया। स्कूल ने कहा कि उसे कार्यपुस्तिका में लगे ‘लोगो’ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अब यह पुस्तक शिक्षण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

स्कूल ने एक बयान में कहा, “हमारे स्टाफ के एक सदस्य ने कुछ साल पहले टाइम्स एजुकेशनल सप्लीमेंट वेबसाइट से सप्लीमेंट खरीदा था। हम डॉक्यूमेंट के लेखक से अनभिज्ञ हैं। हमें अफसोस है कि हमारे प्रशासन की निगरानी में यह अपराध हुआ है। हम आपको आश्वासन दे सकते हैं कि इसका उपयोग स्कूल में नहीं किया जाता है।”

आडवाणी, नरेंद्र मोदी के बाद अब मीडिया ने CM योगी आदित्यनाथ को अपनी नफरत का पसंदीदा विषय बना लिया है

कई पत्रकार अपना करियर उन राजनेताओं पर लिखकर बनाते हैं, जिनसे वे नफरत करना पसंद करते हैं। इसी पर लिखकर वो अपनी करियर को नई ऊँचाई देते हैं। हमने पिछले दो दशकों में देखा है कि किस तरह से मोदी-विरोध कई लोगों के लिए पूर्णकालिक करियर विकल्प के रूप में उभरा है।

अब मीडिया ने महंत योगी आदित्यनाथ को भी अपनी नफरत की सूची में शामिल कर लिया है। ये सभी पत्रकार इस तथ्य को आसानी से भूल जाएँगे कि सीएम योगी पाँच बार के सांसद हैं, इस दौरान उनका संसद में उपस्थिति और बहस का अद्भुत रिकॉर्ड रहा है।

2004 और 2009 में जब बीजेपी शानदार प्रदर्शन नहीं कर रही थी, तब भी योगी अपने चुनावों में भारी अंतर से चुनाव जीते थे। मोदी के बाद योगी ही ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनका उल्लेख न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट में किया गया। एक सामान्य फैक्ट-चेक से पता चलता है कि इनमें से अधिकांश लेख विदेशी भूमि पर बैठकर लिखे गए हैं और तथ्यों के बजाय पक्षपात पर आधारित हैं।

2017 में, जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो उन्हें पिछले 15 वर्षों से अखिलेश यादव, उनके पिता मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती द्वारा चलाया जा रहा निष्क्रिय उत्तर प्रदेश मिला था।

उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था इन तीन वजहों से लचर थी- 

  1. एक अपर्याप्त पुलिस बल – राज्य की स्वीकृत 3 लाख पुलिस पदों में से केवल 1.5 लाख पदों पर ही पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारों ने नियुक्ति की थी।
  2. राजनीति का बाहुबलीकरण – राजा भैया, अतीक अहमद, विकास दुबे, गायत्री प्रजापति जैसे लोग जेलों के बजाय सत्ता की गलियारों में थे।
  3. ‘लडके हैं, गलती हो जाती है’ की पितृसत्तात्मक और नारी-विरोधी मानसिकता वाली मुलायम सिंह यादव की ‘लीडरशिप’ वाली सरकार।

योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में 1.3 लाख अतिरिक्त पुलिस बल की भर्ती की जा चुकी है। दिन में 18 घंटे काम करने वाले योगी ने पहले दिन से इस साँठगाँठ पर नकेल कसनी शुरू कर दी। उन्होंने गृह विभाग से उत्तर प्रदेश के सभी ख़ूँख़ार बदमाशों की सूची निकालने के लिए कहा – जो जेल से भाग गए हैं, अदालत में भाग गए हैं, कभी भी पूर्व में एफआईआर नहीं की गई, क्योंकि राजनीतिक संरक्षण के कारण या कई अदालती आदेशों के बाद भी कभी गिरफ्तार नहीं हुए।

उन्होंने इन सभी ख़ूँख़ार अपराधियों का शिकार करना शुरू कर दिया, जिन्हें पिछले 15 वर्षों में राजनीतिक आश्रय मिला। उन्हें पकड़ने के लिए उन्होंने विशेष टीमें बनाईं। कई मामलों में, इन अपराधियों ने पुलिस टीमों पर गोलीबारी की, जब वे गिरफ्तार होने वाले थे और पुलिस की जवाबी गोलीबारी में मारे गए या फिर घायल हुए। उत्तर प्रदेश पुलिस ने योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले 16 महीनों में 3000 से अधिक ऐसे अभियान चलाए हैं।

कुल 78 अपराधियों को मार गिराया गया है, 838 से अधिक अपराधियों को लगातार चोटें आई हैं और 7043 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया ने इस बड़े पैमाने पर किए गए योगी की सराहना करने के बजाय, मानव अधिकार मामलों के उल्लंघन के बहाने योगी के प्रयास को कम कर दिया। उल्लेखनीय है कि इन सभी मुठभेड़ों ने मजिस्ट्रीयल जाँच भी पास की और इसे वैध पाया गया। मीडिया ने कभी इस तथ्य को उजागर करने की जहमत नहीं उठाई।

लेकिन इंडस्ट्री उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति में तेजी से सुधार देख रहा था। सुरक्षित उत्तर प्रदेश ने के 5 लाख करोड़ का निवेश किया। इनमें से 250 से अधिक परियोजनाओं को 2019 तक धरातल पर उतारकर पूरा किया। वास्तव में, 2020 में, आंध्र प्रदेश के बाद, उत्तर प्रदेश ने व्यापार रैंकिंग करने में दूसरे स्थान पर पहुँच गया। लेकिन मीडिया ने कभी भी योगी को उत्तर प्रदेश से बाहर आने वाली सकारात्मक खबरों के लिए फ्रंट पेज पर या प्राइम टाइम डिबेट में जगह नहीं दी।

वैश्विक रूप से आधुनिक सभ्य समाज में महिलाओं के खिलाफ हमला सबसे बड़ा दाग है। पश्चिमी मीडिया भारत को दुनिया की बलात्कार की राजधानी के रूप में चित्रित करता है, जबकि स्वीडन में बलात्कार दर (जनसंख्या में प्रति लाख जनसंख्या पर बलात्कार) 63.5 है, ऑस्ट्रेलिया में 28.6, संयुक्त राज्य अमेरिका में 27.3 और भारत में केवल 1.8 है। 

NCRB के आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की 14.7 बलात्कार दर की तुलना में यूपी में बलात्कार की दर 3.7 है। राजस्थान में बलात्कार दर 11.7 और केरल की 10.7 है। अधिकांश मीडिया हाउस दिल्ली या नोएडा में स्थित होने के कारण, योगी का उत्तर प्रदेश ‘डोर स्टेप रिपोर्टिंग’ का शिकार हो जाता है।

सितंबर 2020 में, केरल के पठानमिट्टा के एक 19 वर्षीय कोरोना मरीज के साथ एंबुलेंस के भीतर बलात्कार किया गया था।  पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में 16 और 14 वर्ष की दो आदिवासी लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया था, जिसके बाद उन्होंने जहर लिया था और उनमें से एक की मौत हो गई है। इसी तरह राजस्थान, बाराँ की दो नाबालिग लड़कियों के साथ 3 दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया गया। लेकिन किसी कारण से, ये हमारे टीवी चैनलों पर प्राइम टाइम डिबेट में जगह नहीं बनाते हैं, जबकि हाथरस पर जमकर रिपोर्टिंग हो रही है।

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हाथरस का दौरा करते हैं, लेकिन केरल के बारे में ट्वीट भी नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल के टीएमसी सांसद, डेरेक ओ ब्रायन भी हाथरस जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अपने ही राज्य पश्चिम बंगाल में दो नाबालिग आदिवासी लड़कियों के साथ जघन्य अपराधों के बारे में टिप्पणी करने से परहेज करते हैं। चूँकि योगी की यूपी उन्हें टीआरपी देती है, इसलिए मीडिया एंकर भी हाथरस पर आँसू बहाते हैं, लेकिन भारत की अन्य बेटियों की परवाह नहीं करते हैं।

पिछले तीन वर्षों में, योगी ने 1.3 लाख रिक्त पदों को भरकर यूपी पुलिस बल में वृद्धि की है। ख़ूँख़ार अपराधी अब जेल में हैं। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और विकास दुबे की अवैध संपत्तियों को या तो कब्जे में ले लिया गया है या फिर ध्वस्त कर दिया गया है। यूपी में सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए रोमियो स्क्वॉड पूरी कोशिश कर रहा है। सभी गंभीर मामलों की निश्चित समय के भीतर जाँच करने के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। जहाँ कभी शिथिलता पाई जाती है, वहाँ पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया जाता है।

यूपी में इंडस्ट्री वापस आ रही हैं, क्योंकि वे अपने पैसे और कर्मचारियों को अब यूपी में सुरक्षित पाते हैं। इस सब के बावजूद, योगी वो राजनेता बने हुए हैं, जिनसे मीडिया नफरत करना पसंद करती है। पहले लाल कृष्ण आडवाणी, फिर नरेंद्र मोदी और अब मीडिया ने योगी आदित्यनाथ को अपना पसंदीदा लक्ष्य बना लिया है।

हाथरस: PFI से जुड़े केरल के कथित पत्रकार, 3 अन्य के खिलाफ UAPA-राजद्रोह के तहत FIR दर्ज, सामाजिक वैमनस्य व विद्रोह भड़काने का आरोप

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की आड़ में मथुरा से गिरफ्तार हुए दंगे की साजिश रचने वाले 4 आरोपितों के खिलाफ बुधवार (अक्टूबर 06, 2020) को मथुरा में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और राजद्रोह के तहत केस दर्ज किया गया है।

दर्ज FIR में बताया गया है कि अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीक कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे।

बता दें कि पुलिस ने सोमवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार कार्यकर्ताओं को मथुरा से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वे सभी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) से जुड़े हुए हैं और दिल्ली से आकर कार में हाथरस की ओर बढ़ रहे थे जहाँ उन्हें रोका गया।

पुलिस ने इन पर आतंकवाद-विरोधी धाराएँ और अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रीवेन्शन एक्ट यानी UAPA भी लगाया गया है। इसके साथ ही, इन आरोपितों पर आतंकवाद के लिए पैसे एकत्रित करने का भी आरोप है।

मथुरा ग्रामीण के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) शीरीश चंद ने पुष्टि की कि इन चारों के खिलाफ अब राजद्रोह और अन्य आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि इन चारों को बुधवार को कोर्ट के सामने पेश किया गया, जहाँ से इन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों के पास से बरामद पैम्फ़्लिट ‘Am I not India’s daughter, made with Carrd’ आदि मुद्रित सामग्री सामाजिक वैमनस्यता बढ़ाने वाले एवं जन विद्रोह भड़काने वाले हैं।

हिरासत में लिए गए चारों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), आईपीसी की 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) के तहत दर्ज किया गया है। इसके अलावा यह भी पाया गया है कि वेबसाइट को संचालित करने वाले व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाला कृत्य भारतीय दंड विधान की धारा 124 ए के अन्तर्गत है, जो कि राजद्रोह है। इन वेबसाइट के कृत्यों के लिए यूएपीए की धारा 17 एवं 18 और धारा 65, 72 और 76 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम भी लगाया गया है।

एफआईआर के मुताबिक, यह चारों व्यक्ति शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे और यह एक बड़ी साजिश थी। हालाँकि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कुछ असमाजित तत्वों द्वारा जानबूझकर सामाजिक विद्वेष एवं जातिगत तनाव तथा देश में सांप्रदायिक संद्भाव को प्रभावित करते हुए प्रदेश में अभी हाल में हुए हाथरस की दुर्भाग्य पूर्ण घटना की आड़ में दंगा भड़काने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, दंगा भड़काने के लिए जो धनराशि प्राप्त की गई है वह भी वैध तरीके से नहीं हासिल की गई है। यह धनराशि जब्त करने योग्य है। carrd.co नाम की वेबसाइट का उपयोग जातिगत हिंसा व दंगा भड़काने के लिए किया जा रहा था। इस वेबसाइट से जुड़े संगठनों एवं कार्यकर्ताओं के द्वारा भीड़ एकत्र करने, अफवाह फैलाने एवं चंदा एकत्र करने का काम न्याय दिलाने की आड़ में किया जा रहा है।

आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई: जयललिता की सहयोगी शशिकला की ₹2000 करोड़ की संपत्ति जब्त

आयकर विभाग ने बुधवार (अक्टूबर 7, 2020) को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी शशिकला पर बड़ी कार्रवाई की है। तमिलनाडु के कोडानाड और सिरुथवूर क्षेत्रों में पूर्व सीएम जे. जयललिता की सहयोगी शशिकला से जुड़ी संपत्ति को संलग्न किया। आयकर विभाग ने बताया कि 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति पर रोक लगा दिया गया है। इनमें से अकेले दो संपत्तियों की कीमत 300 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का पूरा ब्यौरा फिलहाल नहीं मिला है। आयकर विभाग पिछले माह ही शशिकला की करोड़ों की संपत्ति जब्त कर चुका है। इससे पहले खबर आई थी कि आयकर विभाग ने सितंबर में शशिकला की करीब 300 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

इससे पहले पिछले साल नंवबर में भी आयकर विभाग द्वारा शशिकला की 1500 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त करने की खबर सामने आई थी। वीके शशिकला और उनके रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली संपत्तियों पर छापेमारी करते हुए एजेंसी को दस्तावेज मिले थे। इन संपत्तियों को बेनामी अधिनियम के तहत जब्त किया गया था।

संलग्न की गई ये संपत्तियाँ चेन्नई, कोयंबटूर, पुदुचेरी और तमिलनाडु के अन्य स्थानों में थीं। कथित तौर पर इन संपत्तियों का उल्लेख शशिकला या उनके परिवार ने अपनी संपत्ति की घोषणा करते समय नहीं किया था। इन संपत्तियों को ‘ऑपरेशन क्लीन मनी’ के तहत आयकर विभाग द्वारा जब्त किया गया था।

गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद वीके शशिकला को जुर्माना भरने की शर्त पूरी करने पर अगले साल 27 जनवरी में रिहाई मिल सकती है। कर्नाटक कारागार विभाग ने बताया कि शशिकला अगर 10 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड जमा करा देती हैं तो उन्हें रिहा किया जा सकता है।

शशिकला फिलहाल परप्पन्ना आग्रहारा जेल में बंद है। उन्हें 66 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति मामले में फरवरी 2017 में दोषी ठहराया गया था और सजा सुनाई गई थी। जेल की सुप्रिटेंडेंट आर लता ने एक आरटीआई कार्यकर्ता के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि जेल रिकॉर्ड के मुताबिक कैदी नंबर 9234 शशिकला की संभावित रिहाई की तारीख 27 जनवरी 2021 है बशर्ते वह कोर्ट द्वारा लगाए गए आर्थिक दंड का भुगतान करती हैं।

अगर वह जुर्माना नहीं भरती हैं तो यह उन्हें 27 फरवरी 2022 को रिहा किया जा सकता है। लता ने कहा कि अगर वह पैरोल सुविधा का इस्तेमाल करती हैं, तो रिहाई की संभावित तारीख बदल सकती है।

पीड़िता के परिवार को थी उसके और आरोपित के रिश्ते से आपत्ति, परिवार के ही हमले से आई गंभीर चोट: ग्राम प्रधान का दावा

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 साल की दलित लड़की की हत्या के मामले में पीड़िता के गाँव के मुखिया ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया है कि पीड़िता और मुख्य आरोपित फोन पर लगातार संपर्क में थे।

उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता के परिवार ने उनके कथित संबंध पर आपत्ति जताई थी। ग्राम प्रधान के अनुसार, आरोपित खुद पीड़िता को सेल फोन देने गया था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पीड़िता पर उसके परिवार द्वारा हमला किया गया था, जिससे उसे गंभीर चोटें आई थीं।

ग्राम प्रधान के अनुसार, “हिंदू धर्म में कोई भी इस तरह के अनैतिक और आपराधिक कृत्य (सामूहिक बलात्कार) नहीं कर सकता है। यदि आरोपित दोषी हैं तो उन्हें फाँसी दें, लेकिन पहले उन्हें दोषी साबित करें। हर कोई परीक्षण (नार्को टेस्ट) के लिए तैयार है। एक व्यक्ति को दूसरों के अपराधों के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए, जैसा इस मामले में हो रहा है। पीड़िता का परिवार उसके रिश्ते को पसंद नहीं करता था। लड़का उससे मिलने आया था, जिसे उसके परिवार ने उसे देख लिया। इसके बाद वो अपनी बेटी से नाराज हो गए और उन्होंने उसकी पिटाई कर दी।”

‘लड़की ने लड़के को बाजरे के खेत में बुलाया होगा क्योंकि प्रेम प्रसंग था’

वहीं भाजपा नेता का बयान भी विवाद का विषय बन चुका है। बाराबंकी नगर पालिका परिषद नवाबगंज के चेयरमैन और बीजेपी नेता रंजीत श्रीवास्तव ने अपने विवादित बयान में कहा है कि ये सारी मरी हुई लड़कियाँ बाजरे, मक्के, गन्ने और अरहर के खेत में ही क्यों मिलती हैं? ये लड़कियाँ धान या गेहूँ के खेत में क्यों पड़ी नहीं मिलतीं?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रंजीत श्रीवास्तव ने हाथरस कांड की पीड़िता का जिक्र करते हुए कहा, “लड़की ने लड़के को बाजरे के खेत में बुलाया होगा क्योंकि प्रेम प्रसंग था। ये सब बातें सोशल मीडिया पर हैं और चैनलों पर भी हैं। ये इस तरह की जितनी लड़कियाँ मरती हैं ये कुछ ही जगहों पर पाई जाती हैं। ये (लड़कियाँ) गन्ने के खेत में पाई जाती हैं, अरहर के खेत में पाई जाती हैं, मक्के के खेत में पाई जाती हैं, बाजरे के खेत में पाई जाती हैं। ये नाले में पाई जाती हैं, झाड़ियों में पाई जाती हैं। ये जंगल में पाई जाती हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाथरस पीड़िता के भाई से पूछताछ की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि आरोपित और पीड़ित परिवार के बीच कई फोन कॉल हुए। 19 वर्षीय पीड़िता का भाई कथित तौर पर आरोपित के संपर्क में था। पीड़िता के कॉल विवरण से भी यही खुलासा हुआ है कि पीड़िता और आरोपित के बीच लगातार फोन पर बातें हुईं थीं। अमित मालवीय ने कहा कि यह मामला आपसी रंजिश का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की उचित जाँच के बाद ही बातचीत का स्वरूप सामने आ पाएगा।